Category: उत्तर प्रदेश

  • जेपीएनआईसी पर अखिलेश के आरोपों पर बीजेपी नेताओ और मंत्रियों का पलटवार, बोले- विकास का चश्मा लगाइए, सच्चाई दिखेगी

    जेपीएनआईसी पर अखिलेश के आरोपों पर बीजेपी नेताओ और मंत्रियों का पलटवार, बोले- विकास का चश्मा लगाइए, सच्चाई दिखेगी

    लखनऊ

     जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (जेपीएनआईसी) को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के बयान पर उत्तर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। प्रदेश सरकार के मंत्रियों और भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने सपा अध्यक्ष पर तीखा पलटवार करते हुए उनके आरोपों को निराधार बताया। मंत्री संजय निषाद ने कहा कि देश संविधान और संवैधानिक व्यवस्था के तहत चलता है। विकास प्राधिकरण इसी व्यवस्था का हिस्सा हैं। जेपीएनआईसी का अधिकार लखनऊ विकास प्राधिकरण को दिया गया है।

    संजय निषाद बोले- जेपीएनआईसी का अधिकार प्राधिकरण के पास

    मंत्री संजय निषाद ने सवाल किया कि अगर विकास के लिए बनाई गई सरकारी संस्था को ही प्राइवेट बताया जाएगा तो प्राधिकरण और निजी संस्था में अंतर क्या रह जाएगा। उन्होंने अखिलेश यादव के आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि सरकार ने भवन का विकास और संचालन सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्था की है। संजय निषाद ने कहा कि कौन सरकार जनता और देश के लिए अच्छा काम कर रही है, इसका फैसला जनता करती है। सपा, बसपा और कांग्रेस के शासन में भ्रष्टाचार चरम पर था और सरकार तथा समाज के बीच संवाद और सामंजस्य का अभाव था। आज विकास हो रहा है, इसलिए जनता एनडीए के साथ खड़ी है।

    बीएल वर्मा ने सपा शासन पर उठाए सवाल

    केंद्रीय राज्य मंत्री बीएल वर्मा ने अखिलेश यादव के आरोपों पर कहा कि उन्हें पहले समाजवादी पार्टी के शासन का दौर याद करना चाहिए। उस समय गरीबों के राशन में भी भ्रष्टाचार होता था और बिचौलिये गरीबों का हक खा जाते थे। उन्होंने कहा कि कॉन्ट्रैक्ट नियमों के अधीन दिए जाते हैं और नियमानुसार काम होता है। उन्होंने तंज कसा कि अखिलेश यादव को भाजपा सरकारों का विकास दिखाई नहीं देता तो उन्हें विकास का चश्मा लगाकर देखना चाहिए। 

    राकेश राठौर गुरु ने जेपीएनआईसी की लागत पर घेरा

    योगी सरकार में राज्यमंत्री राकेश राठौर गुरु ने अखिलेश यादव को यह कहते हुए घेरा है कि जेपीएनआईसी के निर्माण में पहले करीब 700 करोड़ रुपये का बजट बना और बाद में करीब 800 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, इसके बावजूद काम पूरा नहीं हुआ। मौजूदा सरकार ने स्थिति का आकलन किया तो परियोजना अधूरी मिली। अब इसे पूरा करने और फंक्शनल करने के लिए 200 से 250 करोड़ रुपये की आवश्यकता है। सरकार की कोशिश है कि परियोजना शुरू हो और इससे सरकार के साथ जनता को भी लाभ मिले।

    पहले सपा शासन की कानून-व्यवस्था याद करें- जगदंबिका पाल

    भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने अखिलेश यादव पर निशाना साधा कि समाजवादी पार्टी की सरकार उत्तर प्रदेश से इसलिए गई क्योंकि उसके शासन में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब थी। बहन-बेटियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठते थे। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को नए संकल्प लेने से पहले अपने शासनकाल में महिलाओं के साथ हुई घटनाओं को लेकर आत्ममंथन और प्रायश्चित करना चाहिए।

    जेपीएनआईसी पर बोलकर अपने पर ही सवाल खड़े कर रहे अखिलेश

    भाजपा नेता ऋचा राजपूत ने कहा कि अखिलेश यादव जेपीएनआईसी पर सवाल उठाकर खुद अपने पर ही सवाल खड़े कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अखिलेश को इस बात का जवाब देना चाहिए कि परियोजना की लागत करीब 800 करोड़ रुपये से अधिक कैसे पहुंच गई। उन्होंने अखिलेश यादव से पूछा कि लागत इतनी बढ़ने के बावजूद परियोजना समय पर पूरी क्यों नहीं हुई।

    कन्नौज के इत्र पार्क का भी जवाब दें अखिलेश

    ऋचा राजपूत ने कन्नौज के इत्र पार्क और पीलीभीत-मुरादाबाद में नगरपालिका की जमीन पर सपा कार्यालय बनाए जाने को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव जितने सवाल उठाएंगे, उतनी ही पुरानी बातें जनता के सामने आएंगी। उन्होंने कहा कि जनता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व पर भरोसा करती है और विकास कार्य उसी दिशा में आगे बढ़ेंगे।

     17 करोड़ से शुरू हुई DPR, सपा शासन में लागत 800 करोड़ पहुंची- दिनेश सिंह

    प्रदेश भाजपा के मुख्य प्रवक्ता दिनेश सिंह ने जेपीएनआईसी के इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि इसकी शुरुआत मुलायम सिंह यादव के मुख्यमंत्री रहते हुई थी। वर्ष 2006 में इसकी DPR करीब 17 करोड़ रुपये की थी। 2012 में अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद इसकी लागत बढ़कर करीब 800 करोड़ रुपये हो गई, लेकिन इसके बावजूद सपा सरकार परियोजना को पूरा नहीं करा सकी। दिनेश सिंह ने कहा कि योगी सरकार आने के बाद जेपीएनआईसी के निर्माण कार्य को फिर गति दी गई। अब इसे पूरी तरह फंक्शनल करने के लिए करीब 200 से 250 करोड़ रुपये की आवश्यकता है। इसी वजह से सरकार ने इसे लीज पर देने का निर्णय लिया है, ताकि शेष काम जल्द पूरा हो। 

    सैफई परिवार की लूट अब नहीं चलेगी- भाजपा प्रवक्ता

    दिनेश सिंह ने अखिलेश यादव के आरोप पर पलटवार किया कि जेपीएनआईसी को बेचने की बात गलत है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने ऐसी व्यवस्था की है जिससे परियोजना पूरी हो सके और जनता के हित में इसका उपयोग हो। उन्होंने आरोप लगाया कि लूट और बंदरबांट का दौर सपा सरकार में था, जबकि भाजपा सरकार में पारदर्शिता के साथ विकास कार्य कराए जा रहे हैं।

  • अखिलेश ने कैंसिल की सहारनपुर की रैली, राजभर ने कसा तंज, बोले- हिम्मत है तो सभा करके दिखाइए

    अखिलेश ने कैंसिल की सहारनपुर की रैली, राजभर ने कसा तंज, बोले- हिम्मत है तो सभा करके दिखाइए

    अखिलेश यादव की सहारनपुर में प्रस्तावित रैली रद्द होने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने उन पर तीखा तंज कसा है। गुरुवार को सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट में राजभर ने सवाल उठाया कि आखिर अखिलेश यादव सहारनपुर जाकर जनसभा को संबोधित करने की हिम्मत क्यों नहीं जुटा पा रहे हैं।

    अपने सोशल मीडिया पोस्ट की शुरुआत राजभर ने भजन की पंक्ति से की-'उठ जाग मुसाफिर भोर भई, अब रैन कहां जो तू सोवत है।' इसके बाद उन्होंने सीधे अखिलेश यादव को निशाने पर लेते हुए लिखा, 'अखिलेश भाई, यह भजन आपके लिए है। जग जाइए, आंख खोल लीजिए।'

    राजभर यहीं नहीं रुके। उन्होंने अखिलेश यादव को सहारनपुर जाकर जनसभा करने की चुनौती देते हुए सवाल उठाया कि आखिर वहां जाने की हिम्मत क्यों नहीं हो रही है। राजभर ने तंज कसा कि ‘चवन्नी’ के चक्कर में अब 36 बिरादरी अखिलेश यादव के खिलाफ खड़ी हो गई है।

    'किसी को चवन्नी, किसी को नीच, किसी को… आखिर मिलता क्या है?'

    ओपी राजभर ने अपने पोस्ट में सपा और उसके नेताओं की भाषा पर भी सीधा हमला बोला। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर सपा के लोग ऐसी भाषा का इस्तेमाल क्यों करते हैं। राजभर ने लिखा कि किसी जाति को ‘चवन्नी’, किसी को ‘नीच’, किसी को ‘वेश्या’ तो किसी को ‘चोर’ कहा जाता है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर इस तरह की बयानबाजी से उन्हें मिलता क्या है?

    राजभर ने इसे सीधे अखिलेश यादव के PDA फॉर्मूले से जोड़ दिया। उन्होंने पूछा कि क्या यही उनका PDA है? गैर-यादव ओबीसी जातियों को अपमानित करके आखिर सपा को कौन सा राजनीतिक सुख मिलता है?

    'लाठी के दम पर सरकार बनाने का दौर 2017 में चला गया'

    राजभर ने अखिलेश यादव के राजनीतिक तौर-तरीकों पर भी हमला करते हुए कहा कि वह आज भी इसी घमंड में जी रहे हैं कि लाठी के दम पर सरकार बना लेंगे। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को अगर अब भी यही मुगालता है तो उन्हें जान लेना चाहिए कि 'लठैतों का दौर 2017 में चला गया।' राजभर ने बेहद तीखे अंदाज में लिखा कि वह दौर अब न 2027 में लौटेगा और न ही अगली पैदाइश में। 

    दादरी की ‘फ्लॉप सभा’ का जिक्र, दूसरी जनसभा पर भी तंज

    ओपी राजभर ने अखिलेश यादव की दादरी की सभा को भी निशाने पर लिया। उन्होंने उसे ‘फ्लॉप सभा’ बताते हुए दावा किया कि उसके बाद अखिलेश यादव दूसरी कोई बड़ी सभा करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। राजभर ने तंज कसते हुए कहा कि अभी तो ‘चवन्नी’ का असर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दिखना शुरू हुआ है और आने वाले दिनों में पूर्वांचल समेत पूरे प्रदेश में यही माहौल बनने वाला है। 

    दरअसल, 26 अगस्त को सपा मुखिया अखिलेश यादव की सहारनपुर में जनसभा प्रस्तावित थी, जिसका सपा की तरफ से कार्यक्रम भी जारी हो गया था। लेकिन अखिलेश ने अपनी जनसभा का कार्यक्रम कैंसिल करते हुए सपा कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसी को लेकर राजभर ने अखिलेश पर तंज कसा है।

  • गरीब परिवारों को आवास से राशन तक हर पात्र योजना का लाभ दिलाएं: मुख्यमंत्री

    गरीब परिवारों को आवास से राशन तक हर पात्र योजना का लाभ दिलाएं: मुख्यमंत्री

    लखनऊ

     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन की बैठक में प्रदेश में चल रही प्रमुख विकास परियोजनाओं और जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता केवल परियोजनाओं की घोषणा और स्वीकृति तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रत्येक परियोजना को तय समय में जमीन पर उतारना और उसका वास्तविक लाभ जनता तक पहुंचाना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भूमि अधिग्रहण, निविदा, विभागीय समन्वय अथवा अन्य स्तर पर लंबित कार्यों का तत्काल समाधान किया जाए और जिन परियोजनाओं की प्रगति अपेक्षित गति से नहीं है, उनकी नियमित समीक्षा कर जवाबदेही तय की जाए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा में बेहतर कनेक्टिविटी की महत्वपूर्ण भूमिका है। एक्सप्रेसवे को केवल परिवहन परियोजना के रूप में नहीं, बल्कि उद्योग, निवेश, रोजगार और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को गति देने वाले कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाए। बैठक में बताया गया कि चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे के लिए 6 अगस्त को निविदा प्रकाशित हो चुकी है और सितंबर में इसका चयन किया जाना है। फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे के लिए आवश्यक 1,339.04 हेक्टेयर भूमि में 1,222.25 हेक्टेयर, यानी 91.28 प्रतिशत भूमि प्राप्त हो चुकी है। आगरा-लखनऊ-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे के लिए 80.43 प्रतिशत, झांसी लिंक एक्सप्रेसवे के लिए 84.82 प्रतिशत और जेवर लिंक एक्सप्रेसवे के लिए 79.27 प्रतिशत भूमि प्राप्त हो चुकी है। मुख्यमंत्री ने भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में तेजी लाने और परियोजनाओं को निर्धारित समय में आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। 

    मेरठ-हरिद्वार, विंध्य और विंध्य पूर्वांचल स्पर एक्सप्रेसवे की प्लानिंग के संबंध में बैठक में बताया गया कि सत्यापन का कार्य पूरा हो चुका है और अब भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी है। मुख्यमंत्री ने संबंधित जिलों के अधिकारियों को भूमि संबंधी कार्यवाही में तेजी लाने के निर्देश दिए, ताकि इन महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी परियोजनाओं में अनावश्यक विलंब न हो।
    ग्रेटर नोएडा के मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स हब की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि लॉजिस्टिक्स परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जाए, जिससे उत्तर प्रदेश देश और दुनिया की सप्लाई चेन का मजबूत केंद्र बन सके। उन्नाव के एक्वा बिजनेस प्रोजेक्ट की समीक्षा में मुख्यमंत्री ने आवश्यक कार्रवाई में तेजी लाने के निर्देश दिए। कानपुर के बिनगवां में 40 एमएलडी क्षमता के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से पनकी पावर प्लांट को उपचारित जल उपलब्ध कराने की परियोजना का कार्य पूरा हो चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी परियोजनाओं में संबंधित विभागों के इंजीनियरों की क्षमता निर्माण पर भी ध्यान दिया जाए, ताकि परियोजनाओं की योजना, क्रियान्वयन और अनुरक्षण में गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके। 

    स्वास्थ्य संस्थानों, अस्पतालों और होटल-गेस्ट हाउस में अग्नि सुरक्षा की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जनसुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने फायर एनओसी से संबंधित प्रभावी डिजिटल डेटाबेस तैयार करने तथा एनओसी की वैधता समाप्त होने से पहले नवीनीकरण की प्रक्रिया शुरू कराने के निर्देश दिए। 
    लखनऊ में सीवर लाइन और मैनहोल के भीतर से गुजर रहे विद्युत एवं ओएफसी केबलों की स्थिति की समीक्षा में मुख्यमंत्री ने कहा कि नागरिक सुविधाओं से जुड़े बुनियादी ढांचे में सुरक्षा मानकों का पूरा ध्यान रखा जाए। जहां भी केबल सीवर लाइन अथवा मैनहोल से गुजर रहे हैं, उन्हें निर्धारित मानकों के अनुसार शिफ्ट किया जाए और कार्य में तेजी लाई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे कार्यों में स्थानीय निकाय से एनओसी जरूर प्राप्त कर लें। 

    विद्युत व्यवस्था की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां लाइन लॉस अत्यधिक हैं, वहां वास्तविक कारणों की पहचान कर ठोस कार्रवाई की जाए। बिजली चोरी, बिलिंग और वसूली की व्यवस्था को प्रभावी बनाया जाए तथा अत्यधिक लाइन लॉस वाले क्षेत्रों में डिस्कॉम के जिम्मेदार अधिकारियों की भी जवाबदेही तय की जाए। 
    ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इन्हें ग्रामीण विद्यार्थियों और युवाओं के लिए अध्ययन, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और डिजिटल ज्ञान के केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि डिजिटल लाइब्रेरियों से जुड़े सभी आवश्यक कार्य 30 सितंबर तक हर हाल में पूरे कर लिए जाएं। 

    जीरो पावर्टी अभियान की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि चिन्हित सभी परिवारों को आवास की सुविधा मिलनी चाहिए। जिन पात्र परिवारों का नाम प्रधानमंत्री आवास योजना में नहीं है, उन्हें मुख्यमंत्री आवास योजना से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा पात्र परिवारों को राशन, आयुष्मान कार्ड, शौचालय, आवास और अन्य संबंधित योजनाओं का लाभ सुनिश्चित किया जाए तथा परिवार के कम से कम एक सदस्य को कौशल प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ने का प्रयास हो। बैठक में बताया गया कि 12.50 लाख चिन्हित परिवारों में नौ लाख परिवार आवास के लिए पात्र पाए गए हैं। इनमें 4.50 लाख लोगों का नाम प्रधानमंत्री आवास योजना की पात्रता सूची में है, जबकि करीब पांच लाख परिवारों को मुख्यमंत्री आवास योजना से लाभान्वित किया जाना है। 6.67 लाख परिवारों के पास आयुष्मान कार्ड नहीं था। बीओसीडब्ल्यू में पंजीकृत परिवारों के आयुष्मान कार्ड बनाने की कार्रवाई आगे बढ़ी है। 

    श्रमिकों के लिए संचालित लेबर अड्डों की समीक्षा में मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रमिकों को सम्मानजनक और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी लेबर अड्डों का सर्वे कर वहां पेयजल, शौचालय, स्वच्छता, स्नान, चिकित्सा और भोजन जैसी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं। श्रमिकों के लेबर कार्ड और आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। प्रत्येक नगर निगम क्षेत्र में मेडिकल मोबाइल यूनिट, मोबाइल कैंटीन और आवश्यकतानुसार अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। चंदौली में निर्मित फिश मार्केट के संचालन की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि तैयार परिसंपत्तियों का तत्काल और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए। 

    गोरखपुर में निर्माणाधीन 30 हजार क्षमता वाले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम की समीक्षा में मुख्यमंत्री ने कहा कि परियोजना को निर्धारित समय में पूरा करने के साथ निर्माण कार्य की गुणवत्ता भी सुनिश्चित की जाए। बैठक में बताया गया कि निर्माण कार्य दिसंबर 2025 में शुरू हुआ है और इसे दिसंबर 2027 तक पूरा किया जाना है। इसी तरह मेरठ के मेजर ध्यानचंद स्पोर्ट्स विश्वविद्यालय की समीक्षा में मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। विभिन्न नीतियों के तहत देय वित्तीय प्रोत्साहनों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि निवेशकों को नीति के अनुरूप स्वीकृत वित्तीय प्रोत्साहन समय पर जारी किए जाएं। 

    राजस्व विभाग की समीक्षा में मुख्यमंत्री ने कहा कि विरासत और पैमाइश से जुड़े मामलों का निस्तारण आम नागरिक के अधिकार और संपत्ति से सीधे जुड़ा विषय है। उन्होंने मामलों के निस्तारण में पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से प्रयागराज में निरस्त किए गए विरासत संबंधी आवेदनों की जांच कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि निरस्तीकरण की पूरी कार्रवाई मेरिट के आधार पर ही हुई हो और पात्र व्यक्ति किसी भी स्थिति में अनावश्यक रूप से प्रभावित न हो। बैठक में बताया गया कि निर्विवाद विरासत के मामलों में सर्वाधिक 13,386 आवेदन प्रयागराज में निरस्त किए गए हैं। पैमाइश से जुड़े मामलों की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने पुराने मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित करने और प्रक्रिया को सरल एवं समयबद्ध बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राजस्व अधिकारियों की नियमित समीक्षा के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाए कि भूमि संबंधी विवाद अनावश्यक रूप से लंबित न रहें।

  • कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों का शैक्षणिक भविष्य होगा डिजिटल और सुरक्षित, योगी सरकार ने अपार आईडी पर बढ़ाया फोकस

    कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों का शैक्षणिक भविष्य होगा डिजिटल और सुरक्षित, योगी सरकार ने अपार आईडी पर बढ़ाया फोकस

    लखनऊ

    योगी सरकार की डिजिटल और पारदर्शी शिक्षा व्यवस्था में अब विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य को सुरक्षित डिजिटल पहचान से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी दिशा में माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश ने कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों से अपार आईडी (APAAR ID) बनवाकर अपने अग्रिम पंजीकरण एवं परीक्षा आवेदन पत्र में दर्ज करने का अनुरोध किया है। ‘वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी’ की अवधारणा पर आधारित 12 अंकों की यह स्थायी डिजिटल पहचान विद्यार्थियों की स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा तक की शैक्षणिक यात्रा के रिकॉर्ड को सुरक्षित और व्यवस्थित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    अपार आईडी के माध्यम से विद्यार्थियों की शैक्षणिक पहचान को डिजिटल सुरक्षा देने की यह पहल योगी सरकार के पारदर्शी, तकनीक आधारित और विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षा तंत्र को और मजबूत करेगी। इससे आज के विद्यार्थी का शैक्षणिक रिकॉर्ड भविष्य की शिक्षा तक सुरक्षित और व्यवस्थित रूप से साथ ले जाने का आधार तैयार होगा।

    अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने बताया कि परिषद द्वारा कक्षा 9 एवं 11 के विद्यार्थियों के अग्रिम पंजीकरण तथा कक्षा 10 एवं 12 के विद्यार्थियों के परीक्षा आवेदन पत्र भरने की प्रक्रिया चल रही है। इसी क्रम में विद्यार्थियों के शैक्षणिक विवरण को पारदर्शी, त्रुटिरहित और सुरक्षित रखने के उद्देश्य से अपार आईडी की व्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है।

    स्थायी डिजिटल पहचान है अपार आईडी

    अपार आईडी 12 अंकों की स्थायी डिजिटल पहचान है, जिसके माध्यम से विद्यार्थी की पूरी शैक्षणिक यात्रा के क्रेडिट और रिपोर्ट कार्ड को एक स्थान पर सुरक्षित रखा जा सकेगा। इसके माध्यम से मार्कशीट, ट्रांसफर सर्टिफिकेट समेत विभिन्न प्रमाणपत्र डिजीलॉकर पर डिजिटल रूप से सुरक्षित रहेंगे। इससे भविष्य में महत्वपूर्ण दस्तावेज खोने या खराब होने की चिंता कम होगी।

    छात्रवृत्ति और योजनाओं का लाभ पहुंचाने में मिलेगी सुविधा

    सही विवरण और आंकड़ों के आधार पर विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति, कल्याणकारी योजनाओं और शैक्षणिक सुविधाओं का लाभ सीधे और बिना बाधा उपलब्ध कराने में अपार आईडी उपयोगी होगी। इससे विद्यार्थियों की शैक्षणिक पहचान और उनके अभिलेखों को डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने में मदद मिलेगी।

    अभिभावकों की सहमति से बनेगी अपार आईडी: भगवती सिंह

    माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि पंजीकरण एवं आवेदन पत्र भरते समय अपार आईडी का विवरण देना अनिवार्य नहीं है। हालांकि, विद्यार्थियों के व्यापक हित और उनके डिजिटल शैक्षणिक भविष्य को सुरक्षित करने के लिए परिषद ने सभी विद्यालय प्रधानाचार्यों, शिक्षकों एवं अभिभावकों से विशेष अनुरोध किया है कि वे अपने बच्चों की अपार आईडी बनवाकर इसे अग्रिम पंजीकरण एवं परीक्षा फॉर्म में दर्ज कराएं। उन्होंने कहा कि अपार आईडी का निर्माण सरल और सुरक्षित प्रक्रिया है, जो अभिभावकों की सहमति से पूरी की जाती है। प्रधानाचार्यों से प्रयास करने को कहा गया है कि अग्रिम पंजीकरण की अंतिम तिथि से पूर्व शत-प्रतिशत विद्यार्थियों की अपार आईडी प्रविष्ट हो जाए।

  • स्क्रैप हुए वाहनों में 48.5 प्रतिशत हिस्सेदारी उत्तर प्रदेश की, देश में नंबर वन का बनाया रिकॉर्ड

    स्क्रैप हुए वाहनों में 48.5 प्रतिशत हिस्सेदारी उत्तर प्रदेश की, देश में नंबर वन का बनाया रिकॉर्ड

    लखनऊ

     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार स्वच्छ, सुरक्षित और आधुनिक परिवहन व्यवस्था की दिशा में लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। इसी क्रम में वाहन स्क्रैपिंग नीति के क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश ने देश में पहला स्थान हासिल किया है। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि पुराने, अनफिट और प्रदूषणकारी वाहनों को वैज्ञानिक एवं पर्यावरण अनुकूल तरीके से स्क्रैप करने में प्रदेश देश में नंबर एक पर है।

    योगी सरकार का उद्देश्य केवल पुराने वाहनों को हटाना नहीं, बल्कि स्वच्छ परिवहन, सड़क सुरक्षा, वैज्ञानिक तरीके से कचरे का दोबारा इस्तेमाल बढ़ाना और ऐसी अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना, जिसमें चीजों को बार-बार उपयोग में लाया जा सके।

    देशभर में स्क्रैप हुए वाहनों में यूपी की करीब आधी हिस्सेदारी

    परिवहन विभाग के मुताबिक 31 जुलाई 2026 तक देशभर में 4.07 लाख से अधिक वाहन स्क्रैप किए गए हैं। इनमें अकेले उत्तर प्रदेश में 1.97 लाख से अधिक वाहन स्क्रैप हुए। इस तरह देश में स्क्रैप किए गए कुल वाहनों में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी करीब 48.5 प्रतिशत है। यह उपलब्धि प्रदेश में वाहन स्क्रैपिंग नीति के प्रभावी क्रियान्वयन और लोगों की बढ़ती भागीदारी को दर्शाती है।

    वाहन स्क्रैपिंग केंद्रों के नेटवर्क को भी मिल रही मजबूती

    उत्तर प्रदेश ने वाहन स्क्रैपिंग के लिए जरूरी आधारभूत ढांचे को मजबूत करने में भी उल्लेखनीय प्रगति की है। प्रदेश में 92 लाइसेंस प्राप्त पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग केंद्र हैं, जिनमें से 51 वर्तमान में संचालित हैं। इससे वाहन मालिकों को अपने जीवन-चक्र पूरा कर चुके वाहनों को अनधिकृत कबाड़ बाजार में देने के बजाय पंजीकृत और विनियमित केंद्रों पर स्क्रैप कराने का सुरक्षित विकल्प मिल रहा है।

    वाहन मालिकों को कर में छूट का भी लाभ

    सरकार की नीति में पर्यावरण संरक्षण के साथ वाहन मालिकों के हितों का भी ध्यान रखा गया है। जमा प्रमाणपत्र के आधार पर नया वाहन खरीदने वाले पात्र वाहन मालिकों को सड़क कर में छूट मिलती है। गैर-परिवहन वाहनों पर 15 प्रतिशत तक, जबकि परिवहन वाहनों पर 10 प्रतिशत रोड टैक्स छूट का प्रावधान है। एनसीआर क्षेत्र में पुराने ट्रक अथवा बस को स्क्रैप कर नया वाहन खरीदने पर निर्धारित शर्तों के तहत 10 वर्षों के लिए 100 प्रतिशत तक रोड टैक्स छूट का प्रावधान भी किया गया है।

    गुणवत्ता और पारदर्शिता पर सरकार की पैनी नजर
    योगी सरकार वाहन स्क्रैपिंग के साथ उसकी गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर भी जोर दे रही है। पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग केंद्रों में निर्धारित मानकों के अनुरूप स्क्रैपिंग हो, इसके लिए परिवहन विभाग निरीक्षण और निगरानी कर रहा है। जुलाई 2026 में शिकायतें प्राप्त होने के बाद इन केंद्रों की कार्यप्रणाली की जांच के लिए विशेष निरीक्षण अभियान भी चलाया गया। प्रत्येक संभाग में अधिकारियों की संयुक्त टीमों को निरीक्षण की जिम्मेदारी दी गई।

    एनसीआर में स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा

    परिवहन मंत्री ने बताया कि प्रदेश के एनसीआर क्षेत्र में भी स्वच्छ परिवहन को गति देने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। हाल में लागू परिवर्तन योजना के तहत मेरठ, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, हापुड़, बागपत, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर और शामली में पुराने बीएस-1, बीएस-2, बीएस-3 और बीएस-4 मालवाहक वाहनों एवं बसों को बीएस-6, सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों से बदलने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

    विकसित उत्तर प्रदेश के लक्ष्य में अहम भूमिका

    परिवहन मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार का लक्ष्य ऐसा उत्तर प्रदेश बनाना है, जहां पुराने और अनफिट वाहन पीछे छूटें, प्रदूषण कम हो, सड़क सुरक्षा मजबूत हो और नागरिकों को स्वच्छ एवं आधुनिक परिवहन सुविधा मिले। वाहन स्क्रैपिंग नीति इसी व्यापक बदलाव का महत्वपूर्ण हिस्सा है और वर्ष 2047 के स्वच्छ, सुरक्षित एवं विकसित उत्तर प्रदेश के लक्ष्य को हासिल करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि पुराने अथवा अनफिट वाहनों को अनधिकृत कबाड़ियों के माध्यम से नष्ट कराने के बजाय केवल पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग केंद्रों में ही स्क्रैप कराएं।

  • 18 एफआईआर, 182 नमूने और 46 लाख रुपये से अधिक की सामग्री जब्त-नष्ट

    18 एफआईआर, 182 नमूने और 46 लाख रुपये से अधिक की सामग्री जब्त-नष्ट

    लखनऊ

     त्योहारों के दौरान प्रदेशवासियों को शुद्ध, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने की योगी सरकार की प्रतिबद्धता के तहत खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए), उत्तर प्रदेश ने मिलावटखोरों के खिलाफ अभियान और तेज कर दिया है। रक्षाबंधन पर्व के मद्देनजर 20 अगस्त 2026 से चलाए जा रहे विशेष प्रवर्तन अभियान में आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के निर्देशन में प्रदेश के विभिन्न जिलों में बड़े पैमाने पर कार्रवाई की गई। अभियान के तहत अब तक 18 एफआईआर दर्ज की गईं, 182 खाद्य नमूने संग्रहीत किए गए, 13,440.25 किलोग्राम और 14,561 लीटर सामग्री जब्त की गई है। वहीं 18,607 किलोग्राम और 7,630 लीटर असुरक्षित/अस्वच्छ खाद्य सामग्री नष्ट कराई गई है। जब्त सामग्री का अनुमानित मूल्य करीब ₹26.09 लाख तथा नष्ट सामग्री का मूल्य करीब ₹27.89 लाख है।

    16 जिलों में पहुंची विशेष प्रवर्तन टीमें
    कानपुर नगर, कानपुर देहात, लखनऊ, मुजफ्फरनगर, मेरठ, कासगंज, अलीगढ़, बागपत, प्रयागराज, गाजियाबाद, आगरा, हापुड़, संत कबीर नगर, फिरोजाबाद, बदायूं, सम्भल और मथुरा समेत विभिन्न जनपदों में कार्रवाई की गई। योगी सरकार की नीति के अनुरूप एफएसडीए ने खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता से समझौता करने वालों के खिलाफ कार्रवाई को केवल नमूना संग्रह तक सीमित नहीं रखा है। जहां खाद्य पदार्थ असुरक्षित या अस्वच्छ परिस्थितियों में पाए गए, वहां उन्हें मौके पर ही नष्ट कराया गया। वहीं मिलावट अथवा खाद्य सुरक्षा मानकों के गंभीर उल्लंघन के मामलों में एफआईआर, कारोबार बंद कराने और परिसर सील करने जैसी कठोर कार्रवाई भी की गई। यह कार्रवाई सरकार की उस नीति को दर्शाती है, जिसमें जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों के लिए कोई स्थान नहीं है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।

    कानपुर से लेकर मेरठ तक मिलावटखोरों पर शिकंजा

    कानपुर नगर में हटिया खोवा मंडी के 14 विक्रेताओं का निरीक्षण कर 18 नमूने लिए गए और अस्वच्छ परिस्थितियों में रखा करीब 4.30 कुंतल खोया नष्ट कराया गया। एक्सप्रेस-वे एवं फजलगंज खोवा मंडी में भी नमूने लिए गए। कानपुर देहात में खोवा निर्माण इकाइयों में रिफाइंड तेल, वनस्पति और एसएमपी के इस्तेमाल के मामले सामने आने पर तैयार खोया नष्ट कराया गया, संदिग्ध सामग्री जब्त की गई तथा संबंधित मामलों में एफआईआर दर्ज कराई गई।
    लखनऊ में शिवाक्षी स्वीट्स पर कार्रवाई के दौरान 15 नमूने लिए गए। 686 किलोग्राम खाद्य सामग्री जब्त करने के साथ 2,675 किलोग्राम संदूषित खाद्य पदार्थ नष्ट कराया गया और अस्वच्छ परिस्थितियों के कारण कारोबार बंद कराया गया। 

    नकली घी और मिलावटी पनीर बनाने वालों पर भी कड़ी कार्रवाई

    सम्भल में नकली घी तैयार करने वाले परिसर पर छापेमारी कर करीब 100 कुंतल घी जब्त किया गया। एफआईआर दर्ज कराने के साथ परिसर सील कर कारोबार बंद कराया गया। बदायूं में वाहन जांच के दौरान 1,605 किलोग्राम देशी घी जब्त किया गया, जिसकी अनुमानित कीमत ₹10.53 लाख है। कासगंज में 4 कुंतल पनीर नष्ट कराया गया, जबकि हापुड़ में करीब 6 कुंतल पनीर नष्ट कराया गया। मथुरा में रिफाइंड तेल और संदिग्ध रसायनों का इस्तेमाल कर पनीर तैयार किए जाने के तीन मामलों में एफआईआर दर्ज कराई गई।

    मिलावट के ‘कच्चे माल’ पर भी एफसी की नजर

    एफएसडीए की कार्रवाई की खास बात यह रही कि विभाग ने केवल तैयार खाद्य पदार्थों को ही निशाना नहीं बनाया, बल्कि मिलावटी खाद्य पदार्थ तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री पर भी कार्रवाई की।
    अभियान में स्किम्ड मिल्क पाउडर, वनस्पति, रिफाइंड तेल, सिंथेटिक रंग, सोडियम बाई कार्बोनेट और संदिग्ध रसायनों को जब्त किया गया। प्रयागराज में 72 कुंतल विभिन्न खाद्य पदार्थ नष्ट कराए गए, जबकि अलीगढ़ में 17.5 कुंतल खोवा नष्ट कराया गया। फिरोजाबाद में 10 कुंतल मावा नष्ट कराने के साथ दो एफआईआर दर्ज हुईं। गाजियाबाद में संदिग्ध रसायन एवं अन्य सामग्री जब्त करते हुए दो एफआईआर दर्ज कराई गईं।

    त्योहार की मिठास में मिलावट की कोई जगह नहीं

    योगी सरकार के निर्देश पर चलाए गए इस विशेष अभियान का उद्देश्य  रक्षाबंधन पर्व पर मिठाई, खोवा, पनीर, दूध और घी के नाम पर लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ न हो। विभाग द्वारा लगातार निरीक्षण, सैंपलिंग, सीजर, विनष्टीकरण और कानूनी कार्रवाई के माध्यम से खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित कराया जा रहा है। सरकार का संदेश साफ है कि जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वालों पर कार्रवाई जारी रहेगी।

  • चेक के साथ सीएम योगी का भरोसा, स्टार्टअप फाउंडर्स बोले – यूपी में बढ़ा है अवसर

    चेक के साथ सीएम योगी का भरोसा, स्टार्टअप फाउंडर्स बोले – यूपी में बढ़ा है अवसर

    लखनऊ

     उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए योगी सरकार के प्रयासों को उस समय और मजबूती मिली, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्टार्टअप फाउंडर्स और उनकी टीमों से सीधे संवाद कर उन्हें सरकार के हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया। लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में सीएम ने 107 स्टार्टअप्स को 3.42 करोड़ रुपये से अधिक और 9 इनक्यूबेटर्स को 1.79 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि के चेक सौंपे। कार्यक्रम में मौजूद कई स्टार्टअप प्रमुखों ने भी सरकार की नीतियों, सहयोग और प्रोत्साहन व्यवस्था की सराहना करते हुए इसे यूपी के स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए अहम कदम बताया।

    एडूबुक के सह-संस्थापक एवं सीईओ अपूर्व बजाज और सीओओ शिवानी मल्होत्रा ने आयोजन के दौरान योगी सरकार की स्टार्टअप नीति की सराहना की। उन्होंने बताया कि उनका स्टार्टअप साइबर सिक्योरिटी, ब्लॉकचेन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा एनालिटिक्स की शिक्षा देता है। इसके साथ ही इस क्षेत्र में बच्चों की बायोडाटा तैयार कराकर देश-विदेश में जॉब मेलों के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। उनके पोर्टल के जरिए छात्रों का बैकग्राउंड वेरिफिकेशन भी तुरंत हो जाता है, जिसमें पहले आमतौर पर 20 दिन से अधिक समय लगता था।

    उन्होंने बताया कि स्टार्टअप को आगे बढ़ाने के लिए योगी सरकार की ओर से 4.50 लाख रुपये का अनुदान मिला है। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप्स की सुविधा के लिए सरकार की ओर से शुरू किया गया ‘वन पोर्टल, वन विंडो’ अच्छा कदम है। इससे उत्तर प्रदेश में उनके जैसे स्टार्टअप्स के लिए काम करना और फंडिंग प्राप्त करना आसान होगा। उन्होंने बताया कि कंपनी में अब तक 80 लाख रुपये तक का निवेश किया जा चुका है।

    कंपनी में महिलाओं को 50 प्रतिशत रोजगार

    शिवानी मल्होत्रा ने कहा कि योगी सरकार ने महिला स्टार्टअप फाउंडर्स को भी प्रोत्साहित किया है। इसका सीधा असर प्रदेश में महिलाओं के रोजगार पर पड़ेगा। उनके लखनऊ स्थित कार्यालय में भी 50 प्रतिशत स्टाफ में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की गई है।

    पाइप लाइन से घर-घर तक पानी पहुंचाने का विजन

    वीडीटी पाइपलाइन के प्रबंध निदेशक भुवनेश शर्मा ने कहा कि उनकी कंपनी उत्तर प्रदेश में तेल, पेट्रोल, डीजल और गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करने का काम कर रही है। इसके लिए पाइपलाइन व्यवस्था को बेहतर बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि यूपी स्टार्टअप समिट में आकर वह काफी खुश हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनसे बातचीत की और प्रदेश के घर-घर तक पानी पहुंचाने को लेकर चर्चा की।

    उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए उनकी टीम पाइपलाइन व्यवस्था को बेहतर बनाने पर काम करेगी। इसके लिए मुख्यमंत्री ने जमीन और फंड उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है। टीम के अब तक के कार्य के लिए उन्हें प्रशस्ति पत्र भी मिला। उन्होंने कहा कि पहले उत्तर प्रदेश को बीमारू प्रदेश के तौर पर देखा जाता था, लेकिन अब प्रदेश तेजी से विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।

    स्टार्टअप इकोसिस्टम का हो रहा विस्तार
    सीएम योगी ने सिंह डायनेमिक्स प्राइवेट लिमिटेड के सह-संस्थापक डॉ. अनुशी वर्मा और डॉ. हिमांशु सिंह को स्टार्टअप प्रोत्साहन के तौर पर 4.50 लाख रुपये का चेक सौंपा। डॉ. हिमांशु सिंह ने कहा कि उनकी कंपनी सुरक्षा बलों के लिए छोटे हथियार बनाने का काम कर रही है। इस राशि से कारोबार को आगे बढ़ाने में काफी मदद मिलेगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश का स्टार्टअप इकोसिस्टम लगातार विकसित होगा और उनकी कंपनी उत्तर प्रदेश के आर्थिक विकास में योगदान दे सकेगी।

    यूपी में मिलेगा भरपूर सहयोग

    एंड्योरएयर सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ रामा कृष्णा ने बताया कि उनकी कंपनी सुरक्षा बलों के लिए ड्रोन बनाने का काम करती है। इनमें लॉजिस्टिक्स, सर्विलांस और अटैक ड्रोन शामिल हैं। उनकी कंपनी में करीब 150 लोग काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस आयोजन से साफ हो गया है कि उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप्स को पहले से भी ज्यादा सहयोग मिलने वाला है। योगी सरकार की नई स्टार्टअप नीति काफी अच्छी है। इसमें जमीन, सुविधाएं, फंडिंग और पूंजी की जरूरतों का पूरा ध्यान रखा गया है।

    योगी सरकार का विजन सराहनीय

    त्रिशूल पल्सेशन टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड के सह-संस्थापक दियांम को स्टार्टअप में प्रोटोटाइप विकास के लिए पांच लाख रुपये का प्रोत्साहन चेक मिला। उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी क्रायोजेनिक रॉकेट इंजन पर काम कर रही है। साथ ही, उनके उत्पाद एक विदेशी कंपनी को भी सप्लाई किए जा रहे हैं। प्रोटोटाइप तैयार करने में योगी सरकार से मिली ग्रांट काफी उपयोगी साबित हुई है। उन्होंने कहा कि योगी सरकार का विजन और उसके लिए किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं।

    योगी सरकार में पूरा हो रहा सपना

    जेनोमिक्स सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड की सह-संस्थापक डॉ. दीक्षा भारतीया को मुख्यमंत्री ने स्टार्टअप प्रोत्साहन के रूप में 4.50 लाख रुपये का चेक सौंपा। उन्होंने बताया कि वह नवजात शिशुओं में होने वाली दुर्लभ बीमारियों पर काम कर रही हैं। भारत में करोड़ों बच्चे ऐसी बीमारियों से प्रभावित हैं। उनका स्टार्टअप नए इनोवेशन के जरिए जन्म के समय बच्चों की हेल्थ स्क्रीनिंग कर रहा है, जिससे बीमारियों की समय रहते पहचान की जा सके।

    उन्होंने बताया कि प्रदेश की कई लैब और अस्पतालों को अपने साथ जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अपने उत्पाद के लिए पेटेंट भी फाइल किया गया है। उन्होंने कहा कि योगी सरकार ने इस सपने को पूरा करने के लिए वित्तीय सहायता के साथ अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई हैं। इसका परिणाम है कि उत्तर प्रदेश में नवाचार और स्टार्टअप्स की संख्या लगातार बढ़ रही है।

  • रक्षाबंधन पर बहनों को निशुल्क बस यात्रा के लिए परिवहन निगम ने किए पुख्ता इंतजाम

    रक्षाबंधन पर बहनों को निशुल्क बस यात्रा के लिए परिवहन निगम ने किए पुख्ता इंतजाम

    लखनऊ

     रक्षाबंधन पर महिलाओं और बहनों को योगी सरकार की ओर से दी गई निशुल्क बस यात्रा का लाभ मिलना शुरू हो गया है। यात्रियों की बढ़ी भीड़ को देखते हुए उत्तर प्रदेश परिवहन निगम ने भी कमर कस ली है। निगम ने 26 से 31 अगस्त तक छह दिनों के लिए अधिक से अधिक बसों का संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही प्रमुख बस स्टेशनों पर अतिरिक्त कर्मचारियों और पर्यवेक्षकों की तैनाती कर यात्रियों को सुगम और सुरक्षित यात्रा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।

    परिवहन निगम ने यात्रियों की उपलब्धता के आधार पर लखनऊ, कानपुर समेत विभिन्न प्रमुख गंतव्यों के लिए अतिरिक्त सेवाएं चलाने और जरूरत के मुताबिक बसों की उपलब्धता बढ़ा दी है। सभी बसों को निर्धारित स्टॉपेज से यात्रियों को लेने और मार्गों की सघन चेकिंग कराने को कहा गया है। बस स्टेशनों पर लगातार पर्यवेक्षकों की मौजूदगी के साथ यात्रियों की सुविधा का भी ध्यान रखा जा रहा है।

    बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने पर जोर

    रक्षाबंधन के अवसर पर महिलाओं के अलावा अन्य यात्रियों को भी बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने पर जोर है। बढ़ी मांग वाले मार्गों पर अतिरिक्त बसें संचालित की जा रही हैं। इस अवधि में निगम की सभी अनुबंधित बसों का भी संचालन महिलाओं व अन्य यात्रियों की सुविधा के लिए किया जा रहा है। बस संचालन से जुड़े कर्मचारियों के लिए विशेष प्रोत्साहन योजना भी लागू की गई है, ताकि अधिक से अधिक बसें सड़क पर रहें।

    चालक-परिचालकों को प्रोत्साहन राशि, बस संचालन पर विशेष जोर

    26 से 31 अगस्त तक छह दिनों की अवधि में 1,800 किलोमीटर बस संचालन पूरा करने वाले चालक-परिचालकों को 1,200 रुपये प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान किया गया है। वहीं, 1,800 किलोमीटर से अधिक संचालन पर संविदा चालक-परिचालकों को अतिरिक्त किलोमीटर के लिए 55 पैसे प्रति किलोमीटर की दर से अतिरिक्त भुगतान किया जाएगा। इससे त्योहार के दौरान बसों के अधिकतम संचालन को प्रोत्साहन मिलेगा।

    प्रमुख बस स्टेशनों पर अतिरिक्त व्यवस्था

    यात्रियों की अधिक भीड़ वाले आनंद विहार, कौशांबी, कश्मीरी गेट, मुरादाबाद, मेरठ, बरेली, कैसरबाग, आलमबाग, चारबाग, अवध डिपो, सहारनपुर, आईएसबीटी आगरा, मसूदाबाद अलीगढ़, झकरकटी कानपुर और इटावा समेत चिन्हित बस स्टेशनों पर अतिरिक्त कर्मचारियों और पर्यवेक्षकों की ड्यूटी सुचारु रूप से चल रही है। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य रक्षाबंधन के दौरान बसों के संचालन को सुचारु बनाए रखना और यात्रियों को समय पर बस उपलब्ध कराना है।

    यात्रियों की मांग के अनुसार बढ़ेंगी बसें

    निगम ने क्षेत्रीय प्रबंधकों को बस स्टेशनों पर बसों की उपलब्धता की लगातार निगरानी करने और मांग के अनुसार तत्काल बसें उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही बसों में भीड़ को देखते हुए यात्रियों को बीच के स्टॉपेज से भी बस में बैठाकर उनके गंतव्य तक पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है।

  • पूर्व राज्यमंत्री  मोहसिन रज़ा जी ने ‘रक्षाबंधन’ के पावन पर्व पर देश व प्रदेशवासियों को दीं हार्दिक बधाई

    पूर्व राज्यमंत्री मोहसिन रज़ा जी ने ‘रक्षाबंधन’ के पावन पर्व पर देश व प्रदेशवासियों को दीं हार्दिक बधाई

    लखनऊ

    उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व राज्यमंत्री एवं पूर्व रणजी क्रिकेटर  मोहसिन रज़ा जी ने भाई-बहन के अटूट स्नेह, विश्वास और समर्पण के प्रतीक पावन पर्व 'रक्षाबंधन' के अवसर पर समस्त देशवासियों एवं प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई और अनंत शुभकामनाएं दी हैं।

    अपने संदेश में  मोहसिन रज़ा जी ने कहा

     "रक्षाबंधन का यह पवित्र त्यौहार भारतीय संस्कृति की उस समृद्ध परंपरा का प्रतीक है, जो रिश्तों की मर्यादा, सुरक्षा, प्रेम और सम्मान को नई गहराई प्रदान करता है। रेशम की एक डोरी केवल भाई और बहन के रिश्ते को ही नहीं बांधती, बल्कि यह समाज में आपसी सौहार्द, सुरक्षा और भाईचारे की भावना को भी सुदृढ़ करती है।"

    उन्होंने आगे कहा:

     "हमारी महान गंगा-जमुनी तहज़ीब में रक्षाबंधन का पर्व सामाजिक समरसता और एक-दूसरे के प्रति कर्तव्यनिष्ठा का पैगाम देता है। आइए, इस शुभ अवसर पर हम सब मिलकर अपनी माताओं, बहनों और बेटियों के मान-सम्मान, अधिकार और सुरक्षा के प्रति अपने संकल्प को और मजबूत करें।"

     मोहसिन रज़ा जी ने ईश्वर से प्रार्थना की कि यह पावन पर्व आप सभी के जीवन में सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और अपार खुशियां लेकर आए।

     

  • नेपाल की आपदा में फंसे यूपी के नागरिकों को निकालने के लिए योगी सरकार ने संभाला मोर्चा

    नेपाल की आपदा में फंसे यूपी के नागरिकों को निकालने के लिए योगी सरकार ने संभाला मोर्चा

    लखनऊ

    नेपाल में बाढ़ व प्राकृतिक आपदा के बीच उत्तर प्रदेश के नागरिकों की सुरक्षा को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश सरकार ने मोर्चा संभाल लिया है। नेपाल में फंसे यूपी के नागरिकों को सुरक्षित निकालने और उन्हें तत्काल राहत पहुंचाने के लिए सरकार ने संसाधनों के साथ राहत-बचाव टीमों को सक्रिय किया है। राहत आयुक्त कार्यालय के कंट्रोल रूम से नेपाल सीमावर्ती जिलों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

    मुख्यमंत्री की निगरानी में राहत-बचाव का व्यापक इंतजाम

    योगी सरकार ने नेपाल में राहत-बचाव अभियान के लिए एसडीआरएफ की एक प्लाटून भेजी है। इसमें 32 जवान शामिल हैं। इसके अलावा पीएसी की 26वीं बटालियन के 22 जवानों को भी नेपाल भेजा गया है। सरकार ने जरूरत के मुताबिक अतिरिक्त बल और संसाधन उपलब्ध कराने की तैयारी की है, जिससे प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने में किसी तरह की कमी न रहे।

    4 रबर बोट के साथ एल्युमिनियम बोट भी भेजी जा रही

    सीएम योगी के निर्देश पर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रेस्क्यू अभियान को प्रभावी बनाने के लिए मौके पर चार रबर बोट मौजूद हैं। अतिरिक्त एसडीआरएफ प्लाटून के साथ एल्युमिनियम बोट भी नेपाल भेजी जा रही है। सिंधुरिया क्षेत्र में राहत-बचाव अभियान की तैयारियां की जा रही हैं। सरकार का पूरा फोकस फंसे हुए नागरिकों को सुरक्षित निकालने और जरूरतमंदों तक तत्काल सहायता पहुंचाने पर है। नेपाल की बाढ़ और वहां की स्थिति की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। नेपाल में फंसे यूपी के नागरिकों के परिजन किसी भी सूचना या सहायता के लिए 1070 पर संपर्क कर सकते हैं।