Category: उत्तर प्रदेश

  • यूपी चुनाव की तैयारी तेज, योगी के नेतृत्व में 2027 का चुनाव लड़ेगी भाजपा

    यूपी चुनाव की तैयारी तेज, योगी के नेतृत्व में 2027 का चुनाव लड़ेगी भाजपा

    लखनऊ
    भाजपा, सीएम योगी आदित्यनाथ की कप्तानी में ही 2027 के रण में उतरेगी। पार्टी का यूपी प्रभारी बनाए जाने के बाद पहली बार लखनऊ पहुंचे राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े ने बीजेपी की अंदरुनी सियासत को लेकर राजनीतिक गलियारों में लगाई जाने वाली तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया। शनिवार को उन्होंने कहा कि सीएम योगी की अगुआई में भाजपा एक बार फिर 2027 में यूपी फतेह करेगी। दो दिवसीय दौरे पर आए तावड़े ने सपा के पीडीए पर तंज भी कसा। उन्होंने कहा कि सपा के पीडीए का मतलब पराया धन अपना है। इससे पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन भी योगी के नेतृत्व में 2027 का विधानसभा चुनाव लड़े जाने की बात कह चुके हैं।

    अगले साल होने वाले विधान सभा चुनाव के लिए भाजपा ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। तैयारियों की थाह लेने और पार्टी की चुनावी रणनीति की दिशा तय करने के लिए शनिवार को विनोद तावड़े दो दिवसीय दौरे पर राजधानी पहुंचे हैं। तावड़े ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का यूपी पर पूरा फोकस है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और अमित शाह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के दिशा-निर्देशन में एनडीए के कार्यकर्ता पूरी ताकत से चुनाव लड़ेंगे और यूपी में जीत हासिल करेंगे। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, प्रदेश महामंत्री (संगठन) धर्मपाल सिंह, प्रदेश महामंत्री संजय राय, मुख्यालय प्रभारी गोविन्द नारायण शुक्ला समेत वरिष्ठ नेताओं ने उनका एयरपोर्ट पर स्वागत किया।

    नारी सुरक्षा को मुद्दा बनाएगी भाजपा
    तावड़े ने पीडीए पर तंज कसते हुए जिस तरह से पराया धन अपना कहा और उसकी व्याख्या करते हुए रुपया-पैसा और जमीन-जायदाद के साथ स्त्रीधन का जिक्र किया, उससे अटकलें लगाई जा रही हैं कि भाजपा सपा शासन काल में महिला सुरक्षा की स्थिति को बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी में है। तावड़े ने कहा कि सपा के पीडीए का मतलब पराया धन अपना है। सूत्रों के मुताबिक भाजपा सपा सरकार के कार्यकाल में महिलाओं और बहू-बेटियों की सुरक्षा को लेकर उठे सवालों को पार्टी आगामी चुनाव में फिर जनता के बीच ले जाएगी। छेड़छाड़, महिला उत्पीड़न और दुष्कर्म जैसी घटनाओं को लेकर भाजपा पहले भी सपा सरकार पर हमलावर रही है।

    कोर कमेटी की बैठक
    यूपी दौरे के दूसरे दिन भाजपा कोर कमेटी की बैठक होगी। रविवार को मुख्यमंत्री के साथ तावड़े की मुलाकात होगी। इसमें चुनाव की रणनीति और व्यापक बातचीत करके अहम फैसले लिए जाएंगे। इसके अलावा रविवार को क्षेत्रीय प्रभारियों, क्षेत्रीय अध्यक्षों और क्षेत्रीय महामंत्रियों के साथ भी बैठक प्रस्तावित है। इस बैठक में क्षेत्रवार राजनीतिक स्थितियों का जायजा लेकर उनके मुताबिक चुनावी रणनीति पर बातचीत होगी।

    केशव और ब्रजेश पाठक से मिले तावड़े
    यूपी भाजपा के नए प्रभारी विनोद तावड़े ने शनिवार देर शाम दोनों उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक के सरकारी आवास पर जाकर उनसे मुलाकात की।सूत्रों के मुताबिक दोनों उप मुख्यमंत्रियों से प्रदेश सरकार के कामकाज और जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की पर चर्चा हुई। आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों और संगठन की भावी रणनीति को लेकर भी बातचीत हुई है।विनोद तावड़े और सह प्रभारी जगदीप भाई पटेल का बेहद सादगी से उनका स्वागत हुआ।

  • चित्रकूट में बाढ़ पीड़ितों से मिलेंगे सीएम योगी, 800 परिवारों को देंगे राहत सामग्री

    चित्रकूट में बाढ़ पीड़ितों से मिलेंगे सीएम योगी, 800 परिवारों को देंगे राहत सामग्री

    सीएम योगी रविवार को चित्रकूट पहुंचेंगे, बाढ़ प्रभावित 800 परिवारों को राहत सामग्री वितरित करेंगे

    बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण कर हालात का लेंगे जायजा

    आश्रयहीन परिवारों को देंगे भूमि आवंटन प्रमाणपत्र और राहत राशि का करेंगे वितरण

    रैन बसेरा में बाढ़ पीड़ितों से संवाद कर जानेंगे उनकी समस्याएं

    लखनऊ, 
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को चित्रकूट जनपद के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वह बाढ़ प्रभावित 800 परिवारों को राहत सामग्री वितरित करेंगे। साथ ही बाढ़ में आश्रयहीन हुए परिवारों को आवास के लिए भूमि आवंटन प्रमाण पत्र और आपदा मोचन निधि से राहत राशि भी प्रदान करेंगे।

    मुख्यमंत्री बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण कर हालात का जायजा लेंगे। इसके बाद रैन बसेरा में बाढ़ प्रभावित लोगों से संवाद कर उनकी समस्याएं जानेंगे।

    कार्यक्रम के दौरान मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी, जिला पंचायत प्रशासक अशोक जाटव, नगर पालिका परिषद चित्रकूटधाम कर्वी अध्यक्ष नरेंद्र गुप्ता और मानिकपुर विधायक अविनाश चंद्र द्विवेदी समेत अन्य गणमान्य मौजूद रहेंगे।

  • बाढ़ प्रभावितों के लिए योगी सरकार की बड़ी मुहिम, 19 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित ठिकानों तक पहुंचाया

    बाढ़ प्रभावितों के लिए योगी सरकार की बड़ी मुहिम, 19 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित ठिकानों तक पहुंचाया

    बाढ़ में योगी सरकार का राहत अभियान तेज, 19 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया

    राहत-बचाव के बीच 4.66 लाख से अधिक लंच पैकेट और 92 हजार राहत खाद्य पैकेट वितरित किए

    1,977 नाव-मोटरबोट से जारी है बचाव अभियान, अब तक शून्य जनहानि, शरणालयों में मिला सुरक्षित ठिकाना

    लोगों के स्वास्थ का ध्यान रखते हुए 6.13 लाख क्लोरीन टैबलेट और 2.17 लाख ओआरएस वितरित किए

    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश में बाढ़ की चुनौती के बीच योगी सरकार ने राहत एवं बचाव अभियान को युद्धस्तर पर तेज कर दिया है। प्रशासन की सतर्कता, राहत दलों की तत्परता और प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी का असर साफ दिखाई दे रहा है। उत्तर प्रदेश राहत आयुक्त कार्यालय के मुताबिक प्रदेश में अब तक 19,294 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है, जबकि बाढ़ से जन व पशुहानि का आंकड़ा शून्य है। प्रभावित परिवारों तक भोजन और जरूरी राहत सामग्री पहुंचाने के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा के भी व्यापक इंतजाम किए गए हैं।

    4.66 लाख से अधिक लंच पैकेट बांटे
    बाढ़ प्रभावित लोगों को तत्काल भोजन उपलब्ध कराने के लिए बड़े स्तर पर राहत अभियान चल रहा है। अब तक 4.66 लाख से अधिक लंच पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। इसके अलावा 92,128 बाढ़ राहत खाद्य पैकेट भी प्रभावित परिवारों तक पहुंचाए गए हैं। इससे बाढ़ के चलते आवागमन अवरुद्ध होने से प्रभावित होने वाले परिवारों को संकट के समय भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित हो रही है।

    रेस्क्यू अभियान में 1,977 नाव-मोटरबोट
    राहत एवं बचाव अभियान के लिए अब तक 1,977 नाव एवं मोटरबोट रेस्क्यू कार्य में लगाई जा चुकी हैं। इनके माध्यम से प्रभावित गांवों और जलभराव वाले इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के साथ जरूरी राहत सामग्री भी पहुंचाई जा रही है।

    1,313 बाढ़ शरणालयों में सुरक्षित ठिकाना
    प्रभावित लोगों के लिए प्रदेश में अब तक 1,313 बाढ़ शरणालय स्थापित किए गए हैं। जहां 6,538 लोग रह रहे हैं। सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए गए लोगों के लिए भोजन और आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जा रही है।

    स्वास्थ्य विभाग से लगातार सक्रिय
    बाढ़ के बाद जलजनित बीमारियों की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग भी सक्रिय है। प्रदेश में 1,072 मेडिकल टीमें गठित की गई हैं। स्वच्छ पेयजल और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए अब तक 6.13 लाख से ज्यादा क्लोरीन टैबलेट और 2.17 लाख से अधिक ओआरएस पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। इससे प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य संबंधी जोखिम को कम करने में मदद मिल रही है।

    शनिवार को प्रभावित जिले
    अयोध्या, आजमगढ़, बहराइच, बदायूं, बलिया, बांदा, बाराबंकी, बस्ती, चंदौली, फर्रुखाबाद, गाजीपुर, गोंडा, गोरखपुर, हरदोई, कासगंज, कानपुर नगर, लखीमपुर खीरी, मिर्जापुर, मुरादाबाद, प्रयागराज, रायबरेली, संत कबीर नगर, रामपुर, शाहजहांपुर, सीतापुर, उन्नाव और वाराणसी।

  • गुमशुदा बच्चों की घर वापसी में यूपी पुलिस की बड़ी कामयाबी, 18 हजार से अधिक मामलों का हुआ समाधान

    गुमशुदा बच्चों की घर वापसी में यूपी पुलिस की बड़ी कामयाबी, 18 हजार से अधिक मामलों का हुआ समाधान

    योगी सरकार में गुमशुदा बच्चों की तलाश को मिली और रफ्तार, 18 हजार से ज्यादा मामलों का निस्तारण

    बाल हेल्पलाइन पर 7 महीने में सामने आए करीब 20,500 मामले

    9,146 बच्चों से जुड़े मामलों में 92.05% का निस्तारण, परिवारों तक सुरक्षित पहुंचाने पर जोर

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में बाल सुरक्षा के व्यापक तंत्र को मिल रही मजबूती

    महिला कल्याण विभाग की सक्रियता से बड़ी संख्या में परिवारों को मिली राहत

    लखनऊ,
    बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण और सुरक्षित भविष्य को लेकर योगी सरकार की संवेदनशीलता का असर बाल हेल्पलाइन के आंकड़ों में स्पष्ट रूप से सामने आया है। 7 महीने में बाल हेल्पलाइन (1098) पर बच्चों के गुम होने से संबंधित करीब 20,500 मामले सामने आए, जिनमें 18,123 मामलों का सफलतापूर्वक निस्तारण किया जा चुका है। गुमशुदा बच्चों की तलाश, उनकी सुरक्षित बरामदगी और परिवार से पुनर्मिलन के लिए प्रदेश का बाल संरक्षण तंत्र लगातार सक्रियता से काम कर रहा है। संकट में फंसे बच्चों तक समय पर सहायता पहुंचाने और उन्हें सुरक्षित उनके परिवार तक वापस पहुंचाने के लिए सरकार ने एक संवेदनशील और जवाबदेह व्यवस्था विकसित की है।

    हर सूचना पर सक्रियता, बड़ी संख्या में परिवारों को मिली राहत

    बाल हेल्पलाइन के आंकड़ों के अनुसार,1 जनवरी से 1 अगस्त 2026 तक बच्चों से संबंधित कुल 58,293 मामले प्राप्त हुए, जिनमें 50,589 मामलों का निस्तारण किया जा चुका है। इनमें सबसे ज्यादा संख्या गुमशुदा बच्चों से संबंधित मामलों की रही। वहीं 9,146 बच्चों के मिलने से जुड़े मामले भी हेल्पलाइन तक पहुंचे, जिनमें 8,419 मामलों का समाधान किया गया। योगी सरकार की प्राथमिकताओं में बच्चों की सुरक्षा और उन्हें सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना प्रमुख रूप से शामिल है। इसी सोच के तहत हेल्पलाइन के माध्यम से प्राप्त सूचनाओं को संबंधित स्तर तक पहुंचाने के साथ मामलों की प्रगति पर भी नजर रखी जा रही है। 

    गुमशुदा बच्चों की सुरक्षित वापसी पर विशेष फोकस

    गुमशुदगी के मामलों में बड़ी संख्या में निस्तारण होना उन परिवारों के लिए बड़ी राहत है, जिनके बच्चे किसी कारण से उनसे बिछड़ गए। बाल संरक्षण तंत्र बच्चों की तलाश के साथ उनकी सुरक्षा और आवश्यक सहायता सुनिश्चित करने पर भी ध्यान दे रहा है। बच्चों के मिलने के बाद उन्हें परिवार तक सुरक्षित पहुंचाने और जरूरत पड़ने पर काउंसलिंग एवं पुनर्वास सेवाओं से जोड़ने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जाती है।

    काउंसलिंग और पुनर्वास पर दिया जा रहा ध्यान

    महिला कल्याण विभाग की निदेशक सी. इंदुमति ने बताया कि प्रदेश सरकार बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। गुमशुदा बच्चों से संबंधित प्रत्येक सूचना को गंभीरता से लेते हुए संबंधित स्तर पर कार्रवाई की जाती है। बच्चों की तलाश के साथ उनकी सुरक्षित वापसी, परिवार से पुनर्मिलन तथा जरूरत के अनुसार काउंसलिंग और पुनर्वास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। बाल हेल्पलाइन पर केवल गुमशुदगी ही नहीं, बल्कि अन्य समस्याओं से जुड़े मामले भी सामने आते हैं। इन पर भी संबंधित विभागों और संस्थाओं के समन्वय से कार्रवाई की जा रही है। ऐसे में हेल्पलाइन बच्चों की समस्याओं को सुनने और उन्हें समाधान तक पहुंचाने के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में काम कर रही है।

  • आधुनिक सुविधाओं से संवरेंगे यूपी के गांव, योगी सरकार का डिजिटल लाइब्रेरी से पंचायत भवन तक जोर

    आधुनिक सुविधाओं से संवरेंगे यूपी के गांव, योगी सरकार का डिजिटल लाइब्रेरी से पंचायत भवन तक जोर

    गांवों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ रही योगी सरकार, डिजिटल लाइब्रेरी से लेकर पंचायत उत्सव भवन तक पर जोर

    ग्रामीण युवाओं के लिए पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का नया केंद्र

    पंचायत भवन बनेंगे गांव के सामाजिक केंद्र, जवाबदेही और गुणवत्ता पर भी निगरानी

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने के साथ-साथ पंचायतों को शिक्षा, डिजिटल संसाधन और सामाजिक गतिविधियों का केंद्र बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इसी कड़ी में ग्राम पंचायत स्तर पर डिजिटल लाइब्रेरी, पंचायत उत्सव भवन और बहुउद्देशीय पंचायत भवनों के निर्माण एवं संचालन पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
       वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में प्रदेश की ग्राम पंचायत एवं वार्ड स्तर पर डिजिटल लाइब्रेरी की स्थापना के लिए 454 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही 1000 बहुउद्देशीय पंचायत भवनों के निर्माण के लिए करीब 57 करोड़ रुपये तथा प्रत्येक विधानसभा के ग्रामीण क्षेत्र में पंचायत उत्सव भवन/बारात घर के लिए 100 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। 

        ग्राम पंचायतों में स्थापित की जा रही डिजिटल लाइब्रेरियों का उद्देश्य केवल किताबें उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि गांव के बच्चों और युवाओं को ई-बुक्स, डिजिटल अध्ययन सामग्री और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से जुड़ी सामग्री पंचायत स्तर पर उपलब्ध कराना है। सरकार की योजना के तहत डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देने और ग्रामीण युवाओं में पढ़ने की आदत विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। डिजिटल लाइब्रेरी परियोजना के तहत कई जिलों में फर्नीचर और पुस्तकों की आपूर्ति का काम पूरा हो चुका है, जबकि कुछ स्थानों पर भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जानी बाकी है। इसके साथ ही डिजिटल लाइब्रेरियों के लिए आईटी उपकरण, फर्नीचर, पुस्तकों और ई-कंटेंट की व्यवस्था तथा उनके रखरखाव के लिए मानक कार्यप्रणाली (SOP) पर भी जोर दिया गया है।

      योगी सरकार की ग्रामीण विकास की सोच में पंचायत भवनों को केवल सरकारी कामकाज तक सीमित रखने के बजाय उन्हें गांव के सामाजिक, शैक्षिक और सामुदायिक केंद्र के रूप में विकसित करने पर जोर है। पंचायत उत्सव भवनों का उपयोग विवाह, सामाजिक और मांगलिक कार्यक्रमों के लिए किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री ने भी ग्राम पंचायतों में उत्सव भवन विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है और राज्य सरकार की ओर से इसके लिए वित्तीय सहयोग की व्यवस्था की गई है। 

        डिजिटल लाइब्रेरी के संचालन को लेकर उत्तरदायित्व एवं संचालन, भवन-सुरक्षा एवं स्वच्छता, पुस्तक एवं फर्नीचर प्रबंधन, आईटी उपकरण, निरीक्षण-रिपोर्टिंग एवं नागरिक फीडबैक तथा जवाबदेही एवं अनुपालन को प्रमुख बिंदु बनाया गया है। यानी सरकार केवल संसाधन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि उनके नियमित संचालन और उपयोगिता की निगरानी पर भी जोर दिया जा रहा है। इस पूरी पहल को योगी सरकार के उस विजन से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें गांवों को बेहतर शिक्षा, डिजिटल सुविधाओं, आधुनिक पंचायत व्यवस्था और सामुदायिक आधारभूत ढांचे से लैस कर ग्रामीण जीवन को अधिक सुविधाजनक बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
         डिजिटल लाइब्रेरी से गांव के युवा डिजिटल दुनिया से जुड़ेंगे, जबकि पंचायत उत्सव भवन ग्रामीण समाज को सामुदायिक गतिविधियों के लिए बेहतर स्थान उपलब्ध कराएंगे। इस तरह पंचायतें केवल प्रशासनिक इकाई नहीं, बल्कि गांव के विकास और सामाजिक परिवर्तन के केंद्र के रूप में विकसित हो रही हैं।

  • शिक्षक प्रशिक्षण को बेहतर बनाने की दिशा में बड़ा कदम, 17 डायटों में वरिष्ठ प्रवक्ता बने प्रभारी प्रधानाचार्य

    शिक्षक प्रशिक्षण को बेहतर बनाने की दिशा में बड़ा कदम, 17 डायटों में वरिष्ठ प्रवक्ता बने प्रभारी प्रधानाचार्य

    योगी सरकार के प्रयासों से मजबूत हो रही शिक्षक प्रशिक्षण व्यवस्था, 17 डायटों में वरिष्ठ प्रवक्ताओं को प्रधानाचार्य का प्रभार

    – वरिष्ठता क्रम के आधार पर वरिष्ठ प्रवक्ताओं को सौंपी गई जिम्मेदारी

    – विशेष सचिव बेसिक शिक्षा, यतीन्द्र कुमार ने निदेशक एससीईआरटी को दिए आवश्यक कार्यवाही के निर्देश

    – डायटों के प्रभावी संचालन से शिक्षक प्रशिक्षण और शैक्षणिक गतिविधियों को मिलेगा संस्थागत संबल

    – एटा, इटावा और मऊ में भी अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था

    लखनऊ
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता के साथ शिक्षक प्रशिक्षण व्यवस्था को भी लगातार सुदृढ़ कर रही है। इसी क्रम में बेसिक शिक्षा विभाग के विशेष सचिव यतीन्द्र कुमार ने निदेशक, राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तर प्रदेश को पत्र जारी कर 17 जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) में वरिष्ठ प्रवक्ताओं को वरिष्ठता क्रम के आधार पर प्रधानाचार्य पद का प्रभार दिए जाने के संबंध में आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही एटा, इटावा और मऊ के डायट में तीन वरिष्ठ प्रवक्ताओं को प्रधानाचार्य पद का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

    योगी सरकार के विशेष सचिव की ओर से जारी पत्र में शासन द्वारा सम्यक विचारोपरांत डायटों के सुचारु संचालन के लिए संबंधित वरिष्ठ प्रवक्ताओं को प्रधानाचार्य पद का प्रभार दिए जाने का निर्णय बताया गया है। निदेशक एससीईआरटी को संबंधित अधिकारियों को प्रभार दिलाने और आवश्यक अग्रेतर कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

    डायट, प्रदेश की शिक्षक प्रशिक्षण व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। शिक्षकों के प्रशिक्षण, क्षमता संवर्धन, शैक्षणिक सहयोग और विद्यालयी शिक्षा में नवाचारों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने में इन संस्थानों की अहम भूमिका है। ऐसे में डायटों को प्रभावी नेतृत्व उपलब्ध कराना शिक्षक प्रशिक्षण व्यवस्था को संस्थागत रूप से मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

    17 डायटों में वरिष्ठ प्रवक्ताओं को जिम्मेदारी
    शासन के निर्देश के अनुसार इनमें राजेश कुमार सिंह (बहराइच), राम प्रताप सिंह (श्रावस्ती), विनोद कुमार (हमीरपुर), मुक्तेश कुमार (फिरोजाबाद), संजय कुमार (फर्रुखाबाद), नवाब वर्मा (हाथरस), दीपक श्रीवास्तव (ललितपुर), अश्वनी प्रताप सिंह (जालौन), विश्वदीपक त्रिपाठी (चंदौली), विमलेश कुमार त्रिपाठी (मिर्जापुर), सुरिद्धि पाण्डेय (सोनभद्र), सुनील कुमार (बलिया), कुलदीप नारायण सिंह (देवरिया), दीनानाथ (कुशीनगर), नरेन्द्र सिंह (संतकबीर नगर), आशीष चौहान (शाहजहांपुर) और नन्दित कुमार (झांसी) शामिल हैं।

    इन्हें मिला अतिरिक्त प्रभार
    जिन तीन वरिष्ठ प्रवक्ताओं/अधिकारी को अतिरिक्त प्रभार दिया गया है, उनमें पत्र में आराध्य उपाध्याय, वरिष्ठ प्रवक्ता, डायट अलीगढ़ को डायट एटा, अतुल कुमार सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक, इटावा को डायट इटावा तथा अतुल कुमार तिवारी, वरिष्ठ प्रवक्ता, डायट मऊ को डायट मऊ के प्रधानाचार्य पद का अतिरिक्त प्रभार दिए जाने के लिए आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए गए हैं।

  • मुख्यमंत्री ने कालभैरव और बाबा विश्वनाथ की चौखट पर मत्था टेका

    मुख्यमंत्री ने कालभैरव और बाबा विश्वनाथ की चौखट पर मत्था टेका

    मुख्यमंत्री ने कालभैरव और बाबा विश्वनाथ की चौखट पर मत्था टेका

    प्रदेश की सुख-शांति, समृद्धि और लोक कल्याण के लिए मुख्यमंत्री ने की पूजा-अर्चना

    वाराणसी
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने काशी कोतवाल बाबा कालभैरव और श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन कर देश और प्रदेशवासियों के सुख, शांति, समृद्धि और लोक कल्याण की कामना की। 

    मुख्यमंत्री शनिवार को 'काशी कोतवाल' बाबा कालभैरव मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना एवं आरती कर बाबा का आशीर्वाद प्राप्त किया। बाबा कालभैरव के चरणों में शीश नवाकर उन्होंने लोक कल्याण और उत्तर प्रदेश की समृद्धि के लिए मंगल कामना की। इसके बाद मुख्यमंत्री श्री काशी विश्वनाथ धाम पहुंचे। यहां उन्होंने बाबा विश्वनाथ के गर्भगृह में विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया तथा प्रदेश और देशवासियों के सुख, शांति, समृद्धि एवं लोक कल्याण की प्रार्थना की।

  • श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर पूरे प्रदेश में आयोजन हुए, लेकिन कहीं दंगा या कर्फ्यू का नाम नहीं सुना होगा: सीएम योगी

    श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर पूरे प्रदेश में आयोजन हुए, लेकिन कहीं दंगा या कर्फ्यू का नाम नहीं सुना होगा: सीएम योगी

    गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कि शिक्षा में राजनीति का कोई स्थान नहीं होना चाहिए। राजनीति के चश्मे से देखने वालों को 2017 के बाद प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में आया आमूलचूल परिवर्तन दिखाई नहीं देगा। उन्होंने प्रदेशभर के शिक्षकों का आह्वान किया कि वे शिक्षा व्यवस्था में उत्कृष्टता और नवाचार को लेकर स्वस्थ प्रतिस्पर्धा आगे बढ़ाएं। यही स्वस्थ प्रतिस्पर्धा प्रदेश और देश का भविष्य बनाएगी। 

    सीएम योगी शनिवार को शिक्षक दिवस पर बेसिक व माध्यमिक शिक्षा के राज्य अध्यापक पुरस्कार एवं मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार वितरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। गोरखपुर में योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित इस समारोह में बेसिक शिक्षा विभाग के 61 और माध्यमिक शिक्षा विभाग के 20 शिक्षकों (कुल 81) को पुरस्कृत किया गया। सभी शिक्षकों को मुख्यमंत्री ने अपने हाथों से पुरस्कृत किया। शिक्षकों को पुरस्कार देते समय सीएम योगी ने उनसे आत्मीय संवाद कर बधाई दी और उन्हें प्रोत्साहित भी किया।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विगत साढ़े नौ साल में शिक्षा व्यवस्था में आए सकारात्मक परिवर्तन की विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि बेसिक और माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था में सुदृढ़ता लाने का काम वर्ष 2017 से पहले भी हो सकता था। पर, तत्कालीन सरकारों ने ध्यान नहीं दिया। उन्होंने तंज कसा, ‘जितना पैसा आप सैफई महोत्सव में खर्च करते थे, उसी में थोड़ा सा पैसा शिक्षा की तरफ डाइवर्ट करते तो लाखों बच्चों का भविष्य बन चुका होता। जितने पैसे में बकिंघम की बग्गी मंगा कर अपना जन्मदिन मनाते थे, उतना पैसा शिक्षा पर खर्च करते, तो बच्चों का भविष्य बनता, पहचान का संकट नहीं आता।’

    टिप्पणी करना आसान है, कर के दिखाना मुश्किल
    मुख्यमंत्री ने शिक्षा पर राजनीति करने वालों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि चुनावी घोषणा अलग बात है, लेकिन स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी बनाना कठिन होता है, यह आज प्रदेश में दिखाई दे रहा है। बयान देना आसान है, लेकिन 1.60 करोड़ बच्चों के अकाउंट में डीबीटी से पैसा पहुंचाना कठिन है और यह हुआ है। संस्कृत की छठी क्लास से लेकर आचार्य तक, बच्चों को स्कॉलरशिप के साथ जोड़ना कठिन था, लेकिन सरकार ने वह भी किया। प्रोजेक्ट अलंकार, ऑपरेशन कायाकल्प से बेसिक व माध्यमिक विद्यालयों में परिवर्तन कठिन था, पर इसे भी किया गया। टिप्पणी करना बहुत आसान है, लेकिन करके दिखाना मुश्किल।

    यूपी को बदनाम करने के लिए दुष्प्रचार
    सीएम योगी ने यूपी को बदनाम करने के लिए दुष्प्रचार की तरफ भी ध्यान आकृष्ट कराया। उन्होंने कहा कि दूसरे राज्य के जर्जर विद्यालय भवन का वीडियो झांसी का बताकर चलाया गया। यूपी के शिक्षा जगत को अपमानित करने का प्रयास करने वालों को स्मार्ट क्लास, ऑपरेशन कायाकल्प जैसे व्यापक परिवर्तन दिखाई नहीं देते। लेकिन, हमारी प्रतिस्पर्धा चुनावी घोषणाबाजों से नहीं, समय से है। जिस बच्चे को आप पढ़ा रहे हैं, अगर उसमें चूक हो गई तो उसका बचपन दोबारा नहीं आने वाला। इसलिए सही समय पर सही दिशा में सही निर्णय लेने की आदत होनी चाहिए। शिक्षा के प्रति विश्वास को बनाए रखना सरकार और शिक्षकों की सामूहिक जिम्मेदारी है। बदलती टेक्नोलॉजी पर हम मौन नहीं रह सकते। हमें एआई, रोबोटिक्स व ड्रोन टेक्नोलॉजी के अनुरूप खुद को तैयार करने की जरूरत है।

    2017 से पहले दंगा-कर्फ्यू व अराजकता का दौर
    मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन लोगों को प्रदेश में चार बार शासन करने का अवसर मिला और जिस कांग्रेस को लगभग छह दशक तक यूपी में शासन करने का अवसर प्राप्त हुआ था, वे दोनों प्रदेश की बदलती व्यवस्था पर प्रश्न खड़ा करने का प्रयास कर रहे हैं। पुराने जर्जर भवन दरअसल उन्हीं के स्मारक थे, जिन्हें हम रिप्लेस कर चुके हैं, वे शिक्षा व्यवस्था पर प्रश्न खड़ा करने का प्रयास कर रहे हैं। डबल इंजन की सरकार शिक्षा व्यवस्था को एक्सक्लूसिव, अधिक संसाधनपूर्ण तथा पारदर्शी बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। कोई ऐसा शिक्षक नहीं होगा, जिसने नौ वर्ष पहले और आज के उत्तर प्रदेश का परिवर्तन नहीं देखा हो। 2017 से पहले उपद्रव, कर्फ्यू, दंगे व अराजकता के माहौल में स्कूल-कॉलेजों के चलने की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। अब कहीं कोई संकट नहीं। कोई उत्सव से पहले उपद्रव नहीं कर सकता। कल जन्माष्टमी थी। सभी 1586 थानों में, देव मंदिरों में, 75 जनपदों की पुलिस लाइन में, सभी जेलों में, हर मोहल्ले-गांव में इसके आयोजन हुए, लेकिन कहीं कर्फ्यू या दंगे का नाम भी नहीं सुना होगा।

    यूपी के शिक्षकों पर अब कोई प्रश्न नहीं
    सीएम योगी ने कहा कि आज के उत्तर प्रदेश में कोई शिक्षकों पर प्रश्न नहीं खड़ा करता। जबकि 2017 के पहले ठेके पर नकल होती थी। स्कूल-कॉलेज नकल के अड्डे बन गए थे। युवाओं के सामने पहचान का संकट था और भारत की सबसे बड़ी आबादी का राज्य कठघरे में खड़ा दिखाई देता था। लोग उत्तर प्रदेश में आना नहीं चाहते थे। हमारे युवाओं व शिक्षकों को बाहरी राज्यों में शक की निगाहों से देखा जाता था। लेकिन, अब सभी जगह हमारे युवाओं व शिक्षकों का सम्मान किया जाता है। यूपी के प्रति धारणा बदली है। इस परिवर्तन के महत्वपूर्ण वाहक शिक्षक हैं और शिष्य का योग्य व संस्कारी बनना ही सबसे बड़ी गुरु दक्षिणा है।

    टीचर, टैलेंट और ट्रांसफॉर्मेशन को जोड़ा गया
    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए टीचर, टैलेंट और ट्रांसफॉर्मेशन जोड़ा गया। इस ट्रिपल-टी में शिक्षक का सम्मान, विद्यार्थी के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और संसाधनों की उपलब्धता पर जोर है। सरकार ने शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ाकर 18 हजार और अनुदेशकों का 17 हजार रुपये कर दिया है। 5 लाख रुपये कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा और सामाजिक सुरक्षा की भी गारंटी दी गई। बेसिक, माध्यमिक, उच्च शिक्षा से जुड़े हुए सभी शिक्षकों, शिक्षणोत्तर कर्मचारियों व उनके परिवार को 5 लाख रुपये प्रतिवर्ष कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने का काम किया गया। पहली बार सोशल सिक्योरिटी की गारंटी दी गई। हमारा मानना है कि बच्चों का भविष्य गढ़ने वालों का सम्मान पहले होना चाहिए। राज्य अध्यापक पुरस्कार की राशि को 10000 से बढ़ाकर 25000 रुपये किया गया। सेवा मामलों में पारदर्शिता के लिए ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट पोर्टल विकसित किया गया। इसी तरह गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए अनेक कार्य किए गए। निपुण भारत अभियान के अच्छे परिणाम मिल रहे हैं, यह अब पांचवी क्लास तक चलेगा। 

    पूरा देश देख रहा यूपी का शिक्षा मॉडल
    मुख्यमंत्री ने बताया कि अकेले माध्यमिक शिक्षा में 1500 करोड़ रुपये से अधिक धनराशि पुराने व जर्जर विद्यालय भवनों की जगह नए भवन बनाने के लिए उपलब्ध कराई गई। इससे 2100 से अधिक अच्छे भवन बने हैं। पहले चरण में हर जनपद में दो-दो सीएम कंपोजिट विद्यालय बनवाए जा रहे हैं। इसे  तहसील स्तर पर लागू करने का प्रयास है। इसका मॉडल अटल आवासीय विद्यालय की तर्ज पर डे-स्कूल जैसा होगा, जहां पहली से लेकर 12वीं तक के बच्चे इंटीग्रेटेड कैंपस में पढ़ पाएंगे। यूपी के स्कूलों में आज स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी, बालक-बालिकाओं के लिए सेपरेट टॉयलेट, शुद्ध पेयजल व्यवस्था व भरपूर बिजली है। 32000 से अधिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, 15000 से अधिक विद्यालयों में आईसीटी लैब, 1129 विद्यालयों में डिजिटल लाइब्रेरी और 261000 से अधिक शिक्षकों को टैबलेट उपलब्ध कराए जा चुके हैं। उत्तर प्रदेश का शिक्षा मॉडल पूरा देश देख रहा है। क्लीन एंड ग्रीन स्कूल बनाने की दिशा में हुए प्रयासों से वर्ष 2025-26 में उत्तर प्रदेश के 12 विद्यालयों को राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुआ है।

    भेदभाव समाप्त करने का सरल माध्यम है टेक्नोलॉजी
    मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्रों में 21वीं सदी के स्किल्स, डिजिटल लिट्रेसी और इनोवेशन की एप्रोच विकसित करने की दिशा में रोबोटिक्स, थ्री-डी प्रिंटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी एडवांस टेक्नोलॉजी की ट्रेनिंग के लिए हमारे विद्यालय तैयार हो रहे हैं। जहां स्मार्ट क्लास पहुंची, वहां शहर और गांव का भेद समाप्त हुआ। जहां डिजिटल लाइब्रेरी पहुंची, वहां गरीब और अमीर का भेद समाप्त हुआ। भेदभाव समाप्त करने के लिए टेक्नोलॉजी सबसे सरल माध्यम है। माध्यमिक शिक्षा में 56 लाख बच्चे दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षा में बैठते हैं। 2017 के पहले 3 महीने परीक्षा चलती थी और 3 महीने लगते थे परिणाम आने में। इस देरी से यूपी के बच्चे यूपी के बाहर कहीं प्रवेश नहीं ले पाते थे। आज समय पर परीक्षा होती है और समय पर परिणाम भी आता है। 

    शिक्षक का स्थान नहीं ले सकती कोई मशीन
    सीएम ने कहा कि टेक्नोलॉजी के बढ़ते प्रयोग के बाद भी शिक्षक का स्थान कोई नहीं ले सकता। मशीन उत्तर दे सकती है, लेकिन मशीन प्रश्न करना नहीं सिखाती। प्रश्न पूछना तो केवल एक शिक्षक सिखाता है। एआई संस्कार नहीं दे सकता, वह तो शिक्षक देगा। शिक्षकों के हाथ में यूपी का, देश का भविष्य है। जिस बच्चे को आज पढ़ा रहे हैं, यही कल शिक्षक, चिकित्सक, अधिवक्ता, प्रशासनिक अधिकारी, वैज्ञानिक, इंजीनियर और देश का नेतृत्वकर्ता भी बनेगा। बच्चे को जैसा संस्कार और अनुशासन देंगे, उसी रूप में वह आपको स्मरण करेगा।

    डॉ. राधाकृष्णन को याद कर दी शिक्षक दिवस की बधाई
    मुख्यमंत्री ने पूर्व राष्ट्रपति सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन को यादकर प्रदेशवासियों को शिक्षक दिवस की बधाई दी। भारत रत्न से सम्मानित डॉ. राधाकृष्णन को उच्चकोटि का विद्वान और महान दार्शनिक बताते हुए उन्होंने कहा कि उनकी जयंती शिक्षक दिवस के रूप में मनाई जाती है। मुख्यमंत्री ने शिक्षक/गुरु की भूमिका के उल्लेख में वेदव्यास, चाणक्य, सुश्रुत, चरक, आर्यभट्ट आदि के योगदान को भी याद किया। 

    शिक्षा एवं शिक्षक सीएम योगी की प्राथमिकता: गुलाब देवी
    समारोह में माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी ने कहा कि शिक्षा एवं शिक्षक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की विशेष प्राथमिकता में शामिल हैं। वह शिक्षकों के कल्याण व भलाई के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। इसी के तहत शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और रसोइयों को कैशलेस इलाज सहित अनेक सुविधाएं दी हैं। सीएम योगी के मार्गदर्शन में यूपी बोर्ड ने परीक्षाओं में शुचिता व पारदर्शिता का श्रेष्ठतम उदाहरण प्रस्तुत किया है। विगत वर्षों में बोर्ड परीक्षा में पेपर लीक जैसी कोई घटना नहीं हुई एवं नकलविहीन परीक्षा संपन्न होकर रिकार्ड समय में परिणाम घोषित हुआ। 
      
    सीएम योगी के मार्गदर्शन में बेसिक शिक्षा में उल्लेखनीय प्रगति: संदीप सिंह
    समारोह में सीएम योगी का स्वागत करते हुए बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि विगत नौ वर्षों से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में सरकार शिक्षकों के सम्मान व कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। बेसिक शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। शिक्षा को डिजिटल टेक्नोलॉजी से जोड़कर उसे वर्तमान और भविष्य के अनुकूल बनाया गया है। हमारी सरकार के लिए शिक्षा राजनीति नहीं बल्कि समाज और राष्ट्र निर्माण का माध्यम है। नए बदलाव के क्रम में प्री-प्राइमरी से कक्षा-12 तक गुणवत्तापरक शिक्षा व्यवस्था के लिए प्रदेश में 150 (प्रति जनपद 2) मुख्यमंत्री मॉडल विद्यालयों का निर्माण 4500 करोड़ रुपये की लागत से कराया जा रहा है। योगी सरकार शिक्षकों, शिक्षामित्रों एवं अनुदेशकों की समस्याओं के प्रति सदैव संवेदनशील रही है। मुख्यमंत्री जी के नेतृत्त्व में शिक्षकों के लिए कैशलेस चिकित्सा योजना, सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा, शिक्षामित्रों एवं अनुदेशकों के मानदेय में वृद्धि के ऐतिहासिक निर्णय लिए गए और व्यापक स्तर पर समारोह आयोजित करते हुए उन्हें सम्मानित किया गया। हाल में रसोइयों के मानदेय एवं ड्रेस धनराशि में वृद्धि की गयी, कैशलेस चिकित्सा योजना कार्ड का वितरण कराया गया। आर्थिक एवं सामाजिक सुरक्षा के रूप में दुर्घटना बीमा का लाभ दिलाने हेतु बैंक से एमओयू किया गया।

    इस अवसर पर प्रदेश सरकार के मत्स्य विभाग के मंत्री संजय निषाद, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, एमएलसी एवं भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह, एमएलसी ध्रुव त्रिपाठी, विधायक श्रीराम चौहान, फतेह बहादुर सिंह, राजेश त्रिपाठी, विपिन सिंह, महेंद्रपाल सिंह, डॉ. विमलेश पासवान, प्रदीप शुक्ल, सरवन निषाद, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी, अपर मुख्य सचिव बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थसारथी सेन शर्मा, भाजपा के जिलाध्यक्ष जनार्दन तिवारी, महानगर अध्यक्ष रमेश प्रताप गुप्ता आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

    शिक्षा विभाग के स्टालों का अवलोकन किया सीएम ने
    मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम स्थल पर बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा विभाग और बाल विकास एवं पुष्टाहार की तरफ से लगाए गए स्टालों का अवलोकन किया। उन्होंने बेसिक शिक्षा के स्टाल पर लर्न बाई डूइंग, समावेशी शिक्षा, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय और माध्यमिक शिक्षा विभाग के स्टाल पर अटल टिकरिंग लैब के बारे में विस्तार से जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने स्टालों पर उपस्थित शिक्षकों और विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन भी किया।

  • सीएम योगी ने बच्चों पर भी लुटाया प्यार, आशीर्वाद के साथ दी चॉकलेट

    सीएम योगी ने बच्चों पर भी लुटाया प्यार, आशीर्वाद के साथ दी चॉकलेट

    गोरखपुर। शुक्रवार रात गोरखपुर आए गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाने के बाद शनिवार सुबह मंदिर की गोशाला में गोसेवा की। उन्होंने गोशाला का भ्रमण कर गोवंश का हाल जाना और उन्हें दुलारकर अपने हाथों से गुड़ खिलाया। 

    शुक्रवार देर रात तक श्रीकृष्ण जन्माष्टमी अनुष्ठान में व्यस्त रहने के बावजूद शनिवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में सीएम योगी की दिनचर्या परंपरागत रही। उन्होंने प्रातःकाल गोरखनाथ मंदिर में गुरु गोरखनाथ का दर्शन-पूजन किया और अपने गुरु ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की समाधि स्थल पर जाकर मत्था टेका। मंदिर परिसर का भ्रमण करते हुए वह मंदिर की गोशाला में पहुंचे और वहां कुछ समय व्यतीत किया। गोशाला में मुख्यमंत्री ने गोवंश के माथे पर हाथ फेरा, उन्हें खूब दुलारा और अपने हाथों से गुड़ खिलाया। मुख्यमंत्री ने गोशाला के कार्यकर्ताओं से सभी गोवंश के स्वास्थ्य व पोषण की जानकारी ली और देखभाल के लिए जरूरी निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर में भ्रमण के दौरान परिजनों के साथ आए बच्चों पर भी खूब प्यार लुटाया। बच्चों को अपने पास बुलाकर उन्होंने सबका नाम पूछा, कहां से आए हैं और किस क्लास में पढ़ते हैं, इसकी जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने बच्चों से आत्मीय संवाद कर उन्हें चॉकलेट दी। सबके माथे पर हाथ फेरकर प्यार-दुलार और खूब पढ़ने का आशीर्वाद दिया।

  • ताइवान की टेक कंपनियों पर योगी सरकार की नजर, यूपी में निवेश के लिए दिया खुला आमंत्रण

    ताइवान की टेक कंपनियों पर योगी सरकार की नजर, यूपी में निवेश के लिए दिया खुला आमंत्रण

    योगी सरकार ने ताइवान की टेक कंपनियों को दिया यूपी में निवेश का न्योता

    ताइपे में आयोजित ‘सेमिकॉन 2026’ में सेमीकंडक्टर और उन्नत प्रौद्योगिकी इकोसिस्टम का किया प्रदर्शन

    प्रदेश में डाटा सेंटर परियोजनाओं के लिए उत्तर प्रदेश ने पेश किए निवेश के अवसर

    ताइवान कंपनियों के समक्ष नीतिगत प्रोत्साहनों, बुनियादी ढांचे और कुशल प्रतिभा को किया प्रस्तुत

    ताइपे/लखनऊ
    । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार राज्य को सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और उन्नत प्रौद्योगिकी के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश ने ताइपे में 2 से 4 सितंबर तक आयोजित ‘सेमिकॉन 2026’ में प्रमुख ताइवानी टेक कंपनियों के समक्ष राज्य में निवेश की संभावनाओं को प्रस्तुत किया और उन्हें सेमीकंडक्टर, डाटा सेंटर तथा इलेक्ट्रॉनिक्स परियोजनाओं में निवेश के लिए आमंत्रित किया।

    ताइवान की कंपनियों के सामने यूपी का निवेश मॉडल
    योगी सरकार की निवेश-अनुकूल नीतियों, तैयार औद्योगिक बुनियादी ढांचे, कुशल मानव संसाधन और तेजी से विकसित हो रहे इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम को ताइवानी कंपनियों के सामने प्रमुख ताकत के रूप में रखा गया। राज्य ने चिप निर्माण, सेंसर, डाटा सेंटर और सप्लाई चेन के स्थानीयकरण आदि क्षेत्रों में रणनीतिक साझेदारी और निवेश के अवसरों पर जोर दिया।

    प्रमुख ताइवानी कंपनियों से हुई चर्चा
    प्रमुख सचिव, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी आलोक कुमार के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधिमंडल ने इंडिया-ताइवान सेमीकंडक्टर फोरम में भाग लिया। प्रतिनिधिमंडल में इन्वेस्ट यूपी की अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी प्रेरणा शर्मा और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी मनीष मीना शामिल रहे। प्रतिनिधिमंडल ने क्रिएटिव सेंसर्स इंक के चेयरमैन यूजीन हुआंग और कंपनी के वरिष्ठ नेतृत्व के साथ बैठक कर भारत में कंपनी के विस्तार की योजनाओं पर चर्चा की। इसके अलावा मीडियाटेक, एडीएटीए टेक्नोलॉजी और टीआईबीए बिजनेस एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के साथ भी निवेश, संयुक्त उपक्रम और दीर्घकालिक सहयोग की संभावनाओं पर बातचीत हुई।

    सेमीकंडक्टर हब बनाने की दिशा में कदम
    आलोक कुमार ने उत्तर प्रदेश में सेमीकंडक्टर क्षेत्र की संभावनाओं को रेखांकित करते हुए राज्य के औद्योगिक बुनियादी ढांचे, प्रगतिशील प्रोत्साहन नीतियों, कुशल कार्यबल और मजबूत टेक्नोलॉजी मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम विकसित करने की योजनाओं की जानकारी दी। ताइवानी कंपनियों को सेंसर मॉड्यूल, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, एप्लीकेशन इंजीनियरिंग, परीक्षण और सप्लाई चेन के व्यापक स्थानीयकरण में निवेश के अवसरों से अवगत कराया गया।

    राष्ट्रीय योजनाओं के साथ कदमताल
    योगी सरकार राज्य की रणनीति को आईएसएम 2.0, ईसीएमएस और एमपीएमएस जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों के साथ उत्तर प्रदेश सेमीकंडक्टर नीति-2024 और उत्तर प्रदेश एफडीआई नीति-2023 के अनुरूप आगे बढ़ा रही है। इन्वेस्ट यूपी, यीडा तथा आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग निवेशकों को औद्योगिक बुनियादी ढांचे, नीतिगत प्रोत्साहनों और सरल अनुमोदन प्रक्रियाओं के माध्यम से सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं।

    एनसीआर की निकटता और मजबूत सप्लायर नेटवर्क बना आकर्षण
    निवेशकों के सामने उत्तर प्रदेश के बड़े लैंड बैंक, एनसीआर से निकटता, कुशल कार्यबल, मजबूत आपूर्तिकर्ता आधार और तेजी से विस्तार कर रहे इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम को प्रमुख निवेश लाभ के रूप में प्रस्तुत किया गया। सरकार का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को सेमीकंडक्टर और उन्नत प्रौद्योगिकी क्षेत्र में देश के प्रमुख निवेश केंद्रों में स्थापित करना है।