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  • इंदौर नगर निगम की नई सुविधा, 311 एप पर खुद करें प्रॉपर्टी टैक्स का आकलन और 21 तरह के सुधार के आवेदन

    इंदौर नगर निगम की नई सुविधा, 311 एप पर खुद करें प्रॉपर्टी टैक्स का आकलन और 21 तरह के सुधार के आवेदन

    इंदौर
     इंदौर नगर निगम द्वारा जारी इंदौर 311 एप पर संपत्तिकर संबंधी नई आनलाइन सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इसके माध्यम से नागरिक घर बैठे संपत्तिकर संबंधी दावे-आपत्ति एवं शिकायत दर्ज करने, अपनी संपत्ति का खुद असेसमेंट कर सकेंगे। इसके अलावा की स्वयं की संपत्ति के संपत्तिकर खाते में आवश्यक सुधार हेतु ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। इस एप में अब शिकायत एवं आवेदनों की लाइव ट्रैकिंग भी हो सकेगी।

    शिकायतकर्ता जान सकेगा कि उसकी शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई है या शिकायत किस अधिकारी के पास जांच के लिए है। प्रॉपर्टी टैक्स पर दावे-आपत्ति के सहित 21 तरह के सुधार के झोन या नगर निगम कार्यालय जाने की जरूरत नहीं रहेगी। कई काम आसानी से घर बैठे मोबाइल एप के जरिए हो जाएंगे।

    प्रॉपर्टी का आकलन खुद कर सकेगा मालिक
    मोबाइल एप के जरिए संपत्ति के मालिक अब खुद ही प्रॉपर्टी टैक्स का आकलन कर सकते हैं। इसमें उसे प्रॉपर्टी सेल्फ असिसमेंट का ऑप्शन चुनकर इसमें मांगी गई जानकारिया दर्ज कर फार्म को सबमिट करना होगा। इसके साथ ही प्रॉपर्टी टैक्स में दोव और आपत्तियों की शिकायत भी इसी एप के जरिए दर्ज कराई जा सकेगी।

    अधिकारियों ने शहर के लोगों से अपील की है कि वे अब निगम के दफ्तर आने की जगह घर बैठे ही मोबाइल एप के जरिए इन सुविधाओं का उपयोग करें। एप में सबसे खास बात यह है कि लोग आपत्ति दर्ज कराने के साथ उसे ट्रैक भी कर सकेंगे।

    एक कॉल में मिलेंगे महापौर
    यदि आप नगर निगम की कोई भी सेवा से परेशान है जैसे, स्वच्छता, कचड़ा गाड़ी, जीरो वेस्ट ईवेंट,  प्रमाणपत्र, लाइट या अन्य समस्याओं के लिए परेशान हैं, तो 311 एप आप के लिए एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है. इसके जरिए आप घर बैठे अपनी किसी भी समस्या का समाधान कर सकते हैं. इतना ही नहीं यहां आपको मेयर हेल्पलाइन पर सीधे महापौर तक अपनी समस्या पहुंचाने का मौका भी मिलेगा. इसके लिए आपको एक कंप्लेंट नंबर दिया जाएगा साथ ही आपके पास कॉल बैक भी आएगा. इसके लिए टोल फ्री नंबर 18002331311 भी जारी किया गया है। 

    एप पर शिकायत और फीडबैक दोनों दे सकते हैं
    Indore 311 App की खास बात ये है कि यहां आप शिकायत के अलावा अपना फीडबैक भी दे सकते हैं. इसके लिए आप अपनी समस्या की कैटेगरी चुनकर फोटो सहित रिपोर्ट करें और कंप्लेंट नंबर  सेव कर लें. यह एप में भी सेव रहता है. यहां आपको निगम की नई जानकारियां और नोटिस भी मिल जाएंगे. यदि कोई कर्मचारी आपसे सही बर्ताव नहीं करता है तो इसके लिए भी आप शिकायत दर्ज करा सकते हैं. इस एप पर इंदौर म्युनिसिपल कमिश्नर और महापौर दोनों नजर रखते हैं। 

    एप इंदौर 311 क्या है?

    इंदौर 311 एप लोगों की सुविधाओं के लिए लाया गया है. इस एप के जरिए आप स्वच्छता, कचड़ा गाड़ी, जीरो वेस्ट ईवेंट, प्रमाणपत्र, लाइट या अन्य समस्याओं का समाधान सिर्फ एक कॉल के जरिए कर सकते हैं. इस एप की खास बात ये है कि इसके जरिए आप सीधे समुदाय के नेताओं के साथ संवाद कर सकते हैं. इंदौर 311 एप को नागरिक सेवाओं के उपयोग को आसान बनाने के लिए बनाया गया है। 

     

  • Singhस्थ 2028 से पहले उज्जैन में निर्माण कार्यों पर सवाल, सांसद ने गडकरी से कार्रवाई की मांग

    Singhस्थ 2028 से पहले उज्जैन में निर्माण कार्यों पर सवाल, सांसद ने गडकरी से कार्रवाई की मांग

    उज्जैन 

    सिहंस्थ-2028 से पहले उज्जैन में हजारों करोड़ के निर्माण कार्यों के घटिया निर्माण उजागर हो गए। शहर को राजस्थान और दिल्ली से जोड़ने के लिए 4 हजार करोड़ रुपए से बनाए देवास-बदनावर और उज्जैन-गरोठ दोनों हाईवे अभी से ही खराब हो गए। घटिया निर्माण सामने आते ही सांसद अनिल फिरोजिया ने भी मोर्चा खोल दिया।

    दिल्ली में सांसद फिरोजिया ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गड़करी से मुलाकात की। 2600 करोड़ रुपए से बन रहे उज्जैन-गरोठ और 1400 करोड़ से बने देवास-बदनावर हाइवे में निर्माण की गुणवत्ता संबंधी हकीकत बताई।

    सांसद ने गड़करी को बताया कि देवास-बदनावर हाईवे को अभी 3 साल ही हुए है, पिछले एक साल से वह लगातार क्षतिग्रस्त हो रहा है। उज्जैन-गरोठ हाईवे तो अभी निर्माणाधीन है। लोकार्पण से पहले ही यह हाइवे धंसने लगा है। सांसद दोनों हाईवे की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

    केंद्रीय मंत्री को उज्जैन-गरोठ व देवास-बदनावर दोनों हाईवे की गुणवत्ता से अवगत करा दिया है। उन्होंने जांच करवाकर दोषियों के खिलाफ सख्त एक्शन लेने की बात की है। – अनिल फिरोजिया, सांसद

    सिंहस्थ से पहले उज्जैन में बड़ा सड़क विस्तार, शक्तिपीठ मार्ग होगा 15 मीटर चौड़ा; 136 दुकानें टूटेंगी

     धार्मिक नगरी उज्जैन में सिंहस्थ (Ujjain Simhastha 2028) तैयारियों को आगे बढ़ाते हुए हुए अब गुदरी चौराहा से हरसिद्धि की पाल तक सड़क चौड़ीकरण की तैयारी है। इस मार्ग को 15 मीटर चौड़ा किया जाएगा, जिसमें 136 दुकान मुकान प्रभावित होंगे। गुदरी चौराहा से पानदरिया होते हुए हरसिद्धि पाल यातायात तक लगभग 570 मीटर लंबा मार्ग पुराने शहर के यातायात के साथ महाकाल सवारी मार्ग का प्रमुख हिस्सा है।

    सिंहस्थ में प्रबंधन के मान से भी यह मार्ग महत्वपूर्ण है। नगर निगम अब इसे 15 मीटर चौड़ा करेगा। करीब 14 करोड़ की लागत से मार्ग का चौड़ीकरण किया जाएगा। मंगलवार को निगम ने वर्तमान रोड के मध्य से नपती व भवनों के प्रभाविता हिस्सों पर मार्किंग का काम शुरू कर दिया है। इसके माध्यम से प्रस्तावित सड़क की सीमा निर्धारित करने के साथ ही प्रभावित भवनों का चिन्हांकन किया जा रहा है। भवन निरीक्षक सौम्या चतुर्वेदी और निगम की टीम ने मौके पर पहुंचकर मार्ग की मार्किंग की।

    इस मार्ग से निकलती है सिंहस्थ में पेशवाई
    पाल मार्ग गुदरी चौराहा से हरसिद्धि पाल पुराने शहर के व्यस्ततम मार्गों में से एक है। बाबा महाकाल की सवारी के साथ सिंहस्थ के दौरान पेशवाई भी इसी मार्ग से होकर गुजरती है। इस कारण सिंहस्थ तैयारियों के चलते इस मार्ग का विशेष महत्व है। रामघाट व हरसिद्धि मंदिर क्षेत्र की ओर आने जाने वाले श्रद्धालुओं व लोगों के लिए भी यह प्रमुख संपर्क मार्ग है।

    सिंहस्थ में भीड़ प्रबंधन है उद्देश्य
    सिंहस्थ-2028 के दौरान महाकाल क्षेत्र से रामघाट की ओर जाने वाले श्रद्धालुओं के आवागमन् को सुगम बनाना और भीड़ प्रबंधन के लिए मार्ग की क्षमता बढ़ाना। अप्रैल 2026 में हुई मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता वाली मंत्रिमंडलीय समिति अलावा की बैठक में इस मार्ग के चौड़ीकरण के साथ सीमेंट-कंक्रीट सड़क निर्माण को मंजूरी दी गई थी। इसी बैठक में गुदरी हरसिद्धि पाल मार्ग के अलावा बबई वाले की धर्मशाला से दानी गेट, शिंदे नर्सिंग होम से नीलगंगा, गौतम मार्ग से तिलकेश्वर, अंकुपात् से मंगलनाथ और महाकाल चौराहे से गोपाल मंदिर होते हुए कमरी मार्ग सहित कई सड़कों के चौड़ीकरण, निर्माण को मंजूरी दी थी। 22 कार्यों के लिए 2,923.84 करोड़ की स्वीकृति देकर मुख्यमंत्री ने इन सिंहस्थ संबंधी कार्यों को 2027 की दीपावली तक पूरा करने के निर्देश दिए है।

  • MP Rain Alert: इंदौर-जबलपुर-सागर-नर्मदापुरम में खास चेतावनी, सामान्य से 8% कम बारिश

    MP Rain Alert: इंदौर-जबलपुर-सागर-नर्मदापुरम में खास चेतावनी, सामान्य से 8% कम बारिश

    भोपाल 

    मध्य प्रदेश में कुछ दिनों के ब्रेक के बाद एक बार फिर मानसून एक्टिव हो गया है. प्रदेश के कई हिस्सों में शुक्रवार को बारिश हुई. मौसम विभाग ने शनिवार को प्रदेश के 15 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है. इंदौर, जबलपुर, सागर और नर्मदापुरम संभाग के कई जिलों में बारिश होने की संभावना जताई गई है. मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में अगले तीन दिनों तक मानसून सिस्टम का असर बना रहेगा। 

    शुक्रवार को भोपाल समेत कई जिलों में मौसम बदला और तेज बारिश हुई. भोपाल में बारिश के साथ तेज आंधी भी चली. इसके कारण कई इलाकों में कुछ समय के लिए विजिबिलिटी 100 मीटर से भी कम हो गई. सड़कों पर गाड़ी चलाने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ा. दमोह, टीकमगढ़ और विदिशा समेत कई जिलों में भी बारिश दर्ज की गई। 

    मौसम विभाग के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी में बना लो प्रेशर एरिया अब प्रदेश के मौसम को प्रभावित कर रहा है. इसी सिस्टम के कारण मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का दौर दोबारा शुरू हुआ है. आने वाले दिनों में इस सिस्टम का असर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में देखने को मिल सकता है। 

    भोपाल समेत कई जिलों में बारिश
    शुक्रवार को भोपाल में बारिश के साथ तेज हवाएं चलीं। कुछ इलाकों में विजिबिलिटी 100 मीटर से भी कम हो गई, जिससे वाहन चालकों को काफी सावधानी बरतनी पड़ी। दमोह, टीकमगढ़ और विदिशा समेत कई जिलों में भी बारिश दर्ज की गई। बारिश के बाद तापमान में गिरावट आई और लोगों को गर्मी से राहत मिली। मौसम विभाग ने इंदौर, जबलपुर, सागर और नर्मदापुरम संभाग के कई जिलों में बारिश की संभावना जताई है। भोपाल और आसपास के क्षेत्रों में भी मौसम सक्रिय रह सकता है। 15 सितंबर तक प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।

    तेज बारिश के दौरान निचले इलाकों में जलभराव की समस्या हो सकती है। वाहन चालकों को कम विजिबिलिटी में धीमी गति से गाड़ी चलाने की सलाह दी गई है। तेज आंधी के समय पेड़ और बिजली के खंभों से दूर रहना भी जरूरी है। आने वाले दिनों में बारिश से राहत तो मिलेगी, लेकिन खराब मौसम के दौरान सावधानी बरतना बेहद जरूरी रहेगा।

    बारिश नहीं होने से गर्मी-उमस दोनों बढ़ी

    बता दें कि प्रदेश के कई जिलों में पिछले 3 से 4 दिन बारिश नहीं हुई। इस वजह से गर्मी और उमस दोनों का असर बढ़ गया। बारिश शुरू होने से लोगों को इससे राहत मिलने की उम्मीद है।

    प्रदेश में अब तक 31.5 इंच बारिश

    मौसम विभाग के अनुसार, अब तक हुई बारिश की बात करें तो इस सीजन 801.3 मिमी यानी, 31.5 इंच बारिश हो चुकी है। यह अब तक की सामान्य बारिश 34.2 इंच (868.6 मिमी) की तुलना में 2.7 इंच कम है। वहीं, ओवरऑल 8 प्रतिशत कम पानी गिरा है। पूर्वी हिस्से में 1 प्रतिशत और पश्चिमी हिस्से में औसत से 14% बारिश कम हुई है।

    33 जिलों में 1% से 56% तक कम बारिश

    प्रदेश के पूर्वी हिस्से- जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में 1% तक कम बारिश हुई है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर, सिवनी में 3% से 26% तक कम बारिश हुई है। पिछले एक सप्ताह में यह आंकड़ा काफी सुधरा है। बीते एक सप्ताह से यहां के कई जिलों में बाढ़ के हालात बने हुए हैं। इससे आंकड़े में सुधार आया और सीजन में पहली बार पूर्वी हिस्सा आंकड़ों में बेहतर रहा है, लेकिन बुधवार तक आंकड़ा एक प्रतिशत हो गया।

    वहीं, पश्चिमी हिस्से के आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, खंडवा, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 1% से 56% कम पानी गिरा है।

    इन 22 जिलों में ज्यादा बारिश

    IMD की मानें तो अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़्र, श्योपुर और शिवपुरी में ही औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई।

    15 सितंबर तक बारिश का दौर
    मौसम विभाग ने बताया कि बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम के कारण प्रदेश में 15 सितंबर तक बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है. इस दौरान कई जिलों में हल्की बारिश हो सकती है, जबकि कुछ इलाकों में भारी बारिश भी होने का अनुमान है. कहीं-कहीं तेज हवाओं और गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है। 

    तीन-चार दिन से थमी थी बारिश, अब फिर राहत
    प्रदेश के कई इलाकों में पिछले तीन-चार दिन से बारिश नहीं होने के कारण गर्मी और उमस बढ़ गई थी। शुक्रवार को बारिश शुरू होने के बाद मौसम बदला और लोगों को राहत मिली। भोपाल में बारिश के दौरान तेज हवा के कारण सड़क पर दृश्यता काफी कम हो गई। दमोह में तेज बारिश के कारण निचले इलाकों में पानी भर गया। खंडवा में भी दोपहर में पहले तेज हवा चली और इसके बाद बारिश हुई। टीकमगढ़ में बारिश के बाद तापमान में गिरावट आई और मौसम सुहाना हो गया।

    31.5 इंच बारिश, सामान्य आंकड़े से अभी 2.7 इंच पीछे
    मध्य प्रदेश में इस मानसून सीजन में अब तक 801.3 मिमी यानी 31.5 इंच बारिश हो चुकी है। सामान्य तौर पर इस अवधि में 868.6 मिमी यानी 34.2 इंच बारिश होनी चाहिए थी। इस लिहाज से प्रदेश में अभी 2.7 इंच यानी 8 प्रतिशत बारिश कम है। पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश की कमी करीब एक प्रतिशत रह गई है, जबकि पश्चिमी हिस्से में सामान्य से 14 प्रतिशत कम बारिश हुई है।

    33 जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से कम
    प्रदेश के 33 जिलों में अब भी सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। पूर्वी हिस्से के कई जिलों में कमी 3 से 26 प्रतिशत तक है। इनमें बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडोरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी शामिल हैं। पश्चिमी हिस्से के कई जिलों में कमी ज्यादा है। आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से कम पानी गिरा है।

    22 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश
    दूसरी ओर अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। 

    इन इलाकों में ज्यादा असर
    इस समय भारी बारिश का सबसे ज्यादा असर इंदौर, जबलपुर, सागर और नर्मदापुरम के जिलों में देखने को मिल सकता है. इसके अलावा भोपाल और आसपास के क्षेत्रों में भी मौसम सक्रिय रहने की संभावना है. बारिश के कारण तापमान में गिरावट आने से लोगों को गर्मी से राहत मिल सकती है. मौसम विभाग ने लोगों से बारिश और तेज आंधी के दौरान सावधानी बरतने की अपील की है. खासकर वाहन चालकों को कम विजिबिलिटी में स्लो स्पीड से गाड़ी चलाने और जरूरत न होने पर खुली जगहों पर जाने से बचने की सलाह दी गई है। 

  • योगी बोले, पाठ्यक्रम से ही नहीं समझ सकते समाज, देश और दुनिया को

    योगी बोले, पाठ्यक्रम से ही नहीं समझ सकते समाज, देश और दुनिया को

    सरकारें ही जर्जर थीं तो सिस्टम भी जर्जर हो गया था: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
     
    यूपी पर लगा था बीमारू का ठप्पा, नौजवान के सामने था पहचान का संकट

    युवा पुस्तक नहीं पढ़ना चाहता, यह धारणा उसके साथ अन्याय : मुख्यमंत्री

    मुख्यमंत्री योगी ने गोमती पुस्तक महोत्सव का पांचवां संस्करण का किया शुभारंभ, 80 से बढ़कर 250 हुए स्टॉल

    योगी बोले, पाठ्यक्रम से ही नहीं समझ सकते समाज, देश और दुनिया को

    प्रदेश की 57,600 ग्राम पंचायतों के पुस्तकालयों तक पहुंचीं एनबीटी की पुस्तकें
     
    लखनऊ

     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकारें ही जर्जर थीं तो सिस्टम भी जर्जर हो गया था। सरकारी विद्यालयों के भवन जर्जर थे, सुविधाओं का अभाव था और उत्तर प्रदेश पर बीमारू राज्य का ठप्पा लग गया था। प्रदेश के नौजवान के सामने पहचान का संकट था। बाहर जाने पर वह अपनी पहचान बताने से भी संकोच करता था। पिछले दस वर्षों में शुरू हुए सकारात्मक प्रयासों के परिणाम अब सामने हैं और उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदली है।
     
    शनिवार को गोमती पुस्तक महोत्सव-2026 के पांचवें संस्करण का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पास ज्ञान और चिंतन की अत्यंत समृद्ध परंपरा रही है। इसके बावजूद जब हमने ज्ञान को सीमित और संकुचित दायरे में कैद किया और अपनी विरासत से दूरी बनाई तो उसका दुष्परिणाम पूरे प्रदेश को भुगतना पड़ा। यूपी बीमारू राज्यों की श्रेणी में खड़ा हो गया। उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति, समाज या राष्ट्र अपनी विरासत से संबंध तोड़कर आगे नहीं बढ़ सकता।
     
    बेसिक शिक्षा की पूर्व की स्थिति का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि परिषदीय विद्यालयों में सुविधाओं की कल्पना करना कठिन था। भवन जर्जर थे और व्यवस्थाएं भी उसी स्थिति में थीं। सरकार ने ऑपरेशन कायाकल्प शुरू किया तो विद्यालयों के भवन बदले। स्मार्ट क्लास और डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा उपलब्ध कराई गई। मुख्यमंत्री ने चित्रकूट का अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि वहां तीसरी कक्षा की एक बच्ची को डिजिटल लाइब्रेरी सहजता से संचालित करते देखकर उन्हें अहसास हुआ कि बच्चों में क्षमता की कमी नहीं थी, उन्हें अवसर और संसाधन नहीं मिले थे।
     
    मुख्यमंत्री योगी ने इसी संदर्भ में युवाओं के पुस्तकों से दूर होने की धारणा को भी खारिज किया। कहा कि यह कहना युवा के साथ अन्याय होगा कि वह पुस्तक नहीं पढ़ना चाहता और अपना अधिकतर समय सोशल या डिजिटल मीडिया पर ही बिताता है। वास्तविकता यह है कि हमने उस तक पुस्तक पहुंचाने का पर्याप्त प्रयास नहीं किया। जब युवाओं को पुस्तकें और उचित मंच उपलब्ध कराया गया तो पुस्तक महोत्सवों में उनकी भागीदारी ने सारी धारणाएं बदल दीं।
     
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि लखनऊ में पुस्तक महोत्सव की शुरुआत के समय उन्हें भी इसके परिणाम को लेकर थोड़ा संकोच था, लेकिन पहले ही आयोजन में अपेक्षा से कई गुना अधिक छात्र और युवा पहुंचे। आज इसका पांचवां संस्करण आयोजित हो रहा है और स्टॉल की संख्या 80 से बढ़कर 250 हो चुकी है। अगले नौ दिनों तक हजारों विद्यार्थियों और युवाओं को ज्ञानवर्धक, मनोरंजक और रोचक पुस्तकों को जानने का अवसर मिलेगा। यहां पुस्तक विमोचन के साथ लेखक और पाठक आमने-सामने होंगे। युवाओं को लेखकों की अभिव्यक्ति, उनके संघर्ष और जीवन यात्रा को समझने का अवसर भी मिलेगा।
     
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आभार जताते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि उनकी प्रेरणा से शिक्षा मंत्रालय देश के अलग-अलग हिस्सों में पुस्तक महोत्सवों के माध्यम से भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को आधुनिक ज्ञान से जोड़ने का काम कर रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री की पुस्तक ‘एग्जाम वारियर्स’ का उल्लेख करते हुए कहा कि इसे हर बच्चे और युवा को पढ़ना और आत्मसात करना चाहिए। यह केवल स्कूली परीक्षाओं के लिए नहीं है। जीवन में हर व्यक्ति को अलग-अलग परिस्थितियों में परीक्षा के दौर से गुजरना पड़ता है। जब हिम्मत जवाब देने लगती है, तब ऐसी पुस्तकें संबल और मार्गदर्शन देती हैं।
     
    ऋग्वेद के मंत्र ‘आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः’ का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय ऋषि परंपरा ज्ञान को चारों ओर से आने देने की प्रेरणा देती है। केवल स्कूल, कॉलेज या विश्वविद्यालय जाकर पाठ्यक्रम पढ़ लेने से ही व्यक्ति ज्ञानवान नहीं हो सकता। पाठ्यक्रम किसी विषय में पारंगत कर सकता है, लेकिन समाज, देश और दुनिया को समझने के लिए अलग-अलग विषयों और विचारों को पढ़ना जरूरी है।
     
    मुख्यमंत्री योगी ने उत्तर प्रदेश की प्राचीन ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि लखनऊ साहित्य का पुराना केंद्र रहा है। यहां से करीब 70 किलोमीटर दूर नैमिषारण्य में 88 हजार ऋषियों ने पुराणों के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाया। काशी के विश्वविद्यालय जगविख्यात रहे हैं। प्रयागराज का कुंभ केवल आयोजन या महोत्सव नहीं रहा, बल्कि देशभर के ऋषि-मुनियों के ज्ञान, चिंतन, संवाद और नवाचार की स्थली रहा है। मुजफ्फरनगर के शुकतीर्थ में करीब पांच हजार वर्ष पहले श्रीमद्भागवत महापुराण की पहली कथा के वाचन की परंपरा भी इसी प्रदेश से जुड़ी है।
     
    मुख्यमंत्री योगी ने गांवों तक पुस्तक और डिजिटल ज्ञान पहुंचाने के प्रयासों का भी उल्लेख किया। कहा कि मुख्यमंत्री के लिए सचिवालय और जिलाधिकारी के लिए कलेक्ट्रेट था, लेकिन गांव की सबसे छोटी प्रशासनिक इकाई के पास बैठने की अपनी जगह तक नहीं थी। सरकार ने ग्राम सचिवालय बनाए और तय किया कि इनमें बैठक कक्ष के साथ पुस्तकालय भी होगा। प्रदेश की 57,600 ग्राम पंचायतों में बने पुस्तकालयों में नेशनल बुक ट्रस्ट की पुस्तकें उपलब्ध कराई गई हैं और डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा भी दी गई है। आज गांव के छात्र और युवा इनका उपयोग कर रहे हैं। यह साबित करता है कि अवसर और संसाधन मिलने पर गांव का युवा भी किसी से पीछे नहीं है।

    मुख्यमंत्री योगी ने छात्राओं को भेंट की ‘एग्जाम वॉरियर्स’, पुस्तक स्टॉलों का किया अवलोकन
    इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फीता काटकर गोमती पुस्तक महोत्सव का शुभारंभ किया। महोत्सव परिसर में पहुंचते ही उन्होंने वहां लगी विभिन्न प्रदर्शनियों का अवलोकन किया और पुस्तक स्टॉलों पर जाकर पुस्तकों को देखा। इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रकाशकों और आयोजकों से भी जानकारी ली। उन्होंने छह छात्राओं को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पुस्तक ‘एग्जाम वॉरियर्स’ अपने हाथों से भेंट की, जबकि अन्य छात्राओं को भी पुस्तकें वितरित की गईं। पुस्तकें पाने वाले बच्चों के चेहरे खिल उठे। मुख्यमंत्री ने छात्राओं के साथ तस्वीर भी खिंचवाई।
     
    इस अवसर पर नेशनल बुक ट्रस्ट के चेयरमैन प्रो. मिलिंद मराठे ने मुख्यमंत्री का शॉल ओढ़ाकर और पुस्तक भेंट कर स्वागत किया। उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी, मुख्य सलाहकार अवनीश अवस्थी, पार्थ सारथी सेन शर्मा और बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह का भी पुस्तक भेंट कर स्वागत किया गया। कार्यक्रम में गोमती पुस्तक महोत्सव के पिछले संस्करणों की यात्रा और यादगार पलों पर आधारित वीडियो भी प्रदर्शित किया गया, जिसे मुख्यमंत्री समेत उपस्थित अतिथियों ने देखा।

    समारोह में उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी, बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह, लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जेपी सैनी, नेशनल बुक ट्रस्ट के चेयरमैन प्रो. मिलिंद सुधाकर मराठे, निदेशक युवराज मलिक सहित लेखक, प्रकाशक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

  • चित्रकूट में मंदाकिनी ने बढ़ाई चिंता, घरों में घुसा पानी; अतिक्रमण ने बदली नदी की धारा

    चित्रकूट में मंदाकिनी ने बढ़ाई चिंता, घरों में घुसा पानी; अतिक्रमण ने बदली नदी की धारा

    चित्रकूट /सतना

    सतना मुख्यालय और तराई इलाके में शुक्रवार रात हुई तेज बारिश के बाद चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर फिर से बढ़ने लगा है। शनिवार सुबह तक नदी का पानी लगातार बढ़ता रहा। रामघाट समेत दूसरे घाटों की सीढ़ियां पूरी तरह पानी में डूब गईं। 

    सावधानी के तौर पर प्रशासन ने घाटों पर बैरिकेडिंग लगा दी है। श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को निचले इलाकों में जाने से रोका गया है। घाट किनारे के दुकानदारों को भी सतर्क रहने और नदी के बढ़ते पानी को देखते हुए सामान सुरक्षित जगह पर हटाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन लगातार जलस्तर पर नजर रख रहा है।

    जलस्तर खतरे से करीब 3 मीटर नीचे फिलहाल राहत की बात यह है कि मंदाकिनी नदी का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 3 मीटर नीचे है। हालांकि, रातभर हुई बारिश के बाद पानी तेजी से बढ़ने से प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। पिछले दिनों आई बाढ़ के बाद नदी के जलस्तर में दोबारा बढ़ोतरी को लेकर घाटों पर खास नजर रखी जा रही है।

    शुक्रवार को दिनभर बादल आते-जाते रहे। कभी हल्की बारिश हुई तो कुछ देर बाद तेज धूप निकल आई। इससे अधिकतम तापमान में करीब 2 डिग्री की बढ़ोतरी हुई और पारा 31.9 डिग्री दर्ज किया गया। यह सामान्य से आधा डिग्री ज्यादा रहा। न्यूनतम तापमान 24.4 डिग्री रहा, जो सामान्य था।

    शाम को मौसम ने अचानक करवट बदली और करीब 15 मिनट तक हल्की से मध्यम बारिश हुई। इसके बाद रात 11.30 बजे से तेज बारिश शुरू हुई, जो रातभर रुक-रुककर जारी रही। 24 घंटे में आधा इंच से ज्यादा बारिश दर्ज की गई। बारिश के कारण उमस भरी गर्मी से लोगों को राहत मिली।

    ये है मौसम सिस्टम मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र वर्तमान में ओडिशा के ऊपर बना हुआ है। इसके साथ ही मानसून ट्रफ लाइन बंगाल की खाड़ी से छत्तीसगढ़, दक्षिण-पश्चिम मध्यप्रदेश होते हुए राजस्थान तक बनी हुई है। इसके प्रभाव से सतना समेत रीवा संभाग में अगले दौर में कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना बनी हुई है।

    1000 करोड़ लीटर पानी घरों में घुसा

    सतना जिले के चित्रकूट में 5 दिनों में 3 बार आई बाढ़ के पीछे अतिक्रमण, अव्यवस्थित विकास और प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल उठ रहे हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने 12 साल पहले मंदाकिनी के किनारे अतिक्रमण के सर्वे के निर्देश दिए थे। दूसरी ओर आरोप ये भी है कि नदी संरक्षण के लिए बने रिवर फ्रंट कॉरिडोर की वजह से भी प्राकृतिक बहाव प्रभावित हुआ है। 29 अगस्त की बाढ़ से चित्रकूट में 500 करोड़ रुपए से अधिक के नुकसान का अनुमान है, जबकि घरों और दुकानों में करीब 1 हजार करोड़ लीटर पानी घुसने का दावा किया गया है।

    अब कलेक्टर ने नदी के बहाव में बाधा बने अतिक्रमण चिह्नित करने के लिए 5 सदस्यीय टीम बनाई है। भास्कर ने विशेषज्ञों से बात कर समझा कि अतिक्रमण से मंदाकिनी का बहाव कैसे प्रभावित हुआ, एनजीटी के निर्देश क्या थे और इतने वर्षों में प्रशासन ने क्या कार्रवाई की।

    कैसे घरों में घुसा 1000 करोड़ लीटर पानी? समझिए इसका वैज्ञानिक गणित

    पर्यावरणविद और प्रोफेसर घनश्यामदास गुप्ता ने इसका वैज्ञानिक आकलन समझाया। उनके मुताबिक चित्रकूट में मंदाकिनी की लंबाई करीब 5 किलोमीटर (5000 मीटर) है और दोनों किनारों पर कम से कम 100-100 मीटर के दायरे में अवैध निर्माण व अतिक्रमण है।

    यदि अतिक्रमण वाले दोनों किनारों की लंबाई 5 किलोमीटर और चौड़ाई 100-100 मीटर मानें, तो कुल क्षेत्रफल 10 लाख वर्ग मीटर बनता है। 10 मीटर ऊंचाई मानने पर यह 1 करोड़ क्यूबिक मीटर यानी 1,000 करोड़ लीटर के बराबर होगा।

    विशेषज्ञ के इस आकलन के मुताबिक, यदि यह जगह उपलब्ध होती तो इतना पानी वहां समा सकता था। अतिक्रमण और निर्माण के कारण पानी के फैलाव की जगह कम होने से बाढ़ का असर बढ़ा।

    अतिक्रमण हटाने 5 सदस्यीय टीम
    कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने मंदाकिनी नदी के तटीय क्षेत्रों में हुए निर्माण कार्यों की जांच के लिए मझगवां एसडीएम के नेतृत्व में 5 सदस्यीय टीम गठित की है।

    टीम सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की गाइडलाइन के आधार पर नदी किनारे के निर्माणों का परीक्षण कर जरूरी वैधानिक कार्रवाई करेगी।

    जांच टीम में चित्रकूट नगर परिषद के सीएमओ, नायब तहसीलदार, पीडब्ल्यूडी और जल संसाधन विभाग के एसडीओ तथा नगर परिषद के सब इंजीनियर को शामिल किया गया है। टीम नदी के प्राकृतिक प्रवाह में बाधक सरकारी और निजी निर्माणों को चिन्हित करेगी।

    हाई फ्लड लेवल भी होगा तय
    जांच के दौरान मंदाकिनी नदी के हाई फ्लड लेवल को भी चिन्हित किया जाएगा। बता दें कि 28-29 अगस्त की रात आई बाढ़ के दौरान आरोग्यधाम में नदी का जलस्तर तय हाई फ्लड लेवल 139.60 मीटर से काफी ऊपर पहुंच गया था।

    प्रशासन के अनुसार जलस्तर करीब 145.76 मीटर तक पहुंचने से चित्रकूट में बड़े पैमाने पर तबाही हुई।

  • MP Bus Service: यात्रियों को मिलेंगी स्मार्ट सुविधाएं, रूट से छेड़छाड़ पर अलार्म देगा सिस्टम

    MP Bus Service: यात्रियों को मिलेंगी स्मार्ट सुविधाएं, रूट से छेड़छाड़ पर अलार्म देगा सिस्टम

     इंदौर
     बस दुर्घटनाओं को रोकने और यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत चलने वाली बसों में कई आधुनिक सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। बस शुरू करने से पहले ड्राइवर को अपनी सीट पर लगे ब्रीथ एनालाइजर में फूंक मारनी होगी। यदि उसने शराब पी रखी है तो बस स्टार्ट ही नहीं होगी। इसके साथ ही यात्रियों की सुविधाओं के लिए बस के टिकट ऑनलाइन मिलेंगे।

    ड्राइवर को झपकी आने पर सेंसर अलार्म के जरिये सचेत करेगा और बस के अपनी लेन से लहराने या रूट बदलने पर भी सुरक्षा सिस्टम सक्रिय हो जाएगा। गुरुवार को ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित यात्री परिवहन विजन समिट में पुणे की एरो ईगल कंपनी की मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के लिए तैयार बस प्रदर्शित की गई। यह बस कंपनी ने संचालन के लिए रीवा को दी है।

    बसों में ये सुरक्षा इंतजाम

        80 किमी की तय रफ्तार : बस की अधिकतम गति 80 किमी प्रति घंटा निर्धारित रहेगी। इससे ज्यादा गति से बस नहीं चलाई जा सकेगी।

        सीसीटीवी कैमरे : यात्रियों की निगरानी के लिए बस के अंदर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।

        साइबर सुरक्षा : बस के इलेक्ट्रानिक सिस्टम को हैकिंग से बचाने के लिए गेटवे सॉफ्टवेयर के जरिये सुरक्षा व्यवस्था की गई है।
        आग से सुरक्षा : बस निर्माण में अग्निरोधी प्लाइवुड का इस्तेमाल किया गया है। बैटरी के लिए बस के निचले हिस्से में अलग कंपार्टमेंट है। इसके ऊपर फायर एक्टिंग्विशर लगा है। आग बुझाने के लिए केमिकल और पानी, दोनों की व्यवस्था होगी।

        झपकी आई तो अलार्म : ड्राइवर को झपकी आने पर सेंसर उसे अलर्ट करेगा। बस के लहराने पर भी सेंसर सक्रिय होगा, जिससे बस को सीधा रखने में मदद मिलेगी।

        दूसरे वाहनों से दूरी : आगे-पीछे करीब 1.5 मीटर की दूरी पर दूसरा वाहन आने पर ड्राइवर को अलर्ट मिलेगा। रिवर्स पार्किंग के लिए भी सेंसर लगाए गए हैं।

    इंदौर में अभी सात बसें पहुंचीं
    मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत इंदौर में अभी सात बसें पहुंची हैं। 45 सीटर इन बसों का डिपो में रंगरोगन किया जा रहा है। 25 दिसंबर से इंदौर में 23 रूट पर सेवा शुरू करने की योजना है। एआइसीटीएसएल के माध्यम से इंदौर से सागर, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा, नरसिंहपुर, छतरपुर, बीना, नर्मदापुरम और बालाघाट के लिए बसें चलाने की योजना है। इसके अलावा खंडवा-शाजापुर, धार-मंदसौर, धार-पचमढ़ी, झाबुआ-भोपाल, खरगोन-नीमच, बुरहानपुर-नीमच, बड़वानी-आगर मालवा, बड़वानी-शाजापुर और बुरहानपुर-रतलाम सहित अन्य मार्गों पर भी बस सेवा प्रस्तावित है।

    अंदर आरामदायक सफर पर चर्चा, बाहर बस में ठसाठस यात्री
    ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में यात्री परिवहन समिट के दौरान विशेषज्ञ पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए चार प्रमुख बिंदुओं- रीच, रिलायबिलिटी, कंफर्टेबिलिटी और अफोर्डेबिलिटी पर चर्चा कर रहे थे। इसी दौरान विजयनगर क्षेत्र में एआईसीटीएसएल की अरविंदो से विजयनगर की ओर आने वाली बस में यात्री ठसाठस भरे थे। कई यात्रियों को बैठने की जगह तक नहीं मिली। खुली खिड़कियों से धूल भी यात्रियों को परेशान कर रही थी। इससे आधुनिक और आरामदायक सार्वजनिक परिवहन की जरूरत साफ नजर आई।

    यात्रा परिवहन विजन समिट-2026 में विशेषज्ञों के मिले सुझाव
        ईवी ट्रांजिशन के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस हो।

        बस स्टेशनों को आधुनिक ‘बस पोर्ट’ के रूप में विकसित करें।

        छोटे व कम यात्री वाले रूट पर छोटी बसों का संचालन।
        बस डिपो पर कमर्शियल गतिविधि, रिटेल और लाजिस्टिक्स से गैर-किराया राजस्व अर्जित करें।

        स्मार्ट टिकटिंग और पैसेंजर इंफार्मेशन सिस्टम के माध्यम से बसों के आने-जाने व रूट की रियल टाइम जानकारी।

        डिजिटल फीडबैक एवं पारदर्शी शिकायत निवारण व्यवस्था।
        आरक्षित, अनारक्षित और नियमित यात्री पास डिजिटल मिलें।

    मप्र में परिवहन सेवा
        96 पीएम ई-बसें और 120 इंटरसिटी बसें संचालित हैं।
        6 महीनों में 486 नई पीएम ई-बसें व 34 नई इंटरसिटी बसें बढ़ेंगी।
        2027 तक बसों की संख्या बढ़कर 1,100 पहुंचेगी।
        7 डिपो हैं व अगले छह माह में सौ-सौ बस क्षमता के 9 नए अत्याधुनिक डिपो बनेंगे।
        प्रति वर्ष 70 हजार टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।

    300 बसें चल रहीं, जरूरत तीन हजार की
    इंदौर में वर्तमान में करीब 300 बसें चल रही हैं, जबकि शहर की जरूरत करीब तीन हजार बसों की बताई गई है। प्रदेश में अभी निजी ऑपरेटर करीब 87 प्रतिशत बसों का संचालन कर रहे हैं। फिलहाल 11 हजार बसें प्रदेश में निजी आपरेटर चला रहे हैं और अगले चार वर्ष में 15 हजार बसें चलाने की योजना है। इंदौर में एआईसीटीएसएल के अलावा भोपाल, ग्वालियर, रीवा, जबलपुर, उज्जैन और सागर में अन्य परिवहन कंपनियां संचालन करेंगी।

    2030 तक प्रदेश के 30 प्रतिशत हिस्से में होगा पब्लिक ट्रांसपोर्ट
        वर्तमान में 87 फीसद बसे निजी ऑपरेटर चला रहे हैं । मप्र में अब पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम पुर्नजीवित होगा। पीएम ई सेवा व मुख्यमंत्री परिवहन सेवा के तहत फिलहाल 10 हजार बसे प्रदेश के शहरों में चलाई जा रही है। 2030 तक प्रदेश के 169 शहरों में 38 हजार बसें चलाई जाएगी। देश के 30 प्रतिशत सिटी ट्रांसपोर्ट के लिए इलेक्ट्रिक बस सेवा उपलब्ध होगी। – शेखर एन धोले, हेड टेक्नीकल सेक्रेटेरिएट, सेंट्रल इंस्टि्टयुट ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट

     

  • डोडा के जंगलों में सुरक्षा बलों का बड़ा ऑपरेशन, आतंकी ढेर; सोशल मीडिया पोस्ट से दिया सख्त संदेश

    डोडा के जंगलों में सुरक्षा बलों का बड़ा ऑपरेशन, आतंकी ढेर; सोशल मीडिया पोस्ट से दिया सख्त संदेश

    डोडा
    जम्मू-कश्मीर के डोडा में आतंकियों के खिलाफ चलाए गए अभियान में सुरक्षा बलों को बड़ी कामयाबी मिली है. शनिवार को डोडा जिले के ऊंचाई वाले इलाके से पाकिस्तान के एक संदिग्ध जैश-ए-मोहम्मद आतंकी का शव बरामद किया गया. अधिकारियों के मुताबिक, शव भद्रवाह घाटी को उधमपुर और कठुआ से जोड़ने वाले दूरदराज सेओजधार जंगल में मिला। 

    यह कार्रवाई सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस के संयुक्त ऑपरेशन के दौरान हुई. पुलिस के मुताबिक, जिस आतंकी के अवशेष मिले हैं, उसे पहले ही एक संयुक्त अभियान में मार गिराया गया था. बाद में सुरक्षा बलों ने इलाके में तलाशी अभियान चलाया और उसके अवशेष बरामद किए। 

    SOG, RR और CRPF ने चलाया सर्च ऑपरेशन
    जम्मू-कश्मीर पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए कहा, कि SOG डोडा, राष्ट्रीय राइफल्स और CRPF की टीमों ने मिलकर आतंकी के अवशेष बरामद किए. पुलिस ने पोस्ट में लिखा, 'You Can Run But You Can't Hide',यानी आतंकी भाग तो सकते हैं, लेकिन सुरक्षा बलों से बचकर छिप नहीं सकते। 

    मौके से बरामद हुई M4 कार्बाइन 
    सर्च ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बलों को अमेरिका में बना M4 कार्बाइन राइफल भी बरामद हुआ. पुलिस के मुताबिक, यह हथियार भी उसी ऑपरेशन के दौरान मिला है. यानी तलाशी अभियान में सुरक्षा बलों के हाथ एक आतंकी के अवशेष के साथ एक आधुनिक राइफल भी लगी है. डोडा का सेओजधार इलाका ऊंचाई और घने जंगलों वाला है। 

    यह इलाका भद्रवाह घाटी से उधमपुर और कठुआ के हिस्सों की तरफ जुड़ता है.  ऐसे दुर्गम इलाकों में आतंकियों की तलाश के लिए सुरक्षा बलों को लंबे सर्च ऑपरेशन चलाने पड़ते हैं. फिलहाल सुरक्षा बलों की कार्रवाई के बाद इलाके में तलाशी और जांच की जा रही है. बरामद हथियार और आतंकी से जुड़ी जानकारी की भी जांच की जा रही है। 

  • जन्म-मृत्यु पंजीयन में राहत का फैसला, नई व्यवस्था आने तक पुराने नियमों से बनेंगे प्रमाण-पत्र

    जन्म-मृत्यु पंजीयन में राहत का फैसला, नई व्यवस्था आने तक पुराने नियमों से बनेंगे प्रमाण-पत्र

    भोपाल

    मध्य प्रदेश में दो साल से अधिक पुराने जन्म-मृत्यु के मामलों के विलंबित पंजीयन को लेकर बनी असमंजस की स्थिति साफ हो गई है। आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय ने स्पष्ट किया है कि आगामी आदेश तक ऐसे मामलों में पूर्ववत प्रक्रिया के तहत ही पंजीयन किया जाएगा। मुख्य रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) एवं आयुक्त आर्थिक एवं सांख्यिकी ने सभी कलेक्टरों और अतिरिक्त मुख्य रजिस्ट्रार को पत्र जारी कर निर्देश दिए हैं।

    दरअसल, जिलों से शिकायतें मिल रही थीं कि प्रशासनिक मजिस्ट्रेट यानी तहसीलदार 6 अगस्त 2026 के जन्म-मृत्यु संशोधन विधेयक के राजपत्र नोटिफिकेशन का हवाला देकर दो साल से अधिक पुराने मामलों के पंजीयन की अनुमति संबंधी आवेदन स्वीकार नहीं कर रहे हैं। कई लोक सेवा केंद्रों पर भी आवेदन नहीं लिए जाने की शिकायतें सामने आई थीं। इससे लोगों को जन्म प्रमाण-पत्र बनवाने में परेशानी हो रही थी और सीएम हेल्पलाइन पर शिकायतें बढ़ रही थीं।

    रजिस्ट्रार जनरल ने अभी कोई नया आदेश नहीं दिया
    मुख्य रजिस्ट्रार ने स्पष्ट किया है कि रजिस्ट्रार जनरल कार्यालय, नई दिल्ली की ओर से इस संबंध में अभी तक कोई नया आदेश या निर्देश जारी नहीं हुआ है। इसलिए 6 अगस्त के राजपत्र नोटिफिकेशन के आधार पर दो साल से अधिक पुराने जन्म-मृत्यु मामलों का पंजीयन रोकने का कोई आधार नहीं है।

    धारा 13(3) के तहत पुरानी प्रक्रिया जारी
    पत्र में कहा गया है कि जन्म-मृत्यु पंजीयन अधिनियम, 1969 की धारा 13(3) के तहत विलंबित पंजीयन की प्रक्रिया फिलहाल पहले की तरह लागू रहेगी। यानी दो साल से अधिक समय बीत जाने के बाद जन्म या मृत्यु का पंजीयन कराने के लिए मौजूदा प्रक्रिया के अनुसार ही आवेदन और कार्रवाई की जाएगी।

    सभी कलेक्टरों और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अधीनस्थ अधिकारियों को इसकी जानकारी दें, ताकि लोगों के आवेदन अनावश्यक रूप से लंबित न रहें।

    संशोधन लागू होने के बाद क्या बदलेगा?
    2026 के संशोधन में विलंबित पंजीयन की व्यवस्था को और सख्त किया गया है। एक साल से अधिक और दो साल के भीतर सूचना देने पर पंजीयन जिला मजिस्ट्रेट, एसडीएम या अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट के आदेश से होगा। अधिकारी को घटना की सत्यता का सत्यापन भी करना होगा और निर्धारित शुल्क लिया जाएगा।

    वहीं दो साल से अधिक पुराने मामले में प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट (JMFC) का आदेश जरूरी होगा। न्यायिक मजिस्ट्रेट भी पंजीयन का आदेश देने से पहले घटना की सत्यता का सत्यापन करेंगे और निर्धारित शुल्क लिया जाएगा।

    पहले और अब में अंतर
    पहले एक साल से अधिक देरी वाले जन्म-मृत्यु पंजीयन में जिला मजिस्ट्रेट, एसडीएम या अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट के आदेश की व्यवस्था थी। 2026 के संशोधन में दो साल से अधिक पुराने मामलों को कार्यपालक मजिस्ट्रेट के स्तर से हटाकर न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी के स्तर पर कर दिया गया है। इससे दो साल बाद होने वाला पंजीयन अधिक सत्यापन आधारित और सख्त होगा।

    MP में अभी पुरानी व्यवस्था क्यों?
    नए प्रावधान के अनुसार संशोधन केंद्र सरकार की ओर से राजपत्र में अधिसूचना जारी होने की तारीख से लागू होगा। मध्यप्रदेश के मुख्य रजिस्ट्रार की ओर से फिलहाल ऐसा कोई नया आदेश नहीं मिलने के कारण राज्य में दो साल से अधिक पुराने मामलों के लिए पुरानी प्रक्रिया ही जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

    2023 के संशोधन में क्या बदला था?
    2023 के संशोधन में जन्म-मृत्यु पंजीयन व्यवस्था में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए थे। इनमें राष्ट्रीय स्तर पर जन्म-मृत्यु का डेटाबेस तैयार करना, राज्यों का एकीकृत डेटाबेस बनाना, उपलब्ध होने पर माता-पिता और सूचनादाता का आधार नंबर दर्ज करना तथा गोद लिए, सरोगेसी से जन्मे और एकल/अविवाहित मां से जन्मे बच्चों के मामलों में सूचना की व्यवस्था शामिल है।

    इसके अलावा जन्म प्रमाण-पत्र को जन्मतिथि और जन्मस्थान के प्रमाण के रूप में महत्वपूर्ण बनाया गया। शैक्षणिक प्रवेश, मतदाता सूची और सरकारी नौकरी सहित विभिन्न कामों में जन्म प्रमाण-पत्र के उपयोग का प्रावधान किया गया। इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से जन्म-मृत्यु प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी जोड़ी गई।

  • Sachin Pilot का पंजाब में बड़ा बयान, ‘कॉकरोचों’ पर निशाना साधते हुए राजस्थान मॉडल की दिलाई याद

    Sachin Pilot का पंजाब में बड़ा बयान, ‘कॉकरोचों’ पर निशाना साधते हुए राजस्थान मॉडल की दिलाई याद

    लुधियाना
    राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री और हाल ही में पंजाब कांग्रेस के प्रभारी बनाए गए सचिन पायलट ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को चुनौती दी। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी (AAP) शासित पंजाब में भी स्कूलों का ऑडिट उसी तरह किया जाना चाहिए, जैसे दूसरे राज्यों में किया जा रहा है।

    पायलट की यह टिप्पणी पंजाब के लुधियाना में CJP की ओर से तीन सरकारी स्कूलों के किए गए ऑडिट के बाद आई है। CJP के सह-संयोजक सौरव दास के नेतृत्व में टीम ने एक सरकारी ‘स्कूल ऑफ एक्सीलेंस’, एक सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल और एक सरकारी प्राथमिक स्कूल का दौरा किया था।

    लुधियाना के स्कूलों में क्या मिला?
    सौरव दास ने गुरुवार को एक वीडियो पोस्ट किया था। इसके मुताबिक, ‘स्कूल ऑफ एक्सीलेंस’ में बेहतर बुनियादी सुविधाएं मौजूद थीं। वहां स्विमिंग पूल, बैडमिंटन कोर्ट, दिव्यांगों के लिए रैंप और AI लैब जैसी सुविधाएं थीं।

    वहीं, बाकी दो स्कूलों में कई समस्याएं सामने आईं। दास ने यह भी कहा कि तीनों स्कूलों में शौचालयों की स्थिति को और बेहतर किया जा सकता है। इसके बाद सौरव दास और उनकी टीम ने पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस से भी मुलाकात की। दास के मुताबिक, मंत्री ने शिकायतों पर कार्रवाई का भरोसा दिया।

    AAP के संस्थापक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी दास को कमियां सामने लाने के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि इन्हें तुरंत दूर किया जाएगा।

    सोशल मीडिया पर उठे सवाल
    हालांकि, CJP के इस ‘ऑडिट’ को सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने निशाने पर लिया। आरोप लगाया गया कि पंजाब में AAP की सरकार होने के कारण CJP ने यहां नरमी बरती। सोशल मीडिया यूजर्स ने इसकी तुलना उन दूसरे राज्यों के स्कूलों से की, जिन्हें CJP ने अपने ऑडिट के लिए चुना था।

    पायलट ने राजस्थान का उदाहरण दिया
    सचिन पायलट ने अपने गृह राज्य राजस्थान का उदाहरण देते हुए CJP से पंजाब में भी उसी तरह की सख्ती बरतने को कहा। राजस्थान में CJP ने 21 अगस्त को एक ऐसे स्कूल से ऑडिट शुरू करने की योजना बनाई थी, जो कथित तबेले में चल रहा था। संगठन के मुताबिक, सह-संयोजक आशुतोष रांका के नेतृत्व में पहुंची CJP की टीम पर कुछ स्थानीय लोगों ने हमला किया था। CJP का दावा था कि ये लोग BJP से जुड़े थे।

    पायलट ने क्या कहा?
    सचिन पायलट ने कहा कि पंजाब या कहीं भी स्कूलों का ऑडिट किया जाना स्वागत योग्य है। लेकिन उन्होंने CJP से एक खास अनुरोध किया। पायलट के मुताबिक, पंजाब का ऑडिट भी उसी नजर, उन्हीं सवालों और उसी साहस के साथ किया जाना चाहिए, जिस तरह दूसरे राज्यों की सरकारों का ऑडिट किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पंजाब को कोई विशेष छूट नहीं मिलनी चाहिए और AAP को भी कोई ‘दोस्ताना छूट’ नहीं मिलनी चाहिए।

    AAP नेताओं ने पायलट को दिया पलटवार
    पायलट के बयान के बाद AAP नेताओं ने उन्हें पंजाब के स्कूलों की तुलना कांग्रेस शासित हिमाचल प्रदेश के स्कूलों से करने की चुनौती दी। AAP नेता और दिल्ली के पूर्व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि पंजाब में ऐसे 1,000 बेहतरीन स्कूल दिखाए जा सकते हैं और पायलट को हिमाचल प्रदेश के ऐसे 1,000 स्कूल दिखाने चाहिए। उन्होंने पंजाब और हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों का एक साथ ऑडिट कराने की चुनौती देते हुए पूछा कि क्या पायलट इसके लिए तैयार हैं।

    AAP के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग धांडा ने भी BJP शासित राजस्थान के जर्जर स्कूलों के बचाव को लेकर पायलट पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि इस रिश्ते को क्या नाम दिया जाए। धांडा ने कहा कि अगर पायलट हिमाचल प्रदेश के 1,000 स्कूलों की सूची दें तो AAP पंजाब के 1,000 स्कूलों की सूची देगी। उन्होंने दोनों राज्यों के स्कूलों का साथ जाकर ऑडिट करने की भी बात कही।
    CJP ने राजस्थान के शिक्षा मंत्री को लेकर क्या कहा?

    इस बीच CJP के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने एक यूजर को टैग करते हुए कहा कि उन्होंने राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर से कई बार उनके कार्यकाल में बनाए गए 10 सबसे शानदार स्कूल दिखाने का अनुरोध किया था, लेकिन उन्होंने इस पर ध्यान नहीं दिया। रांका ने कहा कि अगर किसी को ऐसे स्कूलों के बारे में जानकारी है तो वह बताए, CJP वहां जाकर उन्हें देखेगी। उन्होंने यह भी कहा कि अच्छे स्कूल भी दिखाए जाने चाहिए।

    पहले भी CJP पर उठे हैं सवाल
    CJP इससे पहले भी उन राज्यों को लेकर आलोचना का सामना कर चुकी है, जिन्हें उसने अपने ऑडिट के लिए चुना। BJP नेता रविशंकर प्रसाद ने हाल में आरोप लगाया था कि CJP पंजाब और कांग्रेस शासित राज्यों पर चुप है, जबकि BJP शासित राज्यों को निशाना बना रही है।

  • गैंगस्टर अमृत दलम पर शिकंजा, यूरोप से भारत लाया गया; पंजाब में हत्या समेत कई केस दर्ज

    गैंगस्टर अमृत दलम पर शिकंजा, यूरोप से भारत लाया गया; पंजाब में हत्या समेत कई केस दर्ज

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

     

    पठानकोट

    पंजाब पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है. जग्गू भगवानपुरिया गैंग से जुड़े कुख्यात गैंगस्टर और पंजाब में मोस्ट वॉन्टेड अमृतपाल सिंह उर्फ अमृत दलम को प्रत्यर्पित करके भारत लाया गया है. पंजाब पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारी उसे प्रत्यर्पण करके यूरोपीय देश मोल्दोवा से भारत वापस लाए हैं. यह पहली बार है जब पंजाब पुलिस ने किसी किसी आरोपी को किसी यूरोपीय देश से प्रत्यर्पित कराकर वापस पंजाब लाया गया है. अमृत दलम पर 21 मामले दर्ज थे, जिसमें अमृतसर में कई व्यापारियों को धमकाने के मामले भी दर्ज थे. उसे वापस भारत लाना बड़ी सफलता माना जा रहा है। 

    भारत से 2024 में हुआ था फरार
    अमृत दलम जग्गू भगवानपुरिया के मुख्य हिटमैन के तौर पर काम करता था. पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक अमृतपाल सिंह के खिलाफ पंजाब में कुल 21 आपराधिक मामले दर्ज हैं, इनमें 4 मामले ट्रायल में हैं, जबकि 17 मामलों में जांच चल रही है. अक्टूबर 2024 के आखिरी सप्ताह में भारत से फरार हुआ था, उसने चंडीगढ़ से जारी फर्जी पासपोर्ट का इस्तेमाल किया था. इस पासपोर्ट में उसकी पहचान गुरपाल सिंह के नाम से बताई गई थी. भारत से निकलने के बाद वह सबसे पहले संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पहुंचा और इसके बाद कई देशों से होते हुए मोल्दोवा पहुंच गया। 

    यूक्रेन भागने वाला था अमृत दलम 
    बताया जा रहा है कि अमृत दलम यूक्रेन भागने की फिराक में था. इसी चक्कर में वह मोल्दोवा में पकड़ा गया. अमृतपाल सिंह को 24 फरवरी 2026 को मोल्दोवा के अधिकारियों ने उस समय पकड़ लिया, जब वह ओटासी स्टेट बॉर्डर से यूक्रेन जाने की कोशिश कर रहा था. इसके बाद पंजाब पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों की कोशिशों से उसे भारत वापस लाने की कानूनी प्रक्रिया शुरू हुई. अमृत दलम को अजरबैजान के बाकू के ट्रांजिट रूट से भारत लाया गया. पंजाब पुलिस की टीम और आरोपी आज सुबह 12 जून 2026 को नई दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर पहुंचे थे. पंजाब पुलिस ने अमृतपाल सिंह के फर्जी पासपोर्ट की जानकारी और उसके संभावित ठिकानों से जुड़ी जानकारी केंद्रीय एजेंसियों के साथ साझा की. इसके आधार पर उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस की प्रक्रिया शुरू की गई और नोटिस हासिल किया गया। 

    21 आपराधिक मामलों का रिकॉर्ड
    दबोचा गया गैंगस्टर, जग्गू भगवानपुरिया के मुख्य हिटमैन के तौर पर काम करता था। पंजाब पुलिस ने विदेश भागे आरोपी अमृतपाल सिंह उर्फ अमृत दलम उर्फ गुरपाल सिंह को मोल्दोवा से भारत वापस ला दिया है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, अमृतपाल सिंह के खिलाफ पंजाब में कुल 21 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें 4 मामले ट्रायल में हैं, जबकि 17 मामलों में जांच चल रही है। 

    फर्जी पहचान से भारत से फरार हुआ था
    पुलिस के मुताबिक अमृतपाल सिंह करीब अक्टूबर 2024 के आखिरी सप्ताह में भारत से फरार हुआ था। उसने चंडीगढ़ से जारी फर्जी पासपोर्ट का इस्तेमाल किया था। इस पासपोर्ट में उसकी पहचान ‘गुरपाल सिंह’ के नाम से बताई गई थी। 

    भारत से निकलने के बाद वह सबसे पहले संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पहुंचा और इसके बाद कई देशों से होते हुए मोल्दोवा पहुंच गया।

    यूक्रेन भागने की कोशिश के दौरान मोल्दोवा में पकड़ा गया
    अमृतपाल सिंह को 24 फरवरी 2026 को मोल्दोवा के अधिकारियों ने उस समय पकड़ लिया, जब वह ओटासी स्टेट बॉर्डर से यूक्रेन जाने की कोशिश कर रहा था। इसके बाद पंजाब पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों की कोशिशों से उसे भारत वापस लाने की कानूनी प्रक्रिया शुरू हुई।  

    इसके बाद अमृत दलम को अजरबैजान के बाकू के ट्रांजिट रूट से भारत लाया गया। पंजाब पुलिस की टीम और आरोपी आज सुबह 12 जून 2026 को नई दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर पहुंचे।

    फर्जी पासपोर्ट और लोकेशन के आधार पर रेड कॉर्नर नोटिस
    पंजाब पुलिस ने अमृतपाल सिंह के फर्जी पासपोर्ट की जानकारी और उसके संभावित ठिकानों से जुड़ी जानकारी केंद्रीय एजेंसियों के साथ साझा की। इसके आधार पर उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस की प्रक्रिया शुरू की गई और नोटिस हासिल किया गया। 

    छह महीने तक चला इंटरनेशनल ऑपरेशन
    अमृतपाल सिंह को पकड़ने के लिए पंजाब पुलिस की AGTF और OFTEC Punjab ने करीब छह महीने तक इंटेलिजेंस आधारित अंतरराष्ट्रीय अभियान चलाया। इस ऑपरेशन का नाम ‘Operation Eastern Reach’ रखा गया था। इसमें लगातार निगरानी के साथ देश और विदेश की अलग-अलग एजेंसियों के बीच समन्वय किया गया। 

    मोल्दोवा की अदालत से मिली भारत प्रत्यर्पण की मंजूरी
    अमृतपाल सिंह को भारत वापस लाने की कानूनी प्रक्रिया के दौरान 26 मई 2026 को अदालत ने उसके भारत प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी। इसके बाद उसने इस फैसले के खिलाफ अपील की, लेकिन 16 जुलाई 2026 को Court of Appeal Centru ने उसकी अपील खारिज कर दी। इसके साथ ही प्रत्यर्पण का आदेश अंतिम हो गया। 

    चार सदस्यीय पंजाब पुलिस टीम मोल्दोवा पहुंची
    प्रत्यर्पण का रास्ता साफ होने के बाद पंजाब पुलिस की चार सदस्यीय टीम मोल्दोवा पहुंची। टीम ने 11 सितंबर 2026 को चिशिनाउ एयरपोर्ट पर अमृतपाल सिंह को अपनी हिरासत में लिया और उसे पंजाब वापस लाया। 

    पंजाब में 21 केस, कई गंभीर धाराओं से जुड़े मामले
    पुलिस के रिकॉर्ड के मुताबिक अमृतपाल सिंह के खिलाफ दर्ज मामलों में UAPA/Explosives, हत्या, Arms Act, NDPS, जबरन वसूली, Passport Act और अन्य BNS से जुड़े मामले शामिल हैं। रिकॉर्ड में हत्या से जुड़े 5, Arms Act के 9, NDPS का 1 और UAPA/Explosives का 1 मामला दर्ज बताया गया है। 

    किन जिलों में दर्ज हैं मामले?
    जांच के तहत चल रहे 17 मामलों में सबसे ज्यादा 7 FIR बटाला, 4 गुरदासपुर, 2 अमृतसर कमिश्नरेट, 2 होशियारपुर, 1 लुधियाना कमिश्नरेट और 1 FIR SSOC अमृतसर से जुड़ी बताई गई है। वहीं ट्रायल में चल रहे 4 मामले बटाला में दर्ज हैं। 

    यानी करीब दो साल पहले फर्जी पहचान और पासपोर्ट के जरिए देश से फरार हुआ अमृतपाल सिंह मोल्दोवा में पकड़ा गया। छह महीने चले अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशन, कानूनी प्रक्रिया और प्रत्यर्पण के बाद अब पंजाब पुलिस उसे भारत वापस ले आई है।

    छह महीने तक चला इंटरनेशनल ऑपरेशन

    अमृतपाल सिंह को पकड़ने के लिए पंजाब पुलिस की AGTF और OFTEC Punjab ने करीब छह महीने तक इंटेलिजेंस आधारित अंतरराष्ट्रीय अभियान चलाया. इस ऑपरेशन का नाम Operation Eastern Reach रखा गया था. इसमें लगातार निगरानी के साथ देश और विदेश की अलग-अलग एजेंसियों के बीच समन्वय किया गया. अमृतपाल सिंह को भारत वापस लाने की कानूनी प्रक्रिया के दौरान 26 मई 2026 को अदालत ने उसके भारत प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी. इसके बाद उसने इस फैसले के खिलाफ अपील की, लेकिन 16 जुलाई 2026 को कोर्ट ने उसकी अपील खारिज कर दी. इसके साथ ही प्रत्यर्पण का आदेश अंतिम हो गया।