Category: राजस्थान

  • राजस्थान में लालसोट-दूदू सड़क चौड़ीकरण को मिली मंजूरी, भूमि अधिग्रहण शुरू हुआ

    राजस्थान में लालसोट-दूदू सड़क चौड़ीकरण को मिली मंजूरी, भूमि अधिग्रहण शुरू हुआ

     दौसा
     लालसोट क्षेत्र के लोगों, व्यापारियों और रोजाना सफर करने वाले वाहन चालकों के लिए राहत भरी खबर है। सार्वजनिक निर्माण विभाग ने विश्व बैंक सहायता प्राप्त राजस्थान हाईवे मॉडर्नाइजेशन प्रोजेक्ट के तहत लालसोट-तूंगा-चाकसू-फागी से दूदू तक विस्तारित स्टेट हाईवे-02 के विकास, चौड़ीकरण, सुदृढ़ीकरण एवं दीर्घकालिक रखरखाव के लिए 601.40 करोड़ रुपए की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति जारी कर दी है। स्वीकृति के साथ ही भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।

    परियोजना के तहत 565.73 करोड़ रुपए सड़क निर्माण एवं रखरखाव तथा 35.67 करोड़ रुपए भूमि अवाप्ति और मुआवजा वितरण पर खर्च किए जाएंगे। निर्माण कार्य हाइब्रिड एन्युटी मोड पर होगा, जिससे गुणवत्ता और समयबद्ध निर्माण सुनिश्चित किया जाएगा। यह परियोजना राज्य सरकार की बजट घोषणा तथा विश्व बैंक पोषित पांच प्रमुख सड़क परियोजनाओं में शामिल है।

    नई सड़क बनने से लालसोट से दूदू तक यात्रा अधिक सुरक्षित, तेज और सुगम होगी। साथ ही जयपुर शहर के भारी ट्रैफिक से बचते हुए अजमेर-जयपुर-दिल्ली नेशनल हाईवे (एनएच-48) तक सीधी और बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी, जिससे पश्चिमी राजस्थान और गुजरात की ओर आवागमन भी आसान होगा।

    आर्थिक विकास को मिलेगी गति
    विधायक रामबिलास मीना ने बताया कि इस परियोजना से क्षेत्र के आर्थिक विकास को गति मिलेगी। किसानों और व्यापारियों को कृषि उपज एवं स्थानीय उत्पाद प्रमुख मंडियों और औद्योगिक क्षेत्रों तक कम समय और कम लागत में पहुंचाने में सुविधा होगी। सड़क के चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण से दुर्घटनाओं में कमी आने के साथ यात्रा समय, ईंधन और वाहन रखरखाव की लागत में भी बचत होगी।

    भूमि अधिग्रहण की शुरुआती कार्रवाई भी शुरू
    राजस्थान राज्य सडक़ विकास एवं निर्माण निगम लिमिटेड के सहायक अभियंता ईश्वर चौधरी ने बताया कि यह मार्ग टू-लेन विथ पेव शोल्डर (मुख्य सडक़ की दोनों लेन के बगल में बनी पर पटरी) के रूप में तैयार किया जाएगा। परियोजना को लेकर वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृतियां जारी की जा चुकी हैं। भूमि अधिग्रहण की शुरुआती कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।

  • ‘काला हिरण’ फिल्म विवाद पर सख्त हाईकोर्ट, सलमान खान की छवि बचाने के निर्देश

    ‘काला हिरण’ फिल्म विवाद पर सख्त हाईकोर्ट, सलमान खान की छवि बचाने के निर्देश

    जोधपुर
    राजस्थान के जोधपुर में वर्ष 1998 में सामने आया बहुचर्चित काला हिरण शिकार मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। जोधपुर के जंगलों से शुरू हुआ यह वन्यजीव संरक्षण और आपराधिक मुकदमा अब दिल्ली उच्च न्यायालय में डिजिटल अधिकारों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दुरुपयोग और व्यक्तिगत प्रतिष्ठा की सुरक्षा से जुड़ी एक बड़ी कानूनी लड़ाई में तब्दील हो चुका है। दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को अभिनेता सलमान खान के जीवन और जोधपुर के उस ऐतिहासिक विवाद पर आधारित फिल्म 'काला हिरण: द बैटल फॉर लेगेसी' के विवादित टीज़र और उससे जुड़ी सामग्री को इंटरनेट से तुरंत हटाने का सख्त आदेश जारी किया है।

    'अभिनेता की छवि को नुकसान': हाईकोर्ट
    दिल्ली हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए माना कि जब तक यह सामग्री डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रहेगी, तब तक हर बीतता पल याचिकाकर्ता की साख को अपूरणीय क्षति पहुंचाएगा।

    अदालत ने स्पष्ट आदेश दिया है कि टीज़र सहित सभी संबंधित डिजिटल लिंक 24 घंटे के भीतर हटाए जाएं। यदि संबंधित पक्ष या प्लेटफॉर्म इसे नहीं हटाते हैं, तो डिजिटल इंटरमीडियरीज़ को सीधे आदेश जारी कर कंटेंट ब्लॉक कराया जाएगा।

    सलमान खान की ओर से पेश वकील रवि प्रकाश ने अदालत में तर्क दिया कि उनके मुवक्किल के नाम, पुरानी तस्वीरों, वीडियो और यहां तक कि एआई से मॉर्फ की गई सामग्री का उपयोग बिना उनकी पूर्व सहमति के व्यावसायिक लाभ के लिए किया जा रहा है।

    वीडियो की सत्यता की जांच के निर्देश
    सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता पक्ष से भी तीखे सवाल किए और फिल्म व वास्तविक घटना के बीच सीधे संबंध को लेकर दलीलें सुनीं। अदालत ने वकील से पूछा कि वे ऐसा कोई सीधा साक्ष्य प्रस्तुत करें, जो यह साबित करता हो कि फिल्म के निर्माता सीधे तौर पर सलमान खान की वास्तविक जीवन की कहानी को ही प्रदर्शित कर रहे हैं।

    अदालत ने फिल्म निर्माताओं को निर्देश दिया कि वे उस पूरे वीडियो सामग्री को याचिकाकर्ता के वकीलों को दिखाएं, जिस पर वे भरोसा कर रहे हैं, ताकि वीडियो की प्रामाणिकता और सत्यता का पूरी तरह से न्यायिक सत्यापन किया जा सके।

    जोधपुर का 1998 का वो मामला…
    यह पूरा विवाद राजस्थान की सांस्कृतिक और पर्यावरणीय विरासत से गहराई से जुड़ा हुआ है। वर्ष 1998 में जोधपुर में बॉलीवुड फिल्म 'हम साथ-साथ हैं' की आउटडोर शूटिंग के दौरान कांकाणी गांव के पास काले हिरणों के शिकार का मामला सामने आया था। प्रकृति और वन्यजीव प्रेमी पर्यावरण-रक्षक बिश्नोई समाज ने इस घटना के खिलाफ कड़ा विरोध जताते हुए कानूनी लड़ाई लड़ी थी।

    इस मामले में सलमान खान की गिरफ्तारी हुई और बाद में उन्हें जमानत मिली। करीब दो दशक तक चली कानूनी लड़ाई के बाद अधीनस्थ अदालत ने उन्हें 5 साल की सजा सुनाई थी, जिस पर सत्र न्यायालय से राहत मिली।

    इसके बाद वर्ष 2022 में राजस्थान हाईकोर्ट ने मामले से जुड़ी स्थानांतरण याचिकाओं को स्वीकार कर सुनवाई प्रक्रिया को आगे बढ़ाया था।

     

  • सरकारी नौकरी का बड़ा मौका! राजस्थान में 24,752 सफाई कर्मचारी पदों पर भर्ती, बिना परीक्षा मिलेगा चयन; अनपढ़ भी पात्र

    सरकारी नौकरी का बड़ा मौका! राजस्थान में 24,752 सफाई कर्मचारी पदों पर भर्ती, बिना परीक्षा मिलेगा चयन; अनपढ़ भी पात्र

    जयपुर 

    राजस्थान में 24752 पदों पर सफाई कर्मचारियों के पदों पर भर्ती निकाली गई है। राज्य सरकार की ओर से प्रदेश की 183 से नगरीय निकायों (नगर पालिका, नगर परिषद और नगर निगम) में संविदा (कॉन्ट्रेक्ट) के तहत यह भर्ती निकाली है। इस भर्ती के आवेदन 15 अगस्त 2026 से आवेदन लिए जाएंगे। एप्लाई करने की आखिरी तारीख 28 सितंबर है। आवेदन एसएसओ (SSO) आईडी या राजस्थान स्वायत्त शासन निदेशालय की वेबसाइट के माध्यम से किए जा सकेंगे। आवेदन के समय लाइव फोटो अपलोड करना अनिवार्य किया गया है। चयन लॉटरी से होगा। परीक्षा और इंटरव्यू नहीं होंगे। कोई भी अभ्यर्थी अपनी इच्छानुसार केवल एक ही नगरीय निकाय से आवेदन कर सकेगा। एक से अधिक निकायों में आवेदन करने पर अभ्यर्थी के सभी आवेदन पत्र निरस्त (रद्द) कर दिए जाएंगे। 5 साल तक संविदा पर काम करने और संतोषजनक सेवा देने के बाद इन कर्मचारियों को स्थाई (नियमित) कर दिया जाएगा।

    आयु सीमा और योग्यता
    आयु: 1 जनवरी 2027 के अनुसार आवेदक की आयु 21 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए। महिला अभ्यर्थियों और आरक्षित श्रेणियों (SC, ST, OBC, MBC, EWS) को अधिकतम आयु सीमा में 5 से 10 वर्ष तक की छूट मिलेगी।

    शैक्षणिक योग्यता: इस भर्ती के लिए कोई न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता निर्धारित नहीं की गई है। यानी अनपढ़ भी योग्य है।

    मूल निवास: आवेदक का राजस्थान का मूल निवासी होना अनिवार्य है।
    सबसे अधिक पदों वाले नगर निकाय:

    जयपुर: 4,811 पद

    कोटा: 1,357 पद

    बीकानेर: 1,084 पद

    जोधपुर: 890 पद

    सीकर: 480 पद

    भरतपुर: 450 पद

    अलवर: 426 पद

    भिवाड़ी: 350 पद

    धौलपुर: 340 पद

    चूरू: 320 पद

    उदयपुर: 300 पद

    भीलवाड़ा: 296 पद

    अजमेर: 290 पद

    झुंझुनूं: 287 पद

    पाली: 287 पद

    अनुभव कितना होना चाहिए
    अभ्यर्थी को राज्य के किसी भी नगरीय निकाय, केंद्र/राज्य सरकार के उपक्रम, या अधिकृत ठेकेदार/संस्था में न्यूनतम 1 वर्ष का सफाई कार्य का व्यावहारिक अनुभव होना चाहिए।

    अनुभव प्रमाण-पत्र सक्षम अधिकारी द्वारा सत्यापित होना चाहिए और यह 1 अगस्त 2026 के बाद का जारी किया हुआ ही मान्य होगा।

    चयन प्रक्रिया
    कोई परीक्षा या इंटरव्यू नहीं: इस भर्ती में ना तो कोई लिखित परीक्षा होगी और ना ही इंटरव्यू लिया जाएगा।

    लॉटरी सिस्टम से होगा चयन
    चयन प्रक्रिया ऑनलाइन लॉटरी के जरिए होगी, जिसे सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग (DoIT&C) के सॉफ्टवेयर के माध्यम से निकाला जाएगा। लॉटरी से पहले दस्तावेजों की जांच होगी।

    प्राथमिकता
    सबसे पहले उसी निकाय के अनुभवी स्थानीय अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी।

    आवेदन शुल्क
    सामान्य वर्ग के लिए 600 रुपये।

    आरक्षित वर्ग और दिव्यांगों के लिए 400 रुपये।

    वेतन और नौकरी की शर्तें (स्थायीकरण)
    यह भर्ती 'राजस्थान कॉन्ट्रेक्चुअल हायरिंग टू सिविल पोस्ट्स रूल्स, 2022' के तहत की जा रही है। संविदा के दौरान चयनित अभ्यर्थियों को 7,410 रुपये प्रतिमाह का नियत मानदेय दिया जाएगा।

    आरक्षण की व्यवस्था
    भर्ती में महिलाओं के लिए 30% क्षैतिज आरक्षण तय किया गया है।

    इसके अलावा दिव्यांगों के लिए 4% और उत्कृष्ट खिलाड़ियों के लिए 2% आरक्षण का प्रावधान है।

    SC, ST, OBC, MBC और EWS वर्गों को नियमानुसार आरक्षण मिलेगा।

  • डिप्रेशन के असर से राजस्थान में तेज बारिश के बने आसार

    डिप्रेशन के असर से राजस्थान में तेज बारिश के बने आसार

    जयपुर
    प्रदेश में एक बार फिर मॉनसून के सक्रिय होने की उम्मीद है. आज प्रदेश के 13 जिलों में बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है. कल से एक नए वेदर सिस्टम के एक्टिव होने से मॉनसून सक्रिय होगा.  मौसम विभाग के मुताबिक, उत्तर पश्चिम बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र तीव्र होकर डिप्रेशन में परिवर्तित हो चुका है. इसकी वजह से आज और अधिक तीव्र होकर डीप डिप्रेशन बनने की संभावना है.  

    इसके साथ ही यह वेदर सिस्टम उत्तर पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रहा है. इसके असर से 28 जुलाई से पूर्वी राजस्थान के कुछ भागों में बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी होने की संभावना है.

    भारी बारिश की संभावना
    29 जुलाई से 2 अगस्त के दौरान राज्य के अधिकांश भागों में एक बार फिर से मॉनसून सक्रिय होने और बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी होने की प्रबल संभावना है. इस दौरान पूर्वी और उत्तर पश्चिमी राजस्थान में कहीं-कहीं भारी बारिश होने की संभावना है.

    कम बारिश से किसान परेशान
    रविवार को बाड़मेर, जैसलमेर, पाली और जोधपुर जिलों में बरसात हुई.  हालांकि, पश्चिमी राजस्थान के जिलों में हुई बरसात को छोड़कर प्रदेश में मौसम शुष्क ही रहा. इस बार मॉनसून में बरसात कम होने से आमजन और किसान परेशान है. बारिश कम होने और धूप पड़ने से पारा भी लगातार बढ़ रहा है.  कई शहरों में उमस और गर्मी बढ़ गई है.

    27 जिलों में औसत से कम बारिश
    दौसा, डूंगरपुर, हनुमानगढ़, जैसलमेर, जालोर, करौली, खैरथल-तिजारा, पाली, सवाई माधोपुर, सिरोही और उदयपुर सहित 12 जिलों में कम बारिश जारी है, जबकि मानसून के विलंबित आगमन और मध्य-मौसम के लंबे शुष्क दौर के कारण 27 जिलों में औसत से कम वर्षा दर्ज की गई है.

  • जोधपुर सिटी स्टेशन पर नए प्लेटफॉर्म बनेंगे, यात्रियों को मिलेगी राहत

    जोधपुर सिटी स्टेशन पर नए प्लेटफॉर्म बनेंगे, यात्रियों को मिलेगी राहत

    जोधपुर
     जोधपुर सिटी रेलवे स्टेशन पर बढ़ते रेल यातायात और यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्लेटफॉर्म विस्तार और यार्ड री-मॉडलिंग का काम तेजी से किया जा रहा है। मौजूदा समय में स्टेशन पर 5 प्लेटफॉर्म हैं जो बढ़ते रेल संचालन और यात्रीभार के कारण कम पड़ रहे हैं। ऐसे में रेलवे ने स्टेशन की क्षमता बढ़ाने के लिए करीब 40.10 करोड़ रुपए की लागत से विकास कार्य शुरू किया है।

    परियोजना के तहत स्टेशन पर दो नए प्लेटफॉर्म संख्या 6 और 7 बनाए जा रहे हैं। इसके साथ ही प्लेटफॉर्म संख्या 5 का चौड़ीकरण और लंबाई बढ़ाने का कार्य भी किया जा रहा है। रेलवे ने इस पूरे कार्य को इसी वर्ष पूरा करने का लक्ष्य रखा है। नए प्लेटफॉर्म तैयार होने के बाद यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और ट्रेनों के संचालन में भी आसानी होगी।

    नए प्लेटफॉर्म पर यात्रियों की सुविधा के लिए कई आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इनमें लिफ्ट, एस्केलेटर, फूड कोर्ट, वॉकवे, शेड और दिव्यांगजन के लिए विशेष व्यवस्थाएं शामिल हैं। इसके अलावा प्लेटफॉर्म संख्या-5 को फुट ओवरब्रिज से जोड़ा जाएगा, जिससे यात्रियों को एक प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म तक पहुंचने में परेशानी नहीं होगी और आवाजाही अधिक सुगम हो जाएगी।

    319 मीटर लंबा होगा प्लेटफॉर्म-5
    रेलवे के अनुसार प्लेटफॉर्म संख्या-5 की लंबाई बढ़ाकर 319 मीटर की जा रही है। इसके लिए करीब 207 मीटर हिस्से में प्लेटफॉर्म का चौड़ीकरण किया जा रहा है, जबकि 80 मीटर हिस्से में लंबाई बढ़ाने का काम किया जा रहा है। इससे एलएचबी रैक वाली लंबी ट्रेनों का संचालन आसानी से किया जा सकेगा और ट्रेनों को प्लेटफॉर्म पर खड़ा करने में आने वाली दिक्कतें कम होंगी।

    बढ़ेगी परिचालन क्षमता
    मंडल रेल प्रबंधक अनुराग त्रिपाठी ने बताया कि यार्ड री-मॉडलिंग का कार्य पूरा होने के बाद जोधपुर स्टेशन की परिचालन क्षमता में काफी बढ़ोतरी होगी। वर्तमान में कई बार प्लेटफॉर्म उपलब्ध नहीं होने के कारण ट्रेनों को पास के स्टेशनों पर रोकना पड़ता है, लेकिन नए प्लेटफॉर्म बनने के बाद ऐसी स्थिति में कमी आएगी।

    उन्होंने बताया कि नए प्लेटफॉर्म और बेहतर व्यवस्था से ट्रेनों के आगमन और प्रस्थान में सुविधा होगी। साथ ही यात्रियों को भी अधिक सुविधाजनक यात्रा अनुभव मिलेगा। रेलवे का मानना है कि इस विकास कार्य के पूरा होने के बाद जोधपुर सिटी रेलवे स्टेशन भविष्य में बढ़ने वाले रेल यातायात का दबाव आसानी से संभाल सकेगा।

  • सहकारिता मॉडल से रोजगार बढ़ाएगी भारत टैक्सी, 30 हजार जुड़े सारथी

    सहकारिता मॉडल से रोजगार बढ़ाएगी भारत टैक्सी, 30 हजार जुड़े सारथी

     जयपुर
    मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि भारत टैक्सी नागरिकों को रोजगार देने के साथ ही स्वामित्व और सम्मान प्रदान करने का सशक्त माध्यम है। व्यक्ति में स्वामित्व की भावना विकसित होने से उसकी कार्यक्षमता, आत्मविश्वास और समर्पण भी कई गुना बढ़ जाता है और यही भावना भविष्य में छोटे उद्यमियों को बड़े उद्योगपति बनने की दिशा में प्रेरित करती है। उन्होंने कहा कि भारत टैक्सी सहकारिता आधारित स्वामित्व मॉडल है, जिसके माध्यम से सारथी अब मालिक भी बन रहे है।

    मुख्यमंत्री शनिवार को एचसीएम रीपा में भारत टैक्सी के शुभारम्भ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व तथा केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की दूरदर्शी सोच से देश में ‘सहकार से समृद्धि’ का संकल्प नए आयाम स्थापित कर रहा है। केन्द्र सरकार के सहयोग से राज्य सरकार भी इसी सोच को धरातल पर लागू कर रही है तथा सहकारिता के माध्यम से रोजगार के नए अवसर सृजित कर रही है। हमारी सरकार ने लगभग 10 लाख नए सदस्यों को सहकारी संस्थाओं से जोड़ने का कार्य किया है, जबकि पूर्ववर्ती सरकार के समय सहकारिता सीमित लोगों के नियंत्रण का माध्यम बन गई थी।

    मुख्यमंत्री ने भारत टैक्सी को दिखाई हरी झंडी
    कार्यक्रम में सहकार टैक्सी को-ऑपरेटिव द्वारा आरसीडीएफ, नगर निगम, जयपुर मेट्रो एवं राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम लिमिटेड के साथ समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान किया गया। इस दौरान 6 सर्वश्रेष्ठ सारथियों को शेयर प्रमाण पत्र वितरित किया गया। कार्यक्रम के उपरांत मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने भारत टैक्सी के 100 से अधिक कैब, बाइक और ऑटो के समूह को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

    सारथी के अधिकारों की रक्षा और भविष्य की सुरक्षा होगी सुनिश्चित
    उन्होंने कहा कि भारत टैक्सी में वाहन चालक सारथी के रूप में स्वयं भागीदार और सहस्वामी हैं। इससे उनकी आय पर किसी प्रकार के अतिरिक्त कमीशन या अन्य कटौती नहीं होगी और उन्हें अपनी मेहनत का पूरा लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था में पांच लाख रुपये तक का दुर्घटना बीमा भी उपलब्ध कराया गया है, जिससे उनके अधिकारों की रक्षा और भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

    भारत टैक्सी से जुड़े 30 हजार से अधिक सारथी
    उन्होंने कहा कि जयपुर में भारत टैक्सी के सॉफ्ट लॉन्च के बाद अब तक 30 हजार से अधिक सारथी इससे जुड़ चुके हैं तथा लगभग सात लाख ग्राहक इस प्लेटफॉर्म का हिस्सा बन चुके हैं। इसके माध्यम से प्रतिदिन हजारों यात्राएं पूरी हो रही हैं। यह सहकारिता आधारित डिजिटल मॉडल के प्रति लोगों के बढ़ते विश्वास का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भारत टैक्सी देश ही नहीं, बल्कि विश्व का सबसे सफल सहकारिता आधारित मोबिलिटी प्लेटफॉर्म बनेगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार विकसित भारत-2047 और विकसित राजस्थान-2047 के विजन के अनुरूप प्रत्येक ग्राम पंचायत और नगरीय निकाय के विकास का रोडमैप तैयार कर रही है। इसमें स्थानीय संसाधनों, कृषि उत्पादन, हस्तशिल्प, वस्त्र उद्योग, रोजगार संभावनाओं तथा प्रोसेसिंग इकाइयों के विकास को प्राथमिकता दी गई है, ताकि गांवों में रोजगार बढ़े।

    उन्होंने कहा कि राजस्थान जीरा, ईसबगोल, सरसों सहित अनेक उपज में देश के अग्रणी राज्यों में है। हमारी सरकार द्वारा कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग इकाइयों की स्थापना को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे किसानों की आय एवं युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों में वृद्धि हो सकेगी। उन्होंने कहा कि दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में भी राजस्थान लगातार प्रगति कर रहा है। ढाई वर्षों में दूध संग्रहण में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है तथा आगामी वर्षों में इसे और विस्तार दिया जाएगा।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान पर्यटन की दृष्टि से समृद्ध राज्य है। यहां मरुस्थल, झीलें, वन्यजीव अभयारण्य, ऐतिहासिक दुर्ग, हवेलियां तथा प्रमुख धार्मिक स्थल हैं। भारत टैक्सी के माध्यम से पर्यटकों को सुगम परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 4 जुलाई को जयपुर मेट्रो फेज-2 का वर्चुअल शिलान्यास किया था। जयपुर में मेट्रो विस्तार से भी भारत टैक्सी प्लेटफॉर्म को लाभ मिलेगा।

    सहकारिता बन रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत आधारशिला
     केन्द्रीय सहकारिता राज्य मंत्री
    केन्द्रीय सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और केन्द्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में सहकारिता क्षेत्र देश के सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि सहकारिता अब केवल ऋण और साख समितियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि कृषि, डेयरी, मत्स्य, बीमा, निर्यात और परिवहन सहित अनेक क्षेत्रों में आमजन के सशक्तीकरण का आधार बन रही है। सहकारिता आज ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत आधारशिला बन चुकी है।
    उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 में स्वतंत्र सहकारिता मंत्रालय की स्थापना के बाद देश में सहकारिता क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन हुए हैं। पिछले पांच वर्षों में मंत्रालय द्वारा पैक्स के कम्प्यूटरीकरण, ई-पैक्स व्यवस्था, बहुउद्देशीय सहकारी समितियों के विस्तार तथा किसानों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने के लिए नई संस्थाओं का गठन शामिल है।

    केन्द्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि भारत टैक्सी सहकारिता मंत्रालय की एक अभिनव पहल है, जिसमें ‘सारथी ही मालिक’ की अवधारणा को साकार किया गया है। इस व्यवस्था में टैक्सी चालक केवल सेवा प्रदाता नहीं, बल्कि सहकारी संस्था का सदस्य और भागीदार भी होगा। उसे यात्रा का भुगतान सीधे प्राप्त होने के साथ-साथ संस्था के लाभांश में भी हिस्सेदारी मिलेगी। उन्होंने कहा कि अब तक देशभर में लगभग 8 लाख सारथी और 41 लाख ग्राहक इस सेवा से जुड़ चुके हैं तथा प्रतिदिन करीब 11 हजार यात्राएं इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से संचालित हो रही हैं। दिल्ली, गुजरात और महाराष्ट्र के बाद अब राजस्थान में इस सेवा का शुभारंभ हुआ है तथा आने वाले समय में इसे देश के 500 शहरों तक विस्तारित किया जाएगा।

    सहकारिता में नवाचारों के लिए राजस्थान बना देश का मॉडल राज्य
    उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में सहकारिता क्षेत्र में राजस्थान की उपलब्धियों की विशेष सराहना करते हुए कहा कि राजस्थान आज देश में सहकारिता में नवाचारों के लिए आदर्श बनकर उभरा है, जो अन्य राज्यों के लिए भी अनुकरणीय है। उन्होंने कहा कि विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना के क्रियान्वयन में राजस्थान प्रथम स्थान पर है। वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 में स्वीकृत 200 गोदामों में से 120 का निर्माण पूर्ण हो चुका है। साथ ही, राज्य में 5 हजार 600 से अधिक पैक्स का ई-पैक्स में रूपांतरण किया जा चुका है तथा इन पर 10 करोड़ से अधिक ऑनलाइन लेनदेन संपन्न हो चुके हैं, जो देश में सर्वाधिक हैं।

    केन्द्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि राजस्थान में लगभग 4 हजार 900 पैक्स बहु-व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़ चुके हैं तथा सामान्य सेवा केंद्र, प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र, किसान उत्पादक संगठन और जन औषधि केंद्र जैसी सेवाएं गांव-गांव तक पहुंचाई जा रही हैं। साथ ही, लगभग 6 हजार 750 पैक्स भारतीय बीज सहकारी समिति (बीबीएसएसएल) के सदस्य बन चुके हैं, जो देश में सर्वाधिक हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह के आग्रह पर बीबीएसएसएल की टिशू कल्चर प्रयोगशाला की स्थापना के लिए 50 एकड़ भूमि उपलब्ध कराने के तत्काल निर्देश दिए, यह सहकारिता क्षेत्र के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

    सहकारिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम कुमार दक ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में सहकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि 6 जुलाई को नई दिल्ली के भारत मंडपम में सहकारिता मंत्रालय के स्थापना दिवस समारोह में राजस्थान को सहकार सदस्यता अभियान, अन्न भंडारण योजना, ई-पैक्स गठन, पैक्स के कम्प्यूटरीकरण सहित अनेक नवाचारों में देश में प्रथम स्थान प्राप्त होने पर एकमात्र राज्य के रूप में प्रतिनिधित्व का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि भारत टैक्सी आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

    कार्यक्रम में सांसद मंजू शर्मा, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, सचिव सहकारिता मंत्रालय डॉ. आशीष कुमार भूटानी, अध्यक्ष सहकार टैक्सी कॉ-ऑपरेटिव लि. जयेन मेहता सहित सहकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं बड़ी संख्या में भारत टैक्सी के सारथी उपस्थित रहें।

  • रोडवेज यात्रियों को राहत, आधुनिक सुविधाओं से लैस 144 बसें शुरू

    रोडवेज यात्रियों को राहत, आधुनिक सुविधाओं से लैस 144 बसें शुरू

    जयपुर
    राजस्थान रोडवेज के यात्रियों के लिए रविवार का दिन बड़ी खुशखबरी लेकर आया। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अजमेर रोड स्थित हीरापुरा बस टर्मिनल से राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम (रोडवेज) की 144 नई ब्लू लाइन एक्सप्रेस बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री एवं परिवहन मंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा, रोडवेज और परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। बसों को रवाना करने से पहले विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद मुख्यमंत्री ने हरी झंडी दिखाकर बसों को प्रदेश के अलग-अलग डिपो के लिए रवाना किया गया।

    22 डिपो को मिली नई बसें
    नई बसों के शामिल होने से प्रदेश के कई प्रमुख रूटों पर रोडवेज की सेवाएं मजबूत होंगी। रोडवेज ने इन बसों को 22 अलग-अलग डिपो में भेजा है। इससे उन क्षेत्रों में भी यात्रियों को राहत मिलेगी, जहां बसों की संख्या कम होने के कारण लंबा इंतजार करना पड़ता था। विभाग का मानना है कि नई बसों के संचालन से शहरों और जिलों के बीच यात्रा पहले से अधिक आसान होगी।

    बसों में क्या-क्या होंगे फीचर्स?
    इन ब्लू लाइन एक्सप्रेस बसों में नए लुक के साथ-साथ कई आधुनिक सुविधाएं भी दी गई हैं। सभी बसें BS-VI मानकों के अनुसार तैयार की गई हैं। यात्रियों के मोबाइल चार्ज करने के लिए चार्जिंग पॉइंट, बस की जानकारी दिखाने वाले एलईडी डिस्प्ले और बस की हर समय लोकेशन बताने वाला व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम (VLTS) लगाया गया है। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट (ECU) भी बसों में दी गई है, जिससे संचालन और बेहतर होगा। आज बसों में प्रोग्राम के दोरान एलईडी डिस्पले पर प्रधानमंत्री मोदी जी का मन की बात कार्यक्रम चलाया गया।

    महिलाओं की सुरक्षा के लिए भी खास तैयारी
    रोडवेज ने नई बसों में सुरक्षा पर भी खास फोकस किया है। हर बस में पैनिक बटन लगाया गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद मिल सके। वहीं वीएलटीएस सिस्टम के जरिए कंट्रोल रूम से बसों की लाइव लोकेशन पर नजर रखी जा सकेगी, जिससे संचालन के साथ सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत होगी। वहीं नई बसों की सीटिंग व्यवस्था भी यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। इनमें एक तरफ तीन और दूसरी तरफ दो सीटों का लेआउट रखा गया है। इससे यात्रियों को बैठने में ज्यादा आराम मिलेगा और लंबी दूरी की यात्रा करना उनके लिए पहले से ज्यादा आरमदायक होगा।

  • राजस्थान पुलिस सीएलजी समितियों में राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने का बड़ा फैसला

    राजस्थान पुलिस सीएलजी समितियों में राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने का बड़ा फैसला

    जयपुर
    राजस्थान में पुलिस और आम जनता के बीच बेहतर तालमेल, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और आपराधिक गतिविधियों पर लगाम कसने के उद्देश्य से गठित सामुदायिक संपर्क समूहों (CLG – Community Liaison Group) की व्यवस्था में भजनलाल सरकार ने एक बड़ा और नीतिगत बदलाव किया है। गृह विभाग की ओर से जारी आधिकारिक अधिसूचना के तहत अब राजनीतिक दलों और उनसे जुड़े संगठनों के कार्यकर्ता भी थाना व पंचायत स्तर पर गठित होने वाली सीएलजी समितियों के सदस्य बन सकेंगे। राज्य सरकार ने राजस्थान पुलिस नियम, 2008 के नियम 12(5) के क्लॉज (सी) को पूरी तरह से निरस्त कर दिया है, जिसके तहत पहले किसी भी राजनीतिक दल के सक्रिय कार्यकर्ताओं या पदाधिकारियों के सीएलजी सदस्य बनने पर स्पष्ट पाबंदी लगी हुई थी। इस फैसले के बाद प्रदेश भर के थानों में स्थानीय स्तर पर सामाजिक व राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदलने के आसार हैं और जमीनी स्तर पर राजनीतिक कार्यकर्ताओं को पुलिस प्रशासन के साथ सीधे संवाद का एक नया मंच मिल गया है।

    गृह विभाग द्वारा 19 जुलाई को जारी अधिसूचना के बाद राजस्थान की पुलिसिंग और प्रशासनिक व्यवस्था में एक नई बहस छिड़ गई है।

    नियम 12(5)(सी) को हटाया गया
     साल 2008 में तत्कालीन भाजपा (वसुंधरा राजे) सरकार के दौरान बने राजस्थान पुलिस नियमों में यह प्रावधान जोड़ा गया था कि सीएलजी को पूरी तरह गैर-राजनीतिक और निष्पक्ष रखा जाएगा।

    राजनीतिक कार्यकर्ताओं को रास्ता साफ
    अब इस प्रतिबंधात्मक क्लॉज को हटा दिए जाने के बाद सत्ताधारी दल सहित सभी राजनीतिक दलों से जुड़े स्थानीय नेता, कार्यकर्ता और सामाजिक-राजनीतिक पृष्ठभूमियों वाले लोग सीएलजी सदस्यता के लिए आधिकारिक रूप से पात्र हो गए हैं।

    संगठन स्तर पर नई जिम्मेदारी
    राजनीतिक विश्लेषक इसे सरकार द्वारा जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को प्रशासनिक सहयोग और सामाजिक पहचान देने की एक बड़ी पहल के रूप में देख रहे हैं।

    क्या काम करती है सीएलजी?
    आम नागरिकों और पुलिस प्रशासन के बीच थाना स्तर पर सामंजस्य बनाने में सीएलजी सदस्यों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। सीएलजी सदस्य स्थानीय स्तर पर शांति व्यवस्था बनाए रखने, त्योहारों व धार्मिक जुलूसों के दौरान सौहार्द कायम करने, प्राकृतिक आपदाओं के समय सहायता पहुंचाने और अपराध नियंत्रण में पुलिस को गोपनीय सुझाव देने का काम करते हैं।

    वर्तमान में राजस्थान के सभी पुलिस थानों और पंचायतों में मिलाकर 75 हजार से अधिक सीएलजी सदस्य सक्रिय हैं। नियम के अनुसार प्रत्येक पंचायत स्तर पर 5 सदस्य और थाना स्तर पर 30 सदस्य नियुक्त करने का प्रावधान है। इन सदस्यों की नियुक्ति संबंधित थाना अधिकारी (SHO) और वृत्ताधिकारी (CO) की सिफारिश पर जिला पुलिस अधीक्षक (SP) द्वारा की जाती है।

    फैसले पर गर्माई सियासत
    सरकार के इस आदेश के सार्वजनिक होते ही राजस्थान के राजनीतिक हलकों में तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इस निर्णय का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि भाजपा और आरएसएस के लोग अब थानों में सीधी एंट्री लेकर कानून-व्यवस्था को प्रभावित करना चाहते हैं। इससे पुलिस की निष्पक्षता और जनता का भरोसा दोनों खत्म होगा।

    भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि सीएलजी में समाज के सभी वर्गों और राजनीतिक वर्ग का भी संतुलित प्रतिनिधित्व होना चाहिए। ऐसे लोगों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए जिनकी सोच सकारात्मक हो और जो समाज में आपसी तालमेल बिठा सकें।

    क्या निष्पक्ष पुलिसिंग पर पड़ेगा असर?
    गृह विभाग के इस आदेश के बाद अब जिला स्तर पर पुलिस कप्तानों (SP) को नई सीएलजी समितियों के गठन के दौरान नए मापदंडों का पालन करना होगा। कुछ पूर्व पुलिस अधिकारियों और प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि राजनीतिक कार्यकर्ताओं की सीधी एंट्री से कई मामलों में स्थानीय पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं और आपसी गुटबाजी थानों तक पहुंच सकती है।

    वहीं सरकार से जुड़े लोगों का मानना है कि स्थानीय स्तर पर जनसमस्याओं को उठाने और पुलिस व जनता के बीच पुल का काम करने में राजनीतिक व सामाजिक रूप से सक्रिय कार्यकर्ताओं का अनुभव काफी मददगार साबित होगा।

     

  • क्लेम भुगतान में देरी पर बीमा कंपनियों को देना होगा 12 प्रतिशत ब्याज

    क्लेम भुगतान में देरी पर बीमा कंपनियों को देना होगा 12 प्रतिशत ब्याज

    जयपुर
     प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में किसानों के हितों की रक्षा के लिए राज्य सरकार ने बीमा कंपनियों पर सख्ती बढ़ा दी है। अब सर्वे में देरी, क्लेम लटकाने या नियमों की अनदेखी करने पर कंपनियों को जुर्माना और ब्याज दोनों चुकाने होंगे। कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल के निर्देश पर कृषि विभाग ने शुक्रवार को 80 पृष्ठों की नई गाइडलाइन जारी की। अब कटाई के बाद (पोस्ट हार्वेस्ट) नुकसान की सूचना मिलने के 48 घंटे के भीतर बीमा कंपनी को सर्वेयर नियुक्त करना होगा।

    ऐसा नहीं करने पर प्रति घटना 20 हजार रुपए का जुर्माना लगेगा। सर्वेयर नियुक्त होने के बाद 10 दिन में सर्वे पूरा करना अनिवार्य होगा। देरी होने पर प्रत्येक लंबित प्रकरण पर एक हजार रुपए का अतिरिक्त दंड लगेगा। यदि फसल कटाई प्रयोग (क्रॉप कटिंग एक्सपेरिमेंट) में बीमा कंपनी सह-पर्यवेक्षण नहीं करती है तो कृषि विभाग की रिपोर्ट अंतिम मानी जाएगी और कंपनी उस पर आपत्ति नहीं कर सकेगी।

    21 दिन से अधिक देरी पर 12% ब्याज
    यदि किसी किसान का बीमा प्रस्ताव निरस्त होने के बावजूद दावा प्रक्रिया शुरू होने से पहले प्रीमियम वापस नहीं किया जाता, तो बीमा कंपनी को संबंधित किसान का दावा चुकाना होगा। वहीं क्लेम भुगतान में 21 दिन से अधिक की देरी होने पर भुगतान की तिथि तक 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा।

    सबलेट पर भी रोक
    चयनित बीमा कंपनी अपना काम किसी दूसरी बीमा कंपनी, संस्था, ज्वाइंट वेंचर या बीमा एजेंट को सबलेट नहीं कर सकेगी। शिकायतों का निस्तारण तहसील, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की शिकायत निवारण प्रणाली के माध्यम से होगा।

    प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की पड़ताल: राजस्थान का 64% कृषि क्षेत्र अब भी फसल बीमा से बाहर
    प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना पर हजारों करोड़ खर्च होने के बावजूद राजस्थान का 64% कृषि क्षेत्र अब भी बीमा सुरक्षा से बाहर है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य के कुल कृषि क्षेत्र का केवल 36% हिस्सा ही बीमित हो सका। सबसे अधिक कवरेज चूरू में 77% रही, जबकि धौलपुर में यह महज 5%, करौली में 7% और दौसा में 9% दर्ज की गई। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार पिछले पांच वर्ष में किसानों को 18,189.16 करोड़ का बीमा दावा मिला। सबसे अधिक भुगतान चूरू (2,459.63 करोड़), हनुमानगढ़ (2,253.59 करोड़), जोधपुर (1,570.94 करोड़), जालोर (1,392.02 करोड़), नागौ (1,287.89 करोड़) और बीकानेर (1,101.64 करोड़ रुपए) में हुआ। वहीं राजसमंद (4.66 करोड़), धौलपुर (7.23 करोड़) और करौली (9.51 करोड़) सबसे पीछे रहे।

    बीमा कंपनियों ने कमाए 8,568.40 करोड़ रुपए
    पिछले पांच वर्षों में योजना के तहत 26,757.56 करोड़ रुपए प्रीमियम जमा हुआ। इसमें किसानों का अंश 4,650.78 करोड़, राज्य सरकार का 11,253.68 करोड़ और केंद्र सरकार का 10,853.10 करोड़ रुपए रहा। इसी अवधि में किसानों को 18,189.16 करोड़ रुपए का क्लेम मिला। ऐसे में बीमा कंपनियों ने 8,568.40 करोड़ रुपए का मुनाफा कमाया।

    फसल बीमा से दूरी के प्रमुख कारण
    -क्लेम मिलने में देरी
    -नुकसान के मुकाबले कम मुआवजा
    -सर्वे और आकलन पर विवाद
    -जागरूकता का अभाव
    -स्वैच्छिक व्यवस्था के बाद गैर-ऋणी किसानों की घटती भागीदारी

  • कारगिल युद्ध में राजस्थान की रेल पटरियां बनीं सेना की जीवनरेखा

    कारगिल युद्ध में राजस्थान की रेल पटरियां बनीं सेना की जीवनरेखा

     जयपुर
    कारगिल युद्ध के दौरान देश की नजरें बर्फ से ढकी चोटियों पर डटी भारतीय सेना पर थीं, लेकिन हजारों किलोमीटर दूर पश्चिमी राजस्थान की रेल पटरियां भी जीत की अहम कड़ी बनी हुई थीं। कारण था कि राजस्थान के सीमावर्ती रेलवे स्टेशन भारतीय सेना की लॉजिस्टिक लाइफलाइन बन गए थे। यहां से गुजरने वाली हर सैन्य ट्रेन सिर्फ डिब्बों का काफिला नहीं थी। बल्कि जवानों, टैंकों, तोपों, गोला-बारूद, ईंधन और देश की उम्मीदों को मोर्चे तक पहुंचाने का जरिया थी।

    दरअसल, साल 1999 में भारत-पाकिस्तान के बीच कारगिल युद्ध शुरू होते ही रेलवे ने अपने परिचालन को युद्धकालीन जरूरतों के अनुरूप ढाल दिया। जोधपुर, बीकानेर, बाड़मेर और जैसलमेर स्थित सैन्य ठिकानों से लगातार विशेष सैन्य ट्रेनें जम्मू और पठानकोट की ओर रवाना होती रहीं। रेलवे यार्डों में सामान्य माल की जगह टैंक, तोपें, सैन्य वाहन और गोला-बारूद से भरी सैन्य रेक नजर आने लगीं। स्टेशन मास्टर, लोको पायलट, गार्ड, कंट्रोलर और ट्रैकमैन सहित हर रेलकर्मी उस दौर में युद्ध का मौन सिपाही बन गया था।

    इधर, युद्ध में 17 रेलकर्मियों ने दी थी शहादत
    साल 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान गडरारोड के पास सेना की रसद लेकर जा रही ट्रेन पर पाकिस्तानी सेना ने हमला कर दिया था। युद्ध में रेलवे के 17 रेल कर्मचारियों ने देश सेवा में अपने प्राणों का बलिदान दिया।

    ये स्टेशन बने थे केंद्र: रेलवे ट्रैक से बंधी थी उम्मीदें
    रेलवे स्टेशन     अंतरराष्ट्रीय सीमा से दूरी
    मुनाबाव            लगभग 2 किमी
    गडरा रोड           लगभग 8 किमी
    श्रीगंगानग र      लगभग 25 किमी
    अनूपगढ़            लगभग 30 किमी
    बाड़मेर              लगभग 100 किमी
    जैसलमेर           लगभग 110 किमी

    हाई अलर्ट पर था पूरा रेल नेटवर्क
    पश्चिमी सीमा पर बढ़े तनाव के बीच राजस्थान का रेल नेटवर्क भी हाई अलर्ट पर रहा। संवेदनशील रेल पुलों, यार्डों और स्टेशनों की सुरक्षा बढ़ाई गई। जोधपुर-जैसलमेर, जोधपुर-बाड़मेर-मुनाबाव और बीकानेर-सूरतगढ़-अनूपगढ़ जैसे रणनीतिक रेल मार्गों पर सेना की जरूरतों के अनुरूप निर्बाध परिचालन जारी रखा गया। सैन्य ट्रैफिक की लगातार निगरानी की गई।
    -अमित सुदर्शन, सीपीआरओ, उत्तर पश्चिम रेलवे