Category: उत्तर प्रदेश

  • गन्ना किसान संस्थान परिसर में आमजन के लिए 52 रुपये किलो चीनी उपलब्ध

    गन्ना किसान संस्थान परिसर में आमजन के लिए 52 रुपये किलो चीनी उपलब्ध

    लखनऊ

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग आमजन को मात्र 52 रुपये प्रति किलो की दर से चीनी उपलब्ध करा रहा है। उपभोक्ता लाल बहादुर शास्त्री गन्ना किसान संस्थान परिसर में स्थित चीनी निगम/सहकारी चीनी मिल संघ के चीनी विक्रय केन्द्र से उक्त दर पर चीनी खरीद का लाभ उठा सकते हैं। 01 एवं 02 किलो के पैकेट क्रमशः 52 व 102 रू. हैं। 05 किलो, 50 किलो के पैकेट का मूल्य क्रमशः 250 व 2500 रुपये रखा गया है। 

    विभाग के अनुसार, चीनी की यह विशेष बिक्री प्रत्येक कार्यदिवस में नियमित रूप से संचालित होगी। आम नागरिक सुबह 10 से सायं 5 बजे तक गन्ना किसान संस्थान परिसर में चीनी बिक्री केंद्र पर जाकर इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। बिक्री केंद्र पर उपभोक्ताओं की सुविधा और सुगम खरीदारी के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं। उपभोक्ता अपनी दैनिक आवश्यकता के अनुसार चीनी की खरीदारी कर सकते हैं।

    गन्ना विकास विभाग ने राजधानी के नागरिकों से अपील की है कि वे इस जनोपयोगी व्यवस्था का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। विभाग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशन में भविष्य में भी आम जनमानस को इसी प्रकार की व्यावहारिक राहत देने के लिए प्रतिबद्ध है।

  • बाढ़ प्रभावितों तक भोजन, दवा और राहत सामग्री पहुंचाना सरकार की प्रतिबद्धताः सीएम योगी

    बाढ़ प्रभावितों तक भोजन, दवा और राहत सामग्री पहुंचाना सरकार की प्रतिबद्धताः सीएम योगी

    लखनऊ

     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार को फर्रुखाबाद और मथुरा के दौरे थे। दौरे से पहले मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर सेल्फी वीडियो संदेश जारी कर दोनों जनपदों के कार्यक्रमों की जानकारी साझा की। उन्होंने फर्रुखाबाद में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने और प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनका कुशल-क्षेम जानने की बात कही।
    सीएम योगी ने कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में प्रत्येक जरूरतमंद तक भोजन, दवा और अन्य आवश्यक सामग्री समय पर पहुंचाना डबल इंजन की सरकार की प्रतिबद्धता है। संकट की इस घड़ी में डबल इंजन की भारतीय जनता पार्टी की सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ हर प्रभावित परिवार के साथ खड़ी है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा नीम करौरी की पावन धरा फर्रुखाबाद को मेरा सादर नमन। आज मैं जनपद के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करूंगा। वहां प्रभावित परिवारों से मिलकर उनका कुशल क्षेम जानूंगा, उनकी समस्याओं को सुनूंगा और बाढ़ राहत सामग्री को भी वितरित करूंगा। इस दौरान राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा करने का भी अवसर मिलेगा।

    मुख्यमंत्री ने मथुरा दौरे से पहले भी अपना सेल्फी वीडियो संदेश जारी किया। अपने संदेश की शुरुआत 'राधे-राधे' संबोधन से की। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज मैं ब्रज की पावन धरा पर आ रहा हूं। योगेश्वर श्री कृष्ण का जीवन हमें धर्म, सत्य और लोक कल्याण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा प्रदान करता है। मुख्यमंत्री ने सभी प्रदेशवासियों और भक्तों को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

  • हर दिन अलग प्रकार के व्यंजन, भोजन में पौष्टिकता का ध्यान

    हर दिन अलग प्रकार के व्यंजन, भोजन में पौष्टिकता का ध्यान

    लखनऊ

     प्रदेश के आंगनबाड़ी केंद्रों पर आने वाले नौनिहालों की थाली केवल राशन तक सीमित नहीं है। सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण-2.0 की गाइडलाइन के तहत संचालित हॉट कुक्ड मील योजना के जरिए 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों को नियमित रूप से ताजा, गर्म और पौष्टिक पका हुआ भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में करीब 1.45 लाख को-लोकेटेड और 0.44 लाख नॉन-को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों पर आने वाले लगभग 32.88 लाख बच्चे इस व्यवस्था का लाभ ले रहे हैं।

    हर दिन अलग मेन्यू, भोजन में पौष्टिकता का ध्यान

    बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से तय साप्ताहिक मेन्यू के अनुसार, बच्चों को अलग-अलग दिन रोटी-सब्जी, चावल-दाल, मौसमी सब्जियों से तैयार तहरी समेत अन्य पौष्टिक भोजन दिया जाता है। प्रत्येक बच्चे के लिए प्रतिदिन 70 ग्राम खाद्यान्न से भोजन तैयार किया जाता है। गर्म भोजन मिलने से बच्चों के पोषण स्तर में सुधार के साथ कम उम्र से ही संतुलित आहार की आदत विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

    भोजन बनने से पहले सफाई, परोसने से पहले गुणवत्ता जांच

    योगी सरकार में बच्चों को भोजन परोसने से पहले उसकी गुणवत्ता और स्वच्छता सुनिश्चित करने की व्यवस्था की गई है। कोटेदार से मिलने वाला खाद्यान्न उत्तम गुणवत्ता का होना जरूरी है। खाना बनाने से पहले अनाज की अच्छी तरह सफाई और हरी सब्जियों को दो से तीन बार पानी से धोने की व्यवस्था है। भोजन परोसने से पहले रोस्टर के आधार पर कम से कम दो वयस्क जैसे शिक्षक, रसोइया या माता समिति के सदस्य भोजन के स्वाद और गुणवत्ता की जांच करते हैं।

    दो तरह के केंद्रों पर अलग व्यवस्था, लक्ष्य एक

    को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों पर भोजन प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में संचालित पीएम पोषण योजना की रसोई व संसाधनों का उपयोग कर तैयार किया जाता है। वहीं नॉन-को-लोकेटेड केंद्रों पर स्थानीय निकायों या ग्राम पंचायतों की ओर से उपलब्ध कराए गए बर्तनों, गैस चूल्हे आदि की मदद से भोजन तैयार कराया जाता है।

    अपर मुख्य सचिव (महिला कल्याण, बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग) लीना जौहरी ने बताया कि हॉट कुक्ड मील योजना के तहत नियमित रूप से करीब 32.88 लाख बच्चों को गर्म और पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया जा रहा है। व्यवस्था में भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और सुरक्षित तरीके से बच्चों तक भोजन पहुंचाने पर विशेष जोर है।

  • गोसेवा आयोग और ‘पार्टनर्स इन प्रॉसपेरिटी’ के बीच तकनीकी सहयोग का करार

    गोसेवा आयोग और ‘पार्टनर्स इन प्रॉसपेरिटी’ के बीच तकनीकी सहयोग का करार

    लखनऊ

     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में गो-संरक्षण को केवल गोवंश के आश्रय और देखभाल तक सीमित न रखते हुए उसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भरता से जोड़ने की दिशा में लगातार महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। इस क्रम में गोशालाओं में उपलब्ध गोबर को स्वच्छ ऊर्जा, जैविक खाद, प्राकृतिक खेती और आय के संसाधन में बदलने के लिए उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग और ‘पार्टनर्स इन प्रॉसपेरिटी’ (पीएनपी) के बीच तकनीकी सहयोग का एमओयू हुआ है। इसके तहत प्रदेश में स्थापित दीनबंधु मॉडल बायोगैस संयंत्रों को तकनीकी सहयोग देने के साथ भविष्य में स्थापित होने वाले संयंत्रों के लिए भी मजबूत तकनीकी व्यवस्था विकसित की जाएगी। इसके तहत 1,000 तकनीकी विशेषज्ञ कर्मियों का नेटवर्क खड़ा किया जाएगा। इसका लक्ष्य गोबर के वैज्ञानिक व आर्थिक उपयोग के जरिए गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाते हुए उन्हें ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सशक्त केंद्र के रूप में विकसित करना है।

    समझौते की सबसे महत्वपूर्ण बात जमीनी स्तर पर तकनीकी तंत्र तैयार करना है। चरणबद्ध तरीके से करीब 1,000 तकनीकी कर्मियों का नेटवर्क विकसित किया जाएगा। यह नेटवर्क दीनबंधु बायोगैस संयंत्रों की स्थापना के साथ उनके संचालन, रखरखाव, तकनीकी प्रशिक्षण और फील्ड मॉनिटरिंग में सहयोग करेगा। इससे बायोगैस संयंत्र स्थापित करने के बाद उनके नियमित और प्रभावी संचालन के लिए स्थानीय स्तर पर तकनीकी सहायता उपलब्ध हो सकेगी। संस्था उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में 3,900 से अधिक दीनबंधु बायोगैस इकाइयों का निर्माण कर चुकी है। संस्था बायोगैस परियोजना विकास से लेकर तकनीकी डिजाइन, फीडस्टॉक एवं गोबर आकलन, संयंत्र निर्माण, संचालन एवं रखरखाव, लाभार्थियों के प्रशिक्षण और फील्ड मॉनिटरिंग तक पूरा तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराएगी।

    गोबर के एक चक्र से ऊर्जा, खाद, खेती और कार्बन लाभ

    नई पहल की अहमियत केवल गोबर से बायोगैस तैयार करने तक सीमित नहीं है। इसके जरिए बायोगैस, जैव-स्लरी, जैविक खाद/बायो-इनपुट, प्राकृतिक एवं पुनर्योजी कृषि, कार्बन लाभ की पूरी श्रृंखला विकसित करने की योजना है। यानी गोशाला का गोबर पहले ऊर्जा का स्रोत बनेगा और बायोगैस संयंत्र से निकलने वाली जैव-स्लरी को जैविक खाद और बायो-इनपुट के रूप में खेती से जोड़ा जा सकेगा। इससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और प्राकृतिक व पुनर्योजी कृषि को बढ़ावा देने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। इस मॉडल को भविष्य में पर्यावरणीय लाभ और कार्बन परियोजनाओं से जोड़ने की संभावनाओं पर भी काम होगा।

    ‘गोबर अपशिष्ट नहीं, ग्रामीण समृद्धि का संसाधन’

    उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने कहा कि गोबर को केवल अपशिष्ट मानने के बजाय ऊर्जा, जैविक कृषि और ग्रामीण आय के महत्वपूर्ण संसाधन के रूप में देखने की आवश्यकता है। दीनबंधु बायोगैस मॉडल को तकनीकी रूप से सुदृढ़ कर बड़े स्तर पर लागू किया जाना गोशालाओं, किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए बहुआयामी लाभ का आधार बन सकता है। इस पहल का उद्देश्य प्रदेश में उपलब्ध गोबर संसाधन को स्वच्छ ऊर्जा, जैविक उर्वरक और सतत कृषि से जोड़ते हुए ऐसी सर्कुलर इकोनॉमी विकसित करना है, जिसमें गोवंश संरक्षण के साथ रोजगार, ऊर्जा की बचत, कृषि उत्पादकता और पर्यावरणीय लाभ भी हासिल हों। प्रदेश के किसान और ग्रामीण समुदायों के साथ मिलकर इस कार्यक्रम का जमीनी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा। तकनीकी नेटवर्क और स्थानीय अनुभव का मेल गोशालाओं में बायोगैस मॉडल को टिकाऊ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए आर्थिक अवसर

    योगी सरकार के गो-संरक्षण मॉडल में यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि इसमें गोवंश संरक्षण को आर्थिक चक्र से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। गोबर यदि ऊर्जा और जैविक खाद में परिवर्तित होकर खेती में वापस पहुंचता है तो गोशालाओं के संसाधनों के उपयोग के साथ किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए भी आर्थिक अवसर तैयार हो सकते हैं। इस तरह प्रदेश में ‘गोबर से ऊर्जा, ऊर्जा से जैविक कृषि और जैविक कृषि से समृद्ध ग्रामीण अर्थव्यवस्था’ की अवधारणा को जमीन पर उतारने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम साबित होने वाला है।

  • मायावती का आकाश आनंद पर फिर यू-टर्न, बड़ी जिम्मेदारी से किया दूर; जानें क्या है पूरा मामला

    मायावती का आकाश आनंद पर फिर यू-टर्न, बड़ी जिम्मेदारी से किया दूर; जानें क्या है पूरा मामला

    लखनऊ

    बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने एक बार फिर अपने भतीजे आकाश आनंद को फिलहाल पार्टी की किसी बड़ी जिम्मेदारी से दूर रखने का फैसला किया है। उन्होंने आकाश को राजनीतिक रूप से और अधिक परिपक्व होने की जरूरत बताते हुए केवल पार्टी में कार्य करने की अनुमति दी है। मायावती ने इस फैसले के लिए बसपा संस्थापक मान्यवर कांशीराम के सिद्धांतों का हवाला दिया। मायावती ने कहा कि कांशीराम ने अपने परिवार के सदस्यों को पार्टी के काम में शामिल होने की अनुमति तो दी थी, लेकिन उन्हें चुनाव लड़ाने या संगठन में बड़े पद देने के पक्ष में नहीं थे। उन्होंने कहा कि वह भी इसी संकल्प पर आगे बढ़ रही हैं।

    नेशनल को-ऑर्डिनेटर का पद भी वापस लिया!
    मायावती का मानना है कि आकाश को अभी राजनीतिक रूप से और परिपक्व होने की जरूरत है, ताकि विरोधी दल साम, दाम, दंड, भेद जैसे हथकंडों का इस्तेमाल कर बसपा को चुनावी नुकसान न पहुंचा सकें। वहीं पार्टी सूत्रों का कहना है कि उनका नेशनल को-ऑर्डिनेटर का पद भी वापस ले लिया गया है। हालांकि पार्टी से बाहर नहीं किया गया है। आकाश को दो बार पहले पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया जा चुका है। आकाश ने अपने एक्स अकाउंट से पद हटाकर खुद को बसपा कार्यकर्ता लिख दिया है।

    कई जिम्मेदारी दी गई, और फिर वापस ली गई
    आकाश आनंद को पहले भी कई बार पार्टी में अहम जिम्मेदारियां दी गईं और बाद में वापस ली गईं। वर्ष 2019 में उन्हें बसपा का राष्ट्रीय समन्वयक बनाया गया था। 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने कई जनसभाओं को संबोधित किया। मई 2024 में सीतापुर की एक जनसभा में उनके आक्रामक भाषण के बाद मुकदमा दर्ज हुआ था। इसके बाद मायावती ने उन्हें पार्टी से हटा दिया था। हालांकि बाद में उनकी वापसी हुई। मार्च 2025 में आकाश आनंद को फिर पार्टी से निष्कासित किया गया। उस समय मायावती ने यह भी कहा था कि अब उनका कोई उत्तराधिकारी नहीं होगा। बाद में आकाश की दोबारा पार्टी में वापसी हुई और अगस्त 2025 में उन्हें फिर राष्ट्रीय को-ऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी दी गई। हाल में हाथरस में उन्होंने चुनावी रैली को संबोधित करते हुए भाजपा पर तीखा हमला बोला था। अब एक बार फिर उनसे संगठन की बड़ी जिम्मेदारी वापस ले ली गई है।

    संघ प्रमुख मोहन भागवत पर निशाना साधा
    इस बीच मायावती ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत पर भी निशाना साधा। लखनऊ में पार्टी की राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक में उन्होंने कहा कि जातिवाद, असमानता और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर आरएसएस की कथनी और करनी में बड़ा अंतर है। उन्होंने आरएसएस से बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के समतामूलक संविधान का ईमानदारी से पालन करने की सलाह दी।

    बैठक में संगठन को मजबूत करने पर जोर
    बैठक में मायावती ने संगठन को मजबूत करने, कमियों को दूर करने और पदाधिकारियों को पूरी निष्ठा से काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने कांशीराम की पुण्यतिथि पर देशभर में होने वाले कार्यक्रमों की तैयारियों को लेकर भी दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि शोषित वर्ग को शासक वर्ग बनाना ही बहुजन आंदोलन का मुख्य लक्ष्य है और इसके लिए सत्ता हासिल करना जरूरी है।

  • आश्रयहीन परिवारों को भूमि आवंटन प्रमाण पत्र तथा आपदा मोचक निधि से राहत राशि के चेक भी दिए मुख्यमंत्री ने

    आश्रयहीन परिवारों को भूमि आवंटन प्रमाण पत्र तथा आपदा मोचक निधि से राहत राशि के चेक भी दिए मुख्यमंत्री ने

    बाढ़ की समस्या का कराएंगे स्थायी समाधान: सीएम योगी

    फर्रुखाबाद में मुख्यमंत्री ने हवाई सर्वेक्षण कर देखे बाढ़ के हालात, पीड़ितों से मिलकर दिलाया विश्वास- हर दुःख-दर्द में साथ खड़ी है सरकार

    पुलिस लाइन में 1000 परिवारों को किया गया बाढ़ राहत सामग्री का वितरण, मुख्यमंत्री ने कई परिवारों को प्रदान की सामग्री 

    आश्रयहीन परिवारों को भूमि आवंटन प्रमाण पत्र तथा आपदा मोचक निधि से राहत राशि के चेक भी दिए मुख्यमंत्री ने 

    50 किलो राहत सामग्री किट दे रही सरकार, अस्पतालों में दवा, एंटी स्नेक वेनम व एंटी रेबीज वैक्सीन उपलब्धः मुख्यमंत्री

    सीएम ने प्रशासन, पीडब्ल्यू समेत संबंधित विभागों को दिया निर्देश- बाढ़ का पानी उतरते ही टूटी सड़कों का तत्काल शुरू कराएं निर्माण 

    फर्रुखाबाद,
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाढ़ का स्थायी समाधान कराने के लिए आश्वस्त करते हुए कहा कि मां गंगा के उफान से पानी का फैलाव हो रहा है। इससे फसल का काफी नुकसान हुआ। सरकार ने 9 वर्ष में सैकड़ों करोड़ की परियोजनाएं स्वीकृत की हैं। जनप्रतिनिधियों के मुताबिक बाढ़ की समस्या का समाधान करने के लिए गंगा नदी की ड्रेजिंग कर उसे चैनलाइज करना होगा। सिल्ट को बाहर तटबंध के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा। यह परियोजना यहां की आवश्यकता है। नदी के चैनलाइज होने से फसल बचेगी और स्थानीय लोगों को भी राहत मिलेगी। 

    मुख्यमंत्री ने गुरुवार को हवाई सर्वेक्षण कर फर्रुखाबाद की बाढ़ प्रभावित सदर, कायमगंज व अमृतपुर तहसीलों में बाढ़ के हालात देखे। इसके पश्चात पुलिस लाइन में 1000 परिवारों को बाढ़ राहत सामग्री का वितरण किया गया। मुख्यमंत्री ने अपने हाथों से कई परिवारों को राहत सामग्री, आश्रयहीन परिवारों को भूमि आवंटन प्रमाण पत्र तथा आपदा मोचक निधि से राहत राशि भी दी। उन्होंने पीड़ित परिवारों से संवाद कर उनका दुख साझा किया और विश्वास दिलाया कि सरकार हर दुख-दर्द में आपके साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री ने प्रशासन, पीडब्ल्यू समेत संबंधित विभागों को बाढ़ का पानी उतरते ही टूटी सड़कों का तत्काल निर्माण शुरू करने का निर्देश भी दिया। 

    बाढ़ के स्थायी समाधान के लिए किसानों का मांगा साथ
    सीएम ने कहा कि प्रशासन ड्रेजिंग का कार्य शुरू करने की तैयारी करें। बाढ़ के स्थायी समाधान के लिए किसानों का सहयोग मांगते हुए सीएम ने कहा कि इसमें यदि आपकी जमीन आएगी तो उचित मुआवजा मिलेगा। हम फर्रुखाबाद को बाढ़ से मुक्त कराने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएंगे। उन्होंने बाढ़ से फसल को हुए नुकसान का सर्वे करने का निर्देश दिया और कहा कि यह रिपोर्ट आते ही किसान के खाते में डीबीटी के माध्यम से सहायता धनराशि भेज दी जाएगी।

    अस्पतालों में एंटी स्नेक वेनम, एंटी रैबीज व अन्य दवाएं उपलब्ध
    मुख्यमंत्री ने कहा कि इस सीजन में सांप, बिच्छू व अन्य विषैले कीड़ों का भय रहता है। सरकार ने पहले ही सीएचसी, जिला अस्पतालों आदि में एंटी स्नेक वेनम, एंटी रैबीज व पर्याप्त दवाओं की व्यवस्था की है। जिन क्षेत्रों में पानी घुस गया है, वहां पशुओं के चारे, वैक्सीन, दवा आदि की भी व्यवस्था है। जनप्रतिनिधि व फील्ड में तैनात टीम लगातार जनसेवा कर रही है।

    50 किलो राहत सामग्री किट दे रही सरकार
    सीएम ने बताया कि पिछले दिनों लखनऊ में फर्रुखाबाद के विधायकों व जिलाध्यक्ष के साथ बैठक में मैंने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की चर्चा की थी। प्रभारी मंत्री को भेजकर राहत कार्यों की निगरानी, समीक्षा व ठोस रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा था। हमारी पूरी संवेदना पीड़ितों के प्रति है। राहत कार्यों के लिए 24 घंटे कंट्रोल रूम, बाढ़ चौकियां व राहत शिविर चल रहे हैं। जिन गांवों में बाढ़ का पानी पहुंच गया है, वहां प्रभावित परिवारों के लिए शासन ने रहने, भोजन आदि की व्यवस्था कराई है। जो लोग घर में सुरक्षित रह सकते हैं, उन तक 50 किलो राहत सामग्री की किट पहुंचाई जा रही है, जिसमें 10 किलो आटा, 10 किलो चावल, 10 किलो आलू, 2 किलो अरहर दाल, तेल, चना, लाई, मसाला, बाल्टी, बरसाती, डिग्निटी किट समेत 50 आइटम शामिल हैं। 15 दिनों से तीनों विधायक सभी पीड़ितों तक पहुंचकर स्थानीय प्रशासन की मदद से राहत सामग्री पहुंचाने में जुटे हैं। 

    हर दुख-दुर्द में साथ खड़ी है सरकार
    मुख्यमंत्री ने बाढ़ की विभीषिका से जूझ रही 102 गांवों की जनता के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने विश्वास दिलाया कि सरकार हर दुःख-दर्द में साथ खड़ी है। जरूरत के मुताबिक हर मदद पहुंचाई जाएगी। उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के बच्चों को पढ़ाने के लिए पहली बार शिक्षक शिविरों व गांवों में जाकर कक्षाएं ले रहे हैं। स्वास्थ्य शिविर, राहत सामग्री समेत सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। 

    अब बदल चुका है फर्रुखाबाद
    सीएम ने कहा कि फर्रुखाबाद बदल चुका है। यहां गंगा एक्सप्रेसवे का लिंक एक्सप्रेसवे आ रहा है और यह बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के साथ जुड़ेगा। अब फर्रुखाबाद के पास भी अपना एक्सप्रेसवे होगा। सड़कों के चौड़ीकरण, ओवरब्रिज तथा गांवों की कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए जनप्रतिनिधियों से प्रस्ताव मांगे गए हैं। सड़कें अच्छी होने से बाढ़ के बावजूद कनेक्टिविटी बनी हुई है। 

    किसानों के साथ है सरकार
    सीएम ने कहा कि फर्रुखाबाद खेती किसानी की बेल्ट है। यहां आलू किसानों की काफी संख्या है। जिन किसानों का आलू कोल्ड स्टोरेज में है, उनके लिए प्रति बोरा धनराशि की व्यवस्था की गई है। डबल इंजन सरकार किसानों के साथ है। 2017 में 275 से 300 रुपये के बीच प्रति क्विंटल गन्ना का दाम मिलता था। आज यह राशि 400 रुपये क्विंटल है। हमने टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर पर्ची, घटतौली आदि से जुड़ी समस्याओं का समाधान किया। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, किसान सम्मान निधि का लाभ दिलाने, फसलों की खरीद के साथ ही मक्का के लिए भी क्रय केंद्र स्थापित किए हैं। पेरू की मदद से आगरा में आलू का अंतरराष्ट्रीय केंद्र काम कर रहा है। दुनिया के बाजार की मांग के अनुरूप आलू उपलब्ध करवाना और किसानों को वैल्यू एडिशन के साथ जोड़ कर उनकी आमदनी कई गुना बढ़ाई गई है।

    अब युवाओं की नौकरी से कोई खिलवाड़ नहीं कर सकता
    सीएम ने कहा कि पहली बार बिना भेदभाव हर जनपद के युवा
    ओं को सरकारी नौकरी मिल रही है। फर्रुखाबाद के साथ कोई भेदभाव, अन्याय नहीं कर सकता। अब सरकारी नौकरी, ओडीओपी आदि के माध्यम से रोजगार के नए अवसर आ रहे हैं। सुरक्षा के बेहतरीन माहौल के कारण यूपी को सर्वाधिक निवेश प्रस्ताव (50 लाख करोड़) प्राप्त हुए हैं। इस निवेश से युवाओं को रोजगार व सम्मान मिलेगा। 2017 के पहले सैफई सिंडिकेट नौकरी पर हावी था, नौजवान नौकरी से वंचित रहता था। अब युवाओं की नौकरी से कोई खिलवाड़ नहीं कर सकता। किसी ने कोशिश की तो उसे जेल भेजेंगे और संपत्ति भी जब्त करेंगे। 

    बेटियों के पढ़ने से स्वावलंबी होता है समाज
    सीएम ने कहा कि उद्योग लगाने वाले युवाओं के लिए सीएम युवा उद्यमी विकास अभियान, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वालों के लिए मुख्यमंत्री अभ्युदय कोचिंग, गरीब व निर्माण श्रमिकों के बच्चों के लिए अटल आवासीय विद्यालय के साथ ही हर विकास खंड में कस्तूरबा गांधी विद्यालय हैं, जो अब 12वीं तक चल रहे हैं। बेटी जब पढ़ती है तो सिर्फ परिवार नहीं, बल्कि समाज भी स्वावलंबी होता है। अब सीएम कंपोजिट विद्यालय स्वीकृत हो रहे हैं। पहली से 12वीं क्लास तक इंटीग्रेटेड कैंपस में बच्चों के लिए शिक्षा व स्किलिंग की सुविधा है। उनके एंप्लॉयमेंट की व्यवस्था भी होगी। हर जनपद में लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल स्किलिंग एंड एंप्लॉयमेंट जोन बनाने की कार्रवाई बढ़ी है। 60 वर्ष से अधिक आयु की सभी माताएं परिवहन निगम की बसों में लोकमाता अहिल्याबाई निशुल्क यात्रा की सुविधा प्राप्त कर रही हैं। स्नातक अंतिम वर्ष की 50 हजार मेधावी बेटियों को रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना के तहत जल्द ही स्कूटी दी जाएंगी। 

    गरीबों के हक पर डकैती डलवाता था सैफई सिंडिकेट
    सीएम ने 3.52 लाख से अधिक आउटसोर्स कार्मिकों के साथ होने वाले भेदभाव का जिक्र करते हुए नवगठित उप्र आउटसोर्स सेवा निगम के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि अब कोई भेदभाव, लूट नहीं चलेगी। पहले की सरकार में ज्यादातर आउटसोर्सिंग एजेंसियां सैफई सिंडिकेट की थीं। वे गरीबों के हक पर डकैती डलवाते थे। हमारी सरकार ने कल उस पर ताला लगवा दिया। यह निगम हर कर्मचारी को न्यूनतम मानदेय भी दिलाएगा। जो कर्मचारी पहले 11,000 के बजाय 6 हजार ही पाता था, अब वह भेदभाव का शिकार नहीं होगा। अब न्यूनतम 20,000 मानदेय होगा और यह पैसा सीधे अकाउंट में जाएगा। स्वास्थ्य बीमा, ईपीएफ, घटना-दुर्घटना, बेटी की शादी, बच्चों की उच्च शिक्षा में भी सुरक्षा कवर मिलेगा। शिक्षकों, शिक्षणेत्तर कर्मचारियों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों आदि को भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई है। 

    अब जिम्मेदारी लेने वाली सरकार 
    सीएम ने कहा कि अच्छी सरकार किसानों, गरीबों, युवाओं, महिलाओं समेत सभी वर्ग के लिए कार्य करती है। अब बाढ़ पीड़ित परिवारों को जमीन का पट्टा, आवास आदि भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। पहले गरीब का घर आग से जलने पर उसे 4 हजार रुपये देकर कहा जाता था कि जाओ, जो करना है, करो। सरकार के इस लापरवाह व्यवहार का दंश गरीब को झेलना पड़ता था। अब डबल इंजन सरकार पूरी जिम्मेदारी लेते हुए गरीब के साथ खड़ी है। 

    इस अवसर पर सांसद मुकेश राजपूत, विधायक मेजर सुनील दत्त द्विवेदी, सुनील कुमार शाक्य, नागेंद्र सिंह राठौर, डॉ. सुरभि, विधान परिषद सदस्य प्रांशुदत्त द्विवेदी, जिला पंचायत प्रशासक मोनिका यादव, भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष रामकिशोर साहू, प्रदेश महामंत्री शंकरलाल लोधी, जिलाध्यक्ष फतेह चंद वर्मा आदि उपस्थित रहे। 

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    सीएम ने आश्रयहीन परिवारों को दिए भूमि आवंटन प्रमाण पत्र तथा राहत राशि के चेक 
    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने आश्रयहीन परिवारों को भूमि आवंटन प्रमाण पत्र तथा आपदा मोचक निधि से राहत राशि भी दी। मुख्यमंत्री के हाथों सदर तहसील के प्रेमचंद, कुसुम देवी, गिरीश, ज्ञान देवी, मुकेश, रामबरन, रवीश, बृजमोहन, सुआलाल व अरुणेश को भूमि आवंटन के स्वीकृति प्रमाण पत्र व 1.20 लाख की राहत राशि मिली।

  • शिक्षक दिवस पर यूपी के 81 अध्यापकों का सम्मान, गोरखपुर के बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में जुटेंगे शिक्षक

    शिक्षक दिवस पर यूपी के 81 अध्यापकों का सम्मान, गोरखपुर के बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में जुटेंगे शिक्षक

    उत्कृष्ट योगदान देने के लिए शिक्षक दिवस पर प्रदेश के 81 अध्यापकों को सम्मानित करेंगे मुख्यमंत्री

    गोरखपुर के योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में 5 सितंबर को होगा भव्य समारोह

    बेसिक शिक्षा के 61 और माध्यमिक शिक्षा के 15 शिक्षकों को मिलेगा राज्य अध्यापक पुरस्कार, माध्यमिक के 5 शिक्षकों को मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार

    इनमें 33 शिक्षिकाएं (31 बेसिक और 2 माध्यमिक विद्यालयों की) हैं शामिल   

    पुरस्कार के लिए चयनित अध्यापकों को गोरखपुर में ससम्मान होटलों में ठहराने की व्यवस्था

    गोरखपुर, 
     शिक्षा के माध्यम से समाज और राष्ट्र निर्माण में भविष्य की पीढ़ियों को आकार देने में उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षकों की भूमिका शिक्षक दिवस पर स्वर्णिम अध्याय में दर्ज हो जाएगी। शिक्षक दिवस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, विद्यालयों का उचित प्रबंधन, नवाचार और विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास करने वाले प्रदेश के कुल 81 शिक्षकों को राज्य अध्यापक पुरस्कार 2025 और मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार 2025 से सम्मानित करेंगे। 5 सितंबर को शिक्षक दिवस पर शिक्षकों को सम्मानित करने का भव्य समारोह गोरखपुर के योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में होगा। पुरस्कार के लिए चयनित प्रदेशभर के शिक्षकों को विशिष्ट अतिथि की तरह ससम्मान ठहराने की व्यवस्था होटलों में की गई है। 

    समाज के प्रति शिक्षक के समर्पण को प्रतिष्ठित करने वाले राज्य स्तरीय पुरस्कार के लिए बेसिक शिक्षा विभाग के 61 और माध्यमिक शिक्षा विभाग के 20 शिक्षकों का चयन किया गया है। इनमें कुल मिलाकर 33 शिक्षिकाएं (31 बेसिक और 2 माध्यमिक विद्यालयों की) शामिल हैं। माध्यमिक शिक्षा विभाग के जिन शिक्षकों को चयनित किया गया है उनमें से 5 को ‘मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार’ से सम्मानित किया जाएगा। पुरस्कार का प्रमुख उद्देश्य शिक्षकों को अच्छे शिक्षण कार्य के लिए प्रोत्साहित करना है। साथ ही बेहतर ढंग से समाज में शिक्षा की अलख जगाने के उनके प्रयासों को और प्रभावी बनाना है।

    पुरस्कार राशि के रूप में मिलेंगे 25 हजार रुपये
    योगी सरकार, राज्य स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित होने वाले शिक्षकों को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह के साथ ही पुरस्कार राशि के रूप में 25 हजार रुपये भी भेंट करेगी। इसके अलावा सम्मानित शिक्षकों को आजीवन उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की बसों में प्रतिवर्ष 4000 किलोमीटर की निशुल्क यात्रा की सुविधा भी मिलेगी। राज्य स्तरीय पुरस्कार पाने वाले शिक्षकों की सेवानिवृत्ति की सीमा भी दो वर्ष बढ़ जाएगी। 

    बेसिक शिक्षा के इन शिक्षकों को दिया जाएगा राज्य अध्यापक पुरस्कार
    1. संगीता शर्मा (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय धनौली, अकोला, आगरा)
    2. गीता वर्मा (सहायक अध्यापक, प्राथमिक विद्यालय चौबारा, गजरौला, अमरोहा)
    3. प्रीति मिश्रा (सहायक अध्यापक, पीएम उच्च विद्यालय बेलवा, पयागपुर, बहराइच)
    4. सलमा खान (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट विद्यालय आदर्श, नगर क्षेत्र, बलरामपुर)
    5. उर्मिला देवी (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय खेमईपुर, भदोही)
    6. रचना कपूर (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय नंगली छोइया, हल्दौर, बिजनौर)
    7. किरन देवी (प्रधानाध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय अंबियापुर, बदायूं)
    8. जूही मलिक (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय स्याना, बुलंदशहर)
    9. उषा सिंह (सहायक अध्यापक, पूर्व माध्यमिक विद्यालय सैदपुर, शहबादगंज, चंदौली)
    10. गीता वर्मा (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय अमानाबाद, फर्रुखाबाद)
    11. अर्चना पांडेय (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट स्कूल पर्थला खंजरपुर, गौतमबुद्धनगर)
    12. ज्योत्स्ना गोस्वामी (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय ननकागढ़ी, राजापुर, गाजियाबाद)
    13. शुचि त्यागी (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट विद्यालय पिपलैडा, दहौलाना, हापुड़)
    14. विजया अवस्थी (सहायक अध्यापक, संविलियन विद्यालय मंसूरनगर, पिहानी, हरदोई)
    15. पल्लवी चतुर्वेदी (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय सासनी, हाथरस)
    16. प्रीति श्रीवास्तव (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट विद्यालय पठाकरका, बंगरा, झांसी)
    17. डॉ. सुमनलता यादव (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय कुंवरपुर बनवारी, छिबरामऊ, कन्नौज)
    18. डॉ. कामायनी शर्मा (सहायक अध्यापक, संविलियन विद्यालय औरोताहरपुर, ककवन, कानपुर नगर)
    19. सुमन कुशवाहा (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय भगवानपुर, नेवादा, कौशाम्बी)
    20. प्रीति गुप्ता (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय चौकी बस स्टैंड, बिरधा, ललितपुर)
    21. विनीता (सहायक अध्यापक, प्राथमिक विद्यालय अमेठी उर्दू, गोसाईगंज, लखनऊ)
    22. सीमा कुमारी (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय महटौली, घिरोर, मैनपुरी)
    23. प्रतिभा रानी भारती (सहायक अध्यापक, प्राथमिक विद्यालय, हर्रा, सरूरपुर, मेरठ)
    24. सुनीता रानी (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय सिरसवां, भगतपुर, मुरादाबाद)
    25. आरती शर्मा (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय रुस्तमगढ़, मुज्जफरनगर)
    26. वैलेंटिना विक्टर (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय अहमदनगर, नगर क्षेत्र, रामपुर)
    27. अमिता टंडन (प्रधानाध्यापक, कम्पोजिट विद्यालय राजपुर रानी, श्रावस्ती)
    28. मीरा सिंह (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय गड़ईडीह, चोपन, सोनभद्र)
    29. प्रीति भारती (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय नेवलगंज, हसनगंज, उन्नाव)
    30. नीलम राय (सहायक अध्यापक, प्राथमिक विद्यालय मंडुआडीह, वाराणसी)
    31. सय्यदा (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय पिपरिया अगरु, मरौरी, पीलीभीत)
    32. सुनीत मित्र पांडेय (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय गोकुला, नवाबगंज, गोंडा)
    33. अमर सिंह (प्रधानाध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय बहरावद, अतरौली, अलीगढ़)
    34. राम मिलन गुप्ता (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट उच्च विद्यालय, नसीरपुर छितौना, जहांगीरगंज, अम्बेडकरनगर)
    35. पंकज कुमार द्विवेदी (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय, ठेउंगा, सोहावल, अयोध्या)
    36. प्रदीप कुमार सिंह (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय भैरवपुर, कोयलसा, आजमगढ़)
    37. अजीत कुमार श्रीवास्तव (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय, इब्राहिमाबाद, मुरली छपरा, बलिया)
    38. राहुल कुमार शुक्ल (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय बहुता, त्रिवेदीगंज, बाराबंकी)
    39. हरिशंकर त्रिपाठी (प्रधानाध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय गढ़चपा, मानिकपुर, चित्रकूट)
    40. ओमवीर सिंह (प्रधानाध्यापक, पीएम उच्च प्राथमिक विद्यालय पिदौरा, मरेहरा, एटा)
    41. वीरेंद्र सिंह (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय ताखा, इटावा)
    42. आनंद कुमार मिश्र (सहायक अध्यापक, प्राथमिक विद्यालय मलूकपुर, ऐरायां, फतेहपुर)
    43. संतोष कुशवाहा (सहायक अध्यापक, कन्या उच्च प्राथमिक विद्यालय मनिहारी, गाजीपुर)
    44. नीतिराज सिंह (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय, चुनकी का डेरा, सुमेरपुर, हमीरपुर)
    45. राजेश कुमार उपाध्याय (सहायक अध्यापक, पूर्व माध्यमिक विद्यालय बारीगांव, घुघली, महराजगंज)
    46. संजय कुमार मिश्र (प्रधानाध्यापक, कम्पोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय गरियांव, मुंगरा बादशाहपुर, जौनपुर)
    47. विनीत कुमार मिश्र (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय अन्ता, रसूलाबाद, कानपुर देहात)
    48. धनंजय प्रताप सिंह (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय सलेमपुर लाला, कासगंज)
    49. प्रमोद कुमार (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय रतासिया, बेहजम, लखीमपुर खीरी)
    50. नवीन कुमार त्रिपाठी (सहायक अध्यापक, पीएम कम्पोजिट विद्यालय उनवल प्रथम, बांसगांव, गोरखपुर)
    51. ओमप्रकाश तिवारी (सहायक अध्यापक, कन्या उच्च प्राथमिक विद्यालय बिलखी, कबरई, महोबा)
    52. अनिल कुमार मौर्य (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय दौलसेपुर, रानीपुर, मऊ)
    53. दयानंद मिश्रा (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय सिद्धि, पहारी, मिर्जापुर)
    54. डॉ. देवेंद्र सिंह (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट विद्यालय बरना, प्रतापगढ़)
    55. रामलखन मौर्या (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय, सिरसा, प्रतापपुर, प्रयागराज)
    56. बृजकिशोर (प्रधानाध्यापक, कम्पोजिट विद्यालय रसूलपुर, गुन्नौर, सम्भल)
    57. अरुण कुमार गुप्ता (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट विद्यालय धनौरा, ददरौल, शाहजहांपुर)
    58. दिनकर चौहान (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय गंगेरू प्रथम, कांधला, शामली)
    59. महेश कुमार (सहायक अध्यापक, प्राथमिक विद्यालय बूड़ा, बर्डपुर, सिद्धार्थनगर)
    60. अतुल शर्मा (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय अडावेनिया ग्रांट, एलिया, सीतापुर)
    61. सत्येंद्र कुमार सिंह (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय साढापुर, प्रतापपुर कमैचा, सुल्तानपुर)

    माध्यमिक विद्यालयों के इन शिक्षकों को मिलेगा राज्य अध्यापक पुरस्कार
    1. रेनू तोमर (प्रधानाचार्य, जवाहर लाल मेमोरियल गर्ल्स इंटर कॉलेज, गाजियाबाद)
    2. डॉ. रमेश प्रताप सिंह (प्रधानाचार्य, उदय प्रताप इंटर कॉलेज, वाराणसी)
    3. गिरिजेश कुमार मल्ल (भाषा अध्यापक, गांधी विद्यालय इंटर कालेज, बछरावां, रायबरेली)
    4. डॉ. अनुज कुमार अग्रवाल (भाषा अध्यापक, राजकीय इंटर कॉलेज, सलेमपुर, कांठ, मुरादाबाद)
    5. महेश्वर प्रसाद त्रिपाठी (भाषा अध्यापक एलपीके इंटर कॉलेज, बसडीला, सरदार नगर, गोरखपुर)
    6. अरुण कुमार ओझा (गणित अध्यापक, हीरालाल रामनिवास इंटर कॉलेज, संतकबीरनगर)
    7. डॉ. गौरव वार्ष्णेय (विज्ञान अध्यापक, जैन इंटर कॉलेज, रामपुर)
    8. डॉ. अभिषेक कुमार सिंह (विज्ञान अध्यापक, हीरालाल रामनिवास इंटर कॉलेज, संतकबीरनगर)
    9. अमित कुमार शर्मा (विज्ञान अध्यापक, राजकीय इंटर कॉलेज, अनूपपुर, डिबाई, हापुड़)
    10. डॉ० हरिश्चन्द्र यादव (मानविकी अध्यापक, विभूति नारायण राजकीय इंटर कॉलेज, ज्ञानपुर, भदोही)
    11. अश्वनी कुमार जैन (मानविकी अध्यापक, महावीर दिगम्बर जैन इंटर कॉलेज, फिरोजाबाद)
    12. राजपाल (मानविकी अध्यापक, दरबारी लाल शर्मा इंटर कॉलेज, रिठौरा, बरेली)
    13. डॉ. संजय कुमार सिंह (वाणिज्य अध्यापक, गुलाबराय इंटर कॉलेज, बरेली)
    14. गुणधर लाल जैन (वाणिज्य अध्यापक, एमडी जैन इंटर कॉलेज, आगरा)
    15. प्रकाश नारायण सिंह (कला अध्यापक, बंगाली टोला इंटर कॉलेज, वाराणसी)

    माध्यमिक विद्यालयों के इन शिक्षकों को मिलेगा मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार
    1. डॉ. योगेन्द्र प्रताप सिंह (प्रधानाचार्य, पं. दीनदयाल उपाध्याय सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, लखीमपुर खीरी)
    2. विक्रम बहादुर सिंह परिहार (प्रधानाचार्य, ज्वाला देवी सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, प्रयागराज)
    3. कल्पना सिंह (प्रधानाचार्य, सरस्वती बालिका विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, झांसी)
    4. डॉ. आनन्द कुमार (मानविकी अध्यापक, महर्षि दयानन्द विद्यापीठ इंटरमीडिएट कॉलेज, गोविंदपुरम, गाजियाबाद)
    5. विजय पाल (कला अध्यापक, जयनारायण सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, बरेली)
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  • UP में OBC युवाओं को मिल रही डिजिटल उड़ान, 31 हजार से अधिक युवाओं ने हासिल की कंप्यूटर ट्रेनिंग

    UP में OBC युवाओं को मिल रही डिजिटल उड़ान, 31 हजार से अधिक युवाओं ने हासिल की कंप्यूटर ट्रेनिंग

    योगी सरकार की डिजिटल पहल, 31 हजार से ज्यादा ओबीसी युवा बन रहे तकनीकी दक्ष

    निशुल्क कंप्यूटर प्रशिक्षण से युवाओं को मिल रहा रोजगारपरक कौशल बढ़ाने का अवसर

    ओ-लेवल में 24,240 और सीसीसी में 7,362 प्रशिक्षणार्थी ले रहे प्रशिक्षण

    नाइलिट से मान्यता प्राप्त संस्थानों के जरिए युवाओं को दी जा रही निःशुल्क तकनीकी शिक्षा

    लखनऊ, 
    उत्तर प्रदेश की योगी सरकार युवाओं को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने और रोजगार के लिए तैयार करने पर विशेष जोर दे रही है। पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की निशुल्क ओ-लेवल एवं सीसीसी कंप्यूटर प्रशिक्षण योजना आर्थिक रूप से कमजोर ओबीसी युवक-युवतियों के लिए तकनीकी शिक्षा का प्रभावी माध्यम बन गई है। योजना के तहत इस वर्ष 31 हजार से ज्यादा प्रशिक्षणार्थी कंप्यूटर प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। सरकार की इस पहल से युवाओं को आधुनिक तकनीकी ज्ञान और रोजगारपरक कौशल हासिल करने का अवसर मिल रहा है। 

    70 हजार से ज्यादा आये थे आवेदन

    वित्तीय वर्ष 2026-27 में योजना के लिए 40 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस वर्ष 31,602 प्रशिक्षणार्थी प्रतिभाग कर रहे हैं। जिसमें सबसे ज्यादा ओ-लेवल में 24,240 और सीसीसी में 7,362 प्रशिक्षणार्थी शामिल हैं। 11 अगस्त से प्रशिक्षण शुरू हो चुका है। वर्ष 2026-27 में योजना के लिए 70 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें सबसे अधिक आवेदन ओ-लेवल प्रशिक्षण के लिए आये थे। 

    योजना के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर ओबीसी युवाओं को बिना किसी शुल्क के आधुनिक कंप्यूटर शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे उनकी तकनीकी दक्षता बढ़ाने के साथ रोजगार के अवसरों को भी मजबूती मिल रही है। योजना का लाभ उन ओबीसी अभ्यर्थियों को दिया जा रहा है, जिन्होंने इंटरमीडिएट या उससे अधिक शिक्षा प्राप्त की है। इसके साथ ही इनके अभिभावकों की वार्षिक आय एक लाख रुपये या उससे कम है।

    338 प्रशिक्षण संस्थानों का मजबूत नेटवर्क

    प्रशिक्षण भारत सरकार के राष्ट्रीय इलेक्ट्रानिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (नाइलिट) से मान्यता प्राप्त संस्थानों के माध्यम से कराया जा रहा है। प्रदेश में वर्तमान में 338 प्रशिक्षण संस्थान योजना से जुड़े हैं। इनमें 63 संस्थान केवल ओ-लेवल, 39 सीसीसी और 236 संस्थान दोनों पाठ्यक्रम संचालित कर रहे हैं। इससे प्रदेश के अधिकांश जिलों में युवाओं को अपने नजदीक ही कंप्यूटर प्रशिक्षण हासिल करने की सुविधा मिल रही है। सरकार की ओर से ओ-लेवल प्रशिक्षण के लिए प्रति छात्र 15 हजार रुपये और सीसीसी के लिए 3,500 रुपये तक का भुगतान किया जाता है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के युवाओं पर प्रशिक्षण का आर्थिक बोझ नहीं पड़ता।

    डिजिटल शिक्षा से रोजगार की ओर बढ़ रहे युवा

    योगी सरकार की यह पहल तकनीकी शिक्षा को गांव और कस्बों तक पहुंचाने के साथ युवाओं को बदलती डिजिटल अर्थव्यवस्था के अनुरूप तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। निःशुल्क कंप्यूटर प्रशिक्षण, व्यापक संस्थागत नेटवर्क और बड़ी संख्या में युवाओं की भागीदारी इस योजना को रोजगारोन्मुखी शिक्षा की दिशा में सरकार की एक सराहनीय पहल बना रही है।

    युवाओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाना सरकार की प्राथमिकता

    पिछड़ा वर्ग कल्याण निदेशक उमेश प्रताप सिंह ने कहा कि इस वर्ष 31 हजार से अधिक प्रशिक्षणार्थी योजना के तहत प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। सरकार का उद्देश्य युवाओं को डिजिटल ज्ञान और रोजगारपरक कौशल उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। योजना के लिए 338 संस्थानों का नेटवर्क तैयार किया गया है, जिससे अधिक से अधिक युवाओं को उनके नजदीकी क्षेत्रों में प्रशिक्षण की सुविधा मिल सके।

  • यूपीकॉस के जरिए आउटसोर्स कर्मियों को नई उम्मीद, भरोसे और सुशासन की मजबूत नींव तैयार

    यूपीकॉस के जरिए आउटसोर्स कर्मियों को नई उम्मीद, भरोसे और सुशासन की मजबूत नींव तैयार

    यूपीकॉस: भरोसे की नींव पर खड़ी नई व्यवस्था

    लखनऊ  
    किसी भी सरकार की संवेदनशीलता परखने के लिए यह देखने की जरूरत नहीं कि वह अपने राज्य के ताकतवर तबके के लिए क्या करती है, यह देखना जरूरी है कि वह अपने सबसे कमजोर, सबसे अनदेखे और सबसे मौन नागरिक के लिए क्या सोचती है। आउटसोर्सिंग व्यवस्था में काम करने वाला कर्मचारी दफ्तर में सबसे पहले आता है और सबसे बाद में जाता है, लेकिन व्यवस्था में उसका स्थान हमेशा सबसे अंतिम पायदान पर रहा है। न उसे स्थायी कर्मचारी जैसा सम्मान मिलता, न सामाजिक सुरक्षा की गारंटी, न भविष्य निधि की निश्चितता। वह विभाग, एजेंसी और खुद अपने बीच बंटा हुआ एक ऐसा व्यक्ति था, जिसकी पीड़ा सुनने वाला कोई संस्थागत तंत्र नहीं था। यही वह शून्य था, जिसे भरने का प्रयास मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार ने उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (यूपीकॉस) गठित करके किया है। 

    एक लंबे इंतज़ार का अंत
    आउटसोर्स कर्मचारी बरसों तक शासन-प्रशासन की भूल-भुलैया में अपनी पहचान तलाशता रहा। हर महीने वेतन कब आएगा, यह सवाल उसके लिए स्थायी बना रहा। उसे इस बात का भी यकीन नहीं था कि उसकी तकलीफ कभी किसी दहलीज़ तक पहुंचेगी भी या नहीं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा बुधवार को उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम का उद्घाटन इसी लंबी प्रतीक्षा को विराम देने वाला क्षण है। यह केवल एक नए निगम की स्थापना भर नहीं, बल्कि उस अदृश्य कर्मचारी वर्ग को औपचारिक पहचान और संस्थागत सहारा देने की पहल है, जो अब तक व्यवस्था के हाशिए पर खड़ा रहकर काम करता आया।

    पुरानी व्यवस्था की टूटी कड़ियां
    2017 से पहले के दौर को देखें तो एक असहज तस्वीर उभरती है। तब आउटसोर्स कर्मचारी को संसाधन समझा ही नहीं जाता था। ठेके देने का काम अक्सर उन्हीं एजेंसियों को मिलता, जिनके तार सत्ता के गलियारों से जुड़े रिश्तेदारों और करीबियों तक जाते थे। भर्ती के नाम पर, वर्दी के नाम पर, और अन्य छोटी-छोटी सुविधाओं के नाम पर शोषण की कहानियां आम बात थीं। पूरा ढांचा तीन हिस्सों में टूटा हुआ था- कार्मिक, एजेंसी और विभाग। किसी समस्या के साथ कर्मचारी जब एक दरवाज़े पर पहुंचता, तो उसे दूसरे दरवाज़े की ओर मोड़ दिया जाता। न वेतन समय पर मिलने की गारंटी, न ईपीएफ-ईएसआई को लेकर कोई स्पष्टता, न सेवा अधिकारों की कोई ठोस रूपरेखा। इस प्रशासनिक ढिलाई ने लाखों परिवारों को स्थायी अनिश्चितता में जीने पर मजबूर कर दिया था।

    बोझ से संपत्ति तक का वैचारिक सफर
    समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्तियों तक शासन की नीतियों, योजनाओं व कार्यक्रमों का लाभ पहुंचाने को अपना विजन बनाने वाली योगी सरकार ने इस सोच को जड़ से बदलने का मानवीय दृष्टिकोण अपनाया। योगी सरकार में आउटसोर्स कर्मी अब बोझ नहीं, राज्य की मानव पूंजी के रूप में देखा जा रहा है। यही वैचारिक बदलाव यूपीकॉस की बुनियाद है। इसके दायरे और गहराई को आंकड़ों से इसे और गहराई से समझा जा सकता है। साढ़े तीन लाख से ज़्यादा आउटसोर्स कर्मचारी सीधे इसके दायरे में आएंगे, और जब उनके परिवारजनों को जोड़ें तो यह संख्या 17 से 20 लाख के बीच पहुंच जाती है। यह अकेले किसी वर्ग विशेष की बात नहीं, बल्कि प्रदेश की सामाजिक बुनावट के एक बड़े हिस्से की तक़दीर बदलने वाला निर्णय है। हर महीने की पांचवीं तारीख तक पारिश्रमिक सीधे बैंक खाते में स्थानांतरित होगा, जिससे पूरी व्यवस्था में किसी पड़ाव पर भी बिचौलियों के लिए कोई स्थान नहीं होगा और भुगतान संबंधित तमाम विसंगतियों पर लगाम लगेगी।

    सुरक्षा कवच जो जीवन बदल देगा
    इससे भी आगे बढ़कर बनाई गई व्यवस्था इस फैसले को असल मायनों में इंसानी बनाती है। किसी दुर्घटना, हादसे या आपदा की स्थिति में परिवार को 20 से 40 लाख रुपये तक का बीमा संरक्षण मिलेगा। यह प्रावधान उस डर को खत्म करता है, जो हर आउटसोर्स कर्मचारी के भीतर हमेशा से बना रहा कि किसी अनहोनी की सूरत में उसका परिवार बेसहारा हो जाएगा। ईपीएफ और ईएसआई का योगदान अब निश्चित रूप से जमा होगा। सरकार खुद एजेंसी को सर्विस चार्ज देगी, ताकि कर्मचारी की जेब पर कोई अतिरिक्त बोझ न पड़े। यह व्यवस्था उस आर्थिक दबाव को सीधे कम करती है, जो अब तक कर्मचारी अकेले उठाता आया था। नौकरी को लेकर छाई असुरक्षा भी अब समाप्त होने जा रही है। कोई भी एजेंसी अब किसी कर्मी को अपनी मर्ज़ी से बर्खास्त नहीं कर सकेगी। ऐसा कोई भी कदम उठाने से पहले सरकार को जानकारी देनी होगी, और उचित जांच के बाद ही निर्णय लिया जाएगा। 

    परिवार तक फैला भरोसे का दायरा
    असली सामाजिक सुरक्षा वही है, जिसमें कोई भी कर्मचारी अपने पूरे परिवार को संरक्षण के दायरे में पाता है। बेटे की पढ़ाई के लिए आठ लाख रुपये तक और बेटी की पढ़ाई के लिए दस लाख रुपये तक की मदद, दो बेटियों की शादी के लिए आठ से दस लाख रुपये तक का सहयोग, और कर्मचारी के आकस्मिक निधन जैसी अप्रिय स्थिति में अंतिम संस्कार के लिए पचास हजार रुपये तक की व्यवस्था- ये सभी प्रावधान मिलकर एक पारिवारिक सुरक्षा कवच का निर्माण करते हैं। मातृत्व अवकाश जैसे वैधानिक लाभ भी अब सुनिश्चित किए गए हैं। यूपीकॉस पोर्टल और वेबसाइट का शुभारंभ इस पूरी संरचना को डिजिटल पारदर्शिता से जोड़ता है, जहां हर कर्मचारी की समस्या को सुनने और सुलझाने के लिए एक स्थायी संस्थागत तंत्र मौजूद रहेगा।

    मुख्यमंत्री की सोच श्रम के प्रति गहरे सम्मान को दर्शाती है। यूपीकॉस इसी सम्मान भावना का प्रतिबिंब है, ठीक वैसे ही जैसे योगी सरकार के वे तमाम फैसले हैं, जिन्होंने किसानों, नौजवानों, महिलाओं व कर्मचारियों के साथ ही समाज के हर तबके के वंचित लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा है। 2017 में जो वृद्धावस्था, निराश्रित महिला और दिव्यांगजन पेंशन मात्र तीन सौ रुपये थी, वह आज बढ़कर पंद्रह सौ रुपये हो चुकी है। रसोइयों के मानदेय में भी इज़ाफा किया गया है। ये सभी निर्णय मिलकर उस नीति की तस्वीर पेश करते हैं, जिसमें समाज के सबसे उपेक्षित वर्गों तक सम्मान और सुरक्षा पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।

    भरोसे की जीत
    यूपीकॉस केवल एक प्रशासनिक इकाई नहीं है, यह एक सामाजिक वादा है। यह इस विश्वास की पुनर्स्थापना है कि सरकार और कर्मचारी का नाता केवल वेतन और काम तक सीमित नहीं होता, बल्कि उसकी नींव भरोसे और उत्तरदायित्व पर टिकी होती है। जब कोई कर्मचारी यह महसूस करता है कि उसकी मेहनत सुरक्षित है, उसका परिवार सुरक्षित है और उसकी आवाज़ को सुना जाएगा, तभी वह सच्चे मायनों में गरिमा के साथ अपना जीवन जी पाता है। यूपीकॉस इसी गरिमा को स्थायी रूप देने को दिशा में उठाया गया एक निर्णायक कदम है।

    जगदीश त्रिपाठी, वरिष्ठ पत्रकार

     

  • UP में आउटसोर्स कर्मचारियों को बड़ी राहत, योगी सरकार ने उठाया अहम कदम; बदलेगी व्यवस्था

    UP में आउटसोर्स कर्मचारियों को बड़ी राहत, योगी सरकार ने उठाया अहम कदम; बदलेगी व्यवस्था

    आउटसोर्स कर्मियों के लिए गरिमा का नया अध्याय

    लखनऊ 

    समाज में पूरी गरिमा के साथ जीने का हर व्यक्ति को अधिकार है और नेतृत्व यदि संवेदनशील है तो इसे सुनिश्चित भी करता है। किसी कर्मचारी को गरिमा का अहसास तभी होता है जब उसे यह महसूस हो कि उसका परिश्रम सुरक्षित है, उसका परिवार सुरक्षित है और उसकी आवाज़ सुनी जाएगी। यह हर कर्मचारी का अधिकार है और यही वह मापदंड है, जिससे किसी भी सरकार की संवेदनशीलता का आकलन किया जा सकता है। उत्तर प्रदेश में आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (यूपीकॉस) का शुभारंभ कर आउटसोर्स कर्मियों की गरिमा लिखने का नया अध्याय शुरू किया है। आउटसोर्स कर्मी जो वर्षों से शासन-सत्ता के गलियारे में अपनी पहचान खोज रहा था, जो अब तक अनिश्चितता के वातावरण में अपना जीवन गुजार रहा था और जिसे यह विश्वास भी नहीं था कि कोई उसकी पीड़ा को सुनेगा। योगी सरकार में गठित हुआ उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम इसी पीड़ा को दूर करने का तंत्र और प्रयास है। 

    2017 से पहले की सरकारों पर नज़र डालें तो एक कड़वी सच्चाई सामने आती है। उस दौर में आउटसोर्स कर्मचारियों को बोझ के रूप में देखा जाता था, संपत्ति के रूप में नहीं। जिन एजेंसियों को ठेके दिए जाते थे, उनमें से अधिकतर सत्ताधारी नेताओं के करीबियों और रिश्तेदारों के स्वामित्व वाली होती थीं। भर्ती प्रक्रिया से लेकर वर्दी और अन्य सुविधाओं तक में शोषण की शिकायतें आम थीं। यह एक ऐसा तंत्र था, जिसमें लाभ कुछ चुनिंदा लोगों तक सीमित रहता था और पीड़ा उन तक पहुंचती थी, जो सबसे कमजोर स्थिति में खड़े थे। यह व्यवस्था कितनी बिखरी हुई थी, इसे इसकी संरचना से ही समझा जा सकता है। एक तरफ कार्मिक होता था, दूसरी तरफ एजेंसी, और तीसरी तरफ सरकारी विभाग। कर्मचारी जब भी किसी समस्या के साथ इनमें से किसी दरवाज़े पर दस्तक देता, उसे दूसरे दरवाज़े की ओर भेज दिया जाता। वेतन में देरी, ईपीएफ और ईएसआई की अनिश्चितता, और सेवा से जुड़े बुनियादी अधिकारों को लेकर व्याप्त असमंजस उसकी नियति थी। यह ऐसी संरचनात्मक उपेक्षा थी, जिसने लाखों परिवारों को अनिश्चितता के अंधेरे में धकेल रखा था। 

    पंडित दीन दयाल उपाध्याय के अंत्योदय सिद्धातों को अपनी सोच में ढालने वाली योगी सरकार ने आउटसोर्स कर्मियों को बोझ नहीं, अपनी मानव संपत्ति के रूप में स्वीकार किया। यह वैचारिक परिवर्तन ही यूपीकॉस की आत्मा है। इसके तथ्यात्मक पक्ष को देखें तो इसकी गंभीरता और स्पष्ट होती है। साढ़े तीन लाख से अधिक आउटसोर्स कर्मियों को सीधा लाभ मिलेगा, लेकिन जब उनके परिवारों को भी जोड़ा जाए तो यह संख्या 17 से 20 लाख तक पहुंच जाती है। यह आंकड़ा उत्तर प्रदेश की सामाजिक संरचना के एक बड़े हिस्से के लिए जीवन बदलने वाला कदम है। हर महीने की पांच तारीख तक पारिश्रमिक सीधे बैंक खाते में पहुंचेगा, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी और भुगतान में होने वाली देरी और गड़बड़ी पर भी अंकुश लगेगा।

    इससे एक कदम आगे जाकर की गई व्यवस्था इस निर्णय को और मानवीय बनाती है। किसी घटना, दुर्घटना या आपदा की स्थिति में परिवार को 20 से 40 लाख रुपये तक का बीमा कवर मिलेगा। यह सुविधा उस असुरक्षा को दूर करती है, जो अब तक हर आउटसोर्स कर्मचारी के मन में एक स्थायी भय की तरह बसी रहती थी कि किसी अनहोनी की स्थिति में उसका परिवार असहाय हो जाएगा। ईपीएफ और ईएसआई का अंशदान भी अब सुनिश्चित किया जाएगा। सरकार आउटसोर्स एजेंसी को सर्विस चार्ज देगी, जिससे कर्मचारी के वेतन से कटौती नहीं होगी। यह प्रावधान सीधे तौर पर उस आर्थिक बोझ को कम करता है, जो पहले कर्मचारी अकेले वहन करता था।

    नौकरी की सुरक्षा को लेकर भी इस व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। अब कोई एजेंसी किसी आउटसोर्स कर्मी को मनमाने ढंग से नौकरी से नहीं निकाल सकेगी। ऐसा करने से पहले सरकार को सूचित करना अनिवार्य होगा, और जांच के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा। इससे किसी भी समय नौकरी जाने की आशंका समाप्त होती है। इसके साथ ही पारिश्रमिक अब किसी अधिकारी या एजेंसी की मर्ज़ी पर निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि कर्मचारी की श्रेणी और शैक्षणिक योग्यता के अनुरूप तय होगा। यह पारदर्शिता कर्मचारी के आत्मसम्मान को पुनर्स्थापित करने वाला कदम है।

    सामाजिक सुरक्षा का दायरा केवल कर्मचारी तक सीमित नहीं होना चाहिए। उसके परिवार को भी उसका लाभ मिलना चाहिए। पुत्र की शिक्षा के लिए आठ लाख रुपये तक और पुत्री की शिक्षा के लिए दस लाख रुपये तक की सहायता, दो पुत्रियों के विवाह के लिए आठ से दस लाख रुपये तक की सहायता और अमसय मृत्यु की स्थिति में कर्मचारी के अंतिम संस्कार के लिए पचास हजार रुपये तक की व्यवस्था तथा मातृत्व अवकाश सहित अन्य वैधानिक सेवा लाभ पारिवारिक सुरक्षा कवच हैं। यूपीकॉस पोर्टल और वेबसाइट की लॉन्चिंग इस पूरी व्यवस्था को डिजिटल पारदर्शिता से जोड़ती है जहां हर कार्मिक की समस्या सुनने और सुलझाने की संस्थागत व्यवस्था मौजूद है। 

    मुख्यमंत्री स्वयं यह मानते हैं कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन और नई अर्थव्यवस्था के दौर में काम की प्रकृति भले बदल रही हो, लेकिन मानव श्रम की गरिमा कभी नहीं बदलेगी। यह मानव श्रम के प्रति सम्मान का परिचायक है। इसी सम्मान भाव का प्रतीक यूपीकॉस और योगी सरकार के वे सभी फैसले हैं जिसमें किसान, नौजवान, महिलाओं, कारीगर, रेहड़ी-पटरी वाले, छोटे उद्यमी और सरकारी कर्मचारी, सभी को मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया गया। वृद्धावस्था, निराश्रित महिला और दिव्यांगजन पेंशन जो 2017 में मात्र तीन सौ रुपये थी, आज बढ़कर पंद्रह सौ रुपये हो चुकी है। रसोइयों के मानदेय में भी बढ़ोतरी की गई है। ये सभी कदम एक ऐसी नीति को दर्शाते हैं, जिसमें समाज के हर वंचित और उपेक्षित वर्ग को सम्मान और सुरक्षा देने का प्रयास किया जा रहा है।

    लाभार्थियों की प्रतिक्रियाएं इस निर्णय की सार्थकता को और पुख्ता करती हैं। संविदाकर्मियों का कहना है कि इस निर्णय से अब घर चलाना आसान होगा और उनके जीवन में बड़ा बदलाव आएगा। पोर्टल और वेबसाइट की पारदर्शिता उन्हें यह भरोसा देती है कि अब उनकी बात सुनी जाएगी। यह भरोसा ही किसी भी कल्याणकारी नीति की सबसे बड़ी सफलता होता है। वस्तुतः यूपीकॉस सिर्फ एक प्रशासनिक निगम नहीं,  बल्कि एक सामाजिक वादा है। यह उस विश्वास की पुनर्स्थापना है कि सरकार और कर्मचारी का रिश्ता केवल वेतन और काम का नहीं, बल्कि भरोसे और जिम्मेदारी का होता है।

    सनी सिंह (लेखक, दिल्ली विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग में शोधार्थी हैं और नई दिल्ली स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन (SPMRF) में रिसर्च एसोसिएट के रूप में कार्यरत हैं।