Category: उत्तर प्रदेश

  • मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में पीएम सूर्य घर योजना में यूपी ने और तेज की रफ्तार

    मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में पीएम सूर्य घर योजना में यूपी ने और तेज की रफ्तार

    लखनऊ

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के तहत घरेलू रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन में उत्तर प्रदेश तेजी से देश में प्रथम स्थान की ओर बढ़ रहा है। अगस्त 2026 के प्रदर्शन ने प्रदेश की इस बढ़त को और मजबूत किया है। वर्तमान गति बनी रही तो शीघ्र ही उत्तर प्रदेश घरेलू रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन में भारत में प्रथम स्थान हासिल कर सकता है। अगस्त 2026 तक उत्तर प्रदेश में 7,92,959 संचयी सोलर इंस्टॉलेशन हो चुके हैं। अगस्त माह में ही प्रदेश में 73,716 इंस्टॉलेशन किए गए। इस दौरान उत्तर प्रदेश की औसत दैनिक इंस्टॉलेशन गति 2,378 प्रतिदिन रही, जो देश के प्रमुख राज्यों में सबसे तेज गति में शामिल है।

    नंबर वन की रेस में यूपी

    संचयी इंस्टॉलेशन में उत्तर प्रदेश 7,92,959 इंस्टॉलेशन में दूसरे स्थान पर है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अगस्त में उत्तर प्रदेश की औसत दैनिक गति 2,378 इंस्टॉलेशन रही। यानी उत्तर प्रदेश प्रतिदिन औसतन 780 इंस्टॉलेशन अधिक कर रहा है। यदि यही रफ्तार बनी रहती है, तो अक्टूबर 2026 के दूसरे सप्ताह के आसपास उत्तर प्रदेश घरेलू रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन में देश का नंबर-1 राज्य बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करेगा।

    आंकड़े भी बता रहे उत्तर प्रदेश की रफ्तार

    संचयी इंस्टॉलेशन    7,92,959
    अगस्त 2026 इंस्टॉलेशन    73,716
    अगस्त औसत दैनिक गति    2,378/दिन
    अनुमानित ओवरटेक समय लगभग 41 दिन  ।

  • काशी में अपराधियों पर तीसरी नजर का शिकंजा, कैमरों ने सुलझाईं हत्या और ढाई करोड़ की चोरी की गुत्थी

    काशी में अपराधियों पर तीसरी नजर का शिकंजा, कैमरों ने सुलझाईं हत्या और ढाई करोड़ की चोरी की गुत्थी

     वाराणसी
     स्मार्ट सिटी वाराणसी में अपराधियों के लिए कहर बन रही तीसरी नजर।अनजाने में भी अपराधी ने शहर की दहलीज लांघी तो वाहनों के नंबर प्लेट व चेहरे पहचाने वाले कैमरे अपना काम कर गुजरेंगे। पुलिस के लिए चेहरे व वाहनों के नंबर प्लेट ही अपराधियों के बाहें मरोड़ने के लिए पर्याप्त साबित होते हैं।

    आंकड़ों के आइने में दो वर्षों में 671 पर्यटकों के विभिन्न गाड़ियों में छूटे उनके सामान ढूढ़ने और 99 गुमशुदा को अपनों से मिलाने स्पष्ट है कि काशी में तीसरी नजर (त्रिनेत्र कमांड सेंटर) की निगाहें सबके ऊपर हैं, जो शरीफों को संतुष्ट दे रहीं तो अपराधियों पर कहर बरपा रहीं हैं।

    1
    गाजीपुर के होटल मालिक की हत्या, काशी के एएनपीआर कैमरों ने दिए सुराग
    गाजीपुर में बिंदु होटल मालिक के बेटे को कटरा गैंग के बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर दी। बदमाश वारदात के बाद वाराणसी की ओर भागे। वाराणसी में बदमाशों ही एंट्री के साथ ही उनका डिजीटल पीछा शुरू हो गया। विशेषज्ञों ने कैमरों के फुटेजे का विश्लेषण किया तो एएनपीआर (आटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) कैमरे की सहायता से वाहन का नंबर प्लेट भी ट्रेस कर लिया गया।वाहन नंबर का सुराग मिलते ही पुलिस के लिए मर्डर मिस्ट्री का सुलझाना आसान हो गया।

    अपाचे बाइक की पहचान से खुली ढाई करोड़ चोरी
    बीते तीन जून को शिवपुर (वाराणसी) में लगभग ढाई करोड़ की चोरी हुई। पुलिस जांच में जुटी तो शिवपुर, रामेश्वरम मोड़, अकथा, पहाड़िया सहित विभिन्न स्थानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज का गहन विश्लेषण करने पर अपाचे बाइक सवार तीन संदिग्ध युवक दिख गए। अलग-अलग कैमरों की फुटेज को जोड़कर संदिग्धों की गतिविधि ट्रैक की गई, उनकी पहचान और लोकेशन मिल गई।इसका असर हुआ कि चोरी गए एक-एक जेवरात मिल गए।

    आधुनिक कैमरे और क्राइम कंट्रोल में उनके कार्य
        एएनपीआरए कैमरा : वाहन की नंबर प्लेट की पहचान करने तथा नियम उल्लंघन करने वाले वाहनों की जानकारी प्राप्त करने में सक्षम।
        आरएलवीडी कैमरा : रेड लाइट उल्लंघन पर नजर रखने में सक्षम।
        फिक्स सीसीटीवी कैमरा : सामान्य निगरानी में सक्षम।
        पीटीजेड कैमरा : भीड़ नियंत्रण को दूर तक चारो तरफ निगरानी तथा ज़ूम करके एक-एक गतिविधि दिखाने में सक्षम।
        एफआरएस कैमरा : चेहरे को पहचानने में सक्षम।

    2
    पूरे ज‍िले में
    2422 कैमरों की निगाहों से पूरे शहर को देखता त्रिनेत्र भवन।
    इनके जिम्मे है, त्रिनेत्र भवन की जिम्मेदारी
        सब इंस्पेक्टर राजेश सिंह (प्रभारी)
        हेड कांस्टेबल करन कुमार
        कांस्टेबल उपेंद्र पासवान
        ओमप्रकाश शाह
        कांस्टेबल सतीश यादव

    संसाधन के साथ-साथ हमारी पुलिस टीम की सक्रियता और रुचि के कारण हम बेहतर कर पा रहे हैं। पर्यटकों के खोए लाखों के सामान जब हम ढूढ़कर कुछ घंटे में लौटाते हैं, तो काशी की कमिश्नरेट पुलिस की साख पूरे देख में बढ़ती है। इसी तरह वाराणसी में क्राइम कंट्रोल करने संग हम आस-पड़ोस में हो रही अपराधिक घटनाओं के राजफाश में भी मददगार बन रहे हैं।
    वैभव बांगर, एडीसीपी काशी जोन।

  • योगमाया और केशवदेव मंदिर में भी किया दर्शन-पूजन, परिसर में विधि- विधान से किया गोपूजन

    योगमाया और केशवदेव मंदिर में भी किया दर्शन-पूजन, परिसर में विधि- विधान से किया गोपूजन

    मथुरा

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने ब्रज प्रवास के दूसरे दिन श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर शुक्रवार सुबह श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने पूरे विधि-विधान व आस्था के साथ मुख्य गर्भगृह में विराजमान 'लाला' (बाल कृष्ण) के दर्शन और विशेष पूजन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। मुख्यमंत्री के रूप में श्रीकृष्ण जन्मभूमि का यह उनका 20वां दर्शन रहा। मंदिर परिसर में आगमन पर श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के पदाधिकारियों ने उनका भव्य स्वागत एवं अभिनंदन किया।

    चांदी से सजे गर्भगृह की अद्भुत छटा निहारते रहे सीएम

    जन्माष्टमी के इस विशेष और दिव्य पर्व पर जन्मभूमि के मुख्य गर्भगृह की दीवारों को चांदी की परत लगाकर बेहद अलौकिक रूप से सजाया गया था। मुख्यमंत्री योगी काफी देर तक चांदी से सजे गर्भगृह की इस अद्भुत छटा और लाला के मनमोहक स्वरूप को भक्तिभाव से निहारते रहे। मुख्य गर्भगृह में दर्शन-पूजन के बाद सीएम ने परिसर में ही स्थित योगमाया मंदिर, केशवदेव मंदिर और भागवत भवन में भी जाकर दर्शन-पूजन किया और देश-प्रदेश की सुख-शांति व समृद्धि की मंगल कामना की।

    गोपूजन कर श्रद्धालुओं पर की पुष्प वर्षा

    मंदिर में पूजन-अर्चन से पहले मुख्यमंत्री ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर में गोमाता का विधिवत पूजन किया। इस पावन पर्व पर जन्मभूमि परिसर में मौजूद हजारों श्रद्धालुओं का अभिवादन स्वीकार करते हुए सीएम योगी ने उन पर देर तक पुष्प वर्षा की और सभी देशवासियों को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने जन्मभूमि परिसर में अपनी मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुति दे रहे उज्जैन से आए कलाकारों के मध्य पहुंचकर उनका उत्साहवर्धन किया और साथ में फोटो भी खिंचवाईं। सीएम योगी करीब 30 मिनट तक जन्मभूमि परिसर में रहे।

  • बाढ़ प्रभावितों की मदद में योगी सरकार का राहत तंत्र मुस्तैद, 17,544 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया

    बाढ़ प्रभावितों की मदद में योगी सरकार का राहत तंत्र मुस्तैद, 17,544 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया

    लखनऊ

    उत्तर प्रदेश में बाढ़ की स्थिति के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राहत एवं बचाव अभियान लगातार युद्धस्तर पर जारी है। उत्तर प्रदेश बाढ़ राहत आयुक्त कार्यालय के मुताबिक गुरुवार को प्रदेश के 26 जिलों में बाढ़ का असर रहा। करीब 3.53 लाख आबादी प्रभावित होने के बावजूद राहत एवं बचाव तंत्र की सक्रियता से अब तक कोई जन या पशु हानि नहीं दर्ज की गई है।प्रभावितों को 72,897 बाढ़ राहत किट और 3.67 लाख से अधिक लंच पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। 

    प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के साथ भोजन, राहत सामग्री और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। अब तक 17,544 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। अभी 4,847 लोग बाढ़ शरणालयों में रह रहे हैं। प्रदेश में कुल 1,312 बाढ़ शरणालय स्थापित किए गए हैं।

    1 हजार से ज्यादा मेडिकल टीमें सक्रिय
    राहत और बचाव अभियान को प्रभावी बनाने के लिए 1,634 बाढ़ चौकियां, 1,697 नाव-मोटरबोट और 1,068 मेडिकल टीमें सक्रिय हैं। इससे प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी के साथ जरूरतमंद लोगों तक तत्काल मदद पहुंचाई जा रही है।

    राहत सामग्री वितरण में भी तेजी
    योगी सरकार के राहत अभियान में प्रभावित परिवारों तक भोजन और जरूरी सामग्री पहुंचाने पर विशेष जोर है। अब तक 72,897 बाढ़ राहत खाद्यान्न पैकेट और 3,67,551 लंच पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। इसके अलावा पशुओं के लिए 5 हजार क्विंटल से अधिक भूसा वितरित किया जा चुका है। स्वास्थ्य सुरक्षा के तहत 5.52 लाख से अधिक क्लोरीन टैबलेट और 1.87 लाख से अधिक ओआरएस पैकेट भी वितरित किए जा चुके हैं। बाढ़ से 45 हजार से अधिक पशु प्रभावित हैं, लेकिन अभी तक किसी पशु की मृत्यु नहीं हुई है। इसी तरह जनहानि की भी कोई सूचना नहीं मिली है।
     

    प्रदेश के बाढ़ प्रभावित जिले
    अमरोहा, अयोध्या, आजमगढ़, बदायूं, बलिया, बाराबंकी, बस्ती, चंदौली, फर्रुखाबाद, गाजीपुर, गोंडा, गोरखपुर, हरदोई, कासगंज, कानपुर, लखीमपुर खीरी, मिर्जापुर, मुरादाबाद, पीलीभीत, प्रयागराज, रायबरेली, रामपुर, संत कबीर नगर, शाहजहांपुर, उन्नाव और वाराणसी।

  • चित्रकूट में घटा मंदाकिनी का जलस्तर, 688 लोगों का रेस्क्यू, सीएम योगी के निर्देश पर राहत-बचाव अभियान जारी

    चित्रकूट में घटा मंदाकिनी का जलस्तर, 688 लोगों का रेस्क्यू, सीएम योगी के निर्देश पर राहत-बचाव अभियान जारी

    लखनऊ

    चित्रकूट में बाढ़ की चुनौती के बीच योगी सरकार के निर्देश पर जिला प्रशासन राहत और बचाव कार्यों को लेकर पूरी तरह सतर्क है। मंदाकिनी नदी का जलस्तर 29 अगस्त को 135.20 मीटर के उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद अब घटकर 128.00 मीटर पर आ गया है। उत्तर प्रदेश राहत आयुक्त कार्यालय के मुताबिक जलस्तर में गिरावट के बावजूद प्रशासन ने निगरानी और राहत कार्यों में कोई ढिलाई नहीं की है। अब तक 688 लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा चुका है। वहीं जिले में बाढ़ से कोई भी जनहानि या पशुहानि नहीं हुई है।

    बाढ़ की स्थिति के दौरान प्रशासन ने अब तक करीब 688 लोगों को सुरक्षित निकालकर राहत एवं सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया है। बचाव अभियान के लिए एनडीआरएफ की टीम के 30 सदस्य और एसडीआरएफ की दो टीमों के 27 सदस्य तैनात किए गए हैं। प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन की टीमें भी लगातार सक्रिय हैं।

    36 गांवों के 13,906 लोगों तक पहुंची मदद

    मंदाकिनी नदी में बढ़े जलस्तर से कर्वी के रामघाट सहित 19 गांव, राजापुर के 7 गांव और मानिकपुर के 10 गांव, यानी कुल 36 गांव प्रभावित हुए। इन क्षेत्रों में  13,906 लोगों तक मदद पहुंचाई गई। प्रशासन प्रभावित आबादी तक भोजन, राहत सामग्री और स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के काम में जुटा हुआ है।

    28,803 लंच पैकेट बांटे गए

    बाढ़ प्रभावित लोगों को तत्काल भोजन उपलब्ध कराने के लिए बड़े स्तर पर व्यवस्था की गई है। तहसील कर्वी में 24,530, राजापुर में 4,043 और मानिकपुर में 230 यानी कुल 28,803 लंच पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। इससे प्रभावित परिवारों को संकट के समय भोजन की तत्काल सुविधा मिली है।

    2,065 राहत किट का वितरण

    प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों तक जरूरी सामग्री पहुंचाने के लिए राहत किट का वितरण किया जा रहा है। अब तक कर्वी में 1,073, राजापुर में 796 और मानिकपुर में 196 यानी कुल 2,065 राहत किट वितरित की जा चुकी हैं। साथ ही अन्य प्रभावितों तक भी तेजी से राहत किट पहुंचाई जा रही है। वहीं प्रभावित लोगों को सुरक्षित आश्रय देने के लिए जिले में 18 बाढ़ शरणालय क्रियाशील हैं।

    मकान क्षति पर तत्काल आर्थिक सहायता

    जिले में बाढ़ से 653 मकानों के आंशिक क्षतिग्रस्त हुए हैं। इनमें से 188 मामलों में 7.52 लाख रुपये की सहायता राशि लाभार्थियों के खातों में भेजी जा चुकी है। वहीं पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त एक मामले में 1.20 लाख रुपये की सहायता दी गई है। शेष मामलों में भी भुगतान की प्रक्रिया जारी है।

    स्वास्थ्य और फसल क्षति पर भी नजर

    बाढ़ प्रभावित और संभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत रखने के लिए 28 मेडिकल टीमें एंबुलेंस और आवश्यक दवाओं के साथ स्वास्थ्य परीक्षण व दवा वितरण कर रही हैं। वहीं किसानों को राहत देने के लिए फसल क्षति का सर्वेक्षण भी कराया जा रहा है।
    12 चरवाहों और 2 हजार से अधिक भेड़ों को बचाया

    गाजीपुर में गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से डूहिया सरैया के पास नदी के टापू पर फंसे 12 चरवाहों और 2 हजार से अधिक भेड़ों को पुलिस और प्रशासन ने बचाया। करीब छह घंटे चले जोखिमपूर्ण अभियान के बाद यह सफलता मिली। 

    देर रात में सूचना मिलते ही पुलिस-प्रशासन की संयुक्त टीम ददरी घाट पहुंची। नाइट विजन ड्रोन से फंसे लोगों और भेड़ों की लोकेशन चिन्हित की गई। इसके बाद फ्लड कंपनी पीएसी, पुलिस, प्रशासनिक टीम और स्थानीय नाविकों ने संयुक्त रूप से रेस्क्यू अभियान चलाया। अभियान में किसी तरह की जनहानि नहीं हुई। स्थानीय ग्रामीणों और चरवाहों ने त्वरित कार्रवाई के लिए पुलिस-प्रशासन की सराहना की।

  • ‘हनुमान अंश’ की कामयाबी से खुश ओपुलेंट स्कूल, पूर्व छात्र एवं फैकल्टी शौभिनव सत्या को दी शुभकामनाएं

    ‘हनुमान अंश’ की कामयाबी से खुश ओपुलेंट स्कूल, पूर्व छात्र एवं फैकल्टी शौभिनव सत्या को दी शुभकामनाएं

    ‘हनुमान अंश’ की सफलता पर ओपुलेंट स्कूल ऑफ एक्टिंग एंड फिल्म्स ने जताया गर्व, पूर्व छात्र एवं फैकल्टी शौभिनव सत्या को दी शुभकामनाएं

    लखनऊ
    ओपुलेंट स्कूल ऑफ एक्टिंग एंड फिल्म्स ने अपने पूर्व छात्र, फैकल्टी एवं टीम सदस्य शौभिनव सत्या को फिल्म ‘हनुमान अंश’ की उल्लेखनीय सफलता के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। संस्थान के संस्थापक मनीष नंदन ने कहा कि शौभिनव सत्या की सफलता पूरे ओपुलेंट परिवार के लिए गर्व का विषय है। छोटे शहरों और सामान्य पृष्ठभूमि से आने वाले प्रतिभाशाली युवाओं के लिए शौभिनव की यात्रा एक प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि मेहनत, ईमानदारी, अनुशासन और प्रतिभा के बल पर शौभिनव ने अपनी अलग पहचान बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है।

    उन्होंने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में नए कलाकारों के लिए अपनी पहचान बनाना चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में शौभिनव की उपलब्धियां इस बात का प्रमाण हैं कि निरंतर मेहनत और प्रतिभा के दम पर स्थापित धारणाओं और पारंपरिक सीमाओं को चुनौती दी जा सकती है।

    ओपुलेंट स्कूल ऑफ एक्टिंग एंड फिल्म्स के सह-संस्थापक एवं फिल्म निर्देशक नितिश नंदन ने कहा कि ओपुलेंट की स्थापना 15 मई 2011 को हुई थी और यह लखनऊ के शुरुआती प्रमुख फिल्म एवं एक्टिंग ट्रेनिंग संस्थानों में से एक है। उन्होंने बताया कि संस्थान के संस्थापक सदस्यों में NSD से प्रशिक्षित स्वर्गीय अलोपी वर्मा जी के नाट्य समूह से जुड़े कलाकारों के साथ-साथ NSD स्नातक एवं फिल्म अभिनेता आलोक नाथ जी, अभिनेत्री सीमा बिस्वास जी, टीवी के लोकप्रिय कलाकार योगेश त्रिपाठी, जो ‘दरोगा हप्पू सिंह’ के किरदार के लिए जाने जाते हैं, तथा आशीष श्रीवास्तव सहित कई प्रतिष्ठित कलाकार एवं रंगकर्मी शामिल रहे हैं।
    नितिश नंदन ने बताया कि अपनी स्थापना से अब तक 1,500 से अधिक कलाकार ओपुलेंट से प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं, जिनमें अनेक कलाकारों ने थिएटर, टेलीविजन और फिल्म के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है।

    उन्होंने कहा कि शौभिनव सत्या के साथ विद्यार्थी और फैकल्टी के रूप में ओपुलेंट ने कई प्रोजेक्ट्स पर काम किया है। शौभिनव संस्थान से अपने जुड़ाव के दौरान न केवल कलाकार के रूप में सक्रिय रहे, बल्कि नई प्रतिभाओं के साथ अपने अनुभव साझा करते हुए एक फैकल्टी सदस्य के रूप में भी योगदान दिया है।
    नितिश नंदन ने आगे कहा, “शौभिनव आज अपने व्यस्त पूर्व-निर्धारित शूटिंग शेड्यूल के कारण लगातार व्यस्त हैं। हमें उम्मीद है कि वे अपने व्यस्त कार्यक्रम से समय निकालकर भविष्य में ओपुलेंट मीडिया एंड एंटरटेनमेंट के साथ भी फिल्म एवं अन्य रचनात्मक प्रोजेक्ट्स में काम करेंगे। ओपुलेंट परिवार के साथ उनका यह जुड़ाव हमारे लिए हमेशा विशेष रहेगा।”
    मनीष नंदन ने कहा कि शौभिनव सत्या की सफलता ओपुलेंट के विद्यार्थियों और देशभर के उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो छोटे शहरों से निकलकर सिनेमा की दुनिया में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं।
    उन्होंने कहा, “शौभिनव आज एक उभरते हुए सितारे हैं और हमें विश्वास है कि आने वाले समय में वे एक बड़े कलाकार और सुपरस्टार के रूप में अपनी पहचान स्थापित करेंगे। उनकी यात्रा अभी शुरू हुई है और हमें उनकी आने वाली उपलब्धियों का इंतजार है।”
    ओपुलेंट स्कूल ऑफ एक्टिंग एंड फिल्म्स परिवार ने शौभिनव सत्या को उनके आगामी प्रोजेक्ट्स एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

     

  • UP की राजनीति का यक्ष प्रश्न, हर समीकरण की सीमा लांघता दिख रहा बड़ा सवाल

    UP की राजनीति का यक्ष प्रश्न, हर समीकरण की सीमा लांघता दिख रहा बड़ा सवाल

    हर समीकरण की सीमा लांघने वाला उत्तर प्रदेश का यक्ष प्रश्न

    लखनऊ 
    राजनीति में प्रायः चुनावी अंकगणित, जातिगत गोलबंदी, क्षेत्रीय समीकरण और घोषणापत्रों के बड़े-बड़े दावे ही जीत-हार का मुख्य आधार माने जाते हैं। चुनावी मंचों से गूंजने वाले नारों, रैलियों में उमड़ती भीड़ और मीडिया के विश्लेषकों की बहसों का अपना एक निश्चित गणितीय हिसाब होता है। परंतु इतिहास साक्षी है कि जब किसी राज्य के राजनीतिक क्षितिज पर कुछ ऐसी अभूतपूर्व संरचनाएं और सांस्कृतिक प्रतीक उभर आते हैं, तो उन्हें केवल आंकड़ों के पारंपरिक तराजू पर नहीं तौला जा सकता। उत्तर प्रदेश का आगामी चुनावी संग्राम जब-जब आकार लेगा, तब-तब एक मौलिक और यक्ष प्रश्न सतह पर आएगा—आखिर वह क्या है, जो इस विशाल प्रदेश में केवल योगी आदित्यनाथ कर सकते हैं, कोई अन्य राजनेता नहीं?

    पारंपरिक राजनीति के व्याकरण को चुनौती देती छवि
    उत्तर प्रदेश का राजनीतिक इतिहास गवाह रहा है कि यहां का जनादेश अधिकांशतः जातियों के जोड़-तोड़, कुनबे के हिसाब-किताब और सामाजिक ध्रुवीकरण के इर्द-गिर्द ही सिमटता रहा है। दशकों तक दलों ने केवल जातिगत जनगणना और क्षेत्रीय क्षत्रपों के गठजोड़ के आधार पर सरकारें बनाई और चलाई हैं। परंतु जब भगवा वस्त्रधारी गोरक्षपीठाधीश्वर सत्ता संभालते हैं तो राजनीति का यह पारंपरिक व्याकरण पूरी तरह बदलने लगता है। जिस व्यक्ति ने अपना व्यक्तिगत जीवन, कुनबा और पारिवारिक मोह से पूरी तरह ऊपर उठकर संन्यास का मार्ग चुना हो, उसकी सामाजिक और राजनीतिक छवि स्वतः ही जाति के संकीर्ण दायरों को लांघ जाती है। जब विपक्षी दल अलग-अलग जातियों और उप-जातियों का गणित साधने में व्यस्त होते हैं, तब योगी आदित्यनाथ एक सर्वव्यापी और व्यापक सांस्कृतिक पहचान खड़ी कर देते हैं। यह एक ऐसा मनोवैज्ञानिक और राजनीतिक प्रभाव है, जिसे कोई भी पारंपरिक राजनेता अपनी अंतर्निहित जातिगत सीमाओं और पारिवारिक दायित्वों के कारण आसानी से नहीं दोहरा सकता। संन्यास और समर्पण की यह छवि उन्हें राजनीतिक जोड़-तोड़ से परे एक अलग ही आधार प्रदान करती है।

    शासन की "कठोर मुद्रा" और सुरक्षा का मनोवैज्ञानिक भाव
    उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक शब्दावली में अपराध के प्रति “जीरो टॉलरेंस” और “बुलडोजर कार्रवाई” केवल एक प्रशासनिक नीति का हिस्सा मात्र नहीं रही, बल्कि वह एक मजबूत राजनीतिक ब्रांड का रूप धारण कर चुकी है। अतीत के उस उत्तर प्रदेश को याद कीजिए, जहां कानून-व्यवस्था पर निरंतर गंभीर प्रश्नचिह्न लगते थे, व्यापारी पलायन के लिए विवश थे और माफिया का अपना समानांतर शासन चलता था। उस पृष्ठभूमि के विपरीत, एक कठोर प्रशासक की भांति खड़े होकर अपराधियों और माफिया तंत्र के मन में कानून का भय पैदा करना, यह वह अभेद्य राजनीतिक पत्ता है, जिसे केवल योगी आदित्यनाथ ही पूर्ण नैतिक अधिकार के साथ खेल सकते हैं। दिलचस्प बात यह है कि जब विपक्षी दल इस आक्रामक नीति की प्रक्रियागत और संवैधानिक आलोचना करते हैं, तो वे अनजाने में योगी की इसी “दृढ़ संकल्प और सख्त प्रशासक” वाली छवि को जनता के बीच और अधिक सशक्त बना देते हैं। जनता सुरक्षा के इस अहसास को किसी भी राजनीतिक तर्क से ऊपर रखती है।

    'विकास' और 'विरासत' का अभूतपूर्व समन्वय
    भारतीय राजनीति में लंबे समय से दो स्पष्ट और परस्पर विरोधी धाराएं विद्यमान रही हैं। एक तरफ वे नेता रहे हैं जो केवल आधुनिकता, अवसंरचना (इन्फ्रास्ट्रक्चर) और आर्थिक विकास की बात करते थे, तो दूसरी तरफ वे जो केवल परंपरा, धर्म और सांस्कृतिक अस्मिता के पक्षधर थे। योगी आदित्यनाथ ने इन दो विपरीत धाराओं को एक ही धरातल पर लाकर खड़ा कर दिया है। उनके एक हाथ में जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट, गंगा एक्सप्रेस-वे, बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे और डिफेंस कॉरिडोर का आधुनिक खाका है, तो दूसरे हाथ में भव्य अयोध्या का राम मंदिर, काशी का दिव्य विश्वनाथ धाम, मथुरा-वृंदावन का कायाकल्प और महाकुंभ का अभूतपूर्व सांस्कृतिक वैभव है। वे “विरासत” को बिना किसी हिचकिचाहट के सार्वजनिक रूप से स्वीकारते हैं और उसे 'विकास' के आधुनिक पहियों पर आरूढ़ कर देते हैं। यह समन्वय किसी ऐसे राजनेता के लिए अत्यंत कठिन है, जिसे सांस्कृतिक प्रतीकों को छूने में राजनीतिक संकोच होता हो, धर्मनिरपेक्षता का आवरण या वोटबैंक खिसकने का भय सताता हो।

    सशक्तीकरण का नया मानक: आधी आबादी का अटूट विश्वास
    चुनावी बहसों में अक्सर मुफ़्त योजनाओं, वित्तीय रेवड़ियों और कैश ट्रांसफर के मुद्दे छाये रहते हैं। विभिन्न दल महिलाओं को आकर्षित करने के लिए कई तरह के आर्थिक वादे करते हैं। परंतु राज्य की “आधी आबादी”, यानी महिला मतदाताओं के लिए, वास्तविक और धरातलीय सशक्तीकरण का अर्थ क्या है? उत्तर प्रदेश के छोटे कस्बों, गांवों और सुदूर ग्रामीण अंचलों में शाम ढलने के बाद महिलाओं का निडर होकर बाहर निकलना, बेटियों का बिना किसी भय के स्कूल और कॉलेज जाना—यह वह प्रत्यक्ष अनुभूति है, जिसे योगी सरकार अपने सुशासन की सबसे बड़ी पूंजी मानती है। चुनावी मैदान में आर्थिक वादे तो कई दल कर सकते हैं, परंतु सार्वजनिक जीवन में निर्भयता और गरिमा का जो वातावरण महिलाओं के बीच स्थापित हुआ है, उस अटूट विश्वास को चुनौती देना किसी भी प्रतिद्वंद्वी के लिए सहज नहीं होगा। सुरक्षा का यह अहसास महिलाओं को एक स्वतंत्र और निर्णायक वोटबैंक में बदल चुका है।

    निर्णायक नेतृत्व की विश्वसनीयता और भावी चुनौतियां
    अंततः, यह प्रश्न एकाधिकारी, स्वतंत्र और निर्णायक नेतृत्व की विश्वसनीयता का भी है। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल और विविध राज्य में जनता प्रायः एक ऐसे “मजबूत और सख्त” चेहरे को चुनना पसंद करती है, जिसकी कमान किसी गठबंधन के जोड़-तोड़, आंतरिक अंतर्विरोधों या किसी रिमोट कंट्रोल के हाथ में न दिखे। लगातार दो कार्यकाल के बाद भी, योगी आदित्यनाथ की पहचान एक ऐसे बेबाक प्रशासक की बनी हुई है, जो राज्य के हित में कड़े और अप्रिय फैसले लेने से भी पीछे नहीं हटता। फिर भी, राजनीति का एक अटल नियम यह भी है कि जीत का रथ कई पहियों पर चलता है। सरकार की सफल योजनाओं और उपलब्धियों को आमजन तक पहुंचाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना सरकार व संगठन का युद्धस्तर पर सक्रिय होना। अतीत की प्रतिष्ठा सफलता का दरवाजा अवश्य खोलती है, लेकिन भविष्य का भरोसा संस्थागत निरंतरता, व्यापक जन-संपर्क और जमीनी समाधानों पर टिकता है। 2027 के चुनाव का अंतिम फैसला कई वास्तविक और व्यावहारिक मानदंडों पर निर्भर करेगा।

    लेकिन, इतना तय है कि योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक ऐसा मानक स्थापित कर दिया है, जो पारंपरिक जातिगत समीकरणों को ध्वस्त करता है। 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में विपक्षी दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल भाजपा संगठन से लड़ने की नहीं, बल्कि योगी की इस विशिष्ट छवि और उनके बनाए इस 'सुशासन एवं सुरक्षा' के मॉडल का विकल्प प्रस्तुत करने की होगी।

    •    नितिन श्रीवास्तव, वरिष्ठ पत्रकार
    •    संपर्क – +91-9415552949

     

  • शिक्षकों को यूपीजीबी का तोहफा, 1.10 करोड़ रुपये तक का मुफ्त दुर्घटना बीमा

    शिक्षकों को यूपीजीबी का तोहफा, 1.10 करोड़ रुपये तक का मुफ्त दुर्घटना बीमा

    लखनऊ

     शिक्षक दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक (यूपीजीबी) ने शिक्षकों के लिए विशेष वेतन पैकेज की घोषणा की है। बैंक की ओर से शुरू किए गए ‘शिक्षक विशेष यूपीजीबी वेतन पैकेज’ में शिक्षकों को 1.10 करोड़ रुपये तक का दुर्घटना एवं विकलांगता बीमा पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही 10 लाख रुपये का जीवन बीमा भी मुफ्त दिया जाएगा।

    लखनऊ स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में बैंक प्रबंधन ने इस विशेष पैकेज का अनावरण किया। प्रबंधन के अनुसार, पैकेज को तैयार करने में पिछले एक महीने से चल रहे ‘शिक्षक संवाद’ के दौरान शिक्षकों से मिले सुझावों को शामिल किया गया है।

    क्षेत्रीय प्रबंधक कौशल किशोर ने शिक्षकों को राष्ट्र निर्माता बताते हुए कहा कि बैंक का उद्देश्य केवल शिक्षकों के वेतन खाते खोलना नहीं, बल्कि उनके साथ दीर्घकालिक वित्तीय संबंध स्थापित करना है। शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष सुधांशु मोहन ने पैकेज को शिक्षकों के लिए अन्य बैंकों की योजनाओं की तुलना में अधिक लाभकारी बताया।

    ऋण से लेकर बैंकिंग सेवाओं तक कई सुविधाएं

    यूपीजीबी के इस विशेष वेतन पैकेज में शिक्षकों को होम लोन, कार लोन और व्यक्तिगत ऋण पर प्रसंस्करण शुल्क नहीं देना होगा। लॉकर शुल्क में भी छूट दी गई है। शिक्षा ऋण पर 0.25 प्रतिशत अतिरिक्त ब्याज छूट का प्रावधान किया गया है।

    इसके अलावा एनईएफटी, आरटीजीएस, एसएमएस अलर्ट, चेकबुक और डिमांड ड्राफ्ट जैसी बैंकिंग सेवाएं भी निशुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी। दुर्घटना एवं विकलांगता बीमा तथा जीवन बीमा की सुविधा शिक्षकों और उनके परिवारों को अतिरिक्त वित्तीय सुरक्षा प्रदान करेगी।

    कार्यक्रम में शिक्षकों को अंगवस्त्र भेंटकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उप क्षेत्रीय प्रबंधक अखिलेश उपाध्याय, मुख्य प्रबंधक अभय कुमार सिंह, वरिष्ठ प्रबंधक शशि सिंह, मोहम्मद रऊफ, शिक्षक अजय सिंह और शाखा प्रबंधक निराजन आनंद सहित बैंक अधिकारी एवं शिक्षक मौजूद रहे।

    बैंक प्रबंधन के अनुसार, 4,300 से अधिक शाखाओं वाला उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक आठ करोड़ से अधिक ग्राहकों को बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध करा रहा है।

  • जिनकी बाबर-औरंगजेब में आस्था होगी, क्या वे आपकी आस्था का सम्मान कर पाएंगे- सीएम योगी

    जिनकी बाबर-औरंगजेब में आस्था होगी, क्या वे आपकी आस्था का सम्मान कर पाएंगे- सीएम योगी

    मथुरा

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या काशी के भव्य विकास के बाद अब ब्रजभूमि को भी जन-भावनाओं के अनुरूप विकसित किया जाएगा। डबल इंजन सरकार इसमें कोई कसर नहीं छोड़ेगी। ब्रजभूमि के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व को ध्यान में रखते हुए यहां ऐसा भव्य परिसर तैयार किया जाएगा, जैसा अयोध्या और काशी में हुआ है। पिछली सरकारें श्रीकृष्ण जन्मभूमि आने से डरती थीं, क्योंकि उन्हें अपने वोट बैंक की चिंता होती थी। यह सरकार कृष्ण कन्हैया, प्रभु श्रीराम, बाबा विश्वनाथ और मां विंध्यवासिनी पर विश्वास करती है। लेकिन, जिनकी आस्था बाबर और औरंगजेब में होगी, क्या वे आपकी आस्था का सम्मान कर पाएंगे? 

    समाज विरोधी मंसूबे पूरे नहीं होने देगी सरकार

    मुख्यमंत्री शुक्रवार को श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर में दर्शन-पूजन करने के उपरांत मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बाबर और औरंगजेब के अनुयायी फिर से समाज में जहर घोलने का काम करने जा रहे हैं। उनकी आदत समाज में विष वमन करने की है, जिससे समाज व राष्ट्र विरोधी तत्वों के हौसले बढ़ सकें, वे आपकी सुरक्षा में सेंध लगा सकें, युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर सकें, बहन-बेटियों की सुरक्षा में सेंध लगा सकें, अन्नदाता किसानों की खुशहाली पर डकैती डाल सकें और उद्यमी बनने की ओर अग्रसर कारीगरों व हस्तशिल्पियों को फिर से लाचार बना सकें। लेकिन डबल इंजन की सरकार इन मंसूबों पर पानी फेरेगी और इन्हें कभी पूरा नहीं होने देगी। 

    कल्पना से परे था अयोध्या का कायापलट

    मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्यावासियों को कल्पना भी नहीं थी कि कभी अयोध्या का इतना भव्य विकास होगा। वहां न सड़क थी, न बिजली और न ही पानी की समुचित व्यवस्था। गंदगी का अंबार लगा रहता था। अयोध्या रेलवे की सिंगल लाइन से जुड़ी थी। जो श्रद्धालु वहां जाता था,  अव्यवस्था और अराजकता देखकर रोता हुआ लौटता था। आज प्रतिदिन करीब एक लाख श्रद्धालु अयोध्या धाम आते हैं। रामनवमी, कार्तिक माह, सावन का झूला मेला, दीपोत्सव आदि पर्वों पर यह संख्या बढ़कर पांच से 50 लाख तक पहुंच जाती है। कहीं कोई असुविधा नहीं होती। सामाजिक समता का अद्भुत उदाहरण भी देखने को मिलता है। प्रभु श्रीराम के नाम को जन-जन तक पहुंचाने वाले महर्षि वाल्मीकि के नाम पर अयोध्या में अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बन गया है। कनेक्टिविटी के लिए चारों ओर से फोरलेन सड़कें बन चुकी हैं। रेलवे की डबल लाइन हो चुकी है। अयोध्या में जहां भी जाएंगे, आपको भक्तिपथ, रामपथ जैसे नामों की फोरलेन सड़कें मिलेंगी।

    अपराजित रही हमारी आस्था

    सीएम ने कहा कि 500 वर्ष पहले 1528 में विदेशी आक्रांता ने हमारी आस्था को समाप्त करने का प्रयास किया था। लेकिन, अयोध्या में प्रभु श्रीराम के प्रति हमारी सनातन आस्था निरंतर बढ़ रही है। वहां उमड़ रहे जनसैलाब से इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। जो आक्रांता खुद को अविजित मानते थे, आज उनका कहीं अता-पता नहीं। सब समाप्त हो गए। लेकिन, हमारी आस्था कभी पराजित नहीं हुई। अयोध्या में प्रभु श्रीराम का दुनिया का विशालतम भव्य मंदिर बन गया। जिन लोगों को ये सब अच्छा नहीं लगता, वे अयोध्या को बदनाम कर रहे हैं।

    मां विंध्यवासिनी धाम का भव्य परिसर

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं अभी यहां योगमाया का दर्शन कर रहा था। इसी धरा पर योगमाया ने अवतरित होकर कंस के अहंकार को चुनौती दी थी और वही योगमाया विंध्यवासिनी धाम में प्रकट हुई थीं। मैं जब भी यहां आता था, मुझे तत्काल मां विंध्यवासिनी का स्मरण आता था। आज मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता है कि योगमाया के प्रति हमारी आस्था ने विंध्यवासिनी धाम को एक भव्य परिसर उपलब्ध कराया है।

    ब्रज क्षेत्र में श्रद्धालुओं को मिलेंगी सभी सुविधाएं

    सीएम ने कहा कि मथुरा-वृंदावन समेत बरसाना, नंदगांव व गोवर्धन आने वाले श्रद्धालुओं को सभी सुविधाएं मिलेंगी। किसी श्रद्धालु को कोई दिक्कत न हो, उसकी आस्था को ठेस न लगे, वह सहज भाव से आए, दर्शन करे और आशीर्वाद लेकर जाए। इसके लिए डबल इंजन की सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। ये पर्व व त्योहार केवल आस्था ही नहीं,  हमारी आर्थिकी के आधार भी हैं। समाज का हर व्यक्ति किसी न किसी रूप में व्यवस्था के साथ जुड़कर पीएम मोदी जी के विकसित भारत की परिकल्पना को आगे बढ़ाने में अपना योगदान दे रहा है।

    हम सिर्फ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें

    मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन से एक ही बात कही कि अर्जुन, तुम निमित्त मात्र हो, तुम अपना कर्तव्य करो। तुम अगर निष्काम कर्म करोगे तो परिणाम पाओगे। इसी तरह हम सब भी देश, समाज व परिवार के प्रति अपने कर्तव्यों का ईमानदारीपूर्वक निर्वहन करेंगे तो भारत को विकसित भारत और उत्तर प्रदेश को विकसित उत्तर प्रदेश बनने में कोई देर नहीं लगेगी। ‘कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन’, श्रीकृष्ण कहते हैं कि कर्म करो, अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ो। बाकी चिंता हमारे कृष्ण कन्हैया करेंगे।

    उन्होंने कहा कि हमारा देश स्वतंत्र है, तभी हम इतने स्वतंत्र माहौल में अपने पर्व और त्योहार मना पा रहे हैं। कल से लाखों की संख्या में श्रद्धालु मथुरा-वृंदावन आकर आस्था के साथ विभिन्न समारोहों और आयोजनों में भागीदार बन रहे हैं। आज हम शासन की सुविधाओं से जुड़े हैं और विकास की नई-नई परियोजनाओं का लाभ ले रहे हैं। नौजवान अपने जीवन और भविष्य के प्रति आश्वस्त है। हर बेटी बहन अपनी सुरक्षा के प्रति आश्वस्त है। हर कारीगर और हर हस्तशिल्पी के मन में उद्यमी बनने का विश्वास है। इसी विश्वास को जगाने और हमें जोड़ने के लिए ये पर्व व त्योहार आते हैं। मुझे भी इसीलिए ब्रजभूमि में ‘लाला’ (बालकृष्ण) के दर्शन करने का अवसर प्राप्त हुआ है।

    अब जवाहर बाग जैसी घटना नहीं, बल्कि उत्सव होता है

    मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत के लिए हमारी आस्था भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। विरासत के सम्मान के लिए ही मैं श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर यहां आता हूं। पिछली सरकारें यहां आने से डरती थीं, क्योंकि उन्हें वोट बैंक की चिंता होती थी। उन्हें डर रहता था कि कहीं लोग सवाल न पूछ लें और इसीलिए उनके कृत्यों से यहां जवाहर बाग जैसी घटना हुई। लेकिन, अब हमारी यह ब्रजभूमि जन्मोत्सव, रंगोत्सव, ब्रजरज उत्सव और वैष्णव कुंभ जैसे आयोजनों के साथ नए उत्साह, नई उमंग और नए विश्वास से जुड़ रही है। यही नया विश्वास हम सबको आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रहा है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को जन्माष्टमी की बधाई व शुभकामनाएं भी दीं।

  • ‘एसी में बैठकर तिलचट्टों के भरोसे सरकार बनाएंगे?’… राजभर ने अखिलेश को घेरा

    ‘एसी में बैठकर तिलचट्टों के भरोसे सरकार बनाएंगे?’… राजभर ने अखिलेश को घेरा

    ‘लाल वाले खुद तिलचट्टों से मदद मांग रहे हैं’… ओपी राजभर का अखिलेश पर तीखा तंज

    ‘पिता-चच्चू ने साइकिल चलाई, बेटवा तिलचट्टों के भरोसे सरकार बनाएगा’… अखिलेश पर राजभर का वार

    ‘एसी में बैठकर तिलचट्टों के भरोसे सरकार बनाएंगे?’… राजभर ने अखिलेश को घेरा

    ‘लाल’ का स्प्रे तिलचट्टे भगाता है, यहां ‘लाल’ वाले ही मदद मांग रहे… अखिलेश पर राजभर का तंज

    ‘सैफई सिंडिकेट के बच्चे विदेश में, गांव के युवा किसके भरोसे?’… अखिलेश पर राजभर का तीखा वार

    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने एक बार फिर समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव पर बेहद तीखा और व्यंग्यात्मक हमला बोला है। अपने सोशल मीडिया पोस्ट में शुक्रवार को राजभर ने अखिलेश यादव को सीधे संबोधित करते हुए उनकी राजनीति, समाजवादी पार्टी की मौजूदा रणनीति और उनके राजनीतिक सहारों पर सवाल उठाए। पोस्ट में राजभर ने ‘अभिजीत नक्षत्र’, ‘तिलचट्टे’, ‘लाल वाला स्प्रे’, ‘कंसवादी लोडर’, ‘रील बाज’ और ‘चांदी के चम्मच’ जैसे शब्दों के जरिए अखिलेश पर जमकर निशाना साधा।

    ‘अभिजीत नक्षत्र में दीपक जलाने चले, घर में तिलचट्टे आने लगे’

    राजभर ने अपने पोस्ट की शुरुआत ही अखिलेश यादव पर तंज से की। उन्होंने लिखा, “का हो अखिलेश यादव जी, सुने हैं कि आप अभिजीत नक्षत्र में दीपक जलाने की कोशिश कर रहे हैं। इसी बीच आपके घर में ‘तिलचट्टे’ आने लगे, वो भी मुंह बांध के।”

    इसके बाद राजभर ने ‘लाल’ और ‘तिलचट्टों’ को लेकर व्यंग्य को और धार दी। उन्होंने लिखा कि टीवी में तो दिखाया जाता है कि ‘लाल’ वाला स्प्रे तिलचट्टों को खत्म करने के लिए होता है, लेकिन यहां तो ‘लाल’ वाले खुद ही तिलचट्टों से मदद मांग रहे हैं। राजभर ने तंज कसते हुए कहा, 'बताइए भला, अपने कंसवादी लोडरों पर इतना भी भरोसा नहीं है कि जो अब ‘तिलचट्टों’ का साथ ले रहे हैं?' दरअसल, राजभर का ये हमला ऐसे समय में आया है जब काकॉकरोच जनता पार्टी के आशुतोष रांका ने गुरुवार को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से बंद कमरे में करीब डेढ़ मुलाकात की थी।

    ‘आपके पिता और चच्चू ने इतनी मेहनत यही दिन देखने के लिए की?’

    राजभर ने इसके बाद अखिलेश यादव के पिता मुलायम सिंह यादव और उनके चच्चू शिवपाल यादव का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों ने गांव-गांव साइकिल का पैडल मार-मारकर समाजवादी पार्टी खड़ी की। उन्होंने सवालिया और व्यंग्यात्मक अंदाज में लिखा, “आपके पिता और चच्चू एतना मेहनत किये! गांव-गांव साइकिल क पैडल मार-मार के समाजवादी पार्टी चलाए, यही दिन देखने के लिए?”

    राजभर ने आगे तंज कसते हुए कहा कि क्या मुलायम और शिवपाल ने इतनी मेहनत इसलिए की थी कि अब उनका बेटा एसी में बैठकर ‘तिलचट्टन’ के भरोसे सरकार बनाएगा। राजभर ने अखिलेश यादव की मौजूदा राजनीतिक शैली को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने लिखा, 'अब पता चल गया कि आप भी रील बाज तिलचट्टन के बल पर राजनीति करने वाले हैं।'

    ‘चांदी के चम्मच वाले हैं, सत्ता का खेल पुरानी आदत है’

    ओपी राजभर ने अपने पोस्ट में अखिलेश यादव की पृष्ठभूमि को लेकर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने लिखा, 'आप चांदी के चम्मच वाले हैं, विदेशी ताकत और अकूत पैसे के बल पर सत्ता का खेल आपकी पुरानी आदत है।' इसके साथ ही उन्होंने ‘सैफई सिंडिकेट’ का जिक्र करते हुए कहा कि उसके बच्चे विदेश में पढ़ते हैं और लंदन-पेरिस घूमते हैं। लेकिन इसके बाद राजभर ने अपने पोस्ट को गांव-देहात के युवाओं की चिंता से जोड़ दिया।

    राजभर ने अखिलेश यादव से अपील करते हुए लिखा कि गांव-देहात के यादव और गरीब जोलहा-पसमांदा मुस्लिम युवाओं को ऐसी आग में न झोंका जाए, जिससे उनका और उनके परिवार का भविष्य तबाह हो जाए। उन्होंने कहा कि सत्ता की राजनीति करने वालों और गांव-देहात के उन युवाओं के बीच फर्क को समझना जरूरी है, जिनके भविष्य और परिवार सीधे किसी भी राजनीतिक संघर्ष का असर झेल सकते हैं।