Category: उत्तर प्रदेश

  • अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर 8 सितंबर को सभी को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों में आयोजन

    अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर 8 सितंबर को सभी को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों में आयोजन

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार बुनियादी शिक्षा की मजबूत नींव बालवाटिका स्तर से ही तैयार करने की दिशा में सीखने को बच्चों के लिए सहज, आनंदमय और रचनात्मक अनुभव से जोड़ रही है। इसी क्रम में अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस 8 सितंबर को प्रदेश के सभी को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों एवं बालवाटिकाओं तथा जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों में ‘आओ सुनें और सुनाएं कहानी’ गतिविधि आयोजित की जाएगी। इसका उद्देश्य कहानी के माध्यम से बच्चों में सुनने, समझने, अपनी बात कहने, कल्पनाशीलता और रचनात्मक सोच को विकसित करना है।

    महानिदेशक स्कूल शिक्षा श्रीमती मोनिका रानी के निर्देशों के क्रम में जारी कार्यक्रम में बालवाटिका के साथ डायट स्तर पर भी गतिविधियों के आयोजन और स्थानीय नवाचारों को शामिल करने पर जोर दिया गया है। नीतिगत रूप से यह पहल बालवाटिका स्तर पर सीखने की प्रक्रिया को बच्चों के अनुभव, संवाद और रचनात्मकता से जोड़ते हुए बुनियादी साक्षरता के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

    कहानी बनेगी सीखने का सहज माध्यम
    को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों एवं बालवाटिकाओं में बालवाटिका हस्तपुस्तिका की दिवस योजना के अनुसार स्वागत समय और स्वतंत्र खेल गतिविधि के बाद कहानी सत्र में ‘आओ सुनें और सुनाएं कहानी’ गतिविधि कराई जाएगी। इसे बच्चों के सामाजिक एवं भावनात्मक विकास से जोड़ते हुए कहानी समय के सत्र में आयोजित किया जाएगा। राज्य स्तर से उपलब्ध बिग बुक अथवा स्थानीय कहानी में से बच्चों की आयु के अनुरूप कहानी का चयन किया जाएगा। कहानी ऐसी होगी, जिससे बच्चों को नैतिक संदेश भी मिल सके। कहानी सुनाने के दौरान बच्चों की कल्पनाशीलता और रचनात्मक सोच को ध्यान में रखते हुए कहानी से जुड़े बंद एवं खुले छोर वाले प्रश्न पूछे जाएंगे और बच्चों को अपने उत्तर देने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

    डायट स्तर पर भी होगा विशेष आयोजन
    जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों में भी ‘आओ सुनें और सुनाएं कहानी’ गतिविधि आयोजित की जाएगी। स्थानीय आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए इसमें नवाचारी प्रयासों को शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं। आसपास की बालवाटिकाओं के आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, एकेडमिक रिसोर्स पर्सन, बच्चों और अभिभावकों को भी कार्यक्रम में आमंत्रित किया जा सकेगा। डायट स्तर पर कहानी पढ़ने का सत्र, कहानी के बाद बच्चों के साथ चर्चा एवं प्रश्नोत्तर सत्र तथा अभिभावकों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और एकेडमिक रिसोर्स पर्सन की सहभागिता से कहानी वाचन जैसी गतिविधियां प्रस्तावित हैं। बच्चों को कागज एवं रंग उपलब्ध कराकर कहानी से प्रेरित चित्र बनाने के लिए प्रोत्साहित करने और उनके चित्रों को प्रदर्शित कर उनकी सराहना करने पर भी जोर दिया गया है।

    कहानी से आगे बढ़ेगी रचनात्मक अभिव्यक्ति
    गतिविधि के बाद बालवाटिका में बच्चों से कहानी के आधार पर चित्र बनाने, चित्र के बारे में अपनी बात बताने और कहानी से जुड़ी रचनात्मक अभिव्यक्ति के अवसर देने के निर्देश हैं। बच्चों द्वारा तैयार सामग्री को सुरक्षित रखने तथा उनकी प्रतिभा को प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया गया है। सभी बालवाटिकाओं में गतिविधि सुनिश्चित करने के लिए प्रधानाध्यापक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और संबंधित शिक्षण सहयोगियों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी।

    कोट:
    योगी सरकार बच्चों की बुनियादी शिक्षा को मजबूत आधार देने के लिए सीखने को आनंद और रचनात्मकता से जोड़ रही है। ‘आओ सुनें और सुनाएं कहानी’ जैसी गतिविधियों से बालवाटिका के बच्चों में भाषा, कल्पनाशीलता और अभिव्यक्ति का विकास होगा।
    *संदीप सिंह, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), बेसिक शिक्षा, उत्तर प्रदेश*

    कोट
    कहानी बच्चों के सीखने, सोचने और अपनी बात कहने का सहज माध्यम है। यह गतिविधि बालवाटिका में बच्चों की कल्पनाशीलता और रचनात्मक सोच को प्रोत्साहित करते हुएव साक्षरता की मजबूत नींव तैयार करने में सहायक होगी।
    श्रीमती मोनिका रानी, महानिदेशक स्कूल शिक्षा, उत्तर प्रदेश

  • सपा सरकार में बाबू जगदेव कुशवाहा की प्रतिमा लगेगी, अखिलेश यादव का बड़ा वादा

    सपा सरकार में बाबू जगदेव कुशवाहा की प्रतिमा लगेगी, अखिलेश यादव का बड़ा वादा

      लखनऊ
      समाजवादी पार्टी, प्रदेश मुख्यालय लखनऊ में आज बिहार के समाजवादी नेता श्रद्धेय बाबू जगदेव प्रसाद कुशवाहा के शहादत दिवस पर कुशवाहा, शाक्य, मौर्य, सैनी समाज का सम्मेलन हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शहीद बाबू जगदेव प्रसाद कुशवाहा के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया।
        इस अवसर पर बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों को सम्बोधित करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि सामाजिक न्याय की लड़ाई बहुत पुरानी है। भाजपा सामाजिक न्याय विरोधी है। नकारात्मक राजनीति करती है। विपक्ष पर झूठे आरोप लगाती है। बदनाम करती है। भाजपा बाबा साहब का संविधान और कानून नहीं मानती है। बाबा साहब का संविधान बचाने और सामाजिक न्याय के लिए पीडीए सरकार बनाना जरूरी है। भाजपा के खिलाफ पीडीए ही विकल्प है। पीडीए की लड़ाई बड़ी है। पीडीए की एकजुटता से भाजपा घबराई है। तरह-तरह का षड्यंत्र कर रही है। भाजपा गरीबों, कमजोरों पर अन्याय कर रही है। उसका एजेण्डा नफरत फैलाना है। उन्होंने कहा कि सच्चा सनातनी कभी दूसरे से नफरत नहीं करता है और दूसरे के साथ अन्याय नहीं करता है।
        अखिलेश यादव ने कहा कि आज कार्यक्रम में सामाजिक न्याय की लड़ाई को लड़ने वाले बड़ी संख्या में लोग मौजूद है। सभी ने पीडीए समाज को और जोड़ने तथा पीडीए आंदोलन को और मजबूत करने का संकल्प लिया। सबने मिलकर पीडीए सरकार बनाने और सामाजिक न्याय के राज की स्थापना का संकल्प लिया है जिससे सबको हक और सम्मान मिले। अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर चक्रवर्ती सम्राट अशोक की जयंती पर छुट्टी घोषित की जाएगी और सपा सरकार में लखनऊ के सबसे महत्वपूर्ण स्थान गोमती रिवर फ्रंट पर बाबू जगदेव कुशवाहा की प्रतिमा लगाकर स्मारक बनाया जाएगा। यादव ने कहा कि श्रद्धेय बाबू जगदेव कुशवाहा ने अपना पूरा जीवन वंचित, शोषित तबके को न्याय दिलाने और सामाजिक न्याय की लड़ाई को आगे बढ़ाने में लगा दिया।
        अखिलेष यादव ने कहा कि समाजवादी सरकार में प्रदेश में भगवान बुद्ध से जुड़े स्थानों कपिलवस्तु, श्रावस्ती, कुशीनगर, सिद्धार्थ नगर, सारनाथ, सोनभद्र और अन्य में विश्वस्तीय इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित कर दुनिया से जोड़ने और सुविधाएं देने का काम होगा।
        अखिलेश यादव ने जातीय जनगणना कराने की मांग करते हुए कहा कि कुशवाहा, शाक्य, मौर्या, सैनी समाज के लोग आबादी में ज्यादा हैं लेकिन संख्या कम बताई जाती है। इनकी गिनती होनी चाहिए। आबादी के हिसाब से हक और सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि आरक्षण था, आरक्षण है और आरक्षण रहेगा, जो लोग सुरंग में रहकर आरक्षण के खिलाफ साजिश कर रहे हैं, उनकी सुरंगवादी सोच को नहीं चलने दिया जाएगा।
        समारोह की अध्यक्षता समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल ने की। इस अवसर पर पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेन्द्र चौधरी, सांसद बाबू सिंह कुशवाहा, नीरज मौर्य एवं देवेश शाक्य, विधायक ऊषा मौर्य, राम अवतार सैनी, पूर्व एमएलसी लीलावती कुशवाहा, कार्यक्रम संयोजक जयपाल सैनी, कार्यक्रम संचालक अवनीश कुशवाहा पूर्व विधायक, जगदीश कुशवाहा पूर्व सांसद, आलोक शाक्य, प्रवक्ता राज कुमार भाटी, डॉ. नवल किशोर शाक्य आदि ने कार्यक्रम में सक्रिय सहभाग किया। प्रदेश अध्यक्ष छात्र सभा विनीत कुशवाहा, आरएस कुशवाहा, दीनानाथ कुशवाहा, अमरनाथ मौर्य, वैभव सैनी प्रदेश उपाध्यक्ष छात्र सभा शामिल रहे।
           

  • लखनऊ में हैरान करने वाला मामला: जिस महिला को समझा था मृत, प्रेमी संग 28 महीने बाद लौटी घर

    लखनऊ में हैरान करने वाला मामला: जिस महिला को समझा था मृत, प्रेमी संग 28 महीने बाद लौटी घर

    लखनऊ
    राजधानी लखनऊ में बड़ा चमत्कार हो गया है। यहां परिवार ने जिस महिला को मृत समझकर उसका अंतिम संस्कार कर दिया था, वह 28 महीने बाद जिंदा घर लौट आई।

    28 वर्ष की शिवानी पांच सितंबर को बीकेटी तहसील के नवीकोट नंदना गांव में अपने मायके पहुंची। उसे देखकर परिवार के लोग हैरान रह गए। करीब डेढ़ वर्ष पहले आईआईएम रोड के पीछे नाले में एक अज्ञात महिला का शव मिला था। मायकेवालों ने उसकी पहचान शिवानी के रूप में की थी। इसके बाद भैंसाकुंड में उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।

    इस प्रकरण में ससुरालवालों के खिलाफ दहेज हत्या का केस भी दर्ज कराया गया था। अब शिवानी के जिंदा लौटने से मामला उलझ गया है। सवाल है कि नाले में मिला शव आखिर किस महिला का था। पुलिस शिवानी को थाने ले गई और उससे पूछताछ की जा रही है।

    अपने प्रेमी के साथ पारा में रह रही
    उसके बारे में पता चला है कि वह अपने प्रेमी के साथ पारा में रह रही थी। पुलिस ने मामले में पड़ताल तेज कर दी है। अब सोमवार को पुलिस 164 के बयान दर्ज कराएगी। परिवार के मुताबिक, शिवानी का विवाह की शादी 22 अप्रैल 2020 को मूल रूप से सीतापुर और यहां बीकेटी के भीखापुर निवासी आनंद सिंह से हुई।

    आरोप है कि कुछ समय बाद उससे प्लाट की मांग की जाने लगी। दादी की मौत के बाद मायके आई शिवानी ने मां को जानकारी और फिर वापस ससुराल नहीं गई। दो मई 2024 की सुबह ससुराल से आधार कार्ड लाने की बात कहक शिवानी घर से निकली, लेकिन लौटी नहीं।

    ससुरालवालों ने भी जानकारी से किया इन्कार
    पिता सर्वेश सिंह उर्फ हींगू ने तलाश शुरू की। ससुरालवालों ने भी जानकारी से इन्कार किया तो बीकेटी थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई गई। 16 जुलाई को आइआइएम रोड के पीछे नाले में अज्ञात महिला का शव मिला। पुलिस ने शिवानी के स्वजन को सूचना दी। मेडिकल कालेज में स्वजन ने हाथ में बंधे कलावे और अंगूठी के आधार पर शिवानी के रूप में पहचान की। पुलिस की मौजूदगी में भैंसाकुंड में अंतिम संस्कार हुआ और ससुरालवालों पर दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ।

    शिवानी ने बताया सच
    पुलिस के मुताबिक, शिवानी पारा में जावेद नामक युवक के साथ रह रही थी, जो नगर निगम के शौचालय की देखरेख करता है। शिवानी के अनुसार उसकी मुलाकात जावेद से पारा में हुई। जावेद ने कई बार उसे घर लौटने के लिए कहा, लेकिन वह वापस नहीं गई।

    डीएनए रिपोर्ट में निकला था किसी और का शव
    डीएनए रिपोर्ट में निकला था किसी और का शव एसीपी बीकेटी विकास पांडेय ने बताया कि महिला के शव का डीएनए टेस्ट कराया गया था। रिपोर्ट में पता चला कि शव शिवानी का नहीं है इसलिए ससुराल पक्ष से किसी को जेल नहीं भेजा गया था, लेकिन अपहरण की धारा में जांच चल रही है। साथ ही वह शव किसका था यह पता लगाया जा रहा है। शिवानी से पूछताछ में पता चलेगा कि इतने दिन वह क्यों नहीं लौटी।

     

  • बेटियों को नेतृत्व और सुरक्षा का मजबूत कवच, मीना मंचों के 450 प्रतिभागियों को प्रशिक्षित करेगी योगी सरकार

    बेटियों को नेतृत्व और सुरक्षा का मजबूत कवच, मीना मंचों के 450 प्रतिभागियों को प्रशिक्षित करेगी योगी सरकार

    लखनऊ
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार बेटियों को शिक्षा के साथ नेतृत्व, आत्मविश्वास और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के लिए विद्यालय स्तर पर चल रहे कार्यक्रमों को संस्थागत मजबूती दे रही है। इसी नीति के अंतर्गत विशेष परियोजना फॉर इक्विटी के अंतर्गत मीना मंचों को बालिकाओं के सशक्तीकरण और नेतृत्व क्षमता विकास का प्रभावी माध्यम बनाने के लिए राज्य स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।

    महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी के अनुसार एसआईईटी, प्रयागराज में 09 से 24 सितंबर तक नौ बैचों में कुल 450 प्रतिभागियों की ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स (टीओटी) एवं मास्टर ट्रेनर (एमटी) कार्यशाला होगी। कार्यशाला में मीना मंचों के सशक्तीकरण, नेतृत्व क्षमता प्रदान करने तथा यौन शोषण संबंधी प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रतिभागियों की क्षमता संवर्धित की जाएगी।

    नौ बैचों में होगा प्रशिक्षण
    जारी दिशा निर्देश के अनुसार प्रथम एवं द्वितीय बैच की कार्यशाला 09 एवं 10 सितंबर, तृतीय एवं चतुर्थ बैच की 11 एवं 12 सितंबर, पंचम एवं षष्ठम बैच की 21 एवं 22 सितंबर, सप्तम एवं अष्टम बैच की 16 एवं 17 सितंबर तथा नवें बैच की कार्यशाला 23 एवं 24 सितंबर 2026 को होगी। प्रत्येक बैच में 50 प्रतिभागी शामिल होंगे और कुल 450 प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।

    75 जनपदों से होगी सहभागिता
    कार्यशाला में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से प्रतिभागी शामिल होंगे। प्रथम बैच में बदायूं, बुलंदशहर, चंदौली, चित्रकूट, देवरिया, एटा, इटावा, फैजाबाद और फर्रुखाबाद से छह-छह प्रतिभागी शामिल होंगे। द्वितीय बैच में फतेहपुर, फिरोजाबाद, गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, गाजीपुर, गोंडा, गोरखपुर और हमीरपुर से प्रतिभागी होंगे। तृतीय बैच में हापुड़, हरदोई, हाथरस, जालौन, जौनपुर, झांसी, कन्नौज और कानपुर देहात तथा चतुर्थ बैच में कासगंज, कौशाम्बी, कुशी नगर, कानपुर नगर, लखीमपुर खीरी, ललितपुर, लखनऊ और महराजगंज से प्रतिभागी शामिल होंगे।

    इसी तरह पंचम बैच में महोबा, मैनपुरी, मथुरा, मऊ, मेरठ, मिर्जापुर, मुरादाबाद और मुजफ्फरनगर तथा षष्ठम बैच में पीलीभीत, प्रतापगढ़, रायबरेली, रामपुर, सहारनपुर, संभल, संत कबीर नगर और शाहजहांपुर से प्रतिभागी होंगे। सप्तम बैच में शामली, सिद्धार्थनगर, सीतापुर, सोनभद्र, श्रावस्ती, सुल्तानपुर, उन्नाव और वाराणसी तथा अष्टम बैच में आगरा, अलीगढ़, औरैया, प्रयागराज, अम्बेडकर नगर, अमेठी, अमरोहा, आजमगढ़ और बागपत से सहभागिता होगी जबकि नवां बैच 23 एवं 24 सितंबर को आयोजित होगा, जिसमें बहराइच, बलरामपुर, बांदा, बाराबंकी, बरेली, बस्ती, भदोही और बिजनौर से प्रतिभागी शामिल होंगे।

    मीना मंचों को मिलेगा सशक्त नेतृत्व
    कार्यशाला का उद्देश्य मीना मंचों को बालिकाओं के सशक्तीकरण, नेतृत्व क्षमता और सुरक्षा संबंधी जागरूकता से जोड़ते हुए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करना है। टीओटी एवं एमटी के रूप में प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले प्रतिभागी आगे संबंधित स्तरों पर इस क्षमता को पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इससे विद्यालयों में बालिकाओं की सहभागिता को बढ़ाने और उन्हें नेतृत्व के अवसर उपलब्ध कराने के प्रयासों को मजबूती मिलेगी।

    कोट:
    योगी सरकार बालिकाओं को शिक्षा के साथ नेतृत्व, आत्मविश्वास और सुरक्षित वातावरण देने के लिए प्रतिबद्ध है। मीना मंच बालिकाओं के सशक्तीकरण और नेतृत्व विकास का प्रभावी माध्यम है। 450 प्रतिभागियों का प्रशिक्षण इस व्यवस्था को और मजबूत करेगा।
    *संदीप सिंह, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), बेसिक शिक्षा, उत्तर प्रदेश*

  • 10 दिन की फ्री ट्रेनिंग, ₹500 रोज मानदेय और ₹10 लाख तक लोन, जानें विश्वकर्मा योजना 2.0 के फायदे

    10 दिन की फ्री ट्रेनिंग, ₹500 रोज मानदेय और ₹10 लाख तक लोन, जानें विश्वकर्मा योजना 2.0 के फायदे

     लखनऊ
    योगी सरकार ने युवाओं और कारीगरों के लिए विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना 2.0 का दायरा व्यापक कर दिया है। अब योजना में पहले से शामिल 11 ट्रेडों के साथ 14 नए ट्रेड जोड़े गए हैं। इस विस्तार के बाद योजना में कुल 25 ट्रेड शामिल हो गए हैं। नई व्यवस्था में मूर्तिकार, मालाकार, दूधवाला, भरभूजा और मछुआरा जैसे पांच नए पारंपरिक ट्रेड शामिल किए गए हैं। वहीं आधुनिक जरूरतों को देखते हुए मोबाइल रिपेयरिंग, ऑटोमोबाइल मरम्मत, इलेक्ट्रॉनिक सामान मरम्मत, विद्युत सामान, प्लम्बर, कंप्यूटर मरम्मत, सोलर इंस्टॉलेशन, डिजिटल फोटोग्राफी तथा सौंदर्य एवं वेलनेस को भी योजना से जोड़ा गया है।

    नए ट्रेडों के जुड़ने से अब ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में अलग-अलग तरह के हुनर रखने वाले अधिक कारीगर योजना के दायरे में आ सकेंगे। सरकार का यह विस्तार युवाओं को बदलती तकनीक और बाजार की मांग के अनुरूप कौशल से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    हुनरमंदों को बाजार से जोड़ने की कोशिश
    उपायुक्त उद्योग अमरेश पांडे, सहायक आयुक्त दिनेश आर्य का कहना है कि विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना 2.0 का विस्तार योगी सरकार की उस नीति का हिस्सा है, जिसमें पारंपरिक कारीगरों के हुनर को संरक्षित करने के साथ युवाओं को रोजगार के बजाय स्वरोजगार और उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

    कारोबार के लिए 10 लाख तक लोन
    प्रशिक्षण के साथ कारोबार के लिए मदद का प्रावधान है। 10 लाख रुपये तक ऋण मिल सकेगा। सामान्य श्रेणी के पुरुषों को लागत का 10 प्रतिशत, जबकि महिलाओं, ओबीसी, एससी, एसटी, दिव्यांग और भूतपूर्व सैनिकों को 5 प्रतिशत मार्जिन मनी जमा करनी होगी। शेष राशि पर 15 प्रतिशत मार्जिन मनी सब्सिडी का प्रावधान है। सीजीटीएमएसई योजना के तहत ऋण 100 प्रतिशत बिना गारंटी सुरक्षित होगा। नियमित भुगतान करने पर पांच वर्षों तक ब्याज सब्सिडी भी दी जाएगी। छह माह की मोरेटोरियम अवधि के बाद ऋण का भुगतान 54 किस्तों में किया जा सकेगा।

    10 दिन की ट्रेनिंग और 500 रुपये मानदेय
    योजना के तहत चयनित लाभार्थियों को 10 दिवसीय निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण अवधि में प्रत्येक प्रशिक्षार्थी को 500 रुपये प्रतिदिन मानदेय डीबीटी के माध्यम से बैंक खाते में मिलेगा। प्रशिक्षण के दौरान भोजन और नाश्ते की व्यवस्था भी निःशुल्क रहेगी। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद लाभार्थियों को 15 हजार रुपये मूल्य तक की उन्नत टूलकिट फ्री दी जाएगी, साथ ही सरकारी मान्यता प्राप्त कौशल प्रमाण-पत्र भी मिलेगा।

  • AI से ड्रोन तक स्टार्टअप्स को फायदा, योगी सरकार बढ़ा सकती है खरीद सीमा 1 करोड़ रुपये तक

    AI से ड्रोन तक स्टार्टअप्स को फायदा, योगी सरकार बढ़ा सकती है खरीद सीमा 1 करोड़ रुपये तक

    लखनऊ
    यूपी के स्टार्टअप को बाजार उपलब्ध कराने के लिए योगी सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। प्रदेश ने स्टार्टअप के उत्पादों के लिए एक और बड़ी नीति पर काम शुरू किया है। इसके तहत पंजीकृत स्टार्टअप के उत्पाद खरीदने के लिए सरकारी विभागों को छूट देने के प्रस्ताव पर काम चल रहा है। इसके लिए खरीद नीति में परिवर्तन किया जाएगा, ताकि सरकारी विभाग एक सीमा तक स्टार्टअप के उत्पाद बगैर टेंडर के खरीद सकें।

    प्रस्तावित नीति के तहत ‘स्टार्टइनयूपी’ पोर्टल पर पंजीकृत स्टार्टअप से खरीद पर छूट देने का प्रस्ताव है। सरकारी विभाग पंजीकृत स्टार्टअप से बिना टेंडर प्रक्रिया के उत्पाद, सर्विसेज तथा उपकरण सीधे खरीद सकेंगे। सरकारी विभागों को यह छूट भी देने का प्रस्ताव है कि वह 50 लाख रुपये तक के उत्पाद, सेवाएं बगैर टेंडर ले सकेंगे

    प्रदेश सरकार इस प्रस्ताव को जल्द ही कैबिनेट बैठक में लाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए यूपी स्टार्टअप मिशन के तहत एक विशेष स्टार्टअप ई-मार्केट प्लेस तैयार किया जा रहा है। अभी सरकारी विभागों के लिए 25 हजार तक के उत्पाद खरीदने की आजादी है। जेम पोर्टल से तीन कोटेशन के आधार पर 50 हजार तक के उत्पाद खरीद सकते है। पांच लाख से अधिक की खरीद के लिए टेंडर जरूरी है।

    उभरते क्षेत्रों के स्टार्टअप को विशेष छूट
    शासन के सूत्रों के मुताबिक, स्टार्टअप से सीधे खरीद के लिए कुछ नियम कायदे बनाए जा रहे हैं। प्रस्तावित नई नीति में डीप-टेक, स्पेस टेक्नोलॉजी, क्वाटंम कंप्यूटिंग, ब्लॉक चेन, एग्री-टेक, मेडि-टेक, ग्रीन एनर्जी, एआई, ड्रोन जैसे उभरते क्षेत्रों के स्टार्टअप के उत्पादों के लिए खरीद सीमा बढ़ाई जा सकती है। यह सीमा सामान्य स्टार्टअप की अपेक्षा दो गुना यानी एक करोड़ तक हो सकती है। सामान्य स्टार्टअप से 50 लाख से एक करोड़ तक की खरीद के जेम पोर्टल से की जा सकेगी। इसके लिए पंजीकृत स्टार्टअप के बीच ही टेंडर जारी होंगे।

    सरकारी विभागों के लिए भी नियम
    नई नीति में यह भी प्रस्तावित किया जा रहा है कि सरकारी विभाग वार्षिक बजट का कुछ हिस्सा स्टार्टअप के नवाचारी उत्पादों को खरीदने के लिए आवंटित कर सकते हैं। यह करीब आधा फीसदी हो सकता है। सरकारी विभागों को स्टार्टअप से उत्पाद खरीद का आर्डर देने के बाद 30 फीसदी भुगतान करना होगा।

    उत्पाद या सेवाओं की डिलीवरी या उत्पाद इंस्टाल करने के बाद बाकी बचे भुगतान का 60 फीसदी हिस्सा देना होगा। आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि इसके लिए एक नीति तय की जा रही है। इसका मकसद स्टार्टअप को आर्थिक रूप से मजबूत करना, सरकारी विभागों के जरिए बाजार तक पहुंच देना है।

  • सहारनपुर मस्जिद विवाद के बीच मुरादाबाद में भी कार्रवाई की तैयारी, MDA ने दी डेडलाइन

    सहारनपुर मस्जिद विवाद के बीच मुरादाबाद में भी कार्रवाई की तैयारी, MDA ने दी डेडलाइन

    सहारनपुर
    यूपी के सहारनपुर में कलक्ट्रेट परिसर में बनी सौ साल पुरानी मस्जिद गिराने का मामला गरमाया हुआ है। सपा, कांग्रेस, आजाद समाज पार्टी समेत तमाम विपक्षी दलों ने इसे लेकर मोर्चा खोला हुआ है। इस बीच यूपी के ही मुरादाबाद में अब सरकारी जमीन पर मस्जिद का आरोप लगाते हुए बुलडोजर चलाने की तैयारी कई गई है। दिल्ली रोड स्थित पाकबड़ा थाना क्षेत्र में सरकारी जमीन पर बनी सालों पुरानी मस्जिद को लेकर खुद तोड़ने की नोटिस एमडीए ने दी है।

    एमडीए सचिव की ओर से मस्जिद के मुतवल्ली को नोटिस जारी कर अवैध निर्माण को खुद ही हटाने के निर्देश दिए गए हैं। नोटिस में इसके लिए 15 दिन की समय सीमा दी गई है। निर्धारित अवधि में निर्माण नहीं हटाए जाने पर प्राधिकरण द्वारा बुलडोजर की कार्रवाई की जाएगी। एमडीए की नोटिस से मस्जिद कमेटी में हड़कंप मचा है।

    करीब 300 वर्ग मीटर सरकारी जमीन पर मस्जिद का निर्माण किया गया है। एमडीए की ओर से इसे अवैध निर्माण माना गया है। सड़क किनारे मस्जिद के निर्माण से यातायात व्यवस्था भी आए दिन बाधित होती रहती है। कमेटी के लोगों के द्वारा मस्जिद सालों पुरानी बताई जा रही है।

    पहले भी की जा चुकी है बुलडोजर कार्रवाई
    सरकारी जमीन पर बने अवैध धार्मिक निर्माणों को लेकर प्रशासन पहले भी कार्रवाई कर चुका है। कांठ रोड सिद्ध अस्पताल के पास सड़क किनारे बनाए गए मस्जिदनुमा निर्माण को प्रशासन ने पुलिस बल की मौजूदगी में हटाया था। विवाद से बचने के लिए प्रशासन की टीम ने सुबह तड़के बुलडोजर कार्रवाई शुरू की थी। लोगों की नींद खुलने तक अवैध निर्माण का नामोनिशान साफ हो गया था। इसी तरह एमडीए की सेक्टर-10 योजना में पार्क की जमीन पर बनी मीनार के निर्माण को बुलडोजर से हटाकर पार्क की जमीन खाली कराई गई थी। एमडीए उपाध्यक्ष अनुभव सिंह का कहना है कि सरकारी जमीन पर किसी भी तरह का अवैध निर्माण स्वीकार नहीं किया जाएगा। नोटिस दिए जाने की कार्रवाई की गई है।

    सहारनपुर मामले पर आज हाईकोर्ट में दायर होगी याचिका
    सहारनपुर कलक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के ध्वस्तीकरण का मामला अब हाईकोर्ट की चौखट तक पहुंच गया है। मस्जिद प्रकरण में सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की जाएगी। मस्जिद के मुतवल्ली की ओर से यह अपील दाखिल की जाएगी। याचिका के जरिए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को चुनौती दिए जाने के साथ प्रकरण में न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की जाएगी।

    कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को लेकर प्रशासन की ओर से की गई ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के बाद अब मुतवल्ली की ओर से कानूनी रास्ता अपनाया जा रहा है। हाईकोर्ट में दाखिल होने वाली याचिका में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से जुड़े आदेश, प्रक्रिया और अन्य संबंधित बिंदुओं को आधार बनाया जाएगा। मुतवल्ली पक्ष का कहना है मस्जिद से संबंधित दस्तावेज और अभिलेख उनके पास मौजूद हैं। ऐसे में कार्रवाई को लेकर न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष रखा जाएगा। याचिका दाखिल होने के बाद अदालत की ओर से सुनवाई की तारीख तय की जाएगी। वहीं, पुलिस-प्रशासन की ओर से लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की जा रही है।

  • SO की मौत के बाद बस्ती में सनसनी, बेटी को ब्लैकमेल करने के आरोप में पिता पर गंभीर सवाल

    SO की मौत के बाद बस्ती में सनसनी, बेटी को ब्लैकमेल करने के आरोप में पिता पर गंभीर सवाल

     बस्ती
    पहले मुलाकात, फिर दोस्ती और उसके बाद नजदीकियां… पुलिस का दावा है कि बस्ती में एक हनीट्रैप गिरोह इसी तरीके से लोगों को अपने जाल में फंसाता था. इसके बाद प्राइवेट बातचीत, तस्वीरों और वीडियो को ब्लैकमेलिंग का हथियार बनाया जाता था. पैसे की मांग होती थी और इनकार करने पर बदनाम करने की धमकी दिए जाने का आरोप है. इस पूरे नेटवर्क का खुलासा तब हुआ, जब बस्ती में वाल्टरगंज थाने के प्रभारी सूर्य प्रकाश सिंह ने 29 अगस्त को अपने सरकारी आवास पर आत्महत्या कर ली. उनकी मौत की जांच के दौरान पुलिस को कुछ ऐसे सुराग मिले, जिनसे एक महिला, उसके पिता और एक वकील की भूमिका सामने आई. पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया है. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 32 वर्षीय प्रियंका चौधरी, उसके पिता राम नयन चौधरी और अधिवक्ता विजय प्रकाश यादव के रूप में हुई है। 

    बस्ती के पुलिस उपमहानिरीक्षक (DIG) संजीव त्यागी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मामले की जानकारी दी. 29 अगस्त का दिन था. वाल्टरगंज थाने के प्रभारी सूर्य प्रकाश सिंह अपने सरकारी आवास पर थे. कुछ समय बाद उनकी मौत की खबर सामने आई. पुलिस के मुताबिक, सिंह ने फांसी लगाकर आत्महत्या की थी. एक पुलिस अधिकारी की इस तरह हुई मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए. सूर्य प्रकाश सिंह के बेटे संदीप सिंह ने 5 सितंबर को बस्ती कोतवाली थाने में FIR दर्ज कराई. शिकायत में कई लोगों पर आपसी मिलीभगत से ऐसे कृत्य करने का आरोप लगाया गया, जिनके कारण उन्होंने आत्महत्या जैसा कदम उठाया. इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की. पुलिस ने सूर्य प्रकाश सिंह के मोबाइल फोन, कॉलिंग पैटर्न की पड़ताल शुरू की. इसी दौरान जांच की कड़ियां एक महिला और उसके संपर्क में रहे कुछ लोगों तक पहुंचीं। 

    पहले नजदीकी, फिर प्राइवेट तस्वीरें और वीडियो

    पुलिस के मुताबिक, आरोपियों का कथित तरीका बेहद योजनाबद्ध था. जांच में सामने आया कि प्रियंका चौधरी कथित तौर पर लोगों से संपर्क करती थी. बातचीत आगे बढ़ने के बाद दोस्ती और फिर प्रेम या अंतरंग संबंध जैसे हालात बनाए जाते थे. पुलिस का दावा है कि इसी दौरान बातचीत, तस्वीरें या वीडियो रिकॉर्ड कर लिए जाते थे. इसके बाद शुरू होता था ब्लैकमेलिंग का खेल. आरोप है कि निजी तस्वीरों और वीडियो को सार्वजनिक करने या परिवार और समाज में बदनाम करने का डर दिखाकर लोगों से पैसे मांगे जाते थे. पुलिस का कहना है कि इस तरीके से कई लोगों को कथित तौर पर निशाना बनाया गया। 

    अकेली नहीं थी प्रियंका, पिता और वकील भी भूमिका में
    पुलिस की जांच में प्रियंका के साथ उसके पिता राम नयन चौधरी और वकील विजय प्रकाश यादव की भूमिका भी सामने आने का दावा किया गया है. पुलिस के मुताबिक, प्रियंका कथित तौर पर लोगों से संपर्क बनाती थी और उन्हें अपने जाल में फंसाती थी. इसके बाद उसके पिता और विजय प्रकाश यादव कथित ब्लैकमेलिंग और वसूली में भूमिका निभाते थे.  पुलिस ने दावा किया है कि गिरोह ने कई लोगों से पैसे की कथित वसूली की. अब जांच अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि इन आरोपियों ने कितने लोगों को निशाना बनाया और इस नेटवर्क में इनके अलावा कोई और व्यक्ति भी शामिल था या नहीं। 

    गंधार गांव में पिता के साथ रहती थी प्रियंका
    पुलिस के मुताबिक, प्रियंका चौधरी वाल्टरगंज थाना क्षेत्र के गंधार गांव में अपने पिता के साथ रहती थी. पुलिस ने बताया कि प्रियंका करीब 10 साल से अपने पति से अलग रह रही थी. वह मुंबई में ब्यूटी पार्लर और स्पा सेंटरों में भी काम कर चुकी थी. पुलिस अब उसकी पुरानी गतिविधियों और संपर्कों की भी जानकारी जुटा रही है. जांच का एक अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि कथित तौर पर जिन लोगों को निशाना बनाया गया, उनसे संपर्क कैसे हुआ और बाद में ब्लैकमेलिंग की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ी. सूर्य प्रकाश सिंह की मौत की जांच में कॉल डिटेल ने भी पुलिस का ध्यान खींचा। 

    DIG संजीव त्यागी के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के विश्लेषण से सिंह का प्रियंका चौधरी और विजय प्रकाश यादव से संपर्क सामने आया है. पुलिस के मुताबिक, घटना वाले दिन की कॉलिंग भी जांच में अहम रही. 29 अगस्त को दोपहर 1 बजकर 41 मिनट पर विजय प्रकाश यादव ने सूर्य प्रकाश सिंह को आखिरी कॉल की थी.  अब पुलिस इस कॉल को लेकर भी जांच कर रही है. अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि इस बातचीत में क्या हुआ था और क्या इसका संबंध सिंह की मौत से पहले की परिस्थितियों से था. पुलिस का कहना है कि कॉलिंग पैटर्न और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को एक साथ देखने पर आरोपियों और सिंह के बीच संपर्क की कड़ी मजबूत हुई। 

    क्या ब्लैकमेलिंग के दबाव में दी जान
     पुलिस को संदेह है कि सूर्य प्रकाश सिंह को आरोपियों की ओर से कथित तौर पर परेशान और प्रताड़ित किया जा रहा था. पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इसी दबाव के कारण उन्होंने आत्महत्या जैसा कदम उठाया. पुलिस इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, कॉल डिटेल, आरोपियों से पूछताछ और अन्य संभावित पीड़ितों से मिली जानकारी को जोड़कर पूरे घटनाक्रम की तस्वीर तैयार कर रही है. पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि कथित गिरोह ने सिर्फ एक व्यक्ति को निशाना नहीं बनाया था. कई अन्य लोगों से भी कथित तौर पर पैसे की वसूली किए जाने की बात सामने आई है. अब पुलिस इन संभावित पीड़ितों की पहचान करने की कोशिश कर रही है. उनसे पूछताछ के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि उनके साथ किस तरह संपर्क किया गया, क्या रिकॉर्ड किया गया और बाद में किस तरह पैसे की मांग की गई. जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि आरोपियों के पास लोगों की निजी तस्वीरें और वीडियो किस तरह पहुंचते थे और क्या इनका इस्तेमाल दूसरे लोगों को भी डराने के लिए किया गया। 

    हॉस्पिटल चौराहे से तीनों गिरफ्तार
    DIG संजीव त्यागी के मुताबिक, तीनों आरोपियों को हॉस्पिटल चौराहे से गिरफ्तार किया गया. अब आरोपियों से पूछताछ के जरिए पुलिस कथित नेटवर्क की दूसरी कड़ियां तलाश रही है. पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इस मामले में कोई और व्यक्ति शामिल है और क्या आरोपियों ने बस्ती के अलावा दूसरे शहरों में भी इसी तरह लोगों को अपना निशाना बनाया था। 

  • मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर कई जिलों में पोस्टरबाजी, यूपी में फिर गरमाया माहौल

    मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर कई जिलों में पोस्टरबाजी, यूपी में फिर गरमाया माहौल

    मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर यूपी के कई जिलों में लगे पोस्टर
     
    पोस्टरों पर लिखा- ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’, फिर चर्चा में आया 2013 का दंगा
     
    लखनऊ, मुजफ्फरनगर, अलीगढ़, सहारनपुर और शामली समेत कई शहरों में लगे पोस्टर
     
    दंगों में 60 से अधिक लोगों की गई थी जान, 50 हजार से ज्यादा लोगों को छोड़ना पड़ा था घर
     
    दंगों के बीच सैफई महोत्सव को लेकर भी घिरी थी अखिलेश सरकार, विपक्ष ने उठाए थे सवाल
     
    कुछ जिलों में पोस्टर लगाने को लेकर सपा कार्यकर्ताओं से झड़प, गरमाई सियासत
     मुजफ्फरनगर 

    मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर रविवार को प्रदेश के कई जिलों में लगाए गए पोस्टरों ने एक बार फिर 2013 की हिंसा और तत्कालीन सपा सरकार की भूमिका को राजनीतिक चर्चा में ला दिया है। लखनऊ, मुजफ्फरनगर, अलीगढ़, सहारनपुर और शामली समेत कई शहरों में लगे पोस्टरों पर बड़े अक्षरों में लिखा गया है, ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे।’
     
    पोस्टर लगाए जाने के दौरान कुछ जिलों में विवाद की स्थिति भी बनी। पोस्टरों का विरोध करने पहुंचे सपा कार्यकर्ताओं और इन्हें लगाने वाले लोगों के बीच कहासुनी और झड़प की बात सामने आई है। इसके बाद स्थानीय स्तर पर पुलिस को भी हस्तक्षेप करना पड़ा। पोस्टरों और उनके विरोध ने दंगों की बरसी पर प्रदेश का राजनीतिक माहौल गरमा दिया है।
     
    सात सितंबर 2013 को मुजफ्फरनगर और आसपास के इलाकों में भड़की सांप्रदायिक हिंसा में 60 से अधिक लोगों की जान गई थी, जबकि 50 हजार से ज्यादा लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा था। हालात इतने बिगड़ गए थे कि हिंसा पर नियंत्रण के लिए सेना की मदद लेनी पड़ी थी।
     
    उस समय प्रदेश में अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सपा सरकार थी। कानून-व्यवस्था संभालने और समय रहते हिंसा रोकने में नाकामी को लेकर सरकार पर गंभीर सवाल उठे थे। सपा सरकार पर दंगाइयों को राजनीतिक संरक्षण देने के आरोप भी लगे थे, जिन्हें पार्टी खारिज करती रही है।
     
    दंगों के बाद राहत शिविरों और विस्थापित परिवारों की स्थिति को लेकर भी तत्कालीन सरकार विपक्ष के निशाने पर रही थी। वहीं, उस दौर में सैफई महोत्सव को लेकर भी अखिलेश सरकार की आलोचना हुई थी। विपक्ष ने इसे दंगा पीड़ितों के प्रति सरकार की असंवेदनशीलता से जोड़कर सवाल उठाए थे।
     
    अब 13 साल बाद दंगों की बरसी पर प्रदेश के अलग-अलग शहरों में लगे पोस्टरों और उन्हें लेकर हुई झड़पों ने मुजफ्फरनगर दंगों को एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।

  • उत्तर प्रदेश में बारिश का अलर्ट, आंधी-वज्रपात के साथ कई जिलों में भारी बारिश की संभावना

    उत्तर प्रदेश में बारिश का अलर्ट, आंधी-वज्रपात के साथ कई जिलों में भारी बारिश की संभावना

    लखनऊ
    दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश और इसके आसपास के इलाकों में बने लो प्रेशर एरिया के सक्रिय होने से उत्तर प्रदेश में मौसम ने करवट ले ली है। भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी ताजा अपडेट के अनुसार, अगले 24 घंटों के दौरान पूर्वी और पश्चिमी यूपी के विभिन्न हिस्सों में बारिश और वज्रपात की गतिविधियां जारी रहेंगी।

    पिछले 24 घंटों में कैसा रहा मौसम का हाल
    मौसम विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 24 घंटों के दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश दर्ज की गई है। बिजनौर जिले में सर्वाधिक 12 सेंटीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई है। इसके अलावा, सहारनपुर और मुजफ्फरनगर में भी तेज बारिश का असर देखा गया है।

    पश्चिमी यूपी में कैसा रहेगा मौसम
    मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी जारी की है कि 6 और 7 सितंबर को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश हो सकती है।

    पूर्वी यूपी में ऐसा रहेगा मौसम
    पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में 6 से 8 सितंबर तक बारिश, आंधी-तूफान और बिजली गिरने की संभावना व्यक्त की गई है। वहीं 6 से 9 सितंबर के दौरान पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है।

    किसानों के लिए जरूरी सलाह
    मौसम विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था करें और गीली स्थिति में सिंचाई, खाद व कीटनाशकों का छिड़काव टाल दें। छोटे पौधों, सब्जियों और बागवानी फसलों को सहारा देने की हिदायत दी गई है।