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  • मध्यप्रदेश में यात्री परिवहन को मिलेगा नया विस्तार, निवेश-रोजगार और उद्योग को बढ़ावा; गांवों तक पहुंचेगी बस सेवा

    मध्यप्रदेश में यात्री परिवहन को मिलेगा नया विस्तार, निवेश-रोजगार और उद्योग को बढ़ावा; गांवों तक पहुंचेगी बस सेवा

    यात्री परिवहन विजन समिट-2026
    मध्यप्रदेश में यात्री परिवहन के विस्तार से निवेश, रोजगार और उद्योग को मिलेगा बढ़ावा

    प्रदेश की 75 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को बस सेवा से जोड़कर ग्रामीण कनेक्टिविटी को करेंगे सुदृढ़
    मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा अंतर्गत संचालित होने वाली सार्वजनिक बसों में महिला और बाल सुरक्षा को प्राथमिकता

    भोपाल 

    प्रदेश के नागरिकों को स्मार्ट, सुरक्षित, सुगम और पर्यावरण-अनुकूल लोक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा यात्री परिवहन विजन समिट-2026 का आयोजन किया जा रहा है। इस समिट में प्रदेश की यात्री परिवहन व्यवस्था को अधिक आधुनिक, व्यवस्थित और प्रभावी बनाने के साथ-साथ निवेश, रोजगार और उद्योग के नए अवसरों को बढ़ावा देने पर भी मंथन होगा।

    इसमें पूरे देश से आने वाले परिवहन विशेषज्ञ, निजी बस ऑपरेटर, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और नीति-निर्माता प्रदेश की यात्री परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए विचार-विमर्श करेंगे। विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए यात्री परिवहन का रोडमैप तैयार करने में मदद मिलेगी। साथ ही प्रदेश की 75 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को बस सेवा से जोड़कर ग्रामीण कनेक्टिविटी को सुदृढ़ किेया जायेगा।

    लगभग 15,000 सार्वजनिक बसें की जाएंगी संचालित

    मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एवं अधोसंरचना लिमिटेड अंतर्गत ‘मोबिलिटी विज़न: 2030’ का लक्ष्य प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों तक परिवहन नेटवर्क का विस्तार करना है। इसके अंतर्गत प्रदेश में 15,000 से अधिक आधुनिक सार्वजनिक बसें संचालित की जाएंगी। इससे प्रतिदिन 30 लाख से ज्यादा यात्रियों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा प्रदान की जायेगी। साथ ही 180 से अधिक आधुनिक बस स्टैंड्स, टर्मिनल्स और डिपो का कायाकल्प किया जाएगा।

    इलेक्ट्रिक बसों के विस्तार पर दिया जाएगा विशेष जोर

    पर्यावरण संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के उद्देश्य से समिट में स्वच्छ ईंधन और इलेक्ट्रिक बसों के विस्तार पर विशेष जोर दिया जाएगा। वर्तमान में 96 पीएम ई-बसें और 120 इंटरसिटी बसें प्रदेश में संचालित हैं। इसके साथ आगामी 6 महीनों में 486 पीएम ई-बसें और 34 इंटरसिटी बसें जोड़ी जाएंगी, जबकि वर्ष 2027 तक यह संख्या बढ़ाकर 1,100 करने का लक्ष्य है। प्रदेश में 100 बसों की क्षमता वाले आधुनिक चार्जिंग डिपो और सोलर इंफ्रॉस्ट्रक्चर भी तैयार किए जा रहे हैं। इससे सालाना 70,000 टन से अधिक कार्बन डाईऑक्साइड के उत्सर्जन में कमी आएगी।

    यात्री सुरक्षा, स्मार्ट तकनीक और 24×7 निगरानी

    मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा अंतर्गत संचालित होने वाली सभी बसों की निगरानी इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम के माध्यम से की जाएगी। इसके लिए मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एण्ड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड एवं उसकी 7 सहायक कंपनियों में अत्याधुनिक कमांड-कंट्रोल सेंटर स्थापित किए जाएंगे। इन सेंटरों से बसों के संचालन, लोकेशन, टाइमिंग एवं अन्य महत्वपूर्ण गतिविधियों की रियल टाइम निगरानी सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही सार्वजनिक बसों में महिला और बाल सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। इससे यात्री परिवहन व्यवस्था अधिक सुरक्षित, सुगम, पारदर्शी और प्रभावी बनाने में भी मदद मिलेगी। सभी बसों को 07 सीसीटीवी कैमरों, पैनिक बटन और रियल-टाइम व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम से लैस किया जा रहा है। इसके अलावा, पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम, ड्राइवरों की तकनीकी ट्रेनिंग और त्वरित शिकायत निवारण तंत्र के जरिए सुरक्षित एवं समयबद्ध यात्रा सुनिश्चित की जाएगी।

    पीपीपी मॉडल के जरिए निजी ऑपरेटरों की सशक्त भागीदारी

    आमजन के आवागमन को सुगम बनाने के लिये जन-निजी भागीदारी को गति देने के लिए पारदर्शी अनुबंध प्रणाली और प्रोत्साहन योजनाएं लागू की जाएगी। इस मॉडल से निजी बस ऑपरेटरों को राजस्व रिसाव रोकने, नॉन-फेयर रेवेन्यू (जैसे विज्ञापन व कार्गो सेवाएं) बढ़ाने और आधुनिक डिपो व टर्मिनलों के उपयोग की सुविधाएं मिलेंगी साथ ही प्रशासन का पूर्ण सहयोग भी मिलेगा। यह समिट निजी क्षेत्र के निवेश को आकर्षित कर मध्यप्रदेश को देश के सबसे उन्नत, पर्यावरण-अनुकूल और तकनीक-सक्षम सार्वजनिक परिवहन राज्यों की श्रेणी में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

    परिवहन क्षेत्र में निवेश और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

    समिट से यात्री परिवहन के विस्तार से प्रदेश में बस संचालन, वाहन निर्माण, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीकी सेवाओं और अन्य संबद्ध क्षेत्रों में निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी। इससे परिवहन क्षेत्र से जुड़े उद्योगों को प्रोत्साहन मिलने के साथ युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

    कल दोपहर 12 बजे तक करा सकेंगे पंजीयन

    समिट में शामिल होकर अपने सुझाव देने के लिए इच्छुक प्रतिभागियों को ऑनलाइन पंजीयन कराना होगा। पंजीयन की अंतिम तिथि 10 सितंबर 2026 है। इच्छुक प्रतिभागी दोपहर 12 बजे तक https://forms.gle/f9wEvWb444JkzJgX6 लिंक पर जाकर पंजीयन करा सकेंगे। साथ ही https://events.eletsonline.com/mpyatriparivahansummit/ लिंक पर जाकर समिट से संबंधित अन्य जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

     

  • 8वें वेतन आयोग से बदलेगी कर्मचारियों की व्यवस्था? 40 साल पुराने नियम में बदलाव की तैयारी, जानें क्या होगा फायदा

    8वें वेतन आयोग से बदलेगी कर्मचारियों की व्यवस्था? 40 साल पुराने नियम में बदलाव की तैयारी, जानें क्या होगा फायदा

    नई दिल्ली

    आठवें वेतन आयोग की सिफारिशो का इंतजार बेसब्री से हो रहा है। वेतन आयोग से कर्मचारी संगठनों की डिमांड भी तरह-तरह की है। ऐसी ही एक डिमांड पेंशनभोगियों की भी है। यह डिमांड अगर लागू हो जाता है रिटायर केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 40 साल पुराने नियम में बदलाव हो जाएगा।

    क्या है डिमांड?
    केंद्र सरकार के पेंशनभोगियों और कर्मचारी संगठनों की मांग है कि कम्युटेड पेंशन (समय से पहले ली गई पेंशन) को बहाल करने की 15 साल की अवधि को कम किया जाए। कई संगठनों ने 8वें वेतन आयोग से सिफारिश की है कि इसे 10 से 12 साल बाद बहाल किया जाए। उनका तर्क है कि मौजूदा नियम उन वित्तीय और एक्चुअरियल मान्यताओं पर आधारित है जो कई दशक पुरानी हैं। बता दें कि साल 1986 में कम्युटेड पेंशन के 15 साल वाले नियम को लागू किया गया था। कहने का मतलब है कि यह 40 साल पुराना नियम है।

    पेंशन कम्युटेशन क्या है?
    केंद्र सरकार के कर्मचारी रिटायरमेंट के समय अपनी बेसिक पेंशन का 40% तक कम्युट (समय से पहले एकमुश्त लेना) करवा सकते हैं और उस रकम को एकमुश्त पा सकते हैं। इसके बदले, कम्युट किए गए हिस्से को उनकी मासिक पेंशन से काट लिया जाता है। मौजूदा नियमों के तहत, काटी गई पेंशन 15 साल बाद बहाल कर दी जाती है।

    क्यों उठ रहे सवाल?
    कर्मचारी और पेंशनभोगी संगठनों का तर्क है कि जब यह सिस्टम लागू किया गया था तब की वित्तीय और जनसांख्यिकीय (डेमोग्राफिक) स्थितियां अब काफी बदल चुकी हैं। बता दें कि नेशनल काउंसिल ऑफ द जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM), ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AIDEF) और फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशन्स (FNPO) ने बहाली की अवधि 11 साल करने की मांग की है।

    इसके अलावा, इंडियन रेलवेज टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन ने 12 साल का प्रस्ताव दिया है, जबकि ऑल इंडिया न्यू पेंशन स्कीम एम्प्लॉइज फेडरेशन ने 10 साल की मांग की है। भारत पेंशनर्स समाज और ऑल पेंशनर्स एसोसिएशन ने भी 11 साल की सिफारिश की है।

    ₹100 की कम्युटेड पेंशन का उदाहरण
    नेशनल काउंसिल ऑफ द जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी ने 100 रुपये की कम्युटेड पेंशन का उदाहरण दिया है। 61 साल की उम्र के पेंशनर के लिए 8.194 के कम्युटेशन फैक्टर पर हर ₹100 मासिक पेंशन कम्युट करने पर करीब ₹9,833 की एकमुश्त राशि मिलती है।

    इसके बाद पेंशनर की मासिक पेंशन से ₹100 की कटौती होती है। 10 साल में कुल कटौती ₹12,000 और 15 साल में ₹18,000 हो जाती है। संगठन का तर्क है कि करीब 10 साल में कम्युट की गई राशि की भरपाई हो जाती है और उसके बाद की कटौती की समीक्षा की जानी चाहिए।

  • मीथेन के बढ़ते उत्सर्जन से MP पर मंडरा रहा खतरा, कई जिलों में बढ़ेगी गर्मी; जानें रिपोर्ट

    मीथेन के बढ़ते उत्सर्जन से MP पर मंडरा रहा खतरा, कई जिलों में बढ़ेगी गर्मी; जानें रिपोर्ट

    भोपाल

    मध्यप्रदेश में कार्बन डाई ऑक्साइड के बाद मीथेन गैस हवा को सबसे ज्यादा प्रदूषित कर रही है। सैटेलाइट विश्लेषण में राज्य में चार अलग-अलग प्रदूषण क्षेत्रों की पहचान की गई है। इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में उद्योग परिवहन प्रमुख स्रोत हैं। सिंगरौली कोयला खनन से होने वाला मीथेन उत्सर्जन ज्यादा है।

    सागर, मुरैना, व में रीवा, खरगोन और छिंदवाड़ा सहित अन्य जिलों में पशुधन से होने वाला मीथेन उत्सर्जन ज्यादा है। ग्रामीण क्षेत्रों में बायोमास जलाने से ब्लैक कार्बन का उत्सर्जन हो रहा है। इन प्रदूषकों के चलते 2030 के दशक तक मप्र के औसत अधिकतम तापमान में 1.8-2.0 डिग्री सेल्सिसयस और न्यूनतम तापमान में 2.0-2.4 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी संभावित है। राज्य का पूर्वी हिस्सा तेजी से गर्म हो रहा है। डिंडोरी, भिंड और सीधी जैसे जिले कम अनुकूलन क्षमता के कारण विशेष रूप से जोखिम में हैं।

    गैर कार्बन डाई ऑक्साइड उत्सर्जन में कमी ऐसे
    एक बहु-क्षेत्रीय आकलन के नाम से पर्यावरण विभाग द्वारा जारी रिपोर्ट जलवायु परिवर्तन केंद्र, एप्को, इंस्टीट्यूट फॉर गवर्नेस एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट और दी एनर्जी एंड रिसोर्स इंस्टीट्यूट- टेरी के विशेषज्ञों ने तैयार की है। प्रदूषकों की समस्याओं से निपटने के रास्ते बताए गए हैं। कहा गया है कि शॉर्ट लिव्ड क्लाइमेट पॉल्यूटेंट्स को कम करना जरूरी है। स्थानीय जरूरतों के मुताबिक प्रभावी उपाय लागू किए जाएं तो 2047 तक सामान्य स्थिति की तुलना में सल्फर डाई ऑक्साइड उत्सर्जन में लगभग 80%, नाइट्रोजन ऑक्साइड में 78%, नॉन मीथेन वॉलेटाइल ऑर्गेनिक कंपाउंड में 61% ब्लैक कार्बन में 56% तक कमी लाई जा सकती है।

    यह सुझाए तात्कालिक रास्ते
    रिपोर्ट में नॉन सीओटू प्रदूषकों को कम करने रिन्यूएबल एनर्जी बढ़ाने, बिजली क्षेत्र में गैस के इस्तेमाल, इंडस्ट्री में साफ़ ईंधन और ट्रांसपोर्ट में ईवी अपनाने, पुरानी गाड़ियां हटाने का सुझाव है। प्राकृतिक तरीके से धान की खेती में मीथेन उत्सर्जन 65% तक कम हो सकता है। चारे के सही प्रबंधन से पशुपालन से होने वाले मीथेन उत्सर्जन में 10-15% की कमी तेजी से और कम लागत में हो सकती है। कम्युनिटी-लेवल पर बायोगैस, एंटरिक फर्मेंटेशन रोकने वाले उपाय, कोयला खदानों से निकलने वाली मीथेन को पकड़ने, जलाने जैसी तकनीकों को बड़े पैमाने पर अपनाने से ये तीनों सेक्टर 2030 के बाद उत्सर्जन में और ज़्यादा और लंबे समय तक कमी लाने में अहम साबित होंगे।

    भविष्य के लिए बताई यह योजना
    -अलग-अलग सेक्टर की एसएलसीपी रणनीतियों को राज्य के जलवायु लक्ष्यों के साथ जोड़ने के लिए सेक्टर और विभागों के बीच तालमेल के सिस्टम को मजबूत करना चाहिए।

    -खनन, ट्रांसपोर्ट और इंडस्ट्री के लिए सेक्टर-स्पेसिफिक रोडमैप बनाया जाए, जिसमें उत्सर्जन कम करने के लिए समय-सीमा वाले लक्ष्य तय हों।

    -पशुपालन, खेती और कोयला खनन जैसे सेक्टर्स में खास तौर पर उत्सर्जन कम करने की रणनीतियां लागू करना चाहिए। ये राज्य में गैर सीओटू उत्सर्जन के ऐसे स्रोत हैं, जिनमें सुधार की सबसे ज्यादा गुंजाइश है, लेकिन जिन पर अब तक कम ध्यान दिया गया है।

    -ग्रीन तकनीकों को बड़े पैमाने पर अपनाने के लिए राष्ट्रीय मिशनों और केंद्रीय योजनाओं का लाभ उठाना चाहिए और कम-कार्बन वाले इंफास्ट्रक्चर के लिए क्लाइमेट फाइनेंस और सीएसआर फंड जुटाना चाहिए।

    -नियम लागू करने और हालात के हिसाब से प्रबंधन के लिए मज़बूत मॉनिटरिंग और मूल्यांकन सिस्टम बनाना जरूरी है, जिसमें रियल-टाइम उत्सर्जन ट्रैकिंग और रिमोट सेंसिंग शामिल हो।

  • जलवायु संकट का खौफनाक अनुमान, 2100 तक 40% धरती हो सकती है बंजर; जीवन पर मंडराएगा बड़ा संकट

    जलवायु संकट का खौफनाक अनुमान, 2100 तक 40% धरती हो सकती है बंजर; जीवन पर मंडराएगा बड़ा संकट

    नई दिल्ली

    हमारी धरती लगातार गर्म हो रही है और इसका नतीजा बेहद भयानक होने वाला है. बढ़ते तापमान के कारण दुनिया के कई इलाके तेजी से सूख रहे हैं. जब ऐसा होता है तो सूखे इलाकों की सीमाएं आगे बढ़ने लगती हैं. इससे पूरी दुनिया का लैंडस्केप बदल जाता है और पेड़-पौधे खत्म होने लगते हैं. अब साइंटिस्ट्स ने इसे लेकर एक खतरनाक अलर्ट जारी किया है. एक नई रिसर्च के मुताबिक 21वीं सदी के अंत तक धरती का 40 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा ड्राईलैंड्स बन सकता है। 

    ‘एनवायर्नमेंटल रिसर्च लेटर्स’ में पब्लिश एक रिपोर्ट में यह डरावना दावा किया गया है. हालांकि इस रिसर्च में एक हैरान करने वाली बात भी सामने आई है. क्लाइमेट चेंज के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) इस खतरे को थोड़ा धीमा कर रही है. आइए इस डरावनी रिसर्च को डिटेल में समझते हैं। 

    धरती पर ड्राईलैंड्स बढ़ने का कारण क्या है?
    ड्राईलैंड्स उन इलाकों को कहते हैं जहां पानी की भारी कमी होती है. यहां बारिश बहुत कम होती है और वाष्पीकरण के जरिए पानी ज्यादा उड़ जाता है. साइंटिस्ट्स का मानना है कि दुनिया भर में ड्राईलैंड्स लगातार बढ़ रहे हैं। 

    चाइनीज एकेडमी ऑफ फॉरेस्ट्री के साइंटिस्ट्स ने इसे लेकर गहराई से एनालिसिस किया है. उन्होंने दुनिया भर के क्लाइमेट डेटा और भविष्य के अनुमानों का इस्तेमाल किया. इसके लिए 1960 से 2023 तक का मौसम डेटा देखा गया. टीम ने एक नई तकनीक का इस्तेमाल करके यह पूरा डेटा तैयार किया है। 

        रिसर्च टीम के एक साइंटिस्ट ने कहा, ‘सूखे इलाकों का बढ़ना ग्लोबल सस्टेनेबल डेवलपमेंट के लिए बड़ा खतरा है। 

    अगर सूखे इलाके उन जगहों पर फैलेंगे जहां अभी अच्छी नमी है, तो पानी की कमी और गंभीर हो जाएगी. इससे पूरे इकोसिस्टम को भारी नुकसान पहुंचेगा और रेगिस्तान तेजी से बढ़ने लगेंगे. इंसान और जानवरों के लिए पानी जुटाना भी काफी मुश्किल हो जाएगा। 

    1994–2023 के दौरान दुनिया भर के शुष्क क्षेत्रों और उनसे जुड़े जलवायु क्षेत्रों का भौगोलिक वितरण (a); हर जलवायु क्षेत्र का प्रतिशत (b). (Visuals Credit : Cai et al., Environmental Research Letters, 2026)

    कार्बन डाइऑक्साइड गैस इस खतरे को धीमा कैसे कर रही है?
        इस रिसर्च में सबसे हैरान करने वाली बात कार्बन डाइऑक्साइड गैस को लेकर है. हम सभी जानते हैं कि यह गैस ग्लोबल वॉर्मिंग का सबसे बड़ा कारण है. लेकिन यही गैस धरती को पूरी तरह सूखने से थोड़ा बचा भी रही है। 

        दरअसल वातावरण में जब CO2 का लेवल बढ़ता है तो इसका असर पौधों पर पड़ता है. पौधों की पत्तियों में छोटे छेद होते हैं जिन्हें स्टोमेटा कहा जाता है. ज्यादा CO2 होने पर यह स्टोमेटा पूरी तरह नहीं खुलते हैं. इससे पौधों के अंदर का पानी भाप बनकर कम उड़ता है. इस वजह से पेड़-पौधे लंबे समय तक अपने अंदर पानी बचाकर रख पाते हैं। 

        स्टोमेटा के आंशिक रूप से बंद होने के कारण पानी का नुकसान काफी कम हो जाता है. साइंटिस्ट्स का कहना है कि पुरानी रिसर्च में इस बात पर ध्यान नहीं दिया गया था. पुराने क्लाइमेट मॉडल में इस खास फैक्टर को इग्नोर कर दिया गया था. इसीलिए पहले की कुछ रिपोर्ट्स में 2100 तक 56 प्रतिशत धरती के सूखने का दावा किया गया था. लेकिन नई कैलकुलेशन के बाद इसे करीब 40 प्रतिशत माना गया है। 

    फिलहाल धरती के कितने हिस्से पर मौजूद है सूखा और बंजर इलाका?
    रिसर्च टीम ने 1994 से 2023 के बेसलाइन डेटा के आधार पर नई जानकारी दी है. अंटार्कटिका को छोड़कर फिलहाल धरती का करीब 38.58 प्रतिशत हिस्सा ड्राईलैंड्स है. इन सूखे इलाकों को चार अलग-अलग कैटिगरी में बांटा गया है। 

  • पंजाब में बिल्डिंग निर्माण के नए नियम लागू, पार्किंग-टॉयलेट से लेकर ऊंचाई और फायर सेफ्टी तक बदले रूल्स

    पंजाब में बिल्डिंग निर्माण के नए नियम लागू, पार्किंग-टॉयलेट से लेकर ऊंचाई और फायर सेफ्टी तक बदले रूल्स

    चंडीगढ़ 
    पंजाब में सरकार ने बिल्डिंग बनाने के नियम बदल दिए हैं। इनमें घर-दुकान भी शामिल हैं। जिनमें फायर एग्जिट से लेकर पार्किंग और छत तक बदलाव किए गए हैं। इसके अलावा हाईटेंशन तारों के नीचे या दूरी को लेकर भी अब नए नियम निर्धारित किए गए हैं।

    सोसाइटीज में पार्किंग के लिए भी अब तय नियम फॉलो करने होंगे। इसके लिए सरकार ने पंजाब शहरी नियोजन और बिल्डिंग (संशोधन) नियम, 2026 लागू कर दिए हैं।

    1. 21 मीटर से ऊंची बिल्डिंग में सभी सीढ़ियां फायर एग्जिट यदि इमारत की ऊंचाई 21 मीटर (लगभग 6-7 मंजिल) से अधिक है, तो उसमें चढ़ने-उतरने के लिए बनी सभी सीढ़ियों को अनिवार्य रूप से 'फायर एग्जिट' यानी आपातकालीन निकास की तरह बनाया जाएगा। आग लगने या किसी अन्य आपात स्थिति में लोग बिना किसी रुकावट के सुरक्षित और तेजी से बाहर निकल सकें, इसके लिए यह व्यवस्था जरूरी होगी।

    2. बिजली की ओवरहेड लाइन के नीचे निर्माण नहीं बिजली की ओवरहेड लाइन के आसपास इमारत बनाते समय निर्धारित दूरी रखना जरूरी होगा।

    3. दुकान, बूथ और SCO की ऊंचाई 5 मीटर तक बूथ, सामान्य दुकानों और SCO में फर्श से छत तक की ऊंचाई अधिकतम 5 मीटर रखी जा सकेगी।

    4. मेजेनाइन में सिर्फ सामान रख सकेंगे बूथ में मुख्य मंजिल और छत के बीच बनाई जाने वाली मेजेनाइन यानी अतिरिक्त छोटी मंजिल का इस्तेमाल सिर्फ सामान रखने के लिए किया जा सकेगा। यहां दुकान का कारोबार या ग्राहकों के बैठने की व्यवस्था नहीं की जा सकेगी। मेजेनाइन का क्षेत्रफल बूथ के कुल एरिया के दो-तिहाई (2/3) से अधिक नहीं होगा। इसमें कॉरिडोर का क्षेत्रफल शामिल नहीं होगा। खास बात यह है कि मेजेनाइन का यह क्षेत्र FAR में शामिल नहीं किया जाएगा।

    5. छत पर सोलर पैनल के लिए राहत अब छत पर सोलर पैनल लगाते समय पैनल के नीचे 2.4 मीटर (लगभग 8 फीट) तक की खाली जगह रखी जा सकेगी। सोलर पैनल और उन्हें लगाने के लिए बनाए गए ढांचे को इमारत की कुल ऊंचाई में शामिल नहीं किया जाएगा। FAR में भी नहीं गिना जाएगा। यानी छत पर सोलर पैनल लगाने के लिए इस अतिरिक्त ढांचे को FAR की गणना में नहीं जोड़ा जाएगा।

    6. छत पर 6 वर्गमीटर तक टॉयलेट अब छत पर अधिकतम 6 वर्ग मीटर (लगभग 64.5 वर्ग फीट) जगह में टॉयलेट बनाया जा सकेगा। इसकी अधिकतम ऊंचाई 2.75 मीटर (लगभग 9 फीट) होगी। टॉयलेट को भी इमारत की कुल ऊंचाई में शामिल नहीं किया जाएगा। FAR में शामिल नहीं किया जाएगा।

    7. लिफ्ट सीधे छत तक जा सकेगी अब आवासीय और कमर्शियल समेत सभी तरह की इमारतों में लिफ्ट को सीधे छत तक ले जाने की अनुमति होगी। लिफ्ट का निर्माण नेशनल बिल्डिंग कोड (NBC) 2016 और संबंधित लिफ्ट कानून के अनुसार करना होगा। लिफ्ट की जांच और सर्टिफिकेशन पंजाब के चीफ इलेक्ट्रिकल इंस्पेक्टर से क्षमता प्रमाण पत्र प्राप्त व्यक्ति ही कर सकेगा। इससे बुजुर्गों, दिव्यांगों और सामान लेकर छत तक जाने वाले लोगों को सुविधा मिलेगी।

    8. कार पार्किंग को लेकर भी नए नियम कार पार्किंग के लिए भी लिफ्ट, क्लब हाउस और स्टिल्ट को लेकर भी नियम तय कर दिए गए हैं।

    9. जिम और इंडोर गेम्स में FAR की राहत पोडियम पर बने कॉमन जिम या इंडोर गेम्स एरिया का सिर्फ आधा हिस्सा (50%) FAR में गिना जाएगा। इससे ऐसे कॉमन एरिया के निर्माण में FAR के लिहाज से राहत मिलेगी।

  • वडनगर से काशी तक गूंजेगा ‘सेवा संकल्प’, PM मोदी के 25 साल पूरे होने पर BJP का मेगा सेलिब्रेशन

    वडनगर से काशी तक गूंजेगा ‘सेवा संकल्प’, PM मोदी के 25 साल पूरे होने पर BJP का मेगा सेलिब्रेशन

    बनारस 
     पीएम मोदी के 25 साल के शासन को भव्य तरीके से मनाए जाने की तैयारी है. इस मौके पर बनारस से वडनगर तक कलश यात्रा का ऐलान क‍िया गया है. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा क‍ि 7 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन सेवा और समर्पण के 25 साल पूरे होने वाले हैं. ऐसे में अगले महीने 'सेवा संकल्प अभियान' आयोजित क‍िया जाएगा. 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक एक महीने तक चलने वाला 'सेवा संकल्प अभियान' आयोजित होगा. 17 सितंबर को हम हर वर्ष सेवा दिवस के रूप में मनाते हैं और पूरा कार्यक्रम सेवा पखवाड़ा के रूप में मनाते हैं।  

    भाजपा अध्‍यक्ष ने कहा, पीएम मोदी ने पिछले 25 वर्षों में जन सेवा से राष्ट्रसेवा के मंत्र को पकड़ते हुए पूरी तरह से सेवा यात्रा को जारी रखा है. 25 करोड़ गरीब परिवारों को गरीबी रेखा से बाहर लाना, 80 करोड़ लोगों को राशन उपलब्ध कराना, 100 करोड़ लोगों से अधिक को सामाजिक सुरक्षा योजना से जोड़ना, 12 करोड़ शौचालय, कोविड की फ्री वैक्सीन और 4 करोड़ से अधिक गरीबों के लिए आवास बनाना सामान्य घटना नहीं है. उनका सफर एक साधारण कार्यकर्ता के रूप में प्रारंभ हुआ और आज देश के प्रधान सेवक के रूप में उन्होंने काम को आगे बढ़ाया, यह केवल उनके स्पष्ट विजन, दृढ़संकल्प और सामाजिक जीवन में लगातार गुणात्मक परिवर्तन कैसे आए, कैसे लोगों के जीवन में बदलाव आए इसका प्रयास उन्होंने किया। 

    'आज भारत दुनिया की तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था के रूप में सामने आ रहा है' 
    नितिन नवीन ने आगे कहा, ''पीएम मोदी ने जब देश का नेतृत्व संभाला तो पूरे देश में एक निराशा, एक अंधकार का माहौल था, पॉलिसी पैरालिसिस कह सकते हैं हमारे इकोनॉमी को फ्रेजाइल फाइव के रूप में देखा जाता था, लेकिन आज भारत दुनिया की तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था के रूप में सामने आ रहा है। 

    7 सितंबर से 7 अक्टूबर के बीच सभी स्कूलों में होंगे कार्यक्रम
    उन्‍होंने कहा, "प्रधानमंत्री के जन्मदिन 17 सितंबर को हर वर्ष हम सेवा दिवस के रूप में मनाते हैं. 17 सितंबर को रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाएगा. 17 सितंबर से 7 अक्टूबर के बीच सभी स्कूलों में चित्रकारी, ड्राइंग और भाषण प्रतियोगिता कराई जाएगी. इसमें उत्कृष्ट चित्रों को और भाषण प्रतियोगिताओं के विजेताओं को मुख्यमंत्री के स्तर पर और अन्य केंद्रीय मंत्री के स्तर पर प्रमाण पत्र देने की योजना है। 

    सभी जिलों में सेवा ज्योतिकलश यात्रा के माध्यम से होंगे कार्यक्रम
    उन्‍होंने कहा क‍ि 7 अक्टूबर, जिस दिन 'हेडऑफ द गवर्नमेंट' के रूप में प्रधानमंत्री के जनसेवा और समर्पण के 25 साल पूरे होंगे, उस दिन देशभर के सभी जिलों में सेवा ज्योतिकलश यात्रा के माध्यम से कार्यक्रम करेंगे. इस कार्यक्रम में उनके 25 वर्षों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाएगी, इस कार्यक्रम में विकसित भारत 2047 का भी संकल्प लिया जाएगा। 

  • कृषि क्षेत्र आने वाले समय में प्रदेश की अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ और सबकी समृद्धि की सबसे बड़ी गारंटी बनने जा रहा है

    कृषि क्षेत्र आने वाले समय में प्रदेश की अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ और सबकी समृद्धि की सबसे बड़ी गारंटी बनने जा रहा है

    भोपाल 

    बलराम कृषि महोत्सव के अवसर पर निवाड़ी में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव नई दिल्ली से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। उन्होंने किसानों को संबोधित करते हुए कृषि विकास, आधुनिक तकनीकों के उपयोग और किसानों की आय बढ़ाने पर जोर दिया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों से संवाद कर कृषि से जुड़े विषयों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि किसानों की समृद्धि प्रदेश सरकार की प्राथमिकता है तथा किसानों को उन्नत तकनीक, बेहतर सुविधाएं और शासन की योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में मौजूद किसानों से कहा कि कृषि क्षेत्र आने वाले समय में प्रदेश की अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ और सबकी समृद्धि की सबसे बड़ी गारंटी बनने जा रहा है। उन्होंने किसानों से कहा कि वे दुग्ध उत्पादन, अन्न उत्पादन, मत्स्य पालन, उद्यानिकी जिसमें भी उनकी रुचि है, एक नई शुरुआत के साथ आगे बढ़ें। हमारी सरकार फील्ड से लेकर फैक्ट्री तक हमेशा किसानों के साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी किसान इस बलराम कृषि महोत्सव में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार का संकल्प है कि किसान कल्याण वर्ष के माध्यम से पूरे वर्ष किसानों के हित में निरंतर कार्य किया जाए। किसानों की आय बढ़ाना और खेती को अधिक लाभकारी बनाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि कृषि के क्षेत्र में नई तकनीक, उन्नत बीज, आधुनिक कृषि यंत्र और वैज्ञानिक पद्धतियों का उपयोग बढ़ाने से किसानों को उत्पादन एवं आय में वृद्धि का लाभ मिलेगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बलराम कृषि महोत्सव जैसे आयोजनों के माध्यम से किसानों को कृषि वैज्ञानिकों से सीधे संवाद करने, उन्नत कृषि यंत्रों, नवीन तकनीकों और बेहतर कृषि उत्पादन से जुड़ी जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिलता है। किसानों को गुणवत्तापूर्ण एवं उन्नत बीजों के साथ आधुनिक कृषि उपकरणों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे खेती की लागत कम हो और उत्पादन में वृद्धि हो। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार परंपरागत कृषि पद्धतियों के साथ प्राकृतिक एवं जैविक खेती को भी बढ़ावा दे रही है। प्राकृतिक खेती को अपनाकर किसान कम लागत में गुणवत्तापूर्ण उत्पादन कर सकते हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों को सिंचाई और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है। किसानों को पर्याप्त विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने के साथ कृषि क्षेत्र में आवश्यक अधोसंरचना को मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार हर परिस्थिति में किसानों के साथ खड़ी है और किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए संवेदनशीलता के साथ कार्य किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने युवाओं, महिलाओं, गरीबों और किसानों को आगे बढ़ाने के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि के साथ पशुपालन, पर्यटन और अन्य रोजगारपरक गतिविधियों को बढ़ावा देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। गौशाला एवं पशुपालन से संबंधित योजनाओं के माध्यम से भी ग्रामीणों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे कृषि वैज्ञानिकों और कृषि विभाग के विशेषज्ञों से मार्गदर्शन लेकर आधुनिक तकनीकों को अपनाएं तथा प्राकृतिक खेती, उन्नत बीज और आधुनिक कृषि यंत्रों का अधिक से अधिक उपयोग करें।

    मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि प्रदेश में वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। किसान कल्याण वर्ष के अंतर्गत किसानों के हित में विभिन्न कार्यक्रम और गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण की सुविधा दी जा रही है। खरीफ एवं रबी फसलों के लिए ऋण चुकाने की अवधि 6-6 माह निर्धारित थी, जिसे बढ़ाकर अब एक वर्ष कर दिया गया है। अब किसान जिस दिन ऋण लेगा, उस दिनांक से एक वर्ष की अवधि में ऋण चुका सकेगा। प्रदेश में ढाई करोड़ किसानों को सब्सिडी पर बीज उपलब्ध कराया गया है।

    कार्यक्रम में अध्यक्ष अपेक्स बैंक भोपाल के प्रशासक  महेंद्र सिंह यादव, प्रदेश प्रभारी बलराम कृषि महोत्सव  कपिल दार्दे और विधायक निवाड़ी  अनिल जैन, सांसद प्रतिनिधि  राजेश पटेरिया, कलेक्टर मती जमुना भिड़े, पुलिस अधीक्षक डॉ राय सिंह नरवरिया द्वारा अन्य अतिथियों की उपस्थिति में देवेन्द्रपुरा निवासी कृषक  उदयभान कुशवाहा को संरक्षित खेती, पठाराम के कृषक  सतीश बंशकार को औषधिय खेती, तरीचर कलां के कृषक  सुरेश कुमार साहू को निजी कस्टम हायरिंग केंद्र, मड़िया खास के  कुलदीप सिंह दांगी को ई कृषि यंत्र अनुदान, टीला के कृषक  अरविंद घोष को डेयरी प्लस, सुजानपुरा के कृषक  सुरेन्द्र कुमार यादव को गौ-मैत्री योजना, चचावली के कृषक  लालाराम सूत्रकार को प्राकृतिक खेती एवं थौना निवासी  कैलाश नारायण केवट को मत्स्य बीज उत्पादन के लिये सम्मानित किया गया। साथ ही शासकीय कन्या उ. मा. वि निवाड़ी की छात्रा कु. शिवानी कुशवाहा ने कक्षा 10वीं परीक्षा में प्रदेश की प्रवीण सूची में 9वां स्थान प्राप्त करने पर सम्मानित किया गया एवं जिले के मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया।

     

  • कानून-व्यवस्था सुदृढ़ रहे, असामाजिक तत्वों पर हो कठोर कार्रवाई

    कानून-व्यवस्था सुदृढ़ रहे, असामाजिक तत्वों पर हो कठोर कार्रवाई

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सागर जिले के बंडा-शाहगढ़ क्षेत्र में अवैध शराब से लोगों की हुई मृत्यु के प्रकरण में कठोरतापूवर्क कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। किसी भी दोषी को छोड़ा नहीं जाए। जिले में नशा मुक्ति अभियान भी चलाया जाए जिससे ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। उन्होंने मृतकों के प्रति अपनी शोक संवेदना भी व्यक्त की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि क्षेत्र में अवैध शराब सामग्री को जब्त करने की कार्रवाई की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आज सागर के बुन्देलखंड मेडिकल चिकित्सा महाविद्यालय के सभागार में जनप्रतिनिधियों, पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चाक-चौबंद रखने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य शासन अपराध और असामाजिक गतिविधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि जिले के साथ-साथ आस-पास और सीमावर्ती क्षेत्रों में गहन जांच अभियान चलाया जाए। उन्होंने कहा जहाँ कहीं भी शंका या संदिग्ध गतिविधि की गुंजाइश हो, वहाँ तत्परता से पड़ताल की जाए और सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को कहा कि पूरी प्रक्रिया में निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखना अनिवार्य है। उन्होंने कहा अपराधियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई हो, लेकिन यह सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है कि किसी निर्दोष के विरुद्ध कार्रवाई नहीं हो।

    अफवाह फैलाने वालों पर करे सख्त कार्रवाई

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शांति एवं सौहार्द बिगाड़ने की मंशा से सोशल मीडिया या अन्य विभिन्न माध्यमों पर अनावश्यक अफवाह फैलाने वाले तत्वों पर पैनी नजर रखने और उनके खिलाफ कठोर दंडात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

    समाज को साथ लेकर चलेगा नशा विरोधी अभियान

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में नशा विरोधी अभियान को गति देने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि नशे के अवैध कारोबार को पूरी तरह ध्वस्त किया जाए। साथ ही, नशा मुक्ति के क्षेत्र में कार्यरत स्वयंसेवी संस्थाओं और सामाजिक संगठनों को साथ लेकर जनजागरूकता और नशा मुक्ति के प्रभावी कार्यक्रम संचालित किए जाएं।

    प्रदेश में कठोर कानून का है प्रावधान

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार के रहते हुए, पूर्व मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान के समय कठोर कानून बनाया गया कि इसमें धारा 49 और बाकी 304 जोड़ते हुए हत्या से लेकर आजीवन कारावास और फांसी तक की सजा देने का प्रावधान है। इस प्रकार की घटना में लिप्त है, उन पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। हमने प्रशासन को फ्री हैंड दिया है कि वह उस पर कठोर से कठोर कार्रवाई करें, जिनके अवैध अतिक्रमण हैं या अलग से किसी ने इस प्रकार से अपना साम्राज्य चलाया है, उस पर भी काम करें।

    नशा मुक्ति के लिए सबको मिलकर प्रयास करने की जरूरत

    हमने पूरे राज्य में निर्देश जारी किए हैं कि नशा मुक्ति अभियान चलाने के लिए धार्मिक संस्थाओं के साथ, सामाजिक संस्थाओं के साथ-साथ अलग-अलग स्तर पर शासन की ओर से भी नशा मुक्ति के अभियान चलाने की आवश्यकता है। हम सबको इससे निपटने के लिए सामाजिक स्तर पर भी प्रतिबद्धता की जरूरत पड़ेगी।

    मुख्यमंत्री ने अस्पताल के वार्डों में जाकर जाना बंडा के प्रभावितों का हाल, परिजन को बंधाया ढांढस

    बंडा के अवैध शराब मामले के प्रभावितों को त्वरित राहत देने और उनका ढांढस बंधाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव सागर स्थित बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज पहुंचे। उन्होंने अस्पताल के वार्डों में जाकर भर्ती मरीजों का कुशलक्षेम जाना और पीड़ित परिवारों से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने परिजन से कहा कि सरकार हर स्थिति में आपके साथ है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रत्येक मरीज के पास जाकर उनके स्वास्थ्य की स्थिति देखी। पीड़ितों के परिजनों से पूछा—"परिवार में कौन-कौन है? चिंता मत करिए, सरकार हर स्थिति में आपके साथ खड़ी है।" निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने बीएमसी के प्रभारी डीन, अधीक्षक और वरिष्ठ चिकित्सकों से पीड़ितों को सर्वोत्तम इलाज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए है। साथ ही आवश्यक दवाओं, टेस्ट और विशेषज्ञों की तैनाती 24 घंटे सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।

    इस दौरान दमोह सांसद  राहुल सिंह लोधी, रहली विधायक  गोपाल भार्गव, खुरई विधायक  भूपेन्द्र सिंह, सागर विधायक  शैलेन्द्र जैन, नरयावली विधायक  प्रदीप लारिया, बंडा विधायक  वीरेन्द्र सिंह लोधी, बीना विधायक मती निर्मला सप्रे, देवरी विधायक  ब्रज बिहारी पटेरिया, जिला पंचायत अध्यक्ष  हीरा सिंह राजपूत,  श्याम तिवारी, महापौर मती संगीता तिवारी, नगर निगम अध्यक्ष  वृन्दावन अहिरवार अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी, डाक्टर्स, मौजूद थे।

     

  • पावरकॉम पर आर्थिक संकट गहराया, ₹9,650 करोड़ बकाया; खर्च चलाने के लिए ₹10 हजार करोड़ जुटाएगा

    पावरकॉम पर आर्थिक संकट गहराया, ₹9,650 करोड़ बकाया; खर्च चलाने के लिए ₹10 हजार करोड़ जुटाएगा

    पटियाला 

    पंजाब में उपभोक्ताओं को मुफ्त बिजली की सुविधा जारी है लेकिन इसकी कीमत पावरकाम की आर्थिक सेहत पर भारी पड़ रही है। पंजाब सरकार से बिजली सब्सिडी के 7550 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित है, जबकि विभिन्न सरकारी विभागों पर बिजली बिलों के करीब 2100 करोड़ रुपये और बकाया हैं। यानी सरकार और उसके विभागों पर पावरकाम का कुल बकाया करीब 9650 करोड़ रुपये पहुंच गया है। 

    नकदी संकट के बीच पावरकाम को अपने जरूरी खर्च चलाने के लिए बाजार से कर्ज लेने की तैयारी करनी पड़ रही है। 7550 करोड़ रुपये की लंबित सब्सिडी में करीब 4000 करोड़ रुपये पिछले दो वित्तीय वर्षों का बकाया ब्याज समेत है। 

    इसके अलावा करीब 3550 करोड़ रुपये चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 की सब्सिडी के हैं। सरकारी विभागों में जलापूर्ति एवं स्वच्छता विभाग पर करीब 1000 करोड़, स्थानीय निकाय विभाग पर 850 करोड़, ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग पर 380 करोड़ और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग पर करीब 125 करोड़ रुपये के बिजली बिल लंबित हैं।

    आम उपभोक्ता का बिल बकाया होने पर पावरकाम कनेक्शन काट सकता है, लेकिन सरकारी विभागों और आवश्यक सेवाओं के कनेक्शनों पर ऐसी कार्रवाई व्यावहारिक रूप से आसान नहीं है। इसका सीधा असर निगम के कैश फ्लो पर पड़ रहा है। बिजली की बढ़ती मांग के बीच पावरकाम को बाहर से बिजली और कोयला खरीदने, मरम्मत के लिए स्पेयर पार्ट्स व अन्य सामग्री जुटाने तथा वेतन समेत नियमित खर्चों का भुगतान करने के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधनों की जरूरत है।

    बिना सरकारी गारंटी 10 हजार करोड़ जुटाएगा पावरकाम
    आर्थिक दबाव के चलते पावरकाम अब बिना सरकारी गारंटी करीब 10 हजार करोड़ रुपये का बाजार ऋण लेने की तैयारी में है। इसके लिए गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर (एनसीडी) और बॉन्ड जारी करने की योजना बनाई गई है। प्रक्रिया के लिए मर्चेंट बैंकरों से ऑनलाइन बोलियां भी आमंत्रित की गई हैं। पावरकाम पर पहले से करीब 18 हजार करोड़ रुपये की देनदारियां हैं। ऐसे में नया कर्ज उसके ब्याज बोझ को और बढ़ाएगा।

    दरें घटाने से 7800 करोड़ के राजस्व घाटे का खतरा
    पीएसईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन के महासचिव इंजीनियर अजयपाल सिंह अटवाल के मुताबिक, हाल के एआरआर में खर्च का वास्तविक आकलन कम करके बिजली दरें घटाई गईं। उनका दावा है कि इससे पावरकाम पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव पड़ा है और चालू वित्तीय वर्ष में वास्तविक खर्च की जरूरतों के मुकाबले करीब 7800 करोड़ रुपये के राजस्व घाटे का सामना करना पड़ सकता है। वहीं, बिजली दरों में कटौती के बाद सरकार का सालाना सब्सिडी बिल करीब 5300 करोड़ रुपये घटकर लगभग 15,200 करोड़ रुपये रह गया है, लेकिन मौजूदा सब्सिडी का भुगतान समय पर नहीं हो रहा।

    बिजली की रिकॉर्ड मांग के बीच 1584 मेगावाट उत्पादन ठप
    पंजाब में बिजली की रिकॉर्ड मांग के बीच मंगलवार को 1584 मेगावाट उत्पादन क्षमता ठप रही। राज्य में बिजली की मांग 16,505 मेगावाट तक पहुंच गई, जबकि पावरकाम के अपने स्रोतों से महज 4605 मेगावाट बिजली उपलब्ध रही। सरकारी क्षेत्र के गोइंदवाल थर्मल का 270 मेगावाट का एक यूनिट मंगलवार को बंद हो गया। 

    रोपड़ और लहरा मुहब्बत थर्मल का एक-एक यूनिट पहले से बंद है। कोयले की कमी के कारण निजी क्षेत्र के तलवंडी साबो और राजपुरा थर्मल भी पूरी क्षमता से नहीं चल सके। दोनों से 894 मेगावाट कम उत्पादन हुआ। 3380 मेगावाट क्षमता वाले इन दोनों प्लांटों से कुल 2486 मेगावाट बिजली ही मिली। 

    तलवंडी साबो में करीब पांच और राजपुरा में छह दिन का कोयला ही बचा है। रणजीत सागर बांध और यूबीडीसी के चार यूनिट बंद रहने से भी 195 मेगावाट उत्पादन प्रभावित रहा। मंगलवार की मांग पिछले साल के इसी दिन के मुकाबले 7344 मेगावाट अधिक रही। सुबह नौ बजे 16,505 मेगावाट की मांग के मुकाबले पावरकाम ने नार्दर्न ग्रिड से 11,171 मेगावाट बिजली ली, जबकि उसका शेड्यूल 11,150 मेगावाट का था। 

     

  • 2030 तक देश में हर साल 20 लाख कैंसर मरीज! जितेंद्र सिंह ने जताई चिंता, विदिशा में इलाज की सुविधा शुरू

    2030 तक देश में हर साल 20 लाख कैंसर मरीज! जितेंद्र सिंह ने जताई चिंता, विदिशा में इलाज की सुविधा शुरू

    विदिशा 
     देश में पिछले साल 2025 में कुल 12 लाख नए कैंसर रोगी पाए गए. अनुमान है कि साल 2030 तक देश में हर साल 20 लाख कैंसर रोगी मिलेंगे. देश में बढ़ते कैंसर के खतरे पर केंद्रीय परमाणु ऊर्जा राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने ये बात कही. विदिशा मेडिकल कॉलेज में कैंसर डे-केयर सेंटर के शुभारंभ अवसर डॉ. जितेंद्र सिंह बोल रहे थे। 

    विदिशा में लगे कैंप से पता चला खतरा कितना बड़ा
    विदिशा स्थित अटल बिहारी वाजपेयी शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय में कैंसर रोगियों के सुलभ और आधुनिक इलाज के लिए कैंसर कीमोथेरेपी डे-केयर सेंटर का शुभारंभ हुआ. केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया "मुझे पता चला है कि विदिशा में इसी साल जून में आयोजित कैंप में 3 हजार लोगों की जांच की गई. इसमें 600 लोगों में कैंसर कन्फर्म हुआ. इसके अलावा 250 लोग कैंसर के सस्पेक्ट मिले. ये आंकड़े बताते हैं कि कितना बड़ा खतरा हमारे सामने है. सरकार का प्रयास है कि आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं और उन्नत मेडिकल टेक्नोलॉजी का लाभ देश के अंतिम छोर पर बैठे हर नागरिक तक पहुंचे। 

    जीवनशैली में बदलाव लाने पर जोर
    केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा "विदिशा जैसे क्षेत्र में स्थानीय स्तर पर इस प्रकार के डे-केयर मॉडल की शुरुआत अत्यंत सराहनीय और क्रांतिकारी कदम है. कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मरीजों और उनके परिवारों को बड़े शहरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं. अब इस डे-केयर सेंटर के शुरू होने से दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को लाभ मिलेगा. देश में कैंसर के संदिग्ध मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. इलाज के साथ लोगों को जीवनशैली में बदलाव करने और कैंसर के प्रति जागरूकता फैलाने की जरूरत है। 

    डे केयर सेंटर में बैठेंगे विशेषज्ञ डॉक्टर
    इस मौके पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा "विदिशा में कैंसर डे-केयर सेंटर प्रारंभ होने से विदिशा, रायसेन, सीहोर और आसपास के ग्रामीण अंचलों के कैंसर पीड़ितों को कीमोथेरेपी और प्रारंभिक उपचार के लिए भोपाल, इंदौर, दिल्ली या मुंबई जैसे बड़े शहरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. डे-केयर मॉडल के तहत मरीज सुबह अस्पताल आकर विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में कीमोथेरेपी व दवाइयां प्राप्त कर सकेंगे. कैंसर की अगर समय पर पहचान हो जाए तो इसका इलाज संभव है। 

    विदिशा में बनेगा कैंसर अस्पताल : शिवराज
    शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की "आने वाले समय में यहां रेडियोथेरेपी सहित अन्य उन्नत चिकित्सा सुविधाएं विकसित की जाएंगी. विदिशा में पूर्ण कैंसर अस्पताल स्थापित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा. टाटा मेमोरियल सेंटर (मुंबई) के मार्गदर्शन और एम्स भोपाल के तकनीकी समन्वय से ये सेंटर संचालित किया जाएगा. भविष्य के पूर्ण अस्पताल के लिए भूमि चिह्नित करने की प्रक्रिया भी जारी है।