Category: राजस्थान

  • अरावली की चोटियों पर कंक्रीट का कब्जा, रिसर्च में सामने आई बिल्डरों की मनमानी

    अरावली की चोटियों पर कंक्रीट का कब्जा, रिसर्च में सामने आई बिल्डरों की मनमानी

    उदयपुर
    अरावली पहाड़ियों के संरक्षण का जायजा लेने और स्थानीय लोगों से बातचीत करने के लिए 9 व 10 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट की विशेष समिति उदयपुर के दौरे पर आ रही है। इस अहम दौरे से ठीक पहले एक वैज्ञानिक शोध ने झीलों की नगरी में अरावली की चोटियों पर चल रहे कंक्रीट के अवैध निर्माणों की पोल खोल दी है। सैटेलाइट इमेजरी आधारित इस अध्ययन ने साबित किया कि यूडीए क्षेत्र के नो-कंस्ट्रक्शन जोन यानी अरावली की चोटियों और संवेदनशील ढलानों पर धड़ल्ले से सैकड़ों निजी होटल, रिसॉर्ट और कमर्शियल प्रोजेक्ट्स खड़े कर दिए गए हैं।

    मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय की डॉ. सीमा जालान और इसरो (एनआरएससी) के वरिष्ठ वैज्ञानिक दंडबाथुला गिरिबाबू के इस शोध ने न केवल बिल्डर्स और प्रशासनिक तंत्र की मिलीभगत को उजागर किया है, बल्कि यह भी दिखाया कि कैसे नीतिगत खामियों का फायदा उठाकर झीलों को कैचमेंट देने वाली पहाड़ियों का क्षरण किया गया। राजस्थान हाईकोर्ट के कड़े रुख और सुप्रीम कोर्ट समिति के आगमन के बीच यह रिपोर्ट प्रशासन के लिए आईना साबित हो रही है।

    पर्यटन और आबादी के दबाव ने ली पहाड़ियों की बलि
    साल 2010 में उदयपुर में पर्यटकों की संख्या लगभग 7.5 लाख थी, जो 2024 में उछलकर 18.5 लाख तक पहुंच गई। शहर में अब पर्यटकों के लिए करीब 850 संपत्तियां मौजूद हैं, जिनमें 30 फाइव स्टार होटल और 80 रिसॉर्ट शामिल हैं। दूसरी ओर, यूडीए का क्षेत्रफल जो 1999-2012 तक 350.9 वर्ग किमी था, वह 30% बढ़कर 2024 में 457 वर्ग किमी हो गया है। आबादी भी 4.7 लाख से बढ़कर 7 लाख तक पहुंच गई। इसी दबाव की आड़ में पहाड़ियों पर अतिक्रमण हुआ।

    साल 1972 से 2024: ऐसे बदला अरावली का भूगोल
    शोधकर्ताओं ने साल 1972 के 'कोरोना सैटेलाइट' के ऐतिहासिक डेटा की तुलना 2024 की आधुनिक सैटेलाइट तस्वीरों से की, जिसके निष्कर्ष बेहद चौंकाने वाले हैं। अरावली की पहाड़ियों का सबसे तेज और विनाशकारी क्षरण साल 2014 के बाद हुआ है। कुल संवेदनशील निर्माणों में से 50 प्रतिशत का निर्माण साल 2017 के बाद हुआ। साल 2023-24 के दौरान पहाड़ियों पर 40 बड़े नए प्रोजेक्ट्स खड़े हो गए।

    160 में से 144 निर्माण निजी
    रिसर्च के दौरान यूडीए क्षेत्र की पहाड़ियों और तलहटी में 160 निर्माणों का अध्ययन किया गया। सरकारी और ऐतिहासिक धरोहर को हटा दें तो इनमें से 144 विशुद्ध रूप से निजी निर्माण हैं।

        होटल और रिसॉर्ट्स: 64 (लगभग 50%)
        शैक्षणिक संस्थान / फार्म हाउस / रिहायशीः 33
        कमर्शियल/इंडस्ट्रियल इकाइयां: 10%

    30 डिग्री ढलान तक पहुंचे निर्माण
        पहाड़ियों पर निर्माण के लिए ढलान और ऊंचाई के सख्त नियम हैं, लेकिन यहां सब दरकिनार हैं।
        37 बड़े व्यावसायिक/निजी प्रतिष्ठान और फार्महाउस ऐसी ढलानों पर हैं, जो 11.33 डिग्री से अधिक तीखे हैं और 600 मीटर से अधिक ऊंचाई पर हैं।
        कई होटल और रिसॉर्ट 20 डिग्री से अधिक की तीव्र ढलान और 700 मीटर से ज्यादा ऊंचाई पर बना दिए गए हैं।
        हालात ऐसे हैं कि 30 डिग्री से अधिक ढलान वाली अत्यंत संवेदनशील पहाड़ियों पर भी अवैध निर्माण जारी है।

    इसरो का अचूक समाधान: एक क्लिक में खत्म होगा बिल्डर्स का खेल
    नासा के लेजर सैटेलाइट डेटा का उपयोग करके वैज्ञानिकों ने खुले तौर पर उपलब्ध डिजिटल एलिवेशन मॉडल्स का परीक्षण किया। इसके अध्ययन में एसआरटीएम जिसका एरर 9.54 मीटर है और एलोस पलसार जिसका एरर 10.78 मीटर की कमियों को उजागर किया। इन्हीं का इस्तेमाल प्रशासन ने किया, जिसकी वजह से गलत जगहों पर भी निर्माण हुआ। पहाड़ी क्षेत्रों के लिए फेबडेम तकनीक सबसे सटीक है, जिसका एरर मात्र 7.72 मीटर है। यह तकनीक पेड़ों और इमारतों को हटाकर जमीन की सटीक ऊंचाई दिखाती है।

    यदि प्रशासन इस तकनीक से तैयार थ्री डी मैप पर अपने राजस्व (खसरा) मैप की लेयर चढ़ा दे, तो एक क्लिक में पता चल सकता था कि किस खसरा नंबर पर निर्माण की अनुमति दी जा सकती है और कौन सा हिस्सा पूरी तरह नो-कंस्ट्रक्शन जोन में आता है।

    मनभावन नजारों की कीमत चुका रहे पहाड़
    सबसे ज्यादा 60% (86 निर्माण) उदयपुर की झीलों के पश्चिम, उत्तर-पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम में केंद्रित हैं। नाई, बूझड़ा, गोरैला और सज्जनगढ़ की पहाड़ियों पर झीलों और जंगलों के सुरम्य दृश्यों को भुनाने के लिए आतिथ्य उद्योग ने नियमों को ताक पर रख दिया।

    सड़क के केंद्र से ढलान मापने का खेल
    बिल्डर्स को ये अनुमतियां कैसे मिली, जवाब है नीतिगत खामी। प्रदेश सरकार के कंजरवेशन ऑफ हिल इन अर्बन एरियाज रेगुलेशन 2018 और 2024-25 के नए ड्राफ्ट में ढलान नापने का आधार सबसे पास के कनेक्टिंग रोड का सेंटरलाइन तय किया था। इससे बेसलाइन बढ़ जाती है, जिससे पहाड़ का ढलान कागजों में कम दिखता है। इसी अस्पष्टता का फायदा उठाकर बिल्डर्स ने धड़ाधड़ अनुमतियां लीं और प्रशासन ने इसकी प्रमाणिकता जांची ही नहीं।

    राजस्थान हाईकोर्ट का कड़ा रुख
    राजस्थान उच्च न्यायालय (जोधपुर पीठ) ने 9 मई 2024 को झील संरक्षण समिति बनाम राजस्थान सरकार मामले में आदेश दिया था कि पहाड़ियों के सटीक सीमांकन के लिए तकनीक आधारित विकल्पों का उपयोग किया जाए। सुप्रीम कोर्ट कमेटी भी इसी तकनीकी सुदृढ़ता की पड़ताल करेगी।

  • जयपुर में एग्रीविजन कॉन्फ्रेंस का शुभारंभ, राज्यपाल ने कृषि नवाचार पर दिया जोर

    जयपुर में एग्रीविजन कॉन्फ्रेंस का शुभारंभ, राज्यपाल ने कृषि नवाचार पर दिया जोर

    जयपुर
    राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि कृषि और इससे जुड़े संबद्ध व्यवसाय भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ रहे हैं और आज भी देश की आर्थिक एवं सामाजिक प्रगति में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों को केवल परंपरागत व्यवसाय के रूप में नहीं देखें, बल्कि आधुनिक तकनीक, नवाचार और उद्यमिता से जोड़कर इसे रोजगार और समृद्धि का सशक्त माध्यम बनाएं।

     राज्यपाल बागडे शनिवार को महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से संबद्ध राजस्थान कृषि महाविद्यालय सभागार में एग्रीविजन के नॉर्थ वेस्ट जोन की द्वितीय कॉन्फ्रेंस के शुभारंभ समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत की कृषि परंपरा अत्यंत समृद्ध रही है। मध्यकालीन भारत की अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव कृषि एवं इससे जुड़े व्यवसायों पर टिकी थी। समय के साथ कृषि तकनीकों में भी अनेक नवाचार हुए, जो भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का प्रमाण हैं।

     उन्होंने युवाओं को परंपरागत कृषि आधारित व्यवसायों से जुड़ने तथा उन्हें आधुनिक तकनीक के माध्यम से नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि आज कृषि क्षेत्र में तकनीक, अनुसंधान, स्टार्टअप, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन के व्यापक अवसर उपलब्ध हैं। युवा इन अवसरों को पहचानकर कृषि को उद्यमिता से जोड़ सकते हैं। दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में नवाचार और उद्यमिता विकास में युवाओं की भूमिका पर विशेषज्ञों द्वारा मार्गदर्शन दिया जाएगा।

     राज्यपाल ने मेवाड़ की ऐतिहासिक एवं सामरिक महत्ता का उल्लेख करते हुए महाराणा प्रताप के संघर्ष और दूरदर्शिता को याद किया। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप न केवल आत्म गौरव और राष्ट्र रक्षा के लिए युद्ध नहीं किए, अपितु विपरीत परिस्थितियों में भी कृषि और जनजीवन के उत्थान के लिए महत्वपूर्ण प्रयास किए। उनका जीवन युवाओं को कठिन परिस्थितियों में भी आत्मनिर्भरता, स्वाभिमान और नवाचार के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

     बागडे ने भारतीय ज्ञान परंपरा की वैज्ञानिक समृद्धता का उल्लेख करते हुए कहा कि आर्यभट्ट, भास्कराचार्य, महर्षि भार्गव, महर्षि पाराशर सहित अनेक ऋषि-मुनियों ने अपने प्रयोगों और अनुसंधानों से ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय वैज्ञानिक परंपरा में प्रकृति, कृषि, गणित और खगोल विज्ञान से जुड़े अनेक ऐसे ज्ञान-विषय मौजूद रहे हैं, जिनकी प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी गौरवशाली ज्ञान परंपरा को समझें और आधुनिक विज्ञान एवं तकनीक के साथ उसका समन्वय करते हुए नए प्रयोग करें।

     राज्यपाल बागडे ने अपने उद्बोधन में नारी शक्ति के महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने डूंगरपुर की वीर बाला कालीबाई, बीकानेर की किरण देवी, झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, उद्योगपति सुधा मूर्ति तथा इंजीनियर कमला भागवत जैसी महिलाओं के प्रेरक प्रसंग सुनाए। उन्होंने कहा कि महिलाओं ने इतिहास से लेकर आधुनिक विज्ञान, शिक्षा, उद्योग और राष्ट्र निर्माण तक हर क्षेत्र में अपनी क्षमता सिद्ध की है। युवाओं को इन प्रेरणादायी व्यक्तित्वों से सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए।

     समारोह में राज्यपाल बागडे ने एग्रीविजन की स्मारिका का विमोचन किया। इसके साथ ही महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की उपलब्धियों पर आधारित पुस्तिका का भी विमोचन किया गया।

     राज्यपाल बागडे ने महाराणा प्रताप सभागार के बाहर संत रविदास जी के जीवन एवं विचारों पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया और इसकी सराहना की। उन्होंने युवाओं से संत रविदास जी के जीवन एवं संदेश से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।

     इस दौरान राज्यपाल बागडे ने राजस्थान कृषि महाविद्यालय परिसर में महाराणा प्रताप की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया। उन्होंने महाराणा प्रताप के साहस, स्वाभिमान और राष्ट्रहित के लिए किए गए संघर्ष को युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बताया। राज्यपाल ने कार्यक्रम स्थल पर भारत माता की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर नमन किया।

     राज्यपाल  बागडे ने कृषि महाविद्यालय परिसर में ‘हरियालो राजस्थान’ अभियान के तहत पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने प्रकृति और पर्यावरण के संरक्षण में प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी को आवश्यक बताते हुए अधिकाधिक पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने का आह्वान किया।

  • राजस्थान में चुनावी बिगुल से पहले तैयारी तेज, प्रत्याशियों के खर्च की सीमा तय

    राजस्थान में चुनावी बिगुल से पहले तैयारी तेज, प्रत्याशियों के खर्च की सीमा तय

    जयपुर
    राजस्थान में आगामी शहरी निकायों और पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों को लेकर चुनावी सुगबुगाहट तेज हो गई है। राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनावी तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। इस बार के चुनावों में सबसे महत्वपूर्ण पहलू महिलाओं का आरक्षण प्रतिशत और प्रत्याशियों द्वारा किया जाने वाला चुनाव खर्च रहेगा। शहरी निकायों और पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण का गणित अलग-अलग तय किया गया है। स्वायत्त शासन विभाग और पंचायती राज विभाग ने इस संबंध में लॉटरी प्रक्रिया की तैयारियां पूरी कर ली हैं।

    राजस्थान में इस बार भी शहरी निकाय और पंचायती राज चुनावों में महिला आरक्षण का अनुपात अलग-अलग रहने वाला है।

    पंचायती राज चुनाव: पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा।

    शहरी निकाय चुनाव: स्वायत्त शासन विभाग द्वारा आयोजित निकाय चुनावों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण ही मिलेगा।

    वर्गवार आरक्षण: अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की श्रेणियों में महिलाओं को आरक्षण इसी 33% और 50% के तय अनुपात के आधार पर ही आवंटित किया जाएगा।

    स्वायत्त शासन विभाग ने 33 फीसदी महिला आरक्षण के हिसाब से तथा पंचायती राज विभाग ने 50 फीसदी महिला आरक्षण के हिसाब से लॉटरी तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

    क्यों नहीं लागू हो पाया 50% आरक्षण?
    उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने वर्ष 2008 में पंचायत और शहरी निकाय दोनों स्तरों पर महिलाओं का आरक्षण 33 से बढ़ाकर 50 फीसदी करने का निर्णय लिया था। हालांकि, शहरी निकायों में 50 फीसदी महिला आरक्षण का मामला कानूनी अड़चनों के कारण सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया।

    अदालत से हरी झंडी न मिलने के कारण निकायों में महिला आरक्षण 33 फीसदी पर ही रुका हुआ है। कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, संविधान के अनुच्छेद 243 डी (Article 243D) में संशोधन के बाद ही शहरी निकायों में 50 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू किया जा सकता है।

    वर्तमान में बिहार, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश और केरल जैसे राज्यों में शहरी निकायों में 50% महिला आरक्षण लागू है।

    पार्षद प्रत्याशियों के लिए चुनाव खर्च की सीमा बढ़ी
    राज्य निर्वाचन आयोग ने विभिन्न निकायों के लिए प्रत्याशी खर्च सीमा का नया ढांचा तय कर दिया है।

    नगर निगम पार्षद: प्रत्याशी चुनाव प्रचार पर अधिकतम ₹3.50 लाख (3.5 लाख) तक खर्च कर सकेंगे।

    नगर परिषद पार्षद: चुनाव खर्च की सीमा ₹50 हजार बढ़ाकर अब ₹2.50 लाख (2.5 लाख) कर दी गई है।

    नगर पालिका पार्षद: पार्षद प्रत्याशी के लिए खर्च की सीमा ₹1.50 लाख (1.5 लाख) रखी गई है।

    कड़े नियम: लाउडस्पीकर बैन, गाड़ियों के लिए स्पेशल परमिशन

    निर्वाचन आयोग ने निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न कराने के लिए कड़े नियम लागू किए हैं।

    चुनावी खर्च का ब्योरा: चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद सभी प्रत्याशियों को 15 दिन के भीतर अपने पूरे चुनावी खर्च का विस्तृत हिसाब आयोग के समक्ष प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।

    मतदान के दिन वाहनों का उपयोग: यदि मतदान के दिन कोई प्रत्याशी वाहन/गाड़ी का इस्तेमाल करना चाहता है, तो उसे इसके लिए निर्वाचन अधिकारी से अलग से लिखित अनुमति लेनी होगी।

    लाउडस्पीकर पर पूर्ण प्रतिबंध: चुनावी कार्यालयों पर लाउडस्पीकर लगाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा। उल्लंघन करने पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

    आयोग ने जारी किया ₹29.64 करोड़ का बजट
    चुनाव प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करने और चुनावी कर्मचारियों के टीए-डीए (TA-DA) व अन्य व्यवस्थाओं के लिए आयोग ने भारी-भरकम बजट स्वीकृत किया है।

    10 नगर निगमों के लिए: निर्वाचन अधिकारियों को कुल ₹10.31 करोड़ आवंटित किए गए हैं।

    नगर पालिकाओं व नगर परिषदों के लिए: ₹19.33 करोड़ का बजट जारी किया गया है।

    कुल चुनावी आवंटन: राज्य निर्वाचन आयोग ने कुल मिलाकर ₹29.64 करोड़ की राशि फील्ड अधिकारियों को जारी कर दी है।

  • केवाईसी के बहाने सुरक्षा पाइप बिक्री पर ब्रेक, गैस कंपनियों को चेतावनी

    केवाईसी के बहाने सुरक्षा पाइप बिक्री पर ब्रेक, गैस कंपनियों को चेतावनी

    जयपुर
     जयपुर समेत राज्य के सभी जिलों में तीनों गैस एजेसियों (भारत गैस, इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान) के 38 लाख गैस उपभोक्ताओं की 16 अगस्त तक नॉन फ्यूल रेवन्यू फार्मूले की आड़ में गैस कनेक्शन की केवाईसी के नाम पर सुरक्षा पाइप, फॉयर बॉल बेच कर करोड़ों रुपए कमाने पर ब्रेक लग गया है। पत्रिका में गुरुवार को एलपीजी केवाईसी के नाम पर 100 करोड़ रुपए की वसूली की तैयारी शीर्षक से समाचार प्रमुखता से प्रकाशित किया गया। समाचार प्रकाशित होने के बाद तीनों गैस कंपनियों में दिन भर खलबली मची रही।

    राज्य स्तरीय समन्वयक मनोज गुप्ता ने तीनों गैस कंपनियों के अधिकारियों के साथ दिनभर बैठक की। शाम को उन्होंने राजस्थान के गैस उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर दी। उन्होंने गैस कंपनियों को निर्देश दिए कि गैस एजेंसी पर 16 अगस्त तक उपभोक्ताओं के गैस कनेक्शन की केवाईसी ही की जाए। किसी भी उपभोक्ता को केवाईसी के नाम पर सुरक्षा पाइप, फायर बॉल व अन्य सामग्री नहीं बेची जाए।

    अगर उपभोक्ता अवधि पार सुरक्षा पाइप को बदलने की मांग करे तब ही उसे 199 रुपए की कीमत का नया सुरक्षा पाइप बेचा जाए। गुप्ता ने कहा कि गैस एजेंसियों पर गैस कनेक्शन की केवाईसी निःशुल्क है। गैस उपभोक्ताओं की केवाईसी को लेकर किसी भी तरह की दिक्कतों का समाधान के लिए तीनों गैस कंपनियों के अधिकारियों के नंबर जारी किए हैं।

    इंडियन ऑयल
    जयपुर डिवीजनल ऑफिस-9925081012
    जोधपुर डिवीजनल ऑफिस-9925081012

    मंत्री बोले- ये मामला बेहद गंभीर
    खाद्य व नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा ने कहा कि गैस एजेंसी पर सुरक्षा पाइप, फायर बॉल जैसी सामग्री नहीं खरीदने वाले उपभोक्ताओं की केवाईसी नहीं करना बेहद गंभीर है। उपभोक्ता अपनी शिकायत विभाग के टोल फ्री नंबर 14435 पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। प्रदेश के सभी गैस उपभोक्ताओं को 16 अगस्त तक केवाईसी करना जरूरी है।

    राजस्थान में गैस उपभोक्ताओं को गैस कनेक्शन की केवाईसी कराने के लिए 16 अगस्त की डेडलाइन है। तीनों गैस कंपनियों के 38 लाख गैस उपभोक्ताओं की केवाईसी पेंडिंग है। उपभोक्ताओं की यह पेडेंसी ही तीनों गैस कंपनियों (इंडेन, भारत और हिंदुस्तान पेट्रोलियम) के लिए खजाना भरने का अवसर बन गया है। कंपनियां ने नॉन फ्यूल रेवन्यू फार्मूला लागू कर एजेंसियों पर केवाईसी कराने पहुंच रहे उपभोक्ताओं के साथ जयपुर समेत पूरे राज्य में खुली लूट शुरू कर दी है। उपभोक्ताओं को सीधे कहा जा रहा है कि 190 रुपए का सुरक्षा पाइप, 999 रुपए की कीमत की फायर बॉल खरीदने पर ही केवाईसी होगी। अनुमान के अनुसार कंपनियां सामग्री बेचने के नाम पर 100 करोड रुपए उपभोक्ताओं की जेब से निकालने की जुगत में हैं। जयपुर शहर में भी कई गैस एजेंसियों पर केवाईसी के नाम पर खुली लूट का यह खेल बुधवार को पत्रिका संवाददाता की पड़ताल में सामने आया।

    पटेल नगर, 22 गोदाम
    पत्रिका संवाददाता 22 गोदाम क्षेत्र में पटेल नगर स्थित इंडेन गैस एजेंसी पर पहुंचा। यहां केवाईसी कराने आए उपभोक्ताओं को दो टूक कहा जा रहा था कि केवाईसी करानी है तो 190 रुपए का सुरक्षा पाइप लेना ही होगा। किसी तरह केवाईसी हो जाए और 16 अगस्त के बाद महंगा सिलेंडर नहीं लेना पड़े, इस भय से उपभोक्ता 190 रुपए का पाइप खरीदने को मजबूर थे।

    इनका कहना
    एजेंसी संचालकों का अभी पहला काम उपभोक्ताओं की केवाईसी करना है। अगर कोई एजेंसी संचालक पाइप नहीं खरीदने पर केवाईसी नहीं करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
    -मनोज गुप्ता, राज्य स्तरीय समन्वयक, गैस कंपनियां

    हम तो उपभोक्ता की सुरक्षा के लिहाज से यह पाइप दे रहे हैं। सॉफ्टवेयर में अगर कनेक्शन का सुरक्षा पाइप अवधिपार है तो ही उपभोक्ता को लेने के लिए कहा जा रहा है।
    -दिनेश शर्मा, मैनेजर, इंडेन, पटेल नगर 22 गोदाम, इंडेन

     

  • राजस्थान सरकार ने प्राचार्य नियुक्ति नियम बदलकर पारदर्शी चयन व्यवस्था लागू की

    राजस्थान सरकार ने प्राचार्य नियुक्ति नियम बदलकर पारदर्शी चयन व्यवस्था लागू की

    उदयपुर
    राजस्थान सरकार ने राजकीय एवं राजमेस मेडिकल कॉलेजों में प्राचार्य एवं नियंत्रक के चयन और नियुक्ति संबंधी नियमों में संशोधन करते हुए नई व्यवस्था लागू कर दी है। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने 11 नवंबर 2025 को जारी दिशा-निर्देशों में बदलाव कर नया परिपत्र जारी किया है। संशोधित नियमों के तहत अब नियुक्ति प्रक्रिया को पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाने का प्रयास किया गया है। नई व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।

    संशोधित नियमों के अनुसार, राज्य के सरकारी एवं राजमेस मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के मानकों के अनुरूप पात्र वरिष्ठ आचार्य-प्राचार्य एवं नियंत्रक पद के लिए आवेदन कर सकेंगे। यदि राज्य में पात्र उम्मीदवार उपलब्ध नहीं होते हैं तो केंद्र अथवा अन्य राज्य सरकारों के मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत चिकित्सा शिक्षकों को भी आवेदन का अवसर मिलेगा। इससे योग्य अभ्यर्थियों का दायरा पहले की तुलना में बढ़ जाएगा।

    उच्चस्तरीय समिति करेगी चयन
    नई चयन प्रक्रिया में प्राचार्य एवं नियंत्रक का चयन साक्षात्कार के जरिए होगा। इसके लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में चयन समिति गठित होगी। समिति में कार्मिक विभाग, चिकित्सा शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तथा संबंधित चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलपति सदस्य होंगे। समिति अभ्यर्थियों की प्रशासनिक दक्षता और शैक्षणिक योग्यता का मूल्यांकन कर चयन करेगी।

    समिति प्रत्येक मेडिकल कॉलेज के लिए तीन अभ्यर्थियों का पैनल तैयार करेगी। अनुमोदन मिलने के बाद चयनित अभ्यर्थी को संबंधित मेडिकल कॉलेज में नियुक्त किया जाएगा। राज्य सरकार आवश्यकता पड़ने पर चयनित प्राचार्य एवं नियंत्रक का स्थानांतरण किसी अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेज में भी कर सकेगी।

    उम्र की बाध्यता खत्म
    संशोधित नियमों में बड़ा बदलाव अधिकतम आयु सीमा को लेकर किया गया है। वर्ष 2025 के आदेश में प्राचार्य एवं नियंत्रक पद के लिए केवल 57 वर्ष तक के चिकित्सा शिक्षक ही आवेदन के पात्र थे। नए संशोधित नियमों में यह शर्त हटा दी गई है। इससे अब सेवा में कार्यरत वरिष्ठ एवं अनुभवी चिकित्सा शिक्षकों के लिए भी प्राचार्य बनने का अवसर खुल गया है।

    3 वर्ष का कार्यकाल
    चयनित प्राचार्य एवं नियंत्रक का प्रारंभिक कार्यकाल तीन वर्ष का होगा। इसके बाद एक बार में एक वर्ष तथा अधिकतम तीन वर्ष तक पुनर्नियुक्ति अथवा सेवा विस्तार दिया जा सकेगा। यदि किसी अधिकारी के खिलाफ गंभीर आरोप, भ्रष्टाचार या प्रशासनिक अनियमितता की शिकायत मिलती है तो राज्य सरकार जांच भी करा सकेगी।

    अनुभव की शर्त तय
    आवेदक के लिए अधीक्षक अथवा अतिरिक्त प्राचार्य पद पर तीन वर्ष और विभागाध्यक्ष के रूप में दो वर्ष का अनुभव अनिवार्य रखा गया है। चयनित अधिकारी को कार्यभार संभालने से पहले एक माह तक वर्तमान प्राचार्य के अधीन पीएमसी डेजिग्नेट के रूप में कार्य करना होगा। इस दौरान कॉलेज के प्रशासनिक कार्य, बैठकों और फाइलों की जानकारी दी जाएगी।

  • OBC राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर बड़ा खुलासा, 10-11 जातियों को मिला सबसे अधिक प्रतिनिधित्व

    OBC राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर बड़ा खुलासा, 10-11 जातियों को मिला सबसे अधिक प्रतिनिधित्व

    जयपुर
    राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनैतिक प्रतिनिधित्व) आयोग ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को रिपोर्ट सौंप दी, जिसमें खुलासा हुआ है कि ओबीसी की 10-11 जातियों में जातिवार एक हजार से अधिक लोगों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिल पाया। सूत्रों के अनुसार ओबीसी व अति पिछड़ा वर्ग (एमबीसी) को आरक्षण का अलग-अलग प्रावधान नहीं है। 309 नगरीय निकायों में से 60 के अध्यक्ष पद ओबीसी के लिए आरक्षित किए जाएंगे। लगभग इसी अनुपात में पंचायती राज संस्थाओं में आरक्षण रहेगा।

    यह रिपोर्ट कैबिनेट की बैठक में रखी जाएगी। इस बार लॉटरी पर्ची के बजाय कम्प्यूटर से निकाली जाएगी। मुख्यमंत्री आवास पर आयोग अध्यक्ष पूर्व जिला न्यायाधीश मदन लाल भाटी ने सदस्य राजीव सक्सेना, मोहन मोरवाल, गोपाल कृष्ण और पवन मंडाविया के साथ मुख्यमंत्री से मुलाकात की। इस दौरान मंत्री मदन दिलावर, झाबर सिंह खर्रा और जोगाराम पटेल भी मौजूद रहे। इस रिपोर्ट के आधार नगरीय निकाय एवं पंचायती राज संस्थाओं में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण दिया जाएगा। अब राजस्थान सरकार आयोग की सिफारिशों का अध्ययन कर आगे की प्रक्रिया अपनाएगी।

    दो भाग में है रिपोर्ट, करीब 900 पन्ने
    ओबीसी आयोग की रिपोर्ट दो भाग में है और दोनों को मिलाकर करीब 900 पन्नों में जानकारी दी गई। इसमें से पहले भाग में जनाधार, फील्ड सर्वे, पिछले दो पंचायत-निकाय चुनाव से संबंधित डेटा, केंद्र व राज्य की ओबीसी से संबंधित योजनाएं, सर्वे में सामने आया ओबीसी का जातिवार राजनीतिक प्रतिनिधित्व का विवरण है। करीब 74.85 लाख परिवारों का सर्वे किया गया, जिसके तहत 19 प्रश्न पूछे गए। इनमें परिवार में राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिलने से संबंधित प्रश्न भी शामिल था।

    इसके अनुसार जाट जाति की प्रदेश में सबसे अधिक आबादी है और राजनीतिक प्रतिनिधित्व भी सबसे अधिक इसी जाति का रहा। दूसरे भाग में पंचायत-निकायों के लिए वार्ड और पदवार ओबीसी का प्रतिनिधित्व सुझाया गया है। जानकारी में आया है कि पिछले दो चुनावों में आरक्षण के कारण ओबीसी को कुल के 10 से 14 प्रतिशत पदों पर प्रतिनिधित्व मिला, लेकिन सामान्य पदों पर जीत के कारण पंचायतों में यह प्रतिशत 46 व शहरी निकायों में 38 प्रतिशत पहुंच गया।

    कानूनी प्रावधान में बदलाव नहीं
    सूत्रों के अनुसार आयोग ने आरक्षण से संबंधित कानूनी प्रावधानों में किस प्रकार के बदलाव की सिफारिश नहीं की है। आरक्षण की सही तस्वीर लॉटरी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सामने आएगी।

    गोल्डन कवर में सौंपी गई रिपोर्ट
    मुख्यमंत्री को आयोग की ओर से गोल्डन कलर के कवर में लपेटकर रिपोर्ट दी गई, वहीं आयोग प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को तीन रंग वाला गुलदस्ता भेंट किया।

    इन जिलों में ट्राइबल की 100 फीसदी रिजर्व सीट
    सलूम्बर, बांसवाड़ा व डूंगरपुर।

    पूरा कर रहे वादाः सीएम
    मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय चुनावों को समय पर कराने का जो वादा किया था, उसकी ओर हम तेजी से बढ़ रहे हैं। वन स्टेट-वन इलेक्शन व्यवस्था से विकास और जनकल्याण के कार्यों को निरंतर गति मिलेगी। इससे पैसे, समय एवं संसाधनों की बचत होगी।

  • राजस्थान में रिटायर्ड कर्मचारियों को ओपीएस के लिए अंतिम अवसर, जारी हुए नए नियम

    राजस्थान में रिटायर्ड कर्मचारियों को ओपीएस के लिए अंतिम अवसर, जारी हुए नए नियम

    जयपुर
    राजस्थान सरकार ने पेंशन योजनाओं को लेकर महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए राज्य के हजारों सेवानिवृत्त कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। वित्त विभाग द्वारा जारी नए परिपत्र के अनुसार, 1 जनवरी 2004 से 31 मार्च 2022 के बीच सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों को अब नई पेंशन योजना (NPS) के स्थान पर पुरानी पेंशन योजना (OPS) को चुनने का एक और अंतिम अवसर प्रदान किया गया है।

    बता दें कि वित्त विभाग ने स्थिति स्पष्ट करते हुए इस विकल्प को चुनने की अंतिम समय सीमा 30 सितंबर 2026 निर्धारित की है। इसके पश्चात किसी भी परिस्थिति में कर्मचारियों का आवेदन या ओपीएस चुनने का विकल्प स्वीकार नहीं किया जाएगा। वहीं, सरकार ने यह भी साफ किया है कि वर्तमान में सेवारत कर्मचारी पहले की तरह ही ओपीएस के दायरे में बने रहेंगे।

    क्या हैं प्रमुख शर्तें और नियम?
    यह छूट विशेष रूप से 1 जनवरी 2004 से 31 मार्च 2022 की अवधि के बीच सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों पर ही लागू होगी।

    जीपीएफ ब्याज दर जमा शर्त: एनपीएस के तहत सेवानिवृत्ति पर प्राप्त हुई राशि को कर्मचारियों को जीपीएफ की ब्याज दरों के समान राशि के साथ सरकारी खाते में वापस जमा कराना होगा।

    पेंशन लाभ की प्रभावी तिथि: निर्धारित प्रक्रिया पूरी कर राशि जमा कराने वाले पात्र कर्मचारियों को 1 अप्रैल 2022 से राजस्थान सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1996 के तहत पुरानी पेंशन योजना का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा।

    गौरतलब है कि राज्य सरकार ने 19 मई 2022 को एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए एनपीएस को समाप्त कर दिया था और 1 अप्रैल 2022 से ओपीएस व्यवस्था को दोबारा लागू कर दिया था। उसी दौरान 31 मार्च 2022 तक रिटायर्ड हुए कर्मचारियों के लिए शर्त रखी गई थी कि एनपीएस फंड वापसी पर ही उन्हें पुरानी पेंशन दी जाएगी।

    कई कर्मचारियों के विकल्प चुनने से चूक जाने के कारण वित्त विभाग ने अब अंतिम तिथि बढ़ाकर 30 सितंबर 2026 कर दी है, ताकि सभी पात्र पूर्व कर्मचारी समय रहते अपनी औपचारिकताएं पूरी कर पेंशन का लाभ उठा सकें।

  • प्राकृतिक आपदाओं से राहत, राजस्थान में 1 करोड़ हेक्टेयर से ज्यादा फसल का बीमा

    प्राकृतिक आपदाओं से राहत, राजस्थान में 1 करोड़ हेक्टेयर से ज्यादा फसल का बीमा

    जयपुर
    मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का व्यापक स्तर पर क्रियान्वयन हुआ है। इसके माध्यम से प्राकृतिक आपदाओं एवं प्रतिकूल मौसम के कारण फसल को हुए नुकसान की स्थिति में लाखों किसानों को आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। राजस्थान में देश में सबसे अधिक लगभग 62 लाख 58 हजार किसानों को योजना में नामांकित किया गया है।

    प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत वर्ष 2025-26 में राज्य के लगभग 2 करोड़ 82 लाख हेक्टेयर सकल फसली क्षेत्र में 1 करोड़ हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र को योजना के अंतर्गत बीमित किया गया है, जो देश में सर्वाधिक है। राज्य के कुल फसली क्षेत्र में बीमित क्षेत्र 36 प्रतिशत है, जो देश के औसत 32 प्रतिशत से बेहतर है। यह प्रतिशत झारखंड और छत्तीसगढ़ के बाद सबसे अधिक है।  

    राजस्थान में हुआ व्यापक फसल बीमा कवरेज
    राज्य में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में वर्ष 2025-26 में चूरू में 13 लाख 35 हजार हेक्टेयर से अधिक, बाड़मेर में 11 लाख 48 हजार हेक्टेयर व बीकानेर में 9 लाख 27 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र को बीमित किया गया है। चूरू में 77 प्रतिशत, बाड़मेर में 69 प्रतिशत और नागौर में 47 प्रतिशत सकल फसली क्षेत्र का बीमा कवरेज हुआ है।
     
    अन्नदाताओं को किया 18 हजार 189 करोड़ रुपये के दावों का भुगतान
    राज्य में वर्ष 2025-26 तक गत पांच वर्षों में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना एवं पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना के तहत कुल 5 करोड़ 21 लाख हेक्टेयर से अधिक का बीमित क्षेत्र दर्ज किया गया तथा किसानों द्वारा 4 हजार 650 करोड़ रुपये से अधिक का प्रीमियम हिस्सा जमा किया गया, जो देशभर में सबसे अधिक है। इस दौरान राज्य में 18 करोड़ 81 लाख से अधिक आवेदन नामांकित हुए और किसानों को 18 हजार 189 करोड़ रुपये से अधिक के दावों का भुगतान किया गया।
     
    राज्य में वर्ष 2024-25 व 2025-26 में फसल बीमा का दायरा व्यापक हुआ है और राज्य सरकार द्वारा किसानों तक बीमा सुरक्षा पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य हो रहा है। इस दौरान खरीफ और रबी सीजन को मिलाकर लगभग 1 लाख करोड़ रुपये की 7 करोड़ 53 लाख से अधिक की फसल पॉलिसियां जारी की गईं। इसमें बीमा दावों के अंतर्गत 4 हजार 498 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि वितरित की गई।

    राज्य सरकार की प्रभावी नीतियों के कारण यह योजना प्रदेश के लाखों अन्नदाताओं को सशक्त करते हुए एक मजबूत ढाल बनी है। मौसम की अनिश्चितता, अतिवृष्टि, सूखा, ओलावृष्टि सहित विभिन्न प्राकृतिक जोखिमों से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत मिल रहे बीमा कवरेज से उन्हें आर्थिक सुरक्षा मिली है।

    क्या है प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना
    प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों को प्राकृतिक आपदाओं (ओलावृष्टि, सूखा, अकाल), कीटों और बीमारियों के कारण फसल के नुकसान से वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती है। इसमें किसानों को लागत प्रभावी प्रीमियम पर फसल बीमा दिया जाता है। योजना के तहत किसान, राज्य सरकार और केंद्र सरकार मिलकर प्रीमियम का भार वहन करते हैं। अगर बीमित फसल को निर्धारित जोखिमों के कारण नुकसान होता है, तो पात्र किसान को बीमा दावे के माध्यम से आर्थिक राहत दी जाती है। 

  • ओबीसी सर्वे रिपोर्ट के बाद पंचायत-निकाय चुनाव की तैयारियां होंगी तेज

    ओबीसी सर्वे रिपोर्ट के बाद पंचायत-निकाय चुनाव की तैयारियां होंगी तेज

    जयपुर
     ओबीसी (राजनीतिक) आयोग पंचायत-निकाय चुनाव में ओबीसी आरक्षण को लेकर अपनी रिपोर्ट आज राजस्थान सरकार को सौंपेगा। आयोग की ओर से मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से बुधवार का समय मांगा गया है। ओबीसी (राजनीतिक) आयोग ने 10 जुलाई से प्रदेश में राजधारा सर्वे मोबाइल एप के जरिए ओबीसी परिवारों से जानकारी ली। सत्रह दिन चले सर्वे के आधार पर बताया जा रहा है कि प्रदेश में ओबीसी आबादी करीब 3.63 करोड़ है।

    इस जानकारी के आधार पर आयोग ने पंचायतों व निकायों में ओबीसी आरक्षण के लिए रिपोर्ट को अंतिम रूप दे दिया है। अब इसकी छपाई का कार्य चल रहा है। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार यह सर्वे किया, जिसके लिए सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने मोबाइल एप तैयार किया था। इस रिपोर्ट के आधार पर ओबीसी के लिए आरक्षण तय होगा। आयोग का गत वर्ष 9 मई को सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश मदन लाल भाटी की अध्यक्षता में हुआ था। मोहन मोरवाल, प्रो. राजीव सक्सेना, एडवोकेट गोपाल कृष्ण व पवन मंडाविया को सदस्य बनाया गया था।

    अब निकाली जाएगी लॉटरी
    उधर, पंचायत-निकाय चुनाव के लिए पंचायती राज विभाग और स्वायत्त शासन विभाग ने भी तैयारियां तेज कर दी है। दोनों विभागों के दिशानिर्देशों के अनुसार जिला स्तर पर वार्डों के आरक्षण की लॉटरी निकाली जाएगी। लॉटरी निकालने के समय राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे। लॉटरी के आधार पर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, व महिलाओं के लिए आरक्षित वार्डों का निर्धारण किया जाएगा।

    राजस्थान में सितंबर में प्रस्तावित नगरीय निकाय चुनावों की तैयारियां तेज करते हुए स्वायत्त शासन विभाग ने सभी जिला कलक्टरों को वार्डों के आरक्षण की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए अधिकृत कर दिया है। इस संबंध में विभाग ने अधिसूचना जारी कर दी है। राज्य की 309 नगरीय निकायों में चुनाव प्रस्तावित हैं। अधिसूचना के तहत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अग्रिम वर्ग की महिलाओं तथा महिलाओं के लिए आरक्षित वार्डों का निर्धारण लॉटरी के माध्यम से कराने का अधिकार भी संबंधित जिला कलक्टरों को दिया गया है।

    15 अगस्त से 15 नवम्बर के बीच चुनाव
    लॉटरी के आधार पर वार्ड आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पंचायती राज विभाग व स्वायत्त शासन विभाग की ओर से राज्य निर्वाचन आयोग को चुनाव कराने की सिफारिश भेजी जाएगी। इसके आधार पर राज्य निर्वाचन आयोग हाईकोर्ट में दी गई अंडरटेकिंग के अनुसार 15 अगस्त को चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करेगा।

  • सुप्रीम कोर्ट के आदेश का असर, हाईवे के दोनों तरफ 40 मीटर में निर्माण और लैंड कन्वर्जन पर लगी रोक

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश का असर, हाईवे के दोनों तरफ 40 मीटर में निर्माण और लैंड कन्वर्जन पर लगी रोक

    जयपुर 

    राजस्थान में नेशनल हाईवे पर अब 40 मीटर तक के एरिया में किसी भी निर्माण की अनुमति नहीं मिलेगी। रेवेन्यू डिपार्टमेंट ने सभी कलेक्टर को आदेश जारी करके अगले आदेशों तक ऐसे मामलों में जमीनों के कन्वर्जन पर रोक लगा दी।

    दरअसल कुछ महीने पहले फलोदी स्थि​त नेशनल हाईवे पर भीषण सड़क हादसा हुआ था। इसके बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने फरवरी 2026 को प्रदेश के सभी नेशनल हाईवे से नियमों के तहत 75 मीटर तक (हाईवे के मिड पॉइंट से) दूरी में बने सभी होटल, ढाबों का संचालन बंद करने और अति​क्रमण हटाने के आदेश दिए थे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2026 में आदेश देते हुए 40 मीटर तक आवासीय और 75 मीटर तक कॉमर्शियल एक्टिविटी बंद करके नो-कंस्ट्रक्शन जोन बनाने के ​लिए कहा था।

    इसी आदेशों की पालना में रेवेन्यू डिपार्टमेंट ने हाल ही एक नोटिफिकेशन जारी करके नेशनल हाईवे के मिड पॉइंट से 40 मीटर की दूरी तक आ रही सभी जमीनों के लैंड यूज कन्वर्जन करने पर रोक लगा दी है।

    इसी आदेशों की पालना में रेवेन्यू डिपार्टमेंट ने हाल ही एक नोटिफिकेशन जारी करके नेशनल हाईवे के मिड पॉइंट से 40 मीटर की दूरी तक आ रही सभी जमीनों के लैंड यूज कन्वर्जन करने पर रोक लगा दी है। 

    रेवेन्यू डिपार्टमेंट ने 40 मीटर तक आवासीय और 75 मीटर तक कॉमर्शियल उपयोग के लिए जमीन के लैंड यूज पर रोक लगाई है। 40 मीटर के बाद केवल आवासीय निर्माण की अनुमति दी जा सकेगी। 

    वहीं हाईवे के मिड पॉइंट से 75 मीटर तक कोई भी ढाबा, दुकान, रेस्स्टोरेंट, होटल, मोटल का संचालन नहीं होगा। न ही इस उपयोग के लिए मौजूदा कृषि भूमि का भू-उपयोग परिवर्तन किया जाएगा।

    75 मीटर तक कॉमर्शियल एक्टिविटी पर रोक
    रेवेन्यू डिपार्टमेंट ने 40 मीटर तक आवासीय और 75 मीटर तक कॉमर्शियल उपयोग के लिए जमीन के लैंड यूज पर रोक लगाई है। 40 मीटर के बाद केवल आवासीय निर्माण की अनुमति दी जा सकेगी।

    वहीं हाईवे के मिड पॉइंट से 75 मीटर तक कोई भी ढाबा, दुकान, रेस्स्टोरेंट, होटल, मोटल का संचालन नहीं होगा। न ही इस उपयोग के लिए मौजूदा कृषि भूमि का भू-उपयोग परिवर्तन किया जाएगा।