Category: उत्तर प्रदेश

  • लखनऊ के चौक में फ्रेगरेंस पार्क का लोकार्पण, राजनाथ सिंह बोले- विकास लोगों के जीवन में महसूस होना चाहिए

    लखनऊ के चौक में फ्रेगरेंस पार्क का लोकार्पण, राजनाथ सिंह बोले- विकास लोगों के जीवन में महसूस होना चाहिए

    लखनऊ
     राजधानी के चौक क्षेत्र में नवनिर्मित फ्रेगरेंस पार्क का शनिवार को रक्षा मंत्री एवं लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह ने लोकार्पण किया। इस अवसर पर पार्क परिसर में स्थापित पंजाब केसरी लाला लाजपत राय और शहीदे आजम भगत सिंह की आदमकद प्रतिमाओं का भी अनावरण किया गया। साथ ही लगभग 43 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित विभिन्न विकास कार्यों का शिलान्यास किया गया।

    समारोह को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सरदार भगत सिंह युवा भारत की ऊर्जा के प्रतीक थे जबकि लाला लाजपत राय अनुभवी भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं। राष्ट्र निर्माण के लिए ऊर्जा और अनुभव, दोनों की आवश्यकता होती है। फ्रेगरेंस पार्क में स्थापित दोनों महान स्वतंत्रता सेनानियों की प्रतिमाएं सही अर्थों में दो पीढ़ियों के संवाद का संदेश देती हैं।

    उन्होंने कहा कि आज की जीवनशैली में लोग एक-दूसरे को पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे हैं। बच्चे भी बड़ी मात्रा में स्क्रीन के सामने समय बिता रहे हैं। ऐसे समय में पार्क और खुले सार्वजनिक स्थल लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने का काम करते हैं। पार्क किसी भी शहर के सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि विकास ऐसा होना चाहिए जिसमें कंक्रीट और प्रकृति के बीच बेहतर समन्वय हो।

    राजनाथ सिंह ने कहा कि वह लखनऊ का समग्र और समावेशी विकास चाहते हैं। शहर में स्थान-स्थान पर हरियाली, बेहतर कनेक्टिविटी और नागरिक सुविधाओं का विस्तार होना चाहिए। उनका प्रयास है कि लखनऊ का विकास केवल आंकड़ों में नहीं बल्कि लोगों के जीवन में महसूस हो। शहर केवल सड़कों, मॉल और इमारतों से नहीं बनता, बल्कि पार्क, खुले मैदान, हरियाली और नागरिक सुविधाएं भी शहर के विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्होंने इस दिशा में लखनऊ विकास प्राधिकरण के कार्यों की सराहना की।

    कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के सामूहिक गायन से हुई। तत्पश्चात क्षेत्रीय विधायक डा. नीरज बोरा ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। अपने उद्बोधन में  उन्होंने कहा कि वर्ष 1947 में भारत-पाकिस्तान विभाजन की विभीषिका का दंश झेलकर पाकिस्तान से भारत आए परिवारों ने देश के विभिन्न हिस्सों में नए सिरे से अपना जीवन शुरू किया। विस्थापित परिवारों को जहां-जहां बसाया गया वहां लाजपत नगर जैसे नामों के माध्यम से उनके संघर्ष और स्मृतियों को सम्मान दिया गया। उन्होंने कहा कि उनकी इच्छा थी कि लाला लाजपत राय के नाम पर एक सुंदर पार्क विकसित हो और परिसर में पंजाब केसरी लाला लाजपत राय तथा शहीदे आजम भगत सिंह की प्रतिमाएं स्थापित हों। इस संबंध में उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से अनुरोध किया था।

    कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री ने एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत पार्क परिसर में चंदन का पौधा रोपा। इसके बाद बटन दबाकर दोनों महान स्वतंत्रता सेनानियों की प्रतिमाओं का अनावरण किया। फ्रेगरेंस पार्क में विभिन्न प्रकार के सुगंधित एवं औषधीय पौधे लगाए गए हैं। इससे यह क्षेत्र के नागरिकों के लिए हरित, सुगंधित और स्वास्थ्यवर्धक सार्वजनिक स्थल के रूप में विकसित होगा।

    कार्यक्रम में भारत विभाजन की 80 वर्ष पूर्व हुई मानवीय त्रासदी पर केंद्रित लघु फिल्म का प्रसारण किया गया। फिल्म के माध्यम से विभाजन के दौरान विस्थापन और पीड़ा झेलने वाले परिवारों के संघर्ष को प्रस्तुत किया गया। इसके साथ ही लखनऊ में हो रहे विभिन्न विकास कार्यों पर आधारित लखनऊ विकास प्राधिकरण की लघु फिल्म भी प्रदर्शित की गई।

    इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने विभाजन के समय पाकिस्तान से भारत आए परिवारों का अभिनन्दन किया। इनमें पूर्व विधायक विद्यासागर गुप्ता, पूर्व महापौर संयुक्ता भाटिया तथा जसवंत कौर शामिल रहीं।

    कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, उद्यान राज्य मंत्री दिनेश प्रताप सिंह, राज्यसभा सांसद एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा, सांसद बृजलाल, संजय सेठ, महापौर सुषमा खर्कवाल, भाजपा लखनऊ महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी, विधान परिषद सदस्य मुकेश शर्मा, विधायक योगेश शुक्ला, ओपी श्रीवास्तव, उमेश द्विवेदी, सांसद प्रतिनिधि दिवाकर त्रिपाठी, उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक के सभापति विवेक तोमर, मंडल अध्यक्ष दयाशंकर पांडे, क्षेत्रीय पार्षद अनुराग मिश्रा, वैज्ञानिक डॉ. शरद श्रीवास्तव सहित भाजपा पदाधिकारी, पार्षद, जनप्रतिनिधि, लखनऊ विकास प्राधिकरण के अधिकारी एवं बड़ी संख्या में क्षेत्रीय नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्र गान के साथ हुआ।

  • फ्लू को लेकर यूपी में अलर्ट, अस्पतालों में दवा-ऑक्सीजन का पर्याप्त स्टॉक

    फ्लू को लेकर यूपी में अलर्ट, अस्पतालों में दवा-ऑक्सीजन का पर्याप्त स्टॉक

    लखनऊ
    प्रदेश में मौसमी फ्लू के बढ़ते मामलों के बीच स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों में इलाज और जरूरी चिकित्सा संसाधनों की उपलब्धता को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने शनिवार को प्रदेशभर के स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से स्थिति की समीक्षा की और अस्पतालों में ओसेल्टामिविर (टैमीफ्लू), ऑक्सीजन, नेबुलाइजर, ऑक्सीजन मास्क और ब्रोंकोडायलेटर्स का पर्याप्त स्टॉक रखने के निर्देश दिए।
    प्रदेश में मरीजों की संख्या को देखते हुए संबंधित जिलों में अस्पतालों को पूरी तरह तैयार रखने और संसाधनों की नियमित निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।
    उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने निर्देश दिए कि अस्पतालों में सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षणों के साथ भर्ती सभी गंभीर मरीजों की फ्लू जांच सुनिश्चित की जाए। इन्फ्लुएंजा-लाइक इलनेस और सांस संबंधी संक्रमण वाले मरीजों के संपर्क में आने वाले लोगों में लक्षण पाए जाने पर चिकित्सकीय सलाह के अनुसार समय से एंटीवायरल दवाएं शुरू की जाएं।

    ज्यादा मामले वाले जिलों में अलग ओपीडी
    जिन जिलों में फ्लू के मामले अधिक हैं, वहां श्वसन संबंधी शिकायत वाले मरीजों के लिए अलग ओपीडी संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे मरीजों की जांच, चिकित्सकीय परामर्श और उपचार को सुगम बनाने के साथ अस्पतालों में भीड़ को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने गंभीर मरीजों के उपचार के लिए प्रत्येक जिले में जिला एवं संयुक्त अस्पताल स्तर पर चार से छह आइसोलेशन बेड तैयार रखने को कहा है। अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि गंभीर मरीजों के इलाज में दवा, ऑक्सीजन या अन्य आवश्यक उपकरणों की कमी न हो।

    फ्लू-बुखार मरीजों के लिए अलग रजिस्ट्रेशन काउंटर
    उपमुख्यमंत्री ने अस्पतालों में बुखार और फ्लू से संबंधित मरीजों के लिए अलग रजिस्ट्रेशन काउंटर बनाने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य मरीजों का पंजीकरण जल्द कराकर उन्हें बिना अनावश्यक इंतजार के चिकित्सकीय परामर्श और उपचार उपलब्ध कराना है।

    डिप्टी सीएम ने की होप सेंटर से ऑनलाइन मॉनिटरिंग
    उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने लखनऊ के कैसरबाग स्थित स्वास्थ्य भवन में स्थापित केंद्रीय कमांड एवं कंट्रोल सेंटर होप (हेल्थ ऑनलाइन पैरामीटर इवैल्यूएशन) पहुंचकर प्रदेश के अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की। उन्होंने चिकित्साधिकारियों से अस्पतालों में दवा, ऑक्सीजन और अन्य आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता की जानकारी ली तथा किसी भी कमी को तत्काल दूर करने के निर्देश दिए।

    नेपाल सीमा से लगे जिलों में विशेष सतर्कता
    नेपाल से सटे उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग को इन क्षेत्रों में फ्लू एवं बुखार के मामलों की प्रभावी निगरानी करने को कहा गया है। साथ ही नेपाल अथवा उत्तर प्रदेश से आने वाले प्रत्येक मरीज को तत्काल चिकित्सकीय सहायता और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। डिप्टी सीएम ने अधिकारियों को अस्पतालों में मास्क, हाथों की स्वच्छता और खांसी के शिष्टाचार के प्रति मरीजों एवं तीमारदारों को जागरूक करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेशवासियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर सरकार पूरी तरह सतर्क है और फ्लू की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। 
    समीक्षा बैठक में अपर मुख्य सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित कुमार घोष, महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. पवन कुमार अरुण सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

  • सीएम योगी ने यूपी को देश के शीर्ष तीन राज्यों में पहुंचाया, अपराधियों के हौसले किए चकनाचूर : राजनाथ

    सीएम योगी ने यूपी को देश के शीर्ष तीन राज्यों में पहुंचाया, अपराधियों के हौसले किए चकनाचूर : राजनाथ

    लखनऊ
     रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में हुए बदलाव और महिला सुरक्षा की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश पहले पूरे देश में बहुत पीछे हुआ करता था, लेकिन योगी आदित्यनाथ ने इसे आज देश के शीर्ष तीन राज्यों में लाकर खड़ा कर दिया है। पहले बेटियों के माता-पिता उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते थे, आज अपराधी और उनके घरवाले चिंतित रहते हैं। महिलाओं को गलत नजर से देखने वालों के हौसले योगी सरकार ने सिर्फ तोड़े नहीं, बल्कि चकनाचूर कर दिए हैं। उनकी हिम्मत भी तोड़ी है, उनके ठिकाने भी तोड़े हैं और उनके घुटने भी तोड़े हैं।

    वीरांगना अवंतीबाई लोधी की भव्य प्रतिमा के लोकार्पण समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए। राजनाथ सिंह ने वीरांगना अवंतीबाई के शौर्य और बलिदान को नमन करते हुए कहा कि उनका जीवन अन्याय के सामने कभी न झुकने और मातृभूमि की रक्षा के लिए सर्वस्व बलिदान करने की प्रेरणा देता है।

    महिला सुरक्षा पर रक्षा मंत्री ने कहा कि पहले की सरकारों के समय देश की राजधानी तक में महिलाएं सुरक्षित नहीं थीं। उत्तर प्रदेश को लेकर उन्होंने कहा, मैं दावे के साथ कह सकता हूं, या तो कल्याण सिंह की हुकूमत थी या आज योगी आदित्यनाथ की हुकूमत है कि कोई महिलाओं पर गलत नजर डालने की हिम्मत नहीं कर सकता। पहले बेटियों के माता-पिता उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते थे, लेकिन आज अपराधी और उनके घरवाले चिंतित रहते हैं। योगी जी ने पूरे हिंदुस्तान में प्रदेश की एक नई पहचान बनाई है। पहले यूपी पूरे देश में बहुत पीछे हुआ करता था। उसे आज देश के शीर्ष तीन राज्यों में लाकर खड़ा करने का काम योगी जी ने किया है।

    महापुरुषों के विचारों व योगदान को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का पूरा प्रयास
    उन्होंने कहा कि सरकार गौरवशाली विरासत को सामने लाने और महापुरुषों के विचारों व योगदान को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का पूरा प्रयास कर रही है। महापुरुषों और वीरांगनाओं के नाम पर बटालियनों और विभिन्न स्थानों का नामकरण किया जा रहा है। इससे समाज में अपने महापुरुषों के प्रति गौरव की अनुभूति होगी और आने वाली पीढ़ियां उनसे प्रेरणा प्राप्त करेंगी।

    तीन महिला पीएसी बटालियनों की कल्पना नहीं की जा सकती थी
    रक्षा मंत्री ने मुख्यमंत्री की ओर से पीएसी की तीन महिला बटालियनों के गठन और उनके नामकरण का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लखनऊ में वीरांगना ऊदा देवी और गोरखपुर में वीरांगना झलकारी बाई के नाम पर पीएसी की बटालियन का नाम रखा गया है। बदायूं में पीएसी की नई बटालियन का नाम वीरांगना अवंतीबाई लोधी के नाम पर रखा गया है। कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था कि किसी मुख्यमंत्री की ऐसी समावेशी सोच होगी।

    कल्याण सिंह ने सत्ता को ठोकर मार दी थी
    देश के नायकों को सम्मान देने की चर्चा करते हुए राजनाथ सिंह ने पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को भी याद किया। उन्होंने कहा कि कारसेवकों पर गोलियां चलाए जाने के विरोध में कल्याण सिंह ने सत्ता को ठोकर मारने का काम किया था।

    अवंतीबाई ने किसानों व आम लोगों की सेना लेकर अंग्रेजों को हराया
    वीरांगना अवंतीबाई को नमन करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में उन्होंने जिस साहस के साथ अंग्रेजों का सामना किया, वह भारतीय इतिहास का गौरवपूर्ण अध्याय है। मातृभूमि के प्रति उनका समर्पण भारत कभी नहीं भूल सकता। अत्यंत विषम परिस्थितियों में शासन की बागडोर संभालने के बावजूद उन्होंने सुशासन का मॉडल खड़ा किया था। अंग्रेजों ने जब छलपूर्वक उनका राज्य छीनने का प्रयास किया तो उन्होंने न केवल हथियार उठाए, बल्कि आसपास के राजाओं और जमींदारों को भी संघर्ष के लिए प्रेरित किया। उन्होंने किसानों और आम लोगों की सेना के बल पर अंग्रेजों को हराकर उन्होंने अपने पराक्रम का परिचय दिया।

    पंचतीर्थ से महाराजा सुहेलदेव के स्मारक तक
    राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर से जुड़े पांच स्थानों को पंचतीर्थ के रूप में विकसित किया है। इसी तरह बहराइच में महानायक सुहेलदेव का भव्य स्मारक बनाया गया है। योगी जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में भी इस गौरवशाली विरासत को सामने लाने का पूरा प्रयास हो रहा है। महापुरुषों और वीरांगनाओं के नाम विभिन्न स्थानों से जोड़कर नई पीढ़ी को उनके योगदान से परिचित कराया जा रहा है।

    ऑपरेशन सिंदूर में महिलाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई
    रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत की महिलाओं ने हर क्षेत्र में अपनी क्षमता साबित की है। सेना, पुलिस, विज्ञान, खेल, शिक्षा और प्रशासन, सभी जगह महिलाएं अपनी क्षमता का परिचय दे रही हैं। ऑपरेशन सिंदूर में महिला पायलटों व सैनिकों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 

    सैनिक स्कूलों के दरवाजे भी बेटियों के लिए खुले
    राजनाथ सिंह ने कहा कि नारी शक्ति को अधिक आत्मविश्वासी और सशक्त बनाने के लिए सरकार अधिकार, अवसर, सुरक्षा और सम्मान देने का काम कर रही है। 

  • लखनऊ में योगी का सपा पर वार, JPNIC को बताया ‘सैफई सिंडिकेट’ का अड्डा; वसूली की भी कही बात

    लखनऊ में योगी का सपा पर वार, JPNIC को बताया ‘सैफई सिंडिकेट’ का अड्डा; वसूली की भी कही बात

    लखनऊ
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि लखनऊ में बना जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (जेपीएनआइसी) समाजवादी पार्टी के भ्रष्टाचार का जीवंत स्मारक है। सपा ने इसे अपनी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का अड्डा जैसा बना दिया था। एक महापुरुष के नाम का इससे बड़ा अपमान नहीं हो सकता।

    मुख्यमंत्री रविवार को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के साथ वीरांगना अवंतीबाई लोधी की प्रतिमा का लोकार्पण करने के उपरांत जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए पूरा जीवन समर्पित करने वाले जयप्रकाश नारायण के नाम पर सपा शासनकाल में शुरू किए गए इस प्रोजेक्ट की लागत 200 करोड़ रुपये थी, लेकिन 864 करोड़ खर्च करने के बावजूद यह अधूरा रहा।

    जिस काम को 18 महीने में पूरा होना था, वह दो साल बाद भी अधूरा था। सेंटर पर सपा का कब्जा रखने के लिए एक कमेटी गठित की गई, जिसमें अखिलेश यादव, डिंपल यादव, धर्मेंद्र यादव, अखिलेश के निजी सचिव और सपा प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी शामिल थे। सीएम योगी ने कहा कि जेपीएनआइसी पर खर्च हुए 864 करोड़ रुपये सैफई सिंडिकेट के नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की जनता के हैं।

    सरकार ने कमेटी भंग कर इस सेंटर को वापस लिया है। अब लखनऊ विकास प्राधिकरण के मार्गदर्शन में इसे संचालित कर जयप्रकाश नारायण की स्मृति को जीवंत किया जाएगा। प्रदेश के खजाने से खर्च धनराशि की वसूली का प्रयास किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि वीरांगना अवंतीबाई लोधी की भव्य अश्वारोही प्रतिमा भारतीय नारी की गरिमा, शौर्य और तेजस्विता का प्रतीक बनकर देशवासियों को प्रेरित करेगी। सीएम ने कहा कि भाजपा सरकार ने पीएसी की सभी 54 कंपनियों को पुनर्गठित किया। प्रदेश में वीरांगनाओं ऊदा देवी, झलकारी बाई व अवंतीबाई लोधी के नाम पर तीन महिला बटालियन गठित की गई हैं।

    इनमें एक लखनऊ, दूसरी गोरखपुर और तीसरी बदायूं में निर्माण के अंतिम चरण में है। अवंतीबाई लोधी ने झांसी व ग्वालियर के बीच संघर्ष का नेतृत्व किया। उनका जीवन हमें एकजुट रहने की प्रेरणा देता है। सीएम योगी ने कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ‘बाबूजी’ ने विधान भवन के सामने अवंतीबाई लोधी की अश्वारोही प्रतिमा स्थापित कराई थी।

    अलीगढ़ में उनके नाम पर स्टेडियम बन रहा है। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान लखनऊ में तिरंगा फहराने वाले अमर शहीद गुलाब सिंह लोधी के सम्मान में उन्नाव के पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय का नामकरण किया गया है। बुलंदशहर में कल्याण सिंह की स्मृति में मेडिकल कॉलेज का निर्माण कराया गया है।

    लखनऊ के कैंसर संस्थान का नाम भी बाबूजी के नाम पर रखा गया और वहां उनकी भव्य प्रतिमा स्थापित कराई गई है। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री बी.एल. वर्मा, उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह, बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह, लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

  • डिजिटल पहचान से बदलेगी छात्र सुविधाओं की तस्वीर, लखनऊ विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक पहल

    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा डिजिटल उत्तर प्रदेश, ई-गवर्नेंस और तकनीक आधारित पारदर्शी व्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में लखनऊ विश्वविद्यालय ने एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक पहल की है। विश्वविद्यालय आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से अपने मुख्य परिसर, द्वितीय परिसर और सभी संकायों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के आधिकारिक आईडी कार्ड्स को भारत सरकार के डिजीलॉकर प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने जा रहा है।

    इस व्यवस्था के तहत लखनऊ विश्वविद्यालय स्वयं इस्यूइंग अथॉरिटी के रूप में कार्य करेगा। विश्वविद्यालय का कहना है कि डीजीलॉकर पर विद्यार्थियों के आधिकारिक पहचान पत्र जारी करने वाला वह देश का पहला राज्य विश्वविद्यालय बन गया है। नई व्यवस्था को डिजिटल इंडिया मिशन और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के विद्यार्थी केंद्रित एवं तकनीक आधारित विजन के अनुरूप लागू किया जा रहा है।

    योगी सरकार के डिजिटल उत्तर प्रदेश को मिलेगी नई रफ्तार
    प्रदेश सरकार लगातार सरकारी एवं शैक्षणिक संस्थानों में पेपरलेस कार्यप्रणाली, डिजिटल सेवाओं, पारदर्शी प्रशासन और तकनीक आधारित गुड गवर्नेंस को बढ़ावा दे रही है। उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय के मार्गदर्शन में लखनऊ विश्वविद्यालय की यह पहल इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे विद्यार्थियों को पहचान पत्र से जुड़ी सुविधाएं डिजिटल माध्यम से उपलब्ध होंगी और कागजी तथा भौतिक प्रक्रियाओं पर निर्भरता कम होगी। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, इस पहल से छात्र सेवाओं को अधिक सुव्यवस्थित, सुरक्षित, त्वरित और विद्यार्थी हितैषी बनाया जा सकेगा।

    अपार आईडी होना अनिवार्य
    डिजीलॉकर पर डिजिटल पहचान पत्र उपलब्ध कराने की व्यवस्था के लिए विद्यार्थियों के पास भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त पंजीकृत अपार आईडी (APAAR ID) होना अनिवार्य होगा। अपार यानी ऑटोमेटेड पेमेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री के माध्यम से विद्यार्थी की शैक्षणिक पहचान को डिजिटल रूप से एकीकृत करने की दिशा में भी यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विश्वविद्यालय के अनुसार, प्रवेश प्रक्रिया और शुल्क जमा होने के बाद अधिकृत डिजिटल पहचान पत्र विद्यार्थी के डिजीलॉकर खाते में उपलब्ध कराया जाएगा।

    कुलपति बोले-तकनीक आधारित गुड गवर्नेंस की दिशा में नया कदम
    लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जे.पी. सैनी ने कहा कि विश्वविद्यालय लगातार तकनीक आधारित, पारदर्शी और विद्यार्थी हितैषी गुड गवर्नेंस की दिशा में नए प्रतिमान स्थापित कर रहा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा स्वयं इस्यूइंग अथॉरिटी के रूप में डिजीलॉकर पर विद्यार्थियों के पहचान पत्र जारी करना डिजिटल उत्तर प्रदेश और डिजिटल इंडिया के संकल्प को मजबूती प्रदान करता है। अपार आईडी के साथ एकीकृत यह व्यवस्था विद्यार्थियों को 24 घंटे सुलभ और सुरक्षित डिजिटल पहचान उपलब्ध कराएगी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का लक्ष्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पेपरलेस, त्वरित और तकनीक-संचालित बनाकर विद्यार्थियों को विश्वस्तरीय और बाधारहित शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना है।

    स्मार्टफोन में 24 घंटे सुरक्षित रहेगा आई कार्ड
    नई व्यवस्था के बाद विद्यार्थियों को अपने पहचानपत्र को हर समय साथ रखने की आवश्यकता नहीं होगी। डीजीलॉकर ऐप के माध्यम से उनका अधिकृत डिजिटल आईडी स्मार्टफोन में उपलब्ध रहेगा। इससे कार्ड के खोने, टूटने, फटने या चोरी होने जैसी समस्याओं से राहत मिलेगी। साथ ही, पहचान पत्र खो जाने की स्थिति में डुप्लीकेट कार्ड बनवाने की प्रक्रिया से भी विद्यार्थियों को काफी हद तक राहत मिलेगी।

    क्यूआर कोड से हो सकेगा सत्यापन
    डिजिटल पहचान पत्र में उपलब्ध क्यूआर कोड के माध्यम से उसकी प्रामाणिकता का डिजिटल सत्यापन किया जा सकेगा। इससे जरूरत पड़ने पर संबंधित संस्थान या अधिकृत एजेंसी पहचान पत्र की वैधता की जांच कर सकेगी। विश्वविद्यालय का कहना है कि डीजीलॉकर के माध्यम से जारी डिजिटल दस्तावेजों की डिजिटल सत्यापन सुविधा विद्यार्थियों के लिए विभिन्न शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्यों में उपयोगी साबित होगी।

    पढ़ाई पूरी होने के बाद डिजिटल आईडी निष्क्रिय
    नई व्यवस्था में विद्यार्थी की विश्वविद्यालय में अध्ययन अवधि से आईडी कार्ड को जोड़ा जाएगा। पढ़ाई पूरी होने के बाद संबंधित डिजिटल पहचान पत्र की वैधता समाप्त/निष्क्रिय हो जाएगी। इससे पुराने पहचान पत्रों के अनधिकृत इस्तेमाल की आशंका को कम करने में मदद मिलेगी।

    ग्रीन कैंपस की दिशा में भी पहल
    डिजिटल आईडी कार्ड व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण लाभ पर्यावरण संरक्षण भी है। भौतिक पीवीसी कार्ड और लेमिनेशन के इस्तेमाल में कमी आने से प्लास्टिक की खपत घटेगी। विश्वविद्यालय की यह पहल उसके ग्रीन कैंपस और पर्यावरण अनुकूल कार्यप्रणाली के प्रयासों को भी मजबूती देगी। विश्वविद्यालय की आईटी टीम ने इस व्यवस्था के लिए आवश्यक तकनीकी एकीकरण पूरा कर लिया है। जल्द ही विद्यार्थियों के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।

  • श्रमिकों को सस्ता भोजन और बेहतर सुविधाएं, योगी सरकार लेबर अड्डों को बनाएगी मॉडल

    श्रमिकों को सस्ता भोजन और बेहतर सुविधाएं, योगी सरकार लेबर अड्डों को बनाएगी मॉडल

    लखनऊ
     तमिलनाडु राज्य की अम्मा कैंटीन की तर्ज पर अब प्रदेश में श्रमिकों को सरकार सस्ते दर पर भोजन की थाली मुहैया कराएगी। योगी आदित्यनाथ सरकार के इस कदम से अब गांव से आकर शहरों में मजदूरी करने वाले कहीं पर भूखे नहीं रहेंगे। लेबर अड्डों पर श्रमिकों के लिए कैंटीन खोली जाएंगी, जहां उन्हें सस्ते दर पर नाश्ता और भोजन मिलेगा। भोजन की थाली की कीमत पांच से दस रुपये होगी। प्रदेश में पंजीकृत 1.95 करोड़ श्रमिक इससे लाभान्वित होंगे।

    विधान सभा चुनाव से पहले कैंटीन सेवा का लाभ उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड में पंजीकृत 1.95 करोड़ श्रमिकों को देने के लिए सरकार सितंबर में सात नगर निगमों के 13 लेबर अड्डों पर श्रमिक सुविधा केंद्र निर्माण का शिलान्यास करने जा रही है। सुविधा केंद्रों पर श्रमिकों को अन्य सुविधाएं भी मिलेंगी।

    चुनाव के मद्देनजर सरकार विभिन्न योजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास करने के साथ ही हर वर्ग को साधने में जुटी है। हाल ही में युवाओं व महिलाओं से संबंधित कई अहम निर्णय करने के बाद सरकार अब निर्माण श्रमिकों को तोहफा देने की तैयारी में है।

    लेबर अड्डों पर बनाए जाने वाले श्रमिक सुविधा केंद्र में श्रमिकों के लिए बैठने, स्वच्छ पानी, शौचालय की सुविधा के साथ ही कैंटीन की सुविधा भी रहेगी। इसके साथ ही सुविधा केंद्र में श्रमिकों को कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने के काउंटर तथा कौशल प्रशिक्षण की व्यवस्था भी होगी।

    सरकार के निर्देश पर श्रम विभाग ने सभी शहरों में उन लेबर अड्डों का चयन कर लिया हैं, जहां सुविधा केंद्र बनाए जाने हैं। लेबर अड्डों पर श्रमिक सुविधा केंद्र के निर्माण के लिए जिलाधिकारियों से जमीन मुहैया कराने को कहा गया है।

    न्यूनतम दर पर श्रमिकों को भोजन की थाली
    श्रम मंत्री अनिल राजभर के मुताबिक गाजियाबाद, झांसी, मुरादाबाद, लखनऊ, मेरठ, गोरखपुर और वाराणसी नगर निगम क्षेत्र के 13 लेबर अड्डों पर श्रमिक सुविधा केंद्र के लिए जगह मिल गई है। इन अड्डों पर सुविधा केंद्र बनाने के लिए अगले महीने शिलान्यास कार्यक्रम होगा। गाजियाबाद में तीन, झांसी में दो, मुरादाबाद में दो, लखनऊ में एक, मेरठ में तीन, गोरखपुर में दो तथा वाराणसी में एक लेबर अड्डे के पास जमीन मिल गई है।

    तीन मंजिला तक सुविधा केंद्र
    उन्होंने बताया कि इसी वर्ष कैंटीन शुरू कर देने की कोशिश है। भोजन थाली पांच से दस रुपये की होगी। तीन मंजिला तक सुविधा केंद्र बनाए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि तमिलनाडु की तत्कालीन मुख्यमंत्री जे. जयललिता ने अम्मा कैंटीन शुरू की थी। इनमें श्रमिकों, गरीबों, छात्रों आदि को तीन से पांच रुपये में सांभर-चावल, दही आदि दिया जाता है। गुजरात, महाराष्ट्र सहित कई और राज्यों में भी ऐसी कैंटीन संचालित हैं।

     

  • महिलाओं की मेहनत से बदली गांवों की तस्वीर, 31 जिलों में रोज 12.5 लाख लीटर दूध का कारोबा

    महिलाओं की मेहनत से बदली गांवों की तस्वीर, 31 जिलों में रोज 12.5 लाख लीटर दूध का कारोबा

     लखनऊ
    उत्तर प्रदेश के गांवों में महिलाओं की आर्थिक ताकत अब श्वेत क्रांति की नई कहानी लिख रही है। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी महिला समूहों की पांच कंपनियों ने वर्ष 2019 से अब तक करीब 5,716.26 करोड़ रुपये का कारोबार किया है। इन कंपनियों से 3.88 लाख से अधिक महिलाएं जुड़ चुकी हैं। दुग्ध उत्पादन और उसके संग्रहण से लेकर प्रसंस्करण और विपणन तक महिलाओं की बढ़ती भागीदारी ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नया आधार दिया है। महिला दुग्ध उत्पादक कंपनियां इस समय प्रतिदिन करीब 12.5 लाख लीटर दूध का संग्रहण कर रही हैं। इन महिला कारोबारियों का नेटवर्क 31 जनपदों के 6,603 गांवों तक पहुंच चुका है, जिसे और विस्तार देने की योजना है।

    दूध के कारोबार से आत्मनिर्भरता की नई राह
    महिलाओं को केवल स्वयं सहायता समूहों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें कारोबार और कंपनी संचालन से जोड़ने का असर अब गांवों में साफ दिखाई दे रहा है। ग्रामीण परिवारों की महिलाएं दुग्ध उत्पादन को नियमित आय के साधन के रूप में अपना रही हैं। दूध के संग्रहण और बिक्री की व्यवस्थित व्यवस्था ने उन्हें स्थानीय स्तर पर बाजार उपलब्ध कराया है। इससे पशुपालन को भी आर्थिक गतिविधि के रूप में मजबूती मिल रही है।

    उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के निदेशक अरुण कुमार ने बताया कि दुग्ध उत्पादक महिलाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नई ताकत बनकर उभर रही हैं। महिला समूहों के माध्यम से तैयार कंपनियां महिलाओं को उत्पादन से लेकर कारोबार तक की पूरी श्रृंखला से जोड़ रही हैं। इसका सकारात्मक असर उनकी आय और गांवों की आर्थिक गतिविधियों पर पड़ रहा है।

    12.5 लाख लीटर दूध प्रतिदिन संग्रहण
    प्रदेश में महिला दुग्ध उत्पादक कंपनियों की बढ़ती सक्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इनके माध्यम से प्रतिदिन करीब 12.5 लाख लीटर दूध संग्रहीत किया जा रहा है। बड़ी संख्या में महिलाएं पशुपालन और दुग्ध उत्पादन से जुड़कर नियमित रूप से दूध उपलब्ध करा रही हैं। संगठित संग्रहण व्यवस्था के कारण दूध को बाजार तक पहुंचाने में भी आसानी हो रही है।

    इस पूरी प्रक्रिया में महिला समूहों की भूमिका केवल दूध उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। समूहों से जुड़ी महिलाएं सामूहिक रूप से आर्थिक गतिविधियों का संचालन सीख रही हैं और कारोबार की समझ विकसित कर रही हैं। इससे ग्रामीण महिलाओं के बीच उद्यमिता की भावना को भी बढ़ावा मिल रहा है। यह सफल कारोबार अब तक 31 जनपदों के साढ़े छह हजार से भी अधिक गांवों तक पहुंच चुका है, जिसे और विस्तार देने की योजना पर काम किया जा रहा है।

    योगी सरकार आने के बाद से कारोबार में लगातार विस्तार
    महिला समूहों की पांच कंपनियों ने वर्ष 2019 से अब तक 5,716.26 करोड़ रुपये का कारोबार किया है। यह आंकड़ा बताता है कि ग्रामीण महिलाओं को संगठित कारोबारी मॉडल से जोड़ने की पहल अब बड़े आर्थिक प्रभाव में बदल रही है। योगी सरकार आने के बाद से इन कंपनियों से जुड़ी 3.88 लाख से अधिक महिलाओं की भागीदारी ने इस मॉडल को व्यापक आधार दिया है।

    महिला समूहों के इस कारोबारी मॉडल से गांवों में रोजगार और आय के नए अवसर तैयार हो रहे हैं। पशुपालन, दूध संग्रहण और उससे जुड़ी गतिविधियों में आर्थिक भागीदारी बढ़ने से ग्रामीण परिवारों की स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिल रही है।

    घर-घर रोजगार से बदल रहा गांवों का आर्थिक चेहरा
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने पर जोर दिया जा रहा है। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के जरिए स्वयं सहायता समूहों को आजीविका गतिविधियों से जोड़ने के साथ उन्हें कारोबार की दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है। इसका उद्देश्य गांव की महिलाओं को रोजगार के लिए बाहर जाने के बजाय स्थानीय स्तर पर ही आय के अवसर उपलब्ध कराना है।

    दुग्ध उत्पादन इस दिशा में महत्वपूर्ण माध्यम बनकर सामने आया है। पशुपालन पहले जहां मुख्य रूप से घरेलू जरूरतों से जुड़ी गतिविधि माना जाता था, वहीं अब संगठित रूप से इसे आय और कारोबार का आधार बनाया जा रहा है। महिला समूहों की कंपनियां इसी बदलाव की तस्वीर पेश कर रही हैं।

    वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी के लक्ष्य से जुड़ रहीं ग्रामीण महिलाएं
    प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महिला समूहों की भूमिका को व्यापक आर्थिक लक्ष्य से भी जोड़ा जा रहा है। महिलाओं को उद्यम, उत्पादन और बाजार से जोड़ने से गांवों में आर्थिक गतिविधियों का दायरा बढ़ रहा है। इससे ग्रामीण परिवारों की क्रय शक्ति बढ़ने के साथ स्थानीय स्तर पर कारोबार को भी प्रोत्साहन मिल रहा है।

    महिला समूहों की पांच कंपनियों का हजारों करोड़ रुपये का कारोबार और लाखों महिलाओं की भागीदारी इस बात का संकेत है कि स्वयं सहायता समूह अब केवल बचत और छोटे ऋण तक सीमित नहीं हैं। वे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में कारोबारी इकाइयों के रूप में अपनी पहचान बना रहे हैं।

    'महिलाओं की दुग्ध शक्ति से गांवों में समृद्धि'
    दूध संग्रहण की इतनी बड़ी व्यवस्था महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को नए स्तर पर ले जा रही है। इससे एक ओर पशुपालन को प्रोत्साहन मिल रहा है तो दूसरी ओर महिलाओं को अपनी मेहनत का आर्थिक मूल्य हासिल करने का अवसर मिल रहा है। नियमित आय के साथ महिलाएं परिवार की आर्थिक जरूरतों में अधिक प्रभावी भूमिका निभा पा रही हैं।

    ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत गठित पांच मिल्क प्रोड्यूसर कंपनियां
    बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, काशी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, सामर्थ्य मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, श्री बाबा गोरखनाथ कृपा मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड तथा सृजनी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड।

    इन जिलों तक फैला कारोबार
    बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, जालौन, झांसी, ललितपुर, महोबा, बलिया, चंदौली, गाजीपुर, मिर्जापुर, संत रविदास नगर, सोनभद्र, वाराणसी, प्रतापगढ़, रायबरेली, सुल्तानपुर, अयोध्या, फतेहपुर, अमेठी, कानपुर नगर, देवरिया, गोरखपुर, कुशीनगर, महराजगंज, बरेली, लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, शाहजहांपुर, सीतापुर, रामपुर।

  • पेयजल को और सुरक्षित बनाने की तैयारी, योगी सरकार गहन जांच में शामिल करेगी माइक्रोप्लास्टिक और PFAS

    पेयजल को और सुरक्षित बनाने की तैयारी, योगी सरकार गहन जांच में शामिल करेगी माइक्रोप्लास्टिक और PFAS

    योगी सरकार करेगी पेयजल की गुणवत्ता का परीक्षण ज्यादा गहनता से, माइक्रोप्लास्टिक और पीएफएएस की भी होगी जांच 

    विश्वस्तरीय परीक्षण सुविधाओं से लैस नई स्टेट लैबोरेटरी भवन का कराया जा रहा तेजी से निर्माण 

    माइक्रोप्लास्टिक एवं पीएफएएस जैसे उभरते प्रदूषक के परीक्षण के लिए आवश्यक उन्नत उपकरणों का प्रस्ताव वार्षिक कार्ययोजना में शामिल 

    पेयजल एवं स्वच्छता विभाग भारत सरकार के सचिव ने मौजूदा स्टेट लैब का किया था निरीक्षण 

    प्रदेश में 1 स्टेट, 3 क्षेत्रीय, 72 जिला एवं 62 वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट प्रयोगशालाओं का नेटवर्क 

     राज्य स्तरीय प्रयोगशालाओं में उन्नत स्तर की परीक्षण सुविधाएं उपलब्ध, इसके 50 मानक एनएबीएल प्रमाणित 

     लखनऊ
     प्रदेश में ग्रामीण पेयजल की गुणवत्ता जांच व्यवस्था को और अधिक उन्नत एवं भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने की दिशा में उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है। जल निगम (ग्रामीण) द्वारा विश्वस्तरीय परीक्षण सुविधाओं से लैस नई स्टेट लैबोरेटरी भवन का निर्माण कराया जा रहा है, जिसका कार्य तेजी से पूर्ण कराने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। नई स्टेट लैब में अत्याधुनिक विश्लेषणात्मक सुविधाओं के साथ पेयजल में उभरते प्रदूषक (इमर्जिंग कंटेमिनेंट्स) जैसे माइक्रोप्लास्टिक या पीएफएएस की जांच क्षमता विकसित करने की योजना है।

    केंद्रीय पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव ने मौजूदा स्टेट लैब का किया था निरीक्षण
    हाल ही में उत्तर प्रदेश के दौरे पर आए भारत सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव ने उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) की मौजूदा स्टेट लैबोरेटरी का निरीक्षण किया था। इस दौरान जल गुणवत्ता परीक्षण सुविधाओं, उन्नत उपकरणों तथा भविष्य में विकसित की जाने वाली परीक्षण क्षमताओं पर चर्चा हुई। इस दौरान उन्होंने माइक्रोप्लास्टिक तथा पीएफएएस जैसे उभरते प्रदूषकों की जांच की सुविधा भी स्टेट लैब स्तर पर विकसित किए जाने पर जोर दिया। 

    प्रदेश में व्यापक जल गुणवत्ता प्रयोगशाला नेटवर्क
    उत्तर प्रदेश में ग्रामीण पेयजल गुणवत्ता की निगरानी एवं परीक्षण के लिए बहुस्तरीय प्रयोगशाला नेटवर्क कार्यरत है। इसमें 1 राज्य स्तरीय,  3 क्षेत्रीय, 72 जिला स्तरीय तथा 62 जल शोधक संयंत्र प्रयोगशालाएं हैं। राज्य स्तरीय प्रयोगशालाओं में उन्नत स्तर की परीक्षण सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसके 50 मानक एनएबीएल प्रमाणित हैं। इस नेटवर्क के माध्यम से जल जीवन मिशन के अंतर्गत पेयजल गुणवत्ता की नियमित निगरानी एवं आवश्यकतानुसार विस्तृत प्रयोगशाला परीक्षण किया जाता है।

    माइक्रोप्लास्टिक और पीएफएएस दो अलग श्रेणियों के प्रदूषक
    माइक्रोप्लास्टिक और पीएफएएस को एक ही पदार्थ मानना तकनीकी रूप से सही नहीं है। माइक्रोप्लास्टिक सामान्यतः 5 मिमी से छोटे प्लास्टिक कणों को कहा जाता है, जबकि पीएफएएस फ्लोरीन युक्त कृत्रिम रसायनों का व्यापक समूह है, जिन्हें पर्यावरण में अत्यधिक स्थायित्व के कारण इसे फॉरएवर कैमिकल कहा जाता है। दोनों की नमूना परीक्षण तथा तकनीकी जांचें अलग-अलग होती हैं।

    कैसे होगी माइक्रोप्लास्टिक की जांच
    माइक्रोप्लास्टिक परीक्षण में प्रदूषक मुक्त सैंपलिंग अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। नमूने को इस प्रकार एकत्र एवं संभाला जाता है कि इसे इकट्ठा करने का फ्लास्क या बर्तन, वातावरण, कपड़ों अथवा प्रयोगशाला सामग्री से बाहरी प्लास्टिक कण नमूने में न मिलें। इसके बाद जल शोधन एवं आवश्यक नूमने परीक्षण के माध्यम से कणों को अलग किया जाता है। माइक्रोस्कोपित परीक्षण से सैंपल या नमूनों में संदिग्ध कणों की संख्या, आकार, आकृति और रंग जैसी विशेषताओं का आकलन किया जा सकता है, जबकि पॉलीमर की पुष्ट पहचान के लिए एफटीआरआर या रमन माइक्रोस्कोपी जैसी स्पेकट्रोस्कोपिक तकनीक का उपयोग किया जाता है।

    बीआईएस मानकों एवं जल जीवन मिशन के प्रोटोकॉल के अनुरूप पेयजल गुणवत्ता निगरानी
    जल जीवन मिशन के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल गुणवत्ता की निगरानी निर्धारित राष्ट्रीय प्रोटोकॉल तथा लागू भारतीय मानकों के अनुरूप की जाती है। प्रयोगशालाओं के साथ-साथ ग्राम स्तर पर प्रशिक्षित महिलाओं/जल गुणवत्ता निगरानी समूहों द्वारा फील्ड टेस्टिंग किट से प्रारंभिक निगरानी की व्यवस्था भी इस प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आवश्यकता एवं निर्धारित परीक्षण कार्यक्रम के अनुसार नमूनों को प्रयोगशालाओं में भेजकर विस्तृत जांच की जाती है।

    भविष्य की जल गुणवत्ता चुनौतियों के लिए तैयार होगी नई स्टेट लैब
    नई स्टेट लैबोरेटरी को आधुनिक एवं विश्वस्तरीय परीक्षण सुविधाओं से लैस करने का उद्देश्य प्रदेश में मजबूत राज्य रेफरल, आधुनिक रेफरल प्रयोगशाला की क्षमता विकसित करना है। माइक्रोप्लास्टिक एवं पीएफएएस जैसे प्रदूषक की परीक्षण सुविधा विकसित होने से भविष्य में बेसलाइन डाटा तैयार करने, संभावित प्रदूषण स्रोतों की पहचान, वैज्ञानिक निगरानी तथा राष्ट्रीय स्तर पर विकसित होने वाले मानकों एवं दिशानिर्देशों के अनुरूप परीक्षण व्यवस्था स्थापित करने में मदद मिलेगी।

    तेज गति से पूरा कराया जाएगा कार्यः प्रबंध निदेशक
    उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) के प्रबंध निदेशक योगेश कुमार ने बताया कि नई स्टेट लैबोरेटरी भवन का निर्माण कार्य तेजी से कराया जा रहा है और इसे विश्वस्तरीय परीक्षण सुविधाओं से सुसज्जित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। स्टेट लैब की उन्नत परीक्षण क्षमता से जल निगम के साथ-साथ आवश्यकता के अनुसार अन्य सरकारी विभागों एवं संस्थाओं को भी उच्च स्तरीय जल परीक्षण में सहयोग मिल सकेगा। माइक्रोप्लास्टिक एवं पीएफएएस जैसे उभरते प्रदूषकों की जांच को विकसित करना, भविष्य की जल गुणवत्ता चुनौतियों के दृष्टिगत महत्वपूर्ण पहल है।

  • मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल से कोरोना काल में शुरू हुई रामलीला, 15 से 25 जनवरी तक अयोध्या में आयोजन

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल से कोरोना काल में शुरू हुई रामलीला, 15 से 25 जनवरी तक अयोध्या में आयोजन

    देश की सबसे बड़ी रामलीला में पहली बार तीन वर्ष के बच्चे करेंगे अभिनय

    अयोध्या से चर्चित फिल्मी कलाकारों की रामलीला का आठवां संस्करण दिल्ली में

    -दो माह बाद जनवरी में नौवां संस्करण अयोध्या में किया जाएगा आयोजित

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल से कोरोना काल में शुरू हुई रामलीला, 15 से 25 जनवरी तक अयोध्या में आयोजन

    दिल्ली में 10 से 20 अक्टूबर तक सजेगा राममंच, देश-विदेश के दर्शकों को दिखेगी भव्य प्रस्तुति

    -62 करोड़ दर्शकों का आंकड़ा पार कर चुकी प्रस्तुति, 60 देशों तक पहुंचेगा रामभक्ति का संदेश

    अयोध्या
    अयोध्या से चर्चित फिल्मी कलाकारों की रामलीला को देश की सबसे बड़ी रामलीला माना जाता है। इस वर्ष पहली बार दिल्ली में अपना आठवां संस्करण प्रस्तुत करेगी। इस भव्य आयोजन में तीन वर्ष के छोटे बच्चों से लेकर सोलह वर्ष तक के बाल कलाकार सुबह के सत्र में अभिनय करेंगे, जबकि शाम को साठ से अधिक फिल्मी सितारे मंच पर नजर आएंगे। नवां संस्करण दो माह बाद जनवरी में अयोध्या में आयोजित होगा। यह रामलीला कोरोना काल में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल से शुरू हुई थी और अब यह विश्व स्तर पर रामभक्ति का संदेश पहुंचा रही है।

         दिल्ली में आयोजन 10 से 20 अक्टूबर तक नई दिल्ली स्थित रफी मार्ग पर कांस्टीट्यूशन क्लब के मावलंकर हॉल में होगा। यहां सुबह 10 बजे से 12 बजे तक तीन से सोलह वर्ष के बच्चे अयोध्या की रामलीला में भाग लेंगे। शाम 7 बजे से 10 बजे तक फिल्मी कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे। आयोजन स्थल पर शाम 4 बजे से रात 11 बजे तक मेले का भी आयोजन होगा। हॉल की बैठने की क्षमता करीब 600 लोगों की है। 120 फीट लंबी एलईडी टीवी स्क्रीन लगाई जाएगी, ताकि दर्शकों को भव्य दृश्य स्पष्ट रूप से दिखाई दें। माना जा रहा है कि इतनी कम उम्र के बच्चों वाली रामलीला पहली बार हो रही है। इसमें भगवान श्रीराम के बचपन के स्वरूपों को भी विशेष रूप से दिखाया जाएगा। यह आयोजन न केवल कलाकारों के अभिनय से यादगार बनेगा, बल्कि तकनीकी व्यवस्थाओं जैसे विशाल एलईडी स्क्रीन और बहुभाषी प्रसारण से भी नए आयाम स्थापित करेगा। संस्थापक सुभाष मलिक (बॉबी)और शुभम मलिक की अगुवाई में टीम लगातार तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सहयोग से शुरू हुई यह रामलीला अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुकी है। दिल्लीवासियों और देश-विदेश के रामभक्तों के लिए यह सुनहरा अवसर है कि वे मावलंकर हॉल में पहुंचकर या टीवी पर बैठकर इस अद्वितीय रामलीला का आनंद लें। अक्टूबर में दिल्ली और जनवरी में अयोध्या दोनों स्थानों पर रामकथा का मंच सजेगा और करोड़ों दिलों में भक्ति का संचार होगा। 

    राम के अभिनय में पहली बार सामने आयेंगे सांसद रवि किशन
    प्रभु श्रीराम की भूमिका में गोरखपुर सांसद और भोजपुरी-बॉलीवुड स्टार रवि किशन नजर आएंगे। 19 अक्टूबर को वे पहली बार राम का किरदार निभाएंगे। इससे पहले वे केवट, भगवान परशुराम और भरत की भूमिकाएं अदा कर चुके हैं। लंकापति रावण की भूमिका में अरुण बख्शी होंगे। बिंदु दारा सिंह भगवान शिव के रूप में, पुनीत इस्सर भगवान परशुराम के रूप में, रजा मुराद अहिरावण के रूप में और अवतार गिल मेघनाद के रूप में मंच पर आएंगे। कुल मिलाकर साठ से अधिक फिल्मी सितारे इस रामलीला में अभिनय करेंगे। रिहर्सल दिल्ली और मुंबई के कलाकार कर रहे हैं।

    अयोध्या में दस दिन चलेगी रामलीला
    अयोध्या में नवां संस्करण 15 जनवरी 2027 से 25 जनवरी 2027 तक होगा। अब तक अयोध्या में सात संस्करण सफलतापूर्वक आयोजित हो चुके हैं। कोरोना काल में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस रामलीला को अनुमति दी थी, जो आज संसार की सबसे बड़ी रामलीला बन चुकी है।

    80 से अधिक सैटेलाइट चैनलों व 40 भाषाओं में होगा प्रसारण
    सुभाष मलिक बताते हैं कि पिछले वर्ष इस प्रस्तुति को 62 करोड़ से अधिक रामभक्तों ने अपने घर बैठे देखा। इस वर्ष भी 80 से अधिक सैटेलाइट चैनलों पर 40 भाषाओं में इसका प्रसारण होगा। साठ से अधिक देशों तक रामभक्ति का संदेश पहुंचेगा। देश-विदेश के दर्शक इस भव्य प्रस्तुति का आनंद ले सकेंगे।

    राजधानी के लोगों को अयोध्या की भव्यता का होगा अनुभव
    अयोध्या की रामलीला न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन है, बल्कि यह बच्चों को रामकथा से जोड़ने का भी माध्यम बन रही है। तीन वर्ष के छोटे बच्चे मंच पर आकर भगवान के बाल स्वरूप को जीवंत करेंगे, जो इस आयोजन को और भी विशेष बनाता है। दिल्ली में पहली बार होने वाला यह संस्करण राजधानी के लोगों को अयोध्या की भव्यता का अनुभव कराएगा। मेले के साथ जुड़ी गतिविधियों से पूरा माहौल राममय हो जाएगा।

  • एआई से इलाज के विश्लेषण, शिकायत निवारण, अस्पतालों की निगरानी और सुविधाओं के सुधार में मिलेगी मदद

    एआई से इलाज के विश्लेषण, शिकायत निवारण, अस्पतालों की निगरानी और सुविधाओं के सुधार में मिलेगी मदद

    योगी सरकार एआई आधारित वाइस बॉट से मरीजों से लेगी फीडबैक  
     
     सीएम योगी के निर्देश पर साचीज विकसित कर रहा एआई आधारित वाइस बॉट, मरीजों के अनुभव बनेंगे सुधार का आधार

    डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक बोले, फोन पर मरीजों से ली जाएगी इलाज और अस्पताल के बारे में जानकारी 
                                                                                                    
     एआई से इलाज के विश्लेषण, शिकायत निवारण, अस्पतालों की निगरानी और सुविधाओं के सुधार में मिलेगी मदद

    लखनऊ
     योगी सरकार द्वारा प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीक और नवाचार के इस्तेमाल को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर नोडल स्टेट हेल्थ एजेंसी ‘साचीज’ द्वारा प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए मरीजों के अनुभव और उनकी राय को महत्वपूर्ण आधार बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने बताया कि साचीज आयुष्मान कार्ड धारक मरीजों और उनके तीमारदारों के लिए एआई आधारित वाइस बॉट विकसित किया जा रहा है। इसके जरिए मरीजों से फोन पर सीधे उनके इलाज और अस्पताल में मिले अनुभव की जानकारी ली जाएगी।

    मरीजों से फोन पर सीधे पूछा जाएगा अनुभव
    डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने बताया कि सीएम योगी की मंशा के अनुरूप एआई आधारित वाइस बॉट का उद्देश्य केवल मरीजों से फीडबैक लेना नहीं है, बल्कि उनकी प्रतिक्रियाओं का तकनीक की मदद से विश्लेषण कर ऐसी जानकारी सामने लाना है, जिस पर समय रहते कार्रवाई की जा सके। इससे अस्पतालों की निगरानी, शिकायतों के समाधान, ऑडिट और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि एआई वाइस बॉट के माध्यम से इलाज करा चुके मरीजों से फोन पर बातचीत कर उनके अनुभव के बारे में जानकारी ली जाएगी। मरीज से यह पूछा जा सकेगा कि उसे अस्पताल में आयुष्मान योजना के तहत उपचार मिला या नहीं। इलाज के दौरान उसे किसी तरह की परेशानी हुई या नहीं, अस्पताल में उपलब्ध सेवाएं कैसी रहीं और अस्पताल के कर्मचारियों का व्यवहार कैसा रहा। यह भी पता लगाया जा सकेगा कि योजना के तहत मिलने वाले उपचार के लिए मरीज या उसके परिवार से कोई अनधिकृत राशि तो नहीं ली गई। इलाज के बाद मरीज कितना संतुष्ट है, इसकी जानकारी भी फीडबैक के माध्यम से प्राप्त की जा सकेगी। इस तरह मरीज की आवाज सीधे स्वास्थ्य महकमे तक पहुंचेगी और उसके अनुभव के आधार पर कमियों की पहचान करना आसान होगा।

    फीडबैक से सामने आएंगे कार्रवाई योग्य मामले
    साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि पहल का उद्देश्य मरीजों की प्रतिक्रियाओं में से उन मामलों की पहचान करना है, जिनमें आगे कार्रवाई की जरूरत है। एआई आधारित विश्लेषण के जरिए बड़ी संख्या में प्राप्त फीडबैक को व्यवस्थित किया जा सकेगा। यदि किसी मरीज द्वारा उपचार न मिलने, अनधिकृत शुल्क लेने, खराब व्यवहार या किसी अन्य समस्या की जानकारी दी जाती है, तो ऐसे मामलों को संबंधित संचालन टीमों तक पहुंचाया जा सकेगा। इससे शिकायतों पर कार्रवाई करने और अस्पतालों की निगरानी को अधिक प्रभावी बनाने में सहायता मिलेगी। इस व्यवस्था से स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि मरीज के वास्तविक अनुभव को भी इसमें शामिल किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि वर्तमान में सीमित संख्या में मरीजों से मैनुअल कॉल के माध्यम से फीडबैक लिया जाता है। इसमें समय और मानव संसाधन अधिक लगता है। एआई वाइस बॉट के माध्यम से बड़ी संख्या में मरीजों तक पहुंचकर उनसे फीडबैक लेने की व्यवस्था विकसित की जा रही है। इससे कम समय में अधिक मरीजों से जानकारी प्राप्त की जा सकेगी। बड़ी संख्या में प्राप्त प्रतिक्रियाओं के आधार पर बेहतर डेटा तैयार होगा। इस डेटा का विश्लेषण कर अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी समस्याओं की पहचान की जा सकेगी।

    मरीज के अनुभव को स्वास्थ्य व्यवस्था में मिलेगा अधिक महत्व
    साचीज की सीईओ ने बताया कि पहल का उद्देश्य केवल लाभार्थियों को उपचार की सुविधा उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उन्हें सही, सम्मानजनक और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्राप्त हो। मरीजों का प्रत्यक्ष अनुभव स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम है। एआई वाइस बॉट के माध्यम से प्राप्त फीडबैक का व्यवस्थित विश्लेषण कर आवश्यक कार्रवाई को अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।