Category: उत्तर प्रदेश

  • 7,968 करोड़ का मेगा प्रोजेक्ट, झांसी लिंक एक्सप्रेसवे निर्माण को मंजूरी

    7,968 करोड़ का मेगा प्रोजेक्ट, झांसी लिंक एक्सप्रेसवे निर्माण को मंजूरी

    7,968 करोड़ रुपये से बनेगा झांसी लिंक एक्सप्रेसवे

    बीडा और डिफेंस कॉरिडोर को मिलेगी तेज कनेक्टिविटी, प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों से आवागमन होगा सुगम

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में बुंदेलखंड के इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। कैबिनेट ने 7,968.30 करोड़ रुपये की लागत से झांसी लिंक एक्सप्रेसवे परियोजना के विकास को मंजूरी प्रदान कर दी है।

    बीडा और डिफेंस कॉरिडोर को मिलेगा सीधा लाभ
    झांसी लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण से बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) क्षेत्र, डिफेंस कॉरिडोर और जनपद झांसी के आसपास के महत्वपूर्ण स्थलों तक बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी। एक्सप्रेसवे के माध्यम से प्रदेश एवं देश के अन्य क्षेत्रों से इन स्थानों तक सुरक्षित और द्रुतगति यातायात आवागमन की सुविधा मिलेगी। परियोजना के निर्माण की अनुमानित लागत 7,968.30 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। निर्माण कार्य के लिए होने वाला संभावित पूरा व्यय भार राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। केंद्र सरकार की ओर से इस परियोजना में किसी प्रकार की वित्तीय भागीदारी अपेक्षित अथवा प्रस्तावित नहीं है।

    जल्द शुरू होगा निर्माण
    परियोजना को कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद यथाशीघ्र निर्माण कार्य प्रारंभ किए जाने की कार्यवाही की जाएगी। सरकार का लक्ष्य परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूर्ण करना है, जिससे क्षेत्र को जल्द बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ मिल सके। झांसी लिंक एक्सप्रेसवे का निर्माण बीडा और डिफेंस कॉरिडोर के विकास के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से औद्योगिक गतिविधियों, निवेश और कारोबार को बढ़ावा मिलने की संभावना है। परियोजना के निर्माण और इसके बाद बढ़ने वाली आर्थिक गतिविधियों से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी सृजित होने की उम्मीद है।

  • सुल्तानपुर में औद्योगिक विकास को रफ्तार, 272 करोड़ के लॉजिस्टिक्स क्लस्टर को मंजूरी

    सुल्तानपुर में औद्योगिक विकास को रफ्तार, 272 करोड़ के लॉजिस्टिक्स क्लस्टर को मंजूरी

    सुल्तानपुर में 272 करोड़ से बनेगा इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर

    पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के समीप विकसित होगा औद्योगिक क्लस्टर, कैबिनेट ने अवस्थापना विकास के प्रस्ताव को दी मंजूरी

    औद्योगिक कॉरिडोर योजना के तहत सुल्तानपुर में होगा आईएमएलसी का विकास

    272.25 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होगी अवस्थापना, ग्लोबल बिड से चुनी जाएगी निर्माण एजेंसी

    लखनऊ
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में प्रदेश में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। कैबिनेट ने औद्योगिक कॉरिडोर योजना के अंतर्गत जनपद सुल्तानपुर में इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर्स (आईएमएलसी) की स्थापना के लिए अवस्थापना विकास के निर्माण कार्यों से संबंधित परियोजना प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी।

    272.25 करोड़ रुपये की परियोजना को मिली मंजूरी
    पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के सन्निकट विकसित किए जाने वाले इस औद्योगिक क्लस्टर के लिए 27225.33 लाख रुपये यानी लगभग 272.25 करोड़ रुपये की लागत अनुमोदित की गई है। निर्माण कार्य में होने वाला संभावित व्यय-भार राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। परियोजना में केंद्र सरकार की किसी प्रकार की वित्तीय भागीदारी अपेक्षित अथवा प्रस्तावित नहीं है।

    ग्लोबल बिड से होगा निर्माण एजेंसी का चयन
    कैबिनेट की मंजूरी के बाद परियोजना के निर्माण एजेंसी के चयन के लिए ग्लोबल बिड आमंत्रित की जाएगी। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा और परियोजना को समयबद्ध रूप से पूरा करने का प्रयास किया जाएगा।

    पूर्वांचल में निवेश और औद्योगिक गतिविधियों को मिलेगी रफ्तार
    आईएमएलसी के विकास से सुल्तानपुर में उद्योगों की स्थापना, निवेश और विनिर्माण गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के समीप होने के कारण क्लस्टर को बेहतर कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स सुविधाओं का लाभ मिलेगा।

    स्थानीय युवाओं के लिए बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
    परियोजना के क्रियान्वयन और इसके अंतर्गत उद्योगों की स्थापना से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर सृजित होने की संभावना है। इससे सुल्तानपुर के लोगों को अपने ही जनपद में रोजगार के अवसर मिलेंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर के विकास से सुल्तानपुर में औद्योगिक आधारभूत ढांचे को मजबूती मिलेगी।

  • इंटर्न डॉक्टरों को अब हर माह मिलेंगे 25 हजार रुपये: ब्रजेश पाठक

    इंटर्न डॉक्टरों को अब हर माह मिलेंगे 25 हजार रुपये: ब्रजेश पाठक

    लखनऊ

    उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश के राजकीय मेडिकल कॉलेजों, चिकित्सा संस्थानों और चिकित्सा विश्वविद्यालयों में रोटेटिंग इंटर्नशिप करने वाले एमबीबीएस और बीडीएस इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड में बड़ा इजाफा किया है। मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में स्टाइपेंड को 12 हजार रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये प्रतिमाह करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। 
    यह जानकारी डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने दी। उन्होंने बताया कि इस फैसले से प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों, चिकित्सा संस्थानों और संबद्ध अस्पतालों में रोटेटिंग इंटर्नशिप कर रहे डॉक्टरों को सीधा लाभ मिलेगा। नई व्यवस्था में प्रत्येक इंटर्न डॉक्टर को हर महीने 13 हजार रुपये अतिरिक्त मिलेंगे।

    108 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी

    इंटर्न डाक्टरों को पहले 7,500 रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड मिलता था। वर्ष 2021 में सरकार ने इसे बढ़ाकर 12 हजार रुपये प्रतिमाह किया था। अब सरकार ने एक बार फिर बड़ा फैसला लेते हुए इसे 25 हजार रुपये प्रतिमाह कर दिया है। इस तरह मौजूदा स्टाइपेंड की तुलना में 108 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। वहीं वर्ष 2021 के मुकाबले अब इंटर्न डॉक्टरों को हर महीने 13 हजार रुपये अधिक मिलेंगे।

    अस्पतालों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं इंटर्न

    रोटेटिंग इंटर्नशिप के दौरान एमबीबीएस और बीडीएस छात्र अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे मरीजों की देखभाल के साथ ओपीडी, वार्ड, आपातकालीन सेवाओं और रात्रिकालीन ड्यूटी में भी अपनी सेवाएं देते हैं। ग्रामीण एवं दूरदराज के क्षेत्रों में स्थित अस्पतालों में भी इंटर्न डॉक्टर मरीजों की देखभाल और स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

    स्वास्थ्य व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी

    इंटर्न डॉक्टर स्वास्थ्य व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों में मरीजों को संभालने और चिकित्सकीय सेवाएं उपलब्ध कराने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।

  • बांके बिहारी मंदिर में चढ़ावे को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- दान का हर पैसा पहुंचे मंदिर के खाते में

    बांके बिहारी मंदिर में चढ़ावे को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- दान का हर पैसा पहुंचे मंदिर के खाते में

    वृंदावन 
       वृंदावन के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर प्रबंधन के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि मंदिर में दान किया गया एक-एक पैसा दान पात्र यानी गुल्लक (Donation Boxes) में जमा चढ़ावा या ऑनलाइन माध्यम से भेजी गई रकम सीधे मंदिर के आधिकारिक खजाने और खाते में ही जानी चाहिए। 

    अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि सेवायत या कोई अन्य व्यक्ति इस प्रक्रिया में कोई बाधा खड़ी करता है तो इस कृत्य को बहुत गंभीरता से लिया जाएगा. इसके साथ ही मंदिर की प्रबंध समिति को किसी भी तरह की गड़बड़ी रोकने के लिए एक पारदर्शी व्यवस्था लागू करने का आदेश कोर्ट ने दिया है। 

    कोर्ट ने यह भी कहा कि मंदिर के धन का उपयोग करके कोई भी संपत्ति या जमीन खरीदने के किसी भी प्रस्ताव पर अमल करने से पहले उसे अदालत के समक्ष लाना अनिवार्य होगा. याचिकाकर्ता की वकील तन्वी दुबे ने कहा कि हाई पावर कमेटी ने साल भर में 40 करोड़ रुपये खर्च कर दिए, लेकिन हालात जस के तस हैं. उल्टे श्रद्धालुओं की दिक्कत और बढ़ गई है. मंदिर के धन का उपयोग करके जमीन खरीदी गई है। 

    अधिकारियों की मनमानी पर रोक लगाई थी
    वृंदावन के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर के प्रबंधन और परंपराओं को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने हाई पावर कमेटी में प्रतिनिधियों के चयन को लेकर अधिकारियों की मनमानी पर रोक लगाई थी. कोर्ट ने कहा था कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया से चुने गए प्रतिनिधि ही समिति में गोस्वामी समाज का प्रतिनिधित्व करेंगे। 

    चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने अपने आदेश में कहा था कि हाई पावर कमेटी में बांके बिहारी के राजभोग और शयन भोग सेवाधिकारियों में से दो-दो चुने हुए प्रतिनिधि शामिल किए जाएंगे. शयन भोग से गोपेश और हिमांशु गोस्वामी, जबकि राजभोग सेवाधिकारी के रूप में रजत और शैलेंद्र गोस्वामी को समिति में शामिल किया जाना था। 

    दरअसल, पिछले साल अगस्त में इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर जज जस्टिस अशोक कुमार की अगुआई में एक हाई पावर कमेटी बनाई गई थी. इस समिति में मथुरा के डीएम समेत अन्य अधिकारी और गोस्वामी समाज के चार प्रतिनिधियों को शामिल किया गया था. समिति का मकसद मंदिर में दर्शन व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन को बेहतर बनाना था। 

     

  • एच1एन1 की दस्तक से कानपुर में बढ़ी सतर्कता, अस्पतालों में बेड-दवा तैयार; लक्षण दिखते ही जांच की सलाह

    एच1एन1 की दस्तक से कानपुर में बढ़ी सतर्कता, अस्पतालों में बेड-दवा तैयार; लक्षण दिखते ही जांच की सलाह

    लखनऊ
    उत्तर प्रदेश समेत छह राज्यों में एच1एन1 वायरस के मामले सामने आने के बाद कानपुर का स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड में आ गया है। संक्रमण के संभावित खतरे को देखते हुए शहर के हैलट और उर्सला अस्पतालों में शुरुआती तैयारियां कर ली गई हैं। दोनों अस्पतालों में 20-20 बेड आरक्षित किए गए हैं। इसके साथ ही जरूरी दवाओं का पर्याप्त स्टॉक रखने के निर्देश हैं।

    स्वास्थ्य विभाग ने हैलट, उर्सला समेत अन्य अस्पतालों के डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को संदिग्ध मरीजों की पहचान को लेकर विशेष सतर्कता बरतने को कहा है। अस्पताल प्रबंधन को निर्देश दिया गया है कि एच1एन1 के लक्षण वाले मरीज मिलने पर इसकी सूचना तत्काल उच्च अधिकारियों को दी जाए, जिससे समय रहते जांच और उपचार की व्यवस्था की जा सके। संदिग्ध मरीजों की निगरानी के साथ संक्रमण को दूसरे मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों तक पहुंचने से रोकने के लिए भी जरूरी सावधानी बरतने को कहा गया है।

    हैलट के प्रमुख अधीक्षक डॉ सौरभ अग्रवाल, उर्सला की निदेशक डॉ सीमा श्रीवास्तव के अनुसार, संभावित खतरे से निपटने की भी पूरी तैयारी की गई है। बेड के साथ पर्याप्त दवा का स्टॉक रखने को कहा गया है। ओपीडी में संदिग्ध मरीजों की तत्काल सूचना देने को कहा गया है। फिलहाल अभी यहां ऐसे किसी खतरे की आशंका नहीं है।

    खांसी-बुखार के साथ सांस फूलना गंभीर संकेत
    डॉक्टरों के अनुसार, स्वाइन फ्लू संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या सांस के साथ निकलने वाली सूक्ष्म बूंदों के संपर्क में आने से फैल सकता है। तेज बुखार, लगातार खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, बदन दर्द, सर्दी लगना और अत्यधिक कमजोरी इसके सामान्य लक्षण हैं। कुछ मरीजों में सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द और ऑक्सीजन का स्तर कम होने जैसी गंभीर स्थिति भी हो सकती है।

    बचाव के लिए सावधानी जरूरी
    स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से भीड़भाड़ वाली जगहों पर अनावश्यक जाने से बचने, खांसते या छींकते समय मुंह-नाक ढकने, हाथों की नियमित सफाई करने और संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने पर सावधानी बरतने की अपील की है। बुखार और खांसी होने पर खुद से एंटीबायोटिक या अन्य दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय परामर्श लेना बेहतर है। अस्पतालों में स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

    इन लोगों को ज्यादा खतरा
    छोटे बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और पहले से हृदय, फेफड़े, मधुमेह या कमजोर प्रतिरोधक क्षमता से जूझ रहे लोगों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। ऐसे लोगों में लक्षण दिखने पर इलाज में देरी न करने की सलाह दी गई है।

  • सरकारी अस्पतालों पर बढ़ा भरोसा, ओपीडी में 12.7 तो आईपीडी में 19.7 फीसदी का उछाल

    सरकारी अस्पतालों पर बढ़ा भरोसा, ओपीडी में 12.7 तो आईपीडी में 19.7 फीसदी का उछाल

    लखनऊ

    उत्तर प्रदेश में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति लोगों का भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है। सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों की संख्या में एक साल के भीतर बड़ा इजाफा हुआ है। हॉस्पिटल इनफॉरमेशन सिस्टम (एचआईएस) के आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 की तुलना में 2025-26 में ओपीडी मरीजों की संख्या 12.7 प्रतिशत और आईपीडी मरीजों की संख्या 19.7 प्रतिशत बढ़ी है। आमजन को उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। यह कहना है प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का। 
    डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने एचआईएस के आंकड़े साझा करते हुए बताया कि वर्ष 2024-25 में प्रदेश के सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में 23,26,92,346 मरीज पहुंचे थे। वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर 26,21,86,275 हो गया। यानी एक वर्ष में ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या में 2,94,93,929, करीब 2.95 करोड़ की वृद्धि दर्ज की गई।

    भर्ती मरीजों की संख्या में भी रिकॉर्ड बढ़ोतरी

    गंभीर एवं जरूरतमंद मरीजों को अस्पताल में भर्ती कर उपचार देने वाली आईपीडी सेवाओं में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2024-25 में जहां 1,03,06,336 मरीज सरकारी अस्पतालों में भर्ती हुए थे, वहीं 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 1,23,35,444 पहुंच गई। इस तरह एक साल में आईपीडी में 20,29,108, यानी करीब 20.29 लाख मरीजों की वृद्धि हुई। प्रतिशत के लिहाज से आईपीडी सेवाओं में 19.7 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया।

    बेहतर इलाज और आधुनिक सुविधाओं पर जोर

    डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य सरकारी अस्पतालों में मरीजों को गुणवत्तापूर्ण, सुलभ और समयबद्ध चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है। इसी दिशा में अस्पतालों की सुविधाओं और संसाधनों को लगातार मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सरकारी अस्पतालों को आधुनिक चिकित्सा उपकरणों से अपग्रेड करने के साथ डायलिसिस, पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी जांच की क्षमता बढ़ाई गई है। मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस सेवाओं को भी बेहतर किया गया है।

    योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर फोकस

    डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने के लिए विभाग लगातार काम कर रहा है। अस्पतालों में उपलब्ध सुविधाओं के विस्तार, आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल और सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार का सीधा लाभ मरीजों को मिल रहा है।
    उन्होंने कहा कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को और अधिक सुलभ, सक्षम, आधुनिक एवं मरीज-केंद्रित बनाने के लिए सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। ओपीडी और आईपीडी के बढ़ते आंकड़े प्रदेश की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जनता के बढ़ते विश्वास को दर्शाते हैं।

  • हाईकोर्ट से मिला झटका तो राजभर बोले- ‘अखिलेश जी हिजाब पर क्या सोचते हैं, मौलाना जानना चाहते हैं’

    हाईकोर्ट से मिला झटका तो राजभर बोले- ‘अखिलेश जी हिजाब पर क्या सोचते हैं, मौलाना जानना चाहते हैं’

    लखनऊ

    योगी सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) प्रमुख ओम प्रकाश राजभर इन दिनों सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर लगातार हमलावर हैं। 25 अगस्त को ओपी राजभर ने अखिलेश यादव से हिजाब से जुड़े मामले पर सवाल पूछा है।

    हाईकोर्ट के आदेश पर अखिलेश से पूछा सवाल
    राजभर ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा, “मित्र अखिलेश जी, हाईकोर्ट का आदेश तो आपने पढ़ा ही होगा। स्कूलों में हिजाब पहनने पर हाईकोर्ट की तरफ़ से रोक लगा दी गई है। लेकिन आपके प्रवक्ता तो खुलकर हाईकोर्ट के खिलाफ खड़े हो गए हैं। आपका क्या रुख़ है?”

    ओपी राजभर ने अखिलेश यादव से पूछा कि क्या आप भी हाईकोर्ट के खिलाफ खड़े होंगे? कह दीजिए अपने मन की। कह दीजिए हाईकोर्ट के इस आदेश से आपका मन दुखा है।

    ‘अखिलेश जी, मौलाना आपका रूख जानना चाहते हैं’- राजभर

    अखिलेश यादव को टैग करते हुए ओपी राजभर ने कहा, “अखिलेश जी, आपके जवाब का इंतज़ार है? बताइए हिजाब को लेकर आप क्या सोचते हैं? मौलाना लोग जानना चाहते हैं? जय संविधान।”

    हिजाब मामले में हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका

    बता दें कि स्कूलों में हिजाब पहनने को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। दरअसल, प्रयागराज के टैगोर पब्लिक स्कूल की 11वीं कक्षा की एक मुस्लिम छात्रा की तरफ से इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर हुई थी। याचिकाकर्ता ने स्कूल की तय यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनने की अनुमति मांगी थी। इस याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने खारिज कर दिया।

    ‘हिजाब इस्लाम की अनिवार्य धार्मिक प्रथा नहीं’

    इस याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की पीठ ने कहा कि हिजाब पहनना इस्लाम की अनिवार्य धार्मिक प्रथा के तौर पर स्थापित नहीं है। अदालत ने कहा कि स्कूल का ड्रेस कोड सभी छात्रों के लिए समान और गैर-भेदभावपूर्ण है तथा अनुशासन बनाए रखने के लिए संस्थान को इसे लागू करने का अधिकार है।

    सिर्फ दावे के आधार पर अनुमति नही- कोर्ट

    अदालत ने कहा कि ऐसा कोई धार्मिक या कानूनी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे यह साबित हो सके कि हिजाब पहनना इस्लाम में एक अनिवार्य प्रथा है। सिर्फ दावे के आधार पर इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने कहा कि समान रूप से लागू किए गए स्कूल ड्रेस कोड में व्यक्तिगत पसंद के आधार पर बदलाव की मांग नहीं की जा सकती।

    अब अखिलेश यादव से राजभर ने किया सवाल

    कोर्ट द्वारा याचिका खारिज होने के बाद अब ओपी राजभर ने अखिलेश यादव से इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करने को कहा है। राजभर ने सवाल किया कि क्या अखिलेश यादव भी हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ खड़े होंगे या विरोध करेंगे।

  • एडेड स्कूलों के लिए योगी सरकार का बड़ा फैसला, 51 विद्यालयों को मिलेंगे 6.71 करोड़ रुपये

    एडेड स्कूलों के लिए योगी सरकार का बड़ा फैसला, 51 विद्यालयों को मिलेंगे 6.71 करोड़ रुपये

    लखनऊ
     प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में भवनों की मरम्मत और जरूरी सुविधाओं के विकास के लिए शासन ने करीब 6.71 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। प्रोजेक्ट अलंकार के तहत यह राशि 23 जिलों के 51 विद्यालयों को दी जाएगी। इससे विद्यालयों में पुराने भवनों की मरम्मत, पुनर्निर्माण और अन्य जरूरी काम कराए जाएंगे।

    माध्यमिक शिक्षा विभाग के आदेश के अनुसार 14 जिलों के 32 विद्यालयों को दूसरी किस्त के रूप में करीब 5.52 करोड़ रुपये दिए गए हैं। वहीं, नौ जिलों के 19 विद्यालयों को तीसरी किस्त के रूप में करीब 1.18 करोड़ रुपये मिलेंगे।

    इस तरह 51 विद्यालयों के लिए कुल 6.71 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत हुई है। यह पैसा विद्यालयों के भवनों की मरम्मत, पुनर्निर्माण, निर्माण और जरूरी अवस्थापना सुविधाओं पर खर्च किया जाएगा।

  • जुलाई 2022 में मिला 1.50 लाख रुपये का ऋण, छोटे व्यवसाय से मजबूत हुई परिवार की आर्थिक स्थिति

    जुलाई 2022 में मिला 1.50 लाख रुपये का ऋण, छोटे व्यवसाय से मजबूत हुई परिवार की आर्थिक स्थिति

    लखनऊ/गोरखपुर

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त करने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से हजारों महिलाएं आज स्वरोजगार से जुड़कर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं। गोरखपुर के चरगांवा ब्लॉक के नाहरपुर गांव की रहने वाली उषा देवी की कहानी भी इसी बदलाव की प्रेरक मिसाल है, जिन्होंने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर न केवल अपनी जिंदगी बदली, बल्कि गांव की सैकड़ों महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गईं।

    पड़ोसी गांव की महिलाओं से मिली प्रेरणा, स्वयं सहायता समूह से जुड़कर शुरू किया नया सफर

    उषा देवी बताती हैं कि करीब चार वर्ष पहले उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी। घर के खर्चों को पूरा करने में कठिनाई होती थी और आय का कोई स्थायी साधन नहीं था। इसी दौरान उन्हें पड़ोसी गांव की महिलाओं से स्वयं सहायता समूह के बारे में जानकारी मिली। उन महिलाओं ने उषा देवी को समूह से जुड़ने और अन्य महिलाओं को भी इससे जोड़ने के लिए प्रेरित किया। उषा देवी ने इस अवसर को अपने जीवन में बदलाव लाने का माध्यम बनाया और स्वयं सहायता समूह से जुड़ गईं। समूह के माध्यम से उन्हें बचत, बैंकिंग और स्वरोजगार से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिलीं, जिसने उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने का काम किया।

    1.50 लाख रुपये के ऋण से मजबूत हुआ कारोबार, किराने की दुकान बनी आय का जरिया

    उषा देवी बताती हैं कि जुलाई 2022 में उन्हें स्वयं सहायता समूह के माध्यम से लगभग 1.50 लाख रुपये का ऋण प्राप्त हुआ। यह आर्थिक सहायता उनके जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई। इस राशि की मदद से उन्होंने अपनी किराने की दुकान को और मजबूत किया तथा व्यवसाय को विस्तार दिया। आज उनकी दुकान गांव के लोगों की जरूरतों को पूरा कर रही है और परिवार के लिए नियमित आय का स्रोत बन चुकी है। उषा देवी पिछले चार वर्षों से अपनी दुकान का सफल संचालन कर रही हैं। उनकी मेहनत और लगन ने परिवार की आर्थिक स्थिति को पहले की तुलना में काफी बेहतर बना दिया है।

    130 महिलाओं को मिला मंच, गांव में बढ़ रही आत्मनिर्भरता की ताकत

    उषा देवी वर्तमान में समूह सखी के रूप में भी कार्य कर रही हैं। उनके नेतृत्व में कुल 9 स्वयं सहायता समूह संचालित हो रहे हैं. इनसे लगभग 130 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। इन समूहों से जुड़ी महिलाएं विभिन्न प्रकार के स्वरोजगार कार्य कर रही हैं। कोई बकरी पालन कर रही है, कोई गाय पालन, कोई मुर्गी पालन, तो कोई सिलाई, कढ़ाई और छोटे व्यापार के माध्यम से अपनी आय बढ़ा रही है। स्वयं सहायता समूहों ने गांव की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ उन्हें समाज में नई पहचान भी दिलाई है।

    योगी सरकार की योजनाओं ने बढ़ाया महिलाओं का आत्मविश्वास

    उषा देवी का कहना है कि स्वयं सहायता समूह और ग्रामीण आजीविका मिशन जैसी योजनाओं ने महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं दी, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने का आत्मविश्वास भी दिया है। पहले जो महिलाएं घर की चारदीवारी तक सीमित थीं, वे आज अपने परिवार की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उनका मानना है कि यदि महिलाओं को सही मार्गदर्शन और अवसर मिले तो वे किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकती हैं। स्वयं सहायता समूहों ने गांव की महिलाओं को अपने पैरों पर खड़ा होने का अवसर दिया है।

     ग्रामीण महिलाओं को नई दिशा दे रहा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन

    राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को संगठित कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। मिशन के तहत महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर बचत, ऋण, प्रशिक्षण और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं। गोरखपुर की उषा देवी की सफलता की कहानी इस बात का प्रमाण है कि सरकार की योजनाएं जब सही लाभार्थियों तक पहुंचती हैं, तो वे केवल आर्थिक सहायता नहीं देतीं बल्कि जीवन बदलने का माध्यम बनती हैं। आज उषा देवी न केवल आत्मनिर्भर हैं, बल्कि अपने साथ सैकड़ों महिलाओं को भी आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ा रही हैं।

  • मोहसिन रज़ा जी ने ईद-मिलाद-उन-नबी (ईद-ए-मिलाद) के पवित्र अवसर पर देश एवं प्रदेशवासियों को दीं हार्दिक शुभकामनाएं

    मोहसिन रज़ा जी ने ईद-मिलाद-उन-नबी (ईद-ए-मिलाद) के पवित्र अवसर पर देश एवं प्रदेशवासियों को दीं हार्दिक शुभकामनाएं

    लखनऊ

    उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व राज्यमंत्री एवं पूर्व रणजी क्रिकेटर  मोहसिन रज़ा जी ने ईद-मिलाद-उन-नबी (पैगंबर हज़रत मोहम्मद साहब के यौम-ए-पैदाइश) के मुकद्दस अवसर पर समस्त देशवासियों और प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।

    इस अवसर पर अपने संदेश में  मोहसिन रज़ा जी ने कहा:

    "पैगंबर हज़रत मोहम्मद साहब का जीवन संपूर्ण मानवता के लिए शांति, दया, करुणा, भाईचारे और सौहार्द का मार्ग दिखाने वाला एक दिव्य प्रकाश स्तंभ है। उन्होंने पूरी दुनिया को प्रेम, समानता और कमजोरों की मदद करने की सीख दी। पैगंबर साहब का यह मुकद्दस दिन हमें उनके  दिखाए गए हक, सच्चाई, सब्र और इंसानियत के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देता है।"

     मोहसिन रज़ा जी ने आगे कहा:

    "हमारा भारत देश गंगा-जमुनी तहज़ीब और विभिन्नताओं में एकता की एक मिसाल है।ईद-मिलाद-उन-नबी का यह पर्व हमारे समाज में आपसी सद्भाव, प्रेम और एकता के ताने-बाने को और अधिक मजबूत करे, यही मेरी ईश्वर से प्रार्थना है। आइए, इस मुबारक मौके पर हम सब मिलकर देश और प्रदेश की तरक्की, शांति और खुशहाली के लिए संकल्प लें।"

    उन्होंने सभी से अपील की कि इस पावन पर्व को अकीदत (श्रद्धा), शांति और आपसी भाईचारे के साथ मनाएं तथा समाज के गरीब और ज़रूरतमंद लोगों की मदद कर पैगंबर साहब के पैगाम को अमली जामा पहनाएं।