Category: उत्तर प्रदेश

  • गोरखपुर से मथुरा तक बड़े निवेश की दस्तक, यूपी में 8 परियोजनाओं के लिए LOC को मं

    गोरखपुर से मथुरा तक बड़े निवेश की दस्तक, यूपी में 8 परियोजनाओं के लिए LOC को मं

    लखनऊ
     राज्य में चार हजार करोड रुपये से अधिक के निवेश का रास्ता साफ हो गया है। औद्योगिक निवेश को लेकर सोमवार को आठ बड़ी परियोजनाओं के लिए लेटर आफ कम्फर्ट (एलओसी) जारी करने की मंजूरी मिल गई।

    मुख्य सचिव एसपी गोयल की अध्यक्षता में औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2022 के तहत हुई उच्च स्तरीय प्राधिकृत समिति(एचएलइसी) की बैठक में 4,104.82 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई। परियोजनाओं के लिए ऑनलाइन इंसेंटिव मैनेजमेंट सिस्टम (ओआईएमएस) पोर्टल के माध्यम से मूल्यांकन समिति की संस्तुति पहले ही प्राप्त हो चुकी थी।

    स्वीकृत परियोजनाओं में मेगा और सुपर मेगा श्रेणी की इकाइयां शामिल हैं। इनके जरिए राज्य के अलग-अलग हिस्सों में विनिर्माण, सीमेंट, फार्मास्यूटिकल्स, खाद्य प्रसंस्करण, वायर एवं इलेक्ट्रिकल उत्पाद, डेयरी और सौर ऊर्जा क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद है।

    एपीएल अपोलो ट्यूब्स लिमिटेड की गोरखपुर में 320 करोड़ रुपये की इकाई, टेरेस्ट्रियल फूड प्रोसेसर्स प्राइवेट लिमिटेड की अमरोहा में 277.30 करोड़ रुपये की परियोजना और अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड की ललितपुर में 738 करोड़ रुपये की परियोजना इसमें शामिल है।

    इसके अलावा शुक्र फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड गौतमबुद्धनगर में 587.50 करोड़, गुडलक इंडिया लिमिटेड बुलंदशहर में 268.67 करोड़, जीके वाइंडिंग्स वायर्स लिमिटेड हाथरस में 381.14 करोड़, बनासकांठा डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स लिमिटेड बागपत में 539.83 करोड़ और एल्पेक्स सोलर लिमिटेड मथुरा में 992.38 करोड़ रुपये का निवेश करेगी।

    कई क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे
    इन परियोजनाओं के धरातल पर आने से प्रदेश में औद्योगिक बुनियादी ढांचे के विस्तार के साथ प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना है। सरकार का जोर निवेश परियोजनाओं के शीघ्र क्रियान्वयन और पात्र इकाइयों को नीति के अनुरूप प्रोत्साहन उपलब्ध कराने पर है।

    बैठक में अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार व अपर मुख्य सचिव अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आलोक कुमार सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

  • फ्रेट बढ़ने से कानपुर का लेदर एक्सपोर्ट संकट में, अमेरिका-यूरोप के ऑर्डर पर लगा ब्रेक

    फ्रेट बढ़ने से कानपुर का लेदर एक्सपोर्ट संकट में, अमेरिका-यूरोप के ऑर्डर पर लगा ब्रेक

    कानपुर
    अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर जहाजों की कमी और कंटेनर की उपलब्धता प्रभावित होने से शिपिंग फ्रेट में बेतहाशा बढ़ोतरी ने कानपुर के लेदर फुटवियर और लेदर गुड्स उद्योग की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

    निर्यातकों के मुताबिक कुछ महीने पहले तक जिस 40 फीट हाई-क्यूब कंटेनर का इटली तक भेजने का समुद्री भाड़ा करीब 1,300-1,500 डालर था, वह 17 अगस्त 2026 तक बढ़कर 7,650 डालर पहुंच गया। यानी करीब छह गुणा तक की बढ़ोतरी ने निर्यात की लागत का पूरा गणित बिगाड़ दिया है।

    बढ़ते मालभाड़े के कारण विदेशी खरीदार भी अतिरिक्त लागत उठाने से पीछे हट रहे हैं। इसका सीधा असर शिपमेंट पर पड़ा है और पिछले करीब एक महीने से कानपुर से लगभग 1,000 करोड़ रुपये के लेदर और लेदर प्रोडक्ट्स का निर्यात आर्डर रुका हुआ है। माल – भाड़ा में बड़े अंतर के कारण खरीदारों ने भी घाटा सहने से मना कर दिया और आर्डर की आपूर्ति रोक दी है।

    लेदर निर्यातकों के अनुसार इटली के लिए 40 फीट हाई-क्यूब कंटेनर का माल – भाड़ा 24 फरवरी 2026 को 1,300 डालर यानी 270841 रुपये था वह 19 मार्च को यह 3,316 डालर, 19 जून को 3,745 डालर, एक जुलाई को 5,125 डालर और 15 जुलाई को 5,591 डालर पहुंच गया।

    17 अगस्त को यही दर 7,650 डॉलर यानी 856622 रुपये दर्ज की गई। लगभग छह लाख रुपये का माल – भाड़ा अंतर निर्यातकों पर भारी पड़ रहा है। फरवरी के मुकाबले अगस्त में समुद्री माल भाड़े में करीब 488 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। जो प्रति वर्गफुट 0.90 रुपये से बढ़कर 2.86 रुपये हो गया है।

    लेदर फुटवियर और लेदर गुड्स में पहले से ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा काफी अधिक है। ऐसे में अचानक बढ़े समुद्री भाड़े को विदेशी खरीदारों पर डालना मुश्किल हो रहा है। निर्यातकों का कहना है कि कई मामलों में बढ़ा हुआ फ्रेट उनके पूरे लाभ मार्जिन को समाप्त कर रहा है।

    कानपुर से हर वर्ष करीब 8,000 से 10,000 करोड़ रुपये के लेदर और लेदर उत्पादों का निर्यात होता है। शुरुआती दौर में कुछ निर्यातकों ने विदेशी खरीदारों के साथ लागत बांटकर या कंपनसेशन के माध्यम से शिपमेंट जारी रखने की कोशिश की, लेकिन लगातार बढ़ते फ्रेट ने स्थिति को गंभीर बना दिया।

    अब खरीदारों ने भी साफ मना कर दिया है कि इतने अधिक दाम पर वह माल नहीं खरीदेंगे। इससे अमेरिका , यूरोप समेत कई देशों के आर्डर फिलहाल के लिए रोकने पड़े हैं।

    निर्यातकों के अनुसार पिछले करीब एक महीने में लगभग 1,000 करोड़ रुपये का माल शिपमेंट में बाधा के कारण कारखानों, गोदामों और बंदरगाहों पर अटक गया है। यदि फ्रेट में जल्द राहत नहीं मिली तो इसका असर उत्पादन, नकदी प्रवाह और रोजगार पर भी पड़ सकता है।

    तारीख और समुद्री फ्रेट रुपये में
        16 फरवरी- 1,520 डॉलर 2,78,912
        24 फरवरी- 1,300 डालर 2,70,841
        19 मार्च- 3,316 डालर 4,49,662
        20 अप्रैल-  2,200 डालर 3,58,900
        25 मई- 2,425 डालर 3,64,987
        19 जून- 3,745 डालर 5,04,970
        29 जून- 4,596 डालर 5,90,811
        21 जुलाई- 5,566 डालर 6,89,193
        17 अगस्त- 7,650 डालर 8,56,622

    समुद्री मालभाड़े में राहत, कंटेनर उपलब्धता और शिपिंग शेड्यूल को लेकर तत्काल हस्तक्षेप की जरूरत है। जिससे कानपुर का लेदर निर्यात उद्योग अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति बनाए रख सके। पिछले एक महीने से निर्यात लगभग पूरी तरह से ठप हो गया है।
        – असद के इराकी – पूर्व सीएलई अध्यक्ष

        समुद्री और हवाई दोनों भाड़ा बढ़ जाने से निर्यात उद्याेग को संकट का सामना करना पड़ रहा है। दुनिया के देशों में भारतीय माल की मांग बनी हुई है लेकिन माल -भाड़ा बढ़ने से समय से माल भेजने में परेशानी हो रही है। वाणिज्य मंत्रालय को शिपिंग कंपनियों के साथ वार्ता कर स्थिति संभालने की कोशिश करनी होगी।
        – मुख्तारुल अमीन, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सीएलई

     

  • यूपी में 2027 चुनाव को लेकर CEC का बड़ा संदेश, बोले- युवा समझदार हैं, मतदान का रिकॉर्ड बनाएं

    यूपी में 2027 चुनाव को लेकर CEC का बड़ा संदेश, बोले- युवा समझदार हैं, मतदान का रिकॉर्ड बनाएं

    लखनऊ
    यूपी के दो दिवसीय दौरे पर आए भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने लोगों से आवाह्न किया है कि वह पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हुए 93.7 प्रतिशत मतदान का रिकॉर्ड तोड़ें। उन्होंने विपक्ष के आरोपों का करारा जवाब देते हुए कहा कि जिसे जिस दिशा से सूरज उगाना है, वह उगाए हम इस पर ध्यान नहीं देते। आज के युवा सबसे समझदार हैं, वह हर चीज समझते हैं। उन्होंने कहा कि यूपी में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में यहां के लोग यह रिकॉर्ड तोड़ कर जोश दिखाएं।

    आरोपों से आयोग डरने वाला नहीं
    राजधानी स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित मतदाता साक्षरता क्लब (ईएलसी) व ईसीआईनेट के क्षेत्रीय सम्मेलन में ज्ञानेश कुमार ने कहा कि चुनाव आयोग पूरी पारदर्शिता के साथ काम कर रहा है। कोई कुछ भी इल्जाम लगाए चुनाव आयोग उससे डरने व घबराने की बजाए उसे चुनौती के रूप में स्वीकार करता है और पूरी पारदर्शिता से काम करता है। उन्होंने कहा कि जिस तरह यह अटल सत्य है कि सूरज पूरब से ही निकलता है, वह उत्तर, दक्षिण या पश्चिम से नहीं निकलता, ठीक उसी तरह चुनाव आयोग पूरी तरह पारदर्शी है यह भी अटल सत्य है। उन्होंने 20 जिलों के शैक्षिक संस्थानों से आए शिक्षकों व छात्रों के साथ संवाद किया।

    युवाओं से सीधे जुड़ेगा आयोग
    राजनीतिक दलों की ओर से चुनाव को लेकर समय-समय पर उठाए जाने वाले सवालों के बीच आयोग युवाओं से सीधे जुड़ेगा। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में छात्रों व शिक्षकों से संवाद के दौरान कहा कि छात्र मतदाता साक्षरता क्लब व ईसीआईनेट प्लेटफॉर्म का उपयोग अधिक से अधिक युवा उठाएं। ईएलसी को स्कूलों, कॉलेजों में व्यवस्थित डिजिटल रूप में सक्षम प्लेटफॉर्म के रूप में पुन: तैयार किया जाएगा

    एक ही वोटिंग लिस्ट से सभी चुनाव संभव नहीं
    देश में एक ही मतदाता सूची से लोकसभा, विधानसभा, पंचायत और नगर निगम के चुनाव संभव नहीं हैं। भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने सोमवार को यह स्पष्ट किया कि संविधान के 73 वें संशोधन के तहत हर राज्य में राज्य निर्वाचन आयोग हैं जो पंचायत व नगर निगम चुनाव के लिए अपने नियम-कानून से मतदाता सूची बना सकता है। ऐसे में जब तक इसमें सरकार कोई बदलाव नहीं करती है तब तक चुनाव आयोग एक मतदाता सूची बनाकर चुनाव नहीं करा सकता।

    लखनऊ के दो दिन के दौरे पर रहे CEC
    यूपी के दो दिवसीय दौरे पर लखनऊ आए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में छात्रों व शिक्षकों से संवाद के दौरान उनके कई सवालों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि भारत में 97 करोड़ मतदाता हैं। करीब आठ से 10 प्रतिशत तक यानी आठ करोड़ नाम हर साल मतदाता सूची में बदलते हैं। करीब दो करोड़ लोगों की मृत्यु होती है। चार करोड़ युवा व अन्य नए मतदाता जुड़ते हैं और चार करोड़ ही लोग घर या निवास स्थान छोड़ कर दूसरी जगह चले जाते हैं। ऐसे में प्रति सेकेंड तीन वोटर बदल जाते हैं। सूची में गड़बड़ी रोकने के हर संभव प्रयास किए जाते हैं पर अगर त्रुटि हो जाती है तो नागरिकों को भी चाहिए कि वे सूची व वोटर कार्ड की गड़बड़ी दूर कराएं।

  • हिजाब पहनने की मांग पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, स्कूल ड्रेस विवाद में छात्रा को नहीं मिली राहत

    हिजाब पहनने की मांग पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, स्कूल ड्रेस विवाद में छात्रा को नहीं मिली राहत

     प्रयागराज

    इलाहाबाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने प्रयागराज के टैगोर पब्लिक स्कूल की 11वीं कक्षा की एक मुस्लिम छात्रा द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया. याचिकाकर्ता ने स्कूल की तय यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनने की अनुमति मांगी थी। 

    न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की पीठ ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि हिजाब पहनना इस्लाम धर्म का अनिवार्य हिस्सा साबित नहीं होता है. अदालत ने स्पष्ट किया कि स्कूल का ड्रेस कोड एक समान, गैर-भेदभावपूर्ण और अनुशासन बनाए रखने के लिए है, जिसे लागू करने का अधिकार संस्थान के पास है। 

    कोर्ट ने धार्मिक साक्ष्यों की कमी को बताया आधार

    अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि ऐसा कोई धार्मिक या कानूनी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे यह साबित हो सके कि हिजाब पहनना इस्लाम में एक अनिवार्य प्रथा है. कोर्ट के अनुसार, केवल दावा करने के आधार पर धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के तहत राहत नहीं दी जा सकती. छात्रा ने तर्क दिया था कि वह कक्षा 6 से 10 तक बिना किसी विरोध के हिजाब पहनकर स्कूल आती रही है. इस पर अदालत ने कहा कि संस्थान की पुरानी सहमति किसी कानूनी अधिकार को जन्म नहीं देती। 

    यूनिफॉर्म कोड और अनुशासन पर हाईकोर्ट की टिप्पणी
    हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि शैक्षणिक संस्थानों में अनुशासन और एकरूपता बनाए रखने के लिए यूनिफॉर्म कोड का पालन जरूरी है. यदि किसी स्कूल की ड्रेस नीति सभी छात्रों के लिए समान है और किसी के साथ भेदभाव नहीं करती, तो व्यक्तिगत पसंद के आधार पर इसमें बदलाव की मांग नहीं की जा सकती. पीठ ने कहा कि स्कूल अपनी पहचान और अनुशासन बनाए रखने के लिए नियम लागू कर सकता है, और पूर्व की ढील के आधार पर छात्र हमेशा के लिए नियम बदलने की मांग नहीं कर सकते। 

    कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले का हवाला देकर याचिका खारिज
    पीठ ने अपने फैसले में पिछले न्यायिक आदेशों का भी हवाला दिया. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि विभिन्न उच्च न्यायालयों ने भी माना है कि महिलाओं के लिए हिजाब पहनना इस्लामी आस्था का अनिवार्य हिस्सा नहीं है. कोर्ट ने कहा कि कर्नाटक हाईकोर्ट के पिछले फैसले से अलग राय लेने का कोई कारण नजर नहीं आता. इन सभी बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया और स्कूल प्रबंधन को अपना निर्धारित यूनिफॉर्म कोड लागू करने की अनुमति दे दी। 

  • रक्षाबंधन पर बहनों के लिए मुफ्त सफर का तोहफा, योगी सरकार ने अब तक बांटे 188 करोड़ के टिकट

    रक्षाबंधन पर बहनों के लिए मुफ्त सफर का तोहफा, योगी सरकार ने अब तक बांटे 188 करोड़ के टिकट

    लखनऊ

    रक्षाबंधन पर बहनों को भाइयों तक पहुंचने में किराये की चिंता न हो, इसके लिए योगी सरकार वर्ष 2017 से लगातार निशुल्क बस यात्रा का उपहार देती आ रही है। वर्ष 2017 से 2025 तक लगातार नौ रक्षाबंधन पर महिलाओं को दी गई इस सुविधा के तहत 2.01 करोड़ निशुल्क टिकट जारी किए गए। इन टिकटों के किराये पर खर्च 188.41 करोड़ रुपये (समतुल्य धनराशि) आंकी गई है। यानी योगी सरकार के कार्यकाल में रक्षाबंधन पर बहनों व महिलाओं को अब तक 188.41 करोड़ रुपये की निशुल्क यात्रा का उपहार मिल चुका है।

    2017 से लगातार जारी है बहनों के लिए निशुल्क सफर 

    योगी सरकार ने वर्ष 2017 में रक्षाबंधन पर महिलाओं के लिए निशुल्क बस यात्रा की पहल शुरू की। इसके बाद लगातार 2025 तक यह सुविधा दी गई। नौ वर्षों में इस सुविधा का लाभ लेने वाली महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ी और 2025 तक कुल 2.01 करोड़ से अधिक निशुल्क टिकट जारी किए गए।

    188.41 करोड़ रुपये का निशुल्क यात्रा उपहार 
    परिवहन निगम के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2017 से 2025 तक रक्षाबंधन के अवसर पर महिलाओं को जारी निशुल्क टिकटों के किराये के समतुल्य धनराशि करीब 188.41 करोड़ रुपये है।

    2025 में महिला के साथ सहयात्री को भी निशुल्क सफर

    वर्ष 2025 में योगी सरकार ने रक्षाबंधन की यात्रा को और सुविधाजनक बनाते हुए महिला के साथ एक सहयात्री को भी निशुल्क यात्रा का लाभ दिया। 8 अगस्त 2025 की सुबह छह बजे से 10 अगस्त की मध्यरात्रि तक कुल 66 घंटे की अवधि में करीब 63.14 लाख महिला यात्रियों और 15.11 लाख से अधिक महिला यात्रियों के सहयात्रियों को निशुल्क यात्रा की सुविधा मिली। इस दौरान 78.26 लाख से अधिक निशुल्क टिकट जारी हुए, जिनका कुल किराया मूल्य करीब 86.98 करोड़ रुपये रहा।

    हर साल बढ़ता गया बहनों का भरोसा

    आंकड़ों पर नजर डालें तो 2017 में 11,16,332 महिला यात्रियों ने इस सुविधा का लाभ लिया था। 2018 में यह संख्या 11,69,226, 2019 में 12,04,085 और 2020 में 7,36,605 रही। 2021 में 9,63,466, 2022 में 22,32,322, 2023 में 29,29,755 और 2024 में 19,78,403 महिला यात्रियों ने निशुल्क यात्रा की। 2025 में महिलाओं के साथ सहयात्री को जोड़ने के बाद कुल निशुल्क टिकटों की संख्या 78,26,324 तक पहुंच गई। 

    यूपीएसआरटीसी प्रधान प्रबंधक (संचालन) अनिल कुमार ने कहा कि 2017 में शुरू हुई निशुल्क बस यात्रा की पहल अब रक्षाबंधन पर योगी सरकार की प्रमुख जनसुविधाओं में शामिल हो चुकी है। 9 वर्षों में 2.01 करोड़ से अधिक निशुल्क टिकट और 188.41 करोड़ रुपये के किराये के समतुल्य लाभ इस योजना के व्यापक असर को दर्शाते हैं। सरकार इस कदम में विभाग पूरी तरह आगे भी तत्पर्रता से जुटा रहेगा। प्रदेश के यात्रियों को सुविधाजनक यात्रा करने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं। 

    त्योहार पर आर्थिक राहत के साथ आसान हुई यात्रा

    रक्षाबंधन पर बड़ी संख्या में महिलाएं अपने भाइयों को राखी बांधने के लिए दूसरे शहरों और गांवों की यात्रा करती हैं। ऐसे में मुफ्त बस यात्रा उन्हें सीधे आर्थिक राहत देती है। खासतौर पर सामान्य और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए यह सुविधा त्योहार के दौरान यात्रा का अतिरिक्त खर्च कम करने में मदद करती है। साथ ही सरकारी बसों में अतिरिक्त बसों और फेरों की व्यवस्था से त्योहार के समय आवागमन को सुगम बनाने का प्रयास किया जाता है।

    महिला सम्मान और आत्मनिर्भरता के विजन से जुड़ी पहल

    योगी सरकार की सोच महिलाओं को केवल योजनाओं का लाभ देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके सम्मान, सुरक्षा, सुविधा और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने पर भी केंद्रित है। रक्षाबंधन पर निशुल्क बस यात्रा इसी विजन का एक प्रत्यक्ष उदाहरण है। सरकार का प्रयास है कि महिलाओं को जरूरी यात्राओं के दौरान आर्थिक और परिवहन संबंधी बाधाओं का सामना कम करना पड़े और वे अपने परिवार के साथ त्योहारों और महत्वपूर्ण अवसरों में सहजता से शामिल हो सकें।

  • स्वास्थ्य कार्यकर्ता (महिला) भर्ती में अगला चरण शुरू, 10,272 अभ्यर्थी दस्तावेज परीक्षण के लिए पात्र

    स्वास्थ्य कार्यकर्ता (महिला) भर्ती में अगला चरण शुरू, 10,272 अभ्यर्थी दस्तावेज परीक्षण के लिए पात्र

    स्वास्थ्य कार्यकर्ता (महिला) मुख्य परीक्षा-2024 के परिणाम के आधार पर 10,272 अभ्यर्थी पात्रता/अभिलेख परीक्षण के लिए अर्ह घोषित

    कुल 5,272 पदों पर होगी भर्ती, अंतिम चयन अभिलेख परीक्षण के बाद नियमानुसार घोषित किया जाएगा 

    यूपीएसएसएससी ने जारी किया कटऑफ, संविदा सेवा के लिए अधिकतम 15 अधिमानी अंक दिए जाने की व्यवस्था

    लखनऊ,
    प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने की दिशा में योगी सरकार की पहल का असर स्वास्थ्य कार्यकर्ता भर्ती प्रक्रिया में भी दिखाई दे रहा है। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूपीएसएसएससी) ने स्वास्थ्य कार्यकर्ता (महिला) मुख्य परीक्षा-2024 के परिणाम के आधार पर 10,272 अभ्यर्थियों को पात्रता/अभिलेख परीक्षण के लिए अर्ह घोषित किया है। इस भर्ती के तहत स्वास्थ्य कार्यकर्ता (महिला) के कुल 5,272 पदों पर चयन किया जाना है।

    मुख्य परीक्षा 11 जनवरी 2026 को आयोजित की गई थी। भर्ती प्रक्रिया में संविदा के आधार पर सहायक नर्स मिडवाइफ (एएनएम) के रूप में कार्य करने वाले अभ्यर्थियों के अनुभव को भी महत्व दिया गया है। शासन के प्रावधानों के तहत संविदा सेवा के लिए अधिकतम 15 अधिमानी अंक दिए जाने की व्यवस्था की गई है। इससे स्वास्थ्य क्षेत्र में पहले से काम कर रहे अनुभवी अभ्यर्थियों को अवसर मिल रहा है।

    आयोग ने स्पष्ट किया है कि पात्रता/अभिलेख परीक्षण के लिए यह अंतिम चयन परिणाम नहीं है। अंतिम चयन अभिलेख परीक्षण के बाद नियमानुसार घोषित किया जाएगा। सामान्य वर्ग की कटऑफ 61.75, अनुसूचित जाति की 56.75, अनुसूचित जनजाति की 31.75, अन्य पिछड़ा वर्ग की 55.25 और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की 55 अंक रही है।

  • योगी सरकार का दावा- पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से संपन्न हुई यूपी सम्मिलित अवर अधीनस्थ सेवा मुख्य परीक्षा

    योगी सरकार का दावा- पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से संपन्न हुई यूपी सम्मिलित अवर अधीनस्थ सेवा मुख्य परीक्षा

    योगी सरकार ने पारदर्शिता के साथ संपन्न कराई यूपी सम्मिलित अवर अधीनस्थ सेवा (स्नातक स्तरीय) मुख्य परीक्षा 

    परीक्षा के 24 घंटे में आयोग की वेबसाइट पर अपलोड की गई प्रोविजनल आंसर शीट

    आयोग की वेबसाइट पर 30 अगस्त तक प्रोविजनल आंसर शीट देख सकेंगे अभ्यर्थी 

    लखनऊ/प्रयागराज
    विगत 9 वर्षों में 9 लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां देने वाली योगी सरकार प्रदेश में प्रतियोगी परीक्षाओं को पारदर्शिता के साथ तय समय पर संपादित करा रही है, ताकि युवाओं को उसका पूरा लाभ मिल सके। इसी क्रम में एक और प्रतियोगी परीक्षा न सिर्फ शुचितापूर्वक और पारदर्शी रूप से सम्पन्न हो गई, बल्कि 24 घंटे में इसकी प्रोविजनल आंसर शीट उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूपीएसएसएससी) की वेबसाइट पर उपलब्ध भी करा दी गई है।

    आयोग द्वारा आयोजित सम्मिलित अवर अधीनस्थ सेवा (स्नातक स्तरीय) मुख्य परीक्षा (प्रा०अ०प०-2025)/08 के अन्तर्गत विभिन्न विभागों के विज्ञापित पदों पर चयन हेतु मुख्य परीक्षा सोमवार 23 अगस्त को संपन्न हुई। आयोग ने इस परीक्षा से संबन्धित समस्त अभ्यर्थियों को सूचित किया है कि इस लिखित परीक्षा की प्रोविजनल आंसर शीट आयोग की वेबसाइट upsssc.gov.in पर अपलोड कर दी गई है। आयोग की तरफ इसका लिंक https://drive.google.com/file/d/1LKnAXU7pmFRvGthWF1R4xDCZD9PSJEN6/view?usp=sharing भी जारी किया गया है। प्रोविजनल आंसर शीट दिनांक 30-08-2026 तक आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध रहेगी।

  • शिक्षकों को सेंसेटाइजेशन वीडियो से जोड़ रही योगी सरकार, ‘प्रशस्त 2.0’ से मजबूत होगी बच्चों की स्क्रीनिंग

    शिक्षकों को सेंसेटाइजेशन वीडियो से जोड़ रही योगी सरकार, ‘प्रशस्त 2.0’ से मजबूत होगी बच्चों की स्क्रीनिंग

    लखनऊ

    हर बच्चे की जरूरत को समझकर उसे उपयुक्त शैक्षिक सहयोग उपलब्ध कराना योगी सरकार की समावेशी शिक्षा नीति का महत्वपूर्ण लक्ष्य है। इसी दिशा में ‘प्रशस्त 2.0’ के माध्यम से बच्चों की स्क्रीनिंग से पहले शिक्षकों को संवेदनशील और तैयार करने की विशेष व्यवस्था की गई है। प्रशस्त एप/पोर्टल पर उपलब्ध सेंसेटाइजेशन वीडियो के जरिए शिक्षकों को बच्चों की स्क्रीनिंग की प्रक्रिया और उसकी आवश्यकता को समझने का अवसर दिया जा रहा है, ताकि विद्यालय स्तर पर बच्चों की जरूरतों की पहचान अधिक संवेदनशीलता और समझ के साथ की जा सके।

    महानिदेशक, स्कूल शिक्षा के निर्देशों के क्रम में सभी मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक, बेसिक तथा जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को अपने स्तर से संबंधित शिक्षकों को सेंसेटाइजेशन वीडियो देखने के लिए निर्देशित करने को कहा गया है। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि सभी संबंधित शिक्षक प्रशस्त एप/पोर्टल पर उपलब्ध वीडियो देखें और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ऑनबोर्ड हों।

    योगी सरकार का यह प्रयास तकनीक और शिक्षक की संवेदनशीलता को जोड़कर बच्चों की जरूरतों की बेहतर पहचान की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ‘प्रशस्त 2.0’ के माध्यम से स्क्रीनिंग से पहले शिक्षक तैयार होंगे, जिससे समावेशी और जरूरत आधारित शिक्षा व्यवस्था को विद्यालय स्तर पर और मजबूती मिलेगी।

    स्क्रीनिंग से पहले शिक्षक होंगे तैयार
    ‘प्रशस्त 2.0’ के अंतर्गत बच्चों की स्क्रीनिंग से पहले शिक्षकों के लिए करीब 40 मिनट के कुल 10 सेंसेटाइजेशन वीडियो उपलब्ध कराए गए हैं। इन वीडियो को देखना शिक्षकों के लिए अनिवार्य किया गया है। वीडियो के माध्यम से शिक्षकों को स्क्रीनिंग प्रक्रिया से संबंधित आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे वे बच्चों की शैक्षिक आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से समझ सकें।

    सभी विद्यालयों के शिक्षकों को जोड़ा जा रहा
    राज्य के परिषदीय, प्राइवेट एडेड और प्राइवेट अनएडेड विद्यालयों के सभी शिक्षकों को प्रशस्त एप/पोर्टल पर ऑनलाइन सेंसेटाइजेशन वीडियो देखने के लिए जोड़ा जा रहा है। इसका उद्देश्य स्क्रीनिंग प्रक्रिया को व्यापक स्तर पर लागू करने से पहले शिक्षकों को एक समान जानकारी और आवश्यक संवेदनशीलता प्रदान करना है।

    प्रशस्त एप और पोर्टल से ऑनलाइन व्यवस्था
    शिक्षकों को सेंसेटाइजेशन वीडियो उपलब्ध कराने के लिए प्रशस्त एप/पोर्टल का उपयोग किया जा रहा है। इससे शिक्षक ऑनलाइन माध्यम से वीडियो देख सकते हैं और स्क्रीनिंग प्रक्रिया के लिए स्वयं को तैयार कर सकते हैं। तकनीक के उपयोग से प्रशिक्षण और संवेदनशीलता संबंधी सामग्री को प्रदेशभर के शिक्षकों तक पहुंचाने की व्यवस्था को सरल और प्रभावी बनाया गया है।

    समावेशी शिक्षा को मिलेगी मजबूती
    ‘प्रशस्त 2.0’ के माध्यम से बच्चों की स्क्रीनिंग को शिक्षक की तैयारी से जोड़ा गया है। स्क्रीनिंग से पहले शिक्षकों को आवश्यक जानकारी और संवेदनशीलता उपलब्ध होने से बच्चों की जरूरतों को समझने की प्रक्रिया को बेहतर आधार मिलेगा। इससे विद्यालयों में ऐसे बच्चों की पहचान और उनके लिए आवश्यक शैक्षिक सहयोग की दिशा तय करने में मदद मिलेगी।

  • उत्तर प्रदेश व जापान के बीच संवाद से हुआ सकारात्मक माहौल का सृजनः मुख्यमंत्री

    उत्तर प्रदेश व जापान के बीच संवाद से हुआ सकारात्मक माहौल का सृजनः मुख्यमंत्री

    लखनऊ

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जापानी कंपनियों के निवेश और पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सोमवार को इन्वेस्ट यूपी व अन्य विभागों के अधिकारियों की बैठक ली। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहली बार 240 लोगों के प्रतिनिधिमंडल का प्रदेश में आगमन हुआ। इस यात्रा में जापान व उत्तर प्रदेश के बीच सकारात्मक माहौल का सृजन हुआ। जापान से आए अतिथियों ने उत्तर प्रदेश में आए सकारात्मक बदलावों की सराहना की। ऐसे में जापान व उत्तर प्रदेश के बीच निरंतर संवाद कर निवेश के माध्यम से युवाओं को रोजगार से जोड़ा जाए। 

    बैठक में मुख्यमंत्री जी को जापान के प्रतिनिधिमंडल की ओर से किए गए सभी एमओयू के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। बताया गया कि इस दौरे का मुख्य फोकस निवेश, मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन एनर्जी, तकनीक, कौशल विकास, शिक्षा और पर्यटन में सहयोग बढ़ाने पर रहा।

    मुख्यमंत्री जी ने यीडा के अंतर्गत जापानी सिटी के लिए भूमि अधिग्रहण के संबंध में जानकारी ली। अधिकारियों ने अवगत कराया कि 500 एकड़ में से 350 एकड़ से अधिक भूमि का अधिग्रहण पूरा किया जा चुका है। मुख्यमंत्री जी ने इस कार्य को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए। 

    मुख्यमंत्री जी ने कहा कि जापान में सितंबर, अक्टूबर व दिसंबर में होने वाले विभिन्न वैश्विक आयोजन में उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधिमंडल को भी भेजा जाए। इसमें मंत्रियों, जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, उद्योगपतियों के साथ ही संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाए। 

    मुख्यमंत्री जी ने कहा कि जापानी भाषा के प्रशिक्षण तथा स्किल डेवलपमेंट के कार्यक्रमों को तेजी से आगे बढ़ाया जाए। यामानाशी प्रांत सहित जापान के विभिन्न क्षेत्रों में प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार की संभावनाओं को सुदृढ़ किया जाए। 

    मुख्यमंत्री जी ने कहा कि इन्वेस्ट यूपी में अलग से यामानाशी जापान डेस्क बनाई जाए। इसके जरिए निरंतर संवाद होता रहे। उन्होंने हर तीसरे महीने इसकी प्रोग्रेस रिपोर्ट भी लेने का निर्देश दिया। 

    मुख्यमंत्री जी ने कहा कि जापानी पर्यटकों को उत्तर प्रदेश के बौद्ध स्थलों पर जाने के लिए अच्छी सुविधाएं दी जाएं। एक ऐसा रूट विकसित किया जाए, जिससे वे एक साथ सारनाथ, कुशीनगर, श्रावस्ती, कपिलवस्तु समेत अधिक से अधिक बौद्ध स्थलों का दर्शन कर सकें। 

    मुख्यमंत्री जी ने निर्देश दिया कि आगामी ट्रेड शो में जापानी विशेषज्ञों के साथ विशेष सत्र आयोजित किए जाएं, जिससे युवाओं को उनके अनुभवों का लाभ प्राप्त हो सके। 

    मुख्यमंत्री जी ने कहाकि यूनेस्को ने सारनाथ की भांति जापान के नारा को विश्व धरोहर सूची में शामिल किया है। दोनों को परस्पर सांस्कृतिक रूप से जोड़ने के लिए कदम उठाए जाएं। 
      
    मुख्यमंत्री जी ने द्विपक्षीय पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिए उत्तर प्रदेश एवं यामानाशी प्रांत के टूर ऑपरेटरों के मध्य बढ़ावा देने हेतु आवश्यक कदम उठाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बौद्ध सर्किट में पर्यटन गतिविधियों को व्यापक स्तर पर प्रोत्साहित किया जाए।

  • “भाषिणी” ने यूपी-जापान निवेश सम्मेलन में तोड़ी भाषा की दीवार, योगी सरकार के ग्लोबल इन्वेस्टमेंट विजन को मिला एआई का साथ

    “भाषिणी” ने यूपी-जापान निवेश सम्मेलन में तोड़ी भाषा की दीवार, योगी सरकार के ग्लोबल इन्वेस्टमेंट विजन को मिला एआई का साथ

    लखनऊ

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश को वैश्विक निवेश के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में राज्य सरकार लगातार तकनीक और नवाचार का प्रभावी इस्तेमाल कर रही है। इसी कड़ी में आयोजित यूपी-जापान निवेश सम्मेलन 2026 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित बहुभाषी प्लेटफॉर्म ‘भाषिणी’ ने भारत और जापान के निवेशकों एवं हितधारकों के बीच भाषा की बाधा को दूर कर संवाद को और अधिक सहज एवं प्रभावी बना दिया।

    उत्तर प्रदेश की निवेश प्रोत्साहन एजेंसी इन्वेस्ट यूपी ने भारत सरकार के एआई-संचालित बहुभाषी प्लेटफॉर्म भाषिणी के साथ विशेष तकनीकी सहयोग किया। सम्मेलन में इसका सफल प्रयोग हुआ, जहां हिंदी, अंग्रेजी और जापानी भाषाओं के बीच रियल-टाइम स्पीच-टू-टेक्स्ट और अनुवाद की सुविधा ने दोनों देशों के प्रतिनिधियों को अपनी भाषा में संवाद और विचारों को समझने में मदद की।

    मुख्यमंत्री योगी के हिंदी संबोधन का रियल-टाइम जापानी अनुवाद

    सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जब हिंदी में अपना संबोधन दिया, तो भाषिणी के ‘श्रुतलेख’ (Shrutlekh) फीचर के माध्यम से उनके भाषण का रियल-टाइम ट्रांसक्रिप्शन और जापानी भाषा में अनुवाद प्रस्तुत किया गया। इससे जापानी प्रतिनिधियों को मुख्यमंत्री के संबोधन को तत्काल समझने में मदद मिली।

    इसी तरह केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के अंग्रेजी संबोधन का भी जापानी भाषा में त्वरित अनुवाद किया गया। इस तकनीक ने सम्मेलन में मौजूद भारतीय और जापानी प्रतिनिधियों के बीच संवाद को अधिक सहज बनाया।

    योगी सरकार के निवेश विजन को मिला तकनीक का साथ

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार का फोकस राज्य को ग्लोबल इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन बनाने पर है। जापान के साथ निवेश और औद्योगिक सहयोग को मजबूत करने के लिए आयोजित सम्मेलन में विनिर्माण, स्वच्छ ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, नवाचार, कौशल विकास और पर्यटन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में संभावनाओं पर चर्चा हुई।

    भाषिणी के रियल-टाइम अनुवाद ने इन चर्चाओं में भाषा को बाधा बनने से रोकते हुए ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के साथ ‘ईज ऑफ कम्युनिकेशन’ को भी मजबूत किया। इससे उत्तर प्रदेश की निवेश नीतियों, अवसरों और संभावनाओं को जापानी निवेशकों तक उनकी अपनी भाषा में पहुंचाने में मदद मिली।

    800 से अधिक सरकारी वेबसाइटों को सशक्त बना रहा भाषिणी

    इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीजन (DIBD) द्वारा संचालित भाषिणी प्लेटफॉर्म वर्तमान में 800 से अधिक सरकारी वेबसाइटों को बहुभाषी सुविधा प्रदान कर रहा है। प्लेटफॉर्म प्रतिदिन 2.4 करोड़ से अधिक एआई इंटरफेस प्रोसेस करता है और अब तक 9 अरब से अधिक एआई इंटरफेस प्रोसेस कर चुका है।

    भाषिणी 36 भारतीय लिखित भाषाओं, 23 भारतीय वॉयस भाषाओं और 35 अंतरराष्ट्रीय भाषाओं को सपोर्ट करता है। ऐसे में इसका उपयोग अंतरराष्ट्रीय निवेश संवाद, सरकारी सेवाओं और डिजिटल कम्युनिकेशन को अधिक समावेशी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    भारत-जापान साझेदारी को नई डिजिटल ताकत

    यूपी-जापान निवेश सम्मेलन में भाषिणी का इस्तेमाल यह दर्शाता है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश निवेश आकर्षित करने के साथ-साथ टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर को भी निवेश संवाद का हिस्सा बना रहा है।

    इन्वेस्ट यूपी ने भारत-जापान निवेश संवाद को अधिक कनेक्टेड, समावेशी और प्रभावी बनाने में भाषिणी के तकनीकी सहयोग की सराहना की। रियल-टाइम एआई ट्रांसलेशन के इस प्रयोग ने उत्तर प्रदेश के वैश्विक निवेश अभियान को तकनीक की नई ताकत दी है और भारत-जापान आर्थिक साझेदारी को संवाद के स्तर पर भी अधिक मजबूत करने का मार्ग प्रशस्त किया है।