Category: राजस्थान

  • ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहला बड़ा हवाई युद्धाभ्यास, जोधपुर में जुटेंगी विदेशी वायुसेनाएं

    ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहला बड़ा हवाई युद्धाभ्यास, जोधपुर में जुटेंगी विदेशी वायुसेनाएं

    जयपुर
    भारतीय वायुसेना का मेगा मल्टीलेटरल युद्धाभ्यास तरंगशक्ति का दूसरा संस्करण ‘तरंगशक्ति-2026’ सितंबर से राजस्थान के जोधपुर वायुसेना स्टेशन पर शुरू होगा। यह अभ्यास केवल लड़ाकू विमानों की उड़ान तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि भारत की बढ़ती सैन्य क्षमता, रणनीतिक साझेदारी और स्वदेशी रक्षा तकनीक का वैश्विक प्रदर्शन भी बनेगा। खास बात यह है कि मई 2025 में 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारतीय वायुसेना की ओर से पाकिस्तान के एयरबेस पर की गई कार्रवाई के बाद यह पहला बड़ा बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास होगा।

    इसमें अमरीका, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त अरब अमीरात, ग्रीस, सिंगापुर, बांग्लादेश और श्रीलंका अपने-अपने लड़ाकू विमान, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर के साथ भाग लेंगे। 18 देशों के सैन्य पर्यवेक्षक भी मौजूद रहेंगे। भारत ने 51 देशों को आमंत्रित किया है, जिसमें से अधिकांश ने सहमति दी है। यह युद्धाभ्यास एक पखवाड़े का होगा, जो सितंबर अंत से लेकर अक्टूबर तक चलेगा। मानसून जाने के बाद जोधपुर का आसमान एकदम साफ होने की वजह से फ्लाइंग के लिए बेहतरीन माना जाता है। तरंगशक्ति का पहला संस्करण वर्ष 2024 में अगस्त-सितंबर में तमिलनाडु और जोधपुर में हुआ था।

    डिफेंस एक्सपो सहित कई कार्यक्रम होंगे
    युद्धाभ्यास में डिफेंस एक्सपो सहित कई कार्यक्रम होंगे, जिसमें एक दूसरे देश की सैन्य क्षमताओं का प्रदर्शन होगा। नई वार टेक्नोलॉजी का भी प्रदर्शन किया जाएगा। भारत भी स्वदेशी तकनीक को दूसरे देशों को बताएगा ताकि डिफेंस सामग्री के लिए मार्केट मिल सके। इसके अलावा युद्धाभ्यास के दौरान भारतीय वायुसेना के विमान अलग-अलग मैन्युवर में प्रदर्शन करेंगे। सूर्यकिरण टीम 9 हॉक विमानों के साथ भाग लेगी। सारंग हेलीकॉप्टर टीम के भी शामिल होने की संभावना है।

    इन लड़ाकू विमानों के शामिल होने की संभावना
        ऑस्ट्रेलिया से एफ-18
        बांग्लादेश से सी-130 ट्रांसपोर्ट जहाज
        ग्रीस से एफ-16 लड़ाकू विमान
        यूएई से एफ-16 व अवॉक्स
        अमरीका से एफ-16, ए-10, एफआरए
        सिंगापुर से सी-130
        जापान एयरफोर्स के लड़ाकू विमान
        यूएई से एफ-16

    भारतीय वायुसेना के ये विमान होंगे शामिल
    तेजस, राफेल, सुखोई-30 एमकेआई, मिराज-2000, जगुआर, मिग-29, एलसीएच प्रचंड हेलीकॉप्टर, एएलएच मार्क-4 रुद्र हेलीकॉप्टर, सी-130, आईएल-78, अवॉक्स।

    सभी देशों की एयरफोर्स ऐसे करेगी युद्धाभ्यास

    • विद इन विजुअल रेंज (WVR) कॉम्बेट मिशन।
    • बियोंड विजुअल रेंज कॉम्बेट (बीवीआर) मिशन।
    • लार्ज फोर्स एंगेजमेंट (एलएफई)।
    • एयर मोबिलिटी ऑपरेशन।
    • लॉ लाइट ऑपरेशन।
    • डायनेमिक टारगेटिंग।
    • एयर टू एयर रिफ्यूलिंग मिशन।
    • कॉम्बेट सर्च एण्ड रेस्क्यू।
    • हाई वेल्यू एरियल एसेट प्रोटेक्शन एंड बस्टिंग।
  • टोंक निकाय चुनाव में बदलेगा सियासी गणित, वार्ड आरक्षण से बढ़ी नेताओं की हलचल

    टोंक निकाय चुनाव में बदलेगा सियासी गणित, वार्ड आरक्षण से बढ़ी नेताओं की हलचल

     टोंक
    टोंक जिले में नगर निकाय चुनाव का बिगुल बजने वाला है। जल्द ही राज्य चुनाव आयोग की ओर से आचार संहिता लागू कर चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर दी जाएगी। माना जा रहा है कि 20 अगस्त के बाद चुनाव की तिथि का एलान कर दिया जाएगा। जिला निर्वाचन विभाग की ओर से इस बारे में तैयारियां तेजी से चल रही हैं। इधर, विभाग की ओर से जिले में निकायवार वार्डों के आरक्षण संख्या भी निर्धारित कर दी गई है। अब सिर्फ नगर निकाय के वार्ड की आरक्षण लॉटरी निकाली जाएगी।

    निकाय और पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच टोंक की सियासत में पुराने चुनावी आंकड़े एक बार फिर चर्चा में हैं। आगामी चुनाव में जिला प्रमुख का पद एससी महिला के लिए आरक्षित होने के बाद अब जिले की सियासी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पांचवीं बार जिला प्रमुख की कुर्सी किस महिला के सिर सजेगी। इससे पहले टोंक में सरोज बंसल, कंचन देवी जैन, सरोज गुर्जर और कल्ली देवी जिला प्रमुख रह चुकी हैं।

    प्रशासन की तैयारियां जारी
    नगर निकायों में वार्डवार आरक्षण की लॉटरी 17 अगस्त को निकाली जाएगी। इसकी तैयारियों में प्रशासन जुटा हुआ है। नगर परिषद टोंक में 60 वार्ड के लिए मतदान होगा। वर्ष 2019 में हुए नगर परिषद के चुनाव में भी इतने ही वार्डों के लिए मतदान हुआ था। वहीं, चेयरमैन का पद भी पिछली बार ही तरह ही अनारक्षित रखा गया है।

    जिला परिषद में भाजपा ने पलटा था समीकरण
    दिसंबर 2020 में हुए जिला परिषद चुनाव में भाजपा ने जिला प्रमुख पद पर जीत दर्ज की थी। जिला परिषद के कुल 25 सदस्यों में भाजपा को 14 और कांग्रेस को 11 वोट मिले थे। खास बात यह रही कि कांग्रेस को भाजपा के एक सदस्य का वोट मिला था। वहीं, जिला परिषद के चुनाव परिणाम में भाजपा ने 15 सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस के खाते में 10 सीटें आई थी। इसके बावजूद जिला प्रमुख के चुनाव में एक भाजपा सदस्य का क्रॉस वोट चर्चा का विषय बना था।

    2019 में बोर्ड और सभापति कांग्रेस का
    वर्ष 2019 में हुए टोंक नगर परिषद चुनाव में कांग्रेस ने सबसे ज्यादा 27 वार्डों में जीत दर्ज की थी। भाजपा के 23 पार्षद चुने गए, जबकि 10 निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी जीत हासिल की थी। कुल 60 वार्डों वाली परिषद में सभापति पद के चुनाव के दौरान सियासी समीकरण और दिलचस्प हो गए थे। सभापति के मतदान में कांग्रेस के अली अहमद को 36 वोट मिले, जबकि भाजपा की लक्ष्मी जैन को 24 वोट मिले थे। इस तरह कांग्रेस ने सभापति की कुर्सी पर कब्जा जमाया था।

    अब आरक्षण ने फिर बदल दिया सियासी गणित
    आगामी चुनाव में जिला प्रमुख पद एससी महिला के लिए आरक्षित होने से पुराने राजनीतिक समीकरणों के साथ नए चेहरे भी चर्चा में आ गए हैं। अब प्रमुख दलों में ऐसी महिला दावेदारों की तलाश शुरू होगी, जिनके पास राजनीतिक अनुभव के साथ चुनाव जीतने की क्षमता और संगठन में मजबूत पकड़ हो।

    इन वर्गों के बनेंगे चेयरमैन
    नगर निकाय             चेयरमैन पद की सीट
    टोंक                           अनारक्षित
    निवाई                        अनारक्षित
    मालपुरा                     अनारक्षित
    टोडारायसिंह              अनारक्षित
    उनियारा                     अनारक्षित
    डिग्गी                         अनारक्षित
    लाम्बाहरिसिंह              अनारक्षित महिला
    पीपलू                         एससी
    देवली                          एससी
    दूनी                        एससी महिला

    पंचायत व नगर निकाय चुनाव की तैयारियां जारी हैं। वार्डवार आरक्षण की लॉटरी 17 या 18 अगस्त को निकाली जाएगी। चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा होते ही दिशा-निर्देश जारी कर दिए जाएंगे।
    -विनोद कुमार मीना, अतिरिक्त जिला कलक्टर टोंक

    पंचायत व निकाय चुनाव को देखते हुए कांग्रेस की ओर से गांव-गांव और शहरों में तैयारियां की जा रही हैं। अब प्रत्याशियों को लेकर मंथन किया जाएगा।
    -सउद सईदी, जिलाध्यक्ष कांग्रेस टोंक

    भाजपा ने टोंक जिले में नगर निकाय और पंचायतराज चुनाव की पूरी तैयारियां कर ली हैं। जल्द ही प्रत्याशियों को लेकर बैठक में चर्चा की जाएगी। पार्टी पूरी ताकत से लड़ेगी।
    -चंद्रवीर सिंह चौहान, जिलाध्यक्ष भाजपा टोंक

     

  • अलवर में बदल गया सियासी गणित, मेयर पद अनारक्षित महिला और जिला प्रमुख ST महिला के लिए रिजर्व

    अलवर में बदल गया सियासी गणित, मेयर पद अनारक्षित महिला और जिला प्रमुख ST महिला के लिए रिजर्व

    अलवर
     अलवर नगर निगम में मेयर (महापौर) की सीट अनारक्षित (ओपन फॉर ऑल) महिला वर्ग के लिए रिजर्व हो गई है। इसी प्रकार अलवर जिला प्रमुख की सीट अनुसूचित जनजाति (एसटी) महिला वर्ग के लिए आरक्षित कर दी गई है। नवगठित खैरथल-तिजारा जिले में जिला प्रमुख की सीट ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित की गई है तथा कोटपूतली-बहरोड़ जिले में जिला प्रमुख की सीट अनारक्षित के लिए रहेगी। गुरुवार को स्वायत्त शासन विभाग व पंचायती राज विभाग की ओर से जयपुर में इन पदों की लॉटरी निकाली गई। पिछले चुनाव में अलवर जिला प्रमुख की सीट ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित थी। अलवर जिले के 12 में से 8 निकायों में इस बार मुखिया की कुर्सी महिलाएं संभालेंगी।

    12 वार्ड एससी के लिए आरक्षित, लॉटरी 17 को
    अलवर नगर निगम (पूर्व में नगर परिषद) में महापौर/सभापति का पद वर्ष 2019 व 2014 के चुनाव में अनारक्षित के खाते में गया था। अलवर नगर निगम के 65 वार्डों में से एससी के 12 वार्ड आरक्षित होंगे, जिसमें 4 महिलाओं के नाम रहेंगे। इस बार एक वार्ड एससी का बढ़ा है। एसटी के लिए 2 वार्ड आरक्षित हुए हैं, जिसमें एक महिला व एक पुरुष के लिए है। अनारक्षित के लिए 38 वार्ड रहेंगे, जिसमें 13 महिलाएं चुनी जाएंगी। इन सभी वार्डों की लॉटरी 17 अगस्त को निकाली जाएगी।

    अलवर में अब जिला पार्षद के 29 पद
    अलवर जिला परिषद में जिला प्रमुख का पद ओबीसी वर्ग के खाते में था, जो इस बार नए जिले खैरथल-तिजारा व कोटपूतली बहरोड़ के बनने से एसटी महिला वर्ग के खाते में गया। खैरथल-तिजारा को पहली बार नया जिला प्रमुख मिलेगा। यहां की जिला परिषद में अलवर से कटकर 11 जिला पार्षद गए हैं। अलवर में अब 29 जिला पार्षद रह गए हैं। कोटपूतली-बहरोड़ जिले में 9 जिला पार्षद अलवर जिले से गए हैं। अलवर में पहले कुल 49 जिला पार्षद थे।

    कहां किसको मिलेगी चेयरमैन/सभापति की कुर्सी
    नगर निगम अलवर: अनारक्षित महिला
    नगर परिषद भिवाड़ी: ओबीसी ओपन
    खैरथल नगर परिषद: अनारक्षित
    तिजारा नगर परिषद: अनारक्षित
    बहरोड़ नगर परिषद: अनारक्षित
    बहादुरपुर नगर पालिका: ओबीसी ओपन
    बड़ौदामेव नगर पालिका: एससी महिला
    गोविंदगढ़ नगर पालिका: अनारक्षित महिला
    टपूकड़ा नगर पालिका:एससी
    मांढ़ण नगर पालिका: एससी
    कठूमर नगर पालिका: एससी महिला
    खेरली नगर पालिका:अनारक्षित
    लक्ष्मणगढ़ नगर पालिका: अनारक्षित महिला
    मालाखेड़ा नगर पालिका: एसटी
    रामगढ़ नगर पालिका:एससी
    थानागाजी नगर पालिका: अनारक्षित महिला
    राजगढ़ नगर पालिका:ओबीसी ओपन
    मुंडावर नगर पालिका: ओबीसी ओपन
    नौगांवा नगर पालिका: ओबीसी महिला
    बानसूर नगर पालिका: अनारक्षित
    किशनगढ़बास नगर पालिका: अनारक्षित
    नारायणपुर नगर पालिका: अनारक्षित महिला
    कोटकासिम नगर पालिका: अनारक्षित महिला
    बर्डोद नगर पालिका: अनारक्षित महिला
    नीमराणा नगर पालिका: ओबीसी महिला

  • राजस्थान में चुनाव से पहले विकास की रफ्तार, पानी सड़क के 788 करोड़ काम

    राजस्थान में चुनाव से पहले विकास की रफ्तार, पानी सड़क के 788 करोड़ काम

    जयपुर
     निकाय और पंचायत चुनाव से पहले सरकार ने शहर से गांव तक बुनियादी सुविधाओं के बड़े प्रोजेक्टों को रफ्तार देने की कवायद शुरू कर दी है। राजधानी में 406 करोड़ रुपए की अमृत-2 पेयजल परियोजनाओं की तकनीकी स्वीकृतियां जारी करने की तैयारी है, वहीं 5 हजार से अधिक आबादी वाले शेष 192 गांवों के लिए 381.91 करोड़ रुपए के अटल प्रगति पथ मंजूर किए गए है।

    यानी चुनावी सरगर्मी के बीच सड़क और पानी से जुड़े करीब 788 करोड़ रुपए के कामों का रास्ता साफ किया गया है। हालांकि जयपुर की पेयजल परियोजनाओं में देरी के चलते चुनाव से पहले मुख्य रूप से कागजी प्रक्रिया पूरी होने की संभावना है और धरातल पर काम आचार संहिता खत्म होने के बाद ही शुरू होगा।

    जयपुर में 406 करोड़ से बदलेगा पेयजल तंत्र
    अमृत-2 के तहत जयपुर के विभिन्न डिवीजनों में 406 करोड़ रुपए के कार्य प्रस्तावित हैं। इनमें 450 एमएम की राइजिंग पाइपलाइन, 3500 केएल क्षमता तक के स्वच्छ जलाशय, 1750 केएल तक की टंकियां और करीब 19 लाख मीटर लंबी डीआई व एचडीपीई पाइपलाइनें शामिल हैं। इनसे पानी की समस्या कम होने व पर्याप्त प्रेशर से पानी मिलने की उम्मीद है। बीसलपुर सिस्टम की नई पाइपलाइन बिछाने की तैयारी के बीच शहर के करीब 17 साल पुराने वितरण तंत्र को बदलना भी जरूरी माना जा रहा है।

    192 गांवों में 286 किमी सड़कें
    सरकार ने 5 हजार से अधिक आबादी वाले शेष 192 गांवों में अटल प्रगति पथ के लिए 381.91 करोड़ रुपए की वित्तीय स्वीकृति दी है। 28 जिलों के इन गांवों और आबादी क्षेत्रों में करीब 286 किलोमीटर लंबी सड़कों का निर्माण और सुदृढ़ीकरण होगा। इससे गांवों और ढाणियों की मुख्य सड़कों से कनेक्टिविटी मजबूत होगी।

    सियासी संदेश भी
    चुनाव से पहले इन प्रोजेक्ट को मंजूरी देना सरकार के लिए विकास कार्यों को गति देने के साथ ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को लेकर अपना संदेश मजबूत करने का मौका भी है।

    किस इलाके में कितने करोड़
    डिवीजन    स्वीकृत राशि    विधानसभा क्षेत्र
    एन-1    38 करोड़    शास्त्री नगर, हवामहल, किशनपोल, सिविल लाइंस
    एन-2    35 करोड़    किशनपोल, आदर्श नगर, हवामहल
    एन-3    10 करोड़    ब्रह्मपुरी, हवामहल, आदर्श नगर
    एन-4    48 करोड़    विद्याधर नगर, झोटवाड़ा
    एस-1    40 करोड़    मालवीय नगर
    एस-2    90 करोड़    सिविल लाइंस, झोटवाड़ा
    एस-3    45 करोड़    मालवीय नगर, बगरू
    एस-4    100 करोड़    सांगानेर

    इनका कहना है
    आगामी दिनों पेयजल प्रोजेक्ट की टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। आचार संहिता समाप्त होते ही धरातल पर काम शुरू होगा।
    -अजय सिंह राठौड़, अतिरिक्त मुख्य अभियंता, जयपुर

  • राजस्थान UCC बिल अंतिम चरण में, कैबिनेट बैठक में सबसे अहम एजेंडा बनने के आसार

    राजस्थान UCC बिल अंतिम चरण में, कैबिनेट बैठक में सबसे अहम एजेंडा बनने के आसार

     जयपुर
     समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक का ड्राफ्ट तैयार करने की प्रक्रिया बुधवार को अंतिम चरण के करीब पहुंच गई। विधिक परीक्षण के बाद विधि विभाग ने इसे मंजूरी के लिए विधि मंत्री जोगाराम पटेल के पास भेज दिया। विधि मंत्री की मंजूरी के बाद विधेयक को कैबिनेट में भेजा जाएगा।

    बताते चलें कि बीते सप्ताह सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली समिति ने विधेयक का ड्राफ्ट मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को सौंप दिया था, जिसे गृह विभाग ने विधिक परीक्षण के लिए सोमवार को विधि विभाग को भेज दिया था। विधि विभाग में सोमवार को देर रात तक विधिक परीक्षण का कार्य चलता रहा और मंगलवार को परीक्षण का कार्य जारी रहा।

    करीब 200 पेज का होगा विधेयक
    विधेयक का ड्राफ्ट करीब दो सौ पेज का बताया जा रहा है, जिसे अब तक यूसीसी को अंतिम रूप दे चुके राज्यों के कानून व विधेयकों के अध्ययन व सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देश और आम जनता से मिले सुझावों के आधार पर अंतिम रूप दिया गया।

    कैबिनेट बैठक में यूसीसी विधेयक होगा महत्वपूर्ण एजेंडा
    राज्य सरकार की कैबिनेट बैठक सचिवालय स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय के मंत्रिमंडल कक्ष में होगी। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में दोनों उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी और प्रेमचंद बैरवा, मंत्रिपरिषद के सदस्य और वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। सूत्रों के अनुसार, बैठक में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक सबसे महत्वपूर्ण एजेंडा हो सकता है।

    कई राज्यों के कानूनी प्रावधानों का किया अध्ययन
    उत्तराखंड में यूसीसी लागू है, जबकि गुजरात में विधेयक विधानसभा से पारित हो चुका है। लेकिन अभी कानून का रूप नहीं ले सका है। राजस्थान के विधेयक के लिए समिति ने उत्तराखंड व गुजरात राज्यों के कानूनी प्रावधानों के साथ ही सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का अध्ययन किया है। सूत्रों ने यह भी स्पष्ट किया कि संवैधानिक कारणों से आदिवासियों को इस विधेयक के दायरे से बाहर रखा गया है।

    UCC यानी Uniform Civil Code ऐसा कानून/कानूनी व्यवस्था है, जिसका उद्देश्य देश के सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और संपत्ति जैसे व्यक्तिगत मामलों में समान नियम लागू करना है। इसमें धर्म के आधार पर अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों की जगह समान नियम, सभी समुदायों के लिए एक जैसी कानूनी प्रक्रिया, महिला और पुरुष के अधिकारों में समानता का प्रावधान, विवाहों का पंजीकरण अनिवार्य किया जा सकता है, UCC में इसे प्रतिबंधित करने का प्रावधान हो सकता है और संबंधित कानून में पंजीकरण और अन्य नियम बनाए जा सकते हैं।

    गौरतलब है कि UCC का मतलब यह नहीं है कि सभी धर्मों के धार्मिक रीति-रिवाज खत्म हो जाएंगे। इसका मुख्य उद्देश्य व्यक्तिगत नागरिक कानूनों के उन हिस्सों में समान कानूनी नियम बनाना है, जो नागरिक अधिकारों और पारिवारिक मामलों से जुड़े हैं।

  • बाड़मेर दहेज हत्या केस में कोर्ट का बड़ा फैसला, तीनों दोषियों पर 90 हजार का जुर्माना

    बाड़मेर दहेज हत्या केस में कोर्ट का बड़ा फैसला, तीनों दोषियों पर 90 हजार का जुर्माना

    बाड़मेर
    बाड़मेर के अपर जिला एवं सेशन न्यायालय संख्या-2 ने दहेज हत्या के एक मामले में सोमवार को सख्त फैसला सुनाते हुए आरोपी पति, ससुर और सास को दोषी ठहराया है। न्यायालय की न्यायाधीश मीनाक्षी मीणा ने तीनों दोषियों को आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा अदालत ने तीनों आरोपियों पर कुल 90 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया है। जुर्माना न अदा करने की स्थिति में दोषियों को एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।

    दोषी करार दिए गए आरोपी
        नजीर (पति): पुत्र कमाल उर्फ कमरूद्दीन
        कमाल उर्फ कमरूद्दीन (ससुर): पुत्र लखमीर
        सरियत (सास): पत्नी कमाल
        सभी निवासी: माठी नाणी, पांधी का पार, रामसर (बाड़मेर)

    अपर लोक अभियोजक सुरेशचंद्र मोदी के अनुसार, मृतका रवीना के पिता परिवादी खमीशा खां ने 12 जुलाई 2023 को रामसर थाने में मामला दर्ज कराया था। रवीना का निकाह 13 फरवरी 2017 को नजीर के साथ हुआ था। शादी के बाद से ही ससुराल पक्ष उसे 5 लाख रुपए दहेज की मांग और संतान न होने का ताना देकर प्रताड़ित करता था।

    दोबारा विश्वास दिलाकर घर लाया था
    प्रताड़ना के कारण रवीना कुछ महीनों से अपने पीहर में रह रही थी। 7 जुलाई 2023 को नजीर उसे दोबारा परेशान न करने का विश्वास दिलाकर अपने साथ ले गया। उसी रात नजीर, कमाल खान और सरियत ने मिलकर रवीना के साथ बुरी तरह मारपीट की और उसकी हत्या कर दी।

    वारदात के बाद आरोपियों ने शव को छिपाने के लिए पानी के टांके में डाल दिया और मायके वालों के पहुंचने से पहले ही शव को दफना दिया। बाद में प्रशासन की मौजूदगी में दफनाए गए शव को बाहर निकालकर पोस्टमॉर्टम कराया गया।

    26 गवाहों के लिए बयान
    अभियोजन पक्ष ने 26 गवाहों के बयान करवाए और 45 दस्तावेज प्रदर्शित किए। राज्य पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक सुरेशचंद्र मोदी ने पैरवी की। अभियुक्तों की ओर से अधिवक्ता स्वरूप सिंह राठौड़ और परिवादी की ओर से अधिवक्ता करनाराम चौधरी ने पैरवी की। अदालत ने सभी पेश सबूतों और गवाहों के आधार पर तीनों आरोपियों को दहेज हत्या और प्रताड़ना की विभिन्न धाराओं में दोषी मानते हुए जेल भेज दिया।

  • सरकार का कर्मचारी हितैषी फैसला: 5 हजार को गृह जिला, 1,630 को मिला नजदीकी जिला

    सरकार का कर्मचारी हितैषी फैसला: 5 हजार को गृह जिला, 1,630 को मिला नजदीकी जिला

    जयपुर
    राजस्थान सरकार के एक आदेश से 7 हज़ार बेरोज़गारों को सरकारी नौकरी मिल गई है। इसमें भी बड़ी बात ये है कि लगभग 5 हज़ार चयनित अभ्यर्थियों को तो उनके गृह ज़िले में ही पहली पोस्टिंग की राहत दी गई है। शेष चयनितों को नजदीकी ज़िले में भेजा गया है। खबर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी सीधी भर्ती-2024 से जुड़ी है जहां चयनित अभ्यर्थी अपनी नियुक्ति को लेकर सरकार के आदेश का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे।

    चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने राजहेल्थ पोर्टल के माध्यम से कुल 7,903 चयनित अभ्यर्थियों के पदस्थापन और नियुक्ति आदेश जारी कर दिए हैं। इस निर्णय की सबसे खास बात यह रही कि सरकार की संवेदनशीलता के कारण लगभग 5,000 अभ्यर्थियों को उनके अपने ही गृह जिले में पहली पोस्टिंग मिल गई है, जबकि 1,630 अभ्यर्थियों को उनके घर के नजदीकी जिले में तैनात किया गया है। इस नीति से न केवल हजारों परिवारों में खुशी की लहर दौड़ गई है, बल्कि प्रदेश की दूर-दराज में स्थित प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य संस्थाओं में कर्मचारियों की कमी भी पूरी होगी।

    विभाग की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर और प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ के मार्गदर्शन में विभाग ने कर्मचारी हितैषी नीति को प्राथमिकता दी है, जिससे नव-नियुक्त युवाओं को अपने परिवार से दूर रहने की आर्थिक और मानसिक परेशानी से राहत मिलेगी।

    राजहेल्थ पोर्टल से ऑनलाइन और पारदर्शी प्रक्रिया
    स्वास्थ्य विभाग ने इस पूरी पदस्थापन प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप को खत्म करते हुए तकनीक का सहारा लिया। निदेशक (अराजपत्रित) राकेश कुमार शर्मा ने बताया कि चिकित्सा मंत्री और प्रमुख शासन सचिव की मंशा के अनुरूप पदस्थापन प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष और त्वरित बनाया गया।

    अभ्यर्थियों को बिना किसी सिफारिश या दफ्तरों के चक्कर काटे सीधे राजहेल्थ पोर्टल के जरिए पदस्थापन स्थान का आवंटन किया गया। डिजिटल प्रक्रिया अपनाए जाने से पारदर्शिता बनी रही और अभ्यर्थियों को पदस्थापन सूची जारी होते ही उनके पोर्टल लॉगिन पर तुरंत जानकारी मिल गई। ऑफलाइन प्रक्रिया में लगने वाले महीनों के समय को बचाते हुए रिकॉर्ड समय में पदस्थापन आदेश जारी किए गए।

    विभाग द्वारा लागू की गई संवेदनशीलता और कर्मचारी हितैषी नीति का सबसे ज्यादा फायदा दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से आने वाले युवाओं को मिला है। सालों की मेहनत के बाद सरकारी नौकरी पाने वाले अभ्यर्थियों के लिए यह दोहरी खुशी का मौका बन गया है।

    गृह जिला आवंटन
     करीब 5,000 नवनियुक्त कर्मचारियों को उनके अपने गृह जिले में ही पोस्टिंग दी गई है, जिससे वे अपने परिवार के साथ रहकर अपनी सेवाएं दे सकेंगे।

    नजदीकी जिले का विकल्प
     1,630 कर्मचारियों को उनके गृह जिले से सटे पड़ोसी जिलों में पदस्थापित किया गया है।

    समीपवर्ती संभाग
    शेष अभ्यर्थियों को उनके नजदीकी संभाग क्षेत्र में तैनात किया गया है ताकि किसी भी कर्मचारी को राज्य के दूसरे छोर पर न जाना पड़े।

    अस्पतालों- स्वास्थ्य केंद्रों को नया प्रशासनिक बल
    प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण की दृष्टि से चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की यह नियुक्ति बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। राजस्थान के सरकारी अस्पतालों, उप-स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के खाली पड़े पदों के कारण रोजमर्रा के प्रशासनिक और सफाई व्यवस्था के कार्यों में दिक्कतें आ रही थीं।

    अब 7,903 नए कर्मचारियों के आ जाने से प्रदेश के कोने-कोने में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं को जन-जन तक बेहतर तरीके से पहुंचाने में मदद मिलेगी। कर्मचारी उच्च मनोबल और उत्साह के साथ अपने विभागीय दायित्वों का निर्वहन कर सकेंगे।

    नव-नियुक्त कर्मचारियों और परिवारों में जश्न का माहौल
    जैसे ही राजहेल्थ पोर्टल पर पदस्थापन की सूची अपलोड की गई, अभ्यर्थियों और उनके परिवारों में खुशी का ठिकाना नहीं रहा। नौकरी के साथ-साथ अपने ही जिले या पास के जिले में नियुक्ति मिलने से अभ्यर्थियों ने राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग का आभार व्यक्त किया है। जल्द ही सभी नव-नियुक्त कर्मचारी अपने-अपने आवंटित जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालयों में उपस्थिति दर्ज कराकर अपना कार्यभार संभालेंगे।

  • सड़क, अस्पताल, पुल और छात्रावास समेत कई परियोजनाओं का शिलान्यास करेंगे सीएम भजनलाल

    सड़क, अस्पताल, पुल और छात्रावास समेत कई परियोजनाओं का शिलान्यास करेंगे सीएम भजनलाल

    बांसवाड़ा
    मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा दो माह बाद वागड़ क्षेत्र के दौरे पर आ रहे है। 11 अगस्त को बांसवाड़ा में उनके प्रस्तावित दौरे को लेकर तैयारियां शुरू हो चुकी है। पंचायत-निकाय चुनाव से ठीक पहले उनके दौरे ने राजनीतिक गलियारों में भी हलचल बढ़ा दी है। सीएम के प्रस्तावित दौरे को लेकर जिला कलक्टर डॉ. इंद्रजीत यादव सहित पुलिस अधिकारियों ने खेल स्टेडियम के पास बनाए जा रहे सभा स्थल का निरीक्षण किया और तैयारियों को देखा।

    सीआईडी सीबी की टीम ने भी देर शाम कार्यक्रम स्थल पर जाकर सुरक्षा व्यवस्था जांच की। जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री आगामी पंचायत-निकाय चुनाव से पहले बांसवाड़ा जिले को कई सौगातें दे सकते हैं। योजनाओं के शिलान्यास को लेकर विभागों ने शिलान्यास पट्टिकाएं भी तैयार करवा ली है। इनमें जिले के गढ़ी, बागीदौरा, कुशलगढ़ और घाटोल विधानसभा क्षेत्रों में करोड़ों रुपये की लागत से विभिन्न विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया जाएगा।

    6000 की क्षमता का पांडल, 5 फीट ऊंचा मंच
    सीएम की सभा को लेकर खेल स्टेडियम के पास 6000 लोगों की क्षमता वाला पांडाल तैयार किया जा रहा है। यहां मंच को करीब 5 फीट ऊंचा बनाया गया है। सीएम के आने के लिए यहां पीछे के गेट से व्यवस्था रखी है। मंच पर आठ ऐसी लगाएं जाएंगे। जनसभा पांडाल में कूलरों की व्यवस्था रहेगी।

    इन विकास कार्यों का शिलान्यास करेंगे सीएम भजनलाल शर्मा
    सड़क निर्माण: गढ़ी, बागीदौरा और कुशलगढ़ विधानसभा क्षेत्रों में 623.12 करोड़ रुपए की लागत से एसएच-54ए सड़क का निर्माण।
    मक्का उत्कृष्टता केंद्र: गढ़ी क्षेत्र में 20 करोड़ रुपए की लागत से मक्का उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना।

    पॉलिटेक्निक कॉलेज: राजकीय पॉलिटेक्निक महाविद्यालय, बागीदौरा में 1 करोड़ रुपए की लागत से बाउंड्री वॉल का निर्माण।
    उप स्वास्थ्य केंद्र: बांसवाड़ा, गढ़ी, कुशलगढ़ और बागीदौरा में 7 उप स्वास्थ्य केंद्रों का निर्माण, लागत 3.85 करोड़ रुपए।
    माही नदी पर पुल: बिलोदा में माही नदी पर बांसवाड़ा-डूंगरपुर को जोड़ने वाले पुल का निर्माण, लागत 60 करोड़ रुपए।
    अटल प्रगति पथ: गढ़ी, बागीदौरा और घाटोल में अटल प्रगति पथ के 5 कार्य, लागत 10 करोड़ रुपए।
    औद्योगिक क्षेत्र पीपलवा: बांसवाड़ा-प्रतापगढ़ रोड से औद्योगिक क्षेत्र पीपलवा तक सड़क निर्माण, लागत 1.23 करोड़ रुपए।
    औद्योगिक क्षेत्र छींच: एसएच-10ए से औद्योगिक क्षेत्र छींच तक सड़क निर्माण, लागत 40 लाख रुपए।
    खेल स्टेडियम: बांसवाड़ा खेल स्टेडियम में कबड्डी इंडोर स्टेडियम एवं तीरंदाजी उपकरण स्टोर रूम का निर्माण, लागत 56.44 लाख रुपए।
    उप स्वास्थ्य केंद्र: बागीदौरा और कुशलगढ़ विधानसभा क्षेत्रों में उप स्वास्थ्य केंद्रों के 4 कार्य, लागत 2.20 करोड़ रुपए।
    पीएचसी निर्माण: कुशलगढ़ विधानसभा क्षेत्र के पाटन में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) का निर्माण, लागत 1.43 लाख रुपए।
    उप जिला चिकित्सालय: बागीदौरा विधानसभा क्षेत्र में उप जिला चिकित्सालय का निर्माण, लागत 40.93 करोड़ रुपए।
    बीपीएचयू लैब: बागीदौरा विधानसभा क्षेत्र में बीपीएचयू लैब का निर्माण, लागत 76.46 रुपए।

    पक्का जल मार्ग: माही मुख्य सिंचाई परियोजना के कमांड क्षेत्र में पक्के जल मार्ग के 2 कार्य, लागत 90.65 लाख रुपए।
    माही नहरों का पुनर्वास: माही नहरों की संरचनाओं को मजबूत करने और पुनर्वास के 3 कार्य, लागत 230.04 करोड़ रुपए।
    जनजाति छात्रावास: गढ़ी, कुशलगढ़ और बांसवाड़ा में जनजाति छात्रावास के 6 कार्य, लागत 5.09 करोड़ रुपए।
    आयुर्वेद औषधालय: बागीदौरा, कुशलगढ़ और बांसवाड़ा में कुल 4 आयुर्वेद औषधालयों के निर्माण के कार्य, लागत 1 करोड़ रुपए।

     

  • IPS देवेंद्र कुमार बिश्नोई की संघर्ष गाथा, 12 बार हुए फेल फिर बने अफसर; अब DIG पद तक पहुंचे

    IPS देवेंद्र कुमार बिश्नोई की संघर्ष गाथा, 12 बार हुए फेल फिर बने अफसर; अब DIG पद तक पहुंचे

    जयपुर 
    प्रतियोगी परीक्षाओं
    की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए असफलता कई बार निराशा लेकर आती है। एक या दो बार असफल होने पर कई छात्र अपना रास्ता बदल लेते हैं या हिम्मत हार बैठते हैं। लेकिन राजस्थान कैडर में 2012 बैच के आईपीएस अधिकारी देवेंद्र कुमार बिश्नोई की कहानी यह साबित करती है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो बार-बार मिलने वाली असफलताएं भी आपके सामने घुटने टेक देती हैं।

    स्टेट पीएससी परीक्षाओं में लगातार 12 बार इंटरव्यू तक पहुंचकर असफल होने के बावजूद देवेंद्र कुमार बिश्नोई ने हार नहीं मानी। अपनी अटूट लगन और कड़ी मेहनत के दम पर वे पहले राजस्थान पुलिस सेवा (RPS) के लिए चुने गए और आगे चलकर आईपीएस (IPS) अफसर बने।

    हरियाणा के हिसार से BSF और फिर सिविल सेवा तक का सफर
    हरियाणा के हिसार जिले के रहने वाले देवेंद्र कुमार बिश्नोई ने कॉलेज की पढ़ाई पूरी करते ही सिविल सेवा में जाने का सपना देखा था। साल 1989 में उन्होंने सीमा सुरक्षा बल (BSF) में अपनी सेवाएं देना शुरू किया। BSF में तैनात रहने के दौरान भी उनके भीतर प्रशासनिक सेवा में जाने की इच्छा बनी रही और वे ड्यूटी के साथ-साथ राज्य लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं की तैयारी में जुटे रहे।

    12 बार इंटरव्यू में फेल
    देवेंद्र कुमार बिश्नोई ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान छात्रों के साथ अपनी असफलताओं का किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि स्टेट पीसीएस परीक्षाओं में वे मेन्स पास करके 12 बार इंटरव्यू के चरण तक पहुंचे, लेकिन हर बार फाइनल मेरिट लिस्ट में उनका नाम नहीं आ पाता था।

    बार-बार असफलता मिलने पर जब उनका मनोबल टूटने लगा, तो उन्होंने खुद को मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखने के लिए अध्यात्म और ईश्वर की शरण का सहारा लिया। उन्होंने अपने भगवान से प्रार्थना की कि वे उनकी मेहनत में रही कमियों को दूर करने का रास्ता दिखाएं और खुद को पूरी तरह पढ़ाई के प्रति समर्पित कर दिया।

    चयन का दिलचस्प इत्तेफाक
    देवेंद्र कुमार बिश्नोई के राजस्थान पुलिस सेवा (RPS) में चयन का एक बेहद अनोखा और दिलचस्प किस्सा भी है। उस समय परीक्षा में ओरिजिनल मार्क्स के साथ-साथ स्केलिंग मार्क्स की व्यवस्था लागू थी। जब रिजल्ट आया, तो इत्तेफाक से उनके ओरिजिनल नंबर भी 911 थे और स्केलिंग के बाद बने फाइनल अंक भी 911 ही रहे।

    इसी सफलता के साथ वे राजस्थान पुलिस सेवा में डीएसपी बने। उन्हें भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में प्रमोशन मिली। वर्तमान में वे राजस्थान पुलिस प्रशिक्षण केंद्र में डीआईजी (DIG) के पद पर तैनात हैं।

  • खाद की अवैध सप्लाई का खुलासा, चालक समेत 3 पर केस; MP भेजी जा रही थी DAP

    खाद की अवैध सप्लाई का खुलासा, चालक समेत 3 पर केस; MP भेजी जा रही थी DAP

    सवाई माधोपुर
     कृषि विभाग की निगरानी और पुलिस नाकाबंदी के बावजूद जिले से खाद की खेपें मध्यप्रदेश तक पहुंचने का मामला सामने आया है। शनिवार सुबह छाण पुलिस चौकी पर तिरपाल से ढकी एक पिकअप को रोककर जांच की गई। पिकअप में करीब 100 कट्टे डीएपी मिले। कृषि विभाग की जांच में खाद के अवैध रूप से परिवहन और कालाबाजारी किए जाने की बात सामने आई। मामले में पिकअप चालक सहित तीन लोगों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।

    कृषि अधिकारियों और पुलिस के अनुसार, शनिवार सुबह करीब साढ़े आठ बजे छाण चौकी पर तिरपाल से ढकी पिकअप को रोककर जांच की गई। तलाशी में पिकअप में 100 बैग डीएपी मिले। पूछताछ में चालक देवकीनंदन माली निवासी खंडार ने खाद को मध्यप्रदेश के जावदेश्वर गांव निवासी रामरूप मीणा के यहां ले जाने की जानकारी दी। कृषि विभाग की जांच में यह खाद सवाई माधोपुर शहर स्थित खाद विक्रेता कमलेश की दुकान से खरीदी जाना सामने आया।

    कृषि अधिकारी ने मामले की जांच की
    सूचना पर कृषि विभाग की टीम मौके पर पहुंची। सहायक निदेशक खेमराज मीणा के निर्देशन में कृषि अधिकारी प्रशिक्षण ताराचंद महावर ने मामले की जांच की। जब्त खाद को क्रय-विक्रय सहकारी समिति, छाण के सुपुर्द किया गया। विभाग की ओर से पिकअप चालक देवकीनंदन माली, जावदेश्वर निवासी रामरूप मीणा तथा शहर स्थित खाद विक्रेता कमलेश के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मामला दर्ज कराया गया।

    पहले भी पकड़ी जा चुकी खेप
    खाद के अवैध परिवहन का यह पहला मामला नहीं है। गत महीने बहरावंडा खुर्द चौकी पुलिस ने नाकाबंदी के दौरान एक पिकअप को पकड़ा था। इसमें भी करीब 100 कट्टे यूरिया मिले थे। प्रारंभिक जांच में खाद को मध्यप्रदेश के सोईकलां क्षेत्र में सप्लाई के लिए ले जाने की बात सामने आई थी। इसके अलावा करीब दो-तीन महीने पहले टोंक जिले के बनेठा थाना क्षेत्र में पकड़ी गई पिकअप में भी अवैध खाद मिली थी। कार्रवाई के बाद मामला कृषि विभाग तक पहुंचा था।

    क्या है किसानों का आरोप
    कृषि विभाग के कार्यालयों व चौकियों को चकमा देकर निकलने का आरोप किसानों का आरोप है कि खाद से भरी पिकअप और ट्रैक्टर-ट्रॉलियां तिरपाल से ढककर दिनदहाड़े जिले से बाहर निकलती है। ये वाहन कृषि विभाग कार्यालय के सामने व समीप से गुजरने के साथ पुलिस चौकियों और थानों को चकमा देकर मध्यप्रदेश सहित आसपास के क्षेत्रों तक पहुंचते हैं। किसानों का कहना है कि कुछ खाद की खेपें निवाई, जयपुर और कोटा क्षेत्र से लाकर सवाई माधोपुर के रास्ते मध्यप्रदेश तथा अन्य क्षेत्रों में भेजी जाती है।

    महंगे दामों से बढ़ रही खेती की लागत
    खाद की कालाबाजारी का सीधा असर किसानों पर पड़ने का आरोप है। किसानों के अनुसार, पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध नहीं होने और महंगे दामों पर खरीद करने से खेती की लागत बढ़ रही है। किसान संगठनों का कहना है कि समय पर खाद नहीं मिलने से खरीफ फसल की तैयारी भी प्रभावित हो रही है।

    इनका कहना है
    छाण चौकी पुलिस ने तिरपाल से ढकी पिकअप में अवैध रूप से ले जाई जा रही डीएपी खाद की खेप पकड़ी थी। सूचना पर कृषि विभाग की टीम मौके पर पहुंची। जब्त खाद को ग्राम सेवा सहकारी समिति के सुपुर्द किया गया है। पिकअप चालक, शहर स्थित दुकान मालिक तथा मध्यप्रदेश के जावदेश्वर निवासी रामरूप के खिलाफ नियमानुसार मामला दर्ज कराया गया है।
    -ताराचंद महावर, कृषि अधिकारी प्रशिक्षण एवं कृषि विस्तार, सवाईमाधोपुर