Category: उत्तर प्रदेश

  • योगी का बड़ा दावा: यूपी में 6 महीने में 1 लाख नियुक्तियां, हर सप्ताह युवाओं को मिलेंगे सरकारी नौकरी के पत्र

    योगी का बड़ा दावा: यूपी में 6 महीने में 1 लाख नियुक्तियां, हर सप्ताह युवाओं को मिलेंगे सरकारी नौकरी के पत्र

    लखनऊ
    यूपी में विधानसभा चुनाव से पहले एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी मिलेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को खुद इसे लेकर बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि अगले छह महीनों में एक लाख युवाओं को सरकारी नियुक्ति पत्र प्रदान किया जाएगा। यह नियुक्ति पत्र अलग-अलग चरणों में हर सप्ताह प्रदान किए जाएंगे। कहा कि सभी परीक्षाएं पूरी कर ली गई हैं। अब केवल रिजल्ट की प्रक्रिय चल रही है। उन्होंने आयोगों और बोर्ड से कहा कि समयसीमा को औऱ सीमित करे।

    सीएम योगी लखनऊ में 'मिशन रोजगार' के अंतर्गत कृषि विभाग में प्राविधिक सहायकों और राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद में मंडी सचिवों के नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस दौरान 3400 से अधिक अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किया गया।

    सीएम योगी ने कहा कि युवा नौकरी के लिए भटकते हैं तो अच्छा नहीं लगता है। हमने आयोग और बोर्ड की बैठक में भी यह कहा है कि इतनी स्वतंत्रता दे रखी है तो परिणाम भी समय पर लाइए। सीएम योगी ने कहा कि पहले यूपी बोर्ड की परीक्षा तीन महीने में होती थी और तीन महीने रिजल्ट आने में लगते थे। साल में छह महीने तो ऐसे ही बर्बाद होते थे। फिर पर्व त्योहारों के कारण बच्चों को पढ़ाई के तीन महीने भी नहीं मिल पाते थे।

    14 दिन में यूपी बोर्ड परीक्षा और रिजल्ट आ रहा
    पिछली सरकारों खासकर सपा पर हमला करते हुुए कहा कि उस समय सरकार नकल करवाती थी और युवाओं को किसी लायक नहीं छोड़ती थी। अब यूपी बोर्ड की परीक्षाएं 14 दिनों में संपन्न हो रही हैं और अगले 14 दिनों में परीक्षा परिणाम भी घोषित किए जा रहे हैं। यानी एक महीने से भी कम समय में प्रदेश का युवा अपना परिणाम प्राप्त कर देश के किसी भी प्रतिष्ठित संस्थान में एडमिशन ले सकता है।

    पहले चाचा भतीजा वसूली को निकल जाते थे
    सीएम योगी ने कहा कि जब हम योग्यतम युवाओं का चयन करते हैं तो इसका लाभ पूरे प्रदेश को मिलता है। पिछले नौ साल के अंदर हमने नौ लाख तीस हजार से अधिक यूपी के युवाओं को सरकारी नौकरी उपलब्ध कराई है और एक भी नियुक्ति पर प्रश्नचिह्न नहीं लगा है। सपा पर हमला करते हुए कहा कि पहले नियुक्ति का विज्ञापन निकलता था और चाचा भतीजे की जो़ड़ी और पूरा महाभारत खानदान वसूली के लिए प्रदेश भर में निकल पड़ता था

    राजनेताओं की गलती के कारण भटकता था युवा
    सीएम योगी ने कहा कि पहले नौजवान भटकता रहता था। न्यायालय को स्टे करना पड़ता था। युवाओं का समय और उम्र खराब होती थी। लोग युवाओं को गलत मानते थे कि नौकरी नहीं हासिल कर पा रहा है। जबकि गलती युवाओं की नहीं, उस समय के राजनेताओं और भ्रष्ट सिस्टम की होती थी। अब सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत काम कर रही है।

  • 23 से 27 अगस्त तक चल रहे पीयर-लर्निंग इमर्शन कार्यक्रम के अंतर्गत समझे निपुण भारत मिशन के एफएलएन सुधार

    23 से 27 अगस्त तक चल रहे पीयर-लर्निंग इमर्शन कार्यक्रम के अंतर्गत समझे निपुण भारत मिशन के एफएलएन सुधार

    लखनऊ

    उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बुनियादी शिक्षा और बच्चों की सीखने की क्षमता को मजबूत करने के प्रयास अब अंतरराष्ट्रीय पीयर-लर्निंग का विषय बन रहे हैं। निपुण भारत मिशन के अंतर्गत भारत में बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (एफएलएन) सुधारों को समझने के उद्देश्य से केन्या, ब्राजील, अर्जेंटीना, दक्षिण अफ्रीका और सेनेगल के वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों एवं नागरिक समाज के प्रतिनिधियों का लगभग 70 सदस्यीय दल गाजियाबाद पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने परिषदीय विद्यालयों में कक्षा शिक्षण का प्रत्यक्ष अवलोकन कर निपुण भारत की नीतियों के जमीनी क्रियान्वयन को समझा।

    23 से 27 अगस्त तक चल रहे सप्ताहभर के पीयर-लर्निंग इमर्शन कार्यक्रम के अंतर्गत प्रतिनिधिमंडल को छोटे-छोटे समूहों में विभाजित कर गाजियाबाद के नगर, राजापुर, लोनी और मुरादनगर ब्लॉकों के 11 विद्यालयों का भ्रमण कराया गया। प्रतिनिधियों ने कक्षा-कक्ष में शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया देखी तथा विद्यार्थियों, शिक्षकों, प्रधानाचार्यों, अकादमिक रिसोर्स पर्सन्स (एआरपी) और राज्य संसाधन समूह के अधिकारियों से संवाद किया।

    गाजियाबाद के परिषदीय विद्यालयों में पांच देशों के प्रतिनिधियों का यह अध्ययन दौरा उत्तर प्रदेश में निपुण भारत मिशन के अंतर्गत एफएलएन सुधारों को नीति से कक्षा तक पहुंचाने की प्रक्रिया को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साझा सीख का अवसर प्रदान कर रहा है।

    यह है उद्देश्य

    कार्यक्रम का उद्देश्य भारत में निपुण भारत मिशन के अंतर्गत एफएलएन सुधारों को समझना और अनुभव साझा करना है। गाजियाबाद के विद्यालयों में कक्षा शिक्षण के प्रत्यक्ष अवलोकन और शिक्षा अधिकारियों के साथ तकनीकी संवाद के माध्यम से प्रतिनिधियों ने एफएलएन सुधारों के जमीनी क्रियान्वयन को करीब से समझा।

    शिक्षा विभाग के साथ हुई तकनीकी चर्चा
    विद्यालयों के दौरे के बाद उत्तर प्रदेश शिक्षा विभाग के साथ विस्तृत तकनीकी चर्चा हुई। इसमें गाजियाबाद के जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी, बेसिक शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी और राज्य संसाधन समूह के सदस्य शामिल हुए। चर्चा में पाठ्यक्रम एवं अध्ययन उद्देश्यों, संरचित शिक्षण-अधिगम सामग्री, शिक्षक मार्गदर्शन एवं मेंटरिंग, आकलन और आंकड़ों के उपयोग पर विचार-विमर्श हुआ। साथ ही सुधारों को बड़े स्तर पर लागू करने में मिडिल टीयर की भूमिका पर भी चर्चा की गई।

    नीति से कक्षा तक की प्रक्रिया को समझा
    विद्यालय भ्रमण के दौरान प्रतिनिधियों ने यह जाना कि निपुण भारत मिशन के अंतर्गत तैयार नीतियों और एफएलएन सुधारों को कक्षा स्तर पर किस तरह लागू किया जा रहा है। विद्यार्थियों और शिक्षकों से सीधे संवाद के माध्यम से शिक्षण प्रक्रिया, अकादमिक सहयोग और बच्चों की सीख से जुड़े अनुभवों को समझा गया।

    ज्ञात हो कि लाइटहाउस इंडिया इमर्शन कार्यक्रम की मेजबानी सेंट्रल स्क्वेयर फाउंडेशन कर रहा है। यह भारत की एंकर लाइटहाउस संस्था है। कार्यक्रम में सेंट्रो लेमन और लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन का सहयोग प्राप्त है तथा ग्लोबल स्कूल फोरम, ऑप्टिमा और गेट्स फाउंडेशन द्वारा इसका वित्तपोषण किया जा रहा है।

  • उत्तर प्रदेश में 9 साल में 9.30 लाख से अधिक युवाओं को मिली सरकारी नौकरीः सीएम योगी

    उत्तर प्रदेश में 9 साल में 9.30 लाख से अधिक युवाओं को मिली सरकारी नौकरीः सीएम योगी

    छह महीने के अंदर एक लाख युवाओं को देंगे सरकारी नौकरी: मुख्यमंत्री

    कृषि विभाग में चयनित 3446 प्राविधिक सहायकों (ग्रुप-सी) व 126 मंडी सचिवों को सीएम योगी आदित्यनाथ ने सौंपे नियुक्ति पत्र 

    उत्तर प्रदेश में 9 साल में 9.30 लाख से अधिक युवाओं को मिली सरकारी नौकरीः सीएम योगी

    जापान, जर्मनी, इजराइल समेत अनेक देश दे रहे यूपी के युवाओं को नौकरीः मुख्यमंत्री

    सीएम ने कहा- 2017 के पहले खेतों से मोटर चोरी कराते थे सरकार के लोग, अब चोरी की तो अंजाम भुगतना पड़ेगा

    लखनऊ, 
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार ने 9 साल में 9.30 लाख से अधिक युवाओं को पारदर्शी ढंग से बिना भेदभाव सरकारी नौकरियां दी हैं। यूपी में कभी एक लाख नौकरियां कल्पना होती थी, लेकिन हम छह महीने के भीतर एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी का नियुक्ति पत्र देने जा रहे हैं। रिजल्ट की प्रक्रिया चल रही है। मुख्यमंत्री मंगलवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में मिशन रोजगार के तहत उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा कृषि विभाग में नवचयनित 3446 प्राविधिक सहायकों (ग्रुप-सी) व 126 मंडी सचिवों को नियुक्ति पत्र सौंपने के उपरांत युवाओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने नवचयनितों से कहा कि सरकार ने पारदर्शी नियुक्ति दी है तो आप भी इसका लाभ प्रदेश, भावी पीढ़ी और देश को दें। कर्तव्य का ईमानदारी से निर्वहन ही ‘नेशन फर्स्ट’ की थ्योरी है।

    सीएम ने थपथपाई आयोग की पीठ
    सीएम ने कहा कि हमारे आयोग व बोर्ड पारदर्शी नियुक्ति प्रक्रिया से बिना भेदभाव, आरक्षण नियमों का पालन करते हुए योग्य अभ्यर्थियों को मेरिट के अनुसार सफलतापूर्वक नियुक्ति पत्र दिला रहे हैं। यह प्रशंसनीय है। योग्यतम अभ्यर्थियों के चयन से उनकी ऊर्जा का लाभ पूरे प्रदेश को मिलता है। 

    अधियाचन के छह महीने में परिणाम दें
    सीएम ने आयोग व बोर्डों के अधिकारियों से कहा कि आपके कार्यों में सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं है। यदि हमने स्वतंत्रता दी है तो समय से परिणाम लाइए। अधियाचन जाने के बाद परिणाम आने में छह महीने से अधिक नहीं लगना चाहिए। एक महीने के अंदर विज्ञापन और अगले दो महीने के अंदर परीक्षा कराएं। प्रक्रिया को सहज-सरल बनाएं, जिससे युवा अपनी ऊर्जा का लाभ दे सके। जब हम युवा ऊर्जा को साथ लेकर चलते हैं तो परिणाम आते हैं। 

    मुख्यमंत्री योगी के हाथों 24 नवचयनित अभ्यर्थियों को मिला नियुक्ति पत्र 

     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुख्य समारोह में मंच पर 24 नवचयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किया। इनमें से प्राविधिक सहायक (ग्रुप-सी) के 19 व मंडी सचिव पद पर चयनित 5 अभ्यर्थियों को सीएम के हाथों नियुक्ति पत्र मिला। 

    नाम-     तैनाती स्थल
    कनिष्का वर्मा- अयोध्या 
    रविप्रकाश सिंह- अयोध्या
    अनीश निषाद-आजमगढ़
    लवकुश यादव- लखीमपुर खीरी
    दिशा सिंह- अयोध्या 
    भावना श्रीवास्तव- प्रयागराज
    अमित कुमार मौर्य-गोंडा
    जूही वर्मा- अयोध्या
    अविनाश सिंह- फतेहपुर
    मो. अफरोज- जालौन 
    ज्ञानवी तिवारी-गोंडा
    प्रगति सिंह- मीरजापुर 
    प्रज्ञा रस्तोगी- मथुरा
    पवनेश कुमार-कौशांबी
    शुभम कुमार-प्रयागराज
    उपासना-गोरखपुर 
    मधुमिता सिंह- गोरखपुर
    अक्षिता सिंह-लखनऊ

    ज्योतिका मिश्रा-लखनऊ

    मंडी सचिव पद पर नवचयनित पांच अभ्यर्थियों को मिला नियुक्ति पत्र
    शिवशंकर चौधरी
    विनोद कुमार
    महिमा मौर्या
    खुशनुमा
    रवि माहौर

    9 साल में 9.30 लाख से अधिक युवाओं को मिली सरकारी नौकरी
    सीएम ने 9 साल में पारदर्शी नियुक्तियों को डबल इंजन सरकार की उपलब्धि बताते हुए कहा कि इस दौरान सरकार ने 9.30 लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी उपलब्ध कराई है। किसी भी नियुक्ति पर कोई प्रश्न नहीं खड़ा कर सकता। 2017 से पहले तो विज्ञापन निकलते ही चाचा-भतीजे की जोड़ी और महाभारत का खानदान वसूली करने निकल पड़ता था। युवा भटकता था, लेकिन परिणाम नहीं आता था। अंततः माननीय न्यायालय को स्टे करना पड़ता था। युवाओं का समय और उम्र खराब होती थी। नौकरी न पाने वाले युवाओं को लोग किसी काम का नहीं मानते थे, लेकिन गलती युवा की नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र में बैठे राजनेताओं, आयोगों व बोर्डों में बैठे बेईमान लोगों की होती थी। हमारी सरकार ने कहा था कि नकल माफिया की कमर तोड़ेंगे और उनके आकाओं को भी जमीन दिखाएंगे। हम लोगों ने माफिया की संपत्ति जब्त कराकर उनसे वसूली कराई। 

    नौजवानों की दुश्मन थी पिछली सरकार
    सीएम ने 2017 से पहले यूपी बोर्ड की परीक्षा की दुर्दशा भी बताई और कहा कि तीन महीने परीक्षा और तीन महीने परिणाम आने में लगते थे। फिर अगले तीन महीने त्योहारों के बीच प्रवेश प्रक्रिया चलती थी। बच्चों को पढ़ाई के लिए तीन महीने भी नहीं मिल पाते थे। नौजवानों की दुश्मन सपा सरकार नकल करवाती थी और नौजवानों को किसी लायक नहीं छोड़ती थी। 

    एक महीने में परीक्षा व परिणाम नहीं देने वाले कुर्सी छोड़ें 
    मुख्यमंत्री ने बताया कि 2017 में सीएम बनने के बाद मैंने माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अधिकारियों से कहा कि परीक्षा व परिणाम एक महीने में दो। जवाब नकारात्मक मिला तो मैंने कहा कि तुम कुर्सी छोड़ो, मैं एक महीने के अंदर यह कराऊंगा। आज यूपी बोर्ड के 56 लाख अभ्यर्थियों की परीक्षा 14 दिन में होती है और अगले 14 दिन में परिणाम आता है। पहले फरवरी से शुरू हुई परीक्षा जून में लू-तपती गर्मी तक चलती थी। अब नकलविहीन परीक्षा और समय से परिणाम आ रहे हैं। विश्वविद्यालयों को भी सुधार लाने का निर्देश दिया गया है। शिक्षण संस्थान बच्चों की स्किलिंग, करियर, रोजगार के लिए भी खुद को तैयार करें।

    युवाओं की उपेक्षा कर विकास नहीं कर सकती सरकार
    सीएम ने कहा कि इन 9.30 लाख युवाओं ने डेमोग्राफिक डिविडेंड के रूप में यूपी को लाभान्वित किया है। यूपी की अर्थव्यवस्था व प्रतिव्यक्ति आय को तीन गुना करने में योगदान दिया है। पिछली सरकारें युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करती थीं। बंदरबांट कर पैसे के बल पर नौकरी देती थीं, लेकिन आज युवाओं के चेहरे की खुशी बता रही है कि बिना किसी लेनदेन, सिफारिश के उनके सपनों को उड़ान मिल रही है। युवा यूपी को बीमारू राज्य से उबारकर टॉप-3 राज्य बनाने में सफल हुए हैं। कोई सरकार युवाओं की उपेक्षा करके न विकास कर सकती और न ही परिणाम ला सकती है। 

    यूपी के युवाओं को दुनिया दे रही नौकरी
    सीएम ने कहा कि 2017 के पहले यहां कोई नहीं आता था, लेकिन दुनिया आज यूपी के नौजवानों को मांग रही है। उन्होंने विगत दिनों यूपी में आए जापान के प्रतिनिधिमंडल का भी जिक्र किया। कहा कि 240 सदस्यों का इतना बड़ा दल पहली बार भारत आया। इसमें बड़े नेता, अधिकारी, इडस्ट्री-बिजनेस लीडर्स शामिल थे। वे यूपी के युवाओं को जापान में नौकरी देना चाहते हैं। जर्मनी, इजराइल भी यूपी के नौजवानों को नौकरी देते हैं। इजराइल में यूपी के 5000 नौजवान गए, वहां डेढ़ लाख रुपये प्राप्त करते हैं। घर पर भी पैसा भेज रहे हैं। उनके रहने-खाने की भी व्यवस्था है। इजराइल जब युद्ध लड़ रहा था, तब भी यूपी के युवा वहां काम कर रहे थे। 

    2017 के पहले खेतों से मोटर चोरी कराते थे सरकार के लोग
    सीएम ने कहा कि 2017 से पहले किसान खेत में जाने से डरता था। उसकी मोटर चोरी हो जाती थी, लेकिन अब कोई मोटर चोरी नहीं करता, क्योंकि पता है कि ऐसा करने पर अंजाम भुगतना पड़ेगा। 2017 के पहले सरकार के लोग ही मोटर चोरी कराते थे। सीएम ने 2017 के पहले बिजली क्षेत्र की दुर्दशा का भी जिक्र करते हुए बताया कि यूपी के किसानों को सर्वाधिक (10 घंटे) बिजली मिलती है। 16 लाख से अधिक निजी ट्यूबवेल का 3000 करोड़ रुपये का बिजली बिल भी सरकार ने माफ किया। अब इसका भुगतान प्रदेश सरकार करती है। पहली बार यूपी में किसान को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का लाभ मिला है।

    जिस चीनी मिल का स्क्रैप 10 करोड़ में बिकता, उसे 3 करोड़ में बेच दिया 
    सीएम ने 2017 से पहले गन्ना किसानों की तबाही बयान की और बताया कि 2009 से चीनी मिलों पर बकाया था। 2007 से 2017 के बीच सपा-बसपा सरकारों ने 29 चीनी मिलों को बंद किया था और 21 को औने-पौने दाम पर बेच दिया था। गोरखपुर मंडल की एक चीनी मिल मात्र तीन करोड़ रुपये में बेची गई थी, जबकि उसका स्क्रैप ही 10 करोड़ में बिकता। उस जमीन की कीमत आज 1000 करोड़ रुपये है। बतौर सांसद मैंने आंदोलन किया और माफिया की चलने न दी। तत्कालीन सरकारें चीनी मिलों को बंद करती थीं। आज 122 मिलें चल रही हैं।

    30 फीसदी तक पहुंचा सकते हैं कृषि विकास दर
    सीएम ने कहा कि यूपी जितना सामर्थ्य किसी के पास नहीं है। यूपी ने कृषि विकास दर 8 फीसदी से बढ़ाकर 18 फीसदी किया। अब इसे और आगे बढ़ाते हुए 30 फीसदी तक पहुंचा सकते हैं। इसके लिए अच्छी क्वालिटी के बीज उपलब्ध कराने होंगे। चौधरी चरण सिंह सीड पार्क काम काम लखनऊ में प्रारंभ हो रहा है। अब 3.25 लाख करोड़ रुपये किसानों के खाते में भेजे जा चुके हैं। सीएम ने किसानों के लिए चलाई जा रही योजनाओं का भी जिक्र किया। 

    किसानों के लिए 2014-15 में आया पैसा हमने 2017 में बांटा 
    सीएम ने कहा कि 2014-15 में हुदहुद साइक्लोन आया था, जिससे असमय अतिवृष्टि, अनावृष्टि, अत्यधिक बारिश से वर्ष भर का फसल चक्र बिगड़ा था। उस समय केंद्र सरकार ने आपदा राहत से पैसा उपलब्ध कराया था। यह पैसा 2017 तक नहीं बंट पाया था। मुख्यमंत्री बनने के बाद हमने किसानों को वह पैसा बांटा। अब मानव-वन्यजीव संघर्ष, सर्पदंश, आकाशीय बिजली की चपेट में आने पर किसान, बटाईदार व परिवार वालों को 24 घंटे के भीतर 5 लाख की सहायता देते हैं। अतिवृष्टि-अनावृष्टि खेत का नुकसान हुआ है तो फसल बीमा का पैसा बाद में मिलेगा, लेकिन आपदा राहत का पैसा किसान को तत्काल दिलाते हैं।

    हमारी सरकार ने सिंचाई के दायरे को भी बढ़ाया
    सीएम ने कहा कि 2017 के पहले किसान सरकार के एजेंडे में ही नहीं था, लेकिन हमारी सरकार ने सिंचाई के दायरे को भी बढ़ाया। 2018 में बाणसागर परियोजना पूरी की। इससे ढाई लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिल रही है। अर्जुन सहायक परियोजना के जरिए महोबा से बांदा तक सिंचाई सुविधा को बढ़ाया। 1972 में बनी सरयू राष्ट्रीय नहर परियोजना 2021 में पूरी हुई। इससे बहराइच से गोरखपुर तक 9-10 जनपदों को 14 लाख हेक्टेयर भूमि को अतिरिक्त सिंचाई की सुविधा मिल रही है। 

    अच्छे कार्यों से किसानों के मन में जगह बनाइए
    सीएम ने नवनियुक्त मंडी सचिवों से कहा कि मंडियों को चमकाइए। वह साफ-सुथरी हों, कचरे का निस्तारण व रंगरोगन हो। किसानों को बुनियादी सुविधाएं, सम्मान मिले, मंडी समिति की सड़कों का समय से निर्माण हो। शेड अच्छे व प्रभावी हों। किसान की उपज की खरीद व एमएसपी देने की उचित व्यवस्था हो। मंडी को ई-नाम से जोड़ने की कार्रवाई को बढ़ाइए। किसानों को वैल्यू एडिशन, ड्रिप एरिगेशन, स्प्रिंकलर प्रणाली, आधुनिक तकनीकों से जोड़ें ताकि उनकी आमदनी बढ़े। आपके अच्छे कार्यों से किसानों के मन में श्रद्धाभाव पैदा होगा। 

    यूपी में चीनी की कोई कमी नहीं
    सीएम ने कहा कि यूपी 140 करोड़ देशवासियों का भी पेट भरने की क्षमता रखता है। यूपी में चीनी की कोई कमी नहीं है। यूपी में एक महीने की कुल खपत 4 लाख टन चीनी है और हमारे पास 28 लाख टन चीनी (7 महीने की चीनी) मौजूद है। 15 अक्टूबर से चीनी मिलें प्रारंभ होगी तो 90 लाख टन चीनी का और उत्पादन हो जाएगा। 

    इस अवसर पर कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, कृषि राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख, प्रमुख सचिव (कृषि) रविंद्र, कृषि निदेशक त्र्यंबक मणि त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।

  • ‘क्रिएटिव विज़न’ के नए अंक का लोकार्पण, डिप्टी सीएम ने टीम के प्रयासों की सराहना की

    ‘क्रिएटिव विज़न’ के नए अंक का लोकार्पण, डिप्टी सीएम ने टीम के प्रयासों की सराहना की

    लखनऊ

     राजधानी लखनऊ के प्रतिष्ठित मर्क्योर होटल में देश की प्रतिष्ठित मासिक पत्रिका ‘क्रिएटिव विज़न’के नए अंक का गरिमापूर्ण विमोचन समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश के माननीय उप मुख्यमंत्री श्री ब्रजेश पाठक रहे। उन्होंने पत्रिका के नए अंक का विमोचन किया और पूरी टीम को शुभकामनाएं दीं।

    इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि ‘क्रिएटिव विज़न’ जिस तरह पत्रकारिता को सामाजिक सरोकारों और रचनात्मक विचारों से जोड़कर आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है, वह सराहनीय है।उन्होंने कहा कि पत्रकारिता केवल खबरों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के मुद्दों को सामने लाने और सकारात्मक बदलाव की दिशा में जनजागरूकता पैदा करने की भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाती है।
    श्री पाठक ने पत्रिका के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा,हम आशा करते हैं कि ‘क्रिएटिव विज़न’ का भविष्य उज्ज्वल हो। पत्रिका समाज और जनसरोकारों से जुड़ी निष्पक्ष एवं सार्थक पत्रकारिता को आगे बढ़ाए और देश-विदेश में उत्तर प्रदेश का नाम रोशन करे।”
    उप मुख्यमंत्री ने उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए ‘क्रिएटिव विज़न’ के संपादक मोहम्मद शबाब की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि किसी भी पत्रिका की पहचान उसकी पूरी टीम की मेहनत, विषयों की गंभीरता और समाज के प्रति उसकी प्रतिबद्धता से बनती है। इस अवसर पर उन्होंने पत्रिका की पूरी टीम को सम्मानित भी किया।

    कार्यक्रम में पत्रकारिता, सामाजिक सरोकार और रचनात्मक लेखन से जुड़े विभिन्न विषयों पर भी चर्चा हुई। उपस्थित अतिथियों ने ‘क्रिएटिव विज़न’ के नए अंक की सराहना करते हुए पत्रिका के निरंतर प्रगति की कामना की।

    इस अवसर पर सुशील विश्वकर्मा, निसार अहमद, राकेश यादव और प्रतीक यादव सहित कई गणमान्य लोग प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

    समारोह ने न केवल ‘क्रिएटिव विज़न’ के नए अंक के प्रकाशन को यादगार बनाया, बल्कि समाज और जनसरोकारों से जुड़ी सकारात्मक पत्रकारिता को आगे बढ़ाने के संकल्प को भी मजबूती दी।

  • बिना इलाज बिल लगाने और गलत लाभार्थी पर कार्रवाई, अनावश्यक इलाज और गुणवत्ता मानकों में कमी पर भी कार्रवाई

    बिना इलाज बिल लगाने और गलत लाभार्थी पर कार्रवाई, अनावश्यक इलाज और गुणवत्ता मानकों में कमी पर भी कार्रवाई

    लखनऊ

     योगी सरकार ने आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना से जुड़े सभी अस्पतालों को योजना के नियमों और आपत्तिजनक कार्यप्रणाली विरोधी दिशानिर्देशों  का पालन अनिवार्य रूप से करने के सख्त निर्देश दिये हैं ताकि लाभार्थियों को बेहतर और पारदर्शी इलाज मिले। ऐसे में सीएम योगी के निर्देश पर स्टेट हेल्थ एजेंसी (साचीज) अस्पतालों को लगातार इन नियमों की जानकारी दे रही है। डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने बताया कि इसके बाद भी नियमों का उल्लंघ करने, लाभार्थी से अवैध वसूली, बिना इलाज के बिल लगाना, गलत लाभार्थी के नाम पर इलाज दर्ज करना, अनावश्यक इलाज या तय मानकों का पालन नहीं करने पर अस्पतालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    साचीज की वेबसाइट पर देखें दिशानिर्देश 

    डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर आयुष्मान योजना से जुड़े अस्पतालों को आपत्तिजनक कार्यप्रणाली विरोधी दिशानिर्देशों की जानकारी दी जा रही है। योगी सरकार का प्रयास है कि अस्पताल पहले से ही नियमों को समझें और अपने स्तर पर कमियों को दूर करें, ताकि मरीजों को परेशानी न हो और योजना में किसी तरह की गड़बड़ी न हो। उन्होंने बताया कि सभी सूचीबद्ध अस्पताल आपत्तिजनक कार्यप्रणाली संबंधी दिशानिर्देश साचीज की आधिकारिक वेबसाइट https://sachis.in/ पर देख और डाउनलोड कर सकते हैं। विभाग की ओर से अस्पतालों को सलाह दी जा रही है कि वे अपने डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ, बिलिंग कर्मचारियों और प्रशासनिक कर्मचारियों को भी इन नियमों की जानकारी दें।

    नियम तोड़ने पर पहली, दूसरी और तीसरी बार अलग कार्रवाई

    लाभार्थी से अवैध नकद भुगतान: पहली बार नियम तोड़ने पर राशि का पूर्ण रिफंड तथा अवैध भुगतान की राशि का पांच गुना दंड, दोबारा उल्लंघन पर क्लेम निरस्तीकरण एवं चिकित्सालय का निलंबन तथा तीसरी बार उल्लंघन पर डी-एम्पैनलमेंट/ब्लैकलिस्टिंग की कार्रवाई की जा सकती है।

    बिना सेवा दिए बिलिंग: पहली बार उल्लंघन पर क्लेम निरस्त करने के साथ क्लेम राशि के पांच गुना तक दंड, दूसरी बार उल्लंघन पर दस गुना तक दंड एवं निलंबन तथा तीसरी बार उल्लंघन पर डी-एम्पैनलमेंट/ब्लैकलिस्टिंग का प्रावधान है।

    अपकोडिंग, अनबंडलिंग एवं अनावश्यक प्रक्रियाएं: पहली बार उल्लंघन पर अतिरिक्त क्लेम राशि के दस गुना तक तथा दूसरी बार उल्लंघन पर बीस गुना तक दंड एवं निलंबन की कार्रवाई की जा सकती है। तीसरी बार उल्लंघन पर डी-एम्पैनलमेंट/ब्लैकलिस्टिंग का प्रावधान है।

    गलत लाभार्थी पहचान: पहली बार उल्लंघन पर पांच गुना तक तथा दूसरी बार उल्लंघन पर दस गुना तक दंड एवं निलंबन की कार्रवाई हो सकती है। तीसरी बार उल्लंघन पर डी-एम्पैनलमेंट/ब्लैकलिस्टिंग की कार्रवाई की जा सकती है।

    गुणवत्ता एवं सेवा मानकों में कमी: न्यूनतम एम्पैनलमेंट, गुणवत्ता एवं निर्धारित सेवा मानकों में कमी पाए जाने पर कारण बताओ नोटिस जारी कर निर्धारित अवधि में सुधार एवं अनुपालन का अवसर दिया जाएगा। निर्धारित अवधि में सुधार न होने पर क्लेम निरस्तीकरण, तीन गुना तक दंड एवं निलंबन की कार्रवाई की जा सकती है। दूसरी बार उल्लंघन पर संबंधित स्वीकृत क्लेम्स पर पांच गुना तक दंड एवं सत्यापन तक निलंबन तथा तीसरी बार उल्लंघन पर डी-एम्पैनलमेंट एवं संबंधित स्वीकृत क्लेम्स पर पांच गुना तक दंड का प्रावधान है।

    चिकित्सालयों के लिए महत्वपूर्ण संदेश 

    साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने सभी सूचीबद्ध चिकित्सालयों से आपत्तिजनक कार्यप्रणाली विरोधी दिशानिर्देशों को केवल औपचारिक निर्देश के रूप में न लेते हुए, इसे अपने दैनिक कार्यप्रणाली का हिस्सा बनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक चिकित्सालय अपने स्तर पर यह सुनिश्चित करें कि चिकित्सकीय, नर्सिंग, बिलिंग एवं प्रशासनिक स्टाफ को योजना के सभी नियमों और दंडात्मक प्रावधानों की स्पष्ट जानकारी हो। चिकित्सालयों को सलाह दी गई है कि वे नियमित रूप से अपने क्लेम, उपचार प्रक्रिया, दस्तावेजीकरण एवं लाभार्थी सेवाओं की आंतरिक समीक्षा करें और किसी भी संभावित अनियमितता को समय रहते ठीक करें। लाभार्थी से अवैध राशि लेना, बिना उपचार के क्लेम करना, अनावश्यक उपचार या प्रक्रियाएं करना, गलत लाभार्थी के नाम पर उपचार दर्ज करना अथवा योजना के मानकों का उल्लंघन न केवल योजना के नियमों के विरुद्ध है, बल्कि इसके लिए निर्धारित दंडात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।

  • आरक्षण से लेकर महिला सशक्तीकरण तक, अभ्यर्थियों ने की योगी सरकार की तारीफ

    आरक्षण से लेकर महिला सशक्तीकरण तक, अभ्यर्थियों ने की योगी सरकार की तारीफ

    लखनऊ

    मिशन रोजगार के तहत उत्तर प्रदेश सरकार ने मंगलवार को 3572 युवाओं को बड़ी सौगात दी। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के माध्यम से कृषि विभाग में नवचयनित 3446 प्राविधिक सहायकों (ग्रुप-सी) और 126 मंडी सचिवों को नियुक्ति पत्र वितरित किए। नियुक्ति पत्र पाकर अभ्यर्थियों के चेहरे खुशी से खिल उठे। चयनित युवाओं ने भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता, निष्पक्षता और समयबद्ध तरीके से नियुक्ति पूरी कराने के लिए योगी सरकार की जमकर सराहना की।

    सरकार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में बेहतर काम कर रही

    अम्बेडकर नगर निवासी साधना देवी का चयन कृषि विभाग में प्राविधिक सहायक पद पर हुआ है और उन्हें अयोध्या जिले में तैनाती मिली है। उन्होंने नियुक्ति वितरण कार्यक्रम की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि सरकार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में बेहतर काम कर रही है। मुख्यमंत्री के हाथों नियुक्ति पत्र मिलना उनके लिए खुशी और गर्व का क्षण है। 

    दो महीने के भीतर नियुक्ति पत्र मिलना सरकार की तेजी और कार्यप्रणाली को दर्शाता 
    बस्ती निवासी महिपाल सिंह का चयन कृषि प्राविधिक सहायक पद पर हुआ है और उनकी पोस्टिंग बाराबंकी में हुई है। महिपाल ने वर्तमान सरकार में चयन प्रक्रिया पहले की अपेक्षा अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित हुई है। उन्होंने कहा कि 23 जून को परिणाम आने के करीब दो महीने के भीतर नियुक्ति पत्र मिलना सरकार की तेजी और कार्यप्रणाली को दर्शाता है। 

    भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की दिशा में बेहतर प्रयास

    रायबरेली निवासी राणा प्रताप सिंह का चयन कृषि प्राविधिक सहायक पद पर हुआ है और उनकी नियुक्ति अमेठी में हुई है। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी तरीके से संपन्न हुई। वर्तमान सरकार में पारदर्शिता बढ़ी है और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की दिशा में बेहतर प्रयास हो रहे हैं। मुख्यमंत्री के हाथों नियुक्ति पत्र मिलना उनके लिए गौरव का विषय है।

    आरक्षण नियमों का हुआ पूरी तरह पालन

    बाराबंकी की महिमा मौर्या का चयन मंडी सचिव पद पर हुआ है। उन्होंने भर्ती प्रक्रिया को निष्पक्ष बताते हुए कहा कि आरक्षण के नियमों का पूरी तरह पालन किया गया। महिमा ने कहा कि सीटों में किसी तरह की हेरफेर नहीं हुई और महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों पर नियमानुसार चयन हुआ। वहीं प्राविधिक सहायक पद पर चयनित ज्ञानवी तिवारी ने योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति की प्रशंसा करते हुए कहा कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रही और महिलाओं को भी बड़ी संख्या में अवसर मिल रहे हैं। निष्पक्ष भर्ती से युवाओं में सरकार के प्रति भरोसा मजबूत हुआ है।

    नई जिम्मेदारी पूरी निष्ठा से निभाएंगी

    रामपुर की खुशनुमा का चयन मंडी सचिव ग्रेड-2 पद पर हुआ है। खुशनुमा ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में युवाओं के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराने का काम हुआ है। नियुक्तियों की पारदर्शिता और महिला सशक्तीकरण के लिए सरकार के प्रयासों की सराहना की। सीएम के संबोधन में कही गई बातों को अपने कार्यक्षेत्र में धरातल पर उतारने का पूरा प्रयास करेंगी और नई जिम्मेदारी पूरी निष्ठा से निभाएंगी।

    योगी सरकार की सराहना, युवाओं से मेहनत की अपील

    प्राविधिक सहायक (ग्रुप-सी) पद पर चयनित पवनेश कुमार ने योगी सरकार की सराहना करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व में भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता को प्राथमिकता दी जा रही है। योग्य युवाओं को बिना भेदभाव अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि नियुक्ति मिलना उनके लिए गौरव और खुशी का क्षण है। पवनेश ने युवाओं से अपील की कि वे लक्ष्य तय कर पूरी मेहनत और ईमानदारी से तैयारी करें।

  • बस हादसे में मौत पर अब 7.50 लाख तक की मदद, घायल यात्रियों के लिए भी मदद का प्रावधान

    बस हादसे में मौत पर अब 7.50 लाख तक की मदद, घायल यात्रियों के लिए भी मदद का प्रावधान

    बस दुर्घटना पीड़ितों के लिए आर्थिक सुरक्षा कवच बनी योगी सरकार की ‘यात्री राहत योजना’

    योगी सरकार ने 17.33 करोड़ रुपये की दी आर्थिक सहायता, बस हादसों के पीड़ितों व आश्रितों को मिली मदद

    यात्रियों के साथ राहगीरों को भी राहत, गैर-यात्रियों को भी योजना के साथ जोड़ा गया

    बस हादसे में मौत पर अब 7.50 लाख तक की मदद, घायल यात्रियों के लिए भी मदद का प्रावधान

    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों से होने वाली दुर्घटनाओं में यात्रियों और अन्य प्रभावित लोगों को आर्थिक सहारा देने के लिए संचालित यात्री राहत एवं सुरक्षा योजना पीड़ित परिवारों के लिए बड़ी मदद का माध्यम बनी है। वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2025-26 के बीच मृत्यु और घायल होने के कुल 342 प्रकरणों में 17.33 करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक सहायता दी गई है। योगी सरकार ने यह मदद पीड़ितों और परिवारों को उपलब्ध कराकर उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने के हक की दिशा में गंभीरता से काम किया है।

    योजना के तहत 2017 से पहले उपलब्ध दो वर्षों यानी 2015-16 और 2016-17 में मृत्यु के 8 मामलों में 40 लाख रुपये की सहायता दी गई थी। इसके बाद 2017-18 से 2025-26 तक 9 वर्षों में मृत्यु के 322 मामलों में लगभग 17.08 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। वहीं घायल यात्रियों के 20 प्रकरणों में 24.37 लाख रुपये की सहायता दी गई।

    2017 के बाद बढ़ा सहायता का दायरा और भुगतान
    2017-18 से 2025-26 के बीच मृतकों के परिजनों को दी गई सहायता में लगातार बड़े स्तर पर भुगतान दर्ज है। इस अवधि में सबसे अधिक 2019-20 में 78 मृत्यु प्रकरणों में लगभग 3.68 करोड़ रुपये, 2021-22 में 48 प्रकरणों में लगभग 2.37 करोड़ रुपये की सहायता दी गई। वहीं 2017-18 में 42 प्रकरणों में करीब 2.10 करोड़ रुपये, 2023-24 में 32 प्रकरणों में 1.85 करोड़ रुपये और 2025-26 में 27 प्रकरणों में 1.97 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ।

    परिवहन निगम (यूपीएसआरटीसी) के वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं कि सड़क दुर्घटना में जान गंवाने या घायल होने वाले लोगों के परिवारों को तत्काल आर्थिक राहत उपलब्ध कराने के लिए सरकार व परिवहन निगम की योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। हमारा प्रयास शुरू से यह भी रहा है कि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जाए। इसके लिए ड्राइवरों, कर्मचारियों से लेकर बसों के बेड़ों तक सभी की नियमित निगरानी की जा रही है।

    वयस्क यात्री की मृत्यु पर अब 7.50 लाख रुपये
    योजना के नए प्रावधानों में मृत्यु की स्थिति में राहत राशि बढ़ाई गई है। वयस्क यात्री की मृत्यु पर 7.50 लाख रुपये, आधा टिकट लेने वाले बच्चे की मृत्यु पर 3.75 लाख रुपये और परिवहन निगम के नियमों के तहत निःशुल्क यात्रा करने वाले छोटे बच्चे की मृत्यु पर लगभग 1.87 लाख रुपये की राहत राशि निर्धारित है। इससे दुर्घटना में परिवार के कमाने वाले सदस्य की मृत्यु होने पर आश्रित परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिलती है।

    गंभीर रूप से घायल यात्रियों को भी राहत
    दुर्घटना में घायल होने वाले यात्रियों के लिए भी योजना में राहत का प्रावधान है। सामान्य रूप से घायल होने पर उपचार के लिए 10 हजार रुपये तक और गंभीर रूप से घायल होने पर 25 हजार रुपये तक की अग्रिम राहत संबंधित अधिकारी द्वारा उपलब्ध कराई जा सकती है। वहीं प्रारंभिक राहत के बाद भी घायल यात्री के उपचार पर इससे अधिक खर्च आता है, तो चिकित्सकीय उपचार के प्रमाणित बिलों और संबंधित मुख्य चिकित्सा अधिकारी की ओर से जारी स्वास्थ्य लाभ प्रमाणपत्र के आधार पर आगे की प्रक्रिया की जाती है।

    योजना के मूल प्रावधानों में गंभीरता के आधार पर घायल यात्री के लिए अधिकतम राहत की सीमा भी निर्धारित की गई है। सामान्य चोट के लिए अधिकतम 25 हजार रुपये, गंभीर चोट के लिए एक लाख रुपये और अति गंभीर चोट/शरीर के 50 प्रतिशत से अधिक जलने जैसी स्थिति में 2.50 लाख रुपये तक सहायता का प्रावधान है।

    बस में सवार नहीं होने वाले पीड़ितों को भी मदद
    यात्री राहत योजना को और व्यापक बनाते के लिए अप्रैल 2026 में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। इसके तहत ऐसे राहगीर/शहरी व्यक्ति, जो निगम की बस में यात्रा नहीं कर रहे हों, लेकिन निगम की बस या अनुबंधित बस से दुर्घटना में घायल या मृत हो जाते हैं, उन्हें भी योजना के दायरे में लाया गया है।

    ऐसे व्यक्ति की मृत्यु होने पर 5 लाख रुपये तक, गंभीर रूप से घायल होने पर 2.50 लाख रुपये तक भुगतान का प्रावधान किया गया है। हालांकि, पुलिस रिपोर्ट और परिवहन निगम के जांच अधिकारी की रिपोर्ट में यदि दुर्घटना के लिए संबंधित व्यक्ति की लापरवाही सामने आती है, तो योजना के तहत भुगतान नहीं किया जाता।

  • बरेली के 80 वार्डों में QR कोड व्यवस्था, भवनों का रिकॉर्ड होगा डिजिटल

    बरेली के 80 वार्डों में QR कोड व्यवस्था, भवनों का रिकॉर्ड होगा डिजिटल

    लखनऊ
    उत्तर प्रदेश के बरेली शहर के करीब सवा दो लाख भवनों को जल्द ही टैग और भवन क्यूआर कोड से जोड़ा जाएगा। नगर निगम ने 80 वार्डों में अगले चरण से इस व्यवस्था को जमीन पर उतारने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके तहत प्रत्येक भवन को एक विशिष्ट टैग और क्यूआर कोड दिया जाएगा। क्यूआर कोड स्कैन करते ही संबंधित प्रॉपर्टी और उसके मालिक से जुड़ी जानकारी सामने आ सकेगी।

    अपर नगर आयुक्त शशिभूषण राय का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य शहर के भवनों का रिकॉर्ड व्यवस्थित और डिजिटल तरीके से तैयार करने के लिए बनाया गया। इससे किसी भवन से जुड़ी जानकारी जुटाने में कर्मचारियों को आसानी होगी और रिकॉर्ड अपडेट रखने में भी मदद मिलेगी। क्यूआर कोड आधारित व्यवस्था लागू होने के बाद भवनों से जुड़ी नगर निगम की कार्रवाई, शिकायतों और अन्य गतिविधियों की निगरानी आसान हो जाएगी। किसी संपत्ति से संबंधित शिकायत मिलने पर उसके रिकॉर्ड तक तेजी से पहुंच बनाई जा सकेगी। इससे संबंधित विभागों के बीच सूचना साझा करने में भी समय कम लगेगा।

    जनसुविधाओं की मॉनिटरिंग में आएगी तेजी
    नगर निगम की विभिन्न जनसुविधाओं और व्यवस्थाओं की मॉनिटरिंग में भी इस तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकेगा। भवनों का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होने से क्षेत्रवार जानकारी जुटाने और जरूरी कार्रवाई की निगरानी में तेजी आने की उम्मीद है। निगम का मानना है कि इससे शहरी प्रबंधन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।

    पर्वतों की पहचान से सजेगी ग्रेटर बरेली टाउनशिप
    वहीं, ग्रेटर बरेली आवासीय योजना अब सिर्फ आवासीय परियोजना नहीं, बल्कि पर्वतों की थीम पर विकसित होने वाली विशिष्ट टाउनशिप के रूप में आकार ले रही है। योजना के 11 सेक्टरों का नाम देश की प्रमुख पर्वत श्रृंखलाओं,पर्वतों और धार्मिक-सांस्कृतिक महत्व वाले पर्वतीय स्थलों के नाम पर रखा गया है। नामकरण में संबंधित पर्वतों की भौगोलिक स्थिति और दिशा को भी ध्यान में रखा गया है।

    बीडीए उपाध्यक्ष सौम्या पांडेय ने आवासीय और व्यावसायिक योजनाओं को बेहतर तरह से विकसित करने की प्लानिंग पर काम शुरू कर दिया है। ग्रेटर बरेली के सेक्टर-1 से 11 तक हिमाद्रि, शिवालिक, नीलगिरि, सह्याद्रि, विंध्याचल, धौलाधार, मेरु, नंदा देवी, त्रिशूल, केदारगिरि और गोवर्धन एन्क्लेव नाम दिए गए हैं। इस तरह हिमालय से लेकर दक्षिण भारत और ब्रज क्षेत्र तक की पर्वतीय और सांस्कृतिक विरासत को ग्रेटर बरेली की पहचान से जोड़ा गया है।

    मेरु एन्क्लेव होगा योजना का केंद्र
    बीडीए उपाध्यक्ष सौम्या पांडेय ने बताया कि योजना के मध्य स्थित मेरु एन्क्लेव को विशेष महत्व दिया गया है। भारतीय परंपरा में मेरु को केंद्रीय पर्वत के रूप में विशेष स्थान प्राप्त है। इसी क्षेत्र में रुद्रवनम् पार्क विकसित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री के विजन के अनुरूप तैयार किए जा रहे इस पार्क का शिलान्यास भी हो चुका है। पार्क ग्रेटर बरेली के प्रमुख आकर्षणों में शामिल होगा और क्षेत्र को हरित व सांस्कृतिक पहचान देगा। इसी क्षेत्र में एक प्रीमियम आवासीय परिसर भी विकसित किया जा रहा है। इसे जल्द जनता के समक्ष प्रस्तुत कर पंजीकरण के लिए उपलब्ध कराने की तैयारी है।

  • चीनी की कमी नहीं, युवाओं को भी बड़ा तोहफा; योगी बोले- 6 महीने में 1 लाख नियुक्तियां

    चीनी की कमी नहीं, युवाओं को भी बड़ा तोहफा; योगी बोले- 6 महीने में 1 लाख नियुक्तियां

    लखनऊ
    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में चीनी की कमी की खबरों को खारिज करते हुए कहा कि यूपी में पर्याप्त मात्रा में चीनी उपलब्ध है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के पास फिलहाल 28 लाख टन चीनी का स्टॉक है, जो करीब सात महीने के लिए पर्याप्त है। यूपी में एक महीने में चीनी की 4 लाख टन खपत होती है। सीएम ने कहा कि यूपी न सिर्फ अपनी जरूरत पूरी करने में सक्षम है, बल्कि पूरे देश को चीनी उपलब्ध करा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि अक्टूबर में जब फिर से चीनी मिलें चालू होंगी तो करीब 90 लाख टन चीनी का और उत्पादन होगा सीएम योगी मंगलवार को नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। देश के अलग-अलग हिस्सों में चीनी की बढ़ती कीमतों और संभावित संकट की चर्चाओं के बीच सीएम का यह बयान आया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में चीनी की कोई कमी नहीं है और लोगों को किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है।

    छह महीने में एक लाख युवाओं को नियुक्ति पत्र
    मुख्यमंत्री ने कृषि विभाग के 3446 प्राविधिक सहायक (ग्रुप-सी) और मंडी परिषद के 126 नवनियुक्त मंडी सचिवों को नियुक्ति पत्र दिए। उन्होने युवाओं के लिए बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि अगले छह महीने में एक लाख युवाओं को सरकारी नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि अलग-अलग चरणों में हर सप्ताह नियुक्ति पत्र उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। सीएम योगी ने कहा कि उनकी सरकार के कार्यकाल में अब तक 9 लाख 30 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी दी जा चुकी है। उन्होंने दावा किया कि इन नियुक्तियों में पारदर्शिता बरती गई है और किसी नियुक्ति पर सवाल खड़ा नहीं किया जा सकता।

    पुरानी सरकारों पर साधा निशाना
    योगी आदित्यनाथ ने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि 2017 से पहले भर्ती प्रक्रिया में युवाओं को परेशानियों का सामना करना पड़ता था। उन्होंने आरोप लगाया कि भर्ती का विज्ञापन निकलने के बाद कथित तौर पर वसूली का खेल शुरू हो जाता था और भर्ती प्रक्रिया लंबे समय तक अटकी रहती थी। कई मामलों में न्यायालय को हस्तक्षेप करना पड़ता था। उनकी सरकार में योग्य अभ्यर्थियों का बिना भेदभाव चयन किया जा रहा है। इससे युवाओं की प्रतिभा और ऊर्जा का लाभ पूरे प्रदेश को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े नौ वर्षों में पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया उनकी सरकार की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल है।

    नकल माफिया पर कार्रवाई का दावा
    सीएम योगी ने कहा कि भर्ती में देरी या अनियमितता के लिए युवाओं को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। उनके मुताबिक, पहले आयोगों, बोर्डों और सरकारी तंत्र में बैठे भ्रष्ट लोगों के कारण युवाओं को परेशानी होती थी। उन्होंने कहा कि सरकार ने अपराध और अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। उन्होंने कहा कि नकल माफिया और विभिन्न संस्थानों में सक्रिय माफिया के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की गई है। सरकार का लक्ष्य है कि युवाओं को निष्पक्ष और पारदर्शी व्यवस्था में उनकी योग्यता के आधार पर रोजगार के अवसर मिलें।

  • यूपी में नौकरी की बड़ी सौगात! 1 लाख युवाओं को मिलेगा रोजगार, योगी बोले- हर हफ्ते बांटेंगे नियुक्ति पत्र

    यूपी में नौकरी की बड़ी सौगात! 1 लाख युवाओं को मिलेगा रोजगार, योगी बोले- हर हफ्ते बांटेंगे नियुक्ति पत्र

    लखनऊ 

    यूपी में विधानसभा चुनाव से पहले एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी मिलेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को खुद इसे लेकर बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि अगले छह महीनों में एक लाख युवाओं को सरकारी नियुक्ति पत्र प्रदान किया जाएगा। यह नियुक्ति पत्र अलग-अलग चरणों में हर सप्ताह प्रदान किए जाएंगे। कहा कि सभी परीक्षाएं पूरी कर ली गई हैं। अब केवल रिजल्ट की प्रक्रिय चल रही है। उन्होंने आयोगों और बोर्ड से कहा कि समयसीमा को औऱ सीमित करे।

    सीएम योगी लखनऊ में 'मिशन रोजगार' के अंतर्गत कृषि विभाग में प्राविधिक सहायकों और राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद में मंडी सचिवों के नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस दौरान 3400 से अधिक अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किया गया।

    सीएम योगी ने कहा कि युवा नौकरी के लिए भटकते हैं तो अच्छा नहीं लगता है। हमने आयोग और बोर्ड की बैठक में भी यह कहा है कि इतनी स्वतंत्रता दे रखी है तो परिणाम भी समय पर लाइए। सीएम योगी ने कहा कि पहले यूपी बोर्ड की परीक्षा तीन महीने में होती थी और तीन महीने रिजल्ट आने में लगते थे। साल में छह महीने तो ऐसे ही बर्बाद होते थे। फिर पर्व त्योहारों के कारण बच्चों को पढ़ाई के तीन महीने भी नहीं मिल पाते थे।

    पिछली सरकारों खासकर सपा पर हमला करते हुुए कहा कि उस समय सरकार नकल करवाती थी और युवाओं को किसी लायक नहीं छोड़ती थी। अब यूपी बोर्ड की परीक्षाएं 14 दिनों में संपन्न हो रही हैं और अगले 14 दिनों में परीक्षा परिणाम भी घोषित किए जा रहे हैं। यानी एक महीने से भी कम समय में प्रदेश का युवा अपना परिणाम प्राप्त कर देश के किसी भी प्रतिष्ठित संस्थान में एडमिशन ले सकता है।

    पहले चाचा भतीजा वसूली को निकल जाते थे
    सीएम योगी ने कहा कि जब हम योग्यतम युवाओं का चयन करते हैं तो इसका लाभ पूरे प्रदेश को मिलता है। पिछले नौ साल के अंदर हमने नौ लाख तीस हजार से अधिक यूपी के युवाओं को सरकारी नौकरी उपलब्ध कराई है और एक भी नियुक्ति पर प्रश्नचिह्न नहीं लगा है। सपा पर हमला करते हुए कहा कि पहले नियुक्ति का विज्ञापन निकलता था और चाचा भतीजे की जो़ड़ी और पूरा महाभारत खानदान वसूली के लिए प्रदेश भर में निकल पड़ता था।

    राजनेताओं की गलती के कारण भटकता था युवा
    सीएम योगी ने कहा कि पहले नौजवान भटकता रहता था। न्यायालय को स्टे करना पड़ता था। युवाओं का समय और उम्र खराब होती थी। लोग युवाओं को गलत मानते थे कि नौकरी नहीं हासिल कर पा रहा है। जबकि गलती युवाओं की नहीं, उस समय के राजनेताओं और भ्रष्ट सिस्टम की होती थी। अब सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत काम कर रही है।