Category: उत्तर प्रदेश

  • वर्ष 2021 में 12 पाठ्यक्रम से शुरू हुई यात्रा अब 53 तक पहुंची

    वर्ष 2021 में 12 पाठ्यक्रम से शुरू हुई यात्रा अब 53 तक पहुंची

    गोरखपुर

    स्थापना के मात्र पांच वर्ष में ही महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर (एमजीयूजी) रोजगारपरक शिक्षा और चिकित्सा सेवा के प्रतिमान गढ़ रहा है। इस विश्वविद्यालय ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में उच्च, विशिष्ट, रोजगारपरक और चिकित्सा शिक्षा को नई राह दिखाई है। पांच साल के भीतर एमबीबीएस, बीएएमएस समेत चार दर्जन से अधिक रोजगारपरक पाठ्यक्रमों की शुरुआत, शोध-अनुसंधान के लिए कई प्रतिष्ठित संस्थाओं के साथ एमओयू कर इस विश्वविद्यालय ने शैक्षिक प्रौद्योगिकी और गुणवत्ता पर विशेष जोर दिया है तथा गोरखपुर को ज्ञान की नगरी बनाने की दिशा में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वर्ष 2021 में 12 पाठ्यक्रम से शुरू हुई इस विश्वविद्यालय की शैक्षिक यात्रा में अब 53 विशिष्ट और रोजगारपरक पाठ्यक्रम जुड़ चुके हैं।

    28 अगस्त, 2021 को तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों लोकार्पित महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय पांच वर्ष में ही शिक्षा के विशिष्ट व प्रमुख केंद्र के रूप में विख्यात हो चुका है। यहां भारतीय ज्ञान मूल्यों का संरक्षण व संवर्धन, वर्तमान और भावी समय को ध्यान में रखकर अनुसंधानिक तरीके से किया जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के परिप्रेक्ष्य में यहां संचालित पाठ्यक्रम ऐसे है, जो समाज के लिए लाभकारी, विद्यार्थी के लिए सहज व रोजगारदायी हैं। इस विश्वविद्यालय के कुलाधिपति (गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री) योगी आदित्यनाथ की मंशा वर्ष 2032 तक गोरखपुर को 'नॉलेज सिटी' के रूप में ख्यातिलब्ध कराने की है।
     उल्लेखनीय है कि 10 दिसम्बर, 2018 को महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक सप्ताह समारोह में आए तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने परिषद के शताब्दी वर्ष 2032 तक गोरखपुर को नॉलेज सिटी बनाने का आह्वान किया था।

    एमजीयूजी के कुलसचिव डॉ. प्रदीप कुमार राव बताते हैं कि इस विश्वविद्यालय की नींव में युग पुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज व राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज के विचार हैं, जिनका मानना था कि दासता से मुक्ति, स्वावलंबन व सामाजिक विकास के लिए शिक्षा ही सबसे सशक्त माध्यम है। वर्तमान गोरक्षपीठाधीश्वर एवं कुलाधिपति योगी आदित्यनाथ इसी वैचारिक परंपरा के संवाहक हैं। उनके मार्गदर्शन में इस विश्वविद्यालय का लक्ष्य भारतीय ज्ञान मनीषा के आलोक में मूल्य संवर्धित, रोजगारपरक उस शिक्षा को बढ़ावा देना है, जो समग्र रूप में सामाजिक व राष्ट्रीय हितों का पोषण कर सके। इसी लक्ष्य की दिशा में कदम बढ़ाते हुए यहां श्री गोरक्षनाथ मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में एमबीबीएस और गुरु गोरक्षनाथ इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में बीएएमएस की पढ़ाई सफलतापूर्वक संचालित हो रही है। इसके अलावा विश्वविद्यालय की नर्सिंग फैकल्टी में दर्जनभर रोजगारदायी पाठ्यक्रम पूर्ण क्षमता से संचालित हैं। विश्वविद्यालय में मेडिकल साइंस, नर्सिंग, पैरामेडिकल, एग्रीकल्चर, एलॉयड हेल्थ साइंसेज और फार्मेसी, बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन से संबंधित डिप्लोमा से लेकर मास्टर और पीएचडी तक के चार दर्जन से अधिक पाठ्यक्रम हैं। मसलन दो वर्षीय एएनएम, तीन वर्षीय जीएनएम, चार वर्षीय बीएससी नर्सिंग, दो वर्षीय पोस्ट बेसिक बीएससी नर्सिंग, दो वर्षीय एमएससी नर्सिंग, डिप्लोमा इन डायलिसिस, डिप्लोमा इन आप्टिमेट्री, डिप्लोमा इन इमरजेंसी एंड ट्रामा केयर, डिप्लोमा इन एनेस्थिसिया एंड क्रिटिकल केयर, डिप्लोमा इन आर्थोपेडिक एंड प्लास्टर टेक्निशियन, डिप्लोमा इन लैब टेक्निशियन (सभी दो वर्षीय), चार वर्षीय बीएससी एग्रीकल्चर, बीएससी ऑनर्स बॉयोटेक्नालोजी, बीएससी आनर्स बॉयोकेमिस्ट्री, बीएससी आनर्स माइक्रोबॉयोलोजी, बीएससी फोरेंसिक साइंस, दो वर्षीय एमएससी बॉयोटेक्नालोजी, तीन वर्षीय एमएससी मेडिकल बॉयोकेमिस्ट्री, तीन वर्षीय एमएससी मेडिकल माइक्रोबॉयोलोजी, एमएससी फोरेंसिक साइंस, दो वर्षीय एमएससी एनवायरमेंटल साइंस, एमएससी एग्रोनोमी, एमएससी हॉर्टिकल्चर, एमएससी प्लांट पैथालॉजी, एमएससी जेनेटिक्स एंड प्लांट ब्रीडिंग, चार वर्षीय बी फार्मा, दो वर्षीय डी फार्मा, बीबीए लॉजिस्टिक, बीबीए ई कॉमर्स, एमबीए फार्मा मैनेजमेंट, एमबीए एग्री बिजनेस मैनेजमेंट, एमबीए फाइनेंस एंड मार्केटिंग,एमबीए इन हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन, और पीएचडी (बायो टेक्नोलॉजी, आयुर्वेद, मेडिकल बायोकेमिस्ट्री, मेडिकल माइक्रोबायोलॉजी,  एग्रीकल्चर, फोरेंसिक साइंस, फार्मेसी, कॉमर्स एंड मैनेजमेंट), बीसीए और एमसीए आदि। वर्तमान दौर में ये सभी पाठ्यक्रम रोजगारपरक हैं और उनकी बहुत मांग है। आने वाले समय में नवाचार आधारित पाठ्यक्रमों की लंबी श्रृंखला दिखेगी। एमजीयूजी देश का पहला ऐसा विश्वविद्यालय है, जहां छात्र संसद का चुनाव स्वनिर्मित सॉफ्टवेयर से ऑनलाइन कराया जा रहा है।

    बीएएमएस और एमबीबीएस के विद्यार्थियों को मिली विशेष उपलब्धि
    एमजीयूजी के बीएएमएस और एमबीबीएस के विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय स्तर पर विशेष उपलब्धि हासिल कर पूरे प्रदेश का मान बढ़ाया है। बीएएमएस के विद्यार्थियों को प्रति वर्ष औसतन पांच विशिष्ट अनुसंधान के लिए चयनित किया जा रहा है, तो एमबीबीएस के दो विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर के शोध अनुसंधान के लिए चयनित किया गया है। निजी विश्वविद्यालय के रूप में ऐसी उपलब्धि हासिल करने वाला एमजीयूजी राज्य का पहला विश्वविद्यालय है। 

    शोध, नवाचार व स्टार्टअप को बढ़ावा देने वाले एमओयू

    शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में शोध-अनुसंधान, नवाचार और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए एमजीयूजी ने अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (ईरी), लुम्बिनी बौद्ध विश्वविद्यालय नेपाल, दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजाति विश्वविद्यालय, एम्स गोरखपुर, केजीएमयू लखनऊ, आरएमआरसी गोरखपुर, महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान अहमदाबाद, वैद्यनाथ आयुर्वेद, इंडो-यूरोपियन चैंबर ऑफ स्माल एंड मीडियम इंटरप्राइजेज, बाबा साहब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय लखनऊ, राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान, राष्ट्रीय कृषि उपयोगी सूक्ष्मजीव ब्यूरो, भारतीय बीज विज्ञान संस्थान, जुबिलेंट एग्रीकल्चर रूरल डेवलपमेंट सोसाइटी, लॉजिस्टिक सेक्टर स्किल काउंसिल आदि के साथ एमओयू किया है।

    अत्याधुनिक और आयुर्वेद, दोनों पद्धतियों से उत्कृष्ट चिकित्सा का केंद्र

    एमजीयूजी शिक्षा के साथ ही परिसर में संचालित अस्पतालों के जरिये काफी किफायती दर पर मॉडर्न मेडिसिन और आयुर्वेद, दोनों की उत्कृष्ट चिकित्सा का केंद्र भी बन गया है। इसके मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पताल में जटिल कैंसर तक की सर्जरी का सफलतापूर्वक इलाज हो रहा है। यहां पूर्वी उत्तर प्रदेश के अलावा देश के अन्य राज्यों से भी मरीज इलाज कराने आ रहे हैं। इसी तरह आयुर्वेद अस्पताल में भी उच्च स्तरीय इलाज की सुविधा है। आयुर्वेद अस्पताल के विश्व स्तरीय 11 कॉटेज वाले पंचकर्म केंद्र ने कम समय में ही विश्वसनीय उपचार की ख्याति अर्जित की है। यहां कई दुर्लभ बीमारियों का सफल इलाज हो चुका है।

    पांच साल में हुआ दो राष्ट्रपति का आगमन

    एमजीयूजी निजी क्षेत्र का संभवतः प्रदेश का पहला विश्वविद्यालय है, जहां पांच साल के दौरान दो बार राष्ट्रपति का आगमन हुआ। 28 अगस्त, 2021 को तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद इसका लोकार्पण करने आए थे। जबकि एक जुलाई 2025 को वर्तमान राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु यहां अकादमिक भवन, ऑडिटोरियम और पंचकर्म चिकित्सा केंद्र का लोकार्पण करने आईं थीं।

    पांचवां स्थापना दिवस समारोह शुक्रवार को

    महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर में आगामी 28 अगस्त (शुक्रवार) को पांचवां स्थापना समारोह मनाया जाएगा। दोपहर बाद 3 बजे से होने वाले समारोह में मुख्यमंत्री एवं इस विश्वविद्यालय के कुलाधिपति योगी आदित्यनाथ अपने आशीर्वचन से विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करेंगे।

  • रक्षाबंधन पर पौधरोपण कर भाई-बहन लेंगे पर्यावरण संरक्षण का संकल्प

    रक्षाबंधन पर पौधरोपण कर भाई-बहन लेंगे पर्यावरण संरक्षण का संकल्प

    लखनऊ

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उत्तर प्रदेश में वनाच्छादन बढ़ाने की पहल रंग ला रही है। वन विभाग की पहल पर रक्षाबंधन पर भाई-बहन के रिश्ते को और प्रगाढ़ता देते हुए पौधरोपण कराया जाएगा। रक्षाबंधन पर पौधरोपण कर भाई-बहन पर्यावरण संरक्षण का संकल्प भी लेंगे। 'पौधरोपण महायज्ञ-2026' के तहत (28 अगस्त, शुक्रवार) को सभी वन प्रभागों में भाई-बहन 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत पौधरोपण करेंगे। वन विभाग ने इस पुनीत अवसर के लिए कई भाई-बहनों से संपर्क भी साधा है। पौधों को रक्षासूत्र बांधकर पेड़ बनाने तक का संकल्प लिया जाएगा। यहां आम लोग भी पौधरोपण कर सकेंगे। सीएम योगी के हरित आवरण को बढ़ाने के उद्देश्य को लेकर लखनऊ के साथ ही समस्त वन प्रभागों में भी इस पहल को मूर्त रूप दिया जाएगा।

    रक्षासूत्र बांधकर पौधों की सुरक्षा का भी लेंगे संकल्प 

    पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखने के लिए पौधरोपण अनिवार्य है। पौधरोपण के उपरांत यहां पौधों को रक्षासूत्र भी बांधा जाएगा। फिर पौधरोपण करने वाले संकल्प लेंगे कि पौधे के पेड़ बनने तक इसकी रक्षा करेंगे। इसमें सामाजिक, सांस्कृतिक संगठनों का भी सहयोग लिया जाएगा। वन विभाग के मुताबिक हरे पौधों को रक्षासूत्र बांधकर इनकी सुरक्षा व संरक्षा का संकल्प लिया जाएगा। पेड़ छाया और ऑक्सीजन प्रदान करते हैं। जिस तरह बहनें भाई को राखी बांधती हैं तो भाई सुरक्षा का विश्वास दिलाता है, उसी प्रकार पेड़ लगाकर उसे सुरक्षा का विश्वास दिलाते हुए प्रकृति के रूप में सार्थक उपहार दिया जाएगा। 

    विशिष्ट वनों को स्थापित कर रही योगी सरकार

    योगी सरकार सामाजिक समरसता, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पर्यावरण संरक्षण और जलवायु संतुलन के लिए प्रयासरत है। इसके लिए मुख्यमंत्री के निर्देश पर विशिष्ट वन भी स्थापित किए जा रहे हैं। नवीन विशिष्ट वनों की स्थापना थीम के अंतर्गत सरकार अलग-अलग उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए कई प्रकार के वनों का निर्माण कर रही है। 

    यूपी में एक दिन में लगाए गए थे 35.27 करोड़ पौधे 

    पौधरोपण महायज्ञ-2026 के तहत एक दिन (12 जुलाई) में 35.27 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में दो स्थानों पर पौधरोपण कर इसका शुभारंभ किया था। यह अभियान पर 5 सितंबर को शिक्षक दिवस तक चलेगा। इसके तहत रक्षाबंधन पर भी पौधे लगाए जाएंगे।

  • यूपी की विशाल आबादी में छिपी अपार संभावनाएं, सीएम योगी ने गिनाई युवा वर्कफोर्स की ताकत

    यूपी की विशाल आबादी में छिपी अपार संभावनाएं, सीएम योगी ने गिनाई युवा वर्कफोर्स की ताकत

    यूपी की आबादी चुनौती नहीं, बड़ी संभावनाः मुख्यमंत्री

    सीएम ने स्टार्टअप नीति के अंतर्गत 107 स्टार्टअप्स को 3.42 करोड़ से अधिक और 9 इनक्यूबेटर्स को 1.79 करोड़ की प्रोत्साहन राशि का किया वितरण

    सीएम ने उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति 2026 पुस्तिका का किया विमोचन, उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन पोर्टल का भी किया शुभारंभ

    दुनिया की सबसे प्रतिभाशाली, ऊर्जावान युवा वर्कफोर्स हमारे पास, नया यूपी पीछे हटने वाला नहींः सीएम योगी

    2014 से पहले देश में 500 स्टार्टअप्स, अब 2.5 लाख से अधिक, 2017 से पहले यूपी में थे 120 स्टार्टअप,  आज इनकी संख्या 24 हजार से अधिक

    लखनऊ,
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि दुनिया की सबसे प्रतिभाशाली, ऊर्जावान युवा वर्कफोर्स यूपी में है। इन्हें प्लेटफॉर्म उलब्ध कराना सरकार का काम है। राजदूत, उच्चायुक्त समेत विदेशी प्रतिनिधिमंडल मुझसे पूछते हैं कि उत्तर प्रदेश की आबादी 25 करोड़ से अधिक है, इसलिए आपके सामने बड़ी चुनौती है। मैं उनसे कहता हूं कि जितनी बड़ी चुनौती, उतनी ही बड़ी संभावना है। यूपी की जिस आबादी को लोग चुनौती कहते हैं, हम उसे डेमोग्रॉफिक डेविडेंड मानते हैं। इनके स्केल को स्किलिंग से जोड़कर इसका उपयोग डेमोग्रॉफिक डेविडेंड के रूप में कर पाते हैं।

    मुख्यमंत्री गुरुवार को लोकभवन में स्टार्टअप नीति के अंतर्गत 107 स्टार्टअप्स को 3.42 करोड़ रुपये से अधिक और 9 इनक्यूबेटर्स को 1.79 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि का वितरण करने के उपरांत युवा उद्यमियों व उद्योग प्रतिनिधियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इस अवसर पर उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति 2026 पुस्तिका का विमोचन तथा उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन पोर्टल का शुभारंभ भी किया। इस दौरान लघु फिल्म के माध्यम से यूपी के स्टार्टअप इकोसिस्टम से अवगत कराया गया।

    2014 से पहले देश में 500 स्टार्टअप्स, अब ढाई लाख से अधिक 
    सीएम योगी ने 2014 से पहले और इसके बाद भारत में स्टार्टअप इकोसिस्टम की चर्चा की। उन्होंने बताया कि भारत में व्यापक बदलाव दिख रहा है। 2014 के पहले देश में मात्र 500 स्टार्टअप्स थे, अब इनकी संख्या ढाई लाख से ऊपर है। स्टार्टअप इकोसिस्टम अब भारत के युवाओं के सपनों की उड़ान को गति दे रहा है। 2017 से पहले यही स्थिति उत्तर प्रदेश की भी थी। उस समय यहां कुल 120 स्टार्टअप थे, लेकिन डबल इंजन सरकार के प्रोत्साहन व सकारात्मक वातावरण के कारण आज इनकी संख्या 24 हजार से अधिक हो गई। इसमें 8 यूनिकॉर्न हैं। यूपी की स्टार्टअप पॉलिसी के अंतर्गत आज 107 स्टार्टअप व 9 इन्क्यूबेटर्स को प्रोत्साहन प्राप्त हो रहा है। यूपी स्टार्टअप नीति के तहत 12 नए इन्क्यूबेटर्स को भी मान्यता प्रदान कर रहे हैं।

    2017 से रोजगार, इन्क्यूबेटर्स, शिक्षा, इनोवेशन की चर्चा एक सपना 
    सीएम ने कहा कि ‘भारत इनोवेट्स’ के कई स्टार्टअप्स का मैंने दौरा किया था। अपने कार्यों की बदौलत उन्होंने यूपी की पहचान और धारणा को बदलने में बड़ी भूमिका का निर्वहन किया। सीएम ने 2017 से पहले यूपी के प्रति नकारात्मक धारणा का जिक्र करते हुए यहां की अव्यवस्था को भी उजागर किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के बाहर जाने पर सांसद के रूप में मैंने भी महसूस किया कि लोग शक की निगाहों से देखते थे। धारणा यह थी कि जहां सड़कों में गड्ढे और बिजली के अभाव में अंधेरा दिखने लगे, समझो यूपी आ गया। उत्सव से पहले उपद्रव होता था। स्कूल-कॉलेज, बाजार महीनों बंद रहते थे। आमजन कर्फ्यू के साये में जीने को विवश था। उस समय 5 वर्ष में 700 से अधिक दंगे हुए। उन परिस्थितियों में उत्तर प्रदेश के अंदर रोजगार, इन्क्यूबेटर्स, शिक्षा, इनोवेशन की चर्चा करना एक सपना ही था। 

    सरकार की उदासीनता से प्रदेश हो गया था ‘बीमारू’
    सीएम ने कहा शिक्षा, रोजगार, स्टैंडअप, स्टार्टअप, इन्क्यूबेटर्स आदि के बारे में इकोसिस्टम तब तैयार होता है, जब धारणा के साथ ही आमजन की मानसिकता भी उसके अनुरूप दिखाई दे। हम अनुकूल वातावरण बनाने के लिए मानसिक रूप से तैयार रहें। सरकार सकारात्मक मानसिकता की हो और उसका आमजन से जुड़ाव हो, लेकिन 2017 के पहले न पॉलिसी थी और न ही सरकार की इच्छाशक्ति। लोग अजीब वातावरण में जीने को मजबूर थे, इसका परिणाम था कि अनंत संभावनाओं वाला उत्तर प्रदेश ‘बीमारू’ हो गया। 

    आधे स्टार्टअप का संचालन कर रही ‘आधी आबादी’ 
    सीएम ने कहा कि आधे स्टार्टअप का संचालन ‘आधी आबादी’ कर रही है। सरकार ने आईआईटी कानपुर, बीएचयू, ट्रिपल आईटी, एकेटीयू, आईआईएम से आए हर प्रस्ताव को प्रोत्साहित करने के लिए फंड व सहयोग उपलब्ध कराया। स्टार्टअप इकोसिस्टम को प्रोत्साहित करने के लिए 2019 में सरकार ने सिडबी के साथ फंड ऑफ फंड्स की व्यवस्था की थी। हालांकि बीच में कुछ गतिरोध आया था, लेकिन बाद में परिवर्तन कर इसे तेजी से बढ़ाया भी गया। 

    इनोवेशन व रिसर्च के लिए सभी विश्वविद्यालयों को दिया फंड
    सीएम ने नए स्टार्टअप के लिए नया प्रोत्साहन देने का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि नई पॉलिसी के तहत हमने हाल में इसे अच्छे ढंग से बढ़ाया है। सीएम ने उच्च शिक्षण संस्थानों का आह्वान किया कि केवल परंपरागत पाठ्यक्रम तक सीमित न रहें, बल्कि विश्वविद्यालयों-इंस्टीट्यूट में इनोवेशन को आरएंडडी के लिए बेहतरीन माहौल दें। सरकार ने इनोवेशन व रिसर्च की एक्टिविटी को प्रोत्साहित करने के लिए सभी विश्वविद्यालयों को अलग से फंड दिया है। इसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश की छवि को और बेहतर करना है। 

    ‘नया यूपी’ पीछे हटने वाला नहीं
    सीएम ने कहा कि हम लोगों ने 2017 व 2018-19 में जो प्रयास किए, उसके सकारात्मक परिणाम अब दिख रहे हैं। 2017 के पहले का ‘बीमारू यूपी’ बॉटम-3 से देश की टॉप-3 इकॉनमी में शामिल हुआ है। 9 वर्ष में उप्र की अर्थव्यवस्था, प्रति व्यक्ति आय, महिला वर्कफोर्स की भागीदारी व बड़े उद्योगों की संख्या तीन गुनी हुई। ‘नया यूपी’ पीछे हटने वाला नहीं, बल्कि सबसे तेज उभरती अर्थव्यवस्था के रूप में खुद को साबित कर रहा है। 

    सरकार हर कदम पर रहेगी साथ 
    सीएम ने कहा कि आईआईटी कानपुर मेडटेक व ड्रोन टेक्नोलॉजी के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाना चाहती थी, आईआईटी बीएचयू यूपीएग्रीज के साथ काम करना और एसजीपीआईजी भी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित करना चाहता था। सरकार ने इन सभी से कहा कि इमर्जिंग टेक्नोलॉजी, क्वांटम कंप्यूटिंग, स्पेस टेक्नोलॉजी, ड्रोन टेक्नोलॉजी, रोबोटिक्स, ग्रीन हाइड्रोजन आदि क्षेत्रों में जहां भी आवश्यकता पड़ेगी, सरकार हर सहयोग के लिए खड़ी है। हम एक दर्जन से अधिक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का संचालन/निर्माण कर रहे हैं। 

    स्टार्टअप इकोसिस्टम में आबादी के अनुसार दर्ज हो यूपी की उपस्थिति 
    सीएम ने उम्मीद जताई कि स्टार्टअप इकोसिस्टम में आबादी के अनुसार यूपी की उपस्थिति दर्ज होती दिखाई दे। भारत में आबादी के अनुरूप यूपी का हिस्सा 1/6 है, जबकि स्टार्टअप की तुलना में यह हिस्सा 1/10 है, यानी भारत के कुल स्टार्टअप का 20 प्रतिशत हिस्सा यूपी में होना चाहिए। इसके लिए तैयारी करनी होगी। डीपटेक के क्षेत्र में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित करने वालों समेत सभी स्टार्टअप्स का सीएम ने आह्वान किया कि वे इकोसिस्टम को गति प्रदान करने और युवाओं के सपनों को उड़ान देने के लिए आगे आएं। 

    यूपी जितनी संभावनाएं देश व दुनिया में कहीं नहीं 
    सीएम ने कहा कि यूपी में लैंड, सुरक्षा की दिक्कत नहीं है। पॉलिसी पैरालिसिस से उबर चुके हैं। यूपी में समर्पित पॉलिसी है। हर क्षेत्र में यहां जितनी संभावनाएं हैं, उतनी देश व दुनिया में कहीं नहीं प्राप्त होंगी। उन्होंने आश्वस्त किया कि आवश्यकता पड़ने पर सिडबी के साथ किए गए फंड ऑफ फंड्स की राशि बढ़ाई जाएगी। लीज पर लैंड, प्लग एंड प्ले मॉडल पर स्पेस उपलब्ध कराने में सरकार मदद करेगी, लेकिन आपको स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ाने के लिए गति देनी होगी।

    हर कदम को प्रोत्साहित करेगी यूपी सरकार
    सीएम ने आशा जताई कि डबल इंजन सरकार के साथ मिलकर आप सभी यूपी को बेहतरीन प्लेटफॉर्म दिलाने में सहयोग करेंगे। उन्होंने आश्वस्त किया कि युवाओं के हित में यूपी सरकार आपके हर कदम को प्रोत्साहित करेगी और यूपी में स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ाने में हरसंभव मदद करेगी। 

    इस अवसर पर वित्त मंत्री सुरेश खन्ना, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री सुनील कुमार शर्मा, अवस्थापना व औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार, प्रमुख सचिव आलोक कुमार, एकेटीयू के कुलपति प्रो. जेपी पांडेय आदि मौजूद रहे।

  • बिना अनुमति बैंकों में गिरवी रखी सरकारी जमीन, योगी सरकार ने दो कंपनियों पर की बड़ी कार्रवाई

    बिना अनुमति बैंकों में गिरवी रखी सरकारी जमीन, योगी सरकार ने दो कंपनियों पर की बड़ी कार्रवाई

    लखनऊ
    उत्तर प्रदेश की विद्युत व्यवस्था को निर्बाध करने में लगी योगी आदित्यनाथ सरकार ने कानपुर देहात के दो बड़े प्रोजेक्ट में अनावश्यक विलंब और लापरवाही पर बड़ी कार्रवाई की है। सरकार ने दो प्राइवेट कंपनियों की जमीन का आवंटन रद कर दिया है।

    योगी आदित्यनाथ सरकार ने कानपुर देहात की भोगनीपुर तहसील में थर्मल पावर प्रोजेक्ट्स लगाने के लिए दो प्राइवेट कंपनियों लैंको अनपारा पावर लिमिटेड और हिमावत पावर प्राइवेट लिमिटेड को दी गई लगभग 944 हेक्टेयर जमीन का आवंटन रद कर दिया है। इन दोनों कंपनियों ने इस जमीन पर लोन लेने के बाद भी कुछ काम नहीं किया है। राज्य सरकार ने निर्देश दिया है कि जमीन वापस सरकार को सौंपी जाए और इसे राज्य के ऊर्जा विभाग के नाम दर्ज किया जाए।

    जालसाजी-अपराध पर जीरो टॉलरेंस
    सरकार ने जालसाजी-अपराध पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए कानपुर देहात में दो कंपनियों को आवंटित 944 हेक्टेयर जमीन का आवंटन रद कर उसे सरकार के पक्ष में दर्ज करने का अंतिम निर्देश जारी कर दिया है। वर्ष 2011 में थर्मल पावर प्लांट लगाने के नाम पर मैसर्स लैन्को अनपरा पावर लिमिटेड और मैसर्स हिमावत पावर प्राइवेट लिमिटेड को भोगनीपुर तहसील में जमीनें आवंटित की गई थीं। कंपनियों ने 15 वर्ष बाद भी कोई काम शुरू नहीं किया और बिना इजाजत जमीनों को बैंकों में गिरवी रख दिया। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की की अनुमति मिलते ही ऊर्जा विभाग ने कानपुर देहात के जिलाधिकारी को निर्देश जारी किए हैं कि खतौनी से दोनों कंपनियों का नाम खारिज कर यह जमीन उत्तर प्रदेश सरकार और ऊर्जा विभाग के नाम दर्ज की जाए।

    कंपनियों ने तोड़ी अनुबंध की शर्त, की धोखाधड़ी
    अनुबंध की शर्त के अनुसार, कंपनियों को जमीन का कब्जा मिलने के तीन वर्ष में पावर प्रोजेक्ट का निर्माण पूरा करना था। तीन वर्ष से अधिक का लंबा समय बीत जाने के बाद भी कंपनियों ने पावर प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य आज तक शुरू ही नहीं किया। इस तरह दोनों ही कंपनियों ने एग्रीमेंट की पहली सबसे बड़ी शर्त का सीधा उल्लंघन किया। इसके बाद जांच में धोखाधड़ी की दूसरी बड़ी बात सामने आई।

    जमीन को बैंक में रखा बंधक
    एग्रीमेंट की शर्त में साफ लिखा था कि कंपनियां राज्य सरकार की अनुमति के बिना जमीन को किसी को बेच नहीं सकतीं, न ही लीज पर दे सकती हैं और न ही गिरवी रख सकती हैं। इसके बावजूद मैसर्स हिमावत पावर ने बिना किसी अनुमति के जमीन को आईडीबीआई बैंक में बंधक रख दिया। वहीं मैसर्स लैन्को अनपरा पावर ने भी सरकार को बिना बताए जमीन को केनरा बैंक और पंजाब नेशनल बैंक में गिरवी रख दिया। कंपनियों ने इस संबंध में ऊर्जा विभाग को कोई पत्र नहीं भेजा और न ही शासन से कोई इजाजत ली, जिससे राज्य सरकार को बड़ी आर्थिक क्षति पहुंची।

    नोटिस का नहीं दिया जवाब
    शर्तों का उल्लंघन होने पर शासन ने सख्त रुख अपनाया और अनुबंध की शर्त 4(6) के तहत 25 मई 2026 को दोनों कंपनियों को 15 दिन के भीतर जवाब देने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया। यह नोटिस कंपनियों के रजिस्टर्ड पते और ईमेल पर भेजा गया, जो कंपनियों को प्राप्त भी हो गया। इसके बावजूद निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी कंपनियों की तरफ से कोई स्पष्टीकरण या उत्तर उपलब्ध नहीं कराया गया। इससे स्पष्ट हो गया कि कंपनियों के पास शर्तों के उल्लंघन का कोई जवाब नहीं था।

    अपर मुख्य सचिव ने जारी किया आदेश
    कंपनियों के जान-बूझकर काम न करने, सरकार को आर्थिक क्षति पहुंचाने और नोटिस का जवाब न देने के कारण 25 अगस्त 2026 को अपर मुख्य सचिव डॉ आशीष कुमार गोयल ने अंतिम आदेश निर्गत कर दिया। आदेश में राज्यपाल की अनुमति से पूरी 944.029 हेक्टेयर जमीन को ऊर्जा विभाग में वापस निहित करने के लिए कहा गया। इसके साथ ही, आदेश की प्रति कानपुर देहात जिलाधिकारी को भेजकर यह निर्देश दिया गया है कि वे तत्काल राजस्व अभिलेखों (खतौनी) में इस पूरी जमीन को ऊर्जा विभाग व राज्य सरकार के नाम अंकित कराने की नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें।

    यह है पूरा मामला
    इस पूरे मामले की शुरुआत 28 जून 2011 को हुई थी, जब ऊर्जा विभाग और दोनों कंपनियों के बीच एग्रीमेंट हुआ था। मैसर्स लैन्को अनपरा पावर लिमिटेड को भोगनीपुर तहसील के ग्राम कृपालपुर, चपरघटा, रसूलपुर भुरण्डा और भरतौली में 90.3260 हेक्टेयर पट्टा भूमि तथा 285.0524 हेक्टेयर अधिग्रहीत निजी भूमि मिलाकर कुल 375.378 हेक्टेयर जमीन दी गई थी। वहीं, मैसर्स हिमावत पावर प्राइवेट लिमिटेड को ग्राम अमिलिया, सिहारी, कछगाँव और चपरघटा में 217.813 हेक्टेयर पट्टा भूमि तथा 350.838 हेक्टेयर अधिग्रहीत निजी भूमि मिलाकर कुल 568.651 हेक्टेयर जमीन उपलब्ध कराई गई थी।

     

  • सीएम युवा योजना से मिली नई उड़ान, अमेठी की रूपाली देवी बनीं आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार की मिसाल

    सीएम युवा योजना से मिली नई उड़ान, अमेठी की रूपाली देवी बनीं आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार की मिसाल

    लखनऊ/अमेठी

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार युवाओं और छोटे उद्यमियों को स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान (सीएम-युवा) इसी संकल्प को साकार करने वाली एक महत्वपूर्ण पहल बनकर उभरा है। अमेठी जिले के जगापुर क्षेत्र की रहने वाली रूपाली देवी की सफलता की कहानी इस बात का प्रमाण है कि सही समय पर मिला आर्थिक सहयोग छोटे व्यवसायों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है।

    ग्राम पंचायत से मिली जानकारी, खुला कारोबार विस्तार का रास्ता

    रूपाली देवी बताती हैं कि उनके परिवार में कुल छह सदस्य हैं। परिवार लंबे समय से ऑटोमोबाइल क्षेत्र से जुड़ा था और इस क्षेत्र में आगे बढ़ने की इच्छा रखता था लेकिन सीमित संसाधनों और पूंजी की कमी के कारण कारोबार का विस्तार संभव नहीं हो पा रहा था। इसी दौरान उन्हें ग्राम पंचायत के माध्यम से मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान (सीएम-युवा) की जानकारी मिली। योजना के बारे में विस्तार से जानने के बाद उन्होंने आवेदन किया। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने और आवश्यक औपचारिकताओं में लगभग दो से तीन महीने का समय लगा। इसके बाद जनवरी 2026 में बैंक के माध्यम से उन्हें 5 लाख रुपये का ऋण प्राप्त हुआ, जिसने उनके पारिवारिक व्यवसाय को नई दिशा देने का काम किया।

    5 लाख रुपये के ऋण से मिला कारोबार को नया विस्तार

    ऋण प्राप्त होने के बाद परिवार ने अपने ऑटोमोबाइल व्यवसाय को नए स्तर पर विकसित करने की योजना बनाई। प्राप्त धनराशि से आवश्यक उपकरण, मशीनें और ऑटो पार्ट्स की उपलब्धता सुनिश्चित की गई तथा उनके पारिवारिक व्यवसाय ‘परमजीत ऑटो पार्ट्स एवं ऑटो गैरेज’ को व्यवस्थित रूप से विकसित किया गया। वर्तमान में गैरेज का संचालन रूपाली देवी और उनके पति परमजीत द्वारा किया जा रहा है। यहां दोपहिया वाहनों की सर्विसिंग, मरम्मत और ऑटो पार्ट्स की बिक्री की जाती है। बेहतर सुविधाओं और गुणवत्तापूर्ण सेवाओं के कारण क्षेत्र में उनकी पहचान लगातार मजबूत हुई है।

    कुछ ही महीनों में कारोबार ने पकड़ी रफ्तार

    रूपाली देवी बताती हैं कि ऋण मिलने के बाद कारोबार में तेजी से वृद्धि हुई। पहले जहां सीमित संसाधनों के कारण व्यवसाय का दायरा छोटा था, वहीं अब ग्राहकों की संख्या और काम दोनों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। अब ‘परमजीत ऑटो पार्ट्स एवं ऑटो गैरेज’ का मासिक टर्नओवर लगभग 2 लाख रुपये तक पहुंच चुका है। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और कारोबार को आगे बढ़ाने का आत्मविश्वास भी मिला है।

    स्वरोजगार ने बढ़ाया आत्मविश्वास, परिवार को मिली नई पहचान

    रूपाली देवी का कहना है कि सीएम-युवा योजना के तहत मिली आर्थिक सहायता उनके परिवार के लिए किसी बड़े अवसर से कम नहीं थी। इस सहयोग ने न केवल कारोबार को विस्तार दिया, बल्कि परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत बनने का अवसर भी प्रदान किया। उनका मानना है कि यदि युवाओं और छोटे उद्यमियों को सही समय पर वित्तीय सहायता और मार्गदर्शन मिले, तो वे अपने सपनों को आसानी से साकार कर सकते हैं। आज उनका परिवार आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है।

    आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के विजन को मिल रही मजबूती

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विजन युवाओं को नौकरी मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार और अवसर सृजित करने वाला बनाना है। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान इसी सोच को धरातल पर उतार रहा है। रूपाली देवी और उनका परिवार इस बात का उदाहरण हैं कि सरकारी योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचे तो वे केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि जीवन में सकारात्मक बदलाव का माध्यम भी बनती हैं।

    सीएम-युवा योजना से खुल रहे स्वरोजगार के नए द्वार

    मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के तहत युवाओं को बिना गारंटी ऋण, प्रशिक्षण और आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। योजना का उद्देश्य युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करना और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। रूपाली देवी और उनके परिवार की यह सफलता कहानी बताती है कि मेहनत, संकल्प और सरकारी सहयोग मिल जाए तो आत्मनिर्भरता का सपना साकार किया जा सकता है।

  • डिजिटल शिक्षा की नई पहल, योगी सरकार ने यूट्यूब को बनाया बच्चों की क्लासरूम

    डिजिटल शिक्षा की नई पहल, योगी सरकार ने यूट्यूब को बनाया बच्चों की क्लासरूम

    हर बच्चे तक शिक्षा की डिजिटल पहुंच, योगी सरकार ने यूट्यूब पर भी लगाई कक्षा

    -योगी सरकार ने बढ़ाया पीएम ई-विद्या का दायरा, बाल वाटिका से कक्षा 12 तक के विद्यार्थियों के लिए कक्षा-वार शैक्षिक सामग्री उपलब्ध

    – चैनल 173 से 177 तक विद्यार्थियों को अपनी कक्षा के अनुसार डिजिटल सामग्री देखने की सुविधा

    – पांच डीटीएच चैनलों की यूट्यूब पर भी उपलब्धता से घर बैठे सीखने और पाठ दोहराने का अवसर

    – राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) यूपी की डिजिटल पहल से शैक्षिक सामग्री की पहुंच हुई आसान

    लखनऊ
     शिक्षा को विद्यालय की चारदीवारी से आगे हर बच्चे तक पहुंचाना योगी सरकार की डिजिटल शिक्षा नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसी दिशा में उत्तर प्रदेश के लिए पीएम ई-विद्या के पांच डीटीएच चैनलों को यूट्यूब पर भी उपलब्ध कराया गया है। इससे बाल वाटिका से कक्षा 12 तक के विद्यार्थी अपनी कक्षा के अनुरूप शैक्षिक सामग्री घर बैठे देख सकते हैं और आवश्यकता के अनुसार पाठों को दोहरा सकते हैं।

    इस व्यवस्था से पीएम ई-विद्या की डिजिटल शैक्षिक सामग्री विद्यार्थियों के लिए अधिक सहज और सुलभ हुई है। डीटीएच और यूट्यूब दोनों माध्यमों के जरिए सीखने के अवसरों का विस्तार करते हुए योगी सरकार की डिजिटल शिक्षा पहल को घर-घर तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

    एससीईआरटी यूपी की डिजिटल पहल से बढ़ी पहुंच
    उत्तर प्रदेश में राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी यूपी) की डिजिटल शैक्षिक व्यवस्था के अंतर्गत पीएम ई-विद्या के चैनलों के माध्यम से विद्यार्थियों तक कक्षा-वार शैक्षिक सामग्री पहुंचाई जा रही है। डीटीएच के साथ यूट्यूब पर उपलब्धता से विद्यार्थी, शिक्षक और अभिभावक अपनी सुविधा के अनुसार इन शैक्षिक संसाधनों का उपयोग कर सकते हैं।

    हर कक्षा के लिए अलग चैनल
    चैनल 173 पर बाल वाटिका से कक्षा 2, चैनल 174 पर कक्षा 3 से 5, चैनल 175 पर कक्षा 6 से 8, चैनल 176 पर कक्षा 9 से 10 और चैनल 177 पर कक्षा 11 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए शैक्षिक सामग्री उपलब्ध है। कक्षावार व्यवस्था से विद्यार्थियों को अपनी कक्षा से संबंधित सामग्री तक आसानी से पहुंच मिलती है।

    डीटीएच के साथ यूट्यूब की सुविधा
    पीएम ई-विद्या के इन चैनलों की सामग्री अब यूट्यूब पर भी उपलब्ध होने से विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए अतिरिक्त डिजिटल माध्यम मिला है। विद्यार्थी अपनी सुविधा के अनुसार शैक्षिक वीडियो देख सकते हैं, पढ़ाए गए विषयों को दोहरा सकते हैं और अपनी सीख को मजबूत कर सकते हैं। चैनलों को निशुल्क सब्सक्राइब करने की सुविधा भी उपलब्ध है।

    हमारी सरकार ने तकनीक के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हर बच्चे तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। पीएम ई-विद्या के कक्षा-वार चैनलों को यूट्यूब पर उपलब्ध कराने से विद्यार्थियों को घर बैठे सीखने और अपनी पढ़ाई दोहराने का सहज अवसर मिला है।
    – संदीप सिंह, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), बेसिक शिक्षा, उत्तर प्रदेश

    एससीईआरटी यूपी के पीएम ई-विद्या चैनलों को यूट्यूब से जोड़ने से डिजिटल शैक्षिक सामग्री की पहुंच और व्यापक हुई है। विद्यार्थी अपनी कक्षा के अनुसार संबंधित चैनल से जुड़कर सरलता से शैक्षिक सामग्री का लाभ उठा सकते हैं।
    – डॉ. पवन सचान, संयुक्त निदेशक, SCERT उत्तर प्रदेश

    कक्षा के अनुसार YouTube चैनल
    बाल वाटिका–कक्षा 2 : SCERT UP PM eVIDYA Channel 173⁠

    कक्षा 3–5 : SCERT UP PM eVIDYA Channel 174⁠

    कक्षा 6–8 : SCERT UP PM eVIDYA Channel 175⁠

    कक्षा 9–10 : SCERT UP PM eVIDYA Channel 176⁠

    कक्षा 11–12 : SCERT UP PM eVIDYA Channel 177⁠

  • प्रोडक्टिविटी, टेक्नोलॉजी, क्लाईमेट रेजिलिएंट, मार्केट, एंटरप्राइज, फॉर्मर प्रॉस्पैरिटी है यूपीएग्रीज का मूल दर्शनः सीएम योगी

    प्रोडक्टिविटी, टेक्नोलॉजी, क्लाईमेट रेजिलिएंट, मार्केट, एंटरप्राइज, फॉर्मर प्रॉस्पैरिटी है यूपीएग्रीज का मूल दर्शनः सीएम योगी

    पूर्वी उत्तर प्रदेश के 21 व बुंदेलखंड के 7 जनपदों में कृषि उत्पादकता व अन्नदाताओं की आय में होगी वृद्धि: मुख्यमंत्री

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष विश्व बैंक वित्तपोषित यूपी-एग्रीज परियोजना के अंतर्गत यूपीडीएएसपी के साथ गूगल एवं नेटवर्क फॉर ह्यूमैनिटी, आईटीसी व एक्वाब्रिज का एमओयू

    यूपी में कृषि के भविष्य को नई दिशा देंगे एमओयू, पूर्वी उत्तर प्रदेश व बुंदेलखंड में पोटेंशियल है और बदलाव की जरूरत भी: सीएम

    प्रोडक्टिविटी, टेक्नोलॉजी, क्लाईमेट रेजिलिएंट, मार्केट, एंटरप्राइज, फॉर्मर प्रॉस्पैरिटी है यूपीएग्रीज का मूल दर्शनः सीएम योगी

    लखनऊ,
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गूगल एवं ग्लोबल एंड नेटवर्क फॉर ह्यूमैनिटी, आईटीसी, एक्वाब्रिज के साथ हुए एमओयू एग्रीकल्चर प्रोडक्टिविटी, किसान की आय और यूपी में कृषि के भविष्य को नई दिशा देने का संकल्प हैं। यूपीएग्रीज प्रदेश के एग्रीकल्चर को प्रोडक्टिविटी से प्रॉस्पैरिटी व फ्यूचर इकॉनमी की ओर ले जाने की महत्वपूर्ण पहल है। इसका लक्ष्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि किसान की आय, फॉर्मिंग की क्लाईमेट रेजिलिएंट कैपिसिटी (जलवायु अनुकूलन क्षमता) को वैल्यू एडिशन व रूरल एंटरप्रेन्योरशिप को एक साथ मजबूत करना भी है। ये एमओयू पूर्वी उत्तर प्रदेश के 21 तथा बुंदेलखंड के 7 जनपदों में कृषि उत्पादकता व अन्नदाताओं की आय में वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

    मुख्यमंत्री की उपस्थिति में बुधवार को विश्व बैंक वित्तपोषित उत्तर प्रदेश एग्रीकल्चर ग्रोथ एंड रूरल एंटरप्राइज इकोसिस्टम स्ट्रेंथनिंग (यूपी-एग्रीज) परियोजना के अंतर्गत यूपीडीएएसपी (उत्तर प्रदेश विविधीकृत कृषि सहायता परियोजना) के साथ ये एमओयू हस्ताक्षरित किए गए।

    इस अवसर पर सीएम योगी ने कहा कि गत वर्ष विश्व बैंक के अध्यक्ष का आगमन हुआ था। उप्र के वे क्षेत्र, जो उस समय कृषि प्रोडक्टिविटी में अत्यंत पिछड़े थे। वहां क्या होना चाहिए, इस पर उनसे चर्चा हुई, फिर यूपीएग्रीज की इस योजना को हमने आगे बढ़ाया। यूपीएग्रीज पीएम मोदी जी और विश्व बैंक के अध्यक्ष के विजन के अनुरूप यूपी में धरातल पर कार्य करते दिख रहा है। यह एमओयू उसी कड़ी को मजबूत तरीके से बढ़ाने के लिए किया गया है। हम दशकों तक यही सुनते रहे कि अन्नदाता किसानों की जय-जयकार होती थी। देश में अन्न उत्पादन बढ़ाने के दावे किए जाते थे। पैदावार बढ़ती भी थी, लेकिन किसान वहीं का वहीं खड़ा था। किसान को कभी नहीं बताया गया कि लागत कैसे घटेगी, उसकी फसल को कौन खरीदेगा और उसका माल मंडी तक कैसे जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग 4000 करोड़ की विश्व बैंक समर्थित इस परियोजना का फोकस पूर्वी उत्तर प्रदेश व बुंदेलखंड है। जहां पोटेंशियल भी है और परिवर्तन की आवश्यकता भी। इन क्षेत्रों को पिछड़ेपन का पर्याय मानकर दशकों तक उपेक्षित छोड़ दिया गया था। जो क्षेत्र कभी सरकार के लिए चिंता व तनाव का कारण होता था, आज वही क्षेत्र सरकार की प्राथमिकता व प्रदेश के प्रोडक्टिविटी का कारण भी बन रहा है। हम पूर्वी उप्र व बुंदेलखंड के 28 जनपदों के 123 विकास खंडों में इस परियोजना को लागू कर रहे हैं। इसका लक्ष्य लगभग 6 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करते 10 लाख किसानों, 35 हजार मत्स्य उत्पादक किसानों व 3 लाख महिलाओं को लाभ पहुंचाना है। परियोजना के अंतर्गत खरीफ 2026 में 1.75 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को आच्छादित किया गया है। रबी फसल (2026-27) में भी 1.75 लाख हेक्टेयर में गेहूं, मटर, चना, मसूर व सरसों आदि की उत्पादकता बढ़ाने का लक्ष्य है। हमें किसान को केवल प्रोड्यूसर नहीं, बल्कि आधुनिक कृषि व अर्थव्यवस्था का प्रॉस्पैरिटी पार्टनर भी बनाना है। 

    सीएम ने कहा कि ईरी के साथ पार्टनरशिप के माध्यम से साइंटिफिक व क्लाईमेटिक विजिलेंट जैसी पद्धतियों को खेतों तक पहुंचाया जा रहा है। खरीफ सत्र 2026 में 3000 हेक्टेयर क्षेत्र में डायरेक्ट सीडेड राइस (डीएसआर) का प्रयोग किया जा रहा है। धान के साथ मक्का, बाजरा, ज्वार, अरहर, तिल, उरद व मूंगफली जैसी फसलों को भी कार्ययोजना में सम्मिलित किया है। उप्र की कृषि परंपरा की शक्ति व आधुनिक विज्ञान के संगम से इसे बढ़ाने में मदद मिलेगी। ग्लोबल साइंस अब लोकल फॉर्म तक पहुंच रहा है। 

    सीएम ने कहा कि गूगल एवं नेटवर्क फॉर ह्यूमैनिटी के साथ साझेदारी में ओपन नेटवर्क फॉर एग्रीकल्चर विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। यह कृषि के लिए ऐसा डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर होगा, जिसका कॉन्सेप्ट यूपीआई और ओएनडीसी जैसे ओपन डिजिटल नेटवर्क मॉडल से भी प्रेरित है। इससे किसानों को अलग-अलग सेवाओं के लिए अलग ऐप व प्लेटफॉर्म की आवश्यकता नहीं होगी, बल्कि हमारा लक्ष्य एक ही इंटरफेस से मौसम, बाजार-मूल्य, मृदा, कृषि सलाह तथा विभिन्न एग्रीटेक सेवाओं तक उनकी पहुंच बनाना है। 

    सीएम ने कहा कि एग्रीटेक स्टार्टअप व कंपनियां भी खुले नेटवर्क के माध्यम से बड़ी संख्या में किसानों तक सेवाएं पहुंचा सकेंगी। हमारा लक्ष्य लागत को कम करना, कम संसाधन व अधिक आय के साथ ही वैश्विक बाजार के अनुरूप गुणवत्ता उपलब्ध कराना भी है। यूपीएग्रीज के अंतर्गत धान और गेहूं के क्लाईमेट रेजिलिएंट कमोडिटी कलस्टर विकसित करने के लिए आईटीसी के साथ भी साझेदारी की जा रही है। दो लाख एकड़ से अधिक क्षेत्र में क्लाईमेट स्मार्ट एग्रीकल्चर का विस्तार प्रस्तावित है। इसमें आधुनिक पद्धति यानी शून्य जुताई, डायरेक्ट सीडेड राइस, क्लाईमेट रेजिलिएंट उन्नत बीज, डिसिजन न्यूट्रेंट मैनेजमेंट सम्मिलित होगा। 

    सीएम ने कहा कि बहराइच में 1500 एकड़ का डीयू कंप्लाइन एंड एमआरएल मानकों के अनुरूप धान कलस्टर विकसित करने का प्रस्ताव है। किसान की प्रति एकड़ आय में 20-30 प्रतिशत वृद्धि, यूरिया के उपयोग को 25 फीसदी कम करने तथा श्रम व सिंचाई में 25-30 प्रतिशत की बचत का भी लक्ष्य रखा गया है। अब यूपी का किसान केवल अनाज उत्पादक नहीं रहेगा, बल्कि क्वालिटी, कैपेबिलिटी व एक्सपोर्ट स्टैंडर्ड से जुड़ी नई एग्री इकॉनमी का भी भागीदार बनेगा। 

    सीएम ने कहा कि यूपीएग्रीज के अंतर्गत धान, गेहूं, मिर्च, मक्का, हरी मटर व टमाटर जैसी फसलों के लिए भी प्रमुख निजी कंपनियों के साथ साझेदारी की जा रही है, जिससे किसानों को बाजार व बेहतर खरीद की व्यवस्था उपलब्ध हो पाएगी। इसके अंतर्गत वैल्यू चेन के प्रत्येक चरण में उत्पादन, संग्रहण, भंडारण, प्रसंस्करण व बाजार को और मजबूत किया जाएगा। हम उत्तर प्रदेश में एक्वा कल्चर को साइंस, टेक्नोलॉजी, प्रोसेसिंग व एंटरप्रेन्योरशिप से जोड़कर पूर्ण ब्लू इकॉनमी इकोसिस्टम विकसित करना चाहते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए एक्वाब्रिज के साथ मत्स्य पालन को ट्रेडिशनल एक्टिविटी से टेक्नोलॉजी ड्रिवेन एंटरप्राइज की ओर बढ़ाने जा रहे हैं। एक्वाब्रिज के साथ साझेदारी के माध्यम से मत्स्य किसानों, सहकारिता समितियों व उद्यमियों को आधुनिक तकनीक व प्रशिक्षण से जोड़ा जाएगा। इसमें एआई आधारित एक्वाकल्चर मैनेजमेंट, ऑटोमैटिक फीडिंग टेक्नोलॉजी, आधुनिक प्रशिक्षण व कैपिसिटी बिल्डिंग पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

    सीएम ने कहा कि यूपीएग्रीज के अंतर्गत उन्नाव में आईएमसी इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के तहत 60 एकड़ क्षेत्र में इंटीग्रेटेड एक्वाकल्चर परियोजना विकसित की जा रही है। इसमें हेचरी, फीड मैन्यूफेक्चरिंग, प्रोसेसिंग फैसिलिटी, डेडिकेटेड ट्रेनिंग सेंटर भी प्रस्तावित है। कृषि को खेत से फूड प्रोसेसिंग, एक्सपोर्ट एवं ग्लोबल वैल्यू चेन तक ले जाने की तैयारी है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के निकट मेगा फूड पार्क एवं एग्री एक्सपोर्ट सेंटर विकसित करने का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य यूपी की कृषि उपज को मंडी से आगे प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन, लॉजिस्टिक व एक्सपोर्ट से जोड़ना है। यूपीएग्रीज का नया सूत्र व मूलदर्शन प्रोडक्टिविटी, टेक्नोलॉजी, क्लाईमेट रेजिलिएंट, मार्केट, एंटरप्राइज, फॉर्मर प्रॉस्पैरिटी है। हमारा लक्ष्य किसानों को बेहतर बीज और तकनीक से प्रोडक्टिविटी, क्लाईमेट स्मार्ट फॉर्मिंग से सस्टेनबिलिटी, डिजिटल नेटवर्क से इन्फॉर्मेशन एंड सर्विस तक पहुंच, कमोडिटी कलस्टर से बाजार, प्रोसेसिंग व इंफ्रास्ट्रक्चर से वैल्यू एडिशन, एफपीओ व निजी निवेशक के माध्यम से रूलर एंटरप्रेन्योरशिप और ग्रामीण विकास तक ले जाना है।

    सीएम ने कहा कि 21वीं सदी मिट्टी व मौसम के साथ डेटा साइंस, साइंस टेक्नोलॉजी और मार्केट इंटेलिजेंस से भी संचालित होगी। यूपीएग्रीज के साथ प्रदेश सरकार कृषि को इस भविष्य के लिए तैयार कर रही है। हमारा लक्ष्य किसान को एग्री इनोवेशन की नई इकॉनमी का सक्रिय भागीदार बनाना है। यूपी कृषि का अगला चरण प्रोडक्टिविटी, सस्टेनबिलिटी व प्रॉस्पेरिटी को साथ लेकर चलने वाली स्मार्ट एग्री रेगुलेशन का केंद्र बनना है। जब खेत डिजिटल होंगे, खेती क्लाईमेट स्मार्ट होगी, उत्पादन क्वालिटी ड्रिवेन व बाजार ग्लोबल होगा तो किसान की आय में वृद्धि होगी। इससे कृषि मॉडल का स्वाभाविक परिणाम भी आएगा।

    सीएम ने अतिथियों को ओडीओपी का स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया। इस अवसर पर श्रम व सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर, उप्र ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के सीईओ मनोज कुमार सिंह, कृषि उत्पादन आयुक्त दीपक कुमार, प्रमुख सचिव (कृषि) रविंद्र, प्रमुख सचिव पंधारी यादव, विश्व बैंक के अनूप जगवानी, गूगल के सिद्धार्थ प्रकाश, एक्वाब्रिज से मो. ताबिश, नेटवर्क फॉर ह्यूमैनिटी से राधा किझनट्टम, आईटीसी के सचिन शर्मा, सीआईपी के निदेशक डॉ. सुधांशु सिंह, सिद्धि नायक एग्रो. लि. के हेमंत गौर आदि मौजूद रहे।

  • कानपुर में उड़ान भरने के बाद खेत में गिरा ट्रेनिंग विमान, दो पायलटों की मौत से मचा हड़कं

    कानपुर में उड़ान भरने के बाद खेत में गिरा ट्रेनिंग विमान, दो पायलटों की मौत से मचा हड़कं

     कानपूर 
    उत्तर प्रदेश के कानपुर के गंगा बैराज क्षेत्र से बड़ी खबर आ रही है। जानकारी के मुताबिक, ट्रेनिंग विमान/एयरक्राफ्ट हादसे का शिकार क्रैश हो गया। हादसे में दोनों ट्रेनी पायलेट की मौत हो गई है। मौके पर राहत-बचाव कार्य जारी है। पुलिस की टीमे मौके पर हैं। पुलिस कमिश्नर ने दो मौतों की पुष्टि की है। कमिश्नर रघुवीर लाल ने बताया कि दोनों पायलटों की पहचान हो गई है।

    मिल रही जानकारी के मुताबिक, विमान ने सुबह करीब 11:20 बजे कानपुर कैंट क्षेत्र से उड़ान भरी थी। बताया जा रहा है कि विमान चार सीटर था और ट्रेनिंग उड़ान पर था। इसके बाद कटरी क्षेत्र स्थित नत्थूपुरवा गांव में गुरुवार दोपहर एक ट्विन इंजन ट्रेनिंग विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में विमान उड़ा रहे दो पायलटों में की मौत हो गई। घायल पायलट को इलाज के लिए हैलट अस्पताल लाया गया था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दोपहर के समय अचानक विमान आसमान से नीचे आया और खेत में जा गिरा। विमान के जमीन से टकराते ही तेज धमाके जैसी आवाज सुनाई दी। हादसे के बाद आसपास के गांवों में अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर पहुंच गए।

    मौके पर राहत-बचाव और पुलिस की टीमों के पहुंचने की जानकारी सामने आ रही है।
    गांव में दहशत का माहौल, खबर फैलते ही घटनास्थल पर भारी भीड़ जमा हो गई
    हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। राहत एवं बचाव कार्य शुरू करते हुए विमान में फंसे दोनों पायलटों को बाहर निकाला गया। दोनों पायलटों की मौत हो गई।विमान दुर्घटना की खबर फैलते ही घटनास्थल पर भारी भीड़ जमा हो गई। गांव में दहशत का माहौल है। पुलिस ने मौके का निरीक्षण कर हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती तौर पर यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि तकनीकी खराबी, मौसम या किसी अन्य वजह से विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ। अधिकारियों की जांच के बाद ही हादसे की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी।

    2023 में गर्ग एविएशन में शामिल हुआ था विमान
    कानपुर के पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट हादसे में जान गंवाने वाले पायलटों की पहचान अभिषेक पुजारी निवासी कर्नाटक और सुमित भाटिया निवासी गुजरात के रूप में हुई है। दोनों की मौके पर ही मौत होने की सूचना है। मौके पर राहत कार्य जारी है। 2023 से विमान ट्रेनिंग के लिए लाया गया था। टेक्नम कंपनी का विमान था। हादसे की सूचना डीजीसीए को दी गई है। डीजीसीए की टीम पहुंच रही है। हादसे का कारण जांच के बाद पता चलेगा।

  • नेपाल की बाढ़ के बाद प्रशासन अलर्ट, सरयू-गंडक पर नजर; कुशीनगर में तैनात होगी NDRF टीम

    नेपाल की बाढ़ के बाद प्रशासन अलर्ट, सरयू-गंडक पर नजर; कुशीनगर में तैनात होगी NDRF टीम

    लखनऊ 
    सरयू नदी का जलस्तर तेजी से घट रहा है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार गुरुवार सुबह 10 बजे अयोध्या में जलस्तर 92.43 मीटर रहा, जो खतरे के निशान से 30 सेमी नीचे पहुंच गया है। इसके साथ सरयू नदी तेजी से कटान कर रही है। सरयू नदी का पानी लगातार कम हो रहा है। तेजी से नदी के पानी में हो रही कमी के चलते नदी किनारे पर दबाव बनाये हुए है। जैसे जैसे नदी का जलस्तर घट रहा है, वैसे वैसे नदी किनारों पर कहर बरपा रही है।

    आबादी व खेती की जमीनें नदी में समाने लगी हैं। नदी के पानी में हुई कमी के चलते लोलपुर विक्रमजोत के कल्यानपुर पड़ाव, चांदपुर, बीडी तटबंध के संदलपुर, छतौना मांझा, शम्भूपुर, पूरे चेतन, लकड़ी पाण्डेय, पकड़ी संग्राम, अर्जुनपुर, अशोकपुर में नदी कटान करती हुई आबादी की ओर बढ़ रही है। किसानों की फसलें नदी में समा कर धारा में विलीन हो रही है। लगातार कटान से ग्रामीणों की जमीन व फसलें नदी में बह रही है।

    बाढ़ की संवेदनशीलता को देखते हुए एडीएम ने निचलौल में कैंप किया
    नेपाल में आई बाढ़ के बाद गंडक नदी के जलस्तर को देखते हुए एडीएम डॉ. प्रशांत कुमार ने बुधवार की रात में गंडक नदी से सटे गांवों में पहुंचकर ग्रामीणों का हाल जाना। वे स्थिति की गंभीरता को देखते हुए निचलौल में कैंप किए हुए हैं। एडीएम ने एसडीएम सिद्धार्थ गुप्ता और तहसीलदार अमित कुमार सिंह के साथ गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए नदी के समीप के ग्राम भेड़िहारी और 
    गेड़हवा आदि का रात मे निरीक्षण किया।

    एसएसबी जवान भी ग्रामीणों की सेवा में तत्पर देखे गए। एडीएम ने ग्रामीणों के साथ नदी का जलस्तर जाना और ग्रामीणों से बाढ़ की स्थिति आने पर प्रशासन को सूचना देने की अपील की। एसडीएम सिद्धार्थ गुप्ता ने बताया कि गंडक नदी का जलस्तर अभी सामान्य है। कहीं भी किसी प्रकार की संवेदनशीलता नहीं है।

    कुशीनगर भेजी जा रही एनडीआरएफ की टीम
    नेपाल में अचानक आई बाढ़, भारी बारिश से तबाही के बाद गोरखपुर प्रशासन सतर्क हो गया है। डीएम दीपक मीणा का कहना है कि नेपाल में तेज बारिश और बाढ़ को देखते हुए संवेदनशीलता के मद्देनजर एनडीआरएफ को कुशीनगर में तैनात करने के लिए भी कहा गया है। किसी भी आपात स्थिति में गांव स्तर तक बनाए गए सूचना तंत्र के जरिए लोगों को समय रहते सचेत किया जाएगा। फिलहाल गोरखपुर में बाढ़ की स्थिति को लेकर कोई तत्काल खतरा नहीं है।

  • कानपुर में ट्रेनिंग के दौरान विमान क्रैश, पायलट और को-पायलट ने गंवाई जान

    कानपुर में ट्रेनिंग के दौरान विमान क्रैश, पायलट और को-पायलट ने गंवाई जान

    कानपुर
    उत्तर प्रदेश के कानपुर् में गुरुवार को एक ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट क्रैश हो गया. इस हादसे में ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट में सवार पायलट और को-पायलट की मौत हो गई है. रेस्क्यू टीमें मौके पर राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई हैं. प्लेन क्रैश की यह दुर्घटना कानपुर के गंगा बैराज के पास हुई है। 

    जानकारी के मुताबिक हादसे का शिकार हुआ ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट गर्ग एविएशन का था. गुरुवार को गंगा बैराज के पास यह विमान हादसे का शिकार हो गया. कानपुर के नत्था खेड़ा इलाके में गंगा बैराज के पास ट्रेनिंग विमान क्रैश होने की सूचना इलाके के लोगों ने फायर ब्रिगेड को दी. हादसे की सूचना पाकर कानपुर के चीफ फायर अफसर भी मौके पर पहुंच गए। 

    फायर ब्रिगेड की टीम के साथ ही इमरजेंसी सर्विस कानपुर नगर की टीमें भी मौके पर पहुंच गईं और तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया. क्रैश एयरक्राफ्ट के मलबे से दो लोगों को गंभीर हालत में रेस्क्यू किया गया. दोनों को गंभीर हालत में उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टर्स ने उनको मृत घोषित कर दिया। 

    इस हादसे में जान गंवाने वाले दोनों ही ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट में सवार पायलट और को-पायलट बताए जा रहे हैं. बताया जाता है कि गर्ग एविएशन का यह ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट ट्रेनिंग उड़ान पर था. इसी दौरान नत्था खेड़ा इलाके में हादसे का शिकार हो गया. हादसे के पीछे की वजह अभी सामने नहीं आई है. रेस्क्यू टीमें मौके पर हैं। 

    कानपुर में हुए ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट क्रैश की Aircraft Accident Investigation Bureau यानी AAIB जांच करेगा कि हादसे की वजह क्या थी. नागरिक उड्डयन महानिदेशालय यानी डीजीसीए ने हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं. डीजीसीए के तीन अधिकारी दुर्घटनास्थल के लिए रवाना हो गए हैं. तीन अधिकारियों की यह टीम संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय का काम करेगी।