Category: उत्तर प्रदेश

  • जन्माष्टमी पर कृष्ण भक्ति में डूबे योगी आदित्यनाथ, गो पूजन कर श्रद्धालुओं को किया संबोधित

    जन्माष्टमी पर कृष्ण भक्ति में डूबे योगी आदित्यनाथ, गो पूजन कर श्रद्धालुओं को किया संबोधित

    मथुरा
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को श्री कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर यूपी के मथुरा में श्री कृष्ण जन्मस्थान पहुंचकर भगवान के दर्शन किये और पूजन-अर्चन किया। मुख्यमंत्री गुरुवार को यहां आये थे और विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लिया था। रात्रि विश्राम उन्होंने वेटरनेरी विश्वविद्यालय के गेस्टहाउस में किया था। शुक्रवार सुबह करीब 9:35 बजे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ श्री कृष्ण जन्मस्थान के गेट नंबर दो से पहुंचे। श्री कृष्ण जन्मस्थान पर उनका ढोल मजीरे बजाकर स्वागत किया गया। श्री कृष्ण जन्मस्थान पर उन्होंने गो पूजन किया।

    उन्होंने केशव देव के दर्शन कर गर्भगृह में पूजन अर्चन किया। इसके बाद वे भागवत भवन पहुंचे, जहां दर्शन किये। भागवत भवन में उन्होंने भगवान की आरती की। भागवत भवन में बैठकर वह भगवान को काफी देर तक भाव विभोर होकर निहारते रहे। श्री कृष्ण जन्मस्थान पर दर्शन को पहुंचे बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने जय श्री राम और कृष्ण कन्हैया के जयकारे लगाये। योगी ने उनका अभिवादन किया और श्रद्धालुओं पर पुष्पवर्षा की। श्री कृष्ण जन्मस्थान पर भागवत भवन की सीढ़ियों से उन्होंने श्रद्धालुओं को संबोधित किया।

    इस मौके पर जनसभा को संबोधित करते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने 5,200 वर्ष पहले सत्य और न्याय के लिए इसी स्थल पर प्रकट होकर जो उद्घोष किए थे, वे आज के समय में भी उतने ही प्रासंगिक हैं। अनेक आक्रमण हुए, अन्य लोगों ने अपनी आस्था को भारत पर थोपने का प्रयास किया। लेकिन सनातन की आस्था को कोई मिटा नहीं पाया। जिसने इसका प्रयास किया वो खुद मिट्टी में मिल गए। सीएम योगी ने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में हम भारत की विरासत और विकास का अद्भुत समन्वय देख रहे हैं।

    सीएम योगी ने कहा कि श्री अयोध्या धाम में दुनिया का विशालतम मंदिर बन गया है। जिनको ये अच्छा नहीं लगता वो अयोध्या को बदनाम कर रहे हैं। जिन्हें अच्छा लगता है उन्हें लगता है हमारे रामलला अयोध्या में विराजमान हो गए हैं। हमारा प्रयास है कि मथुरा-वृंदावन में भी वैसे ही भव्य परिसर तैयार हों, जैसे श्री अयोध्या धाम और काशी में हुए हैं। किसी श्रद्धालु को दिक्कत न हो। किसी को कोई संकट न हो और दर्शन करने में कोई चुनौती न हो। आप सभी को आश्वस्त करता हूं कि डबल इंजन सरकार आपके साथ मिलकर आपकी भावनाओं के अनुरूप इस ब्रज भूमि को बनाने में कोर-कसर नहीं छोड़ेगी। यह सरकार तो कृष्ण कन्हैया, प्रभु श्री राम, बाबा विश्वनाथ और माँ विंध्यवासिनी पर विश्वास करती है।

  • RTI के तहत CCTV फुटेज पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, जानिए कब मिल सकती है रिकॉर्डिंग

    RTI के तहत CCTV फुटेज पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, जानिए कब मिल सकती है रिकॉर्डिंग

    प्रयागराज
    इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने एक अहम फैसले में कहा है कि सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई सीसीटीवी फुटेज सीधे आवेदक को उपलब्ध नहीं कराई जा सकती। हाईकोर्ट ने इसका कारण स्पष्ट करते हुए कहा कि सीसीटीवी फुटेज में संवेदनशील जानकारी हो सकती है लिहाजा यह आरटीआई एक्ट में दिए गए अपवाद के अंतर्गत आती है। हालांकि, हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आवेदक सक्षम हाईकोर्ट या आयोग के समक्ष यदि आवेदन करता है तो वे संबंधित सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने और आवश्यक होने पर उसे अपने पास मंगाने का आदेश दे सकते हैं

    न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अबधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने यह आदेश शोभित कश्यप की ओर से याचिका को निस्तारित करते हुए पारित किया है। मामले में याची ने 20 मार्च 2025 को दाखिल सूचना के अधिकार आवेदन के आधार पर पूरी सूचना उपलब्ध कराने तथा सीसीटीवी फुटेज देने की मांग की थी। याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सूचना आयोग की ओर से बताया गया कि मांगी गई सीसीटीवी फुटेज में संवेदनशील जानकारी है। लिहाजा इसे सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 8(1)(छ) के तहत सीधे आवेदक को नहीं दिया जा सकता।

    सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखवाना नागरिक का अधिकार
    वहीं याची की ओर से सर्वोच्च न्यायालय के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा गया कि सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखवाना नागरिक का अधिकार है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि शीर्ष अदालत के फैसले के अनुसार सक्षम कोर्ट अथवा आयोग के पास सीसीटीवी फुटेज मंगाने और उसे सुरक्षित रखने का निर्देश देने की शक्ति है। वर्तमान मामले में याची ने अभी तक किसी सक्षम न्यायालय अथवा आयोग के समक्ष कोई शिकायत दाखिल नहीं की है बल्कि उसने सिर्फ सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराने की मांग की है। ऐसी स्थिति में फुटेज सीधे उसे नहीं दी जा सकती। अपने आदेश में खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि याची सक्षम न्यायालय या सक्षम फोरम के समक्ष आवेदन करता है तो वे सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने तथा शिकायत की जांच के लिए वास्तविक फुटेज मंगाने का निर्देश दे सकते हैं।

    एक दूसरे मामले में हाईकोर्ट ने नए सिरे से जांच का दिया आदेश
    हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने मोदी रबर लिमिटेड को दी गई 117 एकड़ जमीन में से लगभग 59 एकड़ जमीन के कथित अवैध हस्तांतरण के मामले में नए सिरे से जांच का आदेश दिया है। न्यायालय ने राजस्व परिषद के अधिकारियों की एक समिति को छह सप्ताह के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट भी सौंपने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही राज्य सरकार को जांच रिपोर्ट मिलने के तीन सप्ताह के भीतर निर्णय लेने का आदेश दिया है। न्यायालय ने पूर्व के आदेशों के अनुपालन में हुई देरी पर राज्य सरकार पर 25 हजार रुपये का हर्जाना लगाया है।

     

  • मरीजों की अनदेखी पर बड़ा एक्शन, 26 डॉक्टर बर्खास्त

    मरीजों की अनदेखी पर बड़ा एक्शन, 26 डॉक्टर बर्खास्त

    लखनऊ
    सरकारी अस्पतालों में मरीजों की अनदेखी और ड्यूटी में लापरवाही भारी पड़ी। लगातार ड्यूटी से गैरहाजिर रहने और चिकित्सीय दायित्वों का पालन नहीं करने वाले 26 डॉक्टरों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। वहीं, उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना और चिकित्सीय कार्यों में लापरवाही के मामले में नौ अन्य डॉक्टरों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

    डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने लंबे समय से अनुपस्थित और लापरवाही के आरोपों से जुड़े मामलों की समीक्षा की। विभागीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद बर्खास्तगी की कार्रवाई की गई। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में तैनात डॉक्टरों की प्राथमिक जिम्मेदारी मरीजों को समय पर, बेहतर और गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराना है। ड्यूटी से गायब रहने या चिकित्सीय दायित्वों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
    उन्होंने अधिकारियों को अस्पतालों में चिकित्सकों की उपस्थिति, ओपीडी-आईपीडी सेवाओं और मरीजों को मिल रहे उपचार की नियमित निगरानी के निर्देश दिए हैं। किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आने पर संबंधित के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

    इन डॉक्टरों पर हुई कार्रवाई
    बर्खास्त किए गए 26 डॉक्टर प्रदेश के विभिन्न जिलों में तैनात थे। इनमें फर्रुखाबाद, अलीगढ़, गाजीपुर, हरदोई, महोबा, बुलंदशहर, लखनऊ, बलरामपुर, मथुरा, मीरजापुर, झांसी, बरेली, गोरखपुर, सहारनपुर, मुरादाबाद, चंदौली, मैनपुरी, मऊ, सुलतानपुर और मुजफ्फरनगर समेत कई जिले शामिल हैं। वहीं इटावा, रामपुर, मेरठ, बदायूं, भदोही, बलरामपुर और गौतमबुद्ध नगर में तैनात नौ डॉक्टरों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। फर्रुखाबाद के कायमगंज सीएचीस के डॉ. स्वदेश कुमार, अलीगढ़ डॉ. वीरेंद्र सिंह, गाजीपुर में स्त्री रोग विभाग डॉ. स्वाती विश्वकर्मा, हरदोई में रेडियोलॉजिस्ट डॉ. बृजेश यादव, महोबा में ईएनटी सर्जन डॉ. ईशान दीक्षित, बुलंदशहर की डॉ. स्वाती आनंद, लखनऊ सिविल हॉस्पिटल डॉ. मनोज कुमार चौरसिया, हरदोई बावन पीएचसी के डॉ. मो. उताउर रहमान, भटपुर पीएचसी डॉ. मनीष खन्ना, बलरामपुर डॉ. अक्षय लेले, मथुरा गोवर्धन सीएचसी जनरल सर्जन डॉ. राकेश फौजदार, मीरजापुर  जरनल सर्जन डॉ. नरेंद्र कुमार जायसवाल, झांसी बबीना सीएचसी की डॉ. निशा बुंदेला, गाजीपुर डॉ. अचल सिंह, बरेली के डॉ.शशांक वर्मा, गोरखपुर ब्रहम्हपुर पीएचसी डॉ. विशाल कुमार सिंह, सहारनपुर गंगोह सीएचसी डॉ. इन्द्रजीत सिंह, मुरादाबाद डॉ. मोहम्मद शबाब खान, चन्दौली से डॉ. राजेश कुमार सिंह, मुरादाबाद के डॉ. मुजफर अली, मैनपुरी डॉ. कृष्ण मुरारी द्विवेदी, मुरादाबाद डॉ. फरयाद हुसैन, मऊ डॉ. तनवीर फरीदी, सुलतानपुर लोकनाथपुर पीएचसी के डॉ. आशुतोष शुक्ला, अमनाईकपुर पीएचसी डॉ. सुशील कुमार खरवार, मुजफ्फरनगर डॉ. कुंवर विक्रांत को बर्खास्त किया गया है।

    विभागीय कार्रवाई के निर्देश
    उच्च अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना, चिकित्सीय कार्यों में लापरवाही नौ डॉक्टरों पर भारी पड़ी। डिप्टी सीएम ने अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य को विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इनमें इटावा के उप मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. श्रीनिवास यादव, रामपुर के डॉ. केक चहल,  मेरठ की डॉ. संगीता चोपड़ा, बदायूं के कादरचौक सीएचसी के डॉ. अवधेश राठौर, भदोही के डॉ. संतोष चक, बलरामपुर के डॉ. सुमित कुमार, भदोही के डॉ.धीरज प्रकाश, गौतमबुद्ध नगर के अरविन्द मलिक और डॉ. असद शामिल हैं।

  • लखनऊ में बारिश का कहर, पुलिया डूबी और खेत जलमग्न; गोमती बैराज के दो गेट खोले गए

    लखनऊ में बारिश का कहर, पुलिया डूबी और खेत जलमग्न; गोमती बैराज के दो गेट खोले गए

    लखनऊ
    यूपी में बीते कुछ दिनों से लगातार जारी बारिश से नादियां-नाले उफान पर हैं। लखनऊ शहर में गोमती का जलस्तर बढ़ने के साथ ही रहीमाबाद में बेहता और बंथरा व निगोहा इलाके से बहने वाली सई नदी का जलस्तर भी बढ़ गया है। रहीमाबाद में झाऊ बेरिया गांव में बेहता का पानी पुलिया के ऊपर से बह रहा है। निगोहां इलाके में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। जबकि बंथरा में सई नदी का जलस्तर बढ़ने से सैकड़ों बीघे फसले पानी में डूब गई है। नदी का पानी गांवों की ओर बढ़ने से ग्रामीणों को बाढ़ की चिंता सताने लगी है। वहीं, बीकेटी में चन्द्रिका देवी मंदिर के पास गोमती का जलस्तर बढ़ गया है।

    बेहता का जलस्तर बढ़ा, झाऊ बेरिया गांव की पुलिया डूबी
    बेहता नदी पर झाऊ बेरिया गांव जाने के लिए बनी पुलिया इधर नाले के जलस्तर बढ़ने के कारण डूब गई है। ग्रामीणों का रहीमाबाद या शहर जाने का यह एक मात्र रास्ता है। ग्राम प्रधान रुसेना सुरसती देवी ने बताया कि झाऊ बेरिया गांव में प्राथमिक विद्यालय बना है। जिसमें अन्य गावों के बच्चे भी पढ़ने आते हैं। पुलिया डूबने से परिजनों ने बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दिया है। ग्रामीणों को पानी से गुजरकर रहीमाबाद आना पड़ रहा है। शाहीखेड़ा निवासी ध्रुव कुमार ने बताया कि बारिश जारी है और बेहता नाले के जलस्तर में इजाफा हुआ तो गांव के लोग घरों में ही कैद हो जाएंगे। एडीएम मलिहाबाद मनोज कुमार सिंह ने बताया कि जलस्तर बढ़ने की जानकारी है। तहसीलदार कुमकुम मिश्रा को राजस्व टीम के साथ मौके पर भेजा गया था। जलस्तर और बढ़ता है तो ग्रामीणों के लिए नाव व अन्य इंतजाम किए जाएंगे।

    सई नदी का जलस्तर बढ़ने से निगोहा इलाके में बाढ़ जैसे हालात
    सई नदी का जलस्तर बढ़ने से निगोहा इलाके में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। जवाहरखेड़ा के पास बंधा पानी में डूब गया। जवाहरखेड़ा, राती, रंजीतखेड़ा, तारापुर और अघईया समेत दर्जनभर गांव नदी के किनारे बसे हैं। नदी का पानी तालाबों के रास्ते खेतों और खलिहानों तक पहुंच गया। इससे कई बीघे धान, उड़द और तिल्ली की फसल जलमग्न हो गई। नदी किनारे बसे गांवों के ग्रामीणों में दहशत है। नदी से जुड़ा बांक नाला भी उफान पर है, जिससे निचले इलाकों के खेतों में पानी भर गया।

    किसान मुन्नीलाल, रामभरोसे, शिवबालक, राजाराम, रामसुमिरन, रामकुमार ने बताया कि बंधा टूटने के बाद पानी तेजी से तालाबों और फिर कल्यानी तक पहुंच गया। किसानों ने बताया कि जलस्तर जल्द नहीं घटा तो धान समेत अन्य फसलें पूरी तरह बर्बाद हो सकती हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से टूटे बंधे की तत्काल मरम्मत कराने, प्रभावित गांवों का निरीक्षण करने और फसल नुकसान का सर्वे कराकर उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है।

    बंथरा में सई नदी का जलस्तर बढ़ने से फसलों को नुकसान
    बंथरा क्षेत्र से होकर गुजरने वाली सई नदी में जलस्तर अचानक बढ़ने से इलाके में हड़कंप मच गया है। नदी का जलस्तर 12 फीट तक पहुंच जाने के कारण आसपास के सैकड़ों किसानों की धान, उड़द और तिल्ली की फसलें पूरी तरह से डूबकर नष्ट हो गई हैं। पानी लगातार नए रिहायशी और ग्रामीण इलाकों की ओर रुख कर रहा है।

    अस्पताल की इमारत और गांवों तक पहुंचा पानी
    नदी का जलस्तर बढ़ने से पानी लटऊवा, दाराब नगर बरकोता, तेरवा, गोड़वा, कल्लन खेड़ा, बेंती और बनी गांव की ओर तेजी से फैल रहा है। स्थिति यह है कि नदी किनारे स्थित बनी गांव के पास प्रसाद अस्पताल की इमारत तक भी बाढ़ का पानी पहुंच चुका है। वर्तमान में नदी का जलस्तर करीब 12 फीट है। यदि इसमें 4 से 5 फीट की और बढ़ोतरी होती है, तो नदी का पानी कई अन्य रिहायशी गांवों में भी घुस जाएगा। बनी गांव निवासी वरिष्ठ नागरिक और समाजसेवियों के अनुसार, वर्ष 1962 में सई नदी का जलस्तर करीब 15 फीट तक चला गया था, जिससे बनी, कल्लन खेड़ा, बेंती, सैदपुर और गोदौली सहित कई गांव पूरी तरह जलमग्न हो गए थे।

    गोमती बैराज से दो गेट पूरे खुले, जलस्तर नियंत्रित
    गोमती नदी के जलस्तर को नियंत्रित करने के लिए सिंचाई विभाग ने गोमती बैराज के दो गेट पूरी तरह से खोल दिये हैं। शारदा नहर खंड-दो के अधिशासी अभियंता मुकेश वैश्य ने बताया कि जल निकासी के लिए गुरुवार को गोमती बैराज के दो गेट को पूरा खोल दिया गया। वहीं तीन अन्य गेट करीब दो फुट तक खोला गया है। फिलहाल चिंता की कोई बात नहीं है। गुरुवार को भी गऊघाट पर गोमती का जलस्तर 349.5 फुट बना रहा। जोकि सामान्य से करीब ढ़ाई फुट अधिक है।

  • UP Election 2027: डिंपल यादव बनाम चारू चौधरी, अखिलेश-जयंत की सियासी जंग में बहुरानियों की एंट्री

    UP Election 2027: डिंपल यादव बनाम चारू चौधरी, अखिलेश-जयंत की सियासी जंग में बहुरानियों की एंट्री

    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में महिलाओं पर सभी दलों का फोकस है. सभी राजनीतिक दल भली भांति समझते हैं कि अगर महिलाएं उनके साथ आ गईं तो चुनाव में जीत दर्ज करना बिलकुल आसान हो जाएगा. क्योंकि महिलाएं जाति और धर्म से ऊपर उठकर वोट करती हैं. खास बात यह है कि वह जिस पार्टी का समर्थन करती हैं तो दिल खोलकर. इसी वजह से बीजेपी, सपा, कांग्रेस, आरएलडी समेत तमाम राजनीतिक दल महिलाओं पर डोरे डालने में जुटी हैं। 

    समाजवादी पार्टी पर हमेशा से गुंडागर्दी फैलाने के आरोप लगते रहे हैं. इस कहा जाता है कि महिलाएं सपा से दूरी बनाती हैं. इस नैरेटिव को बदलने के लिए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव इस बार पत्नी डिंपल यादव को प्रमुखता से आगे करते दिख रहे हैं. डिंपल की सक्रियता को लेकर सोशल मीडिया पर काफी बातें हो रही है, लेकिन इसी बीच जयंत चौधरी ने अपनी पत्नी चारू चौधरी को चुनावी मंच पर लेकर आ गए हैं. अब चारू सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं. लोग डिंपल और चारू की तुलना भी करने लगे हैं। 

    मंच पर पहुंचते ही चारू ने अखिलेश यादव को निशाने पर लिया
    गुरुवार को सहारनपुर में राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) की रैली में जयंत चौधरी की पत्नी चारू चौधरी भी भाषण देने पहुंचीं. चारू ने लिखा हुआ भाषण पढ़ने के बजाय खुद से पूरे कॉन्फिडेंस के साथ भाषण दीं. उनका भाषण भले ही दो मिनट का रहा, लेकिन उसमें ही उन्होंने ऐसी बातें कहीं जो चर्चा का विषय बन गया है. चारू चौधरी ने बिना नाम लिए अखिलेश यादव को निशाने पर लिया और कहा- ‘किसी को भी यह अधिकार नहीं है कि वो आपका अपमान करें या आपको सिखाएं और समझाएं. इस तरीके की बयानबाजी सिर्फ उनकी मानसिकता दर्शाता है. उनका अहंकार दर्शाता है. सच तो यह है कि यह लोकतंत्र है. सरकार किसकी बन रही है, कौन आ रहा है, जा रहा है, यह फैसला सिर्फ आप करते हैं। 

    चारू चौधरी का यह बयान अखिलेश यादव के उस तंज का जवाब था जिसमें, उन्होंने जयंत चौधरी का नाम लिए बगैर कहा था कि जिसको ‘चवन्नी से रुपया बनाया’ वो भी उधर भाग गए. जयंत चौधरी की पत्नी पूरे आत्मविश्वास के साथ मंच संभालती दिखीं. उन्होंने अपने छोटे भाषण में ही एनडीए के ज्यादा से ज्यादा प्रत्याशियों को जीत दिलाकर लखनऊ भेजने की अपील की. चारू चौधरी भले ही 2009 से पति जयंत के लिए चुनावी रैलियां और रोडशो करती रही हैं, लेकिन वह एंटरप्रेन्योर भी हैं. वह साउथ दिल्ली में ज्वेलरी और कपड़ों का फैशन ब्रांड शोरूम चलाती हैं. उन्होंने अभी तक कोई चुनाव नहीं लड़ा है और ना ही विधानमंडल या संसद की सदस्य बनी हैं। 

    डिंपल यादव को आगे कर रहे हैं अखिलेश यादव
    वहीं समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव 2012 उपचुनाव में पहली बार निर्विरोध कन्नौज से सांसद चुनी गई थीं. 2014 के लोकसभा चुनाव में वह दोबारा कन्नौज से चुनाव जीतीं. 2022 में तीसरी बार मुलायम सिंह यादव के निधन से खाली हुई मैनपुरी सीट पर हुए उपचुनाव में डिंपल यादव सांसद चुनी गईं. 2024 के लोकसभा चुनाव में मैनपुरी से जीत दर्ज कर वह अभी सांसद हैं। 

    पिछले दिनों जंतर मंतर पर GEN-Z के आंदोलन में अखिलेश यादव की गैरमौजूदरगी में डिंपल यादव छात्रों की अगुवाई करती दिखीं. इसके बाद छात्रों पर हुए लाठीचार्च के बाद डिंपल जिस तरह से घायल छात्रों के साथ खड़ी दिखीं उसके बाद सोशल मीडिया पर उनकी इस छवि की काफी तारीफ हुई। 

    पिछले दिनों सपा प्रमुख आगामी यूपी चुनाव को लेकर महिलाओं के लिए बड़ी घोषणाएं करने के लिए मीडिया के सामने आए थे. इस दौरान महिलाओं के लिए घोषणाएं करने की जिम्मेदारी डिंपल यादव को ही दी गई. पत्रकारों के सामने डिंपल यादव ने घोषणा की कि अगर समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है तो राज्य की महिलाओं को हर साल 40 हजार रुपये दिए जाएंगे. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव ने डिंपल को पत्रकारों के सवालों का भी जवाब देने के लिए भी प्रोत्साहित करते दिखे. डिंपल ने भी बेहद मजबूती के साथ पत्रकारों के सवालों का मंजे हुए राजनेता की तरह जवाब दिया। 

    जहां तक डिंपल की एजुकेशन का सवाल है तो वह लखनऊ यूनिर्सिटी से बी कॉम हैं. वहीं चारू दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट हैं. इसके अलावा चारू लंदन से ज्वेलरी डिजाइनिंग का कोर्स भी कर चुकी हैं. जहां चारू भी पंजाबी फैमिली से होने के बावजूद जाट परिवार की बहू बनी हैं, वहीं डिंपल यादव राजपूत परिवार से होते हुए भी यादव परिवार की दुल्हन हैं. दोनों ने ही नारी सशक्तिकरण का परिचय देते हुए अपनी मर्जी से शादियां की हैं. 2027 के विधानसभा चुनाव में देखना दिलचस्प होगा कि दोनों देवियां किस रूप में अपने-अपने दल और गठबंधन के लिए वोट जुटा पाती हैं। 

  • मथुरा में योगी आदित्यनाथ का तीखा वार, ‘हम राम-कृष्ण को मानने वाले, बाबर-औरंगजेब के विरोधी’

    मथुरा में योगी आदित्यनाथ का तीखा वार, ‘हम राम-कृष्ण को मानने वाले, बाबर-औरंगजेब के विरोधी’

    मथुरा
    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मथुरा स्थित श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर में दर्शन-पूजन के बाद आयोजित कार्यक्रम में कहा कि उनकी सरकार प्रभु श्री राम, कृष्ण कन्हैया, बाबा विश्वनाथ और मां विंध्यवासिनी पर विश्वास करती है. उन्होंने कहा कि 1528 में विदेशी आक्रांताओं ने अयोध्या में आस्था को समाप्त करने का प्रयास किया था, लेकिन जो खुद को अविजित मानते थे वे आज समाप्त हो चुके हैं. सीएम योगी ने चेतावनी दी कि बाबर और औरंगजेब के अनुयायी अपनी आदतों से मजबूर होकर फिर से समाज में विष वमन करने और राष्ट्रविरोधी तत्वों के हौसले बढ़ाने में जुटे हैं। 

    विरासत और जन आस्था पर योगी का बयान
    संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि योग माया के प्रति अटूट आस्था की वजह से ही विंध्यवासिनी धाम को एक भव्य परिसर मिल सका है. उन्होंने सवाल उठाया कि जिन लोगों की आस्था बाबर और औरंगजेब में होगी, वे जनता की आस्था को कभी सम्मान नहीं दे पाएंगे. सीएम योगी ने स्पष्ट किया कि जिनकी आस्था आक्रांताओं में है, वे धार्मिक भावनाओं का आदर नहीं कर सकते। 

    सुरक्षा और खुशहाली पर खतरे का जिक्र
    मुख्यमंत्री ने विरोधियों पर हमला बोलते हुए कहा
    कि ये तत्व समाज में जहर घोलकर आम जनता की सुरक्षा में सेंध लगाना चाहते हैं. वे युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने, बहनों-बेटियों की सुरक्षा को खतरे में डालने, किसानों की खुशहाली पर डकैती डालने और उभरते हुए कारीगरों व हस्तशिल्पियों को फिर से लाचार बनाने का प्रयास कर रहे हैं। 

    डबल इंजन सरकार का कड़ा संदेश
    सीएम योगी ने जोर देकर कहा कि समाज विरोधी और राष्ट्र विरोधी तत्वों की इन साजिशों को सफल नहीं होने दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की डबल इंजन सरकार इन सभी गलत मंसूबों पर पूरी तरह पानी फेरेगी. सरकार जनता की सुरक्षा, समृद्धि और विकास के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इन मंसूबों को कभी पूरा नहीं होने देगी। 

    मुख्यमंत्री ने कहा- 5200 वर्ष पूर्व धर्म, सत्य और न्याय की स्थापना के लिए श्री हरि विष्णु के पूर्ण अवतार के रूप में श्री कृष्ण कन्हैया इसी पवित्र स्थल पर प्रकट हुए थे. अनेक आक्रमणों और आस्था थोपने के प्रयासों के बावजूद सनातन धर्म को कोई मिटा नहीं सका. जिन लोगों ने इसे मिटाने का दुस्साहस किया, वे खुद मिट्टी में मिल गए. आज भी ब्रजभूमि में श्री कृष्ण और राधा रानी की स्मृतियां भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। 

  • लोकसभा के झटके के बाद BJP ने कसी कमर, यूपी में संगठन से लेकर चुनावी रणनीति तक होगी समीक्षा

    लोकसभा के झटके के बाद BJP ने कसी कमर, यूपी में संगठन से लेकर चुनावी रणनीति तक होगी समीक्षा

    लखनऊ
     यूपी विधान सभा चुनाव को प्रतिष्ठा का सवाल बना चुकी भाजपा संगठन बनाने के बाद अब पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं को चुनावी होमवर्क देगी। सात सितंबर को जहां यूपी के नए प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े लखनऊ में डेरा डालेंगे, वहीं राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का भी दौरा होगा।

    राष्ट्रीय नेतृत्व प्रदेश एवं क्षेत्रीय टीमों से मिलकर चुनावी धड़कन की जानकारी लेगा। मोर्चों के साथ भी अलग बैठक होगी। वहीं, माह के अंत में गृहमंत्री अमित शाह के दौरे की रचना बनाई जा रही है।

    यूपी विधान सभा चुनाव ज्यादा दूर नहीं है। 2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा को भारी झटका लगा। अगर चुनावी परिणाम के आधार पर आकलन करें तो ढाई सौ से ज्यादा विधान सभाओं में सपा और सहयोग दल आगे रहे। यह भाजपा के लिए खतरे की घंटी है।

    इसके बाद से भगवा खेमा संगठन एवं जातीय समीकरण कसने में जुटा है। हालांकि संगठन एवं जनप्रतिनिधियों में मतभेद एवं कार्यकर्ताओं के थकने की वजह से ज्यादातर अभियानों का रंग फीका रहा है। जिलाध्यक्षों को बनाने एवं जिलों की टीमों के गठन में भारी विलंब हुआ, वहीं कई क्षेत्रों में पदाधिकारियों को लेकर अंदरुनी लड़ाई खुलकर सामने आई। पदाधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए गए।

    इस बीच प्रदेश की टीम में भारी बदलाव किया गया, लेकिन यहां भी कई ऐसे नाम शामिल किए गए, जिनका संगठन में कोई अनुभव नहीं रहा। अब क्षेत्रीय टीमों की घोषणा कर दी गई है, जिसके बाद विनोद तावड़े के दौरे की उपयोगिता बढ़ गई है। तावड़े ने प्रदेश की टीम में बड़े बदलाव की पटकथा लिखी, जिसका असर 2027 विधान सभा चुनाव में टिकटों में बदलाव में भी दिखेगा।

    वह सालभर से यूपी के दौरों पर निकल रहे हैं। राष्ट्रीय संगठन महामंत्री प्रदेशभर के संगठनों के साथ संवाद करेंगे। नितिन नवीन चार एवं पांच जुलाई को लखनऊ में थे, जहां उन्होंने प्रदेश की टीम के साथ मुलाकात करने के साथ ही सहयोगी दलों से भी मिले।

    बुजुर्ग एवं अनुभवी कार्यकर्ताओं को साधा, वहीं दोनों डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य एवं ब्रजेश पाठक के यहां पहुंचकर बड़ा संदेश दिया। सीएम योगी आदित्यनाथ से भी मिले थे। अब नई तैयारियों के साथ लखनऊ पहुंचेंगे, जहां से वह काशी एवं अयोध्या जा सकते हैं।

    इस बीच गृहमंत्री अमित शाह का यूपी दौरा प्रस्तावित है। इससे पहले वह 23 जनवरी को लखनऊ आए थे, जहां उन्होंने प्रदेश भाजपा मुख्यालय पर पदाधिकारियों से भी मुलाकात की थी।

  • जन्माष्टमी पर पंचरत्नी पोशाक में सजेगा ठाकुरजी का स्वरूप, रात 12 बजे होगा जन्माभिषेक

    जन्माष्टमी पर पंचरत्नी पोशाक में सजेगा ठाकुरजी का स्वरूप, रात 12 बजे होगा जन्माभिषेक

    मथुरा
    अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र तथा श्रीकृष्ण कृष्ण जन्मभूमि न्यास अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास महाराज ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पर्व पर मथुरा सहित देशवासियों के प्रति शुभकामना व्यक्त करते हुए संदेश पत्र जारी किया। इस पत्र में उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य के कारणों इस साल श्रीकृष्ण जन्मभूमि व्यक्तिगत रूप से नहीं पहुंच पा रहा हूं। इसका मुझे खेद है। उन्होंने पत्र में अपनी भावना व्यक्त करते हुए कहा कि अखाड़ा परिषद की ओर से कार सेवा का निर्णय लिया जाता है तो मैं भी कार सेवा में सहभागी रहूंगा।

    उन्होंने भरोसा जताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में मंदिर निर्माण का मार्ग अवश्य प्रशस्त होगा। उनके मीडिया सलाहकार शरद शर्मा ने इस पत्र को सोशल मीडिया में जारी करते हुए बताया कि महंत नृत्य गोपाल दास महाराज लगातार जन्माष्टमी पर मथुरा कृष्ण जन्मभूमि पर स्वयं उपस्थित हो कर कृष्ण लला का अभिषेक पूजन करते रहे हैं। उन्हें इस जन्माष्टमी में मथुरा नहीं पहुंच पाने का दुख है। वह पूर्ण स्वस्थ होने पर अगले साल अवश्य सम्मिलित होंगे।श्

    जन्मोत्सव में शरीक होने के लिए लाखों श्रद्धालु पहुंचे मथुरा
    आपको बता दें कि श्रीकृष्ण जन्मस्थान समेत समूचे ब्रज में पालनहार का जन्मोत्सव शुक्रवार की रात होगा। अपने आराध्य के जन्मोत्सव में शरीक होने के लिए लाखों श्रद्धालु यहां पहुंच चुके हैं। हर ओर उल्लास और उमंग के बीच भक्तों के टोल नाचते-थिरकते नजर आ रहे हैं। समूचा शहर विद्युतीय प्रकाश और चुनरियों से दुल्हन की तरह सजा नजर आ रहा है। जन्मोत्सव पर उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए मथुरा-वृंदावन को सात जोन और 35 सैक्टर में विभक्त किया है। साढ़े पांच हजार से छह हजार पुलिस, पीएसी और आरएएफ की तैनाती की गयी है। ड्रोन कैमरों से निगरानी की जा रही है। योगीराज श्रीकृष्ण का 5253वें जन्म दिवस की धूम ब्रजभूमि में गुरुवार से ही शुरु हो गयी। श्रीकृष्ण जन्मस्थान के मुख्यद्वार पर सुबह से श्रद्धालुओं की कतारें लग गयीं, जो निरंतर बड़ी होती जा रही थी।

    जन्माष्टमी पर ठाकुरजी को पंचरत्नी पोशाक धारण कराई जाएगी
    गोविंद नगर स्थित मुख्य द्वार से श्रद्धालुओं के प्रवेश की व्यवस्था रखी गयी है। श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर विराजमान केशवदेव जी, मां योगमाया, श्रीगर्भगृह, श्रीराधाकृष्ण युगल सरकार मंदिर में विशिष्ट पूजन, सहस्त्रार्चन, जन्माभिषेक एवं आरती के दिव्य आयोजन होंगे। जन्माष्टमी पर ठाकुरजी को पंचरत्नी पोशाक धारण करायी जाएगी। इस विशिष्ट पोशाक पर समुद्र मंथन से प्राप्त रत्नों से पंचरत्न कामधेनु गाय, पांचजन्य शंख, अमृत कलश, ऐरावत हाथी एवं कल्प वृक्ष को विशेष रूप से उकेरा गया है। इसके साथ ही भागवत भवन में ठाकुरजी कलहंस के पुष्प बंगले में विराजमान होंगे। ठाकुरजी का जन्माभिषेक मध्य रात्रि 12 बजे होगा।

  • PNB के करेंसी चेस्ट तक कैसे पहुंचे ₹17 करोड़ के नकली नोट? NIA जांच में सामने आएंगे बड़े राज

    PNB के करेंसी चेस्ट तक कैसे पहुंचे ₹17 करोड़ के नकली नोट? NIA जांच में सामने आएंगे बड़े राज

    सहारनपुर
    यूपी के सहारनपुर में पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की करेंसी चेस्ट में करोड़ों के नकली नोट मिलने के मामले में जांच का दायरा और बढ़ गया है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की आठ सदस्यीय टीम ने जांच की कमान संभाल ली है। टीम बुधवार रात सहारनपुर पहुंची और इसके बाद से मामले से जुड़े दस्तावेजों, बैंकिंग रिकॉर्ड और नकली नोटों के करेंसी चेस्ट तक नोट पहुंचने के रास्ते की पड़ताल शुरू कर दी है।

    पीएनबी की घंटाघर स्थित करेंसी चेस्ट में नोटों की जांच के दौरान 17 करोड़ से अधिक की नकली करेंसी मिलने का मामला सामने आया है। इतनी बड़ी मात्रा में नकली नोट मिलने के बाद बैंक अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है। करेंसी चेस्ट में इतनी बड़ी मात्रा में नकली नोट पहुंचना जांच एजेंसियों के लिए गंभीर सवाल बन गया है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतनी बड़ी रकम के नकली नोट बैंक की करेंसी चेस्ट तक आखिर किस माध्यम से पहुंचे।

    सीधे करेंसी चेस्ट पहुंचे या किसी बैंक से?
    एनआइए टीम नकली करेंसी के स्रोत का पता लगाने में जुटी है। जांच एजेंसी यह जानने का प्रयास कर रही है कि नकली नोट सीधे किसी माध्यम से करेंसी चेस्ट तक पहुंचे या किसी बैंक शाखा या अन्य स्तर से होते हुए यहां तक आए। जांच के दौरान नोटों के करेंसी चेस्ट में आने की पूरी प्रक्रिया को खंगाला जा रहा है। इसके साथ ही कैश के आवागमन, नोटों की गिनती और जांच प्रक्रिया तथा संबंधित रिकॉर्ड को भी जांच के दायरे में लिया गया है।

    बैंक के रिकॉर्ड और दस्तावेजों की भी पड़ताल
    एनआईए टीम बैंक में नकदी के लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जांच कर रही है। अधिकारियों की नजर उन प्रक्रियाओं पर है, जिनके तहत करेंसी चेस्ट में नकदी जमा होती है और उसकी जांच की जाती है। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि नकली नोटों की पहचान बैंकिंग प्रक्रिया के दौरान पहले क्यों नहीं हो सकी और वे किस स्तर पर करेंसी चेस्ट तक पहुंच गए।

    कहीं संगठित नेटवर्क से तो नहीं जुड़े तार?
    पीएनबी करेंसी चेस्ट में 17 करोड़ से अधिक की नकली करेंसी मिलने का मामला महज नकली नोट बरामद होने तक सीमित नहीं दिख रहा है। इतनी बड़ी मात्रा में नकली नोट आखिर करेंसी चेस्ट तक पहुंची कैसे? क्या यह किसी बैंक शाखा से सामान्य बैंकिंग प्रक्रिया के तहत यहां पहुंची या फिर इसके पीछे कोई सुनियोजित और संगठित नेटवर्क सक्रिय था? सबसे बड़ा सवाल यही है कि करोड़ों की नकली करेंसी बैंकिंग सिस्टम की इतनी महत्वपूर्ण कड़ी तक पहुंच गई और इसकी भनक समय रहते क्यों नहीं लगी।

    माध्यम ही है जांच का अहम बिंदु
    जांच का अहम बिंदु यह है कि नकली नोट किन माध्यमों से करेंसी चेस्ट तक पहुंचे। एजेंसियां इस संभावना को भी खंगाल रही हैं कि कहीं नकली करेंसी किसी संगठित गिरोह के जरिए अलग-अलग स्तरों से होते हुए बैंक तक तो नहीं पहुंचाई गई। यदि जांच में नेटवर्क के संकेत मिलते हैं तो मामला केवल बैंकिंग अनियमितता नहीं, बल्कि बड़े नकली करेंसी सिंडिकेट तक पहुंच सकता है।

    बैंक अधिकारी-कर्मचारी भी जांच के दायरे में
    करेंसी चेस्ट में नकदी पहुंचने, उसकी गिनती और जांच की प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ हो सकती है। जांच एजेंसी यह पता लगाएगी कि नकली नोट किस स्तर पर सिस्टम में शामिल हुए और उनकी पहचान पहले क्यों नहीं हो सकी। फिलहाल एनआइए की आठ सदस्यीय टीम मामले की जांच में जुटी है। टीम बुधवार रात सहारनपुर पहुंची थी। बैंक के रिकॉर्ड, कैश मूवमेंट और अन्य दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं।

    निलंबित प्रबंधक फरार, गिरफ्तारी को कई राज्यों में दबिश
    पंजाब नेशनल बैंक की सोफिया मार्केट स्थित करेंसी चेस्ट में सामने आए जाली नोट और नकदी गायब होने के मामले में पुलिस ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। नामजद और निलंबित बैंक अधिकारियों के खिलाफ सर्च वारंट जारी होने के बाद

    अब उनकी गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।
    पुलिस के अनुसार करेंसी चेस्ट प्रकरण में दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज हैं। इनमें एक मुकदमा जाली नोट मिलने से संबंधित है, जबकि दूसरे में करीब 4.30 लाख रुपये गायब होने की शिकायत दर्ज कराई गई है। पीएनबी के नोडल अधिकारी अरुण कुमार चौबे की तहरीर पर कोतवाली सदर बाजार में वरिष्ठ प्रबंधक मंडल कार्यालय रवि कुमार कांसे, करेंसी चेस्ट प्रबंधक सुशील शर्मा और खेरा बाजार जगाधरी करेंसी चेस्ट प्रबंधक अमित कुमार के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। प्रारंभिक जांच में भूमिका संदिग्ध पाए जाने के बाद बैंक प्रबंधन ने तीन अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया था। इनमें रवि कुमार कांसे, सुशील शर्मा और अमित कुमार शामिल हैं। अब उनकी गिरफ्तारी के प्रयास तेज है।

  • बेटियों के सम्मानजनक विवाह का सहारा बनी योगी सरकार, सामूहिक विवाह योजना ने पकड़ी रफ्तार

    बेटियों के सम्मानजनक विवाह का सहारा बनी योगी सरकार, सामूहिक विवाह योजना ने पकड़ी रफ्तार

    लखनऊ

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बेटियों के सम्मानजनक विवाह का मजबूत सहारा बन रही है। योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 17,758 जोड़ों का विवाह संपन्न कराया जा चुका है। सरकार ने इस वित्तीय वर्ष में प्रदेश में 72,448 सामूहिक विवाह कराने का लक्ष्य निर्धारित किया है। योजना की बढ़ती रफ्तार से बड़ी संख्या में जरूरतमंद परिवारों को विवाह के खर्च की चिंता से राहत मिल रही है।

    योजना के तहत 72,787 आवेदन प्राप्त हुए हैं। आवेदनों की जांच के बाद 20,042 आवेदन स्वीकृत किए गए, जबकि 7,245 आवेदन अपात्र पाए गए। योगी सरकार का जोर पात्र लाभार्थियों तक योजना का लाभ पारदर्शी तरीके से पहुंचाने पर है।

    पीलीभीत बना प्रदेश में अव्वल, दूसरे स्थान पर शाहजहांपुर

    सामूहिक विवाह संपन्न कराने में पीलीभीत प्रदेश में सबसे आगे है। यहां अब तक 1,271 जोड़ों का विवाह कराया जा चुका है। वहीं 1,063 विवाह के साथ शाहजहांपुर दूसरे स्थान पर है। इसके अलावा सुल्तानपुर में 1,040 और रामपुर में 1,031 जोड़ों का विवाह संपन्न कराया गया है। जिलों में लगातार आयोजित हो रहे सामूहिक विवाह समारोह योजना को जमीनी स्तर पर गति दे रहे हैं।

    आर्थिक अभाव किसी बेटी के सम्मानजनक विवाह में बाधा न बने

    समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने कहा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार का संकल्प है कि आर्थिक अभाव किसी बेटी के सम्मानजनक विवाह में बाधा न बने। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना इसी संकल्प को साकार कर रही है। हमारा प्रयास है कि योजना का लाभ पूरी पारदर्शिता के साथ वास्तविक और पात्र परिवारों तक पहुंचे, जिसके लिए तकनीक के माध्यम से सत्यापन व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है।

    तकनीक से मजबूत हुई सत्यापन व्यवस्था, सीधे खाते में पहुंचेगी सहायता

    समाज कल्याण विभाग के निदेशक संजीव सिंह ने बताया कि योजना में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए तकनीक का प्रभावी इस्तेमाल किया जा रहा है। आवेदकों के सत्यापन के लिए ई-केवाईसी की व्यवस्था की गई है। वहीं, ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के माध्यम से आय और जाति प्रमाण पत्रों का डिजिटल सत्यापन किया जा रहा है। शीघ्र ही आधार आधारित भुगतान व्यवस्था भी लागू की जाएगी, जिससे अनुदान राशि पात्र लाभार्थी के आधार से जुड़े बैंक खाते में सीधे पहुंच सकेगी। योजना के तहत प्रत्येक जोड़े को 1 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। इसमें 64 हजार रुपये गृहस्थी बसाने, 21 हजार रुपये वैवाहिक उपहार सामग्री और 15 हजार रुपये विवाह समारोह की आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए निर्धारित हैं।