Category: उत्तर प्रदेश

  • UP में बाढ़ के बीच मजबूत हुआ राहत तंत्र, 591 करोड़ चेतावनी संदेशों ने समय रहते लाखों लोगों को किया सतर्क

    UP में बाढ़ के बीच मजबूत हुआ राहत तंत्र, 591 करोड़ चेतावनी संदेशों ने समय रहते लाखों लोगों को किया सतर्क

     लखनऊ
     उत्तर प्रदेश में भारी बारिश, आंधी-तूफान, वज्रपात और बाढ़ के बीच योगी सरकार का मजबूत चेतावनी एवं राहत-बचाव तंत्र लोगों के लिए जीवनरक्षक साबित हुआ है।

    राहत आयुक्त कार्यालय की ओर से बड़े पैमाने पर भेजे गए 591 करोड़ से अधिक अलर्ट मैसेज ने लाखों लोगों को समय रहते मौसम और बाढ़ के संभावित खतरे से सतर्क किया। समय पर मिली चेतावनी, स्थानीय प्रशासन की तत्परता और आमजन की सजगता का नतीजा रहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अब तक एक भी जनहानि नहीं हुई है।

    करोड़ों संदेशों से समय रहते मिली चेतावनी
    प्रदेश में लोगों को भारी बारिश, आंधी-तूफान, वज्रपात और बाढ़ से बचाव के लिए मोबाइल संदेशों के माध्यम से लगातार अलर्ट भेजे गए। जुलाई में 306 करोड़ और अगस्त में 285 करोड़ यानी कुल 591 करोड़ अलर्ट मैसेज प्रसारित किए गए। इसके अलावा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से एक करोड़ से अधिक लोगों तक मौसम संबंधी सूचनाएं और चेतावनियां पहुंचाई गईं। इस व्यापक सूचना तंत्र ने लोगों को समय रहते सावधान होने, सुरक्षित स्थानों पर जाने और जरूरी सुरक्षा उपाय अपनाने में मदद की।

    चेतावनी मिलते ही खुद सुरक्षित हुए लोग
    अलर्ट सिस्टम की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि मौसम और नदियों के जलस्तर से जुड़ी सूचनाएं लोगों तक समय पर पहुंचीं। इससे प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोग संभावित खतरे को समझकर स्वयं भी सुरक्षित स्थानों की ओर जाने में सक्षम हुए। स्थानीय प्रशासन ने भी इन चेतावनियों के आधार पर लगातार लोगों को जागरूक किया। इस तरह तकनीक, प्रशासनिक सतर्कता और आमजन की सजगता ने मिलकर जनसुरक्षा को मजबूत किया।

    3.52 लाख से अधिक लोगों तक पहुंची मदद
    अलर्ट और राहत-बचाव व्यवस्था के जरिए बाढ़ की स्थिति में अब तक 3.52 लाख से अधिक लोगों तक मदद पहुंचाई गई। वहीं राहत एवं बचाव अभियानों के दौरान समय रहते 17.54 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।

    1070 हेल्पलाइन से तत्काल राहत
    राहत आयुक्त कार्यालय की 1070 हेल्पलाइन भी संकट के समय लोगों के लिए महत्वपूर्ण सहारा बनी। सूचना मिलते ही संबंधित जिला प्रशासन को जानकारी उपलब्ध कराई गई और जरूरत के अनुसार राहत एवं बचाव दलों को मौके पर भेजा गया।

    चित्रकूट, प्रयागराज और मिर्जापुर समेत अन्य प्रभावित जिलों में बाढ़ में फंसे लोगों की लोकेशन प्राप्त कर बचाव दलों तक पहुंचाई गई, जिसके बाद नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालने की कार्रवाई की गई। यही प्रयास बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अब तक शून्य जनहानि सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण साबित हुआ है।

  • मस्जिद पर बुलडोजर एक्शन के बाद सियासी हलचल, सांसद इकरा हसन हाउस अरेस्ट

    मस्जिद पर बुलडोजर एक्शन के बाद सियासी हलचल, सांसद इकरा हसन हाउस अरेस्ट

     सहारनपुर/शामली

    सहारनपुर के कलेक्ट्रट परिसर में मस्जिद पर बुलडोजर एक्शन को लेकर सपा सांसद इकरा हसन का हाउस अरेस्ट कर लिया गया है। बता दें कि शनिवार सुबह कलेक्ट्रट परिसर में मौजूद मस्जिद को प्रशासन ने ढहा दिया है।

    इकरा हसन ने लगाया हाउस अरेस्ट का आरोप
    मस्जिद प्रकरण को लेकर कैराना सांसद इकरा हसन ने आरोप लगाया कि उनके आवास पर रात में भारी पुलिस बल तैनात कर उन्हें बाहर निकलने से रोक दिया गया। इकरा हसन ने इसे हाउस अरेस्ट बताते हुए सवाल उठाया कि क्या जनता के मुद्दे पर अधिकारियों से मिलना अब अपराध हो गया है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि को रोककर जनता की आवाज दबाई नहीं जा सकती।

    यूपी के सहारनपुर में शनिवार सुबह डीएम परिसर में बनी मस्जिद को प्रशासन ने ध्वस्त कर दिया. प्रशासन के मुताबिक, सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने निर्माण को सरकारी जमीन पर अवैध पाया था. मस्जिद कमेटी की पहली अपील भी खारिज हो चुकी थी. कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस और आरआरएफ की तैनाती रही. वहीं, इस मामले को लेकर सहारनपुर जाने की कोशिश कर रहीं कैराना से सांसद इकरा हसन को उनके आवास पर हाउस अरेस्ट कर दिया गया। 

    सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को लेकर पिछले कुछ समय से विवाद चल रहा था. शनिवार सुबह प्रशासन ने इस निर्माण को गिराने की कार्रवाई शुरू कर दी. मौके पर बुलडोजर लगाया गया और पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात रहा। 

    प्रशासन का कहना है कि सिटी मजिस्ट्रेट के न्यायालय में सुनवाई के दौरान मस्जिद के निर्माण को अवैध पाया गया था. अधिकारियों के मुताबिक, यह निर्माण सरकारी जमीन पर था. इस आदेश के खिलाफ मस्जिद कमेटी ने पहली अपील की थी, लेकिन वहां भी अपील खारिज कर दी गई और सिटी मजिस्ट्रेट के मूल आदेश को बरकरार रखा गया। 

    कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की अपील की थी खारिज
    डिस्ट्रिक्ट जज की कोर्ट ने 4 सितंबर को सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती देने वाली मुस्लिम पक्ष की अपील खारिज कर दी थी। जिला जज की कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पेश किए गए सबूतों की जांच करने के बाद मस्जिद को अवैध घोषित करने वाले सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा।

    सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट ने मस्जिद गिराने का दिया था आदेश
    सिटी मजिस्ट्रेट की कोर्ट ने 17 जुलाई को मस्जिद को गिराने का आदेश दिया था और सरकारी जमीन पर कथित अवैध कब्जे और उसके गलत इस्तेमाल के लिए वहां मौजूद लोगों पर लगभग 6.41 करोड़ रुपये का मुआवजा लगाया था।

    रात से ही पुलिस की तैनाती, अफवाहों पर नजर
    कार्रवाई से पहले ही सहारनपुर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी. प्रशासन ने बताया कि त्योहारों को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल के साथ पांच कंपनी पीएसी, आरआरएफ की तैनाती की गई है. मिश्रित आबादी वाले इलाकों में लगातार फुट पेट्रोलिंग और फ्लैग मार्च किया जा रहा है। 

    सहारनपुर मंडल के डीआईजी अभिषेक सिंह ने कहा कि प्रशासन ने कार्रवाई से पहले सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की हैं. उनके मुताबिक नोटिस और अपील समेत निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। 

    डीआईजी ने सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों को भी चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति इस मामले को लेकर अफवाह फैलाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. ध्वस्तीकरण के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर के आसपास सुरक्षा का खास इंतजाम किया गया. बुलडोजर से मस्जिद के निर्माण को गिराने की कार्रवाई जारी रही और बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी मौके पर तैनात रहे। 

    सहारनपुर जाने से पहले इकरा हसन हाउस अरेस्ट
    उधर, इस कार्रवाई के बीच कैराना से सांसद इकरा हसन को उनके आवास पर हाउस अरेस्ट कर दिया गया. वह सहारनपुर जाने की तैयारी कर रही थीं. इसी दौरान उनके आवास पर बड़ी संख्या में पुलिस बल पहुंचा और उन्हें बाहर जाने से रोक दिया गया। 

    हाउस अरेस्ट के बाद इकरा हसन ने कहा कि वह सहारनपुर कलेक्ट्रेट मस्जिद मामले को लेकर अधिकारियों से मुलाकात करना चाहती थीं और इलाके की जनता की आवाज प्रशासन के सामने रखना चाहती थीं. उनका आरोप है कि उन्हें सहारनपुर जाने से रोकने के लिए घर पर ही नजरबंद कर दिया गया। 

    सांसद ने सवाल उठाया कि क्या किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधि का अपनी जनता से जुड़े मुद्दे पर अधिकारियों से मिलना भी अब अपराध हो गया है. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि जनता की आवाज उठाने के लिए चुने जाते हैं और उन्हें रोककर उस आवाज को दबाया नहीं जा सकता. फिलहाल सहारनपुर में प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर रखी है. कलेक्ट्रेट परिसर में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के साथ-साथ इलाकों में पुलिस की गश्त बढ़ाई गई है। 

     

  • UP आउटसोर्स सेवा निगम की नई व्यवस्था: पारदर्शी भर्ती, पूरा वेतन और सेवा सुरक्षा के लिए 4-स्तरीय निगरानी

    UP आउटसोर्स सेवा निगम की नई व्यवस्था: पारदर्शी भर्ती, पूरा वेतन और सेवा सुरक्षा के लिए 4-स्तरीय निगरानी

    लखनऊ
    आउटसोर्स कार्मिकों के लिए लागू की गई नई व्यवस्था में मौजूदा पारिश्रमिक को सुरक्षित रखने के साथ ही एजेंसियों की मनमानी पर भी अंकुश लगाया गया है। उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (यूपीसीओएस) ने चार श्रेणियों में कार्मिकों को बांटकर न्यूनतम पारिश्रमिक तय किया है। यदि किसी विभाग में किसी कार्मिक को इससे अधिक पारिश्रमिक मिल रहा है तो उसे नई व्यवस्था लागू होने के बाद घटाया नहीं जाएगा, बल्कि मौजूदा पारिश्रमिक ही मिलता रहेगा।

    निगम आउटसोर्सिंग व्यवस्था को महज एजेंसी के जरिए कर्मचारी उपलब्ध कराने की प्रक्रिया के बजाय नियामक व्यवस्था के रूप में काम करेगा। यह एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर नियंत्रण रखेगा और कार्मिकों को बिना किसी कटौती के पूरा पारिश्रमिक दिलाने की व्यवस्था करेगा। साथ ही सभी विभागों, संस्थाओं और स्थानीय निकायों को आवश्यकता के अनुसार मानव संसाधन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी भी निगम की ही होगी।

    निगम ने आउटसोर्स कार्मिकों के लिए जो चार श्रेणियां तय की हैं उनमें श्रेणी-1 (हाईली स्किल्ड) के लिए न्यूनतम 40 हजार रुपये, श्रेणी-2 (स्किल्ड/टेक्निकल) के लिए 25 हजार, श्रेणी-3 (सेमी-स्किल्ड) के लिए 22 हजार और श्रेणी-4 (सपोर्ट स्टाफ) के लिए 20 हजार रुपये का न्यूनतम पारिश्रमिक प्रस्तावित है। मसलन, चिकित्सक, अभियंता और वास्तुविद श्रेणी-1 में, जबकि नर्स, फार्मासिस्ट, डाटा प्रोसेसिंग और ड्राइविंग से जुड़े पद श्रेणी-2 में रखे गए हैं।

    आउटसोर्स कार्मिकों की भर्ती में भी पारदर्शिता लाने का प्रविधान है। विभाग पहले अपनी मांग और आरक्षण नियमों के साथ निगम को भेजेगा। इसके बाद सेवायोजन पोर्टल से छंटनी की जाएगी, फिर 100 अंकों की चयन प्रणाली के आधार पर चयन होगा। अंत में कार्मिक को यूनिक कोड व आइडी कार्ड दिया जाएगा। 50 अंक लिखित परीक्षा, 25 अंक अधिमानी अर्हता, 15 अंक स्थानीय निवासी और 10 अंक विशेष महिला आरक्षण के लिए रखे गए हैं।

    आउटसोर्स कर्मियों की सेवा सुरक्षा को लेकर भी स्पष्ट प्रविधान हैं। व्यवस्था की निगरानी के लिए राज्य/निदेशालय, मंडल, जिला और स्थानीय निकाय स्तर पर चार-स्तरीय समितियां बनाई जाएंगी। ये समितियां कार्मिकों की अर्हता का सत्यापन कर पात्र सूची आउटसोर्स एजेंसी को भेजेंगी। इससे भर्ती, तैनाती और एजेंसी के स्तर पर होने वाली गड़बड़ियों पर निगरानी का तंत्र मजबूत होगा।

    नियमित सरकारी नौकरी का विकल्प नहीं
    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है आउटसोर्स व्यवस्था नियमित सरकारी सेवाओं का विकल्प नहीं है। आउटसोर्स कर्मियों की सेवाएं सृजित/नियमित पदों के विरुद्ध नहीं ली जाएंगी और इसे नियमित रोजगार का दावा नहीं माना जाएगा।

    विभागों को आउटसोर्स मद में पर्याप्त बजट का प्रविधान भी करना होगा। निगम की स्थापित व्यवस्था में किसी भी प्रकार का बदलाव या संशोधन मुख्यमंत्री की स्वीकृति के बाद ही किया जा सकेगा।

  • CM योगी को देखते ही घिर गए बच्चे, चॉकलेट-खिलौने लेकर खुशी से झूम उठी ‘बच्चा पार्टी’

    CM योगी को देखते ही घिर गए बच्चे, चॉकलेट-खिलौने लेकर खुशी से झूम उठी ‘बच्चा पार्टी’

    गोरखपुर
    श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की अगली सुबह शनिवार को गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर परिसर में सुबह-सुबह सीएम योगी से अचानक हुई मुलाकात में बच्चा पार्टी की मौज हो गई। परिसर का राउंड लगाने निकले सीएम योगी को अचानक कुछ बच्चे दिखे तो वे वहीं रुक गए। सीएम ने बच्चों को बुलाया और उनसे बातचीत शुरू कर दी। बच्चे भी उन्हें घेरकर खडे़ हो गए। इसके बाद कुछ देर तक हंसी-ठिठोली और बातें होती रहीं। इसी दौरान सीएम योगी ने चॉकलेट मंगाई और एक-एक कर बच्चों को देनी शुरू कर दी। उन्होंने पूछ-पूछ कर सुनिश्चित किया कि सभी बच्चों को चॉकलेट मिल जाए। इस दौरान बहुत छोटे बच्चों को सीएम योगी ने खिलौने भी दिए। ऐसे ही एक छोटे से बच्चे को उन्होंने झुनझुना बजाकर दिखाया तो बच्चा खिलाखिला उठा। सीएम, मासूम को पास से झुनझुना दिखाया तो उसने खट से उनके हाथ से झुनझुना ले लिया।

    सीएम योगी जब कभी गोरखपुर में होते हैं तो सुबह-सुबह गोरखनाथ मंदिर का राउंड लगाने निकलते हैं। इस दौरान वह कुछ वक्त गोशाला में भी बिताते हैं। शनिवार की सुबह भी सीएम योगी अपनी परंपरागत दिनचर्या के अनुसार गोरखनाथ मंदिर परिसर के भ्रमण पर निकले थे। इसी दौरान बच्चों से उनकी भेंट हो गई। सुबह-सुबह सीएम योगी से बातें कर और उनसे चॉकलेट और खिलौने ले बच्चे खुशी और उत्साह से भर गए।

    सीएम योगी के पास हमेशा रहती हैं चॉकलेट और टॉफियां
    बच्चों को पता है कि सीएम योगी के पास हमेशा कुछ चॉकलेट और टॉफियां होती ही हैं। मुख्यमंत्री बनने के पहले से सीएम योगी जहां कहीं जाते हैं उनकी गाड़ी में चॉकलेट और टॉफियों का डिब्बा जरूर होता है। जहां कहीं बच्चे मिल गए वहां सीएम उनसे बातें, हंसी-ठिठोली करते और फिर चॉकलेट-टॉफियां बांटते दिखते हैं। सीएम योगी के इस अंदाज के चलते छोटे-छोटे बच्चों के बीच वे खासे लोकप्रिय हैं।

    गोरखनाथ मंदिर में धूमधाम से मनी जन्माष्टमी
    इसके पहले शुक्रवार की आधी रात को गोरखनाथ मंदिर में जन्माष्टमी धूमधाम से मनी। श्रीकृष्ण के प्राकट्य के बाद 'नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैयालाल की' और ‘श्रीकृष्ण गोविंद हरे मुरारी, हे नाथ नारायण वासुदेव’ की मंगल धुन, सोहर गीत और घंट-घड़ियाल की ध्वनि के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बतौर गोरक्षपीठाधीश्वर उन्हें गोद में लेकर गर्भगृह से बाहर आए। सीएम योगी ने, प्रभु श्रीहरि के बाल स्वरूप ‘लड्डू गोपाल’ को फूलों से सजे पालने में बैठाकर श्रद्धाभाव से उन्हें झुलाया और आरती उतारी। प्रभु श्रीकृष्ण का प्राकट्य अनुष्ठान पूरा होने के बाद मंदिर की तरफ से श्रद्धालुओं के बीच फलाहार और प्रसाद बांटा गया।

    आज शिक्षकों को सम्मानित करेंगे सीएम
    सीएम योगी शिक्षक दिवस पर शनिवार को गोरखपुर के योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित समारोह में 81 शिक्षकों को सम्मानित करेंगे। इनमें बेसिक के 61 और माध्यमिक के 15 शिक्षकों को राज्य अध्यापक पुरस्कार 2025 और माध्यमिक के पांच शिक्षकों को मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया जाएगा। समारोह को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी और बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह भी संबोधित करेंगे।

  • समर्पण और शानदार कार्य का सम्मान, मुख्यमंत्री योगी 81 शिक्षकों को करेंगे सम्मानित

    समर्पण और शानदार कार्य का सम्मान, मुख्यमंत्री योगी 81 शिक्षकों को करेंगे सम्मानित

    उत्कृष्ट योगदान करने वाले, कार्य के प्रति समर्पित 81 शिक्षकों को मुख्यमंत्री योगी करेंगे पुरस्कृत

    शिक्षक दिवस समारोह में 76 शिक्षकों को मिलेगा राज्य अध्यापक पुरस्कार, 5 को मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार

    शनिवार को गोरखपुर के योगिराज गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में होगा भव्य समारोह का आयोजन
        
    गोरखपुर

     भावी पीढ़ी को गढ़ने व शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार और अन्य उत्कृष्ट प्रयासों से शिक्षण कार्य को नई दिशा देने वाले प्रदेश के 81 शिक्षकों को शिक्षक दिवस पर पुरस्कृत किया जाएगा। 5 सितंबर को गोरखपुर के योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित भव्य समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, चयनित शिक्षकों को 'राज्य अध्यापक पुरस्कार 2025' एवं 'मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार 2025' प्रदान करेंगे।

    पुरस्कार के लिए चयनित कुल 81 शिक्षकों में बेसिक शिक्षा विभाग के 61 तथा माध्यमिक शिक्षा विभाग के 20 शिक्षक शामिल हैं। इनमें 33 महिला शिक्षक (31 बेसिक और 2 माध्यमिक) शामिल हैं। शिक्षक दिवस पर होने वाले समारोह में बेसिक और माध्यमिक के 76 शिक्षकों को राज्य अध्यापक पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। जबकि स्ववित्तपोषित माध्यमिक विद्यालयों के 5 शिक्षकों को मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि स्ववित्तपोषित विद्यालयों के शिक्षकों के लिए मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार की शुरुआत वर्ष 2018 में सीएम योगी ने ही की थी।  

    राज्य अध्यापक पुरस्कार एवं मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार प्राप्त करने वाले प्रत्येक शिक्षक को प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह और 25 हजार रुपये की सम्मान राशि प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही राज्य स्तरीय पुरस्कार प्राप्त करने वाले शिक्षकों की सेवानिवृत्ति की आयु सीमा में दो वर्ष की वृद्धि होगी। इन शिक्षकों को उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों में आजीवन निशुल्क यात्रा की सुविधा मिलेगी।

    पुरस्कार प्राप्त करने के लिए प्रदेशभर से गोरखपुर आए चयनित सभी शिक्षकों को शासन की ओर से विशिष्ट अतिथि के रूप में होटलों में ठहराने की व्यवस्था की गई है। शनिवार को होने वाले शिक्षक दिवस एवं पुरस्कार वितरण समारोह को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अलावा प्रदेश की माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी और बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह भी संबोधित करेंगे। समारोह में मत्स्य विभाग के मंत्री संजय निषाद, गोरखपुर के सांसद रविकिशन के अलावा अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे।

  • सीएम योगी का बड़ा बयान- आक्रांता मंदिर तोड़ सकता है, लेकिन हमारी आस्था नहीं

    सीएम योगी का बड़ा बयान- आक्रांता मंदिर तोड़ सकता है, लेकिन हमारी आस्था नहीं

    आक्रांता मंदिर तोड़ सकता है, हमारी आस्था नहीं: सीएम योगी

    लखनऊ पुलिस लाइन में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी आयोजन में शामिल हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

    अंधकार में जन्म लेकर श्रीकृष्ण ने जीवन भर समाज को दिखाया प्रकाश का मार्ग- मुख्यमंत्री

    सीएम ने कहा- आक्रांताओं ने मूर्तियां तोड़ीं, मंदिरों के ऊपर इमारतें खड़ी कीं, लेकिन हमारे मन में बसे श्रीराम-श्रीकृष्ण को नहीं छू पाए

    अयोध्या में राम मंदिर और काशी विश्वनाथ धाम के भव्य स्वरूप ने दिखाई आस्था की अजेय शक्ति

    लखनऊ
    श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आक्रांता मंदिर तोड़ सकता है, लेकिन आस्था नहीं। वे मूर्तियां तोड़ सकते हैं, मंदिरों के ऊपर अपनी इमारत खड़ी कर सकते हैं, लेकिन वे हमारे मन में बसे श्रीराम-श्रीकृष्ण को कभी छू नहीं पाए। सोमनाथ मंदिर बार-बार टूटा, लेकिन भारत ने उसे बार-बार बनाया। अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर भगवान राम का मंदिर बार-बार टूटा, लेकिन आज यह अपनी अजेय पताका के साथ खड़ा है। काशी में बाबा विश्वनाथ का मंदिर भी बार-बार टूटा, लेकिन पहले लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर और आधुनिक भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने काशी विश्वनाथ धाम के रूप में इसे भव्य स्वरूप दिया।

    पुलिस लाइन लखनऊ में आयोजित श्रीकृष्ण जन्माष्टमी समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन लोगों ने भारत को मिटाने और उसकी आस्था को नष्ट करने का प्रयास किया, वे स्वयं इतिहास के पन्नों में मिट गए। आज कोई उन्हें पूछने वाला नहीं। इसके विपरीत भारत आज भी जाग्रत है और अपनी शाश्वत यात्रा को लेकर आगे बढ़ रहा है। आज का यह आयोजन हम सभी को योगेश्वर श्रीकृष्ण के उस शाश्वत संदेश के साथ जोड़ता है, जो पिछले 5000 वर्षों से अधिक समय से सम और विषम परिस्थितियों में इस समाज का मार्गदर्शन कर रहा है।

    सीएम ने कहा कि श्रीकृष्ण का जन्म जेल की काल कोठरी में होता है। जन्म अंधकार में होता है, लेकिन जीवन भर श्रीकृष्ण ने उन परिस्थितियों को परास्त करते हुए समाज को प्रकाश का मार्ग दिखाया। धर्म, सत्य और न्याय की स्थापना के लिए प्रभु का अवतरण हुआ। यह धर्म कुछ और नहीं, बल्कि वही कर्तव्य है, जिसका पालन करते हुए श्रीकृष्ण को हमने कंस के विरुद्ध और महाभारत के युद्ध में भी देखा है। जीवन में जब भ्रम हो, संशय हो, तब कर्म की प्रेरणा प्रदान करने वाला श्रीकृष्ण का संदेश हम सभी को श्रीमद्भगवद्गीता के माध्यम से प्राप्त होता है, हर सनातनी और हर भारतवासी बड़ी श्रद्धा के साथ उनका स्मरण करता है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सौभाग्य रहा कि मैं कल से आज दोपहर तक वृंदावन और मथुरा में ही था। वहां लाखों की संख्या में उमड़ा जनसैलाब था। लोगों को न बरसात की चिंता थी, न गर्मी की, न सुविधा की और न ही किसी प्रकार का कोई संकोच। सभी के मन में एक ही भाव और एक ही भंगिमा थी कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि में दर्शन करना है। मथुरा, वृंदावन, बरसाना, गोकुल, गोवर्धन, बलदेव और नंदगांव, इन सभी क्षेत्रों में आज भी श्रीकृष्ण की वे स्मृतियां लोगों के मन में बसी हुई हैं। वहां लोग अनावश्यक रूप से पहाड़ों का खनन नहीं करते, पेड़ों की टहनियां नहीं तोड़ते और प्रकृति को नुकसान नहीं पहुंचाते।

    सीएम ने कहा कि इंद्र अपनी पूजा कराना चाहते थे। श्रीकृष्ण ने कहा कि नहीं, जो हमारे अन्नदाता किसानों को और हमारे पशुपालकों को संरक्षण देता है, हमें उसकी पूजा करनी चाहिए। इसीलिए आज भी हम लोग पिछले 5000 वर्षों से गोवर्धन की पूजा कर रहे हैं। श्रद्धालु गोवर्धन की परिक्रमा करते हैं और लाखों की संख्या में वहां पहुंचते हैं। यह भाव हमें दिखाता है कि आक्रांता मंदिर तोड़ सकता है, लेकिन हमारी आस्था नहीं।

    प्रतिस्पर्धा सकारात्मक होनी चाहिए
    मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीकृष्ण का संदेश हम सबके लिए एक ही है कि कर्म क्षेत्र में अपने आप को पहचानो। आज प्रत्येक क्षेत्र में एक नई प्रतिस्पर्धा है। एक नए भाव के साथ पूरा देश आगे बढ़ने के लिए उत्सुक दिखाई देता है, लेकिन यह प्रतिस्पर्धा सकारात्मक होनी चाहिए। जिन लोगों ने आस्था को नष्ट करने का प्रयास किया था, उनका भाव नकारात्मक था, इसलिए वे स्वयं नष्ट हो गए। जिन लोगों ने भारत के भाव और भंगिमा को नष्ट करने का प्रयास किया था, वे इतिहास में नाम शेष हो गए।

    हर व्यक्ति अपने कर्तव्यों का ईमानदारीपूर्वक निर्वहन करे
    मुख्यमंत्री ने कहा कि यह यात्रा केवल सरकार को नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतवासियों को मिलकर तय करनी है। विकसित भारत की संकल्पना तब पूरी होगी, जब सकारात्मक भाव के साथ हर व्यक्ति अपने-अपने कर्तव्यों का ईमानदारीपूर्वक निर्वहन करे। हर व्यक्ति कर्म क्षेत्र में श्रेष्ठ करने की दिशा में अग्रसर होगा तो निश्चित रूप से भारत विकसित भारत होगा और उत्तर प्रदेश विकसित उत्तर प्रदेश होगा।

    कार्यक्रम में जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह, ऊर्जा राज्य मंत्री कैलाश राजपूत, पूर्व डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा, पूर्व मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह, लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल, विधायक नीरज बोरा, जय देवी, अमरेश कुमार और ओपी श्रीवास्तव, मुख्य सचिव एसपी गोयल, पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण, अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद समेत गणमान्य अतिथि मौजूद रहे।

  • ग्राम पंचायतों की जमीन होगी अतिक्रमण मुक्त, हाईकोर्ट बोला- बेदखली आदेश के लिए लंबी प्रक्रिया जरूरी नहीं

    ग्राम पंचायतों की जमीन होगी अतिक्रमण मुक्त, हाईकोर्ट बोला- बेदखली आदेश के लिए लंबी प्रक्रिया जरूरी नहीं

    लखनऊ

    ग्राम पंचायत की जमीनों से अतिक्रमण को हटाने के मामले में हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत पारित बेदखली आदेश को लागू करने के लिए लंबी और पेचीदा प्रक्रिया अपनाने की आवश्यकता नहीं है। कहा कि धारा 67 के तहत अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही संक्षिप्त प्रकृति की है।

    न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने पूजा देवी की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर यह आदेश दीया है। न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी कहा कि प्रावधान से ही स्पष्ट है कि धारा 67(3) के तहत अतिक्रमणकारी को बेदखल करने के लिए आवश्यक बल का प्रयोग भी किया जा सकता है तथा निर्धारित प्रतिकर की वसूली भू-राजस्व के बकाये के रूप में की जा सकती है।

    वर्तमान राजस्व संहिता एवं नियमों के अनुरूप बनाने पर विचार करने को कहा
    कोर्ट ने आगे कहा कि राजस्व संहिता, 2006 और उसके तहत बनाए गए नियमों में अतिक्रमण हटाने तथा आदेश के अनुपालन की प्रक्रिया निर्धारित है। लिहाजा धारा 67 की कार्यवाही के बाद उसके अनुपालन के लिए सिविल प्रक्रिया संहिता की विस्तृत और लंबी प्रक्रिया को नहीं अपनाया जा सकता। न्यायालय ने विशेष रूप से कहा कि धारा 67(3) और अध्याय 12 में अतिक्रमण हटाने तथा प्रतिकर की वसूली के लिए पर्याप्त वैधानिक व्यवस्था उपलब्ध है। इस कारण धारा 67 के आदेश को प्रभावी करने के लिए निष्पादन कार्यवाही को अनावश्यक रूप से जटिल या दीर्घकालिक नहीं बनाया जाना चाहिए। इसके साथ ही न्यायालय ने राज्य सरकार को राजस्व न्यायालय मैनुअल के पैरा 460 की समीक्षा कर उसे वर्तमान राजस्व संहिता एवं नियमों के अनुरूप बनाने पर विचार करने को कहा है।

    हाईकोर्ट ने जमीन के कथित अवैध हस्तांतरण के मामले में नए सिरे से जांच का दिया आदेश
    वहीं हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने मोदी रबर लिमिटेड को दी गई 117 एकड़ जमीन में से लगभग 59 एकड़ जमीन के कथित अवैध हस्तांतरण के मामले में नए सिरे से जांच का आदेश दिया है। न्यायालय ने राजस्व परिषद के अधिकारियों की एक समिति को छह सप्ताह के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट भी सौंपने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही राज्य सरकार को जांच रिपोर्ट मिलने के तीन सप्ताह के भीतर निर्णय लेने का आदेश दिया है। न्यायालय ने पूर्व के आदेशों के अनुपालन में हुई देरी पर राज्य सरकार पर 25 हजार रुपये का हर्जाना लगाया है।न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने यह आदेश लोकेश कुमार खुराना की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर पारित किया। इस मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर को तय की गई है। पिछले आदेश के अनुपालन में, राजस्व विभाग की प्रमुख सचिव अपर्णा यू. कोर्ट के समक्ष उपस्थित हुईं।

  • 591 करोड़ अलर्ट मैसेज से बाढ़ के दौरान यूपी में बचाई गई लाखों की जान, एक भी जनहानि नहीं

    591 करोड़ अलर्ट मैसेज से बाढ़ के दौरान यूपी में बचाई गई लाखों की जान, एक भी जनहानि नहीं

    लखनऊ

    उत्तर प्रदेश में भारी बारिश, आंधी-तूफान, वज्रपात और बाढ़ के बीच योगी सरकार का मजबूत चेतावनी एवं राहत-बचाव तंत्र लोगों के लिए जीवनरक्षक साबित हुआ है। राहत आयुक्त कार्यालय की ओर से बड़े पैमाने पर भेजे गए 591 करोड़ से अधिक अलर्ट मैसेज ने लाखों लोगों को समय रहते मौसम और बाढ़ के संभावित खतरे से सतर्क किया। समय पर मिली चेतावनी, स्थानीय प्रशासन की तत्परता और आमजन की सजगता का नतीजा रहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अब तक एक भी जनहानि नहीं हुई है।

    करोड़ों संदेशों से समय रहते मिली चेतावनी

    प्रदेश में लोगों को भारी बारिश, आंधी-तूफान, वज्रपात और बाढ़ से बचाव के लिए मोबाइल संदेशों के माध्यम से लगातार अलर्ट भेजे गए। जुलाई में 306 करोड़ और अगस्त में 285 करोड़ यानी कुल 591 करोड़ अलर्ट मैसेज प्रसारित किए गए। इसके अलावा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से एक करोड़ से अधिक लोगों तक मौसम संबंधी सूचनाएं और चेतावनियां पहुंचाई गईं। इस व्यापक सूचना तंत्र ने लोगों को समय रहते सावधान होने, सुरक्षित स्थानों पर जाने और जरूरी सुरक्षा उपाय अपनाने में मदद की।

    चेतावनी मिलते ही खुद सुरक्षित हुए लोग

    अलर्ट सिस्टम की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि मौसम और नदियों के जलस्तर से जुड़ी सूचनाएं लोगों तक समय पर पहुंचीं। इससे प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोग संभावित खतरे को समझकर स्वयं भी सुरक्षित स्थानों की ओर जाने में सक्षम हुए। स्थानीय प्रशासन ने भी इन चेतावनियों के आधार पर लगातार लोगों को जागरूक किया। इस तरह तकनीक, प्रशासनिक सतर्कता और आमजन की सजगता ने मिलकर जनसुरक्षा को मजबूत किया।

    3.52 लाख से अधिक लोगों तक पहुंची मदद

    अलर्ट और राहत-बचाव व्यवस्था के जरिए बाढ़ की स्थिति में अब तक 3.52 लाख से अधिक लोगों तक मदद पहुंचाई गई। वहीं राहत एवं बचाव अभियानों के दौरान समय रहते 17.54 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।

    1070 हेल्पलाइन से तत्काल राहत

    राहत आयुक्त कार्यालय की 1070 हेल्पलाइन भी संकट के समय लोगों के लिए महत्वपूर्ण सहारा बनी। सूचना मिलते ही संबंधित जिला प्रशासन को जानकारी उपलब्ध कराई गई और जरूरत के अनुसार राहत एवं बचाव दलों को मौके पर भेजा गया। चित्रकूट, प्रयागराज और मिर्जापुर समेत अन्य प्रभावित जिलों में बाढ़ में फंसे लोगों की लोकेशन प्राप्त कर बचाव दलों तक पहुंचाई गई, जिसके बाद नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालने की कार्रवाई की गई। यही प्रयास बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अब तक शून्य जनहानि सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण साबित हुआ है।

  • नशामुक्त उत्तर प्रदेश के संकल्प को बड़ी कामयाबी, योगी सरकार ने ड्रग नेटवर्क पर कसा शिकंजा

    नशामुक्त उत्तर प्रदेश के संकल्प को बड़ी कामयाबी, योगी सरकार ने ड्रग नेटवर्क पर कसा शिकंजा

    लखनऊ

     उत्तर प्रदेश को नशे के कारोबार से मुक्त कराने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत प्रदेश में ड्रग माफिया और नशीली दवाओं की अवैध सप्लाई चेन के खिलाफ कार्रवाई तेज है। सरकार के इसी अभियान को आगे बढ़ाते हुए एएनटीएफ लखनऊ यूनिट और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की संयुक्त टीम ने राजधानी लखनऊ में नशीली दवाओं के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है।

    ट्रांसपोर्ट नगर में की गई कार्रवाई में करीब 228 किलोग्राम नशीली दवाएं बरामद हुई हैं। इनमें 9.60 लाख एल्जोमैक-0.5 (एल्प्राजोलाम) टैबलेट, 1.20 लाख स्पैसमोनाम प्लस (ट्रामाडोल एचसीएल) कैप्सूल और कोडीनयुक्त ओनेरेक्स 100 एमएल कफ सिरप की 720 बोतलें शामिल हैं। कार्रवाई के दौरान सात मोबाइल फोन और 11,140 रुपये नकद भी मिले। मामले में छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

    एक खेप से खुलने लगी पूरे नेटवर्क की कड़ी

    एएनटीएफ को ट्रांसपोर्ट नगर में नशीली दवाओं की बड़ी खेप पहुंचने की सूचना मिली थी। 3 सितंबर को टीम ने मकान संख्या एस-363/364 के आसपास निगरानी शुरू की। इसी दौरान तीन लोग कार्टूनों को बोरियों में छिपाते दिखाई दिए। संदेह के आधार पर तलाशी लेने पर किशन वासवानी, समीर अहमद और शाद इरशाद के कब्जे से बड़ी मात्रा में नशीली दवाएं बरामद हुईं। कार्रवाई में एफएसडीए की टीम भी शामिल रही। औषधि निरीक्षकों ने बरामद दवाओं के नमूने जांच के लिए सुरक्षित किए।

    पूछताछ आगे बढ़ी तो सप्लाई नेटवर्क की अगली कड़ी सामने आई। किशन वासवानी और समीर अहमद ने दवाओं की आपूर्ति कन्हैया फार्मा के संचालक उमेश कुमार से होने की जानकारी दी। इसके आधार पर उमेश कुमार और सतेन्द्र सिंह को भी गिरफ्तार किया गया।

    फर्म के दस्तावेजों की आड़ में हो रही थी बिलिंग

    जांच में सामने आया कि उमेश कुमार कथित तौर पर सतेन्द्र सिंह की फर्म के दस्तावेजों का इस्तेमाल नशीली दवाओं की बिलिंग के लिए करता था। इसके एवज में सतेन्द्र सिंह को कमीशन दिए जाने की बात सामने आई है। एफएसडीए की जांच के दौरान कन्हैया फार्मा में प्रॉक्सीमेक-एसपीएएस कैप्सूल के 1,116 डिब्बों सहित सात प्रकार की दवाएं मिलीं। फर्म संचालक दवाओं के खरीद और बिक्री से संबंधित पूर्ण अभिलेख उपलब्ध नहीं करा सका। इसके बाद एफएसडीए ने कन्हैया फार्मा को सील कर दिया।

    पूछताछ में सामने आया एक और सप्लायर

    जांच का दायरा बढ़ाते हुए टीम ने शाद इरशाद से पूछताछ की। इसमें विशाल चौरसिया का नाम सामने आया। इसके बाद उसे भी गिरफ्तार किया गया।पूछताछ में विशाल ने शाद को नशीली दवाओं की आपूर्ति करने की बात बताई। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कोडीन से जुड़े एक मामले में अमीनाबाद थाने में एफआईआर दर्ज होने के बाद उसका दवा लाइसेंस निरस्त हो चुका था। इसके बाद वह कथित तौर पर दूसरी फर्मों के माध्यम से नशीली दवाओं का कारोबार कर रहा था। बरामद कोडीनयुक्त कफ सिरप के संबंध में विशाल ने इसे बृजेश वर्मा से खरीदने की बात भी बताई है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां अब नेटवर्क की अन्य कड़ियों की भी जांच कर रही हैं।

    नशे के कारोबार पर सरकार का सख्त संदेश

    एएनटीएफ के मुताबिक किशन वासवानी, समीर अहमद, शाद इरशाद, उमेश कुमार, सतेन्द्र सिंह और विशाल चौरसिया इस अवैध नेटवर्क से जुड़े पाए गए हैं। सभी छह आरोपियों को धारा 8/21/22/29 एनडीपीएस एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया है। बरामद दवाओं का नियमानुसार न्यायालय के समक्ष नमूनाकरण कराया जाएगा। पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी ई-साक्ष्य एप के माध्यम से की गई। योगी सरकार की नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत की गई यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि प्रदेश में नशीली दवाओं के कारोबार को केवल सड़क स्तर पर नहीं, बल्कि सप्लाई, बिलिंग और वितरण से जुड़े पूरे नेटवर्क के स्तर पर निशाना बनाया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाते हुए उत्तर प्रदेश को नशामुक्त बनाने की दिशा में लगातार प्रभावी कार्रवाई करना है।

  • शिक्षकों के सम्मान में सभी वन प्रभाग लगाएंगे ‘एक पेड़ गुरु के नाम’

    शिक्षकों के सम्मान में सभी वन प्रभाग लगाएंगे ‘एक पेड़ गुरु के नाम’

    लखनऊ

    योगी सरकार ने एक तरफ पौधरोपण महायज्ञ-2026 के अंतर्गत एक दिन में 35.27 करोड़ से अधिक पौधे रोप कर रिकॉर्ड बनाया तो दूसरी तरफ इस वर्ष भी विशिष्ट वनों की स्थापना की गई। विशिष्ट वनों की श्रृंखला में 'एक पेड़ गुरु के नाम' के तहत भी विशिष्ट आयोजन होगा। गुरु के सम्मान में 5 सितंबर को शिक्षक दिवस पर सभी वन प्रभागों में यह आयोजन किया जाएगा। 

    योगी सरकार ने रचा इतिहास, 2026 में बनाया सर्वाधिक पौधरोपण का कीर्तिमान

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने नया इतिहास रच दिया। 'एक पेड़ मां के नाम' के अंतर्गत पौधरोपण महायज्ञ-2026 में पूरे प्रदेश में एक दिन (12 जुलाई, रविवारवार) में 35,27,89,926 पौधरोपण हुए। यह सरकार द्वारा तय किए गए लक्ष्य 35 करोड़ से 27,89,926 अधिक रहा। सीएम योगी ने 12 जुलाई को गोरखपुर में दो स्थानों पर पौधरोपण कर अभियान का शुभारंभ किया था।

    लखनऊ में चंद्रिका देवी मंदिर के समीप लगेगा 'एक पेड़ गुरु के नाम' 

    लखनऊ के प्रभागीय वनाधिकारी सितांशु पांडेय ने बताया कि विशिष्ट वनों की श्रृंखला में शिक्षक दिवस पर लखनऊ में भी पौधरोपण अभियान चलाया जाएगा। यहां चंद्रिका देवी मंदिर के समीप 'एक पेड़ गुरु के नाम' कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। यहां आगन्तुकों को स्मृति चिह्न के रूप में पौधे भी भेंट किए जाएंगे। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर में शिक्षक दिवस के मुख्य कार्यक्रम में 'एक पेड़ गुरु के नाम' पौधरोपण कर सकते हैं। 

    पौधरोपण महाभियान-2026 में लगाए गए विशिष्ट वन 

    पौधरोपण महायज्ञ-2026 के तहत गुरु के सम्मान में 5 सितंबर को प्रदेश के सभी वन प्रभागों में 'एक पेड़ गुरु के नाम' लगाया जाएगा। इसे लेकर सभी वन प्रभागों में तैयारी पूरी हो गई है। मुख्य वन संरक्षक (प्रचार-प्रसार) अदिति शर्मा ने बताया कि इस वर्ष भी अनेक विशिष्ट वन स्थापित किए गए। 

    2026 में स्थापित किए गए विशिष्ट वन व अन्य कार्यक्रम
    👉वन योगा कार्यक्रम
    👉श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर पौधरोपण
    👉वन महोत्सव
    👉 पर्यावरण दिवस पर वृहद पौधरोपण
    👉 महर्षि चरक औषधि वन                
    👉 समृद्धि वन                 
    👉 कपि वन                  
    👉 ऊर्जा वन                  
    👉 समरस वन                  
    👉 सहजन भंडारा             
    👉 आम भंडारा
    👉 वंदे मातरम वाटिका                               
    👉 अविरल धारा पौधरोपण    
    👉 मिशन छाया   
    👉 एक्सप्रेस वे पौधरोपण 
    👉 भाई-बहन पौधरोपण (रक्षाबंधन वाटिका)
    👉 एक पेड़ गुरु के नाम आदि