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  • टैक्स असेसमेंट में पेट्रोल-डीजल-CNG पंप संचालकों को राहत, 30 दिन में आपत्ति नहीं तो आवेदन मान्य

    टैक्स असेसमेंट में पेट्रोल-डीजल-CNG पंप संचालकों को राहत, 30 दिन में आपत्ति नहीं तो आवेदन मान्य

    भोपाल 

    मध्य प्रदेश सरकार ने पेट्रोल, डीजल और CNG पंप संचालकों को लंबित टैक्स असेसमेंट के मामलों में राहत दी है। वित्तीय वर्ष 2024-25 के पात्र मामलों में व्यापारियों की ओर से दी गई जानकारी के आधार पर स्व-घोषणा के जरिए कर निर्धारण पूरा माना जाएगा। वाणिज्यिक कर विभाग ने इसके लिए अधिसूचना जारी की है।

    यह व्यवस्था मध्यप्रदेश वैट अधिनियम 2002, केंद्रीय बिक्री कर अधिनियम 1956, मोटर स्पिरिट उपकर अधिनियम 2018 और हाई स्पीड डीजल उपकर अधिनियम 2018 के तहत लंबित मामलों पर लागू होगी। निर्धारित फॉर्म में आवेदन करने पर विभाग उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर असेसमेंट पूरा करेगा।

    किन पंप संचालकों को मिलेगा लाभ
    यह सुविधा उन्हीं पंजीकृत पेट्रोल पंप संचालकों को मिलेगी, जिन्होंने मध्य प्रदेश में अधिसूचित तेल कंपनियों या पंजीकृत व्यापारियों से टैक्स और उपकर चुकाकर पेट्रोल, डीजल या CNG खरीदा है। साथ ही वर्ष 2024-25 में उनके खिलाफ टैक्स चोरी का मामला नहीं होना चाहिए।

    इसके अलावा अतिरिक्त कर या ऑडिट से संबंधित लंबित नोटिस का अनुपालन बाकी नहीं होना चाहिए और संबंधित वर्ष के लिए रिफंड का दावा भी नहीं किया गया हो।

    आवेदन के साथ ये दस्तावेज जरूरी
    पंप संचालकों को आवेदन के साथ कर और ब्याज जमा करने की चालान कॉपी लगानी होगी। 2 करोड़ रुपए से ज्यादा टर्नओवर वाले कारोबारियों को CA की ऑडिट रिपोर्ट भी देनी होगी। CST में छूट या रियायती दर का लाभ लिया गया है तो फॉर्म-C, F, E आदि मूल दस्तावेज भी प्रस्तुत करने होंगे।

    फैसले का मकसद
    सरकार का कहना है कि यह कदम रिटेल कीमतों पर उपलब्ध ईंधन के डायवर्जन (दूसरी जगह बेचने) और दुरुपयोग को रोकने के लिए उठाया गया है। रिटेल पंपों पर बिकने वाला ईंधन अब मुख्य रूप से आम नागरिकों के उपयोग के लिए ही रहेगा। यह प्रतिबंध फिलहाल 90 दिन तक लागू रहेगा, हालांकि सरकार इसे पहले भी वापस ले सकती है या इसमें संशोधन कर सकती है।

    क्या होगा असर?
    बड़े संस्थानों, उद्योगों और व्यावसायिक वाहन मालिकों को ईंधन खरीदने में बदलाव करना पड़ेगा। तेल विपणन कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) की थोक और रिटेल बिक्री की निगरानी बढ़ेगी। शेयर बाजार में इन कंपनियों के शेयरों पर भी इस फैसले का असर देखा जा सकता है।

    कीमतों का संदर्भ
    यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण घरेलू ईंधन कीमतें बढ़ाई गई हैं। दिल्ली में 15 मई के बाद पेट्रोल की कीमत में करीब 4.75 रुपये प्रति लीटर (लगभग 5%) और डीजल में 4.82 रुपये प्रति लीटर (लगभग 5.49%) की बढ़ोतरी हुई है।

    ज्ञात हो, मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी आपूर्ति समस्याओं के कारण वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें प्रभावित हुई हैं। ऐसे में सरकार का यह कदम ईंधन के सही उपयोग को सुनिश्चित करने और अनावश्यक दुरुपयोग को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। (इनपुट-एजेंसी)

  • सागर शराब कांड में प्रशासन का सख्त रुख, आरोपियों की अवैध संपत्तियों पर चला बुलडोजर; मचा हड़कंप

    सागर शराब कांड में प्रशासन का सख्त रुख, आरोपियों की अवैध संपत्तियों पर चला बुलडोजर; मचा हड़कंप

     सागर 

    सागर के बंडा में  जहरीली शराब कांड के आरोपियों पर प्रशासन ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इस कांड से जुड़े आरोपियों की अवैध तरीके से अर्जित संपत्तियों पर बुलडोजर कार्रवाई शुरू हो चुकी है। सरकारी अमला संपत्तियों की जांच परख करने गुरुवार सुबह से ही मौके पर पहुंच गया। 

    तीन विशेष टीमें  तैनात
    प्रशासन ने तीन अलग-अलग विशेष टीमें गठित की हैं। ये टीमें आपसी समन्वय के साथ चिन्हित स्थानों पर कार्रवाई कर रही हैँ। कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है। ताकि किसी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। 

    मकान और गोदाम पर चला बुलडोजर
    प्रशासन और पुलिस की ओर से खुफिया इनपुट तथा राजस्व विभाग के रिकॉर्ड के आधार पर आरोपियों की संपत्तियों को चिन्हित किया गया है। बताया जा रहा है कि अवैध अतिक्रमण और कथित अवैध शराब कारोबार से अर्जित संपत्तियों में शामिल मकान और गोदामों को कार्रवाई के दायरे में लिया गया है।  

    पांच जगहों पर कार्रवाई 
    प्रशासन की ओर से कुल पांच स्थानों को कार्रवाई के लिए चिन्हित किए जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें जहरीली शराब कांड के मुख्य आरोपी बताए जा रहे चंद्रभान राजपूत, मनीष लोधी और आशीष साहू के मकान, गोदाम और अनधिकृत तरीके से अर्जित अन्य संपत्तियां शामिल हैं।

    शराब माफियाओं में हड़कंप
    जहरीली शराब कांड के बाद प्रशासन की इस कार्रवाई से क्षेत्र में अवैध शराब कारोबार से जुड़े लोगों में हड़कंप की स्थिति है। प्रशासन का कहना है कि अवैध शराब का कारोबार कर लोगों की जान से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। चिन्हित संपत्तियों के संबंध में राजस्व रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

  • छत्तीसगढ़ CM विष्णु देव साय आज देखेंगे ‘हनुमान अंश’, फिल्म से जुड़ा खास कार्यक्रम

    छत्तीसगढ़ CM विष्णु देव साय आज देखेंगे ‘हनुमान अंश’, फिल्म से जुड़ा खास कार्यक्रम

    रायपुर.

    7 अगस्त को एक फिल्म रिलीज हुई 'हनुमान अंश' जिसने देखते ही देखते बॉक्स ऑफिस पर कई धुरंधरों को पछाड़ दिया, क्योंकि इस फिल्म ने अपने बजट से ज्यादा की कमाई कर डाली. फिल्म की इतना चर्चा हो रही है कि अब छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णु देव साय भी फिल्म हनुमान अंश देखने जा रहे हैं.

    वो आज शाम को एक निजी मॉल में फिल्म देखेंगे, उनके मंत्री भी इस फिल्म को देखने जाएंगे. महज 2 करोड़ बजट मे बनी ये फिल्म कई रिकॉर्ड अपने नाम कर रही है. ऐसा माना जा रहा है कि शायद वो इस फिल्म को टैक्स फ्री कर दें. 

    सीएम योगी से मिली हनुमान अंश की टीम 
    फिल्म 'हनुमान अंश' की टीम ने हाल ही में लखनऊ स्थित मुख्यमंत्री आवास पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से विशेष मुलाकात की. इस प्रतिनिधिमंडल में फिल्म के निर्माता, लेखक-निर्देशक विशाल चतुर्वेदी, मुख्य अभिनेता शोभिनव और फिल्म से जुड़े अन्य प्रमुख कलाकार एवं टीम सदस्य शामिल थे. मुलाकात के दौरान विशाल चतुर्वेदी और शोभिनव ने मुख्यमंत्री को फिल्म की विषयवस्तु और उसकी आध्यात्मिक यात्रा के बारे में विस्तार से जानकारी दी.

    उन्होंने बताया कि 'हनुमान अंश' श्रद्धेय संत बाबा नीम करोली के जीवन, उनकी आध्यात्मिक साधना और भगवान हनुमान के प्रति उनकी अटूट भक्ति को केंद्र में रखकर बनाई गई है. मुख्यमंत्री योगी ने फिल्म से जुड़े सभी लोगों के प्रयासों की सराहना की और पूरी टीम को फिल्म की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं. विचारों के इस सकारात्मक आदान-प्रदान और आत्मीय बातचीत ने इस मुलाकात को कलाकारों और निर्माताओं के लिए एक यादगार अनुभव बना दिया.

  • रिहायशी भवनों में कारोबार करने वालों की बढ़ी मुश्किलें, भोपाल हाईकोर्ट का सख्त रुख; 7 दिन में पेश करें कागजात

    रिहायशी भवनों में कारोबार करने वालों की बढ़ी मुश्किलें, भोपाल हाईकोर्ट का सख्त रुख; 7 दिन में पेश करें कागजात

    भोपाल 

    भोपाल के रिहायशी इलाकों में आवासीय भूखंडों पर चल रहे मॉल, होटल और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। बुधवार को कोर्ट ने संबंधित पक्षकारों को निर्देश दिए हैं शहर में आवासीय और लो-डेंसिटी क्षेत्रों में अवैध निर्माण व गैर-कानूनी व्यावसायिक गतिविधियों पर संकट गहरा गया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तहत मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने मॉल, होटल व व्यावसायिक संचालकों को वैधानिक अनुमति पत्र नगरनिगम को दिखाने का निर्देश दिया है। जिस पर निगम विधि पूर्वक उनकी पड़ताल करेगा। दूसरी ओर, शहर के लो-डेंसिटी इलाकों में तय सीमा से 10 गुना तक ज्यादा अवैध निर्माण हो चुके हैं। नगर निगम की नोटिस व सीलिंग कार्रवाई के बीच अफसर अब मास्टर प्लान के जरिए इन्हें नियमित करने का रास्ता तलाश रहे हैं, जिससे मास्टर प्लान का ड्राफ्ट फिर अटक गया है।

    मास्टरप्लान नियमित करने की प्लानिंग
    शहर के जिन क्षेत्रों को 2005 के मास्टर प्लान में लो-डॅसिटी तय कर निर्माण की लिमिट तय कर रखी है, वहां बेशुमार व बड़े निर्माण हो गए है। अब इन निर्माणों को मास्टर प्लान के रास्ते नियमित कराने की कोशिश की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद आवासीय परिसरों से व्यावसायिक गतिविधि बंद कराने नगर निगम नोटिस और सीलिंग कर रहा है। दोनों ही पक्ष इसके लिए मास्टर प्लान को लागू करने की मांग कर रहे है। प्लानिंग एरिया के लो-डेंसिटी क्षेत्रों को नियमित करने बीते पंद्रह दिन से टीएंडसीपी और नगरीय प्रशासन के अफसर बैठकें कर रहे हैं। गौरतलब है कि लो-डेंसिटी एरिया में 10 हजार वर्गफीट जमीन पर 0.06 एफएआर से महज 600 वर्गफीट तक के निर्माण की अनुमति है, जबकि यहां दस गुना ज्यादा 6000 से 8000 वर्गफीट तक निर्माण हो गए।

    ये हैं लो-डेंसिटी के नियम
    ग्राम बैरागढ़ चिचली, नीलबड़ व मिंडोरी में लो-डेंसिटी तय है। इनमें 48 व्यक्ति प्रति हेक्टेयर डेंसिटी तय है। इनमें निर्माण के लिए कम से कम 1000 वर्गमीटर यानि 10 हजार वर्गफीट क्षेत्रफल जरूरी है। यहां निर्माण की अनुमति पर 0.06 एफएआर तय है। यानि 10 हजार वर्गफीट के प्लॉट पर 600 वर्गफीट निर्माण ही हो सकता है। इससे अधिक अवैध है। इसमें भी जमीन पर कुल अनुमति का छह फीसदी ही निर्मित किया जा सकता है।

    कार्रवाई का रास्ता साफ
    कोर्ट के आदेश के बाद रिहायशी क्षेत्रों में बिना वैध अनुमति व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने वाले प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की स्थिति साफ हो गई है। अब संबंधित पक्षों को अपने व्यावसायिक उपयोग की वैध अनुमति साबित करने के लिए दस्तावेज निगम के सामने रखने होंगे।

    याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि यह रिहायशी इलाकों को बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि अब नगर निगम के सामने कार्रवाई करने के लिए स्पष्ट न्यायिक निर्देश हैं।

    ट्रैफिक-पार्किंग की समस्या से जूझ रहे रहवासी
    रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों के कारण ट्रैफिक, पार्किंग, शोर और सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे लोगों को भी कोर्ट के आदेश से कार्रवाई की उम्मीद है। रहवासी लवनीश भाटी ने कहा कि लंबे समय से शिकायतों के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ, अब कोर्ट के आदेश के बाद जमीन पर कार्रवाई की उम्मीद है।

    संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति ने भी फैसले का स्वागत करते हुए नगर निगम से रिहायशी इलाकों में चल रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जांच की मांग की है। समिति का कहना है कि जिनके पास वैध अनुमति नहीं है, उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

    ये हैं स्थिति

    -कलियासोत कैचमेंट में साक्षी ढाबे के पास से अंदर के के क्षेत्र में निर्मित वीआइपी कॉलोनी में 600 वर्गफीट की जगह 6000 वर्गफीट के बंगले बना लिए। मामला कोर्ट में चला गया।

    -चार इमली, श्यामला हिल्स पर अवैध तौर पर बंगले बन गए।
    -नरसिंहगढ़ रोड पर लो-डेंसिटी में 12 बड़ी कॉलोनियां बन गईं।
    -मिंडोरी और संबंधित क्षेत्र में बड़े मकान, रेस्टोरेंट विकसित हो गए।
    -केरवा डेम से लगी जमीन लो-डेंसिटी है, लेकिन इसकी ओर जाने वाली रोड किनारे अवैध तौर पर कॉलोनियां विकसित हो गईं।

    कोर्ट ने कहा-कागजात दिखाएं नगर निगम करेगा सभी के परीक्षण
    आवासीय क्षेत्र के मॉल, होटल और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर अनुमति और वैधानिकता की जांच नगरनिगम भोपाल करेगा। हाईकोर्ट में सोमवार को 42 याचिकाओं पर सुनवाई हुई थी। वहीं, मंगलवार को दस नम्बर, कलियासोत और बड़ा तालाब के 50 मीटर दायरे में व्यावसायिक गतिविधियां बंद करने सम्बंधी आदेश और शो-कॉज नोटिस को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई हुई। शोकॉज नोटिस की याचिकाओं का निराकरण करते हुए कोर्ट ने नगर निगम को याचिकाकर्ताओं के जवाब का विधि के अनुसार परीक्षण कर कारण सहित आदेश पारित करने के निर्देश दिए थे। मकानों को तोड़ने के मामले में दलीलें पूरी नहीं हो सकीं। एकलपीठ ने मकान तोड़ने पर लगी रोक बरकरार रखते हुए अगली सुनवाई 15 सितंबर निर्धारित की है।

    सामाजिक कार्यकर्ताओं ने किया स्वागत
    हाईकोर्ट के रुख का स्थानीय रहवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया है। याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने इसे शहर के आवासीय इलाकों को बचाने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है। उनका कहना है कि अब अनुमति के नाम पर टालमटोल या बहानेबाजी नहीं चलेगी। उन्होंने कहा कि असली परीक्षा भोपाल नगर निगम की है, जिसे यह साबित करना होगा कि कानून सभी के लिए समान है, चाहे वह आम नागरिक हो या कोई प्रभावशाली व्यक्ति।

    शोर और सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं पर चिंता जताई
    रहवासी लवनीश भाटी और संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति ने आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों के कारण पैदा हो रही ट्रैफिक, पार्किंग, अत्यधिक शोर और सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं पर चिंता जताई। रहवासियों का कहना हैं कि वे वर्षों से इन दिक्कतों को झेल रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही थी।

  • बुमराह की टीम इंडिया में वापसी तय, अफगानिस्तान सीरीज से पहले हर्षित राणा को लगा झटका; यश ठाकुर की एंट्री

    बुमराह की टीम इंडिया में वापसी तय, अफगानिस्तान सीरीज से पहले हर्षित राणा को लगा झटका; यश ठाकुर की एंट्री

    मुंबई 

    टीम इंडिया के स्टार पेसर को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE) ने टीम इंडिया के स्टार पेसर जसप्रीत बुमराह को अफगानिस्तान के खिलाफ खेले जाने वाली सीरीज और एशियन गेम्स के लिए फिट घोषित कर दिया है, तो वहीं चोटिल चल रहे हर्षित राणा दोनों ही बड़ी प्रतियोगिताओं से बाहर हो गए हैं. हर्षित राणा की जगह चयन समिति ने अफगान सीरीज और एशियन गेम्स दोनों के  लिए ही मीडिय पेसर यश ठाकुर को टीम में जगह दी है। 

    हर्षित राणा की जगर यश ठाकुर
    राणा  बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में अपने रिहैब के दौरान अच्छी प्रगति कर रहे थे, लेकिन 7 सितंबर को एक मैच सिमुलेशन के दौरान गेंदबाजी करते समय उन्हें रेक्टस फेमोरिस (मांसपेशियों) में खिंचाव आ गया और इसके बाद वह बाहर हो गए. वहीं, विदर्भ के 27 वर्षीय तेज गेंदबाज यश ने हाल ही में जुलाई में भारत के जिम्बाब्वे दौरे के दौरान अपना T20I पदार्पण (डेब्यू) किया था. उन्होंने दो मैच खेले और चार विकेट लिए. वह 50 सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी मैचों में खेल चुके हैं, जिसमें उन्होंने 7.04 की प्रभावशाली इकोनॉमी रेट से 81 विकेट लिए हैं। 

     इसके चलते वह टीम इंडिया के आगामी दोनों असाइनमेंट से बाहर हो गए. सिलेक्टर्स ने उनकी जगह विदर्भ के तेज गेंदबाज यश ठाकुर को जगह दी है। 

    भारतीय टीम में बुमराह के लौटने से अफगानिस्तान के खिलाफ उसके पेस अटैक की धार बढ़ी है. बुमराह के साथ यहां तेज बॉलिंग में अर्शदीप सिंह और यश ठाकुर मौजूद होंगे. भारत की कमान श्रेयस अय्यर के हाथों में होगी, जबकि तिलक वर्मा उपकप्तान की भूमिका में नजर आएंगे। 

    अफगानिस्तान टी20 सीरीज के लिए अपडेटेड टीम: श्रेयस अय्यर (कपतान), अभिषेक शर्मा, वैभव सूर्यवंशी, संजू सैमसन (विकेटकीपर), ईशान किशन (विकेटकीपर), तिलक वर्मा (उप-कप्तान), शिवम दुबे, नीतीश कुमार रेड्डी, अक्षर पटेल, वाशिंगटन सुंदर, वरुण चक्रवर्ती, रवि बिश्नोई, जसप्रीत बुमराह, अर्शदीप सिंह, यश ठाकुर

    2026 एशियन गेम्स के लिए  अपडेटेड टीम:
    श्रेयस अय्यर (कप्तान), अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन (विकेटकीपर), ईशान किशन (विकेटकीपर), शिवम दुबे, तिलक वर्मा (उप-कप्तान), नीतीश कुमार रेड्डी, अक्षर पटेल, वाशिंगटन सुंदर, वरुण चक्रवर्ती, रवि बिश्नोई, जसप्रीत बुमराह, अर्शदीप सिंह, वैभव सूर्यवंशी, यश ठाकुर

    IND vs AFG टी20 सीरीज का शेड्यूल
    13 सितंबर : पहला टी20
    15 सितंबर : दूसरा टी20
    17 सितंबर : तीसरा टी20

  • BSP में बड़ा सियासी घटनाक्रम: आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ का राजनीति से संन्यास, मायावती पर कही बड़ी बात

    BSP में बड़ा सियासी घटनाक्रम: आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ का राजनीति से संन्यास, मायावती पर कही बड़ी बात

    लखनऊ 

    बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से बाहर कर दिया है. इससे पहले मायावती ने 3 सितंबर 2026 को आकाश को राष्ट्रीय संयोजक के पद से हटाया था. अब उन्होंने आकाश को बसपा की प्राथमिक सदस्यता और पार्टी से भी पूरी तरह मुक्त कर दिया है। 

    दरअसल आकाश आनंद के ससुर और पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास का ऐलान किया है. इसे लेकर मायावती ने कहा कि उन्होंने अगर समय पर फैसला ले लेते तो आकाश के साथ ऐसा नहीं होगा। 

    मायावती ने कहा कि अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति छोड़ने का फैसला सही समय पर नहीं लिया. अगर वो ये कदम पहले उठा लेते, तो बसपा, बहुजन मूवमेंट और खुद आकाश आनंद को लगातार मुश्किल और विपरीत परिस्थितियों का सामना नहीं करना पड़ता। 

    मायावती ने पिछले हफ्ते आकाश आनंद को राजनीति के लिए अपरिपक्व बताते हुए पार्टी के कोर्डिनेटर समेत सभी पदों से हटा दिया था। इसके बाद बुधवार को आकाश को दोबारा पद देने के लिए उनके ससुर अशोक के सामने एक शर्त रख दी थी। मायावती ने कहा था कि आकाश आनन्द के भविष्य के लिए अशोक सिद्धार्थ के पास अभी भी मौका है। वे अपनी महत्वकांक्षा त्याग कर राजनीति से पूरी तरह से संन्यास ले लें तो आकाश आनन्द को उनकी ज़िम्मेदारियां वापस देने पर विचार हो सकता है।

    'जो व्यक्ति 'डबल माइंड' होकर काम…'
    मायावती ने आकाश आनंद के रुख पर अपनी नाराजगी जाहिर की. उन्होंने मुद्दा उठाया कि आकाश आनंद पहले हमेशा उनके एक्स पोस्ट को रिपोस्ट किया करते थे, लेकिन अशोक सिद्धार्थ से जुड़ी मायावती की पोस्ट को उन्होंने रिपोस्ट नहीं किया. मायावती के मुताबिक, ये इस बात का साफ संकेत है कि आकाश आनंद पार्टी से ज्यादा पारिवारिक रिश्तों को तरजीह दे रहे हैं. उन्होंने सवाल किया कि जो व्यक्ति 'डबल माइंड' होकर काम करेगा, वो बसपा का भला कैसे कर सकता है?

    मायावती ने अपने पोस्ट में आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ की मंशा पर भी सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि अगर सिद्धार्थ को सच में आकाश आनंद के भविष्य और बहुजन मूवमेंट की चिंता होती, तो वो बहुत पहले ही राजनीति से किनारा कर लेते. लेकिन उनकी नीयत और निजी महत्वाकांक्षाओं को लेकर अब भी सवाल बने हुए हैं। 

    2027 में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने का आह्वान
    पार्टी में इस बड़े बदलाव के बाद मायावती ने कार्यकर्ताओं को नया लक्ष्य सौंपा. उन्होंने बसपा कार्यकर्ताओं से अपील की कि वो विरोधियों के सभी राजनीतिक हथकंडों का मजबूती से मुकाबला करें. उन्होंने उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों में 'सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय' के सिद्धांत पर चलते हुए पूरी ताकत से जुटने और पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने की बात की। 

    मायावती को लिखा भावुक पत्र
    मायावती की शर्त के 24 घंटे के अंदर ही अशोक सिद्धार्थ ने भावुक पत्र लिखते हुए सक्रिय राजनीति के साथ ही सामाजिक जीवन से पूरी तरह संन्यास की घोषणा कर दी। उन्होंने मायावती और बसपा के प्रति अपनी अटूट निष्ठा भी जाहिर की है। अशोक सिद्धार्थ ने पत्र में स्पष्ट किया कि उनके लिए बहनजी का आदेश दुनिया की किसी भी चीज से बढ़कर है और उनके मार्गदर्शन के आगे पारिवारिक रिश्ते-नाते बेहद छोटे हैं।

    विरोधियों पर निशाना, आरोपों को बेबुनियाद भी बताया
    अशोक सिद्धार्थ ने पार्टी पर कब्जे के विरोधियों के आरोपों को बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि पार्टी के कुछ साथी अफवाह फैला रहे हैं कि वे पार्टी पर कब्जा और आकाश आनंद को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। सफाई देते हुए कहा कि आकाश को सलाह देना तो दूर, बीते कई महीनों में उनसे मुलाकात केवल पार्टी कार्यक्रमों के सिलसिले में हुई है। कहा कि आकाश मेरे दामाद से पहले बहनजी के भतीजे हैं। उनके अंदर बहुजन मिशन का खून बहता है। मेरे जैसा मामूली कार्यकर्ता भला उन्हें क्या गुमराह करेगा?

    35 सालों का सफर और मायावती के प्रति आभार
    अशोक सिद्धार्थ ने बसपा में 35 वर्षों के योगदान का जिक्र करते हुए लिखा कि मान्यवर कांशीराम और डॉ. भीमराव अंबेडकर के मिशन में मायावती की वजह से ही उन्हें एक आम कार्यकर्ता से संसद और विधानमंडल तक पहुंचने का मौका मिला। मिशन के लिए अगर जान भी देनी पड़े तो यह उनके लिए गर्व की बात होगी।

    अंत में यह भी लिखा कि आकाश आनंद को जिम्मेदारी देना या न देना पूरी तरह से बसपा सुप्रीमो का अधिकार है। उनके संन्यास को आकाश आनंद की पद पर वापसी से जोड़कर न देखा जाए। अगर बहनजी को लगता है कि उनके राजनीति में रहने से संतों, गुरुओं और महापुरुषों के बहुजन मिशन को नुकसान पहुंच रहा है तो वे तत्काल प्रभाव से राजनीतिक और सामाजिक जीवन से संन्यास ले रहे हैं।

  • डिजिटल नुकसान से जूझ रहे महिलाओं-बच्चों के लिए इंदौर में पहल, साइबर वेलनेस सेंटर में मिलेगी नि:शुल्क सहायता

    डिजिटल नुकसान से जूझ रहे महिलाओं-बच्चों के लिए इंदौर में पहल, साइबर वेलनेस सेंटर में मिलेगी नि:शुल्क सहायता

    महिलाओं-बच्चों के लिए इंदौर में शुरू हुआ साइबर वेलनेस सेंटर

    साइबर अपराध और डिजिटल नुकसान के पीड़ितों को मिलेगी मुफ्त तकनीकी और कानूनी सहायता – महिला बाल विकास मंत्री सुश्री भूरिया

     इंदौर

    साइबर अपराध, ऑनलाइन उत्पीड़न और डिजिटल नुकसान का सामना कर रही महिलाओं और बच्चों को अब इंदौर में एक ही स्थान पर काउंसलिंग से लेकर कानूनी और तकनीकी सहायता तक मिल सकेगी। महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने बुधवार को केंद्र का उद्घाटन किया। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा अहान फाउंडेशन के प्रोजेक्ट रिस्पॉन्सिबल नेटिज़्म और कोगटा फाउंडेशन के सहयोग से साइबर वेलनेस सेंटर का  इंदौर में शुभारंभ किया गया है। केंद्र का उद्देश्य साइबर घटनाओं के पीड़ितों और सर्वाइवर्स को तत्काल, मुफ्त और संवेदनशील सहायता उपलब्ध कराने के साथ प्रदेश में डिजिटल सुरक्षा और जिम्मेदार ऑनलाइन व्यवहार के लिए मजबूत सहायता तंत्र तैयार करना है।

    केंद्र में साइबर नुकसान से प्रभावित लोगों को मुफ्त काउंसलिंग, मनो-सामाजिक एवं भावनात्मक सहायता, तकनीकी और कानूनी मार्गदर्शन तथा साइबर घटनाओं की रिपोर्ट दर्ज कराने में सहयोग मिलेगा। इसके अलावा महिलाओं, बच्चों और समुदायों के लिए साइबर वेलनेस, डिजिटल रेजिलिएंस और साइबर अधिकारों को लेकर जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे।

    मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने कहा कि महिलाओं और बच्चों को डिजिटल दुनिया में सुरक्षित और जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ने में सक्षम बनाने के लिए सरकार, सामाजिक संस्थाओं और समुदाय को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा केवल तकनीकी विषय नहीं है, बल्कि इससे जुड़े मामलों में पीड़ितों को मानसिक और भावनात्मक सहारे की भी जरूरत होती है।

     

  • MP हाईकोर्ट के 30वें मुख्य न्यायाधिपति बने न्यायमूर्ति कोगजे, राज्यपाल पटेल ने दिलाई शपथ

    MP हाईकोर्ट के 30वें मुख्य न्यायाधिपति बने न्यायमूर्ति कोगजे, राज्यपाल पटेल ने दिलाई शपथ

    राज्यपाल पटेल ने उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति को दिलाई शपथ

    न्यायमूर्ति कोगजे मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के बने 30वें मुख्य न्यायाधिपति

    भोपाल 

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने न्यायमूर्ति अल्पेश यशवंत कोगजे को मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति की शपथ दिलाई। न्यायमूर्ति अल्पेश यशवंत कोगजे ने मध्य प्रदेश के 30 वें मुख्य न्यायाधीपति की शपथ ली। शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन गुरूवार को लोकभवन के सांदीपनि सभागार में किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी उपस्थित रहे।

    राज्यपाल पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शपथ ग्रहण के बाद नव नियुक्त मुख्य न्यायाधिपति कोगजे को पुष्प-गुच्छ भेंट कर बधाई और शुभकामनाएं दीं।

    मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने शपथ ग्रहण समारोह का संचालन किया। उन्होंने राष्ट्रपति द्वारा मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधिपति न्यायमूर्ति अल्पेश यशवंत कोगजे को नियुक्त किए जाने की अधिसूचना का वाचन किया। समारोह का प्रारंभ और समापन राष्‍ट्रीय गीत वंदे मातरम् तथा राष्‍ट्र गान जन-गण-मन के गायन के साथ हुआ।

    शपथ ग्रहण समारोह में विधानसभा अध्यक्ष नरेन्‍द्र सिंह तोमर, उप मुख्‍यमंत्री द्वय जगदीश देवड़ा और राजेन्द्र शुक्‍ल, कौशल विकास एवं रोजगार राज्‍यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल, महापौर भोपाल श्रीमती मालती राय, मध्‍यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के अध्‍यक्ष अवधेश प्रताप सिंह, पूर्व राज्‍यपाल कप्‍तान सिंह सोलंकी, न्यायमूर्ति जी.एस. अहलूवालिया, न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर, न्यायमूर्ति संदीप एन. भट्ट, न्यायमूर्ति विनय सराफ, न्यायमूर्ति रमेश फड़के, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल धरमिंदर सिंह, अपर मुख्‍य सचिव डॉ. शिवशेखर शुक्‍ला और संजय शुक्‍ल, राज्‍यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना, विधायक, सांसद मध्‍यप्रदेश, गुजरात और उत्तरप्रदेश राज्‍य के उच्‍च न्‍यायालयों के न्‍यायमूर्तिगण, वरिष्‍ठ प्रशासनिक, न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता और आयोगों के पदाधिकारी मौजूद थे।

     

  • उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के रास्ते में आई 100 साल पुरानी मस्जिद, हाईकोर्ट से याचिका खारिज

    उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के रास्ते में आई 100 साल पुरानी मस्जिद, हाईकोर्ट से याचिका खारिज

     इंदौर 

    उज्जैन में सिंहस्थ महापर्व 2028 की तैयारियों के तहत सड़कों के चौड़ीकरण का काम तेजी से चल रहा है। कंठाल से बड़े गोपाल मंदिर मार्ग के चौड़ीकरण की जद में आ रही करीब 100 साल पुरानी शाही मस्जिद को हटाने के खिलाफ दायर दोनों याचिकाओं को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर पीठ ने बुधवार को खारिज कर दिया। जस्टिस संदीप एन. भट्ट की एकल पीठ ने दोनों मामलों की एक साथ सुनवाई की और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद याचिकाएं निरस्त कर दीं।
     उज्जैन की 100 साल पुरानी शाही मस्जिद के तोड़ने पर फिलहाल कोई रोक नहीं है। सिंहस्थ 2028 के तहत किए जा रहे सड़क चौड़ीकरण के दायरे में यह मस्जिद भी आ रही है।उज्जैन नगर निगम ने इसे हटाने के लिए नोटिस दिया था जिसे चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका प्रस्तुत हुई थी। बुधवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने निगम की कार्रवाई पर किसी तरह की रोक लगाने से इंकार करते हुए याचिका निराकृत कर दी।

    हाई कोर्ट में प्रस्तुत इन याचिकाओं में मप्र शासन, ज्वाइंट डायरेक्टर टीएंडसीपी, उज्जैन नगर निगम, भवन अधिकारी और कलेक्टर उज्जैन को पक्षकार बनाया गया था। उप महाधिवक्ता सुदीप भार्गव ने याचिका निरस्त करने और कार्रवाई पर किसी तरह का स्टे नहीं दिए जाने की पुष्टि की है।

    मस्जिद पक्ष की ओर से प्रस्तुत याचिका में नगर निगम के भवन अधिकारी द्वारा जारी सूचना पत्र को अपूर्ण, अस्पष्ट और अवैधानिक बताते हुए आपत्ति दर्ज कराई गई थी। कहा था कि शाही मस्जिद 100 वर्ष से अधिक पुरानी और मुगलकालीन मस्जिद है।

    क्या है वजह

    प्रशासन के अनुसार, सिंहस्थ 2028 में उज्जैन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। गोपाल मंदिर मार्ग शहर के व्यस्त और संकरे रास्तों में शामिल है। याचिकाकर्ताओं की ओर से मस्जिद को 100 वर्ष से अधिक पुराना और ऐतिहासिक बताया गया। पंचायत ने पुराने दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि 17 मार्च 1925 को सिंधिया राजघराने के चेयरमैन, टाउन इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट और ग्वालियर सरकार लश्कर की ओर से शहर काजी को पत्र जारी किया गया था। इसमें कुछ भूमि के अधिग्रहण के बाद मस्जिद के शेष हिस्से को यथावत रखने का उल्लेख होने का दावा किया गया है।

    पहली याचिका शाही मस्जिद वक्फ पंचायत मोचियान के प्रतिनिधि अशफाक अहमद और शाही मस्जिद इंतजामिया कमेटी वक्फ पंच मोचियान के प्रतिनिधि और वाइस चेयरमैन अशफाक अहमद की ओर से दायर की गई थी। इसमें मप्र शासन, ज्वाइंट डायरेक्टर टीएंडसीपी, उज्जैन नगर निगम, बिल्डिंग ऑफिसर और कलेक्टर उज्जैन को पक्षकार बनाया गया था।

    दूसरी याचिका शाही मस्जिद वक्फ पंच मोचियान के प्रेसीडेंट अशान हुसैन की अपर से लगाई गई थी। इसमें मप्र दूसरी याचिका शाही मस्जिद वक्फ पंच मोचियान के प्रेसीडेंट अरशान हुसैन की ओर से लगाई गई थी। इसमें मप्र शासन, उज्जैन नगर निगम और मप्र वक्फ बोर्ड को पक्षकार बनाया गया था।

    याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता सैय्यद अशहर अली वारसी ने कहा कि अभी विस्तृत लिखित आदेश आना बाकी है। याचिकाएं खारिज की गई हैं, लेकिन आदेश का अध्ययन करने के बाद फैसले के खिलाफ डबल बेंच या सुप्रीम कोर्ट में अपील की जाएगी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मस्जिद ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व की है, इसलिए इसे हटाया नहीं जाना चाहिए।मस्जिद प्रबंधन ने पुराने दस्तावेजों का हवाला दिया था।

    प्रशासन के अनुसार, सिंहस्थ 2028 में उज्जैन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। गोपाल मंदिर मार्ग शहर के व्यस्त और संकरे रास्तों में शामिल है। सिंहस्थ के दौरान यातायात को सुचारू रखने और भीड़ का दबाव कम करने के लिए इस मार्ग का चौड़ीकरण जरूरी माना जा रहा है। नगर निगम का कहना है कि कार्रवाई मास्टर प्लान और निर्धारित नियमों के तहत की जा रही है।

    अनवर कादरी की पार्षदी खत्म करने का मामला पहुंचा हाई कोर्ट, दायर हुई याचिका

    इंदौर :नगर निगम वार्ड 58 से पार्षद रहे अनवर कादरी की पार्षदी समाप्त करने के मामले में हाई कोर्ट में याचिका दायर हुई है। याचिका कादरी की पत्नी ने दायर की है।याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति संदीप एन भट्ट ने शासन से कहा कि वह दो दिन में स्पष्ट करे कि कादरी की ओर से की गई अपील की क्या स्थिति है। एडवोकेट विभोर खंडेलवाल के मुताबिक कादरी की पार्षदी खत्म करने के संभागायुक्त के निर्णय को प्रमुख सचिव नगरीय प्रशासन के समक्ष चुनौती देते हुए अपील दायर की गई थी जो अब भी लंबित है।

    अपील लंबित रहने के दौरान प्रमुख सचिव ने निर्वाचन आयोग से चुनाव के लिए अनुशंसा कर दी। इसी को चुनौती देते हुए याचिका प्रस्तुत हुई है। बुधवार को हुई सुनवाई में शासन कोर्ट को बताया कि फिलहाल वार्ड में चुनाव स्थगित कर दिए हैं।

    इस पर कादरी के वकील ने सवाल उठाया कि अपील लंबित है तो फिर ऐसी स्थिति में चुनाव कराए कैसे जा सकते हैं। इस पर कोर्ट ने अपील की स्थिति के बारे में पूछा जिस पर सरकारी वकील ने जानकारी लेने की बात कही। इस पर कोर्ट ने शासन को दो दिन का समय दिया है। शासन को बताना है कि कादरी की ओर से दायर अपील की क्या स्थिति है। मामले में अब 11 सितंबर को सुनवाई होगी।

    शाही मस्जिद 100 वर्ष पुरानी, ऐतिहासिक दस्तावेज उपलब्ध
    याचिकाओं में मस्जिद कमेटी ने उज्जैन नगर निगम के नोटिस को अपूर्ण, अस्पष्ट और अवैधानिक बताते हुए आपत्ति दर्ज कराई थी। प्रबंधन का दावा है कि शाही मस्जिद 100 वर्ष से अधिक पुरानी है और इससे जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेज उपलब्ध हैं। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, 17 मार्च 1925 को सिंधिया राजघराने के चेयरमैन, टाउन इम्पूवमेंट ट्रस्ट और ग्वालियर सरकार लश्कर की ओर से शहर काजी को पत्र जारी किया गया था। इसमें भूमि अधिग्रहण के बाद मस्जिद के शेष हिस्से को यथावत रखने का उल्लेख था। इसके अलावा 13 सितंबर 1985 के मप्र शासन के राजपत्र में भी मस्जिद और उसकी पैमाइश का उल्लेख होने का दावा किया गया है।

    वर्तमान में सड़क करीब 40 फीट चौड़ी
    प्रबंधन का यह भी कहना है कि वर्ष 1975 में यातायात सुगम बनाने के लिए मस्जिद की ओर से स्वेच्छा से भूमि दी गई थी। वर्तमान में सड़क करीब 40 फीट चौड़ी है और आवागमन में कोई बड़ी बाधा नहीं है। इसलिए धार्मिक स्थल को हटाने की कार्रवाई को गलत बताया था। हालांकि, कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं ओर सरकार का पक्ष सुनने के बाद याचिकाओं को खारिज कर दिया है। याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता सैय्यद अश्हार अली वारसी ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि हम विस्तृत आदेश का इंतजार कर रहे हैं। कोर्ट के आदेश को देखने के बाद उसके खिलाफ हम अपील दायर करेंगे।

  • पंजाब के 3 पवित्र शहरों में मांस पर सख्ती, बिक्री से लेकर इस्तेमाल तक पर लगी रोक

    पंजाब के 3 पवित्र शहरों में मांस पर सख्ती, बिक्री से लेकर इस्तेमाल तक पर लगी रोक

    चंडीगढ़.

    पंजाब सरकार ने राज्य के तीन पवित्र शहरों में मांस की बिक्री और इस्तेमाल पर रोक से संबंधित नोटिफिकेशन अब असाधारण गजट में प्रकाशित कर दिया है। पंजाब सरकार के 9 सितंबर 2026 के असाधारण गजट में पशुपालन, मत्स्य पालन एवं डेयरी विकास विभाग की ओर से जारी आदेश को प्रकाशित किया गया है।

    खास बात यह है कि गजट में प्रकाशित आदेश पर 23 दिसंबर 2025 की तारीख दर्ज है। यानी प्रतिबंध का आदेश करीब साढ़े आठ महीने पहले जारी किया गया था, लेकिन अब इसे सरकारी गजट में प्रकाशित किया गया है। सरकार का यह आदेश अमृतसर की चारदीवारी वाले क्षेत्र, रूपनगर जिले के श्री आनंदपुर साहिब और बठिंडा जिले के तलवंडी साबो (श्री दमदमा साहिब) में लागू होगा। आदेश में कहा गया है कि इन क्षेत्रों में मांस की बिक्री और इस्तेमाल पर रोक तत्काल प्रभाव से लागू की जाएगी। उल्लंघन करने वालों के खिलाफ राज्य में लागू संबंधित कानूनों और नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी।

    गृह विभाग के निर्देश पर जारी हुआ आदेश
    पशुपालन विभाग के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह कार्रवाई गृह मामले विभाग की 15 दिसंबर 2025 की अधिसूचना में दिए गए निर्देशों के अनुपालन में की गई है। इसके बाद पशुपालन, मत्स्य पालन एवं डेयरी विकास विभाग ने 23 दिसंबर 2025 को प्रतिबंध संबंधी आदेश जारी किया। अब इसे 9 सितंबर 2026 को पंजाब सरकार के असाधारण गजट में प्रकाशित किया गया है।

    अमृतसर में पूरे शहर पर नहीं, चारदीवारी क्षेत्र में रोक
    नोटिफिकेशन में अमृतसर के लिए पूरे शहर को प्रतिबंधित क्षेत्र नहीं बनाया गया है। इसमें विशेष तौर पर अमृतसर के चारदीवारी वाले शहर का उल्लेख है। वहीं श्री आनंदपुर साहिब और तलवंडी साबो (श्री दमदमा साहिब) की संबंधित नगर पालिका सीमाओं में यह आदेश लागू होगा।

    पवित्र शहर घोषित करने के फैसले की पृष्ठभूमि
    राज्य सरकार ने इन क्षेत्रों को धार्मिक महत्व को देखते हुए पवित्र शहर घोषित करने का फैसला किया था। अमृतसर में श्री हरमंदिर साहिब, श्री आनंदपुर साहिब में तख्त श्री केसगढ़ साहिब और तलवंडी साबो में तख्त श्री दमदमा साहिब जैसे प्रमुख धार्मिक स्थल हैं। इन क्षेत्रों की धार्मिक मर्यादा और गरिमा को बनाए रखने के उद्देश्य से प्रतिबंध का फैसला लिया गया था। हालांकि, वर्तमान गजट में मांस की बिक्री और इस्तेमाल पर प्रतिबंध का स्पष्ट उल्लेख है। शराब, तंबाकू और अन्य नशीले पदार्थों पर रोक संबंधी व्यापक घोषणा को अलग सरकारी आदेश के बिना इसी नोटिफिकेशन का हिस्सा नहीं माना जा सकता।