Category: उत्तर प्रदेश

  • सपा की वोट बैंक राजनीति पर भाजपा ने साधा निशाना, दिया करारा जवाब

    सपा की वोट बैंक राजनीति पर भाजपा ने साधा निशाना, दिया करारा जवाब

    लखनऊ

    भारतीय जनता पार्टी अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुंवर बासित अली के लखनऊ आगमन पर उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री दानिश आजाद अंसारी के आवास पर आज हुआ भव्य स्वागत समारोह राजधानी की सियासत में चर्चा का विषय बन गया। हज़ारों की संख्या में कार्यकर्ताओं और समर्थकों की मौजूदगी में हुए इस कार्यक्रम ने जहां भाजपा के ताकत का एहसास कराया, वहीं समाजवादी पार्टी की वर्षों पुरानी ‘मुस्लिम वोट बैंक’ वाली राजनीति को सीधी राजनीतिक चुनौती भी दी।

    कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं का उत्साह और उमड़ा जनसमूह यह संदेश देता नजर आया कि मुस्लिम समाज को किसी एक राजनीतिक दल की स्थायी राजनीतिक संपत्ति समझने का दौर अब समाप्त हो रहा है। सपा के लिए यह दृश्य इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जिस समाज को वह लंबे समय से अपने राजनीतिक प्रभाव का आधार मानती रही है, उसी समाज का बड़ा हिस्सा अब भाजपा के साथ अपनी राजनीतिक भागीदारी को लेकर खुलकर सामने आ रहा है।

    राज्य मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार बिना भेदभाव, सबके विकास के संकल्प के साथ काम कर रही है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज का युवा अब केवल राजनीतिक नारों के आधार पर नहीं, बल्कि शिक्षा, रोजगार, विकास, सुरक्षा और सम्मान के आधार पर अपना भविष्य तय करना चाहता है।

    उन्होंने समाजवादी पार्टी पर व्यंग्य करते हुए कहा कि “जो लोग वर्षों से मुस्लिम समाज को अपना स्थायी वोट बैंक समझकर राजनीति करते रहे, उन्हें अब यह समझ लेना चाहिए कि लोकतंत्र में वोट किसी की जागीर नहीं होता।”

    दानिश आजाद अंसारी ने कहा कि लखनऊ में आज का यह स्वागत कार्यक्रम बदलते राजनीतिक माहौल का जीता-जागता संदेश है। भाजपा हर समाज के बीच लगातार संवाद और संपर्क बढ़ा रहा है तथा बड़ी संख्या में मुस्लिम युवा मोदी योगी के विकास के विजन से जुड़ रहे हैं।

    कुंवर बासित अली के स्वागत में दिखाई दिया उत्साह और शक्ति प्रदर्शन आने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर भाजपा की सक्रियता और राजनीतिक तैयारी का भी संकेत माना जा रहा है।

  • योगी सरकार की बड़ी पहल: सर्वोदय विद्यालयों के 3 हजार से अधिक विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ मिलेगा हुनर

    योगी सरकार की बड़ी पहल: सर्वोदय विद्यालयों के 3 हजार से अधिक विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ मिलेगा हुनर

    लखनऊ
    योगी सरकार प्रदेश के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ रोजगारपरक कौशल से जोड़ने की दिशा में लगातार काम कर रही है। इसी कड़ी में समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों के विद्यार्थियों को स्कूली शिक्षा के साथ व्यावसायिक कौशल का प्रशिक्षण देने की तैयारी पूरी कर ली गई है। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ के तहत प्रदेश के 3 हजार से अधिक विद्यार्थियों को विभिन्न रोजगारपरक क्षेत्रों में प्रशिक्षित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। प्रशिक्षण का लक्ष्य 31 प्रशिक्षण प्रदाता संस्थाओं को सौंपा गया है। सभी चयनित संस्थाओं को प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने, उनका अनुमोदन कराने, विद्यार्थियों का पंजीकरण करने और बैच गठित करने की प्रक्रिया निर्धारित समयसीमा में पूरी करनी होगी। 30 सितंबर 2026 तक सभी प्रशिक्षण केंद्रों पर प्रशिक्षण शुरू करना अनिवार्य किया गया है।

    शिक्षा के साथ रोजगारपरक कौशल पर जोर
    प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने बताया कि ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ का उद्देश्य सर्वोदय विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ ऐसे कौशल से जोड़ना है, जो उन्हें भविष्य में रोजगार, स्वरोजगार और बेहतर करियर के अवसरों के लिए तैयार कर सकें। विद्यार्थियों को उनकी रुचि और उपलब्ध प्रशिक्षण के अनुसार अपैरल, आईटी-आईटीईएस, मैनेजमेंट सहित अन्य रोजगारपरक सेक्टरों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। योगी सरकार की कौशल विकास नीति के तहत यह पहल युवाओं को शिक्षा से कौशल और कौशल से रोजगार की ओर ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी। स्कूल स्तर पर ही विद्यार्थियों को व्यावहारिक और व्यावसायिक प्रशिक्षण मिलने से उनमें आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ भविष्य के लिए आवश्यक दक्षताएं विकसित करने में मदद मिलेगी।

    एक बैच में अधिकतम 35 विद्यार्थी
    प्रशिक्षण की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए बैच का आकार भी निर्धारित किया गया है। एक बैच में अधिकतम 35 विद्यार्थी शामिल होंगे, जबकि प्रशिक्षण की कुल अवधि 300 घंटे तक होगी। इससे विद्यार्थियों को नियमित स्कूली शिक्षा प्रभावित किए बिना कौशल प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। मिशन का जोर केवल प्रशिक्षण शुरू कराने पर ही नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर भी है। प्रशिक्षण प्रदाता को मिशन मुख्यालय में अनुबंध जमा कर उसकी पुष्टि करानी होगी। इसके बाद ही संबंधित जिले की जिला कार्यक्रम प्रबंधन इकाई (DPMU) को बैच गठित करने की अनुमति दी जाएगी।

    मान्यता प्राप्त जॉब रोल में ही प्रशिक्षण
    कौशल प्रशिक्षण की गुणवत्ता और प्रमाणिकता सुनिश्चित करने के लिए बैच को मंजूरी देने से पहले NCVET और NQR पोर्टल पर संबंधित जॉब रोल की जांच की जाएगी। इसके बाद केवल वैध और मान्यता प्राप्त जॉब रोल में ही विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिया जा सकेगा। पोर्टल पर भी उन्हीं बैच और सेक्टर को मंजूरी दी जाएगी, जो संबंधित प्रशिक्षण संस्था को आवंटित किए गए हैं। इससे प्रशिक्षण व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने और विद्यार्थियों को निर्धारित मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

    बैच शुरू होने के सात दिन के भीतर मिलेगी पाठ्य सामग्री
    विद्यार्थियों को प्रशिक्षण के दौरान आवश्यक संसाधनों की कमी न हो, इसके लिए प्रशिक्षण प्रदाताओं को बैच शुरू होने के सात दिन के भीतर पाठ्य सामग्री उपलब्ध करानी होगी। विद्यार्थियों को सामग्री दिए जाने की हस्ताक्षरित रसीद और तस्वीरें भी मिशन पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। प्रशिक्षण का पाठ्यक्रम और मूल्यांकन संबंधित सेक्टर स्किल काउंसिल (एसएससी) के निर्धारित मानकों के अनुसार किया जाएगा। प्रशिक्षण के लिए भुगतान भी निर्धारित कॉमन कॉस्ट नॉर्म्स के अनुसार किया जाएगा।

    समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण पर मिशन का जोर
    मिशन निदेशक पुलकित खरे ने प्रशिक्षण प्रदाताओं को सभी प्रक्रियाएं निर्धारित समयसीमा और नियमों के अनुरूप पूरी करने के निर्देश दिए हैं। मिशन की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि प्रशिक्षण केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि विद्यार्थियों को वास्तव में उपयोगी और गुणवत्तापूर्ण कौशल हासिल हो। उन्होंने कहा कि ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ के माध्यम से विद्यार्थियों को स्कूली शिक्षा के साथ हुनर में दक्ष बनाने का प्रयास किया जा रहा है। स्कूल में ही कौशल प्रशिक्षण से विद्यार्थियों में आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे आगे रोजगार एवं बेहतर करियर के अवसरों के लिए अधिक सक्षम बनेंगे।

    कोट
    हमारा लक्ष्य है कि ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ के माध्यम से विद्यार्थी स्कूली शिक्षा के साथ हुनर में कुशल हो सकें, ताकि वे भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहें। स्कूल में ही कौशल से जुड़ने से उनमें आत्मविश्वास बढ़ेगा और आगे रोजगार व बेहतर करियर के अवसरों के लिए वे अधिक सक्षम बन सकेंगे। प्रशिक्षण की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करना हमारी प्राथमिकता है, ताकि प्रत्येक विद्यार्थी को इस पहल का पूरा लाभ मिले।
    *- पुलकित खरे, मिशन निदेशक, उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन*

  • कन्हैया फार्मा के नाम पर चल रहा था नशीली दवाओं का खेल, 71 लाख की खेप के साथ 6 गिरफ्तार

    कन्हैया फार्मा के नाम पर चल रहा था नशीली दवाओं का खेल, 71 लाख की खेप के साथ 6 गिरफ्तार

     लखनऊ
     एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) की लखनऊ टीम ने नशीली दवाओं की तस्करी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए छह तस्करों को गिरफ्तार किया है। टीम ने इनके कब्जे से करीब 71.44 लाख रुपये कीमत की नशीली दवाएं, सात मोबाइल फोन और 11,140 रुपये नकद बरामद किए हैं। कार्रवाई शुक्रवार को ट्रांसपोर्टनगर स्थित कन्हैया फार्मा के पास की गई।

    एएनटीएफ के मुताबिक गिरफ्तार आरोपितों में लखनऊ निवासी किशन वासवानी, शाद इरशाद, उमेश कुमार, विशाल चौरसिया, कानपुर देहात के राजपुर निवासी समीर अहमद, आजमगढ़ के अहरौली निवासी सतेन्द्र सिंह शामिल हैं। तस्करों के पास से कोडीनयुक्त कफ सीरप की 720 बोतल, ट्रामाडोल हाइड्रोक्लोराइड युक्त स्पास्मोनाम प्लस के 1.20 लाख कैप्सूल और अल्प्राजोलम की 9.60 लाख गोलियां बरामद हुई हैं।

    पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि वे नशीली दवाएं खरीदते थे। इसके बाद किसी पार्टी को खेप पहुंचाकर मोटा मुनाफा कमाते थे। सरोजनीनगर थाने में आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।

    कन्हैया फार्मा के नाम से लगा रखा था बोर्ड
    एएनटीएफ एसपी के मुताबिक तस्करों ने गोदाम के बाहर कन्हैया फार्मा के नाम से बोर्ड लगा रखा था। तस्करों की कंपनी रजिस्टर्ड है या नहीं इस बिंदु पर औषधि विभाग की टीम जांच कर रही है। इसी नाम से संचालित गोदाम में तस्कर दिल्ली से माल लाकर रखते थे। भारी मात्रा में माल यहां डंप था।

    इसकी हुई बरामदगी
    कोडीन युक्त वनरेक्स 100 एमएल कफ सिरप (कुल 720 बोतल), स्पैस्मोनाम प्लस (ट्रामाडोल एचसीएल) कैप्सूल (कुल 1,20,000), अल्जोमैक-0.5 अल्प्राजोलम टैबलेट्स (कुल 9,60,000) अनुमानित कीमत लगभग 71 लाख 44 हजार 180 रुपये) के अलावा सात मोबाइल फोन, 11,140 रुपये नकद।

  • योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का असर, यूपी में नशे के कारोबार पर प्रहार

    योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का असर, यूपी में नशे के कारोबार पर प्रहार

    लखनऊ/वाराणसी
     योगी सरकार की नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 2.10 करोड़ रुपये कीमत की हेरोइन बरामद की है। एएनटीएफ यूनिट वाराणसी की टीम ने अवैध मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले सक्रिय तस्कर अभिषेक सोनकर को गिरफ्तार किया है।

    डीजीपी कार्यालय के मुताबिक गिरफ्तार आरोपी वाराणसी के फूलपुर थाना क्षेत्र के झोरिया जगदीशपुर बाबतपुर का निवासी है। एएनटीएफ टीम ने उसके कब्जे से 1 किलो 20 ग्राम अवैध मादक पदार्थ हेरोइन समेत अन्य सामान भी बरामद किया है। आरोपी की गिरफ्तारी चंदौली जिले के अलीनगर थाना क्षेत्र में गोदना मोड़ सर्विस रोड से की गई।

    चंदौली में करनी थी सप्लाई
    पुलिस पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह अपने पार्टनर के साथ मिलकर अवैध मादक पदार्थों की सप्लाई करता है। बरामद हेरोइन भी वह अपने पार्टनर के कहने पर किसी व्यक्ति को सप्लाई करने के लिए चंदौली की ओर ले जा रहा था। इसी दौरान पुलिस ने उसे पकड़ लिया। पुलिस मामले और गिरोह से जुड़े अन्य पहलुओं पर भी जांच कर रही है।

  • योगी सरकार ट्रामा एंड इमरजेंसी नेटवर्क से हर साल बचाएगी 12 हजार लोगों की जान

    योगी सरकार ट्रामा एंड इमरजेंसी नेटवर्क से हर साल बचाएगी 12 हजार लोगों की जान

    लखनऊ
    खयमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं और अन्य गंभीर आपात स्थितियों में मरीजों को समय पर इलाज उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को एकीकृत और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में बड़ी पहल की जा रही है। इसके तहत यूपीटीईएन (उत्तर प्रदेश ट्रामा एंड इमरजेंसी नेटवर्क) को एक ऐसे एकीकृत आपात चिकित्सा नेटवर्क के रूप में विकसित करने की योजना तैयार की गई है, जिसका उद्देश्य दुर्घटना या मेडिकल इमरजेंसी के बाद शुरुआती 60 मिनट यानी ‘गोल्डन ऑवर’ में मरीज को सही उपचार तक पहुंचाना है।
      यूपीटीईएन के जरिए प्रदेश की बिखरी ट्रॉमा, बर्न, कार्डियक, स्ट्रोक और अन्य इमरजेंसी सेवाओं को एक नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। योजना के तहत 173 एकीकृत ट्रॉमा एवं इमरजेंसी मेडिसिन यूनिट विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें 11 लेवल-1 एपेक्स हब, 36 लेवल-2 रीजनल सेंटर और 126 लेवल-3 जिला स्तर की इकाइयां शामिल होंगी। इसका मकसद मरीज को जरूरत के अनुसार नजदीकी और सक्षम चिकित्सा केंद्र तक तेजी से पहुंचाना है।

    हर साल 12 हजार जानें बचाने का लक्ष्य
    अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य अमित घोष ने बताया कि व्यवस्था के जरिए हर साल 10 हजार से 12 हजार लोगों की जान बचाने का लक्ष्य रखा गया है। विशेषज्ञों की मानें तो समय पर इलाज मिलने से गंभीर दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों और स्थायी विकलांगता के मामलों में कमी लाई जा सकती है। इसके लिए केवल अस्पतालों की संख्या बढ़ाने के बजाय अस्पताल, एंबुलेंस, ट्रॉमा सेंटर, डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ और कमांड सेंटर को एक ही आपात नेटवर्क में जोड़ने पर जोर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि यूपीटीईएन का उद्देश्य मरीज के अस्पताल पहुंचने का इंतजार करने के बजाय आपातकाल की सूचना मिलते ही इलाज की प्रक्रिया शुरू करना है। योजना के तहत 1,200 एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट (एएलएस) एंबुलेंस को नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इन एंबुलेंस को केवल परिवहन का साधन न मानकर चलते-फिरते आपात उपचार केंद्र के रूप में इस्तेमाल करने की दिशा में काम किया जाएगा। इसके अलावा प्रदेश के 18 मंडलीय स्तर के कमांड सेंटर नेटवर्क के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इन केंद्रों के जरिए इमरजेंसी कॉल, एंबुलेंस, अस्पतालों में बेड और विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं के बीच समन्वय स्थापित करने की व्यवस्था विकसित की जाएगी।

    30 से 50 प्रतिशत तक रिस्पांस टाइम किया जाएगा कम
    अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य ने बताया कि योजना के तहत आपातकालीन प्रतिक्रिया समय में 30 से 50 प्रतिशत तक कमी लाने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं अस्पताल पहुंचने से पहले महत्वपूर्ण चिकित्सकीय निर्णय लेने के लिए करीब 10 मिनट का अतिरिक्त समय हासिल करने की योजना है। इसके लिए रियल-टाइम नेटवर्किंग, डिजिटल अलर्ट सिस्टम और एआई आधारित ट्रायेज जैसी तकनीकों के इस्तेमाल का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य है कि किस मरीज को किस अस्पताल या किस विशेषज्ञ विभाग में भेजा जाना चाहिए। यानी ‘राइट मरीज, राइट डिपार्टमेंट और राइट टाइम’ के सिद्धांत पर इमरजेंसी सिस्टम को संचालित किया जाएगा। योजना में आम लोगों को भी आपातकालीन व्यवस्था का हिस्सा बनाने पर विचार किया जा रहा है। इसके लिए तीन स्तरों पर फर्स्ट रिस्पॉन्डर नेटवर्क तैयार करने की योजना बनायी जा रही है। इसमें पहले स्तर पर पुलिस, एंबुलेंस चालक, फायर सर्विस और हाईवे पेट्रोल जैसे तत्काल मदद पहुंचाने वाले लोग होंगे। वहीं दूसरे स्तर पर पुलिस, होमगार्ड और अन्य संस्थागत रिस्पॉन्डर होंगे जबकि तीसरे स्तर पर आम नागरिकों को बेसिक इमरजेंसी रिस्पांस का प्रशिक्षण देकर उन्हें जरूरत के समय शुरुआती मदद के लिए तैयार किया जाएगा।

    48 घंटे तक मुफ्त इमरजेंसी इलाज*
    योजना के तहत सभी नागरिकों के लिए 48 घंटे तक मुफ्त आपातकालीन उपचार की व्यवस्था होगी। इसका उद्देश्य दुर्घटना या गंभीर बीमारी की स्थिति में मरीज और उसके परिवार पर तत्काल इलाज के खर्च का दबाव कम करना है, ताकि आर्थिक कारणों से उपचार में देरी न हो। इसके साथ ही यूपीटीईएन के लिए अलग बजट, मानव संसाधन नीति और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है। इसके अलावा इमरजेंसी मेडिसिन ऑफिसर (ईएमओ) कैडर बनाने, एम्स के अनुरूप वेतनमान तथा विशेषज्ञ डॉक्टरों के लिए प्रोत्साहन की व्यवस्था जैसे कदम शामिल हैं।

  • कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई, फिर बखेड़ा क्यों?’ सहारनपुर पर संगीत सोम का विपक्ष से सवाल

    कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई, फिर बखेड़ा क्यों?’ सहारनपुर पर संगीत सोम का विपक्ष से सवाल

    ‘मस्जिद नहीं, अवैध इमारत गिरी’, सहारनपुर विवाद पर संगीत सोम ने अखिलेश-राहुल-ओवैसी को घेरा

    ‘मुस्लिमों की बर्बादी के पीछे अखिलेश-राहुल और ओवैसी’, संगीत सोम का तीखा हमला

    कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई, फिर बखेड़ा क्यों?’ सहारनपुर पर संगीत सोम का विपक्ष से सवाल

    अखिलेश-राहुल-ओवैसी पर संगीत सोम का हमला- ‘संविधान की किताब लेकर घूमते हैं, कोर्ट के आदेश पर सवाल उठाते हैं’

    '2013 की तरह फिर पश्चिमी यूपी में दंगा कराना चाहते हैं अखिलेश, संगीत सोम ने सपा को घेरा

    लखनऊ
     सहारनपुर में सरकारी जमीन पर बनी अवैध मस्जिद पर हुई कार्रवाई को लेकर बीजेपी नेता संगीत सोम ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी पर तीखा हमला बोला है। संगीत सोम ने साफ कहा कि मीडिया और विपक्ष को यह समझना होगा कि सहारनपुर में किसी मस्जिद को नहीं गिराया गया, बल्कि अवैध जमीन पर बनी एक अवैध इमारत को कानूनी प्रक्रिया के तहत हटाया गया है।

    संगीत सोम ने दावा किया कि कार्रवाई के दौरान इमारत के नीचे करीब 400 साल पुराना कुआं भी मिला है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में जो भी निर्माण अवैध जमीन पर या अतिक्रमण करके किया गया है, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। किसी धर्म को निशाना बनाने का सवाल ही नहीं है।

    ‘मुस्लिमों का आका बनने की होड़ में हैं विपक्षी नेता’

    बीजेपी नेता ने अखिलेश यादव, राहुल गांधी और असदुद्दीन ओवैसी पर निशाना साधते हुए कहा कि इन दिनों उत्तर प्रदेश में यह होड़ लगी है कि मुस्लिमों का सबसे बड़ा आका कौन बनेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी राजनीति के चलते सहारनपुर की कार्रवाई को धार्मिक रंग देने की कोशिश की जा रही है।

    संगीत सोम ने ओवैसी पर भी हमला बोलते हुए पुराने दस्तावेजों और बिजली बिल से जुड़े दावों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब 1911 में सहारनपुर में बिजली की व्यवस्था ही नहीं थी, तो उस दौर का बिजली बिल कहां से आया? सोम ने इसे फर्जीवाड़े का उदाहरण बताते हुए कहा कि ओवैसी जैसे नेता ऐसे ही दावों के सहारे लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं।

    ‘कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई, फिर बखेड़ा क्यों?’

    संगीत सोम ने कहा कि जिस इमारत पर कार्रवाई हुई, वह कोर्ट के आदेश के बाद की गई। ऐसे में विपक्ष का इस मुद्दे को लेकर हंगामा खड़ा करना उनकी मंशा पर सवाल पैदा करता है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव, राहुल गांधी और ओवैसी तीनों संविधान की किताब लेकर घूमते हैं, लेकिन जब अदालत के आदेश पर कार्रवाई होती है तो उसी कार्रवाई को धार्मिक रंग देने की कोशिश शुरू हो जाती है।

    उन्होंने तीनों नेताओं को निशाने पर लेते हुए कहा कि यह राजनीति संविधान और कानून की रक्षा के लिए नहीं, बल्कि वोट बैंक की राजनीति के लिए की जा रही है।

    ‘पश्चिमी यूपी में फिर दंगा कराना चाहते हैं अखिलेश’

    संगीत सोम ने आरोप लगाया कि विपक्षी नेता सहारनपुर के मुद्दे के बहाने पश्चिमी उत्तर प्रदेश का माहौल खराब करना चाहते हैं। उन्होंने अखिलेश यादव पर हमला करते हुए 2013 के दंगों का भी जिक्र किया और कहा कि अब एक बार फिर पश्चिमी यूपी में तनाव पैदा करने की कोशिश की जा रही है।

    उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रहते उत्तर प्रदेश में किसी को दंगा कराने या कानून व्यवस्था को चुनौती देने की इजाजत नहीं दी जाएगी। अगर अखिलेश यादव अपने समर्थकों के जरिए माहौल बिगाड़ने की कोशिश करते हैं तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    ‘मुस्लिमों की बर्बादी के पीछे अखिलेश, ओवैसी और राहुल’

    संगीत सोम ने कहा कि मुस्लिमों की तीन बर्बादी- अखिलेश, ओवैसी और राहुल गांधी। उन्होंने कहा कि विपक्ष जानबूझकर यह नैरेटिव बनाने की कोशिश कर रहा है कि मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है, जबकि कार्रवाई का निशाना धर्म नहीं बल्कि अवैध कब्जा और भूमाफिया हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों तक कुछ लोगों ने मुस्लिमों का इस्तेमाल किया, उनसे कब्जे करवाए और अपनी जेबें भरीं।

    संगीत सोम ने आखिर में फिर विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि अखिलेश यादव, राहुल गांधी और ओवैसी ने मुस्लिम समाज को सबसे ज्यादा छला है और अब भी वे उत्तर प्रदेश की शांति और कानून व्यवस्था को राजनीतिक फायदे के लिए दांव पर लगाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश अब “उत्तम प्रदेश” बनने की राह पर है और किसी को भी अराजकता फैलाकर इस रास्ते को रोकने नहीं दिया जाएगा।

  • चित्रकूट में बाढ़ प्रभावित 800 परिवारों को राहत सामग्री वितरण, बेघर परिवारों को आवास हेतु भूमि आवंटन प्रमाणपत्र एवं राहत राशि

    चित्रकूट में बाढ़ प्रभावित 800 परिवारों को राहत सामग्री वितरण, बेघर परिवारों को आवास हेतु भूमि आवंटन प्रमाणपत्र एवं राहत राशि

    लखनऊ/चित्रकूट
     मंदाकिनी नदी में आई भीषण बाढ़ से प्रभावित चित्रकूट के 800 परिवारों को रविवार को राहत सामग्री वितरण कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहले की सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले बाढ़ आने पर तत्कालीन सरकार इसका संज्ञान तक नहीं लेती थी। राहत के नाम पर बहुत अधिक हो-हल्ला होने पर प्रभावितों को केवल सूखे ब्रेड दे दिए जाते थे, जबकि राहत के लिए आने वाला पूरा पैसा सपाई गुंडे खाकर हजम कर जाते थे और गरीब, कमजोर एवं वंचित लोगों को कुछ नहीं मिलता था। उन्होंने कहा कि पहले जहां बाढ़ प्रभावितों को एक किलो राहत सामग्री भी नहीं मिलती थी, वहीं अब करीब 50 किलो राहत सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।

    मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण कर स्थिति का जायजा लिया। इसके बाद 800 बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री वितरित की गई। बाढ़ में आश्रयहीन हुए परिवारों को आवास के लिए भूमि आवंटन प्रमाण पत्र तथा आपदा मोचक निधि से राहत राशि भी वितरित की गई। इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रभावित लोगों से उनका हाल-चाल जाना और बच्चों को चॉकलेट देकर उनसे बातचीत की।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभु राम को जब वनवास हुआ था तो चित्रकूट ने उन्हें आश्रय दिया। अब चित्रकूटवासी संकट में हैं तो प्रभु का भक्त होने के नाते वे साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि सरकार हर स्थिति में गरीब और प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है। बाढ़ से प्रभावित गरीबों, किसानों, नौजवानों, महिलाओं, व्यापारियों और साधु-संतों को आश्वस्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जिसका भी नुकसान हुआ है, सरकार उसे हर संभव मदद उपलब्ध कराएगी।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चित्रकूट की पावन धरा को नमन करते हुए कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम ने लगभग 12 वर्ष जिस धरा पर रहकर ऋषि-मुनियों के सानिध्य में राम राज्य की परिकल्पना को साकार किया था, वह भूमि आज भी आस्था और साधना का प्रमुख केंद्र है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा की इस घड़ी में प्रभावित परिवार खुद को अकेला न समझें। डबल इंजन की सरकार भारतीय जनता पार्टी के कोटि-कोटि कार्यकर्ताओं के साथ उनके साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री ने मंदाकिनी नदी में पिछले दिनों आई भीषण आपदा से हुई त्रासदी का पहले हवाई सर्वेक्षण किया और बाद में रामघाट सहित आसपास के प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कर हालात का जायजा लिया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस दिन चित्रकूट में अचानक बाढ़ आई, उस समय वह बलिया के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के दौरे पर थे। सूचना मिलते ही उन्होंने लखनऊ से डीजी पीएसी को निर्देश देकर एसडीआरएफ और पीएसी की अतिरिक्त फ्लड कंट्रोल कंपनियों को तत्काल चित्रकूट रवाना कराया। उस समय जिले में एसडीआरएफ की केवल एक कंपनी तैनात थी, लेकिन अगले दो से तीन घंटे के भीतर एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और पीएसी की फ्लड यूनिट की कुल आठ कंपनियां राहत एवं बचाव कार्य में जुट गईं और युद्ध स्तर पर अभियान चलाया गया।
    उसी दिन शाम को जिला प्रशासन और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर राहत कार्यों की समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि घरों में फंसे सभी लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहली बार मंदाकिनी नदी में इतने बड़े पैमाने पर जलस्तर बढ़ा है। गत वर्ष क्षेत्र में लगभग 360 मिलीमीटर वर्षा हुई थी, जबकि इस बार इसका स्तर लगभग दोगुना पहुंच गया। मध्य प्रदेश की ओर जाने वाला भारी वाहनों का पक्का पुल भी बह गया है। उन्होंने कहा कि जब एक मजबूत पुल तक बह सकता है तो सामान्य घरों की स्थिति का सहज अनुमान लगाया जा सकता है। आपदा की इसी विकरालता को देखते हुए प्रशासन के साथ विस्तृत बैठक कर कार्ययोजना तय करेंगे।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि नदी के कैचमेंट क्षेत्र में अनियोजित निर्माण ऐसी आपदाओं का बड़ा कारण बन सकता है। उन्होंने कहा कि नदी जब अपने स्वाभाविक स्वरूप में बहती है तो उसके दायरे में आने वाले अतिक्रमण और निर्माण बह जाते हैं। इसलिए कैचमेंट क्षेत्र में ऐसे निर्माण से बचना होगा और नदी के स्वाभाविक प्रवाह के लिए पर्याप्त मार्ग सुनिश्चित करना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इतनी भीषण बाढ़ के बावजूद प्रभु श्रीराम, कामदनाथ, हनुमान और चित्रकूट के ऋषि-मुनियों की तपस्थली की कृपा से कोई जनहानि नहीं हुई।

    बाढ़ से प्रभावित परिवारों, व्यापारियों, मठ-मंदिरों और घाटों को सरकार देगी सहयोग
    मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावितों को आश्वस्त करते हुए कहा कि आपदा की इस घड़ी में वे अकेले नहीं हैं। सामान्य परिवारों, व्यापारियों, मठ-मंदिरों और घाटों को बाढ़ से जो भी नुकसान हुआ है, उसमें सरकार की ओर से सहयोग की व्यवस्था की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने पहले ही निर्देश दे रखा है कि बाढ़ या अग्निकांड में किसी गरीब अथवा किसी अन्य व्यक्ति का पूरा घर नष्ट हो जाता है तो पात्रता के अनुसार उसे प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत नया आवास उपलब्ध कराया जाए। यदि वह प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए पात्र नहीं है तो मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत नया आवास और जमीन का पट्टा तत्काल उपलब्ध कराया जाए।

    उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की भी समुचित व्यवस्था की गई है। जहां जलजमाव हो गया है या अत्यधिक पानी आने के कारण लोग घिर गए हैं, उन्हें सुरक्षित राहत शिविरों में पहुंचाया जाए। राहत शिविरों में प्रभावित लोगों के लिए भोजन, सुरक्षा, चिकित्सा सहित हर प्रकार की सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

    आप नहीं रह सकते तो हमारी जनता सूखा ब्रेड खाकर क्यों रहेगी
    सीएम योगी ने कहा कि वर्ष 2017 में बाढ़ राहत कार्यों के निरीक्षण का प्रसंग साझा करते हुए कहा कि उस समय उन्होंने अधिकारियों से पूछा था कि पीड़ित परिवारों को क्या सहायता दी जा रही है। जवाब में सूखा ब्रेड बताया गया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा था कि यदि आपको 10 दिन तक केवल सूखा ब्रेड दिया जाए तो क्या आप रह पाएंगे। यदि आप नहीं रह सकते तो हमारी जनता क्यों रहेगी। इसके बाद उन्होंने पीड़ित परिवारों के लिए पूरी राहत सामग्री की किट तैयार करने के निर्देश दिए।

    राहत सामग्री में 26 सामान हैं, इसका वजन लगभग 50 किलो
     सीएम योगी ने कहा कि हर जरूरतमंद परिवार को राहत सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। इसमें 10 किलो चावल, 10 किलो आटा, 10 किलो आलू, 2 किलो अरहर की दाल, 1 लीटर रिफाइंड या सरसों का तेल, चना, लाई, मिर्च, मसाला, धनिया और हल्दी सहित अन्य आवश्यक सामग्री शामिल है। उन्होंने कहा कि खाद्य सामग्री के साथ प्रभावित परिवारों को डिग्निटी किट भी उपलब्ध कराई जाती है। बाल्टी, मग, ढक्कनयुक्त बाल्टी और बरसाती सहित आवश्यक वस्तुएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस तरह राहत सामग्री के माध्यम से 26 सामान उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसका वजन लगभग 50 किलो है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आपदा राहत के लिए मिलने वाली धनराशि प्रत्येक पीड़ित परिवार तक बिना किसी भेदभाव के पहुंचती है।
    उन्होंने कहा कि इस मौसम में सांप के बिलों और अन्य स्थानों पर पानी भरने के कारण सांप, बिच्छू और जंगली जानवर बाहर निकल आते हैं। ऐसे में सभी स्वास्थ्य केंद्रों, चाहे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हों या जिला चिकित्सालय में आवश्यक दवाओं और वैक्सीन की तत्काल उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। सांप के काटने पर एंटी-स्नेक वेनम और कुत्ते या किसी जंगली जानवर के काटने पर एंटी-रेबीज वैक्सीन तत्काल और नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाए।

  • चित्रकूट में सीएम योगी ने बाढ़ पीड़ितों के घावों पर लगाया मरहम, बांटी राहत सामग्री, ढहे मकानों के लिए दिए चेक

    चित्रकूट में सीएम योगी ने बाढ़ पीड़ितों के घावों पर लगाया मरहम, बांटी राहत सामग्री, ढहे मकानों के लिए दिए चेक

    चित्रकूट
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को अपने एक दिवसीय दौरे पर धर्मनगरी चित्रकूट पहुंचे। यहां पर मुख्यमंत्री ने भीषण बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों का हवाई और जमीनी निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने मंदाकिनी नदी की बाढ़ से प्रभावित हुए सैकड़ों परिवारों से मुलाकात कर उनका दुख-दर्द जाना और उन्हें राशन किट व राहत सामग्री वितरित की। आपदा की इस घड़ी में त्वरित सहायता पहुंचाते हुए मुख्यमंत्री ने उन तीन बाढ़ पीड़ितों में से प्रत्येक को 1 लाख 20 हजार रुपये के चेक सौंपे, जिनके आशियाने बाढ़ की भेंट चढ़ गए थे वहीं कुछ लाभार्थियों को भूमि आवंटन प्रमाण पत्र भी दिये। प्रशासन अभी सर्वे करा रहा है, शीघ्र ही अन्य प्रभावितों को भी ऐसी ही मदद दी जाएगी।

    हर वर्ग को मदद का दिया भरोसा
    राहत सामग्री वितरण के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनता को आश्वस्त करते हुए कहा कि संकट की इस घड़ी में उत्तर प्रदेश सरकार पूरी मजबूती के साथ बाढ़ पीड़ितों के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि किसी भी पीड़ित को परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। सरकार द्वारा हर वर्ग के सभी प्रभावित लोगों को बिना किसी भेदभाव के हर संभव मदद दी जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि राहत कार्य में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    सीएम योगी ने दिया चेक व भूमि आवंटन प्रमाणपत्र
    बाढ़ प्रभावित लोगों का दर्द व राहत कार्य की ताजा स्थिति जानने आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चित्रकूट के रामायण मेला में आयोजित राहत सामग्री वितरण कार्यक्रम में मंच से जहां पूर्ण रूप से मकान छतिग्रस्त हो जाने पर मुकेश, लल्लू और चुन्नीलाल में प्रत्येक को 1 लाख 20 हजार रुपए के चेक प्रदान किए तो वही राम सूरज और सूरज कली को भूमि आवंटन प्रमाणपत्र प्रदान किया।

    सिर्फ योगी जी ही इतनी जल्दी राहत पहुंचाने आ सकते हैं, कह कर पीड़ितों ने जताया आभार

    मुख्यमंत्री के हाथों तुरंत मदद पाकर बाढ़ पीड़ित खुश नजर आए। राहत सामग्री और पक्के मकान का आश्वासन पाकर लोगों ने मुख्यमंत्री का दिल से आभार जताया। सीतापुर मलकाना इलाके की रहने वाली रानी व मंजू ने बताया कि बाढ़ में हमारा पूरा घर डूब गया था और गृहस्थी का सारा सामान बर्बाद हो गया था। आज सुख्यमंत्री जी ने खुद आकर हमें राशन किट दी है जिससे हमें बड़ी राहत मिली है। मुख्यमंत्री जी ने हमें नया घर बनवाने का भरोसा भी दिया है।

    कटरा गूजर गांव की रहने वाली आशा ने बताया कि बाढ़ में हमारा मकान डूब गया था। लेकिन प्रशासन और योगी सरकार की सजगता के कारण बाढ़ के पहले दिन से ही हमें लगातार खाने-पीने का सामान मिल रहा था। आपदा के बीच भी हमें भूखा नहीं सोने दिया गया। वहीं एक अन्य बाढ़ पीड़ित ज्ञान सिंह ने कहा कि मेरा कच्चा मकान बाढ़ में ढह गया था। आज राशन किट भी मिली और घर बनवाने का भी आश्वासन मिला है। मैंने अपने जीवन में ऐसे मुख्यमंत्री कभी नहीं देखा जो इतनी जल्दी खुद पीड़ितों के बीच आकर उनका दुख-दर्द बांटें। जो योगी जी ने किया, वह आज तक किसी मुख्यमंत्री ने नहीं किया।

    चित्रकूट की जनता और जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री के इस त्वरित दौरे और संवेदनशीलता की जमकर सराहना की है। बाढ़ क्षेत्रों का दौरा करने के बाद मुख्यमंत्री ने स्थानीय प्रशासन के साथ समीक्षा बैठक कर स्थिति को जल्द से जल्द सामान्य करने और पुनर्वास कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।

  • स्वाइन फ्लू की बढ़ती रफ्तार से लखनऊ में चिंता, 63 एक्टिव केस; जानें गंभीर लक्षण

    स्वाइन फ्लू की बढ़ती रफ्तार से लखनऊ में चिंता, 63 एक्टिव केस; जानें गंभीर लक्षण

    लखनऊ
    राजधानी में स्वाइन फ्लू (एच1एन1) का संक्रमण लगातार बढ़ रहा है। पिछले दो दिनों में ही 24 मरीजों की स्वाइन फ्लू रिपोर्ट पाजिटिव आई है। शुक्रवार को 13 और शनिवार को 11 नए मरीज सामने आए हैं। इसके साथ ही लखनऊ में सक्रिय मरीजों की संख्या बढ़कर 63 हो गई है। तेजी से बढ़ रहे मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी और उपचार की व्यवस्था को और मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।

    सीएमओ डॉ. एनबी सिंह ने बताया कि 20 रोगी अस्पतालों में भर्ती थे, जिनमें 17 स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं। एक पहले से भर्ती था, जबकि दो मरीज शनिवार को भर्ती कराए गए। हालांकि, तीन रोगियों की तबीयत स्थिर है। कोई गंभीर लक्षण नहीं हैं। लगातार नए मरीज सामने आने से स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। अस्पतालों में स्वाइन फ्लू के संदिग्ध और संक्रमित मरीजों के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।

    गंभीर लक्षणों को नजरअंदाज न करें
    मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने लोगों को स्वाइन फ्लू के लक्षणों को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है। तेज बुखार के साथ सांस फूलना, सीने में दर्द, रक्तचाप कम होना, बेहोशी, नाखून अथवा होंठ नीले पड़ना और बलगम में खून आना गंभीर लक्षण माने जाते हैं। ऐसे मरीजों को तत्काल जांच और इलाज की जरूरत है। बच्चों में लगातार तेज बुखार, अत्यधिक सुस्ती, खाना-पीना बंद कर देना, झटके आना अथवा सांस लेने में परेशानी भी गंभीर संकेत हो सकते हैं।

    उन्होंने स्पष्ट किया है कि सामान्य जुकाम, गले में खराश, खांसी और बुखार होने पर हर मरीज को एच1एन1 की जांच कराने की आवश्यकता नहीं है। ऐसे मरीज चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपचार लें, पर्याप्त आराम करें, मास्क का प्रयोग करें और ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थों का सेवन करें। बिना डाक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक दवाएं लेने से बचें। शनिवार को मिले 11 मरीजों में एक लोकबंधु अस्पताल और एक एसजीपीजीआइ में भर्ती है।

  • सहारनपुर में मस्जिद के नीचे मिला कुआं, पोकलेन से नहीं टूटा स्लैब; ASI जांच से खुलेगा राज

    सहारनपुर में मस्जिद के नीचे मिला कुआं, पोकलेन से नहीं टूटा स्लैब; ASI जांच से खुलेगा राज

    सहारनपुर 

    यूपी में सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में बीते शनिवार को जिस मस्जिद को बुलडोजर से ढहाया गया था, मलबा हटाने के बाद उसके नीचे से कुआं निकला है। मलबा अब पूरी तरह साफ कर दिया गया है। दूसरी तरफ, 70 साल पुरानी अवैध मस्जिद गिराए जाने पर सियासत भी जारी है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस से लेकर AIMIM ने बुलडोजर एक्शन के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है।

    मलबा हटाने के बाद स्ट्रक्चर के नीचे मिला कुआं

    मस्जिद के स्ट्रक्चर के नीचे कुआं मिलने के बाद, सहारनपुर कलेक्ट्रेट में बनी अवैध मस्जिद को गिराने के एक्शन पर SDM सदर सुबोध कुमार ने कहा, 'हमने यह एक्शन अदालत के आदेश का पालन करते हुए किया है। इसी दौरान, यहां एक कुआं मिला है। संबंधित एजेंसियां इसकी ​​जांच करेंगी और बताएंगी कि यह कुआं कितना बड़ा है।'

    ईंटों से बना हुआ है कुएं का स्ट्रक्चर
    SDM सदर सुबोध कुमार आगे बोले कि टेक्निकल टीमों की पड़ताल के बाद ही सब कुछ स्पष्ट हो पाएगा। यह ईंटों से बना कुआं है और इसका स्ट्रक्चर भी ईंटों से ही बना है। पहली नजर में तो यह कुआं ही लग रहा है।

    7 सितंबर को सहारनपुर जाएगा सपा का डेलिगेशन
    दूसरी तरफ, समाजवादी पार्टी ने बुलडोजर एक्शन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 7 सितंबर को समाजवादी पार्टी का एक डेलिगेशन सहारनपुर जाएगा। डेलिगेशन कलेक्ट्रेट का भी दौरा करेगा, जहां मस्जिद को गिराया गया है। डेलिगेशन ने शामिल सभी नेता पहले पूर्व सांसद हाजी फजलुर्रहमान के घर पर जमा होंगे। इसके बाद यहां से कलेक्ट्रेट जाएंगे।

    ईंटों से बनी है कुएं की संरचना प्रशासन के मुताबिक, प्रारंभिक तौर पर सामने आई संरचना ईंटों से बनी हुई है और देखने में यह कुआं ही प्रतीत होता है। हालांकि, अधिकारियों ने इसकी अंतिम पुष्टि के लिए तकनीकी जांच को जरूरी बताया है। एएसआई की टीम भी मौके की जांच करेगी, जिसके बाद कुएं की संरचना और संभावित ऐतिहासिक महत्व से जुड़े पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। मस्जिद को गिराए जाने के बाद प्रशासन ने कलेक्ट्रेट परिसर से मलबे की एक-एक ईंट हटाने की कार्रवाई की। बताया गया कि मलबे को सहारनपुर शहर से करीब 10 किलोमीटर दूर निर्धारित स्थान पर ले जाकर डाला गया है। प्रशासन का कहना है कि परिसर को पूरी तरह साफ कर समतल किया जा चुका है।

    पोकलेन भी नहीं हटा पाई भारी स्लैब
    इस पूरी कहानी का एक दिलचस्प हिस्सा वह स्लैब भी है, जिसके नीचे कुआं मिला. मलबा हटाने के दौरान कर्मचारियों को एक मजबूत और भारी स्लैब मिला. उसे हटाने के लिए पोकलेन मशीन की मदद ली गई. लेकिन मशीन से भी स्लैब नहीं टूट पाया. इसके बाद कटर मंगवाया गया. स्लैब को काटने के बाद उसे हटाया गया. और फिर नीचे कुआं दिखाई दिया। 

    कलेक्ट्रेट परिसर में कुआं मिलने की खबर फैली तो मौके पर लोगों की भीड़ जुटने लगी. लोग एक-एक करके कुएं को देखने पहुंचने लगे. कुएं की गहराई कितनी है? यह कब बनाया गया होगा? इसका इस्तेमाल किस लिए होता होगा?ऐसे कई सवाल लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गए. हालांकि इन सवालों का जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है। 

    कुएं के सामने आने के बाद सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस बल भी तैनात किया गया. कुएं के आसपास लोगों की आवाजाही पर नजर रखी जा रही है. प्रशासन की निगरानी में मलबा हटाने का काम भी जारी है. अब सिर्फ मलबा हटाने की कार्रवाई नहीं, बल्कि जमीन के नीचे मिले इस ढांचे की जांच भी अहम हो गई है। 

    SDM बोले- प्रथम दृष्टया यह कुआं ही लग रहा है
    एसडीएम सदर सुबोध कुमार ने बताया कि न्यायालय के आदेश के बाद की गई कार्रवाई में यह ढांचा सामने आया है. उनके मुताबिक, प्रथम दृष्टया यह कुआं ही दिखाई दे रहा है और इसकी गहराई करीब 20 फीट के आसपास है. लेकिन कुएं की असली कहानी अभी सामने आनी बाकी है. यह कितना पुराना है? इसे कब बनाया गया था? इसका इस्तेमाल किस लिए होता था? इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही मिल सकेंगे। 

    अब ASI की जांच पर टिकी नजर
    प्रशासन के मुताबिक, मामले की जांच के लिए ASI की टीम मौके पर आएगी. जांच के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि जमीन के नीचे मिला यह कुआं कितना पुराना है और इसका कोई ऐतिहासिक या पुरातात्विक महत्व है या नहीं. फिलहाल, सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद हटाए जाने के बाद मलबे के नीचे मिला यह कुआं अब चर्चा का विषय बन गया है. भारी स्लैब के नीचे करीब 20 फीट गहरा दिखाई देने वाला कुआं आखिर कब बना और इसकी कहानी क्या है? इसका जवाब अब जांच के बाद ही सामने आएगा। 

    मस्जिद के नीचे कुआं मिलने से बढ़ी सतर्कता
    मस्जिद के बीच में कुआं मिलने के बाद प्रशासन मामले में अतिरिक्त सावधानी बरत रहा है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद हैं। कुएं को फिलहाल ढक दिया गया है, ताकि किसी तरह की दुर्घटना न हो और जांच के दौरान संरचना को सुरक्षित रखा जा सके।

    सपा का प्रतिनिधिमंडल करेगा सहारनपुर का दौरा
    इस बीच समाजवादी पार्टी ने भी पूरे मामले की जांच के लिए अपना प्रतिनिधिमंडल सहारनपुर भेजने का फैसला किया है। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर प्रतिनिधिमंडल रविवार को सहारनपुर पहुंचकर घटनाक्रम की जानकारी जुटाएगा।

    सपा के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल मंडलायुक्त से मुलाकात कर मस्जिद ध्वस्तीकरण से जुड़े तथ्यों की जानकारी लेगा। पार्टी का दावा है कि 4 सितंबर की शाम प्रशासन की ओर से मस्जिद को सील किए जाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन बाद में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। प्रतिनिधिमंडल मौके की स्थिति देखने के बाद अपनी रिपोर्ट प्रदेश कार्यालय को सौंपेगा।

    सहारनपुर जाने वाले सपा डेलिगेशन की लिस्ट

        लाल बिहारी यादव, नेता प्रतिपक्ष, विधान परिषद 
        चौधरी अब्दुल वाहिद, जिलाध्यक्ष
        हाजी नवाब अंसारी, महानगर अध्यक्ष
        हरेंद्र मलिक, सांसद 
        इकरा हसन, कैराना सांसद 
        चौधरी रूद्रसेन, राष्ट्रीय महासचिव 
        हाजी फजलुर्रहमान, पूर्व सांसद 
        अतुल प्रधान, सरधना विधायक 
        आशु मलिक, विधायक 
        उमर अली, विधायक 
        रामऔतार सैनी, विधायक 
        किरन पाल कश्यप, MLC
        माविया अली, पूर्व विधायक 
        राहुल भारती, अध्यक्ष, सपा SC मोर्चा
        मांगेराम कश्यप, पूर्व राज्यमंत्री 
        जिया चौधरी, जिलाध्यक्ष, मुजफ्फरनगर

    ओवैसी और कांग्रेस ने भी उठाया मस्जिद का मुद्दा
    गौरतलब है कि असदुद्दीन ओवैसी भी सहारनपुर मस्जिद मामले को लेकर योगी सरकार पर हमलावर हैं। असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया है कि मस्जिद कलेक्ट्रेट दफ्तर बनने से पहले बनी थी। लेकिन योगी सरकार मस्जिदों को तोड़ रही है। वहीं,  कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने एक बार फिर दावा किया कि प्रशासन ने जल्दबाजी में मस्जिद को गिरा दिया। इसके लिए वो सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे।