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  • BRICS में बढ़ा लोकल करेंसी का इस्तेमाल, 90% ट्रेड अपनी मुद्रा में; डॉलर के लिए बढ़ी मुश्किलें

    BRICS में बढ़ा लोकल करेंसी का इस्तेमाल, 90% ट्रेड अपनी मुद्रा में; डॉलर के लिए बढ़ी मुश्किलें

     नई दिल्ली

    रूस ने BRICS में भारत की अध्यक्षता और उसके दौरान हुए नतीजों की तारीफ की है. रूस के राष्ट्रपति के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि रूस BRICS सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए पूरी कोशिश कर रहा है. उन्होंने बताया कि BRICS देशों के साथ रूस के 90 फीसदी भुगतान नेशनल करेंसी यानी संबंधित देशों की अपनी मुद्रा में हो रहे हैं। 

    पेस्कोव ने कहा कि इसका मकसद डीडॉलराइजेशन नहीं है, बल्कि भुगतान के तरीकों को ज्यादा से ज्यादा बढ़ाना है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि कुछ देश अपनी नेशनल करेंसी का इस्तेमाल विदेश नीति के एक टूल के तौर पर कर रहे हैं। 

    BRICS में बढ़ रहा सहयोग
    पेस्कोव ने कहा कि BRICS में सहयोग के तीन प्रमुख क्षेत्रों में काम हो रहा है, जिनमें मानवीय सहयोग और आर्थिक सहयोग शामिल हैं. उन्होंने कहा कि रूस BRICS की सदस्यता का विस्तार करने के लिए भी प्रतिबद्ध है। 

    इसके साथ ही BRICS सुरक्षा के मोर्चे पर भी सहयोग का मैकेनिज्म विकसित कर रहा है. इसमें ड्रग्स और नशीले पदार्थों से निपटने के साथ आतंकवाद विरोधी अभियानों में सहयोग शामिल है. BRICS देशों के बीच अंतरिक्ष के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाया जा रहा है। 

    भारत को बताया रणनीतिक साझेदार
    भारत को लेकर पेस्कोव ने कहा कि भारत रूस का रणनीतिक साझेदार है और दोनों देश अलग-अलग क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ा रहे हैं. उन्होंने कहा कि भारत के साथ भी ज्यादातर भुगतान नेशनल करेंसी में किए जा रहे हैं। 

    यूक्रेन जंग को लेकर पेस्कोव ने कहा कि रूस इसे रोकने की कोशिश कर रहा है और शांतिपूर्ण समाधान के पक्ष में है. उन्होंने 2014 की घटनाओं का जिक्र करते हुए अमेरिका, ब्रिटेन और दूसरे यूरोपीय देशों पर रूस को हटाने के लिए तख्तापलट की साजिश का आरोप लगाया। 

    पेस्कोव ने कहा कि रूस शांति के लिए भारत की ओर से किए जा रहे प्रयासों का स्वागत करता है. उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से जंग खत्म कराने की कोशिशों का भी स्वागत किया. हालांकि, पेस्कोव ने आरोप लगाया कि कुछ यूरोपीय देश यूक्रेन को रूस की रणनीतिक हार के लिए उकसा रहे हैं. उन्होंने कहा कि रूस ऐसा होने नहीं देगा। 

  • 8th Pay Commission News: पेंशनर्स के फिटमेंट फैक्टर पर संशय, PM मोदी को लिखे पत्र से समझें पूरा मामला

    8th Pay Commission News: पेंशनर्स के फिटमेंट फैक्टर पर संशय, PM मोदी को लिखे पत्र से समझें पूरा मामला

    नई दिल्ली

    आठवें वेतन आयोग के लागू होने का केंद्रीय सरकारी कर्मचारी जितनी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, उतना ही इंतजार देशभर के पेंशनर्स को भी है. 8वें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन हुए 10 महीने से ज्‍यादा समय हो गया है और आयोग इस बीच काफी सारी एक्‍सरसाइज कर चुका है. फिलहाल देश के अलग-अलग शहरों में आयोग की बैठकों का दौर जारी है। 

    इस बीच पेंशनर्स के एक संघ रिटायर्ड एम्प्लॉइज वेलफेयर एसोसिएशन (Retired Employees Welfare Association) ने 8th Pay Commission के ToR यानी टर्म ऑफ रेफरेंस के एक बिंदु पर आशंका जताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र (Letter to PM Modi) लिखा है। 

    क्‍या पुराने पेंशनर्स को नहीं मिलेगा फिटमेंट फैक्‍टर का लाभ?
    रिटायर्ड एम्प्लॉइज वेलफेयर एसोसिएशन (Retired Employees Welfare Association) ने मंगलवार, 7 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी को पत्र भेजा है. संघ को आशंका है कि OPS यानी ओल्‍ड पेंशन स्‍कीम के तहत आने वाले पुराने पेंशनर्स को फिटमेंट फैक्‍टर का लाभ नहीं मिलेगा. एसोसिएशन ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के Terms of Reference में संशोधन की मांग की है. संगठन के अनुसार , करीब 69 लाख पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि उन्हें पेंशन संशोधन का लाभ मिलेगा या नहीं। 

    8th CPC के ToR में किस बात को लेकर है आपत्ति? 
    संघ की आपत्ति 8वें वेतन आयोग के ToR के प्वाइंट 2(e) की भाषा को लेकर है. उनका कहना है कि मौजूदा ToR में पेंशन, NPS और UPS का उल्लेख है, लेकिन पुराने पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स की पेंशन रिवीजन को स्पष्ट रूप से नहीं लिखा गया है। 

    एसोसिएशन का कहना है कि 7वें वेतन आयोग के ToR में 'revision of pre-retirement pension' का स्पष्ट उल्लेख था. संगठन ने छठे और 5वें वेतन आयोग के ToR में भी पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स का स्पष्ट उल्लेख होने का दावा किया है। 

    वित्त मंत्री और वित्त सचिव को भी भेजा पत्र 
    एसोसिएशन ने वित्त मंत्री और वित्त सचिव को पहले पत्र भेजे जाने की बात कही है. संगठन के मुताबिक, अब तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी नहीं हुआ है। 

    एसोसिएशन ने मांग की है कि ToR में स्पष्ट रूप से जोड़ा जाए कि 8वां वेतन आयोग 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हुए सभी पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स की पेंशन/फैमिली पेंशन के संशोधन पर भी सिफारिश का लाभ देगा। 

    जब तक औपचारिक संशोधन नहीं होता, तब तक सरकार से प्रेस रिलीज या आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करने की मांग की गई है. संगठन ने ये पत्र प्रधानमंत्री के अलावा वित्त मंत्री, वित्त सचिव और DoPPW के सचिव को भी भेजा है। 

    पेंशन को लेकर डरने की जरूरत नहीं, यहां दूर करें कन्‍फ्यूजन  

     इस मसले पर कुछ जानकारों से बात की और मसले को समझने का प्रयास किया कि क्‍या वाकई ये डर वाजिब है. अगर हां तो सरकार या आयोग आगे क्‍या कर सकता है. 8वें वेतन आयोग के गजट नोटिफिकेशन में ToR में प्वाइंट 2(e) की भाषा को लेकर संघ शंका में है. रिटायर्ड एम्‍प्‍लॉयीज वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव साधु सिंह से बात करने की कोशिश की, जो खबर लिखे जाने तक नहीं हो पाई है. फिर हमने दूसरे एक्‍सपर्ट्स से समझने की कोशिश की। 

    ऐसे मामलों के एक एक्‍सपर्ट ने समझाया कि आपत्ति क्‍यों है… उन्‍होंने कहा, ' 2(e) में लिखा है- Review the structure of Death-cum-Retirement Gratuity and Pension including NPS/UPS and outside NPS for the employees…

    यानी प्रावधान में पेंशन, ग्रेच्युटी, NPS/UPS और NPS के बाहर के कर्मचारियों का उल्लेख है, लेकिन एसोसिएशन का तर्क है कि इसमें 'existing pensioners' यानी मौजूदा पेंशनर्स, pre-2026 retirees यानी 2026 से पहले रिटायर होने वाले कर्मी, 'family pensioners' या 'revision of pre-retirement pension' जैसी स्पष्ट भाषा नहीं है. इसी को लेकर को लेकर उन्होंने प्रधानमंत्री से ToR संशोधन की मांग की है। 

    8वें वेतन आयोग के ToR को लेकर NDTV ने AINPSF के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष डॉ मंजीत सिंह पटेल से समझना चाहा. उन्‍होंने इसी ToR में 2(f) के तीसरे प्‍वाइंट का जिक्र किया, जिसमें लिखा है- The Unfunded cost of non-Contributory Pension Schemes…'. 

    डॉ पटेल ने समझाया कि Unfunded Non Contributed के अंदर बिना कंट्रीब्‍यूशन वाले पेंशनर्स यानी NPS/UPS के अलावा वाले पुराने पेंशनर्स भी आ जाते हैं. दूसरी बात कि अगर 2(e) में पुराने पेंशनर्स का जिक्र नहीं है तो पुराने वर्किंग एम्‍प्‍लॉईज का भी अलग से जिक्र नहीं है. तो इसका मतलब ये न समझा जाए कि वे भी फिटमेंट फैक्‍टर के लाभ के दायरे में नहीं आएंगे। 

  • इंदौर-नागपुर से अहमदाबाद-वड़ोदरा तक सुपरफास्ट कनेक्टिविटी, बैतूल-खंडवा फोरलेन बनेगा नई लाइफलाइन

    इंदौर-नागपुर से अहमदाबाद-वड़ोदरा तक सुपरफास्ट कनेक्टिविटी, बैतूल-खंडवा फोरलेन बनेगा नई लाइफलाइन

    इंदौर 

    बैतूल से खंडवा के बीच फोरलेन प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल चुकी है. यह प्रोजेक्ट इंदौर और नागपुर के बीच की दूरी को बेहद कम कर देगा. दोनों शहरों के बीच का सफर 6 घंटे में पूरा हो जाएगा. यह परियोजना बैतूल-खंडवा-वडोदरा कॉरिडोर का हिस्सा है, जिससे मध्य प्रदेश की गुजरात और महाराष्ट्र से कनेक्टिविटी और मजबूत हो जाएगी. इस फोरलेन के बनने से नागपुर, जलगांव, भुसावल, अकोला, वाशिम, हिंगोली, नांदेड़ जैसे शहर कनेक्ट होंगे. वहीं गुजरात के अहमदाबाद, वडोदरा जैसे बड़े शहरों से सीधी कनेक्टिविटी हो जाएगी. इसलिए यह प्रोजेक्ट मध्य प्रदेश के लिए अहम है, क्योंकि आने वाले समय में यह प्रदेश के लिए गेमचेंजर बनेगा। 

    इंदौर से नागपुर का सफर 6 घंटे में होगा
    बैतूल से खंडवा फोरलेन बनने से सबसे बड़ा फायदा इंदौर नागपुर रूट पर होगा. केंद्र सरकार के प्रोजेक्ट दस्तावेज में इस कॉरिडोर को इंदौर और नागपुर एयरपोर्ट, इंदौर के मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक पार्क और बैतूल-खंडवा के प्रमुख रेलवे स्टेशनों से जोड़ने वाली कड़ी बताया गया है. इंदौर से पहले सीधे बैतूल तक का सफर होगा. इसके बाद बैतूल से नागपुर का सफर तय किय जाएगा. पहले इंदौर से नागपुर जाने में 13 से 14 घंटे का समय लगता था. क्योंकि पूरा रूट 2 लेन हाईवे था. यह नया मार्ग सीधे नेशनल NH-47, NH-753 और NH-52 जैसी बड़ी सड़कों को आपस में इंटरलिंक करदेगा. इंदौर से हरदा-बैतूल होते हुए नागपुर जाने वाले ट्रैफिक को इस अपग्रेडेशन से सीधी मदद मिलेगी. इस फोरलेन के बनने से पूरा मार्ग एक्सप्रेसवे में अपग्रेड हो जाएगा. जिससे इंदौर से नागपुर का सफर 6 घंटे में पूरा कर लिया जाएगा. इसलिए इंदौर से नागपुर और दक्षिण भारत के बीच का सफर भी बेहद आसान हो जाएगा। 

    एमपी की गुजरात और महाराष्ट्र तक कनेक्टिविटी
        मध्य प्रदेश: बैतूल खंडवा फोरलेन हाईवे से इंदौर, बैतूल, खंडवा, बुरहानपुर, बड़वानी जैसे शहर सीधे कनेक्ट हो जाएंगे. 
        महाराष्ट्र: नागपुर, जलगांव, भुसावल, अकोला, वाशिम, हिंगोली और नांदेड़ जैसे शहरों के लिए भी राह आसान हो जाएगी. 
        गुजरात: इस प्रोजेक्ट से एमपी के खंडवा का सीधा कनेक्शन अहमदाबाद, वड़ोदरा जैसे बड़े शहरों से भी हो जाएगा. 

    मध्य प्रदेश के शहरों को फायदा
    यह कॉरिडोर मध्य प्रदेश के भीतर एक मजबूत कनेक्टिविटी जाल तैयार करेगा, क्योंकि इससे एमपी के कई बड़े शहर आपस में कनेक्ट होंगे. बैतूल, छिंदवाड़ा और नागपुर की तरफ से आने वाला ट्रैफिक खंडवा होते हुए इंदौर और भोपाल की तरफ बेहद आसानी से और कम समय में पूरा किया जा सकेगा. खंडवा, खरगोन और बड़वानी: निमाड़ अंचल के ये तीनों प्रमुख जिले इस हाईवे के जरिए सीधे बैतूल और छिंदवाड़ा से कनेक्ट हो जाएंगे। 

    सिंहस्थ-2028 में भी फायदा
    बैतूल-खंडवा-जुलवानिया फोरलेन से मध्य प्रदेश के मालवा और निमाड़ की कनेक्टिविटी भी मजबूत हो जाएगी. उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ-2028 के आयोजन के हिसाब से यह प्रोजेक्ट अहम साबित होगा. क्योंकि उज्जैन में महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग और खंडवा जिले के मंधाता में ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के बीच भारी ट्रैफिक को सुचारू रूप से प्रबंधित करने में मदद करेगा. जिससे सिंहस्थ में महाराष्ट्र और गुजरात की तरफ से आने वाले यात्रियों को इस फोरलेन का फायदा होगा. इसलिए यह प्रोजेक्ट आने वाले समय में मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के व्यापारिक संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा। 

    बैतूल-खंडवा फोरलेन को केंद्र की मंजूरी 
    बैतूल से खंडवा के बीच बनने वाले इस प्रोजेक्ट को केंद्र सरकार ने जून 2026 में मंजूरी दे दी है. इस परियोजना के लिए 4415.60 करोड़ रुपए का बजट तय किया गया है. जिसकी कुल दूरी 233.653 किलोमीटर होगी. फिलहाल इसे 4 लेन में विकसित किया जाएगा. जबकि भविष्य में इसे 6 लेन बनाने की योजना है. ताजा अपडेट के मुताबिक नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) इस प्रोजेक्ट की डीपीआर तैयार की जा रही है. जिसे मंजूरी मिलते ही इस पर काम शुरू हो जाएगा. जनवरी 2027 से इसका काम शुरू होने की संभावना है. खास बात यह है कि सभी ब्लैक स्पॉट्स खत्म होंगे, जिससे गाड़ियां 100 किलोमीटर की रफ्तार से चलेगी. वर्तमान में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को पूरा किया जा रहा है. उम्मीद जताई जा रही है कि साल 2029 के अंत तक या 2030 की शुरुआत में यह हाईवे पूरी तरह से बनकर तैयार हो जाएगा। 

  • नेतन्याहू की वापसी पर सवाल! इजरायल के ताजा सर्वे में याशार सबसे बड़ी पार्टी, जानें किसे कितनी सीटें

    नेतन्याहू की वापसी पर सवाल! इजरायल के ताजा सर्वे में याशार सबसे बड़ी पार्टी, जानें किसे कितनी सीटें

    तेल अवीव
    इजरायल में आम चुनाव से पहले प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए सर्वे के आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं. सोमवार को जारी एक ओपिनियन पोल के मुताबिक, अगर आज चुनाव होते हैं तो पूर्व इजरायली सेना प्रमुख गादी आइजनकोट की याशार पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बन सकती है. सर्वे में नेतन्याहू की जीत-हार को लेकर भी बड़े दावे सामने आ रहे हैं। 

    सर्वे में याशार को 25 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है, जबकि नेतन्याहू की लिकुड पार्टी 21 सीटों पर सिमटती दिख रही है. यह सर्वे इजरायल के मार्केट रिसर्च और पब्लिक ओपिनियन पोलिंग संस्थान मिडगैम ने चैनल 12 के लिए किया है. पिछले सर्वे के मुकाबले याशार को एक सीट का फायदा हुआ है, जबकि लिकुड की दो सीटें कम हुई हैं. इजरायल की संसद यानी नेसेट में कुल 120 सीटें हैं। 

    विपक्षी गठबंधन को बहुमत से ज्यादा सीटों का अनुमान
    सर्वे के मुताबिक, पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट की टुगेदर पार्टी को 13 सीटें मिलने का अनुमान है. हालांकि, यह उसके हालिया सर्वे में सबसे कम आंकड़ा है और पिछली बार के मुकाबले पार्टी को दो सीटों का नुकसान हुआ है। 

    यायर गोलान की अगुवाई वाली डेमोक्रेट्स पार्टी 11 सीटों पर बनी हुई है. वहीं एविगडोर लिबरमैन की यिसराइल बेतेनु पार्टी को 8 सीटें मिलने का अनुमान है. यूनाइटेड टोरा यहूदी धर्म पार्टी को भी 8 और आर्येह डेरी की शास पार्टी को 7 सीटें मिल सकती हैं। 

    बेजलेल स्मोट्रिच और मोशे फेइग्लिन की अगुवाई वाले राइट-विंग धार्मिक जियोनिज्म और जेहुत गठबंधन को 6 सीटें मिलने का अनुमान है. ओफर विंटर की अमचा यिसराइल को 4 सीटें मिल सकती हैं। 

    इजरायल टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अरब पार्टियों में जॉइंट लिस्ट को 7 और मंसूर अब्बास की यूनाइटेड अरब लिस्ट को 4 सीटें मिलने का अनुमान है. वहीं बेनी गैंट्ज की ब्लू एंड व्हाइट और अवी माओज की नोआम यिसराइल समेत कई पार्टियां 3.25 फीसदी के चुनावी थ्रेशोल्ड को पार करती नहीं दिख रही हैं। 

    पीएम पद की पसंद में भी आइजनकोट आगे
    राजनीतिक गुटों की बात करें तो विपक्षी खेमे को कुल 68 सीटें मिलने का अनुमान है. इनमें 57 सीटें यहूदी पार्टियों और 11 सीटें अरब पार्टियों की हैं. नेतन्याहू के खेमे को 52 सीटें मिलने का अनुमान है. स्मोट्रिच और विंटर की पार्टियों के चुनावी थ्रेशोल्ड पार करने से नेतन्याहू के खेमे को दो सीटों का फायदा हुआ है। 

    इजरायल में सरकार बनाने के लिए 120 सदस्यीय नेसेट में कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है. ऐसे में मौजूदा सर्वे के आंकड़े विपक्ष को बढ़त देते हैं, लेकिन सरकार बनाने के लिए गठबंधन की तस्वीर अहम होगी

    प्रधानमंत्री पद के लिए भी नेतन्याहू पिछड़ते दिख रहे हैं. सर्वे में 42 फीसदी लोगों ने गादी आइजनकोट को प्रधानमंत्री पद के लिए ज्यादा उपयुक्त बताया, जबकि नेतन्याहू के पक्ष में 35 फीसदी लोग रहे. यानी आइजनकोट को नेतन्याहू पर 7 प्रतिशत अंकों की बढ़त मिली। 

    यह सर्वे ऐसे समय आया है जब 27 अक्टूबर के आम चुनाव के लिए पार्टियों ने अपनी उम्मीदवार सूची जमा कर दी है. आइजनकोट ने बेनेट की पार्टी के साथ गठबंधन नहीं किया है. वहीं ओफर विंटर ने भी स्मोट्रिच की पार्टी के साथ जाने के बजाय अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है। 

  • MP में शिक्षा का डिजिटल विस्तार, 9 सितंबर को लॉन्च होगा ‘ई-ज्ञानसेतु’ YouTube चैनल; छात्रों को मिलेंगे ई-वीडियो

    MP में शिक्षा का डिजिटल विस्तार, 9 सितंबर को लॉन्च होगा ‘ई-ज्ञानसेतु’ YouTube चैनल; छात्रों को मिलेंगे ई-वीडियो

    ई-ज्ञानसेतु YouTube चैनल पर विद्यार्थियों को मिलेंगे गुणवत्तापूर्ण ई-वीडियो कंटेंट

    मंत्री परमार 9 सितंबर को करेंगे ई-ज्ञानसेतु YouTube चैनल का शुभारंभ
    उच्च शिक्षा विभाग द्वारा क्षेत्रीय भाषाओं में शासकीय विश्वविद्यालय, महाविद्यालय के प्राध्यापकों एवं सहायक प्राध्यापकों से तैयार कराया गया है कंटेंट

    भोपाल 
    मध्यप्रदेश के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण डिजिटल अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने की दिशा में उच्च शिक्षा विभाग द्वारा तैयार किए जा रहे ई-वीडियो कंटेंट अब 9 सितंबर 2026 से e-GyanSetu YouTube Channel पर उपलब्ध होंगे। ई- वीडियो कंटेंट के प्रकाशन का उच्च शिक्षा मंत्री इन्दर सिंह परमार द्वारा 9 सितंबर को शाम 5 बजे शुभारंभ किया जाएगा। कार्यक्रम का लाइव प्रसारण Google Meet एवं e-GyanSetu YouTube Channel के माध्यम से होगा।

    राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP)-2020 की भावना के अनुरूप तथा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं मंत्री परमार के मार्गदर्शन में प्रदेश के संभागीय मुख्यालयों में स्थापित 10 डिजिटल स्टूडियो के माध्यम से स्नातक स्तर के विभिन्न विषयों एवं पाठ्यक्रमों के लिए ई-कंटेंट तैयार किया जा रहा है। इस पहल के अंतर्गत कला, विज्ञान, वाणिज्य सहित विभिन्न विषयों के वीडियो व्याख्यान तैयार किए जा रहे हैं। अब तक 2,305 वीडियो शूट किए जा चुके हैं, जिनमें से 954 वीडियो का एडिटिंग कार्य पूर्ण हो चुका है ।

    ई-वीडियो कंटेंट को विद्यार्थियों के लिए अधिक प्रभावी और रोचक बनाने के लिए ग्राफिक्स एवं डिजिटल विजुअल्स का उपयोग किया गया है। वीडियो की शैक्षणिक एवं विषयगत गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। ये वीडियो प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में कार्यरत प्राध्यापकों एवं सहायक प्राध्यापकों द्वारा तैयार किए जा रहे हैं।

    वीडियो की प्रमाणिकता एवं गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए तैयार ई-कंटेंट का विषयवस्तु, पाठ्यक्रमानुरूपता एवं शैक्षणिक गुणवत्ता के आधार पर Validation Board द्वारा परीक्षण एवं सत्यापन किया जाता है। सत्यापन के बाद ही वीडियो को विद्यार्थियों के लिए e-GyanSetu YouTube Channel पर प्रकाशित किया जाएगा।

    ई-कंटेंट निर्माण में प्रदेश की भाषाई विविधता का भी ध्यान रखा गया है। विद्यार्थियों की सुविधा के लिए बघेली, बुंदेली, मराठी तथा संस्कृत सहित क्षेत्रीय भाषाओं में भी वीडियो तैयार किए गए हैं। इससे अलग-अलग भाषाई पृष्ठभूमि वाले विद्यार्थियों तक डिजिटल अध्ययन सामग्री पहुँचाने में मदद मिलेगी।

    मंत्रालय में आयोजित बैठक में मंत्री परमार के समक्ष तैयार ई-कंटेंट वीडियो प्रदर्शित किए गए थे। बैठक में हुई चर्चा के दौरान मंत्री द्वारा वीडियो को शीघ्र e-GyanSetu YouTube Channel पर अपलोड एवं प्रकाशित किए जाने के निर्देश दिए गए।

    e-GyanSetu पर उपलब्ध वीडियो के माध्यम से विद्यार्थी अपनी सुविधा के अनुसार मोबाइल, लैपटॉप, टैबलेट अथवा अन्य डिजिटल माध्यमों से अध्ययन कर सकेंगे। इससे विद्यार्थियों को विषयवस्तु को दोहराने, कठिन टॉपिक्स को पुनः समझने तथा अपनी सीखने की गति के अनुसार अध्ययन करने की सुविधा मिलेगी। ई-कंटेंट निर्माण, एडिटिंग एवं सत्यापन की प्रक्रिया निरंतर जारी है। सत्यापन पूर्ण होने वाले वीडियो को चरणबद्ध रूप से e-GyanSetu YouTube Channel पर प्रकाशित किया जाएगा। इस पहल से प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण डिजिटल अध्ययन सामग्री की उपलब्धता को और व्यापक बनाने में सहायता मिलेगी।

     

  • MP विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटी कांग्रेस, 70 कमजोर सीटें चिन्हित; BJP के सामने 35 सीटों की चुनौती

    MP विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटी कांग्रेस, 70 कमजोर सीटें चिन्हित; BJP के सामने 35 सीटों की चुनौती

     भोपाल
     मध्य प्रदेश में वर्ष 2028 के विधानसभा चुनाव के लिए अब लगभग दो वर्ष ही बचे हैं। ऐसे में पिछले चुनाव में करारी हार झेल चुकी कांग्रेस ने उन सीटों पर अभी से जोर लगाना शुरू कर दिया है, जिन पर वह कभी नहीं जीती या एक-दो बार ही जीती है। ऐसी 70 सीटों की पहचान की गई है। पार्टी सबसे पहले इन विधानसभा क्षेत्रों में घर-घर मतदाता सूची का सत्यापन करेगी।

    इंदौर में 19 सितंबर को प्रस्तावित राहुल गांधी के दौरे के बाद पार्टी इन सीटों पर फोकस करेगी। मतदाताओं के नाम, फोन नंबर सहित उनकी जानकारी संकलित की जाएगी, जिससे उनसे संपर्क किया जा सके।

    बता दें कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में कुल 230 सीटों में से 66 ही कांग्रेस को मिली थीं। कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती हैं ये विधानसभा सीटें भोपाल की गोविंदपुरा विधानसभा सीट पर 1980 से भाजपा का कब्जा है। यहां पहले बाबूलाल गौर और पिछले दो बार से उनकी बहू कृष्णा गौर विधायक हैं। सागर की रहली विधानसभा सीट से भाजपा के गोपाल भार्गव 1985 से लगातार जीत रहे हैं। इंदौर-2 विधानसभा सीट 1993 से भाजपा के पास है।

    घर-घर जाकर मतदाता सूची का सत्यापन करेंगे पार्टी कार्यकर्ता
    महामंत्री एवं संगठन प्रभारी, प्रदेश कांग्रेस, डॉ. संजय कामले ने कहा कि पार्टी ने ऐसी 70 विधानसभा सीटें चिह्नित की हैं, जिनमें प्रदर्शन कमजोर रहा है। पार्टी इन सीटों पर कभी नहीं जीती या अभी तक में एक-दो बार ही जीती हैं। इन सीटों पर सबसे पहले मतदाता सूची के सत्यापन के लिए अभियान चलाया जाएगा जो लगभग छह माह चलेगा।

    भाजपा के लिए 35 सीटों पर चुनौती
    भाजपा ने भी जनसंघ के समय से नहीं जीती या बहुत कम बार जीती 35 सीटों की पहचान की है। इन सीटों की जिम्मेदारी बड़े नेताओं को दी जाएगी। चार-चार गांवों का क्लस्टर गठित कर एक प्रभारी बनाया जाएगा जो कमजोरियों की पहचान कर दूर करने का प्रयास करेगा।

    दरअसल, भाजपा ने वर्ष 2028 के विधानसभा चुनाव में खुद को मजबूत बनाने के लिए माइक्रो-प्लानिंग रणनीति बनाई है। पार्टी का लक्ष्य प्रत्येक बूथ पर 51 प्रतिशत वोट शेयर हासिल करना है। इसके लिए "पन्ना प्रमुखों" को सक्रिय कर घर-घर संपर्क अभियान चलाया जा रहा है। अल्पसंख्यक और जातिगत समीकरण को देखते हुए इन सीटों पर प्रभावी जाति समूहों एससी-एसटी व अन्य को साधने के लिए नजदीकी विधायकों को सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे पहुंचाने का निर्देश दिया गया है।

    मंत्रियों की तैनाती भी इन "कठिन" सीटों पर की गई है। संगठन के दिग्गज मंत्रियों और कोर ग्रुप के सदस्यों को प्रभारी बनाया गया है ताकि वे जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं का भरोसा जीत सकें।

    सीटें जो भाजपा के लिए हैं चुनौती
    गुना जिले की राघौगढ़ विधानसभा सीट पर 1977 से कांग्रेस का कब्जा है। सीधी जिले की चुरहट विधानसभा सीट से भाजपा सिर्फ दो बार जीत पाई है। भोपाल की उत्तर विधानसभा सीट वर्ष 1998 से कांग्रेस के पास है। कसरावद भीकनगांव में 2013 से लगातार कांग्रेस जीती है। बड़वानी के राजपुर से बाला बच्चन भी लगातार तीन बार से जीते हैं।

     

  • GDP ग्रोथ 7.8% पहुंची, लेकिन 2047 का लक्ष्य आसान नहीं, अर्थशास्त्रियों ने बताया किन मोर्चों पर बढ़ानी होगी रफ्तार

    GDP ग्रोथ 7.8% पहुंची, लेकिन 2047 का लक्ष्य आसान नहीं, अर्थशास्त्रियों ने बताया किन मोर्चों पर बढ़ानी होगी रफ्तार

     नई दिल्ली
    भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8% की शानदार GDP ग्रोथ दर्ज की है. पश्चिम एशिया संकट और अन्य वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच यह आंकड़ा उम्मीद से बेहतर रहा और भारत की मजबूत आर्थिक रफ्तार को दिखाता है. हालांकि, इस GDP आंकड़े को लेकर विवाद भी सामने आया। 

    पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने GDP के आंकड़ों और पिछली अवधि के संशोधन पर सवाल उठाए, जबकि कांग्रेस ने भी सरकार पर आंकड़ों के साथ हेरफेर करने का आरोप लगाया. सुभाष गर्ग ने तो यहां तक दावा कर दिया कि भारतीय अर्थव्यवस्था की वास्तविक वृद्धि दर 7.8% की जगह सिर्फ 2.6% है. हालांकि, उन्होंने खुद ही एक इंटरव्यू में अपने 2.6% जीडीपी ग्रोथ के दावे से पलटते हुए इसे 5% तक संसोधित कर दिया। 

    दूसरी ओर, दो प्रमुख अर्थशास्त्रियों- सुरजीत भल्ला और मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने GDP ग्रोथ के आंकड़ों में हेरफेर के आरोपों को खारिज किया है. साथ ही दोनों ने बताया कि 7.8% की ग्रोथ के बावजूद 2047 तक विकसित देश बनने के लिए भारत को और तेज आर्थिक विकास की जरूरत होगी। 

    खास बात यह है कि मोंटेक सिंह अहलूवालिया कांग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार के दौरान योजना आयोग के डिप्टी चेयरमैन रह चुके हैं. वह 2004 से 2014 के बीच देश की आर्थिक नीति और सुधारों से जुड़े अहम फैसलों में महत्वपूर्ण भूमिका में थे. इसलिए मौजूदा जीडीपी ग्रोथ पर उनकी राय इस बहस को एक अलग वजन देती है। 

    सुभाष गर्ग ने क्या सवाल उठाया?
    GDP के नए आंकड़े जारी होने के बाद पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने पिछले साल की पहली तिमाही के आंकड़ों में हुए बड़े संशोधन को लेकर सवाल खड़े किए. उनका कहना था कि पिछले साल की पहली तिमाही का मौजूदा कीमतों पर GDP आंकड़ा पहले करीब ₹86 लाख करोड़ बताया गया था, जिसे नई GDP सीरीज में घटाकर करीब ₹80 लाख करोड़ कर दिया गया. उन्होंने करीब ₹6 लाख करोड़ के अंतर को लेकर सरकार से स्पष्टीकरण मांगा और इसी आधार पर मौजूदा 7.8% ग्रोथ की गणना पर सवाल उठाया। 

    सुभाष गर्ग का तर्क था कि अगर पुराने और नए आंकड़ों को अलग-अलग आधार पर देखा जाए तो मौजूदा कीमतों पर GDP ग्रोथ 2.5% से भी कम नजर आती है. हालांकि, सरकार और अर्थशास्त्रियों ने उनकी इस गणना को सिरे से खारिज करते हुए अतार्किक बताया. सरकार और अर्थशास्त्रियों ने कहा कि दो अलग-अलग स्टैटिस्टिकल सीरीज के आंकड़ों की तुलना करने जीडीपी की गणना नहीं की जा सकती। 

    कांग्रेस ने भी उठाए थे सवाल
    सुभाष गर्ग की आपत्ति के बाद GDP के आंकड़े राजनीतिक बहस का मुद्दा भी बन गए. कांग्रेस ने नई GDP सीरीज, GDP डिफ्लेटर और पिछले आंकड़ों में हुए संशोधन को लेकर सरकार पर सवाल उठाए. पार्टी ने दावा किया कि नई सीरीज में चार वर्षों के दौरान भारत की GDP में करीब ₹43 लाख करोड़ की कमी दिखाई गई है. सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि नई GDP सीरीज में 2022-23 को बेस ईयर बनाया गया है और आंकड़ों की गणना के लिए बेहतर डेटा सोर्स, नई मेथोडोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है. सांख्यिकी मंत्रालय (MoSPI) ने भी कहा है कि अलग-अलग GDP सीरीज के आंकड़ों की तुलना करके ग्रोथ रेट निकालना सही तरीका नहीं है। 

    दो बड़े अर्थशास्त्रियों ने क्या कहा?
    GDP के आंकड़ों को लेकर चल रही इस बहस के बीच सुरजीत भल्ला और मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने भी अपनी राय रखी. दोनों ने इस बात से सहमति जताई कि 7.8% के आंकड़े को राजनीतिक तरीके से बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने का कोई ठोस सबूत नहीं है. विश्व बैंक में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले अर्थशास्त्री नीलकंठ मिश्रा ने भी अलग-अलग GDP सीरीज को मिलाकर 2.6% या 2.8% की ग्रोथ निकालने को सही नहीं माना। 

    सुरजीत भल्ला ने कहा कि अगर सरकार GDP को बढ़ाकर दिखाना चाहती, तो खपत के आंकड़ों को भी बढ़ा हुआ दिखाया जा सकता था. लेकिन नई सीरीज में खपत को उलटे नीचे संशोधित किया गया है. उनके मुताबिक, अब तक ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह कहा जा सके कि GDP के आंकड़ों के साथ छेड़छाड़ हुई है। 

    7.8% ग्रोथ ठीक, पर 2047 का लक्ष्य चुनौतीपूर्ण
    GDP विवाद से अलग दोनों अर्थशास्त्रियों की सबसे अहम बात 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को लेकर है. भारत ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8% की मजबूत ग्रोथ जरूर दर्ज की है, लेकिन सुरजीत भल्ला और मोंटेक सिंह अहलूवालिया के मुताबिक सिर्फ एक-दो तिमाहियों की तेज ग्रोथ से यह तय नहीं किया जा सकता कि भारत 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था बन जाएगा। 

    सुरजीत भल्ला का कहना है कि भारत को इस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए लंबे समय तक दोहरे अंकों में ग्रोथ बनाए रखनी होगी. उन्होंने इन्वेस्टमेंट-GDP रेशियो में करीब 34% तक की मजबूती को सकारात्मक बदलाव माना, लेकिन कहा कि डॉलर के लिहाज से प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने के लिए अभी काफी तेज ग्रोथ की जरूरत है। 

    मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने भी कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था पहले के निराशावादी अनुमानों के मुकाबले ज्यादा मजबूत दिखाई दे रही है. लेकिन 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य के लिए मौजूदा रफ्तार पर्याप्त नहीं है. उनका मानना है कि भारत को ज्यादा ऊंची और लगातार बनी रहने वाली ग्रोथ चाहिए। 

    सिर्फ GDP बढ़ना काफी नहीं
    अर्थशास्त्रियों के मुताबिक किसी देश के विकसित होने का मतलब सिर्फ कुल GDP का बढ़ना नहीं है. प्रति व्यक्ति आय, रोजगार, प्रोडक्शन और डेवलपमेंट का फायदा समाज के व्यापक हिस्से तक पहुंचना भी उतना ही जरूरी है. अर्थशास्त्री रोहित लांबा ने भारत के डेवलपमेंट मॉडल को चीन और दक्षिण कोरिया से अलग बताया है। 

    उनके मुताबिक भारत कृषि आधारित अर्थव्यवस्था से सीधे हाई-स्किल सर्विस सेक्टर की ओर तेजी से बढ़ा, जबकि बड़े पैमाने पर रोजगार देने वाले मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को जितना चाहिए, उतना मजबूत नहीं बना सका. विश्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक 2024 में भारत की प्रति व्यक्ति GDP करीब 2,695 डॉलर थी. इसके मुकाबले चीन की प्रति व्यक्ति GDP करीब 13,303 डॉलर, ब्रिटेन की करीब 53,246 डॉलर और अमेरिका की करीब 84,534 डॉलर थी। 

    रोजगार और K-Shaped ग्रोथ की चुनौती
    भारत के लिए अगली बड़ी चुनौती ऐसी ग्रोथ सुनिश्चित करना है, जिससे ज्यादा उत्पादक और बेहतर गुणवत्ता वाले रोजगार पैदा हों. तेज GDP ग्रोथ के बावजूद अगर इसका फायदा आय के अलग-अलग वर्गों तक समान रूप से नहीं पहुंचता, तो विकास का मॉडल K-shaped हो सकता है. K-शेप्ड इकोनॉमी एक ऐसी आर्थिक स्थिति है जिसमें समाज के अलग-अलग हिस्से या उद्योग एक ही समय में विपरीत दिशाओं में आगे बढ़ते हैं मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने भी इस बात पर जोर दिया है कि आर्थिक विकास के साथ रोजगार और व्यापक स्तर पर समृद्धि सुनिश्चित करना जरूरी है. सिर्फ GDP ग्रोथ को देखकर यह नहीं माना जा सकता कि अर्थव्यवस्था की सभी समस्याएं खत्म हो गई हैं। 

    ज्यादा ठोस आर्थिक सुधारों की जरूरत

    विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सुरजीत भल्ला और मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने ज्यादा ठोस आर्थिक सुधारों की जरूरत बताई है. खास तौर पर भारत को वैश्विक व्यापार के साथ ज्यादा मजबूती से जुड़ने, टैरिफ कम करने और उद्योगों के लिए इम्पोर्टेड इनपुट सस्ते करने पर जोर देना होगा. अहलूवालिया ने ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के साथ हुए व्यापार समझौतों का फायदा उठाने और वैश्विक बाजारों के लिए भारतीय कंपनियों को ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनाने की जरूरत बताई. उनका कहना है कि भारत को अपनी क्षमता पर भरोसा रखते हुए दुनिया के लिए और ज्यादा खुला होना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि अब सिर्फ 'रिफॉर्म की जरूरत है' कहने से काम नहीं चलेगा. सरकार को यह तय करना होगा कि वास्तव में कौन-कौन से सुधार किए जाने हैं और उन्हें किस तरह लागू किया जाएगा। 

  • भारत की मेजबानी में 12 सितंबर से BRICS समिट, दिल्ली के भारत मंडपम में होगा महामंथन

    भारत की मेजबानी में 12 सितंबर से BRICS समिट, दिल्ली के भारत मंडपम में होगा महामंथन

     नई दिल्ली
    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए तैयार है. ब्रिक्स की अध्यक्षता इस साल भारत कर रहा है और अध्यक्ष के नाते इस बार के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की जिम्मेदारी भी भारत की है. 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन नई दिल्ली के भारत मंडपम में 12 और 13 सितंबर को होना है। 

    इस शिखर सम्मेलन में शिरकत करने के लिए ब्रिक्स के सदस्य देशों के साथ ही कई अन्य कद्दावर भी नई दिल्ली में होंगे. इस शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग नई दिल्ली आ सकते हैं. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान भी भारत आ सकते हैं। 

    संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस भी इसमें शामिल होने भारत आ सकते हैं. विदेश मंत्रालय की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष शामिल होंगे. साझेदार देशों के राष्ट्राध्यक्षों और कई अन्य देशों के प्रतिनिधियों को भी आउटरीच के तहत इस शिखर सम्मेलन में शामिल होने का निमंत्रण भेजा गया है। 

    नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ऐसे समय में होने जा रहा है, जब संगठन के 20 साल पूरे हो रहे हैं. ब्राजील, रूस, भारत और चीन ने साल 2006 में संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के दौरान अनौपचारिक तौर पर ब्रिक समूह की नींव रखी थी. हालांकि, इसकी औपचारिक स्थापना साल 2009 में हुई थी। 

    तब 16 जून को रूस के येकातेरिनबर्ग शहर में ब्रिक समूह का औपचारिक गठन किया गया था. ब्रिक का पहला शिखर सम्मेलन भी तभी हुआ था. ब्रिक का पहला शिखर सम्मेलन 16 जून 2009 को रूस के येकातेरिनबर्ग में ही हुआ था. साल 2010 में दक्षिण अफ्रीका भी इस समूह में शामिल हो गया और इसके बाद ब्रिक संगठन ब्रिक्स हो गया था। 

    ब्रिक्स में इस समय भारत, रूस, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के साथ ही मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और इंडोनेशिया सदस्य देश हैं. साझेदार देशों की भी एक अलग कैटेगरी है. इस कैटेगरी में 10 देश शामिल हैं। 

  • दो की जगह अब मिलेंगी तीन साड़ियां, स्मार्टफोन से रियल टाइम डेटा से जुड़ेंगे आंगनवाड़ी केंद्र

    दो की जगह अब मिलेंगी तीन साड़ियां, स्मार्टफोन से रियल टाइम डेटा से जुड़ेंगे आंगनवाड़ी केंद्र

    अयोध्या

     प्रदेश की 2.91 लाख आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को बड़ी सौगात दी। आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों का मानदेय आठ हजार से बढ़ाकर 12 हजार रुपये और सहायिकाओं का चार हजार से बढ़ाकर छह हजार रुपये प्रतिमाह किया जाएगा। इसके साथ ही कार्यकत्रियों, सहायिकाओं तथा उनके परिवारों को हर वर्ष पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। अब उन्हें दो के बजाय तीन साड़ियां मिलेंगी। सीएम ने स्मार्टफोन और रियल टाइम डेटा के इस्तेमाल से आंगनवाड़ी केंद्रों को स्मार्ट बनाने की भी घोषणा की।
     
    मुख्यमंत्री योगी अयोध्या धाम में आईसीडीएस के तहत आयोजित आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों एवं सहायिकाओं के सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। अयोध्या में करीब 12 हजार आंगनवाड़ी कार्यकत्रियां और सहायिकाएं मौजूद रहीं, जबकि सभी 75 जिलों में आयोजित कार्यक्रमों से मंत्री, सांसद, विधायक और आंगनवाड़ी कार्यकत्रियां व सहायिकाएं जुड़ीं। बुधवार से शुरू हो रहे पोषण माह से पहले मुख्यमंत्री योगी ने आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों व सहायिकाओं को मानदेय वृद्धि, कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा, अतिरिक्त साड़ी और स्मार्टफोन की चार प्रमुख सौगातें दीं। अपने संबोधन से पहले सीएम ने कार्यक्रम स्थल पर लगाई गई प्रदर्शनी में विभिन्न विभागों के स्टॉल्स का अवलोकन किया, महिलाओं को पुष्टाहार भेंट किया तथा कई बच्चों का अन्नप्राशन भी कराया।

    सेवा की मिसाल बनीं आंगनवाड़ी कार्यकत्रियां

    मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 में सरकार बनने के समय आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों को महज तीन हजार रुपये मानदेय मिलता था। सरकार ने इसे परफॉर्मेंस आधारित व्यवस्था से जोड़ते हुए आठ हजार रुपये किया। अब इसे बढ़ाकर 12 हजार रुपये किया जाएगा। सहायिकाओं का मानदेय भी 1,500 रुपये से बढ़ाकर पहले चार हजार और अब छह हजार रुपये किया जा रहा है। आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं ने कोरोना जैसी सदी की सबसे बड़ी महामारी के दौरान एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे गांव-गांव स्क्रीनिंग से लेकर दस्तक अभियान और संक्रमित लोगों की सेवा तक अपनी जान जोखिम में डालकर जुटी रहीं।

    सीएम योगी ने कहा कि सभी आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं के साथ उनके परिवार को हर वर्ष पांच लाख रुपये तक कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा मिलेगी। इसका लाभ इम्पैनल्ड अस्पतालों के साथ सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में लिया जा सकेगा। हाल में प्रदेश के करीब 15 लाख शिक्षकों, शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को पांच लाख रुपये की कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा दी गई है। लगातार मांग आ रही थी कि आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को भी इससे जोड़ा जाए। अब सरकार यह सुविधा उन्हें भी देने जा रही है।
     
    मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश की 2.91 लाख आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं के लिए साड़ी की धनराशि जारी कर दी गई है। अब तक उन्हें दो साड़ियां मिलती थीं। अब एक अतिरिक्त साड़ी के लिए 500 रुपये और दिए जाएंगे। इस पर प्रदेश सरकार करीब 20 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार वहन करेगी। पहले चरण में 1.28 लाख स्मार्टफोन भी उपलब्ध कराए गए हैं। इससे योजनाओं का डेटा रियल टाइम में दर्ज किया जा सकेगा और आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों का काम भी आसान होगा।

    हर आंगनवाड़ी केंद्र को अपना भवन देना लक्ष्य

    सीएम ने आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों की भूमिका को बच्चों के भविष्य से जोड़ते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने 2018 में इनकी भूमिका की तुलना माता यशोदा से की थी। मां के बाद छोटे बच्चों का पहला संवाद आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं से होता है। बचपन स्वस्थ होगा तो भारत स्वस्थ, समर्थ, आत्मनिर्भर और विकसित बनेगा। पिछले नौ वर्षों में प्रदेश के 70 हजार से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों को व्यवस्थित स्वरूप दिया गया है। सरकार का लक्ष्य प्रत्येक आंगनवाड़ी केंद्र को अपना भवन उपलब्ध कराना है। इसके लिए राज्य वित्त आयोग की धनराशि या अलग बजट से भवनों का निर्माण कराया जाएगा।
     
    शराब माफिया संचालित करता था बच्चों का पोषाहार

    पूर्ववर्ती सरकारों पर हमला करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले आंगनवाड़ी केंद्र जर्जर थे। बच्चे बैठने के लिए टाट लेकर आते थे। पेयजल और जरूरी उपकरणों का अभाव था। केंद्र सरकार पैसा देती थी, लेकिन पोषाहार पर माफिया का शिकंजा था। प्रदेश में बच्चों का पोषाहार एक शराब माफिया संचालित करता था। सरकार और माफिया व्यवस्था को चौपट करते थे और बदनामी आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को झेलनी पड़ती थी। अब पोषाहार को माफिया से मुक्त कर 204 स्थानों पर टेक होम राशन प्लांट महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से संचालित किए जा रहे हैं।
     
    सपा-कांग्रेस ने किया राममंदिर का विरोध

    अयोध्या के बदलाव को आंगनवाड़ी केंद्रों के कायाकल्प से जोड़ते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दस वर्ष पहले यहां न पर्याप्त बिजली थी, न सड़कें और न सुविधाएं। आज अयोध्या में फोरलेन सड़कें, भव्य रेलवे स्टेशन और महर्षि वाल्मीकि के नाम पर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट है। रेलवे की सिंगल लाइन डबल हो चुकी है। राम की पैड़ी का कायाकल्प हुआ और अयोध्या देश की सोलर सिटी बनी है। सपा और कांग्रेस, दोनों दलों ने राम मंदिर का विरोध किया। सपा ने अयोध्या में सड़कों के चौड़ीकरण, रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट निर्माण तक का विरोध किया। ये विरासत के भी विरोधी हैं और विकास के भी। लेकिन, इनके विरोध के बावजूद न राम मंदिर अभियान रुका और न अयोध्या का विकास। आज रामलला भव्य मंदिर में विराजमान हैं और देश-दुनिया के लोग अयोध्या के बदलाव को देख रहे हैं।
     
    समारोह में सैम और मैम श्रेणी से सामान्य पोषण स्थिति में आए बच्चों और उनके अभिभावकों, उत्कृष्ट कार्य करने वाले आंगनवाड़ी केंद्रों तथा एवरेस्ट बेस कैंप अभियान में शामिल बेटियों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, महिला कल्याण व बाल विकास एवं पुष्टाहार मंत्री बेबी रानी मौर्य, महिला कल्याण राज्य मंत्री प्रतिभा शुक्ला, अयोध्या महापौर पंडित गिरीशपति त्रिपाठी, जिला पंचायत सदस्य रोली सिंह, विधान परिषद सदस्य हरिओम पांडेय, अयोध्या सदर विधायक वेद प्रकाश गुप्ता, रुदौली विधायक रामचंद्र यादव, मिल्कीपुर विधायक चंद्रभानु पासवान, गोसाईंगंज विधायक डॉ. अमित सिंह चौहान, अभय सिंह, महिला कल्याण एवं बाल विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव लीना जौहरी, प्रदेश व जिले के अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

  • मध्यप्रदेश में वेस्ट-टू-एनर्जी, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट और ग्रीन मोबिलिटी में निवेश और तकनीकी साझेदारी पर हुई विस्तृत चर्चा

    मध्यप्रदेश में वेस्ट-टू-एनर्जी, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट और ग्रीन मोबिलिटी में निवेश और तकनीकी साझेदारी पर हुई विस्तृत चर्चा

    भोपाल 

    एआईएम कांग्रेस-2026

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संयुक्त अरब अमीरात में आयोजित तीन दिवसीय प्रतिष्ठित 'एआईएम कांग्रेस-2026' के तीसरे दिन 8 सितंबर को शारजाह स्थित बी-आह (Bee’aH) मुख्यालय का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने बी-आह फैसेलिटी के ग्रुप सीईओ एवं वाइस-चेयरमैन  खालिद अल हुरैमल के साथ एक उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक की। बैठक में पर्यावरण संरक्षण, स्मार्ट सिटी विकास, सर्कुलर इकोनॉमी और अत्याधुनिक वेस्ट मैनेजमेंट समाधानों को मध्यप्रदेश में लागू करने को लेकर गहन विचार-विमर्श हुआ। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ यादव ने सभी प्रकार के इंडस्ट्रियल वेस्ट, सीवेज वेस्ट, वेस्ट रिप्रोसेसिंग और इनर्ट मटेरियल के डिस्पोजल संबंधी ट्रीटमेंट सेंटर का निरीक्षण किया। इस दौरान विशेषज्ञों ने उन्हें बताया कि यहां विश्व की सर्वाधिक उन्नत तकनीकी का उपयोग किया जा रहा है।

    मध्यप्रदेश में वेस्ट-टू-एनर्जी और ग्रीन मोबिलिटी में निवेश की संभावनाएं

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चर्चा के दौरान बी-आह ग्रुप को मध्यप्रदेश के नगर निगमों में म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट तथा वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजनाओं में निवेश और टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश स्वच्छ ऊर्जा और सस्टेनेबल अर्बन डेवलपमेंट के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। बीईईएएच की डिजिटल, एआई-सक्षम और सर्कुलर इकोनॉमी क्षमताएं मध्यप्रदेश के स्मार्ट सिटी विजन और क्लीन एनर्जी मिशन के बिल्कुल अनुकूल हैं। राज्य में ईवी-आधारित फ्लीट और रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स के विस्तार में यह साझेदारी अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकती है।

    इंदौर के स्वच्छता मॉडल के साथ वैश्विक तालमेल

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारत के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए बताया कि इंदौर ने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट और बायो-सीएनजी के क्षेत्र में देश और दुनिया के समक्ष एक अनुकरणीय मॉडल स्थापित किया है। उन्होंने बी आह को इंदौर के स्थापित मॉडल के साथ जुड़कर नए आधुनिक समाधानों पर मिलकर काम करने का प्रस्ताव दिया, जिससे कचरा प्रबंधन के साथ-साथ जीरो-वेस्ट लैंडफिल के लक्ष्य को हासिल किया जा सके।

    जीआईएस-2027 के लिए दिया आमंत्रण

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बी आह के ग्रुप के सीईओ  खालिद अल हुरैमल को अगले साल भोपाल में आयोजित होने वाली 'ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027' में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण दिया। मुख्यमंत्री ने आग्रह किया कि बी आह ग्रुप अपनी आगामी वैश्विक विस्तार योजनाओं में मध्यप्रदेश को एक प्रमुख और प्राथमिकता वाले गंतव्य (डेस्टिनेशन) के रूप में शामिल करे।

    अत्याधुनिक मुख्यालय का किया अवलोकन

    बैठक के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रसिद्ध आर्किटेक्ट ज़ाहा हदीद द्वारा डिज़ाईन किए गए बी-आह के प्रतिष्ठित एआई-सक्षम व नेट-ज़ीरो-रेडी मुख्यालय तथा उनकी विभिन्न उन्नत सुविधाओं की सराहना की। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2007 में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के रूप में स्थापित बी आह आज 46 राष्ट्रीयताओं के 13 हजार से अधिक कर्मचारियों और यूएई, सऊदी अरब व मिस्र में विस्तृत परिचालनों के साथ पर्यावरण, रिन्यूएबल एनर्जी, ग्रीन मोबिलिटी और टेक्नोलॉजी का अग्रणी अंतर्राष्ट्रीय समूह बन चुका है। शारजाह में 90 प्रतिशत से अधिक लैंडफिल-डायवर्जन दर और कमर्शियल स्केल वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट के संचालन में समूह ने वैश्विक मानक स्थापित किए हैं।

    एडवांस्ड सस्टेनेबल और एआई-सक्षम है बी आह फैसिलिटी का मुख्यालय

    बी आह सस्टेनेबिलिटी, इनोवेशन और एआई का वैश्विक मॉडल संयुक्त अरब अमीरात के शारजाह में मुख्यालय वाला बी-आह (BEEAH) वैश्विक स्तर पर सस्टेनेबिलिटी और इनोवेशन के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है। पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के रूप में स्थापित यह संस्था एक वेस्ट मैनेजमेंट कंपनी से विकसित होकर आज एनवायरमेंटल सर्विसेज, रिन्यूएबल एनर्जी, टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर और सस्टेनेबल रियल एस्टेट जैसे विविध क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभा रही है।

    बी-आह की पहचान एडवांस्ड वेस्ट मैनेजमेंट और सर्कुलर इकोनॉमी सॉल्युशन्स के लिए है। उच्च वेस्ट-डायवर्जन दर के साथ संस्था शारजाह के महत्वाकांक्षी सस्टेनेबिलिटी लक्ष्यों को हासिल करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। इसका उद्देश्य कचरे को केवल निपटान की वस्तु न मानकर उसे संसाधन में बदलते हुए एक ऐसे मॉडल को विकसित करना है, जो पर्यावरण संरक्षण के साथ आर्थिक विकास को भी गति दे।

    बीईईएच का प्रतिष्ठित मुख्यालय इस सोच का जीवंत उदाहरण है। प्रसिद्ध वास्तुकार ज़ाहा हदीद द्वारा डिजाइन किया गया यह भवन दुनिया की अत्याधुनिक सस्टेनेबल और एआई-सक्षम इमारतों में शामिल है। भवन की डिजाइन, तकनीक और ऊर्जा दक्षता इसे भविष्य के स्मार्ट एवं पर्यावरण-अनुकूल शहरों के लिए एक प्रभावी मॉडल बनाती है।

    रणनीतिक साझेदारियों और नवाचार आधारित परियोजनाओं के माध्यम से बी-आह स्मार्ट और सस्टेनेबल शहरों के विकास को नई दिशा दे रहा है। पर्यावरणीय उत्कृष्टता, ग्रीन टेक्नोलॉजी और सर्कुलर इकोनॉमी के क्षेत्र में इसके प्रयासों ने शारजाह को क्षेत्रीय स्तर पर ग्रीन इनोवेशन के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई है।