Category: उत्तर प्रदेश

  • लोगों को भ्रमित कर रही एआई जनित खबरें एनएमसी से जुड़ी फेक न्यूज़ सोशल मीडिया पर वायरल

    लोगों को भ्रमित कर रही एआई जनित खबरें एनएमसी से जुड़ी फेक न्यूज़ सोशल मीडिया पर वायरल

    लखनऊ

    सोशल मीडिया लोगों की दिनचर्या का एक हिस्सा बन गया है। जहां दिन भर तरह-तरह की खबरें प्रसारित और प्रचारित होती रहती हैं। देखने और पढऩे में सामान्य सी लगने वाले कई समाचार सच से कोसों दूर होते हैं। यह खबरें केवल न्यूज पेपर कटिंग तक सीमित नहीं है घटना-दुर्घटना के वीडियो भी एआई से बनाकर व्यूज बटोरने के लिए सोशल मीडिया पर वायरल किए जा रहे हैं। खबरों से प्रभावित होने वाले जब उसकी पड़ताल करते हैं तो पता चलता है कि वह समाचार एआई यानि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बना है। 

    तकनीक के हमेशा से ही दो पहलू रहे हैं। एक वह जो मानव सभ्यता के लिए लाभदायक होता है तो दूसरा आम आदमी का जीवन खतरे में डाल सकता है। इसी तकनीक का ताजा उदाहरण है एआई। आज के समय में हर कोई एआई का मास्टर बनना चाहता है। एआई आपकी तस्वीर को सुन्दर बनाने से लेकर कपड़े और लोकेशन तक बदल सकता है। इतना ही नहीं आप एआई की मदद से कोई भी वीडियो बना सकते हैं। आज इसी तकनीक का सहारा लेकर कई लोग फेक न्यूज़ और वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर व्यूज बढ़ा रहे हैं। यही लोग समाचार पत्र की कटिंग सी लगने वाली खबर भी एआई से बनाकर सोशल मीडिया में पोस्ट कर रहे हैं। कई समाचार पत्र सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली खबरों के फैक्ट जांचे बगैर ही उन्हें अखबार में जगह दे देते हैं। जो लोगों की परेशानी का सबब बन जाता ह है। फर्जी खबरों की कड़ी में एक न्यूज सोशल मीडिया पर वायरल हुई जो राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) से जुड़ी थी । जिसमें NMC द्वारा डमी फैकल्टी की लिस्ट तैयार किये जाने की जानकारी दी गयी थी। लिस्ट उन डॉक्टरों की जो तैनात तो हैं पर कॉलेज नहीं जाते। अब प्रभावित लोगों ने इसकी पड़ताल की हकीकत सामने आई कि समाचार फर्जी और एआई जनित है। लोगों का कहना है कि इससे होने वाली परेशानी से मानसिक दबाव बनाता है।
    कभी किसी दुर्घटना की फर्जी खबर आ जाती है तो कभी किसी प्रतियोगी परीक्षा का रिजल्ट आ जाता है। यहां तक की एआई से लोग अफसरों के नियुक्ति और आदेश पत्र बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर रहे हैं। और ऐसे लोगों की भी संख्या कम नहीं है जो बगैर सच को जाने समझे उस पत्र को शेयर करते चले जाते हैं। आए दिन ऐसी दर्जनों पोस्ट वायरल होती हैं जिनका सच से कोई लेना देना नहीं। किसी कोई भी जागरूक नागरिक इसकी पड़ताल करता है तब यह पता चला है कि समाचार पत्र या वीडियो एआई से जेनरेट किया गया है।

  • UPCOS से आउटसोर्स कर्मचारियों को सुरक्षा कवच, पूरा वेतन समय पर देने की व्यवस्था; सामाजिक सुरक्षा भी सुनिश्चित

    UPCOS से आउटसोर्स कर्मचारियों को सुरक्षा कवच, पूरा वेतन समय पर देने की व्यवस्था; सामाजिक सुरक्षा भी सुनिश्चित

    यूपी में आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए ऐतिहासिक शुरुआत : समय पर मिलेगा पूरा वेतन, सामाजिक सुरक्षा की भी गारंटी

    – आउटसोर्स कर्मियों के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'यूपीकोस' का किया विधिवत शुभारंभ, पोर्टल और वेबसाइट लॉन्च

    – आउटसोर्सिंग व्यवस्था में बिचौलियों का खेल खत्म, अब हर महीने की 5 तारीख तक सीधे खाते में आएगा वेतन

    – एजेंसियां अब मनमाने ढंग से नहीं कर सकेंगी छंटनी, नई एजेंसी आने पर भी बरकरार रहेगी पुराने कर्मियों की नौकरी

    – आउटसोर्स पद चार श्रेणियों में बंटे, डॉक्टरों से लेकर चतुर्थ श्रेणी कर्मियों तक का मानदेय हुआ निर्धारित

    – एमबीबीएस डॉक्टर, इंजीनियर को न्यूनतम 40 हजार और चतुर्थ श्रेणी कर्मियों को 20 हजार रुपये मानदेय मिलेगा

    – सभी आउटसोर्स कर्मियों को मिलेगा ईपीएफ और ईएसआई का पक्का कानूनी सुरक्षा कवच

    – ईएसआई के तहत मुफ्त इलाज, दवाएं और महिला कर्मियों को मिलेगा पूरा सवेतन मातृत्व अवकाश

    – दुर्घटना में मृत्यु या दिव्यांगता पर बिना किसी प्रीमियम के बैंक खाते से मिलेगा 40 लाख रुपये तक का कवर

    – चतुर्थ श्रेणी कर्मियों के बच्चों का उच्च शिक्षा या सिविल सेवा मुख्य परीक्षा में चयन होने पर 1 लाख रुपये की मदद

    – आउटसोर्स भर्तियों में लागू होगा संवैधानिक आरक्षण, जेम पोर्टल के जरिए पारदर्शी ढंग से चुनी जाएंगी एजेंसियां

    लखनऊ, 
     उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी दफ्तरों में काम करने वाले आउटसोर्स कर्मचारियों के जीवन में बड़ा बदलाव लाने की दिशा में ठोस कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को राजधानी लखनऊ स्थित लोक भवन में उत्तर प्रदेश आउटसोर्सिंग सेवा निगम यानी ‘यूपीकोस’ का विधिवत शुभारंभ किया। इस खास मौके पर मुख्यमंत्री ने निगम का आधिकारिक लोगो, वेबसाइट और पोर्टल जनता को समर्पित किया। कार्यक्रम के दौरान आउटसोर्स कर्मियों को पारिश्रमिक के चेक भी वितरित किए गए। प्रदेश के सरकारी दफ्तरों, अस्पतालों, नगर निकायों और शिक्षण संस्थानों में करीब 3.5 लाख युवा वर्षों से सेवा दे रहे हैं। काम पूरी तरह सरकारी था लेकिन उनकी आजीविका की सुरक्षा निजी एजेंसियों के भरोसे छोड़ दी गई थी। यूपीकोस का गठन इसी बड़ी खाई को पाटने का एक ऐतिहासिक प्रयास बनकर उभरा है।

    बिचौलियों के चंगुल में फंसी थी पुरानी व्यवस्था
    पुरानी व्यवस्था में आउटसोर्स कर्मचारी हमेशा खुद को असहाय महसूस करता था। कर्मचारी काम तो सरकारी विभाग का करता था, लेकिन उसका वेतन निजी एजेंसी के माध्यम से आता था। सरकार इस पूरे लेन-देन से एकदम अलग-थलग दिखाई पड़ती थी। किसी भी समस्या के समाधान के लिए कर्मचारी को तीन दरवाजों के चक्कर काटने पड़ते थे। विभाग उसे एजेंसी के पास भेजता था और एजेंसी उसे टरका देती थी। कागज पर दर्ज वेतन और हाथ में आने वाली रकम में जमीन-आसमान का अंतर होता था। बिना किसी जवाबदेही के काम कर रहीं ये एजेंसियां कर्मचारियों की गाढ़ी कमाई में से भी हिस्सा काट लेती थीं। इसके अलावा कई जगह महीनों तक वेतन न मिलना एक सामान्य बात बन चुकी थी।

    शोषण, कटौती और भय के अंतहीन दौर का अंत
    पहले के दौर में आउटसोर्सिंग का दायरा मनमानी और शोषण का पर्याय बन चुका था। एजेंसियां कर्मचारियों के पारिश्रमिक से मनमाने ढंग से अवैध कटौती करती थीं। नौकरी पर रखने और अनुबंध के नवीनीकरण के नाम पर गरीब अभ्यर्थियों से धन उगाही की शिकायतें आम थीं। चयन की कोई पारदर्शी और निष्पक्ष व्यवस्था न होने से मेधावी युवा पिछड़ जाते थे। ईपीएफ और ईएसआई की सुविधाएं सिर्फ कागजों पर सिमट कर रह गई थीं। कई कर्मचारियों के खाते तक नहीं खोले जाते थे। यदि खाते खुल भी गए तो उनमें पैसा समय पर जमा नहीं होता था। एजेंसी बदलते ही पुराना जमा पैसा फंस जाता था। नतीजतन बीमारी या दुर्घटना की स्थिति में कर्मचारियों को कोई सामाजिक सुरक्षा नहीं मिल पाती थी।

    त्रिपक्षीय व्यवस्था से पारदर्शी समाधान की व्यवस्था
    इस गंभीर और पुरानी समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए सरकार ने एक मजबूत निगम की नींव रखी है। यूपीकोस के माध्यम से अब शोषण के सारे रास्ते बंद किए जा रहे हैं। नई नीति के तहत विभाग, यूपीकोस निगम और सेवा प्रदाता एजेंसी एक कानूनी त्रिपक्षीय समझौते से बंधेंगे। संबंधित सरकारी विभाग अपनी आवश्यकता सीधे निगम को भेजेगा। निगम तय नियमों के तहत एजेंसी के जरिए कुशल कर्मचारी उपलब्ध कराएगा। इस व्यवस्था से कर्मचारी अब अकेला नहीं रहेगा और सरकार उसकी सुरक्षा की सीधी गारंटर बनेगी। व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए एजेंसियों का चयन जेम पोर्टल के जरिए होगा। सभी कर्मचारियों की भर्ती, उपस्थिति और भुगतान का पूरा ब्योरा एक ही पोर्टल पर दर्ज रहेगा। नियम तोड़ने वाली एजेंसियों को तुरंत ब्लैकलिस्ट कर उन पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।

    हर महीने की पांच तारीख पर आ जाएगी तनख्वाह
    नई व्यवस्था का सबसे क्रांतिकारी और राहत देने वाला पहलू समय पर पूरा भुगतान सुनिश्चित करना है। अब हर महीने की पांच तारीख को कर्मचारी के बैंक खाते में पूरा पारिश्रमिक सीधे पहुंचेगा। काम का आकलन हर महीने की इक्कीस तारीख से लेकर अगले महीने की बीस तारीख तक किया जाएगा। व्यवस्था ऐसी बनाई गई है कि एजेंसी को पहले कर्मचारी के खाते में पूरा वेतन जमा करना होगा। जब कर्मचारी का वेतन सुरक्षित हो जाएगा, उसके बाद ही निगम एजेंसी को उसका तय कमीशन जारी करेगा। यदि किसी विभाग में समय पर बजट उपलब्ध नहीं होगा, तो भी कर्मचारी का वेतन नहीं रुकेगा। ऐसे हालात में वित्त विभाग से अग्रिम बजट लेकर कर्मचारियों को समय पर पैसा दिया जाएगा और विभाग बाद में यह राशि लौटाएगा।

    छंटनी की मनमानी पर लगेगी पूरी तरह से रोक
    आउटसोर्स कर्मचारियों के मन में हर वक्त छंटनी की तलवार लटकती रहती थी। एजेंसियां अपनी मर्जी से किसी को भी बाहर का रास्ता दिखा देती थीं। यूपीकोस ने इस डर को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया है। अब कोई भी एजेंसी अपनी मर्जी से किसी कर्मचारी को हटा नहीं सकेगी। अनुशासनहीनता या गंभीर शिकायत की स्थिति में भी विभाग और निगम दोनों की लिखित मंजूरी अनिवार्य होगी। सबसे बड़ी बात यह है कि तीन या चार साल बाद जब पुरानी एजेंसी की जगह नई एजेंसी आएगी, तब भी कार्यरत कर्मचारियों को हटाया नहीं जाएगा। नई एजेंसी को अनिवार्य रूप से वर्तमान में कार्यरत कर्मचारियों को ही अपने साथ बनाए रखना होगा। एजेंसी का कार्यकाल अधिकतम चार वर्ष तक सीमित रहेगा और उसका सर्विस चार्ज भी सरकार द्वारा पहले से तय होगा।

    विशेषज्ञों और डॉक्टरों को श्रेणी एक में मिलेगा सम्मान
    निगम ने सभी पदों और योग्यताओं को पारदर्शी बनाते हुए चार प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया है। पहली श्रेणी में उच्च शैक्षणिक योग्यता और तकनीकी दक्षता वाले पेशेवरों को रखा गया है। इसमें एमबीबीएस डिग्री धारक चिकित्सक, सहायक अभियंता, प्रोजेक्ट अधिकारी और वरिष्ठ लेखा अधिकारी जैसे पद शामिल हैं। इस श्रेणी के कर्मियों का मासिक मानदेय न्यूनतम 40 हजार रुपये निर्धारित किया गया है। सरकारी अस्पतालों में संविदा पर सेवा देने वाले डॉक्टरों को अब न सिर्फ सम्मानजनक मानदेय मिलेगा, बल्कि उन्हें पहली बार ईपीएफ, ईएसआई और बीमा का पक्का कानूनी संरक्षण भी हासिल होगा।

    तकनीकी और प्रशासनिक पदों के लिए श्रेणी दो की व्यवस्था
    दूसरी श्रेणी में स्नातक स्तर की डिग्री और विशेष तकनीकी डिप्लोमा रखने वाले कर्मियों को शामिल किया गया है। इसमें अस्पतालों में दिन-रात सेवा देने वाली स्टाफ नर्स, जूनियर इंजीनियर, सीनियर असिस्टेंट और लीगल असिस्टेंट जैसे महत्वपूर्ण पद आते हैं। इन पदों के लिए न्यूनतम 25 हजार रुपये का मासिक मानदेय तय किया गया है। अस्पताल की समर्पित नर्स हो या दफ्तर का तकनीकी सहायक, सरकार ने दोनों को एक मजबूत और सुरक्षित सामाजिक ढांचे से जोड़ा है। इस व्यवस्था से सेवा के स्तर में सुधार होगा और कर्मियों में अपने दायित्व के प्रति आत्मसम्मान का भाव मजबूत होगा।

    इंटर पास कर्मियों के लिए श्रेणी तीन में मिली सुरक्षा
    तीसरी श्रेणी में उन कर्मचारियों को रखा गया है जो इंटरमीडिएट उत्तीर्ण हैं और कार्यालयों के संचालन में रीढ़ की तरह काम करते हैं। इसमें डाटा एंट्री ऑपरेटर, कंप्यूटर टाइपिस्ट, स्टोरकीपर, इलेक्ट्रीशियन, पैरामेडिकल स्टाफ, ड्राइवर, मैकेनिक और लैब असिस्टेंट शामिल हैं। इनका मानदेय न्यूनतम 22 हजार रुपये तय किया गया है। जूनियर हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी कर सरकारी तंत्र में काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या सबसे अधिक है। पूर्व में सबसे अधिक वेतन कटौती और देरी की मार इसी वर्ग पर पड़ती थी। अब इन्हें तय समय पर सम्मानजनक पारिश्रमिक की पक्की गारंटी दे दी गई है।

    बुनियादी कर्मियों को श्रेणी चार में मिला बड़ा सहारा
    चौथी श्रेणी में कक्षा आठ और दस पास अत्यंत परिश्रमी कर्मियों को शामिल किया गया है। इनमें सफाई कर्मी, स्वीपर, सुरक्षा चौकीदार, माली, रसोइया, वार्ड ब्वॉय और अनुसेवक जैसे आवश्यक पद आते हैं। इन पदों के लिए न्यूनतम 20 हजार रुपये का मानदेय तय किया गया है। ये वे हाथ हैं जिनके बिना अस्पताल, कार्यालय और नगर निकाय एक दिन भी नहीं चल सकते। पिछली व्यवस्था में सबसे कम मानदेय और सबसे अधिक शोषण इन्हीं बुनियादी कर्मियों का होता था। योगी सरकार ने इन्हें न्यूनतम वेतन, ईपीएफ, स्वास्थ्य बीमा और कानूनी संरक्षण देकर सबसे बड़ा सामाजिक संबल प्रदान किया है।

    परिवारों के लिए कल्याण और शिक्षा का संबल बनेगी सरकार
    यह नई नीति सिर्फ कर्मचारी तक सीमित नहीं है बल्कि उसके पूरे परिवार की खुशहाली का ध्यान रखती है। सेवा के दौरान किसी कर्मचारी की असामयिक मृत्यु होने पर तत्काल राहत के रूप में अंतिम संस्कार के लिए पंद्रह हजार रुपये दिए जाएंगे। श्रेणी चार के गरीब कर्मचारियों के होनहार बच्चों के लिए विशेष कल्याण कोष बनाया गया है। यदि किसी चतुर्थ श्रेणी कर्मी का बेटा या बेटी आईआईटी, आईआईएम, एमटेक, मेडिकल या संघ अथवा राज्य लोक सेवा की मुख्य परीक्षा में चयनित होता है, तो उसे एक लाख रुपये की विशेष प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। एक परिवार में एक बच्चे को यह सहायता मिलेगी ताकि आर्थिक तंगी किसी होनहार के सपनों के आड़े न आए।

    इलाज, मातृत्व सुख और बुढ़ापे में पेंशन की सुविधा
    सामाजिक सुरक्षा के मोर्चे पर निगम ने सभी कर्मियों के लिए ईएसआई और ईपीएफ का लाभ अनिवार्य कर दिया है। ईएसआई के दायरे में आने से महिला कर्मचारियों को पूर्ण सवेतन मातृत्व अवकाश मिलेगा। बीमारी की स्थिति में अवकाश और इलाज की पूरी सुविधा दी जाएगी। कर्मचारी और उसके परिजनों को ईएसआई अस्पतालों और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में मुफ्त ओपीडी, जांच, दवाएं और गंभीर सर्जरी की सुविधा मिलेगी। ईपीएफ के जरिए साठ वर्ष की आयु पूरी होने पर सेवाकाल के आधार पर साढ़े सात हजार रुपये तक की मासिक पेंशन सुनिश्चित की गई है। कर्मी की मृत्यु की दशा में आश्रित पत्नी को आजीवन पेंशन मिलेगी और अविवाहित कर्मी के माता-पिता को भी पेंशन की सुविधा दी जाएगी। बैंक सैलरी खाते से दुर्घटना बीमा के रूप में बिना कोई प्रीमियम दिए 40 लाख रुपये तक का सुरक्षा कवर भी जोड़ा गया है।

    संवैधानिक आरक्षण और उच्च स्तरीय निगरानी की व्यवस्था
    योगी सरकार ने इस पूरी व्यवस्था को सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के अनुकूल तैयार किया है। भविष्य में आउटसोर्सिंग के जरिए होने वाली सभी भर्तियों में एससी, एसटी, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस, दिव्यांगजन और महिलाओं को पूरा संवैधानिक आरक्षण दिया जाएगा। कर्मियों की कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए समय-समय पर विशेष कौशल प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। निगम के संचालन और पारदर्शिता की निगरानी के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बोर्ड बनाया गया है। इसमें वित्त, कार्मिक, न्याय और श्रम विभाग के प्रमुख अधिकारी शामिल हैं। हर जिले और मंडल में शिकायतों की जांच के लिए अलग समितियां होंगी। योगी सरकार के इस क्रांतिकारी कदम से अब शोषण का पुराना तंत्र खत्म हो गया है और लाखों आउटसोर्स कर्मियों को उनके श्रम का पूरा सम्मान और अधिकार मिलना तय हुआ है।

  • CM Yogi का युवाओं पर फोकस, जन्माष्टमी से पहले 5 बड़े तोहफों से खुले तरक्की के नए रास्ते

    CM Yogi का युवाओं पर फोकस, जन्माष्टमी से पहले 5 बड़े तोहफों से खुले तरक्की के नए रास्ते

    जन्माष्टमी से पहले योगी ने युवाओं को दिए पांच बड़े उपहार

    आठ दिन में पढ़ाई, तकनीक, नौकरी और रोजगार सुरक्षा से जुड़े पांच बड़े फैसले

    25 लाख टैबलेट खरीदने की मंजूरी, 3.16 लाख छात्रों की शुल्क भरपाई का रास्ता साफ

    मेडिकल इंटर्न का भत्ता 12 से बढ़ाकर 25 हजार, एडीओ पंचायत के 50 प्रतिशत पदों पर सीधी भर्ती

    पांचवें उपहार में साढ़े तीन लाख आउटसोर्स कर्मियों को 20 से 40 हजार मानदेय के साथ सामाजिक सुरक्षा

    लखनऊ
     जन्माष्टमी से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के युवाओं के लिए सौगातों का पिटारा खोल दिया है। महज आठ दिन के भीतर सरकार ने पांच बड़े फैसले किए हैं, जिनका सीधा संबंध युवाओं की पढ़ाई, तकनीक, सरकारी नौकरी, मानदेय और रोजगार की सुरक्षा से है। 25 लाख टैबलेट की खरीद से लेकर तीन लाख से अधिक छात्रों की अटकी शुल्क भरपाई, मेडिकल इंटर्न का भत्ता दोगुने से अधिक करने और एडीओ पंचायत के आधे पद सीधी भर्ती के लिए खोलने के बाद बुधवार को पांचवां बड़ा फैसला आउटसोर्स कर्मियों के लिए आया। उत्तर प्रदेश आउटसोर्सिंग सेवा निगम (यूपीकोस) के शुभारंभ के साथ करीब साढ़े तीन लाख कर्मियों के मानदेय, समय पर भुगतान और नौकरी की सुरक्षा का नया ढांचा तैयार कर दिया गया है।

    सरकार का पहला बड़ा फैसला मेडिकल की पढ़ाई पूरी कर इंटर्नशिप कर रहे युवाओं से जुड़ा है। राजकीय मेडिकल कॉलेजों, चिकित्सा संस्थानों और विश्वविद्यालयों में एमबीबीएस व बीडीएस की रोटेटिंग इंटर्नशिप करने वालों का मासिक भत्ता 12 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दिया गया है। वर्ष 2021 में इसे 7,500 से बढ़ाकर 12 हजार रुपये किया गया था। अब इसमें एकमुश्त 13 हजार रुपये की बढ़ोतरी की गई है।

    दूसरा उपहार तकनीक से जुड़ा है। स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तीकरण योजना के तहत 25 लाख टैबलेट खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। स्नातक, स्नातकोत्तर, डिप्लोमा और कौशल विकास समेत विभिन्न पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत पात्र युवाओं को ये टैबलेट निशुल्क दिए जाएंगे। इसके लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में 2,374.60 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।

    तीसरा फैसला उन 3,16,057 विद्यार्थियों के लिए राहत लेकर आया है, जो वर्ष 2025-26 में तकनीकी और प्रक्रियागत कारणों से छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति नहीं पा सके थे। सरकार इनके लिए पोर्टल दोबारा खोलेगी। इन विद्यार्थियों के भुगतान पर 551.85 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

    चौथे फैसले से सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए नया रास्ता खुला है। सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) के पद अभी तक शत-प्रतिशत प्रोन्नति से भरे जाते थे। सरकार ने व्यवस्था बदलकर 50 प्रतिशत पद सीधी भर्ती से भरने का निर्णय लिया है। यानी अब युवाओं को सीधे एडीओ पंचायत बनने का अवसर मिलेगा।

    इन चार फैसलों के बाद बुधवार को मुख्यमंत्री ने पांचवां और बड़े दायरे वाला उपहार आउटसोर्स कर्मियों को दिया। यूपीकोस के शुभारंभ के साथ आउटसोर्सिंग के पदों को चार श्रेणियों में बांटकर न्यूनतम 20 हजार, 22 हजार, 25 हजार और 40 हजार रुपये मानदेय तय किया गया है। हर महीने की पांच तारीख तक पूरा वेतन सीधे बैंक खाते में पहुंचेगा। एजेंसी बदलने पर कार्यरत कर्मचारी नहीं बदले जाएंगे और मनमाने ढंग से छंटनी भी नहीं की जा सकेगी।

    इतना ही नहीं, आउटसोर्स कर्मियों को ईपीएफ और ईएसआई के दायरे में लाकर सामाजिक सुरक्षा भी सुनिश्चित की गई है। महिला कर्मियों को सवेतन मातृत्व अवकाश और परिवार को इलाज की सुविधा मिलेगी। बैंक सैलरी खाते के जरिए दुर्घटना में मृत्यु अथवा दिव्यांगता पर 40 लाख रुपये तक का कवर भी मिलेगा।

    इस तरह जन्माष्टमी से पहले आठ दिनों में युवाओं के लिए फैसलों का दायरा पढ़ाई से शुरू होकर रोजगार की सुरक्षा तक पहुंचा है। छात्र को शुल्क भरपाई और टैबलेट, मेडिकल इंटर्न को बढ़ा भत्ता, प्रतियोगी युवा को सरकारी नौकरी का नया अवसर और पांचवें उपहार के रूप में साढ़े तीन लाख आउटसोर्स कर्मियों को बेहतर मानदेय के साथ नौकरी और सामाजिक सुरक्षा की गारंटी मिली है।

  • मुख्यमंत्री ने लॉन्च किया यूपी कॉस पोर्टल, इससे एक जगह मिलेगी सरकारी लाभ सबंधी व अन्य जानकारियां

    मुख्यमंत्री ने लॉन्च किया यूपी कॉस पोर्टल, इससे एक जगह मिलेगी सरकारी लाभ सबंधी व अन्य जानकारियां

    आउटसोर्स कर्मियों को बड़ी सौगात, नियोक्ता नहीं कर पाएंगे शोषण और अन्याय

    उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम बनने से लाखों कार्मिकों को मिलेगी सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा 

    मुख्यमंत्री ने लॉन्च किया यूपी कॉस पोर्टल, इससे एक जगह मिलेगी सरकारी लाभ सबंधी व अन्य जानकारियां 

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आउटसोर्स कर्मियों को वितरित किए चेक 

    लखनऊ
     योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश के लगभग लगभग पांच लाख आउटसोर्स कार्मिकों को बड़ी सौगात दी है। उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम के गठन के बाद अब नियोक्ता द्वारा न आउटसोर्स कर्मियों का शोषण हो पाएगा और न ही उनके साथ अन्याय हो पाएगा। पहली बार सम्मानजनक मानदेय सुनिश्चित हुआ। इसके साथ ही इससे सामाजिक सुरक्षा मिलेगी। पांच साल में रिवीजन होगा। साथ ही नियुक्ति प्रक्रिया में नियोक्ता का मनमानापन भी नहीं चल पाएगा। 

    मुख्यमंत्री ने लॉन्च किया यूपी कॉस पोर्टल 
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी कॉस पोर्टल व वेबसाइट की लॉन्चिंग की। यूपी कॉस पोर्टल से आउटसोर्स निगमकर्मियों को बड़ी सुविधाएं भी मिलेंगी। इसके जरिए ऑनलाइन माध्यम से भर्ती व जॉइनिंग प्रक्रिया की जानकारी मिलेगी। समय पर मानदेय व सरकारी लाभ के साथ ही आउटसोर्स कर्मियों की पूरी जानकारी एक जगह मिलेगी। इससे उपस्थिति की सटीक जानकारी व छुट्टी का प्रबंधन भी सुनिश्चित होगा। यहां शिकायत और समाधान की भी सुविधा होगी। समय पर ईपीएफ अंशदान व ईएसआईसी का लाभ सुनिश्चित होगा। पोर्टल पर विभाग, एजेंसी और आउटसोर्सकर्मियों के लिए एक ही मंच होगा। 

    एमओयू का किया गया हस्तांतरण
    भारतीय स्टेट बैंक के साथ आउटसोर्स कर्मियों को मिलने वाले लाभ व सामाजिक सुरक्षा के लिए एसबीआई के साथ एमओयू का हस्तांतरण भी किया गया। 

    मुख्यमंत्री ने आउटसोर्स कर्मियों को वितरित किये चेक 

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में आउटसोर्स कर्मियों को चेक भी वितरित किये। इस दौरान लघु फिल्म भी प्रदर्शित की गई। सीएम के हाथों इन्हें मिला चेक- 
    रोहित कुमार- फर्राश- सचिवालय प्रशासन विभाग     
    कसिन खान- रात्रि चौकीदार- सचिवालय प्रशासन विभाग
    सरिता-सफाई कर्मी- सचिवालय प्रशासन विभाग
    आशु कुमार- फर्राश- सचिवालय प्रशासन विभाग
    अरविंद कुमार यादव- वाहन चालक- सचिवालय प्रशासन विभाग
    रामकुमार- माली- सचिवालय प्रशासन विभाग
    जितेंद्र प्रसाद- पंप ऑपरेटर नगर निगम लखनऊ 
    राजू कन्नौजिया- पंप ऑपरेटर नगर निगम लखनऊ
    हंसराज सिंह- पंप ऑपरेटर नगर निगम लखनऊ
    दिलीप कुमार- पंप ऑपरेटर नगर निगम लखनऊ
    अंजनी कुमार- पंप ऑपरेटर नगर निगम लखनऊ 
    नरेंद्र तिवारी- पंप ऑपरेटर नगर निगम लखनऊ ।

  • योगी सरकार का बेटियों की शिक्षा पर बड़ा फोकस, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के लिए ₹101.49 करोड़ मंजूर

    योगी सरकार का बेटियों की शिक्षा पर बड़ा फोकस, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के लिए ₹101.49 करोड़ मंजूर

    बेटियों की शिक्षा को मजबूत आधार दे रही योगी सरकार, कस्तूरबा विद्यालयों के कायाकल्प के लिए ₹101.49 करोड़ जारी

    – छह प्रमुख निर्माण कार्यों से छात्राओं के आवास, स्वच्छता और सुरक्षा सुविधाओं का होगा विस्तार

    – अतिरिक्त डॉरमेट्री, जर्जर भवन पुनर्निर्माण, टॉयलेट ब्लॉक, गार्ड रूम, सेप्टिक टैंक और बाउंड्री वॉल के होंगे निर्माण

    – उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद को कार्यदायी संस्था की जिम्मेदारी, जिला स्तर पर समन्वय के निर्देश

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने बेटियों की शिक्षा को मजबूत आधार देने की दिशा में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के आधारभूत ढांचे को नई ताकत देने का बड़ा कदम उठाया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में ₹101.49 करोड़ की धनराशि जारी कर इन विद्यालयों में आवासीय क्षमता, स्वच्छता और सुरक्षा से जुड़ी सुविधाओं के विस्तार का रास्ता साफ किया गया है। अतिरिक्त डॉरमेट्री से लेकर जर्जर भवनों के पुनर्निर्माण, टॉयलेट ब्लॉक, गार्ड रूम, सेप्टिक टैंक और बाउंड्री वॉल तक के छह प्रमुख निर्माण कार्यों के जरिए इन विद्यालयों को अधिक सुरक्षित, स्वच्छ और सुविधायुक्त आवासीय शिक्षा केंद्रों के रूप में विकसित किया जाएगा। 

    महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी के निर्देशों के क्रम में आगे बढ़ाई गई प्रक्रिया में उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद को कार्यदायी संस्था बनाया गया। स्वीकृत लागत के सापेक्ष निर्धारित धनराशि अवमुक्त कर निर्माण कार्यों को धरातल पर उतारने की प्रक्रिया शुरू की गई है। बेटियों की शिक्षा को बेहतर सुविधाओं की मजबूत जमीन देने की यह पहल कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों को अधिक सुरक्षित और सुविधायुक्त आवासीय शिक्षा केंद्रों के रूप में विकसित करने की दिशा में योगी सरकार के ठोस प्रयास को रेखांकित करती है।

    – छह प्रमुख निर्माण कार्यों से बढ़ेंगी सुविधाएं
    कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में छात्राओं की आवासीय, स्वच्छता और सुरक्षा संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त डॉरमेट्री, जर्जर भवनों का पुनर्निर्माण, टॉयलेट ब्लॉक, गार्ड रूम, सेप्टिक टैंक और बाउंड्री वॉल के निर्माण कार्य कराए जाएंगे। इससे विद्यालय परिसरों में छात्राओं के रहने की क्षमता बढ़ाने के साथ आवश्यक सुविधाओं का विस्तार होगा।
    अतिरिक्त डॉरमेट्री से आवासीय क्षमता को मजबूती मिलेगी। जर्जर भवनों का पुनर्निर्माण सुरक्षित भवन उपलब्ध कराने में सहायक होगा। वहीं टॉयलेट ब्लॉक और सेप्टिक टैंक से स्वच्छता व्यवस्था बेहतर होगी तथा गार्ड रूम और बाउंड्री वॉल से परिसर की सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।

    जिलों में समन्वय से आगे बढ़ेगा क्रियान्वयन
    राज्य स्तर से स्वीकृत निर्माण कार्यों को जिला स्तर पर तेजी से शुरू कराने के लिए संबंधित जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को कार्यदायी संस्था से समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे विद्यालयवार कार्यों की प्रगति को गति देने और निर्माण संबंधी प्रक्रियाओं को समय से पूरा कराने में मदद मिलेगी।

    कोट:
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार बेटियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ सुरक्षित और सुविधायुक्त विद्यालयी वातावरण उपलब्ध कराने के लिए निरंतर काम कर रही है। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार इसी संकल्प की महत्वपूर्ण कड़ी है। इन निर्माण कार्यों से छात्राओं को बेहतर शैक्षिक वातावरण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
    – संदीप सिंह, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), बेसिक शिक्षा, उत्तर प्रदेश

  • डिप्टी सीएम नेकहा- महिलाओं-नवजातों को समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकार प्रतिबद्ध

    डिप्टी सीएम नेकहा- महिलाओं-नवजातों को समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकार प्रतिबद्ध

    मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को और सुदृढ़ करेगा सुमन रोडमैप-2030: ब्रजेश पाठक

    डिप्टी सीएम ने सुरक्षित मातृत्व आश्वासन द्विदिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला को किया संबोधित 

    डिप्टी सीएम नेकहा- महिलाओं-नवजातों को समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकार प्रतिबद्ध

    लखनऊ

    प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। प्रदेश में मातृ एवं नवजात मृत्यु दर को कम करने तथा महिलाओं और नवजात शिशुओं को समय पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत है। 
    लखनऊ में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित ‘सुमन रोडमैप-2030’ के अंतर्गत दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि देश के विभिन्न राज्यों के स्वास्थ्य नेतृत्व का एक साथ आना केवल एक कार्यशाला नहीं, बल्कि माताओं और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की दिशा में साझा संकल्प है। 
    उन्होंने कहा कि कार्यशाला में विभिन्न राज्यों द्वारा मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों, अनुभवों और चुनौतियों को साझा किया जा रहा है। इससे राज्यों को एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने तथा स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने में मदद मिलेगी। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि मातृ एवं नवजात मृत्यु को रोकना केवल स्वास्थ्य सूचकांकों में सुधार का लक्ष्य नहीं है, बल्कि इसके पीछे प्रत्येक मां, नवजात शिशु और परिवार का जीवन जुड़ा हुआ है। सुरक्षित प्रसव के साथ-साथ गर्भावस्था के दौरान उचित देखभाल, प्रसव के बाद नवजात और माताओं की निगरानी तथा समय पर स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश के प्रत्येक जनपद में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार कार्य कर रही है। प्रत्येक स्वास्थ्य इकाई पर विशेषज्ञ चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।

    आशा कार्यकर्ता स्वास्थ्य व्यवस्था की ताकत 
    उपमुख्यमंत्री ने कहा कि आज के समय में तकनीक और आंकड़े स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने के महत्वपूर्ण साधन हैं। स्वास्थ्य संबंधी उपलब्ध आंकड़ों का बेहतर उपयोग करते हुए समय पर सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित करनी होगी। सुमन रोडमैप के माध्यम से गर्भावस्था में जोखिम की पहचान तथा विभिन्न स्तरों पर होने वाली देरी के विश्लेषण जैसे नए उपायों पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।उन्होंने कहा कि तकनीक के साथ-साथ आशा कार्यकर्ता, एएनएम, नर्स, चिकित्सक और अग्रिम पंक्ति के सभी स्वास्थ्यकर्मी स्वास्थ्य व्यवस्था की वास्तविक ताकत हैं। मातृ स्वास्थ्य को केवल स्वास्थ्य विभाग तक सीमित रखकर अपेक्षित लक्ष्य हासिल नहीं किए जा सकते। परिवार नियोजन, पोषण, एनीमिया नियंत्रण, महिला एवं बाल विकास, पंचायतों और समुदाय की भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है। 

    सभी राज्य करें अनुभव साझा
    डिप्टी सीएम ने कहा कि सरकार ऐसी व्यवस्था विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसमें प्रत्येक गर्भवती महिला को अलग-अलग योजनाओं और कार्यक्रमों के बीच भटकना न पड़े, बल्कि उसे एकीकृत एवं निरंतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हों। उन्होंने देश के सभी राज्यों से अपने अनुभव साझा करने और ‘सुमन रोडमैप-2030’ को अपनी-अपनी परिस्थितियों के अनुरूप ठोस कार्रवाई में बदलने का आह्वान किया। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि जब कोई लाभार्थी स्वास्थ्यकर्मी या स्वास्थ्य संस्थान तक पहुंचे तो उसे सही सेवा, समय पर, निःशुल्क और पूरी गरिमा के साथ मिले। यही सुमन की भावना और निरंतर स्वास्थ्य देखभाल का मूल उद्देश्य है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला से प्राप्त सुझावों एवं अनुभवों के आधार पर एक मजबूत, व्यावहारिक एवं परिणामोन्मुख सुमन रोडमैप-2030 तैयार होगा, जो मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    इनकी रही उपस्थिति
    इस अवसर पर अपर सचिव एवं मिशन निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन आराधना पटनायक जी, संयुक्त सचिव, (आरसीएच) मीरा श्रीवास्तव जी, अपर मुख्य सचिव (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग) उत्तर प्रदेश सरकार अमित कुमार घोष जी, सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, उत्तर प्रदेश शासन रितु माहेश्वरी जी, मिशन निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तर प्रदेश सरकार डॉ० पिंकी जोएल जी, आयुक्त एवं सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, ओडिशा सरकार अश्वती एस० जी एवं अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।

  • UPCOS से आउटसोर्स कर्मियों को मजबूत सुरक्षा, नौकरी की निरंतरता और सामाजिक सुरक्षा का भरोसा

    UPCOS से आउटसोर्स कर्मियों को मजबूत सुरक्षा, नौकरी की निरंतरता और सामाजिक सुरक्षा का भरोसा

    नौकरी की सिक्योरिटी, भविष्य की भी चिंता… आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को योगी सरकार का 'सुरक्षा कवच'

    पूरी व्यवस्था को संस्थागत और डिजिटल ढांचे से जोड़ने की दिशा में योगी सरकार का बड़ा कदम 

    वेतन और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियां अब अधिक स्पष्ट और जवाबदेह ढांचे में होंगी

    लखनऊ

    नौकरी सिर्फ हर महीने मिलने वाली तनख्वाह का नाम नहीं होती। नौकरी के साथ कर्मचारी को अपने भविष्य की चिंता होती है, परिवार की जिम्मेदारी होती है और यह भरोसा भी चाहिए होता है कि उसकी मेहनत का रिकॉर्ड सुरक्षित है, उसका वेतन समय पर मिलेगा और जरूरत पड़ने पर उसके अधिकारों की सुनवाई करने वाली कोई व्यवस्था मौजूद है।

    आउटसोर्सिंग व्यवस्था में काम करने वाले कर्मचारियों के सामने लंबे समय से यही सबसे बड़ी चिंता रही है। वेतन, EPF, ESIC और सेवा संबंधी दूसरी सुविधाओं को लेकर भी असमंजस की स्थिति रहती थी। अब योगी आदित्यनाथ सरकार ने इस पूरी व्यवस्था को एक संस्थागत और डिजिटल ढांचे से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम यानी UPCOS का शुभारंभ किया। इसके साथ ही आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती, तैनाती, उपस्थिति, वेतन, सामाजिक सुरक्षा और शिकायत निस्तारण जैसी व्यवस्थाओं को एक व्यवस्थित ढांचे में लाने की शुरुआत हुई है।

    एक कर्मचारी, एक डिजिटल व्यवस्था
    UPCOS के जरिए सरकारी विभाग, आउटसोर्सिंग एजेंसियां और कर्मचारी एक आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक आधारित व्यवस्था से जुड़ेंगे। मैनपावर की जरूरत का आकलन, रिक्तियों का पूर्वानुमान और उसके अनुसार मानव संसाधन की योजना भी बनाई जाएगी।
    भर्ती प्रक्रिया ऑनलाइन, पारदर्शी, योग्यता और मेरिट आधारित होगी तथा राज्य सरकार की आरक्षण नीति का पालन किया जाएगा। SC, ST, OBC, दिव्यांगजन, महिलाओं, EWS, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रितों और पूर्व सैनिकों के लिए नियमों के अनुसार आरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा।

    कर्मचारी अपने सर्विस डिटेल, बैंक अकाउंट, उपस्थिति, भुगतान और अन्य जानकारी एक ही जगह देख सकेगा। वह अपनी शिकायत भी दर्ज कर सकेगा, उसकी स्थिति ट्रैक कर सकेगा और समयबद्ध समाधान की व्यवस्था होगी।

    हर महीने 5 तारीख तक वेतन
    नई व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण पहलू समय पर पारिश्रमिक से जुड़ा है। आउटसोर्स कर्मचारियों को हर महीने 1 से 5 तारीख के बीच पारिश्रमिक उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। भुगतान सीधे कर्मचारी के बैंक खाते में पहुंचाने का प्रावधान है।
    EPF और ESIC से जुड़े कर्मचारियों के खाते खुलवाना और नियमित रूप से अंशदान जमा कराना भी व्यवस्था का हिस्सा होगा। एजेंसियों को इसका प्रमाण भी निगम को निर्धारित समय में देना होगा। यानी कर्मचारी के वेतन और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियों को अब अधिक स्पष्ट और जवाबदेह ढांचे में लाया जा रहा है।

    मनमाने ढंग से नहीं हटाया जा सकेगा कर्मचारी
    आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की सबसे बड़ी चिंताओं में से एक नौकरी की असुरक्षा भी रही है। नई व्यवस्था में कर्मचारी को मनमाने ढंग से हटाने पर रोक लगाई गई है। आउटसोर्सिंग एजेंसी किसी कर्मचारी को अपने स्तर से नहीं हटा सकेगी। अनुशासनहीनता या दंडनीय अपराध जैसी परिस्थितियों में भी संबंधित विभाग या संस्था और निगम की सहमति के बाद ही कार्रवाई की जा सकेगी।

    प्रशिक्षण और मेरिट आधारित चयन
    नई व्यवस्था केवल नौकरी देने तक सीमित नहीं है। कर्मचारियों की कार्यक्षमता और दक्षता बढ़ाने के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण देने की भी व्यवस्था की गई है। सेवायोजन विभाग के पोर्टल के माध्यम से उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा। योग्यता, दक्षता और तय मानकों के आधार पर पारदर्शी चयन प्रक्रिया अपनाई जाएगी। श्रेणी-3 और श्रेणी-4 के पदों के लिए साक्षात्कार नहीं होगा। विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता महिलाओं को चयन प्रक्रिया में वरीयता देने का भी प्रावधान है।

    मातृत्व अवकाश और वैधानिक सेवा लाभ
    नई व्यवस्था में आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए केवल वेतन और नौकरी की बात नहीं की गई है। मातृत्व अवकाश सहित अन्य वैधानिक सेवा लाभों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भी प्रभावी व्यवस्था की गई है। EPF, ESIC और बैंकिंग से जुड़ी अनुमन्य सुविधाओं को भी कर्मचारियों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी तय की गई है।

    ₹40 लाख तक का दुर्घटना बीमा
    UPCOS के साथ सामाजिक सुरक्षा का दायरा भी बढ़ाया गया है। भारतीय स्टेट बैंक के साथ हुए एमओयू के माध्यम से आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए व्यापक सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। निर्धारित वेतन श्रेणियों के अनुसार कर्मचारी को लगभग ₹40 लाख तक का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा मिलेगा। स्थायी आंशिक दिव्यांगता की स्थिति में भी निर्धारित बीमा सुरक्षा उपलब्ध होगी।
    इसके अलावा जलने की स्थिति में प्लास्टिक सर्जरी के लिए ₹10 लाख तक, आकस्मिक दवाओं के लिए ₹5 लाख तक और आपात स्थिति में एयर एंबुलेंस के लिए ₹10 लाख तक की सुविधा शामिल है।

    कर्मचारी के बाद परिवार की भी चिंता
    इस व्यवस्था की सबसे अलग बात यह है कि सामाजिक सुरक्षा का दायरा कर्मचारी तक ही सीमित नहीं रखा गया है। किसी बड़ी अनहोनी की स्थिति में उसके परिवार के लिए भी आर्थिक सहायता की व्यवस्था की गई है। कर्मचारी के पुत्र की शिक्षा के लिए ₹8 लाख तक और पुत्री की शिक्षा के लिए ₹10 लाख तक सहायता का प्रावधान है। दो पुत्रियों के विवाह के लिए ₹8 से ₹10 लाख तक की सहायता और कर्मचारी के अंतिम संस्कार के लिए ₹50 हजार तक की व्यवस्था की गई है।
    कर्मचारी और उसके परिवार के लिए जीरो बैलेंस बैंक खाते की सुविधा भी उपलब्ध होगी। वेतन खाते के माध्यम से परिवार के अधिकतम चार सदस्यों को विशेष योजनाओं का लाभ देने की व्यवस्था भी की गई है।

    बिचौलियों की जगह जवाबदेह व्यवस्था

    UPCOS का बड़ा उद्देश्य आउटसोर्सिंग व्यवस्था में कर्मचारी, एजेंसी और विभाग के बीच जिम्मेदारियों को स्पष्ट करना भी है। एजेंसियों का चयन और इंपैनलमेंट तय प्रक्रिया के तहत किया जाएगा। विभाग, निगम और एजेंसी के बीच त्रिपक्षीय व्यवस्था के माध्यम से जवाबदेही तय होगी। भर्ती से लेकर पोस्टिंग, उपस्थिति, वेतन, ग्रेच्युटी, बीमा और दूसरी सेवा सुविधाओं का डिजिटल प्रबंधन और निगरानी की जाएगी। इसका सीधा अर्थ है कि कर्मचारी को अपनी सेवा से जुड़ी जानकारी के लिए अलग-अलग दफ्तरों और लोगों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। 

    3.5 लाख कर्मचारियों को सीधा फायदा

    योगी सरकार के इस फैसले के बाद प्रदेश के विभिन्न विभागों में कार्यरत करीब 3.50 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों को सीधा फायदा होगा। अब इन कर्मचारियों को समय पर वेतन के साथ ही सुरक्षा की गारंटी और भविष्य की सिक्योरिटी भी मिलेगी।

  • बसों व बस स्टेशनों पर संदिग्ध व्यक्तियों और वस्तुओं की अधिकारी करें प्रभावी निगरानी: प्रबंध निदेशक

    बसों व बस स्टेशनों पर संदिग्ध व्यक्तियों और वस्तुओं की अधिकारी करें प्रभावी निगरानी: प्रबंध निदेशक

    श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर श्रद्धालुओं की राह होगी सुगम और सुरक्षित, योगी सरकार ने बनाई मजबूत व्यवस्था

    मथुरा-वृंदावन व अन्य तीर्थों को जाने वाली बसों और बस स्टेशनों पर परिवहन व्यवस्था सुदृढ़ की जाए: परिवहन मंत्री

    बसों व बस स्टेशनों पर संदिग्ध व्यक्तियों और वस्तुओं की अधिकारी करें प्रभावी निगरानी: प्रबंध निदेशक

    लखनऊ
     श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन समेत प्रमुख धार्मिक स्थलों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के उमड़ने की संभावना है। इसे देखते हुए योगी सरकार ने परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसी क्रम में परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने 4 सितंबर को मनाए जाने वाले श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व के मद्देनजर बसों और बस स्टेशनों पर सुदृढ़ परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

    जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा, लीला स्थली वृंदावन और प्रमुख धार्मिक स्थल गोवर्धन में देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचेंगे है। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जन्माष्टमी के अवसर पर मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन आदि प्रमुख धार्मिक स्थलों में कानून-व्यवस्था, सुरक्षा और परिवहन व्यवस्था की दृष्टि से आवश्यक सतर्कता बरती जाए। बसों के संचालन के साथ-साथ बस स्टेशनों पर भी विशेष निगरानी रखी जाए।

    यात्री की सुरक्षा को लेकर रहें सतर्क
    परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक प्रभु एन सिंह ने सभी क्षेत्रीय और सहायक क्षेत्रीय प्रबंधकों को सर्तक रहने के लिए कहा है। अधिकारियों से कहा गया है कि अपने-अपने क्षेत्रों के बस स्टेशनों, प्रमुख बस अड्डों और धार्मिक स्थलों को जाने वाले मार्गों पर संचालित बसों में विशेष सतर्कता बरतें।

    साथ ही बसों एवं बस स्टेशनों पर संदिग्ध व्यक्तियों व वस्तुओं की प्रभावी निगरानी, चेकिंग करने के लिए कहा गया है। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल स्थानीय पुलिस व प्रशासन देने के लिए कहा।

  • Ram Mandir को मिला पहला CEO, एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा संभालेंगे कमान; करगिल और ऑपरेशन सिंदूर का है अनुभव

    Ram Mandir को मिला पहला CEO, एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा संभालेंगे कमान; करगिल और ऑपरेशन सिंदूर का है अनुभव

    अयोध्या

    राम मंदिर ट्रस्ट के नए CEO का ऐलान हो गया है. भारतीय वायुसेना के रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को यह जिम्मेदारी मिली है. एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वेस्टर्न कमांड की कमान संभाली थी। 

    कौन हैं एयर मार्शल जितेंद्र शर्मा?
    एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायु सेना के एक रिटायर्ड अधिकारी हैं, उन्होंने वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के तौर पर काम किया. इससे पहले, उन्होंने इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (ऑपरेशन्स) के डिप्टी चीफ के तौर पर काम किया था. वे इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ में डॉक्ट्रिन, ऑर्गनाइज़ेशन और ट्रेनिंग के डिप्टी चीफ भी रह चुके हैं। 

    मिश्रा नेशनल डिफेंस एकेडमी, खड़कवासला और एयर फोर्स एकेडमी, डुंडीगल के पूर्व छात्र हैं. वे एयर फोर्स टेस्ट पायलट्स स्कूल, एयर कमांड एंड स्टाफ कॉलेज, मोंटगोमरी, अलबामा और रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज के भी पूर्व छात्र हैं। 

    मिश्रा को 6 दिसंबर 1986 को एयर फोर्स एकेडमी से भारतीय वायु सेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन मिला था. 38 साल से ज्यादा के करियर में, उन्हें 3000 घंटे से ज्यादा का फ्लाइट एक्सपीरियंस है. उन्होंने 18 से ज्यादा तरह के फाइटर, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर उड़ाए हैं। 

    स्क्वाड्रन लीडर के तौर पर, वे उस टीम का हिस्सा थे जिसने कारगिल युद्ध की शुरुआत में मिराज 2000 एयरक्राफ्ट पर लेजर-गाइडेड बमों को ऑपरेशनल बनाया था. इन बमों का इस्तेमाल बाद में ऑपरेशन सफेद सागर के दौरान टाइगर हिल और मुंथो ढालो पर हुए मशहूर हमलों में किया गया था। 

    ट्रस्ट में 3 नए सदस्यों को शामिल किया गया है. इनमें अयोध्या से मदन मोहन पांडेय, दिल्ली से महेश भागचन्दका और शिकोहाबाद से निर्मला यादव का नाम शामिल है। 

    चंपत राय, अनिल मिश्रा के इस्तीफे और विमलेंद्र मोहन के निधन के बाद ट्रस्ट के तीन पद खाली थे. जिसके बाद तीन लोगों को ट्रस्टी बनाया गया है. ट्रस्टी बने महेश भागचंदका अशोक सिंघल के रिश्तेदार हैं. वहीं, मदन मोहन पांडेय हाईकोर्ट में मंदिर पक्ष के वकील थे. तीनों ही राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में ऑनलाइन जुड़े। 

    राम मंदिर के नए CEO को जानें

    वायुसेना से रिटायर्ड एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा राम मंदिर ट्रस्ट के नए CEO होंगे. बुधवार को ट्रस्ट की बैठक में उन्हें CEO चुना गया. रिटायर्ड एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा हाल ही में वायुसेना से रिटायर्ड हुए हैं. पाकिस्तान के खिलाफ 'ऑपरेशन सफेद सागर' और 'ऑपरेशन सिंदूर' में उनकी अहम भूमिका रही है। 

    1999 में कारगिल युद्ध के समय 'ऑपरेशन सफेद सागर' के दौरान उन्होंने मिराज 2000 से पाकिस्तानी सेना पर बमबारी की थी. वहीं, पिछले साल पहलगाम अटैक के बाद हुए 'ऑपरेशन सिंदूर' की कमान इन्हीं के हाथों में थी। 

    'ऑपरेशन सिंदूर' में उनकी अहम भूमिका के लिए उन्हें पिछले साल स्वतंत्रता दिवस पर सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित किया गया था. इससे पहले 2024 में उन्हें अति विशिष्ट सेवा मेडल और 2013 में विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया था। 

    'ऑपरेशन सफेद सागर' में अहम भूमिका
    जीतेंद्र मिश्रा 6 दिसंबर 1986 को एयर फोर्स एकेडमी से वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में शामिल किया गया था. लगभग 40 साल के करियर में उन्होंने 3 हजार घंटे से ज्यादा उड़ान भरने का अनुभव है. उन्होंने 18 से ज्यादा तरह के लड़ाकू विमान, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर उड़ाए हैं। 

    स्क्वाड्रन लीडर के तौर पर, वह उस टीम का हिस्सा थे जिसने कारगिल युद्ध की शुरुआत में मिराज 2000 एयरक्राफ्ट पर लेजर-गाइडेड बमों को ऑपरेशनल बनाया था. इन बमों का इस्तेमाल बाद में 'ऑपरेशन सफ़ेद सागर' के दौरान टाइगर हिल और मुंथो ढालो पर हुए हमलों में किया गया था। 

    सीईओ के पास होंगी ये जिम्मेदारियां
    राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने बताया कि पेशेवर प्रशासन और पारदर्शिता के लिए एक सीईओ बेहद जरूरी है. नए नियमों के तहत सीईओ के अधिकार और शक्तियां तय की जाएंगी. सीईओ ट्रस्ट के महामंत्री को रिपोर्ट करेंगे और उनके पास सभी प्रशासनिक, वित्तीय और वैधानिक अधिकार होंगे। 

    5500 से ज्यादा आवेदन आए
    राम मंदिर के पहले CEO पद के लिए कुल 5585 आवेदन आए. ट्रस्ट ने इनमें से तीन उम्मीदवार चुने उसमें से जितेंद्र मिश्रा को यह जिम्मेदारी मिली है. इसके लिए बुधवार को ट्रस्ट की बैठक हुई. बैठक में ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास, स्वामी कमलनयन दास, अंतरिम महासचिव डॉ. कृष्ण मोहन, ट्रस्टी महंत दीनेंद्र दास और कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि सहित अन्य लोग मौजूद रहे। 

    कैसे चुना गया नया CEO
    सीईओ के चयन की प्रक्रिया में AI आधारित स्क्रीनिंग के साथ मैनुअल मूल्यांकन का इस्तेमाल किया गया. आवेदनों की जांच के लिए 600 अंकों का मूल्यांकन ढांचा तैयार किया गया था. प्रारंभिक मूल्यांकन में 3,577 उम्मीदवार शामिल हुए, जिनमें से 470 या उससे अधिक अंक पाने वाले उम्मीदवारों को चयनित किया गया. इसके बाद 11 और 12 अगस्त को अयोध्या में 108 आवेदकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बातचीत की गई और अंतिम रूप से 16 उम्मीदवारों का इंटरव्यू किया गया। 

    राम मंदिर CEO का ऐलान ऐसे समय में हुआ है, जब मंदिर को मिले चंदा में कथित चोरी का विवाद चल रहा है. इस मामले में आठ लोगों की गिरफ्तारी हुई है और ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी अनिल मिश्रा और एक अन्य पदाधिकारी ने इस्तीफा दे दिया है। 

     

  • अकेला नहीं है आउटसोर्स कर्मी, उसकी समस्या को सुनने व सुलझाने का तंत्र विकसित किया सरकार ने: मुख्यमंत्री

    अकेला नहीं है आउटसोर्स कर्मी, उसकी समस्या को सुनने व सुलझाने का तंत्र विकसित किया सरकार ने: मुख्यमंत्री

    मुख्यमंत्री ने दिया आउटसोर्स सेवाकर्मियों को बड़ा उपहार

    उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम का शुभारंभ किया सीएम योगी ने, यूपीकॉस पोर्टल व वेबसाइट की लॉन्चिंग और लोगो का अनावरण भी 

    सीएम ने आउटसोर्स कर्मियों को वितरित किए बढ़ाए गए पारिश्रमिक के चेक, पांच तारीख तक सीधे अकाउंट में जाएगा पारिश्रमिक

    घटना-दुर्घटना, आपदा का शिकार होने पर निर्धारित श्रेणी के अनुसार परिवार को मिलेगा 20 से 40 लाख तक दुर्घटना बीमा कवर 

    3.5 लाख से अधिक आउटसोर्स कर्मियों को ही नहीं, पारिवारिक सदस्यों समेत 17-20 लाख लोगों को मिलेगा निगम का लाभ: सीएम योगी

    ईपीएफ व ईएसआई का अंशदान भी जमा होगा, सरकार आउटसोर्स एजेंसी को देगी सर्विस चार्ज, कर्मचारी से नहीं होगी कटौती

    आउटसोर्स कर्मी को सीधे निकाल नहीं सकेगी कंपनी, पहले सरकार को बताना होगा, जांच के बाद होगा निर्णय

    ‘सैफई-रामपुर सिंडिकेट’ के बाद अब एजेंसियों के माध्यम से होने वाले आउटसोर्स कर्मियों के शोषण पर होगा प्रहार 

    किसी व्यक्ति की कृपा पर नहीं, बल्कि श्रेणी व शैक्षणिक योग्यता के अनुरूप सुनिश्चित होगा पारिश्रमिक

    अकेला नहीं है आउटसोर्स कर्मी, उसकी समस्या को सुनने व सुलझाने का तंत्र विकसित किया सरकार ने: मुख्यमंत्री

    लखनऊ,
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के आउटसोर्स कर्मियों को बुधवार को बड़ा उपहार दिया। इन कर्मियों से जुड़ी सभी समस्याओं को सुनने व सुलझाने के लिए सीएम ने उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम का शुभारंभ करने के साथ ही यूपीकॉस के पोर्टल व वेबसाइट की लॉन्चिंग और इसके लोगो का अनावरण भी किया। इस अवसर पर उन्होंने आउटसोर्स कर्मियों को बढ़ाए गए पारिश्रमिक के चेक सौंपे तथा 40 लाख रुपये तक का दुर्घटना बीमा कवर भी प्रदान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि निगम बनने से 3.5 लाख से अधिक आउटसोर्स कर्मियों को ही नहीं, बल्कि उनके पारिवारिक सदस्यों समेत 17-20 लाख व्यक्तियों को इसका लाभ मिलेगा। 

    आउटसोर्स कर्मचारियों की गरिमा स्थापित करने का प्रयास  
    मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में यूपी की साढ़े 9 वर्ष में विकास यात्रा का श्रेय नगर निकाय कर्मियों, पंप ऑपरेटरों, सचिवालयों, चिकित्सालयों व शासन व्यवस्था से जुड़े स्थायी, संविदा व आउटसोर्स कर्मियों को दिया। उन्होंने कहा कि यह शासन की जिम्मेदारी है कि हर व्यक्ति को गरिमा के अनुरूप सम्मान प्राप्त हो। उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम के जरिए हमारी सरकार का प्रयास इसी गरिमा व गौरव को स्थापित करना है।

    सरकार ने समझी पीड़ा, दूर की चिंता
    मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले की व्यवस्था तीन खेमों में बंटी थी। एक तरफ कार्मिक, दूसरी तरफ एजेंसी और तीसरी तरफ सरकारी विभाग होता था। कर्मचारी समस्या लेकर अलग-अलग दरवाजों पर जाता था, लेकिन सुनवाई नहीं होती थी। वेतन की चिंता, सामाजिक व सेवा संबंधी सुरक्षा की गारंटी भी नहीं थी। तब इन कर्मियों का प्रश्न होता था कि आखिर मेरी पीड़ा कौन सुनेगा, मेरे परिवार की चिंता कौन करेगा। हमारा मानना है कि सरकार व कर्मचारी का रिश्ता केवल वेतन और कार्य का नहीं हो सकता, वह विश्वास और जिम्मेदारी का होता है। कर्मचारी का जीवन कागजों व कार्यालयों के चक्कर में न बीते। उसे महसूस होना चाहिए कि उसके बेहतर काम का रिकॉर्ड और अधिकारों को सुरक्षित रखा जा रहा है। वह अकेला नहीं, उसकी समस्या को सुनने का भी तंत्र है। समय से वेतन, भविष्य निधि, बीमा अधिकार, मेहनत के अनुरूप मानदेय हर कार्मिक का अधिकार है और सरकार ने यही सुनिश्चित किया है।

    सामाजिक के साथ आर्थिक भेदभाव भी नहीं होना चाहिए
    सीएम ने कहा कि जब कर्मचारियों से मानदेय पूछते थे तो कोई 8 हजार, कोई  11 हजार बताता था। जो 9 हजार बताते थे, उन्हें भी 6 हजार ही मिलता था। हमारा मानना है कि सामाजिक भेदभाव दूर करने के लिए आर्थिक भेदभाव भी दूर किया जाना चाहिए। व्यक्ति को मेहनत का उचित मानदेय मिलना ही श्रम का सम्मान है। उसे सामाजिक सुरक्षा की गारंटी, बल्कि घटना-दुर्घटना पर बीमा कवर भी मिलना चाहिए। हमारी सरकार ने संवेदनशीलता को सुशासन की पहली शर्त मानते हुए आउटसोर्स सेवा निगम का गठन किया। इसके माध्यम से हर कार्मिक को संस्थागत सुरक्षित भविष्य प्राप्त होगा। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद अधिकार किसी व्यक्ति की कृपा पर नहीं, बल्कि मेहनत से प्राप्त होगा। व्यवस्था में बिचौलियों की जगह नहीं होगी। पोर्टल पर सारी जानकारी उपलब्ध होगी। अब कर्मचारी अकेला नहीं है, निगम उसके साथ होगा। 

    20 लाख लोगों को मिल सकेगा सुरक्षा कवर 
    मुख्यमंत्री ने कहा कि जब किसी को समय पर अधिकार मिलता है तो उसका लाभ केवल एक व्यक्ति को नहीं मिलता। बच्चे की पढ़ाई, मां की दवाई, बेटी का भविष्य सुनिश्चित होता है। परिवार को भरोसा मिलता है कि मेहनत बेकार न जाएगी। सरकार निगम के माध्यम से 20 लाख लोगों को सुरक्षा कवर प्रदान करना चाहती है। अब सरकारी विभाग, आउटसोर्स एजेंसी व कर्मचारी आधुनिक, पारदर्शी, तकनीक आधारित व्यवस्था से जुड़ जाएंगे। मैनपावर की आवश्यकता का आकलन, रिक्तियों का पूर्वानुमान व मानव संसाधन की योजना बनाई जा सकेगी। 

    श्रेणी व शैक्षणिक योग्यता के अनुरूप होगा पारिश्रमिक 
    सीएम ने कहा कि राज्य सरकार की आरक्षण नीतियों के अनुरूप योग्यता व मेरिट के आधार पर भर्ती प्रक्रिया ऑनलाइन व पारदर्शी होगी। भर्ती, पोस्टिंग, उपस्थिति, मानदेय, ग्रेच्युटी, बीमा व सेवा लाभ की डिजिटल मॉनिटरिंग भी होगी। कर्मचारी अब सेवा विवरण, अकाउंट, उपस्थिति, भुगतान व कटौती आदि एक ही जगह देख सकेगा। यहीं शिकायत दर्ज कराकर समय से निराकरण भी पा सकेगा। श्रेणी व शैक्षणिक योग्यता के अनुरूप प्रत्येक कर्मचारी का पारिश्रमिक भी सुनिश्चित होगा। 

    पांच तारीख तक अकाउंट में जाएगा पारिश्रमिक 
    मुख्यमंत्री ने कहा कि 1 से 5 तारीख तक सीधे बैंक अकाउंट में पारिश्रमिक जाएगा। नियमित रूप से ईपीएफ व ईएसआई का अंशदान भी जमा होगा। सरकार आउटसोर्स एजेंसी को सर्विस चार्ज देगी, वे कर्मचारी के पैसे से कटौती नहीं सकेंगे। कंपनी किसी आउटसोर्स कर्मी को निकाल नहीं सकेगी। वह पहले सरकार को बताएगी, जिसकी जांच होगी। कंपनी की रिपोर्ट गलत हुई तो कर्मचारी का उत्पीड़न नहीं हो पाएगा।

    मातृत्व अवकाश सहित सभी वैधानिक सेवा लाभ भी
    मुख्यमंत्री ने कहा कि हम ईएसआई अंशदान का पैसा ईएसआई अस्पतालों में निशुल्क उपचार के लिए देंगे, यदि वहां किसी उपचार की सुविधा नहीं मिली तो आयुष्मान भारत से इसे जोड़ेंगे। इससे आउटसोर्स कर्मी व परिवार को पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा कवर भी मिलेगा। मातृत्व अवकाश सहित सभी वैधानिक सेवा लाभ भी सुनिश्चित किए जाएंगे। 

    20 से 40 लाख तक दुर्घटना बीमा कवर 
    सीएम ने आउटसोर्स सेवा निगम के साथ एसबीआई के एमओयू का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि मानदेय सीधे बैंक में जाएगा और घटना-दुर्घटना, आपदा का शिकार होने पर निर्धारित श्रेणी के अनुसार 20 से 40 लाख तक का दुर्घटना बीमा कवर परिवार को मिलेगा। अग्निकांड का शिकार होने पर 10 लाख, आकस्मिक दवा के लिए पांच लाख, आपात स्थिति में एयर एंबुलेंस की सुविधा के लिए 10 लाख, बेटे की शिक्षा के लिए 8 लाख, बेटी की शिक्षा के लिए 10 लाख रुपये तक मिलेगा। दो पुत्रियों के विवाह के लिए 8-10 लाख तक तथा किसी कर्मचारी की मृत्यु पर बैंक के माध्यम से निगम परिजनों को तत्काल 50 हजार रुपये उपलब्ध कराएगा। जीरो बैलेंस पर बैंक खाता खुलेगा और इसके माध्यम से परिवार के चार सदस्यों को विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। अब आउटसोर्स कर्मचारियों को ऑर्गनाइज्ड, स्किल्ड, सिक्योर व डिग्निफाइड वर्कफोर्स में बदलने वाला निगम प्रारंभ हो रहा है। 

    पहले सत्ताधारी लोगों के रिश्तेदारों की थीं कंपनियां
    सीएम ने आरोप लगाया कि 2017 के पहले की सरकारें आउटसोर्स कर्मचारियों को बोझ मानती थीं। उस समय उन्होंने जो कंपनियां रखी थीं, उसमें अधिकतर सत्ताधारी लोगों के रिश्तेदारों की थीं, जो भर्ती, यूनिफॉर्म व अन्य कार्यों के नाम पर शोषण करती थीं। भाजपा सरकार ने कर्मचारियों को बोझ नहीं, बल्कि मानव संसाधन के रूप में संपत्ति माना है। 

    कभी नहीं बदलेगी मानव श्रम की गरिमा
    सीएम ने कहा कि ऑर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, ऑटोमेशन व नई अर्थव्यवस्था के दौर में कार्य की प्रकृति बदल रही है, लेकिन मानव के श्रम की गरिमा कभी नहीं बदलेगी। टेक्नोलॉजी जितना आगे जाएगी, गवर्नेंस को उतना अधिक मानवीय होना पड़ेगा। साढ़े 9 वर्ष में डबल इंजन सरकार ने भय-अराजकता से मुक्ति दिलाई तो पारदर्शिता के साथ नई कार्य संस्कृति को भी बढ़ाया। व्यवस्था के किनारे खड़े व्यक्ति को मुख्यधारा में लाया गया। यूपी की अर्थव्यवस्था में किसान, नौजवान, महिलाएं, कारीगर, रेहड़ी-पटरी वाले, मेहनतकश नागरिक, सूक्ष्म-लघु-मध्यम उद्यम से जुड़े उद्यमी, स्टार्टअप शुरू करने वाले युवा से लेकर सरकारी कर्मचारी और आउटसोर्स कर्मचारी मजबूत भागीदारी निभा रहे हैं। 

    किसानों को उद्यमिता से जोड़ रही सरकार
    सीएम योगी ने कहा कि सरकार ने किसानों को बाजार तक पहुंच दी। उसे तकनीक, सिंचाई, बीमा और सीधे भुगतान से जोड़ा। हमारी सोच है कि किसान सिर्फ खेती न करे, बल्कि कृषि अर्थव्यवस्था का मजबूत उद्यमी भी बने। 2017 से पहले कारीगरों में निराशा थी। पिछली सरकारों की अकर्मण्यता के कारण पीढ़ियों का धंधा चौपट हो चुका था। हमारी सरकार ने एक जनपद-एक उत्पाद योजना लागू की, उसे तकनीक, बाजार दिया। आज कारीगर उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। 

    अब दौड़ रहा है उत्तर प्रदेश
    सीएम ने कहा कि पहले छोटे उद्यमी विभागों में चक्कर लगाते थे। हमने एमएसएमई के लिए पहले उद्योग लगाने और 1000 दिन में एनओसी की व्यवस्था बनाई। आज 96 लाख एमएसएमई यूनिट में 3.15 करोड़ से अधिक लोग काम कर रहे हैं। हमने सिंगल विंडो सिस्टम बनाया। अब उत्तर प्रदेश दौड़ रहा है। हमने केवल सुरक्षा नहीं दी, बल्कि प्रदेश को आर्थिक रूप से संपन्न बनाने की दिशा में भी कदम बढ़ाए हैं।

    महिला समृद्धि के लिए लगातार काम किए सरकार ने
    सीएम ने कई महिला सदस्यों वाले मिल्क प्रोड्यूसर समूहों का जिक्र करते हुए कहा कि वे झांसी, आगरा, लखनऊ, काशी, गोरखपुर, रायबरेली आदि जनपदों में सफलतापूर्वक काम कर रहे हैं। इससे 4 लाख बहनें जुड़कर आत्मनिर्भरता की कहानी कह रही हैं। राज्य में स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर लगभग 1 करोड़ महिलाएं प्रदेश की प्रगति को गति दे रही हैं। 

    छह महीने में एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी मिलेगी
    मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 के पहले भर्ती निकलती थी तो युवा को पेपर लीक समेत कई चुनौतियों से जूझना पड़ता था। हमने यूपी सरकार के सभी आयोग व बोर्ड में आवश्यक बदलाव किए। सुनिश्चित किया कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने पर जेल और संपत्ति जब्त होगी। अगले छह महीने में एक लाख नए युवाओं को सरकारी नौकरी मिलेगी। यूपी पुलिस में 2.25 लाख भर्ती की गईं। 2017 से पहले यूपी पुलिस में 10 हजार महिला कार्मिक थीं, अब 44 हजार हैं और नई भर्ती के बाद 11-12 हजार और भर्ती हो जाएंगी। यूपी में 50 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव आए। पहले बड़े उद्योग महज 14 हजार थे, अब यह संख्या 35 हजार होने जा रही है। 2017 के पहले 120 स्टार्टअप थे, आज 24 हजार से अधिक हैं।

    ‘सैफई-रामपुर सिंडिकेट’ के बाद अब एजेंसियों के शोषण पर प्रहार 
    सीएम ने कहा कि हम युवाओं को स्किल, इनोवेशन व टेक्नोलॉजी से जोड़कर मार्केट-इंडस्ट्री रेडी वर्कफोर्स के रूप में तैयार कर रहे हैं। एआई, रोबोटिक्स, इंटरनेट ऑफ थिंग्स के साथ थ्री-डी प्रिटिंग की ट्रेनिंग दी जा रही है। यूपी के हर मंडल में एक विश्वविद्यालय है। अब यूनिवर्सिटी बनाने के लिए ‘रामपुर सिडिंकेट’ व अन्य लोगों के लिए अलग-अलग प्रावधान जैसा नहीं है। 2017 के पहले ‘सैफई-रामपुर सिंडिकेट’ व्यवस्था का खून चूसता था। एजेंसियों के माध्यम से शोषण होता था। आउटसोर्स निगम के माध्यम से अब तीसरे सिंडिकेट पर भी प्रहार होगा।

    इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व ब्रजेश पाठक समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।