Category: उत्तर प्रदेश

  • नकली घी से लेकर मिलावटी खोया-पनीर तक पर कार्रवाई, यूपी में 18 FIR और करोड़ों की सामग्री जब्त

    नकली घी से लेकर मिलावटी खोया-पनीर तक पर कार्रवाई, यूपी में 18 FIR और करोड़ों की सामग्री जब्त

     लखनऊ
    त्योहारों के दौरान प्रदेशवासियों को शुद्ध, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने की कड़ी में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने मिलावटखोरों के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है।

    रक्षाबंधन पर्व के मद्देनजर 20 अगस्त से चलाए जा रहे विशेष प्रवर्तन अभियान में प्र शासन के निर्देशन में प्रदेश के विभिन्न जिलों में बड़े पैमाने पर कार्रवाई की गई।

    अभियान के तहत अब तक 18 एफआईआर दर्ज की गईं, 182 खाद्य नमूने संग्रहीत किए गए, 13,440.25 किलोग्राम और 14,561 लीटर सामग्री जब्त की गई है। वहीं 18,607 किलोग्राम और 7,630 लीटर असुरक्षित और अस्वच्छ खाद्य सामग्री नष्ट कराई गई है। जब्त सामग्री का अनुमानित मूल्य करीब 26.09 लाख तथा नष्ट सामग्री का मूल्य करीब 27.89 लाख रुपए है।

    कानपुर नगर, कानपुर देहात, लखनऊ, मुजफ्फरनगर, मेरठ, कासगंज, अलीगढ़, बागपत, प्रयागराज, गाजियाबाद, आगरा, हापुड़, संत कबीर नगर, फिरोजाबाद, बदायूं, सम्भल और मथुरा समेत विभिन्न जनपदों में कार्रवाई की गई। है। कानपुर नगर में हटिया खोवा मंडी के 14 विक्रेताओं का निरीक्षण कर 18 नमूने लिए गए और अस्वच्छ परिस्थितियों में रखा करीब 4.30 कुंतल खोया नष्ट कराया गया।

    एक्सप्रेसवे एवं फजलगंज खोवा मंडी में भी नमूने लिए गए। कानपुर देहात में खोवा निर्माण इकाइयों में रिफाइंड तेल, वनस्पति और एसएमपी के इस्तेमाल के मामले सामने आने पर तैयार खोया नष्ट कराया गया, संदिग्ध सामग्री जब्त की गई तथा संबंधित मामलों में एफआईआर दर्ज कराई गई।

    लखनऊ में शिवाक्षी स्वीट्स पर कार्रवाई के दौरान 15 नमूने लिए गए। 686 किलोग्राम खाद्य सामग्री जब्त करने के साथ 2,675 किलोग्राम संदूषित खाद्य पदार्थ नष्ट कराया गया। स म्भल में 100 कुंतल नकली घी जब्त किया गया। बदायूं में वाहन जांच के दौरान 1,605 किलोग्राम देशी घी जब्त किया गया, जिसकी अनुमानित कीमत ₹10.53 लाख है।

    कासगंज में चार और हापुड़ में करीब छह कुंतल पनीर नष्ट कराया गया। मथुरा में रिफाइंड तेल और संदिग्ध रसायनों का इस्तेमाल कर पनीर तैयार किए जाने के तीन मामलों में एफआईआर दर्ज कराई गई। अभियान में स्किम्ड मिल्क पाउडर, वनस्पति, रिफाइंड तेल, सिंथेटिक रंग, सोडियम बाई कार्बोनेट और संदिग्ध रसायनों को जब्त किया गया।

    प्रयागराज में 72 कुंतल जबकि अलीगढ़ में 17.5 कुंतल खोवा नष्ट कराया गया। फिरोजाबाद में 10 कुंतल मावा नष्ट कराने के साथ दो एफआईआर दर्ज हुईं। गाजियाबाद में संदिग्ध रसायन एवं अन्य सामग्री जब्त करते हुए दो एफआईआर दर्ज कराई गईं।

  • राखी पर महिलाओं को बड़ी राहत, यूपी रोडवेज ने बढ़ाई बसें; 60 साल से अधिक उम्र की महिलाओं का सफर मुफ्त

    राखी पर महिलाओं को बड़ी राहत, यूपी रोडवेज ने बढ़ाई बसें; 60 साल से अधिक उम्र की महिलाओं का सफर मुफ्त

     लखनऊ
     रक्षाबंधन पर महिलाओं की सुविधा के लिए परिवहन निगम बसें चला रहा है। 31 अगस्त तक अधिक से अधिक बसों का संचालन जारी रहेगा। प्रमुख बस स्टेशनों पर अतिरिक्त कर्मचारियों व पर्यवेक्षकों की तैनाती की गई है।

    26 से 31 अगस्त छह दिनों में 1800 किलोमीटर बस संचालन पूरा करने वाले ड्राइवरों, कंडक्टराें को 1200 रुपये प्रोत्साहन राशि मिलेगी। 1800 किलोमीटर से अधिक संचालन पर संविदा कर्मचारियों को अतिरिक्त किलोमीटर के लिए 55 पैसे प्रति किलोमीटर की दर से अतिरिक्त भुगतान होगा।

    मुफ्त यात्रा पर राज्यपाल की मुहर
    लोकमाता अहिल्या बाई मातृ शक्ति यात्रा योजना के तहत प्रदेश की 60 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को परिवहन निगम की साधारण बसों में 28 अगस्त से मुफ्त यात्रा सुविधा देने की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने स्वीकृति दिया है। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि यह सुविधा उस महिला यात्री को मिलेगी जिसकी आयु 60 वर्ष से अधिक हो और उत्तर प्रदेश की निवासिनी हो।

    परिवहन मंत्री ने बताया कि वास्तविक निश्शुल्क यात्रा व प्रतिपूर्ति की धनराशि का आंकलन परिवहन निगम करेगा। निगम हर माह मुफ्त यात्राओं व देय प्रतिपूर्ति का वास्तविक व्यय व उपभोग का संकलित सत्यापित विवरण परिवहन विभाग व शासन को उपलब्ध कराया जाएगा। लाभार्थियों को मुफ्त यात्रा के संंबंध में स्मार्ट कार्ड जारी के लिए निर्देश अलग से जारी किए जाएंगे।

     

  • UP में रक्षाबंधन की धूम, योगी-आनंदीबेन समेत नेताओं ने प्रदेशवासियों को दी शुभकामनाएं

    UP में रक्षाबंधन की धूम, योगी-आनंदीबेन समेत नेताओं ने प्रदेशवासियों को दी शुभकामनाएं

    लखनऊ
    राज्यपाल आनंदीबेन पटेल व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देश व प्रदेशवासियों को रक्षाबंधन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।

    राज्यपाल ने शुभकामना संदेश में कहा कि रक्षाबंधन भाई-बहन के बीच प्रेम, स्नेह, विश्वास और आपसी समर्पण का पवित्र पर्व है। यह पारिवारिक एवं सामाजिक संबंधों को सुदृढ़ करने के साथ-साथ परस्पर सम्मान, सहयोग और सौहार्द की भावना को बढ़ावा देता है।

    रक्षाबंधन भारतीय संस्कृति में नारी सम्मान और पारिवारिक मूल्यों की सुदृढ़ परंपरा का प्रतीक है। यह अवसर हमें महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान एवं सशक्तिकरण के प्रति अपने संकल्प को और मजबूत करने की प्रेरणा देता है।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि रक्षाबंधन भाई-बहन के पारस्परिक प्रेम, स्नेह, विश्वास और संकल्प का पर्व है। यह पर्व परिवार को जोड़ने, समाज में आत्मीयता बढ़ाने तथा बहन-बेटियों के सम्मान, सुरक्षा और स्वाभिमान के प्रति अपने दायित्व का स्मरण कराने वाला है। यह पर्व हमारी सनातन संस्कृति और सुदृढ़ सामाजिक परंपराओं का प्रतीक है। रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के रिश्ते का उत्सव नहीं, बल्कि कर्तव्य और संरक्षण की भावना का भी पर्व है।

    भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी तथा प्रदेश महामंत्री (संगठन) धर्मपाल सिंह ने प्रदेशवासियों को रक्षाबंधन पर्व की बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।

    पंकज चौधरी ने कहा कि भारतीय संस्कृति की विशेषता में परिवार के प्रति दायित्व-बोध और कर्तव्य-भाव का संकल्प निहित है। इसलिए हमारे प्रत्येक पर्व में पारिवारिक संबंधों की आत्मीयता को प्रगाढ़ करने के साथ-साथ अपने दायित्वों और संकल्पों को दृढ़ करने का भाव भी समाहित रहता है।

    धर्मपाल सिंह ने कहा कि युगों-युगों से रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को स्नेह, विश्वास और रक्षा के धागों से बांधता आया है।

    सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा रक्षाबंधन में बहने जो रक्षा सूत्र बांधती हैं, भाई उनकी सुरक्षा का वचन देता है। मां-बहनों की सुरक्षा एवं सम्मान का यह दिन संकल्प लेने का भी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि यह पर्व हमारे पारिवारिक एवं सामाजिक संबंधों को और मजबूत करने के साथ-साथ एक-दूसरे के प्रति सम्मान, सहयोग और सुरक्षा की भावना को भी प्रगाढ़ करता है।

     

  • बाइक सवार बदमाशों ने पुलिस पर की फायरिंग, जवाबी कार्रवाई में एक को लगी गोली; दूसरा फरार

    बाइक सवार बदमाशों ने पुलिस पर की फायरिंग, जवाबी कार्रवाई में एक को लगी गोली; दूसरा फरार

    देवरिया 
    यूपी में देवरिया जिले के सदर कोतवाली के बेलडाड मोड़ के समीप गुरुवार की रात पुलिस से बदमाश की मुठभेड़ हो गई। एक बदमाश को पैर में गोली लग गई। उसे उपचार के लिए महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कालेज में भर्ती कराया गया है। एसपी अभिजीत आर शंकर समेत अन्य अधिकारियों ने घटना स्थल पहुंच जानकारी ली।

    गुरुवार की देर रात कोतवाली पुलिस को मुखबिर ने सूचना दिया कि एक बाइक पर सवार होकर दो बदमाश बेलडाड मोड़ के समीप आ रहे है। सूचना के बाद कोतवाली पुलिस सक्रिय हो गई और बदमाशो की तलाश करने लगी। इस बीच एक बाइक पर दो युवक आते नजर आए, पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया तो वह बरहज रोड की तरफ भागने लगे, इस बीच उनकी बाइक अनियंत्रित हो गई और वह बाइक लेकर गिर पड़े। इसके बाद दोनों भागने लगे। उसमें से एक ने पुलिस टीम पर फायर झोंक दिया।

    पुलिस अपना बचाव करते हुए जवाबी कार्रवाई की तो एक के पैर में गोली लग गई और वह मौके पर गिर पड़ा। इसके बाद पुलिस उसे लेकर मेडिकल कालेज पहुंची। पूछताछ में उसने अपना नाम मनीष जायसवाल निवासी देवरिया खास सदर कोतवाली बताया। इसके पास से पुलिस ने एक बाइक, एक पिस्टल, तीन कारतूस बरामद किया है। एसपी अभिजीत आर शंकर ने बताया बताया कि बदमाश के साथ पुलिस की मुठभेड़ हुई है, पैर में गोली लगने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया है। फरार बदमाश की गिरफ्तारी के लिए टीम लगाई गई है। बदमाश मनीष जायसवाल के ऊपर कुल 12 केस दर्ज हैं।

    ईंट-भट्ठों पर आबकारी विभाग का छापा, दो गिरफ्तार
    आबकारी विभाग ने गुरुवार को ईंट भट्ठों पर छापेमारी किया। जिसमें कच्ची शराब के दो अवैध कारोबारी पुलिस के हत्थे चढ़ गए। जिनके विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया गया। जिला आबकारी अधिकारी सुरेश चन्द्र मिश्र के निर्देश पर आबकारी निरीक्षक मिथिलेश कुमार ने अपनी टीम के साथ रुद्रपुर क्षेत्र में ईंट भट्ठों पर छापेमारी किया। जिसमें रुद्रपुर कोतवाली क्षेत्र के फतेहपुर गांव के गिदहा टोला पर दस-दस लीटर शराब के साथ दो महिलाओं को टीम ने गिरफ्तार कर लिया।

    खाद्य सुरक्षा टीम ने लिए 11 नमूने, जांच को भेजे
    वहीं, देवरिया में आयुक्त खाद्य सुरक्षा विभाग एवं जिलाधिकारी के निर्देश पर खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा रुद्रपुर, बरहज तथा सलेमपुर तहसील क्षेत्र में आगामी रक्षा बंधन त्योहार को देखते हुए सघन प्रवर्तन कार्यवाही संचालित की। इसके तहत मिठाई तथा दूध के कुल 11 नमूने जांच को भेजे गए हैं।

  • H1N1 का बढ़ा खतरा: लखनऊ में अब तक 13 केस, महिला की मौत के बाद परिवार की निगरानी शुरू

    H1N1 का बढ़ा खतरा: लखनऊ में अब तक 13 केस, महिला की मौत के बाद परिवार की निगरानी शुरू

    लखनऊ 
    राजधानी में स्वाइन फ्लू से महिला की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। डॉक्टरों का कहना है कि स्वाइन फ्लू के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल संक्रमण जैसे हो सकते हैं। लेकिन सांस लेने में तकलीफ बढ़ना गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है। ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय मरीज की तत्काल जांच और इलाज जरूरी है।

    सर्दी-जुकाम, बुखार या खांसी पर सावधानी बरतें
    सीएमओ डॉ. एनबी सिंह ने बताया कि सर्दी-जुकाम, बुखार या खांसी होने पर भीड़भाड़ वाली जगहों से दूरी बनाने और संक्रमण फैलने से रोकने के लिए सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। गंभीर लक्षण दिखने पर मरीज को तत्काल अस्पताल ले जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि स्वाइन फ्लू मरीजों के जांच व इलाज के पुख्ता इंतजाम हैं। सिविल में 12 और बलरामपुर अस्पताल में छह बेड का अलग वार्ड बनाया गया है। इसमें गंभीर मरीजों के इलाज की सुविधा है। जरूरी दवाएं और जांच के इंतजाम हैं। उन्होंने कहा कि सभी अस्पताल स्वाइन फ्लू को अहतियात बरतें। स्वाइन फ्लू के लक्षण वाले मरीजों की जांच कराएं। घबराएं नहीं।

    एक माह में तीन लोगों में संक्रमण
    एक महीने में तीन लोग संक्रमण की जद में आ चुके हैं। जबकि जनवरी से अब तक लखनऊ में 13 लोगों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हो चुकी है। इनमें ज्यादातर मरीजों ने सर्दी-जुकाम और इससे जुड़े लक्षणों के बाद सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर से सलाह ली। डॉक्टरों की सलाह पर मरीजों की स्वाइन फ्लू की जांच कराई गई। एलाइजा जांच में संक्रमण की पुष्टि हुई। स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन मरीजों की निगरानी के साथ लोगों को सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं।

    स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक मौसम में बदलाव के दौरान वायरल संक्रमण के मामले बढ़ते हैं। स्वाइन फ्लू भी संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या सांस के साथ निकलने वाली संक्रमित बूंदों से फैल सकता है। शुरुआत में इसके लक्षण सामान्य सर्दी-जुकाम जैसे ही नजर आते हैं। ऐसे में लगातार लक्षण बने रहने या स्थिति बिगड़ने पर डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

    महिला के परिवार की भी होगी निगरानी
    इंदिरानगर निवासी 50 वर्षीय महिला की बलरामपुर अस्पताल में इलाज के दौरान मौत के बाद सीएमओ ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम अब यह पता लगाएगी कि महिला इस बीच कहां-कहां गई, किन लोगों के सम्पर्क में आई। महिला के संपर्क में आए लोगों की निगरानी की जा सकती है। परिवार के अन्य सदस्यों को फिलहाल आइसोलेट रहने की सलाह दी गई है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने परिवारीजनों को जरूरी दवाएं उपलब्ध कराने के साथ एहतियात बरतने की सलाह दी है।

    संक्रमित सतह छूने से बीमारी फैलने का खतरा
    स्वाइन फ्लू को इन्फ्लुएंजा-ए (H1N1) संक्रमण भी कहा जाता है। यह मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या सांस लेने से निकलने वाली बूंदों से फैलता है। संक्रमित सतह को छूने के बाद आंख, नाक या मुंह छूने से भी संक्रमण का खतरा हो सकता है।

    लक्षण
    तेज बुखार और ठंड लगना

    खांसी और गले में खराश

    नाक बहना या जुकाम

    शरीर और मांसपेशियों में दर्द

    अत्यधिक कमजोरी और थकान

    सांस लेने में परेशानी या सांस फूलना

    गंभीर स्थिति में ऑक्सीजन स्तर कम होना।

    बचाव
    खांसते या छींकते समय मुंह-नाक ढकें

    हाथ साबुन से बार-बार धोएं

    संक्रमित से दूरी रखें

    लक्षण होने पर भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें

    इस्तेमाल किए गए रुमाल या टिश्यू को सुरक्षित फेंकें

    सांस लेने में परेशानी या हालत बिगड़ने पर अस्पताल पहुंचें।

  • कानपुर नगर निगम में ‘ऑपरेशन क्लीन’ से हड़कंप, शिकायतों का फर्जी निस्तारण करने वालों पर गिरी गाज

    कानपुर नगर निगम में ‘ऑपरेशन क्लीन’ से हड़कंप, शिकायतों का फर्जी निस्तारण करने वालों पर गिरी गाज

    पटना 
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्ती के बाद कानपुर में बड़ा ऐक्शन शुरू हो गया है। नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने कानपुर नगर निगम में ‘ऑपरेशन क्लीन’ शुरू कर दिया है। पथ प्रकाश विभाग में तैनात ऐसे 11 स्विच मैन को निलंबित कर दिया है, जिन्होंने मौके पर स्ट्रीट लााइटें खराब या बंद होने के बाद भी मोबाइल पर दर्शा दिया कि शिकायतों का निस्तारण हो गया है। इसके साथ ही अपने कार्यालय के स्टेनो, रबिश प्रभारी और जोन दो में तैनात जेई को हटाकर दूसरी जगह तैनात कर दिया है।

    नगर आयुक्त की ओर से गुरुवार को जारी हुए निलंबन आदेश से हड़कंप मच गया। निलंबित होने वाले कर्मियों में जोन एक के मो. आसिफ, जोन दो के शिवनंदन, जोन तीन के अशोक कुमार, जोन चार के कलाम, शफी मोहम्मद व टीनू कश्यप, जोन छह के घनश्याम कुमार, रोहिताश दीक्षित, अनिल कुमार और रमेश चंद्र हैं। इन पर लापरवाही बरतने, शिकायतों का झूठा निस्तारण दर्शाने और अनुशासनहीनता बरतने का आरोप है। संबंधित जोन के पार्षदों द्वारा भी स्ट्रीट लाइटों के खराब होने की शिकायतें की जा रहीं थीं।

    कर्मचारियों को कई बार चेतावनी दी गई थी
    इन कर्मचारियों को कई बार चेतावनी दी गई थी मगर कोई सुधार नहीं हुआ। मामले में अपर नगर आयुक्त अनूप कुमार को जांच अधिकारी नामित किया गया है। नगर आयुक्त ने स्पष्ट किया कि जनहित के कार्यों में किसी भी प्रकार की शिथिलता क्षम्य नहीं होगी।

    हटाकर कहीं और भेजा गया
    जोनल कार्यालय जोन दो में तैनात अवर अभियंता दिनेश प्रसाद का स्थानांतरण कार्यालय जोन छह में कर दिया गया है। नगर आयुक्त ने अपने कार्यालय से संबद्ध स्टेनो संजय प्रसाद कटियार का भी स्थानांतरण जोन छह में कर दिया है। रबिश प्रभारी रफजुल रहमान को जोन दो के जोनल कार्यालय भेज दिया है। इनमें से अवर अभियंता दिनेश प्रसाद पर कुछ माफिया ठेकेदारों से संबंध होने के भी आरोप लग रहे थे। नगर आयुक्त के पास कई शिकायतें पहुंचीं थीं।

    अपर पुलिस आयुक्त करेंगे मॉनीटरिंग
    पुलिस आयुक्त ने बताया कि अपर पुलिस आयुक्त कानून और व्यवस्था डॉ. विपिन टाडा को मॉनीटरिंग की जिम्मेदारी दी गई है। वह नगरआयुक्त के साथ मिलकर पूरे मामले पर नजर रखेंगे।

    नगर आयुक्त के साथ चलेगा पुलिस एस्कॉर्ट
    टेंडर रैकेट सामने आने के बाद नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय को कमिश्नरेट पुलिस की ओर से सुरक्षा दी गई। उन्हें दो एसआई और चार पुलिस कर्मियों की भारी भरकम सुरक्षा मुहैया कराई गई है। जिसके बाद अब उनके साथ ही पुलिस एस्कॉर्ट चलेगा। अधिकारिक सूत्रों ने बताया कि ठेकेदारों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई के चलते सुरक्षा मुहैया कराई गई है। दरअसल ठेकेदार रसूखदार हैं।

    पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल के अनुसार नगर निगम के टेंडर रैकेट में ठेकेदार ही नहीं बल्कि अधिकारी और कर्मचारी भी शामिल हैं। इनसे जुड़ी कई शिकायतें प्राप्त हुई हैं जिनकी जांच कराई जा रही है। जेई और दूसरे कर्मचारी फर्में बनाकर ठेके ले रहे थे।

  • 2027 की तैयारी में BJP, चुनावी जंग से पहले संगठन-सरकार में बड़े फेरबदल के संकेत

    2027 की तैयारी में BJP, चुनावी जंग से पहले संगठन-सरकार में बड़े फेरबदल के संकेत

    लखनऊ 
    बीजेपी के लिए अब समय तेजी से निकल रहा है. 2027-28 में लगातार होने वाले 16 विधानसभा चुनावों की उलटी गिनती शुरू होने में अब महज 180 दिन बचे हैं. अकेले 2027 में बीजेपी को पांच राज्यों में अपनी सत्ता बचानी है, जिसमें गुजरात और उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य शामिल हैं. इसके अलावा पार्टी पंजाब में आम आदमी पार्टी को सत्ता से हटाने और हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस को हराने की भी तैयारी कर रही है. पार्टी के अंदर के बड़े नेताओं का कहना है कि मोदी दौर में अब तक के सबसे बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है। 

    इसे पार्टी के अंदर मदर ऑफ ऑल रीसेट यानी बहुत बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है. इसमें कई नेताओं की एंट्री, कुछ नेताओं की विदाई और संगठन में बड़े स्तर पर बदलाव शामिल हो सकते हैं। 

    बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता का कहना है, "चुनौतियां काफी बढ़ गई हैं. मामला सिर्फ युवाओं या सवर्ण वोटरों के बीच पार्टी की पकड़ कमजोर होने, महंगाई और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों तक सीमित नहीं है. हिंदुत्व की लहर भी पहले जैसी नहीं रही. अभी यह धारणा मजबूत होती दिख रही है कि हमारे पास समस्याओं को हल करने के लिए नए विचार नहीं हैं. ऐसे में सिर्फ ऊपर-ऊपर से बदलाव करने से काम नहीं चलेगा. बड़ी नीतिगत और राजनीतिक पहल की जरूरत है. इसके लिए पार्टी और सरकार दोनों में बदलाव पहला कदम हो सकता है। 

    मोदी सरकार 3.0 को करीब 27 महीने हो चुके हैं. 2014 के बाद यह पहली बार है जब बीजेपी लगातार नकारात्मक राजनीतिक नैरेटिव और बड़े राजनीतिक बदलावों का सामना कर रही है. ऐसे में पार्टी अब कमजोर संकेत देने के मूड में नहीं है। 

    बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन की टीम ने एक हफ्ते पहले संगठन में बदलाव की घोषणा की थी. लेकिन उस बदलाव से ऐसा लगा कि "पिक्चर अभी बाकी है."

    यह एक सामान्य संगठनात्मक बदलाव था. इसमें कई पुराने और भरोसेमंद नेताओं को उनके अच्छे रिकॉर्ड के आधार पर बनाए रखा गया. कुछ पुराने और नए चेहरों को सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए जगह दी गई. लेकिन इस पूरी सूची को समझने के लिए एक-एक नाम का बारीकी से विश्लेषण करना पड़ा कि पार्टी आखिर कौन सा राजनीतिक संदेश देना चाहती है.

    अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि बीजेपी और आरएसएस के शीर्ष नेतृत्व के सामने इस रीसेट का दायरा कितना बड़ा होगा?

    बीजेपी के अंदर के सूत्रों के मुताबिक पार्टी के स्तर पर सबसे बड़ा बदलाव शीर्ष फैसले लेने वाली संस्थाओं में हो सकता है. इसमें संसदीय बोर्ड सबसे महत्वपूर्ण है.

    संसदीय बोर्ड के पास बेहद अहम अधिकार हैं. विधानसभा चुनाव में किसे टिकट मिलेगा, इससे लेकर प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार तक जैसे बड़े फैसलों में इसकी भूमिका होती है.

    लेकिन संसदीय बोर्ड में सदस्यों की संख्या कम है. इसलिए नितिन नबीन की नई टीम के लिए इसमें बहुत ज्यादा बदलाव की गुंजाइश नहीं है.

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का बने रहना तय माना जा रहा है. राजनाथ सिंह बोर्ड के सबसे वरिष्ठ सदस्य हैं. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अब करीब छह महीने बाकी हैं. 2024 के लोकसभा चुनाव में सवर्ण ठाकुर वोटरों का एक हिस्सा बीजेपी से दूर गया था, जिसका असर पार्टी के प्रदर्शन पर पड़ा. ऐसे में किसी दूसरे ठाकुर नेता को शामिल करने से ज्यादा राजनीतिक फायदा शायद मौजूदा सदस्य को हटाने में नहीं होगा. इसलिए राजनाथ सिंह को हटाए जाने की संभावना कम है.

    संगठन महासचिव बीएल संतोष भी बने रह सकते हैं.
    इसका मतलब है कि बाकी सात सीटों में ही बदलाव की गुंजाइश है. फिलहाल इन पर जेपी नड्डा, बीएस येदियुरप्पा, सर्बानंद सोनोवाल, के लक्ष्मण, इकबाल सिंह लालपुरा, सुधा यादव और सत्यनारायण जटिया हैं.

    स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष होने के नाते बोर्ड में हैं. उनके बने रहने के पक्ष में एक वजह यह भी है कि हिमाचल प्रदेश, उनका गृह राज्य, नवंबर 2027 में विधानसभा चुनाव में जाएगा. दूसरी वजह यह है कि वह बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व की कार्यशैली को अच्छी तरह समझते हैं.

    इससे बदलाव के लिए सिर्फ छह सीटें बचती हैं. लेकिन किसे हटाया जाए, यह आसान फैसला नहीं होगा.

    बीजेपी के कर्नाटक के पुराने बड़े नेता बीएस येदियुरप्पा इस साल फरवरी में 80 साल के हो चुके हैं. अगर पार्टी और आरएसएस उनके बाहर होने की तैयारी करते हैं तो उन्हें कर्नाटक के प्रभावशाली लिंगायत समुदाय को भी ध्यान में रखना होगा. बोर्ड में येदियुरप्पा की मौजूदगी इस समुदाय को यह संदेश देती है कि बीजेपी के शीर्ष फैसलों में अब भी उनका प्रतिनिधित्व है. हालांकि कर्नाटक में विधानसभा चुनाव मई 2028 में होने हैं.

    असम में इसी साल अप्रैल में चुनाव हो चुके हैं. मोदी सरकार में मंत्री सर्बानंद सोनोवाल पूर्वोत्तर के बड़े चेहरे हैं और यह इलाका बीजेपी के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. उनका आदिवासी पृष्ठभूमि से आना उन्हें दोहरा राजनीतिक फायदा देता है। 

    इकबाल सिंह लालपुरा फिलहाल बीजेपी के संसदीय बोर्ड में अल्पसंख्यक चेहरा हैं, क्योंकि बोर्ड में कोई मुस्लिम सदस्य नहीं है. वह पूर्व आईपीएस अधिकारी हैं और 1978 में सिख-निरंकारी विवाद के बाद अलगाववादी नेता जरनैल सिंह भिंडरांवाले को गिरफ्तार कर चुके हैं. वह राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। 

    पंजाब विधानसभा चुनाव फरवरी 2027 में होने हैं. ऐसे में बीजेपी किसी युवा और ज्यादा चर्चित सिख चेहरे को संसदीय बोर्ड में शामिल कर सकती है। 

    सुधा यादव हरियाणा से आती हैं. नरेंद्र मोदी जब 1999 में बीजेपी के हरियाणा प्रभारी थे, तब गुजरात के मुख्यमंत्री बनने से भी पहले उन्होंने महेंद्रगढ़ लोकसभा सीट से सुधा यादव के नाम का समर्थन किया था। 

    सबसे ज्यादा संभावना यही मानी जा रही है कि सत्यनारायण जटिया को बदला जा सकता है.

    बीजेपी संसदीय बोर्ड में किसी प्रमुख पिछड़े वर्ग, अनुसूचित जाति, युवा या महिला चेहरे को शामिल करके भी राजनीतिक संदेश दे सकती है। 

    क्या मुख्यमंत्रियों को संसदीय बोर्ड में जगह दी जाएगी?
    जनवरी 2006 में बीजेपी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को संसदीय बोर्ड में शामिल किया था. लेकिन 2007 में उन्हें बाहर कर दिया गया. 2013 तक राजनीतिक परिस्थितियां बदल चुकी थीं. जून में बीजेपी की चुनाव अभियान समिति का प्रमुख बनाए जाने और सितंबर में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार घोषित किए जाने से पहले मार्च 2013 में मोदी को फिर संसदीय बोर्ड में शामिल किया गया था। 

    अगस्त 2022 में मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को बोर्ड से हटा दिया गया. इसके बाद अनौपचारिक तौर पर यह नियम बन गया कि पार्टी की शीर्ष संस्था में कोई मुख्यमंत्री नहीं होगा। 

    इसके पीछे तर्क था कि अगर मुख्यमंत्री ही बोर्ड के सदस्य होंगे तो दूसरे मुख्यमंत्रियों के बारे में फैसले कौन करेगा?

    लेकिन हाल की एक बैठक के बाद संकेत मिल रहे हैं कि बीजेपी की वैचारिक मार्गदर्शक संस्था आरएसएस उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को संसदीय बोर्ड में शामिल करने के पक्ष में है। 

    दोनों सवर्ण समुदाय से आते हैं. ऐसे में उनकी मौजूदगी बीजेपी को उस वर्ग तक पहुंचने का राजनीतिक संदेश देने का मौका दे सकती है, जिसके एक हिस्से में पार्टी को लेकर नाराजगी की बात कही जा रही है। 

    योगी और फडणवीस दोनों की राजनीतिक ताकत अलग-अलग है. योगी के साथ हिंदुत्व की मजबूत छवि, बड़े पैमाने पर जनसमर्थन जुटाने की क्षमता और उत्तर प्रदेश का राजनीतिक प्रभाव है. वहीं फडणवीस प्रशासनिक अनुभव, गठबंधन सहयोगियों के साथ काम करने की क्षमता और महाराष्ट्र का राजनीतिक वजन लेकर आते हैं। 

    दिल्ली में कुछ लोगों की हिचकिचाहट के बावजूद योगी आदित्यनाथ, नरेंद्र मोदी के बाद कई राज्यों में बीजेपी के सबसे ज्यादा मांग वाले प्रचारकों में शामिल हो चुके हैं. संसदीय बोर्ड में उनकी एंट्री उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले उनके राष्ट्रीय कद को और मजबूत कर सकती है। 

    देवेंद्र फडणवीस को भी बीजेपी के भविष्य के प्रमुख चेहरों में गिना जाता है.
    लेकिन यहां एक बड़ी राजनीतिक अड़चन है. अगर बीजेपी "संसदीय बोर्ड में कोई मुख्यमंत्री नहीं" वाला नियम खत्म करती है तो वह किसी भी मुख्यमंत्री को शामिल करके योगी को बाहर नहीं रख सकती. उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी इसे बड़ा मुद्दा बना सकती है और ठाकुर वोटरों को यह कहकर अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर सकती है कि बीजेपी में योगी की कोई खास हैसियत नहीं है। 

    दूसरी तरफ बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व सिर्फ योगी को शामिल करने से भी बचना चाहेगा, क्योंकि इससे पार्टी में उनका कद बाकी नेताओं से बहुत ज्यादा बढ़ सकता है। 

    सरकार में बड़ा रीसेट
    केंद्र सरकार में मंत्री बनना राजनीतिक बदलाव का सबसे बड़ा संकेत माना जाता है. इसलिए मोदी सरकार के मंत्रिमंडल में सबसे बड़ा बदलाव होने की संभावना है। 

    नरेंद्र मोदी 2014 से लगातार जरूरत और राजनीतिक समीकरणों के हिसाब से अपने मंत्रिमंडल में बदलाव करते रहे हैं। 

    मई 2014 में सत्ता में आने के बाद नवंबर 2014 में उन्होंने 21 नए मंत्रियों को सरकार में शामिल किया था. जुलाई 2016 में पांच मंत्रियों को हटाया गया और 19 नए चेहरों को जगह मिली. नवंबर 2017 में छह मंत्रियों ने इस्तीफा दिया, नौ नए मंत्री शामिल हुए और चार को प्रमोशन मिला। 

    जुलाई 2021 में कोरोना संकट, अर्थव्यवस्था की मुश्किलों और सरकार की छवि को लेकर उठे सवालों के बीच मोदी ने 2014 के बाद का सबसे बड़ा मंत्रिमंडल विस्तार किया. इसमें 36 नए मंत्री शामिल किए गए, 12 मंत्रियों ने इस्तीफा दिया और सात को प्रमोशन मिला। 

    अब पहले मौजूदा स्थिति का गणित समझिए.
    फिलहाल प्रधानमंत्री मोदी समेत केंद्रीय मंत्रिपरिषद में 68 सदस्य हैं. नियमों के मुताबिक प्रधानमंत्री समेत अधिकतम 81 मंत्री हो सकते हैं. यानी फिलहाल 12 नए लोगों को जगह देने की गुंजाइश है। 

    परीक्षा के पेपर लीक को लेकर छात्रों के विरोध के बाद धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की बात सामने आई. रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कुरियन के राज्यसभा कार्यकाल खत्म हो गए. हर्ष मल्होत्रा और पंकज चौधरी को क्रमशः दिल्ली और उत्तर प्रदेश बीजेपी का अध्यक्ष बनाया गया है। 

    पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और सामाजिक न्याय राज्य मंत्री बीएल वर्मा का राज्यसभा कार्यकाल नवंबर में खत्म हो रहा है। 

    पीयूष गोयल के मामले में भी बदलाव की संभावना पर चर्चा है. उन्हें बीजेपी का राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाए जाने के बाद अगर पार्टी "एक व्यक्ति, एक पद" का नियम लागू करती है तो वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय में नया मंत्री आ सकता है. हालांकि अमेरिका के साथ भारत की व्यापार वार्ता में गोयल की अहम भूमिका है, इसलिए उन्हें इस नियम से छूट मिलने की संभावना भी है। 

    बीजेपी के सूत्रों का कहना है कि कामकाज और राजनीतिक उपयोगिता के आधार पर 12 से 18 मंत्रियों को हटाया जा सकता है या उन्हें संगठन में राजनीतिक जिम्मेदारी दी जा सकती है। 

    अगर प्रधानमंत्री लोकसभा की कुल संख्या के 15 प्रतिशत तक मंत्री बनाने की सीमा का पूरा इस्तेमाल करते हैं तो करीब 30 नए चेहरों के लिए जगह बन सकती है। 

    काम के बोझ और मंत्रियों की क्षमता के हिसाब से मंत्रालयों का बंटवारा भी बदला जा सकता है। 

    29 कैबिनेट मंत्रियों में से करीब एक दर्जन, सभी पांच स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री और 17 राज्य मंत्री दो या उससे ज्यादा मंत्रालय संभाल रहे हैं। 

    मंत्रिमंडल में कौन आएगा और कौन बाहर जाएगा, इसमें सामाजिक और राजनीतिक समीकरण बड़ी भूमिका निभाएंगे। 

    फिलहाल मंत्रिपरिषद में 27 मंत्री ओबीसी समुदाय से, करीब 10 अनुसूचित जाति से, पांच अनुसूचित जनजाति से और पांच धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों से हैं. सात महिला मंत्री हैं. बीजेपी इन वर्गों की हिस्सेदारी और बढ़ाने की कोशिश कर सकती है। 

    मंत्रिमंडल की औसत उम्र करीब 58 साल है. लेकिन हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के नेता जीतन राम मांझी जैसे नेता भी हैं, जो अक्टूबर में 82 साल के हो जाएंगे. प्रधानमंत्री कुछ युवा चेहरों को शामिल करके औसत उम्र कम करना चाह सकते हैं। 

    हालांकि यह पूरा बदलाव सिर्फ जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों पर आधारित नहीं होगा. गठबंधन और मंत्रियों के प्रदर्शन का भी बड़ा असर होगा। 

    2014 और 2019 की तरह बीजेपी के पास 2024 के बाद अकेले पूर्ण बहुमत नहीं है. अब उसे गठबंधन सहयोगियों की मांगों का भी ध्यान रखना पड़ता है. इससे बीजेपी के पास बदलाव करने की स्वतंत्रता कुछ कम हो जाती है। 

    एकनाथ शिंदे गुट के पास ऑपरेशन टाइगर के बाद 13 सांसद हैं. फिलहाल उसे सिर्फ एक राज्य मंत्री का पद मिला हुआ है. पार्टी ने बीजेपी को संकेत दिया है कि उसके नेता के सांसद बेटे श्रीकांत शिंदे को मंत्री बनाया जा सकता है। 

    चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी ने 2024 में जितनी सीटों पर चुनाव लड़ा था, सभी जीत ली थीं. उसके पास पांच सांसद हैं. बीजेपी उत्तर प्रदेश में पासवान का इस्तेमाल करना चाहती है, क्योंकि बिहार आधारित उनकी पार्टी का दलितों के बीच मजबूत आधार है। 

    पासवान अपने पिता के पास रहे मंत्रालयों में से किसी एक मंत्रालय की मांग कर सकते हैं. खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय से किसी बड़े मंत्रालय में प्रमोशन मिलने से युवा नेता की राष्ट्रीय छवि मजबूत हो सकती है। 

    जून में तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों के ममता बनर्जी का साथ छोड़कर नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी ऑफ इंडिया में शामिल होने की बात सामने आई. ये सांसद सरकार से मंत्री पद के रूप में राजनीतिक इनाम की उम्मीद कर सकते हैं. हालांकि उनके दल-बदल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही याचिका इस रास्ते में बड़ी अड़चन है। 

    राघव चड्ढा समेत आम आदमी पार्टी के छह अन्य सांसद बीजेपी के साथ आ चुके हैं. डेटा और संगठन के काम में माहिर संदीप पाठक को नितिन नबीन की टीम में जगह मिली है. अगर राघव चड्ढा को केंद्र सरकार में मंत्री बनाया जाता है तो यह पंजाब के मतदाताओं के लिए बड़ा राजनीतिक संदेश हो सकता है। 

    इसके अलावा जातीय और क्षेत्रीय संदेश भी महत्वपूर्ण होंगे.
    आने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और गुजरात से युवा नेताओं या अलग-अलग सामाजिक वर्गों में प्रभाव रखने वाले नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। 

  • कानपुर में विकराल हुई पांडु नदी, घरों में घुसा पानी; गंगा का जलस्तर बढ़ने से मचा हड़कंप

    कानपुर में विकराल हुई पांडु नदी, घरों में घुसा पानी; गंगा का जलस्तर बढ़ने से मचा हड़कंप

    कानपूर 
    यूपी के कानपुर में लगातार हो रही बारिश के चलते पांडु नदी विकराल रूप में आ गई है। कानपुर में पांडु नदी का पानी बर्रा आठ मेहरबान सिंह का पुरवा कच्ची बस्ती इलाके में घुस गया है। पूरा इलाका जलमग्न हो गया है। 150 से ज्यादा परिवारों ने परेशान होकर इलाके से पलायन कर लिया है। उन्होंने करीबियों व रिश्तेदारों के घरों में आसरा बनाया है। उधर, गंगा नदी भी खतरे के करीब पहुंच चुकी है।

    लगातार बारिश के चलते पांडु नदी का जलस्तर काफी बढ़ गया है। कटान होने के चलते पांडु नदी का पानी कच्ची बस्ती में घुस गया है। पानी लोगों के घरों तक आ गया। बाढ़ राहत शिविर बर्रा कम्पोजिट विद्यालय, आई सेक्टर में राहत सामग्री वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

    कार्यक्रम में बाढ़ प्रभावित 100 परिवारों को विधायक महेश त्रिवेदी द्वारा राहत सामग्री वितरित की गई। इसमें जिला उपाध्यक्ष शिवम मिश्रा, कमल त्रिवेदी, रोहित मिश्रा अंकित शर्मा मौजूद रहे। तहसीलदार विनय द्विवेदी ने बताया कि पांडु नदी के बढ़े हुए जलस्तर को लेकर राहत शिविर चालू हो गया है। कोई भी राहत शिविर में रहना नहीं चाह रहा है।

    बर्रा आठ मेहरबान सिंह का पुरवा कच्ची बस्ती हुई जलमग्न, गंगा खतरे के करीब
    यूपी के बिठूर में गंगा का पानी कटरी के गांवों की ओर तेजी से बढ़ने लगा है। बाढ़ का संकट घरों के मुहाने पर आकर खड़ा हो गया। इस समय गंगा का जलस्तर 114.300 मीटर पर पहुंच गया है। बिठूर से गंगा बैराज के बीच पानी अब खतरे के निशान को पार कर कटरी के गांवों में घुसने लगा है। बुधवार रात गंगा का पानी कटरी में तेजी से घुसा। बगीचों, खेतों में भरता हुआ पानी अब गांव के मार्गों में भरने लगा है। ख्योरा कटरी का भगवानदीनपुरवा पानी से पूरी तरह से घिर चुका है। भोपालपुरवा से भगवानदीनपुरवा जाने वाले मार्ग पर डेढ़ से दो फुट तक पानी भर चुका है।

    गंगा से आ रहा पानी अब भोपाल पुरवा तक बढ़ने लगा है। शुक्रवार तक और विकराल होने की संभावना जताई जा रही है। इसी के साथ बनिया पुरवा, दुर्गापुरवा, गिल्लीपुरवा, लक्ष्मणपुर, शिवदिनपुरवा, चंदीपुरवा, प्रतापपुरहरी गांव समेत दो दर्जन गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। कटरी शंकरपुर के जितेंद्र निषाद और ख्योरा कटरी के अशोक निषाद ने बताया कि पानी तेजी से बगीचों से होते हुए गांव की तरफ बढ़ रहा है। तहलसीदार विनय द्विवेदी ने बताया कि गंगा नदी के जलस्तर की लगातार मानीटरिंग हो रही है।

  • योगी सरकार के संकल्प को गति देगा राज्य औद्यानिक निर्यात प्रोत्साहन बोर्ड: मंत्री दिनेश प्रताप

    योगी सरकार के संकल्प को गति देगा राज्य औद्यानिक निर्यात प्रोत्साहन बोर्ड: मंत्री दिनेश प्रताप

    किसानों की उपज को बिक्री के लिए विदेशों तक पहुंचाने के लिए वेबसाइट का शुभारंभ, निर्यातकों और एफपीओ के बीच एमओयू 

    राज्य औद्यानिक निर्यात प्रोत्साहन बोर्ड की दूसरी बैठक में निर्यात सुगम बनाने पर मंथन  

    योगी सरकार के संकल्प को गति देगा राज्य औद्यानिक निर्यात प्रोत्साहन बोर्ड: मंत्री दिनेश प्रताप 

    बोर्ड की वेबसाइट से पता चलेगा कि किस जिले की कौन-सी उपज किस देश में बिकेगी

    उत्तर प्रदेश में तैयार हुए करीब 3,000 निर्यातक, वैश्विक बाजार से सीधे जुड़ रहे किसान
     
    सभी 75 जिलों से किसान, निर्यातक और एफपीओ जुटे

    लखनऊ,
     योगी सरकार किसानों की उपज को स्थानीय-राष्ट्रीय बाजारों से आगे वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने तथा कृषि एवं औद्यानिकी क्षेत्र में मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। इसी क्रम में गुरुवार को उद्यान भवन के आडिटोरियम में उत्तर प्रदेश राज्य औद्यानिक निर्यात प्रोत्साहन बोर्ड की दूसरी बैठक एवं कार्यशाला हुई। इसकी अध्यक्षता उद्यान राज्यमंत्री मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह ने की। इस अवसर पर बोर्ड की वेबसाइट https://upsheb.in/ का शुभारंभ किया गया तथा निर्यातकों और एफपीओ के बीच एमओयू भी हुआ। बैठक में प्रदेश के सभी 75 जनपदों से प्रगतिशील किसान, निर्यातक, एफपीओ, उत्पादक कंपनियां और संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल हुए। 

    उद्यान राज्यमंत्री ने कहा कि राज्य औद्यानिक निर्यात प्रोत्साहन बोर्ड राज्य के किसानों की उपज को सात समंदर पार तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा। बोर्ड की वेबसाइट का शुभारंभ किसानों और निर्यातकों के लिए महत्वपूर्ण सुविधा के रूप में सामने आया है। अब प्रदेश का किसान अथवा निर्यातक यह जानकारी प्राप्त कर सकेगा कि उसके जनपद की कौन-सी सरप्लस उपज किस देश के बाजार में भेजी जा सकती है, संबंधित देश के लिए उत्पाद के क्या मानक आवश्यक हैं और निर्यात के लिए किन प्रक्रियाओं का पालन करना होगा। इसके साथ ही निर्यातकों को राज्य सरकार एवं बोर्ड की ओर से उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं, सहयोग, मार्गदर्शन और अनुदान से संबंधित जानकारी भी ऑनलाइन उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है। बोर्ड का उद्देश्य किसानों और निर्यातकों को बाजार, गुणवत्ता और निर्यात की प्रक्रिया से संबंधित जानकारी आसानी से उपलब्ध कराना है।

    उन्होंने कहा कि कुछ समय पहले तक उत्तर प्रदेश के निर्यातक मुख्य रूप से बड़े शहरों तक सीमित थे, लेकिन आज प्रदेश के सभी 75 जिलों में निर्यातक अपनी भूमिका निभा रहे हैं। वर्तमान में प्रदेश में करीब 3000 निर्यातक तैयार हो चुके हैं, जो किसानों की उपज को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश से औद्यानिक एवं कृषि आधारित प्रसंस्कृत उत्पादों के निर्यात में लगातार वृद्धि हुई है। वर्ष 2016-17 में 727 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ था, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 1132 करोड़ रुपये हो गया। प्रदेश की कृषि एवं औद्यानिक उपज अमेरिका, यूएई, जर्मनी, सऊदी अरब, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और स्वीडन सहित विभिन्न देशों तक पहुंच रही है। 

    उद्यान राज्यमंत्री ने जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा के लिए प्रदेश की उपज गुणवत्तापूर्ण होने के साथ संबंधित देशों के निर्धारित मानकों पर खरी उतरनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जेवर एयरपोर्ट के तैयार होने से प्रदेश के कृषि उत्पादों को हवाई कार्गो के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक तेजी से पहुंचाने की संभावनाएं बढ़ेंगी। इसके साथ ही जेवर के पास राज्य सरकार द्वारा इंटीग्रेटेड टेस्टिंग ट्रीटमेंट पार्क विकसित किया जा रहा है, जहां अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप परीक्षण, प्रमाणन और पैकेजिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

    मंत्री सिंह ने आलू किसानों के हित में सरकार के प्रयासों का उल्लेख किया, बताया कि बाजार में भाव में उतार-चढ़ाव की स्थिति में किसानों को राहत देने के लिए 1000 करोड़ रुपये के भामाशाह भाव स्थिरता कोष का प्रावधान किया गया है। वहीं शीतगृह में भंडारित आलू के लिए 100 रुपये प्रति क्विंटल शीतगृह किराये पर अनुदान तथा प्रमाणित आलू बीज की बिक्री दर में 1000 रुपये प्रति क्विंटल की छूट देने की व्यवस्था की गई है। बेहतर आलू कोल्ड स्टोरेज स्थापित करने के लिए भी उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अनुदान की व्यवस्था की गई है। 

    मंत्री सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के संकल्प को साकार करने में उद्यान विभाग और राज्य औद्यानिक निर्यात प्रोत्साहन बोर्ड महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। किसानों की उपज को वैश्विक बाजार उपलब्ध कराने, निर्यातकों को प्रोत्साहित करने और कृषि उत्पादों में मूल्य संवर्धन बढ़ाने से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। 

    कार्यशाला में एपीडा के उप महाप्रबन्धक डॉ. सीबी सिंह, कृषि विपणन एवं कृषि विदेश व्यापार, लखनऊ के सहायक निदेशक संजय सिंह, एफआईईओ कानपुर के सहायक निदेशक आलोक श्रीवास्तव, सुधांशु सिंह, क्षेत्रीय निदेशक सी-सार्क, आगरा ने भी विचार रखे।  

    इस अवसर पर उद्यान विभाग के अपर मुख्य सचिव उद्यान बीएल मीणा, निदेशक भानु प्रकाश राम, उप महाप्रबंधक एपीडा सीबी सिंह, उपनिदेशक मंडी रामजी मिश्रा, अध्यक्ष कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन तृप्ति सिंह आदि उपस्थित रहे।

  • सरकारी स्कूलों के खिलाफ अफवाह फैलाने वालों पर शिकंजा! FIR के लिए BSA ने DM को सौंपी रिपोर्ट

    सरकारी स्कूलों के खिलाफ अफवाह फैलाने वालों पर शिकंजा! FIR के लिए BSA ने DM को सौंपी रिपोर्ट

     प्रयागराज
    कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के सरकारी स्कूलों की दशा सुधारने के लिए 15 अगस्त से शुरू हुए ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के बीच सोशल मीडिया पर परिषदीय स्कूलों के भ्रामक वीडियो वायरल करने को लेकर सख्ती शुरू हो गई है। प्रयागराज में दो स्कूलों से जुड़े मामले में बीएसए अनिल कुमार ने डीएम को रिपोर्ट भेज दी है और अब गलत सूचनाएं प्रसारित करने वालों के खिलाफ एफआईआर कराई जाएगी।

    दरअसल, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक यूजर ने कौंधियारा विकास खंड के प्राथमिक विद्यालय कुआं में शौचालय, सड़क, पेयजल और विद्युत कनेक्शन न होने की सूचना शेयर की थी। इस पर सीडीओ हर्षिका सिंह ने खुद प्रधानाध्यापिका पूनम साहू से फोन पर विद्यालय में उपलब्ध पानी, बिजली, सड़क और शौचालय की सुविधाओं के संबंध में जानकारी प्राप्त की। प्रिंसिपल ने सूचित किया कि विद्यालय में आवश्यक सुविधाए उपलब्ध हैं और विद्यालय की स्थिति संतोषजनक है। विद्यालय में बालक एवं बालिकाओं के लिए उपलब्ध शौचालय उपयोग योग्य है। विद्यालय तक पहुंचने के लिए सड़क की समुचित व्यवस्था है। पेयजल के साथ विद्युत व्यवस्था उपलब्ध है।

    वहीं, फेसबुक पर बहादुरपुर ब्लॉक के स्कूल में पहुंच मार्ग को लेकर वायरल वीडियो को भी बीएसए ने गलत बताया है। बीएसए का कहना है कि जांच में पता चला कि वायरल वीडियो ग्राम पंचायत कोटवा स्थित प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों का है। उच्च प्राथमिक विद्यालय की प्रभारी प्रधानाध्यापक मिथिलेश त्रिपाठी के अनुसार, वीडियो में दिखाई दे रहे बच्चे ग्राम पंचायत कोटवा के बिंद और सोनकर बस्ती के हैं।

    बारिश के कारण सड़क पर आया था पानी
    उन्होंने आगे बताया कि सोनकर बस्ती के पास ही बिजलीघर स्थित है और रास्ता पक्का है। सड़क के दोनों ओर तालाब हैं। दो दिन पहले अत्यधिक बारिश के कारण तालाब का पानी सड़क पर आ गया था जो कि अब खाली हो गया है। बस्ती से आने के लिए एक पगडंडी रास्ता भी वर्तमान में जलमग्न है। विद्यालय आने के लिए दूसरा पक्का रास्ता भी है। कुछ लोगों ने जानबूझकर बच्चों को पानी से होकर जाने को कहा और वीडियो बनाकर वायरल कर दिया। बीएसए का कहना है कि गलत तथ्यों के आधार पर परिषदीय विद्यालयों की छवि खराब करने वालों के खिलाफ एफआईआर कराई जाएगी।

    मेरठ में दो युवकों का चालान, देवरिया में केस दर्ज
    इससे पहले स्कूलों की बदहाली का वीडियो बनाने पर मेरठ में दो युवकों का चालान कर दिया गया। वहीं, देवरिया में युवक के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया। दरअसल, मेरठ में कांग्रेस नेता के बेटे और उसके साथी को सरूरपुर ब्लॉक के कालंद गांव स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय की बदहाल व्यवस्थाओं का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाली थी।