Category: राजस्थान

  • तिलानेश गांव पहुंचे मुख्यमंत्री भजनलाल, बुजुर्ग की पीड़ा सुन हुए भावुक

    तिलानेश गांव पहुंचे मुख्यमंत्री भजनलाल, बुजुर्ग की पीड़ा सुन हुए भावुक

    नागौर
    मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने डेगाना उपखंड की तिलानेश ग्राम पंचायत में शुक्रवार रात को ग्राम विकास चौपाल के बाद आज सुबह गांव का भ्रमण कर ग्रामीणों से सीधे संवाद किया। इस दौरान वे खेत में निनाण (निराई) कर रही महिलाओं के बीच पहुंचे और खेती-किसानी तथा दैनिक जीवन से जुड़े अनुभव पूछे। महिलाओं ने मुख्यमंत्री को बताया कि गांव में वे एक-दूसरे के सहयोग से खेतों में काम करती हैं। एक दिन सभी मिलकर एक महिला के खेत में निराई करती हैं और दूसरे दिन दूसरी महिला के खेत में। इससे काम जल्दी पूरा हो जाता है और गांव में आपसी प्रेम व सहयोग की भावना भी बनी रहती है। मुख्यमंत्री ने महिलाओं की इस सामूहिक कार्य संस्कृति की सराहना करते हुए इसे ग्रामीण एकता का अच्छा उदाहरण बताया।

    नागौर जिले के तिलानेश गांव में भ्रमण के दौरान एक महिला ने मुख्यमंत्री को अपनी समस्या बताते हुए कहा कि गांव का गंदा पानी उसके घर के सामने आकर भर जाता है। मुख्यमंत्री ने इसका कारण पूछा तो ग्रामीणों ने बताया कि आगे पानी निकासी का कोई रास्ता नहीं होने से यह समस्या बनी हुई है। इस पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को समस्या के समाधान के निर्देश देते हुए आश्वस्त किया कि जल्द ही इसका निराकरण किया जाएगा। महिला ने मुख्यमंत्री का धन्यवाद देते हुए कहा कि उन्होंने उसकी बात सुनी।

    बुजुर्ग ने मुख्यमंत्री के सामने अपना दुख साझा किया
    भ्रमण के दौरान एक बुजुर्ग ने भी मुख्यमंत्री के सामने अपना दुख साझा किया। उन्होंने बताया कि उनके बेटे और पत्नी का निधन हो चुका है और वे अकेले हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि बुजुर्ग को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए और उनकी हर संभव सहायता सुनिश्चित की जाए। बातचीत के दौरान बुजुर्ग ने भावुक होकर बताया कि रात को उन्हें स्कूल परिसर में प्रवेश नहीं करने दिया गया था। तब उन्होंने वहां मौजूद लोगों से कहा कि सुबह घर पर मिल लेना, मुख्यमंत्री स्वयं आएंगे। इस पर उन्होंने मुख्यमंत्री से कहा, "हम तो आपके कबूतर हैं।"

    बुजुर्ग की इस आत्मीय बात पर मुख्यमंत्री ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, "मैं आपके दर्शन करने आया हूं।" मुख्यमंत्री के इस जवाब से वहां मौजूद ग्रामीणों के चेहरे खिल उठे और पूरा माहौल आत्मीयता से भर गया। मुख्यमंत्री ने ग्राम विकास चौपाल के बाद तिलानेश गांव में ही रात्रि विश्राम भी किया और देर शाम तक ग्रामीणों से मिलकर उनकी समस्याएं सुनीं तथा अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।

    शहीद के घर पहुंचे सीएम भजनलाल शर्मा
    ग्राम विकास चौपाल के बाद नागौर जिले की ग्राम पंचायत तिलानेश में सीएम भजनलाल शर्मा ने वीर सपूत, अमर शहीद ग्रेनेडियर मोडाराम खटकड़ जी के आवास पहुँचकर उनकी पावन स्मृतियों को श्रद्धापूर्वक नमन किया। इस अवसर पर उनके परिजनों के साथ भोज किया। बता दें कि सन् 1965 के भारत-पाक युद्ध में मातृभूमि की रक्षा करते हुए अमर शहीद ग्रेनेडियर मोडाराम खटकड़ शहीद हो गए थे।

    प्रदेश को मिली 8 अमृत स्टेशनों की सौगात
    इससे पहले शुक्रवार को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा नागौर के गोटन रेलवे स्टेशन से वीसी के जरिए प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रम से जुड़े और उनका संबोधन सुना। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत के संकल्प में रेलवे की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद भारतीय रेलवे में ऐतिहासिक परिवर्तन हुए हैं, जिससे देश की प्रगति, विकास और आत्मनिर्भर भारत की मजबूत आधारशिला बनी है। प्रधानमंत्री के कर कमलों से प्रदेश को 8 अमृत स्टेशनों की सौगात मिली है। ये अमृत स्टेशन विकसित राजस्थान के संकल्प को गति देने में महत्वपूर्ण कदम साबित होंगे।

  • राजस्थान में हर घर जल अभियान को केंद्र से 537.70 करोड़ की सहायता

    राजस्थान में हर घर जल अभियान को केंद्र से 537.70 करोड़ की सहायता

    जयपुर
    राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से चली आ रही पेयजल की समस्या को स्थाई रूप से समाप्त करने और दूर-दराज के ढाणियों तक स्वच्छ पीने का पानी पहुंचाने की दिशा में राज्य सरकार को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की प्रभावी पैरवी और केंद्र सरकार के साथ निरंतर समन्वय के सकारात्मक परिणाम धरातल पर दिखने लगे हैं, जिसके तहत भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय ने जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राजस्थान को 537.70 करोड़ रुपये की भारी-भरकम केंद्रीय सहायता राशि स्वीकृत कर दी है। यह विशेष वित्तीय फंड मिलने से प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में चल रही पाइपलाइन और वाटर प्यूरीफिकेशन प्रोजेक्ट्स को एक नई गति मिलेगी और राज्य सरकार का 'हर घर जल' का संकल्प और अधिक सशक्त होकर उभरेगा।

    केंद्र सरकार द्वारा जारी की गई यह राशि असल में जल जीवन मिशन के प्रथम चरण की समाप्ति और दूसरे चरण के शुरू होने के बीच की अंतरिम अवधि में राजस्थान सरकार द्वारा अपने संसाधनों से किए गए अतिरिक्त खर्च की प्रतिपूर्ति के रूप में दी जा रही है।

    सामान्य, SC और ST क्षेत्रों के लिए अलग-अलग बजट
    केंद्र सरकार की आधिकारिक स्वीकृति के अनुसार, इस पूरे 537.70 करोड़ रुपये के बजट को सामाजिक और क्षेत्रीय आवश्यकताओं के आधार पर तीन मुख्य भागों में विभाजित किया गया है, ताकि समाज के हर वंचित तबके तक पानी की पहुंच सुनिश्चित की जा सके।

    सामान्य क्षेत्र के लिए: ग्रामीण इलाकों के सामान्य घटकों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 307.45 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

    अनुसूचित जाति (SC) घटक: दलित बाहुल्य ग्रामीण क्षेत्रों में पाइपलाइन नेटवर्क बिछाने के लिए 177.73 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान है।

    अनुसूचित जनजाति (ST) घटक: राज्य के आदिवासी और पहाड़ी क्षेत्रों में जलापूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 52.52 करोड़ रुपये की राशि सुरक्षित की गई है।

    राजस्थान ने बनाया नया कीर्तिमान
    जल जीवन मिशन के मिशन निदेशक राजन विशाल ने बताया कि 1 अप्रेल 2026 के बाद से राज्य सरकार ने इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में एक नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि कागजी कार्यवाही को छोड़कर अब सीधे ग्राउंड पर रिजल्ट दिखाया जाए।

    प्रदेश में भौतिक रूप से पूरी तरह तैयार हो चुकी 3,241 पेयजल योजनाओं में से 2,520 योजनाओं का बहुत जल्द चरणबद्ध तरीके से 'जल अर्पण' कर जनता को समर्पित किया जाएगा।

    लगभग 713 करोड़ रुपये मूल्य के ऐसे पुराने वाउचर्स की पहचान की गई है जो पहले राष्ट्रीय पोर्टल पर प्रदर्शित नहीं हो रहे थे, उन्हें अब लाइव एंट्री के लिए भेजा गया है। इसके साथ ही 3,346 पुरानी योजनाओं के एकमुश्त निपटान (OTS) के लिए भी 537 करोड़ रुपये का अप्रूवल मिल चुका है।

    2,212 गांव प्रमाणित, 35 जिलों की सुधार योजना
    'हर घर जल' का लक्ष्य केवल कागजों तक सीमित न रहे, इसके लिए सर्टिफिकेशन प्रक्रिया को कड़ा किया गया है। अब तक राज्य के 2,212 से अधिक गांवों को 'हर घर जल' प्रमाणित घोषित किया जा चुका है, जिसमें से 705 नए प्रमाण-पत्र तो पिछले मात्र 2 महीनों में ही जारी किए गए हैं।

    इसके अलावा, प्रदेश की 93 प्रतिशत पेयजल योजनाओं के लिए डिजिटल सुजलम भारत आईडी जनरेट की जा चुकी है। शहरी क्षेत्रों को छोड़कर राज्य की सभी ग्राम पंचायतों और दूरस्थ गांवों में 100 प्रतिशत वाटर असेसमेंट का कार्य पूरा कर लिया गया है। प्रदेश के 40 में से 35 जिलों की विस्तृत जिला सुधार योजनाएं तैयार हो चुकी हैं, जबकि बचे हुए 5 जिलों का काम भी 31 जुलाई 2026 तक पूरा कर लिया जाएगा।

    डिजिटल मॉनिटरिंग और जियो-टैगिंग से बढ़ेगी पारदर्शिता
    भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण सामग्री की शिकायतों को पूरी तरह समाप्त करने के लिए जल जीवन मिशन 2.0 के तहत निर्मित होने वाली सभी सरकारी संपत्तियों की 'सुजलम भारत प्लेटफॉर्म' पर अनिवार्य रूप से जियो-टैगिंग की जाएगी। सुजलम मोबाइल एप्लीकेशन के प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग मॉड्यूल पर हर हफ्ते काम की लाइव प्रगति को अपडेट करना होगा, जिससे जयपुर में बैठे वरिष्ठ अधिकारी भी सीधे काम की गुणवत्ता देख सकेंगे।

    एक और महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए मिशन निदेशक ने बताया कि भारत सरकार ने अब इस महत्वाकांक्षी योजना की अंतिम समयसीमा को बढ़ाकर दिसंबर 2028 तक कर दिया है। केंद्र और राज्य सरकार की 50:50 की आर्थिक भागीदारी से चलने वाली यह योजना आने वाले 2 वर्षों में राजस्थान के ग्रामीण अंचल की तस्वीर को पूरी तरह बदल देगी और महिलाओं को पानी के लिए मीलों पैदल चलने के अभिशाप से हमेशा के लिए मुक्ति दिलाएगी।

  • केंद्र ने जल जीवन मिशन 2.0 के लिए राजस्थान को 486 करोड़ दिए

    केंद्र ने जल जीवन मिशन 2.0 के लिए राजस्थान को 486 करोड़ दिए

     जयपुर
     केंद्र सरकार ने आखिर राजस्थान को जल जीवन मिशन 2.0 के तहत बड़ी वित्तीय राहत देते हुए 486 करोड़ रुपए से ज्यादा राशि जारी करने की मंजूरी दे दी है। यह राशि राज्य सरकार को जल जीवन मिशन के पहले चरण की समाप्ति और जल जीवन मिशन 2.0 शुरू होने के बीच ग्रामीण क्षेत्रों में हर ग्रामीण परिवार तक नल से जल कनेक्शन (एफएचटीसी) उपलब्ध कराने पर किए गए खर्च की केंद्रीय हिस्सेदारी के रूप में दी जाएगी। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं।

    बता दें कि यह राशि साल 2026-27 के प्रस्ताव के आधार पर स्वीकृत की गई है। इसमें 277.91 करोड़ रुपए सामान्य श्रेणी, 160.65 करोड़ रुपए अनुसूचित जाति (एससीसी) और 47.48 करोड़ रुपए अनुसूचित जनजाति (एसटीसी) मद में शामिल हैं। राशि केंद्र और राज्य के 50:50 साझेदारी मॉडल के तहत स्वीकृत की गई है। जल जीवन मिशन में पूर्ववर्ती सरकार में हुए घोटाले के बाद राज्य सरकार ने इसमें कई तरह से होमवर्क करके केंद्र के मापदंड को पूरा किया है। जल जीवन मिशन के निदेशक राजन विशाल ने लंबे समय से रुकी हुई राशि को जारी कराने के लिए होमवर्क किया

    ये रहेगी निगरानी की शर्त
    केंद्र सरकार ने राज्य सरकार के लिए कुछ जरूरी शर्तें भी रखी हैं, जिन योजनाओं के लिए यह राशि दी जा रही है, उनसे जुड़ी सभी परिसंपत्तियों की जानकारी और उनकी लोकेशन 'सुजलम भारत' पोर्टल पर दर्ज करनी होगी।

    केंद्र सरकार के हिस्से की राशि
    जल जीवन मिशन 1.0 के दौरान केंद्र सरकार की हिस्सेदारी राज्य सरकार ने अपने संसाधनों से खर्च की थी। अब केंद्र सरकार उसी राशि की प्रतिपूर्ति कर रही है। अप्रैल 2024 के बाद बकाया राशि में से करीब 56 करोड़ की एक किस्त पहले आ चुकी है।

    यह किया स्पष्ट
    आदेश के अनुसार, केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया किया है कि कि यह राशि नॉर्मल प्रोग्राम के तहत जारी की जा रही है। इसका उद्देश्य राज्य सरकार द्वारा पहले से किए गए खर्च की प्रतिपूर्ति करना है, ताकि जल जीवन मिशन के कार्यों की वित्तीय गति बनी रहे।

    एससी-एसटी बहुल गांवों की योजनाओं पर ही होगा खर्च
    अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) मद से मिलने वाली राशि का उपयोग केवल उन ग्रामीण पेयजल योजनाओं पर किया जाएगा, जिनसे एससी और एसटी बहुल गांवों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जाना है।

  • सरकारी नौकरी में दिव्यांग कोटे के नियम बदले, यूडीआईडी कार्ड हुआ अनिवार्य

    सरकारी नौकरी में दिव्यांग कोटे के नियम बदले, यूडीआईडी कार्ड हुआ अनिवार्य

     जयपुर
    सरकारी नौकरियों में दिव्यांग कोटे का लाभ लेने वाले अभ्यर्थियों और वर्तमान कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर है। दिव्यांग प्रमाण पत्रों में आ रही विसंगतियों और फर्जीवाड़े पर लगाम कसने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब किसी भी सामान्य अस्पताल का प्रमाण पत्र सरकारी नौकरी के लिए मान्य नहीं होगा। सरकार ने प्रदेश के सभी 7 संभागीय मुख्यालयों के मेडिकल कॉलेजों में विशेष दिव्यांगता सत्यापन बोर्ड बनाने का निर्णय किया है। कार्मिक विभाग की शासन सचिव अर्चना सिंह ने यह कदम राजस्थान उच्च न्यायालय की ओर से अमन बनाम राज्य व अन्य मामले में दिए गए अंतरिम आदेश की पालना में उठाया है।

    अब ऐसे होगी दिव्यांगता की जांच
    अब पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और सख्त बना दिया गया है। चिकित्सा विभाग की ओर से सातों संभाग जयपुर, जोधपुर, अजमेर, बीकानेर, कोटा, उदयपुर और भरतपुर के मेडिकल कॉलेजों और उनसे संबद्ध अस्पतालों में दिव्यांगता सत्यापन बोर्ड का गठन किया जाएगा। इस बोर्ड में असिस्टेंट प्रोफेसर या उससे उच्च स्तर के डॉक्टर शामिल होंगे। मेडिकल कॉलेजों को सभी प्रकार की दिव्यांगता मापने के लिए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की ओर से तय किए गए मानक उपकरणों से सुसज्जित किया जाएगा। जांच के दौरान सभी संबंधित डॉक्टर अनिवार्य रूप से मौजूद रहेंगे।

    नौकरी चाहने वाले युवाओं के लिए क्या बदला
    अब भर्ती परीक्षाओं में आवेदन करते समय सभी अभ्यर्थियों के पास वैध यूडीआईडी कार्ड होना अनिवार्य होगा। राजस्थान लोक सेवा आयोग और कर्मचारी चयन बोर्ड सहित सभी भर्ती एजेंसियां अपने विज्ञापन में यह स्पष्ट लिखेंगी कि चयनित अभ्यर्थियों की दिव्यांगता की जांच केवल संभागीय मुख्यालयों पर बने नए बोर्ड द्वारा की जाएगी। यदि किसी अभ्यर्थी ने पहले से ही कोई दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवा रखा है, तो भी उसकी पात्रता का अंतिम निर्णय इस नए बोर्ड द्वारा मानकों के आधार पर की गई जांच के बाद ही तय होगा।

    पहले से नौकरी कर रहे कर्मचारियों का क्या होगा
    राज्य सरकार के जिन सेवारत दिव्यांग कर्मचारियों या अधिकारियों का पुन सत्यापन किया जा रहा है, उनके लिए भी स्थिति स्पष्ट कर दी गई है। यदि पुरानी जांच और नए सत्यापन में दिव्यांगता के प्रतिशत में अंतर पाया जाता है तो ऐसे कर्मचारियों की योग्यता का निर्धारण उनके चयन के समय लागू मेडिकल मानकों के आधार पर ही किया जाएगा।

    अपील का भी मिलेगा अधिकार
    सरकार ने अभ्यर्थियों और कर्मचारियों को राहत देते हुए अपीलीय सत्यापन मेडिकल बोर्ड बनाने का भी प्रावधान किया है। यह अपीलीय बोर्ड संभागीय मुख्यालय स्तर के मेडिकल कॉलेज में एडिशनल प्रिंसिपल या मेडिकल अधीक्षक की अध्यक्षता में बनेगा। इस बोर्ड के सदस्य प्रारंभिक सत्यापन बोर्ड के सदस्यों से उच्च पद के होंगे। यदि कोई नया अभ्यर्थी या सेवारत कर्मचारी प्रारंभिक मेडिकल बोर्ड की जांच या प्रतिशत से असंतुष्ट है, तो वह इस अपीलीय बोर्ड में अपील दायर कर सकेगा।

  • मानसून ब्रेक से राजस्थान बेहाल, कम बारिश से खरीफ फसलों पर संकट गहराया

    मानसून ब्रेक से राजस्थान बेहाल, कम बारिश से खरीफ फसलों पर संकट गहराया

    जयपुर
    राजस्थान में मानसून की रफ्तार थमने से एक बार फिर किसानों की चिंता बढ़ गई है। जुलाई के मध्य तक अच्छी बारिश की उम्मीद लगाए बैठे प्रदेश के कई हिस्सों में बादल तो गायब हैं, लेकिन गर्मी और उमस लगातार बढ़ रही है। मौसम विभाग ने गुरुवार (16 जुलाई) को प्रदेश में कहीं भी भारी बारिश का अलर्ट जारी नहीं किया है। हालांकि 13 जिलों में हल्की बारिश या बूंदाबांदी की संभावना जताई गई है। राहत की बात यह है कि 19 जुलाई से मौसम का मिजाज फिर बदल सकता है और मानसून दोबारा सक्रिय होने के संकेत मिल रहे हैं।

    मौसम विभाग के अनुसार फिलहाल राजस्थान में मानसून ‘ब्रेक फेज’ से गुजर रहा है। यही वजह है कि पिछले करीब एक सप्ताह से राज्य के अधिकांश हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बेहद कमजोर बनी हुई हैं। सैटेलाइट तस्वीरों में भी राजस्थान के ऊपर बादलों की कमी साफ दिखाई दे रही है। 10 जुलाई के बाद से लगभग यही स्थिति बनी हुई है।

    13 फीसदी कम बारिश, खेतों में बढ़ी चिंता
    मानसून की सुस्ती का सबसे ज्यादा असर खरीफ की फसलों पर दिखाई देने लगा है। प्रदेश में अब तक सामान्य से करीब 13 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। जिन इलाकों में बाजरा, मूंग, उड़द, तिल और दूसरी खरीफ फसलें बोई गई हैं, वहां नमी कम होने लगी है। कई जगह खेतों में फसलें मुरझाने लगी हैं और यदि अगले कुछ दिनों तक अच्छी बारिश नहीं हुई तो नुकसान बढ़ने की आशंका है।

    किसानों का कहना है कि बुवाई के बाद शुरुआती बारिश तो मिल गई, लेकिन अब लगातार सूखे जैसे हालात बनने से फसलों की बढ़वार प्रभावित हो रही है।

    आज इन 13 जिलों में बारिश की संभावना
    मौसम विभाग ने गुरुवार को श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, झुंझुनूं, सीकर, कोटपूतली-बहरोड़, खैरथल-तिजारा, अलवर, डीग, भरतपुर, धौलपुर, करौली और दौसा में कहीं-कहीं हल्की बारिश या बूंदाबांदी की संभावना जताई है। हालांकि प्रदेश के बाकी हिस्सों में मौसम मुख्यतः शुष्क रहने और गर्मी-उमस का असर बने रहने का अनुमान है।

    गर्मी और उमस ने किया बेहाल
    बारिश की कमी के कारण दिन के तापमान में भी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। पिछले 24 घंटे में श्रीगंगानगर प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 40.1 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। इसके बाद जैसलमेर में 39.0 डिग्री और बीकानेर में 38.8 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ।

    बुधवार शाम श्रीगंगानगर में हल्की बारिश जरूर हुई, लेकिन इससे मौसम में ज्यादा बदलाव नहीं आया।

    जयपुर से उदयपुर तक उमस का असर
    राजधानी जयपुर में दिनभर मौसम साफ रहा और बीच-बीच में हल्के बादल नजर आए। यहां अधिकतम तापमान 35.0 डिग्री और न्यूनतम 28.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। आने वाले दिनों में तापमान में और बढ़ोतरी की संभावना है।

    उदयपुर में तेज धूप और उमस ने लोगों को परेशान किया। यहां अधिकतम तापमान 34.0 डिग्री और न्यूनतम 26.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पिछले एक दिन में दिन और रात दोनों के तापमान में बढ़ोतरी हुई।

    अजमेर में अधिकतम तापमान 34.7 डिग्री और न्यूनतम 25.5 डिग्री सेल्सियस रहा। दिनभर उमस बनी रही, हालांकि शाम को चली हवा से लोगों को थोड़ी राहत मिली।

    कोटा में भी बारिश का इंतजार जारी है। यहां अधिकतम तापमान 37.4 डिग्री और न्यूनतम 28.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। उमस के कारण लोगों को दिनभर परेशानी झेलनी पड़ी।

    अलवर और सीकर में बूंदाबांदी की उम्मीद
    अलवर में सुबह घने बादल छाए रहे, लेकिन दोपहर बाद तेज धूप निकलने से गर्मी और उमस बढ़ गई। मौसम विभाग ने अगले पांच दिनों तक यहां बादलों की आवाजाही और हल्की बारिश की संभावना जताई है।

    सीकर में सुबह ठंडी हवा चलने से कुछ राहत मिली, लेकिन बाद में धूप तेज हो गई। जिले के उत्तर-पूर्वी हिस्सों में देर रात तक हल्की बारिश होने का अनुमान है। जिले में अब तक सामान्य से 45 प्रतिशत से भी कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे खेती पर असर साफ दिखाई देने लगा है।

    19 जुलाई से फिर सक्रिय हो सकता है मानसून
    मौसम विभाग के अनुसार 19 जुलाई से उत्तर-पश्चिम भारत में एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना है। इसके प्रभाव से राजस्थान में मानसून की गतिविधियां दोबारा तेज हो सकती हैं। यदि यह सिस्टम मजबूत रहा तो कई जिलों में अच्छी बारिश का दौर लौट सकता है और किसानों के साथ-साथ आम लोगों को भी गर्मी और उमस से राहत मिलने की उम्मीद है।

    फिलहाल प्रदेश में भारी बारिश का कोई अलर्ट नहीं है, लेकिन मौसम वैज्ञानिक लगातार बदलती परिस्थितियों पर नजर बनाए हुए हैं। अगले दो-तीन दिन राजस्थान के लिए इंतजार और उम्मीद वाले रहने वाले हैं। यदि 19 जुलाई के बाद मानसून फिर सक्रिय होता है तो सूखती फसलों को नई जिंदगी मिल सकती है और बारिश का लंबा इंतजार भी खत्म हो सकता है।

  • ओबीसी सर्वे पूरा, फिर भी पंचायत-निकाय चुनाव में देरी पर हाईकोर्ट सख्त

    ओबीसी सर्वे पूरा, फिर भी पंचायत-निकाय चुनाव में देरी पर हाईकोर्ट सख्त

     जयपुर
    राजस्थान में पंचायत-निकाय चुनाव को लेकर एक बार फिर तेजी आ गई है। राजस्थान हाईकोर्ट में आज गुरुवार को पंचायत-निकाय चुनाव के मामले में पूर्व विधायक संयम लोढ़ा व अन्य की ओर से दायर अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई होगी। इन याचिकाओं में अदालती आदेश के बावजूद चुनाव में देरी का आरोप लगाते हुए दोषियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही करने का आग्रह किया गया है। इसके साथ ही बुधवार को सुनवाई के दौरान राजस्थान हाईकोर्ट ने पंचायती राज संस्थाओं और नगर निकायों के चुनाव में देरी को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने अदालती आदेश की पालना नहीं होने को लेकर आज गुरुवार को दोपहर 2 बजे राज्य निर्वाचन आयुक्त को व्यक्तिश: अथवा वर्चुअल माध्यम से हाजिर होने का निर्देश दिया। साथ ही ओबीसी आरक्षण के मामले में जानकारी देने के लिए ओबीसी आयोग सचिव को भी मौजूद रहने को कहा है।

    ओबीसी आयोग ने किया 5 लाख से अधिक का सर्वे
    ताजा जानकारी के अनुसार ओबीसी आयोग ने पांच लाख से अधिक परिवारों का सर्वे पूरा कर लिया है। इसके अलावा सर्वे कार्य में लगाए गए करीब 15 हजार कर्मचारी तबादले के बाद रिलीव हो गए थे, उनके स्थान पर नए कर्मचारी लगाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। राजस्थान की राजधरा एप में आ रही समस्या को भी दूर कर दिया गया।

    उन्होंने अदालती आदेश का उल्लंघन किया…
    इससे पूर्व बुधवार को हाईकोर्ट ने पंचायती राज संस्थाओं और नगर निकायों के चुनाव में देरी को लेकर नाराजगी जताई। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायाधीश संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने पूर्व विधायक संयम लोढ़ा व अन्य की याचिका के संबंध में राज्य सरकार की ओर से पेश प्रार्थना पत्र पर बुधवार को कहा कि संविधान के अनुच्छेद 243-क के तहत राज्य निर्वाचन आयुक्त चुनाव के मामले में अदालती आदेश का पालन करवाने के लिए बाध्य थे। प्रथम दृष्टया लगता है, उन्होंने अदालती आदेश का उल्लंघन किया है।

    14 अगस्त तक पेश होगी रिपोर्ट
    राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि हाईकोर्ट ने 22 मई को राज्य निर्वाचन आयोग को ग्राम पंचायतों तथा नगर निकायों के चुनाव 31 जुलाई तक करवाने के निर्देश दिए थे, लेकिन अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है।

    आयोग ने 3 जुलाई को सरकार को बताया कि सर्वे कार्य 23 जुलाई तक पूरा होगा और 14 अगस्त तक रिपोर्ट पेश कर दी जाएगी।

    सरकार ने रखा अपना पक्ष
    1- राजनीतिक आरक्षण का निर्धारण संवैधानिक एवं न्यायिक मानकों के अनुरूप किया जाना आवश्यक है, इसलिए प्रक्रिया में अतिरिक्त समय लग रहा है।
    2- राज्य की लगभग 50 प्रतिशत जनसंख्या अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित है और उनके संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना आवश्यक है।

  • IPS Transfer 2026: सरकार का बड़ा तबादला आदेश, 18 IPS अधिकारियों का हुआ स्थानांतरण, 4 जिलों में नए SP नियुक्त

    IPS Transfer 2026: सरकार का बड़ा तबादला आदेश, 18 IPS अधिकारियों का हुआ स्थानांतरण, 4 जिलों में नए SP नियुक्त

    जयपुर 

    राजस्थान में पुलिस विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। राज्य की भजनलाल सरकार ने भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के 18 अधिकारियों के तबादलों किए हैं। कार्मिक विभाग की ओर से जारी आदेशानुसार,  महानिदेशक (DG) स्तर के अधिकारियों से लेकर कई रेंजों के आईजी (IG) और जिलों के पुलिस अधीक्षकों (SP) के कार्यक्षेत्र बदले गए हैं। इस सूची में डीजी रैंक के 2 और आईजी रैंक के 6 अफसरों को नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा चार जिलों में नए एसपी भी लगाए गए हैं।

    राजस्थान आईपीएस अधिकारी तबादला सूची

        वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अनिल पालीवाल को महानिदेशक और कमांडेंट जनरल, गृह रक्षा ।
        मालिनी अग्रवाल को महानिदेशक पुलिस (यातायात) ।
        जोधपुर कमिश्नर रहे शरत कविराज को पुलिस महानिरीक्षक (आईजी), अपराध शाखा ।
        राजेंद्र सिंह को आईजी, सतर्कता, जयपुर ।
        अंशुमन भोमिया को पुलिस आयुक्त, जोधपुर।
        कैलाश चंद बिश्नोई को आईजी, आयोजना, आधुनिकीकरण एवं कल्याण ।
        डॉ. प्रीति चंद्रा को आईजी, भरतपुर रेंज ।
        डॉ. रवि को आईजी, अजमेर रेंज ।
        प्रदीप मोहन शर्मा को अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (यातायात एवं प्रशासन), जयपुर पुलिस आयुक्तालय ।
        रमेश को पुलिस अधीक्षक, सीबी (ह्यूमन राइट्स एंड वीकर सेक्शंस), पुलिस मुख्यालय जयपुर ।
        नरेंद्र सिंह मीणा को कमांडेंट, 10वीं बटालियन आरएसी, बीकानेर।
        अनुष्ठा कालिया को पुलिस उपायुक्त (मुख्यालय), पुलिस आयुक्तालय, जयपुर
        अजेय सिंह राठौड़ को कमाण्डेन्ट, 7वीं बटालियन, आर.ए.सी., भरतपुर
        पी.डी. नित्या को पुलिस अधीक्षक, एसीबी, जोधपुर।

    इन जिलों के एसपी बदले

        राजेश कुमार कांवट को पुलिस अधीक्षक, बालोतरा ।
        बी. आदित्य को पुलिस अधीक्षक, हनुमानगढ़ ।
        पंकज यादव को पुलिस अधीक्षक, जोधपुर ग्रामीण ।
        विशाल जांगिड़ को बीकानेर पुलिस अधीक्षक, प्रतापगढ़

     

  • आईआईएस बेंगलुरु जांच में राजस्थान की सीमन तकनीक गुणवत्ता पर खरी

    आईआईएस बेंगलुरु जांच में राजस्थान की सीमन तकनीक गुणवत्ता पर खरी

     जयपुर
    पशुपालकों की आय में वृद्धि, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने तथा देशी पशुधन के वैज्ञानिक नस्ल सुधार को गति देने के उद्देश्य से राजस्थान सरकार स्वदेशी जेंडर सॉर्टेड सीमन तकनीक के व्यापक उपयोग को गति दे रही है। कम लागत वाली इस आधुनिक तकनीक के माध्यम से उच्च गुणवत्ता वाली बछियों के जन्म की संभावना बढ़ती है, जिससे पशुपालकों को दीर्घकालिक आर्थिक लाभ प्राप्त होता है। इसी दृष्टिकोण के साथ राजस्थान आज देश के उन अग्रणी राज्यों में शामिल है, जहां इस तकनीक को बड़े स्तर पर किसानों के हित में अपनाया जा रहा है।

    हाल ही में कुछ क्षेत्रों से जेंडर सॉर्टेड सीमन के परिणामों को लेकर शिकायतें प्राप्त हुई थीं। राज्य सरकार ने पशुपालकों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए तत्काल संज्ञान लिया तथा संबंधित क्षेत्रों सहित विभिन्न स्थानों से रैंडम आधार पर सीमन के नमूने एकत्रित कर उनकी स्वतंत्र वैज्ञानिक जांच के लिए इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (आई आई एस), बेंगलुरु भेजे। जांच रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से प्रमाणित हुआ है कि विभाग द्वारा उपलब्ध कराये जा रहे जेंडर सॉर्टेड सीमन में 88 से 96 प्रतिशत तक क्रियाशील एक्स-क्रोमोज़ोम वाले शुक्राणु पाए गए हैं, जो कि पूरी तरह गुणवत्तापूर्ण, वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप एवं तकनीकी रूप से शुद्ध है। रिपोर्ट में सीमन की गुणवत्ता व तकनीक में किसी भी प्रकार की कमी नहीं पाई गई।

    इस विषय पर पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत एवं पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ. सुरेश चंद मीणा ने विभागीय अधिकारियों एवं संबंधित पक्षों के साथ विस्तृत संवाद किया। बैठक में स्पष्ट किया गया कि राज्य सरकार किसानों के हित में स्वदेशी जेंडर सॉर्टेड सीमन तकनीक के उपयोग के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित स्वदेशी तकनीक न केवल किफायती और प्रभावी है, बल्कि पशुपालन प्रणाली के अनुरूप विकसित होने के कारण पशुपालकों के लिए अधिक उपयोगी एवं लाभकारी सिद्ध होती है।

    विभाग द्वारा निर्धारित वैज्ञानिक प्रोटोकॉल एवं कोल्ड चेन का पालन करते हुए प्रशिक्षित कृत्रिम गर्भाधान कार्यकर्ताओं के माध्यम से यह सेवा उपलब्ध कराई जा रही है। बैठक में अवगत कराया गया कि प्रदेश में जून मध्य तक 6.24 लाख जेंडर सॉर्टेड सीमन डोज की आपूर्ति की जा चुकी है, जिनमें से 3.23 लाख डोज का उपयोग किया गया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जेंडर सॉर्टेड सीमन से गर्भधारण करने वाले अधिकांश पशुओं में बछियों का जन्म दर्ज किया गया है, जो इस तकनीक की विष्वसनीयता एवं प्रभावशीलता का प्रमाण है।

    बैठक में यह भी निर्देश दिए गए कि विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए स्वदेशी जेंडर सॉर्टेड सीमन का शत-प्रतिशत उपयोग सुनिश्चित किया जाए तथा फील्ड प्रोटोकॉल एवं कोल्ड चेन का कड़ाई से पालन किया जाए ताकि प्रत्येक पशुपालक तक इस तकनीक का पूरा लाभ पहुंच सके। राजस्थान सरकार ने सभी पशुपालकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की भ्रामक व अपुष्ट जानकारी पर विष्वास न करें तथा अपने निकटतम पशु चिकित्सालय अथवा पशुपालन विभाग के अधिकारियों से संपर्क कर इस वैज्ञानिक एवं प्रमाणित तकनीक का लाभ उठाएं। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार वैज्ञानिक पशुपालन, स्वदेशी तकनीकों के संवर्धन तथा पशुपालकों की समृद्धि के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

  • शेखावाटी के बाद अब बाड़मेर-जालोर को पानी दिलाने की मांग तेज हुई

    शेखावाटी के बाद अब बाड़मेर-जालोर को पानी दिलाने की मांग तेज हुई

    जयपुर
    भजनलाल सरकार ने शेखावाटी इलाके के लिए यमुना जल समझौता करके ऐतिहासिक कदम उठाया है। शेखावाटी जनता की खुशी बाड़मेर-बालोतरा-जालोर की जनता के चेहरे पर भी आ सकती है। करीब दो दशक से गुजरात के कडाण बांध में फिजूल बह रहे इन जिलों के हिस्से का पानी गुजरात और राजस्थान सरकार के साझा समझौता करने पर मिल सकता है। महज 17 किलोमीटर दूर यह पानी गुजरात में है।

    माही परियोजना प्रोजेक्ट 1966 में बना था और 1979 में गुजरात के कडाण इलाके तक बांध बन गया। साथ ही यहां तक पानी भी आ गया। यह स्थान राजस्थान से महज 17 किमी की दूरी पर ही है। यहां कुल 87 टीएमसी पानी पहुंच गया। योजना में तय था कि इसमें से 28 टीएमसी पानी राजस्थान को दिया जाएगा।

    इस पानी का फायदा राजस्थान के जालोर, सिरोही, बाड़मेर और जैसलमेर जिले को मिलना था। 650 से अधिक गांव ढाणियों तक नहर बनाकर यह पानी पहुंचाने की योजना बनाई गई थी। सिंचाई और पेयजल के लिए बनी इस योजना में गुजरात सरकार ने कडाण तक अपना कार्य पूर्ण कर फिर रोक दिया। आगे का कार्य दोनों राज्यों के समझौते से होना था लेकिन गुजरात ने साथ नहीं दिया। कुल 337 किमी हाईलेवल कैनाल बननी थी इसमें से 320 किमी गुजरात में ही बना दी गई।

    राजस्थान ने कई बार आवाज उठाई
    वर्ष 2007 से लगातार इसको लेकर राजस्थान के किसानों ने आवाज उठाई कि उनके हिस्से का 28 टीएमसी पानी मिले लेकिन इसका असर कहीं नहीं हुआ। 2007 में खोसला कमेटी का गठन हुआ। इस कमेटी ने भी राजस्थान के हक में बात रखी पर बात नहीं बनी।

    2024 में मुख्यमंत्री ने पत्र लिखा था
    18 जून 2024 को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी केन्द्र सरकार को पत्र लिखकर गुजरात से राजस्थान के हिस्से के पानी की मांग की थी। गुजरात और राजस्थान में पत्र व्यवहार तो हुआ लेकिन पेयजल को लेकर समस्या का समाधान नहीं हुआ है।

    चार जवाई बांध भरने की क्षमता
    यह पानी खंभात की खाड़ी में फिजूल बह रहा है। जवाई बांध जैसे चार जवाई बांध भरने की क्षमता रखता है। इस पानी को लेकर आंदोलन और पैरवी भी खूब हुई है। शेखावटी के लिए जैसे पानी आया है, वैसे ही यह पानी गुजरात से मांगकर लिया जा सकता है। यह राजस्थान के हिस्से और हक का पानी है।
    केसरसिंह राठौड़, राजस्थान किसान संघर्ष समिति प्रदेश उपाध्यक्ष

  • RGHS नियम बदले, तीन घंटे में मंजूरी नहीं तो आवेदन स्वतः स्वीकृत होगा

    RGHS नियम बदले, तीन घंटे में मंजूरी नहीं तो आवेदन स्वतः स्वीकृत होगा

     जयपुर
    राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (आरजीएचएस) की जांच के लिए नई गाइडलाइन आज सोमवार 13 जुलाई से लागू होगी। नए नियमों के तहत डॉक्टर की ओर से लिखी गई नियमित ओपीडी जांचों की कुल लागत 2,000 रुपए तक है तो मरीज को किसी भी तरह की पूर्व अनुमति (प्री-ऑथराइजेशन) की जरूरत नहीं होगी। हालांकि 2,000 रुपए से अधिक की नियमित जांच के लिए संबंधित अस्पताल को आरजीएचएस पोर्टल पर प्री-ऑथराइजेशन लेना होगा। इसके लिए डॉक्टर की पर्ची, मरीज की मेडिकल हिस्ट्री, पूर्व जांच रिपोर्ट (यदि उपलब्ध हो) और जांच की आवश्यकता का स्पष्ट चिकित्सकीय औचित्य ऑनलाइन अपलोड करना होगा। महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि मंजूरी की प्रक्रिया को समयबद्ध किया गया है।

    ये भी बदलाव
    1- अर्जेंट मामलों में थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर (टीपीए) को एक घंटे और सामान्य मामलों में तीन घंटे के भीतर निर्णय देना होगा। निर्धारित समय में कोई फैसला नहीं होता है तो अनुरोध स्वतः स्वीकृत (ऑटो-अप्रूव्ड) माना जाएगा।
    2- आपातकालीन परिस्थितियों में पहले की तरह किसी भी प्रकार की पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी। अस्पताल तत्काल जांच और उपचार शुरू कर सकेंगे, लेकिन बाद में आवश्यक क्लिनिकल दस्तावेज और औचित्य आरजीएचएस पोर्टल पर अपलोड करना होगा।

    हालांकि अस्पताल या डॉक्टर को बाद में मरीज से जुड़े सभी क्लिनिकल दस्तावेज और जांच का औचित्य राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) पोर्टल पर अपलोड करना होगा। अगर किसी मरीज की OPD जांच की कुल लागत 2,000 रुपए से अधिक होती है, तो अस्पताल को RGHS पोर्टल पर प्री-अथॉराइजेशन के लिए आवेदन करना होगा।

    तो आवेदन को स्वतः मंजूर माना जाएगा
    आवेदन के साथ ओपीडी प्रिस्क्रिप्शन, मरीज का मेडिकल इतिहास, पूर्व जांच रिपोर्ट जांच की आवश्यकता का स्पष्ट क्लिनिकल औचित्य अपलोड करना अनिवार्य रहेगा। नई व्यवस्था में समयबद्ध मंजूरी की भी व्यवस्था की गई है। तत्काल जांच के मामलों में TPA को एक घंटे के भीतर और सामान्य मामलों में 3 घंटे के भीतर फैसला देना होगा। यदि निर्धारित समय सीमा में कोई निर्णय नहीं आता है, तो आवेदन को स्वतः मंजूर माना जाएगा।

    सरकार ने सभी RGHS से सूचीबद्ध निजी अस्पतालों, डायग्नोस्टिक सेंटरों और थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर को इन निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। नई गाइडलाइन 13 जुलाई 2026 या उसके बाद प्रस्तुत किए जाने वाले सभी OPD रूटीन इन्वेस्टिगेशन अनुरोधों पर लागू होगी।