Category: राजस्थान

  • राजस्थान का अनोखा परिवार! एक-एक कर कई सदस्यों ने क्रैक की UPSC, लोग कहने लगे ‘IAS फैक्ट्री’

    राजस्थान का अनोखा परिवार! एक-एक कर कई सदस्यों ने क्रैक की UPSC, लोग कहने लगे ‘IAS फैक्ट्री’

    नई दिल्ली

    आईएएस, आईपीएस, आईएफएस अफसर बनाने वाली यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे कठिन परीक्षा माना जाता है। हर साल करीब 8 से 10 लाख अभ्यर्थी सालोंसाल तैयारी कर इसका फॉर्म भरते हैं लेकिन करीब 1000 का ही चयन हो पाता है। यानी सक्सेस रेट 0.1 फीसदी से 0.2 फीसदी तक ही। लेकिन राजस्थान के एक घर में ये तथ्य और आंकड़े लागू नहीं होते। सवाई माधोपुर जिले के बामनवास स्थित नाहरसिंहपुरा गांव का एक परिवार इन दिनों 'IAS फैक्ट्री' के नाम से जाना जा रहा है। इस परिवार ने अब तक 6 भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी देश को दिए हैं।

    अर्नब प्रताप सिंह ने यूपीएससी 2022 परीक्षा में ऑल इंडिया 430वीं रैंक हासिल की थी। अर्नब का सफर मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज, लखनऊ से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के साथ शुरू हुआ। उनकी स्कूली शिक्षा सिटी मॉन्टेसरी स्कूल (CMS), लखनऊ और दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS), दिल्ली से हुई। अर्नब प्रताप सिंह के पिता बाबूलाल मीणा 1991 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। वह वर्तमान में उत्तर प्रदेश में सेवारत हैं। परिवार की मुखिया वीना मीणा भी 1993 बैच की आईएएस अधिकारी हैं। वीणा मीणा भी उत्तर प्रदेश कैडर में सेवारत हैं।

    ताऊजी ने शुरू की थी IAS बनने की परंपरा
     खबर के मुताबिक अर्नब के ताऊ डॉ. बट्टीलाल मीणा भी सेवानिवृत्त IAS अधिकारी हैं, जिन्होंने परिवार में इस परंपरा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अर्नब के ताऊजी की बेटी और उनके एक अन्य चाचा की बेटी शेफाली ने 2016 में यूपीएससी परीक्षा पास की और आईएएस अधिकारी बनीं। ये प्रतिभाशाली बहनें अब गुजरात कैडर में कार्यरत हैं।

    यूपी का मिश्रा परिवार भी है मिसाल
    राजस्थान के अलावा उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के लालगंज कस्बे का मिश्रा परिवार सिविल सेवा परीक्षा में अपनी ऐतिहासिक सफलता के लिए पूरे देश में जाना जाता है। इस परिवार के चार भाई-बहनों ने UPSC परीक्षा पास कर IAS और IPS अधिकारी बनने का गौरव हासिल किया है। उनकी सफलता आज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। इस सफलता की शुरुआत योगेश मिश्रा ने वर्ष 2013 में की, जब उन्होंने UPSC परीक्षा पास की।

    इसके बाद बहन माधवी मिश्रा ने वर्ष 2015 में UPSC परीक्षा पास कर IAS अधिकारी बनने का सपना पूरा किया। फिर बड़ी बहन क्षमा मिश्रा ने आर्थिक कठिनाइयों का सामना करते हुए वर्ष 2016 में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में जगह बनाई। सबसे छोटे भाई लोकेश मिश्रा ने भी बाद में UPSC परीक्षा पास कर IAS अधिकारी बनकर परिवार की इस ऐतिहासिक उपलब्धि को पूरा किया। आज मिश्रा परिवार की सफलता पूरे प्रतापगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में चर्चा का विषय है।

  • कभी जंगली सब्जी था कीकोड़ा, अब किसानों को दे रहा बेहतर आमदनी

    कभी जंगली सब्जी था कीकोड़ा, अब किसानों को दे रहा बेहतर आमदनी

    जयपुर
     कभी खेतों की वाड़, मेड़ों और जंगल की झाड़ियों में स्वतः उगने वाला कीकोड़ा अब किसानों की नई उम्मीद बन गया है। बरसात के सीमित मौसम में मिलने वाली ये पारंपरिक सब्जी अब किसानों के लिए अतिरिक्त आय का मजबूत जरिया बन रही है। स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता और मांग के चलते कीकोड़ा की कीमतों में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है। राजस्थान के कई जिलों में यह 120 से 300 रुपए प्रति किलो तक बिक रहा है जिससे किसानों को सामान्य सब्जियों की तुलना में बेहतर मुनाफा मिल रहा है।

    कभी ग्रामीण परिवार केवल अपने उपयोग के लिए खेतों की वाड़ और झाड़ियों से कीकोड़ा तोड़कर लाते थे, लेकिन अब इसकी मांग इतनी बढ़ गई है कि कई किसान इसकी व्यावसायिक खेती करने लगे हैं। स्थानीय मंडियों से लेकर जयपुर, उदयपुर, जोधपुर और अहमदाबाद तक इसकी आपूर्ति हो रही है।

    सिर्फ दो-तीन महीने का सीजन, इसलिए रहती है ऊंची कीमत
    कीकोड़ा का उत्पादन मुख्य रूप से जुलाई से सितंबर तक ही होता है। सीमित अवधि और कम उपलब्धता के कारण बाजार में इसकी कीमत अन्य हरी सब्जियों की तुलना में कई गुना अधिक रहती है। बारिश के मौसम में इसकी मांग लगातार बढ़ती है, जबकि आपूर्ति सीमित होने से किसानों को अच्छे दाम मिल जाते हैं।

    डॉक्टर भी बताते हैं फायदेमंद
    कीकोड़ा में विटामिन-सी, फाइबर, आयरन, कैल्शियम और एंटीऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। आयुर्वेद में इसे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, पाचन तंत्र मजबूत करने और मौसमी संक्रमण से बचाव के लिए उपयोगी माना गया है। यही वजह है कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है।

    कम लागत, ज्यादा मुनाफा
    कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि कीकोड़ा की खेती में अन्य सब्जियों की तुलना में लागत कम आती है। बेल वाली यह फसल बरसात में तेजी से बढ़ती है और रासायनिक दवाओं की आवश्यकता भी अपेक्षाकृत कम पड़ती है। यदि किसानों को उन्नत बीज, तकनीकी मार्गदर्शन और विपणन की सुविधा मिले तो यह प्रदेश की महत्वपूर्ण नकदी फसल बन सकती है।

    क्या कहते हैं किसान
    उदयपुर जिले के बिछडी निवासी किसान चुनीलाल डांगी का कहना है कि पहले कीकोड़ा खेत की वाड़ में अपने आप उग जाता था और घर में ही खा लेते थे। अब व्यापारी गांव तक खरीदने आने लगे हैं। अच्छी कीमत मिलने से अतिरिक्त आमदनी हो रही है।

    गोटीपा निवासी किसान श्रवण सिंह देवल का कहना है कि बरसात के मौसम में कीकोड़ा की अच्छी मांग रहती है। मंडी में ले जाने पर तुरंत बिक जाता है। कम मेहनत में अच्छी कमाई होने से अब इसकी देखभाल भी पहले से ज्यादा करने लगे हैं।

    कीकोड़ा क्यों बन रहा है ''हरा सोना''
        खेतों की वाड़ और झाड़ियों से निकलकर होटलों तक पहुंचा।
        केवल बरसात में उपलब्ध होने से बाजार में ऊंची कीमत।
        औषधीय गुणों के कारण बढ़ रही उपभोक्ताओं की मांग।
        कम लागत में किसानों को अच्छा लाभ।
        प्रदेश में व्यावसायिक खेती की बढ़ रही संभावनाएं।

    इनका कहना है
    कीकोड़ा एक पौष्टिक एवं औषधीय महत्व की सब्जी है। इसकी व्यावसायिक खेती की अच्छी संभावनाएं हैं। यदि किसान वैज्ञानिक तरीके से इसकी खेती करें और उचित विपणन व्यवस्था मिले तो यह उनकी आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
    भावना डांगी, सहायक कृषि अधिकारी, डबोक

  • राजस्थान सीमा पर ड्रोन ड्रॉपिंग नेटवर्क सक्रिय, हेरोइन और विदेशी हथियार बरामद हुए

    राजस्थान सीमा पर ड्रोन ड्रॉपिंग नेटवर्क सक्रिय, हेरोइन और विदेशी हथियार बरामद हुए

    बीकानेर
     पाकिस्तान की ओर से ड्रोन के जरिए नशे और हथियारों की तस्करी अब सीमावर्ती इलाकों के लिए गंभीर सुरक्षा चुनौती बन चुकी है। वर्ष 2026 के पहले सात महीनों में भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा से 69 किलो 808 ग्राम हेरोइन ड्रोन के माध्यम से भारतीय सीमा में पहुंचाई गई, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत करीब 304 करोड़ रुपए आंकी गई है। ताजा कार्रवाई में खाजूवाला क्षेत्र से 10 किलो हेरोइन, 11 विदेशी पिस्टल और 100 कारतूस बरामद होने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे नेटवर्क की जांच तेज कर दी है।

    जांच एजेंसियों के अनुसार तस्करी का नेटवर्क अब श्रीगंगानगर जिले के करणपुर, रायसिंहनगर, रावला, हिन्दूमलकोट, केसरीसिंहपुर, जैतसर और बीकानेर के खाजूवाला तक सक्रिय हो चुका है। तस्कर रात के अंधेरे में ड्रोन के जरिए खेतों में हेरोइन और हथियार गिराते हैं, जिन्हें स्थानीय संपर्कों की मदद से आगे सुरक्षित ठिकानों तक पहुंचाया जाता है। पुलिस, बीएसएफ, एनसीबी और सीआईडी की संयुक्त जांच में सामने आया है कि कुछ ग्रामीण युवाओं को पैसों का लालच देकर ड्रोन से गिराई गई खेप उठाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। इसके बाद यह खेप विभिन्न राज्यों में सक्रिय नेटवर्क तक पहुंचाई जाती थी।

    नशे के साथ हथियारों की भी घुसपैठ
    सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि ड्रोन के जरिए हेरोइन के साथ विदेशी हथियार भेजने का उद्देश्य केवल तस्करी नहीं, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों में संगठित अपराध और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करना भी है। इस कारण ड्रोन आधारित तस्करी को अब 'नार्को-टेरर' के नए स्वरूप के रूप में देखा जा रहा है।

    एंटी-ड्रोन सिस्टम पर बढ़ा फोकस
    लगातार बढ़ रही ड्रोन गतिविधियों को देखते हुए सीमा पर एंटी-ड्रोन सिस्टम, ड्रोन रडार, इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वित कार्रवाई को और मजबूत किया जा रहा है, ताकि सीमा पार से होने वाली ड्रोन ड्रॉपिंग पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

    दो मामलों ने बढ़ाई एजेंसियों की चिंता
    अप्रैल में पूगल क्षेत्र में सड़क हादसे के बाद एक स्कूटी की डिग्गी से 14 किलो हेरोइन बरामद हुई थी। अब खाजूवाला में 10 किलो हेरोइन और विदेशी हथियारों की बरामदगी ने इस नेटवर्क की गंभीरता उजागर कर दी है। दोनों मामलों में खेप ले जाने वाले आरोपियों का संबंध पाली और जैतारण से सामने आने के बाद पुलिस इन क्षेत्रों पर भी विशेष निगरानी रख रही है।

    इस साल ड्रोन ड्रॉपिंग: प्रमुख घटनाक्रम
    9 जनवरी: खाजूवाला से 500 ग्राम हेरोइन
    10 जनवरी: अनूपगढ़ से 4.008 किलो हेरोइन, 3 गिरफ्तार
    11 फरवरी: खाजूवाला से 2.25 किलो हेरोइन
    26 फरवरी: खाजूवाला में 5 विदेशी पिस्टल, 325 कारतूस
    1 मार्च: रावला से 1 किलो हेरोइन
    9 मार्च: रायसिंहनगर से 6.4 किलो हेरोइन
    26 मार्च: रावला से 10 किलो हेरोइन, 5 गिरफ्तार
    5 अप्रैल: करणपुर से 12.167 किलो हेरोइन
    6 अप्रैल: करणपुर से 2.340 किलो हेरोइन
    7 अप्रैल: करणपुर से 1.5 किलो हेरोइन
    18 अप्रैल: रायसिंहनगर से 759 ग्राम हेरोइन
    26 अप्रैल: केसरीसिंहपुर से 1 किलो हेरोइन
    27 जून: जैतसर से 10.5 किलो हेरोइन
    20 जुलाई: हिन्दूमलकोट से 1 किलो हेरोइन
    2 अगस्त: खाजूवाला से 10 किलो हेरोइन, 11 विदेशी पिस्टल

    नशे और हथियारों की तस्करी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती
    सीमा पार से ड्रोन के जरिए नशे और हथियारों की तस्करी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती है। सभी एजेंसियां समन्वय से कार्रवाई कर रही हैं और ड्रोन ड्रॉपिंग नेटवर्क से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।
    -ओमप्रकाश, पुलिस महानिरीक्षक, बीकानेर रेंज

  • मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने मध्यस्थता को बताया भविष्य की न्याय प्रणाली का आधार

    मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने मध्यस्थता को बताया भविष्य की न्याय प्रणाली का आधार

    जयपुर
     राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (RSLSA), कॉमनवेल्थ लॉयर्स एसोसिएशन (CLA), सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) तथा निवारण-मेडिएटर्स ऑफ सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में होटल द ललित, जयपुर में आयोजित तीन दिवसीय "कॉमनवेल्थ पीस मेडिएशन कॉन्फ्रेंस-2026 : पीस मेडिएशन एंड द रूल ऑफ लॉ" के दूसरे दिन मध्यस्थता को न्याय प्रणाली का अभिन्न अंग बनाने, विवादों के त्वरित एवं सौहार्दपूर्ण समाधान तथा न्याय तक सरल और प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करने पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ। सम्मेलन में भारत तथा कॉमनवेल्थ देशों के न्यायाधीशों, विधि विशेषज्ञों एवं मध्यस्थता विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा करते हुए मध्यस्थता को भविष्य की न्याय व्यवस्था की महत्वपूर्ण आवश्यकता बताया।
     
    महाधिवक्ता ने बताया मध्यस्थता को परिवर्तनकारी यात्रा की शुरुआत
    दूसरे दिन के सत्र का शुभारंभ गणमान्य अतिथियों के स्वागत एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ। राजस्थान के महाधिवक्ता श्री राजेन्द्र प्रसाद ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि कानून और न्याय स्थिर अवधारणाएं नहीं हैं, बल्कि समय के साथ विकसित होने वाली व्यवस्थाएं हैं। उन्होंने सामान्य मध्यस्थता और शांति मध्यस्थता के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि जहां सामान्य मध्यस्थता विशिष्ट विवादों का समाधान करती है, वहीं शांति मध्यस्थता समाजों और देशों के बीच विश्वास, संवाद और सहयोग को निरंतर सुदृढ़ करने की प्रक्रिया है। उन्होंने इस सम्मेलन को वैश्विक स्तर पर संवाद और सहयोग को बढ़ावा देने वाली परिवर्तनकारी यात्रा की शुरुआत बताया।

    न्यायमूर्ति डॉ. पुष्पेन्द्र सिंह भाटी ने मध्यस्थता के मानवीय पक्ष को रेखांकित किया
    राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश माननीय डॉ. न्यायमूर्ति पुष्पेन्द्र सिंह भाटी ने मध्यस्थता के भावनात्मक और मानवीय प्रभाव को रेखांकित करते हुए एक बालक की मार्मिक कहानी साझा की, जिसका अपने माता-पिता के मध्यस्थता के माध्यम से पुनर्मिलन होने के बाद परिवार पुनः एकजुट हो सका। उन्होंने कहा कि असफल मध्यस्थता का परिणाम कभी-कभी दीवानी मुकदमे में हार-जीत से भी अधिक गंभीर हो सकता है। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि विश्वास, संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों पर आधारित व्यवस्था है तथा शांति और मध्यस्थता एक-दूसरे के पूरक हैं।

     कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने मध्यस्थता को संस्थागत मजबूती देने पर दिया बल
    राजस्थान उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एवं राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष माननीय न्यायमूर्ति संजीव प्रकाश शर्मा ने बताया कि राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा जून 2026 में पूर्व उच्च न्यायालय न्यायाधीशों के लिए 40 घंटे का ऐतिहासिक मध्यस्थता प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें 38 पूर्व न्यायाधीशों ने भाग लिया। उन्होंने मीडिएशन फॉर द नेशन 10 एवं 20 कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए प्री-आर्बिट्रेशन मीडिएशन को अनिवार्य बनाए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।

    उन्होंने कहा कि तेजी से विकसित हो रही डिजिटल अर्थव्यवस्था में, जहां देशों के बीच व्यापार और कानूनी प्रक्रियाएं अधिक जटिल होती जा रही हैं, वहां मध्यस्थता विवाद समाधान का सबसे त्वरित, व्यावहारिक एवं भविष्य उन्मुख माध्यम बनकर उभर रही है।

     उपमुख्यमंत्री ने लोक अदालतों एवं विधिक सहायता कार्यक्रमों की सराहना की
    राजस्थान के उपमुख्यमंत्री श्री प्रेमचंद बैरवा ने राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा आयोजित लोक अदालतों एवं निःशुल्क विधिक सहायता कार्यक्रमों की सराहना करते हुए कहा कि न्याय केवल न्यायालयों के निर्णयों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि संवाद, करुणा, सहमति और सामाजिक समावेशन पर आधारित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता समाज में विश्वास कायम करने और न्याय को अधिक जनोन्मुखी बनाने का प्रभावी माध्यम है।
     
    न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई ने मध्यस्थता को पहला विकल्प बनाने की आवश्यकता बताई
    भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई ने कहा कि मध्यस्थता को विवाद समाधान का अंतिम विकल्प नहीं, बल्कि पहला स्वाभाविक विकल्प बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुकदमेबाजी जहां प्रायः जीत और हार तय करती है, वहीं मध्यस्थता दोनों पक्षों के हितों की रक्षा करते हुए संतुलित और स्वीकार्य समाधान प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था न्याय को अधिक मानवीय, सहभागी एवं प्रभावी बनाती है।

    मुख्य न्यायाधीश ने मध्यस्थता को न्याय व्यवस्था का केंद्रीय आधार बताया
    भारत के मुख्य न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने अपने मुख्य उद्बोधन में कहा कि मध्यस्थता आज केवल वैकल्पिक विवाद समाधान प्रणाली नहीं रह गई है, बल्कि न्याय व्यवस्था का ऐसा महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुकी है जिसकी उपयोगिता निरंतर बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि समाज, व्यापार, प्रौद्योगिकी और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में तेजी से हो रहे बदलावों के बीच न्याय प्रणाली को भी अधिक संवेदनशील, सहभागी और व्यवहारिक बनाने की आवश्यकता है, जिसमें मध्यस्थता अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
     
    उन्होंने कहा कि मुकदमेबाजी का उद्देश्य प्रायः विवाद का निर्णय करना होता है, जबकि मध्यस्थता का उद्देश्य विवाद के मूल कारणों को समझना और सभी पक्षों के लिए स्वीकार्य समाधान विकसित करना है। यही कारण है कि आज विश्वभर में मध्यस्थता को न्याय तक सरल, त्वरित एवं कम खर्चीली पहुंच उपलब्ध कराने वाले प्रभावी माध्यम के रूप में स्वीकार किया जा रहा है।

    सहयोगात्मक न्याय व्यवस्था को बढ़ावा देने पर दिया बल
    मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि स्थायी लोक अदालतें, सुलह (Conciliation), पारंपरिक पंचायत व्यवस्था तथा सर्वोच्च न्यायालय एवं बार एसोसिएशनों के सहयोग से विकसित विभिन्न वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि न्याय केवल निर्णय देने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि समाज में विश्वास, संवाद और सामंजस्य स्थापित करने का माध्यम भी होना चाहिए।
     
    तकनीकी सत्रों में मध्यस्थता के विविध आयामों पर हुआ मंथन
    अध्यक्षीय सत्र के समापन के बाद निवारण की महासचिव सुश्री नंदिनी गोरे ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इसके पश्चात कॉमनवेल्थ देशों के न्यायाधीशों एवं विधि विशेषज्ञों की सहभागिता से मध्यस्थता के विभिन्न आयामों पर विषयगत तकनीकी सत्र आयोजित किए गए।
     

  • राजस्थान बिजली में आत्मनिर्भर बन रहा, उदयपुर में बोले मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा

    राजस्थान बिजली में आत्मनिर्भर बन रहा, उदयपुर में बोले मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा

    उदयपुर
    मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा रविवार को उदयपुर जिले को 421 करोड़ रुपए के विकास कार्यों की सौगात दी। नगर निगम के सुखाड़िया रंगमंच सभागार में सीएम भजनलाल शर्मा ने 21 विकास कार्यों का लोकार्पण किया। साथ ही 435 नए विकास कार्यों का शिलान्यास किया। इस मौके पर सीएम भजनलाल शर्मा ने कहा कि बिजली उत्पादन के लिए कई परियोजना विकसित की गई है और बिजली उत्पादन में प्रदेश आत्मनिर्भर बन रहा है। पहले हम बिजली खरीदते थे। लेकिन, अब दूसरे राज्यों को बिजली दे रहे है।

    भजनलाल शर्मा ने कहा कि राजस्थान का विकास एक निर्धारित रोडमैप के आधार पर कर रहे है। देश में सर्वाधिक जल परियोजना राजस्थान में संचालित हो रही है। हाल ही में 35 हजार करोड़ की यमुना जल परियोजना का शिलान्यास किया गया है। राम जल सेतु लिंक परियोजना का भी काम तेज से चल रहा है। उन्होंने कहा कि युवाओं के हितों के लिए सरकार लगातार काम रही है। सरकार ने 4 लाख से ज्यादा युवाओं को नियुक्तियां देने का लक्ष्य रखा है और अब तक 178000 युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए जा चुके है। पिछली गहलोत सरकार पर तंज कसते हुए सीएम भजनलाल ने कहा कि पहले हर परीक्षा का पेपर लीक होता था। लेकिन, इस सरकार में कोई पेपर लीक नहीं हुआ है।

    'नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत' यूथ आइकन पोस्टर का विमोचन
    उदयपुर दौरे के दौरान सीएम भजनलाल शर्मा नशामुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान के राष्ट्रीय शुभारंभ कार्यक्रम से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। उदयपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान सीएम ने युवा साथियों को नशामुक्त जीवन अपनाने, अपने परिवार एवं समाज को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने तथा विकसित राजस्थान, विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने की शपथ दिलाई। साथ ही, 'नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत' यूथ आइकन पोस्टर का विमोचन किया। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार युवाओं के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ नशामुक्त समाज के निर्माण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए जनजागरूकता, शिक्षा, परामर्श, पुनर्वास एवं जनभागीदारी आधारित अभियानों को निरंतर गति प्रदान कर रही है। इस अवसर पर जनजाति क्षेत्रीय विकास एवं गृह रक्षा मंत्री बाबूलाल खराड़ी, राजस्व एवं उपनिवेशन मंत्री हेमन्त मीणा सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

    नारी शक्ति रैली को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना
    इससे पहले मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने महिला सुरक्षा संकल्प आयोजन के तहत उदयपुर के राजस्थान कृषि महाविद्यालय परिसर से नारी शक्ति रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। रैली आरसीए परिसर से शुरू होकर सूरजपोल, बापू बाजार और देहली गेट होते हुए टाउन हॉल पहुंचकर संपन्न हुई। इस दौरान कालिका पेट्रोलिंग यूनिट, महिला कांस्टेबल, अश्वारोही पुलिस बल, महिला सशक्तीकरण से जुड़ी विभिन्न झांकियां, महिला खिलाड़ी, गाइड तथा एनएसएस की स्वयंसेविकाओं सहित बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लेकर महिला सुरक्षा, सम्मान और सशक्तीकरण का संदेश दिया। इस अवसर पर मुख्य सचिव वी श्रीनिवास, सांसद डॉ मन्नालाल रावत, उदयपुर शहर विधायक ताराचंद जैन, उदयपुर ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा भी मौजूद रहे।

    बीड़ा गांव में भ्रमण कर ग्रामीणों से की मुलाकात
    उदयपुर जिले के दूसरे दिन की शुरूआत सीएम भजनलाल शर्मा ने सुबह बीड़ा गांव में भ्रमण के साथ ही। बीड़ा ग्राम पंचायत में प्रातः भ्रमण के दौरान सीएम भजनलाल ग्रामीण परिवेश की सहजता, प्रकृति की मनोहारी छटा, गांव की जीवंत संस्कृति और लोकजीवन की सादगी अभिभूत हुए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों से संवाद कर उनके सुझावों, अनुभवों और अपेक्षाओं को जाना। साथ ही आवरी माता के मंदिर में दर्शन कर प्रदेश की सुख-समृद्धि, खुशहाली एवं जनकल्याण की कामना की।

  • NH-48 पर नहीं रुकेंगी गाड़ियां, MLFF टोल सिस्टम से मिलेगा जाम से छुटकारा

    NH-48 पर नहीं रुकेंगी गाड़ियां, MLFF टोल सिस्टम से मिलेगा जाम से छुटकारा

    जयपुर
    राष्ट्रीय राजमार्ग 48 (NH-48) पर गुरुग्राम से जयपुर के बीच रोजाना सफर करने वाले लाखों यात्रियों, ट्रांसपोर्टरों और पर्यटकों के लिए आज 1 अगस्त 2026 की तारीख ऐतिहासिक साबित हो रही है। दरअसल, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इस 270 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर को पूरी तरह से बैरियर-फ्री करते हुए 'मल्टी-लेन फ्री फ्लो' (MLFF) टोल कलेक्शन सिस्टम में तब्दील कर दिया है। राजस्थान-हरियाणा बॉर्डर पर स्थित प्रसिद्ध शाहजहांपुर टोल प्लाजा पर इस अत्याधुनिक सिस्टम के लाइव होते ही अब गाड़ियों को टोल देने के लिए लंबी कतारों में खड़ा नहीं होना पड़ेगा। अब वाहन चालक बिना अपनी स्पीड कम किए सीधे हाईवे गेंट्री के नीचे से गुजर सकेंगे और उनका टोल अपने आप उनके लिंक FASTag खाते से कट जाएगा।

    बता दें कि राजस्थान के मनोहरपुरा और दौलतपुर प्लाजा पहले ही इस तकनीक से लैस हो चुके थे, जिसके बाद शाहजहांपुर अंतिम पड़ाव था। इस ऐतिहासिक बदलाव से न सिर्फ ईंधन की भारी बचत होगी बल्कि दिल्ली से जयपुर के बीच लगने वाले समय में भी काफी हद तक कम हो सकेगा।

    क्या है फ्री-फ्लो टोलिंग और कैसे काम करेगा यह नया सिस्टम?
    फ्री-फ्लो टोलिंग तकनीक का मुख्य मकसद हाईवे पर गाड़ियों की स्पीड को बिना प्रभावित किए टोल कलेक्शन को पूरा करना है।

    हाई-परफॉर्मेंस RFID और ANPR कैमरे: हाईवे के ऊपर बने लोहे के विशाल गेंट्री फ्रेम पर हाई-टेक RFID रीडर और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरे लगाए गए हैं।

    फुल स्पीड में स्कैनिंग: जब भी कोई कार या ट्रक 80 से 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से इन गेंट्री के नीचे से गुजरता है, तो कैमरे और रीडर सेकेंड के सौवें हिस्से में वाहन के विंडशील्ड पर लगे FASTag और नंबर प्लेट को स्कैन कर लेते हैं।

    ऑटोमैटिक डिडक्शन: FASTag से लिंक बैंक खाते से तय टोल राशि अपने आप कट जाती है और चालक के मोबाइल पर तुरंत मैसेज प्राप्त हो जाता है।

    1. 270 किमी का कॉरिडोर पूरी तरह बैरियर-फ्री
    गुरुग्राम से जयपुर तक अब एक भी टोल बूथ पर बूम-बैलियर गिरा हुआ नहीं मिलेगा। पूरी सड़क अब फ्री-वे की तरह काम करेगी।

    2. शाहजहांपुर बना अंतिम लिंक
    राजस्थान के दौलतपुर और मनोहरपुरा टोल प्लाजा पहले ही MLFF से जुड़ चुके थे। 1 अगस्त 2026 से शाहजहांपुर टोल प्लाजा पर भी यह व्यवस्था पूरी तरह लाइव हो गई है

    3. जाम और प्रदूषण से मुक्ति
    टोल बूथों पर लगने वाली 15 से 30 मिनट की लंबी कतारों से मुक्ति मिलेगी। इससे गाड़ियों का ईंधन बचेगा और प्रदूषण में भारी कमी आएगी।

    4. FASTag में पर्याप्त बैलेंस अनिवार्य
    NHAI ने साफ निर्देश जारी किए हैं कि यात्रा शुरू करने से पहले चालक अपने FASTag में पर्याप्त बैलेंस जरूर जांच लें, क्योंकि कम बैलेंस होने पर सिस्टम तुरंत गाड़ी को ब्लैकलिस्ट श्रेणी में डाल देगा।

    5. 72 घंटे का नियम और इलेक्ट्रॉनिक नोटिस
    अगर किसी वाहन का FASTag अमान्य, खराब या बैलेंस रहित पाया जाता है, तो MLFF सिस्टम तुरंत वाहन स्वामी के पास इलेक्ट्रॉनिक नोटिस भेजेगा।

    6. डबल पेनल्टी (दोगुना जुर्माना)
    नोटिस जारी होने के 72 घंटे के भीतर यदि बकाया टोल राशि का भुगतान नहीं किया गया, तो वाहन मालिक पर दोगुना टोल शुल्क (Double Penalty) लागू कर दिया जाएगा।

    7. ANPR कैमरे से ट्रैकिंग
    यदि FASTag काम नहीं कर रहा है, तो हाईवे गेंट्री पर लगे ANPR कैमरे वाहन के नंबर प्लेट से चालान और बकाया टोल सीधे वाहन पोर्टल से जोड़ देंगे।

    8. राजस्थान के यात्रियों को सबसे बड़ा फायदा
    जयपुर, कोटपूतली, बहरोड़, नीमराणा, अलवर और शाहजहांपुर के दैनिक यात्रियों को अब बिना किसी रुकावट के तेज रफ्तार कनेक्टिविटी मिलेगी।

    9. देशभर में विस्तार की योजना
    आर्थिक समीक्षा (Economic Survey 2025-26) के अनुसार, वर्तमान में यह MLFF सिस्टम गुजरात के चोरयासी (NH-48), दिल्ली के मुंडका (UER-II), हरियाणा के घरौंडा (NH-44) और राजस्थान के मनोहरपुरा, दौलतपुर व शाहजहांपुर में लागू हो चुका है।

    10. मार्च 2029 तक पूरा देश होगा बैरियर-फ्री
    केंद्र सरकार का लक्ष्य मार्च 2029 तक देश के सभी 4-लेन और उससे चौड़े राष्ट्रीय राजमार्गों तथा एक्सप्रेसवे को पूरी तरह से इसी तरह फ्री-फ्लो टोलिंग सिस्टम में बदलने का है।

    बिना बैलेंस सफर करने वालों के लिए सख्त चेतावनी
    NHAI और यातायात पुलिस ने स्पष्ट किया है कि बैरियर हटने का मतलब टोल फ्री होना बिल्कुल नहीं है। यदि कोई चालक बिना FASTag या बिना बैलेंस के इस कॉरिडोर से गुजरता है, तो गेंट्री कैमरे उसकी गाड़ी की हर एंगल से एचडी फोटो और वीडियो रिकॉर्ड कर लेंगे।

    72 घंटे की समयसीमा बीत जाने के बाद परिवहन विभाग के एकीकृत सिस्टम के जरिए गाड़ी पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इसलिए राजस्थान और दिल्ली-एनसीआर के बीच यात्रा करने वाले सभी वाहन मालिकों को सला

  • राजस्थान में कमर्शियल एलपीजी सस्ता हुआ, जानिए आपके जिले में नई कीमत आज

    राजस्थान में कमर्शियल एलपीजी सस्ता हुआ, जानिए आपके जिले में नई कीमत आज

    जयपुर
    अगस्त महीने के पहले दिन की सुबह राहत भरी खबर लेकर आई। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) ने आज 1 अगस्त 2026 को एलपीजी (LPG) उपभोक्ताओं को राहत देते हुए 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में बड़ी कटौती का ऐलान किया है। इस फैसले से राजस्थान के लाखों रेस्टोरेंट मालिकों, ढाबा संचालकों, हलवाइयों और छोटे व्यापारियों के मासिक बजट को सीधी राहत मिलेगी। राजधानी जयपुर में 19 किलो वाला कमर्शियल सिलेंडर ₹192 घटकर ₹2,765.50 का हो गया है। वहीं दूसरी ओर, आम गृहणियों और परिवारों के लिए इस्तेमाल होने वाले 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है और इसके दाम प्रदेश भर में पूरी तरह स्थिर बने हुए हैं। स्थानीय टैक्स, वैट और ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट की भिन्नता के कारण राजस्थान के अलग-अलग जिलों में रसोई गैस और कमर्शियल सिलेंडर की दरों में अंतर देखने को मिलता है।

    राजस्थान में कहां है सबसे महंगा और सबसे सस्ता सिलेंडर?
    स्थानीय मालभाड़े और क्षेत्रीय टैक्स स्लैब के कारण राजस्थान के विभिन्न जिलों में एलपीजी दरों में भिन्नता पाई जाती है:

    सबसे सस्ता घरेलू सिलेंडर (14.2 KG): राजस्थान में सबसे सस्ता घरेलू गैस सिलेंडर राजधानी जयपुर में उपलब्ध है, जहां इसकी कीमत ₹945.50 है। इसके अलावा अजमेर, दौसा और सीकर में भी घरेलू सिलेंडर ₹947.00 की किफायती दर पर मिल रहा है।

    सबसे महंगा घरेलू सिलेंडर (14.2 KG): प्रदेश में सबसे महंगा घरेलू एलपीजी सिलेंडर जनजातीय बहुल जिले डूंगरपुर में है, जहां प्रति सिलेंडर ₹991.50 चुकाने पड़ रहे हैं। इसके अलावा प्रतापगढ़ में भी इसकी कीमत ₹988.50 है।

    सबसे सस्ता कमर्शियल सिलेंडर (19 KG): 19 किलो वाला कमर्शियल सिलेंडर प्रदेश में सबसे कम कीमत पर अजमेर में उपलब्ध है, जहां इसकी दर ₹2,718.00 है। ब्यावर में भी यह ₹2,720.50 में मिल रहा है।

    सबसे महंगा कमर्शियल सिलेंडर (19 KG): सबसे महंगा कमर्शियल गैस सिलेंडर प्रतापगढ़ जिले में है, जहां इसकी नई कीमत ₹2,872.00 तय की गई है। इसके बाद डूंगरपुर में यह ₹2,862.50 का है।

    कमर्शियल यूजर्स को राहत
    ऑयल कंपनियों द्वारा की गई इस कटौती से राजस्थान के व्यावसायिक क्षेत्र को कुछ हद तक सम्बल मिलने की उम्मीद है। 19 किलो वाले सिलेंडर पर ₹192 प्रति सिलेंडर की यह राहत होटल उद्योग, खान-पान की दुकानों और कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े लोगों के लिए परिचालन लागत कम करने में मददगार साबित होगी।

    घर की रसोई में उपयोग होने वाले 14.2 किलो वाले सिलेंडर के दाम न घटने और न बढ़ने से आम परिवारों का मासिक बजट पूरी तरह यथावत और संतुलित बना रहेगा।

     

     

     

  • कोटा को मिलेगी हवाई सौगात, ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट निर्माण ने पकड़ी रफ्तार

    कोटा को मिलेगी हवाई सौगात, ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट निर्माण ने पकड़ी रफ्तार

     कोटा
    कोटा-बूंदी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के निर्माण कार्य की प्रगति की समीक्षा के लिए संसद भवन, नई दिल्ली में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू, नागरिक उड्डयन मंत्रालय के सचिव, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआइ) के चेयरमैन, मंत्रालय एवं एएआइ के वरिष्ठ अधिकारियों तथा राज्य प्रशासन के अधिकारियों ने भाग लिया।

    बैठक में एयरपोर्ट निर्माण की वर्तमान प्रगति, पर्यावरणीय एवं तकनीकी स्वीकृतियों तथा परियोजना के विभिन्न चरणों की विस्तृत समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि कोटा ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का निर्माण कार्य मई 2025 में शुरू हो चुका है। परियोजना का डिज़ाइन डवलपमेंट चरण लगभग 80% पूरा हो चुका है और निर्माण कार्य के तहत फाउंडेशन का कार्य भी प्रारंभ हो गया है। साथ ही रनवे, टर्मिनल भवन और अन्य आवश्यक आधारभूत सुविधाओं के निर्माण की तैयारियां भी तय समय-सीमा के अनुसार आगे बढ़ाई जा रही हैं।

    निर्माण कार्य को गति दें अधिकारी
    लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कोटा के नए ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट से दिसंबर 2027 तक नियमित हवाई सेवाएं शुरू हो जानी चाहिए। इसके लिए उन्होंने निर्माण कार्य में तेजी लाते हुए अक्टूबर 2027 तक एयरपोर्ट का निर्माण पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि परियोजना का प्रत्येक कार्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा किया जाए। यदि निर्माण के दौरान प्रशासनिक, तकनीकी अथवा अन्य स्वीकृतियों से जुड़ी कोई बाधा आती है तो उसका तत्काल समाधान सुनिश्चित किया जाए, ताकि परियोजना की गति प्रभावित न हो।

    हर तीन माह में प्रस्तुत करें प्रगति रिपोर्ट
    बिरला ने एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे प्रत्येक तीन माह में परियोजना की प्रगति रिपोर्ट उन्हें प्रस्तुत करें, ताकि निर्माण कार्य की नियमित समीक्षा के साथ समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके। उल्लेखनीय है कि करीब 1507 करोड़ रुपए की लागत से शंभूपुरा में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का निर्माण किया जा रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद कोटा-बूंदी सहित पूरे हाड़ौती क्षेत्र को हवाई कनेक्टिविटी की ऐतिहासिक सौगात मिलेगी। इससे क्षेत्र के औद्योगिक, शैक्षणिक, व्यापारिक तथा पर्यटन विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है। बैठक में लोकसभा अध्यक्ष के ओएसडी राजीव दत्ता भी उपस्थित रहे।

  • राजस्थान में ड्रग्स के खिलाफ सख्ती, हर जिले के माफिया होंगे चिन्हित

    राजस्थान में ड्रग्स के खिलाफ सख्ती, हर जिले के माफिया होंगे चिन्हित

    जयपुर
    राजस्थान को पूरी तरह से नशा मुक्त बनाने और सीमावर्ती जिलों से लेकर शहरी इलाकों तक फैले मादक पदार्थों के काले कारोबार को जड़ से उखाड़ने के लिए भजनलाल शर्मा सरकार ने बड़ा रोडमैप तैयार किया है। जयपुर स्थित शासन सचिवालय में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में आयोजित राज्य स्तरीय नार्को समन्वय केंद्र (NCORD) की उच्चस्तरीय बैठक में मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए केंद्र सरकार की 'डिटेक्ट-डिसरप्ट-डेस्ट्रॉय' (Detect-Disrupt-Destroy) नीति को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। इस नई रणनीति के तहत राजस्थान के प्रत्येक जिले में मादक पदार्थों से जुड़े 10 प्रमुख मुकदमों की विशेष सूची तैयार की जाएगी और हर जिले से 5 सबसे कुख्यात ड्रग माफियाओं को चिन्हित कर उनकी संपत्तियों को जब्त करने व नेटवर्क को तबाह करने का बड़ा अभियान चलाया जाएगा। इसके साथ ही प्रदेश के सभी पुलिस थानों में एक ही दिन विशेष अभियान चलाकर अब तक जब्त किए गए करोड़ों रुपये के नशीले पदार्थों को एक साथ नष्ट करने की योजना बनाई गई है।

    क्या है 'डिटेक्ट-डिसरप्ट-डेस्ट्रॉय' नीति और कैसे करेगी काम?
    ड्रग्स के अवैध कारोबार की सप्लाई चेन को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए भजनलाल सरकार ने त्रिस्तरीय रणनीति पर काम शुरू किया है।

    डिटेक्ट (Detect): इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB), एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) और स्थानीय पुलिस की मदद से राज्य में नशे के प्रवेश मार्गों, अंतरराज्यीय तस्करों और स्थानीय सप्लायरों का सटीक डेटा तैयार कर उन्हें ट्रैक किया जाएगा।

    डिसरप्ट (Disrupt): ड्रग्स नेटवर्क के वित्तीय स्रोतों, कोरियर बॉयज और मुख्य वित्तीय मददगारों पर कड़ा प्रहार कर उनकी सप्लाई चेन और मनी ट्रेल को बीच में ही तोड़ दिया जाएगा।

    डेस्ट्रॉय (Destroy): तस्करों द्वारा नशे की कमाई से बनाई गई अवैध संपत्तियों को कानूनन सीज व कुर्क किया जाएगा और जब्त किए गए नशे के खेपों को पारदर्शी तरीके से नष्ट किया जाएगा।

    तीन साल का रोडमैप, सख्ती से लागू हो नीति : गृह मंत्री
    हाल ही में गृह मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में आयोजित 'एनसीओआरडी' (NCORD) की 10वीं शीर्ष स्तरीय बैठक में नशीले पदार्थों के नियंत्रण पर 'विज़न डॉक्यूमेंट' लॉन्च किया गया। इस दौरान गृह मंत्री ने कहा था कि नशीली दवाओं के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मिशन को हासिल करने के लिए यह एक व्यापक और समयबद्ध दिशा निर्देश है। यह दस्तावेज़ इस खतरे पर घातक प्रहार करने के लिए हमारे एंटी-नारकोटिक्स तंत्र के आधुनिक, खुफिया जानकारी आधारित, तकनीक-संचालित और नेटवर्क-केंद्रित दृष्टिकोण का लाभ उठाता है।

    गृह मंत्री ने कहा, 'डिटेक्ट, डिसरप्ट और डेस्ट्रॉय' (खोजें, बाधित करें और नष्ट करें) के सिद्धांत पर तैयार की गई यह रणनीति अगले तीन वर्षों का रोडमैप तैयार करती है, ताकि हमारे युवाओं को ड्रग कार्टेल के चंगुल से बचाने के लिए एक अटूट सुरक्षा घेरा बनाया जा सके।'

    ड्रग माफियाओं की संपत्ति होगी सीज
    मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने राज्य के सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों (SPs) को मुख्य तौर पर तीन महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं।

    टॉप 10 केस और 5 माफिया चिन्हित: प्रत्येक जिले के पुलिस कप्तान अपने इलाके के 10 सबसे बड़े ड्रग्स मुकदमों को शॉर्टलिस्ट करेंगे और उनमें शामिल 5 सबसे कुख्यात ड्रग तस्करों की सूची तैयार करेंगे।

    मजबूत चार्जशीट से सजा: आदतन अपराधियों के खिलाफ ठोस साक्ष्यों के आधार पर ऐसी अभेद्य चार्जशीट तैयार की जाएगी जिससे अदालत में प्रभावी पैरवी हो सके और दोषियों को जल्द से जल्द कठोर सजा मिल सके।

    3 या अधिक केस वाले अपराधियों पर तुरंत एक्शन: जिन तस्करों के खिलाफ 3 या उससे अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं, उनके केसों का प्राथमिकता के आधार पर त्वरित निस्तारण किया जाएगा।

    सभी थानों में एक साथ चलेगा 'ड्रग्स निस्तारण अभियान'
    राजस्थान पुलिस के इतिहास में पहली बार जब्ती की गई नशीली दवाओं और मादक पदार्थों के निस्तारण को लेकर एक व्यापक राज्यव्यापी योजना बनाई गई है।

    एक दिन, एक साथ निस्तारण: प्रदेश के सभी पुलिस थानों के मालखानों में वर्षों से जमा जब्त शुदा ड्रग्स को एक ही दिन विशेष अभियान चलाकर कानूनी प्रक्रियाओं के तहत विनष्ट (Destroy) किया जाएगा।

    जब्त वाहनों की होगी नीलामी: तस्करों से जब्त किए गए वाहनों और अन्य साधनों को कानूनी अड़चनों से मुक्त कराकर शीघ्र नीलाम किया जाएगा ताकि सरकारी राजस्व में वृद्धि हो और अपराधियों को कड़ा सबक मिले।

    'राजस्थान विजन 2026-29': तीन विभागों का जॉइंट प्लान
    बैठक में वर्ष 2026 से 2029 तक के लिए मादक पदार्थों के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' नीति का खाका तैयार किया गया, जिसमें पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ सामाजिक सुधार पर भी जोर दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग तथा युवा मामलात विभाग मिलकर नशा मुक्ति केंद्रों के संचालन, युवाओं के काउंसलिंग और जन-जागरूकता अभियानों का संचालन करेंगे।

    बैठक में डीजीपी राजीव कुमार शर्मा, गृह विभाग के एसीएस भास्कर ए. सावंत, एसीएस कुलदीप रांका, एएनटीएफ के एडीजी विकास कुमार, एडीजी दिनेश एम.एन., केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो और बीएसएफ राजस्थान फ्रंटियर के आईजी सहित तमाम विभागों के वरिष्ठ अफसर शामिल रहे।

  • जयपुर में भारत टैक्सी सेवा शुरू, शेक टू एसएमएस से बढ़ेगी सुरक्षा सुविधा

    जयपुर में भारत टैक्सी सेवा शुरू, शेक टू एसएमएस से बढ़ेगी सुरक्षा सुविधा

    जयपुर 
    भारत टैक्सी ऐप के जरिए यात्रियों को कम किराया और 'शेक टू एसएमएस' जैसी सुरक्षा सुविधा देने के साथ चालकों को बिना कमीशन काम करने का मौका दिया जा रहा है। इस सहकारी कंपनी का दावा है कि यात्रियों को 10 से 15 प्रतिशत तक सस्ता किराए की सुविधा, सर्ज प्राइसिंग नहीं होगी और चालकों से कोई कमीशन नहीं लिया जाएगा। अगले कुछ महीनों में पूरे जयपुर में 24 घंटे सेवा उपलब्ध करा दी जाएगी। हालांकि, सेवा अभी शुरुआती चरण में है। यही वजह है कि शहर के अधिकांश बाहरी इलाकों में यात्रियों को भारत टैक्सी आसानी से उपलब्ध नहीं हो रही। बीते एक महीने में जयपुर से करीब 36 हजार चालकों ने पंजीकरण कराया है, लेकिन फिलहाल केवल 3400 वाहन ही संचालन में हैं।

    यात्रियों के लिए क्या है खास?
    किराया कम- अन्य एग्रीगेटर कंपनियों की तुलना में यात्रियों से 10 से 15 प्रतिशत तक कम किराया। पीक आवर्स या बारिश जैसी परिस्थितियों में भी सर्ज प्राइसिंग लागू नहीं होगी यानी दिन, रात या व्यस्त समय में किराया नहीं बढ़ेगा।

    सुरक्षा का अहसास- ऐप में 'शेक टू एसएमएस' फीचर में तीन इमरजेंसी मोबाइल नंबर दर्ज किए जा सकते हैं। आपात स्थिति में यदि यात्री मोबाइल को जोर से हिलाता है तो उसकी लाइव लोकेशन स्वतः इन तीनों नंबरों पर भेज दी जाएगी। कंपनी का दावा है कि यह फीचर महिलाओं और अकेले सफर करने वाले यात्रियों को अतिरिक्त सुरक्षा देगा।

    इन इलाकों में टैक्सी सेवा शुरू
    फिलहाल जयपुर के मालवीय नगर, दुर्गापुरा, टोंक रोड, सोडाला और जवाहर सर्किल जैसे इलाकों में भारत टैक्सी आसानी से मिल रही है। वहीं वैशाली नगर, प्रतापनगर, मान्यावास, भांकरोटा, आगरा रोड और सीकर रोड जैसे क्षेत्रों में अभी टैक्सी की उपलब्धता कम है, इसलिए यात्रियों को कैब मिलने के लिए थोड़ा ज्यादा इंतजार करना पड़ सकता है। कंपनी का कहना है कि आने वाले कुछ महीनों में पूरे जयपुर में 24 घंटे टैक्सी सेवा उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।

    कुछ महीनों में 24 घंटे सेवा उपलब्ध कराने का लक्ष्य
    "भारत टैक्सी अभी शुरुआती चरण में है। अगले कुछ महीनों में पूरे जयपुर में 24 घंटे सेवा उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। हमारा फोकस यात्रियों को सस्ता और सुरक्षित सफर देने के साथ चालकों को बिना कमीशन बेहतर आय उपलब्ध कराना है।"

    — अभिषेक चारण, सिटी हेड, भारत टैक्सी, जयपुर