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  • दिल्ली में अवैध निर्माण पर बड़ा प्रहार, रेखा गुप्ता ने दिए बुलडोजर चलाने के आदेश; जानें किन इलाकों में होगी कार्रवाई

    दिल्ली में अवैध निर्माण पर बड़ा प्रहार, रेखा गुप्ता ने दिए बुलडोजर चलाने के आदेश; जानें किन इलाकों में होगी कार्रवाई

    नई दिल्ली

    सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने अवैध निर्माणों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एमसीडी को अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाने का निर्देश दिया है। मंगलवार को 17 इमारतों को ध्वस्त किए जाने के बाद बुधवार को दिल्ली के कई इलाकों में बुलडोजर ऐक्शन लिया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा है कि नगर निगम के सभी वरिष्ठ अधिकारी ग्राउंड पर रहें। उन्होंने दिल्ली के सभी पीजी-हॉस्टल का सघन निरीक्षण करने को कहा है और अवैध निर्माण पर तेजी से कार्रवाई करने को कहा है। मुख्यमंत्री ने यह भी आदेश दिया है कि जो भी निर्माण अवैध पाया जाता है उसके लिए दोषी अधिकारियों की पहचान की जाए। बिल्डिंग रिकॉर्ड खंगाला जाए और यह पता लगाया जाए कि किस वर्ष और किसके अधिकार क्षेत्र में उसका निर्माण किया गया था।

    ताबड़तोड़ चल रही है कार्रवाई
    सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना के बाद दिल्ली नगर निगम ने खतरनाक और अवैध भवनों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। मंगलवार को निगम ने अलग-अलग इलाकों में 17 इमारतों को ध्वस्त किया और पांच संपत्तियों को सील कर दिया। इसके अलावा 9 लोगों को कारण बताओ नोटिस, दो को सीलिंग नोटिस और 15 को ध्वस्तीकरण आदेश जारी किया गया है।

    किन इलाकों में कार्रवाई
    मंगलवार को एमसीडी ने सैदुलाजाब, लक्ष्मी नगर, विश्वास नगर, मुखर्जी नगर, जामिया नगर, शाहीन बाग, तिलक नगर, करमपुरा, करोलबाग, रमेश नगर, मानसरोवर गार्डन, चांदनी चौक और नेहरू विहार समेत कई इलाकों में कार्रवाई की। इन इलाकों में बड़ी संख्या में अवैध इमारतों का निर्माण किया गया है। किसी मकान का नक्शा पास नहीं कराया गया है तो कई को तय मापदंड से अधिक ऊंचा बनाया गया है। कई इमारतों का ढांचा बेहद कमजोर पाया गया है।

    बड़े पैमाने पर जारी किए गए हैं नोटिस
    सोमवार को दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शीर्ष सरकारी और एमसीडी अधिकारियों के साथ बैठक की और अधिकारियों को पेइंग गेस्ट (पीजी) आवास वाले इलाकों में निरीक्षण अभियान चलाने के निर्देश दिए। खासतौर पर उन मकानों का निरीक्षण करने को कहा गया है, जिनमें प्रथम दृष्टया ऊंचाई और मंजिल संबंधी नियमों का उल्लंघन किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, एक से 8 सितंबर के बीच नगर निकाय ने 48 संपत्तियों के खिलाफ तोड़फोड़ की कार्रवाई की और 15 संपत्तियों को सील किया। इसी अवधि के दौरान, निगम ने अनधिकृत निर्माण के लिए 90 कारण बताओ नोटिस, सीलिंग के लिए 124 कारण बताओ नोटिस और 66 तोड़फोड़ आदेश जारी किए। रिपोर्ट में कहा गया है कि एक जून से 31 अगस्त के बीच एमसीडी ने 959 संपत्तियों के खिलाफ तोड़फोड़ की कार्रवाई की और 456 संपत्तियों को सील किया। इस अवधि के दौरान अनधिकृत निर्माण के लिए 1,461 कारण बताओ नोटिस, सीलिंग के लिए 590 कारण बताओ नोटिस और 687 तोड़फोड़ आदेश जारी किए गए।

  • संपत्ति मालिकों के लिए बड़ी सुविधा, 10-25 सितंबर तक लगेगा CHB का जन सुविधा शिविर

    संपत्ति मालिकों के लिए बड़ी सुविधा, 10-25 सितंबर तक लगेगा CHB का जन सुविधा शिविर

     चंडीगढ़
     लीजहोल्ड संपत्तियों को फ्रीहोल्ड में बदलवाने के इच्छुक चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) के आवंटियों और संपत्ति मालिकों के लिए राहत की खबर है। हाउसिंग बोर्ड की ओर से कन्वर्जन प्रक्रिया को आसान बनाने और लोगों को एक ही जगह पर जरूरी सुविधा उपलब्ध कराने के लिए जन सुविधा शिविर लगाया जा रहा है।

    शिविर में आवासीय इकाइयों के साथ व्यावसायिक संपत्तियों को फ्रीहोल्ड में बदलवाने के मामलों पर भी कार्रवाई की जाएगी। यह शिविर 10 सितंबर से 25 सितंबर तक सभी कार्य दिवसों में आयोजित किया जाएगा। अवकाश के दिनों में कैंप नहीं लगेगा।

    आवंटी और संपत्ति मालिक सुबह 11 बजे से शाम चार बजे तक सेक्टर-9 डी स्थित चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड कार्यालय की छठी मंजिल के बहुउद्देशीय हॉल में पहुंच सकते हैं। बोर्ड का प्रयास है कि शिविर के माध्यम से कन्वर्जन से जुड़े मामलों की प्रक्रिया को सरल और जल्द पूरा किया जा सके।

    यह शिविर 10 सितंबर से 25 सितंबर 2026 तक सभी कार्य दिवसों में लगेगा। छुट्टी वाले दिन कैंप नहीं लगाया जाएगा। आवंटी और संपत्ति मालिक सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक सेक्टर-9 स्थित चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड कार्यालय की छठी मंजिल के बहुउद्देशीय हॉल में पहुंच सकते हैं।

    ये दस्तावेज साथ लेकर आएं
    कैंप में आने वाले आवंटियों और संपत्ति मालिकों को अपने साथ आवंटन पत्र या ट्रांसफर डीड की कॉपी, नवीनतम भुगतान रसीद, पहचान और पते का प्रमाण सहित कन्वर्जन से जुड़े अन्य जरूरी दस्तावेज लाने होंगे। दस्तावेज पूरे होने पर आवेदन की जांच और आगे की प्रक्रिया जल्दी पूरी हो सकेगी।

    पहले ऑनलाइन चेक कर लें शुल्क और बकाया
    CHB ने लोगों को सलाह दी है कि कैंप में आने से पहले अपने मामले में लागू कन्वर्जन शुल्क और किसी भी बकाया राशि की जानकारी बोर्ड के ऑनलाइन पोर्टल पर जांच लें। इससे उन्हें पहले से पता रहेगा कि कितनी राशि जमा करनी है और कैंप में प्रक्रिया पूरी करने में कम समय लगेगा।

    एक ही जगह मिलेगी सुविधा
    जन सुविधा शिविर का मकसद लीजहोल्ड से फ्रीहोल्ड कन्वर्जन से जुड़े काम को आसान बनाना है। CHB ने पात्र आवंटियों और संपत्ति मालिकों से इस सुविधा का लाभ उठाने की अपील की है।

    दस्तावेज साथ लाना जरूरी
    सीएचबी ने आवंटियों और मालिकों से कहा है कि वे शिविर में आते समय अपने आवंटन पत्र या हस्तांतरण विलेख की प्रति, नवीनतम भुगतान रसीदें, पहचान और पते का प्रमाण तथा कन्वर्जन से संबंधित अन्य जरूरी दस्तावेज साथ लेकर आएं। दस्तावेज पूरे होने से आवेदन की जांच और आगे की प्रक्रिया में तेजी आएगी।

    पहले ऑनलाइन जांच लें शुल्क और बकाया
    बोर्ड ने आवेदकों को सलाह दी है कि कैंप में आने से पहले अपने मामले में लागू कन्वर्जन शुल्क और यदि कोई बकाया राशि है तो उसकी जानकारी सीएचबी के ऑनलाइन पोर्टल पर जांच लें। इससे आवेदकों को पहले से देय राशि की जानकारी मिल जाएगी और शिविर के दौरान आवेदन प्रक्रिया में अनावश्यक देरी से बचा जा सकेगा।

    सीएचबी ने सभी पात्र आवंटियों और संपत्ति मालिकों से इस सुविधा का लाभ उठाने की अपील की है। बोर्ड के अनुसार, शिविर लोगों को लीजहोल्ड संपत्तियों को फ्रीहोल्ड में बदलवाने की प्रक्रिया के संबंध में आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है।

  • साय कैबिनेट के अहम फैसले, निर्यात नीति 2026-30 मंजूर; NSTI खोलने 10 एकड़ भूमि आवंटित

    साय कैबिनेट के अहम फैसले, निर्यात नीति 2026-30 मंजूर; NSTI खोलने 10 एकड़ भूमि आवंटित

    रायपुर.

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित कैबिनेट की बैठक में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में लिए गए निर्णयों के संबंध में उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने जानकारी दी।

    मंत्रिपरिषद ने राज्य को देश के प्रमुख निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से ‘छत्तीसगढ़ निर्यात प्रोत्साहन नीति 2026-30’ को मंजूरी दी है। नई नीति के माध्यम से प्रदेश में मजबूत निर्यात इकोसिस्टम और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने, निर्यातकों को बेहतर बाजार पहुंच एवं व्यापार सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ ही कृषि एवं औद्योगिक क्षेत्रों में मूल्य संवर्धित उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा दिया जाएगा। इस नीति के तहत ई-कॉमर्स, व्यापार मेलों एवं प्रदर्शनियों के माध्यम से प्रदेश के उद्यमियों और निर्यातकों की अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक सीधी पहुंच बढ़ाई जाएगी। इस नीति का लक्ष्य छत्तीसगढ़ के निर्यात में गुणात्मक एवं मात्रात्मक वृद्धि के साथ प्रदेश को ‘राष्ट्रीय एवं वैश्विक बाजारों से और मजबूती से जोड़ना है।

    मंत्रिपरिषद ने नवा रायपुर अटल नगर में नेशनल स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (NSTI) की स्थापना के लिए एक और महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए भारत सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमशीलता निदेशालय को ग्राम तेंदुवा में 10 एकड़ भूमि निःशुल्क आवंटित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। लगभग 200 करोड़ रुपए की लागत से विकसित होने वाले इस संस्थान में आधुनिक शैक्षणिक, प्रशासनिक एवं छात्रावास सुविधाएं विकसित की जाएंगी। यहां दीर्घकालिक पाठ्यक्रमों में प्रतिवर्ष 1,000 तथा अल्पकालीन कार्यक्रमों में 3,000 प्रशिक्षुओं को आज के उद्योगों की जरूरत के अनुरूप आधुनिक तकनीकी एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जा सकेगा।

    NSTI की स्थापना से प्रदेश के युवाओं के लिए उन्नत कौशल प्रशिक्षण, इंटर्नशिप और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा नवा रायपुर को देश में कौशल एवं तकनीकी शिक्षा के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी। मंत्रिपरिषद ने राज्य शासन के अधीन कार्यरत स्थायी/अस्थायी शासकीय सेवकों, निगम-मंडल एवं स्वशासी संस्थाओं के कर्मचारियों, संविदाकर्मियों तथा नगर सैनिकों को अन्य शासकीय सेवाओं एवं उच्च पदों के लिए आवेदन करने में बड़ी राहत देते हुए निर्धारित अधिकतम आयु सीमा 38 वर्ष से बढ़ाकर 45 वर्ष करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।

    इस निर्णय से शासकीय एवं संबद्ध संस्थाओं में कार्यरत कर्मचारियों को उच्च पदों एवं अन्य सेवाओं में आगे बढ़ने के अधिक और समान अवसर प्राप्त होंगे। इस संबंध में राज्य शासन द्वारा एकीकृत स्थायी दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। मंत्रिपरिषद ने दुर्ग जिला न्यायालय के नवीन भवन निर्माण के लिए ग्राम तितुरडीह में बीआईटी कॉलेज के समीप 4 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके लिए भिलाई इस्पात संयंत्र के नाम दर्ज उक्त भूमि के बदले ग्राम पाहंदा, तहसील पाटन में 5.024 हेक्टेयर शासकीय भूमि भिलाई इस्पात संयंत्र को दी जाएगी। दोनों भूखंडों का वर्तमान मूल्य लगभग समान है। इस निर्णय से दुर्ग में जिला न्यायालय के लिए आधुनिक एवं सुव्यवस्थित नवीन न्यायालय परिसर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा और न्यायिक अधोसंरचना को और सुदृढ़ किया जा सकेगा।

  • सपा की कथनी और करनी में कितना फर्क? तुष्टिकरण की राजनीति को लेकर गरमाई सियासत

    सपा की कथनी और करनी में कितना फर्क? तुष्टिकरण की राजनीति को लेकर गरमाई सियासत

    सपा का तुष्टिकरण और कथनी-करनी का सच

    लखनऊ 

    चुनाव नजदीक देख समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव लगभग रोज ही जनता से नए-नए वादे करने में जुट गए हैं और इसी क्रम में उन्होंने यह भी कहा है कि जब वह सत्ता में आएंगे तो बौद्ध तीर्थस्थलों का विकास करेंगे। लेकिन उनके इस वादे को लेकर उत्तर प्रदेश की जनता और विशेषकर दलित-शोषित समाज को यह विचार अवश्य करना चाहिए कि सपा का अतीत क्या रहा है और बौद्ध तीर्थस्थलों के प्रति उनका रवैया पूर्व में क्या रहा है? सच्चाई यह है कि बौद्ध धर्मस्थलों व स्मारकों का विकास या संरक्षण कभी समाजवादी पार्टी के एजेंडे में नहीं रहा। उलटे उनके शासनकाल में बौद्ध अनुयायी किस तरह अपमानित किए गए, इसे एक घटना से समझा जा सकता है। 
    अखिलेश यादव मार्च 2012 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। 17 अगस्त 2012 को लखनऊ के टीले वाली मस्जिद में अलविदा की नमाज़ पढ़ी जाती है। नमाज़ के बाद सुनियोजित ढंग से मुसलमानों की भीड़ मस्जिद से रोहिंग्या मुसलमानों के समर्थन में नारेबाजी करते हुए बुद्धा पार्क की तरफ़ बढ़ती है। मौके पर मौजूद पुलिस बल उन्हें नहीं रोकता, क्योंकि वह सपा की मुस्लिम तुष्टिकरण नीति से भलीभांति परिचित था। पूरी तरह अराजकता पर उतारू भीड़ ने बुद्धा पार्क पर हमला कर दिया और भगवान बुद्ध की प्रतिमा पर चढ़ कर उसे तोड़ डाला। अन्य बौद्ध-प्रतीकों और दुकानों को भी तहस-नहस कर दिया।
     
    उग्र भीड़ यहीं नहीं रुकती,  उसने भंते श्रीअशोकानंद जी एवं उनके शिष्यों पर प्राणघातक हमला बोल दिया और उन्हें बुरी तरह मारा-पीटा, उनके कपड़े फाड़ दिए, क्योंकि उन्हें बौद्ध भिक्षुओं के भगवा वस्त्रों से भी नफ़रत थी। उनकी तीन गाड़ियां तोड़ दी गईं। प्रश्न उठता है कि ऐसा क्यों किया गया?  क्योंकि, अलविदा की नमाज़ के बाद मुसलमानों के बीच म्यांमार (बर्मा) के बौद्धों के विरुद्ध ज़हर उगला गया था। उस समय म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों और म्यांमार के बौद्ध नागरिकों के बीच झगड़े चल रहे थे। रोहिंग्या मुसलमानों ने बौद्धों पर हमले किए, उनके मकान जलाए और कई नरसंहार किए। वे म्यांमार के ‘अराकान’ क्षेत्र को बौद्धों से मुक्त करके ‘मुस्लिम’ देश बनाना चाहते थे। इस पर बौद्धों ने अपना बचाव किया और अंततः वहां हुए सांप्रदायिक दंगों में रोहिंग्या मुसलमानों को भागना पड़ा।
     
    इसके बाद रोहिंग्या मुसलमान भारी संख्या में बांग्लादेश होते हुए भारत में भी घुस आये और यहां भी उत्पात मचाने लगे, आतंकी घटनाएं भी कीं। यह बड़ा सवाल है कि भागे हुए रोहिंग्या ने आख़िर दुनिया के 56 मुस्लिम देशों में क्यों नहीं शरण ली, भारत ही क्यों? अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र के तहत, दुनिया भर के मुस्लिम आतंकी और उनका समाज भारत को ‘दारूल इस्लाम’ यानी ‘गजवा-ए-हिन्द’ बनाना चाहता है। झगड़ा म्यांमार में और बुद्ध प्रतिमा तोड़ी जाती है लखनऊ में,  बौद्ध संत और उनके शिष्यों पर हमला लखनऊ में। थाना हज़रतगंज में भंते अशोकानंद जी ने मुकदमा कायम कराया, किंतु तुष्टिकरण की राजनीति करने वाली अखिलेश सरकार ने दंगाइयों व आरोपियों के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की… क्योंकि दंगाई मुसलमान थे।

    यह घटना सत्ता के संरक्षण में अराजकता का बड़ा उदाहरण है। दंगाई हज़रतगंज में तोड़फोड़ करते हुए विधानसभा मार्ग तक आ गए, लेकिन पुलिस ने आंसू-गैस और लाठीचार्ज तक नहीं किया। यह पहली बार हुआ कि दंगाइयों की भीड़ चौक से तोड़फोड़ करती हुई संवेदनशील हज़रतगंज होते हुए विधानसभा के सामने पहुंच गई। पुलिस अधिकारी भीड़ के आगे-आगे हज़रतगंज की दुकानें बंद करवाते हुए आगे बढ़ रहे थे। दंगाइयों पर ‘राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम’ (एनएसए) का मामला बनता था, किंतु अखिलेश जी ने आईपीसी की धाराओं में भी कोई कार्रवाई नहीं कराई।

    मैं अखिलेश यादव जी को बताना चाहता हूं कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार सभी धर्मों का सम्मान करती है। इसीलिए “विरासत से विकास” की योजना बनाई गई, अयोध्या में भव्य राममंदिर, काशी-विश्वनाथ कॉरिडोर, मां विंधवासिनी कॉरिडोर, कुशीनगर में इंटरनेशनल एयरपोर्ट और प्रदेश में ‘बुद्धिस्ट सर्किट’ योजना के तहत बौद्धस्थलों का विकास हो रहा है। मेरे गृह जनपद सिद्धार्थनगर में भगवान बुद्ध की जन्मस्थली ‘कपिलवस्तु’ से 1898 में अंग्रेज़ ज़मींदार विलियम स्तूप से भगवान बुद्ध की रेलिक्स (अवशेष) निकाल कर लंदन ले गया था। उन अवशेषों की 7 मई 2025 को हांगकांग में नीलामी होनी थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के कुशल नेतृत्व में न केवल नीलामी रोकी गई अपितु उन पवित्र अवशेषों को भारत लाकर दिल्ली के राय पिथौरा फोर्ट में एक नवनिर्मित स्मारक में स्थापित कराया गया। मैंने भी प्रधानमंत्री जी को नीलामी रोकने के लिए 5 मई 2025 को पत्र लिखा था। अखिलेश जी को वहां जाना चाहिए, लेकिन वह नहीं जाएंगे, वह अयोध्या भी नहीं जाएंगे, क्योंकि वोट-बैंक का सवाल है।

    अखिलेश राज में बौद्धों का अपमान हुआ और भाजपा राज में उनका सम्मान। बाबा साहेब ने नागपुर में बौद्ध धर्म की दीक्षा ग्रहण की थी। प्रधानमंत्री जी ने नागपुर दीक्षास्थल सहित बाबा साहेब के सम्मान में ‘पंच तीर्थ’ बनवाए। अखिलेश राज में उत्तर प्रदेश में बाबा साहेब को अपमानित किया गया। उनके नाम पर बने कन्नौज मेडिकल कॉलेज से उनका नाम हटा दिया गया। बाबा साहेब आंबेडकर ग्रीन गार्डेन का नाम बदल कर ‘जनेश्वर मिश्रा पार्क’ कर दिया गया। 5 सितंबर 2016 को गाजियाबाद हज हाउस के लोकार्पण पर अखिलेश यादव के प्रिय मंत्री आज़म ख़ान ने बाबा साहेब को भू-माफिया कहा था, अखिलेश जी ने उन्हें रोका तक नहीं और तालियां बजाते रहे। यह बाबा साहेब से उनकी नफ़रत का खुला उदाहरण था। 

    मुझे यह कहने में संकोच नहीं कि अखिलेश यादव जी का एजेंडा ‘मुस्लिम तुष्टिकरण’ है। वह स्वयं भी बौद्ध विरोधी, दलित विरोधी, दलित महापुरुष विरोधी व संत विरोधी हैं। 2013 में एक लाख से अधिक दलित अधिकारियों/ कर्मियों को पदावनत करने वाले, लोकसभा में समाजवादी पार्टी के दलित सांसद यशवीर (नगीना बिजनौर) से दलितों के प्रमोशन में आरक्षण का बिल फड़वाने वाले अखिलेश जी के मुंह से बौद्ध तीर्थस्थलों के विकास की बात शोभा नहीं देती। सपा को दलित कभी माफ नहीं करेंगे। जब तक अतीत के इन ऐतिहासिक अपराधों और तुष्टिकरण की नीति का उत्तर नहीं दिया जाता, तब तक बौद्ध स्थलों के संरक्षण के दावे केवल एक राजनीतिक भ्रमजाल से अधिक कुछ नहीं हैं। वंदे मातरम् नमो बुद्धाय !

    –    बृजलाल, पूर्व पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश एवं सदस्य, राज्यसभा

  • दुबई में MP के लिए निवेश जुटाने की कवायद तेज, CM मोहन यादव ने GIS-2027 के लिए दिया आमंत्रण

    दुबई में MP के लिए निवेश जुटाने की कवायद तेज, CM मोहन यादव ने GIS-2027 के लिए दिया आमंत्रण

     भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में ऊर्जा, अधोसंरचना, लॉजिस्टिक्स और नगरीय विकास के क्षेत्र में निवेश की अपार संभावनाएं हैं। मध्यप्रदेश, देश के मध्य में स्थित है और यहां का सड़क सम्पर्क, रेल तथा एयर कनेक्टिविटी देश के सभी स्थानों से सुगम है। देश के किसी भी कोने में मध्यप्रदेश से अपने उत्पाद पहुंचाना सरल और त्वरित है। प्रदेश में उपलब्ध बेहतर औद्योगिक अधोसंरचना, पर्याप्त ऊर्जा तथा स्किल्ड मैनपॉवर के कारण मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास की दृष्टि से हर तरह की संभावनाओं से परिपूर्ण प्रदेश है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दुबई में आयोजित 'एआईएम कांग्रेस-2026' (एन्युअल इन्वेस्टमेंट मीटिंग) के तीसरे दिन 8 सितंबर को यूएई के प्रमुख निवेशकों और उद्यमियों के साथ वन-टू-वन मीटिंग की। इसके अंतर्गत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यूएई के बिजनेस-फिलैंथ्रॉपी के लिए स्पेशल एनवॉय और क्रेसेंट एंटरप्राइजेज के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर बद्र जाफर, डीपी वर्ल्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रिजवान सूमार, राणा होल्डिंग्स लिमिटेड के चेयरमैन-मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. दर्शन सिंह राणा, जेम्स एजुकेशन कंपनी के चेयरमैन-फाउंडर श्री सनी वर्की, ब्यूमर्क कॉर्पोरेशन लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन और सीईओ सिद्धार्थ बालाचंद्रन, शराफ ग्रुप के प्रेसिडेंट-सीईओ श्याम कपूर, वीएफएस ग्लोबल के वैश्विक प्रमुख अमित साइचर तथा सुपरमार्केट, वितरण और विनिर्माण क्षेत्र के प्रमुख बहुराष्ट्रीय समूह 'चोइथराम' के अध्यक्ष एल.टी. पगरानी से विस्तृत चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्योग समूहों के प्रतिनिधियों को अगले वर्ष होने वाली ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट (जीआईएस)-2027 का निमंत्रण भी दिया।

    तकनीक आधारित उद्यमशीलता और स्टार्टअप को राज्य सरकार कर रही है प्रोत्साहित
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चर्चा के दौरान क्रेसेंट एंटरप्राइजेज के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर बद्र जाफर को प्रदेश के प्रमुख उत्पादन क्लस्टर्स के लिए वेयर हाऊसिंग, लॉजिस्टिक्स आदि के क्षेत्र में उपलब्ध संभावनाओं से अवगत कराया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि तकनीक आधारित उद्यमशीलता और स्टार्टअप के क्षेत्र में निवेश को राज्य सरकार निरंतर प्रोत्साहित कर रही है। जाफर ने शहरी अधोसंरचना विकास, सूचना प्रौद्योगिकी, संसाधनों के प्रभावी उपयोग, तकनीक हस्तांतरण के क्षेत्र में दीर्घ अवधि निवेश के संबंध में रूचि प्रकट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव तथा जाफर के बीच मध्यप्रदेश में एनर्जी और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में नवाचार को लेकर विशेष रूप से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को जाफर ने बताया कि क्रेसेंट ग्रुप ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, अधोसंरचना और दीर्घकालिक निवेश में रुचि रखने वाला बहुआयामी व्यापारिक समूह है। पेट्रोलियम और उद्यमिता क्रेसेंट के प्रमुख कार्यक्षेत्र हैं। कंपनी का मुख्यालय शारजाह में है।

    पोवारखेड़ा अंतरदेशीय लॉजिस्टिक्स के प्रमुख प्रवेश द्वार के रूप में होगा विकसित
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डीपी वर्ल्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रिजवान सूमार के साथ चर्चा में लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन सहित कई विषयों पर बातचीत की। उल्लेखनीय है कि डीपी वर्ल्ड की इकाईयां मध्यप्रदेश में पहले से ही संचालित है तथा वह प्रदेश में गतिविधियों के विस्तार का इच्छुक है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सूमार ने बताया कि डीपी वर्ल्ड कंपनी एंड-टू-एंड सप्लाई चेन और व्यापार समाधानों की एकीकृत वैश्विक प्रदाता है। यह दुबई सरकार की 100% स्वामित्व वाली कंपनी है। कंपनी भारत सहित 80 देशों में काम कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पोवारखेड़ा लॉजिस्टिक्स कंपोजिट हब को अंतरदेशीय लॉजिस्टिक्स के प्रमुख प्रवेश द्वार के रूप में विकसित करने की संभावना है। प्रमुख औद्योगिक और कृषि क्लस्टरों को सेवा देने वाली मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और कोल्ड-चेन सुविधाओं से व्यापार-व्यवसाय गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा। कुशल रेल-आधारित माल ढुलाई के माध्यम से लॉजिस्टिक्स लागत और ट्रांसपोर्ट का समय कम करते हुए किसानों, एफपीओ, एमएसएमई और उद्योगों के लिए कार्गो समेकन, मूल्य संवर्धन और निर्यात सहायता प्रदान करने से प्रदेश के उत्पादों को वैश्विक बाजारों से जोड़ा जा सकेगा, इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

    स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग, डेटा सेंटर्स, ग्रीन एनर्जी, ई-मोबिलिटी के क्षेत्र में निवेश पर हुई चर्चा
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राणा होल्डिंग्स लिमिटेड के चेयरमैन-मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. दर्शन सिंह राणा से मुलाकात की। दोनों के बीच मध्यप्रदेश में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा हुई। बैठक में स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग, डेटा सेंटर्स, ग्रीन एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन, ई-मोबिलिटी और एग्रीकल्चरल मशीनरी पर फोकस किया गया।

    प्रदेश के प्रमुख शहरों में अंतर्राष्ट्रीय स्तर के K-12 स्कूल कैंपस होंगे स्थापित
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जेम्स एजुकेशन कंपनी के चेयरमैन-फाउंडर सनी वर्की से मुलाकात के दौरान उन्हें प्रदेश के शिक्षा क्षेत्र के नवाचारों और प्रदेश में निवेश की संभावनाओं से अवगत कराया। उल्लेखनीय है कि जेम्स एजुकेशन कंपनी स्कूल शिक्षा, एजुकेशनल मैनेजमेंट और एज्युकेशन टेक्नोलॉजी सेक्टर में काम करती है। जेम्स एजुकेशन कंपनी ने मध्यप्रदेश के प्रमुख शहरों और विकासशील शहरों में अंतर्राष्ट्रीय स्तर के K-12 स्कूल कैंपस स्थापित करने में रूचि प्रदर्शित की। इन स्कूलों में विद्यार्थियों में कौशल विकसित करने के लिए ट्रेनिंग भी दी जाएगी। कंपनी स्थानीय जरूरतों और भविष्य की लर्निंग आवश्यकताओं के अनुसार नेशनल और इंटरनेशनल करिकुलम को लागू करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को सनी वर्की ने बताया कि उनकी कंपनी की स्थापना वर्ष 2000 में हुई थी। कंपनी मिडिल ईस्ट, एशिया, यूरोप और नॉर्थ अमेरिका में काम कर रही है। कंपनी का फोकस गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शिक्षक सशक्तिकरण और शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार पर है। इसका मुख्यालय दुबई में है।

    ब्यूमर्क कॉर्पोरेशन प्रदेश में निवेश का इच्छुक
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ब्यूमर्क कॉर्पोरेशन लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन और सीईओ सिद्धार्थ बालाचंद्रन से वन-टू-वन मीटिंग की। बालाचंद्रन ने इंफ्रास्ट्रक्चर, हेल्थ केयर, टेक्नोलॉजी, ग्रीन एनर्जी सहित कई सेक्टर में निवेश की इच्छा प्रकट की।

    शराफ ग्रुप मध्यप्रदेश में संचालन एवं प्रतिष्ठान स्थापित करने के लिए इच्छुक
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शराफ ग्रुप के प्रेसिडेंट-सीईओ श्याम कपूर से मुलाकात की। दोनों के बीच शिपिंग-लॉजिस्टिक्स, सप्लाई चेन सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक में मध्यप्रदेश में रेल-साइडिंग युक्त लॉजिस्टिक्स पार्क स्थापित करने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई। इसके लिए लगभग 30 से 50 मिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश का प्रस्ताव है। इस परियोजना से लगभग 300 से 600 लोगों के लिए रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है। कंपनी इंदौर और पीथमपुर क्षेत्र में निवेश के लिए इच्छुक है। बैठक में मल्टीमोडल लॉजिस्टिक्स पार्क, आधुनिक वेयरहाउसिंग और रीजनल डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर्स का विकास किए जाने पर चर्चा हुई। कंपनी के प्रेसिडेंट कपूर ने बैठक में बताया कि कंपनी भारत में अपनी भारतीय सहायक कंपनी हिंद टर्मिनल्स प्राइवेट लिमिटेड (HTPL) के माध्यम से मौजूद है जो इनलैंड कंटेनर डिपो के संचालन के साथ-साथ ताजे कृषि उत्पादों के संरक्षण के लिए कोल्ड-चेन समाधान भी उपलब्ध कराती है। कंपनी भारत में 35 माल वाहक ट्रेनों और लगभग 900 ट्रकों का संचालन कर रही है। कंपनी मध्यप्रदेश में अपना संचालन एवं प्रतिष्ठान स्थापित करने के लिए विशेष रूप से इच्छुक है।

    भोपाल और इंदौर में वीज़ा सेवाओं का होगा विस्तार
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव के साथ वीएफएस ग्लोबल के वैश्विक प्रमुख अमित साइचर की सौहार्दपूर्ण एवं परिणामोन्मुखी बैठक संपन्न हुई। बैठक में राज्य में निवेश, रोजगार, वीज़ा सेवाओं की सुलभता, पर्यटन तथा युवाओं के कौशल विकास को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वीएफएस ग्लोबल को भोपाल और इंदौर में वीज़ा आवेदन सेवाओं का दायरा बढ़ाने तथा क्षेत्रीय पहुंच को और अधिक सशक्त बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के युवाओं की रोजगार-योग्यता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया। चर्चा के दौरान स्थानीय युवाओं के लिए उद्योग-उन्मुख यात्रा, पर्यटन और आतिथ्य (हॉस्पिटैलिटी) प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने पर विचार किया गया।

    चोइथराम समूह सुपरमार्केट और आधुनिक किराना रिटेल केन्द्रों की स्थापना का इच्छुक
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सुपरमार्केट, वितरण और विनिर्माण क्षेत्र के प्रमुख बहुराष्ट्रीय समूह 'चोइथराम' के अध्यक्ष एल. टी. पगरानी से प्रदेश की निवेश नीतियों और व्यापारिक संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की। दुबई मुख्यालय वाला चोइथराम समूह वर्ष 1943 से कार्यरत प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय समूह है। यूरोप, उत्तरी अमेरिका और अफ्रीका में मजबूत उपस्थिति रखने वाला यह समूह रिटेल, खाद्य सेवाओं, लॉजिस्टिक्स और ब्रांड वितरण में विशेषज्ञता रखता है। बैठक के दौरान राज्य में आधुनिक व्यापारिक अधोसंरचना के विकास पर सहमति बनी। समूह प्रदेश के प्रमुख शहरों में सुपरमार्केट और आधुनिक किराना-रिटेल प्रारूपों की स्थापना का इच्छुक है। औद्योगिक साझेदारी के तहत समूह मध्यप्रदेश के स्थानीय उत्पादकों और किसानों से सीधे कृषि व प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों की खरीद करेगा। स्थानीय कच्चे माल का उपयोग कर राज्य में खाद्य प्रसंस्करण, पैकेजिंग और निजी लेबल विनिर्माण को गति दी जाएगी।

  • इंदौर में स्टाइपेंड को लेकर गरमाया विवाद, जूनियर डॉक्टरों ने संभाला मोर्चा; MY अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर असर

    इंदौर में स्टाइपेंड को लेकर गरमाया विवाद, जूनियर डॉक्टरों ने संभाला मोर्चा; MY अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर असर

    इंदौर

    इंदौर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एमवायएच में चिकित्सा व्यवस्था उस समय प्रभावित हुई जब जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल का ऐलान कर दिया। यहां के डॉक्टर भोपाल में हुए लाठीचार्ज और 'वन नेशन-वन स्टाइपेंड' की लंबे समय से लंबित मांग को लेकर विरोध दर्ज करा रहे हैं। मध्य प्रदेश के इंटर्न डॉक्टर्स 3 दिन से सड़कों पर हैं। भोपाल में सबसे बड़ा प्रदर्शन कमला पार्क के पास चल रहा है, जहां डॉक्टर सड़क पर बैठकर आंदोलन कर रहे हैं। प्रदेशभर के सरकारी अस्पतालों में इसका असर दिख रहा है और कई जगह ओपीडी सेवाएं पूरी तरह से ठप हैं।

    हाथों में तख्तियां लेकर नारेबाजी की
    अस्पताल परिसर में एकत्र हुए रेजिडेंट डॉक्टरों ने हाथों में तख्तियां लेकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारी चिकित्सकों का कहना है कि एमबीबीएस के बाद इंटर्नशिप कर रहे डॉक्टर और पोस्ट ग्रेजुएशन के छात्र अस्पतालों में दिन-रात सेवाएं देते हैं। इसके बावजूद देश के अलग-अलग राज्यों में उनके मानदेय में भारी असमानता है। डॉक्टरों की मांग है कि पूरे देश में एक समान मानदेय व्यवस्था लागू की जाए और भोपाल में चिकित्सकों पर बल प्रयोग करने वाले दोषियों पर तत्काल कार्रवाई हो। इंटर्न डॉक्टर राजेश सोनी ने कहा कि जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होगी, हमारा प्रदर्शन जारी रहेगा। डॉ. रागिनी खन्ना ने बताया कि धूप और गर्मी में भी हम लगातार आंदोलन करेंगे। सीनियर डॉक्टर, हमारे सभी साथी और परिचित इस आंदोलन में हमारे साथ हैं। 

    स्टाइपेंड पर पूरे देश में एक जैसी व्यवस्था की मांग
    जूडा इंदौर के अध्यक्ष डॉक्टर विक्रम नेतू ने कहा कि भोपाल में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे जूनियर डॉक्टरों पर लाठीचार्ज किया गया। हम दोषियों पर कार्रवाई की मांग करते हैं। इस तरह का सलूक कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। हमारी प्रमुख मांग है कि पूरे देश में समान स्टाइपेंड व्यवस्था लागू होना चाहिए।  

    अस्पताल प्रबंधन बोला मरीज परेशान नहीं होंगे
    अस्पताल प्रबंधक डॉक्टर अशोक यादव का कहना है कि मरीजों की देखभाल प्रभावित नहीं होने दी जाएगी। प्रबंधन के अनुसार ओपीडी और आपातकालीन सेवाएं सुचारु रूप से चालू हैं। वरिष्ठ चिकित्सकों और कंसल्टेंट्स को मोर्चे पर तैनात किया गया है। वहीं कई रेजिडेंट डॉक्टरों ने काली पट्टी बांधकर काम करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया है ताकि मरीजों की जान जोखिम में न पड़े। 

  • अकेले रहने वाले बुजुर्गों के लिए यूपी सरकार की नई पहल, रेंटल हाउसिंग नीति जल्द; बनी समिति

    अकेले रहने वाले बुजुर्गों के लिए यूपी सरकार की नई पहल, रेंटल हाउसिंग नीति जल्द; बनी समिति

    लखनऊ

    उत्तर प्रदेश सरकार बुजुर्गों के लिए एक नई और विशेष रेंटल हाउसिंग नीति लाने की तैयारी कर रही है. इस नीति का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में रहने वाले वरिष्ठ नागरिकों को सुरक्षित, सम्मानजनक और किफायती आवास उपलब्ध कराना है. आवास एवं शहरी नियोजन विभाग ने इसके लिए नौ सदस्यीय समिति का गठन किया है, जो नीति का प्रारूप तैयार कर सरकार को अपनी सिफारिशें देगी. प्रस्तावित योजना के तहत जरूरतमंद बुजुर्गों को कम किराये पर मकान उपलब्ध कराने की व्यवस्था होगी. सरकार का मानना है कि वृद्धावस्था में किसी भी वरिष्ठ नागरिक को आवास के लिए भटकना न पड़े और उसे सुरक्षित रहने का विकल्प मिल सके। 

    नीति तैयार करने के लिए बनी 9 सदस्यीय समिति
    आवास एवं शहरी नियोजन विभाग ने नई रेंटल हाउसिंग नीति के लिए नौ सदस्यीय समिति का गठन किया है. समिति की अध्यक्षता आवास विभाग के सचिव करेंगे. समिति में लखनऊ, कानपुर, गाजियाबाद, वाराणसी और मेरठ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्षों को सदस्य बनाया गया है. वहीं, आवास बंधु के निदेशक को सदस्य-संयोजक की जिम्मेदारी सौंपी गई है. यह समिति वरिष्ठ नागरिकों की आवश्यकताओं का अध्ययन कर नीति का मसौदा तैयार करेगी और सरकार को अपनी संस्तुतियां सौंपेगी। 

    सभी शहरों में विकसित होगा आवास मॉडल
    सरकार की योजना प्रदेश के विभिन्न शहरों में बुजुर्गों के लिए विशेष आवासीय परियोजनाएं विकसित करने की है. इन मकानों को जरूरतमंद वरिष्ठ नागरिकों को किफायती किराये पर उपलब्ध कराया जाएगा. नीति में सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं तक आसान पहुंच, सार्वजनिक परिवहन की उपलब्धता और वरिष्ठ नागरिकों के अनुकूल बुनियादी सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिए जाने की संभावना है। 

    बुजुर्गों के लिए पहले से चल रही हैं कई योजनाएं

    उत्तर प्रदेश सरकार पहले से ही वरिष्ठ नागरिकों के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं संचालित कर रही है. वृद्धावस्था पेंशन योजना के तहत पात्र बुजुर्गों को प्रति माह 1,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है. इसके अलावा लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा योजना के तहत 60 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को रोडवेज बसों में निशुल्क यात्रा की सुविधा दी जा रही है। 

    संपत्ति संरक्षण के अधिकार
    राज्य मंत्रिमंडल ने हाल ही में 'उत्तर प्रदेश माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण नियमावली-2014' में संशोधन को मंजूरी दी है. नए प्रावधानों के तहत यदि संतान या आश्रित रिश्तेदार वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण नहीं करते या उनके साथ दुर्व्यवहार करते हैं तो बुजुर्ग उन्हें अपनी संपत्ति से बेदखल कर सकेंगे. साथ ही शिकायतों के निस्तारण के लिए 30 दिन की समयसीमा भी तय की गई है। 

  • MP में वेस्ट-टू-एनर्जी को मिलेगा बढ़ावा, शारजाह के BEEAH से टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप पर चर्चा

    MP में वेस्ट-टू-एनर्जी को मिलेगा बढ़ावा, शारजाह के BEEAH से टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप पर चर्चा

    भोपाल
     मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संयुक्त अरब अमीरात में आयोजित तीन दिवसीय प्रतिष्ठित 'एआईएम कांग्रेस-2026' के तीसरे दिन 8 सितंबर को शारजाह स्थित बी-आह (Bee’aH) मुख्यालय का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने बी-आह फैसेलिटी के ग्रुप सीईओ एवं वाइस-चेयरमैन खालिद अल हुरैमल के साथ एक उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक की। बैठक में पर्यावरण संरक्षण, स्मार्ट सिटी विकास, सर्कुलर इकोनॉमी और अत्याधुनिक वेस्ट मैनेजमेंट समाधानों को मध्यप्रदेश में लागू करने को लेकर गहन विचार-विमर्श हुआ।

    इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ यादव ने सभी प्रकार के इंडस्ट्रियल वेस्ट, सीवेज वेस्ट, वेस्ट रिप्रोसेसिंग और इनर्ट मटेरियल के डिस्पोजल संबंधी ट्रीटमेंट सेंटर का निरीक्षण किया। इस दौरान विशेषज्ञों ने उन्हें बताया कि यहां विश्व की सर्वाधिक उन्नत तकनीकी का उपयोग किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चर्चा के दौरान बी-आह ग्रुप को मध्यप्रदेश के नगर निगमों में म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट तथा वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजनाओं में निवेश और टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश स्वच्छ ऊर्जा और सस्टेनेबल अर्बन डेवलपमेंट के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। बीईईएएच की डिजिटल, एआई-सक्षम और सर्कुलर इकोनॉमी क्षमताएं मध्यप्रदेश के स्मार्ट सिटी विजन और क्लीन एनर्जी मिशन के बिल्कुल अनुकूल हैं। राज्य में ईवी-आधारित फ्लीट और रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स के विस्तार में यह साझेदारी अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकती है।

    इंदौर के स्वच्छता मॉडल के साथ वैश्विक तालमेल
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारत के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए बताया कि इंदौर ने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट और बायो-सीएनजी के क्षेत्र में देश और दुनिया के समक्ष एक अनुकरणीय मॉडल स्थापित किया है। उन्होंने बी आह को इंदौर के स्थापित मॉडल के साथ जुड़कर नए आधुनिक समाधानों पर मिलकर काम करने का प्रस्ताव दिया, जिससे कचरा प्रबंधन के साथ-साथ जीरो-वेस्ट लैंडफिल के लक्ष्य को हासिल किया जा सके।

    जीआईएस-2027 के लिए दिया आमंत्रण
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बी आह के ग्रुप के सीईओ खालिद अल हुरैमल को अगले साल भोपाल में आयोजित होने वाली 'ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027' में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण दिया। मुख्यमंत्री ने आग्रह किया कि बी आह ग्रुप अपनी आगामी वैश्विक विस्तार योजनाओं में मध्यप्रदेश को एक प्रमुख और प्राथमिकता वाले गंतव्य (डेस्टिनेशन) के रूप में शामिल करे।

    अत्याधुनिक मुख्यालय का किया अवलोकन
    बैठक के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रसिद्ध आर्किटेक्ट ज़ाहा हदीद द्वारा डिज़ाईन किए गए बी-आह के प्रतिष्ठित एआई-सक्षम व नेट-ज़ीरो-रेडी मुख्यालय तथा उनकी विभिन्न उन्नत सुविधाओं की सराहना की। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2007 में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के रूप में स्थापित बी आह आज 46 राष्ट्रीयताओं के 13 हजार से अधिक कर्मचारियों और यूएई, सऊदी अरब व मिस्र में विस्तृत परिचालनों के साथ पर्यावरण, रिन्यूएबल एनर्जी, ग्रीन मोबिलिटी और टेक्नोलॉजी का अग्रणी अंतर्राष्ट्रीय समूह बन चुका है। शारजाह में 90 प्रतिशत से अधिक लैंडफिल-डायवर्जन दर और कमर्शियल स्केल वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट के संचालन में समूह ने वैश्विक मानक स्थापित किए हैं।

    एडवांस्ड सस्टेनेबल और एआई-सक्षम है बी आह फैसिलिटी का मुख्यालय
    बी आह सस्टेनेबिलिटी, इनोवेशन और एआई का वैश्विक मॉडल संयुक्त अरब अमीरात के शारजाह में मुख्यालय वाला बी-आह (BEEAH) वैश्विक स्तर पर सस्टेनेबिलिटी और इनोवेशन के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है। पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के रूप में स्थापित यह संस्था एक वेस्ट मैनेजमेंट कंपनी से विकसित होकर आज एनवायरमेंटल सर्विसेज, रिन्यूएबल एनर्जी, टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर और सस्टेनेबल रियल एस्टेट जैसे विविध क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभा रही है। बी-आह की पहचान एडवांस्ड वेस्ट मैनेजमेंट और सर्कुलर इकोनॉमी सॉल्युशन्स के लिए है। उच्च वेस्ट-डायवर्जन दर के साथ संस्था शारजाह के महत्वाकांक्षी सस्टेनेबिलिटी लक्ष्यों को हासिल करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

    इसका उद्देश्य कचरे को केवल निपटान की वस्तु न मानकर उसे संसाधन में बदलते हुए एक ऐसे मॉडल को विकसित करना है, जो पर्यावरण संरक्षण के साथ आर्थिक विकास को भी गति दे। बीईईएच का प्रतिष्ठित मुख्यालय इस सोच का जीवंत उदाहरण है। प्रसिद्ध वास्तुकार ज़ाहा हदीद द्वारा डिजाइन किया गया यह भवन दुनिया की अत्याधुनिक सस्टेनेबल और एआई-सक्षम इमारतों में शामिल है। भवन की डिजाइन, तकनीक और ऊर्जा दक्षता इसे भविष्य के स्मार्ट एवं पर्यावरण-अनुकूल शहरों के लिए एक प्रभावी मॉडल बनाती है। रणनीतिक साझेदारियों और नवाचार आधारित परियोजनाओं के माध्यम से बी-आह स्मार्ट और सस्टेनेबल शहरों के विकास को नई दिशा दे रहा है। पर्यावरणीय उत्कृष्टता, ग्रीन टेक्नोलॉजी और सर्कुलर इकोनॉमी के क्षेत्र में इसके प्रयासों ने शारजाह को क्षेत्रीय स्तर पर ग्रीन इनोवेशन के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई है।

  • सागर शराब कांड: मौतों का आंकड़ा 28 पहुंचा, 7 दुकानें फिर खुलेंगी; गांव-गांव शुरू हुआ नशामुक्ति अभियान

    सागर शराब कांड: मौतों का आंकड़ा 28 पहुंचा, 7 दुकानें फिर खुलेंगी; गांव-गांव शुरू हुआ नशामुक्ति अभियान

     सागर
     मध्य प्रदेश के सागर जिले में जहरीली शराब पीने वाले लोगों की मौत का सिलसिला जारी है। मंगलवार को तीन और लोगों की मौत हुई। इनको मिलाकर मरने वालों की संख्या बढ़कर 28 हो गई है।इस बीच प्रभावित क्षेत्रों में उन सात शराब की दुकानों को फिर से खोलने का आदेश हो जारी हो गया है, जिन्हें मौतों के बाद बंद करा दिया गया था। हालांकि आदेश में कहा गया है कि जिले में केवल संदिग्ध बाम्बे व्हिस्की और सागर गोल्ड ब्रांड की देसी शराब की बिक्री प्रतिबंधित रहेगी।

    मामले में पुलिस और प्रशासन ने अवैध शराब के नेटवर्क को ध्वस्त करने और दोषियों पर कार्रवाई के लिए रणनीति बनाई है। अब प्रशासन ने तीन स्तर पर कार्रवाई शुरू की है।

    इसमें घर-घर सर्वे, चौपाल और कानूनी कार्रवाई शामिल है। बंडा सिविल अस्पताल में शराब सेवन से प्रभावित मरीजों के आने का सिलसिला अब थमने लगा है। हालांकि, मामले में अब राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस ने शासन-प्रशासन पर मौतों का आंकड़ा छिपाने का आरोप लगाया है।

    मंगलवार को छापरी, घूरमार और रिछवार सानौधा गांव के एक-एक व्यक्ति की मौत हुई। करीब 13 लोग बुंदेलखंड मेडिकल कालेज की आइसीयू में जीवन और मौत के बीच जूझ रहे हैं, जबकि डेढ़ सौ से अधिक लोग भर्ती हैं। हालांकि कुछ लोगों को उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी भी दे दी गई है।

    इस बीच, प्रारंभिक जांच में संदिग्ध शराब किसी अधिकृत डिस्टिलरी से तैयार होकर बाजार में आने की पुष्टि नहीं हुई है। अधिकारियों का कहना है कि यदि डिस्टिलरी स्तर पर तैयार शराब में गड़बड़ी होती तो उसका असर संभाग के अन्य क्षेत्रों में भी दिखाई देता।

    फिलहाल जांच का फोकस शराब की पैकेजिंग और उसमें मिलावट के स्तर पर है। शराब की जांच के लिए तीन टीमें गठित की हैं। पिछले दो दिनों में शराब दुकानों, आरोपितों के कब्जे, फैक्ट्री सहित अन्य स्थानों से शराब के करीब 80 नमूने लिए गए हैं। अधिकारियों ने बताया कि नकली शराब की बोतल का ढक्कन ढीला होने और शराब का रंग सामान्य से अलग होता है।

    मृतकों के विसरा की फॉरेंसिक जांच पर जताया संदेह
    जिला कांग्रेस कमेटी सागर ग्रामीण के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह मोहासा ने कहा कि सरकार अभी भी जहरीली शराब से हुई मौतों के वास्तविक आंकड़े सार्वजनिक नहीं कर रही है। प्रशासन द्वारा बताए जा रहे आंकड़ों और जमीनी हकीकत में अंतर दिखाई दे रहा है।

    पहले मृतकों के शव परिजनों को सौंपने में देरी हुई, पोस्टमार्टम में देरी हुई और अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि मृतकों के विसरा की फॉरेंसिक जांच पूरी ईमानदारी और निष्पक्षता से होगी या नहीं।

    कांग्रेस की मांग है कि सभी मृतकों के विसरा की जांच भोपाल की स्वतंत्र फॉरेंसिक लैब से कराई जाए, ताकि जांच की निष्पक्षता पर किसी प्रकार का सवाल न उठे।

    भारत की सबसे भ्रष्ट सरकार मध्यप्रदेश में-राहुल गांधी
    राहुल गांधी ने सागर में जहरीली शराब से मौतों के बाद X पर लिखा- भारत की सबसे भ्रष्ट सरकार वाले राज्य मध्यप्रदेश में शासन नाम की कोई चीज बची ही नहीं। दवा जहरीली। शराब जहरीली। पानी जहरीला। नए कानून बना दिए जाते हैं, लेकिन अगले हादसे तक उन्हें किसी तहखाने में डाल दिया जाता है।

    उन्होंने लिखा- जहरीली शराब ने प्रदेश के सागर में अनेक लोगों की जान लेकर उन सभी घरों में मातम पहुंचा दिया है, लेकिन मध्यप्रदेश को पता है आगे क्या होगा। कुछ गिरफ्तारियां होंगी, कुछ अधिकारी सस्पेंड होंगे, जांच के आदेश होंगे, क्योंकि ये पहली बार नहीं है।

    शिकायतों पर क्लीनचिट भारी पड़ी, वेयर हाउस प्रभारी को हटाया
    सागर में लंबे समय से आबकारी वेयर हाउस की प्रभारी मंजूषा सोनी को मंगलवार देर शाम हटा दिया गया। उनके स्थान पर राम चित्रकार को नया प्रभारी बनाया गया है।

    दरअसल, पिछले महीने एक शराब ठेकेदार ने बाम्बे व्हिस्की की नकली बोतल देकर उसके मिलावटी होने की आशंका जताई थी। 10-12 दिन उसे रखे रहने के बाद सहायक आबकारी आयुक्त ने उसे जांच के लिए वेयर हाउस भेजा।

    बताया गया है कि एडीओ मंजूषा सोनी ने करीब एक घंटे में केवल बैच नंबर का मिलान कर शराब को पीने योग्य बताते हुए रिपोर्ट भेज दी।

    अब इसी ब्रांड की शराब से बंडा तहसील मुख्यालय से सटे आठ गांवों में मौतों के बाद क्लीनचिट पर सवाल है। शराब ठेकेदारों का कहना है मंजूषा सोनी 20-22 साल से सागर में ही कार्यरत हैं।

    राहुल गांधी ने कहा- सरकार जवाब दे
    लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष्य राहुल गांधी ने इस मामले में कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए राज्य सरकार से जवाबदेही की मांग की है। उन्होंने इंटरनेट मीडिया पर की पोस्ट में लिखा है कि भारत की सबसे भ्रष्ट सरकार वाले राज्य मध्य प्रदेश में शासन नाम की कोई चीज बची ही नहीं।

    जहरीली शराब ने प्रदेश के सागर जिले में अनेक लोगों की जान लेकर उन सभी घरों में मातम पहुंचा दिया है। मगर पूरे मध्य प्रदेश को पता है आगे क्या होगा- कुछ गिरफ्तारियां होंगी, कुछ अधिकारी सस्पेंड होंगे, जांच के आदेश होंगे, क्योंकि यह पहली बार नहीं है। कुछ ही वक्त पहले इंदौर में दूषित पानी पीने से कई लोगों की मौत हुई।

    पिछले साल जहरीली कफ सीरप से छोटे बच्चों की जान चली गई। मध्य प्रदेश में दवा जहरीली। शराब जहरीली। पानी जहरीला। 20 साल से ज्यादा समय से भाजपा की सरकार है, लेकिन जवाबदेही कहां है?

    उन्होंने कहा कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो, इन मौतों की पूरी सच्चाई सामने आए और सिर्फ छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई नहीं, जिसकी भी लापरवाही या मिलीभगत सामने आए, उसकी जवाबदेही तय हो।

    शिवपुरी में महिलाओं ने शराब की दुकान पर लगाई आग
    सागर जिले में जहरीली शराब पीने से मौतों के बाद शिवपुरी जिले के अमोला गांव की शराब की दुकान पर महिलाओं ने धावा बोल दिया। उन्होंने बोतलें फेंक जमकर तोड़फोड़ की और दुकान में आग लगा दी। पूरी दुकान जलकर राख हो गई। कर्मचारियों ने भागकर खुद को महिलाओं के आक्रोश से बचाया। सभी महिलाएं हाथों में लाठियां लेकर पहुंचीं थीं।

    दरअसल, शराब ठेकेदारों ने जगह-जगह शराब बिक्री के ठिकाने बना दिए हैं। आमोला में ऐसी ही दुकान खोली गई है। इससे गांव में शराब पीकर रोज हंगामा होता है। नतीजतन, महिलाएं परेशान होती हैं। अमोला थाना प्रभारी योगेंद्र सेंगर का कहना है कि पुलिस टीम ने महिलाओं को शांत कराया।

    शराब दुकानें सील, आरोपियों की धरपकड़ शुरू
    शराब से मौतें होने का कारण सामने आते ही पुलिस और प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी। तत्काल सात लाइसेंसी शराब दुकानों को सील कर दिया गया। सैंपलिंग शुरू कराई गई।

    वहीं, दूसरी ओर पुलिस की अलग-अलग टीमों ने गांवों में दबिश दी। अवैध रूप से शराब बेचने वाले आरोपियों की धरपकड़ शुरू की गई। उनके कब्जे से शराब जब्त की गई। इसके बाद पुलिस ने क्षेत्र में लगातार निगरानी बढ़ाई, ताकि कोई भी व्यक्ति अवैध शराब न बेच सके।

    प्रशासन ने गांव-गांव में मुनादी कराकर लोगों से शराब नहीं पीने की अपील की। वहीं, शराब पीने वाले लोगों को अस्पताल में चेकअप कराने की सलाह दी गई। इसके बाद प्रशासन ने जल्द ही स्थिति पर नियंत्रण पा लिया।

    इन 30 लोगों को मामले में आरोपी बनाया
    मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने जुझार लोधी, दिनेश सिंह, सौरभ लोधी, गोविंद लोधी, मनोहर लोधी, लाइसेंसी यशवंत ठाकुर, मनीष लोधी, आशीष साहू, आकाश राय, रहीम खान, सत्यम, आशाराम, अरविंद, रोहित, माखन, अनिकेत गंधर्व, विशाल लोधी, मंगल रजक, विशाल लोधी और राजा सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

    वहीं, विनायका थाने में राम सिंह लोधी निवासी पाटन, ततरवारा सरपंच चंदू उर्फ चंद्रभान पिता द्वारिका प्रसाद राजपूत निवासी ततरवारा, अरविंद पिता आशाराम यादव, भगवान सिंह पिता देवी सिंह लोधी, मानसिंह प्रताप बिहार अहिरवार, लाइसेंसी ठेकेदार सिद्धार्थ कुशवाहा, रोहित पिता उत्तम शिवहरे निवासी छतरपुर, राघवेंद्र पिता सोहन सिंह निवासी ततरवारा, धर्मेंद्र पिता भुजबल राजपूत निवासी ततरवारा और सोहन पिता उमराव सिंह राजपूत निवासी ततरवारा के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

  • पंजाब में कर्मचारियों को मिली बड़ी राहत, 13 दिन चली हड़ताल के बाद सरकार से सहमति

    पंजाब में कर्मचारियों को मिली बड़ी राहत, 13 दिन चली हड़ताल के बाद सरकार से सहमति

    चंडीगढ़.

    पंजाब सरकार के कर्मचारियों और सरकार के बीच पिछले कई दिनों से चल रहा टकराव बुधवार को खत्म हो गया। मुख्य सचिव के साथ कर्मचारी संगठनों की बैठक के बाद कर्मचारियों ने अपनी हड़ताल वापस लेने का औपचारिक एलान कर दिया।

    बैठक में कर्मचारियों की विभिन्न मांगों पर भी लगभग सहमति बन गई है। सरकार की ओर से कर्मचारियों के खिलाफ जारी किए गए दोनों पत्र वापस लेने पर भी सहमति बनी है। कर्मचारी संगठनों ने लंबित मांगों को लेकर मंगलवार से सामूहिक अवकाश लेकर आंदोलन शुरू किया था और बाद में हड़ताल को 11 सितंबर तक बढ़ाने की घोषणा की थी। इससे पंजाब सिविल सचिवालय समेत विभिन्न सरकारी कार्यालयों में कामकाज प्रभावित हुआ था। सरकार की ओर से भी सख्त रुख अपनाते हुए ड्यूटी से अनधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारियों पर ‘काम नहीं तो वेतन नहीं’ का नियम लागू करने और अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे।

    मुख्य सचिव के साथ हुई बातचीत
    बुधवार को मुख्य सचिव के साथ हुई बैठक में दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई। बैठक के बाद कर्मचारी संगठनों ने हड़ताल समाप्त करने की घोषणा कर दी। कर्मचारियों की मांगों पर भी सरकार के साथ लगभग सहमति बनने की बात कही गई है। इसके साथ ही सरकार की ओर से जारी दोनों पत्रों को वापस लेने का फैसला हुआ है। इस घटनाक्रम से सरकार और कर्मचारियों के बीच बढ़ा तनाव फिलहाल खत्म हो गया है। कर्मचारियों के हड़ताल वापस लेने के बाद अब सरकारी कार्यालयों में सामान्य कामकाज बहाल होने की उम्मीद है। कर्मचारियों की मांगों को लेकर सरकार की ओर से आगे की प्रक्रिया जल्द स्पष्ट की जाएगी।

    क्या थी मांगें?
    कर्मचारी लंबित महंगाई भत्ता और एरियर जारी करने, पुरानी पेंशन योजना लागू करने, अस्थायी कर्मियों को नियमित और वेतन से जुड़ी विसंगतियां दूर करने समेत अन्य मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।