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  • वस्त्र उद्योग में यूपी की बढ़ती ताकत, योगी सरकार की नीतियों से टेक्सटाइल सेक्टर को मिला बड़ा बढ़ावा: राकेश सचान

    वस्त्र उद्योग में यूपी की बढ़ती ताकत, योगी सरकार की नीतियों से टेक्सटाइल सेक्टर को मिला बड़ा बढ़ावा: राकेश सचान

    योगी सरकार की नीतियों से यूपी का वस्त्र उद्योग नई ऊंचाइयों पर: राकेश सचान

    यूपी में वस्त्र उद्योग को मिल रहा नया विस्तार, 5,354 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मंजूर

    लखनऊ-हरदोई के बीच 1,000 एकड़ में बन रहा पीएम मित्र पार्क, बुनकरों को डिजाइन से डिजिटल मार्केटिंग तक मदद 

    अमरोहा से बनारस तक पांच स्थानों पर टेक्सटाइल पार्क के लिए जमीन उपलब्ध, सस्ते दर पर निवेश का अवसर

    निवेशकों को कैपिटल सब्सिडी से स्टांप ड्यूटी तक राहत, यूपी को टेक्सटाइल हब बनाने की तैयारी

    लखनऊ
     वस्त्र उद्योग मंत्री राकेश सचान ने कहा कि योगी सरकार की नीतियों और निवेश अनुकूल माहौल से प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ उद्योगों को भी नई गति मिली है। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेश से करीब 35 हजार करोड़ रुपये का हस्तशिल्प निर्यात हुआ है, जबकि 2 लाख से अधिक हथकरघा बुनकर इस क्षेत्र से जुड़े हैं और 110 करोड़ रुपये से अधिक का निर्यात किया जा रहा है। कहा कि यूपी के वस्त्र उत्पादों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है।

    5,354 करोड़ के निवेश प्रस्ताव मंजूर
    राकेश सचान ने बताया कि प्रदेश में वस्त्र उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सरकार लगातार निवेशकों को प्रोत्साहन दे रही है। आज 5,354 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मंजूर किए गए हैं। वर्ष 2017 और 2022 की वस्त्र उद्योग नीतियों के तहत करीब 116 निवेशकों को 322 करोड़ रुपये का इंसेंटिव दिया गया है। इसके अलावा करीब 96 करोड़ रुपये का इंसेंटिव भी दिया जा चुका है। उन्होंने बताया कि उद्यमियों को कैपिटल सब्सिडी, 100 प्रतिशत स्टांप ड्यूटी में छूट और 60 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी समेत जमीन आवंटन और बिजली में भी छूट जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मेलों में हिस्सा लेने वाले उद्यमियों को 90 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है।

    प्रदेश के 17 उत्पादों को जीआई टैग
    मंत्री ने कहा कि गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद का गारमेंट क्षेत्र, कानपुर का होजरी उद्योग, वाराणसी की सिल्क साड़ी, भदोही-मिर्जापुर की कालीन, लखनऊ की चिकनकारी, पिलखुवा के घरेलू वस्त्र, मेरठ के खेल परिधान और फर्रुखाबाद की वस्त्र छपाई प्रदेश की पहचान बन चुके हैं। प्रदेश के 17 उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है। योगी सरकार बुनकरों को डिजाइन, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और डिजिटल मार्केटिंग में मदद दे रही है। वाराणसी में 443 विद्यार्थियों को 84 लाख रुपये की वित्तीय सहायता देकर आगे बढ़ाने का काम किया गया है। इससे पारंपरिक हुनर को आधुनिक बाजार से जोड़ने में मदद मिलेगी।

    1 हजार एकड़ में पीएम मित्र पार्क
    राकेश सचान ने बताया कि लखनऊ-हरदोई के बीच 1 हजार एकड़ में पीएम मित्र पार्क विकसित किया जा रहा है। इसके लिए योगी सरकार 1,100 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। पार्क में सिक्स लेन सड़क, 125 केवी की विद्युत लाइन और पानी की सप्लाई पहुंच चुकी है। मास्टर डेवलपर भी तय हो गया है।

    पांच स्थानों पर टेक्सटाइल पार्क के लिए जमीन
    उन्होंने बताया कि सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में 10 टेक्सटाइल पार्क विकसित करने का लक्ष्य दिया है। इसके तहत अमरोहा, बिजनौर, संत कबीर नगर, बरेली और बनारस में शिल्प पार्क के लिए जमीन उपलब्ध हो चुकी है। करीब 400 एकड़ क्षेत्र में उद्यमियों को निवेश का अवसर मिलेगा और विभाग उन्हें सस्ती दरों पर जमीन उपलब्ध कराएगा। कानपुर समेत अन्य स्थानों पर टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंग पार्क के लिए भी जमीन चिन्हित की जा रही है।

    उन्होंने कहा कि 2022 की तरह ही 2027 में बनने वाली नई नीति में भी प्रदेश के उद्यमियों के सुझावों को शामिल किया जाएगा। पर्यटन के बढ़ते दायरे और 25 करोड़ की आबादी वाले घरेलू बाजार को देखते हुए वस्त्र एवं ओडीओपी उत्पादों में निवेश की बड़ी संभावनाएं हैं। इसके लिए उद्यमियों को यूपी में बड़े स्तर पर निवेश के लिए आमंत्रित किया।

  • गैस आधारित फर्टिलाइजर प्लांट से बदलेगी राजनांदगांव की तस्वीर, औद्योगिक विकास के साथ बढ़ेंगे रोजगार के अवसर: CM साय

    गैस आधारित फर्टिलाइजर प्लांट से बदलेगी राजनांदगांव की तस्वीर, औद्योगिक विकास के साथ बढ़ेंगे रोजगार के अवसर: CM साय

    राजनांदगांव में प्रस्तावित गैस आधारित फर्टिलाइजर प्लांट से औद्योगिक विकास और रोजगार को मिलेगी नई गति : मुख्यमंत्री साय

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह से की आत्मीय भेंट

    इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर 2.0 सहित प्रदेश के विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर हुई चर्चा

    रायपुर
    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज विधानसभा अध्यक्ष  डॉ. रमन सिंह से उनके रायपुर स्थित निवास पर आत्मीय भेंट की। इस अवसर पर दोनों नेताओं के बीच राजनांदगांव में गेल (इंडिया) लिमिटेड के प्रस्तावित गैस आधारित फर्टिलाइजर प्लांट, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर 2.0 तथा प्रदेश के औद्योगिक और आर्थिक विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राजनांदगांव में गेल (इंडिया) लिमिटेड का प्रस्तावित गैस आधारित फर्टिलाइजर प्लांट क्षेत्र के औद्योगिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण परियोजना साबित होगा। इस परियोजना से स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होने के साथ सहायक उद्योगों और व्यावसायिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने कहा कि इससे राजनांदगांव सहित आसपास के क्षेत्रों की आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने और निवेश को प्रोत्साहित करने की दिशा में राज्य सरकार लगातार कार्य कर रही है। प्रदेश में नई संभावनाओं वाले उद्योगों के विस्तार के साथ आधुनिक तकनीक और उच्च मूल्य आधारित विनिर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर 2.0 इसी दिशा में छत्तीसगढ़ को इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आधुनिक विनिर्माण के उभरते केंद्र के रूप में स्थापित करने की महत्वपूर्ण पहल है।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ में बड़ी औद्योगिक परियोजनाओं और निवेश के लिए नई संभावनाएं बनी हैं। हमारा प्रयास है कि प्रदेश में आने वाला निवेश स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार, क्षेत्रीय विकास और आर्थिक समृद्धि का माध्यम बने। राजनांदगांव की प्रस्तावित फर्टिलाइजर परियोजना भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगी।

  • भारतीय ज्ञान परंपरा में दिखता है जीवन का दर्शन, निजी विश्वविद्यालयों के योगदान पर बोले राज्यपाल पटेल

    भारतीय ज्ञान परंपरा में दिखता है जीवन का दर्शन, निजी विश्वविद्यालयों के योगदान पर बोले राज्यपाल पटेल

    हमारी ज्ञान परंपरा में व्यावहारिकता, गहनता और जीवन का दर्शन : राज्यपाल पटेल

    राज्यपाल भारतीय ज्ञान परंपरा के विकास में निजी विश्वविद्यालयों के योगदान विषय पर आयोजित कार्यशाला में हुए शामिल

    भोपाल
    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि भारतीय संस्कृति प्रकृति पूजक है। ब्रह्माण्ड के सूर्य, चन्द्रमा, ग्रह, नक्षत्र हमारी जीवन संस्कृति का अभिन्न अंग है। प्रकृति के पांचों तत्व वायु, अग्नि, जल, पृथ्वी और नभ हमारी दैनिक दिनचर्या में शामिल है। यह महान ज्ञान परंपरा अनंत काल से शाश्वत है। इसमें व्यावहारिकता, गहनता और जीवन का गूढ़ दर्शन है। जरूरी  है कि इस अद्भुत और गौरवशाली परंपरा को वर्तमान और भावी पीढ़ी तक सार्थक रूप से पहुंचाया जाए। आयोजक इस दिशा में बेहतर पारस्परिक समन्वय के साथ चिंतन करें, शोध और अनुसंधान को बढ़ावा दें। भारतीय ज्ञान परंपरा का निरंतर समृद्धता में योगदान करें।

    राज्यपाल पटेल मंगलवार को मध्‍यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग और निजी विश्वविद्यालय संघ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने की निजी विश्वविद्यालयों के माध्यम से की गई पहल के लिए आयोजकों को बधाई और शुभकामनाएं दी। कुशाभाऊ सभागार में आयोजित कार्यशाला का आयोजन ''भारतीय ज्ञान परंपरा के विकास में निजी विश्वविद्यालयों के योगदान'' विषय पर किया गया था। इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री इंदर परमार भी मौजूद थे।

    विकसित भारत के लिए सक्षम और सामर्थ्यवान पीढ़ी तैयार करें : राज्यपाल

    राज्यपाल पटेल ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा का महान स्त्रोत हमारी वैदिक,   पौराणिक और प्राचीन संस्कृति है। रामायण और महाभारत जैसे ग्रंथ, ज्ञान, विज्ञान और संस्कार के अद्भुत भंडार है। इन ग्रंथों के प्रत्येक पात्र प्रेम, आदर, त्याग, स्वाभिमान, सम्मान और नैतिकता के आदर्श प्रतीक है। उन्होंने निजी विश्वविद्यालयों से अपेक्षा की है कि हमारी परंपरा और उसके ज्ञान तत्वों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने की ज़िम्मेदारी स्वीकारें। विद्यार्थियों को समाज के गरीब, पिछड़े, वंचित और कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशील बनाएं। उन्हें विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में सक्षम और सामर्थ्यवान बनाएं। उन्होंने कहा कि आयोजक नियमित रूप से ऐसे आयोजनों की समीक्षा के द्वारा भविष्य की चुनौतियों और उनके समाधान के प्रयास करें।

    वही विद्या सार्थक, जो अज्ञान, भय और बंधन से करें मुक्त : पटेल

    राज्‍यपाल पटेल ने कहा कि हमारी गुरु शिष्य परंपरा में शिक्षा केवल पाठ याद करना नहीं, बल्कि चरित्र, अनुशासन, आत्म निर्भरता और कर्तव्य बोध का विकास करना था। भारतीय ज्ञान परंपरा का गौरव, ऐसी उपलब्धियों में नहीं, बल्कि उस सोच में है, जिसने ज्ञान को मानव और समाज के हित से जोड़ा है। भारतीय ज्ञान परंपरा में शिक्षा की सार्थकता मनुष्य को अज्ञान, भय और बंधन से मुक्त करना और “सब सुखी हो” के लिए कार्य करना बताया है।  

    हमारी ज्ञान परंपरा में मानव कल्याण का महान ध्येय : राज्यपाल

    राज्‍यपाल पटेल ने कहा कि भारत केवल एक प्राचीन देश नहीं, ऐसी महान ज्ञान सभ्यता है, जिसका लक्ष्य सत्य, जीवन और लोक का कल्याण था। हमारी ज्ञान परंपरा में शिक्षा केवल सूचना पाना नहीं, बल्कि जीवन को समझकर मानवता के कल्याण के लिए सत्य की खोज करना था। उन्होंने कहा कि उपनिषदों में हमारी ज्ञान परंपरा की जिज्ञासा, वेदों में प्रकृति और ब्रह्मांड के प्रति सम्मान तथा हमारे दर्शन में जीवन के गहरे सवालों के चिंतन की महान विरासत मिलती है। चरक और सुश्रुत ने मानव स्वास्थ्य और चिकित्सा को व्यवस्थित ज्ञान के रूप में विकसित किया। कौटिल्य के अर्थशास्त्र में शासन, अर्थनीति, कूटनीति और समाज व्यवस्था पर गहरा चिंतन मिलता है, जिसकी प्रासंगिकता सर्वकालिक है।

    राज्‍यपाल पटेल ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यशाला का शुभारंभ किया। उनका मध्‍यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष डॉ. खेमसिंह डेहरिया और निजी विश्वविद्यालय संघ के अध्यक्ष डॉ. संजीव अग्रवाल ने पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया।

    भारतीय ज्ञान परम्परा केवल पाठ्यक्रम नहीं, व्यावहारिक ज्ञान का

    सशक्त माध्यम : उच्च शिक्षा मंत्री परमार

    कार्यशाला में उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा केवल पाठ्यक्रम का विषय नहीं, बल्कि समाज जीवन में विद्यमान व्यावहारिक ज्ञान की समृद्ध परम्परा है। यह हमारे पूर्वजों का प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का भाव उनकी वैज्ञानिक एवं समग्र जीवन-दृष्टि की परिचायक है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने शिक्षा में भारतीय ज्ञान परम्परा के समृद्ध समावेश का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा को भारतीय दृष्टि एवं भारतीयता से जोड़ने के प्रयासों में सार्वजनिक और निजी विश्वविद्यालयों की सक्रिय और पारस्परिक सहभागिता आवश्यक है। जरूरी है कि इसका युगानुकूल परिप्रेक्ष्य में वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ शोध, अनुसंधान एवं दस्‍तावेजीकरण किया जाए। सभी निजी विश्वविद्यालय भारतीय ज्ञान परम्परा के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विशेष प्रकोष्ठ गठित करें। अपने पूर्वजों के ज्ञान को सहेजें और तथ्यों के आधार पर जीवनोपयोगी पाठ्य सामग्री तैयार करें।

    शिक्षा संस्कृति और उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अतुल कोठारी ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत भारतीय ज्ञान परंपरा की दिशा में मध्‍यप्रदेश की कार्य प्रणाली की सराहना की। प्रदेश को राष्ट्रीय प्रयासों में अग्रणी बताया। निजी विश्वविद्यालयों के सहयोग से भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने की पहल को अनुकरणीय कहा। मध्‍यप्रदेश हिन्दी ग्रंथ अकादमी के संचालक अशोक कड़ेल ने हिन्दी ग्रंथ अकादमी द्वारा भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित पाठ्यक्रम सृजन और प्रकाशन प्रयासों की जानकारी दी।

    कार्यशाला में उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा के भावी रोडमेप के लिए स्‍थानीयता और आधुनिकता का समन्वय प्रशिक्षण, शोध एवं अनुसंधान आधारित प्रमाणित पाठ्यक्रम, स्वस्थ प्रतिस्पर्धा अत्यंत जरूरी है।

    कार्यशाला में स्वागत उद्बोधन निजी विश्वविद्यालय संघ के अध्यक्ष डॉ. संजीव अग्रवाल ने दिया। आभार निजी वि.वि. संघ के सचिव डॉ. अजीत सिंह पटेल ने व्यक्त किया। इस अवसर पर उच्‍च शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी,  मध्‍यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के सदस्य, निजी विश्वविद्यालय संघ के पदाधिकारी, शिक्षाविद् उपस्थित थे।

     

  • पंजाब में विवादों के बीच घिरी मान सरकार, प्रदर्शन से लेकर स्कूल-कुत्तों के मुद्दे तक विपक्ष का हमला

    पंजाब में विवादों के बीच घिरी मान सरकार, प्रदर्शन से लेकर स्कूल-कुत्तों के मुद्दे तक विपक्ष का हमला

    चंडीगढ़

    पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले सामने आए कुछ विवादों ने सियासी रंग ले लिया है। राजनीतिक दल इन मुद्दों को जोर-शोर से उठा रहे हैं और इनके जरिये सरकार को घेरने के साथ चुनावी समीकरण साधने की कोशिश में हैं। खास बात यह है कि इनमें से कई मामलों पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लिया है। आयोग ने मुख्य सचिव, डीजीपी समेत अन्य अधिकारियों से जांच के बाद रिपोर्ट मांगी है।

    अमूमन विधानसभा चुनाव से पहले धरने और प्रदर्शन सियासी माहौल को गर्म करते हैं। राजनीतिक दल भी इन आंदोलनों को अपने एजेंडे से जोड़ते हैं। पंजाब में पिछले कुछ दिनों में सामने आए इन विवादों ने इस सिलसिले को और तेज कर दिया है। विपक्षी दल जहां इन्हें सरकार के खिलाफ माहौल बनाने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं वहीं सरकार डैमेज कंट्रोल में जुटी है। 

    काला झंडा दिखाने से लेकर लाठीचार्ज तक
    मोहनजीत सिंह का मामला
    : सुनाम के शेरों गांव में मुख्यमंत्री की लोक मिलनी के दौरान नशे के खिलाफ आवाज उठाते हुए मोहनजीत सिंह ने छत पर खड़े होकर काला झंडा फहराया था। पुलिस ने उसे हिरासत में लिया था। बाद में मोहनजीत ने पुलिस पर थर्ड डिग्री टॉर्चर का आरोप लगाया। भाजपा, शिअद और कांग्रेस के नेताओं ने उसका समर्थन करते हुए सरकार को घेरा। राज्यसभा सांसद तरुण चुघ की शिकायत पर आयोग ने मुख्य सचिव, डीजीपी, संगरूर एसएसपी और डीसी से तत्काल जांच कर कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है।

    पांच करोड़ के आरोप : मुख्यमंत्री की पत्नी के नाम पर दुराचार के आरोपी को बचाने के लिए कथित तौर पर पांच करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार का आरोप लगा। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस रणजीत सिंह की शिकायत पर आयोग ने मुख्य सचिव और डीजीपी से जांच रिपोर्ट मांगी है।

    सफाई कर्मचारियों पर लाठीचार्ज : बरनाला में मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे सफाई कर्मचारियों पर पुलिस लाठीचार्ज के आरोप लगे। महिलाओं समेत प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग का आरोप है। आयोग ने स्वत: संज्ञान लेते हुए पूछा है कि लाठीचार्ज का आदेश किन परिस्थितियों में दिया गया और इसकी मंजूरी किस अधिकारी ने दी। घायलों की संख्या, चोटों की प्रकृति, चिकित्सा स्थिति और मुआवजे की जानकारी भी मांगी गई है।

    स्कूलों से छात्राओं और आवारा कुत्तों तक
    सीमावर्ती स्कूलों में स्वतंत्रता दिवस : पंजाब के सीमावर्ती सरकारी स्कूलों में 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस नहीं मनाने के आरोप लगे। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सरकार की ओर से मोर्चा संभाला। आयोग ने मुख्य सचिव से राज्य, जिला और स्कूल स्तर की कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है।

    मोगा में छात्राओं से कथित उत्पीड़न : सरकारी स्कूल में छात्राओं से कथित यौन उत्पीड़न के मामले में आयोग ने स्वत: संज्ञान लिया। मुख्य सचिव और मोगा एसएसपी को नोटिस जारी कर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई। शिक्षा विभाग प्रधानाचार्य को निलंबित कर चुका है।

    रूपनगर में बच्ची की मौत : आवारा कुत्तों के हमले में आठ वर्षीय बच्ची की मौत के मामले में भी आयोग ने स्वत: संज्ञान लिया। पंजाब में आवारा कुत्तों के आतंक और सरकार की ओर से उठाए गए कदमों पर मुख्य सचिव से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। इन मामलों को लेकर विपक्षी दल सरकार पर सवाल उठा रहे हैं। चुनाव नजदीक आने के साथ इन विवादों के और सियासी मुद्दा बनने के आसार हैं।

  • टेक्सटाइल सेक्टर में यूपी की नई उड़ान, कारीगर बनें ब्रांड ओनर और युवा बनें एंटरप्रेन्योर: योगी

    टेक्सटाइल सेक्टर में यूपी की नई उड़ान, कारीगर बनें ब्रांड ओनर और युवा बनें एंटरप्रेन्योर: योगी

    यूपी का मतलब अल्टीमेट पोटेंशियल, टेक्सटाइल सेक्टर बनेगा नई औद्योगिक ताकत: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

    सीएम बोले- कारीगर सिर्फ सप्लायर नहीं, ब्रांड ओनर और युवा जॉब सीकर नहीं, एंटरप्रेन्योर बनें

    टेक्सटाइल सेक्टर में 5,196 करोड़ रुपये के नए निवेश प्रस्तावों के एमओयू, 163 करोड़ के लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी
     
    कृषि के बाद सर्वाधिक रोजगार देने वाला सेक्टर है वस्त्र उद्योग, यूपी में दो लाख हैंडलूम और पांच लाख से अधिक पावरलूम बुनकर
     
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया दो दिवसीय यूपी टेक्सटाइल्स कॉन्क्लेव-2026 का उद्घाटन
     
    यूपी टेक मित्र पोर्टल लॉन्च, हथकरघा बुनकर समृद्धि योजना का भी किया शुभारंभ

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यूपी का मतलब ‘अल्टीमेट पोटेंशियल’ है। उत्तर प्रदेश के पास विरासत, हुनर, मानव संसाधन, उद्योग, उद्यमिता और देश का सबसे बड़ा बाजार है। दुनिया की सबसे युवा वर्कफोर्स भी हमारे पास है। अब इसी ताकत के सहारे उत्तर प्रदेश को ग्लोबल टेक्सटाइल हब बनाना है। हमारा लक्ष्य फाइबर से यार्न, यार्न से फैब्रिक, फैब्रिक से गारमेंट और गारमेंट से ब्रांड होते हुए ग्लोबल मार्केट तक पूरी वैल्यू चेन प्रदेश में विकसित करने का है।
     
    मुख्यमंत्री योगी मंगलवार को दो दिवसीय यूपी टेक्सटाइल्स कॉन्क्लेव-2026 के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने यूपी टेक मित्र पोर्टल लॉन्च करने के साथ हथकरघा बुनकर समृद्धि योजना का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में टेक्सटाइल सेक्टर में 5,196 करोड़ रुपये के नए निवेश प्रस्तावों के एमओयू किए गए। साथ ही 163 करोड़ रुपये के लेटर ऑफ कम्फर्ट और 60 करोड़ रुपये की सब्सिडी का वितरण किया गया।
     
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश की टेक्सटाइल पहचान हजारों वर्षों पुरानी है। वैदिक साहित्य से लेकर रामायण और महाभारत तक काशी के रेशमी वस्त्रों का उल्लेख मिलता है। वाराणसी की सिल्क साड़ी, भदोही का कारपेट, लखनऊ की चिकनकारी, बरेली की जरी, कानपुर का टेक्सटाइल इकोसिस्टम और मेरठ में टेक्निकल टेक्सटाइल की संभावनाएं प्रदेश की विरासत और औद्योगिक क्षमता का प्रमाण हैं।
     
    उन्होंने कहा कि प्रदेश में दो लाख हैंडलूम और पांच लाख से अधिक पावरलूम बुनकर इस सेक्टर की असली ताकत हैं। कृषि के बाद सर्वाधिक रोजगार का सृजन वस्त्र उद्योग करता है। उत्तर प्रदेश फैब्रिक मैन्युफैक्चरिंग में देश में तीसरे स्थान पर है और कुल फैब्रिक उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी 13 से 14 प्रतिशत है। पिछले छह वर्षों में प्रदेश के वस्त्र, परिधान और हस्तशिल्प निर्यात में करीब 56 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यूपी इस सेक्टर में देश का चौथा सबसे बड़ा निर्यातक राज्य बन गया है। वर्ष 2025-26 में 21 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निर्यात के साथ गौतमबुद्ध नगर देश के प्रमुख निर्यातक जिलों में दूसरे स्थान पर पहुंचा है।
     
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2030 तक 350 बिलियन अमेरिकी डॉलर की टेक्सटाइल एवं अपैरल इकोनॉमी और 100 बिलियन डॉलर के निर्यात का लक्ष्य रखा है। इस राष्ट्रीय संकल्प में उत्तर प्रदेश अपनी पूरी क्षमता से भागीदारी करेगा। ओडीओपी के माध्यम से प्रदेश के 35 से अधिक जिलों के वस्त्र और हैंडलूम उत्पादों को नई पहचान मिली है। प्रदेश के 17 टेक्सटाइल उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लाखों महिलाएं भी इस सेक्टर से जुड़कर आत्मनिर्भर हो रही हैं।
     
    मुख्यमंत्री योगी ने पिछली सरकारों पर हमला करते हुए कहा कि 2017 से पहले प्रदेश की पहचान ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन माफिया’ की बन गई थी। कानून व्यवस्था चौपट थी। निवेशक व्यापार का सपना लेकर आता था और वसूली की पर्ची लेकर लौटता था। दंगे, कर्फ्यू, गुंडा टैक्स और माफिया के कारण उद्योग लगाना मुश्किल था। बिजली और विकास एक परिवार तक सीमित था। आज यूपी कर्फ्यू, दंगा, माफिया और उपद्रव से मुक्त है। उन्होंने कहा, “बेटी, व्यापारी या निवेशक की सुरक्षा में सेंध लगाने का दुस्साहस किया तो दो ही जगह होंगी, या जेल या जहन्नुम।”
     
    उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था में बदलाव और निवेश अनुकूल नीतियों का परिणाम है कि आज प्रदेश के पास 36 सेक्टोरल पॉलिसी हैं। देश के 55 प्रतिशत मोबाइल और 60 प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट का उत्पादन यूपी में हो रहा है। यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के छह स्ट्रेटेजिक नोड में 35 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। प्रदेश में एमएसएमई के 12 प्लेज पार्क भी तैयार हो रहे हैं।
     
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि टेक्सटाइल इंडस्ट्री अब केवल धागे, कपड़े और फैशन तक सीमित नहीं है। डिफेंस, हेल्थकेयर, कृषि और स्पोर्ट्स जैसे क्षेत्रों में टेक्निकल टेक्सटाइल तेजी से उभर रहा है। इसलिए उत्तर प्रदेश को ट्रेडिशनल टेक्सटाइल से आगे बढ़कर टेक्निकल टेक्सटाइल में भी अपनी ताकत बढ़ानी होगी। पीएम मित्रा पार्क और संत कबीर टेक्सटाइल पार्क जैसी पहल इसी दिशा में आगे बढ़ रही हैं। वाराणसी, अमरोहा, बरेली, संतकबीरनगर और बिजनौर में परियोजनाओं के लिए भूमि आरक्षित की गई है। सीतापुर, मऊ, कानपुर, झांसी और रायबरेली में टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क के लिए भूमि चिन्हित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। नोएडा को अपैरल सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है।
     
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि सरकार चाहती है कि एमएसएमई केवल सब-कॉन्ट्रैक्टर नहीं, ग्लोबल वैल्यू चेन के पार्टनर बनें। युवा केवल जॉब सीकर नहीं, टेक्सटाइल एंटरप्रेन्योर और इनोवेटर बनें तथा कारीगर केवल सप्लायर नहीं, अपने ब्रांड के मालिक बनें। ‘डिजाइन इन यूपी, मेड इन यूपी और एक्सपोर्टेड फ्रॉम यूपी’ के मंत्र से प्रदेश के हुनर को वैश्विक पहचान मिले। निफ्ट रायबरेली और उत्तर प्रदेश टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट कानपुर युवाओं को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप तैयार कर रहे हैं।
     
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि यूपी आज पॉलिसी, इंफ्रास्ट्रक्चर, टैलेंट और मार्केट हर स्तर पर तैयार है। अब प्रदेश की सांस्कृतिक पूंजी को आर्थिक पूंजी में बदलना है। बुनकर का हुनर, उद्यमी का कारोबार, युवाओं का रोजगार, महिलाओं की भागीदारी, निवेश और निर्यात बढ़ाकर उत्तर प्रदेश को दुनिया के प्रमुख टेक्सटाइल केंद्रों में स्थापित किया जाएगा।

    कार्यक्रम में खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम, हथकरघा एवं वस्त्र उद्योग मंत्री राकेश सचान, उत्तर प्रदेश ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के सीईओ मनोज कुमार सिंह, प्रमुख सचिव वस्त्र उद्योग अनिल कुमार सागर सहित देशभर के प्रमुख उद्यमी, निवेशक, निर्यातक और टेक्सटाइल सेक्टर के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

  • MP Weather: प्रदेश में अब तक 31.1 इंच बारिश, 12 जिलों में सामान्य से ज्यादा; रीवा संभाग में अगले 4 दिन झमाझम

    MP Weather: प्रदेश में अब तक 31.1 इंच बारिश, 12 जिलों में सामान्य से ज्यादा; रीवा संभाग में अगले 4 दिन झमाझम

    भोपाल
    मध्य प्रदेश में इस मानसून सीजन में अब तक औसतन 31.1 इंच (लगभग 791 मिमी) पानी बरस चुका है। यह आंकड़ा निर्धारित कोटे का 83.5 प्रतिशत है। सामान्य औसत 33.1 इंच के मुकाबले अभी करीब दो इंच की कमी बनी हुई है, जो कुल मिलाकर छह प्रतिशत कम है।

    प्रदेश के 12 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश हुई है। इनमें भोपाल, राजगढ़, शिवपुरी, निवाड़ी, मैहर, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज और उमरिया शामिल हैं। इन क्षेत्रों में वर्षा का प्रतिशत 101 से 146 तक पहुंच गया है। मऊगंज जिले में सबसे अधिक करीब 53 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई, जबकि आलीराजपुर में सबसे कम 13.6 इंच पानी गिरा।

    12 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश
    भोपाल, राजगढ़, शिवपुरी, निवाड़ी, मैहर, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज और उमरिया में सामान्य से ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई है। वहीं उमरिया, अनूपपुर, आगर-मालवा, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, ग्वालियर, गुना, दतिया, खरगोन और बुरहानपुर में अब तक 90% से ज्यादा बारिश हो चुकी है। मऊगंज प्रदेश में सबसे ज्यादा बारिश वाला जिला है, जहां करीब 53 इंच पानी गिर चुका है, जबकि आलीराजपुर में सबसे कम 13.6 इंच बारिश दर्ज हुई है।

    31 जिलों में 3 से 54% तक बारिश कम
    प्रदेश के कई जिलों में अब भी बारिश का आंकड़ा सामान्य से काफी नीचे है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में 3% से 23% तक कम बारिश हुई है। वहीं पश्चिमी हिस्से के आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा समेत कई जिलों में सामान्य से 7% से 54% तक कम पानी गिरा है।

    पूर्वी हिस्से में बारिश से सुधरा आंकड़ा
    पिछले एक सप्ताह में पूर्वी मध्य प्रदेश के बारिश के आंकड़े में तेजी से सुधार हुआ है। जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में हाल के दिनों में तेज बारिश के कारण कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात भी बने। इसी वजह से पहली बार इस सीजन में पूर्वी हिस्से की बारिश सामान्य के आसपास पहुंची है और सोमवार तक यहां सामान्य से करीब 1% ज्यादा बारिश दर्ज की गई।

    11 सितंबर तक इन संभागों में तेज बारिश
    मौसम केंद्र भोपाल के मुताबिक 11 सितंबर तक रीवा और शहडोल संभाग में तेज बारिश का दौर जारी रह सकता है। प्रदेश के बाकी जिलों में हल्की बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार 12 सितंबर के बाद एक नया सिस्टम सक्रिय हो सकता है, जिसके असर से एक बार फिर पूरे प्रदेश में बारिश का दौर शुरू होने की संभावना है।

    इतने ही जिले बेहतर स्थिति में हैं, जहां 90 प्रतिशत से अधिक कोटा पूरा हो चुका है। इसके विपरीत 31 जिले अभी भी पिछड़े हुए हैं। पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश अपेक्षाकृत अच्छी रही, जबकि इंदौर-उज्जैन वाले पश्चिमी हिस्से में कमी ज्यादा नजर आ रही है।

    रीवा-शहडोल में जारी रहेगा बारिश का दौर
    मौसम विज्ञान केंद्र भोपाल के अनुसार 11 सितंबर तक रीवा और शहडोल संभाग में भारी वर्षा का क्रम बना रहेगा। अन्य जिलों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। 12 सितंबर के बाद नए सिस्टम के सक्रिय होने की संभावना है, जिससे पूरे प्रदेश में दोबारा बारिश का माहौल बन सकता है।

    जून में सूखा, जुलाई-अगस्त में अच्छी बारिश मौसम विभाग के अनुसार, जून में 14% कम बारिश हुई थी। जुलाई की शुरुआती दिनों में तेज बारिश होने से यह बढ़ गया। इसके बाद मानसून दो बार ब्रेक हुआ और कई दिन तक बारिश नहीं हुई।

    आखिरी सप्ताह में फिर से स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव हो गया। बावजूद इसके 13 प्रतिशत कम बारिश हुई है। हालांकि, जुलाई और फिर अगस्त का भी फुल हो गया, लेकिन जून की भरपाई नहीं हो पाई। यही वजह से अब तक भी प्रदेश में 6 प्रतिशत कम पानी गिरा है।

    प्रदेश की सामान्य बारिश 37.3 इंच प्रदेश की सामान्य बारिश 37.3 इंच है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जिले की सामान्य बारिश 38 से 39 इंच तक है।

     

  • पंजाब में पावर कट से बढ़ी चिंता, इंजीनियरों ने मान सरकार से की बिजली उत्पादन बढ़ाने की मांग

    पंजाब में पावर कट से बढ़ी चिंता, इंजीनियरों ने मान सरकार से की बिजली उत्पादन बढ़ाने की मांग

    पटियाला 

    पीएसईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को पत्र लिखा है। एसोसिएशन ने राज्य में थर्मल और सोलर बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने की मांग की है। महासचिव इंजीनियर अजयपाल सिंह अटवाल ने कहा कि पंजाब का बिजली क्षेत्र वित्तीय संकट और बिजली की कमी का सामना कर रहा है।

    बिजली की बढ़ती कमी से उद्योग, खेती और घरेलू खपतकर्ता प्रभावित हो रहे हैं। तत्काल कदम न उठाने पर आने वाले वर्षों में हालात गंभीर होंगे। पंजाब की अपनी बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ती मांग से बहुत कम है। इससे पावरकाॅम को ऊर्जा विनिमय से महंगी बिजली खरीदनी पड़ रही है। राजपुरा और तलवंडी साबो के निजी थर्मल प्लांट कोयला भंडार बनाए रखने में विफल रहे हैं। इन प्लांटों में कोयले की भारी कमी है। यह सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के नियमों का सीधा उल्लंघन है। निवेश में देरी से महंगी बिजली खरीद पर निर्भरता बढ़ेगी।

    इंजीनियरों के अनुसार पंजाब सरकार की ओर से सब्सिडी की राशि का भुगतान लंबित है। इसके अलावा कई सरकारी विभागों पर बिजली बिलों का भुगतान नहीं करने के कारण भी पावरकॉम पर वित्तीय दबाव बढ़ रहा है।

    एसोसिएशन ने दावा किया है कि एआरआर में खर्चों का अनुमान कम रखे जाने के कारण टैरिफ में अनुचित कटौती हुई है। इससे पावरकॉम के राजस्व पर असर पड़ रहा है। इंजीनियरों के मुताबिक मौजूदा वित्त वर्ष में पावरकॉम को करीब 7,800 करोड़ रुपये के राजस्व घाटे का सामना करना पड़ सकता है।

    संकट के प्रमुख कारण
    एसोसिएशन के अनुसार, पंजाब को गैर-सौर और रात की उच्चतम मांग पूरी करने के लिए थर्मल उत्पादन क्षमता तुरंत बढ़ानी होगी। ऐसा न करने पर राज्य हर गर्मी में गंभीर बिजली की कमी के चक्र में फंसा रहेगा। पंजाब बिजली की मांग पूरी करने के लिए राज्य के बाहर से खरीदी गई बिजली और निजी उत्पादकों पर तेजी से निर्भर हो रहा है। इस आर्थिक बोझ के कारण तत्काल नीति समीक्षा की आवश्यकता है। क्षमता बढ़ाने में लगातार देरी से बिजली मांग और इन-स्टेट उत्पादन क्षमता का अंतर बढ़ रहा है।

    वित्तीय चुनौतियां और भविष्य की मांग
    पावरकाॅम की वित्तीय स्थिति लगातार कमजोर हो रही है। इसका मुख्य कारण पंजाब सरकार का बकाया सब्सिडी का भुगतान न करना है। मौजूदा वित्तीय साल में पावरकाॅम को करीब 7,800 करोड़ रुपये के राजस्व की कमी का सामना करना पड़ सकता है। एसोसिएशन के सुझावों पर ध्यान नहीं दिया गया जबकि औद्योगिक विस्तार, खेती, घरेलू खपत और डेटा सेंटर जैसे उच्च-भार वाले क्षेत्रों से भविष्य में बिजली की जरूरत काफी बढ़ेगी। राज्य-क्षेत्र बिजली उत्पादन परियोजनाओं में निवेश से पंजाब के युवाओं को रोजगार का बड़ा मौका मिलेगा।

    गर्मियों में बढ़ जाती है मांग
    पत्र के अनुसार गर्मियों में बिजली की मांग बढ़ने के साथ ही पीक डिमांड के समय पंजाब का अपना बिजली उत्पादन अपेक्षाकृत कम हो जाता है। ऐसे में मांग पूरी करने के लिए बिजली एक्सचेंज से महंगी दरों पर बिजली खरीदनी पड़ती है। इससे पावरकॉम पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ता है।

    एसोसिएशन ने कहा कि हिमाचल प्रदेश जैसे जलविद्युत उत्पादन वाले राज्य भी अब बिजली बैंकिंग के बजाय खुले बाजार में बिजली बेचने को प्राथमिकता दे रहे हैं। इससे पंजाब के लिए सस्ती बिजली की उपलब्धता और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

    निजी बिजली संयंत्रों पर निर्भरता पर सवाल
    इंजीनियरों ने निजी थर्मल प्लांटों पर बढ़ती निर्भरता को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इससे पंजाब का बड़ा पूंजी निवेश निजी क्षेत्र की ओर जा रहा है। एसोसिएशन ने सरकार से दीर्घकालिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सरकारी क्षेत्र में नए बिजली उत्पादन प्रोजेक्ट शुरू करने और प्रदेश की अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए तत्काल नीति बनाने की मांग की है।

     

     

  • कांग्रेस में युवा नेतृत्व को बढ़ावा देने की तैयारी, राहुल गांधी ने 120 नेताओं को किया शॉर्टलिस्ट

    कांग्रेस में युवा नेतृत्व को बढ़ावा देने की तैयारी, राहुल गांधी ने 120 नेताओं को किया शॉर्टलिस्ट

    नई दिल्ली
    लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कांग्रेस संगठन को नए सिरे से गढ़ने और युवाओं को फ्रंटफुट पर लाने की कवायद शुरू कर दी है. कांग्रेस को बुजुर्ग और 'ड्राइंग रूम पॉलिटिक्स' करने वाले नेताओं के चंगुल से निकालकर अब एक युवा, आक्रामक और जमीन पर लड़ने वाले संगठन में तब्दील करने की योजना पर काम शुरू हो चुका है। 

    कांग्रेस में राष्ट्रीय संगठन के पदों पर नियुक्ति के लिए अब राजनीतिक वरिष्ठता के बजाय काम के रिकॉर्ड और जमीनी सक्रियता को मुख्य कसौटी माना जा रहा है. संगठन को अधिक समावेशी और गतिशील बनाने के लिए पार्टी नेतृत्व ने नए राष्ट्रीय सचिवों को शामिल करने हेतु इंटरव्यू की प्रक्रिया शुरू की है। 

    राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल के साथ कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव पद के लिए नेताओं के इंटरव्यू ले रहे हैं. देश के अलग-अलग राज्यों से चुनिंदा नेताओं को दिल्ली बुलाया गया है, ताकि संगठन में एक नई, पेशेवर और वैचारिक रूप से मजबूत युवा लीडरशिप तैयार की जा सके। 

    राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ले रहे इंटरव्यू
    राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने सोमवार को कांग्रेस
    के राष्ट्रीय सचिव पद के लिए 30 नेताओं का इंटरव्यू लिया. रायबरेली के दो दिवसीय दौरे से राहुल गांधी के लौटने के बाद फिर से इंटरव्यू की प्रक्रिया शुरू होगी. यह कदम केवल संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि पार्टी में नई ऊर्जा और मजबूत युवा लीडरशिप खड़ी करने का एक सुनियोजित प्रयास है। 

    कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव के लिए 10-10 के समूह में नेताओं का इंटरव्यू लिया जा रहा है. राहुल गांधी नेताओं से उनके पुराने कामकाज से लेकर प्रोफाइल तक के बारे में सवाल पूछ रहे हैं. जिन नेताओं का इंटरव्यू लिया जा रहा है, उनके कामकाज का पूरा रिपोर्ट कार्ड पहले से ही राहुल गांधी के पास मौजूद है। 

    राहुल गांधी बना रहे अपनी नई टीम
    कांग्रेस ने अलग-अलग राज्यों में राष्ट्रीय सचिवों की नियुक्ति की कवायद शुरू कर दी है, जिसके लिए राहुल गांधी पार्टी में अपनी नई टीम तैयार कर रहे हैं. इसीलिए फाइनल इंटरव्यू राहुल गांधी खुद ले रहे हैं. राष्ट्रीय सचिव पद के लिए शॉर्टलिस्ट किए गए नेताओं के कामकाज की रिपोर्ट के साथ राहुल गांधी उनसे मिल रहे हैं। 

    राहुल गांधी का मुख्य ध्यान इस बात पर है कि निर्णय केवल सिफारिशों या सिफारिशी पत्रों के आधार पर न हों, बल्कि जमीनी हकीकत, काम करने की क्षमता और दूरदृष्टि के बल पर युवाओं को जगह मिले. कांग्रेस अपने मौजूदा 60 प्रतिशत से ज़्यादा सचिवों को बदलने की तैयारी में है और संगठन में नए चेहरों को मौका देने की योजना बना रही है। 

    कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव पद के लिए 120 नेताओं का इंटरव्यू लिया जाएगा, जिसके बाद पार्टी उनकी नियुक्ति करेगी. इस पद के लिए उन नेताओं को प्राथमिकता दी जा रही है, जिन्होंने पहले कांग्रेस के 'संगठन सृजन' कार्यक्रम के तहत ऑब्जर्वर के तौर पर काम किया है। 

    नई लीडरशिप खड़ी करने का प्लान
    राहुल गांधी ने जब 2004 में राजनीति में कदम रखा था, तब से कांग्रेस पार्टी का कायाकल्प और 'जनरेशन चेंज' उनका सबसे बड़ा और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट रहा है. उन्होंने कांग्रेस के भीतर युवाओं को आगे लाने और पारंपरिक संगठनात्मक ढांचे में बड़े बदलाव करने के लिए कई प्रयास किए हैं. कांग्रेस ने यूथ कांग्रेस और NSUI में भी नियुक्तियां करने के लिए इंटरव्यू-आधारित प्रक्रिया अपनाई थी. इसके जरिए प्रतिभा-आधारित चयन प्रक्रिया को बढ़ावा दिया गया, ताकि बिना किसी राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले युवा भी नेतृत्व में आ सकें। 

    राहुल गांधी का यह सियासी प्रयोग पहले पुराने दिग्गजों (ओल्ड गार्ड) के कड़े विरोध और अंदरूनी खींचतान के चलते परवान नहीं चढ़ सका था. हालांकि, पिछले कुछ दिनों में कांग्रेस के भीतर जो कदम उठाए जा रहे हैं और बदलाव दिख रहे हैं, उनसे स्थिति बदल रही है. कांग्रेस ने वरिष्ठ नेताओं की जगह नए चेहरों की ताजपोशी कर सियासी संदेश दिया है. संगठन में बदलाव शुरू हो चुके हैं और अब नए चेहरे नजर आने लगे हैं। 

    प्रदेश संगठन से लेकर जिला संगठन तक में युवा चेहरों की नियुक्तियां हो रही हैं. इससे साफ जाहिर होता है कि राहुल गांधी का दो दशक पुराना सपना अब हकीकत में बदलने लगा है. इसी कड़ी में राष्ट्रीय सचिवों की नियुक्ति का खाका खींचा जा रहा है. इसके जरिए उन कार्यकर्ताओं और युवा नेताओं को तरजीह दी जा रही है जो लंबे समय से जमीन पर काम कर रहे हैं, ताकि मेहनत करने वाले युवाओं का भरोसा राजनीति में बना रहे। 

    कांग्रेस का प्लान देश के हर कोने और समाज के हर वर्ग से आने वाले युवाओं को मौका देकर एक समावेशी टीम बनाने का है. राहुल गांधी का यह प्रयोग इस बात का प्रतीक है कि भविष्य की राजनीति को वही दिशा दे सकते हैं जिनके पास नया दृष्टिकोण, ऊर्जा और जनसेवा का जज्बा हो. राष्ट्रीय सचिवों के इस चयन अभियान से न केवल संगठन में नई जान फूंकने की कोशिश की जा रही है, बल्कि यह देश के हर उस युवा के लिए भी एक उम्मीद का संदेश है जो राजनीति को बदलाव का जरिया मानता है। 

  • इंदौर, जबलपुर और भोपाल का दमदार प्रदर्शन, स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में MP के तीन शहर शीर्ष-5 में

    इंदौर, जबलपुर और भोपाल का दमदार प्रदर्शन, स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में MP के तीन शहर शीर्ष-5 में

    राष्ट्रीय स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026: मध्यप्रदेश के तीन शहर देश के शीर्ष पाँच में

    स्वच्छ वायु प्रबंधन में मध्यप्रदेश का स्वर्णिम प्रदर्शन: इंदौर द्वितीय, जबलपुर तृतीय और भोपाल चौथे स्थान पर, वार्ड श्रेणी में भोपाल का वार्ड-60 अलंकृत
    हरित विकास और जनभागीदारी की सुखद परिणति: राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता रैंकिंग में मध्यप्रदेश ने राष्ट्रीय पटल पर लहराया परचम

    भोपाल 

    पर्यावरण संरक्षण, हरित विकास और जनभागीदारी की दिशा में मध्यप्रदेश ने स्वर्णिम उपलब्धि अर्जित की है। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 के परिणामों में देश के शीर्ष पाँच स्वच्छ वायु शहरों में प्रदेश के तीन प्रमुख नगरों ने अनुपम स्थान प्राप्त कर राष्ट्रीय पटल पर प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। 'राष्ट्रीय स्वच्छ वायु दिवस' के अवसर पर सोमवार को नई दिल्ली स्थित इंदिरा पर्यावरण भवन के गंगा प्रेक्षागृह में आयोजित समारोह में 10 लाख से अधिक आबादी वाली श्रेणी में इंदौर एवं जबलपुर तथा वार्ड स्तरीय श्रेणी में भोपाल नगर निगम के वार्ड क्रमांक-60 को प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान से अलंकृत किया गया। यह सम्मान नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव तन्मय कुमार द्वारा प्रदान किया गया।

    दस लाख से अधिक जनसंख्या श्रेणी में प्रदेश का उत्कृष्ट प्रदर्शन

    राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के अंतर्गत 10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले महानगरों की प्रतिस्पर्धा में मध्यप्रदेश का प्रदर्शन अत्यंत सराहनीय रहा। इस वर्ग में इंदौर ने संपूर्ण देश में द्वितीय, जबलपुर ने तृतीय तथा राजधानी भोपाल ने चतुर्थ स्थान अर्जित कर स्वच्छ वायु प्रबंधन में अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की है। इसी श्रेणी में ग्वालियर ने 39वाँ स्थान प्राप्त किया। वहीं, 3 से 10 लाख जनसंख्या वर्ग में उज्जैन ने 16वाँ और सागर ने 21वाँ स्थान प्राप्त किया, जबकि 3 लाख से कम जनसंख्या श्रेणी में देवास ने 7वाँ स्थान हासिल किया। उल्लेखनीय है कि केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा संचालित इस सर्वेक्षण में देश के 130 प्रमुख शहरों के मध्य निर्धारित मापदंडों पर स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करने के लिए रैंकिंग जारी की जाती है।

    इंदौर एवं जबलपुर की अनुकरणीय उपलब्धियां

    स्वच्छता के क्षेत्र में निरंतर नवमानक स्थापित करने वाले इंदौर नगर ने धूल नियंत्रण, मैकेनाइज्ड सड़क सफाई, हरित क्षेत्र के विस्तार तथा नागरिक सहभागिता के बल पर वायु गुणवत्ता प्रबंधन में देश में दूसरा स्थान हासिल किया है। समारोह में इंदौर नगर निगम की ओर से महापौर पुष्यमित्र भार्गव, आयुक्त क्षितिज सिंघल एवं एमआईसी सदस्य अश्विनी शुक्ला ने यह सम्मान ग्रहण किया। वहीं, प्रदूषण नियंत्रण एवं सुनियोजित पर्यावरण संरक्षण कार्यों के दम पर तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले जबलपुर नगर निगम की ओर से महापौर जगत बहादुर सिंह 'अन्नू', आयुक्त राम प्रसाद अहिरवार, कमलेश श्रीवास्तव, संभव अयाची एवं जी.एस. मरावी ने पुरस्कार प्राप्त किया।

    भोपाल के वार्ड क्रमांक-60 को मिला राष्ट्रीय गौरव

    वार्ड स्तरीय वायु गुणवत्ता में अभूतपूर्व सुधार और नवाचारों के लिए भोपाल नगर निगम के वार्ड क्रमांक-60 को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष रूप से सराहा गया। स्थानीय स्तर पर हरित पहल, सघन पौधारोपण तथा नागरिक जागरूकता के प्रभावी प्रयासों के लिए अपर आयुक्त अमन मिश्रा एवं एमआईसी सदस्य आर. के. सिंह बघेल ने यह प्रतिष्ठित सम्मान स्वीकार किया।

    सतत् विकास और दूरदर्शी नेतृत्व की सुखद परिणति

    यह राष्ट्रीय गौरव प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 'विकसित भारत' के पावन संकल्प तथा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व में संचालित पर्यावरण संरक्षण अभियानों का फलश्रम है। प्रदेश के नगरीय निकायों द्वारा धूल नियंत्रण, जल छिड़काव, खुले में कचरा जलाने पर रोकथाम, निर्माण स्थलों की निगरानी एवं व्यापक जनचेतना के जो प्रयास किए गए हैं, आज उन्हीं की परिणति स्वरूप मध्यप्रदेश ने राष्ट्रीय वायु संरक्षण पटल पर यह सफलता अर्जित की है।

     

  • ग्रामीण क्षेत्रों में बदलेगी तस्वीर, योगी सरकार देगी बेहतर पेयजल और आसान आवागमन की सौगात

    ग्रामीण क्षेत्रों में बदलेगी तस्वीर, योगी सरकार देगी बेहतर पेयजल और आसान आवागमन की सौगात

    योगी सरकार का ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर पेयजल आपूर्ति के साथ सुगम आवागमन की सुविधा पर भी जोर

    अक्टूबर से प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में वृहद स्तर पर चलेगा सड़क मरम्मत से जुड़ा अभियान

    पेयजल आपूर्ति के दौरान पाइप बिछाने के लिए खोदी गई सड़कों को बारिश के बाद किया जाएगा ठीक

    पेयजल योजनाओं को समय से पूरा किया जाए, लापरवाही सामने आने पर होगी कार्रवाई: जलशक्ति मंत्री

    लखनऊ
     योगी सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर पेयजल आपूर्ति के साथ लोगों को सुगम आवागमन की सुविधा देने पर जोर दे रही है। इसी क्रम में जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने मानसून के बाद अक्टूबर से पूरे प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े स्तर पर सड़क की मरम्मत का अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों को अभियान से जुड़ी सभी तैयारियां समय से पूरी करने को कहा है, ताकि पेयजल योजनाओं के लिए खोदी गई सड़कों को जल्द दुरुस्त कर ग्रामीणों को राहत दी जा सके।

    जलशक्ति मंत्री ने सोमवार को राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन कार्यालय में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विभिन्न पेयजल योजनाओं की मंडलवार समीक्षा की। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में जलापूर्ति के लिए पाइपलाइन बिछाने के दौरान कई स्थानों पर सड़कें खोदी गई हैं। मानसून के दौरान बारिश के कारण इन मार्गों पर लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अक्टूबर से अभियान चलाकर इन सड़कों को दोबारा भरकर, समतल करते हुए दुरुस्त किया जाए। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल योजनाओं का काम पूरा होने के साथ लोगों को बेहतर सड़क सुविधा भी मिल सकेगी।

    क्षेत्र भ्रमण और रात्रि प्रवास पर भी जोर
    जलशक्ति मंत्री ने विभिन्न जोन के अभियंताओं और अधीक्षण अभियंताओं से क्षेत्र भ्रमण व रात्रि प्रवास के संबंध में फीडबैक लिया। उन्होंने सहायक अभियंताओं (एई) और अवर अभियंताओं (जेई) को भी रात्रि प्रवास करने के निर्देश दिए, ताकि योजनाओं के काम की मौके पर नियमित निगरानी हो सके।

    पेयजल योजनाओं को समय से पूरा करने के निर्देश
    निर्माणाधीन पेयजल योजनाओं की समीक्षा करते हुए स्वतंत्र देव सिंह ने सभी परियोजनाओं को निर्धारित समय में जल्द पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि योजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए जरूरत के अनुसार मैनपावर बढ़ाया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    जल प्रबंधन पर विशेष ध्यान
    जलशक्ति मंत्री ने अधिकारियों को जल प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पेयजल योजनाओं के संचालन और जलापूर्ति व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने के लिए अधिकारी नियमित निगरानी करें। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में तैयार की जा रही पेयजल योजनाओं का बेहतर संचालन सुनिश्चित किया जा सकेगा और लोगों को लगातार पेयजल की सुविधा मिल सकेगी।

    अधिकारियों के काम की होगी निगरानी
    बैठक में मुख्य अभियंताओं, अधीक्षण अभियंताओं और अधिशासी अभियंताओं (एक्सईएन) को अपने अधीनस्थ अभियंताओं और संबंधित एजेंसियों के कार्यों की गोपनीय रिपोर्ट तैयार कर अपर मुख्य सचिव को भेजने के निर्देश भी दिए गए। इससे योजनाओं की प्रगति और अधिकारियों व कार्यदायी एजेंसियों के कामकाज की निगरानी को और मजबूत किया जा सकेगा।

    इस बैठक में नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुराग श्रीवास्तव, उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) के प्रबंध निदेशक योगेश कुमार, राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन के अधिशासी निदेशक जोगिंदर सिंह, जेएमडी (प्रशासन) डॉ. राजेश प्रजापति, जेएमडी प्रभाष कुमार, स्टेट कोऑर्डिनेटर डीके सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।