Category: उत्तर प्रदेश

  • अवैध शराब के खिलाफ योगी सरकार का बड़ा एक्शन, 3152 छापों में 8418 लीटर शराब बरामद

    अवैध शराब के खिलाफ योगी सरकार का बड़ा एक्शन, 3152 छापों में 8418 लीटर शराब बरामद

    लखनऊ

     अवैध शराब के निर्माण, बिक्री और तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए योगी सरकार के निर्देश पर प्रदेश में विशेष प्रवर्तन अभियान लगातार चलाया जा रहा है। अभियान के तहत आबकारी विभाग की टीमों ने प्रदेशभर में व्यापक कार्रवाई करते हुए 3152 स्थानों पर छापे मारे। इस दौरान 373 अभियोग पंजीकृत किए गए, जबकि कार्रवाई में 77 लोगों को गिरफ्तार किया गया। टीमों ने कुल 8418 लीटर अवैध शराब बरामद की।

    विभागीय टीमों की संदिग्ध गतिविधियों पर नजर

    आबकारी विभाग की यह कार्रवाई अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ सरकार की सख्त नीति का हिस्सा है। अभियान का उद्देश्य अवैध शराब के निर्माण और बिक्री पर रोक लगाने के साथ ही राजस्व को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण करना है। विभागीय टीमें संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखते हुए लगातार प्रवर्तन कार्रवाई कर रही हैं।

    अवैध शराब के कारोबार पर आबकारी विभाग सख्त 

    आबकारी आयुक्त डॉ आदर्श सिंह ने बताया कि विशेष प्रवर्तन अभियान के तहत अवैध शराब के कारोबार से जुड़े लोगों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जा रही है। विभाग का फोकस केवल शराब की बरामदगी तक सीमित नहीं है, बल्कि अवैध निर्माण, भंडारण, बिक्री और तस्करी की गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी रखते हुए इनके नेटवर्क को रोकना है। 10 सितंबर की कार्रवाई में 3152 छापे और 373 अभियोग दर्ज हुए। विभाग की टीमें आगे भी अभियान को जारी रखते हुए अवैध शराब से जुड़े मामलों में सख्त कार्रवाई पर जोर दे रही हैं।

  • ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र बनवाने की राह हुई आसान, योगी सरकार ने शुरू किया ऑनलाइन पोर्टल

    ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र बनवाने की राह हुई आसान, योगी सरकार ने शुरू किया ऑनलाइन पोर्टल

    लखनऊ

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जन केंद्रित, पारदर्शी और तकनीक आधारित सुशासन के विजन को आगे बढ़ाते हुए उत्तर प्रदेश में राजस्व सेवाओं को और सरल एवं नागरिक हितैषी बनाने की दिशा में बड़ी पहल की गई है। राजस्व परिषद ने ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र की प्रक्रिया को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाने के लिए ईडब्ल्यूएस पोर्टल व भूमि अभिलेखों को अधिक स्पष्ट और सटीक बनाने के लिए सरलीकृत खतौनी का शुभारंभ किया है। राजस्व परिषद की अध्यक्ष अर्चना अग्रवाल ने शुक्रवार को राजस्व परिषद के आंबेडकर सभागार में दोनों सुविधाओं की शुरुआत की। इनके साथ उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 116 के तहत भूमि विभाजन की प्रक्रिया को ऑनलाइन करने वाला पोर्टल भी शुरू किया गया।

    ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र के लिए नहीं लगाने पड़ेंगे अनावश्यक चक्कर

    ईडब्ल्यूएस पोर्टल के शुरू होने से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के नागरिकों के लिए प्रमाणपत्र बनवाने की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक आसान और पारदर्शी होगी। अब नागरिक ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवेदन आगे लेखपाल और तहसीलदार स्तर पर ऑनलाइन भेजा और निस्तारित किया जा सकेगा। आवेदन किस स्तर पर पहुंचा है और उसकी क्या स्थिति है, इसकी जानकारी भी डिजिटल माध्यम से दर्ज और देखी जा सकेगी।

    इस व्यवस्था से कागजी कार्यवाही कम होगी और नागरिकों को बार-बार तहसील या संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत कम पड़ेगी। साथ ही आवेदन के निस्तारण में जवाबदेही और समयबद्धता बढ़ेगी। पूरी प्रक्रिया की निगरानी डिजिटल माध्यम से होने के कारण पारदर्शिता भी मजबूत होगी। योगी सरकार की तकनीक आधारित व्यवस्था का यह कदम खास तौर पर उन नागरिकों के लिए राहत देने वाला है, जिन्हें प्रमाण-पत्र बनवाने में अनावश्यक भागदौड़ करनी पड़ती थी।

    सरलीकृत खतौनी से भूमि का रिकॉर्ड समझना होगा आसान

    सरलीकृत खतौनी के जरिए भूमि अभिलेखों को आम नागरिक के लिए अधिक स्पष्ट, सहज और उपयोगी बनाया गया है। अब खतौनी में भूमि का क्षेत्रफल छह दशमलव स्थानों तक प्रदर्शित किया जाएगा। इससे भूमि के क्षेत्रफल की जानकारी पहले से अधिक सटीक रूप में सामने आएगी।

    खतौनी में अभिलेखागार से संबंधित पुराने आदेशों और पुराने बंधक आदेशों की जानकारी को भी व्यवस्थित रूप से उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इससे नागरिकों और राजस्व अधिकारियों को भूमि के स्वामित्व से जुड़े पुराने अभिलेखों और आदेशों की जानकारी आसानी से मिल सकेगी। इससे भूमि संबंधी रिकॉर्ड को समझने में सुविधा होगी और पुराने दस्तावेजों की जानकारी जुटाने में होने वाली कठिनाई भी कम होगी।

    धारा 116 पोर्टल से भूमि विभाजन की प्रक्रिया होगी ऑनलाइन

    उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 116 के तहत सह-खातेदार द्वारा भूमि के विभाजन का वाद किया जा सकता है। अब इस प्रक्रिया को भी तकनीक से जोड़ते हुए नया पोर्टल शुरू किया गया है। नागरिक भूमि विभाजन के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवेदन के बाद नोटिस और उद्घोषणा की प्रक्रिया को भी डिजिटल माध्यम से संचालित और निगरानी में रखा जा सकेगा।

    संबंधित लेखपाल की रिपोर्ट पोर्टल पर उपलब्ध होगी। भूमि की वास्तविक भौगोलिक स्थिति को देखने के लिए मानचित्र की सुविधा भी दी गई है। इससे न्यायालय और मौके पर होने वाली कार्यवाही के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होगा। परिणामस्वरूप भूमि विभाजन के मामलों का निस्तारण अधिक पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से करने में मदद मिलेगी।

    तकनीक के साथ संवेदनशीलता पर जोर

    राजस्व परिषद की अध्यक्ष अर्चना अग्रवाल ने कहा कि राजस्व प्रशासन का सीधा संबंध आम नागरिक और उसके भूमि संबंधी अधिकारों से है। इसलिए तकनीक और नए प्रयोगों का उद्देश्य केवल प्रक्रियाओं को ऑनलाइन करना नहीं, बल्कि नागरिकों की समस्याओं का सरल, पारदर्शी और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना होना चाहिए। उन्होंने युवा अधिकारियों से संवेदनशीलता, निष्पक्षता और जनसेवा की भावना के साथ काम करने व तकनीक का अधिकतम उपयोग करने के लिए।

    पीसीएस प्रशिक्षु अधिकारियों से संवाद

    कार्यक्रम के दौरान पीसीएस प्रशिक्षु अधिकारियों के साथ संवाद भी आयोजित किया गया। उन्हें राजस्व परिषद की कार्यप्रणाली और क्षेत्र स्तर पर राजस्व प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका से परिचित कराया गया। साथ ही रोवर तकनीक के माध्यम से आधुनिक एवं सटीक भूमि मापन की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया गया। प्रशिक्षु अधिकारियों ने राजस्व प्रशासन, तकनीक के उपयोग और क्षेत्र स्तर पर आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों पर अधिकारियों के साथ संवाद किया।

  • सेवा संकल्प अभियान को लेकर योगी सरकार की बड़ी तैयारी, जनसेवा और स्वच्छता को मिलेगा नया विस्तार

    सेवा संकल्प अभियान को लेकर योगी सरकार की बड़ी तैयारी, जनसेवा और स्वच्छता को मिलेगा नया विस्तार

    लखनऊ

    योगी सरकार प्रदेश में स्वच्छता, जनसेवा और जनभागीदारी को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़े स्तर पर सेवा संकल्प अभियान एवं जन सेवा पर्व आयोजित करने जा रही है। अभियान को प्रभावी और जनकेंद्रित बनाने के लिए नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा की अध्यक्षता में संगम भवन, लखनऊ में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अंतरविभागीय बैठक हुई। बैठक में अभियान की तैयारियों और विभागों के बीच बेहतर समन्वय को लेकर व्यापक दिशा-निर्देश दिए गए।

    प्रत्येक विभाग में नोडल अधिकारी नामित कर मोबाइल नंबर सार्वजनिक करने के निर्देश

    नगर विकास मंत्री ने कहा कि यह एक बहुजनपदीय एवं बहुविभागीय कार्यक्रम है, जिसमें सभी विभागों की प्रभावी सहभागिता आवश्यक है। उन्होंने सभी विभागों को निर्देशित किया कि अपने-अपने विभाग में एक नोडल अधिकारी नामित करें तथा उसका मोबाइल नंबर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करें, जिससे कार्यक्रमों के दौरान विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो और जनसमस्याओं का त्वरित समाधान किया जा सके।

    सभी नगर निगमों, नगर पालिका परिषदों एवं नगर पंचायतों को निर्देश दिए गए कि उनके पास उपलब्ध छोटे-बड़े सभागार एवं अन्य संसाधनों को एक माह तक चलने वाले कार्यक्रमों के लिए यथासंभव उपलब्ध कराया जाए। 15 सितंबर से पहले सभी पार्षदों की बैठक आयोजित कर उन्हें अभियान की विस्तृत जानकारी दी जाए, ताकि वार्ड स्तर तक जनभागीदारी सुनिश्चित हो सके।

    डिजिटल बोर्ड, डिजिटल लाइब्रेरी और सेवा सेतु कैंप के माध्यम से योजनाओं का होगा व्यापक प्रचार-प्रसार

    मंत्री एके शर्मा ने निर्देश दिए कि नगर निगम, नगर पालिका परिषद एवं नगर पंचायतों में उपलब्ध डिजिटल बोर्डों पर संस्कृति विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए वीडियो चलाए जाएं, जिनके माध्यम से सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं एवं उपलब्धियों की जानकारी आमजन तक पहुंचाई जाए। जहां नगर निकायों अथवा ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित हैं, वहां भी विशेष प्रचार-प्रसार किया जाए। सभी नगर निकायों में सेवा सेतु के अंतर्गत कैंप लगाकर पात्र नागरिकों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर 17 सितंबर को दीप प्रज्ज्वलन, घाटों एवं प्रमुख भवनों को सजाने के निर्देश

    मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना, पीएम सूर्य घर योजना तथा अन्य सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को 17 सितंबर को दीप प्रज्ज्वलित कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर शुभकामनाएं एवं अपना आशीर्वाद देने के लिए प्रेरित किया जाए। नगरों में स्थित स्कूल, कॉलेज, बड़े अस्पताल एवं प्रमुख सरकारी एवं सार्वजनिक भवनों को प्रकाश व्यवस्था से सजाया जाए। सभी सरकारी कार्यालयों को स्वच्छ एवं सुंदर रखा जाए।

    25 सितंबर से 2 अक्टूबर तक चलेगा अनवरत सफाई अभियान

    बैठक में निर्देश दिए गए कि वाराणसी से वडनगर, गुजरात तक प्रस्तावित यात्रा के मार्ग में आने वाले सभी जिलों में स्वच्छता एवं साफ-सफाई की विशेष व्यवस्था की जाए। यात्रा मार्ग के प्रमुख स्थानों पर विशेष सफाई अभियान चलाकर उन्हें स्वच्छ एवं सुंदर बनाया जाए। 25 सितंबर से 2 अक्टूबर तक अनवरत विशेष स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा। सभी विभागों एवं स्थानीय निकायों द्वारा किए जाने वाले कार्यों की डिजिटल रिकॉर्डिंग कर अपने-अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि स्वच्छता के प्रति जनजागरूकता एवं जनभागीदारी को बढ़ावा मिले।

    मंत्री एके शर्मा ने विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंताओं एवं अधीक्षण अभियंताओं को अन्य विभागों के साथ समन्वय कर विद्युत संबंधी समस्याओं का तत्काल समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही स्ट्रीट लाइटों के संचालन की नियमित निगरानी करने तथा दिन के समय अनावश्यक रूप से स्ट्रीट लाइटें चालू न रहने देने के निर्देश दिए।

  • गड्ढों पर योगी सरकार का बड़ा एक्शन, 50 हजार किमी सड़कों को गड्ढामुक्त करने का लक्ष्य

    गड्ढों पर योगी सरकार का बड़ा एक्शन, 50 हजार किमी सड़कों को गड्ढामुक्त करने का लक्ष्य

     लखनऊ
     उत्तर प्रदेश में खस्ताहाल सड़कों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बेहद गंभीर हैं। अपने सरकारी आवास पर शुक्रवार को मंत्रियों और शीर्ष अधिकारियों ने मौजूदगी में उन्होंने लोक निर्माण विभाग की समीक्षा की और सख्त निर्देश दिया।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सड़क आम आदमी के रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ी है। शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों, मुख्य बाजारों, सरकारी कार्यालयों और ऐसे अन्य स्थानों, जहां आमजन का आवागमन अधिक रहता है, वहां की सड़कों को प्राथमिकता पर लिया जाए।

    उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन मार्गों पर तत्काल काम शुरू कराया जाए और जहां मरम्मत की जरूरत है, वहां बिना देरी किए सड़क को आवागमन योग्य बनाया जाए। उन्होंने कहा कि काम में तेजी के साथ गुणवत्ता का भी पूरा ध्यान रखा जाए।

    सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बारिश और बाढ़ से खराब हुई सड़कों की तत्काल मरम्मत कर उन्हें आवागमन के योग्य बनाने और बरसात के बाद जरूरत के अनुसार उनका नवीनीकरण कराने के निर्देश दिए हैं।

    शुक्रवार को लोक निर्माण विभाग की समीक्षा बैठक में उन्होंने कहा कि बारिश अभी जारी है, इसलिए सड़कों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाए और बारिश से नए क्षतिग्रस्त मार्गों का भी सर्वे कराया जाए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी पर्व-त्योहारों में बड़ी संख्या में लोगों का आवागमन होगा। ऐसे में प्रमुख मार्गों पर आवागमन में किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने पर्वों से पहले आवश्यक मरम्मत और नवीनीकरण के काम पूरे करने के निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि गड्ढामुक्ति का काम केवल पैचवर्क तक सीमित न रहे। जहां सड़क तत्काल खराब स्थिति में है, वहां उसे अभी मोटरेबल बनाया जाए और बरसात समाप्त होने के बाद जरूरत के अनुसार स्थायी नवीनीकरण कराया जाए।

    समीक्षा बैठक में उनको बताया गया कि अतिवृष्टि के साथ ही एक्सप्रेस-वे, राष्ट्रीय मार्ग, रेलवे आदि की निर्माणाधीन परियोजनाओं के कारण भारी वाहनों की आवाजाही से भी कई सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। इन मार्गों का विभागवार सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे के आधार पर क्षतिग्रस्त सड़कों को चिन्हित कर गड्ढामुक्ति के विभागवार लक्ष्य तय किए जाएंगे।

    आगामी पर्वों को देखते हुए प्रदेश में 681 महत्वपूर्ण मार्ग चिन्हित किए गए हैं। इनमें गणेश चतुर्थी, विश्वकर्मा पूजा, नवरात्रि, दीपावली, छठ पूजा और कार्तिक पूर्णिमा जैसे प्रमुख पर्वों के दौरान अधिक आवागमन वाले मार्ग शामिल हैं। इन मार्गों को प्राथमिकता के आधार पर बेहतर स्थिति में रखने की तैयारी है।

    मुख्यमंत्री ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अधिकारियों से भी उनकी कार्ययोजना की जानकारी ली। साथ ही मंडी परिषद, पंचायती राज, सिंचाई, ग्राम्य विकास, नगर विकास, आवास एवं शहरी नियोजन तथा अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग की कार्ययोजनाओं की समीक्षा की गई। उन्होंने सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय के साथ काम करने पर जोर दिया।

    विभाग के प्रस्तुतिकरण में बताया गया कि गड्ढामुक्ति अभियान में नौ विभागों के मार्ग शामिल हैं। इन विभागों के अधीन करीब 4.36 लाख किलोमीटर सड़कें हैं। वर्तमान लक्ष्य के तहत करीब 50 हजार किलोमीटर मार्गों को गड्ढामुक्त किया जाना है, जिसमें अब तक करीब 5,751 किलोमीटर पर काम पूरा किया जा चुका है। क्षतिग्रस्त मार्गों के सर्वे के बाद विभागवार लक्ष्य को अंतिम रूप दिया जाएगा।

    नवीनीकरण और विशेष मरम्मत के कार्यों की भी समीक्षा की गई। विभाग के अनुसार नवीनीकरण के लिए करीब 30 हजार किलोमीटर और विशेष मरम्मत के लिए करीब 5 हजार किलोमीटर का लक्ष्य रखा गया है। अब तक नवीनीकरण में करीब 14 हजार किलोमीटर और विशेष मरम्मत में करीब 700 किलोमीटर की प्रगति बताई गई।

    बैठक में जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी', पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर, राज्य मंत्री लोक निर्माण विभाग ब्रजेश सिंह, राज्य मंत्री औद्योगिक विकास विभाग जसवंत सिंह सैनी, राज्य मंत्री जल शक्ति रामकेश निषाद तथा राज्य मंत्री ग्राम्य विकास विजय लक्ष्मी गौतम उपस्थित रहे।

  • UP में 2027 के लिए BJP का मेगा प्लान! 18,900 हारे बूथों पर फोकस, ऐसे होगी ‘रिकवरी’

    UP में 2027 के लिए BJP का मेगा प्लान! 18,900 हारे बूथों पर फोकस, ऐसे होगी ‘रिकवरी’

    लखनऊ 

    उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की सियासी जंग फतह करने के लिए भाजपा अब पूरी तरह से एक्टिव हो गई है. सीएम योगी आदित्यनाथ अलग-अलग इलाकों में जनसभाएं कर भले ही सियासी माहौल बनाने में जुटे हों, लेकिन भाजपा एक रिकवरी प्लान पर भी काम कर रही है. इसके तहत 2024 में जिन विधानसभा सीटों पर हार मिली है, उनके एक-एक बूथ की रिपोर्ट तैयार की जा रही है। 

    भाजपा सत्ता की हैट्रिक लगाने के लिए 'हाइपर-लोकल' मोड में उतर गई है. मकसद बिल्कुल साफ है, हर बूथ, हर नंबर और हर वोट पर ध्यान देना. पार्टी 2024 के लोकसभा चुनावों में मिली हार को सिर्फ़ एक बड़ी राजनीतिक हार के तौर पर नहीं देख रही है. उसने डेटा की गहराई से जांच की है और उन खास पोलिंग बूथों की पहचान की है, जहां 2022 के विधानसभा चुनावों और 2024 के लोकसभा चुनावों के बीच उसका सपोर्ट बेस कम हुआ। 

    भाजपा सूत्रों ने बताया कि पार्टी ने 2022 में जिन 18,900 बूथों पर जीत हासिल की थी, 2024 के चुनाव में उन्हीं बूथों पर वोट कम मिले हैं. यह संख्या अब पार्टी की संगठनात्मक रणनीति का अहम हिस्सा बन गई है. इसीलिए भाजपा ने पहले इन बूथों का हिसाब-किताब करने, कमजोर जगहों की पहचान कर उन्हें मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाने के लिए रिकवरी प्लान बनाया है। 

    भाजपा के सामने ग्रामीण बूथों की चुनौती
    भाजपा की बूथ स्तरीय कवायद से मिली सबसे अहम जानकारी भौगोलिक है. भाजपा ने जिन 18,900 बूथों को चिह्नित किया है, उनमें से लगभग 80 फीसदी बूथ ग्रामीण इलाकों के हैं. खासकर छोटे गांवों और बिखरी हुई बस्तियों वाले बूथ हैं। लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर और कानपुर जैसे शहरी केंद्र अपेक्षाकृत ज़्यादा मज़बूत रहे. इससे साफ है कि भाजपा का आधार ग्रामीण इलाकों में घट रहा है, जिसे दुरुस्त करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए गए हैं। 

    भाजपा के सामने अब सिर्फ़ पूरे राज्य में राजनीतिक संदेश पहुंचाने की चुनौती नहीं है; चुनौती यह पहचानना है कि कौन-से ग्रामीण समुदाय दूर हो गए, वे क्यों दूर हुए और उन्हें वापस कैसे लाया जाए। 

    वॉर रूम से जमीनी लड़ाई तक का प्लान
    यूपी में भाजपा की रणनीति डेटा एनालिसिस से आगे बढ़कर संगठन को जमीनी स्तर पर मज़बूत करने की ओर बढ़ रही है.  भाजपा के यूपी प्रभारी विनोद तावड़े 16 से 22 सितंबर के बीच फिर से यूपी का दौरा करेंगे. उनकी समीक्षा में जिन मुद्दों पर खास तौर पर चर्चा होगी, उनमें वे बूथ शामिल हैं जहां पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था और उन्हें वापस जीतने की रणनीति बनाना शामिल है। 

    भाजपा की यह प्रक्रिया असल में एक पॉलिटिकल फीडबैक लूप है: बूथ की पहचान करना, सामाजिक बदलाव को समझना, स्थानीय मुद्दों की पहचान करना, और उसके बाद संगठन को फिर से खड़ा करके दोबारा से बूथ को वापस जीतना. भाजपा का मानना है कि उत्तर प्रदेश में चुनाव का नतीजा पूरे राज्य के औसत आंकड़ों से तय नहीं होता; यह हज़ारों अलग-अलग बूथों पर जीत-हार से तय होता है, जहां वोटों के अंतर को मापा जा सकता है, वोटरों की पहचान की जा सकती है और संगठन की कमियों को सुधारा जा सकता है। 

    भाजपा का यूपी में रिकवरी प्लान
    भाजपा के यूपी में नए गणित का आधार बूथ प्रबंधन है. यूपी में 18,900 का आंकड़ा सिर्फ़ एक संख्या नहीं है, बल्कि यह 2024 में मिली हार को माइक्रो-लेवल पर चुनावी रिकवरी प्लान में बदलने की भाजपा की रणनीति है. अवध और पूर्वांचल सबसे ज़्यादा जोखिम वाले इलाके हैं. ग्रामीण बूथ मुख्य चुनावी मैदान हैं, तथा गैर-यादव ओबीसी और गैर-जाटव दलित वोटों को एकजुट करना एक अहम चिंता है। 

    बसपा के कमज़ोर होने से विपक्ष के वोट ट्रांसफर का पैटर्न बदल गया है. इसके अलावा बुंदेलखंड जैसे इलाकों में स्थानीय मुद्दे अभी भी अहम हैं. भाजपा अब इसी गणित को ज़मीनी स्तर पर लागू करने की तैयारी कर रही है ताकि 2027 में दोबारा वापसी कर सके। 

    अवध और पूर्वांचल में भाजपा की चुनौती
    डेटा से पता चलता है कि उत्तर प्रदेश में हर जगह नुकसान एक जैसा नहीं था. अवध क्षेत्र में भाजपा ने 2022 में इलाके की 154 विधानसभा सीटों में से 101 सीटें जीती थीं, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में वह इनमें से सिर्फ़ 51 सीटों पर आगे थी। 

    यह कुल मिलाकर 50 सीटों का नुकसान है, 2022 के नतीजों के मुकाबले 49.5 फीसदी की गिरावट. अमेठी, फैज़ाबाद, कन्नौज, सुल्तानपुर और सीतापुर जिलों में यह नुकसान साफ़ तौर पर देखा गया, जिससे अवध भाजपा के चुनावी नक्शे में सबसे ज़्यादा दबाव वाले इलाकों में से एक बन गया है।

    अवध की तरह ही पूर्वांचल इलाके में भी भाजपा को झटका लगा था. 2022 में भाजपा ने पूर्वांचल इलाके की 102 विधानसभा सीटों में से 53 सीटें जीती थीं. इसके दो साल बाद, लोकसभा चुनाव के दौरान वह सिर्फ़ 36 सीटों पर आगे थी। यह कुल मिलाकर 17 सीटों या 32.1 फीसदी की गिरावट रही। 

    बूथ-लेवल पर यह गिरावट खास तौर पर जौनपुर, गाज़ीपुर, मछलीशहर, चंदौली और ग्रामीण प्रयागराज में देखी गई। भाजपा जिन राजनीतिक वजहों पर गौर कर रही है, उनमें गैर-यादव ओबीसी वोटरों के एक हिस्से का समाजवादी पार्टी की तरफ़ जाना शामिल है, जहां अखिलेश यादव का 'पीडीए' फार्मूला प्रभावी रहा। 

    पश्चिमी यूपी और बुंदेलखंड में नफा-नुकसान
    पश्चिमी इलाके में भी गिरावट देखी गई, हालांकि अवध और पूर्वांचल के मुकाबले नुकसान कम था. पश्चिमी यूपी में भाजपा ने 2022 में 76 विधानसभा सीटों में से 57 सीटें जीती थीं; 2024 में वह 43 सीटों पर आगे रही. इस तरह कुल 14 सीटों या 24.6 फीसदी का नुकसान हुआ। 

     रुहेलखंड में 2022 के चुनाव में भाजपा ने 52 सीटों में से 30 सीटें जीती थीं. 2024 के लोकसभा चुनाव में उसकी बढ़त घटकर 22 सीटों पर आ गई, यानी कुल आठ सीटों या 26.7 फीसदी की गिरावट हुई। पश्चिमी यूपी और रुहेलखंड को मिलाकर कुल 128 विधानसभा सीटें हैं; भाजपा ने 2022 के चुनाव में इनमें से 87 सीटें जीती थीं और 2024 के लोकसभा चुनाव में 65 सीटों पर बढ़त बनाए रखीच। 

    वहीं, बुंदेलखंड की तस्वीर कुछ अलग हैय 2022 में भाजपा ने 19 में से 14 विधानसभा सीटें जीती थीं, लेकिन 2024 में वह सिर्फ़ नौ सीटों पर आगे रही. यानी कुल मिलाकर पांच सीटों या 35.7 फीसदी की कमी हुई. यहां पार्टी का आकलन राज्य-स्तर की किसी एक राजनीतिक लहर के बजाय स्थानीय मुद्दों और मौजूदा सरकार के प्रति नाराज़गी (एंटी-इनकंबेंसी) की ओर ज़्यादा इशारा करता है. लगता है कि इन वजहों से इस इलाके के कुछ हिस्सों में भाजपा की बढ़त कमज़ोर हुई है। 

    सपा के 'पीडीए' फ़ैक्टर पर भाजपा की नज़र
    भाजपा के अंदरूनी आकलन में भी सामाजिक समीकरण को समस्या की जड़ माना गया हैय ऐसा प्रतीत होता है कि सपा की 'पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक' (PDA) रणनीति ने भाजपा के गैर-यादव ओबीसी और गैर-जाटव दलित वोट बैंक में सेंध लगाई है. यह ज़रूरी नहीं कि पूरे समुदाय ने ही पाला बदल लिया हो, बल्कि अहम जातियों के समूहों में होने वाले छोटे-मोटे बदलाव भी बूथ स्तर पर नतीजों को पूरी तरह बदल सकते हैं। 

    माना जाता है कि कई इलाकों में कुर्मी, कुशवाहा और दूसरे ओबीसी वोटरों का एक हिस्सा सपा में शिफ्ट हो गया. साथ ही बसपा के कमज़ोर होने से विपक्ष के वोट का गणित भी बदला है. 2022 में बसपा का वोट शेयर लगभग 13 फीसदी था, जो 2024 में घटकर 9 फीसदी हो गया. ऐसे में उसके ग्रामीण वोट बैंक का एक हिस्सा अलग-अलग पार्टियों में बंटने के बजाय 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन की तरफ़ जाता दिखा। 

    2022 का गेम कैसे 2024 में बदल गया
    2024 का चौंकाने वाला नतीजा आज भी परेशान कर रहा है. ये आंकड़े बताते हैं कि भाजपा क्यों 2024 के लोकसभा नतीजों को एक चेतावनी मान रही है, जिस पर बारीकी से ध्यान देने की ज़रूरत है. पार्टी ने 2024 में उत्तर प्रदेश में 33 लोकसभा सीटें जीतीं, जो 2019 में जीती गई 62 सीटों के मुकाबले काफी कम थीं। 

    वहीं, सपा ने 37 सीटें हासिल कीं, जबकि 2019 में उसे सिर्फ़ पांच सीटें मिली थीं, लेकिन संसदीय सीटों के ये आंकड़े भाजपा के लिए नतीजों के विश्लेषण की सिर्फ़ शुरुआत भर हैं. जब 2024 के लोकसभा नतीजों को राज्य की 403 विधानसभा सीटों के हिसाब से देखा जाता है, तो पार्टी की पकड़ कमज़ोर होने का दायरा और भी साफ़ हो जाता है। 

    2022 के विधानसभा चुनावों में भाजपा की 255 सीटों की संख्या असल में घटकर लगभग 161 विधानसभा क्षेत्रों की बढ़त तक सिमट जाती है, जब 2024 के लोकसभा वोटिंग पैटर्न को उन पर लागू करके देखा जाता है. और इस मुख्य आंकड़े के पीछे एक और बारीक आंकड़ा छिपा है: 18,900 बूथ, जहां नतीजे पलट गए। 

  • स्वास्थ्य विभाग की ऑनलाइन बैठक में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने चिकित्साधिकारियों को दिए निर्देश

    स्वास्थ्य विभाग की ऑनलाइन बैठक में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने चिकित्साधिकारियों को दिए निर्देश

    लखनऊ
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक संचालित होने वाले ‘सेवा संकल्प अभियान’ को लेकर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने शुक्रवार को आवास पर वर्चुअल बैठक की। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अभियान के तहत आयोजित होने वाली विभिन्न गतिविधियों की तैयारियों की समीक्षा की और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
    उपमुख्यमंत्री ने कहा कि अभियान का उद्देश्य सेवा, स्वास्थ्य और जनकल्याण की भावना को जन-जन तक पहुंचाना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अभियान के तहत होने वाले सभी कार्यक्रमों का प्रभावी, व्यवस्थित और समयबद्ध संचालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि अधिक से अधिक नागरिकों को स्वास्थ्य सेवाओं एवं योजनाओं का लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि इस अभियान में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले चिकित्सा अधिकारियों, कर्मचारियों को सम्मानित भी किया जाएगा।
    डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने बताया कि अभियान के अंतर्गत 17 सितंबर को सेवा दिवस के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन प्रदेशभर में रक्तदान शिविर आयोजित किए जाएंगे। इसी दिन शाम 7 बजे बजे प्रदेश की सभी स्वास्थ्य इकाइयों पर ‘आशीर्वाद का दीपक’ प्रज्वलित किया जाएगा। इसके माध्यम से सेवा, समर्पण और जनकल्याण का संदेश जन-जन तक पहुंचाया जाएगा। वहीं, 25 सितंबर से 2 अक्टूबर तक पूरे प्रदेश में व्यापक स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों में आमजन को विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं, जांच सुविधाओं तथा स्वास्थ्य विभाग की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया जाएगा।

    कार्ययोजना करें तैयार
    उपमुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक जिले में अभियान की गतिविधियों की कार्ययोजना पहले से तैयार की जाए और सभी कार्यक्रमों की नियमित समीक्षा की जाए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं और उपलब्धियों को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के साथ-साथ पात्र लाभार्थियों को योजनाओं का सीधा लाभ दिलाना अभियान की प्राथमिकता होनी चाहिए।

    इनकी रही उपस्थिति
    वर्चुअल बैठक में राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह, मंत्री सोमेंद्र तोमर, उपाध्यक्ष, भाजपा, उत्तर प्रदेश कामेश्वर सिंह, प्रमुख सचिव (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य) अमित कुमार घोष सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

  • सहारनपुर मस्जिद केस: हाईकोर्ट ने जुर्माना वसूली पर लगाई रोक, सरकार से मांगा जवाब

    सहारनपुर मस्जिद केस: हाईकोर्ट ने जुर्माना वसूली पर लगाई रोक, सरकार से मांगा जवाब

     सहारनपुर
    यूपी के सहारनपुर में मस्जिद ध्वस्तीकरण को लेकर दाखिल याचिका पर आज हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार से जवाबी हलफनामा मांगा। यूपी सरकार को जवाबी हलफनामा देने के लिए समय दिया गया। ​न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने सरकार को जवाब दाखिल करने का समय देते हुए मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर तय की है। वहीं, हाईकोर्ट ने अगली तारीख तक छह करोड़ रुपये से अधिक के जुर्माने की मस्जिद कमेटी से वसूली के सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश पर रोक लगा दी है।

    गौरतलब हो कि हाईकोर्ट में मस्जिद कमेटी प्रबंधन की ओर से मुतवल्ली तनवीर अहमद ने मंगलवार को याचिका दाखिल की थी। याचिका में प्रशासन की कार्रवाई को चुनौती दी गई थी। मामले में सरकार को विपक्षी बनाया गया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रशासन ने शनिवार को कलक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को बिना नोटिस और सक्षम आदेश के ध्वस्त कर दिया। याचिका में वर्शिप एक्ट के उल्लंघन का भी आरोप लगाया गया है। इसके अलावा बिजली का बिल स्वीकार नहीं करने, गवाहों की पूरी गवाही नहीं कराने और फाइल को बहस में लगाकर अंतिम निर्णय किए जाने समेत प्रक्रिया से जुड़े कई बिंदुओं को चुनौती का आधार बनाया गया है।

    याचिका में यह भी तर्क दिया गया है कि पब्लिक प्रिमाइसेज (एविक्शन ऑफ अनऑथराइज्ड ऑक्यूपेंट्स) एक्ट यानी पीपी एक्ट के तहत कार्रवाई से पहले वादी पक्ष को अपना स्वामित्व साबित करना होता है।मस्जिद कमेटी का आरोप है कि सरकार और प्रशासन की ओर से इस संबंध में पर्याप्त आधार प्रस्तुत नहीं किया गया। मस्जिद कमेटी का कहना है कि मामले में न्यायिक प्रक्रिया और संबंधित कानूनी प्रावधानों का पालन किया जाना चाहिए था।

    उल्लेखनीय है कि सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने 16 जुलाई 2026 को मस्जिद को अवैध करार देते हुए मस्जिद प्रबंधन पर 6.41 करोड़ रुपये का अर्थदंड लगाया था। मस्जिद कमेटी की ओर से दाखिल याचिका में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के साथ उस प्रक्रिया को भी चुनौती दी गई है, जिसके आधार पर प्रशासन ने कार्रवाई की। याचिका में आरोप लगाया गया है कि मस्जिद को ध्वस्त करने से पहले संबंधित पक्ष को नोटिस नहीं दिया गया और न ही ऐसा आदेश दिखाया गया, जिसके आधार पर तत्काल ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा सके।

    कलक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के ध्वस्तीकरण के मामले में शुक्रवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। मस्जिद प्रबंधन की ओर से दाखिल रिट कॉज लिस्ट में 35वें नंबर पर सूचीबद्ध रहा। मामले की सुनवाई कोर्ट नंबर-9 में हुई। सुनवाई को लेकर प्रशासन और पुलिस पूरी तरह सतर्क रहा। मस्जिद प्रबंधन की अपील जिला जज की अदालत में भी खारिज हो गई थी। इसके बाद मुतव्वली की ओर से आठ सितंबर को हाईकोर्ट में रिट दाखिल की गई, जिस पर शुक्रवार को सुनवाई हुई है।

  • योगी सरकार का बड़ा फैसला! यूपी की 681 प्रमुख सड़कें होंगी गड्ढामुक्त, त्योहारों से पहले शुरू होगी कवायद

    योगी सरकार का बड़ा फैसला! यूपी की 681 प्रमुख सड़कें होंगी गड्ढामुक्त, त्योहारों से पहले शुरू होगी कवायद

     लखनऊ
    यूपी में बारिश और बाढ़ के कारण खराब हुई सड़कों को लेकर योगी सरकार ने अब तेजी से काम करने की तैयारी शुरू कर दी है. आगामी त्योहारों को देखते हुए प्रदेश के 681 महत्वपूर्ण मार्ग चिन्हित किए गए हैं. इन सड़कों को प्राथमिकता के आधार पर गड्ढामुक्त और आवागमन के लिए बेहतर बनाया जाएगा। 

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को लोक निर्माण विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिया कि बारिश से क्षतिग्रस्त सड़कों को तत्काल ठीक कर मोटरेबल बनाया जाए. उन्होंने साफ कहा कि अभी बरसात पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, इसलिए जहां तत्काल मरम्मत जरूरी है, वहां काम किया जाए और बारिश समाप्त होने के बाद जरूरत के मुताबिक सड़क का स्थायी नवीनीकरण कराया जाए. मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि गड्ढामुक्ति अभियान सिर्फ गड्ढों में पैचवर्क करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए. सड़क की वास्तविक स्थिति का आकलन करके जरूरत के अनुसार मरम्मत और नवीनीकरण की कार्रवाई की जाए। 

    त्योहारों से पहले 681 मार्गों पर खास नजर

    आने वाले दिनों में प्रदेश में लगातार पर्व-त्योहार हैं. गणेश चतुर्थी, विश्वकर्मा पूजा, नवरात्रि, दीपावली, छठ पूजा और कार्तिक पूर्णिमा जैसे पर्वों के दौरान बड़ी संख्या में लोग एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते हैं. इसी को देखते हुए सरकार ने 681 महत्वपूर्ण मार्गों की पहचान की है. इन मार्गों पर त्योहारों से पहले जरूरी मरम्मत और नवीनीकरण का काम पूरा कराने पर जोर दिया जा रहा है. इन सड़कों पर भीड़ और वाहनों की आवाजाही अधिक रहने की संभावना है. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि पर्वों के दौरान लोगों को खराब सड़कों के कारण परेशानी नहीं होनी चाहिए। 

    बारिश अभी जारी, इसलिए दो स्तर पर होगा काम
    अधिकारियों का कहना है कि सरकार के सामने फिलहाल एक चुनौती यह भी है कि प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश अभी जारी है. ऐसे में किसी सड़क की पूरी तरह स्थायी मरम्मत करना हर जगह संभव नहीं है. इसी वजह से मुख्यमंत्री ने दो स्तर पर काम करने को कहा है. पहले चरण में बारिश से खराब सड़क को तुरंत आवागमन योग्य बनाया जाएगा. जहां गड्ढे हैं या सड़क का हिस्सा टूट गया है, वहां जरूरी मरम्मत की जाएगी. दूसरे चरण में बरसात समाप्त होने के बाद सड़क की स्थिति का दोबारा आकलन किया जाएगा. जहां ज्यादा नुकसान हुआ है, वहां स्थायी नवीनीकरण कराया जाएगा. इससे फिलहाल लोगों को आने-जाने में राहत मिलेगी और बाद में सड़क को स्थायी रूप से बेहतर किया जा सकेगा। 

    सिर्फ बारिश से ही नहीं टूटीं सड़कें
    समीक्षा बैठक में यह भी सामने आया कि प्रदेश में सड़कों के खराब होने की वजह केवल बारिश और बाढ़ नहीं है. कई जगह एक्सप्रेसवे, राष्ट्रीय राजमार्ग, रेलवे और दूसरी निर्माणाधीन परियोजनाओं के चलते भारी वाहनों की आवाजाही बढ़ी है. लगातार भारी वाहनों के चलने से भी कई सड़कों को नुकसान पहुंचा है. अब ऐसे मार्गों का विभागवार सर्वे कराया जा रहा है. सर्वे में जिन सड़कों को क्षतिग्रस्त पाया जाएगा, उन्हें चिन्हित करके संबंधित विभाग के लिए गड्ढामुक्ति का लक्ष्य तय किया जाएगा। 

    9 विभागों की 4.36 लाख किमी सड़कों की समीक्षा
    बैठक में प्रदेश के नौ विभागों के अधीन आने वाली सड़कों की स्थिति की समीक्षा की गई. अधिकारियों के मुताबिक इन विभागों के अधीन करीब 4.36 लाख किलोमीटर सड़कें हैं. मौजूदा गड्ढामुक्ति अभियान के तहत करीब 50 हजार किलोमीटर मार्गों को बेहतर बनाने का लक्ष्य रखा गया है. अब तक करीब 5,751 किलोमीटर सड़कों पर गड्ढामुक्ति का काम पूरा होने की जानकारी बैठक में दी गई. बाकी सड़कों पर भी काम चल रहा है. इसके साथ ही बारिश और अन्य कारणों से क्षतिग्रस्त हुए नए मार्गों का सर्वे पूरा होने के बाद विभागवार लक्ष्य को अंतिम रूप दिया जाएगा। 

    30 हजार किमी सड़क के नवीनीकरण का लक्ष्य
    सरकार ने सिर्फ गड्ढे भरने का लक्ष्य नहीं रखा है. जहां सड़क की स्थिति ज्यादा खराब है, वहां नवीनीकरण और विशेष मरम्मत भी कराई जाएगी. बैठक में बताया गया कि करीब 30 हजार किलोमीटर सड़कों के नवीनीकरण का लक्ष्य रखा गया है. इसमें अब तक करीब 14 हजार किलोमीटर पर काम होने की जानकारी दी गई. इसी तरह करीब 5 हजार किलोमीटर मार्गों पर विशेष मरम्मत का लक्ष्य है. अब तक करीब 700 किलोमीटर पर विशेष मरम्मत का काम पूरा होने की बात कही गई। 

    स्कूल-अस्पताल वाली सड़कें पहले ठीक होंगी
    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि सड़क सुधार के लिए प्राथमिकता तय करते समय केवल सड़क की लंबाई नहीं देखी जाए, बल्कि वहां लोगों की जरूरत को भी ध्यान में रखा जाए. उन्होंने शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों, मुख्य बाजारों, सरकारी कार्यालयों और अधिक आवाजाही वाले स्थानों तक पहुंचने वाली सड़कों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए. इसका मतलब साफ है कि जिस सड़क से रोजाना बड़ी संख्या में छात्र, मरीज, कर्मचारी और आम लोग गुजरते हैं, वहां मरम्मत का काम पहले कराया जाएगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी से सीधे जुड़ी है. इसलिए इसकी खराब स्थिति का असर सीधे लोगों पर पड़ता है. सड़कों की मरम्मत को लेकर अक्सर गुणवत्ता पर सवाल उठते रहे हैं. इसे देखते हुए मुख्यमंत्री ने काम में तेजी के साथ गुणवत्ता का भी ध्यान रखने को कहा. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सड़क की मरम्मत सिर्फ औपचारिकता के लिए न हो. जहां पैचवर्क से काम चल सकता है वहां उसे किया जाए, लेकिन जहां सड़क का व्यापक नवीनीकरण जरूरी है वहां स्थायी समाधान किया जाए. बारिश खत्म होने के बाद सड़कों की वास्तविक स्थिति के अनुसार आगे की कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए हैं। 

    सभी विभाग मिलकर करेंगे काम
    सड़कें केवल लोक निर्माण विभाग के अधीन नहीं हैं. अलग-अलग क्षेत्रों में अलग विभागों की सड़कें हैं. ऐसे में मुख्यमंत्री ने सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया. बैठक में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, मंडी परिषद, पंचायती राज, सिंचाई, ग्राम्य विकास, नगर विकास, आवास एवं शहरी नियोजन तथा अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग की कार्ययोजनाओं की भी समीक्षा की गई। 

  • शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों और प्रमुख बाजारों की सड़कों को प्राथमिकता पर लेकर तत्काल शुरू कराएं मरम्मत कार्य: मुख्यमंत्री

    शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों और प्रमुख बाजारों की सड़कों को प्राथमिकता पर लेकर तत्काल शुरू कराएं मरम्मत कार्य: मुख्यमंत्री

    बारिश से खराब सड़कों को तत्काल मोटरेबल बनाएं, बरसात के बाद नवीनीकरण भी हो: मुख्यमंत्री

    आगामी पर्व-त्योहारों से पहले प्रमुख मार्गों को प्राथमिकता से गड्ढामुक्त करें: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

    आगामी पर्वों के लिए 681 महत्वपूर्ण मार्ग चिन्हित, प्राथमिकता के आधार पर होंगे गड्ढामुक्त

    शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों और प्रमुख बाजारों की सड़कों को प्राथमिकता पर लेकर तत्काल शुरू कराएं मरम्मत कार्य: मुख्यमंत्री

    09 विभागों के करीब 4.36 लाख किमी मार्गों की मुख्यमंत्री ने की समीक्षा, 50 हजार किमी के गड्ढामुक्ति लक्ष्य पर चल रहा काम

    लखनऊ, 
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बारिश और बाढ़ से खराब हुई सड़कों की तत्काल मरम्मत कर उन्हें आवागमन के योग्य बनाने और बरसात के बाद जरूरत के अनुसार उनका नवीनीकरण कराने के निर्देश दिए हैं। शुक्रवार को लोक निर्माण विभाग की समीक्षा बैठक में उन्होंने कहा कि बारिश अभी जारी है, इसलिए सड़कों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाए और बारिश से नए क्षतिग्रस्त मार्गों का भी सर्वे कराया जाए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी पर्व-त्योहारों में बड़ी संख्या में लोगों का आवागमन होगा। ऐसे में प्रमुख मार्गों पर आवागमन में किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने पर्वों से पहले आवश्यक मरम्मत और नवीनीकरण के काम पूरे करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि गड्ढामुक्ति का काम केवल पैचवर्क तक सीमित न रहे। जहां सड़क तत्काल खराब स्थिति में है, वहां उसे अभी मोटरेबल बनाया जाए और बरसात समाप्त होने के बाद जरूरत के अनुसार स्थायी नवीनीकरण कराया जाए।

    बैठक में बताया गया कि अतिवृष्टि के साथ ही एक्सप्रेस-वे, राष्ट्रीय मार्ग, रेलवे आदि की निर्माणाधीन परियोजनाओं के कारण भारी वाहनों की आवाजाही से भी कई सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। इन मार्गों का विभागवार सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे के आधार पर क्षतिग्रस्त सड़कों को चिन्हित कर गड्ढामुक्ति के विभागवार लक्ष्य तय किए जाएंगे।

    आगामी पर्वों को देखते हुए प्रदेश में 681 महत्वपूर्ण मार्ग चिन्हित किए गए हैं। इनमें गणेश चतुर्थी, विश्वकर्मा पूजा, नवरात्रि, दीपावली, छठ पूजा और कार्तिक पूर्णिमा जैसे प्रमुख पर्वों के दौरान अधिक आवागमन वाले मार्ग शामिल हैं। इन मार्गों को प्राथमिकता के आधार पर बेहतर स्थिति में रखने की तैयारी है।

    मुख्यमंत्री ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अधिकारियों से भी उनकी कार्ययोजना की जानकारी ली। साथ ही मंडी परिषद, पंचायती राज, सिंचाई, ग्राम्य विकास, नगर विकास, आवास एवं शहरी नियोजन तथा अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग की कार्ययोजनाओं की समीक्षा की गई। उन्होंने सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय के साथ काम करने पर जोर दिया।

    विभाग के प्रस्तुतिकरण में बताया गया कि गड्ढामुक्ति अभियान में 09 विभागों के मार्ग शामिल हैं। इन विभागों के अधीन करीब 4.36 लाख किलोमीटर सड़कें हैं। वर्तमान लक्ष्य के तहत करीब 50 हजार किलोमीटर मार्गों को गड्ढामुक्त किया जाना है, जिसमें अब तक करीब 5,751 किलोमीटर पर काम पूरा किया जा चुका है। क्षतिग्रस्त मार्गों के सर्वे के बाद विभागवार लक्ष्य को अंतिम रूप दिया जाएगा।

    नवीनीकरण और विशेष मरम्मत के कार्यों की भी समीक्षा की गई। विभाग के अनुसार नवीनीकरण के लिए करीब 30 हजार किलोमीटर और विशेष मरम्मत के लिए करीब 5 हजार किलोमीटर का लक्ष्य रखा गया है। अब तक नवीनीकरण में करीब 14 हजार किलोमीटर और विशेष मरम्मत में करीब 700 किलोमीटर की प्रगति बताई गई।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क आम आदमी के रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ी है। शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों, मुख्य बाजारों, सरकारी कार्यालयों और ऐसे अन्य स्थानों, जहां आमजन का आवागमन अधिक रहता है, वहां की सड़कों को प्राथमिकता पर लिया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन मार्गों पर तत्काल काम शुरू कराया जाए और जहां मरम्मत की जरूरत है, वहां बिना देरी किए सड़क को आवागमन योग्य बनाया जाए। उन्होंने कहा कि काम में तेजी के साथ गुणवत्ता का भी पूरा ध्यान रखा जाए।

    बैठक में जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी', पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर, राज्य मंत्री लोक निर्माण विभाग ब्रजेश सिंह, राज्य मंत्री औद्योगिक विकास विभाग जसवंत सिंह सैनी, राज्य मंत्री जल शक्ति रामकेश निषाद तथा राज्य मंत्री ग्राम्य विकास विजय लक्ष्मी गौतम उपस्थित रहे।

  • सोनम का कहना है कि प्रतिभा और मेहनत हो तो सरकार की योजनाएं सफलता तक पहुंचने का रास्ता आसान बनाती हैं

    सोनम का कहना है कि प्रतिभा और मेहनत हो तो सरकार की योजनाएं सफलता तक पहुंचने का रास्ता आसान बनाती हैं

    सीएम योगी के भरोसे से बढ़ा मनोबल, बेटियों के लिए प्रेरणा बनीं सोनम यादव 

    मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना से मिली दिशा, आज एसडीएम पद पर चयनित होकर प्रशिक्षण प्राप्त कर रहीं सोनम

    सोनम का कहना है कि प्रतिभा और मेहनत हो तो सरकार की योजनाएं सफलता तक पहुंचने का रास्ता आसान बनाती हैं

    लखनऊ
    युवाओं को अपना सपना पूरा करने में आर्थिक अभाव अब आड़े नहीं आएगा, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का दिलाया गया यह भरोसा अयोध्या की सोनम यादव जैसी युवाओं की सफलता से और मजबूत हुआ है। योगी सरकार की मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना का लाभ लेकर यूपीपीसीएस-2024 में उप जिलाधिकारी (एसडीएम) पद पर चयनित हुईं सोनम यादव आज प्रदेश के हजारों युवाओं, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी हैं। वर्तमान में वह डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी, लखनऊ में प्रशासनिक प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं।

    अभ्युदय योजना से मिली सफलता, अब निभा रहीं नई जिम्मेदारियां

    अयोध्या जिले के मवई ब्लॉक स्थित हारिका पांडे का पुरवा, गड़ौरा गांव की रहने वाली सोनम यादव ने मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के मार्गदर्शन का लाभ लेकर यूपीपीसीएस-2024 में सफलता प्राप्त की थी। आज चयन के बाद उनके जीवन में जिम्मेदारियों का नया अध्याय शुरू हो चुका है। सोनम बताती हैं कि प्रशिक्षण के दौरान उन्हें प्रशासनिक प्रक्रियाओं, कानून-व्यवस्था, राजस्व प्रशासन, जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा आम जनता के साथ संवाद से जुड़े विभिन्न पहलुओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उनके अनुसार यह प्रशिक्षण उन्हें एक संवेदनशील, जिम्मेदार और जन केंद्रित प्रशासनिक अधिकारी के रूप में तैयार कर रहा है।

    मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना ने दिखाई सफलता की राह

    सोनम का कहना है कि मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना ने उनकी सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। योजना के माध्यम से उन्हें गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन, अध्ययन सामग्री और विषय विशेषज्ञों से सीखने का अवसर मिला। वह बताती हैं कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के लिए केवल मेहनत ही नहीं, बल्कि सही दिशा और मार्गदर्शन भी आवश्यक होता है। अभ्युदय योजना के तहत मिले नियमित मार्गदर्शन, अध्ययन वातावरण और विशेषज्ञों के सहयोग ने उनकी तैयारी को नई दिशा दी तथा आत्मविश्वास को मजबूत किया।

    युवाओं और बेटियों को दे रही हैं प्रेरणा

    सोनम यादव आज युवाओं और छात्राओं को यह संदेश देती हैं कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। वह विद्यार्थियों को स्पष्ट रणनीति, नियमित अध्ययन, निरंतर अभ्यास और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की सलाह देती हैं। ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों और आर्थिक रूप से सीमित संसाधनों वाले विद्यार्थियों के लिए उनका संदेश है कि वे अपनी परिस्थितियों को अपने सपनों की सीमा न बनने दें। उनका मानना है कि मेहनत, अनुशासन और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।

    सरकार की योजनाएं बन रहीं अवसर का माध्यम 

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की युवाओं और छात्राओं के लिए संचालित योजनाओं को सोनम अवसरों की समानता और युवा सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानती हैं। उनका कहना है कि शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, कौशल विकास और महिला सशक्तीकरण से जुड़ी योजनाएं प्रतिभाशाली युवाओं को आगे बढ़ने का अवसर दे रही हैं। एक भावी प्रशासनिक अधिकारी के रूप में उनकी प्राथमिकता पारदर्शी, संवेदनशील और जन केंद्रित प्रशासन सुनिश्चित करना होगी, ताकि सरकार की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी ढंग से पहुंच सके। सोनम यादव की सफलता केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं। आज वह नई पीढ़ी के लिए उम्मीद, आत्मविश्वास और सकारात्मक बदलाव की पहचान बन चुकी हैं।