Category: उत्तर प्रदेश

  • यूपी राइज: ‘आत्मनिर्भर यूपी’ की दिशा में युवाओं ने पेश किए शानदार स्टार्टअप आइडिया

    यूपी राइज: ‘आत्मनिर्भर यूपी’ की दिशा में युवाओं ने पेश किए शानदार स्टार्टअप आइडिया

    आगरा

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आत्मनिर्भर यूपी विजन को धरातल पर उतारने के लिए एमजी रोड स्थित सेंट जॉन्स कॉलेज में 'यूपी राइज' कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में शहर और आसपास के क्षेत्रों से आए करीब 1000 से अधिक छात्र- छात्राओं ने पूरे उत्साह के साथ प्रतिभाग किया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को केवल नौकरी तलाशने वाला न बनाकर, उन्हें स्वयं का उद्यम स्थापित कर दूसरों को रोजगार देने वाला 'जॉब क्रिएटर' बनाना है।

    सरकारी योजनाओं की जानकारी और मेंटर्स का मार्गदर्शन

    कार्यक्रम के दौरान युवाओं को राज्य सरकार की विभिन्न रोजगारपरक नीतियों की विस्तृत जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना, मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना और महिला सशक्तिकरण से जुड़ी योजनाओं पर विशेष जोर दिया और बताया कि आसान शर्तों पर वित्तीय सहायता व सब्सिडी कैसे प्राप्त की जा सकती है। छात्रों का मार्गदर्शन करने के लिए हर्षित देसाई, राहुल सारंगी और साईराज धोंड मेंटर के रूप में शामिल हुए। मेंटर हर्षित देसाई, जो वर्तमान में स्ट्रैटिविटी (एशिया और मिडिल ईस्ट) में मैनेजिंग पार्टनर हैं और पूर्व में आदित्य बिड़ला फाइनेंस व केपीएमजी में शीर्ष पदों पर रह चुके हैं, ने अपने 23 वर्षों के अनुभव से छात्रों को इनोवेशन और स्केलेबल कंज्यूमर इंटरनेट प्रोडक्ट्स बनाने के गुर सिखाए।

    टॉप-10 इनोवेटिव आइडियाज ने खींचा ध्यान

    इस आयोजन में कुल 35 स्टार्टअप आइडिया आए, जिनमें से 10 बेहतरीन आइडिया को शॉर्टलिस्ट किया गया। इनमें साइकिल सॉइल (ऑर्गेनिक कॉटन, बांस और खेती के कचरे से बने बायोडिग्रेडेबल सैनिटरी पैड), द मंडला स्टूडियो (हाथ से बने मंडला आर्ट प्रोडक्ट), बायो फ्रेश (क्यूआर कोड ट्रैकिंग वाला स्मार्ट डेयरी पैकेजिंग सिस्टम), आर्टेरा (कस्टमाइजेबल टैटू और फेस पेंटिंग सर्विस), बायोकोट (बीजों को बचाने वाली बायोडिग्रेडेबल स्लीव), वेस्ट टू वेल्थ (पेठा-इंडस्ट्री के वेस्ट वाटर और चावल के भूसे से बायोएथेनॉल निर्माण), पीयर पॉड्स (एआई-पावर्ड स्टडी पार्टनर प्लेटफॉर्म), प्रोटियोस्कोप (बायोटेक के लिए प्रोटीन सीक्वेंस एनालिसिस व 3D स्ट्रक्चर प्रेडिक्शन) और प्रोजेक्ट अन्विता (एनईपी आधारित इंटर्नशिप प्लेटफॉर्म) जैसे शानदार आइडिया शामिल रहे।

    विजेताओं को मिली प्रोत्साहन राशि

    जूरी और इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के सामने अपनी प्रेजेंटेशन देने के बाद महिलाओं के नेतृत्व वाले 'क्रोशे एंटरप्राइज' ने प्रथम स्थान हासिल कर 25,000 रुपये का मुख्य पुरस्कार जीता। यह स्टार्टअप पारंपरिक क्रोशिया कौशल को आधुनिक उत्पादों जैसे बैग, फोन कवर, की-चेन, क्रॉप टॉप और हेयर एक्सेसरीज में बदल रहा है। वहीं 'साइकिल सॉइल' और 'आर्टेरा' की टीमों को संयुक्त रूप से द्वितीय स्थान प्राप्त हुआ, जिन्हें 15,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि देकर सम्मानित किया गया।

    15 सितंबर को आंबेडकर विश्वविद्यालय में होगा आयोजन

    यूपी राइज कार्यक्रम प्रदेश के 25 शहरों के 30 प्रमुख कॉलेजों में आयोजित किया जाएगा। इसके माध्यम से राज्य के प्रतिभाशाली छात्रों को सीधे बड़ी कंपनियों में इंटर्नशिप तथा रोजगार के अवसर मिलेंगे। आगरा में इस पहल का अगला पड़ाव 15 सितम्बर 2026 को डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में होगा। इन इनोवेटिव आइडियाज ने यह साबित कर दिया है कि यूपी का युवा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

  • सिर्फ फैक्ट्रियां ही नहीं, स्किल, रिसर्च और एमएसएमई का भी बनेगा मजबूत नेटवर्क

    सिर्फ फैक्ट्रियां ही नहीं, स्किल, रिसर्च और एमएसएमई का भी बनेगा मजबूत नेटवर्क

    कानपुर

    उत्तर प्रदेश को रक्षा उत्पादन का ग्लोबल हब बनाने के लिए योगी सरकार मिशन मोड में काम कर रही है। यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (यूपीडीआईसी) के अगले चरण को लेकर कानपुर में आगे की तैयारी पर गहराई से चर्चा की गई। ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ) और प्रदेश सरकार की साझेदारी में आयोजित ‘कानपुर रीजनल डिफेंस वर्कशॉप’ में यह बात प्रमुखता से सामने आई कि आने वाले दिनों में कानपुर रक्षा उत्पादन का बड़ा केंद्र बनेगा। आईआईटी कानपुर और बीएचयू नई तकनीक में मदद करेंगे। 

    कार्यक्रम में ज़िलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि 'पूर्व का मैनचेस्टर' कहा जाने वाला कानपुर अब देश का बड़ा रक्षा निर्माण केंद्र बनने की पूरी क्षमता रखता है। वहीं, ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के उपाध्यक्ष प्रोफेसर हर्ष पंत ने कहा कि भारत सरकार अब रक्षा सामान बाहर से मंगाने के बजाय खुद अपने देश में बनाने पर ध्यान दे रही है  और इसमें यूपी के इस रक्षा कॉरिडोर की बहुत बड़ी भूमिका है। उन्होंने बताया कि उनकी संस्था द्वारा शुरू की गई 'स्ट्रैटेजिक उत्तर प्रदेश' पहल का मकसद रक्षा क्षेत्र के सभी साथियों को एक मंच पर लाना, यूपीडीआईसी में निवेश बढ़ाना और अलग-अलग शहरों में जाकर रक्षा क्षेत्र की संभावनाओं को मजबूत करना है, और कानपुर की यह कार्यशाला इसी मुहिम का हिस्सा है।  

    सांसद रमेश अवस्थी ने कहा कि यह कॉरिडोर उत्तर प्रदेश को हथियार और रक्षा उपकरण बनाने का एक बड़ा केंद्र बनाने की दिशा में काम कर रहा है। सरकार ने आईआईटी कानपुर और बीएचयू जैसे बड़े संस्थानों के साथ हाथ मिलाया है ताकि इस पूरे कॉरिडोर में विज्ञान, रिसर्च और नई तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया जा सके। कानपुर की इस नई पहचान को बनाने के लिए सरकार, उद्योग जगत, रक्षा उत्पादन, शोध संस्थानों, नीति निर्माताओं, आईआईटी कानपुर जैसे बड़े संस्थानों और एमएसएमई के प्रमुख लोगों ने एक साथ बैठकर पूरा खाका तैयार किया है। यूपी की बड़ी यूथ पावर को सीधे डिफेंस सेक्टर की खास जरूरतों के मुताबिक तैयार किया जाएगा। 

    डेटम एडवांस्ड कंपोजिट्स के तन्मय तिवारी ने भी इस बात पर जोर दिया कि कानपुर में बुनियादी ढांचे को बहुत तेजी से खड़ा करने की जरूरत है और युवाओं को ट्रेनिंग व हुनर देने पर ध्यान देना होगा। आईआईटी कानपुर और बीएचयू जैसी जगहों की रिसर्च का फायदा अब आईटीआई और स्थानीय संस्थानों तक पहुंचेगा। उद्योगों की मदद से मिलने वाली ट्रेनिंग और इंटर्नशिप से न सिर्फ युवाओं को नौकरियां मिलेंगी, बल्कि यूपी के पास रक्षा क्षेत्र के लिए अपनी एक पक्की स्किल्ड वर्कफोर्स भी खड़ी हो जाएगी।  

    इसके साथ ही, कार्यशाला में स्थानीय छोटे कारोबारियों और एमएसएमई के रास्ते की सबसे बड़ी रुकावटों, यानी टेस्टिंग, क्वालिटी चेक, ट्रायल और सर्टिफिकेशन की कठिन प्रक्रियाओं को बेहद आसान बनाने की योजना पर बात हुई। भारतीय रक्षा निर्माता समाज के मेजर जनरल पी. के. सैनी ने बताया कि रक्षा खरीद प्रक्रियाओं में कई नए और आसान बदलाव किए गए हैं, जिससे कानपुर के स्थानीय उद्योगों के लिए रक्षा सामान बनाने में हिस्सा लेना अब काफी आसान हो जाएगा। 'मेक इन इंडिया' का दायरा बढ़ाते हुए वर्कशॉप में इस बात पर जोर दिया गया कि अब सिर्फ बाहर से कलपुर्जे लाकर जोड़ने के बजाय अपने देश के भीतर ही डिजाइन, बौद्धिक संपदा (आईपी), सॉफ्टवेयर और अपग्रेड तकनीक विकसित की जाए। कानपुर में पहले से ही मजबूत इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग का आधार मौजूद है।

    यूएस-इंडिया बिजनेस काउंसिल की उदया अरुण ने बताया कि उद्योग जगत और निवेशक कानपुर को लेकर बहुत ज्यादा उत्साहित हैं क्योंकि यह रक्षा कॉरिडोर के सबसे मजबूत केंद्रों में से एक बनकर उभरा है। टीकेएमएस इंडिया के कमोडोर अनिल जय सिंह ने भी कहा कि भारत में काम कर रही विदेशी रक्षा कंपनियों को यहां के बड़े बाजार का अंदाजा हो चुका है और वे भी इसका हिस्सा बनना चाहती हैं। 

    नीतियों में बदलाव और नागरिक उद्योगों को फायदा

    योगी सरकार की इस नई पहल का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि रक्षा क्षेत्र में होने वाले ये नए बदलाव सिर्फ सेना या सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेंगे। वर्कशॉप में यह बात सामने आई कि आईआईटी कानपुर जैसे संस्थानों के सहयोग से ऐसी ड्यूल-यूज और डीप-टेक तकनीकें बनाई जाएंगी, जिनका इस्तेमाल आम नागरिक उद्योगों और आम सामान बनाने में भी हो सकेगा। इससे पूरे कानपुर का व्यापारिक और औद्योगिक माहौल चमकेगा। वर्कशॉप में यह भी तय हुआ कि कानपुर में बेहतर तालमेल के लिए एक अलग से काम करने वाली संस्थागत व्यवस्था बनाई जाएगी। कानपुर की इस कार्यशाला के बाद अब अगला पड़ाव झांसी की वर्कशॉप और इस साल के अंत में लखनऊ में होने वाला बड़ा डिफेंस कॉन्क्लेव होगा, जहां इन सिफारिशों के आधार पर यूपी को वैश्विक रक्षा पटल पर स्थापित करने की अंतिम नीतियां सामने आएंगी।

  • अधिकारी जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी करें- नगर विकास मंत्री

    अधिकारी जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी करें- नगर विकास मंत्री

    लखनऊ

    योगी सरकार ने बारिश के दौरान नगरीय क्षेत्रों में नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए व्यवस्थाओं की निगरानी तेज कर दी है। इसी क्रम में नगर विकास मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर जल निकासी, नाला- नालियों की सफाई और पेयजल आपूर्ति समेत विभिन्न व्यवस्थाओं की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बरसात के दौरान नागरिकों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो और जलभराव की समस्या का तत्काल समाधान सुनिश्चित किया जाए।

    नगर विकास मंत्री ने नाला-नालियों की सफाई व्यवस्था पर विशेष जोर देते हुए कहा कि बरसात के दौरान जलभराव की प्रमुख वजहों में नाला-नालियों का अवरुद्ध होना भी शामिल है। इसलिए सभी नगर निकायों में नाला-नालियों की सफाई का कार्य पूरी गंभीरता के साथ कराया जाए। सफाई के बाद निकली सिल्ट और कचरे का तत्काल निस्तारण सुनिश्चित किया जाए, ताकि वह दोबारा नालियों में न पहुंचे। उन्होंने सभी नगरीय निकायों के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सफाई व्यवस्था में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में प्रत्येक वर्ष जलभराव की समस्या सामने आती है, उन्हें चिन्हित कर वहां प्रभावी जल निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। एके शर्मा ने पेयजल आपूर्ति की भी समीक्षा की और अधिकारियों को निर्देश दिए कि बरसात के मौसम में पेयजल की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता न हो। नागरिकों को पर्याप्त एवं शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाए। जहां कहीं पेयजल आपूर्ति से संबंधित शिकायतें प्राप्त हों, उनका प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जाए।

    मंत्री ने आगामी त्योहारों के मद्देनजर नगरीय व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद रखने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि त्योहारों के दौरान शहरों में लोगों की आवाजाही और भीड़ बढ़ती है। ऐसे में साफ-सफाई, जल निकासी, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था तथा अन्य नागरिक सुविधाओं को पहले से ही दुरुस्त रखा जाए। धार्मिक एवं सार्वजनिक स्थलों के आसपास विशेष साफ-सफाई कराई जाए और आवश्यकतानुसार अतिरिक्त संसाधनों की व्यवस्था की जाए।

    उन्होंने अधिकारियों से कहा कि नगर निगमों और नगर निकायों की व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी की जाए तथा अधिकारी केवल कार्यालयों तक सीमित न रहें, बल्कि मौके पर जाकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण करें। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश के शहरों को स्वच्छ, सुंदर, सुरक्षित और बेहतर नागरिक सुविधाओं से युक्त बनाने के लिए सरकार लगातार कार्य कर रही है। इस दिशा में नगर निकायों की जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण है।

  • जर्मन प्रतिनिधिमंडल ने यूपी के मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और कारोबारी माहौल की सराहना की

    जर्मन प्रतिनिधिमंडल ने यूपी के मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और कारोबारी माहौल की सराहना की

    लखनऊ

    इंडो-जर्मन गेटवे प्रोग्राम के तहत उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने एमएसएमई को वैश्विक बाजार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इस संबंध में जर्मनी से आए प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश के एमएसएमई मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान उत्तर प्रदेश और जर्मनी के बीच व्यापार, निवेश, तकनीकी सहयोग और एमएसएमई के अंतरराष्ट्रीय विस्तार को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।

    मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश तेजी से वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनने की ओर बढ़ रहा है। प्रदेश में निवेशकों के लिए भरोसेमंद और पारदर्शी कारोबारी वातावरण तैयार किया गया है। देश के कुल एमएसएमई का लगभग 14 प्रतिशत हिस्सा यूपी में है और लगभग एक करोड़ एमएसएमई इकाइयां यहां कार्यरत हैं। कृषि के बाद रोजगार का सबसे बड़ा क्षेत्र एमएसएमई है।

    उन्होंने बताया कि भारत व जर्मनी के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 31.01 बिलियन डॉलर का है। यूरोपीय संघ को होने वाले यूपी के कुल निर्यात में जर्मनी की हिस्सेदारी लगभग 19.8 प्रतिशत है। यूपी से जर्मनी को प्रतिवर्ष 404.20 मिलियन डॉलर से अधिक का निर्यात होता है, जिसमें रेडीमेड वस्त्र, चर्म उत्पाद, फुटवियर, कालीन, ऑटो कंपोनेंट्स प्रमुख हैं। प्रदेश का कुल निर्यात लगभग 18.2 बिलियन यूरो यानी करीब दो लाख करोड़ रुपये को पार कर चुका है और यूपी देश का पांचवां सबसे बड़ा निर्यातक राज्य बन गया है।

    बैठक में बताया गया कि इंडो-जर्मन गेटवे प्रोग्राम 12 माह का संरचित कार्यक्रम है, जिसे जर्मनी के इनोवेशन हब राइन-मेन तथा जीआईबीए के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। इसके तहत चयनित एमएसएमई एवं स्टार्टअप्स को जर्मनी में कानूनी कंपनी स्थापित करने, वहां के बाजार को समझने और विदेशी खरीदारों से सीधे संपर्क के लिए सहायता दी जाएगी। प्रिसीजन इंजीनियरिंग, ऑटोमेशन, इलेक्ट्रिक वाहन, सौर ऊर्जा और रीसाइक्लिंग जैसे क्षेत्रों में संयुक्त परियोजनाओं पर भी चर्चा हुई।

    जर्मन प्रतिनिधिमंडल ने यूपी के मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और कारोबारी वातावरण की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस प्रोग्राम में केवल बड़ी कंपनियों पर ही नहीं, बल्कि स्पष्ट विजन वाली संभावनाशील एमएसएमई और स्टार्टअप्स का चयन किया जाएगा। उन्होंने यूपी के विश्वविद्यालयों के साथ सहयोग और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के माध्यम से व्यापारिक संबंध बढ़ाने में रुचि दिखाई।

    मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने जर्मन उद्यमियों को 25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा में आयोजित होने वाले चौथे यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी व्यापार, तकनीक, निवेश और कौशल के क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग का मजबूत आधार बनेगी। प्रथम चरण में वैश्विक विस्तार की क्षमता वाली इकाइयों की पहचान की जाएगी।

    जर्मन प्रतिनिधिमंडल में राउनहाइम के मेयर डेविड रेंडेल, इनोवेशन हब राइन-मेन के सीईओ स्टीफन विट्टेकाइंड, जर्मन इंडियन बिजनेस अलायंस (जीआईबीए) के सीईओ निर्मल रमण कन्नाइयन तथा चेयरमैन सेल्वकुमार पेरियासामी शामिल रहे। इस अवसर पर प्रमुख सचिव एमएसएमई शशि भूषण लाल, विशेष सचिव शिशिर सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे।

  • सबका साथ, सबका विकास’ सिर्फ नारा नहीं, अपने सार्थक सरोकारों के साथ बलिया में धरातल पर आया सामने

    सबका साथ, सबका विकास’ सिर्फ नारा नहीं, अपने सार्थक सरोकारों के साथ बलिया में धरातल पर आया सामने

    बलिया

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मानना रहा है कि सुशासन की असली परीक्षा तब होती है जब वह समाज के सबसे कमजोर और वंचित वर्ग तक बिना किसी बाधा के पहुंचे। बलिया जिले में सामने आई एक घटना इस सोच को हकीकत में बदलने का प्रमाण है। जिले मनियर ब्लॉक की दिघेड़ा ग्रामसभा के रानीपुर गांव में रहने वाली सात वर्ष की रागिनी एक पैर से दिव्यांग है लेकिन उसकी पढ़ाई की जिद और परेशानी की खबर मिलते ही जिलाधिकारी खुद उसके घर जा पहुंचे और ट्राइसिकिल देकर इलाज की व्यवस्था कराई। 
    प्राथमिक विद्यालय दिघेड़ा में कक्षा एक की छात्रा रागिनी शारीरिक चुनौतियों के बावजूद हर दिन स्कूल जाती थी। परिवार की आर्थिक तंगी और गांव की टूटी-फूटी सड़कों के बीच उसका यह सफर आसान नहीं था, लेकिन पढ़ाई को लेकर इसके हौसले में कमी नहीं आई। जब यह मामला जिला प्रशासन के संज्ञान में आया तो बिना देर किए जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह विभागीय अधिकारियों की टीम के साथ सीधे रागिनी के घर पहुंचे और उसकी मां बबीता देवी व दादा से आत्मीयता से बातचीत की। बच्ची से खुद संवाद करते हुए उन्होंने उसकी पढ़ाई, स्कूल आने-जाने की दिक्कतों और रोजमर्रा की जरूरतों के बारे में बारीकी से जानकारी ली।

    मौके पर ही मिली किताबें, ट्राईसाइकिल और इलाज का भरोसा

    संवेदनशीलता की यह पहल केवल मुलाकात तक सीमित नहीं रही। जिलाधिकारी ने अपने हाथों से रागिनी को स्कूली किताबें और पढ़ाई की सामग्री भेंट कीं, ताकि उसकी शिक्षा में कोई कमी न रह जाए। बच्ची को आवागमन में होने वाली दिक्कत को समझते हुए तत्काल दो ट्राईसाइकिल भी उपलब्ध कराई गईं। इसके साथ ही उसके पैर के इलाज के लिए बिना देर किए डॉक्टरी जांच और समुचित चिकित्सा व्यवस्था कराने के सख्त निर्देश स्वास्थ्य विभाग को दिए गए। परिवार को यह भी भरोसा दिलाया गया कि उनके घर में शौचालय निर्माण की राशि पहले से स्वीकृत है और उसे जल्द उपलब्ध कराया जाएगा। गांव में मौजूद जर्जर सड़क को देखकर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताई और संबंधित विभाग को तत्काल मरम्मत का निर्देश दिया, जिससे रागिनी समेत पूरे गांव के लोगों को आवागमन में राहत मिल सके।

    दिव्यांगजनों के लिए विशेष कैंप का निर्देश

    योगी सरकार की मंशा के तहत जिलाधिकारी ने दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी को निर्देश दिया कि पूरे गांव में विशेष कैंप लगाकर सभी पात्र दिव्यांगजनों को आर्थिक और भौतिक सहायता उपलब्ध कराई जाए। इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अभय कुमार राय, बेसिक शिक्षा अधिकारी मनीष कुमार सिंह और जिला पंचायत राज अधिकारी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। 
    जिलाधिकारी की इस त्वरित कार्रवाई से रागिनी और उसके परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। यह घटना बताती है कि योगी सरकार का सुशासन मॉडल सिर्फ फाइलों और योजनाओं तक सीमित नहीं, बल्कि जरूरतमंदों के दरवाजे तक पहुंचकर उन्हें राहत देने का माध्यम बन चुका है। बलिया की इस मिसाल ने एक बार फिर साबित कर दिया कि जब इच्छाशक्ति हो, तो प्रशासनिक मशीनरी सबसे दूरदराज के गांव तक भी संवेदनशीलता के साथ पहुंच सकती है।

  • निर्यातोन्मुखी उद्यमों को जर्मनी व यूरोपीय बाजार में प्रवेश के अनुरूप तैयार करना है लक्ष्य

    निर्यातोन्मुखी उद्यमों को जर्मनी व यूरोपीय बाजार में प्रवेश के अनुरूप तैयार करना है लक्ष्य

    लखनऊ

    योगी सरकार उत्तर प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को वैश्विक बाजारों से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में बुधवार को इन्वेस्ट यूपी कार्यालय में इंडो-जर्मन गेटवे कार्यक्रम के तहत एमएसएमई एवं निर्यात प्रोत्साहन विभाग तथा जर्मन इंडियन बिजनेस अलायंस (जीआईबीए) के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इसका मुख्य उद्देश्य प्रदेश के निर्यातोन्मुखी उद्यमों को जर्मनी व यूरोपीय बाजार में प्रवेश के लिए तैयार करना है। यह सहयोग गैर-वित्तीय, गैर-बाध्यकारी और गैर-अनन्य स्वरूप का है।

    प्रमुख सचिव एमएसएमई एवं निर्यात प्रोत्साहन शशि भूषण लाल ने इस अवसर पर कहा कि वर्ष 2026 भारत-जर्मनी संबंधों के लिए ऐतिहासिक वर्ष है, क्योंकि इस वर्ष दोनों देशों के राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष और रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष पूरे हो रहे हैं। जर्मनी यूरोपीय संघ में भारत का महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार है और भारत में 2000 से अधिक जर्मन कंपनियां काम कर रही हैं। प्रदेश में विनिर्माण इकाइयों और निर्यात के लिए तैयार एमएसएमई का मजबूत आधार है, जिनमें यूरोपीय बाजार में विस्तार की बड़ी क्षमता है। उन्होंने इस कार्यक्रम को 12 महीने के संरचित रूप में विकसित करने का प्रस्ताव रखा, जिसमें उद्यम मूल्यांकन, बाजार सत्यापन, स्थापना और प्रवेश के बाद सहायता जैसे चरण शामिल होंगे।

    जर्मनी के राउनहाइम शहर के मेयर डेविड रेंडेल ने कहा कि इस साझेदारी को कागजी कार्रवाई से मुक्त और व्यावहारिक बनाया जाना चाहिए। इसकी सफलता कार्यक्रमों की संख्या से नहीं, बल्कि नए व्यावसायिक समझौतों, भारतीय कंपनियों द्वारा जर्मनी में उपस्थिति और जर्मन कंपनियों द्वारा उत्तर प्रदेश में परियोजनाएं शुरू करने जैसे ठोस परिणामों से मापी जानी चाहिए। उन्होंने इनोवेशन हब राइन-मेन को जर्मनी में संस्थागत आधार और जीआईबीए को भारतीय पक्ष में समन्वयक के रूप में विकसित करने पर जोर दिया।

    एमओयू के तहत उत्तर प्रदेश के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान, पात्र उद्यमों को कार्यक्रम की जानकारी देना, राज्य सरकार की योजनाओं के साथ समन्वय और उद्यमों की तैयारी में सहायता जैसे कार्यों पर फोकस होगा। इसके साथ ही गाजियाबाद कॉमन फैसिलिटी सेंटर (सीएफसी) के आधुनिकीकरण में जर्मन तकनीक, गुणवत्ता, परीक्षण एवं प्रमाणन संबंधी मार्गदर्शन और जर्मन प्रौद्योगिकी प्रदाताओं के साथ संपर्क बढ़ाने पर भी काम किया जाएगा। जर्मन आयात मानकों, यूरोपीय संघ के व्यापार नियमों, टैरिफ और निर्यात दस्तावेजीकरण जैसे विषयों पर संयुक्त कार्यशालाएं भी आयोजित की जाएंगी। यह एमओयू तीन वर्ष तक प्रभावी रहेगा।

    कार्यक्रम में इन्वेस्ट यूपी के सीईओ विजय किरण आनंद, उद्योग आयुक्त के.वी. पंडियन, सहायक महाप्रबंधक रितेश सक्सेना, यूपी इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन के एमडी हिमांशु कौशिक, इनोवेशन हब राइन-मेन के सीईओ स्टीफन विट्टेकिंड और जीआईबीए के चेयरमैन सेल्वकुमार पेरियासामी सहित अन्य प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

  • Gorakhpur से Hyderabad का सफर होगा आसान, 2 अक्टूबर से चलेगी Amrit Bharat Express; जानें रूट और शेड्यूल

    Gorakhpur से Hyderabad का सफर होगा आसान, 2 अक्टूबर से चलेगी Amrit Bharat Express; जानें रूट और शेड्यूल

    गोरखपुर

    उत्तर प्रदेश के गोरखपुर, गोंडा, बाराबंकी, गोमतीनगर, लखनऊ सिटी, ऐशबाग, कानपुर सेंट्रल, उरई और झांसी स्टेशनों से हैदराबाद तक जाने और आने वाले यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। गोरखपुर से चर्लपल्ली (हैदराबाद) तक अमृतभारत एक्सप्रेस की मंजूरी के साथ ही इसके चलने की तारीख का भी ऐलान हो गया है। बोर्ड से मिले निर्देश के बाद पूर्वोत्तर रेलवे ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। सीपीआरओ सुमित कुमार ने बताया कि नई अमृतभारत ट्रेन चर्लपल्ली से गांधी जयंती यानी 2 अक्टूबर से हर शुक्रवार और गोरखपुर से 04 अक्टूबर से हर रविवार को 22075/22076 चर्लपल्ली-गोरखपुर-अमृत भारत साप्ताहिक एक्सप्रेस के रूप में चलेगी। रेलवे बोर्ड ने प्रयोग के तौर पर अभी इसे सप्ताह में एक दिन चलाने की मंजूरी दी है। डिमांड बढ़ने पर फेरे बढ़ाए जा सकते हैं। हैदराबाद के लिए गोरखपुर से पहली रेगुलर ट्रेन होगी।

    यह ट्रेन गोरखपुर से हैदराबाद चर्लपल्ली के अलावा गोंडा, बाराबंकी, गोमतीनगर, लखनऊ सिटी, ऐशबाग, कानपुर सेंट्रल, उरई, झांसी, बीना, भोपाल,इटारसी, बैतूल, नागपुर, चंदरपुर, बल्लारशाह, काजीपेट स्टेशनों पर भी रुकेगी। 22075 चर्लपल्ली-गोरखपुर अमृत भारत साप्ताहिक एक्सप्रेस 02 अक्टूबर से प्रत्येक शुक्रवार को चर्लपल्ली से रात 9.45 बजे प्रस्थान कर तीसरे दिन सुबह 6.25 बजे गोरखपुर पहुंचेगी। वापसी यात्रा में, 22076 गोरखपुर-चर्लपल्ली अमृत भारत साप्ताहिक एक्सप्रेस 04 अक्टूबर से प्रत्येक रविवार को गोरखपुर से सुबह 08.30 बजे प्रस्थान कर दूसरे दिन शाम 5 बजे चर्लपल्ली पहुंचेगी। इस ट्रेन में कुल 22 कोच लगाए जाएंगे।

    यात्रियों को ये सुविधाएं मिलेंगी
    बिना एसी वाली अमृत भारत एक्सप्रेस आम यात्रियों के लिए डिजाइन की गई है। नई ट्रेनों में सीसीटीवी कैमरे लगे रहेंगे। टॉक-बैक सिस्टम से यात्री आपात स्थिति में सीधे लोको पायलट व ट्रेन मैनेजर से संपर्क कर सकेंगे। वैक्यूम बायो टॉयलेट, आरामदायक सीटों की सुविधा मिलेगी। 130 किमी की रफ्तार से दौड़ने वाली 22 बोगियों वाली अमृत भारत एक्स में 1834 यात्री सफर कर सकेंगे।

    गोरखपुर के रास्ते अभी चल रहीं 4 अमृतभारत एक्सप्रेस
    दिल्ली और बांद्रा अमृतभारत के बाद अब गोरखपुर से हैदराबाद (चेरापल्ली) तक चलने वाली इस अमृतभारत की सौगात मिली है। बिहार से चलकर गोरखपुर के रास्ते अभी चार अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन हो रहा है। इसमें लखनऊ के रास्ते आनंदविहार से दरभंगा के लिए एक अमृत भारत एक्सप्रेस है। वहीं हाल ही में गोरखपुर दिल्ली और बांद्रा के लिए अमृतभारत ट्रेन की मंजूरी बोर्ड ने दी है। भविष्य में रेलवे बोर्ड 24 और अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनें पटरी पर उतारने जा रहा है।

    जानें शेड्यूल

    हैदराबा से गोरखपुर अमृतभारत(22075)

    -प्रस्थान का दिन-शुक्रवार

    -प्रस्थान -रात 9.45 बजे

    -आगमन-तीसरे दिन सुबह 6.25 बजे

    गोरखपुर से हैदराबाद अमृतभारत(22076)

    -प्रस्थान का दिन-रविवार

    -प्रस्थान -सुबह 8 बजे

  • सीएम युवा योजना से मिली नई पहचान, साधना ने खड़ा किया सफल वाटर प्लांट व्यवसाय

    सीएम युवा योजना से मिली नई पहचान, साधना ने खड़ा किया सफल वाटर प्लांट व्यवसाय

    लखनऊ/इटावा

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार युवाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न स्वरोजगार योजनाएं संचालित कर रही है। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान (सीएम युवा) ऐसी ही एक महत्वपूर्ण पहल है, जो लोगों को रोजगार तलाशने वाला नहीं बल्कि रोजगार सृजित करने वाला बनाने का कार्य कर रही है। इटावा जनपद के महेवा क्षेत्र की रहने वाली साधना इसकी प्रेरणादायक मिसाल हैं। योजना के तहत मिली वित्तीय सहायता से उन्होंने ‘जय भोले वाटर प्लांट’ की स्थापना की और आज सफलतापूर्वक अपना व्यवसाय संचालित कर रही हैं।

    समाचार पत्र से मिली योजना की जानकारी

    साधना बताती हैं कि उन्हें मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान (सीएम युवा) की जानकारी एक समाचार पत्र के माध्यम से मिली। उस समय उनके पास कोई स्वयं का व्यवसाय नहीं था, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और आत्मनिर्भर बनने की इच्छा थी। योजना के बारे में जानकारी मिलने के बाद उन्होंने आवेदन किया और अपना उद्यम स्थापित करने का निर्णय लिया। उनके अनुसार, सरकार की इस पहल ने उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर प्रदान किया।

    वित्तीय सहायता से शुरू हुआ कारोबार

    अप्रैल 2025 में साधना को योजना के तहत 3.20 लाख रुपये का ऋण तथा 87 हजार रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ। इस वित्तीय सहायता से उन्होंने ‘जय भोले वाटर प्लांट’ की स्थापना की। साधना बताती हैं कि व्यवसाय शुरू करने में सबसे बड़ी चुनौती पूंजी की व्यवस्था थी। पर्याप्त संसाधन न होने के कारण कारोबार शुरू करना आसान नहीं था, लेकिन योजना से मिली सहायता ने उनकी राह आसान कर दी। इसके बाद उन्होंने शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने का कार्य शुरू किया और धीरे-धीरे ग्राहकों का विश्वास अर्जित किया।

    आज लाखों का कारोबार, कई परिवारों को मिला सहारा

    लगातार मेहनत और बेहतर सेवाओं के बल पर आज उनका वाटर प्लांट क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना चुका है। वर्तमान में उनके उद्यम का वार्षिक टर्नओवर लगभग 4.20 लाख रुपये तक पहुंच चुका है। साधना का कहना है कि गुणवत्तापूर्ण सेवा और ग्राहकों का भरोसा ही उनकी सफलता का आधार है। उनके इस उद्यम से 6 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार भी मिला हुआ है, जिससे कई परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है।

    कारोबार को और आगे बढ़ाने का लक्ष्य

    साधना का कहना है कि वह भविष्य में अपने वाटर प्लांट के कारोबार को और आगे बढ़ाना चाहती हैं। उनका लक्ष्य अधिक लोगों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर सृजित करना है। उनका मानना है कि यदि मेहनत और सरकार की योजनाओं का सहयोग मिले तो आत्मनिर्भर बनने का सपना आसानी से साकार किया जा सकता है। साधना की सफलता इस बात का प्रमाण है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में संचालित मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान (सीएम युवा) लोगों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाते हुए आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के संकल्प को मजबूती प्रदान कर रहा है।

  • महिला सशक्तिकरण की नई तस्वीर, 28 लाख से ज्यादा ‘लखपति दीदी’ बनीं परिवार की आर्थिक ताकत

    महिला सशक्तिकरण की नई तस्वीर, 28 लाख से ज्यादा ‘लखपति दीदी’ बनीं परिवार की आर्थिक ताकत

    ‘लखपति दीदी’ बन प्रदेश की 28 लाख से अधिक महिलाएं बनीं परिवार की आर्थिक धुरी

    योगी सरकार के आजीविका मिशन से बदल रही ग्रामीण समृद्धि की तस्वीर

    65 हजार से ज्यादा ग्राम संगठनों और 3,200 से अधिक संकुल स्तरीय संघों ने तैयार किया मजबूत आर्थिक तंत्र

    गरीब ग्रामीण परिवारों को स्वयं सहायता समूहों के जरिए आत्मनिर्भर उद्यमों से जोड़ रही योगी सरकार

    लखनऊ,
     उत्तर प्रदेश के गांवों में महिलाएं आर्थिक बदलाव की नई कहानी लिख रहीं हैं। कभी घर की चारदीवारी और खेती-किसानी में सहयोग तक सीमित मानी जाने वाली ग्रामीण महिलाएं अब बचतकर्ता से उद्यमी और परिवार की सहयोगी से उसकी आर्थिक ताकत बन रही हैं। योगी सरकार के ग्रामीण आजीविका मिशन ने इस बदलाव को व्यापक आधार दिया है। प्रदेश में साढ़े दस लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर करीब सवा करोड़ ग्रामीण परिवार आत्मनिर्भर बने हैं और इनमें से 28 लाख से अधिक महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बनकर ग्रामीण समृद्धि का नया चेहरा बन गई हैं। यह बदलाव केवल महिलाओं की आय बढ़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि गांवों में पूंजी, उत्पादन, बाजार और रोजगार का नया चक्र भी खड़ा कर रहा है।

    आजीविका मिशन की सबसे बड़ी उपलब्धि उसका विशाल नेटवर्क ही नहीं, बल्कि गांवों में विकसित हो रहा सामुदायिक आर्थिक तंत्र है। छोटी-छोटी बचत से शुरू हुआ महिलाओं का सफर अब बैंकिंग, ऋण, उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन और उद्यमिता तक पहुंच गया है। 
    योगी सरकार ने स्वयं सहायता समूहों को केवल वित्तीय सहयोग का माध्यम बनाने के बजाय उन्हें आर्थिक स्वावलंबन की पहली सीढ़ी बनाया है। समूहों से आगे 65,544 ग्राम संगठनों और 3,298 संकुल स्तरीय संघों का ढांचा खड़ा कर महिलाओं को ऐसा संस्थागत आधार दिया गया है, जो उनकी आजीविका को स्थायित्व और कारोबार को विस्तार दे रहा है।

    बचत की छोटी पूंजी बनी बड़े बदलाव का आधार

    ग्रामीण आजीविका मिशन की बुनियाद सामूहिकता की उस ताकत पर टिकी है, जिसमें महिलाएं संगठित होकर अपनी आर्थिक क्षमता बढ़ाती हैं। स्वयं सहायता समूह में नियमित छोटी बचत से शुरुआत होती है। यही बचत वित्तीय अनुशासन पैदा करती है और आगे बैंक ऋण तथा दूसरे संस्थागत वित्त तक पहुंच का रास्ता खोलती है।

    मिशन निदेशक अरुण कुमार ने बताया कि इस व्यवस्था ने उस ग्रामीण महिला के लिए भी उद्यमिता के द्वार खोले हैं, जिसके पास न बड़ी पूंजी थी और न बाजार तक सीधी पहुंच। खेती से जुड़ी गतिविधियों से लेकर पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण, स्थानीय उत्पादों के निर्माण और सेवा क्षेत्र तक महिलाएं आय के नए स्रोत विकसित कर रही हैं। इससे उनकी भूमिका परिवार की अतिरिक्त कमाई करने वाली सदस्य से आगे बढ़कर आर्थिक फैसलों में भागीदार की बन रही है।

    28.16 लाख लखपति दीदियां बदलाव की सबसे बड़ी पहचान

    इस परिवर्तन की सबसे सशक्त तस्वीर प्रदेश की 28.16 लाख ‘लखपति दीदियां’ हैं। इन महिलाओं का लखपति बनना महज आय का एक आंकड़ा नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों की आर्थिक संरचना में आ रहे बदलाव का संकेत है। नियमित और टिकाऊ आमदनी ने महिलाओं को परिवार की जरूरतों को पूरा करने के साथ भविष्य के लिए पूंजी तैयार करने की क्षमता भी दी है। महिला की आय बढ़ने का प्रभाव परिवार और गांव दोनों पर पड़ता है। बच्चों की शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य और घरेलू जरूरतों पर खर्च की क्षमता बढ़ने के साथ स्थानीय बाजार में मांग भी पैदा होती है। यही वजह है कि लखपति दीदी अभियान को केवल महिला सशक्तीकरण के दायरे में देखने के बजाय ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नीचे से ऊपर की ओर समृद्धि पैदा करने वाले मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।

    गांव-गांव तक पहुंचा आर्थिक स्वावलंबन का नेटवर्क

    उत्तर प्रदेश में साढ़े दस लाख स्वयं सहायता समूहों से सवा करोड़ परिवारों का जुड़ना मिशन के विस्तार की व्यापकता का बड़ा उदाहरण है। इतने बड़े स्तर पर ग्रामीण परिवारों को संगठित करने से गांवों में महिलाओं की सामूहिक आर्थिक शक्ति तैयार हुई है। छोटे स्तर पर पूंजी, प्रशिक्षण और बाजार की जिन चुनौतियों का सामना अकेली महिला के लिए कठिन होता था, योगी सरकार के सहयोग और सामूहिक शक्ति ने उनका समाधान आसान किया है।

    इस मॉडल की विशेषता यह भी है कि गरीब परिवार की आजीविका को चरणबद्ध ढंग से मजबूत किया जाता है। पहले महिला को समूह से जोड़ना, फिर बचत और वित्तीय अनुशासन विकसित करना और उसके बाद ऋण, कौशल, उत्पादन तथा बाजार से जोड़ना, यही क्रम आत्मनिर्भरता की बुनियाद तैयार कर रहा है।

    65,544 ग्राम संगठन बने समूहों की ताकत

    स्वयं सहायता समूहों को दीर्घकालिक और संस्थागत मजबूती देने के लिए प्रदेश में 65,544 ग्राम संगठन और 3,298 संकुल स्तरीय संघों का नेटवर्क खड़ा किया गया है। इस व्यवस्था ने गांव की महिलाओं को सामुदायिक संस्थाओं के संचालन और आर्थिक गतिविधियों के प्रबंधन में भी भागीदार बनाया है।

    मिशन निदेशक अरुण कुमार ने बताया कि ग्राम संगठन स्थानीय स्तर पर समूहों के बीच समन्वय, वित्तीय अनुशासन और आजीविका गतिविधियों को मजबूती देते हैं, जबकि संकुल स्तरीय संघ उन्हें बड़े बाजार, प्रशिक्षण और संस्थागत सहयोग तक पहुंचाने का माध्यम बन रहे हैं। इसी मजबूत ढांचे के सहारे मिशन की ‘आत्मनिर्भर महिला, आदर्श परिवार और समृद्ध संस्था’ की अवधारणा गांवों में मूर्त रूप ले रही है।

  • दिव्यांग छात्राओं के सपनों को मिलेगी रफ्तार, 40 प्रतिशत दिव्यांगता पर भी ई-ट्राइसाइकिल

    दिव्यांग छात्राओं के सपनों को मिलेगी रफ्तार, 40 प्रतिशत दिव्यांगता पर भी ई-ट्राइसाइकिल

    लखनऊ

    योगी सरकार ने दिव्यांग छात्राओं को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने, उनकी गतिशीलता बढ़ाने और शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थानों तक आवागमन को सुगम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग द्वारा बैटरी चालित ई-ट्राइसाइकिल वितरण योजना का विस्तार करते हुए 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता वाली पात्र अध्ययनरत छात्राओं को भी योजना का लाभ देने का निर्णय लिया गया है।

    योजना के अंतर्गत पात्र छात्राओं को अधिकतम 65,000 रुपये तक की बैटरी चालित ई-ट्राइसाइकिल निशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। इससे विद्यालय, महाविद्यालय, विश्वविद्यालय एवं प्रशिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत दिव्यांग छात्राओं के लिए घर से शिक्षण संस्थान तक आने-जाने में सुविधा होगी और आवागमन की बाधा को कम किया जा सकेगा।

    प्रदेश के सभी विधानसभा क्षेत्रों तक पहुंचेगा योजना का लाभ

    योजना को प्रदेशव्यापी स्वरूप देते हुए सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों को इसके दायरे में रखा गया है। योजना के तहत प्रदेश की प्रत्येक विधानसभा सीट से 20-20 पात्र दिव्यांग छात्राओं का चयन होगा। विभिन्न जनपदों में चिन्हांकन एवं सत्यापन के बाद उन्हें निशुल्क बैटरी चालित ई-ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराई जाएगी। इस तरह योजना के अंतर्गत प्रदेशभर में कुल 8,060 ई-ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाली पात्र दिव्यांग छात्राओं को भी आवागमन की बेहतर सुविधा मिल सके और वे अपनी शिक्षा एवं प्रशिक्षण को बिना किसी परिवहन संबंधी बाधा के जारी रख सकें।

    40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता पर पात्रता

    योजना के अंतर्गत 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता वाली पात्र अध्ययनरत छात्राएं लाभ प्राप्त कर सकेंगी। लाभार्थी छात्रा का किसी मान्यता प्राप्त विद्यालय, महाविद्यालय, विश्वविद्यालय अथवा प्रशिक्षण संस्थान में अध्ययनरत या प्रशिक्षणरत होना आवश्यक होगा। पात्रता का निर्धारण शासन द्वारा निर्धारित नियमों एवं शर्तों के अनुसार किया जाएगा। छात्रा के पास निर्धारित दिव्यांगता प्रमाण-पत्र/यूडीआईडी कार्ड तथा योजना के लिए आवश्यक अन्य अभिलेख होना आवश्यक होगा। पात्रता के संबंध में निर्धारित मानकों के अनुसार दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा।

    लाभार्थी की उम्र 16 वर्ष या उससे अधिक होना अनिवार्य 

    जनपद स्तर पर संबंधित अधिकारियों द्वारा पात्र छात्राओं का चिन्हांकन एवं सत्यापन कराया जाएगा। सत्यापन की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पात्र छात्राओं को अधिकतम 65,000 रुपये तक की बैटरी चालित ई-ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराई जाएगी। इस योजना का लाभ लेने के लिए लाभार्थी की उम्र 16 वर्ष या उससे अधिक होना अनिवार्य है। आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है। छात्राएं जनपद स्तर पर जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग अधिकारी या पोर्टल https://hwd.uphq.in/ पर आवेदन कर सकती हैं।

    शिक्षा जारी रखने में मिलेगी मजबूती

    योजना का उद्देश्य केवल आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि दिव्यांग छात्राओं को आत्मनिर्भर बनाते हुए उनकी शिक्षा और प्रशिक्षण को निर्बाध बनाए रखना भी है। परिवहन की समस्या के कारण अनेक दिव्यांग छात्राओं को विद्यालय, महाविद्यालय अथवा प्रशिक्षण संस्थान तक नियमित रूप से पहुंचने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है। कई बार आवागमन की समस्या उनकी शिक्षा में बाधा बन जाती है। ई-ट्राइसाइकिल उपलब्ध होने से ऐसी छात्राओं को नियमित रूप से शिक्षण संस्थान तक पहुंचने में सुविधा होगी और उनकी पढ़ाई जारी रखने के अवसर मजबूत होंगे।

    समान अवसर और सशक्तीकरण की दिशा में बड़ा कदम

    योगी सरकार की यह पहल दिव्यांग छात्राओं को शिक्षा, कौशल विकास और भविष्य में रोजगार के बेहतर अवसरों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। बैटरी चालित ई-ट्राइसाइकिल से उनकी गतिशीलता, आत्मनिर्भरता, शिक्षा तक पहुंच और सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा मिलेगा। प्रदेश के सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों तक योजना को पहुंचाने का प्रयास दिव्यांग छात्राओं के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। विभाग का प्रयास है कि दिव्यांगजन के लिए संचालित योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक पात्र लाभार्थियों तक पारदर्शी, निष्पक्ष और प्रभावी ढंग से पहुंचाया जाए। यह पहल समावेशी शिक्षा, समान अवसर और दिव्यांग छात्राओं के सशक्तीकरण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को और मजबूत करती है।

    पढ़ाई के लिए आसान होगा आवागमन

    दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के उपनिदेशक डॉ. अमित कुमार राय ने बताया कि दिव्यांग छात्राओं को शिक्षा एवं प्रशिक्षण के दौरान आवागमन में किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए शासन द्वारा बैटरी चालित ई-ट्राइसाइकिल वितरण योजना का विस्तार किया गया है। अब 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता वाली पात्र अध्ययनरत छात्राओं को भी योजना का लाभ मिलेगा। जनपद स्तर पर आवश्यक अभिलेखों एवं पात्रता का सत्यापन करने के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत पात्र छात्राओं को ई-ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराई जाएगी।