Category: उत्तर प्रदेश

  • औद्योगिक विकास को रफ्तार: 8 मेगा इकाइयों के लिए प्रोत्साहन प्रस्ताव मंजूर

    औद्योगिक विकास को रफ्तार: 8 मेगा इकाइयों के लिए प्रोत्साहन प्रस्ताव मंजूर

    8 मेगा औद्योगिक इकाइयों को प्रोत्साहन देने की मंजूरी

    2,901 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश को मिलेगा बढ़ावा, प्रदेश में बड़े पैमाने पर औद्योगिक गतिविधियों और रोजगार को गति

    लखनऊ,
    योगी कैबिनेट की बैठक में प्रदेश में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2022 के तहत आठ मेगा श्रेणी की औद्योगिक इकाइयों को लेटर ऑफ कम्फर्ट (एलओसी) जारी किए जाने की संस्तुति को मंजूरी प्रदान कर दी है।

    इन आठ औद्योगिक इकाइयों द्वारा प्रदेश में कुल 2,901.97 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। इन इकाइयों को नीति के तहत नेट एसजीएसटी और पूंजीगत सब्सिडी जैसे प्रोत्साहनों का लाभ मिलेगा।

    मेगा निवेश परियोजनाओं को कैबिनेट की मंजूरी
    उच्च स्तरीय प्राधिकृत समिति (एचएलईसी) की 4 मई 2026 को हुई बैठक में इन औद्योगिक इकाइयों के प्रस्तावों पर विचार कर कैबिनेट से अनुमोदन की संस्तुति की गई थी। अब कैबिनेट ने इन इकाइयों को लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी किए जाने की मंजूरी दे दी है। मंजूरी पाने वाली औद्योगिक इकाइयों में सूर्या ग्लोबल सुपर फ्लैक्सीफिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा गौतमबुद्ध नगर में 605.37 करोड़ रुपये, शाल्विस स्पेशियलिटीज लिमिटेड द्वारा हमीरपुर में 297.30 करोड़ रुपये और साउंड कास्टिंग्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा हाथरस में 225 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। इसी तरह वृन्दावन बॉटलर्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा बाराबंकी में 436.12 करोड़ रुपये, जुआरी (Zuari) एनविएन बायोएनर्जी प्राइवेट बायोएनर्जी लिमिटेड द्वारा लखीमपुर खीरी में 294.72 करोड़ रुपये, पसवारा पेपर्स लिमिटेड द्वारा हाथरस में 315 करोड़ रुपये, सीआरडी फूड्स एंड बेवरेजेज लिमिटेड द्वारा मथुरा में 363.94 करोड़ रुपये और माउंट एवरेस्ट ब्रुअरीज लिमिटेड द्वारा उन्नाव में 363.52 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है।

    निवेशकों को मिलेगा नीति आधारित प्रोत्साहन
    इन परियोजनाओं को उनकी पात्रता के अनुसार नेट एसजीएसटी और पूंजीगत सब्सिडी जैसे प्रोत्साहन दिए जाएंगे। इन प्रोत्साहनों का उद्देश्य प्रदेश में बड़े औद्योगिक निवेश को आकर्षित करने और औद्योगिक इकाइयों को प्रतिस्पर्धी कारोबारी वातावरण उपलब्ध कराना है। इन आठ मेगा परियोजनाओं से प्रदेश में विनिर्माण एवं अन्य औद्योगिक गतिविधियों को विस्तार मिलने की उम्मीद है। निवेश के साथ नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना और संचालन से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है।

    सरकार के इस निर्णय से गौतमबुद्ध नगर, हमीरपुर, हाथरस, बाराबंकी, लखीमपुर खीरी, मथुरा और उन्नाव जैसे जिलों में औद्योगिक गतिविधियों को गति मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर आर्थिक अवसर बढ़ने की उम्मीद है।

  • सीएम योगी की कैबिनेट का बड़ा फैसला, युवाओं के लिए खरीदे जाएंगे 25 लाख टैबलेट

    सीएम योगी की कैबिनेट का बड़ा फैसला, युवाओं के लिए खरीदे जाएंगे 25 लाख टैबलेट

    युवाओं के लिए 25 लाख टैबलेट खरीदने का प्रस्ताव मंजूर

    युवा शक्ति को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने की दिशा में सीएम योगी की अध्यक्षता में कैबिनेट का बड़ा फैसला

    उच्च शिक्षा से लेकर कौशल विकास तक युवाओं को मिलेगा डिजिटल सहारा, पात्र युवाओं को निशुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे टैबलेट

    आईटीआई और कौशल प्रशिक्षण से जुड़े युवाओं को भी लाभ, रोजगार के अवसर होंगे मजबूत

    लखनऊ
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट बैठक में प्रदेश के युवाओं को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से संचालित स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तीकरण योजना के तहत 25 लाख टैबलेट की खरीद के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। योगी सरकार ने टेंडर प्रक्रिया में चयनित संस्थाओं को क्रय आदेश जारी किए जाने की मंजूरी देकर प्रदेश के युवाओं को डिजिटल संसाधनों से जोड़ने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम उठाया है। ये टैबलेट पात्र युवाओं को निशुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे।

    गौरतलब है कि स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तीकरण योजना 5 वर्ष के लिए लागू है। योजना के तहत प्रदेश के युवाओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के लिए आधुनिक टैबलेट उपलब्ध कराए जा रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 में इसके लिए 2,374.60 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। खास बात यह है कि इस योजना से केंद्र सरकार पर कोई अतिरिक्त व्यय भार नहीं पड़ेगा।

    उच्च शिक्षा से लेकर कौशल विकास तक मिलेगा डिजिटल सपोर्ट
    योजना के तहत स्नातक, स्नातकोत्तर, डिप्लोमा, कौशल विकास समेत विभिन्न शिक्षण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों में अध्ययनरत पात्र युवाओं को निशुल्क टैबलेट उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे विद्यार्थी अपने शैक्षिक पाठ्यक्रम को डिजिटल माध्यम से बेहतर ढंग से पूरा कर सकेंगे और तकनीक आधारित अध्ययन की सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। टैबलेट मिलने से युवाओं को सरकारी और गैर-सरकारी योजनाओं, ऑनलाइन प्रशिक्षण, रोजगार एवं स्वरोजगार से जुड़ी सेवाओं तक पहुंच बनाने में भी मदद मिलेगी। योगी सरकार का उद्देश्य केवल युवाओं को उपकरण उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उन्हें तकनीकी रूप से सक्षम बनाकर शिक्षा, रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसरों से जोड़ना है।

    आईटीआई और कौशल प्रशिक्षण से जुड़े युवाओं को भी मिलेगा लाभ
    वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि कैबिनेट के इस निर्णय से उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, स्वास्थ्य शिक्षा, कौशल विकास प्रशिक्षण और आईटीआई से जुड़े पंजीकृत कुशल युवाओं को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने में मदद मिलेगी। डिजिटल संसाधनों तक आसान पहुंच से प्रशिक्षण की गुणवत्ता बेहतर होने के साथ युवाओं की रोजगारपरक दक्षता भी बढ़ेगी। तकनीकी रूप से सक्षम युवा वर्ग रोजगार सृजन और सेवा क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

  • वृद्ध माता-पिता के सम्मान की नई पहल, अधिकारों की रक्षा के लिए नियमों में संशोधन

    वृद्ध माता-पिता के सम्मान की नई पहल, अधिकारों की रक्षा के लिए नियमों में संशोधन

    वृद्ध माता-पिता के सम्मान व अधिकारों की रक्षा के लिए नियमों में संशोधन

    संतान या अन्य आश्रित रिश्तेदार देखभाल न करें तो उन्हें अपनी संपत्ति से बेदखल कर सकते हैं बुजुर्ग

    बुजुर्गों की मदद के लिए योगी सरकार जल्द जारी करेगी टोलफ्री नम्बर

    लखनऊ
     योगी कैबिनेट ने वरिष्ठ नागरिकों के सम्मानजनक जीवन और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए भी बड़ा कदम उठाया है। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि मंत्रिमंडल ने ‘उत्तर प्रदेश माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण नियमावली-2014’ में संशोधन करते हुए नियम 22 में 22क, 22ख और 22ग जोड़ने का निर्णय लिया है।

    नए प्रावधानों के तहत मां-बाप अपने बच्चों को संपत्ति से बेदखल कर सकेंगे। इसके लिए बेदखली की प्रक्रिया भी निर्धारित की गई है। यदि किसी भी वरिष्ठ नागरिक की संतान या उनके अन्य आश्रित रिश्तेदार उनका भरण-पोषण नहीं कर रहे हैं अथवा उनके साथ किसी तरह का दुर्व्यवहार कर रहे हैं तो पीड़ित बुजुर्ग उन्हें अपनी संपत्ति से बेदखल कर सकेंगे।

    वित्त मंत्री ने बताया कि बुजुर्गों को इस व्यवस्था का लाभ आसानी से मिल सके, इसके लिए बेदखली की प्रक्रिया को स्पष्ट और समयबद्ध बनाया गया है। साथ ही, जल्द ही सरकार एक टोल नंबर भी जारी करेगी ताकि यदि कोई वरिष्ठ नागरिक स्वयं जाकर शिकायत करने में सक्षम न हो, तो उसे आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

    नए प्रावधानों के अनुसार ऐसे मामलों में जिला मजिस्ट्रेट के पास शिकायत की जा सकेगी और उन्हें इस प्रकार के सभी मामलों की मासिक रिपोर्ट सरकार को देनी होगी। शिकायतों की सुनवाई 30 दिन के अंदर की जाएगी, ताकि बुजुर्गों को न्याय के लिए लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े।

    सरकार द्वारा किए गए इस बदलाव का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनके अधिकारों की रक्षा करना और उनके साथ होने वाले अत्याचार एवं दुर्व्यवहार में कमी लाना है। साथ ही, यह व्यवस्था परिवार के सदस्यों को अपने वृद्ध माता-पिता की देखभाल और उनके सम्मान के प्रति प्रेरित करेगी।

  • योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला: 60 साल से अधिक उम्र की महिलाओं की बस यात्रा निशुल्क

    योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला: 60 साल से अधिक उम्र की महिलाओं की बस यात्रा निशुल्क

    60 साल से अधिक उम्र की महिलाएं यूपी रोडवेज की बसों में करेंगी निशुल्क यात्रा, योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला

    88 हजार से अधिक महिलाओं को लाभ, हर महीने 22.55 करोड़ का अतिरिक्त व्यय आएगा सरकार पर

    परिवहन निगम की ओर से महिलाओं की सुविधा के लिए उपलब्ध कराए जाएंगे विशेष स्मार्ट कार्ड

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में महिला सशक्तीकरण और उन्हें बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। प्रदेश सरकार ने लोक कल्याण संकल्प-2022 के तहत ‘सशक्त नारी’ के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की सामान्य बसों में निशुल्क यात्रा सुविधा प्रदान करने की घोषणा की है। यह फैसला वरिष्ठ महिलाओं को आर्थिक राहत देने के साथ ही उन्हें आवागमन में अधिक स्वतंत्रता और सुविधा देने वाला कदम साबित होगा।

    योगी सरकार के इस फैसले का लाभ बड़ी संख्या में महिला यात्रियों को मिलेगा। एक अनुमान के मुताबिक प्रतिदिन करीब 88,438 महिला यात्रियों द्वारा इस सुविधा का लाभ उठाया जा सकता है। इससे महिलाओं को प्रतिदिन आने-जाने के खर्च में राहत मिलेगी। विशेष रूप से 60 वर्ष से अधिक उम्र की उन महिलाओं के लिए सार्वजनिक परिवहन अधिक सुलभ होगा, जिन्हें नियमित रूप से विभिन्न कार्यों के लिए यात्रा करनी पड़ती है।

    निगम की ओर से जारी होंगे विशेष स्मार्ट कार्ड
    इस योजना के तहत निशुल्क यात्रा सुविधा को व्यवस्थित तरीके से लागू करने के लिए 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को परिवहन निगम की ओर से विशेष स्मार्ट कार्ड उपलब्ध कराए जाएंगे। स्मार्ट कार्ड के माध्यम से पात्र महिला यात्रियों की पहचान और निशुल्क यात्रा की व्यवस्था को सुगम बनाया जा सकेगा।

    22 करोड़ से ज्यादा हर महीने होंगे खर्च
    इस सुविधा के तहत सरकार पर हर महीने 22.55 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय भार आएगा। योगी सरकार ने इस फैसले के जरिए महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और सुविधा को प्राथमिकता के रूप में दर्शाया है। ‘सशक्त नारी’ के संकल्प को अब परिवहन सेवाओं से भी जोड़ दिया गया है।

  • 16 जिलों में बाढ़ राहत अभियान तेज, प्रभावितों तक पहुंचाई जा रही जरूरी सहायता

    16 जिलों में बाढ़ राहत अभियान तेज, प्रभावितों तक पहुंचाई जा रही जरूरी सहायता

    बाढ़ प्रभावितों तक तेजी से पहुंच रही राहत, 16 जिलों में मदद से जुड़ा अभियान जारी

    योगी सरकार ने बाढ़ में फंसे 14,628 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया, अब तक प्रदेश में नहीं होने पाई कोई जनहानि

    810 मेडिकल टीमें लगातार कर रहीं निगरानी, 536 नाव-मोटरबोट से राहत अभियान को मिली रफ्तार

    75 बाढ़ शरणालयों में 2240 लोगों को मिला आश्रय, 2 लाख से अधिक भोजन के पैकेट वितरित किए गए

    पशुओं के लिए 2345 क्विंटल से अधिक भूसा वितरित हुआ, प्रदेश में 1,618 बाढ़ चौकियां सक्रिय

    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश में बाढ़ की चुनौती के बीच योगी सरकार की मुस्तैदी से राहत और बचाव अभियान लगातार प्रभावी ढंग से जारी है। सरकार की प्राथमिकता बाढ़ प्रभावित लोगों की जान बचाने के साथ उन्हें समय पर भोजन, स्वास्थ्य सुविधाएं और सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराना है। अब तक 14,628 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है और बाढ़ से किसी तरह की जनहानि नहीं हुई है। प्रभावित परिवारों को अब तक 2.04 लाख से अधिक भोजन के पैकेट पहुंचाए गए हैं। इसके साथ ही मेडिकल टीमों की तैनाती, क्लोरीन-ओआरएस का वितरण, पशुओं के लिए भूसे की व्यवस्था कर सरकार ने इंसानों के साथ पशुधन की सुरक्षा का भी पूरा इंतजाम सुनिश्चित किया है।

    राहत आयुक्त कार्यालय की मंगलवार की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश के 16 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं, जबकि अब तक कुल 25 जिले बाढ़ की चपेट में आए हैं। वर्तमान में करीब 1.44 लाख आबादी प्रभावित है, जबकि अब तक प्रभावित कुल आबादी का आंकड़ा 2.19 लाख से अधिक रहा है।

    प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए अब तक प्रदेश में कुल 1,618 बाढ़ चौकियां स्थापित की जा चुकी हैं। इसी तरह स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत रखने के लिए आज 127 मेडिकल टीमें काम कर रही हैं और अब तक कुल 810 मेडिकल टीमें गठित की गई हैं।

    जनहानि और पशुहानि का आंकड़ा शून्य
    राहत आयुक्त कार्यालय के मुताबिक अब तक बाढ़ से जनहानि और पशुहानि का आंकड़ा शून्य है। वहीं, बाढ़ से आज चार और अब तक 208 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। क्षतिग्रस्त मकानों के सापेक्ष आज तीन और अब तक कुल 130 मामलों में सहायता वितरित की जा चुकी है।

    14,628 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया
    राहत अभियान में प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। अब तक 14,628 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। इसके अलावा प्रदेश में कुल 1,281 बाढ़ शरणालय स्थापित किए गए हैं, जिनमें से 75 वर्तमान में संचालित हैं। इन संचालित शरणालयों में 2,240 लोग रह रहे हैं।

    भोजन की व्यवस्था, लाखों पैकेट पहुंचाए
    बाढ़ प्रभावित परिवारों तक भोजन पहुंचाने के लिए राहत एजेंसियों की ओर से लगातार खाद्य सामग्री वितरित की जा रही है। मंगलवार को 4,819 खाद्य पैकेट और 14,962 लंच पैकेट वितरित किए गए। अब तक कुल 39,321 खाद्य पैकेट और 2,04 लाख से अधिक लंच पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। इससे प्रभावित परिवारों को मुश्किल हालात में भोजन की तत्काल उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिल रही है।

    स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए क्लोरीन और ओआरएस का वितरण
    बाढ़ के दौरान जलजनित बीमारियों की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की ओर से साफ-सफाई और स्वास्थ्य सुरक्षा पर भी जोर दिया जा रहा है। मंगलवार को 7,882 क्लोरीन टैबलेट और 2,270 ओआरएस वितरित किए गए। अब तक 1,07,347 क्लोरीन टैबलेट और 45,338 ओआरएस वितरित किए जा चुके हैं। मेडिकल टीमों की तैनाती के साथ यह व्यवस्था प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य संबंधी जोखिम कम करने में सहायक है।

    पशुओं के लिए भी राहत व्यवस्था
    राहत अभियान में प्रभावित परिवारों के साथ
    उनके पशुधन की सुरक्षा को भी शामिल किया गया है। पशुओं के लिए मंगलवार को 1,282.15 क्विंटल भूसा वितरित किया गया, जबकि अब तक कुल 2,345 क्विंटल से अधिक भूसा उपलब्ध कराया जा चुका है।

    536 नाव-मोटरबोट से राहत अभियान को मिली रफ्तार
    बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आवागमन और बचाव कार्य के लिए प्रशासन की ओर से नावों और मोटरबोट का इस्तेमाल किया जा रहा है। वर्तमान में 536 नाव एवं मोटरबोट राहत कार्य में प्रयुक्त हैं, जबकि अब तक कुल 1,028 नाव एवं मोटरबोट का उपयोग किया जा चुका है। इससे जलभराव वाले क्षेत्रों तक राहत दलों और आवश्यक सामग्री की पहुंच आसान हुई है।

  • न्यायिक व्यवस्था के बेहतर प्रबंधन की पहल, कोर्ट मैनेजर्स के लिए नई नियमावली लागू

    न्यायिक व्यवस्था के बेहतर प्रबंधन की पहल, कोर्ट मैनेजर्स के लिए नई नियमावली लागू

    कोर्ट मैनेजर्स के लिए नई नियमावली को कैबिनेट मंजूरी

    कोर्ट मैनेजमेंट को मजबूत करने की योगी सरकार की बड़ी पहल

    लखनऊ
     न्यायालयों के प्रशासनिक एवं प्रबंधकीय ढांचे को और मजबूत करने की दिशा में योगी सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट बैठक में इलाहाबाद हाईकोर्ट और प्रदेश के जनपदीय न्यायालयों में कार्यरत कोर्ट मैनेजर्स की सेवा व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने के लिए ‘द इलाहाबाद हाईकोर्ट (कोर्ट मैनेजर्स सेंट्रलाइज्ड सर्विस) रूल्स, 2026’ के मसौदे को मंजूरी दे दी है।

    सरकार के इस निर्णय से प्रदेश की न्यायिक व्यवस्था में कोर्ट मैनेजर्स को एक अधिक सुसंगठित, स्पष्ट और संस्थागत सेवा ढांचा मिल सकेगा। इससे न्यायालयों के प्रशासनिक कामकाज को गति देने और न्यायिक संस्थानों के प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। यह नियमावली सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 16 मई, 2025 को कोर्ट मैनेजर्स के संबंध में दिए गए निर्देशों के अनुपालन में तैयार की गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देशों एवं निष्कर्षों के आधार पर नियमावली का मसौदा तैयार कर राज्य सरकार को उपलब्ध कराया गया था, जिसे कैबिनेट ने मंजूरी प्रदान कर दी है।

    81 कोर्ट मैनेजर्स की होगी तैनाती, वेतनमान निर्धारित
    नई व्यवस्था के तहत इलाहाबाद हाईकोर्ट तथा प्रदेश के जनपदीय न्यायालयों में कुल 81 कोर्ट मैनेजर्स की तैनाती की जाएगी। इसके साथ ही उनके वेतन एवं सेवा संबंधी ढांचे को भी पुनरीक्षित किया गया है। कोर्ट मैनेजर्स का वेतनमान ₹56,100 से ₹1,77,500 तक निर्धारित किया गया है।

    प्रशासनिक कामकाज को मिलेगा पेशेवर स्वरूप
    कोर्ट मैनेजर्स न्यायालयों के प्रशासनिक और प्रबंधकीय कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इनके माध्यम से न्यायालयों में मानव संसाधन, आधारभूत सुविधाओं, केस-फ्लो मैनेजमेंट, प्रशासनिक समन्वय और अन्य प्रबंधकीय कार्यों की निगरानी एवं बेहतर संचालन में सहायता मिलेगी। इससे न्यायिक अधिकारियों और न्यायाधीशों को प्रशासनिक दायित्वों के भार में राहत मिलेगी।

    न्यायिक व्यवस्था को आधुनिक और प्रभावी बनाने की दिशा में कदम
    योगी सरकार का यह निर्णय प्रदेश में न्यायिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के साथ-साथ कोर्ट मैनेजमेंट को अधिक आधुनिक व परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सेवा नियम स्पष्ट होने से कोर्ट मैनेजर्स की जिम्मेदारियों और सेवा शर्तों में भी एकरूपता आएगी। सरकार के इस फैसले से न केवल सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित होगा, बल्कि हाईकोर्ट और जिला न्यायालयों के प्रशासनिक कामकाज में भी बेहतर समन्वय और दक्षता आने की उम्मीद है। इसका प्रत्यक्ष लाभ न्यायालयों में आने वाले वादकारियों और आम नागरिकों को भी मिल सकेगा।

    नई नियमावली लागू करने से राज्य सरकार पर लगभग 3.97 करोड़ रुपये का वार्षिक अतिरिक्त व्यय भार आने का अनुमान है। सरकार द्वारा इस वित्तीय भार को स्वीकार करते हुए कोर्ट मैनेजर व्यवस्था को संस्थागत रूप देने का निर्णय न्यायालयों के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

  • मेडिकल और डेंटल इंटर्न्स की बल्ले-बल्ले, इंटर्नशिप भत्ता बढ़ाकर किया 25 हजार रुपये

    मेडिकल और डेंटल इंटर्न्स की बल्ले-बल्ले, इंटर्नशिप भत्ता बढ़ाकर किया 25 हजार रुपये

    एमबीबीएस-बीडीएस इंटर्नशिप भत्ता दोगुने से ज्यादा, 12 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपये

    मेडिकल इंटर्न युवा डॉक्टरों को योगी सरकार का तोहफा, 2021 में भी बढ़ाया गया था इंटर्नशिप भत्ता

    लखनऊ
     प्रदेश के राजकीय मेडिकल कालेजों, संस्थानों और चिकित्सा विश्वविद्यालयों से एमबीबीएस व बीडीएस परीक्षा उत्तीर्ण कर रोटेटिंग इंटर्नशिप करने वाले छात्रों को अब हर माह 12 हजार के बजाय 25 हजार रुपये इंटर्नशिप भत्ता मिलेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में भत्ता बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। गौरतलब है कि योगी सरकार ने इससे पहले भी 2021 में यह भत्ता 7,500 से बढ़ाकर 12 हजार रुपये किया था।

    दोगुने से ज्यादा बढ़ाया इंटर्नशिप भत्ता
    अभी इंटर्नशिप के दौरान मेडिकल छात्रों को 12 हजार रुपये प्रतिमाह बतौर भत्ता मिलता है। कैबिनेट ने यह राशि दोगुने से ज्यादा बढ़ाकर 25 हजार रुपये प्रतिमाह किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी देकर इन छात्रों को आर्थिक राहत दी है। इससे प्रदेश के सरकारी चिकित्सा संस्थानों में प्रशिक्षण लेने वाले एमबीबीएस और बीडीएस इंटर्न को प्रोत्साहन मिलेगा।

    ओपीडी व रात्रि ड्यूटी में निभाते हैं महत्वपूर्ण भूमिका
    प्रदेश में एमबीबीएस और बीडीएस परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले छात्रों के लिए रोटेटिंग इंटर्नशिप अनिवार्य है। इंटर्नशिप के दौरान छात्र राजकीय चिकित्सा संस्थानों में मरीजों के उपचार में चिकित्सकीय सहयोग देने के साथ ही आपातकालीन सेवाओं, वार्ड, ओपीडी और रात्रि ड्यूटी में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

  • पर्यावरण अनुकूल सफर की ओर कदम, रोडवेज में जुड़ेंगी 250 इलेक्ट्रिक बसें

    पर्यावरण अनुकूल सफर की ओर कदम, रोडवेज में जुड़ेंगी 250 इलेक्ट्रिक बसें

    250 नई इलेक्ट्रिक बसों से मजबूत होगा रोडवेज का बेड़ा

    लखनऊ
     योगी कैबिनेट ने सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में भी अहम फैसला लिया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के बस बेड़े के सुदृढ़ीकरण के लिए 250 नई वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसों की खरीद प्रस्तावित है। इसके लिए सरकार ने 400 करोड़ रुपये की प्रावधानित धनराशि को मंजूरी देने का निर्णय लिया गया है।

    प्रस्ताव के तहत 50 सीटर 100 बसें और 41 सीटर 150 बसें खरीदी जाएंगी। इन 250 बसों की कुल खरीद पर करीब 425.50 करोड़ रुपये का वित्तीय व्यय संभावित है। सरकार की ओर से उपलब्ध कराई जाने वाली 400 करोड़ रुपये की धनराशि के अतिरिक्त करीब 25.50 करोड़ रुपये का खर्च उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम अपने संसाधनों से वहन करेगा।

    प्रदूषण पर भी लगेगी लगाम
    इस फैसले का एक महत्वपूर्ण पहलू राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करना भी है। सीपीक्यूएम के निर्देशों के अनुसार 1 नवंबर 2026 से दिल्ली में केवल सीएनजी, इलेक्ट्रिक और बीएस-6 वाहनों को प्रवेश की अनुमति होगी। ऐसे में इलेक्ट्रिक बसों के बेड़े का विस्तार उत्तर प्रदेश से दिल्ली आने-जाने वाले सार्वजनिक परिवहन को इन पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप बनाने में मदद करेगा।

    नई इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से प्रदेश के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों के लिए परिवहन सेवाओं को भी बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। इलेक्ट्रिक बसें पर्यावरण के अनुकूल यात्रा सुविधा उपलब्ध कराने के साथ आम यात्रियों को आधुनिक और सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन का विकल्प देंगी।

    लोगों को कई स्तर पर मिलेगा रोजगार
    इसके साथ ही बस बेड़े के विस्तार से चालकों, परिचालकों और तकनीकी रख-रखाव से जुड़े कुशल-अकुशल कर्मियों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है। बसों की संख्या में वृद्धि से ढाबा, रेस्टोरेंट और अन्य यात्री सुविधाओं से जुड़े रोजगार को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।

  • यूपी में 2,606 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्ताव मंजूर, तीन बड़ी कंपनियों को मिला लेटर ऑफ कम्फर्ट

    यूपी में 2,606 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्ताव मंजूर, तीन बड़ी कंपनियों को मिला लेटर ऑफ कम्फर्ट

    यूपी में होगा 2,606 करोड़ रुपये का नया औद्योगिक निवेश

    एग्रिस्टो मासा, कैनपैक इंडिया और सुप्रीम इंडस्ट्रीज को लेटर ऑफ कम्फर्ट की मंजूरी

    फ्रेंच फ्राइज से लेकर एल्युमिनियम बेवरेज कैन और प्लास्टिक बिल्डिंग सॉल्यूशन का होगा उत्पादन

    बिजनौर, उन्नाव और कानपुर देहात में स्थापित होंगी औद्योगिक परियोजनाएं

    लखनऊ

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश में बड़े औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। कैबिनेट ने तीन प्रमुख औद्योगिक इकाइयों को लेटर ऑफ कम्फर्ट (एलओसी) जारी किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है। इन परियोजनाओं के माध्यम से प्रदेश में कुल 2,606.04 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है।

    तीन जिलों में स्थापित होंगी औद्योगिक परियोजनाएं
    कैबिनेट की मंजूरी पाने वाली परियोजनाओं में मेसर्स एग्रिस्टो मासा प्राइवेट लिमिटेड की बिजनौर में, मेसर्स कैनपैक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की उन्नाव में और मेसर्स सुप्रीम इंडस्ट्रीज लिमिटेड की कानपुर देहात में परियोजना शामिल है। इन परियोजनाओं में एफडीआई/ एफसीआई तथा अन्य पात्र श्रेणियों के अंतर्गत नीति आधारित प्रोत्साहन के रूप में लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी किया जाएगा।

    उन्नाव में 1,573 करोड़ रुपये का निवेश
    कैनपैक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा उन्नाव में एल्युमिनियम बेवरेज कैन के विनिर्माण की इकाई स्थापित की जाएगी। परियोजना के लिए 1,573.62 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। यह इकाई यूपीडा के आईएमएलसी इंडस्ट्रियल कॉरिडोर क्षेत्र में करीब 26 हेक्टेयर भूमि पर स्थापित की जाएगी। परियोजना की अनुमानित वार्षिक उत्पादन क्षमता 130 करोड़ यूनिट होगी।

    बिजनौर में बनेगी फ्रेंच फ्राइज की बड़ी यूनिट
    एग्रिस्टो मासा प्राइवेट लिमिटेड अपनी मौजूदा आलू फ्लेक्स उत्पादन गतिविधियों का विस्तार करते हुए फ्रेंच फ्राइज के उत्पादन में प्रवेश करेगी। कंपनी की वर्तमान उत्पादन क्षमता लगभग 7,332 मीट्रिक टन प्रतिवर्ष है, जबकि प्रस्तावित फ्रेंच फ्राइज इकाई की अधिकतम स्थापित क्षमता 75,000 मीट्रिक टन प्रतिवर्ष होगी। इस परियोजना में 794.27 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है।

    कानपुर देहात में सुप्रीम इंडस्ट्रीज का निवेश
    सुप्रीम इंडस्ट्रीज लिमिटेड द्वारा कानपुर देहात में 238.15 करोड़ रुपये के निवेश से वैल्यू एडेड प्लास्टिक बिल्डिंग सॉल्यूशन उत्पादों का विनिर्माण किया जाएगा। वर्ष 1942 में स्थापित सुप्रीम इंडस्ट्रीज भारत के प्रमुख प्लास्टिक प्रोसेसिंग समूहों में शामिल है। कंपनी देशभर में आधुनिक तकनीक और उन्नत विनिर्माण सुविधाओं से युक्त 28 संयंत्र संचालित करती है।

    औद्योगिक विकास के साथ रोजगार के अवसर बढ़ेंगे

    तीनों परियोजनाओं के धरातल पर उतरने से प्रदेश में विनिर्माण क्षेत्र को मजबूती मिलने के साथ निवेश और रोजगार के नए अवसर सृजित होने की उम्मीद है। बिजनौर, उन्नाव और कानपुर देहात में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी। इस निर्णय से उत्तर प्रदेश में एफडीआई, विनिर्माण और वैल्यू एडेड इंडस्ट्री को बढ़ावा देने तथा प्रदेश को एक प्रमुख औद्योगिक निवेश गंतव्य के रूप में और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

  • गंगा एक्सप्रेसवे का होगा विस्तार, हरिद्वार तक बनेगा नया कॉरिडोर

    गंगा एक्सप्रेसवे का होगा विस्तार, हरिद्वार तक बनेगा नया कॉरिडोर

    हरिद्वार तक विस्तारित होगा गंगा एक्सप्रेसवे

    10,761 करोड़ रुपये की लागत से होगा विस्तार, बिजनौर से हरिद्वार की कनेक्टिविटी होगी आसान

    दो कुम्भ नगरियों प्रयागराज और हरिद्वार के बीच बनेगा तेज और नियंत्रित एक्सप्रेसवे कनेक्शन

    लखनऊ, 
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में प्रदेश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क के विस्तार और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। कैबिनेट ने गंगा एक्सप्रेसवे को हरिद्वार तक विस्तारित करने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है। प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का निर्माण 6 लेन में किया जाएगा, जिसे भविष्य में 8 लेन तक विस्तारित किया जा सकेगा।

    10,761 करोड़ रुपये आएगी अनुमानित लागत
    हरिद्वार तक गंगा एक्सप्रेसवे के विस्तार के लिए राज्य सरकार पर संभावित 10,761 करोड़ रुपये का व्यय-भार आएगा। परियोजना में केंद्र सरकार की किसी प्रकार की वित्तीय भागीदारी अपेक्षित अथवा प्रस्तावित नहीं है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद परियोजना की डीपीआर तैयार करने सहित आगे की आवश्यक कार्यवाही की जाएगी।

    बिजनौर से हरिद्वार की कनेक्टिविटी होगी आसान
    उत्तराखंड सीमा से लगे बिजनौर जिले से हरिद्वार जाने के लिए वर्तमान में प्रमुख रूप से एनएच-34 (मेरठ-बिजनौर-हरिद्वार राष्ट्रीय मार्ग) की सुविधा उपलब्ध है। गंगा एक्सप्रेसवे के हरिद्वार तक विस्तार से बिजनौर को हरिद्वार से बेहतर और तेज कनेक्टिविटी मिल सकेगी।इसके साथ ही बिजनौर की कनेक्टिविटी गंगा एक्सप्रेसवे के माध्यम से प्रदेश की राजधानी लखनऊ से भी बेहतर होगी। इससे क्षेत्र में व्यापार, निवेश, उद्योग और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

    प्रयागराज-हरिद्वार के बीच बनेगा एक्सप्रेसवे कॉरिडोर
    गंगा एक्सप्रेसवे के हरिद्वार तक पहुंचने से गंगा के तट पर स्थित दो प्रमुख कुम्भ नगरियों, प्रयागराज और हरिद्वार के बीच प्रवेश नियंत्रित एक्सप्रेसवे नेटवर्क के माध्यम से तेज और सुगम यातायात सुविधा विकसित होगी। इससे धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ ही श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए दोनों धार्मिक नगरियों के बीच आवागमन अधिक सुविधाजनक होने की उम्मीद है।

    धार्मिक पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
    एक्सप्रेसवे के विस्तार से धार्मिक पर्यटन में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है। बेहतर कनेक्टिविटी से हरिद्वार, बिजनौर और गंगा एक्सप्रेसवे से जुड़े अन्य क्षेत्रों में पर्यटन आधारित आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिल सकती है। परियोजना के निर्माण और इससे उत्पन्न होने वाली आर्थिक गतिविधियों के माध्यम से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर सृजित होने की संभावना है। इससे क्षेत्र के आर्थिक एवं सामाजिक विकास को भी नई गति मिलेगी।