Category: राजस्थान

  • कारगिल युद्ध में राजस्थान की रेल पटरियां बनीं सेना की जीवनरेखा

    कारगिल युद्ध में राजस्थान की रेल पटरियां बनीं सेना की जीवनरेखा

     जयपुर
    कारगिल युद्ध के दौरान देश की नजरें बर्फ से ढकी चोटियों पर डटी भारतीय सेना पर थीं, लेकिन हजारों किलोमीटर दूर पश्चिमी राजस्थान की रेल पटरियां भी जीत की अहम कड़ी बनी हुई थीं। कारण था कि राजस्थान के सीमावर्ती रेलवे स्टेशन भारतीय सेना की लॉजिस्टिक लाइफलाइन बन गए थे। यहां से गुजरने वाली हर सैन्य ट्रेन सिर्फ डिब्बों का काफिला नहीं थी। बल्कि जवानों, टैंकों, तोपों, गोला-बारूद, ईंधन और देश की उम्मीदों को मोर्चे तक पहुंचाने का जरिया थी।

    दरअसल, साल 1999 में भारत-पाकिस्तान के बीच कारगिल युद्ध शुरू होते ही रेलवे ने अपने परिचालन को युद्धकालीन जरूरतों के अनुरूप ढाल दिया। जोधपुर, बीकानेर, बाड़मेर और जैसलमेर स्थित सैन्य ठिकानों से लगातार विशेष सैन्य ट्रेनें जम्मू और पठानकोट की ओर रवाना होती रहीं। रेलवे यार्डों में सामान्य माल की जगह टैंक, तोपें, सैन्य वाहन और गोला-बारूद से भरी सैन्य रेक नजर आने लगीं। स्टेशन मास्टर, लोको पायलट, गार्ड, कंट्रोलर और ट्रैकमैन सहित हर रेलकर्मी उस दौर में युद्ध का मौन सिपाही बन गया था।

    इधर, युद्ध में 17 रेलकर्मियों ने दी थी शहादत
    साल 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान गडरारोड के पास सेना की रसद लेकर जा रही ट्रेन पर पाकिस्तानी सेना ने हमला कर दिया था। युद्ध में रेलवे के 17 रेल कर्मचारियों ने देश सेवा में अपने प्राणों का बलिदान दिया।

    ये स्टेशन बने थे केंद्र: रेलवे ट्रैक से बंधी थी उम्मीदें
    रेलवे स्टेशन     अंतरराष्ट्रीय सीमा से दूरी
    मुनाबाव            लगभग 2 किमी
    गडरा रोड           लगभग 8 किमी
    श्रीगंगानग र      लगभग 25 किमी
    अनूपगढ़            लगभग 30 किमी
    बाड़मेर              लगभग 100 किमी
    जैसलमेर           लगभग 110 किमी

    हाई अलर्ट पर था पूरा रेल नेटवर्क
    पश्चिमी सीमा पर बढ़े तनाव के बीच राजस्थान का रेल नेटवर्क भी हाई अलर्ट पर रहा। संवेदनशील रेल पुलों, यार्डों और स्टेशनों की सुरक्षा बढ़ाई गई। जोधपुर-जैसलमेर, जोधपुर-बाड़मेर-मुनाबाव और बीकानेर-सूरतगढ़-अनूपगढ़ जैसे रणनीतिक रेल मार्गों पर सेना की जरूरतों के अनुरूप निर्बाध परिचालन जारी रखा गया। सैन्य ट्रैफिक की लगातार निगरानी की गई।
    -अमित सुदर्शन, सीपीआरओ, उत्तर पश्चिम रेलवे

  • राजस्थान में निजी कंपनियां तैयार करेंगी नए शहरों के मास्टर प्लान अब

    राजस्थान में निजी कंपनियां तैयार करेंगी नए शहरों के मास्टर प्लान अब

    जयपुर
     राजस्थान में नवगठित 49 शहरों में से ज्यादातर के मास्टर प्लान 'ठेके' पर देने की तैयारी है। नगर नियोजन विभाग और टाउन प्लानिंग शाखा में नगर नियोजकों की फौज होने के बावजूद इस काम को आउटसोर्स किया जा रहा है। इससे मास्टर प्लान (लागू होने से पहले) की गोपनीयता खत्म होने की भी आशंका बनी रहेगी। सवाल इसलिए भी उठ रहा है क्योंकि इसकी गोपनीयता बनाए रखने के लिए कंपनी के लिए क्या-क्या राइडर लगाए जाएंगे, यह स्पष्ट नहीं है।

    इस बीच राजस्थान नगरीय विकास विभाग ने टाउन प्लानिंग शाखा को अत्याधुनिक तकनीक मास्टर प्लान तैयार करने के निर्देश दिए है। हालांकि, अभी यह तय होना है कि किन शहरों के मास्टर प्लान कौन तैयार करेगा। जयपुर के नए मास्टर प्लान-2047 को तैयार करने का ज्यादातर काम निजी कंपनी ही करेगी।

    जानकारी के मुताबिक राजस्थान के नए शहरों में से ज्यादातर के मास्टर प्लान 'ठेके' पर देने की तैयारी है। पहले फेज में गोविंदगढ़, सिकरी, जायल, टिब्बी, बहादुरपुर, लक्ष्मणगढ़, बानसूर, उचैना, सुल्तानपुर, बसनी, सिवाना, सपोटरा, मंडावरी, बामनवास, हमीरगढ़, बरोदामेव, खाजूवाला, रामगढ़, सरमथुरा, बसेड़ी, पावटा-प्रागपुरा, भोपालगढ़, अटरू, मनोहरपुरा, नरैना (नारायणा), मंडावर, मारवाड़ जंक्शन, बोनली, बिजोलियां, मसूदा, लाम्बाहरिसिंह, नापासर, जमवारामगढ़, दांता, अजीतगढ़, धरियावद, पीपलू, डिग्गी, मेड़ता रोड, गढ़साना, लूणकरनसर, नारायणपुर, टांटोटी, पहाड़ी, जाखल, गुड़ामालानी, मंधान, सोजत रोड और सिंधरी का चयन किया गया है।

    लोगों को पहले यह भी चाहिए
    1. रहने योग्य शहर हो, यानि यहां जीवनयापन के लिए जरूरी सुविधाएं सुलभता से उपलब्ध हो। इसमें साफ पानी, कचरा मुक्त शहर, चौबीस घंटे पानी व बिजली सप्लाई, सुदृढ़ ड्रेनेज व सीवरेज सिस्टम, सार्वजनिक शौचालय।
    2. सड़क के साथ फुटपाथ एरिया भी बढ़े, राहगीरों की किसी को चिंता नहीं है।
    3. हर एरिया में सेन्ट्रल पार्क की तर्ज पर ऑक्सीजोन विकसित हो।

    एक्सपर्ट: जनता की जरूरत के आधार पर हो
    मास्टर प्लान किसी भी शहर के विकास का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है, इसलिए इसकी गुणवत्ता और गोपनीयता दोनों जरूरी हैं। जरूरी हो तो ही आउटसोर्स किया जाए। इसे निजी एजेंसियों से तैयार कराया जाता है तो सख्त निगरानी रखनी होगी और स्पष्ट गोपनीयता शर्तें लागू करनी चाहिए। अंतिम जिम्मेदारी सरकार और टाउन प्लानिंग विभाग की ही होनी चाहिए। मास्टर प्लान केवल नक्शों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि लोगों की जरूरतों पर आधारित हो।
    -सी.एस. पाराशर, पूर्व अतिरिक्त मुख्य नगर नियोजक, राजस्थान

  • जयपुर में फुटपाथ से हटेंगे अतिक्रमण, फ्लाईओवर के नीचे विकसित होगी पार्किंग सुविधा

    जयपुर में फुटपाथ से हटेंगे अतिक्रमण, फ्लाईओवर के नीचे विकसित होगी पार्किंग सुविधा

    जयपुर
    जयपुर शहर में फुटपाथ पर चलना अब लोगों के लिए आसान हो सकता है। सड़कों पर बेतरतीब पार्किंग और अतिक्रमण से राहत दिलाने की दिशा में ट्रैफिक कंट्रोल बोर्ड की बैठक में अहम फैसले दिए गए। बुधवार की बैठक जेडीए में जेडीसी सिद्धार्थ महाजन की अध्यक्षता में हुई। बैठक में तय हुआ कि फुटपाथों से डेयरी बूथ, रैंप, सीढ़ियां और अन्य अतिक्रमण हटाए जाएंगे। वहीं फ्लाईओवर के नीचे खाली पड़ी जगहों को पार्किंग के रूप में विकसित किया जाएगा ताकि सड़क किनारे खड़े वाहनों का दबाव कम हो सके। जयपुर शहर में एरिया ट्रैफिक मैनेजमेंट प्लान (एटीएमपी) लागू कर आंतरिक सड़कों को चरणबद्ध तरीके से सिग्नल-फ्री बनाने और एआइ आधारित ट्रैफिक प्रबंधन की भी तैयारी की गई है।

    बैठक में पैदल यात्रियों को प्राथमिकता देने पर विशेष जोर दिया गया। जेडीए की प्रवर्तन शाखा शहरभर में अभियान चलाकर फुटपाथों पर बने अवैध डेयरी बूथ, दुकानों के रैंप, सीढ़ियां और अन्य अतिक्रमण हटाए जाएंगे। एसएल मार्ग सहित प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों में होटल, अस्पताल और अन्य प्रतिष्ठानों द्वारा किए गए अतिक्रमण पर भी कार्रवाई होगी।

    यातायात व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए एरिया ट्रैफिक मैनेजमेंट प्लान लागू किया जाएगा। इसके तहत बाधारहित और निरंतर फुटपाथ विकसित होंगे। सड़क और फुटपाथ के बीच ग्रीन मेश फेंस, लो-लेवल लाइटिंग, हरित पट्टियां, साइकिल ट्रैक, बैठने की व्यवस्था और अन्य शहरी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

    अब ये तैयारी
        फ्लाईओवर के नीचे खाली पड़े स्थानों को व्यवस्थित पार्किंग। हैरिटेज थीम के अनुरूप कियोस्क।
        प्रमुख मॉल्स की बेसमेंट पार्किंग से अवैध व्यावसायिक गतिविधियां हटाकर उन्हें केवल पार्किंग के लिए उपयोग में लाने का निर्णय भी लिया गया।

    पत्रिका ने चलाया अभियान
    फुटपाथ पर अतिक्रमण को लेकर राजस्थान पत्रिका ने "फुटपाथ खाली करो" अभियान चलाया था। इसमें बताया था कि राहगीर के चलने को जगह नहीं है। शहरभर में अधिकांश फुटपाथ पर अवैध रूप से कब्जे जमा रखे हैं।

    अन्य प्रमुख फैसले

    • शहर के करीब 50 हजार ई-रिक्शा का संचालन 7 जोन में व्यवस्थित होगा। ई-रिक्शा में क्यूआर कोड आधारित एसओएस सुविधा होगी, जिससे महिलाओं और यात्रियों की सुरक्षा बढ़ेगी।
    • एएनपीआर (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) तकनीक से ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले वाहनों की पहचान होगी। प्रमुख चौराहों में स्क्रीन पर वाहनों के लंबित चालान प्रदर्शित किए जाएंगे।
    • यातायात पुलिस के लिए हैरिटेज लुक वाले नए ट्रैफिक बूथ बनेंगे। इनमें अलग वॉशरूम सहित अन्य बुनियादी सुविधाएं होंगी।
  • अजमेर में बम धमकी ईमेल भेजने वाला आरोपी गिरफ्तार, पुलिस नेटवर्क खंगालने में जुटी

    अजमेर में बम धमकी ईमेल भेजने वाला आरोपी गिरफ्तार, पुलिस नेटवर्क खंगालने में जुटी

    अजमेर
     सिविल लाइंस थाना पुलिस ने ई-मेल से अजमेर में बम धमाकों की झूठी धमकियां देकर दहशत फैलाने के आरोपी युवक को गुजरात से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने गुजरात के सोमनाथ पाटन की वेणेश्वर सोसायटी निवासी फलदू हार्दिक रमेशचन्द को दबोचा। पुलिस उसे लेकर मंगलवार देर रात अजमेर पहुंची। प्रारम्भिक पूछताछ के बाद आरोपी को थाने में दर्ज प्रकरण में गिरफ्तार कर बुधवार को कोर्ट में पेश करने पर दो दिन के पुलिस रिमांड पर सौंपा गया। पुलिस उससे अजमेर समेत प्रदेश के अन्य जिलों में भेजे गए झूठी धमकियों के ई-मेल और संभावित नेटवर्क के संबंध में पूछताछ कर रही है। ऐसे में कई राज खुलने की संभावना है। बताया जा रहा है कि पुलिस आज खुलासा करेगी।

    पुलिस के अनुसार 9 जुलाई को घूघरा स्थित क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय को ई-मेल भेजकर जहरीली साइनाइड गैस और बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी। इसके बाद 13 जुलाई को अजमेर जिला एवं सेशन न्यायालय को ई-मेल भेजकर छह जिलेटिन बम लगाना बताते हुए विस्फोट की धमकी भेजी गई। दोनों मामलों में सिविल लाइंस थाने में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की गई थी।

    तकनीकी जांच से गुजरात तक पहुंची पुलिस
    धमकी भरे ई-मेल मिलने के बाद पुलिस ने साइबर तकनीकी साक्ष्यों और डिजिटल ट्रेल के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया। जांच के दौरान आरोपी की लोकेशन गुजरात के सोमनाथ पाटन में मिलने पर पुलिस टीम ने दबिश देकर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस रिमांड के दौरान आरोपी से ई-मेल भेजने के उद्देश्य, इस्तेमाल उपकरण, तकनीकी माध्यम तथा अन्य संभावित मामलों में उसकी भूमिका के संबंध में गहन पूछताछ की जाएगी। पूछताछ के दौरान पुलिस को कई अहम सुराग मिल सकते है। साथ ही पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश में जुटी हुई है कि पिछले कुछ महीनों में प्रदेशभर के कलक्टर और कोर्ट को बम जो बम की धमकियां मिली थी, क्या उसमें भी आरोपी का हाथ है?

    पहले भी मिल चुकी हैं धमकियां
    अजमेर में बीते कुछ माह से विभिन्न सरकारी कार्यालय व संवेदनशील संस्थानों को लगातार धमकी भरे ई-मेल मिलते रहे हैं। इनमें 4 और 10 दिसंबर 2025 को दरगाह-कलेक्ट्रेट परिसर, 23 दिसंबर 2025 को कलेक्ट्रेट में आरडीएक्स, 6 और 12 फरवरी 2026 को सेशन कोर्ट परिसर, 11 फरवरी को कलक्ट्रेट, 10 मार्च को अजमेर सहित प्रदेशभर के पासपोर्ट कार्यालयों, 17 मार्च को जयपुर हाईकोर्ट तथा 9 और 13 जुलाई को क्रमशः आरटीओ और जिला सेशन न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकियां शामिल हैं।

     

  • राजस्थान के टोल यात्रियों को डिजिटल पास और 22 भाषाओं में मिलेगी सहायता

    राजस्थान के टोल यात्रियों को डिजिटल पास और 22 भाषाओं में मिलेगी सहायता

    जयपुर
    राजस्थान में राष्ट्रीय राजमार्गों से गुजरने वाले वाहन चालकों और टोल प्लाजा के 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले स्थानीय निवासियों के लिए राहतभरी खबर सामने आई है। दरअसल, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने डिजिटल इंडिया विजन और यात्रियों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए अपने आधिकारिक 'राजमार्गयात्रा' (RajmargYatra) मोबाइल ऐप पर दो बड़े डिजिटल फीचर्स लॉन्च किए हैं। इसमें पहला ऑनलाइन 'डिजिटल लोकल पास' (Digital Local Pass) और दूसरा 'मार्गमित्र' (MargMitra) हेल्प सेंटर है। दिल्ली के मुंडका-बक्करवाला टोल प्लाजा से शुरू की गई यह हाई-टेक डिजिटल 'लोकल पास' सुविधा जल्द ही राजस्थान के जयपुर, कोटा और अजमेर जैसे सभी प्रमुख टोल प्लाजा पर प्रभावी कर दी जाएगी। इस नई व्यवस्था के राजस्थान में लागू होने के बाद स्थानीय लोगों को पास बनवाने के लिए अब टोल प्लाजा के दफ्तरों के चक्कर काटने और मैन्युअल कागजात जमा कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

    अब घर बैठे 2 मिनट में बनेगा 'लोकल टोल पास'
    टोल नियमों के अनुसार, किसी भी राष्ट्रीय राजमार्ग टोल प्लाजा के 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले स्थानीय निवासियों को रियायती दर पर अनलिमिटेड मासिक आवाजाही के लिए 'लोकल पास' की सुविधा दी जाती है।

    अब तक राजस्थान के निवासियों को इस पास को बनवाने या रिन्यू कराने के लिए अपने ओरिजिनल आधार कार्ड, आरसी (RC) और पते का प्रमाण पत्र लेकर भौतिक रूप से टोल प्लाजा ऑफिस जाना पड़ता था। लेकिन अब 'राजमार्गयात्रा' ऐप के नए डिजिटल फ्रेमवर्क के जरिए यह पूरी प्रक्रिया 2 से 3 मिनट में ऑनलाइन पूरी हो जाएगी।

    दिल्ली में इस सुविधा का सफल रोल-आउट हो चुका है और आने वाले महीनों में इसे पूरे देश के साथ-साथ राजस्थान के हर जिले के टोल प्लाजा पर पूरी तरह एक्टिवेट कर दिया जाएगा।

    ऐसे मिनटों में हो जाएगा ऑनलाइन वेरिफिकेशन
    एनएचएआई की इस नई डिजिटल व्यवस्था में किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी रोकने और प्रक्रिया को तेज बनाने के लिए सरकारी पोर्टलों का सीधा इंटीग्रेशन किया गया है:

    स्वचालित डेटा फेचिंग: ऐप को भारत सरकार के DigiLocker और VAHAN डेटाबेस से जोड़ा गया है।

    जीआईएस (GIS) लोकेशन मैपिंग: जैसे ही यूजर ऐप में अपनी गाड़ी का नंबर डालेगा, सिस्टम उसके पते, आरसी और FASTag की डिटेल अपने आप उठा लेगा। इसके बाद जीआईएस मैपिंग तकनीक से यह तुरंत वेरीफाई हो जाएगा कि वाहन मालिक का घर टोल प्लाजा के 20 किमी दायरे के अंदर है या नहीं।

    इंस्टेंट अप्रूवल: वेरिफिकेशन पूरा होते ही ऑनलाइन पेमेंट करते ही ई-लोकल पास एक्टिवेट हो जाएगा।

    'मार्गमित्र' हेल्प सेंटर: 22 भारतीय भाषाओं में मिलेगी मदद
    एनएचएआई ने हाईवे उपयोगकर्ताओं की समस्याओं का ऑन-द-स्पॉट निस्तारण करने के लिए ऐप में 'मार्गमित्र' (MargMitra) नाम का एक इंटेलिजेंट डिजिटल हेल्प सेंटर भी शुरू किया है।

    राजस्थान के हाईवे चालक अब हिंदी और अंग्रेजी सहित 22 भारतीय भाषाओं में बोलकर या लिखकर अपने सवाल पूछ सकते हैं।

    फास्टैग रिचार्ज (FASTag Recharge), केवाईसी (KYC), रिफंड स्टेटस, पास सेवाएं और फास्टैग ब्लैकलिस्टिंग से जुड़ी जानकारी 'मार्गमित्र' तुरंत उपलब्ध कराएगा।

    यदि हाईवे पर कोई दुर्घटना होती है, वाहन खराब होता है या अतिक्रमण दिखता है, तो फोटो और लोकेशन के साथ ऐप पर शिकायत दर्ज की जा सकती है। शिकायतों की स्टेटस ट्रैकिंग भी रियल-टाइम में की जा सकेगी।

    राजस्थान के लाखों लोगों को मिलेगा फायदा
    राजस्थान में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे, जयपुर-दिल्ली, जयपुर-अजमेर, देवली-कोटा और बीकानेर-जोधपुर जैसे भारत के सबसे महत्वपूर्ण हाईवे नेटवर्क स्थित हैं। कोटपूतली, बहरोड़, शाहजहांपुर, मनोहरपुर, दौसा, जयपुर और कोटा जैसे टोल प्लाजा के आसपास रहने वाले ग्रामीणों, व्यापारियों और दैनिक यात्रियों को इस सुविधा का बड़ा फायदा होगा। इससे न केवल टोल प्लाजा पर लगने वाला समय और ईंधन बचेगा, बल्कि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता भी आएगी।

  • शेखावाटी को यमुना जल मिलने से पेयजल, सिंचाई और रोजगार को मिलेगा बल

    शेखावाटी को यमुना जल मिलने से पेयजल, सिंचाई और रोजगार को मिलेगा बल

    जयपुर
    शेखावाटी क्षेत्र के लिए यमुना जल समझौते को साकार करने पर शेखावाटी फाउंडेशन की ओर से सोमवार को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का नागरिक अभिनंदन किया गया। बिड़ला सभागार में आयोजित समारोह में बड़ी संख्या में शेखावाटी क्षेत्र से जुड़े जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों, उद्यमियों, शिक्षाविदों, किसानों, युवाओं और गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया।

    इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि शेखावाटी केवल भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि धर्म, अध्यात्म, संत परंपरा और वीरता की पहचान है। यहां के साधु-संत और आध्यात्मिक चेतना व नैतिक मूल्यों की प्रेरणा देते रहे हैं। सबसे ज्यादा गर्मी और सर्दी शेखावटी में ही पड़ती है। यहां से कुछ प्रवासी व्यापार के लिए गए तो कुछ अभावों में बाहर गए।

    उन्होंने कहा, शेखावाटी ने अभावों से लड़कर देश-दुनिया में अपनी पहचान बनाई है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने माथे पर कलश रखा। प्रतीकात्मक रूप में यमुना का पानी शेखावाटी के कलश में डाला गया। पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने कहा, अब शेखावाटी को फ्लोराइड युक्त पानी से निजात मिलेगी।

    कांग्रेस समझौता रद्द करना चाहती थी : सीएम
    मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर तीखा राजनीतिक हमला भी बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार केंद्र, हरियाणा और राजस्थान में कांग्रेस की सरकारें रहीं, तब भी शेखावाटी को यमुना का पानी दिलाने की कोई पहल नहीं हुई। हरियाणा विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने उनकी पार्टी की सरकार बनने पर राजस्थान के साथ हुए यमुना जल समझौते को रद्द करने की बात कही। राजस्थान के कांग्रेस नेता वहां उसका समर्थन करते नजर आए।

    शेखावाटी क्षेत्र की बदलेगी तस्वीर-तकदीर
    फाउंडेशन के अध्यक्ष विनोद गोयल ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में वर्षों से लंबित यमुना जल समझौते को नई दिशा और गति मिली है। यह निर्णय शेखावाटी क्षेत्र के लाखों लोगों की आशाओं से जुड़ा है और आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य का आधार बनेगा। राष्ट्रीय महामंत्री गजानंद शर्मा और कार्यक्रम संयोजक राष्ट्रीय हरि शर्मा ने कहा कि यमुना जल उपलब्ध होने से शेखावाटी क्षेत्र की तस्वीर-तकदीर बदलेगी। पेयजल-सिंचाई की सुविधाओं में विस्तार होने के साथ कृषि, उद्योग, व्यापार और रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे।

    नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा, यमुना का जल पाइप लाइन से मिलने के कारण किसानों की भूमि अधिग्रहित करनी नहीं करनी पड़ेगी। केवल पाइपलाइन डालने के समय एक या दो फसलों का मुआवजा ही किसानों को देना पड़ेगा। कार्य हो जाने के बाद किसान फिर से भूमि का उपयोग कर सकेंगे। विधायक कालीचरण सराफ, गोपाल शर्मा, प्रकाश अग्रवाल, डॉ. एसपी यादव सहित अन्य प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।

  • 2500 से अधिक बांधों में रोजगार की संभावनाएं, मत्स्य विभाग ने बनाई नई रणनीति

    2500 से अधिक बांधों में रोजगार की संभावनाएं, मत्स्य विभाग ने बनाई नई रणनीति

     जयपुर
    मत्स्य विभाग की निदेशक श्रीमती संचिता बिश्नोई ने राजस्थान संपर्क पोर्टल (181)के माध्यम से विभाग से जुड़ी आमजन की शिकायतों एवं लंबित प्रकरणों की गहन समीक्षा हेतु निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने विभागीय अधिकारियों को शिकायतों के सही श्रेणीकरण और समयबद्ध व गुणवत्तापूर्ण निस्तारण पर विशेष जोर देने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान निदेशक श्रीमती बिश्नोई ने पोर्टल पर मॉडरेशन स्तर पर 90 से 180 दिनों से अधिक समय से लंबित शिकायतों पर सख्त रुख अपनाया और अधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर इनका त्वरित समाधान करने के लिए कहा।

     परिवादियों से सीधी बातचीत, मौके पर ही दिए समाधान के निर्देश
     निदेशक ने निरीक्षण के दौरान कई परिवादियों से सीधे दूरभाष पर संवाद कर उनकी समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुना। एक परिवादी द्वारा शिकायत दर्ज कराने पर उन्होंने तुरंत संज्ञान लेते हुए संबंधित तालाब के पानी की वॉटर टेस्टिंग कराने के निर्देश जारी किए, ताकि जलीय पर्यावरण अनुकूल बना रहे और मत्स्य पालकों को नुकसान न हो।

     तालाबों का ऑनलाइन ऑक्शन और हैचरी विकास
     श्रीमती बिश्नोई ने तालाबों और जलाशयों की ऑनलाइन ऑक्शन से संबंधित समस्याओं को प्राथमिकता से निस्तारित करने के निर्देश दिए ताकि नीलामी प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बनी रहे। इसके साथ ही उन्होंने राज्य में गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज उत्पादन बढ़ाने के लिए हैचरी के सुदृढ़ीकरण और विकास पर बल दिया।

     2,500 से 3,000 बांधों में रोजगार के नए अवसर
     मत्स्य निदेशक ने बताया कि राजस्थान के लगभग 2,500 से 3,000 छोटे-बड़े बांधों एवं जल संरचनाओं में मत्स्य पालन और एक्वाकल्चर के क्षेत्र में स्वरोजगार की अपार संभावनाएं छिपी हुई हैं। उन्होंने कहा कि सही प्रबंधन, पारदर्शी ऑक्शन और हैचरी के विकास से स्थानीय ग्रामीणों व युवाओं के लिए आजीविका के नए द्वार खुल रहे हैं।

     उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के निर्देशानुसार आमजन की शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए सभी विभागों के सचिव निर्धारित तिथियों पर राजस्थान संपर्क हेल्पलाइन (181) कंट्रोल रूम में उपस्थित होकर परिवादियों से सीधे संवाद कर रहे हैं। इस पहल के माध्यम से नागरिक घर बैठे अपनी शिकायत दर्ज कर शीघ्र समाधान प्राप्त कर रहे हैं। निरीक्षण के दौरान विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं आईटी विंग के तकनीकी विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

  • तीन दिन बदल सकता है मौसम का मिजाज, गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ बारिश के आसा

    तीन दिन बदल सकता है मौसम का मिजाज, गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ बारिश के आसा

    जयपुर
    राजस्थान में मानसून की रफ्तार फिलहाल धीमी पड़ गई है और इसका असर अब साफ तौर पर महसूस होने लगा है। कई जिलों में बारिश थमने से उमस और गर्मी ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। रविवार को बीकानेर संभाग सबसे ज्यादा गर्म रहा, जहां तीन जिलों में तापमान 41 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया। हालांकि, शाम होते-होते जयपुर, अलवर और दौसा समेत कुछ इलाकों में हल्की बारिश ने मौसम को थोड़ा राहतभरा बना दिया।

    इधर, मौसम विभाग ने सोमवार को राज्य के 24 जिलों में बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। अगले तीन दिन तक कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश, तेज हवाएं चलने और बिजली गिरने की संभावना जताई गई है। ऐसे में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    बीकानेर संभाग सबसे गर्म, चूरू बना सबसे तपता शहर
    कमजोर पड़े मानसून का सबसे ज्यादा असर बीकानेर संभाग में देखने को मिला। रविवार को चूरू 41.6 डिग्री सेल्सियस के साथ प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा। इसके अलावा श्रीगंगानगर में 41.4 डिग्री और बीकानेर में 41.2 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। फतेहपुर का पारा भी 40 डिग्री के करीब पहुंच गया।

    दौसा में 39.1, फलोदी में 39, झुंझुनूं में 38.9, सीकर में 38.5 और अलवर में 38 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया। दिनभर तेज धूप और उमस के कारण लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया।

    इन जिलों में हुई हल्की बारिश, लेकिन झमाझम का इंतजार जारी
    पिछले 24 घंटे के दौरान झुंझुनूं, सीकर, अलवर, कोटपूतली-बहरोड़, जयपुर, दौसा, करौली, बूंदी और अजमेर में बादलों की आवाजाही बनी रही। माउंट आबू में 2.5 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि चित्तौड़गढ़ में हल्की बूंदाबांदी हुई।

    अलवर जिले के माधोगढ़, नटनी का बारा, कुशलगढ़, अकबरपुर और सिलीसेढ़ जैसे इलाकों में रिमझिम बारिश से मौसम सुहावना हो गया। हालांकि, राज्य के अधिकांश हिस्सों में अब भी अच्छी बारिश का इंतजार बना हुआ है।

    जयपुर में दिन का तापमान घटा, लेकिन रातें हुईं ज्यादा गर्म
    राजधानी जयपुर में रविवार को अधिकतम तापमान 36.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो एक दिन पहले की तुलना में करीब एक डिग्री कम रहा। इससे दिन में कुछ राहत जरूर मिली, लेकिन रात की गर्मी बढ़ गई। न्यूनतम तापमान बढ़कर 30.6 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया, जिससे लोगों को उमस भरी रात का सामना करना पड़ा।

    अजमेर और कोटा में किसानों की बढ़ी चिंता
    अजमेर में पिछले करीब 10 दिनों से अच्छी बारिश नहीं हुई है। रविवार को दिनभर तेज धूप और उमस बनी रही। अधिकतम तापमान 36.7 और न्यूनतम 26.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले दिनों में मानसून फिर सक्रिय हो सकता है।

    कोटा में भी बादल छाए रहे, लेकिन बारिश नहीं हुई। अधिकतम तापमान 33.8 और न्यूनतम 29.1 डिग्री सेल्सियस रहा। हवा नहीं चलने से उमस बनी रही। खेतों में बारिश नहीं पहुंचने से किसानों की चिंता बढ़ने लगी है।

    जोधपुर और उदयपुर में भी उमस का असर
    जोधपुर में रविवार को अधिकतम तापमान 37.6 और न्यूनतम 29.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार 21 जुलाई तक मौसम शुष्क रह सकता है, जबकि 22 से 24 जुलाई के बीच बारिश की संभावना है।

    उदयपुर में दिन का तापमान घटकर 31.5 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया, लेकिन उमस कम नहीं हुई। इसका असर पर्यटन पर भी दिखाई दिया और कई प्रमुख पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की संख्या सामान्य से कम रही।

    अगले तीन दिन कैसा रहेगा मौसम?
    मौसम विभाग के अनुसार सोमवार से प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज बदल सकता है। 24 जिलों में बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। कई स्थानों पर गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश, 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और बिजली गिरने की संभावना है।

    हालांकि, फिलहाल पूरे प्रदेश में भारी बारिश की संभावना नहीं है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ दिनों में मानसून दोबारा सक्रिय होने पर राजस्थान के अधिकांश जिलों में अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है। तब तक लोगों को गर्मी, उमस और बीच-बीच में होने वाली हल्की बारिश के साथ बदलते मौसम का सामना करना पड़ेगा।

  • शादी के नाम पर ठगी का खेल, उम्रदराज युवकों को निशाना बनाता था लुटेरी दुल्हन गैंग

    शादी के नाम पर ठगी का खेल, उम्रदराज युवकों को निशाना बनाता था लुटेरी दुल्हन गैंग

    कोटा
    राजस्थान में कोटा जिले के रामगंजमंडी थाना क्षेत्र में पुलिस ने अंतरराज्यीय 'लुटेरी दुल्हन' गिरोह के आठ सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस अधीक्षक सुजीत शंकर ने शनिवार को बताया कि पुलिस ने अंतर्राज्यीय 'लुटेरी दुल्हन' गिरोह के आठ सदस्यों को गिरफ्तार किया है।

    यह गिरोह राजस्थान, मध्य प्रदेश, झारखंड और बिहार तक फैला हुआ था, जो अविवाहित और उम्रदराज युवकों को निशाना बनाता था। यह गैंग कॉरपोरेट की तरह काम करता था। लड़कों को जिन युवतियों से मिलाया जाता था वे पहले से ही शादीशुदा होती थीं। इसके लिए कोटा की रामगंज मंडी और झारखंड के धनबाद में बातें करने वाले मध्यस्थ तैनात थे।

    मंदिर में करवाते थे शादी
    गिरोह के दलाल पहले लडकों को लड़कियों की तस्वीरें दिखाते थे और फिर झारखंड से युवतियों को बुलाकर मंदिर में नकली शादी करवा देते थे। उन्होंने बताया कि शादी के नाम पर पीड़ितों से एक से दो लाख रुपये ऐंठे जाते थे, लेकिन शादी के महज एक-दो दिन बाद ही ये दुल्हनें अपने माता-पिता की बीमारी का झूठा बहाना बनाकर गहने और नकदी समेटकर फरार हो जाती थीं।

    पीड़ितों की शिकायत के बाद खुलासा
    पुलिस अधीक्षक सुजीत शंकर ने बताया कि इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश दो अलग-अलग पीड़ितों की शिकायतों के बाद हुआ। पहली शिकायत 13 जुलाई को लाडपुरा निवासी दिनेश कुमार ने दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने बताया कि गिरोह ने उनके साथ नकली शादी करवाकर पैसों की बड़ी धोखाधड़ी की है।

    पुलिस ने जाल बिछाकर किया गिरफ्तार
    इसके बाद, 16 जुलाई को हिरियाखेड़ी निवासी दिलीप सिंह ने भी इसी तरह की ठगी की शिकायत दर्ज कराई। इन दोनों ही मामलों में आरोपियों ने पीड़ितों को शादी का झांसा देकर लाखों रुपये हड़प लिए थे। इन शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस का एक विशेष दल का गठन किया गया, जिसने जाल बिछाकर गिरोह के आठ सदस्यों को धर दबोचा।

    कई इलाको में वारदात को दिया अंजाम
    उन्होंने बताया कि इस गिरोह ने पहले भी कई इलाकों में इसी तरह की वारदातों को अंजाम देकर लाखों रुपये लूटे हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह की सदस्य पूजा ने मध्य प्रदेश के मोड़ी हरिपुरा निवासी सुरेश पाटीदार से एक लाख रुपये, अंजलि ने झालावाड़ के दीपक मीणा से एक लाख रुपये, शिवानी ने असनावर के टिंकू सिंह से एक लाख 10 हजार रुपये, पिंकी ने अकलेरा के सत्यनारायण से डेढ़ लाख रुपये और सुनीता मुखर्जी ने बूंदी के डाबी निवासी धनराज से एक लाख 10 हजार रुपये लिए हैं। गिरफ्तार आरोपियों से कड़ाई से पूछताछ की जा रही है।

  • मिलावटी खाद्य पदार्थों पर शिकंजा: बाड़मेर में फैक्ट्री से भारी मात्रा में घी बरामद, जांच शुरू

    मिलावटी खाद्य पदार्थों पर शिकंजा: बाड़मेर में फैक्ट्री से भारी मात्रा में घी बरामद, जांच शुरू

    बाड़मेर
     राजस्थान के बाड़मेर जिले में मिलावटी खाद्य पदार्थों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत खाद्य सुरक्षा विभाग और सदर थाना पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की। विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने रविवार को रिंग रोड स्थित 'शिव गोरी' नाम से संचालित एक फैक्ट्री पर छापा मारा। कार्रवाई के दौरान टीम ने मौके से 870 किलो तैयार मिलावटी घी तथा 1595 किलो पाम ऑयल बरामद किया। बरामद सामग्री को जब्त कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस छापेमारी के बाद शहर के कारो​बारियों में हड़कंप मच गया।

    अधिकारियों के अनुसार, फैक्ट्री में बड़े पैमाने पर मिलावटी घी तैयार किए जाने की सूचना मिलने पर संयुक्त टीम ने बाड़मेर में छापेमारी की। जांच के दौरान फैक्ट्री में भारी मात्रा में तैयार घी और पाम ऑयल मिला, जिसके आधार पर मिलावट की आशंका को देखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग ने घी एवं अन्य सामग्री के नमूने एकत्र किए। इन नमूनों को प्रयोगशाला भेजा जाएगा, जहां जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    की जाएगी कठोर कानूनी कार्रवाई
    खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आमजन के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में घी के मिलावटी होने की पुष्टि होती है तो संबंधित संचालकों के विरुद्ध खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    मिलावटी खाद्य पदार्थों का कारोबार करने वालों में हड़कंप
    इस कार्रवाई से मिलावटी खाद्य पदार्थों का कारोबार करने वालों में हड़कंप मच गया है। प्रशासन ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि कहीं मिलावटी खाद्य सामग्री के निर्माण या बिक्री की जानकारी मिले तो इसकी सूचना तत्काल संबंधित विभाग को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई कर लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। फिलहाल मामले की जांच जारी है और प्रयोगशाला रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    विभाग की लोगों से अपील
    खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे केवल विश्वसनीय ब्रांड या लाइसेंसधारी दुकानों से ही खाद्य सामग्री खरीदें और किसी भी संदिग्ध उत्पाद या अवैध फैक्ट्री की जानकारी मिलने पर तत्काल खाद्य सुरक्षा विभाग को सूचना दें, ताकि आम लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ समय रहते सख्त कार्रवाई की जा सके।