Category: उत्तर प्रदेश

  • ‘आपके सामने ही आजम खान ने उड़ाया था बाबा साहब का मजाक, तब किस नशे में थे?’ अखिलेश पर ओपी राजभर का हमला

    ‘आपके सामने ही आजम खान ने उड़ाया था बाबा साहब का मजाक, तब किस नशे में थे?’ अखिलेश पर ओपी राजभर का हमला

    ‘सत्ता में तो कब्रिस्तान दिख रहा था, आज सम्राट अशोक की बात कर रहे हो’- अखिलेश पर बरसे ओपी राजभर

    ‘सिर्फ यादव जी और खान साहब ही चाहिए क्या PC में?’ अखिलेश से ओपी राजभर के तीखे सवाल

    'आपके सामने ही आजम खान ने उड़ाया था बाबा साहब का मजाक, तब किस नशे में थे?’ अखिलेश पर ओपी राजभर का हमला

    लखनऊ
    समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव पर योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री और सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने जोरदार हमला बोला है। उन्होंने अखिलेश यादव पर आरोप लगाया कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में अगर कोई पत्रकार तीखा सवाल कर दे तो तिलमिला जाते हैं।

    पीसी में भी सिर्फ यादव जी और ख़ान साहब ही चाहिए क्या?

    ओपी राजभर ने सोशल मीडिया पोस्ट पर एक पोस्ट के जरिए सवाल किया कि “क्या मित्र अखिलेश यादव जी, एसी में बैठकर अपने खासम-खास यूट्यूबर्स के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस करते है और गलती से कोई ढ़ंग का पत्रकार कड़ा सवाल पूछ दें तो 'मिसरा जी-मिसरा जी' करने लगते हैं। क्या पीसी में भी सिर्फ यादव जी और ख़ान साहब ही चाहिए क्या? 

    राजभर ने 8 सितंबर को हुई अखिलेश यादव की प्रेस कांफ्रेंस को लेकर कहा, “आपकी प्रेस कॉन्फ्रेंस देखी। इसमें आप बहुत लंबा चौड़ा फेंक रहे थे कि सरकार आई तो सम्राट अशोक की जयंती पर अवकाश देंगे, बौद्ध स्थल वर्ल्ड क्लास बना देंगे।”

    सत्ता में थे तो क़ब्रिस्तान पर ख़र्च कर रहे थे- राजभर

    राजभर ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि अशोक-बुद्ध जी का नाम लेते हुए यह भी बता दिये होते कि जब आप सत्ता में थे तब आपको कब्रिस्तान दिख रहा था। तब तो जनता के सारे पैसे तो क़ब्रिस्तान में ख़र्च कर रहे थे। ओपी राजभर ने अखिलेश यादव पर आरोप लगाया कि जब सपा सरकार थी तब बहुजन महापुरुषों के नाम पर बने जिलों और संस्थानों का नाम मिटाए जा रहे थे।

    यूपी कैबिनेट मंत्री राजभर ने कहा कि आपकी सरकार में भीम नगर, फुले नगर, कांशीराम नगर, रमाबाई नगर, संत रविदास नगर का नाम बदला गया। आंबेडकर जी के नाम पर चलने वाली सब योजना हटा दी गई।

    राजभर ने आरोप लगाया, “आप मंच पर बैठे रहे और आपके आजम खान बाबा साहब की प्रतिमा का मजाक उड़ाते रहे, तब आप किस नशे में थे? उन्होंने कहा कि यूपी जनता आपसे सवाल पूछ रही है कि आपने सत्ता में रहते बहुजनों के लिए क्या, जवाब ज़रूर दीजिए।

    इससे पहले राजभर बोल चुके हैं अखिलेश पर हमला

    बता दें कि यह पहला मौका नहीं है जब ओपी राजभर ने अखिलेश यादव पर सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए हमला बोला है। इससे पहले उन्होंने अखिलेश यादव की राजनीति पर सवाल खड़े किए थे। राजभर ने कहा था कि आखिर अखिलेश यादव कबतक हवाबाजी करेंगे और एसी और पीसी से ही चुनाव लड़ेंगे? उन्होंने तंज कसते हुए सपा प्रमुख को जमीन पर आने की बात कही थी।

    इससे पहले राजभर ने अखिलेश यादव को चुनौती देते हुए कहा था कि आइए जमीन पर उतरिए और दो-दो हाथ हो जाएं। एकतरफा चुनाव में मजा नहीं आता है।'

  • बिजली व्यवस्था में योगी सरकार का बड़ा सुधार, AT&C हानि में कमी से मजबूत हुआ विद्युत वितरण तंत्र

    बिजली व्यवस्था में योगी सरकार का बड़ा सुधार, AT&C हानि में कमी से मजबूत हुआ विद्युत वितरण तंत्र

    लखनऊ
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश की विद्युत व्यवस्था को मजबूत करने और बिजली वितरण में होने वाले नुकसान को कम करने के प्रयासों का असर आंकड़ों में साफ दिखाई दे रहा है। वर्ष 2020-21 में 20.63 प्रतिशत रही वितरण हानि वर्ष 2025-26 में घटकर 13.04 प्रतिशत रह गई।

    इसी अवधि में एटीएंडसी हानि भी 31.19 प्रतिशत से घटकर 17.83 प्रतिशत पर आ गई। कृषि फीडरों को छोड़कर प्रदेश में फीडरों की संख्या 18,351 से बढ़कर 21,463 हो गई है। इनमें लाभकारी फीडरों की संख्या 5,772 से बढ़कर 8,104 पहुंच गई। इसमें 2,332 अतिरिक्त फीडर लाभकारी श्रेणी में आए हैं।

    लाभकारी फीडरों की हिस्सेदारी भी 31 प्रतिशत से बढ़कर 38 प्रतिशत हो गई है। डिस्कॉमवार प्रदर्शन में पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम 53 प्रतिशत लाभकारी फीडरों के साथ प्रदेश में पहले स्थान पर रहा।

    केस्को 39 प्रतिशत, दक्षिणांचल और मध्यांचल 37-37 प्रतिशत तथा पूर्वांचल 22 प्रतिशत पर रहा। ये आंकड़े बताते हैं कि योगी सरकार के कार्यकाल में बिजली वितरण व्यवस्था को अधिक कुशल, जवाबदेह और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में लगातार सुधार हुआ है।

    हाई लॉस क्लस्टर मॉडल से वसूली और नए कनेक्शन में तेजी
    योगी सरकार के नेतृत्व में बिजली वितरण व्यवस्था में सुधार के लिए लागू हाई लॉस क्लस्टर मॉडल के तहत प्रदेश में 703 क्लस्टर, 1703 फीडर, 42.21 लाख उपभोक्ता और 76,839 वितरण ट्रांसफार्मरों को कवर किया गया।

    यह कुल उपभोक्ताओं का करीब 11 प्रतिशत है। अभियान के तहत 654 करोड़ 31 लाख रुपये की बकाया वसूली की गई है, जबकि 1,01,548 नए विद्युत संयोजन जारी किए गए हैं।

    दक्षिणांचल डिस्कॉम में भी सुधार उल्लेखनीय रहा। यहां वितरण हानि 25.64 प्रतिशत से घटकर 14.78 प्रतिशत और एटीएंडसी हानि 31.03 प्रतिशत से घटकर 19.57 प्रतिशत रह गई। थ्रू-रेट 3.65 रुपये प्रति यूनिट से बढ़कर 4.06 रुपये हो गया। दक्षिणांचल में वर्ष 2025-26 में 105 करोड़ रुपये तथा चालू वित्तीय वर्ष में जुलाई तक 155 करोड़ रुपये की वसूली की गई।

    हाई लॉस फीडरों पर कार्रवाई का असर
    तालबेहट टाउन-2 ललितपुर में एटीएंडसी हानि 63 प्रतिशत से घटकर 11 प्रतिशत, मणिकापुर सीरी कासगंज में 87 से 53 प्रतिशत और राल मथुरा में 83.62 से 47.82 प्रतिशत तक आ गई। आगरा, मथुरा, चित्रकूट, राठ और कोसी के टॉप-10 हाई लॉस फीडरों का घाटा 22.53 करोड़ से घटकर 17.89 करोड़ रुपये रह गया, जो करीब 21 प्रतिशत की कमी है।

    फीडर स्तर पर मॉनिटरिंग से बढ़ा वित्तीय अनुशासन
    अधिकारियों के अनुसार, यह सुधार योगी सरकार और यूपीपीसीएल अध्यक्ष के मार्गदर्शन और लगातार मॉनिटरिंग का परिणाम है। फीडर स्तर पर दैनिक समीक्षा, डेटा आधारित निगरानी और फील्ड अधिकारियों की जवाबदेही तय किए जाने से विद्युत विभाग में वित्तीय अनुशासन मजबूत हुआ है और राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

     

  • यूपी-बिहार के यात्रियों के लिए खुशखबरी, योगी सरकार बढ़ाएगी अंतरराज्यीय बस कनेक्टिविटी

    यूपी-बिहार के यात्रियों के लिए खुशखबरी, योगी सरकार बढ़ाएगी अंतरराज्यीय बस कनेक्टिविटी

    योगी सरकार की पहल से यूपी-बिहार के यात्रियों को मिलेगी बेहतर अंतरराज्यीय बस सुविधा

    यूपी-बिहार के बीच और मजबूत होगा बस सेवा नेटवर्क, परिवहन मंत्रियों की अहम बैठक

    सीमावर्ती जिलों के यात्रियों को बड़ी राहत, यूपी-बिहार के नए बस मार्गों पर बनी सहमति

    यूपी-बिहार के बीच नए हाईवे पर दौड़ेंगी बसें, नए मार्ग तय करने की तैयारी, किराये में एकरूपता पर भी सहमति

    बिहार सरकार की तरफ से दिए गए कई आश्वासन, दूसरे चरण की बैठक जल्द, यात्रियों को होगा सीधा लाभ

    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश और बिहार के बीच आवागमन को और आसान बनाने की दिशा में योगी सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। दोनों राज्यों की जनता, खासकर सीमावर्ती जिलों के यात्रियों को बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सोमवार को लखनऊ में उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह और बिहार के परिवहन मंत्री दामोदर रावत की महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें यूपी रोडवेज और बिहार राज्य पथ परिवहन निगम के बीच बस सेवाओं के विस्तार और नए मार्गों को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।

    नए मार्गों पर बस संचालन की तैयारी
    बैठक में वर्ष 2016 से प्रभावी उत्तर प्रदेश-बिहार अंतरराज्यीय परिवहन करार और मई 2026 में हुए उसके विस्तार के तहत निर्धारित 25 मार्गों पर बस संचालन की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की गई। इसके साथ ही बिहार राज्य पथ परिवहन निगम की ओर से बिहार के अलग-अलग जिलों से उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के लिए बस सेवा शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया।

    नए हाईवे से जुड़ेंगे नए बस मार्ग
    दोनों राज्यों के बीच हाल के वर्षों में कई नए हाईवे और सड़क मार्ग तैयार हुए हैं। इन्हें बस सेवा से जोड़ने के लिए नए मार्गों का निर्धारण किया जाएगा। इसके लिए जल्द ही दूसरे चरण की बैठक आयोजित करने पर सहमति बनी है। बिहार सरकार की ओर से प्रस्तावित मार्गों का मानचित्र सहित विस्तृत विवरण जल्द उपलब्ध कराया जाएगा।

    यात्रियों की सुविधा और किराये में एकरूपता पर जोर
    बैठक में दोनों राज्यों की जनता को बेहतर परिवहन सुविधा देने पर विशेष जोर दिया गया। खासतौर पर सीमावर्ती जिलों के लोगों के लिए बस सेवाओं का विस्तार करने की दिशा में आपसी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। वहीं दोनों राज्यों की बस सेवाओं में किराये के निर्धारण में एकरूपता लाने पर भी सहमति बनी है। साथ ही नए मार्गों का दोबारा परीक्षण कर समान किलोमीटर के आधार पर परिवहन करार करने पर विचार किया गया।

    यूपी रोडवेज की बसों के संचालन में नहीं आएगी बाधा
    बिहार सरकार ने भरोसा दिलाया कि बिहार में उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों के संचालन में किसी प्रकार की बाधा या असुविधा नहीं होने दी जाएगी। दोनों राज्यों के परिवहन विभाग और परिवहन निगम के अधिकारी प्रस्तावित मार्गों का परीक्षण कर आगे की कार्रवाई करेंगे।

  • AI और इनोवेशन से बदलेगा युवाओं का भविष्य, बाराबंकी में ‘रंग दे बसंती’ युवा संवाद

    AI और इनोवेशन से बदलेगा युवाओं का भविष्य, बाराबंकी में ‘रंग दे बसंती’ युवा संवाद

    बाराबंकी में रंग दे बसंती का युवा संवाद, छात्रों को मिला नवाचार और एआई का गुरुमंत्र

    साईं कॉलेज में इंटर के छात्र-छात्राओं ने क्विज और टैलेंट क्रिएशन में लिया हिस्सा

     रंग दे बसंती टीम ने विजेताओं को ट्रॉफी से किया सम्मानित

    प्रदेशभर में प्रतिभाओं का चयन, नवाचार के लिए छात्रों को 15 हजार रुपये तक की आर्थिक मदद

    कवि सम्मेलन से वॉल पेंटिंग तक, रचनात्मक कार्यक्रमों के जरिए युवाओं को मंच दे रहा रंग दे बसंती

    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश में युवाओं को रचनात्मक अभिव्यक्ति का मंच देने और माफिया राज व भय की संस्कृति के खिलाफ सकारात्मक संदेश देने के उद्देश्य से ‘रंग दे बसंती’ अभियान के तहत विभिन्न शहरों में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में बाराबंकी के लखपेड़ाबाग स्थित साईं कॉलेज में अभियान की टीम ने इंटरमीडियट के छात्र-छात्राओं से संवाद किया।

    इस दौरान विद्यार्थियों को परीक्षा की तैयारी के साथ भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने तथा शिक्षा के साथ नवाचार और एआई आधारित शिक्षा की उपयोगिता के बारे में जानकारी दी गई। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने क्विज प्रतियोगिता और टैलेंट क्रिएशन जैसी गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया। कॉलेज के प्रिंसिपल सुरेंद्र वर्मा ने कहा कि रंग दे बसंती जैसे मंच विद्यार्थियों के लिए उपयोगी साबित होंगे। ऐसे आयोजनों के माध्यम से छात्र-छात्राओं को अपनी प्रतिभा को निखारने और आत्मविश्वास के साथ उसे प्रस्तुत करने का अवसर मिलता है।

    रंग दे बसंती की टीम ने प्रतियोगिताओं में विजयी छात्र-छात्राओं नैतिक, शगुन यादव, प्रखर, उमैरा कुल्सुंग और अदिति सोनी को ट्रॉफी प्रदान कर सम्मानित किया गया। रंग दे बसंती के प्रदेश संयोजक ने बताया कि अभियान के तहत प्रदेश के विभिन्न जनपदों से योग्य छात्र-छात्राओं का चयन किया जा रहा है। चयनित प्रतिभाओं को शैक्षिक गतिविधियों के साथ नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए 15 हजार रुपये तक की आर्थिक मदद भी दी जा रही है। इसके लिए प्रदेश के सभी जनपदों में फॉर्म भरवाए जा रहे हैं। आवेदन फॉर्म रंग दे बसंती के इंस्टाग्राम पेज और वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।

    अभियान के तहत प्रदेश के कई प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों और जिलों में कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में कवि सम्मेलन, लखनऊ विश्वविद्यालय में वॉल पेंटिंग तथा मुजफ्फरनगर के एसडी कॉलेज में कॉमिक बुक विमोचन जैसे कार्यक्रमों के जरिए युवाओं तक अभियान की पहुंच बढ़ाई जा रही है।

    अभियान की मूल भावना बंदूक की जगह ब्रश, डर की जगह डायलॉग है। इसके माध्यम से युवाओं को डर और दबाव की संस्कृति के बजाय अभिव्यक्ति, रचनात्मकता और संवाद का मंच देने पर जोर दिया जा रहा है। योगी सरकार की ओर से युवाओं को शिक्षा, कौशल, तकनीक और नवाचार से जोड़ने पर दिए जा रहे जोर के बीच रंग दे बसंती जैसे अभियान सकारात्मक और रचनात्मक युवा ऊर्जा को दिशा देने की पहल के रूप में सामने आ रहे हैं।

  • अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा योजना बनी बुजुर्ग महिलाओं का सहारा, यूपी सरकार की पहल से मुफ्त यात्रा का लाभ

    अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा योजना बनी बुजुर्ग महिलाओं का सहारा, यूपी सरकार की पहल से मुफ्त यात्रा का लाभ

    अंबेडकरनगर
     सुलतानपुर के कादीपुर की चंद्रावती देवी पांच सौ रुपये लेकर जिला मुख्यालय के निजी चिकित्सक से इलाज करवाने आई थीं। 100 रुपये डॉक्टर की फीस जमा की, 300 रुपये की दवा ले ली।

    वापस घर जाने के लिए 100 रुपये किराये के लिए बचा लिए। पटेल नगर से बस अड्डे तक करीब एक किमी पैदल पहुंचीं। यहां सोमवार दोपहर 12 बजे अकबरपुर से कादीपुर-प्रयागराज जाने वाली रोडवेज बस खड़ी थी।

    कंडक्टर सूरज यादव जोर-जोर से कादीपुर, सुलतानपुर, प्रयागराज जाने के लिए आवाज लगा रहे थे। बोले, दादी बैठो बस में, तुम्हारा तो किराया भी नहीं लगेगा। इतना सुनते ही चंद्रावती के चेहरा खिल उठा। आधार कार्ड निकाला, कंडक्टर ने इसे देखकर जीरो टिकट बना दिया।

    अकबरपुर से कादीपुर का 51 टिकट का दाम बच गया। गर्मी और भूख से परेशान दादी ने तुरंत 20 रुपये का समोसा खाकर पानी पीया। कहा-अब फ्री में बस से घर जाएंगे, किराया बच रहा है।

    आजमगढ़ से अयोध्या जाने वाली बस में सवार गोसाईंगंज की 60 वर्षीय गीता देवी न्यायालय तारीख पर आई थीं। बताया कि आधार कार्ड दिखाकर मुफ्त यात्रा हुई। जो किराया लगता, उसे वकील की फीस में दे दिया। सरकार ने बहुत अच्छी सुविधा दी है

    आजमगढ़ की सावित्री देवी बस से मरैला स्थित मायके पहुंचीं। कहा- बहुत अच्छा लग रहा है, सरकार ने हम लोग के बारे में सोचा। अब किराये की टेंशन खत्म। हर महीना जब भी समय मिलेगा, मैं मायके आ जाऊंगी। पहले 100-50 रुपये भी बचाना मुश्किल था, अब मुफ्त सफर हो रहा है। अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा योजना बुजुर्ग महिलाओं के लिए वरदान साबित हो रही है।

    एक सप्ताह के भीतर 60 वर्ष से अधिक उम्र की 200 से अधिक महिलाओं ने रोडवेज बसों में निश्शुल्क यात्रा की है। अकबरपुर डिपो की 94 बसों में योजना के तहत दिल्ली, आजमगढ़, लखनऊ, मऊ, गोरखपुर, प्रयागराज रूट पर बुजुर्ग महिलाओं को सिर्फ आधार कार्ड दिखाना होता है, जिसके बाद उन्हें टिकट नहीं लेना पड़ता।

    स्टेशन इंचार्ज लक्ष्मी सिंह ने बताया कि आधार कार्ड की उम्र के अनुसार सफर का लाभ दिया जा रहा है। यात्री स्मार्ट कार्ड अभी बनना शुरू नहीं हुआ है,शीघ्र ही इसका शुभारंभ होगा।

  • ‘देश को योगी आदित्यनाथ जैसे और नेताओं की जरूरत’, सुहेल सेठ ने जमकर सराहा यूपी मॉडल

    ‘देश को योगी आदित्यनाथ जैसे और नेताओं की जरूरत’, सुहेल सेठ ने जमकर सराहा यूपी मॉडल

    सुहेल सेठ ने की 'योगी मॉडल ऑफ गवर्नेंस' की तारीफ, बोले-देश को चाहिए योगी आदित्यनाथ जैसे और नेता

    नोएडा से ग्रेटर नोएडा तक के शानदार इंफ्रास्ट्रक्चर की सराहना, बोले- मजबूत और निर्णायक नेतृत्व से ही दिखता है बदलाव

    गलगोटियास यूनिवर्सिटी में नई किताब 'डब्ल्यूटीएफ इंडिया: आर वी लूजिंग द प्लॉट?' का विमोचन, छात्रों से भारत के भविष्य और नागरिक जिम्मेदारियों पर खुलकर संवाद

    ग्रेटर नोएडा

    जाने-माने लेखक, ब्रांड स्ट्रैटेजिस्ट और कमेंटेटर सुहेल सेठ ने गलगोटियास यूनिवर्सिटी में आयोजित संवाद कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शासन मॉडल की जमकर सराहना की। नोएडा से ग्रेटर नोएडा तक सफर के दौरान नजर आए इंफ्रास्ट्रक्चर की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि देश को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जैसे और नेताओं की जरूरत है।

    सुहेल सेठ गलगोटियास यूनिवर्सिटी में अपनी नई किताब 'डब्ल्यूटीएफ इंडिया: आर वी लूजिंग द प्लॉट?' के विमोचन के लिए पहुंचे थे। यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय की संवाद श्रृंखला का हिस्सा था, जिसमें अलग-अलग क्षेत्रों की जानी-मानी हस्तियों को छात्रों से बातचीत के लिए आमंत्रित किया जाता है। क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलाव का जिक्र करते हुए सेठ ने यहां के इंफ्रास्ट्रक्चर की गुणवत्ता और विकास की रफ्तार को प्रभावी शासन की पहचान बताया।

    उन्होंने कहा कि विश्वस्तरीय और जमीन पर दिखाई देने वाला इंफ्रास्ट्रक्चर अचानक तैयार नहीं होता। इसके पीछे मजबूत और निर्णायक नेतृत्व होता है, जो स्पष्ट दिशा तय करता है और उसे जमीन पर लागू करने की क्षमता रखता है। उनके मुताबिक क्षेत्र में बदलाव की रफ्तार बताती है कि जब स्पष्ट सोच के साथ उसे लागू करने की इच्छाशक्ति और क्षमता जुड़ती है, तो प्रभावी शासन के जरिए कितना बड़ा बदलाव किया जा सकता है।

    किताब के विमोचन के बाद गलगोटियास यूनिवर्सिटी के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर डॉ. ध्रुव गलगोटिया के साथ सुहेल सेठ की विस्तृत बातचीत हुई। इसके बाद उन्होंने छात्रों के साथ भी संवाद किया। बातचीत में भारत की दिशा, नागरिकों की जिम्मेदारियों और देश के भविष्य के प्रति उदासीन रहने के बजाय सक्रिय रूप से जुड़े रहने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।

    छात्रों के साथ संवाद कार्यक्रम दौरे के प्रमुख आकर्षणों में रहा। छात्रों ने भारत की दिशा और अपनी पीढ़ी की भूमिका को लेकर सुहेल सेठ से कई सवाल किए। सेठ ने अपने खास बेबाक और सहज अंदाज में जवाब देते हुए छात्रों से सवाल करने, भागीदारी निभाने और भारत की कहानी को खुद आकार देने की जिम्मेदारी लेने का आह्वान किया।

    डॉ. ध्रुव गलगोटिया ने सुहेल सेठ की मेजबानी पर खुशी जताई। उन्होंने कहा, “हमारे कैंपस में सुहेल सेठ की मेजबानी करना हमारे लिए सम्मान की बात है। विश्वविद्यालय अपने छात्रों को सबसे बड़ी चीज यह दे सकता है कि वे उन लोगों के साथ बड़े विचारों पर चर्चा और बहस कर सकें, जो उन विचारों को आकार देते हैं। साथ ही वे खुद और देश के बारे में पहले से ज़्यादा सोचकर यहां से निकलें। हमारे छात्रों ने आज बिल्कुल यही किया और उनकी ऊर्जा मुझे भरोसा दिलाती है कि हम सही तरह का माहौल तैयार कर रहे हैं।”

    गलगोटियास यूनिवर्सिटी की संवाद श्रृंखला विश्वविद्यालय की उस पहल का हिस्सा है, जिसके तहत उद्योग, विचार और सार्वजनिक जीवन को प्रभावित करने वाली हस्तियों को कैंपस में बुलाया जाता है। इसका उद्देश्य छात्रों को ऐसे लोगों से सीखने और संवाद करने का अवसर देना है, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों को प्रभावित किया है।

    50 हजार से ज्यादा छात्र, एक लाख से अधिक पूर्व छात्र

    गलगोटियास यूनिवर्सिटी भारत की प्रमुख मल्टीडिसिप्लिनरी यूनिवर्सिटी में शामिल है। विश्वविद्यालय को अकादमिक उत्कृष्टता, रिसर्च, इनोवेशन, ग्लोबल सहयोग और इंडस्ट्री से जुड़ी शिक्षा के लिए जाना जाता है। यहां 50,000 से अधिक छात्र पढ़ते हैं, जबकि इसका ग्लोबल एलुमनाई नेटवर्क 1,00,000 से अधिक पूर्व छात्रों का है। विश्वविद्यालय ने टेक्नोलॉजी, उद्यमिता, अलग-अलग विषयों के बीच सीखने और वास्तविक दुनिया में काम आने वाली शिक्षा पर केंद्रित एक तेजी से बढ़ता इकोसिस्टम तैयार किया है।

    क्यूएस और टाइम्स हायर एजुकेशन रैंकिंग में भी स्थान

    क्वाक्वेरेली साइमंड्स की क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स 2027 में गलगोटियास यूनिवर्सिटी को वैश्विक स्तर पर 1201 – 1400 बैंड में जगह मिली है। भारत में यह निजी विश्वविद्यालयों में 16वें और सभी विश्वविद्यालयों में 46वें स्थान पर रही। वहीं टाइम्स हायर एजुकेशन वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स 2026 में विश्वविद्यालय को वैश्विक स्तर पर 1201-1500 बैंड में स्थान मिला और भारत में निजी विश्वविद्यालयों में 27वां तथा सभी विश्वविद्यालयों में 65वां स्थान मिला। विश्वविद्यालय को एनएएसी 'ए प्लस' मान्यता भी प्राप्त है, जो भारत की उच्च संस्थागत गुणवत्ता रेटिंग में शामिल है।

    विश्वविद्यालय में इंजीनियरिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कंप्यूटर साइंस, सेमीकंडक्टर्स, बिजनेस, लॉ, मीडिया, डिजाइन, हेल्थ साइंसेज, हॉस्पिटैलिटी, लिबरल एजुकेशन और नए इंटरडिसिप्लिनरी क्षेत्रों में विभिन्न पाठ्यक्रम संचालित किए जाते हैं। वर्ष 2026 में छात्रों को 1,250 से अधिक रिक्रूटर्स की ओर से 5,500 से ज्यादा जॉब ऑफर मिले। विश्वविद्यालय ने एप्पल, एक्सेंचर, इन्फोसिस, आईबीएम, इंटेल, सिस्को, टाटा टेक्नोलॉजीज, एलएंडटी एडुटेक, कैपजेमिनी और सेल्सफोर्स जैसी संस्थाओं के साथ इंडस्ट्री और इनोवेशन पार्टनरशिप भी विकसित की हैं। साथ ही ग्लोबल अकादमिक सहयोग और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने पर भी काम जारी है।

  • सहारनपुर में अवैध इमारत हटाने पर अखिलेश क्यों बौखलाए? संगीत सोम ने पूछा- ‘क्या भूमाफियाओं के साथ हैं?’

    सहारनपुर में अवैध इमारत हटाने पर अखिलेश क्यों बौखलाए? संगीत सोम ने पूछा- ‘क्या भूमाफियाओं के साथ हैं?’

    'मुजफ्फरनगर में हिंदू कट रहे थे, अखिलेश सैफई में डांस देख रहे थे', संगीत सोम ने सपा को घेरा

    मुजफ्फरनगर दंगे की बरसी पर अखिलेश की PC, संगीत सोम बोले- ‘सनातनी न भूले हैं, न भूलेंगे’

    सहारनपुर में अवैध इमारत हटाने पर अखिलेश क्यों बौखलाए? संगीत सोम ने पूछा- ‘क्या भूमाफियाओं के साथ हैं?’

    मर्डर पर राजनीति, एनकाउंटर पर माफियाओं का साथ? अंकित बालियान केस पर अखिलेश को संगीत सोम ने घेरा

    ‘P से पापी, D से डकैत, A से अपराधी’- संगीत सोम ने अखिलेश के PDA को बताया छलावा

    ‘अखिलेश यादव मुगल शासन के आखिरी शासक थे’- संगीत सोम बोले, अब यूपी में नहीं चलेगा मुगल राज

    लखनऊ
     मुजफ्फरनगर दंगे की बरसी पर अखिलेश यादव की प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर बीजेपी के पूर्व विधायक संगीत सोम ने सपा पर तीखा हमला बोला। संगीत सोम ने आरोप लगाया कि जब मुजफ्फरनगर में हिंदू काटे जा रहे थे और पश्चिमी यूपी जल रहा था, तब अखिलेश यादव सैफई में डांस देख रहे थे। उन्होंने कहा कि सनातनी मुजफ्फरनगर दंगे को न भूले हैं और न भूलेंगे। संगीत सोम ने कहा कि 'हम न माफ किए थे, न करेंगे।'

    संगीत सोम ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि आज (सोमवार) प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव मुजफ्फरनगर दंगे की बरसी पर कुछ बोलेंगे और सनातनियों से माफी मांगेंगे कि कैसे उन्होंने हजारों हिंदुओं को कटवाने और मरवाने का काम किया गया था, लेकिन अखिलेश यादव कुछ बोले तक नहीं। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य है कि अखिलेश यादव को आज भी याद नहीं आया कि उन्होंने क्या किया था।

    ‘मुजफ्फरनगर में अखिलेश के इशारे पर पुलिस वाले हिंदुओं को गोली मार रहे थे’

    संगीत सोम ने कहा कि मुजफ्फरनगर में अखिलेश यादव के इशारे पर पुलिस वाले हिंदुओं को गोली मार रहे थे। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव ने मुजफ्फरनगर में दंगे कराए और आज उसकी बरसी पर बाकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा कि अंदाजा लगा लीजिए कि अखिलेश यादव क्या कर रहे हैं। संगीत सोम ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव का इतिहास ही सनातन विरोधी रहा है। उन्होंने कहा, 'कभी राम मंदिर भक्तों पर गोली चलवाते हैं तो कभी दंगे करवाते हैं।'

    संगीत सोम ने कहा कि अखिलेश यादव केवल एक ही धर्म की राजनीति करते हैं। उन्हें सनातनियों से कोई मतलब नहीं है। उन्होंने कहा कि भगवान अखिलेश यादव को कभी माफ नहीं करेगा।

    सहारनपुर में कार्रवाई पर अखिलेश को घेरा, पूछा- ‘क्या वो भूमाफियाओं के साथ हैं?’

    संगीत सोम ने सहारनपुर में अवैध निर्माण के खिलाफ हुई कार्रवाई को लेकर भी अखिलेश यादव को घेरा। उन्होंने कहा कि एक सरकारी बिल्डिंग पर अवैध इमारत थी और उसे हटाया गया है। इसके बावजूद अखिलेश यादव इस कार्रवाई को लेकर बौखला गए हैं। उन्होंने सवाल किया, 'क्या वो भूमाफियाओं के साथ हैं?'

    संगीत सोम ने कहा कि जितनी इस तरह की कब्जे वाली जमीन है और जितनी इस तरह की अवैध मस्जिद और मजार बनी हैं, उसे तोड़ा जाएगा।

    'अंकित बालियान के मर्डर पर गिद्ध जैसी नजर, एनकाउंटर होते ही पलट गए'

    मुरादाबाद के अंकित बालियान हत्याकांड का जिक्र करते हुए भी संगीत सोम ने अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव राजनीति के लिए इस तरह की घटनाओं पर गिद्ध जैसे नजर रखेंगे, लेकिन जैसे ही एनकाउंटर होगा, वह तुरंत पलट जाएंगे और माफियाओं के साथ देने लगेंगे। उन्होंने कहा कि अब उत्तर प्रदेश में दंगा नहीं हो सकता है। अब प्रदेश में कानून का राज है।

    ‘अखिलेश को पर्यटन स्थल, एम्स और एक्सप्रेस-वे से मतलब नहीं’

    संगीत सोम ने कहा कि अखिलेश यादव को उत्तर प्रदेश में बन रहे पर्यटन स्थल, एम्स और एक्सप्रेस-वे से मतलब नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव केवल डांस देखने में व्यस्त रहते थे और उन्हें केवल माफियाओं से मतलब है।

    उन्होंने कहा, 'अखिलेश यादव मुगल शासन के आखिरी शासक थे। अब यूपी में मुगल शासन नहीं चलेगा।' संगीत सोम ने अपने ऊपर हुई कार्रवाई का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव ने उन पर फर्जी रासुका लगाई थी और कई निर्दोषों को जेल भेजा था।

    सपा-कांग्रेस गठबंधन पर भी हमला, बोले- ‘इनका कुछ पता नहीं कब होगा, कैसे होगा’

    सपा और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर चल रही खींचतान पर भी संगीत सोम ने निशाना साधा। उन्होंने कहा कि दोनों दलों में अभी सीट बंटवारे को लेकर ही लड़ाई मची है। सपा सोचती है कि वह बड़ी पार्टी है और कांग्रेस भी खुद को बड़ी पार्टी समझती है।

    संगीत सोम ने कहा कि अखिलेश यादव सोच रहे हैं कि कांग्रेस को 20-30 सीट में निपटा दें, जबकि कांग्रेस वाले 200 सीट मांग रहे हैं। ऐसे में इनके गठबंधन का कुछ पता नहीं है कि कब होगा और कैसे होगा। इसके उलट उन्होंने दावा किया कि बीजेपी 300 सीटों के साथ यूपी में सरकार बनाने जा रही है। बीजेपी जमीन पर चुनाव लड़ रही है और जमीन पर काम कर रही है।

    ‘पी से पापी, डी से डकैत, ए से अपराधी… ये केवल छलावा कर रहे हैं’

    सपा के PDA फॉर्मूले पर हमला बोलते हुए संगीत सोम ने कहा, 'पी से पापी, डी से डकैत, ए से अपराधी।' उन्होंने कहा कि ये केवल छलावा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज यूपी में काम हो रहा है। सड़कें बन रही हैं, स्कूल-कॉलेज बन रहे हैं, निवेश आ रहा है और इंफ्रास्ट्रक्चर सुधर रहा है। उन्होंने दावा किया कि सपा कहीं है ही नहीं और चुनाव में वह बसपा से भी पीछे रहेगी।

  • यूपी फतह के लिए BJP की नई रणनीति, तावड़े ने बूथ मजबूत करने और हर जाति को साधने का दिया मंत्र

    यूपी फतह के लिए BJP की नई रणनीति, तावड़े ने बूथ मजबूत करने और हर जाति को साधने का दिया मंत्र

       लखनऊ
    उत्तर प्रदेश में बीजेपी ने सत्ता की हैट्रिक लगाने का ताना-बाना बुनना शुरू कर दिया है. बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव और यूपी प्रभारी विनोद तावड़े ने अपने दो दिवसीय लखनऊ दौरे के दौरान मिशन-2027 के लिए पार्टी के रणनीतिक खाके यानी ब्लूप्रिंट की नींव रखी. बिना किसी भारी तामझाम और सादगी के साथ लखनऊ पहुंचे तावड़े ने जीत की हैट्रिक लगाने के लिए संगठन को चुस्त-दुरुस्त करने से लेकर नैरेटिव सेट करने तक कई अहम दिशा-निर्देश दिए। 

    बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े ने अपने दो दिवसीय प्रवास के दौरान विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी की तैयारियों को परखा. इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ-साथ दोनों उप-मुख्यमंत्रियों से मुलाकात और बातचीत भी की. इसके अलावा संगठन के लोगों के साथ मंथन कर सारा ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है। 

    विनोद तावड़े ने पार्टी पदाधिकारियों को विधानसभा चुनाव 2027 के लिए टारगेट दिया. उन्होंने कहा कि हमें हर बूथ को मजबूत करना होगा, कोई बूथ छूटना नहीं चाहिए और उसके लिए विशेष कार्ययोजना बनाएं. इसके साथ ही उन्होंने सभी जातियों को साधने का मंत्र भी दिया और कहा कि संख्या चाहे कम हो या ज्यादा, लेकिन कोई जाति छूट न जाए, हमें सबको जोड़ना होगा। 

    यूपी फतह का खाका खींच गए तावड़े
    बिहार चुनावों में एनडीए के चुनावी प्रबंधन और तालमेल के सफल फार्मूले को यूपी की जमीन पर उतारने का काम तावड़े ने शुरू कर दिया है. उत्तर प्रदेश के बीजेपी प्रभारी बनने के बाद पहली बार लखनऊ पहुंचे राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े ने 2027 का विधानसभा चुनाव मजबूत संगठन के बलबूते और पीएम मोदी व सीएम योगी के नाम और काम पर लड़ने के संकेत दिएच इस तरह सरकार और संगठन दोनों के साथ समन्वय बनाकर 2027 के चुनाव में उतरने का खाका खींच गए। 

    विनोद तावड़े ने रविवार सुबह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के बाद दिनभर पार्टी दफ्तर में क्षेत्रीय पदाधिकारियों से मुलाकात की. उन्होंने प्रदेश के महामंत्रियों, क्षेत्रीय अध्यक्षों और प्रभारियों के साथ बैठक की. बीजेपी संगठन के नेताओं से मुलाकात के दौरान विनोद तावड़े ने साफ कहा कि बूथ की मजबूती ही 2027 के चुनाव की जीत का आधार बनेगी। 

    तावड़े ने पदाधिकारियों से कहा कि वे हर बूथ के अनुसार कार्ययोजना बनाएं. किस बूथ पर जीत की क्या स्थिति है, इसकी ठीक से समीक्षा करें. इसके अलावा जहां कमी नजर आए, उसे दुरुस्त करें. इस तरह हारी हुई बूथों को चिह्नित करते हुए वहां पार्टी को मजबूत करने के निर्देश भी दिए। 

    सपा के पीडीए का काउंटर प्लान तैयार
    अखिलेश यादव के 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) कार्ड की काट के लिए तावड़े ने 'परफॉर्मेटिव नैरेटिव' पेश किया. उन्होंने सपा के पीडीए पर तंज कसते हुए इसे 'पराया धन अपना' करार दिया और जमीन पर अवैध कब्जे तथा महिला सुरक्षा (स्त्रीधन) जैसे मुद्दों को उठाकर सपा को घेरने का संकेत दिया. इसके साथ ही बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग को मजबूत करने का खाका भी खींचा। 

    तावड़े ने कहा कि हमें सभी वर्गों का साथ चाहिए, ऐसी कोई भी जाति न हो जो अछूती रह जाए. यूपी बड़ा प्रदेश है और हर क्षेत्र में अलग-अलग जातियों का प्रभाव है. यदि किसी जाति के वोटरों की संख्या कम है, तो भी हमें उसे छोड़ना नहीं है, उनसे संपर्क करके उन्हें पार्टी से जोड़ने का प्रयास करना है. इसके साथ ही उन्होंने विपक्ष की तैयारी पर नजर रखकर अपनी रणनीति बनाने की नसीहत दी। 

    विपक्ष के प्रत्याशी का तोड़ तलाशने का टास्क
    बीजेपी प्रभारी ने कहा कि विपक्षी तैयारियों पर हमें पूरी नजर रखनी होगी. विपक्ष का कोई नेता या प्रत्याशी मजबूत है, तो उसकी मजबूती का आधार पता करना होगा और फिर उसी के अनुसार अपनी रणनीति तैयार करके मजबूत होना होगा. पार्टी सूत्रों का कहना है कि उन्होंने विपक्ष के मजबूत प्रत्याशियों पर खास नजर रखने और उनका तोड़ निकालने के लिए कहा है. इसका यह संदेश भी है कि यदि विपक्ष के मजबूत प्रत्याशी को अपने पाले में लाकर जीत मिलती है, तो आखिर में यह भी एक विकल्प हो सकता है। 

    बीजेपी संगठन को निर्देश दिए गए कि 2022 के चुनाव में गंवाई गई 57 सीटों और एनडीए की हारी हुई 130 सीटों की गहन समीक्षा की जाए और बूथ स्तर पर शक्ति केंद्रों में युवाओं को जोड़ा जाए. इस तरह से विनोद तावड़े 2027 के विधानसभा चुनाव में सत्ता की हैट्रिक लगाने ही नहीं, बल्कि बिहार की तरह क्लीन स्वीप करने का प्लान बना रहे हैं। 

    वीआईपी कल्चर से दूरी बनाकर दिया संदेश
    बीजेपी के प्रदेश प्रभारी बनाए जाने के बाद विनोद तावड़े ने उत्तर प्रदेश आने से पहले ही साफ कर दिया था कि उनके स्वागत की एक भी होर्डिंग शहर में नहीं लगनी चाहिए और न ही उनका नाम दिखाई देना चाहिए. ऐसे में जिन लोगों ने विनोद तावड़े के लिए बैनर, पोस्टर और होर्डिंग लगाए थे, उन्हें रातों-रात उन्हीं लोगों ने हटा लिया। 
    अब विनोद तावड़े ने नया मंत्र दिया और पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे लखनऊ में समय बिताने के बजाय अपने-अपने आवंटित विधानसभा क्षेत्रों में जाएं, रात को वहीं प्रवास करें और स्वागत-सत्कार के चक्कर में न पड़ें. मार्च 2027 तक, यानी विधानसभा चुनाव होने तक सभी पदाधिकारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गईं और चुनावी अभियानों को अंतिम रूप देने के निर्देश दिए गए। 

    संगठन-सरकार के साथ मजबूत समन्वय
    प्रदेश प्रभारी तावड़े ने भाजपा के सभी प्रदेश मोर्चों के अध्यक्षों से भी संवाद किया. इस दौरान उन्होंने निर्देश दिए कि वे जल्द से जल्द अपनी कार्यसमिति बनाएं. सूत्रों के अनुसार हफ्तेभर के अंदर कार्यकारिणी गठित करने के लिए उन्होंने कहा है. यह भी कहा गया कि जब कार्यकारिणी गठित हो जाए, तो उन्हें आगे का टारगेट दिया जाएगा जिसे पूरा करने के लिए सभी को मिलकर जुटना होगा। 

    तावड़े ने रविवार सुबह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी उनके सरकारी आवास पर मुलाकात की. सूत्रों के अनुसार उन्होंने सरकार के कामकाज की जानकारी ली और कल्याणकारी योजनाओं पर बात की. सरकार और संगठन में समन्वय के मुद्दे पर भी दोनों नेताओं के बीच चर्चा हुई। 

    सीएम के साथ बैठक में संगठन के सहयोग से सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने और विकास को मुद्दा बनाने पर सहमति बनी. इससे पहले उन्होंने शनिवार को दोनों डिप्टी सीएम से अलग से मुलाकात की थी. मुख्यमंत्री, दोनों डिप्टी सीएम और प्रदेश अध्यक्ष के साथ बैठकें करके सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल बिठाने पर सहमति बनाई गई। 

  • बाढ़ में योगी सरकार का राहत अभियान जारी, 6.83 लाख लंच पैकेट व 1.11 लाख से ज्यादा बाढ़ राहत किट बांटे

    बाढ़ में योगी सरकार का राहत अभियान जारी, 6.83 लाख लंच पैकेट व 1.11 लाख से ज्यादा बाढ़ राहत किट बांटे

    लखनऊ

    योगी सरकार ने प्रदेश में बाढ़ की चुनौती के बीच राहत और बचाव कार्यों को पूरी तत्परता के साथ तेज कर दिया है। बाढ़ प्रबंधन की मजबूत व्यवस्था, मौके पर तैनात राहत टीमें और प्रभावित लोगों तक तत्काल मदद पहुंचाने के कारण प्रशासनिक अमला लगातार सक्रिय है। उत्तर प्रदेश राहत आयुक्त कार्यालय के मुताबिक अब तक 6.83 लाख से अधिक लंच पैकेट व 1.11 लाख से ज्यादा बाढ़ राहत किट जरूरतमंदों तक पहुंचाए जा चुके हैं। वहीं 19,496 प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। साथ ही बाढ़ से जनहानि शून्य है।

    राहत एवं बचाव अभियान के तहत अब तक स्थापित बाढ़ चौकियों की संख्या 1,634 की जा चुकी है। प्रभावित क्षेत्रों में अब तक 1,072 मेडिकल टीमें गठित की जा चुकी हैं। वहीं, राहत और बचाव कार्यों के लिए 2,161 नाव एवं मोटरबोट राहत अभियान में जुटी हुईं हैं।

    योगी सरकार के निर्देश पर बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का अभियान भी जारी है। सोमवार को 6,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया, जबकि अब तक 19,496 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया जा चुका है। प्रभावितों के लिए 1,315 शरणालय स्थापित किए गए हैं।

    भोजन और राहत सामग्री पहुंचाने में भी प्रशासन पूरी सक्रियता दिखा रहा है। अब तक 1.11 लाख से अधिक बाढ़ राहत किट और 6.83 लाख से अधिक लंच पैकेट वितरित किए गए हैं। स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए अब तक 6.68 लाख क्लोरीन टैबलेट और 2.60 लाख से अधिक ओआरएस पैकेट भी वितरित किए गए हैं।

    बाढ़ से क्षतिग्रस्त मकानों के मामलों में भी प्रभावित परिवारों को सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। अब तक 1,490 मकान क्षतिग्रस्त होने की सूचना है, जिसके सापेक्ष कुल 1,272 मामलों में सहायता दी जा चुकी है।

    प्रभावित जिले
    अयोध्या, आजमगढ़, बहराइच, बदायूं, बलिया, बाराबंकी, बस्ती, चंदौली, फर्रुखाबाद, गाजीपुर, गोंडा, गोरखपुर, हरदोई, कासगंज, कानपुर नगर, लखीमपुर खीरी, मिर्जापुर, मुरादाबाद, प्रयागराज, रायबरेली, संत कबीर नगर, रामपुर, सीतापुर, शाहजहांपुर, उन्नाव और वाराणसी।

  • स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में यूपी के 16 शहरों ने बनाई जगह, लखनऊ देश में पहले स्थान पर

    स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में यूपी के 16 शहरों ने बनाई जगह, लखनऊ देश में पहले स्थान पर

    लखनऊ

    उत्तर प्रदेश में स्वच्छ हवा को लेकर किए जा रहे लगातार प्रयासों ने राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश ने स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए देश में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से कराए गए सर्वेक्षण में 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में लखनऊ ने पहली बार इंदौर को पीछे छोड़ते हुए देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। 

    लखनऊ ने 198 अंक के साथ प्रथम स्थान जबकि इंदौर 197 और जबलपुर 195 अंकों के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे हैं। यह उपलब्धि केवल राजधानी लखनऊ तक सीमित नहीं है। प्रदेश के 16 शहरों ने अलग-अलग आबादी वर्गों में राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन किया है। इससे स्पष्ट है कि प्रदेश में स्वच्छ वायु को लेकर शहर स्तर से लेकर वार्ड स्तर तक योजनाबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है।

    यूपी के दूसरे शहरों ने भी दिखाया दम

    10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में उत्तर प्रदेश के कई शहरों ने भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई। आगरा 192 अंकों के साथ चौथे, गाजियाबाद 184 अंकों के साथ नौवें, कानपुर 183.2 अंकों के साथ 11वें और प्रयागराज 180 अंकों के साथ 13वें स्थान पर रहा। मेरठ 22वें और वाराणसी 34वें स्थान पर रहे। इस रैंकिंग से यह संकेत मिलता है कि स्वच्छ हवा को लेकर प्रदेश के बड़े शहरों में किए जा रहे प्रयासों का असर व्यापक स्तर पर दिखाई दे रहा है।

    3 से 10 लाख आबादी वाले शहरों में भी यूपी का दबदबा

    मध्यम आबादी वाले शहरों की श्रेणी में भी उत्तर प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। फिरोजाबाद ने 195 अंक हासिल कर देश में दूसरा स्थान प्राप्त किया। शहर में कांच उद्योगों को स्वच्छ प्राकृतिक गैस ईंधन की ओर तेजी से स्थानांतरित करने को अहम उपलब्धि माना गया। झांसी 192.5 अंकों के साथ पांचवें, जबकि मुरादाबाद और नोएडा 187.5-187.5 अंकों के साथ संयुक्त रूप से आठवें स्थान पर रहे। गोरखपुर 22वें और बरेली 26वें स्थान पर रहा।

    छोटे शहरों में भी बेहतर प्रदर्शन

    तीन लाख से कम आबादी वाले शहरों की श्रेणी में भी यूपी के शहरों ने प्रभावी प्रदर्शन किया। रायबरेली 180.5 अंकों के साथ 17वें स्थान पर रहा। अनपरा 29वें, खुर्जा 30वें और गजरौला 31वें स्थान पर रहे। इन शहरों में धूल नियंत्रण और वाहनों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए किए गए प्रयासों को प्रमुखता मिली।

    वार्ड स्तर पर भी यूपी की बड़ी उपलब्धि

    स्वच्छ वायु प्रबंधन को शहरों तक सीमित रखने के बजाय स्थानीय स्तर पर भी प्रभावी कदम उठाए गए। 30 हजार से अधिक आबादी वाले शहरी वार्डों की राष्ट्रीय श्रेणी में लखनऊ के जोन-4 स्थित वार्ड-70 ने पहला स्थान हासिल किया। वहीं 10 हजार से 30 हजार आबादी वाले वार्डों की श्रेणी में प्रयागराज के वार्ड-31 ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। राज्य स्तरीय वार्ड पुरस्कारों में कानपुर के वार्ड केएनपी078, प्रयागराज के वार्ड-33 और बरेली के गांधी उद्यान वार्ड-32 को उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया। खुले में कूड़ा जलाने पर प्रभावी रोक और स्थानीय स्तर पर धूल नियंत्रण जैसे उपायों को इसमें महत्वपूर्ण माना गया।

    समन्वित रणनीति का परिणाम

    प्रदेश में स्वच्छ हवा के लिए नगर विकास विभाग, स्थानीय नगरीय निकायों और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के समन्वय से विभिन्न स्तरों पर कार्रवाई की गई। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत तैयार और लागू की गई समन्वित रणनीति का असर लखनऊ के देश में पहले स्थान समेत यूपी के कई शहरों और वार्डों की राष्ट्रीय रैंकिंग में दिखाई दिया है। 

    पुरस्कार के साथ बढ़ा स्थानीय निकायों का उत्साह

    स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में उत्तर प्रदेश ने शानदार प्रदर्शन किया है। श्रेणी-1 में लखनऊ नगर निगम को प्रथम पुरस्कार हासिल करने के साथ ही 1.5 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि मिली है। वहीं श्रेणी-2 में फिरोजाबाद नगर निगम को प्रथम पुरस्कार के साथ 25 लाख रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की गई है। वार्ड स्तर पर भी प्रदेश को महत्वपूर्ण सफलता मिली। लखनऊ नगर निगम के वार्ड-70 को प्रथम पुरस्कार के साथ 50 लाख रुपये, प्रयागराज नगर निगम के वार्ड-31 ने तृतीय पुरस्कार के साथ 20 लाख रुपये की पुरस्कार राशि दी गई है।

    स्वच्छ वायु के क्षेत्र में लखनऊ की उपलब्धि प्रदेश के लिए नई प्रेरणा- नगर विकास मंत्री

    नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व में उत्तर प्रदेश के शहरों की तस्वीर तेजी से बदल रही है। लखनऊ ने स्वच्छ वायु संरक्षण के क्षेत्र में पहली बार इंदौर को पीछे छोड़कर देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। यह उपलब्धि प्रदेश के लिए एक नई प्रेरणा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जिस प्रकार स्वच्छ वायु के क्षेत्र में लखनऊ ने देश में पहला स्थान हासिल किया है, उसी प्रकार स्वच्छता सर्वेक्षण में भी लखनऊ को देश का नंबर-वन शहर बनाने के लिए सरकार, नगर निगम और नागरिक मिलकर पूरी प्रतिबद्धता से कार्य करेंगे।

    लखनऊ की नंबर-1 उपलब्धि ने बढ़ाया यूपी का गौरव

    लखनऊ को 198 अंकों के साथ देश में पहला स्थान मिलना प्रदेश के लिए विशेष उपलब्धि है। राजधानी में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए इलेक्ट्रिक परिवहन, सड़क की धूल नियंत्रण, वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन, हरियाली बढ़ाने और यातायात व्यवस्था को बेहतर करने जैसे क्षेत्रों में लगातार काम किया गया। नगर निगम की ओर से डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रहण के लिए करीब 1,100 इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए शहर में 12 चार्जिंग स्टेशन और 916 चार्जिंग प्वाइंट बनाए गए हैं। स्वच्छ परिवहन की दिशा में 140 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन भी किया जा रहा है। सड़क की धूल को नियंत्रित करने के लिए 97 इलेक्ट्रिक मैकेनाइज्ड स्वीपिंग मशीनें संचालित हैं। इसके साथ ही 559.85 किलोमीटर सड़कों को एंड-टू-एंड पक्का किया गया है, जिससे धूल के कारण होने वाले प्रदूषण को कम करने में मदद मिली है।

    कचरा प्रबंधन और हरियाली पर भी विशेष जोर

    स्वच्छ वायु की रणनीति में वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया। लखनऊ में 2,550 टीपीडी क्षमता से 100 प्रतिशत वैज्ञानिक कचरा प्रसंस्करण की व्यवस्था की गई है। खुले में कूड़ा जलाने की समस्या को नियंत्रित करने के साथ ही शहर में कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण पर जोर दिया गया। शहर में हरियाली बढ़ाने के लिए वर्टिकल गार्डन और मियावाकी पौधरोपण जैसे प्रयास किए गए। इस तरह स्वच्छ वायु के लिए परिवहन, सड़क, कचरा प्रबंधन और हरित क्षेत्र सभी प्रमुख क्षेत्रों को एक साथ जोड़कर काम किया गया। लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल ने इस उपलब्धि का श्रेय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व, जनता, पार्षदों और नगर निगम कर्मियों के सामूहिक प्रयासों को दिया है। राजधानी की यह सफलता अब प्रदेश के दूसरे शहरों के लिए भी स्वच्छ वायु प्रबंधन के क्षेत्र में एक प्रभावी मॉडल के रूप में सामने आई है।