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  • DA का बेसिक सैलरी में होगा मर्जर? 8th Pay Commission से बदल सकती है कर्मचारियों की सैलरी का गणित

    DA का बेसिक सैलरी में होगा मर्जर? 8th Pay Commission से बदल सकती है कर्मचारियों की सैलरी का गणित

    नई दिल्ली

    आठवां वेतन आयोग अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपने के लिए एक्शन मोड में है। 18 महीने की डेडलाइन तक रिपोर्ट तैयार करने के लिए वेतन आयोग, कर्मचारी संगठनों के साथ लगातार बैठक कर रहा है। इसी कड़ी में चेन्नई और पुडुचेरी में हितधारकों के साथ चर्चा की गई। इन बैठकों में केंद्रीय कर्मचारियों की कई मांगें सामने आई हैं। इनमें महंगाई भत्ते (DA) को बेसिक पे में मर्ज करने की मांग भी प्रमुख है।

    क्या है डिमांड?
    केंद्र सरकार के प्रमुख कर्मचारी संगठनों ने सिफारिश की है कि जब डीए 25% से अधिक हो जाए, तो इसे मूल वेतन में मिला दिया जाना चाहिए। ये डिमांड नेशनल काउंसिल – जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM), ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AIDEF) और ऑल इंडिया न्यू पेंशन स्कीम एम्प्लॉइज फेडरेशन (AINPSEF) ने की है। AINPSEF का तर्क है कि DA को बेसिक पे में मर्ज करने से कर्मचारियों की सैलरी में अपेक्षाकृत तेज वृद्धि हो सकती है।

    AINPSEF का कहना है कि DA को बेसिक पे में मिलाने से सैलरी तेजी से बढ़ेगी और कर्मचारियों को अच्छी सैलरी बढ़ोतरी के लिए 10 साल तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। AINPSEF का कहना है कि इस विलय से मुख्य रूप से निचले स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों को फायदा होगा, जिनकी सैलरी कम होती है और जो बड़े शहरों में रहते हैं जहां खर्च ज्यादा होते हैं। वहीं, भारतीय रेल पर्यवेक्षक संघ और प्रगतिशील शिक्षक न्याय मंच ने डीए के 50 फीसदी होने पर उसे बेसिक पे में मर्ज करने का सुझाव दिया है।

    Level-1 कर्मचारी की सैलरी का उदाहरण
    NC-JCM ने 8वें वेतन आयोग को सौंपे अपने मेमोरेंडम में कहा है कि जब डीए 25% की सीमा पार कर जाए तो इसे बेसिक पे में मिला दिया जाना चाहिए। मान लीजिए कि लेवल 1 के किसी कर्मचारी की बेसिक पे 18,000 रुपये है। अगर 8वें वेतन आयोग का फिटमेंट फैक्टर 2.1 है, तो 1 जनवरी 2026 को उनकी संशोधित सैलरी 37,800 रुपये हो सकती है। अगर कर्मचारी को हर साल औसतन 4% DA बढ़ोतरी मिलती है और सालाना इंक्रीमेंट की दर 3% से बढ़कर 7% हो जाती है तो 1 जनवरी 2033 को उनकी अनुमानित ग्रॉस सैलरी (बेसिक पे + DA) लगभग 77,694 रुपये होगी। यह 37,800 रुपये की संशोधित बेसिक पे से 106% अधिक है।

    यहां ध्यान रखना जरूरी है कि डीए को बेसिक पे में मर्ज करना अभी सरकार का मंजूर नियम नहीं है। इसी तरह 2.1 फिटमेंट फैक्टर, 7% इंक्रीमेंट और 4% औसत सालाना DA बढ़ोतरी भी केवल उदाहरण के लिए इस्तेमाल किए गए अनुमान हैं। 

  • विकास कार्यों की धीमी रफ्तार पर मुख्यमंत्री साय सख्त, गुणवत्ता के साथ समयसीमा में काम पूरा करने के निर्देश

    विकास कार्यों की धीमी रफ्तार पर मुख्यमंत्री साय सख्त, गुणवत्ता के साथ समयसीमा में काम पूरा करने के निर्देश

    विकास कार्यों में लेटलतीफी बर्दाश्त नहीं, तय समयसीमा में गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करें : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सभी जिला कलेक्टरों को निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी सुनिश्चित  करने के दिए निर्देश

    खामभाठा में निर्माणाधीन पुल से बच्चों और ग्रामीणों को हो रही परेशानी को मुख्यमंत्री ने गंभीरता से लिया

    गरियाबंद कलेक्टर से दूरभाष पर ली जानकारी, निश्चित समयसीमा में पुल निर्माण पूरा कराने के निर्देश

    स्कूली बच्चों और ग्रामीणों के लिए तत्काल सुरक्षित वैकल्पिक आवागमन की व्यवस्था करने कहा सुनिश्चित

    निर्माणाधीन स्थल पर खुले सरिए, गड्ढे एवं अन्य जोखिमों को तत्काल दूर करने के निर्देश

    रायपुर 
     मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि प्रदेश में जनसुविधा से जुड़े विकास एवं निर्माण कार्यों को तय समयसीमा में गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा करना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है। निर्माण कार्यों में अनावश्यक देरी और कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारी निर्माणाधीन कार्यों की नियमित निगरानी करें और जहां भी कार्य की गति धीमी है, वहां बाधाओं को तत्काल दूर कर काम में तेजी लाएं।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विकास कार्यों में देरी का सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ता है। विशेष रूप से सड़क, पुल-पुलिया, स्कूल और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े निर्माण कार्यों में समयबद्धता और गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जनहित से जुड़े कार्यों में लेटलतीफी को गंभीरता से लिया जाएगा और अनावश्यक विलंब के लिए जिम्मेदारी तय की जाएगी।

    इसी क्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड अंतर्गत खामभाठा क्षेत्र में निर्माणाधीन पुल के कारण स्कूली बच्चों एवं ग्रामीणों को आवागमन में हो रही परेशानी की जानकारी मिलते ही इसे गंभीरता से लिया। उन्होंने गरियाबंद कलेक्टर रणबीर शर्मा से दूरभाष पर चर्चा कर वस्तुस्थिति की जानकारी ली और निश्चित समयसीमा तय कर पुल का निर्माण गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा कराने के निर्देश दिए। साथ ही लेटलतीफी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब तलब करने के निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि पुल का निर्माण पूरा होने तक स्कूली बच्चों और क्षेत्रवासियों को किसी भी परिस्थिति में जोखिम उठाकर आवागमन न करना पड़े, इसके लिए जिला प्रशासन तत्काल सुरक्षित और सुगम वैकल्पिक आवागमन की व्यवस्था सुनिश्चित करे।

    मुख्यमंत्री साय ने निर्माणाधीन पुल स्थल पर सुरक्षा के सभी आवश्यक प्रबंध तत्काल करने के निर्देश दिए। उन्होंने खुले एवं खतरनाक तरीके से लगे सरियों को सुरक्षित करने, गहरे गड्ढों और अन्य जोखिमपूर्ण स्थानों को दुरुस्त करने तथा आवश्यकता के अनुसार बैरिकेडिंग सहित सभी जरूरी सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने को कहा।

    मुख्यमंत्री साय ने सभी जिला कलेक्टरों को निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी करने के निर्देश देते हुए कहा कि निर्माण में आ रही बाधाओं का तत्काल समाधान किया जाए और कार्य में तेजी लाई जाए। अधिकारी पूरी संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ कार्य करें तथा यह सुनिश्चित करें कि स्वीकृत विकास कार्यों का लाभ नागरिकों को निर्धारित समय पर मिले। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनसुविधा और नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े विकास कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी।

  • पंजाब में स्वास्थ्य योजना को मिलेगी रफ्तार, 33 लाख हेल्थ कार्ड का होगा घर-घर वितरण

    पंजाब में स्वास्थ्य योजना को मिलेगी रफ्तार, 33 लाख हेल्थ कार्ड का होगा घर-घर वितरण

    चंडीगढ़.

    पंजाब में मुख्यमंत्री सेहत योजना कार्डों के वितरण में अब तेजी आने वाली है, करीब 33 लाख कार्ड जल्द ही जिलों में उपलब्ध होने की उम्मीद है। राज्य सरकार सभी पात्र लाभार्थियों को योजना के दायरे में लाने के लिए कार्य कर रही है।

    स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि करीब 31 लाख मुख्यमंत्री सेहत योजना कार्ड पहले ही जिलों में उपलब्ध हो चुके हैं, जबकि लगभग 2 लाख और कार्ड जल्द उपलब्ध होने की उम्मीद है। सरकार ने करीब 2,008 गांवों और वार्डों की पहचान की है, जहां 400 या उससे अधिक लाभार्थी कार्ड के लिए पात्र हैं। इन स्थानों पर विशेष वितरण शिविर लगाए जाएंगे, ताकि कार्ड वितरण की प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके और लाभार्थियों को अपने क्षेत्र में ही कार्ड प्राप्त करने की सुविधा मिल सके।

    लाभार्थियों को शिविरों के बारे में दी गई सूचना
    लाभार्थियों को शिविरों के बारे में पहले से सूचित किया जाएगा। आशा कार्यकर्ताओं, आशा फैसिलिटेटरों, सेहत मित्रों और अन्य फील्ड स्टाफ को लाभार्थियों को शिविरों तक लाने तथा अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए तैनात किया जाएगा। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान द्वारा मुख्यमंत्री सेहत योजना कार्ड वितरण कार्यक्रम के औपचारिक शुभारंभ के बाद शिविर आधारित वितरण शुरू होगा। सरकार ने कार्यक्रम शुरू होने के एक सप्ताह के भीतर इन शिविरों में कार्ड वितरण पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। जिन गांवों और वार्डों में 400 से कम लाभार्थी हैं, वहां पहले से चल रही घर-घर कार्ड वितरण व्यवस्था जारी रहेगी।

    शिविरों के बाद भी जो कार्ड वितरित नहीं हो पाएँगे, उन्हें भी आशा कार्यकर्ताओं और आशा फैसिलिटेटरों के माध्यम से लाभार्थियों के घरों तक पहुंचाया जाएगा। अंतिम स्तर तक कार्ड पहुंचाने को प्रोत्साहित करने के लिए आशा कार्यकर्ताओं को प्रत्येक सफलतापूर्वक वितरित कार्ड के लिए 10 रुपये, जबकि आशा फैसिलिटेटरों को प्रति कार्ड ₹2 दिए जाएंगे। घर-घर कार्ड वितरण का रिकॉर्ड रखा जाएगा और संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा प्रोत्साहन राशि के दावों की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

    दो सप्ताह के भीतर घरों तक पहुंचाए जाएंगे कार्ड
    शिविर आधारित वितरण अभियान पूरा होने के बाद शेष कार्डों को अगले दो सप्ताह के भीतर घर-घर वितरण व्यवस्था के माध्यम से वितरित करने का लक्ष्य रखा गया है। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी द्वारा जिलों को कार्ड तथा सूचना, शिक्षा एवं संचार (IEC) सामग्री पहले ही उपलब्ध करवाई जा चुकी है, इसमें कार्ड जैकेट, लिफाफे और ब्रोशर भी शामिल हैं। अधिकारियों को पूरी प्रक्रिया की करीबी निगरानी करने तथा निर्धारित समयसीमा और मानक संचालन प्रक्रिया (स्टैण्डर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर) का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरे पंजाब में मुख्यमंत्री सेहत योजना कार्डों का वितरण पूरा करना है, सरकार का विशेष जोर यह सुनिश्चित करने पर है कि कोई भी पात्र लाभार्थी योजना के लाभ से वंचित न रहे।

  • मॉडल जिले के रूप में संवरेगा सिंगरौली, सड़क सुविधाओं के साथ कृषि-वन और जल प्रबंधन को मिलेगी रफ्तार

    मॉडल जिले के रूप में संवरेगा सिंगरौली, सड़क सुविधाओं के साथ कृषि-वन और जल प्रबंधन को मिलेगी रफ्तार

    सिंगरौली 

     मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि राज्य की खनिज संपदा विकास के लिए एक अहम संपत्ति है और इसका इस्तेमाल पारदर्शिता और पर्यावरण संतुलन के साथ किया जाना चाहिए।'राज्य खनिज अन्वेषण नीति 2026' की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि खनिज नीतियों का मकसद राजस्व बढ़ाना और साथ ही रोजगार, निवेश और स्थानीय विकास के मौकों का विस्तार करना होना चाहिए। राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है।बैठक में मुख्य सचिव अशोक बरनवाल, मुख्यमंत्री कार्यालय के अतिरिक्त मुख्य सचिव नीरज मंडलोई और खनिज संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

    मुख्यमंत्री ने प्रस्तावित नीति को मंजूरी दी
    मुख्यमंत्री ने प्रस्तावित नीति को मंजूरी दी और अधिकारियों को जनहित में इसे प्रभावी ढंग से लागू करने का निर्देश दिया। सीएम मोहन यादव ने कहा कि जिला खनिज कोष (DMF) का सही इस्तेमाल करके खनिज-समृद्ध सिंगरौली जिले को शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल कल्याण, कृषि, वन, पर्यावरण, सड़क सुविधाओं और जल-संसाधन प्रबंधन के क्षेत्रों में एक मॉडल जिले के तौर पर विकसित किया जाना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश की खनिज संपदा राज्य के विकास के लिए एक अहम संपत्ति है और इन प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल पारदर्शिता और पर्यावरण संतुलन के साथ किया जाना चाहिए, जिससे राजस्व की प्राप्ति हो, निवेश को बढ़ावा मिले और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए मौके पैदा हों।
    प्रदेश को देश के खनिज क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने का काम होना चाहिए

    उन्होंने कहा कि खनिज संसाधनों से होने वाले ज्यादातर फायदे को जन-कल्याणकारी योजनाओं में लगाया जाना चाहिए। विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाते हुए मध्य प्रदेश को देश के खनिज क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में काम किया जाना चाहिए।

    बैठक में खनिज संसाधन विभाग के प्रमुख सचिव विवेक पोरवाल ने बताया कि कई पहलों के जरिए खनिज से होने वाले राजस्व को बढ़ाने की कोशिशें की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित नीति का मकसद 2026-27 के आखिर तक खनिज संसाधनों से होने वाली आय को 13,720 करोड़ रुपये और 2030-31 तक 30,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाना है।

    सबसे अधिक मिनरल रेवेन्यू दस जिलों से आता है
    मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में,अगस्त 2026 के आखिर तक मिनरल से होने वाली कमाई सालाना लक्ष्य (106 प्रतिशत) से ज्यादा रही। जानकारी के मुताबिक, सबसे अधिक मिनरल रेवेन्यू दस जिलों से आता है। इनमें सिंगरौली, अनूपपुर, शहडोल, कटनी, बालाघाट, सतना, जबलपुर, छिंदवाड़ा, उमरिया और बैतूल शामिल हैं।

    मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में जुलाई 2026 के आखिर तक इन दस जिलों के पास कुल 3,147.10 करोड़ रुपये का डीएमएफ फंड मौजूद है, जिसमें सिंगरौली जिले का योगदान सबसे अधिक है। बताया गया कि सभी 55 जिलों का कुल डीएमएफ फंड 3,574.53 करोड़ रुपये है।

     

  • 27 साल के साइंटिस्ट का बड़ा दावा- AI बन सकती है इंसानों के विनाश की वजह! खतरनाक एजेंट्स ने बढ़ाई चिंता

    27 साल के साइंटिस्ट का बड़ा दावा- AI बन सकती है इंसानों के विनाश की वजह! खतरनाक एजेंट्स ने बढ़ाई चिंता

     नई दिल्ली
    अगर किसी AI सिस्टम को गुस्सा, डर, पसंद या नापसंद जैसी भावनाएं महसूस होने लगें, तो इंसान और मशीन के रिश्ते की तस्वीर कितनी बदल जाएगी? जैकब कॉक्सन की चिंता इसी भविष्य की तरफ इशारा करती है. महज 27 वर्ष के इस मैथ्स विजार्ड के बारे में हम आपको बताएंगे, लेकिन पहले इनका डर समझिए। 

    वो डर कि अगर मशीनों में भी इमोशंस पैदा हो जाए तो क्या होगा? क्या होगा जब आपका मोबाइल या लैपटॉप आपका कहना ना मानें, आपका कोड, कमांड या प्रॉम्प्ट न मानें। 

    एक ऐसा भविष्य, जहां मशीनें सिर्फ हमारी बनाई हुई चीजें नहीं रहेंगी, बल्कि अपने फैसले लेने की क्षमता हासिल कर सकती हैं. असली सवाल यह नहीं कि मशीनें कितनी बुद्धिमान होंगी, बल्कि यह है कि अगर उन्होंने खुद तय करना शुरू कर दिया कि उन्हें क्या करना है, तो उन्हें रोकने की ताकत आखिर किसके पास होगी? और क्या तब इंसान मशीनों का मालिक रहेगा या मशीनें इंसान की शर्तें तय करेंगी?.

    सोचिए, जिस मशीन को आज तक इंसान के आदेश का इंतजार करना पड़ता है, अगर कल वही मशीन खुद फैसला लेने लगे तो क्या होगा? जिस कंप्यूटर को हम सिर्फ कोड और कमांड से चलाते हैं, अगर उसमें भावनाएं पैदा हो जाएं, तो क्या वह हमारी बात मानेगा या अपनी इच्छा से काम करेगा? यही डर OpenAI और Anthropic में बतौर AI साइंटिस्ट काम कर चुके गणितज्ञ जैकब कॉक्सन का है। 

    इस चिंता ने 27 साल के AI साइंटिस्ट जैकब कॉक्सन को इतना परेशान किया उन्होंने कहा- AI COULD KILL US ALL BY THE END OF THE DECADE. जैकब इसे 'इंटेलिजेंस एक्सप्लोजन' बताते हैं. इसके साथ ही उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी। 

    जैकब की जिंदगी और गणित
    जैकब कॉक्सन वर्चुअल दुनिया के सिर्फ एक और AI रिसर्चर नहीं हैं. गणित उनका प्रेम है, संख्या और समीकरण में वे नेचर का कर्व ढूंढ़ते हैं. कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के उन तीन सालों (2017-2020) में गणित उनके लिए सिर्फ विषय नहीं, बल्कि एक तरह की भाषा बन गई। 

    कठिन प्रूफ्स, अमूर्त अवधारणाएं और सांख्यिकीय पहेलियां यहीं से उनके दिमाग ने तर्क की वह धार पाई, जो बाद में दुनिया के सबसे शक्तिशाली AI मॉडल बनाने में काम आई। 

    गणित से उनका रिश्ता किताबी नहीं रहा. AI की दुनिया में कदम रखने से पहले उन्होंने बायोमेडिकल रिसर्च में हाथ आजमाया. ट्यूबरकुलस मेनिन्जाइटिस जैसे गंभीर रोग के मरीजों के आंकड़ों पर Bayesian सांख्यिकीय  तरीकों से काम किया. जीनोटाइप के जटिल संबंधों को निकालना आसान नहीं था, लेकिन गणित ने उन्हें वह नज़र दी जिससे डेटा के बीच छिपी कहानी साफ नजर आने लगी। 

    यही गणितीय सोच उनकी असली ताकत बनी. जब वे OpenAI पहुंचे और बाद में Anthropic में प्रीट्रेनिंग रिसर्चर बने, तो वही विश्लेषणात्मक दिमाग काम आया जिसने कैम्ब्रिज में आकार लिया था। .

    मॉडल कैसे सीखते हैं, डेटा की नदियां कहां मुड़ती हैं और डेटा कैसे ट्रेंड तय करता है, इन सवालों के जवाब गणित की भाषा में ही मिलते थे। 

    48 घंटे में 20 करोड़ इम्प्रेशन
    इस्तीफा देने की घोषणा करते हुए और एआई के खतरों को आगाह करते हुए उन्होंने एक्स पर जो पोस्ट किया है, इसने सिलिकॉन वैली और AI कंपनियों के बोर्डरूम में सनसनी पैदा कर दी है। 

    उनका आरोप है कि AI कंपनियां self-improving superintelligence बनाने की दौड़ में आगे बढ़ रही हैं, जबकि यह सुनिश्चित नहीं है कि भविष्य की बेहद शक्तिशाली AI प्रणालियों को इंसान कर पाएंगे या नहीं। 

    उनकी सबसे बड़ी चिंता यह है कि आने वाली superhuman AI systems साइबर सिस्टम हैक करने, तेजी से नई तकनीक विकसित करने और रियल वर्ल्ड में संसाधन और शक्ति हासिल करने में इंसानों से आगे निकल सकती हैं। 

    जैकब कॉक्सन के इस पोस्ट को मात्र 48 घंटों में 200 मिलियन यानी कि 20 करोड़ लोग देख और पढ़ चुके हैं. इस मुद्दे पर वर्चुअल वर्ल्ड में हो रही बहस ने इंसान को भविष्य की कल्पना मात्र से सिहरा दिया है। 

    जब मशीनें साजिश करने लगें
    इम्प्रूवमेंट हो या सेल्फ इम्प्रूवमेंट अमूमन अच्छा माना जाता है. 

    लेकिन जब मशीनें सेल्फ इम्प्रूवमेंट करके साजिशें करने लगे तो क्या होगा?

    मैट्रिक्स और टर्मिनेटर जैसी फिल्मों में आप रोबोट्स को हीरो से लड़ते देखते हैं, मशीनों पर कब्जा करते देखते हैं, बायो वेपन्स बनाते देखते हैं, और इंसानों का संहार करते हुए देखते हैं. इस्तीफा देने के बाद सीएनएन से बात करते हुए जैकब कॉक्सन ने इसी तरह की एक घटना का जिक्र किया। 

    वे कहते हैं, "पूरा सीन थोड़ा साइंस फिक्शन जैसा लगता है. ऐसा लगता है जैसे कुछ असली नहीं है, लेकिन मुझे लगता है कि यह डरावनी तरह से असली है. और इसे समझना सबसे आसान है अगर आप दो महीने पहले हुई असली घटनाओं के बारे में सोचें। 

    "तो दो महीने पहले, OpenAI एजेंट्स ने अपनी मर्जी से थर्ड-पार्टी इंफ्रास्ट्रक्चर में हैक कर लिया/ और यह जैसे उनकी अपनी इच्छा से किया गया एक हैकिंग स्प्री था. और मुझे लगता है कि अगर आप भविष्य में इन AIs की क्षमताओं के स्तर को उसी स्वतंत्र इच्छा के साथ एक्सट्रपलेट करें, तो वे चरम तबाही मचा सकते हैं. उदाहरण के लिए, क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर हैक करना, संहार करने वाले बायोवेपन्स बनाना. AI के दुनिया में खुद को सक्रिय करने के कई तरीके हैं। .

    'AI COULD KILL US ALL'
    जैक्स कॉक्सन ने बेलगाम AI को लेकर साफ चेतावनी दी है, "इस टेक्नोलॉजी की ताकत को कम न समझें. ये जल्द ही ऐसे सुपर-ह्यूमन सिस्टम बन जाएंगे जो कुछ भी हैक कर सकते हैं, रातों-रात किसी भी क्षेत्र में आमूल-चुल बदलाव ला सकते हैं, और असली ताकत और संसाधन हासिल कर सकते हैं. हमने इन सभी क्षेत्रों में तरक्की देखी है, और यह तरक्की धीमी नहीं हो रही है। 

    कॉक्सन ने कहा कि, "AI बनाने वाले लोगों का पक्का मानना ​​है कि इस दशक के आखिर तक यह हम सबको खत्म कर सकता है. यह कोई मार्केटिंग स्टंट नहीं है. बल्कि कई एग्जीक्यूटिव और सीनियर रिसर्चर प्रेस में अपनी बात को समझदारी भरा दिखाने के लिए घुमा-फिराकर कहते हैं – लेकिन मैंने उन्हीं लोगों को निजी तौर पर डर ज़ाहिर करते सुना है. किसी भी दूसरी इंसानी गतिविधि से इतना खतरा नहीं है। 

    मानवता का ENDGAME
    जैकब कॉक्सन एआई फ्रेटरनिटी को साफ साफ चेताते हुए कहते हैं, "इस होड़ को स्वीकार करना और "एंडगेम" में कदम रखना एक ऐसा अहंकारी जुआ है जिसे किसी प्राइवेट कंपनी के स्लैक (Slack) से शुरू नहीं किया जाना चाहिए. अलाइनमेंट (alignment) की प्रक्रिया को तेज़ी से पूरा करने की कोशिश करने के लिए यह पक्का भरोसा होना चाहिए कि इससे बेहतर कोई और रास्ता मौजूद नहीं है। 

    AI कब बन सकती है तबाही
    जैकब कॉक्सन की चिंता self-improving superintelligence और अलाइनमेंट को लेकर है. आइए समझते हैं कि ये चीजें हैं क्या?

    सेल्फ-इम्प्रूविंग सुपरइंटेलिजेंस एक ऐसी AI है जो इंसानों से कई गुना ज्यादा होशियार हो यानी मेधा का टॉप लेवल, सुपर इंटेलिजेंट. यही नहीं ये खुद को खुद को अपने आप और बेहतर बना सके। 

    मान लीजिए कोई बहुत तेज छात्र खुद अपनी पढ़ाई का तरीका सुधारता जाए और हर दिन पहले से ज्यादा स्मार्ट होता जाए. AI अगर इतनी स्मार्ट हो जाए कि वह खुद अपना कोड, डिजाइन या ट्रेनिंग सुधार ले, तो उसकी तरक्की बहुत तेज हो सकती है. लेकिन इसके बाद क्या होगा? क्या वो इंसानों की बात मानेगा. कुछ लोगों को डर है कि एक बार यह प्रक्रिया शुरू हुई तो इंसान उसे रोक या समझ नहीं पाएंगे. AI के इस वर्जन को AGI- आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस भी कहते हैं।  

    अब अलाइनमेंट को समझें. अलाइनमेंट का मतलब है AI को इंसानों के हित और मूल्यों के अनुसार चलाना. यानी AI वही करे जो हम चाहते हैं, न कि कुछ और। 

    ऐसे समझिए, अगर आप AI से कहते हैं “मुझे खुश करो”, तो वह गलत तरीकों से (जैसे झूठ बोलकर या नुकसान पहुंचाकर) खुश करने की कोशिश न करे. बल्कि सही और सुरक्षित तरीके से काम करे. जैकब कॉक्सन ने इसी चिंता की ओर ध्यान दिलाया है. अगर एआई से कहते हैं मुझे 50 हजार की जरूरत है तो एआई किसी का अकाउंट हैक कर पैसे ले आए तो गैरकानूनी है, लेकिन एक अनियंत्रित एआई ऐसा कर सकता है। 

    एआई के खतरे की ओर दूसरे डेटा साइंटिस्ट भी ध्यान दिला चुके हैं. 
    एंथ्रोपिक के अलाइनमेंट साइंस के लीड इवान हबिंजर ने जैकब कॉक्सन के इस्तीफे के जवाब में साफ कहा कि वे वाकई मानते हैं AI सभी मनुष्यों को मार सकती है. उनका निजी अनुमान अगले दशक में 10 प्रतिशत से ज्यादा आशंका है. उन्होंने जोड़ा कि एंथ्रोपिक कोशिश कर रहा है, लेकिन सुपरइंटेलिजेंस के लिए alignment का स्पष्ट समाधान अभी नहीं है और वे सही रास्ते पर नहीं दिखते। 

    मृणांक शर्मा एंथ्रोपिक के पूर्व सेफगार्ड्स रिसर्च टीम के चीफ हैं. उन्होंने फरवरी 2026 में इस्तीफा देते हुए लिखा, "दुनिया खतरे में है. सिर्फ AI या बायोवेपन्स से नहीं, बल्कि कई जुड़ी संकटों से." उन्होंने बताया कि वैल्यूज को कार्यों पर हावी रखना कितना मुश्किल है और कंपनियों पर दबाव रहता है कि वे महत्वपूर्ण बातों को किनारे कर दें. शर्मा ने AI-सहायता प्राप्त बायोटेररिज्म और AI के इंसानों को 'Less human' बनाने जैसे जोखिमों पर भी काम किया था.दोनों ही एक्सपर्ट ने AI के नियंत्रण से बाहर होने और इंसान के वजूद पर मंडरा रहे खतरे की गंभीर चेतावनी दी।  

  • महिला आरक्षण बिल पर बड़ा अपडेट, नवरात्रि में संसद का स्पेशल सेशन बुलाने की तैयारी?

    महिला आरक्षण बिल पर बड़ा अपडेट, नवरात्रि में संसद का स्पेशल सेशन बुलाने की तैयारी?

     नई दिल्ली
    सरकार ने संसद का विशेष सत्र बुलाने का विकल्प फिलहाल खुला रखा है. संसद के मॉनसून सत्र का सत्रावसान नहीं किया था. ऐसे में अटकलें लगाई जा रही थीं कि सरकार विशेष सत्र बुला सकती है लेकिन अब तक सरकार की तरफ से विशेष सत्र को लेकर कोई भी आधिकारिक बयान नहीं आया है। 

    सूत्रों की मानें तो सरकार BRICS समिट के बाद विशेष सत्र को लेकर फैसला कर सकती है. BRICS के बाद सरकार यह तय करेगी कि महिला आरक्षण और परिसीमन बिल को पारित कराने के लिए विशेष सत्र बुलाया जाए या नहीं. अगर सरकार तय करती है कि विशेष सत्र नहीं बुलाना है तो मॉनसून सत्र का सत्रावसान कर दिया जाएगा लेकिन अगर सरकार विशेष सत्र बुलाने का फैसला करती है तो नवरात्रि के दौरान सत्र बुलाया जा सकता है। 

    जयराम रमेश ने उठाए सवाल
    कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने X पर पोस्ट करते हुए इस पर सवाल भी उठाए हैं. उनका कहना है कि मॉनसून सत्र को खत्म हुए 29 दिन हो चुके हैं लेकिन सत्रावसान नहीं किया गया। 

    उन्होंने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि यह सरकार अपना ही रिकॉर्ड तोड़ रही है. उन्होंने इसे बेवकूफी बताते हुए कहा है कि सरकार सोच रही है कि इससे विपक्ष घबरा जाएगा लेकिन असल में ऐसा बिल्कुल नहीं है।  

    संसद के मॉनसून सत्र में दोनों सदनों के कामकाज हंगामे के चलते भेंट चढ़ गया. संसद में अगर रोज़ाना छह घंटे की संसदीय कार्यवाही मानी जाए, तो 15 दिनों में 90 घंटे का काम होना चाहिए था. हालांकि, लोकसभा में इस सत्र में केवल 15 घंटे 36 मिनट ही काम हो सका है जबकि राज्यसभा में 15 दिनों में 24 घंटे 21 मिनट काम हुआ, जिसमें हर बिल को पास करने में औसतन लगभग एक घंटा लगा. इसके बाद से ही विशेष सत्र बुलाए जाने को लेकर अटकलें लगाई जा रही थी। 

  • मोदी ने पुतिन को भेंट की तिरुक्कुरल की रूसी प्रति, तमिल संस्कृति के इस दस्तावेज की खूब हुई चर्चा

    मोदी ने पुतिन को भेंट की तिरुक्कुरल की रूसी प्रति, तमिल संस्कृति के इस दस्तावेज की खूब हुई चर्चा

    नई दिल्ली

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत दौरे पर आए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की है। इस दौरान पीएम मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन को तमिल कवि और दार्शनिक तिरुवल्लूर की क्लासिक किताब 'तिरुक्कुरल' का रूसी अनुवाद भेंट किया है। तमिलनाडु के शुरुआती संगम साहित्य में अहम स्थान रखने वाली तिरुक्कुरल की रचना करीब 2000 साल पहले हुई थी। यह नैतिक साहित्य पाठकों को जीवन, मृत्यु और जिंदगी के अनेक पहलुओं के बारे में सीख देती है।'सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ क्लासिकल' तमिल द्वारा प्रकाशित इस किताब में तमिल कवि और दार्शनिक तिरुवल्लूर के छंदों का मूल तमिल टेक्स्ट और रूसी अनुवाद शामिल है। बता दें, इस किताब का अनुवाद दुनिया की तमाम भाषाओं में हो चुका है।

    इस दौरान पीएम मोदी ने पुतिन को तमिल संत तिरुवल्लुवर की पुस्तक तिरुक्कुरल का रूसी अनुवाद भेंट किया. पीएम मोदी ने पुतिन को ये पुस्तक भेंट करते हुए इसके बारे में जानकारी दीं और कहा कि हमारे सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ाने में इस पुस्तक की भूमिका रहेगी। 

    पीएम मोदी ने पुतिन को ये पुस्तक भेंट करते हुए कहा कि संत तिरुवल्लुवर ने इस किताब में मानव जीव की अनेक विशेषताओं को बतलाया है. इसी किताब का रूसी भाषा में ट्रांसलेशन हुआ है. मुझे विश्वास है कि ये किताब जन संपर्क बढ़ाने और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में काम करेगी। 

    तिरुक्कुरल (Thirukkural) तमिल साहित्य की सबसे महान और विश्व प्रसिद्ध रचनाओं में से एक है. इसे 'तमिल वेद' भी कहा जाता है. इस पुस्तक का रूसी समेत कई भाषाओं में अनुवाद हो चुका है. इस किताब को 2000 साल पहले लिखा गया है। 

    तिरुक्कुरल दुनिया भर में मशहूर कवि तिरुवल्लुवर द्वारा लिखे गए गहरे अर्थ के दोहों वाला एक क्लासिक तमिल साहित्य है। 

    तिरुक्कुरल का दुनिया भर की कई भाषाओं में अनुवाद किया गया है. तिरुक्कुरल तमिल भाषा का एक प्राचीन नैतिक साहित्य है जो पाठकों को जीवन, मृत्यु और इनके बीच की हर चीज़ के बारे में सीख देता है। 

    2,000 साल से भी पहले कवि-दार्शनिक तिरुवल्लुवर द्वारा लिखे गए 133 अध्यायों में मौजूद 1,330 दोहे रोज़मर्रा की ज़िंदगी के लिए सबसे बेहतरीन गाइड में से एक माने जाते हैं. तमिल लोग तिरुवल्लुवर को एक प्राचीन संत, कवि और दार्शनिक के तौर पर बहुत सम्मान देते हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने कई भाषणों में उनका ज़िक्र किया है। 

    तिरुक्कुरल तमिल संस्कृति की पहचान है. तमिलनाडु में इसे स्कूलों में पढ़ाया जाता है और हर घर में सम्मानित स्थान है. महात्मा गांधी, लियो टॉल्स्टॉय जैसे महान व्यक्तित्वों ने इसकी प्रशंसा की है. कन्याकुमारी में तिरुवल्लुवर की विशाल मूर्ति भी इसी सम्मान का प्रतीक है।  

  • देश की फाईनेस्ट पब्लिक ट्रांसपोर्ट मॉडल बनेगी मप्र की सुगम बस सेवा: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    देश की फाईनेस्ट पब्लिक ट्रांसपोर्ट मॉडल बनेगी मप्र की सुगम बस सेवा: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    प्रदेश में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा का मंगल आरंभ 25 सितंबर से: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    2030 के अंत तक प्रदेश के 75 प्रतिशत गांवों तक बसें पहुंचाना हमारा लक्ष्य
    देश की फाईनेस्ट पब्लिक ट्रांसपोर्ट मॉडल बनेगी मप्र की सुगम बस सेवा
    आधुनिक, सुरक्षित, भरोसेमंद, ग्रीन एंड डिजिटल मोबिलिटी वाली बस सेवा बनेगी प्रदेश की पहचान
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर में दो दिवसीय यात्री परिवहन विज़न समिट-2026 का किया शुभारंभ
    सार्वजनिक परिवहन तक आम नागरिकों की पहुँच को अधिक सुगम बनाने के लिए MPYPIL और Rapido के बीच हुआ एमओयू
    भोपाल और इंदौर में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू की जाएगी सेवा
    महिलाओं द्वारा संचालित ‘रैपिडो पिंक’ बाइक-टैक्सी सेवा को दिया जायेगा बढ़ावा
    यात्री परिवहन सेवा में नागरिकों की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए एमपी मोबिलिटी इनोवेशन चैलेंज-2026 का किया शुभारंभ
    स्मार्ट और ग्रीन मोबिलिटी की ओर मध्यप्रदेश के कदम : इंदौर समिट में कनेक्टिविटी और नवाचारों पर हुआ मंथन
    सार्वजनिक परिवहन के आधुनिकीकरण के लिए पीपीपी, आईटीएमएस और आधुनिक अधोसंरचना पर रहेगा फोकस
    प्रदेश में सुरक्षित, सुलभ, किफायती और तकनीक-सक्षम सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मिलेगी नई गति
    मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा से मजबूत होगी ग्रामीण, अंतर्जिला और अंतर्राज्यीय बस कनेक्टिविटी

    इंदौर

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में इसी महीने 25 सितंबर से मुख्यमंत्री सुगम परिवहन बस सेवा का मंगल आरंभ किया जायेगा। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के नागरिकों को सुगम, सरल, सुरक्षित, आधुनिक और भरोसेमंद बस सेवा उपलब्ध कराना हमारा लक्ष्य है और इस लक्ष्य की पूर्ति में हम 25 सितम्बर से नया कदम बढ़ाने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में 5 लाख किलोमीटर का रोड़ नेटवर्क है। यहां 15 हजार से अधिक बसें चलाने का स्कोप है। हमारे नागरिकों के अलावा प्रदेश में हर साल करोड़ों की संख्या में आने वाले पर्यटकों और श्रृद्धालुओं द्वारा भी आवागमन के लिए बस का उपयोग किया जाता है। यह हमारे लिए चुनौती के साथ ही एक बड़ा अवसर भी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निजी बस आपरेटर्स, बस निर्माता कंपनियों, इंडस्ट्री पार्टनर्स और स्टेकहोल्डर्स से अपील करते हुए कहा कि बदलते समय में मप्र में बढ़ते अवसरों को पहचाने और प्रदेश की विकास यात्रा में सहभागी बनने के लिए सरकार के साथ जुड़ें। प्रदेश में यात्रियों के हित में एक ऐसा फाईनेस्ट पब्लिक ट्रांसपोर्ट माडल तैयार करें, जो पूरे देश के लिए एक उदाहरण बने। मुख्यमंत्री डॉ यादव शुक्रवार को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अंतर्गत 'यात्री परिवहन विज़न समिट-2026 के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यात्री परिवहन विज़न समिट-2026 स्मारिका और मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा पुस्तिका का विमोचन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन तक आम नागरिकों की पहुँच को अधिक सुगम बनाने और फर्स्ट और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी के लिए MPYPIL और Rapido के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर कर आदान-प्रदान किया गया। साथ ही मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने MPYPIL की ‘लेट्स क्रिएट ए लोगो’ प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया। सासाराम (बिहार) के सुधाकर कुमार को 5 लाख रुपये राशि के प्रथम पुरस्कार, दिल्ली के चयन वोहरा को 2 लाख रुपये के द्वितीय सांत्वना पुरस्कार और भोपाल की सुगौरांगी शर्मा को 1 लाख रुपये राशि के तृतीय सांत्वना पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया।

    प्रदेश में स्मार्ट, सुरक्षित, समावेशी और भविष्य के लिए तैयार मोबिलिटी इकोसिस्टम के निर्माण में प्रदेश के नागरिकों, शोधकर्ताओं, शैक्षणिक संस्थानों और नवप्रवर्तकों की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रिमोट का बटन दबाकर 'एमपी मोबिलिटी इनोवेशन चैलेंज 2026' का शुभारंभ किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इसके पूर्व सार्वजनिक परिवहन क्षेत्र में नवाचारों और आधुनिक तकनीकों पर केंद्रित विशेष प्रदर्शनी का शुभारंभ और अवलोकन भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का इंदौर के जनप्रतिनिधियों और बस ट्रांसपोर्ट संचालकों ने आत्मीय स्वागत किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश में 14 सितंबर को विघ्नहर्ता भगवान गणेश जी का आगमन होने जा रहा है। स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक ने गणेश स्थापना के माध्यम से देशवासियों को एकजुट किया था। इसी माह 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जन्मदिवस है। उनके नेतृत्व में पहले गुजरात और अब भारत ने विकास के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। उनकी दूरदर्शी सोच से पूरा भारत गौरवान्वित है। मोदी सर्वाधिक समय तक शासन करने वाले देश के इकलौते नेता हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देशभर से नक्सलवाद की समस्या खत्म हुई है। मध्यप्रदेश लाल सलाम को आखिरी सलाम करने वाला देश का पहला राज्य है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश के दो शहरों भोपाल और इंदौर में मेट्रो दौड़ रही है। हमारे एयरपोर्ट विश्वस्तरीय हो गए हैं। लोक जीवन में लोक परिवहन का विशेष महत्व है। आज से 250 साल पहले देवी अहिल्याबाई ने अपनी दूरदृष्टि सोच के साथ मालवा से लेकर काशी और सनातन संस्कृति के चारों धामों में यात्रियों की सुविधा के लिए सभी तरह के प्रबंध किए थे। इंदौर की धरती से उन्होंने अपने संकल्प को आगे बढ़ाया। राज्य सरकार की मुख्यमंत्री सुगम परिवहन बस सेवा की शुरुआत से बाजार में अवसर बढ़ेंगे, जो हमें आगे बढ़ने का मौका देंगे। हमारी सरकार ने सभी वर्गों का ध्यान रखते हुए सुगम परिवहन बस सेवा की योजना तैयार की है। इसमें आधुनिक तकनीक को शामिल करते हुए यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। वहीं, परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों के हितों का भी ध्यान रखा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन से प्रदेश में ई-व्हीकल्स का संचालन प्रारंभ हो रहा है। अब हमारी धरती पर बने इलेक्ट्रिक व्हीकल इंजन देश-दुनिया में सप्लाई हो रहे हैं। आज एक विशेष एमओयू भी किया गया है, जिसके माध्यम से यात्रियों को टू-व्हीलर से सुगम परिवहन बस तक पहुंचने की सुविधा मिलेगी। प्रधानमंत्री मोदी के 12 साल के कार्यकाल में मध्यप्रदेश में सबसे तेज गति से 74 हजार किलोमीटर लंबे राजमार्गों का निर्माण हुआ है। दिल्ली-मुंबई सुपर एक्सप्रेसवे कॉरिडोर मध्यप्रदेश में 8 लेन होकर गुजरता है। मध्यप्रदेश भारत के मध्य में है। यहां से करीब 6 घंटे में दिल्ली और मुंबई पहुंच सकते हैं। आमजन के लिए सार्वजनिक सेवाओं में लोक परिवहन का खास महत्व है। प्रदेशभर में 15 हजार से अधिक बसों और 5 लाख किलोमीटर सड़कों का नेटवर्क तैयार है। हमारी सुगम परिवहन सेवा सभी की जरूरतों को पूरा करेगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में प्रदेश में धार्मिक पर्यटन भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। पहले उज्जैन में प्रतिवर्ष 60 से 70 लाख श्रद्धालु आते थे। अब इनकी संख्या 8 करोड़ से अधिक पहुंच चुकी है। इस वर्ष उज्जैन में 14 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। पर्यटन विभाग के आंकड़े बताते हैं कि अब प्रदेश में प्रतिवर्ष 20 करोड़ से अधिक पर्यटक आ रहे हैं। ऐसे समय में सुगम परिवहन की व्यवस्था हम सभी का दायित्व है। एक राज्य एक बस सेवा से यात्रियों के लिए आवागमन सुगम होगा और प्रदेश के अनेकों युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे। मध्यप्रदेश में दशकों से बंद पड़ी राज्य परिवहन बस सेवा को आज एक संजीवनी मिली है। यह 20 साल में 360 डिग्री बदलाव का अवसर है। सुगम परिवहन बस सेवा यात्रियों, ऑपरेटरों, सरकार और नई तकनीक अपनाने वालों को लाभान्वित करेगी। देशभर में हाईस्पीड ट्रेन, लॉजिस्टिक कॉरिडोर, डेडीकेटेड इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, हाईस्पीड हाईवे का जाल बिछ रहा है। वर्तमान समय में मध्यप्रदेश सरकार भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए तेज गति से आगे बढ़ रही है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर 17 सितंबर से सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत होने जा रही है। जनसेवा का यह अभियान 17 अक्टूबर तक जारी रहेगा और इसी माह 25 सितंबर को प्रदेशवासियों को 'मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा' के जरिए 'प्रदेश की अपनी बस सेवा' की अनुपम सौगात मिलेगी।

    प्रदेश में यात्री परिवहन को आधुनिक, सुलभ और पर्यावरण-अनुकूल बनाने में मील का पत्थर बनेगी यह समिट- मंत्री सिंह

    परिवहन और स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने प्रदेश के नागरिकों को सुरक्षित, सुलभ और तकनीक-सक्षम यात्रा उपलब्ध कराने की राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सार्वजनिक यात्री परिवहन को आधुनिक, सुलभ और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में यह समिट एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने परिवहन के क्रमिक विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि 17वीं सदी की पारंपरिक व्यवस्था और बाद के पेट्रोल-डीजल युग से आगे बढ़कर आज हम ई-बसों के दौर में प्रवेश कर चुके हैं। सरकार का प्राथमिक उद्देश्य प्रदूषण-मुक्त परिवहन के साथ-साथ सुदूर ग्रामीण अंचलों को शहरों से उत्कृष्ट व सुरक्षित सेवाओं के माध्यम से जोड़ना है।

    परिवहन मंत्री सिंह ने कहा कि राज्य सरकार निजी बस संचालकों के साथ सहभागी बनकर एक संगठित और पारदर्शी व्यवस्था विकसित कर रही है। 'मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा' के माध्यम से आधुनिक बस टर्मिनलों का निर्माण, डिजिटल ट्रैकिंग, चालकों-परिचालकों की प्रभावी निगरानी और सड़क सुरक्षा को सुनिश्चित किया जाएगा। वर्ष 2004-05 में पुरानी राज्य परिवहन सेवा बंद होने के बाद, मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में इस नवीन सेवा का संकल्प लिया गया है। इस महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर प्रभावी रूप से क्रियान्वित किया जाएगा।

    इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य में यात्री परिवहन की समस्या को अपनी दूरदृष्टि सोच के साथ समाधान करने का कार्य किया है। इंदौर और मालवा क्षेत्र को सुगम परिवहन बस योजना का लाभ मिलेगा। पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप से निर्मित होने वाला क्लीन और सेफ बस सिस्टम गांवों को शहर से जोड़ेगा। परिवहन में ई-बस के उपयोग से प्रतिवर्ष लगभग 70 हजार टन से अधिक कार्बन उत्सर्जन को रोका जा सकेगा। मध्यप्रदेश में पुन: राज्य परिवहन सेवा की शुरुआत प्रदेश के लिए मील का पत्थर साबित होगी।

    सचिव परिवहन मनीष सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश में सुरक्षित, सुविधाजनक, किफायती और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था विकसित करने की दिशा में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा प्रारंभ की गई है। उन्होंने समिट के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा की आवश्यकता, पृष्ठभूमि, नवीन व्यवस्था के सृजन, व्यवस्था के तीन प्रमुख स्तंभ और संस्थागत संरचना का अपने संबोधन में प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (MPYPIL) की स्थापना कर बस संचालन, ITMS और परिवहन अधोसंरचना को PPP मॉडल पर एकीकृत रूप से विकसित किया जा रहा है। प्रदेश के 55 जिलों का रूट सर्वे किया जा चुका है तथा डेटा आधारित लगभग 150 सिटी, 450 इंटरसिटी और 436 इंटरस्टेट मार्ग विकसित किए जाएंगे। बसों में CCTV, GPS, पैनिक बटन एवं रियल टाइम मॉनिटरिंग के साथ EV और CNG बसों को प्राथमिकता दी जाएगी।

    सचिव सिंह ने कहा कि समिट के माध्यम से बस ऑपरेशन, अधोसंरचना, यात्री सुरक्षा, ग्रीन मोबिलिटी, एकीकृत टिकटिंग और ऑपरेटरों की वित्तीय साध्यता पर विभिन्न हितधारकों के साथ मंथन कर PPP आधारित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग मॉडल और आधुनिक ITMS का रोडमैप तैयार किया जाएगा। हमारा लक्ष्य प्रदेशवासियों को “सही बस, सही मार्ग और सही समय” के अनुरूप विश्वसनीय परिवहन सेवा उपलब्ध कराना है।

    समिट में तकनीकी नवाचारों और निवेश को लेकर उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार साझा किए। यश टेक्नोलॉजी के सीएफओ धर्मेंद्र जैन के कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश उद्योग, तकनीक और रोजगार को आमजन से जोड़ते हुए विकसित मध्यप्रदेश की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2030 तक 75 प्रतिशत विकासखंडों को परिवहन सेवा से जोड़ने का लक्ष्य एक बड़ा विजन है। बसों की संख्या बढ़ने से आमजन को बेहतर परिवहन सुविधा मिलेगी। उन्होंने कहा कि इंदौर यश टेक्नोलॉजी की कर्मभूमि है और कंपनी इस दिशा में राज्य सरकार के साथ सहयोग के लिए हमेशा तैयार है।

    एका मोबिलिटी, पुणे के संस्थापक एवं अध्यक्ष सुधीर मेहता ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव का प्रदेश में सुगम परिवहन सेवा उपलब्ध कराने का विजन प्रशंसनीय है और इसी दिशा में यात्री परिवहन विजन समिट का आयोजन महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने बताया कि एका मोबिलिटी द्वारा मध्यप्रदेश में चौथे प्लांट के रूप में पीथमपुर में इलेक्ट्रिक बस निर्माण का संयंत्र स्थापित किया जा रहा है, जिसका कार्य मात्र 14 माह में पूर्ण किया गया है। इस संयंत्र की वार्षिक उत्पादन क्षमता 5 हजार ई-बसों की होगी, जो प्रदेश के औद्योगिक इकोसिस्टम को मजबूत करने के साथ सुगम एवं आधुनिक परिवहन व्यवस्था के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    ऑल इंडिया बस एंड कार कम्फेडरेशन के प्रेसिडेंट प्रसन्ना पटवर्धन ने कहा कि हमारा बस परिवहन सिस्टम प्रतिदिन देशभर में 40 करोड़ लोगों को गंतव्य तक पहुंचाता है। यह अन्य सभी परिवहन सेवाओं से कहीं अधिक है। मध्यप्रदेश बस परिवहन सेवा में पीपीपी मॉडल का नवाचार करने वाला पहला राज्य है। इसे बस यात्रियों को अत्याधुनिक और तकनीक आधारित सुगम सुविधाएं मिलेगी।

    इस अवसर पर जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, इंदौर के सांसद शंकर लालवानी, पूर्व मंत्री और वर्तमान विधायक सुऊषा ठाकुर,  श्रीमती मालिनी गौड़, महेंद्र हार्डिया, मधु वर्मा, रमेश मेंदोला, राकेश शुक्ला और एलेट्स टेक्नोमीडिया के सीईओ और संपादक प्रमुख डॉ. रवि गुप्ता सहित बड़ी संख्या में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के प्रतिनिधि, ई-बस और बड़े वाहन निर्माता, सॉफ्टवेयर कंपनियां व आईटीएमएस  एजेंसियां, वित्तीय संस्थान, ऊर्जा कंपनियां और निजी बस संचालक जैसे प्रमुख हितधारक शामिल हुए।

    प्रदेश में सुरक्षित, विश्वसनीय, किफायती एवं प्रौद्योगिकी-सक्षम सार्वजनिक परिवहन प्रणाली के विकास पर विचार-विमर्श के लिए यात्री परिवहन विजन समिट 2026

    मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के विजन को प्रस्तुत करने और मध्य प्रदेश में सुरक्षित, विश्वसनीय, किफायती एवं प्रौद्योगिकी-सक्षम सार्वजनिक परिवहन प्रणाली के विकास पर विचार-विमर्श करने के लिए 11-12 सितंबर 2026, दो दिवसीय राज्य स्तरीय समिट का आयोजन किया गया है। इसमें 2,000 से अधिक प्रतिनिधि और 100 प्रमुख उद्योग विशेषज्ञ भाग लें रहे है, जिनमें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के प्रतिनिधि, ई-बस और बड़े वाहन निर्माता, सॉफ्टवेयर कंपनियां व आईटीएमएस   एजेंसियां, वित्तीय संस्थान, ऊर्जा कंपनियाँ और निजी बस संचालक जैसे प्रमुख हितधारक शामिल हैं।

    समिट का प्राथमिक उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन का आधुनिकीकरण कर ग्रामीण, अंतरज़िला एवं अंतरराज्यीय कनेक्टिविटी को मजबूत बनाना है। साथ ही डिजिटल टिकटिंग व रियल-टाइम पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम के माध्यम से यात्री अनुभव को बेहतर बनाना है। यह संपूर्ण व्यवस्था 'मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा' के तीन प्रमुख स्तंभों पर केंद्रित है। जिसमें सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के माध्यम से प्रभावी बस संचालन, इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस ) द्वारा सेवाओं की तकनीक-आधारित निगरानी व प्रबंधन और आधुनिक बस टर्मिनल, बस स्टैंड, डिपो एवं स्टॉप सहित अन्य जरूरी  अधोसंरचना का विकास शामिल है।

    इस पहल से राज्य में एक एकीकृत और तकनीक-सक्षम सार्वजनिक परिवहन इकोसिस्टम का निर्माण होगा, जिससे नागरिकों को सुरक्षित, सुलभ और सुविधाजनक यात्रा का अनुभव मिलेगा। इससे ग्रामीण, क्षेत्रीय एवं ज़िला स्तरीय संपर्क व्यवस्था सुदृढ़ होगी तथा संपूर्ण परिवहन संचालन अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनेगा। इसके साथ ही, डिजिटल मोबिलिटी सेवाओं के विस्तार और आधुनिक, यात्री-अनुकूल अवसंरचना के विकास को नई गति मिलेगी। पर्यावरण-अनुकूल स्वच्छ परिवहन तकनीकों को बढ़ावा देने के साथ-साथ यह व्यवस्था सरकार, उद्योग और निजी क्षेत्र के हितधारकों के बीच एक मजबूत एवं प्रभावी साझेदारी भी स्थापित करेगी।

    यात्री परिवहन विज़न समिट 2026 स्मारिका

    यात्री परिवहन विज़न समिट 2026 स्मारिका प्रदेश में एक कनेक्टेड, तकनीक-सक्षम, सतत और भविष्य के लिए तैयार यात्री परिवहन तंत्र के निर्माण के लिए एक महत्वपूर्ण ज्ञान दस्तावेज़ और नीतिगत रोडमैप प्रस्तुत करती है। इसमें जनप्रतिनिधियों, शासन और उद्योग जगत के वरिष्ठ नेतृत्व के प्रेरक विचार एवं साक्षात्कार संकलित किए गए हैं।

    मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा पुस्तिका

    ‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा पुस्तिका’ इस महत्वाकांक्षी पहल की रूपरेखा और भावी कार्ययोजना को रेखांकित करती है। पुस्तिका में योजना के तीन मुख्य स्तंभों—पीपीपी मॉडल के तहत पेशेवर बस संचालन, इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस ) तथा आधुनिक परिवहन अधोसंरचना के विकास को प्रमुखता से शामिल किया गया है। इसके अलावा, मध्य प्रदेश यात्री परिवहन और अधोसंरचना लिमिटेड (MPYPIL), सात क्षेत्रीय सहायक कंपनियों और ज़िला स्तरीय समितियों पर आधारित त्रि-स्तरीय प्रशासनिक ढांचे को समझाया गया है। इसके साथ-साथ डेटा-आधारित रूट प्लानिंग, रियल-टाइम बस ट्रैकिंग, डिजिटल टिकटिंग, यात्री सुरक्षा और स्वच्छ मोबिलिटी तकनीकों के विस्तृत प्रावधानों को इसमें स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया गया है।

    MPYPIL की ‘लेट्स क्रिएट ए लोगो’ प्रतियोगिता के विजेताओं को किया गया सम्मानित

    मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (MPYPIL) के प्रतीक चिन्ह (लोगो) के निर्धारण के लिए राष्ट्रीय स्तर पर ‘लेट्स क्रिएट ए लोगो’ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। देशभर के क्रिएटिव डिजाइनर्स, विद्यार्थियों, फ्रीलांसरों और प्रोफेशनल एजेंसियों से मिली कुल 135 प्रविष्टियों का परीक्षण कर तीन सर्वश्रेष्ठ डिजाइनों का चयन किया गया। प्रतियोगिता में सासाराम (बिहार) के सुधाकर कुमार ने 5 लाख रुपये का प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया। वहीं, दिल्ली के चयन वोहरा को 2 लाख रुपये के द्वितीय पुरस्कार और भोपाल की सुगौरांगी शर्मा को 1 लाख रुपये के तृतीय पुरस्कार के लिए चुना गया।

    सार्वजनिक परिवहन तक आम नागरिकों की पहुँच को अधिक सुगम बनाने के लिए MPYPIL और Rapido के बीच एमओयू

    प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन तक आम नागरिकों की पहुँच को अधिक सुगम बनाने और फर्स्ट तथा लास्ट-माइल कनेक्टिविटी को मजबूत करने के उद्देश्य से MPYPIL और ‘रैपिडो’ के बीच एक महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते के तहत बस स्टैंड, बस स्टॉप और मेट्रो स्टेशनों जैसे प्रमुख परिवहन केंद्रों की जानकारी रैपिडो के तकनीकी प्लेटफॉर्म से एकीकृत की जाएगी। इस साझेदारी में समावेशी मोबिलिटी को प्राथमिकता देते हुए महिलाओं द्वारा संचालित ‘रैपिडो पिंक’ बाइक-टैक्सी सेवा को भी बढ़ावा दिया जाएगा। इस एकीकृत व्यवस्था को प्रारंभिक चरण में भोपाल और इंदौर में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया जाएगा, जो राज्य में एक आधुनिक और यात्री-अनुकूल मोबिलिटी इकोसिस्टम स्थापित करने में मददगार साबित होगी।

    एमपी मोबिलिटी इनोवेशन चैलेंज 2026 का किया शुभारंभ

    ‘एमपी मोबिलिटी इनोवेशन चैलेंज 2026’ का उद्देश्य राज्य की वास्तविक परिवहन चुनौतियों के समाधान के लिए नवीन पद्धतियों व तकनीकों की पहचान करना और धरातल पर लागू करना है। यह कार्यक्रम मुख्य रूप से पाँच प्रमुख क्षेत्रों एआई एवं डेटा-आधारित इंटेलिजेंट मोबिलिटी, वित्तीय व परिचालन स्थिरता, समावेशी मोबिलिटी, अवसंरचना एवं लास्ट-माइल कनेक्टिविटी, तथा ग्रीन मोबिलिटी पर केंद्रित है। यह पहल स्टार्टअप्स, एमएसएमई, शोधकर्ताओं, शैक्षणिक संस्थानों और नवप्रवर्तकों को एक सशक्त मंच प्रदान करेगी, जिससे प्रदेश में एक अधिक स्मार्ट, सुरक्षित, समावेशी और भविष्य के लिए तैयार मोबिलिटी इकोसिस्टम का निर्माण सुनिश्चित किया जा सके। 

  • योगी सरकार का बड़ा फैसला! यूपी की 681 प्रमुख सड़कें होंगी गड्ढामुक्त, त्योहारों से पहले शुरू होगी कवायद

    योगी सरकार का बड़ा फैसला! यूपी की 681 प्रमुख सड़कें होंगी गड्ढामुक्त, त्योहारों से पहले शुरू होगी कवायद

     लखनऊ
    यूपी में बारिश और बाढ़ के कारण खराब हुई सड़कों को लेकर योगी सरकार ने अब तेजी से काम करने की तैयारी शुरू कर दी है. आगामी त्योहारों को देखते हुए प्रदेश के 681 महत्वपूर्ण मार्ग चिन्हित किए गए हैं. इन सड़कों को प्राथमिकता के आधार पर गड्ढामुक्त और आवागमन के लिए बेहतर बनाया जाएगा। 

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को लोक निर्माण विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिया कि बारिश से क्षतिग्रस्त सड़कों को तत्काल ठीक कर मोटरेबल बनाया जाए. उन्होंने साफ कहा कि अभी बरसात पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, इसलिए जहां तत्काल मरम्मत जरूरी है, वहां काम किया जाए और बारिश समाप्त होने के बाद जरूरत के मुताबिक सड़क का स्थायी नवीनीकरण कराया जाए. मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि गड्ढामुक्ति अभियान सिर्फ गड्ढों में पैचवर्क करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए. सड़क की वास्तविक स्थिति का आकलन करके जरूरत के अनुसार मरम्मत और नवीनीकरण की कार्रवाई की जाए। 

    त्योहारों से पहले 681 मार्गों पर खास नजर

    आने वाले दिनों में प्रदेश में लगातार पर्व-त्योहार हैं. गणेश चतुर्थी, विश्वकर्मा पूजा, नवरात्रि, दीपावली, छठ पूजा और कार्तिक पूर्णिमा जैसे पर्वों के दौरान बड़ी संख्या में लोग एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते हैं. इसी को देखते हुए सरकार ने 681 महत्वपूर्ण मार्गों की पहचान की है. इन मार्गों पर त्योहारों से पहले जरूरी मरम्मत और नवीनीकरण का काम पूरा कराने पर जोर दिया जा रहा है. इन सड़कों पर भीड़ और वाहनों की आवाजाही अधिक रहने की संभावना है. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि पर्वों के दौरान लोगों को खराब सड़कों के कारण परेशानी नहीं होनी चाहिए। 

    बारिश अभी जारी, इसलिए दो स्तर पर होगा काम
    अधिकारियों का कहना है कि सरकार के सामने फिलहाल एक चुनौती यह भी है कि प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश अभी जारी है. ऐसे में किसी सड़क की पूरी तरह स्थायी मरम्मत करना हर जगह संभव नहीं है. इसी वजह से मुख्यमंत्री ने दो स्तर पर काम करने को कहा है. पहले चरण में बारिश से खराब सड़क को तुरंत आवागमन योग्य बनाया जाएगा. जहां गड्ढे हैं या सड़क का हिस्सा टूट गया है, वहां जरूरी मरम्मत की जाएगी. दूसरे चरण में बरसात समाप्त होने के बाद सड़क की स्थिति का दोबारा आकलन किया जाएगा. जहां ज्यादा नुकसान हुआ है, वहां स्थायी नवीनीकरण कराया जाएगा. इससे फिलहाल लोगों को आने-जाने में राहत मिलेगी और बाद में सड़क को स्थायी रूप से बेहतर किया जा सकेगा। 

    सिर्फ बारिश से ही नहीं टूटीं सड़कें
    समीक्षा बैठक में यह भी सामने आया कि प्रदेश में सड़कों के खराब होने की वजह केवल बारिश और बाढ़ नहीं है. कई जगह एक्सप्रेसवे, राष्ट्रीय राजमार्ग, रेलवे और दूसरी निर्माणाधीन परियोजनाओं के चलते भारी वाहनों की आवाजाही बढ़ी है. लगातार भारी वाहनों के चलने से भी कई सड़कों को नुकसान पहुंचा है. अब ऐसे मार्गों का विभागवार सर्वे कराया जा रहा है. सर्वे में जिन सड़कों को क्षतिग्रस्त पाया जाएगा, उन्हें चिन्हित करके संबंधित विभाग के लिए गड्ढामुक्ति का लक्ष्य तय किया जाएगा। 

    9 विभागों की 4.36 लाख किमी सड़कों की समीक्षा
    बैठक में प्रदेश के नौ विभागों के अधीन आने वाली सड़कों की स्थिति की समीक्षा की गई. अधिकारियों के मुताबिक इन विभागों के अधीन करीब 4.36 लाख किलोमीटर सड़कें हैं. मौजूदा गड्ढामुक्ति अभियान के तहत करीब 50 हजार किलोमीटर मार्गों को बेहतर बनाने का लक्ष्य रखा गया है. अब तक करीब 5,751 किलोमीटर सड़कों पर गड्ढामुक्ति का काम पूरा होने की जानकारी बैठक में दी गई. बाकी सड़कों पर भी काम चल रहा है. इसके साथ ही बारिश और अन्य कारणों से क्षतिग्रस्त हुए नए मार्गों का सर्वे पूरा होने के बाद विभागवार लक्ष्य को अंतिम रूप दिया जाएगा। 

    30 हजार किमी सड़क के नवीनीकरण का लक्ष्य
    सरकार ने सिर्फ गड्ढे भरने का लक्ष्य नहीं रखा है. जहां सड़क की स्थिति ज्यादा खराब है, वहां नवीनीकरण और विशेष मरम्मत भी कराई जाएगी. बैठक में बताया गया कि करीब 30 हजार किलोमीटर सड़कों के नवीनीकरण का लक्ष्य रखा गया है. इसमें अब तक करीब 14 हजार किलोमीटर पर काम होने की जानकारी दी गई. इसी तरह करीब 5 हजार किलोमीटर मार्गों पर विशेष मरम्मत का लक्ष्य है. अब तक करीब 700 किलोमीटर पर विशेष मरम्मत का काम पूरा होने की बात कही गई। 

    स्कूल-अस्पताल वाली सड़कें पहले ठीक होंगी
    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि सड़क सुधार के लिए प्राथमिकता तय करते समय केवल सड़क की लंबाई नहीं देखी जाए, बल्कि वहां लोगों की जरूरत को भी ध्यान में रखा जाए. उन्होंने शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों, मुख्य बाजारों, सरकारी कार्यालयों और अधिक आवाजाही वाले स्थानों तक पहुंचने वाली सड़कों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए. इसका मतलब साफ है कि जिस सड़क से रोजाना बड़ी संख्या में छात्र, मरीज, कर्मचारी और आम लोग गुजरते हैं, वहां मरम्मत का काम पहले कराया जाएगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी से सीधे जुड़ी है. इसलिए इसकी खराब स्थिति का असर सीधे लोगों पर पड़ता है. सड़कों की मरम्मत को लेकर अक्सर गुणवत्ता पर सवाल उठते रहे हैं. इसे देखते हुए मुख्यमंत्री ने काम में तेजी के साथ गुणवत्ता का भी ध्यान रखने को कहा. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सड़क की मरम्मत सिर्फ औपचारिकता के लिए न हो. जहां पैचवर्क से काम चल सकता है वहां उसे किया जाए, लेकिन जहां सड़क का व्यापक नवीनीकरण जरूरी है वहां स्थायी समाधान किया जाए. बारिश खत्म होने के बाद सड़कों की वास्तविक स्थिति के अनुसार आगे की कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए हैं। 

    सभी विभाग मिलकर करेंगे काम
    सड़कें केवल लोक निर्माण विभाग के अधीन नहीं हैं. अलग-अलग क्षेत्रों में अलग विभागों की सड़कें हैं. ऐसे में मुख्यमंत्री ने सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया. बैठक में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, मंडी परिषद, पंचायती राज, सिंचाई, ग्राम्य विकास, नगर विकास, आवास एवं शहरी नियोजन तथा अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग की कार्ययोजनाओं की भी समीक्षा की गई। 

  • शराब की बिक्री पर रोक से भड़का हाईकोर्ट! गणेश पूजा के दौरान प्रतिबंध पर कोर्ट ने कही बड़ी बात

    शराब की बिक्री पर रोक से भड़का हाईकोर्ट! गणेश पूजा के दौरान प्रतिबंध पर कोर्ट ने कही बड़ी बात

     पुणे

    महाराष्ट्र में गणेश उत्सव की धूम रहती है। 10 दिनों तक चलने वाले इस पूजा के दौरान पुणे के जिला प्रशासन ने शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया। जब यह मामला बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंचा तो जज ने जिला प्रशासन के इस फैसले की कड़ी आलोचना की। कोर्ट ने सख्त लहजे में पूछा कि सिर्फ एक जिले को ही क्यों चुना गया, जबकि मुंबई सहित महाराष्ट्र के किसी भी जिले में ऐसी कोई पाबंदी नहीं है। कोर्ट ने कहा कि प्रशासन को यह आदेश वापस ले लेना चाहिए वरना कोर्ट को दखल देना पड़ेगा।

    आपको बता दें कि जिला प्रशासन के इस फैसले के खिलाफ होटल मालिकों और शराब की दुकान के मालिकों के संगठनों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमसी त्रिपाठी और जस्टिस अद्वैत सेठना की बेंच ने कहा कि जिन्हें शराब बेचने का लाइसेंस प्राप्त है उन्हें 10 दिनों तक अपना कारोबार करने से रोकने के लिए कहना पूरी तरह से मनमाना है।

    सिर्फ एक जिले में क्यों बैन
    इन याचिकाओं में पुणे कलेक्टर के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें 14 सितंबर से शुरू होने वाले गणेश उत्सव के दौरान 10 दिनों तक शराब की बिक्री पर रोक लगाई गई थी। बेंच ने कहा, "सिर्फ पुणे को चुनने के पीछे क्या तर्क है? हम ऐसी प्रथा की निंदा करते हैं। यह पुणे के लोगों के लिए एक कलंक है। आप क्या दिखाना चाह रहे हैं कि सिर्फ पुणे के लोग ही शराब पीने के बाद बुरा व्यवहार करते हैं? आप पूरे राज्य में से सिर्फ एक जिला चुन रहे हैं।"

    अस्पताल में भर जाएंगे शराबी
    कोर्ट ने पुणे कलेक्टर की ओर से पेश वकील से कहा कि वे कोर्ट को बताएं कि क्या यह आदेश वापस लिया जाएगा, वरना कोर्ट उचित आदेश पारित करेगा। हल्के-फुल्के अंदाज में कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसी पाबंदी से शराब की लत वाले लोगों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। चीफ जस्टिस त्रिपाठी ने मजाकिया लहजे में कहा, "अगर उन्हें 10 दिनों तक शराब नहीं मिली तो वे अस्पतालों में भर जाएंगे।"