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  • छत्तीसगढ़ के जंगलों में प्लास्टिक फेंका तो खैर नहीं, वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए बड़ा फैसला

    छत्तीसगढ़ के जंगलों में प्लास्टिक फेंका तो खैर नहीं, वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए बड़ा फैसला

    बिलासपुर.

    वन्यप्राणियों की सुरक्षा और संरक्षण को देखते हुए वन मुख्यालय ने बड़ा निर्णय लिया है। एटीआर सहित प्रदेश के सभी वन मंडलों और संरक्षित क्षेत्रों में प्लास्टिक के इस्तेमाल और कचरे पर सख्ती से रोक लगाने के निर्देश जारी किए गए हैं।

    अब यदि किसी सैलानी के पास प्रतिबंधित प्लास्टिक पाया जाता है या उसे जंगल में फेंकते हुए पकड़ा जाता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करते हुए 500 रुपए या उससे अधिक की प्रशमन राशि वसूल की जाएगी।

    वन्यप्राणियों के संरक्षण के लिए सख्त होगी कार्रवाई
    वन्यप्राणियों के संरक्षण और संवर्धन के लिए शासन स्तर पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। प्रदेश के सभी वन मंडलों, रेंज, डिवीजन, अचानकमार टाइगर रिजर्व सहित राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्यों को प्लास्टिक प्रदूषण से मुक्त करने के लिए कार्रवाई का दायरा बढ़ाया जा रहा है। संरक्षित क्षेत्रों में प्रतिबंधित प्लास्टिक मिलने पर केवल समझाइश देने के बजाय तलाशी, जब्ती, प्लास्टिक हटाने और नियमों के तहत प्रशमन राशि वसूलने की कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए सर्किल फॉरेस्ट ऑफिसर और बीट फॉरेस्ट ऑफिसर स्तर तक के अधिकारियों को अधिकार देने के निर्देश जारी किए गए हैं। वन्यजीव प्रबंधन एवं जैव विविधता संरक्षण के प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव वार्डन कार्यालय की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि संरक्षित क्षेत्रों में प्लास्टिक के उपयोग पर पहले से रोक के निर्देश हैं। इसके बावजूद प्लास्टिक के उपयोग और कचरे पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। इसे देखते हुए अब छत्तीसगढ़ प्लास्टिक एवं अन्य जैव अनाशित सामग्री नियम, 2023 के प्रावधानों को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य के नियमों के तहत प्लास्टिक कैरी बैग, नॉन-वूवन पॉलीप्रोपलीन बैग, प्लास्टिक और थर्मोकोल से बने डिस्पोजेबल कप, प्लेट, गिलास, कटोरे, चम्मच और स्ट्रॉ समेत कई वस्तुएं प्रतिबंधित हैं।

    टाइगर रिजर्व में भी सख्त प्रावधान लागू
    अचानकमार टाइगर रिजर्व के अलावा प्रदेश के उदंती-सीतानदी, इंद्रावती और गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व सहित राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्यों के लिए भी निर्देश जारी किए गए हैं। जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि संबंधित क्षेत्रों के सर्किल और बीट फॉरेस्ट अधिकारियों को नियमों के तहत कार्रवाई के लिए अधिकृत एवं सशक्त किया जा सकता है।

    500 से 1 लाख रुपए तक प्रशमन राशि
    नियमों में अपराध की प्रकृति और संबंधित व्यक्ति के आधार पर प्रशमन राशि निर्धारित की गई है। पहली बार उल्लंघन करने पर व्यक्ति या स्ट्रीट वेंडर से 500 रुपए, दुकान या प्रतिष्ठान से 5 हजार रुपए और निर्माता से 1 लाख रुपए तक की राशि ली जा सकती है। दूसरी बार अपराध करने पर यह राशि क्रमशः 5 हजार, 50 हजार और 2 लाख रुपए होगी। इसके बाद के अपराधों को अशमनीय रखा गया है।
    जुर्माने की राशि और अपराध के प्रशमन के रूप में प्राप्त राशि राज्य सरकार के संबंधित खाते में जमा की जाएगी। इस राशि का उपयोग पर्यावरण संरक्षण और पर्यावरण से जुड़ी विभिन्न कार्ययोजनाओं में किया जाएगा।

  • भारत-चीन रिश्तों में नई गर्माहट! 7 साल बाद इंडिया आएंगे शी जिनपिंग, BRICS में होंगे शामिल

    भारत-चीन रिश्तों में नई गर्माहट! 7 साल बाद इंडिया आएंगे शी जिनपिंग, BRICS में होंगे शामिल

     नई दिल्ली
    चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग BRICS समिट में शामिल होने के लिए भारत आ सकते हैं. बीजिंग में चीन के विदेश मंत्रालय यानी MFA की ओर से आज उनके भारत दौरे का आधिकारिक ऐलान किए जाने की उम्मीद है. राष्ट्रपति शी का शनिवार दोपहर दिल्ली पहुंच सकते हैं. शाम करीब छह बजे भारत मंडपम में प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात हो सकती है। 

    BRICS समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच भारत मंडपम में द्विपक्षीय बैठक भी हो सकती है. यह बैठक भारत-चीन रिश्तों के लिहाज से अहम मानी जा रही है। 

    खास बात यह है कि मोदी और शी जिनपिंग की भारतीय जमीन पर करीब 7 साल बाद पहली द्विपक्षीय मुलाकात होगी. यह बैठक गलवान झड़पों के बाद भी दोनों नेताओं की भारत में पहली द्विपक्षीय बैठक होगी। 

    भारत में 12-13 सितंबर को होगा BRICS समिट
    भारत 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है. भारत इस साल BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और इसकी थीम "Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability" रखी गई है। 

    सम्मेलन में सदस्य और पार्टनर देशों के नेता वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों के साथ BRICS के बीच राजनीतिक-सुरक्षा, आर्थिक-वित्तीय और लोगों के बीच सहयोग बढ़ाने पर चर्चा करेंगे. 2026 में BRICS की स्थापना के 20 साल भी पूरे हो रहे हैं। 

    NSG कमांडो समेत 25000 जवान होंगे तैनात; जानें 11 बड़े सुरक्षा इंतजाम

     18वें BRICS शिखर सम्मेलन के लिए राजधानी दिल्ली को अभेद्य सुरक्षा घेरे में तब्दील किया जा रहा है। इस सम्मेलन में शिरकत करने 11 सदस्य देशों और 10 साझेदार देशों के राष्ट्राध्यक्ष और प्रतिनिधि आ रहे हैं। इनमें दो नाम बेहद अहम माने जा रहे हैं- पहला, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन और दूसरा चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग। इनके आने की भी संभावना है। तीन दिवसीय BRICS समिट 11 सितंबर से शुरू होगा। सुरक्षा व्यवस्था का स्तर 2023 में हुए G20 शिखर सम्मेलन के करीब रखा जा रहा है।

    दिल्ली पुलिस की सुरक्षा यूनिट ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर व्यापक सुरक्षा प्लान तैयार किया है। करीब 25000 जवानों को तैनात किया जाएगा। इसमें 100 से अधिक NSG कमांडो भी शामिल होंगे। एंटी-ड्रोन सिस्टम और लगातार मॉक ड्रिल के जरिए दिल्ली में जमीन से लेकर आसमान तक सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जा रही है।आइए जानते हैं BRICS समिट के लिए दिल्ली में किए जा रहे 11 बड़े सुरक्षा इंतजाम…

        25000 जवान संभालेंगे सुरक्षा की कमान
    BRICS समिट के दौरान दिल्ली में करीब 25000 सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की जा रही है। दिल्ली पुलिस के अलावा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के जवान भी सुरक्षा व्यवस्था में शामिल होंगे।

        100 से ज्यादा NSG कमांडो तैनात
    VVIP सुरक्षा को देखते हुए 100 से अधिक NSG कमांडो भी तैनात किए जा रहे हैं। भारत मंडपम समेत संवेदनशील स्थानों पर विशेष सुरक्षा व्यवस्था रहेगी। विदेशी राष्ट्राध्यक्षों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा एजेंसियां लगातार खतरे का आकलन करेंगी।

        आसमान पर एंटी-ड्रोन सिस्टम से नजर
    समिट के दौरान ड्रोन और अन्य फ्लाइंग ऑब्जेक्ट्स से हर हवा में मौजूद खतरों पर निगरानी की जाएगी। संभावित खतरे को देखते हुए एंटी-ड्रोन सिस्टम तैनात किए जाएंगे।

        भारत मंडपम से होटलों तक हाई-सिक्योरिटी कॉरिडोर
    समिट का मुख्य आयोजन स्थल भारत मंडपम होगा। विदेशी राष्ट्राध्यक्षों और मेहमानों के ठहरने वाले होटलों से भारत मंडपम तक के पूरे रूट को हाई-सिक्योरिटी कॉरिडोर के तौर पर तैयार किया जा रहा है। करीब 30 DCP रैंक के अधिकारी इसकी निगरानी करेंगे।

        10 होटलों पर विशेष सुरक्षा
    विदेशी मेहमानों और प्रतिनिधिमंडलों से जुड़े 10 होटल सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम होंगे। इन होटलों के आसपास सुरक्षा बढ़ाई जा रही है।

        VVIP काफिलों की बार-बार मॉक ड्रिल
    सुरक्षा व्यवस्था को परखने के लिए दिल्ली पुलिस, दिल्ली ट्रैफिक पुलिस, विदेश मंत्रालय और अन्य एजेंसियां लगातार मॉक ड्रिल कर रही हैं। VVIP मोटरकेड की आवाजाही का 12 प्रमुख स्थानों पर अभ्यास किया जा रहा है, ताकि वास्तविक मूवमेंट के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो।

        22 डायवर्जन पॉइंट, 4800 ट्रैफिक पुलिसकर्मी
    विदेशी राष्ट्राध्यक्षों और प्रतिनिधियों के काफिलों की आवाजाही के दौरान ट्रैफिक को नियंत्रित करने के लिए 22 डायवर्जन पॉइंट बनाए गए हैं। करीब 4,800 ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की तैयारी है। VVIP मूवमेंट के दौरान आम लोगों को ट्रैफिक संबंधी दिक्कतों से बचाने के लिए रूट डायवर्जन किए जाएंगे।

        मोटरकेड की गाड़ियों में GPS
    VVIP काफिले में शामिल वाहनों को GPS से लैस किया जा रहा है। इससे सुरक्षा एजेंसियां मोटरकेड में शामिल वाहनों की स्थिति को रियल टाइम में मॉनिटर कर सकेंगी। एयरपोर्ट, होटल और भारत मंडपम के बीच होने वाली आवाजाही पर विशेष नजर रहेगी।

        एंटी-सैबोटाज और बम निरोधक दस्ते सक्रिय
    भारत मंडपम, होटल और VVIP रूट पर एंटी-सैबोटाज टीम तथा बम डिटेक्शन एंड डिस्पोजल स्क्वॉड सुरक्षा जांच कर रहे हैं। संवेदनशील स्थानों की जांच और संदिग्ध वस्तुओं या गतिविधियों पर नजर रखने के लिए विशेष टीमें तैनात रहेंगी।

        दिल्ली ही नहीं, पड़ोसी राज्यों तक सुरक्षा ग्रिड
    BRICS की सुरक्षा व्यवस्था को दिल्ली की सीमाओं तक सीमित नहीं रखा गया है। दिल्ली पुलिस हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और चंडीगढ़ की पुलिस एवं सुरक्षा एजेंसियों के साथ काम कर रही है। संदिग्ध लोगों और वाहनों की जांच, सीमा पर निगरानी और खुफिया सूचनाओं को तेजी से साझा करने के लिए साझा सुरक्षा ग्रिड तैयार किया गया है।

        खाकी वर्दी में दिखेंगे CAPF जवान
    BRICS ड्यूटी में लगाए गए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के जवानों के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है। BSF, ITBP और CRPF समेत CAPF के जवानों को खाकी वर्दी पहनने की सलाह दी गई है।

    पुतिन और शी जिनपिंग जैसे हाई-प्रोफाइल नेताओं के संभावित दौरे को देखते हुए दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए जमीन, सड़क और आसमान- तीनों स्तरों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर रही हैं।

    आखिरी बार अक्टूबर 2019 में शी जिनपिंग आए थे भारत
    चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की पिछली भारत यात्रा 11-12 अक्टूबर 2019 को हुई थी. तब वह तमिलनाडु के मामल्लापुरम पहुंचे थे, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ भारत-चीन के दूसरे अनौपचारिक शिखर सम्मेलन में शामिल हुए थे. यह 2018 में चीन के वुहान में हुई पहली अनौपचारिक बैठक के बाद दोनों नेताओं की दूसरी ऐसी मुलाकात थी. इस दौरान दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय रिश्तों के साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की थी। 

  • जेल से बाहर आने की उम्मीदों पर फिरा पानी, सुप्रीम कोर्ट ने अबू सलेम की प्रीमैच्योर रिलीज याचिका ठुकराई

    जेल से बाहर आने की उम्मीदों पर फिरा पानी, सुप्रीम कोर्ट ने अबू सलेम की प्रीमैच्योर रिलीज याचिका ठुकराई

    मुंबई 

    1993 के मुंबई धमाका मामले में दोषी करार कुख्‍यात गैंगस्‍टर अबू सलेम को सुप्रीम कोर्ट से तगड़ा झटका लगा है. शीर्ष अदालत ने अबू सलेम की समयपूर्व रिहाई वाली याचिका को खारिज कर दिया है. इसका मतलब यह है कि अबू सलेम जेल से बाहर नहीं आ सकेगा. उसका कानूनी तिकड़म फेल हो गया है. इस मामले में अबू सलेम को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है. बता दें कि वॉन्‍टेड गैंगस्‍टर को पुर्तगाल से प्रत्‍यर्पित करा कर भारत लाया गया था।

    आपको बता दें कि इसी साल अप्रैल में बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा रिहाई की याचिका खारिज किए जाने के बाद अबू सलेम ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। उसे 1995 में बिजनेसमैन प्रदीप जैन की हत्या के मामले में 2015 में और 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में 2017 में TADA की स्पेशल कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी। सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा, "साधारण हिसाब से भी देखें तो 11 नवंबर, 2005 को जेल जाने की तारीख से आपके 25 साल पूरे नहीं हुए हैं।"

    अबू सलेम को मुंबई ब्लास्ट और प्रदीप जैन की हत्या के मामलों में मुकदमे का सामना करने के लिए भारत प्रत्यर्पित किया गया था, जब भारत सरकार ने यह पक्का भरोसा दिया था कि उसे 25 साल से ज्यादा जेल की सजा नहीं दी जाएगी। जब ट्रायल कोर्ट ने दोनों मामलों में उम्रकैद की सजा सुनाई तो सुप्रीम कोर्ट ने 13 जुलाई, 2022 को पुर्तगाल को दिए गए भारत के पक्के भरोसे के मुताबिक उसकी सजा को घटाकर 25 साल कर दिया।

    क्या थी अबु सलेम की दलील?
    अबू सलेम की तरफ से कहा गया था कि सजा में मिलने वाली छूट (remission) को जोड़ने पर उसने 25 साल की सजा पूरी कर ली है, इसलिए उसे रिहा किया जाए। हालांकि, बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा था कि उसकी याचिका समय से पहले दायर की गई है। उसकी 25 साल की अवधि 2030 में पूरी होगी। अबू सलेम ने हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को सही माना है। आपको बता दें कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल महीने में भी अबू सलेम की याचिका को खारिज कर दिया था।

    क्या है पूरा केस?
    आपको बता दें कि 12 मार्च 1993 को मुंबई में एक के बाद एक 12 बड़े बम धमाके हुए थे। इन धमाकों में 250 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी और करीब 700 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। इस मामले में अबू सलेम को साल 2005 में पुर्तगाल से प्रत्यर्पित किया गया था। अबु सलेम को कोर्ट ने मुंबई ब्लास्ट में शामिल होने के लिए आजीवन कारावास की सजा दी थी। 

    क्या था अबू सलेम का तर्क?
    सुप्रीम कोर्ट में पहले हुई कार्यवाही में केंद्र सरकार ने तर्क दिया था कि उसकी 25 साल की सजा 11 नवंबर, 2005 से शुरू हुई थी और यह नवंबर 2030 में खत्म होगी। वहीं, अबू सलेम ने तर्क दिया है कि सजा की अवधि की गिनती 18 सितंबर 2002 से की जानी चाहिए जब भारत के कहने पर इंटरपोल द्वारा जारी रेड कॉर्नर नोटिस के बाद उसे पुर्तगाल में हिरासत में लिया गया था। केंद्र सरकार का तर्क है कि अबू सलेम को पुर्तगाल में पासपोर्ट से जुड़े एक अपराध के सिलसिले में हिरासत में लिया गया था और उसकी हिरासत का उस अपराध से कोई लेना-देना नहीं था जिसके लिए उसे प्रत्यर्पित किया गया था।

    कौन है अबू सलेम?
    अबू सलेम अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के सिंडिकेट का हिस्सा था। जून 2017 में अबू सलेम को 1993 के मुंबई धमाकों के मामले में दोषी ठहराया गया और उम्रकैद की सजा सुनाई गई। उसे सीरियल बम धमाकों में इस्तेमाल के लिए गुजरात से मुंबई हथियार ले जाने का दोषी पाया गया था। इन धमाकों में 257 लोगों की मौत हुई थी और 700 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।

     

  • 1937 में यूपी के प्रीमियर बने पंत जी, प्रथम मुख्यमंत्री के रूप में उत्तर प्रदेश में रखी सुशासन की नींव- सीएम योगी

    1937 में यूपी के प्रीमियर बने पंत जी, प्रथम मुख्यमंत्री के रूप में उत्तर प्रदेश में रखी सुशासन की नींव- सीएम योगी

    पंडित गोविंद बल्लभ पंत की 139वीं जयंती पर सीएम योगी ने दी श्रद्धाजंलि, उनके योगदान को किया नमन

    पंडित गोविंद बल्लभ पंत ने स्वतंत्रता संग्राम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, काकोरी के क्रांतिकारियों की मजबूती से की थी पैरवी: मुख्यमंत्री

    1937 में यूपी के प्रीमियर बने पंत जी, प्रथम मुख्यमंत्री के रूप में उत्तर प्रदेश में रखी सुशासन की नींव- सीएम योगी

    सीएम ने कहा- गृहमंत्री के रूप में पंत जी ने भाषाई संघर्ष का समाधान कर हिंदी को दिलाया सम्मान

    लखनऊ
     महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, देश के पूर्व गृहमंत्री और उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत की 139वीं जयंती पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पंडित गोविंद बल्लभ पंत के स्वतंत्रता आंदोलन, राष्ट्र निर्माण और उत्तर प्रदेश के विकास में योगदान का उल्लेख करते हुए उनकी स्मृतियों को नमन किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री पंडित गोविंद वल्लभ पंत जी की पावन जयंती है। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार और प्रदेश की जनता की ओर से वह पंत जी की स्मृतियों को नमन करते हुए उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।

    काकोरी के क्रांतिकारियों की मजबूती से की पैरवी
    मुख्यमंत्री ने कहा कि पंडित गोविंद बल्लभ पंत महान अधिवक्ता होने के साथ-साथ प्रमुख स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। वर्ष 1925 में काकोरी ट्रेन एक्शन के बाद ब्रिटिश हुकूमत ने क्रांतिकारियों के खिलाफ जो अभियोग दर्ज किया था, उसके खिलाफ क्रांतिकारियों की पैरवी मजबूती के साथ करने वाले महान नेताओं में पंडित गोविंद बल्लभ पंत प्रमुख थे। उन्होंने देश की आजादी के आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लिया।

    सीएम योगी ने कहा कि वर्ष 1937 में पंत जी को यूपी के प्रीमियर के रूप में चुना गया, लेकिन कुछ समय बाद उन्होंने पद से इस्तीफा देकर स्वाधीनता आंदोलन में अपनी सक्रिय भूमिका जारी रखी। भारत छोड़ो आंदोलन समेत समय-समय पर हुए स्वतंत्रता संग्राम के विभिन्न बड़े आंदोलनों में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

    प्रथम मुख्यमंत्री के रूप में सुशासन की नींव रखी
    मुख्यमंत्री ने कहा कि 1947 में देश की आजादी के साथ पंडित गोविंद बल्लभ पंत उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री बने। उस समय उत्तराखंड भी उत्तर प्रदेश का हिस्सा था। ऐसे में इतने बड़े राज्य की व्यवस्था को सुशासन के मॉडल के रूप में प्रस्तुत करने के साथ ही आर्थिक उन्नयन और समाज के प्रत्येक वर्ग के हितों के लिए उन्होंने काम किया। पंत जी ने अनेक महत्वपूर्ण सुधार किए। उनके द्वारा प्रस्तुत लैंड रिफॉर्म मॉडल भी महत्वपूर्ण रहा। 

    गृहमंत्री के रूप में निभाई अहम भूमिका
    सीएम योगी ने कहा कि वर्ष 1954 में पंडित गोविंद बल्लभ पंत देश के गृह मंत्री बने। गृह मंत्री के रूप में उन्होंने देश के भीतर चल रहे भाषाई संघर्ष और समाज में नए विभाजन की नींव डालने के प्रयासों का सूझ-बूझ के साथ समाधान निकाला। हिंदी को राजभाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

  • योगी सरकार की बाढ़ पर पैनी नजर, 21,333 लोगों को सुरक्षित निकाला; अब तक जनहानि शून्य

    योगी सरकार की बाढ़ पर पैनी नजर, 21,333 लोगों को सुरक्षित निकाला; अब तक जनहानि शून्य

    योगी सरकार का बाढ़ राहत अभियान जारी, 21,333 लोग सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया, अब तक जनहानि शून्य

    बाढ़ प्रभावितों को 8.58 लाख लंच पैकेट वितरित किए गए, स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए 1,139 मेडिकल टीमें तैनात

    2,304 नाव-मोटरबोट से जारी चलाया गया बचाव अभियान, राहत शरणालयों में मिला प्रभावितों को ठिकाना

    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश में बाढ़ की चुनौती के बीच योगी सरकार ने राहत एवं बचाव अभियान को और तेज कर दिया है। प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री, भोजन, स्वास्थ्य सुविधाएं और अन्य आवश्यक सहायता पहुंचाई जा रही है। उत्तर प्रदेश राहत आयुक्त कार्यालय के मुताबिक प्रशासन की सक्रियता और लगातार निगरानी के बीच अब तक 21,333 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। वहीं अब तक पशुहानि और जनहानि शून्य दर्ज की गई है।

    वर्तमान में 26 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। राहत एवं बचाव अभियान के तहत बुधवार को ही 7,903 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। अब तक कुल 21,333 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाकर बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत दी गई है। जलभराव और दुर्गम क्षेत्रों में फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए 2,304 नाव एवं मोटरबोट का इस्तेमाल किया जा चुका है।

    8.58 लाख से अधिक लंच पैकेट वितरित
    बाढ़ प्रभावित परिवारों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए व्यापक अभियान जारी है। अब तक 8.58 लाख से अधिक लंच पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। बुधवार को भी 83,545 लंच पैकेट प्रभावित लोगों तक पहुंचाए गए। इसके साथ ही अब तक 1.38 लाख से ज्यादा बाढ़ राहत किट वितरित किए गए हैं।

    राहत शरणालयों में 7,581 लोग ले रहे आश्रय
    प्रभावित लोगों को सुरक्षित ठिकाना उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश में अब तक 1,343 बाढ़ शरणालय स्थापित किए गए हैं। इनमें 7,581 लोग रह रहे हैं।

    बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बीमारियों की रोकथाम और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 1,139 मेडिकल टीमें गठित की गई हैं। स्वच्छ पेयजल और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए अब तक 7.09 लाख से अधिक क्लोरीन टैबलेट व 2.88 लाख से ज्यादा ओआरएस पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। इससे प्रभावित परिवारों को संक्रमण और जलजनित बीमारियों से बचाने में मदद मिल रही है।

    प्रभावित जिले
    अयोध्या, आजमगढ़, बहराइच, बदायूं, बलिया, बाराबंकी, बस्ती, फर्रुखाबाद, गाजीपुर, गोंडा, गोरखपुर, हरदोई, कासगंज, कौशांबी, कानपुर नगर, लखीमपुर खीरी, मिर्जापुर, मुरादाबाद, प्रयागराज, रायबरेली, संत कबीर नगर, रामपुर, सीतापुर, शाहजहांपुर, उन्नाव और वाराणसी।

  • रायपुर में अफसरों की फील्ड विजिट पर जोर, अरुण साव बोले- जमीनी हकीकत देखकर तेज करें काम

    रायपुर में अफसरों की फील्ड विजिट पर जोर, अरुण साव बोले- जमीनी हकीकत देखकर तेज करें काम

    रायपुर : सुबह शहर में निकलें अधिकारी, जमीनी हकीकत देखें और काम कराएं : अरुण साव

    उप मुख्यमंत्री ने नगर निगमों और जिला मुख्यालय वाले नगर पालिकाओं के कार्यों की समीक्षा की

    संपत्ति कर के भुगतान के लिए निकायों में ऑनलाइन व्यवस्था बनाने के दिए निर्देश, सभी कार्यों और योजनाओं की नियमित समीक्षा के लिए प्रभावी कार्यपद्धति अपनाने कहा

    जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और उपयोग किए गए पानी के पुनः उपयोग की व्यापक कार्ययोजना बनाने के निर्देश, अगले 50 वर्षों की जरूरत को देखते हुए बनाएं दीर्घकालिक योजना

    रायपुर.

    उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने आज राज्य के सभी नगर निगमों तथा जिला मुख्यालय वाले नगर पालिकाओं के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने नवा रायपुर स्थित विश्राम भवन में आयोजित बैठक में निगम आयुक्तों और मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को शहरों के विकास, स्वच्छता, राजस्व वसूली, योजनाओं के क्रियान्वयन और निर्माण कार्यों में तेजी लाने के साथ ही जवाबदेही से काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नगरीय निकाय केवल बजट खर्च करने वाली संस्था नहीं, बल्कि शहर के भविष्य की योजनाएं बनाने, जनसुविधाएं उपलब्ध कराने तथा नागरिकों की कल्याणकारी संस्था है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा और संचालक नीलेशकुमार क्षीरसागर भी समीक्षा बैठक में शामिल हुए।

    सुबह शहर में निकलें अधिकारी, जमीनी हकीकत देखें और काम कराएं : अरुण साव

    उप मुख्यमंत्री साव ने बैठक में कहा कि शहरों के विकास के काम तथा राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ लोगों तक समय पर पहुंचे, इसके लिए अधिकारी सक्रियता से काम करें। प्रधानमंत्री आवास योजना और पीएम स्वनिधि योजनाओं का लाभ ज्यादा से ज्यादा जरूरतमंदों तक पहुंचाएं। उन्होंने निकायों की आय बढ़ाने के लिए संपत्तियों के सर्वे कर नई संपत्तियों की पहचान करने और संपत्ति कर जमा करने के लिए ज्यादा से ज्यादा निकायों में आनलाइन भुगतान की सुविधा विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने निकायों के अभियंताओं से कहा कि वे निर्माण कार्यों में तेजी और गुणवत्ता सुनिश्चित करें तथा निर्माणाधीन कार्यों की कड़ाई से निरीक्षण करें। उन्होंने सप्ताह के अलग-अलग दिनों में राजस्व वसूली, निर्माण कार्यों, साफ-सफाई और योजनाओं के क्रियान्वयन की नियमित समीक्षा के लिए कार्य-पद्धति विकसित करने के निर्देश दिए। 

    उप मुख्यमंत्री ने अवैध कब्जों और अतिक्रमणों का पता चलते ही तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अवैध निर्माण पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से भविष्य में सड़क, पानी, बिजली और अन्य सुविधाओं का अतिरिक्त भार निकाय पर पड़ता है। उन्होंने निगम आयुक्तों और सीएमओ को प्रतिदिन प्रातः भ्रमण कर साफ-सफाई की व्यवस्था और निर्माण कार्यों के निरीक्षण के निर्देश दिए। इससे कार्यों की मैदानी हकीकत पता चलने के साथ ही शहर की समस्याओं और लोगों के फीडबैक की भी जानकारी मिलेगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में निवेश और पर्यटन की संभावनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में शहरों की अधोसंरचना भी भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित होनी चाहिए। 

    साव ने नगरीय निकायों में अगले 50 वर्षों की जल की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए चिंतन शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और उपयोग किए गए पानी के पुनः उपयोग की व्यापक योजना बनाने पर जोर देते हुए शहरों के सभी घरों में पेयजल आपूर्ति की पुख्ता व्यवस्था तैयार करने को कहा। भविष्य के जल संकट से बचने के लिए अभी से दीर्घकालिक रणनीति बनाकर काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि निकायों के अधिकारी ही शहर की छवि और विकास की दिशा तय करने वाले प्रमुख जिम्मेदार अधिकारी हैं, इसलिए पूरी क्षमता, संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ काम करें।

    शहरों की व्यवस्था ऐसी हो कि नागरिकों को निकाय की मौजूदगी का अहसास हो : सोनमणि बोरा

    नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने समीक्षा बैठक में अधिकारियों से कहा कि नगरीय निकायों का दायित्व केवल निर्माण कार्यो और योजनाओं को पूरा करना नहीं है, बल्कि शहर की व्यवस्थाओं का निर्बाध और सुचारू संचालन भी है। तेजी से हो रहे शहरीकरण और बढ़ती जनआकांक्षाओं के अनुरूप निकायों को भविष्य की जरूरतों का रोडमैप तैयार कर उस पर प्रभावी ढंग से अमल करना होगा। शहरवासियों को निकाय की मौजूदगी का अहसास होना चाहिए। उन्हें विभिन्न आयोजनों व कार्यक्रमों में सहभागी बनाया जाना चाहिए। 

    प्रमुख सचिव बोरा ने कहा कि नगरीय निकायों का काम संवैधानिक जिम्मेदारी है और इसका कार्यक्षेत्र बेहद व्यापक है। नागरिकों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ ही शहरों में आधुनिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करना भी निकायों की जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि योजनाओं और विकास कार्यों का असर कागजों में नहीं, बल्कि धरातल पर स्पष्ट दिखाई देना चाहिए। निगम आयुक्त और सीएमओ शहरी विकास और कल्याण की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें।

    उन्होंने शहरों में उपलब्ध खाली स्थानों का चिन्हांकन कर वहां सघन वृक्षारोपण कराने और 'अर्बन फारेस्ट' विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने फुटपाथों को अतिक्रमणमुक्त रखने और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के निर्देशों का गंभीरता और सक्रियता से पालन करने को कहा। उन्होंने सामान्य सभा और एमआईसी की बैठकें भी समयबद्ध तरीके से नियमित रूप से आयोजित करने के निर्देश दिए।

    समीक्षा बैठक में निर्माणाधीन सभी नालंदा परिसरों को शीघ्र शुरू करने की दिशा में आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी करने पर भी जोर दिया गया। प्रमुख सचिव ने फर्नीचर, आइटी सुविधाओं, किताबों तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए राशि स्वीकृत कर जल्द टेंडर जारी करने के निर्देश दिए। सूडा के सीईओ सुमित अग्रवाल, अपर संचालक पुलक भट्टाचार्य और मुख्य अभियंता रमेश शर्मा सहित सभी नगर निगमों के आयुक्त, जिला मुख्यालय वाले नगरीय निकायों के सीएमओ, राजस्व अधिकारी, वरिष्ठ अभियंता और संभागीय कार्यालयों के संयुक्त संचालक भी समीक्षा बैठक में मौजूद थे।

    इन कार्यों की हुई समीक्षा

    उप मुख्यमंत्री साव ने बैठक में मुख्यमंत्री एवं उप मुख्यमंत्री की घोषणाओं की अद्यतन स्थिति, अधोसंरचना कार्यों, नालंदा परिसर, मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, 15वें वित्त आयोग, स्वच्छ भारत मिशन, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, अमृत मिशन, जल आवर्धन योजनाओं, पीएम स्वनिधि और पीएम ई-बस सहित विभिन्न राज्य प्रवर्तित योजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने राजस्व वसूली, वेतन भुगतान, एनर्जी बिल ऑडिट, एबीसी रूल्स एवं गोधाम योजना, निकायों की टीम द्वारा प्रतिदिन मॉर्निंग विजिट, सीएम हेल्पलाइन, लोक सेवा गारंटी और रेन वाटर हार्वेस्टिंग कार्यों की प्रगति की भी समीक्षा की। 

  • कानून-व्यवस्था सुदृढ़ रहे, असामाजिक तत्वों पर हो कठोर कार्रवाई  : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    कानून-व्यवस्था सुदृढ़ रहे, असामाजिक तत्वों पर हो कठोर कार्रवाई : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    आमजन की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता, सागर के अवैध शराब मामले की होगी न्यायिक जांच : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    लापरवाही और अनियमितता पर ज़ीरो टालरेंस, सबकी जवाबदेही तय की जाएगी
    सागर के अवैध शराब मामले में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का बड़ा और कड़ा एक्शन
    इरशाद वली बनाए गए सागर संभाग के नए आईजी

    सागर 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को विदेश दौरे से लौटते ही सागर में अवैध शराब से मृत्यु के मामले में बड़ा और कड़ा एक्शन लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सागर के अवैध शराब मामले की न्यायिक जांच कराने के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा है कि आमजन की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस मामले में सभी दोषियों पर कठोरतम  कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि लापरवाही और अनियमितता पर सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति है। सभी की जवाबदेही तय की जाएगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश पर दिलीप कुमार ने सागर संभाग के आयुक्त पद की कमान संभाल ली है। इस गंभीर मामले में मुख्यमंत्री ने सख्त और निर्णायक प्रशासनिक निर्णय लेते हुए इरशाद वली को सागर पुलिस रेंज के नए पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) की जिम्मेदारी सौंपी है।

    जिम्मेदारों पर कठोरतापूर्वक कार्रवाई की जाए सुनिश्चित

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सागर जिले के बंडा-शाहगढ़ क्षेत्र में अवैध शराब से लोगों की हुई मृत्यु के प्रकरण में कठोरतापूवर्क कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। किसी भी दोषी को छोड़ा नहीं जाए। जिले में नशा मुक्ति अभियान भी चलाया जाए जिससे ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। उन्होंने मृतकों के प्रति अपनी शोक संवेदना भी व्यक्त की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि क्षेत्र में अवैध शराब सामग्री को जब्त करने की कार्रवाई की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आज सागर के बुन्देलखंड मेडिकल चिकित्सा महाविद्यालय के सभागार में जनप्रतिनिधियों, पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चाक-चौबंद रखने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य शासन अपराध और असामाजिक गतिविधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि जिले के साथ-साथ आस-पास और सीमावर्ती क्षेत्रों में गहन जांच अभियान चलाया जाए। उन्होंने कहा जहाँ कहीं भी शंका या संदिग्ध गतिविधि की गुंजाइश हो, वहाँ तत्परता से पड़ताल की जाए और सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को कहा कि पूरी प्रक्रिया में निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखना अनिवार्य है। उन्होंने कहा अपराधियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई हो, लेकिन यह सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है कि किसी निर्दोष के विरुद्ध कार्रवाई नहीं हो।

    अफवाह फैलाने वालों पर करे सख्त कार्रवाई
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शांति एवं सौहार्द बिगाड़ने की मंशा से सो
    शल मीडिया या अन्य विभिन्न माध्यमों पर अनावश्यक अफवाह फैलाने वाले तत्वों पर पैनी नजर रखने और उनके खिलाफ कठोर दंडात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

    समाज को साथ लेकर चलेगा नशा विरोधी अभियान
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में नशा विरोधी अभियान को गति देने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि नशे के अवैध कारोबार को पूरी तरह ध्वस्त किया जाए। साथ ही, नशा मुक्ति के क्षेत्र में कार्यरत स्वयंसेवी संस्थाओं और सामाजिक संगठनों को साथ लेकर जनजागरूकता और नशा मुक्ति के प्रभावी कार्यक्रम संचालित किए जाएं।

    प्रदेश में कठोर कानून का है प्रावधान
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार के रहते हुए, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के समय कठोर कानून बनाया गया कि इसमें धारा 49 और बाकी 304 जोड़ते हुए हत्या से लेकर आजीवन कारावास और फांसी तक की सजा देने का प्रावधान है। इस प्रकार की घटना में लिप्त है, उन पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। हमने प्रशासन को फ्री हैंड दिया है कि वह उस पर कठोर से कठोर कार्रवाई करें, जिनके अवैध अतिक्रमण हैं या अलग से किसी ने इस प्रकार से अपना साम्राज्य चलाया है, उस पर भी काम करें।

    नशा मुक्ति के लिए सबको मिलकर प्रयास करने की जरूरत
    हमने पूरे राज्य में निर्देश जारी किए हैं कि नशा मुक्ति अभियान चलाने के लिए धार्मिक संस्थाओं के साथ, सामाजिक संस्थाओं के साथ-साथ अलग-अलग स्तर पर शासन की ओर से भी नशा मुक्ति के अभियान चलाने की आवश्यकता है। हम सबको इससे निपटने के लिए सामाजिक स्तर पर भी प्रतिबद्धता की जरूरत पड़ेगी।

    मुख्यमंत्री ने अस्पताल के वार्डों में जाकर जाना बंडा के प्रभावितों का हाल, परिजन को बंधाया ढांढस
    बंडा के अवैध शराब मामले के प्रभावितों को त्वरित राहत देने और उनका ढांढस बंधाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव सागर स्थित बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज पहुंचे। उन्होंने अस्पताल के वार्डों में जाकर भर्ती मरीजों का कुशलक्षेम जाना और पीड़ित परिवारों से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने परिजन से कहा कि सरकार हर स्थिति में आपके साथ है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रत्येक मरीज के पास जाकर उनके स्वास्थ्य की स्थिति देखी। पीड़ितों के परिजनों से पूछा—"परिवार में कौन-कौन है? चिंता मत करिए, सरकार हर स्थिति में आपके साथ खड़ी है।" निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने बीएमसी के प्रभारी डीन, अधीक्षक और वरिष्ठ चिकित्सकों से पीड़ितों को सर्वोत्तम इलाज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए है। साथ ही आवश्यक दवाओं, टेस्ट और विशेषज्ञों की तैनाती 24 घंटे सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।

    इस दौरान दमोह सांसद राहुल सिंह लोधी, रहली विधायक गोपाल भार्गव, खुरई विधायक भूपेन्द्र सिंह, सागर विधायक शैलेन्द्र जैन, नरयावली विधायक प्रदीप लारिया, बंडा विधायक वीरेन्द्र सिंह लोधी, बीना विधायक श्रीमती निर्मला सप्रे, देवरी विधायक ब्रज बिहारी पटेरिया, जिला पंचायत अध्यक्ष हीरा सिंह राजपूत, श्याम तिवारी, महापौर श्रीमती संगीता तिवारी, नगर निगम अध्यक्ष वृन्दावन अहिरवार अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी, डाक्टर्स, मौजूद थे।

     

  • शिक्षा में AI के बढ़ते इस्तेमाल पर ब्रजेश पाठक का बड़ा बयान, बोले- शिक्षक जरूरी, तकनीक बनेगी बदलाव का माध्यम

    शिक्षा में AI के बढ़ते इस्तेमाल पर ब्रजेश पाठक का बड़ा बयान, बोले- शिक्षक जरूरी, तकनीक बनेगी बदलाव का माध्यम

    एआई शिक्षकों का विकल्प नहीं, शिक्षा को नई दिशा देने का माध्यम : ब्रजेश पाठक

    इंस्पिरेशन एकेडमिक कंसल्टेंट्स के शिक्षण संवाद कार्यक्रम में डिप्टी सीएम ने रखे विचार 

    कहा- शिक्षा के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा उत्तर प्रदेश

    लखनऊ
    इंस्पिरेशन एकेडमिक कंसल्टेंट्स की ओर से लखनऊ में आयोजित ‘शिक्षक संवाद’ कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को लेकर रोजगार समाप्त होने की आशंका जताई जा रही है, लेकिन तकनीक के विकास के साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। एआई को चुनौती के बजाय अवसर के रूप में स्वीकार करने की जरूरत है।
    उपमुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की शिक्षा परंपरा अत्यंत समृद्ध रही है। तक्षशिला और नालंदा जैसे विश्वविद्यालय हमारी गौरवशाली शैक्षिक विरासत के प्रतीक हैं। आज बदलते तकनीकी दौर में शिक्षा व्यवस्था को भी समय की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करना जरूरी है। एआई और आधुनिक तकनीक का बेहतर उपयोग शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। 

    शिक्षक भावी पीढ़ी के निर्माण और संस्कारों के संवाहक
    उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान देने वाले नहीं, बल्कि भावी पीढ़ी के निर्माण और संस्कारों के संवाहक हैं। बदलते शिक्षा परिवेश में शिक्षकों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। शिक्षा से जुड़े अभियानों के माध्यम से प्रदेश में बड़ी संख्या में बच्चे विद्यालयों से जुड़ रहे हैं।

    83 मेडिकल कॉलेज पूरी क्षमता से कर रहे काम
    डिप्टी सीएम ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश में मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में 83 मेडिकल कॉलेज पूरी क्षमता से काम कर रहे हैं। वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में करीब 40 मेडिकल कॉलेज थे। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा कौशल विकास के क्षेत्र में भी लगातार कार्य किया जा रहा है, जिससे युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध हो सकें।

    ओडीओपी से पूरी दुनिया में मिली पहचान
    उन्होंने ‘एक जनपद, एक उत्पाद’ (ओडीओपी) योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश के स्थानीय उत्पादों को देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में पहचान मिल रही है। स्थानीय हुनर और उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है।

    शिक्षकों के सवालों का दिया जवाब
    कार्यक्रम के दौरान उपमुख्यमंत्री ने लखनऊ के विभिन्न विद्यालयों से आए शिक्षकों के साथ शिक्षा की गुणवत्ता, तकनीकी बदलाव, एआई, नवाचार और विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े विषयों पर विस्तार से संवाद किया। शिक्षकों ने विभिन्न मुद्दों पर सवाल और सुझाव रखे, जिनका उपमुख्यमंत्री ने जवाब दिया। कार्यक्रम में इंस्पिरेशन एकेडमिक कंसल्टेंट्स की प्रेरणा त्रिपाठी सहित लखनऊ के विभिन्न विद्यालयों के सम्मानित एवं प्रतिष्ठित शिक्षण समुदाय के शिक्षक-शिक्षिकाएं मौजूद रहे।

  • ₹400 का LPG सिलेंडर और बढ़ी सब्सिडी! क्या सरकार करने वाली है बड़ा ऐलान?

    ₹400 का LPG सिलेंडर और बढ़ी सब्सिडी! क्या सरकार करने वाली है बड़ा ऐलान?

    नई दिल्ली

    ऊर्जा, पर्यावरण और जल परिषद यानी CEW की एक रिपोर्ट आई है। इसमें कहा गया है कि LPG की कीमत एक ऐसा बड़ा मुद्दा है, जो सभी वर्गों के लिए चुनौती बना हुआ है। मौजूदा दरें आम आदमी की पहुंच से काफी ऊपर हैं। इसी वजह से लोग जलाऊ लकड़ी या महंगे अनौपचारिक सिलेंडरों का सहारा ले रहे हैं।

    रिपोर्ट के मुताबिक अगर 14.2 किलोग्राम वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत 400 रुपये हो जाए तो 80 प्रतिशत से अधिक लोग पूरी तरह से गैस पर आ जाएंगे। अभी सिलेंडर रिफिल करवाने की औसत भुगतान क्षमता 500 रुपये प्रति सिलेंडर है, जबकि उज्ज्वला योजना के तहत सब्सिडी वाला सिलेंडर 642 रुपये का है।

    प्रवासी मजदूरों को भारी दिक्कतें
    स्टडी के अनुसार, प्रवासी मजदूरों
    में से 79 प्रतिशत के पास औपचारिक गैस कनेक्शन नहीं है और 4 प्रतिशत से भी कम लोग प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का लाभ पा रहे हैं। यह स्थिति इसलिए और हैरान करने वाली है, क्योंकि 2021 की नीति में प्रवासी मजदूरों के लिए सेल्फ-डिक्लेरेशन के माध्यम से कनेक्शन लेने की सुविधा पहले ही दे दी गई थी। इसके बावजूद जागरूकता की कमी और कागजी प्रक्रियाओं में उलझन के कारण प्रवासी मजदूर इस योजना से दूर हैं।

    सीईडब्ल्यू की फेलो प्रार्थना बराह का कहना है कि सरकार का यह सोचना कि केवल एलपीजी कनेक्शन दे देने भर से काम हो जाएगा, सही नहीं है। असली चुनौती यह है कि लोग नियमित रूप से गैस रिफिल करवा पाएं, प्रवासी मजदूरों को उज्ज्वला योजना की पूरी जानकारी हो और ग्रामीण घरों तक सिलेंडर भरोसेमंद ढंग से पहुंचते रहें।

    उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि भारत की स्वच्छ हवा की नीति को केवल 'कनेक्शन देने' से आगे बढ़कर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि साफ ईंधन सस्ता, भरोसेमंद और लंबे समय तक टिकाऊ हो।

    शहरी झुग्गियों और प्रवासियों की स्थिति
    शहरी अनौपचारिक बस्तियों में 70 प्रतिशत लोग पूरी तरह से गैस का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन बिना औपचारिक कनेक्शन वाले 31 प्रतिशत लोगों को एड्रेस प्रूफ न होने के कारण कनेक्शन देने से मना कर दिया जाता है। इस वजह से 11 प्रतिशत लोग वास्तविक रिटेल प्राइस के बजाय 1,040 रुपये तक अनौपचारिक रूप से सिलेंडर खरीदने को मजबूर हैं।

    वहीं, प्रवासी मजदूरों में से 70 प्रतिशत, जो खुले स्थानों में रहते हैं, पूरी तरह से ठोस ईंधनों जैसे लकड़ी और कोयले पर निर्भर हैं। जो प्रवासी अनौपचारिक रूप से गैस खरीदते हैं, उन्हें 71 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से भुगतान करना पड़ता है, जो आधिकारिक दर से 20 प्रतिशत से अधिक महंगा है।

    200 रुपये और बढ़े सब्सिडी
    सीईडब्ल्यू की पहली सिफारिश यह है कि पेट्रोलियम मंत्रालय को उज्ज्वला सब्सिडी को प्रति सिलेंडर लगभग 200 रुपये बढ़ाना चाहिए। दूसरा सुझाव प्रवासी मजदूरों के लिए विशेष पंजीकरण अभियान चलाने का है, ताकि वे आसानी से उज्ज्वला योजना से जुड़ सकें।

    तीसरा, स्मार्ट मीटर कियोस्क की पायलट परियोजनाएं शुरू करने की सिफारिश की गई है, ताकि लोग छोटी-छोटी किस्तों में गैस के पैसे जमा कर सकें। ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर डिलीवरी बढ़ाने के लिए विक्रेताओं को अलग-अलग कमीशन देने का सुझाव दिया गया है, ताकि दूर-दराज के इलाकों में भी सिलेंडर पहुंच सकें।

  • लाड़ली बहना की 40वीं किस्त कब आएगी? ₹1500 के लिए जानें संभावित तारीख और पेमेंट से जुड़ा बड़ा अपडेट

    लाड़ली बहना की 40वीं किस्त कब आएगी? ₹1500 के लिए जानें संभावित तारीख और पेमेंट से जुड़ा बड़ा अपडेट

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी लाड़ली बहना योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता दी जाती है। योजना के अंतर्गत पात्र महिलाओं के आधार लिंक और DBT-enabled बैंक खातों में 1500 रुपये प्रतिमाह ट्रांसफर किए जाते हैं।अब महिलाओं को योजना की 40वीं किस्त का इंतजार है। सामान्य तौर पर सरकार हर महीने 10 से 15 तारीख के बीच किस्त जारी करती है। ऐसे में इस बार भी 15 सितंबर से पहले राशि खाते में पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

    19 अगस्त को जारी हुई थी 39वीं किस्त
    इससे पहले सरकार ने रक्षाबंधन से पहले 19 अगस्त को लाड़ली बहना योजना की 39वीं किस्त जारी की थी। उस दौरान पात्र महिलाओं के बैंक खातों में नियमित 1500 रुपये की किस्त के साथ 250 रुपये अतिरिक्त गिफ्ट के तौर पर भी ट्रांसफर किए गए थे।अब अगली किस्त को लेकर महिलाओं की नजर सरकार की आधिकारिक घोषणा पर बनी हुई है।

    किन महिलाओं को मिलता है लाड़ली बहना योजना का लाभ?
    लाड़ली बहना योजना का लाभ मध्यप्रदेश की स्थानीय निवासी विवाहित महिलाओं को दिया जाता है। योजना में विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता महिलाएं भी शामिल हैं।पात्रता के अनुसार आवेदन के कैलेंडर वर्ष में 1 जनवरी की स्थिति में महिला की उम्र कम से कम 21 वर्ष पूरी होनी चाहिए और वह 60 वर्ष से कम आयु की होनी चाहिए।

    इन महिलाओं को नहीं मिलेगा लाभ
    योजना के तहत कुछ श्रेणियों को अपात्र रखा गया है। यदि महिला या उसके परिवार की स्वघोषित वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से अधिक है, तो वह योजना का लाभ नहीं ले सकती।इसके अलावा परिवार में कोई आयकरदाता होने पर भी पात्रता नहीं होगी। सरकारी विभाग, उपक्रम, मंडल या स्थानीय निकाय में नियमित, स्थायी कर्मचारी या संविदाकर्मी के रूप में काम करने वाले सदस्य वाले परिवार भी योजना से बाहर हैं।सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन प्राप्त करने वाले परिवारों को भी योजना का लाभ नहीं दिया जाता।

    दूसरी सरकारी योजना का लाभ लेने वाली महिलाओं की पात्रता
    यदि कोई महिला किसी अन्य सरकारी योजना के माध्यम से हर महीने 1250 रुपये या उससे अधिक की राशि प्राप्त कर रही है, तो वह लाड़ली बहना योजना के लिए पात्र नहीं होगी।

    जमीन और वाहन को लेकर भी नियम
    योजना की पात्रता में परिवार की कृषि भूमि और वाहन की स्थिति को भी शामिल किया गया है। 5 एकड़ से अधिक कृषि भूमि वाले परिवार योजना का लाभ नहीं ले सकते।इसी तरह ट्रैक्टर को छोड़कर चार पहिया वाहन रखने वाले परिवार भी योजना के दायरे से बाहर हैं।

    महिलाओं को आधिकारिक घोषणा का इंतजार
    फिलहाल 40वीं किस्त को लेकर 15 सितंबर से पहले भुगतान की संभावना बताई जा रही है। हालांकि, राशि ट्रांसफर की अंतिम तारीख सरकार की आधिकारिक घोषणा से ही स्पष्ट होगी। 

    किन महिलाओं को मिलेगा योजना का लाभ?
    लाड़ली बहना योजना का लाभ मध्य प्रदेश की स्थानीय निवासी विवाहित महिलाओं को मिलता है। इसमें विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता महिलाएं भी शामिल हैं। आवेदन के कैलेंडर वर्ष में 1 जनवरी की स्थिति में महिला की उम्र 21 वर्ष पूरी होनी चाहिए और वह 60 वर्ष से कम आयु की होनी चाहिए।

    किन महिलाओं को नहीं मिलेगा लाभ?

    जिस महिला या उसके परिवार की स्वघोषित वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से अधिक है, वह पात्र नहीं होगी। परिवार में कोई आयकरदाता होने पर भी लाभ नहीं मिलेगा। इसी तरह सरकारी विभाग, उपक्रम, मंडल या स्थानीय निकाय में नियमित, स्थाईकर्मी या संविदाकर्मी के रूप में कार्यरत सदस्य वाले परिवार भी अपात्र होंगे। सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन पाने वाले परिवार भी योजना के दायरे से बाहर हैं।

    इसके अलावा, जो महिला किसी अन्य सरकारी योजना से प्रतिमाह 1250 रुपये या उससे अधिक प्राप्त कर रही है, वह पात्र नहीं होगी। वर्तमान या भूतपूर्व सांसद/विधायक के परिवार, चयनित या मनोनीत बोर्ड, निगम, मंडल या उपक्रम के अध्यक्ष, संचालक अथवा सदस्य के परिवार भी अपात्र हैं।

    स्थानीय निकायों के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों (पंच और उपसरपंच को छोड़कर) के परिवार, 5 एकड़ से अधिक कृषि भूमि वाले परिवार और ट्रैक्टर को छोड़कर चार पहिया वाहन रखने वाले परिवार भी योजना का लाभ नहीं ले सकते।