Category: उत्तर प्रदेश

  • योगी सरकार में हर कक्षा को मिलेगा सीखने का नया साधन, ₹56.36 करोड़ से बनेंगे टीएलएम

    योगी सरकार में हर कक्षा को मिलेगा सीखने का नया साधन, ₹56.36 करोड़ से बनेंगे टीएलएम

    लखनऊ

     योगी सरकार बेसिक शिक्षा में कक्षा-कक्ष को अधिक प्रभावी, सहज और गतिविधि आधारित बनाने के साथ-साथ विद्यालयों में शिक्षण-अधिगम सामग्री की उपलब्धता को सुदृढ़ कर रही है। इसी क्रम में समग्र शिक्षा के अंतर्गत वर्ष 2026-27 में कक्षा 1 से 5 तक के विद्यालयों में शिक्षकों द्वारा टीचिंग लर्निंग मैटेरियल (टीएलएम) तैयार करने के लिए ₹56.36 करोड़ का बजट जारी किया गया है। 

    इसका उपयोग विद्यालय स्तर पर शिक्षकों द्वारा बच्चों की सीखने की जरूरत, कक्षा एवं विषय के अनुरूप उपयोगी शिक्षण सामग्री तैयार करने में किया जाएगा। राज्य परियोजना निदेशक एवं महानिदेशक, स्कूल शिक्षा मोनिका रानी द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में जिलों को धनराशि का प्रभावी और निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

    15 अक्टूबर तक खरीद, 31 अक्टूबर तक निर्माण

    विद्यालय स्तर पर टीएलएम निर्माण के लिए समय-सीमा भी निर्धारित की गई है। संबंधित सामग्री की खरीद 15 अक्टूबर 2026 तक पूरी करनी होगी, जबकि शिक्षकों द्वारा 31 अक्टूबर 2026 तक कक्षावार एवं विषयवार टीएलएम तैयार किया जाएगा। उत्कृष्ट और नवाचारी सामग्री को सामने लाने के लिए ब्लॉक संसाधन केंद्र स्तर पर ‘निपुण टीएलएम मेला उत्सव’ आयोजित किया जाएगा, जिसमें शिक्षकों द्वारा विकसित टीएलएम का प्रदर्शन और कक्षा शिक्षण में उसके प्रभावी उपयोग का प्रस्तुतीकरण होगा।

    हर कक्षा की सीखने की जरूरत के अनुरूप सामग्री

    समग्र शिक्षा की वार्षिक कार्ययोजना एवं बजट 2026-27 में स्वीकृत धनराशि के अंतर्गत यह बजट विद्यालय स्तर पर टीएलएम निर्माण के लिए उपलब्ध कराया गया है। इसका उद्देश्य कक्षा 1 से 5 तक के शिक्षकों को ऐसी शिक्षण सामग्री तैयार करने के लिए संसाधन उपलब्ध कराना है, जो निपुण लक्ष्य से जुड़ी, सरल, उपयोगी और कक्षा-कक्ष में सहजता से प्रयोग की जा सके। दिशा-निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि टीएलएम पाठ्य बिंदु, विषयवस्तु और शिक्षण योजना के अनुरूप तैयार हो। सामग्री में उपयोगिता, टिकाऊपन और सहज उपलब्धता का ध्यान रखने के साथ बच्चों की स्वयं सामग्री बनाने और जोड़ने में सहभागिता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है।

    निपुण लक्ष्य से लेकर आकलन ट्रैकर तक

    सूची में कक्षा 1 से 5 तक के लिए ‘निपुण लक्ष्य’ पोस्टर, कक्षावार गणित एवं हिंदी की तालिका, कक्षा 3 से 5 के लिए अंग्रेजी एवं पर्यावरण अध्ययन की तालिका, शिक्षण-अधिगम से संबंधित आईईसी सामग्री, कैच-अप शिक्षण एवं आकलन ट्रैकर सहित विभिन्न सामग्री शामिल है। इसके अतिरिक्त कार्ड बोर्ड, चार्ट पेपर, स्केच पेन, फ्लैश कार्ड, एबेकस, ग्लोब, भारत एवं विश्व के मानचित्र, कठपुतलियां, पशु-पक्षियों एवं परिवहन संबंधी चार्ट, घड़ी, वर्णमाला कार्ड आदि सामग्री की व्यवस्था सुझाई गई है।

    टीएलएम के निर्माण और उपयोग पर भी निगरानी

    निर्देशों के अनुसार स्वीकृत धनराशि का उपयोग निर्धारित टीएलएम निर्माण में ही किया जाएगा। सामान्य स्टेशनरी, सफाई सामग्री, सजावट, व्यक्तिगत उपयोग की वस्तुओं अथवा ऐसी सामग्री की खरीद पर धनराशि खर्च नहीं की जाएगी, जिसका शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में प्रत्यक्ष उपयोग न हो। विद्यालयों में टीएलएम के निर्माण और कक्षा-शिक्षण में उसके उपयोग की निगरानी प्रधानाध्यापक/प्रभारी प्रधानाध्यापक, बीईओ, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, डायट एवं संबंधित शैक्षिक टीमों द्वारा की जाएगी।

    योगी सरकार प्रदेश के हर बच्चे को बेहतर सीखने के अवसर उपलब्ध कराने के लिए कक्षा शिक्षण को अधिक प्रभावी और गतिविधिपरक बना रही है। विद्यालयों में शिक्षकों को टीएलएम निर्माण के लिए उपलब्ध कराए जा रहे संसाधन कक्षा-कक्ष को अधिक जीवंत और सीखने की प्रक्रिया को अधिक सहज बनाएंगे। इसमें बच्चों की सहभागिता सुनिश्चित करने से सीखने के साथ उनकी रचनात्मकता भी विकसित होगी।

    संदीप सिंह, बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) उत्तर प्रदेश

    हमारा प्रयास है कि विद्यालयों में उपलब्ध कराई जा रही टीएलएम निर्माण की सुविधा का उपयोग शिक्षकों द्वारा बच्चों की सीखने की जरूरतों और शिक्षण योजना के अनुरूप किया जाए तथा उसका प्रभावी उपयोग कक्षा-कक्ष में सुनिश्चित हो। शिक्षकों द्वारा तैयार उत्कृष्ट और नवाचारी टीएलएम को निपुण टीएलएम मेला उत्सव के माध्यम से साझा करने से बेहतर शिक्षण प्रयोगों को व्यापक स्तर पर अपनाने का अवसर मिलेगा।
    मोनिका रानी, महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक

  • महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण से बदलेगा यूपी का भविष्य, नई दिशा में बढ़ रहा प्रदेश

    महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण से बदलेगा यूपी का भविष्य, नई दिशा में बढ़ रहा प्रदेश

    मातृशक्ति के सम्मान से गढ़ता यूपी का नया भविष्य

    हमारे धार्मिक ग्रंथों में नारी को शक्ति कहा गया है। यह शक्ति केवल पूजने से नहीं आती, बल्कि उसे अवसर, अधिकार और सम्मान देकर उसकी ऊर्जा को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने से प्रस्फुटित होती है। नारी शक्ति, सृजन और समाज की धुरी है जिसे उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता’ के भाव से आगे बढ़ा रही है, जो हमारी सनातन सभ्यता की मूल चेतना का उदघोष है। किंतु नारी का असली सम्मान तब तक पूर्ण नहीं होता, जब तक कि उसके श्रम का सम्मान न किया जाए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं के मानदेय में बढ़ोतरी करके सम्मान की इस श्रृंखला को आगे बढ़ाया है। सरकार के इस फैसले के सामाजिक अर्थ बहुत व्यापक हैं। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को राज्य की सरकारी व्यवस्था की महज एक इकाई के रूप में नहीं देखा जा सकता। वे गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य तथा प्रारंभिक देखभाल की पहली पंक्ति में खड़ी होती हैं। उनके श्रम का सम्मान वस्तुतः आने वाली पीढ़ी के बेहतर भविष्य का सम्मान है।

    यह विडंबना ही है कि एक दशक पहले तक यूपी की सरकारें नारी के सम्मान की बात तो करती रहीं, लेकिन व्यवहार में उन्हें हाशिये पर ही धकेला जाता रहा। चाहे वह श्रम का प्रतिफल हो या सामाजिक सुरक्षा का अधिकार, हमेशा उनकी अनदेखी हुई। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका और रसोइया जैसी लाखों महिलाएं समाज की नींव को सींचती रहीं, पर बदले में उन्हें वह सब नहीं मिला जिसकी वे वास्तविक रूप से हकदार रहीं। यही वह पृष्ठभूमि है जिसमें योगी सरकार के नारी सम्मान को केंद्र में रखकर लिए गए फैसले महत्वपूर्ण हो जाते हैं। वह चाहे आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों का मानदेय बढ़ाना हो, रसोइयों को उनके श्रम का सही प्रतिदान दिया जाना हो, साठ वर्ष या उससे अधिक आयु की महिलाओं को निःशुल्क बस यात्रा की सुविधा देना हो, स्नातक की छात्राओं को स्कूटी देने की घोषणा हो या फिर ग्रामीण महिलाओं को विभिन्न योजनाओं के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाना हो, सभी में एक व्यापक संदेश है। यह संदेश योगी सरकार की सोच का प्रतिबिंब है कि नारी सहायता की पात्र नहीं है, वह विकास की शक्ति है। सरकार की नीतियों में मातृशक्ति का सम्मान अब घोषणाओं से आगे बढ़कर मानदेय, सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, गतिशीलता और कानून-व्यवस्था जैसे क्षेत्रों में स्पष्ट दिखाई देता है।
     
    आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय में वृद्धि और उन्हें कैशलेस इलाज की सुविधा की बात करते हैं। यह सिर्फ एक निर्णय भर नहीं, व्यवस्थागत परिवर्तन का संदेश है जिसमें मानवीय संवेदना के साथ नारी गरिमा और श्रम का सम्मान है। 2017 में आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों को महज तीन हजार रुपये मानदेय मिलता था। योगी सरकार ने इसे परफॉर्मेंस आधारित व्यवस्था से जोड़ते हुए आठ हजार रुपये किया। अब इसे बढ़ाकर 12 हजार रुपये किया गया। सहायिकाओं का मानदेय भी 1,500 रुपये से बढ़ाकर पहले चार हजार और अब छह हजार रुपये किया गया। इसके साथ ही कैशलेस इलाज की सुविधा इन्हें स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं से मुक्त करेगी। ये सब इसके हकदार थे क्योंकि इनका सेवा भाव अतुलनीय है। याद करें कोरोना काल की महामारी को, ये आंगनवाड़ी कार्यकत्रियां ही थीं जिन्होंने अपनी जान जोखिम में डालते हुए गांव-गांव स्क्रीनिंग से लेकर दस्तक अभियान और संक्रमित लोगों की सेवा की।

    सीएम योगी ने कहा कि सभी आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं के साथ उनके परिवार को हर वर्ष पांच लाख रुपये तक कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा मिलेगी। इसका लाभ इम्पैनल्ड अस्पतालों के साथ सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में लिया जा सकेगा। मुख्यमंत्री ने सम्मान भाव में ही इनके लिए अब दो से तीन साड़ियों की व्यवस्था की है।नएक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता केवल एक सरकारी कर्मचारी नहीं होती, वह समाज की उस पहली कड़ी की तरह होती है जो गर्भवती माताओं से लेकर नवजात शिशुओं तक की देखभाल का दायित्व निभाती है। जब यह कड़ी सशक्त होती है, तो पूरा सामाजिक ताना-बाना मजबूत होता है।

    इसी क्रम में योगी सरकार के एक और निर्णय की चर्चा जरूरी है। मुख्यमंत्री ने रक्षाबंधन से पहले प्रदेश की 3.54 लाख रसोइया बहनों को जो चार बड़े उपहार दिए, वे भी भावनात्मक और व्यावहारिक, दोनों दृष्टि से उल्लेखनीय हैं। रसोइया माताओं-बहनों का मानदेय 2 हजार से बढ़ाकर 3 हजार रुपये करना, दुर्घटना की स्थिति में स्टेट बैंक के माध्यम से दो लाख रुपये की सहायता और प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक की मुफ्त कैशलेस चिकित्सा सुविधा देना, तथा परिधान राशि को दोगुना कर 500 से 1000 रुपये करना। ये सभी निर्णय महिलाओं की समग्र सामाजिक सुरक्षा की चिंता करते हैं।

    नारी सशक्तीकरण की यह यात्रा यहीं नहीं रुकती। लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा योजना का शुभारंभ इस बात का प्रतीक है कि सरकार वृद्ध महिलाओं की गतिशीलता और स्वतंत्रता को भी उतना ही महत्व देती है जितना युवा पीढ़ी के सपनों को। साठ वर्ष या उससे अधिक आयु की महिलाओं को निःशुल्क बस यात्रा की सुविधा देना एक ऐसा कदम है जो उन्हें आर्थिक निर्भरता से मुक्त कर सामाजिक जीवन में सक्रिय भागीदार बनाता है। दूसरी ओर, स्नातक में अध्ययनरत 50 हजार बेटियों को अक्टूबर-नवंबर में स्कूटी प्रदान करने की योजना युवा छात्राओं के सपनों को पंख देने जैसी है। शिक्षा तक पहुंच और गतिशीलता, दोनों को सुनिश्चित करती यह पहल बेटियों के आत्मविश्वास को नई ऊंचाई देगी।

    सामाजिक सुरक्षा की दृष्टि से देखें तो 40.34 लाख निराश्रित महिलाओं को नियमित मासिक पेंशन मिलना और इस पेंशन राशि को 1000 से बढ़ाकर 1500 रुपये प्रतिमाह करने का निर्णय अकेली, विधवा या परित्यक्ता महिलाओं के लिए संबल का काम करता है। सक्षम आंगनबाड़ी और पोषण 2.0 योजना के अंतर्गत 22 लाख से अधिक गर्भवती और धात्री महिलाओं को हर माह राशन मिलना, और रेसिपी आधारित पुष्टाहार लागू करने वाला देश का पहला राज्य बनना, उत्तर प्रदेश की उस दूरदर्शिता को दर्शाता है जो मातृत्व और शिशु स्वास्थ्य को प्राथमिकता देती है। आर्थिक सशक्तीकरण के आयाम में लखपति दीदी योजना के अंतर्गत 18.55 लाख से अधिक महिलाओं का लखपति बनना, 40 हजार सक्रिय बीसी सखियों द्वारा 44,453 करोड़ रुपये से अधिक के वित्तीय लेनदेन का रिकॉर्ड बनाना, तथा 15,409 विद्युत सखियों द्वारा 3,207 करोड़ रुपये का बिल संकलन करना, उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था का नया चेहरा है।
     
    किसी भी समाज या राष्ट्र का विकास तब तक अधूरा रहता है जब तक उसकी आधी आबादी बराबरी और सम्मान के साथ आगे नहीं बढ़ती। योगी सरकार ने नारी गांव की अर्थव्यवस्था, विद्यालय की चेतना, अस्पताल की सेवा और सुरक्षा तंत्र की रीढ़ बनाया है। दिशा और नीयत स्पष्ट है। प्रदेश सरकार के ये निर्णय स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि नारी कल्याण अब कोई कोरा नारा नहीं, बल्कि नीति का केंद्रीय बिंदु है। यहां नीति और नीयत का फासला सिमटता दिख रहा है।

    –    अमिता मिश्रा, वरिष्ठ पत्रकार

  • योगी सरकार का जल प्रबंधन मॉडल बदलेगा बुंदेलखंड की कृषि व्यवस्था, खेतों तक पहुंचेगी इजराइली तकनीक

    योगी सरकार का जल प्रबंधन मॉडल बदलेगा बुंदेलखंड की कृषि व्यवस्था, खेतों तक पहुंचेगी इजराइली तकनीक

    लखनऊ

     बुंदेलखंड में जल संकट की चुनौती से निपटने के लिए योगी सरकार का इंडिया-इजराइल बुंदेलखंड वाटर प्रोजेक्ट अब केवल जलाशय और सिंचाई ढांचा तैयार करने तक सीमित नहीं है। झांसी के गंगावली में चल रहे मिनी पायलट प्रोजेक्ट के जरिए अब यह परखा जा रहा है कि उपलब्ध पानी का वैज्ञानिक प्रबंधन कर कम पानी में अधिक और बेहतर कृषि उत्पादन कैसे हासिल किया जा सकता है। परियोजना के अगले चरण में ड्रिप, स्प्रिंकलर, ऑटोमेटेड इरिगेशन, सोलर पंपिंग, वाटर बजटिंग और संरक्षित खेती जैसी तकनीकों को स्थानीय परिस्थितियों में परखा जाएगा।

    नमामि गंगे और ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के विशेष सचिव एवं निदेशक, भूगर्भ जल विभाग डॉ. राजेश कुमार प्रजापति ने कहा कि सबसे खास बात यह है कि परियोजना में ‘जितना पानी उपलब्ध, उसी के अनुरूप खेती’ की अवधारणा को बढ़ावा देने की तैयारी है। पांड वाटर बजटिंग के जरिए तालाब में उपलब्ध उपयोगी पानी का आकलन किया जाएगा और उसी आधार पर फसल क्षेत्र व गर्मी की फसलों के लिए पानी की सीमा तय करने का प्रस्ताव है। इससे जरूरत से ज्यादा पानी निकालने के बजाय उपलब्ध जल का अधिकतम उत्पादक उपयोग किया जा सकेगा।

    पानी के हिसाब से तय होगी खेती की योजना

    बुंदेलखंड जैसे जल-संवेदनशील क्षेत्र में वाटर बजटिंग को परियोजना की महत्वपूर्ण कड़ी बनाया जा रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रमों में किसानों को तालाब के पानी का हिसाब-किताब और संतुलन तैयार करने की जानकारी दी जाएगी। उपलब्ध उपयोगी पानी के आधार पर फसल क्षेत्र निर्धारित करने और गर्मी की फसलों के लिए वाटर सीलिंग तय करने की व्यवस्था प्रस्तावित है। इसका सीधा फायदा यह होगा कि खेती की योजना उपलब्ध जल संसाधनों को ध्यान में रखकर बनाई जाएगी। अनियंत्रित सिंचाई और जरूरत से अधिक पानी निकालने के बजाय जल-बजट आधारित सिंचाई को बढ़ावा मिलेगा। इससे सीमित जल का बेहतर उपयोग करते हुए कृषि उत्पादकता बढ़ाने की संभावना बनेगी।

    भूजल की स्थिति पर भी रखी जाएगी वैज्ञानिक नजर

    डॉ. राजेश कुमार प्रजापति ने कहा कि परियोजना के शुरुआती चरण में भूजल स्तर में सुधार को लेकर अभी कोई मात्रात्मक निष्कर्ष स्पष्ट रूप से सामने नहीं आया है। हालांकि, भविष्य में वास्तविक प्रभाव का वैज्ञानिक मूल्यांकन करने के लिए बोरवेल और ऑब्जर्वेशन वेल की व्यवस्था की गई है। इनके माध्यम से जल स्रोत और जल उपयोग की निगरानी की जाएगी।

    परियोजना में प्री-प्रोजेक्ट और पोस्ट-प्रोजेक्ट भूजल आंकड़ों की तुलना कर यह आकलन करने की तैयारी है कि जल दक्षता बढ़ाने वाली व्यवस्थाओं से भूजल पर दबाव कितना कम होता है। यानी परियोजना का मूल्यांकन केवल दावों के आधार पर नहीं, बल्कि आंकड़ों के आधार पर करने की व्यवस्था तैयार की जा रही है।

    इजराइली तकनीक का बुंदेलखंड की जमीन पर परीक्षण
    इंडिया-इजराइल सहयोग के तहत माइक्रो इरिगेशन, ड्रिप, स्प्रिंकलर, ऑटोमेटेड इरिगेशन, एससीएडीए, सोलर पंपिंग, रिजर्वायर आधारित जल प्रबंधन, वाटर बजटिंग और संरक्षित खेती जैसी आधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन किया जा रहा है। परियोजना का उद्देश्य केवल विदेशी तकनीक को स्थापित करना नहीं है, बल्कि यह देखना है कि बुंदेलखंड की स्थानीय परिस्थितियों में कौन सी तकनीक सबसे ज्यादा प्रभावी साबित होती है। इसके लिए पानी की मात्रा, सिंचाई दक्षता, फसल की पैदावार, खेती की लागत और जल उत्पादकता जैसे मानकों को मापने की व्यवस्था प्रस्तावित है।

    जलाशय से खेत तक पहुंचेगी आधुनिक सिंचाई व्यवस्था

    परियोजना के अगले चरण में जलाशय से खेत तक पाइपलाइन बिछाने, ड्रिपलाइन और स्प्रिंकलर लगाने, ग्रीनहाउस/टनल व सिंचाई स्वचालन प्रणाली को क्रियाशील करने की योजना है। इसके साथ किसानों को खाद एवं उर्वरक के उचित इस्तेमाल, जल बजट तैयार करने, फसल की योजना बनाने और कृषि यंत्रों के संचालन का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इससे किसानों को केवल सिंचाई का नया साधन नहीं मिलेगा, बल्कि पानी, फसल और कृषि लागत को बेहतर तरीके से प्रबंधित करने की तकनीकी जानकारी भी मिलेगी।

    प्रदर्शन खेत से किसानों के अपने खेत तक पहुंचेगा मॉडल

    परियोजना की एक महत्वपूर्ण कड़ी सफल तकनीकों को किसानों के अपने खेतों तक पहुंचाना है। गंगावली के डेमोस्ट्रेशन फार्म यानी प्रदर्शन खेत में जिन तकनीकों और व्यवस्थाओं के बेहतर परिणाम सामने आएंगे, उन्हें किसानों के खेतों में अपनाने और दोहराने का अवसर दिया जाएगा। इससे मिनी पायलट प्रोजेक्ट केवल प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सफल मॉडल को व्यापक स्तर पर किसानों तक ले जाने का आधार तैयार होगा।

    हर फसल और हर बूंद का रखा जाएगा रिकॉर्ड

    परियोजना में निगरानी को केवल निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं रखा गया है। प्रदर्शन खेतों पर फसल उत्पादन, पानी के इस्तेमाल, पानी के समान वितरण, कृषि सामग्री की मात्रा, लागत, सकल लाभ और किसानों द्वारा नई तकनीकों को अपनाने जैसे महत्वपूर्ण मानकों का नियमित रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था प्रस्तावित है।

    खेत से जुड़े अभिलेख डिजिटल रूप में दर्ज किए जाएंगे। मौसम के अनुसार किसानों के परिणामों का सूचना-पटल तैयार करने की भी व्यवस्था प्रस्तावित है। इससे परियोजना के प्रभाव का चरणबद्ध और वैज्ञानिक मूल्यांकन किया जा सकेगा।

    कृषि और भूजल विभागों की भी रहेगी तकनीकी भागीदारी

    भूगर्भ जल विभाग के अधिशासी अभियंता व वैयक्तिक सहायक निदेशक अनुपम ने कहा कि परियोजना के परिणामों के सत्यापन के लिए कृषि, उद्यान और भूजल विभागों को तकनीकी सहयोग से जोड़ने का प्रावधान किया गया है। इससे अलग-अलग विभागों की विशेषज्ञता का इस्तेमाल कर परियोजना के परिणामों को जांचने और आगे की रणनीति तैयार करने में मदद मिलेगी।

  • बाढ़ प्रभावित यूपी में राहत की रफ्तार तेज, 8.58 लाख लंच पैकेट और 1.38 लाख राहत किट बांटे

    बाढ़ प्रभावित यूपी में राहत की रफ्तार तेज, 8.58 लाख लंच पैकेट और 1.38 लाख राहत किट बांटे

    लखनऊ
    उत्तर प्रदेश में बाढ़ की चुनौती के बीच योगी सरकार ने राहत एवं बचाव अभियान को और तेज कर दिया है। प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री, भोजन, स्वास्थ्य सुविधाएं और अन्य आवश्यक सहायता पहुंचाई जा रही है। उत्तर प्रदेश राहत आयुक्त कार्यालय के मुताबिक प्रशासन की सक्रियता और लगातार निगरानी के बीच अब तक 21,333 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। वहीं अब तक पशुहानि और जनहानि शून्य दर्ज की गई है।

    वर्तमान में 26 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। राहत एवं बचाव अभियान के तहत बुधवार को ही 7,903 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। अब तक कुल 21,333 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाकर बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत दी गई है। जलभराव और दुर्गम क्षेत्रों में फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए 2,304 नाव एवं मोटरबोट का इस्तेमाल किया जा चुका है।

    8.58 लाख से अधिक लंच पैकेट वितरित
    बाढ़ प्रभावित परिवारों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए व्यापक अभियान जारी है। अब तक 8.58 लाख से अधिक लंच पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। बुधवार को भी 83,545 लंच पैकेट प्रभावित लोगों तक पहुंचाए गए। इसके साथ ही अब तक 1.38 लाख से ज्यादा बाढ़ राहत किट वितरित किए गए हैं।

    राहत शरणालयों में 7,581 लोग ले रहे आश्रय
    प्रभावित लोगों को सुरक्षित ठिकाना उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश में अब तक 1,343 बाढ़ शरणालय स्थापित किए गए हैं। इनमें 7,581 लोग रह रहे हैं।

    बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बीमारियों की रोकथाम और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 1,139 मेडिकल टीमें गठित की गई हैं। स्वच्छ पेयजल और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए अब तक 7.09 लाख से अधिक क्लोरीन टैबलेट व 2.88 लाख से ज्यादा ओआरएस पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। इससे प्रभावित परिवारों को संक्रमण और जलजनित बीमारियों से बचाने में मदद मिल रही है।

    प्रभावित जिले
    अयोध्या, आजमगढ़, बहराइच, बदायूं, बलिया, बाराबंकी, बस्ती, फर्रुखाबाद, गाजीपुर, गोंडा, गोरखपुर, हरदोई, कासगंज, कौशांबी, कानपुर नगर, लखीमपुर खीरी, मिर्जापुर, मुरादाबाद, प्रयागराज, रायबरेली, संत कबीर नगर, रामपुर, सीतापुर, शाहजहांपुर, उन्नाव और वाराणसी।

  • सीतापुर में मिड-डे मील का राशन न पहुंचाने पर परिवहन ठेकेदार पर एफआईआर के निर्देश

    सीतापुर में मिड-डे मील का राशन न पहुंचाने पर परिवहन ठेकेदार पर एफआईआर के निर्देश

    लखनऊ

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने सरकारी खाद्यान्न वितरण व्यवस्था में लापरवाही के खिलाफ एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। सीतापुर में सिंगल स्टेज परिवहन व्यवस्था के तहत मिड-डे मील का राशन संबंधित उचित दर विक्रेताओं (कोटेदारों) तक नहीं पहुंचाए जाने के मामले में खाद्य एवं रसद मंत्री मनोज कुमार पाण्डेय ने कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने जिलाधिकारी सीतापुर को संबंधित परिवहन ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने और संबंधित फर्म को ब्लैक लिस्ट करने के निर्देश दिए हैं।

    लापरवाही करने वाले अधिकारियों की भी जिम्मेदारी होगी तय

    सरकार ने कार्रवाई का दायरा केवल परिवहन ठेकेदार तक सीमित नहीं रखा है। पूरे प्रकरण में पर्यवेक्षण और अनुश्रवण के स्तर पर लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की भी जिम्मेदारी निर्धारित की जाएगी। मंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जांच में जिसकी भी लापरवाही सामने आए, उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इससे साफ है कि योगी सरकार सरकारी योजनाओं में किसी भी स्तर की लापरवाही को लेकर जवाबदेही तय करने में पीछे नहीं हट रही है।

    प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने के स्पष्ट निर्देश

    सिंगल स्टेज परिवहन व्यवस्था की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने के लिए विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि खाद्यान्न वितरण में किसी भी स्तर पर लापरवाही की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए नियमित अनुश्रवण और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जाए। योगी सरकार की प्राथमिकता खाद्यान्न वितरण व्यवस्था को पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनाना है, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ निर्धारित समय पर पात्र लाभार्थियों तक निर्बाध रूप से पहुंच सके।

    जनता और बच्चों के हक के राशन से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा

    मंत्री मनोज कुमार पाण्डेय ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस नीति के अनुरूप भ्रष्टाचार, लापरवाही अथवा शासकीय खाद्यान्न वितरण में किसी भी प्रकार की अनियमितता को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जनता और बच्चों के हक के राशन में गड़बड़ी अत्यंत गंभीर विषय है। खाद्यान्न को निर्धारित स्थान तक समय से पहुंचाना संबंधित एजेंसी और अधिकारियों की जिम्मेदारी है। इसमें लापरवाही करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। जिम्मेदारी तय होगी और दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

  • अल्पसंख्यक समाज के विकास को लेकर मौलाना खालिद राशिद फरंगी महली से मिले आयोग अध्यक्ष

    अल्पसंख्यक समाज के विकास को लेकर मौलाना खालिद राशिद फरंगी महली से मिले आयोग अध्यक्ष

    उत्तर प्रदेश

    उत्तर प्रदेश राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष (चेयरमैन) का पदभार ग्रहण करने के उपरांत आज ऐशबाग स्थित ऐतिहासिक ईदगाह पहुंचकर प्रसिद्ध मुस्लिम धर्मगुरु एवं ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना ख़ालिद राशिद फरंगी महली साहब से शिष्टाचार भेंट की। 

    मुलाकात के दौरान मौलाना साहब का बहुमूल्य मार्गदर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त हुआ। इस अवसर पर अल्पसंख्यक समाज के सर्वांगीण विकास, बेहतर शिक्षा, उनके अधिकारों के संरक्षण, कल्याणकारी योजनाओं और समाज से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर अत्यंत सकारात्मक एवं सार्थक चर्चा हुई।

    हमारी सरकार 'सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास' के संकल्प के साथ अल्पसंख्यक समाज के उत्थान और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।

     

  • रायबरेली की जनता और महिलाओं के साथ अन्यायपूर्ण राजनीति कर रहे राहुल गांधी : मंत्री

    रायबरेली की जनता और महिलाओं के साथ अन्यायपूर्ण राजनीति कर रहे राहुल गांधी : मंत्री

    ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसी पवित्र योजना पर राहुल गांधी का सवाल उठाना मातृशक्ति का अपमान : दिनेश प्रताप सिंह 

    रायबरेली में कांग्रेस नेता के बयान पर योगी सरकार के मंत्री ने किया करारा पलटवार

    रायबरेली की जनता और महिलाओं के साथ अन्यायपूर्ण राजनीति कर रहे राहुल गांधी : मंत्री

    योगी सरकार की प्राथमिकता जनता की सुरक्षा, सम्मान और विकास है, विपक्ष को निभानी चाहिए रचनात्मक भूमिका

    लखनऊ
    प्रदेश के उद्यान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार एवं कृषि निर्यात राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह ने गुरुवार को प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेता एवं रायबरेली के सांसद राहुल गांधी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि रायबरेली की दिशा बैठक में राहुल गांधी का जोर जनकल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा कर उन्हें गति देने के बजाय ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसी योजनाओं में खामियां तलाश कर राजनीति करने पर अधिक रहा। मंत्री ने कहा कि बैठक में राहुल गांधी के रवैये से निराशा हुई।

    ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ पर सवाल उठाने का आरोप

    राज्यमंत्री ने कहा कि दिशा बैठक में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ कार्यक्रम की चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने संबंधित अधिकारी से पूछा कि इस योजना में क्या होता है। यदि दिशा समिति के अध्यक्ष को ही योजना की जानकारी नहीं होगी तो उसका अनुश्रवण और समन्वय कैसे होगा। इसके बाद राहुल गांधी ने योजना के प्रचार-प्रसार पर होने वाले खर्च को जानने पर अधिक जोर दिया। इससे ऐसा लगा कि योजना का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के बजाय उसमें खामी तलाशना प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि बेटियों और मातृशक्ति के सम्मान से जुड़ा अभियान है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार महिलाओं को स्वावलंबी और आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है।

     ‘डरो मत’ कहने वाले राहुल गांधी जनता और मीडिया से क्यों बच रहे?
     
    दिनेश प्रताप सिंह ने राहुल गांधी के ‘डरो मत’ संदेश पर कटाक्ष करते हुए आरोप लगाया कि रायबरेली में उन्होंने सांसद निधि से कराए गए कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास अपने निजी आवास के भीतर से किया, जबकि बाहर के गेट पर ताला लगा रहा। मीडिया प्रतिनिधि सुबह से इंतजार करते रहे, लेकिन राहुल गांधी कैमरे के सामने आकर रायबरेली की जनता को शुभकामनाएं तक नहीं दे सके। 

    राहुल को तीन लोग पीछे बैठकर पर्चियों के माध्यम से निर्देश देते रहे
    राज्यमंत्री ने कटाक्ष किया कि रायबरेली की दिशा बैठक में भी राहुल गांधी सांसद और समिति अध्यक्ष से ज्यादा नेता प्रतिपक्ष की भूमिका में नजर आए। उनके साथ दिल्ली से आए तीन लोग पीछे बैठकर पर्चियों के माध्यम से निर्देश देते रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकसभा में भी राहुल गांधी दूसरे दलों के सहयोग पर निर्भर दिखाई देते हैं।

    योगी सरकार में सुरक्षा और सम्मान सर्वोपरि
    राज्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार में जनता की सुरक्षा और सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रदेश सरकार कानून-व्यवस्था को लेकर स्पष्ट नीति के साथ काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था की सराहना देश के साथ विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों द्वारा भी की गई है। 

    अखिलेश के बुलंदशहर दौरे पर बोले- सरकार ने किसी को नहीं रोका
    अखिलेश यादव के बुलंदशहर दौरे में हेलीपैड की अनुमति से जुड़े सवाल पर दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि प्रशासन द्वारा अनुमति न मिलना किसी राजनीतिक भय का विषय नहीं है। योगी सरकार ने अखिलेश यादव को कभी कहीं जाने से नहीं रोका और न इसकी आवश्यकता है। उन्होंने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की राष्ट्रीय लोकदल नेतृत्व से जुड़ी टिप्पणी को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।

  • गोशालाओं को अब संरक्षण के साथ बनाया जाएगा आत्मनिर्भरता का मॉडल

    गोशालाओं को अब संरक्षण के साथ बनाया जाएगा आत्मनिर्भरता का मॉडल

    लखनऊ

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप उत्तर प्रदेश में गोवंश संरक्षण को अधिक प्रभावी, व्यवस्थित और आत्मनिर्भर बनाने की तैयारी तेज हो गई है। इसी क्रम में गोशालाओं को प्राकृतिक कृषि, जैविक उर्वरक, बायोगैस, पंचगव्य आधारित उत्पादों और ग्रामीण रोजगार से जोड़ने की दिशा में उत्तर प्रदेश गो-सेवा आयोग और उत्तर प्रदेश काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च (UPCAR) के संयुक्त सहयोग से कृषि उत्पादन आयुक्त दीपक कुमार की अध्यक्षता में 25 सूत्रीय एजेंडे पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

    पिकअप भवन में आयोजित बैठक में गो-सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने गोवंश संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना में वर्तमान में एक से चार गोवंश सुपुर्द किए जाने की सीमा बढ़ाकर अधिकतम 10 गोवंश किए जाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि इससे अधिक संख्या में इच्छुक कृषक और पशुपालक गोवंश संरक्षण से जुड़ सकेंगे तथा योजना की पहुंच और प्रभाव बढ़ेगा।

    आयोग के उपाध्यक्ष महेश शुक्ल ने विभिन्न मंडलों और जनपदों में गोवंशों की देखभाल और गोशाला प्रबंधन में अधिकारियों एवं कर्मचारियों को गंभीरता व जिम्मेदारी के साथ काम करने की अपेक्षा की।

    आयोग के सदस्य रमाकांत उपाध्याय ने सड़क दुर्घटनाओं अथवा अन्य कारणों से घायल गोवंशों को तत्काल चिकित्सा उपलब्ध कराने के लिए 24×7 समर्पित एंबुलेंस सेवा शुरू करने का सुझाव दिया। इसके जरिए घायल गोवंशों को तत्काल निकटतम पशु चिकित्सालय या उपयुक्त चिकित्सा केंद्र तक पहुंचाया जा सकेगा। सदस्य दीपक गोयल ने गोशालाओं में मृत होने वाले गोवंशों के सम्मानजनक और व्यवस्थित निस्तारण के लिए स्थानीय परिस्थितियों व निर्धारित मानकों के अनुरूप समर्पित स्थल विकसित करने का सुझाव दिया। सदस्य राजेश सिंह सेंगर ने गोशालाओं  के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने की अपेक्षा की।

    कृषि उत्पादन आयुक्त दीपक कुमार ने आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों के सुझावों पर संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन दिया। इस दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता गोशालाओं को अधिक व्यवस्थित और आत्मनिर्भर बनाना है। 

    किसानों के यहां वीबीजी-रामजी योजना के तहत पक्के कैटल शेड, यूरिन टैंक और नाद के निर्माण, बड़े गो संरक्षण केंद्रों और अस्थायी गो आश्रय स्थलों में बायोगैस संयंत्रों की स्थापना तथा गोबर-गोमूत्र से जीवामृत, घन जीवामृत, बीजामृत और अन्य कृषि उपयोगी उत्पाद तैयार कर उनके विपणन की व्यवस्था पर विचार हुआ। कृषि उत्पादन आयुक्त दीपक कुमार ने संबंधित विभागों को आयोग द्वारा प्रस्तुत विषयों पर आवश्यक समन्वय के साथ आगे की कार्रवाई का आश्वासन दिया। इस दौरान उत्तर प्रदेश काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च के डीजी डॉ. संजय सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

  • यूपी की ‘दीदियों’ को मिलेगा खास क्रेडिट कार्ड, छोटे कारोबार के लिए ₹1 लाख तक की मदद

    यूपी की ‘दीदियों’ को मिलेगा खास क्रेडिट कार्ड, छोटे कारोबार के लिए ₹1 लाख तक की मदद

     लखनऊ
     विधान सभा चुनाव से पहले महिलाओं को लुभाने के लिए सरकार बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रही है। उत्तर प्रदेश महिला उद्यमी क्रेडिट योजना में महिला स्वयं सहायता समूहों से जुड़ीं एक करोड़ दीदियों को एक लाख रुपये तक का क्रेडिट (ऋण) लाभ दिया जाएगा। हालांकि योजना के पहले चरण में 20,000 रुपये की पहली किश्त मिलेगी।

    इसके समय से भुगतान पर दो चरणों में 80 हजार रुपये का और क्रेडिट दिया जाएगा। सरकार, योजना को विधान सभा चुनाव से पहले जोर-शोर से लांच करने की तैयारी कर रही है। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने इसका प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

    पिछले माह राजनीतिक गलियारों में योगी सरकार द्वारा महिलाओं को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की चर्चाएं चली थीं। अब तक सरकार की ओर से आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया है। हालांकि भाजपा ने मध्य प्रदेश, बिहार और महाराष्ट्र में विधान सभा चुनावों से पहले ऐसा ही दांव चला था।

    अब यूपी में भी ऐसे ही दांव की तैयारी है। उत्तर प्रदेश आजीविका मिशन (यूपीएसआरएलएम) के तहत संचालित महिला स्वयं सहायता समूहों को उद्यमी क्रेडिट योजना को इसी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

    महिलाओं को दिया जाएगा विशेष क्रेडिट कार्ड
    प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में इस योजना की घोषणा की थी। बुधवार को योजना भवन में हुई ग्राम्य विकास विभाग की उच्चस्तरीय बैठक में उपमुख्यमंत्री ने इस उत्तर प्रदेश महिला उद्यमी क्रेडिट योजना की तैयारी की समीक्षा की। योजना के तहत महिला को ब्याजमुक्त ऋण उपलब्ध कराया जाना है। इसके लिए महिलाओं को विशेष क्रेडिट कार्ड बनाकर दिया जाएगा।

    इस धनराशि का उपयोग महिलाएं अपने छोटे व्यवसाय को शुरू करने या पहले से संचालित उद्यम को विस्तार देने में कर सकेंगी। पहले चरण में दिए जाने वाले 20 हजार रुपये का समय से भुगतान करने पर महिलाओं को दूसरे चरण में 30 हजार रुपये ऋण के रूप में दिए जाएंगे। यदि महिलाएं दूसरी किस्त भी चुका देती हैं तो उनको तीसरे चरण में 50 हजार रुपये का क्रेडिट लाभ दिया जाएगा। इसके लिए बैंकों ने एक प्रारूप तैयार किया है, जिसके विभाग प्रस्ताव तैयार कर रहा है।

    उपमुख्यमंत्री ने कहा कि समूह की दीदियों को पहचान व सुविधाओं से जोड़ने के लिए आइकार्ड उपलब्ध कराया जाए। ये कार्ड क्यूआर कोड जैसी डिजिटल सुविधाओं से युक्त हों

    दीदियों को डिजिटल भुगतान, डिजिटल मार्केटिंग, आनलाइन बिक्री, वित्तीय सेवाओं और आधुनिक उद्यम प्रबंधन से जोड़ा जाए। उन्होंने ई-रिक्शा योजना के तहत दो लाख रुपये तक के वाहनों की ही खरीद पर विचार करने, 100 महिला शक्ति केंद्र स्थापित करने के निर्देश दिए।

    बैठक में एचसीएल फाउंडेशन के साथ ‘समुदाय साझेदारी’ को वर्ष 2031 तक बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। इस दाैरान ग्राम्य विकास राज्यमंत्री विजय लक्ष्मी गौतम, प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास सौरभ बाबू, आयुक्त प्रमोद कुमार उपाध्याय, मिशन निदेशक अरुण कुमार आदि उपस्थित रहे।

     

  • ‘सैफई से आती थी नौकरी की सूची’, भूपेंद्र चौधरी ने सपा पर बोला हमला, बोले- परिवार और जाति से आगे नहीं बढ़ रहा एजेंडा

    ‘सैफई से आती थी नौकरी की सूची’, भूपेंद्र चौधरी ने सपा पर बोला हमला, बोले- परिवार और जाति से आगे नहीं बढ़ रहा एजेंडा

    लखनऊ

    समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद भाजपा नेताओं ने सपा और उसके नेतृत्व पर तीखा हमला बोला। उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने समाजवादी पार्टी को युवा विरोधी पार्टी बताते हुए आरोप लगाया कि सपा सरकार के दौरान नौकरियों में भ्रष्टाचार, पेपर लीक और परीक्षाओं में अनियमितताएं आम थीं। उन्होंने कहा कि उस दौर में निकलने वाली सरकारी नौकरियों की सूची सैफई से आती थी और एक परिवार व एक बिरादरी तक सीमित रहती थी।

    ‘सैफई से आती थी नौकरी की सूची’

    भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि समाजवादी पार्टी हमेशा युवाओं के विरोध में रही है। उनके मुताबिक सपा सरकार में जमकर पेपर लीक होते थे और परीक्षाएं ठेके पर कराई जाती थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि जो भी नौकरी निकलती थी, वह केवल एक परिवार और एक बिरादरी के लिए होती थी और उसकी सूची सैफई से आती थी।

    ‘हारते हैं तो ईवीएम को दोष देते हैं’

    भूपेंद्र चौधरी ने ईवीएम के मुद्दे पर भी सपा को घेरा। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी जब चुनाव जीतती है तो ईवीएम पर सवाल नहीं उठाती, लेकिन चुनाव हारने के बाद उसी ईवीएम को दोष देने लगती है और संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल खड़े करती है।

    ‘परिवार और जाति से आगे नहीं बढ़ता सपा का एजेंडा’

    अखिलेश यादव पर हमला बोलते हुए भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि समाजवादी पार्टी ने हमेशा जाति की राजनीति की है। सर्व समाज को साथ लेकर चलने की बात उसके एजेंडे में कभी नहीं रही। उन्होंने कहा कि जब सपा विपक्ष में होती है तो सर्व समाज की बात करती है, लेकिन सत्ता में आते ही उसका एजेंडा परिवार और जाति तक सिमट जाता है। भूपेंद्र चौधरी ने AI वीडियो को लेकर भी सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि इस तरह के वीडियो जारी करना प्रदेश की 25 करोड़ जनता का अपमान है। उन्होंने कहा कि जनता ने योगी आदित्यनाथ को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया है और AI के जरिए उसकी तस्वीर बदलकर पेश करना जनता के जनादेश का अपमान है।

    ‘अखिलेश को सोते हुए सरकार बनती नजर आ रही’

    भाजपा के मुख्य प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि विधानसभा चुनाव 2027 में समाजवादी पार्टी और उसके नेता को सोते हुए सरकार बनती नजर आ रही है। अखिलेश यादव के ‘जेन जी’ वाले बयान पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि उनके ‘जेन जी’ का मतलब जनता ने देखा है।

    दिनेश प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि 2017 से पहले अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश के हर जिले में एक-एक माफिया पैदा करने का काम किया और उन्हीं के संरक्षण में सरकार चलती थी। उन्होंने कहा कि अखिलेश सरकार के दौरान जितनी वैकेंसी निकलीं, उनमें से एक भी नियुक्ति वह नहीं कर पाए। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौर में युवाओं के हाथ में कट्टा देने और वसूली करने का काम किया गया।

    उन्होंने कहा कि ‘जेन जी’ पहले भी भाजपा के साथ था, आज भी भाजपा के साथ है और आगे भी भाजपा के साथ ही रहेगा।

    PDA मतलब- 'पराया धन अपना’

    दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि समाजवादी पार्टी के सत्ता से बाहर होते ही उनकी ‘पर्ची और खर्ची’ बंद हो गई। इसी वजह से आज सपा PDA की राजनीति कर रही है। उन्होंने अखिलेश यादव के पुराने बयान का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने चौरसिया, शाक्य और वर्मा समाज के लोगों को बोलने से रोकने की बात कही थी। दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि अखिलेश यादव ने पहले भी इन समाजों का अपमान किया और आज भी कर रहे हैं। PDA को लेकर उन्होंने तंज कसा कि अखिलेश यादव के लिए PDA का मतलब ‘पराया धन अपना’ है।

    दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है, समाजवादी पार्टी के लोगों का मानसिक संतुलन बिगड़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि सपा की पूरी राजनीति X, प्रेस और अब पोस्टर तक सीमित होकर रह गई है।

    ‘अखिलेश और सपा फ्रस्टेशन में’

    उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष मोहसिन रजा ने भी सपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव और उनकी पार्टी के लोग फ्रस्टेशन में हैं, क्योंकि पूरा प्रदेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के काम से सहमत है।

    मोहसिन रजा ने कहा कि मोदी और योगी सरकारों ने कानून-व्यवस्था पर काम कर लोगों को सुरक्षा देने का काम किया है और यही वजह है कि विपक्ष परेशान है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी का यह अंतिम चुनाव है और 2027 में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा प्रचंड बहुमत से सरकार बनाएगी।

    ‘अखिलेश खुद कार्यक्रम जारी करते हैं और खुद कैंसिल करते हैं’

    कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार ने अखिलेश यादव के रद्द हुए दौरों को लेकर सपा के आरोपों पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि पहले अखिलेश यादव का सहारनपुर दौरा रद्द हुआ और फिर बुलंदशहर का दौरा भी रद्द हो गया। इसके बाद सरकार पर परमिशन नहीं देने का आरोप लगाया गया।

    अनिल कुमार ने कहा कि ये बातें निराधार हैं। उनके मुताबिक अखिलेश यादव खुद कार्यक्रम जारी करते हैं और खुद ही उसे कैंसल कर देते हैं। अनिल कुमार ने कहा कि पिछले 25 वर्षों में देश में बड़ा बदलाव हुआ है। शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में अभूतपूर्व काम हुआ है। उन्होंने कहा कि विपक्ष हर काम को नकारने की आदत बना चुका है।