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  • बिजली संकट से पंजाब बेहाल, थर्मल-हाइडल यूनिटें ठप और कोयला कम; जालंधर में सड़कों पर उतरे लोग

    बिजली संकट से पंजाब बेहाल, थर्मल-हाइडल यूनिटें ठप और कोयला कम; जालंधर में सड़कों पर उतरे लोग

    जालंधर

    पंजाब में बिजली संकट और गहरा गया है। बिजली की मांग 16,619 मेगावाट के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। शुक्रवार को राजपुरा थर्मल की 700 मेगावाट की यूनिट नंबर-1 तकनीकी खराबी के कारण बंद हो गई। पहले से कई थर्मल और हाइडल यूनिटों के ठप होने से राज्य में कुल 1,915 मेगावाट बिजली उत्पादन प्रभावित है। बारिश की कमी और उमस भरी गर्मी के बीच बढ़ी मांग के कारण उद्योगों, जिला मुख्यालयों, गांवों और कृषि क्षेत्र में बिजली कटौती करनी पड़ी।

    बिजली संकट के कारण उद्योगों में सवा चार घंटे, जिला मुख्यालयों पर तीन से चार घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में एक घंटे के कट लगाने पड़े। कृषि क्षेत्र को भी केवल पांच से छह घंटे बिजली मिल सकी।

    शुक्रवार को तकनीकी खराबी से राजपुरा थर्मल की 700 मेगावाट की यूनिट नंबर-1 बंद हो गई। पहले से रोपड़ थर्मल की 210 मेगावाट यूनिट नंबर-6 और तलवंडी साबो थर्मल की 660 मेगावाट यूनिट नंबर-2 बंद हैं। हाइडल परियोजनाओं में रणजीत सागर बांध की 300 मेगावाट क्षमता वाली यूनिट नंबर-3 व 4 तथा यूबीआईडीसी की तीन यूनिटें ठप हैं। हाइडल से 345 मेगावाट उत्पादन प्रभावित है। 

    पंजाब में बिजली संकट और गहरा गया है। शुक्रवार को बिजली की मांग रिकॉर्ड 16,619 मेगावाट तक पहुंच गई। प्राइवेट थर्मल प्लांट तलवंडी साबो में 7 दिन और राजपुरा थर्मल प्लांट में 3 दिन का कोयला बचा है।

    तलवंडी साबो में चार, राजपुरा में सात दिन का कोयला बचा
    थर्मल प्लांटों में कोयले का संकट भी बरकरार है। तलवंडी साबो में चार, राजपुरा में सात, लहरा मोहब्बत में 11 और गोइंदवाल में 18 दिन का कोयला बचा है। पावरकॉम के अपने सभी साधनों से शुक्रवार को केवल 4,162 मेगावाट बिजली उपलब्ध रही, जबकि मांग पूरी करने के लिए नॉर्दर्न ग्रिड से 11,747 मेगावाट बिजली लेनी पड़ी। शुक्रवार की मांग 2025 के 11,404 मेगावाट और 2024 के 14,481 मेगावाट से भी काफी अधिक रही। 

    थर्मल और हाइडल यूनिटों के बंद होने से राज्य में कुल 1,915 मेगावाट बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ है। बिजली संकट के कारण उद्योगों में करीब सवा चार घंटे, जिला मुख्यालयों पर 3 से 4 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 1 घंटे के कट लगाने पड़े। कृषि क्षेत्र को भी केवल 5 से 6 घंटे बिजली मिल सकी।

    इधर, जालंधर के इंडस्ट्रियल एरिया में 10 से 11 घंटे के लंबे बिजली कट से परेशान लोगों ने देर रात करीब साढ़े 11 बजे सोढल चौक पर जाम लगा दिया। लोगों ने सरकार और पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PSPCL) के खिलाफ नारेबाजी की।

    प्रदर्शन कर रहे लोगों ने कहा कि शाम 7 बजे से अगले दिन सुबह 6 बजे तक लगातार 10 से 11 घंटे के कट लगाए जा रहे हैं। बिजली नहीं होने से पीने के पानी की सप्लाई भी प्रभावित हो रही है। उनका कहना था कि लंबे बिजली कट के कारण लोग रात में ठीक से सो भी नहीं पा रहे हैं।

    राजपुरा में 3 दिन का कोयला बाकी
    जानकारी के अनुसार, हर प्लांट में 20 दिन के कोयले का स्टॉक होना जरूरी होता है। लेकिन प्राइवेट थर्मल प्लांट तलवंडी साबो में टोटल स्टॉक 23 प्रतिशत कोयला बचा है, जो कि 7 दिन के लिए है। इसी तरह राजपुरा में स्टॉक का 18 प्रतिशत कोयला बचा है, जो 3 दिन ही चलेगा। हालांकि दोनों थर्मल प्लांटों को कोयले की सप्लाई प्रति दिन खपत के अनुसार निरंतर मिल रही है।

    इसी तरह सरकारी थर्मल प्लांट लहरा मोहब्बत में 68 प्रतिशत कोयला स्टॉक में है, जो कि खपत के हिसाब से 12 दिन के लिए है। वहीं गोइंदवाल में 93 प्रतिशत स्टॉक है, जो कि 32 दिन के लिए है। इसी तरह रोपड़ में 169 प्रतिशत कोयले का स्टॉक है, जो कि खपत के हिसाब से 66 दिन के लिए है।

    इन प्लांटों की यूनिटें बंद
    पावरकॉम के अपने सभी साधनों से शुक्रवार को केवल 4,162 मेगावाट बिजली उपलब्ध रही, जबकि मांग पूरी करने के लिए नॉर्दर्न ग्रिड से 11,747 मेगावाट बिजली लेनी पड़ी। रोपड़ थर्मल की 210 मेगावाट यूनिट नंबर-6 और तलवंडी साबो थर्मल की 660 मेगावाट यूनिट नंबर-2 बंद हैं। हाइडल परियोजनाओं में रणजीत सागर बांध की 300 मेगावाट क्षमता वाली यूनिट नंबर-3 व 4 तथा यूबीडीसी की तीन यूनिटें बंद हैं।

    शिकायत पर JE और XEN नहीं करते सुनवाई
    जालंधर में प्रदर्शन कर रहे लोगों ने आरोप लगाया कि बिजली विभाग के अधिकारियों (JE और XEN) को शिकायत करने पर कोई सुनवाई नहीं होती। अधिकारी पटियाला मुख्यालय से मैसेज आने और ऊपर से ही कट लगाए जाने का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं।

    सबसे ज्यादा राजस्व देने वाले औद्योगिक क्षेत्र का ऐसा हाल होने पर स्थानीय कारोबारियों ने रोष व्यक्त किया कि बिना बिजली के न तो फैक्ट्रियां चल पा रही हैं और न ही घरों में कोई काम हो पा रहा है।

    मुफ्त के बजाय 24 घंटे बिजली दे सरकार
    प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि सरकार मुफ्त बिजली और बिजली बिल माफ जैसे बड़े-बड़े दावे करना बंद करे और 24 घंटे बिजली देने का प्रबंध करे। जब भी अधिकारियों से बात करते हैं तो एक ही जवाब मिलता है कि पटियाला से आदेश है। अगर जल्द ही बिजली कटौती की समस्या का स्थाई समाधान नहीं किया गया, तो वे अपने इस आंदोलन को और उग्र करेंगे और सड़कों पर पक्का धरना देने के लिए मजबूर होंगे।

    5 दिन पहले ही बिजली मंत्री ने दी थी चेतावनी
    बिजली मंत्री तरणप्रीत सिंह सौंद ने कोयले की कमी से पैदा हुए बिजली संकट पर 5 दिन पहले वीडियो जारी किया था। इसमें कहा था कि पूरे भारत में कोयले की कमी के कारण सूबे को घरेलू और इंडस्ट्री सेक्टर में कट लगाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

    देशभर में लगभग 63 गीगावाट (GW) क्षमता के थर्मल पावर प्लांट कोयले की किल्लत से सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं और अधिकांश निजी बिजली प्लांट के पास केवल 3 से 4 दिनों का ही कोयला स्टॉक बचा है, जिसके कारण वे अपनी आधी क्षमता (हाफ कैपेसिटी) पर चलने को मजबूर हैं।

    बिजली मंत्री ने कहा कि नाभा पावर लिमिटेड (राजपुरा) और तलवंडी साबो पावर प्लांट (मानसा) पूरी तरह से केंद्र सरकार द्वारा सप्लाई किए जाने वाले कोयले पर निर्भर हैं। केंद्र से पर्याप्त कोयला न मिलने के कारण ये दोनों बड़े प्लांट वर्तमान में आधी क्षमता पर ही बिजली उत्पादन कर पा रहे हैं।

  • ग्वालियर में तिघरा डैम से पानी की निकासी शुरू, 9-9 इंच खुले 3 गेट

    ग्वालियर में तिघरा डैम से पानी की निकासी शुरू, 9-9 इंच खुले 3 गेट

    ग्वालियर
    तिघरा डैम का जलस्तर लगातार बढ़ने के बाद शुक्रवार शाम साढ़े छह बजे इसके तीन गेट खोल दिए गए। तीनों गेट नौ-नौ इंच खोले गए और इनके जरिए 1040 क्यूसिक पानी सांक नदी में छोड़ा गया। खास बात यह है कि इस सीजन में मानसून के आखिरी दिनों में पहली बार तिघरा डैम के गेट खोले गए हैं।

    गेट खोले जाने के दौरान निगम महापौर शोभा सिकरवार, एमआइसी सदस्य, जल संसाधन विभाग और नगर निगम के इंजीनियरों सहित अन्य अधिकारी मौके पर मौजूद रहे।

    सुबह 739.40 फीट था जलस्तर, दिनभर बढ़ता रहा
    शुक्रवार सुबह आठ बजे तिघरा बांध का जलस्तर 739.40 फीट दर्ज किया गया था। दिन में तिघरा के कैचमेंट क्षेत्र में हुई वर्षा के कारण जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा। जलस्तर में हो रही लगातार बढ़ोतरी और आगे संभावित वर्षा को देखते हुए जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने दोपहर करीब 1:30 बजे गेट खोले जाने की सूचना जारी की।

    शाम पांच बजे तक बांध का जलस्तर 739.50 फीट से अधिक पहुंच गया। इसके बाद भी जलस्तर बढ़ता रहा। भारी वर्षा की संभावना को देखते हुए अधिकारियों ने आखिरकार तीन गेट खोलने का निर्णय लिया। शाम साढ़े छह बजे गेट नौ-नौ इंच खोलकर सांक नदी में 1040 क्यूसिक पानी छोड़ा गया।

    इस सीजन में पहली बार खुले डैम के गेट
    इस बार मानसून के दौरान तिघरा डैम के गेट लंबे समय तक बंद रहे। पिछले वर्षों में जुलाई से अक्टूबर के बीच तिघरा डैम के गेट 17 बार खोले गए थे। इस बार मानसून के आखिरी दिनों में पहली बार गेट खोलने की स्थिति बनी है।

    अगस्त के आखिरी सप्ताह और सितंबर की शुरुआत में हुई बारिश से डैम का जलस्तर तेजी से बढ़ा। इसके बाद रात में और शुक्रवार दिन में हुई बारिश ने जलस्तर को और ऊपर पहुंचा दिया। इसी के चलते डैम से पानी छोड़ना पड़ा।

    गेट खुलने की खबर से शहरवासियों में खुशी
    ग्वालियर शहर की जलापूर्ति मुख्य रूप से तिघरा डैम पर निर्भर है। इस मानसून के आधे सीजन तक पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण तिघरा डैम आधा भी नहीं भर पाया था। इसका असर शहर की जलापूर्ति पर भी पड़ा और लोगों को एक दिन छोड़कर पानी मिल रहा था।

    डैम के पर्याप्त नहीं भरने से आगे जलसंकट की चिंता भी बढ़ गई थी। हालांकि अगस्त के आखिरी सप्ताह और सितंबर की शुरुआत में हुई अच्छी बारिश से तस्वीर बदल गई। तिघरा डैम के फुल होने के बाद अब गेट खोले जाने से शहरवासियों में खुशी है। लोगों को उम्मीद है कि अब ग्वालियर में रोजाना पानी की सप्लाई हो सकेगी।

    एम. विश्वेश्वरैया की देखरेख में मजबूत हुई इंजीनियरिंग
    तिघरा डैम का निर्माण सांक नदी पर वर्ष 1916 में कराया गया था। महाराजा माधवराव सिंधिया प्रथम ने बांध की योजना और उसकी तकनीकी बारीकियों को समझने के लिए भारत के महान इंजीनियर और भारत रत्न सर एम. विश्वेश्वरैया को आमंत्रित किया था।

    1917 में बांध के शुरुआती क्षतिग्रस्त होने के बाद इसके पुनर्निर्माण और आटोमैटिक फ्लड गेट्स की तकनीक को मजबूत बनाने में उनके सुझावों और इंजीनियरिंग का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

    निर्माण के ठीक एक साल बाद 19 अगस्त 1917 को भारी बारिश और नींव में बलुआ पत्थर के रिसाव के कारण बांध का एक हिस्सा टूट गया था। इसके बाद इसे अधिक मजबूत संरचना के साथ दोबारा तैयार किया गया।

    1927 में जीर्णोद्धार, 1970 में फिर आईं दरारें
    वर्ष 1927 के आसपास तिघरा डैम का जीर्णोद्धार पूरा हुआ। इसके बाद 1970 में अत्यधिक जलभराव और तकनीकी वजहों से इसके कुछ हिस्सों में फिर दरारें आईं। इसके बाद सरकार ने आधुनिक सिविल इंजीनियरिंग तकनीक का इस्तेमाल करते हुए इसे मजबूत कंक्रीट और चुनाई संरचना में बदला।

    तिघरा डैम से ग्वालियर शहर को जलापूर्ति की शुरुआत वर्ष 1916 से ही हुई थी। 1916 से अब तक यह शहर की लगभग 14 लाख आबादी के लिए पेयजल का प्राथमिक स्रोत बना हुआ है। मोतीझील वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में तिघरा का पानी साफ करने के बाद शहर की विभिन्न टंकियों तक पहुंचाया जाता है।

    24 मीटर ऊंचा और 1,341 मीटर लंबा है डैम
    तिघरा डैम की ऊंचाई लगभग 24 मीटर और लंबाई 1,341 मीटर है। इसका निर्माण ग्वालियर शहर की जलापूर्ति के साथ आसपास के 11 गांवों की सिंचाई के उद्देश्य से कराया गया था।

  • मेडिकल छात्रों के लिए बड़ी खबर, CIMS में 19 PG कोर्स का नवीनीकरण; MD-MS की 91 सीटें उपलब्ध

    मेडिकल छात्रों के लिए बड़ी खबर, CIMS में 19 PG कोर्स का नवीनीकरण; MD-MS की 91 सीटें उपलब्ध

    बिलासपुर.

    छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर ने चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) के स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान शिक्षा बोर्ड शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए सिम्स के 19 स्नातकोत्तर चिकित्सा पाठ्यक्रमों के नवीनीकरण को अस्थायी स्वीकृति प्रदान कर एमडी एवं एमएस पाठ्यक्रमों की कुल 91 सीटों पर प्रवेश की अनुमति दी है।

    एनएमसी की स्वीकृति के अनुसार, एमडी के 14 पाठ्यक्रमों में 69 सीटें तथा एमएस के 5 पाठ्यक्रमों में 22 सीटें शामिल हैं। यह स्वीकृति सिम्स में स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा के विस्तार और गुणवत्ता को बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने इस उपलब्धि पर कहा कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए पीजी पाठ्यक्रमों के नवीनीकरण की अनुमति मिलना संस्थान के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि सिम्स परिवार, विशेषकर पीजी विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं चिकित्सा शिक्षा से जुड़े सभी लोगों के लिए उत्साहवर्धक है। उन्होंने कहा कि एमडी एवं एमएस पाठ्यक्रमों में प्रवेश की अनुमति मिलना संस्थान की शैक्षणिक गुणवत्ता, प्रशिक्षण व्यवस्था और चिकित्सा शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इससे विद्यार्थियों को बेहतर व्यावहारिक एवं चिकित्सकीय प्रशिक्षण के अवसर मिलेंगे और प्रदेश को भविष्य में अधिक संख्या में दक्ष एवं विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध हो सकेंगे। सिम्स के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने भी इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पीजी पाठ्यक्रमों के नवीनीकरण की अनुमति सिम्स के लिए एक महत्वपूर्ण और उत्साहवर्धक उपलब्धि है।

    इन विभागों में मिली सीटों की स्वीकृति
    एमडी पाठ्यक्रमों में सामुदायिक चिकित्सा में 5, फॉरेंसिक मेडिसिन में 2, एनाटॉमी में 3, बायोकेमिस्ट्री में फार्माकोलॉजी में 5 माइक्रोबायोलॉजी में 5 पीडियाट्रिक्स में 6, एनेस्थीसियोलॉजी में 8 त्वचा रोग में 3, जनरल मेडिसिन में 8, मनोचिकित्सा में 3, पैथोलॉजी में 9, रेडियो डायग्नोसिस में तथा रेस्पिरेटरी मेडिसिन में 2 सीटों को स्वीकृति मिली है वहीं एमएस पाठ्यक्रमों में ईएनटी की 4. नेत्र रोग की 3, प्रसूति एवं स्त्री रोग की 6, ऑर्थोपेडिक्स की 6 तथा जनरल सर्जरी की 6 सीटें शामिल हैं।

    चिकित्सा शिक्षा को मिलेगा नया विस्तार
    एनएमसी की यह स्वीकृति सिम्स की शैक्षणिक गतिविधियों को नई गति देने वाली मानी जा रही है। विभिन्न चिकित्सा विशेषज्ञताओं में पीजी सीटों की उपलब्धता से न केवल चिकित्सकीय शिक्षा का विस्तार होगा, बल्कि आने वाले वर्षों में प्रदेश को विभिन्न विशेषज्ञताओं के प्रशिक्षित चिकित्सक भी मिलेंगे। एनएमसी ने अपने स्वीकृति पत्र में स्पष्ट किया है. कि, वास्तविक सीटों की संख्या मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड द्वारा स्वीकृत संख्या के अनुसार ही मान्य होगी सिम्स प्रशासन ने इस उपलब्धि संस्थान के चिकित्सकों, शिक्षकों, पीजी विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम बताया है।

  • विकास को मिलेगी रफ्तार, केंद्र के सुधारों के अनुरूप छत्तीसगढ़ में बदले भूमि उपयोग के नियम

    विकास को मिलेगी रफ्तार, केंद्र के सुधारों के अनुरूप छत्तीसगढ़ में बदले भूमि उपयोग के नियम

    रायपुर : विकास को गति देने छत्तीसगढ़ में भूमि उपयोग नियमों में बड़ा बदलाव

    डीरिगुलेशन और अनुपालन बोझ कम करने के केंद्र के सुधारों के अनुरूप छत्तीसगढ़ की नई पहल

    Negative List आधारित व्यवस्था से भूमि उपयोग होगा अधिक लचीला और व्यावहारिक, निवेश एवं विकास गतिविधियों को मिलेगी सहजता

    रायपुर

    छत्तीसगढ़ में विकास गतिविधियों को गति देने और भूमि उपयोग से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक सरल, स्पष्ट एवं व्यावहारिक बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। आवास एवं पर्यावरण विभाग ने छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया है। प्रस्तावित संशोधन में विभिन्न भूमि उपयोग श्रेणियों के लिए Negative List आधारित व्यवस्था अपनाने का प्रावधान किया गया है। यह पहल केंद्र सरकार के डीरिगुलेशन और अनुपालन बोझ कम करने के व्यापक सुधारों के अनुरूप है।

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार का निरंतर प्रयास है कि नागरिकों, उद्यमियों और निवेशकों के लिए नियमों और प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाए तथा विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हो। भूमि उपयोग नियमों में प्रस्तावित संशोधन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे बदलती जरूरतों के अनुरूप विकास गतिविधियों को आगे बढ़ाने में सुविधा होगी तथा प्रदेश में निवेश, रोजगार और अधोसंरचना विकास को गति मिलेगी।

    आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य नियमन को समाप्त करना नहीं, बल्कि उसे अधिक स्पष्ट, सरल, लचीला और परिणामोन्मुख बनाना है। Negative List आधारित व्यवस्था के माध्यम से प्रतिबंधित गतिविधियों को स्पष्ट रूप से निर्धारित किया जाएगा, जबकि अन्य गतिविधियों के लिए अनावश्यक नियामकीय बाधाएं कम होंगी। इससे बदलती आर्थिक एवं सामाजिक जरूरतों के अनुरूप भूमि उपयोग व्यवस्था अधिक व्यावहारिक बनेगी।

    मंत्री चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत विजन@2047 के अनुरूप और भारत सरकार के डीरिगुलेशन एवं ईज ऑफ लिविंग से जुड़े सुधारों की दिशा में छत्तीसगढ़ लगातार नीतिगत सुधार कर रहा है। आवास एवं पर्यावरण विभाग द्वारा पिछले दो वर्षों में ग्रामीण और शहरी विकास को गति देने के लिए अनेक सुधार किए गए हैं। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियमों में प्रस्तावित यह बदलाव प्रदेश के आवासीय, वाणिज्यिक एवं औद्योगिक विकास को नई गति देगा।

    उन्होंने कहा कि इस सुधार से मास्टर प्लान में निर्धारित विभिन्न भूमि उपयोगों को अधिक लचीला, व्यावहारिक और समयानुकूल बनाया जा सकेगा। इसका लाभ आम नागरिकों को भी मिलेगा और भूमि उपयोग से संबंधित प्रक्रियाओं में आने वाली कठिनाइयों को कम करने का मार्ग प्रशस्त होगा। नई व्यवस्था का उद्देश्य विकास की संभावनाओं को बढ़ाने के साथ-साथ नियोजित विकास और आवश्यक प्रतिबंधों के बीच संतुलन स्थापित करना है।

    प्रतिबंधित गतिविधियों की स्पष्ट सूची, अन्य गतिविधियों के लिए व्यापक अवसर

    प्रस्तावित संशोधन के अनुसार विभिन्न भूमि उपयोग श्रेणियों में केवल निर्धारित निषिद्ध गतिविधियों को प्रतिबंधित किया जाएगा। संबंधित भूमि उपयोग श्रेणी की Negative List में शामिल नहीं होने वाली गतिविधियों को अनुमत माना जाएगा। इससे वर्तमान के साथ-साथ भविष्य में विकसित होने वाली नई गतिविधियों के लिए भी अधिक व्यापक अवसर उपलब्ध होंगे।

    प्रस्ताव में आवासीय, वाणिज्यिक, औद्योगिक, सार्वजनिक एवं अर्द्ध-सार्वजनिक, परिवहन, आमोद-प्रमोद तथा कृषि भूमि उपयोग के लिए अलग-अलग निषिद्ध गतिविधियों की सूची निर्धारित की गई है। इससे प्रत्येक क्षेत्र की प्रकृति, पर्यावरणीय संवेदनशीलता और विकास की जरूरतों के अनुरूप स्पष्ट नियामकीय व्यवस्था विकसित होगी।

    आवासीय क्षेत्रों में सुरक्षा और पर्यावरण को प्राथमिकता

    आवासीय भूमि उपयोग के अंतर्गत प्रदूषणकारी उद्योगों, बड़े भंडारण, कबाड़खानों, संक्रामक रोग अस्पताल, कारागार, बड़े परिवहन टर्मिनल, थोक व्यापार, तेल डिपो, पेट्रोलियम एवं ज्वलनशील पदार्थों के भंडारण, गैस गोदाम, पशुपालन एवं मछली पालन, डेयरी एवं कुक्कुट पालन, दाह संस्कार/कब्रिस्तान तथा खनन जैसी गतिविधियों को निषिद्ध रखने का प्रस्ताव है। इससे आवासीय क्षेत्रों की सुरक्षा, पर्यावरणीय गुणवत्ता और बेहतर जीवन-परिस्थितियों को बनाए रखने में मदद मिलेगी।

    वाणिज्यिक और औद्योगिक क्षेत्रों के लिए स्पष्ट नियोजन

    वाणिज्यिक भूमि उपयोग में नारंगी, लाल एवं नीली श्रेणी के उद्योगों, खतरनाक एवं विषाक्त रसायनों तथा विस्फोटक पदार्थों के भंडारण सहित पशुपालन, मछली पालन, डेयरी एवं कुक्कुट पालन, दाह संस्कार/कब्रिस्तान तथा खनन गतिविधियों को निषिद्ध करने का प्रावधान किया गया है।

    वहीं औद्योगिक भूमि उपयोग में पूर्णतः आवासीय टाउनशिप, अनुमत कर्मचारी आवास को छोड़कर छात्रावास एवं शयनागार, विद्यालय, संक्रामक रोग अस्पताल, कारागार, बड़े परिवहन टर्मिनल, थोक व्यापार, तेल डिपो, पेट्रोलियम एवं ज्वलनशील पदार्थों का भंडारण, गैस गोदाम तथा पर्यावरण के प्रति संवेदनशील और असंगत गतिविधियों को प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव है।

    कृषि, सार्वजनिक और परिवहन क्षेत्रों के लिए भी स्पष्ट व्यवस्था

    कृषि भूमि उपयोग में आवासीय अभिन्यास, किफायती जन आवास एवं एकीकृत उपनगर को छोड़कर बड़े वाणिज्यिक परिसर, खतरनाक वाणिज्यिक उपयोग, विभिन्न श्रेणी के उद्योग, उच्च घनत्व वाली आवासीय योजनाएं तथा बड़े मॉल जैसी गतिविधियों को निषिद्ध रखने का प्रस्ताव है।

    इसी प्रकार सार्वजनिक एवं अर्द्ध-सार्वजनिक, परिवहन तथा आमोद-प्रमोद भूमि उपयोग के लिए भी असंगत, प्रदूषणकारी, खतरनाक एवं अत्यधिक भारी गतिविधियों को स्पष्ट रूप से निषिद्ध किया गया है। इससे निर्धारित भूमि उपयोग और संबंधित क्षेत्र की विकास आवश्यकताओं के बीच बेहतर संतुलन स्थापित किया जा सकेगा।

    नई अर्थव्यवस्था और बदलती जरूरतों के अनुरूप नियोजन

    तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था के साथ नई सेवाओं, संस्थाओं, व्यवसायों और तकनीकी गतिविधियों के स्वरूप भी लगातार विकसित हो रहे हैं। ऐसे में पहले से तय गतिविधियों की लंबी सूची के बजाय स्पष्ट रूप से निर्धारित निषिद्ध गतिविधियों के आधार पर नियमन करने से नई और उभरती गतिविधियों के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे।

    प्रस्तावित व्यवस्था से अनावश्यक अनुपालन बोझ कम होने के साथ विकास परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है। साथ ही निवेशकों के लिए अधिक स्पष्ट और पूर्वानुमानित नियामकीय वातावरण तैयार होगा। इससे प्रदेश के शहरों और कस्बों में नियोजित विकास को बढ़ावा देने के साथ आवास, व्यापार, सेवाओं और अधोसंरचना से जुड़ी बदलती जरूरतों को पूरा करने में भी सुविधा होगी।

    नागरिकों और संबंधित पक्षों से मांगे गए सुझाव

    प्रस्तावित संशोधन पर नागरिकों एवं संबंधित पक्षों से आपत्ति और सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से 15 दिवस की अवधि में प्राप्त आपत्तियों एवं सुझावों पर शासन द्वारा विचार किया जाएगा। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत नियमों में प्रस्तावित संशोधन को अंतिम रूप दिया जाएगा।

    भूमि उपयोग नियमों में प्रस्तावित यह बदलाव छत्तीसगढ़ में सरल नियमन, कम अनुपालन बोझ, स्पष्ट नियोजन और विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण सुधार है। इससे प्रदेश की बदलती विकास आवश्यकताओं के अनुरूप नियोजन व्यवस्था को अधिक लचीला और भविष्य के लिए तैयार बनाने में मदद मिलेगी।

  • मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दिए निर्देश, पात्र परिवारों को समय पर पूरा राशन पहुंचाना करें सुनिश्चित

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दिए निर्देश, पात्र परिवारों को समय पर पूरा राशन पहुंचाना करें सुनिश्चित

    रायपुर : हर पात्र परिवार को समय पर और पूरा राशन मिले, किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

    विशेष पिछड़ी जनजातियों की बसाहटों में राशन वितरण की नियमित निगरानी के निर्देश

    आमानारा में पहाड़ी कोरवा परिवारों को राशन नहीं मिलने की शिकायत को मुख्यमंत्री ने गंभीरता से लिया

    रायगढ़ कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी से दूरभाष पर ली जानकारी, पात्र परिवारों को तत्काल राशन उपलब्ध कराने के निर्देश

    शिकायत सही पाए जाने पर संबंधित राशन दुकान निलंबित, चिड़ोडी की राशन दुकान से की गई वैकल्पिक व्यवस्था

    मुख्यमंत्री ने कहा – ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति न हो, खाद्य विभाग और जिला प्रशासन सुनिश्चित करें

    रायपुर,

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से प्रत्येक पात्र परिवार को उसके अधिकार का पूरा राशन समय पर मिलना सुनिश्चित किया जाए। विशेष रूप से पहाड़ी कोरवा सहित विशेष पिछड़ी जनजातियों और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को राशन प्राप्त करने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। राशन वितरण में लापरवाही या अनियमितता पाए जाने पर जिम्मेदारी तय कर तत्काल कार्रवाई की जाए।

    मुख्यमंत्री साय ने अधिकारियों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली की नियमित निगरानी के निर्देश देते हुए कहा कि शासन द्वारा उपलब्ध कराया जा रहा खाद्यान्न वास्तविक हितग्राही तक निर्धारित मात्रा में और समय पर पहुंचे, यह संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है। विशेष पिछड़ी जनजातियों की बसाहटों में अधिकारी अतिरिक्त संवेदनशीलता के साथ राशन की उपलब्धता और वितरण की निगरानी करें।

    मुख्यमंत्री साय ने रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ क्षेत्र अंतर्गत आमानारा गांव में पहाड़ी कोरवा परिवारों को राशन नहीं मिलने की शिकायत को गंभीरता से लिया। उन्होंने रायगढ़ कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी से दूरभाष पर चर्चा कर पूरे प्रकरण की जानकारी ली और प्रभावित पात्र परिवारों को तत्काल राशन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री ने कलेक्टर से कहा कि शिकायत से जुड़े वितरण अभिलेखों की समुचित जांच की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी पात्र परिवार अपने हक के खाद्यान्न से वंचित न रहे। ई-पॉस मशीन में दर्ज वितरण और हितग्राहियों को वास्तव में दिए गए खाद्यान्न का मिलान कर किसी प्रकार की अनियमितता सामने आने पर जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

    जिला कलेक्टर  मयंक चतुर्वेदी ने मुख्यमंत्री साय को अवगत कराया कि शिकायत सामने आते ही मामले की जांच कराई गई। जांच में शिकायत सही पाए जाने पर संबंधित राशन दुकान को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही पहाड़ी कोरवा परिवारों एवं अन्य हितग्राहियों को राशन मिलने में कोई व्यवधान न आए, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में चिड़ोडी की राशन दुकान से संबद्ध किया गया है।

    मुख्यमंत्री साय ने निर्देश दिए कि इस प्रकरण में आवश्यक कार्रवाई के साथ ही जिले की सार्वजनिक वितरण प्रणाली की सतत निगरानी की जाए, ताकि ऐसी स्थिति की पुनरावृत्ति न हो। हर हितग्राही को समय पर और गुणवत्ता के साथ राशन वितरण सुनिश्चित हो। 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक सहज, पारदर्शी और समयबद्ध रूप से पहुंचाना हमारी सुशासन सरकार की प्राथमिकता है। प्रत्येक पात्र परिवार को उसका अधिकार बिना किसी बाधा के मिले, इसके लिए अधिकारी संवेदनशीलता, तत्परता और जवाबदेही के साथ कार्य करें।

  • BRICS में दिखेगी भारत की ताकत, मोदी-जिनपिंग की मुलाकात से पहले चीन ने दिया दोस्ती का संदेश

    BRICS में दिखेगी भारत की ताकत, मोदी-जिनपिंग की मुलाकात से पहले चीन ने दिया दोस्ती का संदेश

    नई दिल्ली
    राजधानी दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन का आज से आधिकारिक आगाज हो रहा है. पहले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को कई देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। 

    सबसे अहम मुलाकात शाम 5:45 बजे भारत मंडपम में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ होगी. चीनी राष्ट्रपति भारत के लिए रवाना हो चुके हैं. इससे पहले पीएम मोदी ने रूसी राष्ट्रपति पुतिन और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान समेत कई नेताओं से शुक्रवार को मुलाकात की थी। 

    जिनपिंग-मोदी की मुलाकात से पहले चीन का बड़ा बयान

    ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत के लिए रवाना हो चुके हैं. उनके दिल्ली पहुंचने से पहले चीन ने भारत के साथ रिश्तों को लेकर बड़ा बयान दिया है. चीन ने कहा है कि 'दोनों देशों को अपने मतभेदों को सही तरीके से संभालते हुए अच्छे पड़ोसी और दोस्त की तरह आगे बढ़ना चाहिए'. साथ ही बातचीत बढ़ाने पर जोर दिया गया है. पीएम मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात से ठीक पहले आए इस बयान ने सबका ध्यान खींचा है। 

    भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने कहा कि बीजिंग और नई दिल्ली दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय बैठक की तैयारी कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि चीन भारत के साथ रिश्तों को लंबे समय के नजरिए से आगे बढ़ाना चाहता है. इसके लिए बातचीत बढ़ाने, सहयोग मजबूत करने की जरूरत है. चीन की तरफ से दोनों देशों को अच्छे पड़ोसी और एक-दूसरे की कामयाबी में मदद करने वाले साझेदार के तौर पर आगे बढ़ने की बात कही गई है। 

    चीन ने मतभेदों को लेकर क्या कहा?

    शू फेइहोंग ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि चीन दोनों नेताओं की रणनीतिक सोच के मुताबिक भारत के साथ काम करेगा. उनका जोर इस बात पर रहा कि दोनों देश एक-दूसरे से संवाद बढ़ाएं. सहयोग के नए रास्ते तलाशें. साथ ही जो मतभेद हैं, उन्हें सही तरीके से संभाला जाए. सीधी भाषा में समझें तो चीन का संदेश है कि दोनों देशों के बीच कुछ मुद्दों पर असहमति हो सकती है, लेकिन इसकी वजह से बातचीत बंद नहीं होनी चाहिए. बीजिंग चाहता है कि रिश्तों को लंबे समय के नजरिए से देखा जाए। 

    विदेश मंत्रालय ने भी दिया यही संदेश
    चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने भी भारत को लेकर इसी तरह की बात कही है. उन्होंने कहा कि चीन भारत के साथ संवाद बढ़ाने के लिए तैयार है. दोनों देशों को अपने रिश्तों को रणनीतिक और लंबे समय के नजरिए से देखना चाहिए. माओ निंग ने भी मतभेदों को सही तरीके से संभालने पर जोर दिया. उन्होंने भारत और चीन को अच्छे पड़ोसी बताया. साथ ही दोनों देशों को एक-दूसरे की कामयाबी में मदद करने वाला साझेदार बताया। 

    सात साल बाद भारत आ रहे हैं जिनपिंग
    शी जिनपिंग शनिवार को नई दिल्ली पहुंचेंगे. वह 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आ रहे हैं. इस दौरान नरेंद्र मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय बातचीत भी होगी. करीब सात साल बाद जिनपिंग का भारत दौरा हो रहा है. इससे पहले वह 2019 में चेन्नई के पास महाबलीपुरम में मोदी के साथ अनौपचारिक बैठक के लिए भारत आए थे। 

    ऐसे समय में होने वाली यह मुलाकात अहम है, जब भारत-चीन रिश्तों में कई मुद्दों को लेकर मतभेद रहे हैं. दोनों देशों के बीच सीमा से जुड़े सवाल भी लंबे समय से बातचीत का हिस्सा रहे हैं. हाल के समय में दोनों तरफ से बातचीत को आगे बढ़ाने की कोशिश हुई है। 

    BRICS में भी रिश्तों पर नजर
    जिनपिंग का भारत दौरा सिर्फ पीएम मोदी के साथ मुलाकात तक सीमित नहीं है. वह ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भी हिस्सा लेंगे. बता दें कि भारत इस साल ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है. सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होगा। 

    चीन ने ब्रिक्स को लेकर भी बातचीत और सहयोग पर जोर दिया है. माओ निंग ने कहा कि बीजिंग ब्रिक्स देशों के साथ मिलकर विवादों को बातचीत के जरिए सुलझाने के लिए काम करना चाहता है. उनका कहना है कि ब्रिक्स उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों के लिए एक अहम मंच बन चुका है. जिनपिंग के भारत रवाना होने से पहले चीन के इन बयानों ने मोदी-जिनपिंग मुलाकात की अहमियत बढ़ा दी है. अब दोनों नेताओं की बातचीत में रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिए किन मुद्दों पर बात होती है, इस पर नजर रहेगी। 
     

    पहले दिन कब क्या होगा:-

        सुबह 11 बजे अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ मुलाकात. 
        सुबह 11:30 बजे प्रधानमंत्री की वियतनाम के नेता ले मिन्ह हंग के साथ बैठक होगी.
        इसी समय राष्ट्रपति भवन में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ बैठक.
        BRICS शिखर सम्मेलन के मुख्य कार्यक्रम के तहत दोपहर 2 बजे BRICS सदस्य देशों के नेताओं का भारत मंडपम के लेवल 2 पर आगमन होगा. दोपहर 2:35 बजे समिट हॉल में “Inclusive Global Governance and Strengthening Multilateralism” विषय पर बंद सत्र होगा.
        शाम 4:25 बजे नेता भारत मंडपम के हॉल 14 में 'Bharat Innovates Exhibition' का अवलोकन करेंगे. शाम 5:05 बजे भारत मंडपम के बाहर लॉन में फैमिली फोटो होगी और 5:10 बजे संयुक्त वृक्षारोपण कार्यक्रम होगा.
        शाम 5:45 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की द्विपक्षीय बैठक भारत मंडपम में होगी.
        रात 7:30 बजे प्रधानमंत्री की मेजबानी में भारत मंडपम के लेवल 3 पर गाला डिनर आयोजित किया जाएगा.

    ट्रैफिक को लेकर ये एडवाइजरी
    ब्रिक्स समिट के चलते दिल्ली पुलिस ने ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की है. शनिवार को सुबह 9:30 बजे से रात 9:30 बजे तक भारत मंडपम समेत लुटियंस दिल्ली और प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक नियंत्रित और डायवर्ट रहेगा. ट्रैफिक एडवाइजरी मैप में सेंट्रल दिल्ली और आसपास के इलाकों में कंट्रोल्ड सड़कें, प्रतिबंधित इलाके, वैकल्पिक रास्ते और डायवर्जन पॉइंट दिखाए गए हैं। 

    एडवाइजरी मैप में वैकल्पिक रास्तों को नीले रंग से, कंट्रोल्ड सड़कों को नारंगी रंग से, प्रतिबंधित इलाकों को बैंगनी रंग से और डायवर्जन पॉइंट को लाल स्टार से दिखाया गया है. इससे पता चलता है कि समिट के दौरान किन रास्तों पर लोगों को पाबंदियों या डायवर्जन का सामना करना पड़ सकता है। 
     

    शिखर सम्मेलन पर मौसम का साया
    BRICS शिखर सम्मेलन के दिन कई राज्यों में भारी से बारिश की चेतावनी जारी की गई है. दिल्ली-NCR (नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम) में अगले दो दिनों तक तेज हवाओं और गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना जताई गई है। 

  • 8th Pay Commission: 3.8 फिटमेंट फैक्टर लागू हुआ तो कितना बढ़ेगा पेंशन? 6% इंक्रीमेंट के साथ समझें नया हिसाब

    8th Pay Commission: 3.8 फिटमेंट फैक्टर लागू हुआ तो कितना बढ़ेगा पेंशन? 6% इंक्रीमेंट के साथ समझें नया हिसाब

    नई दिल्ली
    क्‍या आठवें वेतन आयोग में केंद्रीय कर्मचारियों को सैलरी में 30% की बढ़ोतरी से ही संतोष करना होगा? क्‍या पेंशनर्स को भी उनके पेंशन में इतनी ही बढ़ोतरी से संतोष करना होगा. 8वें वेतन आयोग की देश के अलग-अलग शहरों में हो रही बैठकों के बीच 3.833 फिटमेंट फैक्‍टर का प्रस्‍ताव दे चुके संगठन AINPSF यानी ऑल इंडिया NPS फेडरेशन को आशंका है कि आयोग ज्‍यादा फिटमेंट फैक्‍टर की सिफारिश शायद ही करे। 

    संगठन के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष डॉ मंजीत पटेल तो 2.10 फिटमेंट फैक्‍टर पर भी कैलकुलेशन कर अपने सदस्‍यों की राय मांग रहे हैं. 7वें वेतन आयोग की तुलना में 8वें वेतन आयोग के लिए उनका कैलकुलेशन सैलरी और पेंशन में करीब 31% की बढ़ोतरी की संभावना जता रहा है। 

    8वें वेतन आयोग में कितनी बढ़ जाएगी सैलरी और पेंशन? 
    इस सवाल का पक्‍का जवाब तो फिलहाल 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के पास भी नहीं है. देशभर में बैठकों का दौर समाप्‍त होने के बाद आयोग आकलन करेगा और तभी अपनी सिफारिशें तैयार करेगा. बहरहाल, अलग-अलग संगठन उम्‍मीदें लगाए बैठे हैं. इधर, डॉ मंजीत सिंह पटेल ने 100 रुपये के मूल वेतन पर सातवें वेतन आयोग और आठवें वेतन आयोग के लिए कैलकुलेशन सामने रखा है. उनका आकलन बताता है कि सैलरी 31.25% बढ़ सकती है. और पेंशन भी इसी अनुपात में बढ़ाई जा सकती है। 

    100 रुपये के मूल वेतन पर कैलकुलेशन का फॉर्मूला
    सैलरी 225 रुपये से बढ़कर 257 रुपये होने में या फिर 158 रुपये से बढ़कर 210 रुपये होने में, कहां ज्‍यादा लाभ दिख रहा है आपको? डॉ पटेल ने अपनी पोस्‍ट में यही लिखा है. इस संबंध में हमने जब उनसे बात की तो उन्‍होंने बताया कि 100 रुपये के मूल वेतन पर मोटा-मोटी कैलकुलेशन किया गया है. उन्‍होंने समझाया

    पहले सातवें वेतन आयोग का कैलकुलेशन समझ लें  

        छठे वेतन आयोग में मान लीजिए किसी की सैलरी 100 रुपये थी. 
        तब DA बढ़कर 125% पहुंच गया था. 
        यानी बेसिक + DA मिलाकर सैलरी बनी- 225 रुपये 
        7वां वेतन आयोग हुआ तो 2.57 फिटमेंट फैक्‍टर लागू हुआ तो सैलरी हो गई 100 x 2.57= 257 रुपये 
        वास्‍तविक बढ़ोतरी= 257-225 = 32 रुपये 
        इसे 225 रुपये के आधार पर प्रतिशत में निकाला जाए तो ये महज 14.22% बढ़ोतरी हुई. 

    अब इसी तरह 8वें वेतन आयोग का कैलकुलेशन देखिए 

        7वें वेतन आयोग में किसी की सैलरी 100 रुपये मान लीजिए
        DA बढ़कर 60% पहुंच गया है.
        यानी बेसिक + DA मिलाकर सैलरी बनी- 160 रुपये 
        अब अगर 2.10 फिटमेंट फैक्‍टर लागू होता है तो सैलरी हो जाएगी: 210 रुपये 
        वास्‍तविक बढ़ोतरी= 210-160 = 50 रुपये
        अब इसे 210 रुपये के आधार पर प्रतिशत में निकाला जाए तो बढ़ोतरी होगी- करीब 31.25%

    डॉ पटेल ने कहा कि अगर 8वें वेतन आयोग में व्‍यवहारिक तौर पर 2.10 फिटमेंट फैक्‍टर लागू होता है तो कर्मचारियों और पेंशनर्स को 31% की बढ़ोतरी से ही संतोष करना पड़ सकता है। 

    31% बढ़ोतरी पर किस लेवल के कर्मचारियों की कितनी हो जाएगा सैलरी? 

    लेवल 1 कर्मचारी की शुरुआती बेसिक सैलरी ₹18,000 है. इस पर 60% DA यानी ₹10,800 जोड़ने पर कुल रकम ₹28,800 बनती है. अब यदि इस ₹28,800 पर 31% बढ़ोतरी की जाए, तो ये राशि करीब ₹37,728 प्रति माह हो जाएगी। 

    लेवल 5 में कर्मचारी की शुरुआती बेसिक सैलरी ₹29,200 होती है. इस पर 60% DA जोड़ने के बाद रकम ₹46,720 बनती है और अगर इसमें 31% बढ़ाया जाए, तो यह अनुमानित रूप से ₹61,203 प्रति माह हो जाएगी। 

    इसी तरह लेवल 10 की एंट्री बेसिक सैलरी ₹56,100 है. 60% DA के साथ यह ₹89,760 बनती है और इस पूरी राशि में 31% जोड़ने पर अनुमानित रकम करीब ₹1.18 लाख प्रति माह पहुंचती है। 

    लेवल 14 में एंट्री बेसिक पे ₹1,44,200 प्रति माह है. 60% DA के साथ यह रकम ₹2,30,720 होती है, जबकि इस कुल राशि में 31% जोड़ने पर अनुमानित वेतन ₹3,02,243 प्रति माह पहुंचेगा। 

    लेवल 18 में कैबिनेट सचिव स्तर की निर्धारित बेसिक सैलरी ₹2,50,000 प्रति माह है. 60% DA के बाद यह ₹4,00,000 हो जाती है और इस रकम पर 31% की गणितीय बढ़ोतरी के बाद कुल अनुमानित राशि ₹5,24,000 प्रति माह बनती है। 

    किस संगठन ने फिटमेंट फैक्‍टर और मिनिमम सैलरी पर क्‍या प्रस्‍ताव दिया है? 

    कर्मचारियों के संगठनों के संयुक्‍त प्रतिनिधि NC-JCM स्‍टाफ साइड (National Council of the Joint Consultative Machinery) ने 3.833 फिटमेंट फैक्टर और 69,000 रुपये मिनिमम सैलरी का प्रस्ताव रखा है. वहीं, AINPSEF (All India New Pension Scheme Employees Federation) और AIDEF (All India Defence Employees' Federation) ने भी 3.833 फिटमेंट फैक्टर और 69,000 रुपये मिनिमम सैलरी का प्रस्ताव रखा है. FNPO (Federation of National Postal Organisations) की भी यही मांग है. कुछ संगठनों ने व्यवहारिक तौर पर कम फिटमेंट फैक्‍टर का भी प्रस्‍ताव दिया है। 

    IRTSA (Indian Railways' Technical Supervisors' Association) ने 2.92 के न्यूनतम फिटमेंट फैक्टर और 52,560 रुपये न्यूनतम सैलरी (Multiple with minimum at Rs 52,560) का प्रस्ताव रखा है। 

    दिल्‍ली गवर्नमेंट स्‍कूल टीचर्स ने 2.62 फिटमेंट फैक्टर और 47,210 रुपये मिनिमम सैलरी का प्रस्ताव रखा है. वहीं चेन्नई GPO पेंशनर्स ने 3.77 फिटमेंट फैक्टर और 68,000 रुपये मिनिमम सैलरी का प्रस्ताव रखा है. भारत पेंशनर्स समाज (BPS) ने 3.833 फिटमेंट फैक्टर और 69,000 रुपये मिनिमम सैलरी का प्रस्ताव रखा है। 

  • DA Hike 2026: 64% महंगाई भत्ते से कितना बढ़ेगा वेतन-पेंशन? लेवल 1 से 10 तक पूरा कैलकुलेशन जानें

    DA Hike 2026: 64% महंगाई भत्ते से कितना बढ़ेगा वेतन-पेंशन? लेवल 1 से 10 तक पूरा कैलकुलेशन जानें

    नई दिल्ली

    त्योहारी सीजन की शुरुआत के साथ ही 1 करोड़ से ज्यादा केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की नजरें महंगाई भत्ते (Dearness Allowance)पर टिक गई हैं. देश के करीब 50 लाख कर्मचारियों और 65 लाख से अधिक पेंशनर्श जुलाई 2026 से लागू होने वाले इस भत्ते में बढ़तरी(DA Hike july 2026) का बेसब्री से इंतजार कर रहे है. इस साल 11 अक्टूबर से नवरात्रि और 20 अक्टूबर को दशहरा है. ऐसे में हर कोई जानना चाहता है कि क्या सरकार दुर्गा पूजा या नवरात्रि के आसपास इस तोहफे का ऐलान करेगी। 

    आइए आपको बताते हैं कि ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (AICPI) के अनुमानित आंकड़े और सरकार के पिछले पैटर्न के हिसाब से कब सरकारी कर्मचारियों के डीए पर गुड न्यूज मिल सकती है और इस बार कितनी बढ़ोतरी की उम्मीद की जा रही है…

    कब तक हो सकती है महंगाई भत्ते की घोषणा?
    आमतौर पर सरकार जुलाई से लागू होने वाले डीए की घोषणा सितंबर या अक्टूबर में करती है. अगर नवरात्रि पर ऐलान नहीं होता है, तो सरकार दिवाली तक पर कर्मचारियों को ये तोहफा दे सकती है. अच्छी बात यह है कि महंगाई भत्ते की घोषणा जब भी होगी, भत्ते की दरें 1 जुलाई 2026 से ही लागू मानी जाएंगी. इसका मतलब है कि कर्मचारियों को पिछले महीनों का बकाया एरियर भी साथ में मिलेगा। 

    कितना बढ़ सकता है आपका DA?
    फिलहाल कर्मचारियों को बेसिक सैलरी का 60% डीए मिल रहा है. ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (AICPI-IW) के जुलाई आंकड़ों के मुताबिक इंडेक्स 153.2 पर पहुंच गया है. इस आधार पर अनुमानित डीए 64% बैठता है. यानी इस बार डीए में सीधा 4% का इजाफा होने की पूरी उम्मीद है. जब तक 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें पूरी तरह लागू नहीं होतीं, तब तक यह बढ़ोतरी 7वें वेतन आयोग के तहत ही दी जाएगी। 

    कितनी बढ़ेगी इन-हैंड सैलरी?
    हालांकि आपको ये समझना होगा कि 4% डीए बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि आपकी कुल टेक-होम सैलरी 4% बढ़ जाएगी. डीए का कैलकुलेशन आपकी बेसिक सैलरी पर होता है…. यहां समझिए डीए बढ़ने से अलग-अलग लेवल के कर्मचारियों की बेसिक सैलरी बढ़कर कितनी हो जाएगी..

    डीए का कैलकुलेशन आपकी बेसिक सैलरी पर होता है. 4% डीए बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि आपकी कुल टेक-होम सैलरी 4% बढ़ जाएगी

    सिर्फ सैलरी नहीं पेंशन भी बढ़ेगा
    महंगाई भत्ता सिर्फ इन-हैंड सैलरी ही नहीं बढ़ाता, बल्कि इसका असर पीएफ (PF), ग्रेच्युटी और पेंशनर्श की मासिक पेंशन पर भी पड़ता है. जैसे ही सरकार कैबिनेट बैठक में इसे मंजूरी देगी, त्योहारी सीजन में कर्मचारियों के बैंक खातों में बढ़ी हुई सैलरी और एरियर की रकम जमा हो जाएगी. फिलहाल आपको त्योहारों से पहसे सरकार की तरफ से आने वाले एक बड़े फैसले के लिए इंतजार करना होगा। 

     

  • मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा से बदलेगा MP का सफर, 20 साल बाद लौटेगी सरकारी बस; 15 हजार बसों की तैयारी

    मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा से बदलेगा MP का सफर, 20 साल बाद लौटेगी सरकारी बस; 15 हजार बसों की तैयारी

    इंदौर
     इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में दो दिवसीय 'यात्री परिवहन विजन समिट-2026' का औपचारिक शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि करीब दो दशकों के अंतराल के बाद राज्य सरकार सार्वजनिक परिवहन के क्षेत्र में एक नया और आधुनिक मॉडल लागू करने जा रही है। इस पहल के तहत उन्नत तकनीक का उपयोग कर यात्रियों को अधिक सुगम, त्वरित और सुरक्षित आवागमन की सुविधाएं प्रदान की जाएंगी।

    सार्वजनिक परिवहन की मांग बढ़ी
    प्रदेश में लगातार बढ़ रही यात्रियों की संख्या का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य के पास वर्तमान में 5 लाख किलोमीटर से अधिक का मजबूत सड़क नेटवर्क है। धार्मिक पर्यटन में आई अभूतपूर्व तेजी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जहां पूर्व में उज्जैन में वार्षिक आधार पर 60 से 70 लाख श्रद्धालु आते थे, वहीं हाल के दिनों में यह आंकड़ा बढ़कर 8 करोड़ के पार पहुंच गया है। इस बढ़ती आवाजाही को देखते हुए सुदृढ़ सार्वजनिक परिवहन ढांचा तैयार करना बेहद अनिवार्य हो गया है।

    निजी ऑपरेटरों के सहयोग से 15 हजार बसों का लक्ष्य
    'मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा' के अंतर्गत वर्ष 2030 तक राज्य भर में लगभग 15 हजार नई बसों का परिचालन शुरू करने की कार्य योजना है। सरकार इस पूरी व्यवस्था में निजी बस ऑपरेटरों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करेगी और उन्हें नवीनतम तकनीकों से लैस करेगी। 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले सेवा संकल्प माह के तहत 25 सितंबर को प्रदेशवासियों को इस नए परिवहन मॉडल की पहली आधिकारिक सौगात मिलेगी।

    इलेक्ट्रिक वाहनों और ग्रीन मोबिलिटी को विशेष प्रोत्साहन
    राज्य में बड़े पैमाने पर हो रहे इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) निर्माण का लाभ सबसे पहले प्रदेश के नागरिकों तक पहुंचाने की रणनीति तैयार की गई है। इंदौर मेट्रो के बाद अब इलेक्ट्रिक, हाइड्रोजन और फ्लेक्स-फ्यूल बसों के संचालन पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में शुरू हो रही यह सेवा नागरिकों के लिए एक नई शुरुआत होगी, जिसके तहत पारंपरिक भगवा रंग की बसें एक बार फिर आधुनिक सुविधाओं के साथ सड़कों पर सेवा देती नजर आएंगी।

     

  • पुतिन-मोदी मुलाकात में हथियारों पर बड़ा मंथन, S-400 की डिलीवरी से Su-57E तक इन डील्स पर नजर

    पुतिन-मोदी मुलाकात में हथियारों पर बड़ा मंथन, S-400 की डिलीवरी से Su-57E तक इन डील्स पर नजर

     नई दिल्ली
    रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत की तीन दिवसीय यात्रा पर पहुंचे हैं. वे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से द्विपक्षीय मुलाकात भी करेंगे. इस मुलाकात में रक्षा सहयोग सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा बनने जा रहा है. भारत और रूस के बीच लंबे समय से चले आ रहे सैन्य संबंधों में नई ऊंचाई छूने की संभावनाएं हैं। 

    S-400 मिसाइल सिस्टम, ब्रह्मोस-एनजी मिसाइल अपग्रेड, Su-30एमकेआई फाइटर जेट का अपग्रेड और पांचवीं पीढ़ी का Su-57E लड़ाकू विमान- ये चार प्रमुख मुद्दे चर्चा के केंद्र में हैं. आइए समझते हैं कि इन हथियारों पर क्या डील हो सकती है और भारत के लिए इनका क्या महत्व है। 

    S-400 मिसाइल सिस्टम: बची हुई डिलीवरी और अतिरिक्त बैटरियों की बात
    भारत ने 2018 में रूस से पांच S-400 मिसाइल सिस्टम खरीदने का 5.43 अरब डॉलर का समझौता किया था. इनमें से चार सिस्टम पहले ही आ चुके हैं और तैनात हैं. पांचवां सिस्टम नवंबर 2026 तक आने की उम्मीद है. पुतिन-मोदी मुलाकात में इस अंतिम खेप की समयबद्ध डिलीवरी और रखरखाव पर चर्चा होगी. रूस ने भारत में मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल सुविधा लगाने का भी प्रस्ताव रखा है। 

    इसके अलावा भारत अतिरिक्त पांच S-400 मिसाइल सिस्टम स्क्वाड्रन खरीदने पर भी विचार कर रहा है. रूस ने इसके लिए करीब 50 हजार करोड़ रुपये का प्रस्ताव दिया है. ये अतिरिक्त सिस्टम पश्चिमी और पूर्वी दोनों मोर्चों पर भारत की एयर डिफेंस क्षमता को दोगुना कर सकते हैं। 

    S-400 मिसाइल सिस्टम लंबी दूरी तक विमान, मिसाइल और ड्रोन को मार गिराने में सक्षम है. ऑपरेशन सिंदूर में इसकी प्रभावशीलता साबित हो चुकी है. इसलिए अतिरिक्त खरीद भारत की बहुस्तरीय रक्षा व्यवस्था को मजबूत करेगी। 

    ब्रह्मोस-एनजी: हल्की और ज्यादा घातक मिसाइल का अपग्रेड
    ब्रह्मोस भारत-रूस का संयुक्त प्रोजेक्ट है और दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में से एक है. अब दोनों देश इसकी नेक्स्ट जनरेशन यानी ब्रह्मोस-एनजी पर काम कर रहे हैं. यह मौजूदा ब्रह्मोस से काफी हल्की है- लगभग 1.3 टन वजन की। 

    इसकी रेंज 400 किलोमीटर से ज्यादा है. स्पीड 4322 km/hr तक है. छोटी साइज की वजह से तेजस और मिग-29 जैसे विमानों पर कई मिसाइलें लगाई जा सकती हैं. पुतिन के दौरे में ब्रह्मोस-एनजी के विकास, संयुक्त उत्पादन और अपग्रेड पर चर्चा होने की पूरी संभावना है। 

    रूस ने साफ कहा है कि अब मिसाइल को और बेहतर और ज्यादा बनाने का समय आ गया है. भारत के लिए यह महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे एयर, लैंड और सी-बेस्ड प्लेटफॉर्म पर स्ट्राइक क्षमता बढ़ेगी. निर्यात बाजार में भी ब्रह्मोस-एनजी की अच्छी मांग हो सकती है। 

    Su-30MKI अपग्रेड: सुपर सुखोई बनने की राह
    भारतीय वायुसेना के पास करीब 260 Su-30MKI लड़ाकू विमान हैं. ये वायुसेना की रीढ़ माने जाते हैं. अब इन्हें सुपर सुखोई कॉन्फिगरेशन में अपग्रेड करने की बड़ी योजना पर चर्चा चल रही है. इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 11 अरब डॉलर से ज्यादा है. अपग्रेड में नए रडार, बेहतर एवियोनिक्स, आधुनिक हथियार सिस्टम और लंबी रेंज की मिसाइलें शामिल होंगी। 

    यह अपग्रेड चरणबद्ध तरीके से होगा. इससे पुराने विमानों की उम्र बढ़ेगी और वे अगले कई साल तक आधुनिक खतरों से निपटने में सक्षम रहेंगे. भारत अपनी स्वदेशी क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रहा है, इसलिए इस अपग्रेड में भारतीय कंपनियों की भागीदारी भी बढ़ाने की कोशिश होगी. पुतिन-मोदी मुलाकात में इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने पर सहमति बन सकती है। 

    Su-57E: पांचवीं पीढ़ी के विमान का टेक्नोलॉजी ट्रांसफर
    सु-57 रूस का पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट है. भारत लंबे समय से अपनी पांचवीं पीढ़ी के विमान एंडवास्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट पर काम कर रहा है, लेकिन वह अभी कई साल दूर है. इस बीच चीन और पाकिस्तान की बढ़ती स्टील्थ क्षमता को देखते हुए भारत के पास अंतरिम समाधान की जरूरत है। 

    रूस ने भारत को Su-57E (एक्सपोर्ट वर्जन) बेचने के साथ-साथ भारत में संयुक्त उत्पादन और तकनीक हस्तांतरण का प्रस्ताव दिया है. यहां तक कि पूर्ण तकनीक एक्सेस की बात भी कही गई है। 

    सीमित संख्या में विमान खरीदकर और बाद में लोकल प्रोडक्शन शुरू करके भारत अपना स्टील्थ गैप भर सकता है. रडार, इंजन और वेपन इंटीग्रेशन जैसी संवेदनशील तकनीकों पर बातचीत चल रही है. यह डील अगर हुई तो भारत-रूस रक्षा संबंधों में नया अध्याय खुलेगा। 

    भारत के लिए क्या मायने रखती हैं ये डीलें?
    इन सभी सौदों का उद्देश्य भारत की सैन्य क्षमता को आधुनिक खतरों के अनुरूप बनाना है. S-400 मिसाइल सिस्टम एयर डिफेंस को मजबूत करेगा, ब्रह्मोस-एनजी स्ट्राइक पावर बढ़ाएगा, Su-30MKI अपग्रेड मौजूदा बेड़े को लंबे समय तक उपयोगी बनाएगा. Su-57E भविष्य की जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगा। 

    साथ ही भारत मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भरता पर जोर दे रहा है, इसलिए टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और संयुक्त उत्पादन वाले प्रस्ताव ज्यादा आकर्षक हैं. रूस भी अपने रक्षा निर्यात को बढ़ाना चाहता है और भारत जैसे विश्वसनीय साझेदार के साथ गहरी साझेदारी चाहता है. ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान यह मुलाकात सिर्फ द्विपक्षीय नहीं, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन को भी प्रभावित कर सकती है। 

    हालांकि फाइनल डील तुरंत नहीं हो सकती, लेकिन दिशा तय हो जाएगी. आने वाले महीनों में इन प्रोजेक्ट्स पर प्रगति देखने को मिलेगी. भारत की सुरक्षा जरूरतों और रणनीतिक स्वायत्तता को ध्यान में रखते हुए ये चर्चाएं बेहद महत्वपूर्ण हैं।