Category: राजस्थान

  • राजस्थान निकाय चुनाव का ऐलान: शहरी वोट बैंक पर BJP-कांग्रेस की नजर, 9 और 11 सितंबर को मतदान

    राजस्थान निकाय चुनाव का ऐलान: शहरी वोट बैंक पर BJP-कांग्रेस की नजर, 9 और 11 सितंबर को मतदान

    जयपुर 

    राजस्थान में शहरी निकाय चुनावों की सरगर्मी बढ़ गई है. नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिकाओं के लिए चुनावी प्रक्रिया की घोषणा हो चुकी है. राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव कार्यक्रम घोषित किए जाने के साथ ही संबंधित नगरीय क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। 

    नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत चुनाव के लिए दो चरणों में चुनाव होनें है. पहले चरण के लिए 9 सितंबर को चुनाव होगा और दूसरे चरण के लिए 11 सितंबर को मतदान होगा. निकाय चुनाव के नतीजे 14 सितंबर को आएंगे, उसके बाद 21 सितंबर को अध्यक्ष पद का चुनाव होगा। 

    प्रदेश के इतिहास में यह पहला अवसर है जब सभी नगरीय निकायों में एक साथ चुनाव आयोजित किए जा रहे हैं. राज्य सरकार की 'एक प्रदेश-एक चुनाव' की पहल की दिशा में इसे एक महत्त्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. शहरी क्षेत्रों में जनादेश हासिल करने के लिए बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही दलों की साख दांव पर लगी हुई है। 

    309 शहरी निकायों में 10,245 वार्डों पर चुनाव
    राज्य निर्वाचन आयोग के राजस्थान निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह के मुताबिक  प्रदेश के 309 शहरी निकायों के कुल 10,245 पार्षद पदों के लिए मतदान की प्रक्रिया संपन्न कराई जाएगी. इनमें 10 नगर निगम, 51 नगर परिषद और 248 नगर पालिकाएं शामिल हैं। 

    राजस्थान में मतदाता सीधे निकाय अध्यक्ष का चुनाव नहीं करते हैय। प्रक्रिया के तहत सबसे पहले मतदाता अपने-अपने वार्डों से पार्षदों का चुनाव करते हैं. इसके बाद चुने हुए पार्षद साधारण सभा की बैठक में निकाय प्रमुख (मेयर, सभापति व नगर पालिका अध्यक्ष) और उप-प्रमुख (डिप्टी मेयर, उपसभापति व उपाध्यक्ष) का चुनाव करते हैं। 

    बीजेपी के लिए साख का सवाल
    राज्य की सत्ता में होने के कारण भारतीय जनता पार्टी पर अपना प्रशासनिक प्रदर्शन साबित करने और शहरी क्षेत्रों पर अपनी मजबूत पकड़ बरकरार रखने का दबाव रहेगा. पारंपरिक रूप से राजस्थान के शहरी क्षेत्रों और नगर निगमों में भाजपा का मजबूत आधार माना जाता रहा है।

    शहरी निकाय के सीटों के आरक्षण और लॉटरी प्रक्रिया के बाद नए राजनीतिक समीकरण बने हैं. टिकट वितरण के बाद असंतोष को नियंत्रित करना और संगठन को एकजुट रखना पार्टी नेतृत्व के लिए एक प्रमुख चुनौती होगी।

    कांग्रेस के लिए वापसी का अवसर
    मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के लिए यह चुनाव अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने और कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने का एक बड़ा अवसर है. कांग्रेस ने टिकट वितरण में पारदर्शिता लाने के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रणाली और क्षेत्रीय प्रभारियों के माध्यम से जमीनी फीडबैक प्राप्त करने की रणनीति अपनाई है।

    पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के मार्गदर्शन में कांग्रेस स्थानीय नागरिक सुविधाओं, बुनियादी ढांचे, सफाई व्यवस्था और स्थानीय शासन के मुद्दों को उठाकर चुनावी मैदान में अपनी बढ़त बनाने का प्रयास कर रही है.  पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और सचिन पायलन के नेतृत्व में कांग्रेस ने अपनी पूरी फौज उतार रखी है। 

  • कैंसर मरीजों के लिए भजनलाल सरकार का बड़ा कदम, RGHS में शामिल हुई अत्याधुनिक CAR-T थेरेपी

    कैंसर मरीजों के लिए भजनलाल सरकार का बड़ा कदम, RGHS में शामिल हुई अत्याधुनिक CAR-T थेरेपी

    जयपुर
    राजस्थान के लाखों सरकारी कर्मचारियों, पेंशनर्स और उनके आश्रित परिवारों के स्वास्थ्य हितों को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने एक संवेदनशील फैसला लिया है। प्रदेश सरकार ने कैंसर जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारी के आधुनिक और सटीक इलाज के लिए जानी जाने वाली CAR-T Cell Therapy को राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) के अनुमत मेडिकल पैकेज में आधिकारिक तौर पर शामिल कर लिया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने स्वयं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से इस नीतिगत निर्णय की जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि राज्य के सरकारी कर्मियों और उनके परिजनों की स्वास्थ्य सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस अत्याधुनिक इम्यूनोथेरेपी के शामिल होने से अब ब्लड कैंसर और मल्टीपल मायलोमा जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को राजस्थान के सूचीबद्ध अस्पतालों में विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं मिल सकेंगी।
    राजस्थान सरकार के इस एक फैसले से उन हजारों परिवारों को सीधा संबल मिलेगा जो अब तक इस खर्चीले इलाज का खर्च उठाने में असमर्थ थे।

    कर्मचारियों की स्वास्थ्य सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता : CM भजनलाल
    मुख्यमंत्री ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया संदेश में इस योजना के दूरगामी फायदों को बताया। उन्होंने कहा, 'कर्मचारियों एवं उनके परिवारों की स्वास्थ्य सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी दिशा में कैंसर उपचार के लिए अत्याधुनिक CAR-T Cell Therapy को RGHS के तहत अनुमत पैकेज में शामिल करने का निर्णय लिया गया है। यह पहल गंभीर बीमारी से जूझ रहे कर्मचारियों एवं उनके परिजनों को आधुनिक उपचार की बेहतर सुविधा और मजबूत स्वास्थ्य सुरक्षा का संबल प्रदान करेगी।'

    स्वस्थ एवं सशक्त राजस्थान की दिशा में फैसला: मंत्री गजेंद्र सिंह
    CAR-T Cell Therapy कैंसर के इलाज की एक सबसे आधुनिक और वैज्ञानिक रूप से उन्नत इम्यूनोथेरेपी व सेल थेरेपी है। इसमें मरीज के शरीर की अपनी ही प्रतिरोधक क्षमता का उपयोग कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए किया जाता है।

    सबसे पहले मरीज के खून से उसकी अपनी T-Cells (श्वेत रक्त कोशिकाएं) निकाली जाती हैं।

    इन कोशिकाओं को प्रयोगशाला में जेनेटिकली इस तरह मॉडिफाई किया जाता है कि वे कैंसर कोशिकाओं पर मौजूद विशेष प्रोटीन को पहचान सकें।

    जेनेटिक रूप से तैयार की गई इन करोड़ों संशोधित CAR-T Cells को वापस मरीज के शरीर में इंजेक्ट कर दिया जाता है, जहां ये कैंसर कोशिकाओं को ढूंढकर नष्ट करती हैं।

    आसान शब्दों में कहें तो इस थेरेपी में मरीज की अपनी ही रोग प्रतिरोधक प्रणाली को कैंसर से लड़ने के लिए विशेष रूप से "ट्रेन" किया जाता है।

    किन कैंसर मरीजों के लिए कारगर है थेरेपी?
    चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, CAR-T Cell Therapy का इस्तेमाल मुख्य रूप से विशिष्ट प्रकार के ब्लड कैंसर के इलाज में किया जाता है।
    यह थेरेपी विशेष रूप से उन मामलों में वरदान साबित होती है जहां पारंपरिक कीमोथेरेपी या रेडिएशन थेरेपी के बाद बीमारी दोबारा लौट आई हो या अन्य दवाएं बेअसर साबित हो रही हों। जयपुर स्थित सवाई मानसिंह अस्पताल में भी CAR-T Cell Therapy की उन्नत सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

    RGHS लाभार्थियों को कैसे मिलेगा लाभ?
    राजस्थान सरकार द्वारा 6 जून 2026 को जारी नई ऑनकोलॉजी गाइडलाइंस (Oncology Guidelines) और RGHS नियमों के तहत लाभार्थी इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। CAR-T Cell Therapy एक हाई-एंड और अति-विशिष्ट उपचार है, इसलिए एम्पैनल्ड अस्पताल में भर्ती होने से पहले प्री-ऑथराइजेशन की प्रक्रिया अनिवार्य होगी।

    यह थेरेपी हर मरीज और हर प्रकार के कैंसर के लिए उपयुक्त नहीं होती, इसलिए एसएमएस अस्पताल या एम्पैनल्ड कैंसर हॉस्पिटल्स की विशेषज्ञ टीम की सिफारिश के आधार पर ही इसे स्वीकृत किया जाएगा।

    RGHS के तहत एलोपैथी ट्रीटमेंट के पैकेज रेट्स सामान्यतः केंद्र सरकार की CGHS दरों के मानकों पर आधारित होते हैं, जिससे लाभार्थियों को बिना किसी कैशलेस बाधा के उपचार मिल सके।

    राज्य सरकार के इस संवेदनशील कदम से अब राजस्थान के कैंसर पीड़ित परिवारों को इलाज के लिए दूसरे राज्यों या महंगे निजी अस्पतालों के भारी-भरकम कर्ज के जाल में नहीं फंसना पड़ेगा।

     

  • राजस्थान निकाय चुनाव: आज जारी हो सकता है कार्यक्रम, सितंबर में 2 चरणों में वोटिंग संभव

    राजस्थान निकाय चुनाव: आज जारी हो सकता है कार्यक्रम, सितंबर में 2 चरणों में वोटिंग संभव

    जयपुर
    राजस्थान के शहरी इलाकों में स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा निकाय चुनाव कार्यक्रम की घोषणा का काउंटडाउन शुरू हो चुका है और प्रदेश के विभिन्न शहरों में किसी भी समय आदर्श आचार संहिता लागू हो सकती है। सूत्रों के अनुसार, स्वायत्त शासन विभाग की ओर से निकायों में आरक्षण और परिसीमन से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट निर्वाचन आयोग को भेजी जा चुकी है। आयोग के अधिकारी इस समय रिपोर्ट की बारीकी से समीक्षा कर रहे हैं। यदि रिपोर्ट में किसी प्रकार की तकनीकी या कानूनी त्रुटि पाई जाती है, तो उसे तुरंत दुरुस्त कराकर चुनाव कार्यक्रम जारी किया जाएगा।

    वहीं, अगर रिपोर्ट पूरी तरह सही पाई जाती है, तो आज 19 अगस्त को दोपहर बाद या शाम तक चुनाव की आधिकारिक घोषणा की जा सकती है। चुनाव कार्यक्रम का ऐलान होते ही संबंधित शहरी निकायों की सीमा में तुरंत प्रभाव से आदर्श आचार संहिता प्रभावी हो जाएगी, जिसका सीधा असर प्रशासनिक निर्णयों और स्थानीय विकास योजनाओं पर पड़ेगा।

    दो चरणों में मतदान संभाव
    राज्य निर्वाचन आयोग से मिल रही जानकारी के मुताबिक, निकाय चुनावों के संचालन के लिए सभी प्रशासनिक और लॉजिस्टिक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। आयोग इस बार निकाय चुनाव प्रक्रिया को 2 चरणों में संपन्न कराने की योजना बना रहा है।

    संभावित कार्यक्रम के अनुसार-
    प्रथम चरण: सितंबर 2026 के पहले सप्ताह में वोटिंग कराई जा सकती है।

    द्वितीय चरण: सितंबर के दूसरे सप्ताह में शेष निकायों के लिए मतदान संपन्न कराया जाएगा।

    अंतिम समीक्षा: आयोग की टीम अंतिम वोटर लिस्ट और बूथों की सुरक्षा व्यवस्था का मिलान कर रही है ताकि घोषणा के बाद किसी प्रकार की प्रशासनिक अड़चन न आए।

    आदर्श आचार संहिता : क्या बंद होगा और क्या चालू रहेगा?
    चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही संबंधित नगरीय निकायों में मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट लागू हो जाएगा। इससे आम जनता और जनप्रतिनिधियों के लिए कई नियम बदल जाएंगे।

    नए कार्यों पर पूर्ण प्रतिबंध
    संबंधित जिलों और निकायों में नए विकास कार्यों के शिलान्यास, उद्घाटन या लोकार्पण कार्यक्रमों पर पूरी तरह रोक रहेगी।

    कोई भी नई विकास योजना, नए टेंडर या नए कार्य आदेश (Work Orders) जारी नहीं किए जा सकेंगे।

    मंत्रियों या जनप्रतिनिधियों द्वारा किसी नई योजना की घोषणा करने पर प्रतिबंध रहेगा।

    जारी काम रहेंगे चालू
    जिन विकास परियोजनाओं के वर्क ऑर्डर आचार संहिता प्रभावी होने से पहले ही जारी किए जा चुके हैं, वे बिना किसी रुकावट के जारी रहेंगे।

    जो निर्माण कार्य पहले से ही जमीन पर चल रहे हैं, उन पर आचार संहिता का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

    सफाई व्यवस्था, पेयजल आपूर्ति और स्ट्रीट लाइट जैसी आवश्यक नागरिक सेवाएं नियमित रूप से चलती रहेंगी।

    विधानसभा में पेश होने वाले बिल
    निकाय चुनाव की तैयारियों के बीच राजनीतिक गलियारों में इस बात की भी चर्चा है कि राज्य सरकार द्वारा विधानसभा में पेश किए जाने वाले नए विधेयकों का चुनाव की तारीखों पर क्या असर पड़ेगा।

    कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, नियमों के तहत आचार संहिता के दौरान भी विधानसभा में बिल पेश किए जा सकते हैं और विधायी कार्य निपटाए जा सकते हैं। हालांकि, सरकार ऐसे किसी भी निर्णय या प्रचार माध्यम का उपयोग नहीं कर सकती, जिससे आम मतदाता प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हों। प्रचार संबंधी गतिविधियों और सरकारी विज्ञापनों पर आचार संहिता के कड़े नियम लागू रहेंगे।

    राज्य निर्वाचन आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस और अंतिम अधिसूचना के बाद ही चुनाव की सटीक तारीखों और संबंधित निकायों की अंतिम सूची स्पष्ट हो सकेगी।

  • राजस्थान DGP का पुलिस अधिकारियों को संदेश, जनशिकायतों पर त्वरित कार्रवाई और गश्त बढ़ाने पर जोर

    राजस्थान DGP का पुलिस अधिकारियों को संदेश, जनशिकायतों पर त्वरित कार्रवाई और गश्त बढ़ाने पर जोर

    जयपुर
     महानिदेशक पुलिस राजस्थान राजीव कुमार शर्मा सोमवार देर शाम बूंदी जिले के दौरे पर रहे। इस दौरान उन्होंने तालेड़ा थाने का भ्रमण कर पुलिस अधिकारियों एवं जवानों से संवाद किया। उन्होंने पुलिसकर्मियों की ड्यूटी, कार्यप्रणाली और पुलिसिंग के दौरान आने वाली चुनौतियों की जानकारी ली। इस दौरान महानिरीक्षक पुलिस, कोटा रेंज हरेंद्र कुमार एवं उप महानिरीक्षक पुलिस, पुलिस मुख्यालय जयपुर श्री कुंवर राष्ट्रदीप भी मौजूद रहे।

    जवानों के साथ किया रात्रि भोज, बढ़ाया उत्साह
    डीजीपी शर्मा ने थाना परिसर स्थित पुलिस मेस का निरीक्षण किया और यहां पुलिसकर्मियों को दी जा रही सेवाओं की जानकारी दी। उन्होंने जवानों के साथ बैठकर भोजन किया और सहज संवाद के माध्यम से उनका उत्साहवर्धन किया।

    उन्होंने पुलिसकर्मियों को कर्तव्य के प्रति पूर्ण निष्ठा, अनुशासन और टीम भावना के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि आमजन की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस की महत्वपूर्ण भूमिका है। पुलिसकर्मी पूरी संवेदनशीलता और समर्पण के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें।

    अपराध गोष्ठी में कानून-व्यवस्था की समीक्षा
    इसके बाद डीजीपी ने जिले के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, वृत्ताधिकारियों एवं थानाधिकारियों के साथ अपराध गोष्ठी आयोजित की। इसमें जिले की कानून-व्यवस्था, अपराध की स्थिति, लंबित प्रकरणों, अपराध नियंत्रण और पुलिसिंग को अधिक प्रभावी एवं जनोन्मुखी बनाने से जुड़े विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।

    डीजीपी ने अपराधों की रोकथाम के लिए सक्रिय एवं प्रभावी पुलिसिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने गंभीर एवं संगठित अपराधों के विरुद्ध त्वरित और कठोर कार्रवाई तथा नवीन आपराधिक कानूनों के तहत अपराधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए जीरो टॉलरेंस की नीति के अनुरूप कार्य करने को कहा। उन्होंने साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए जन—जागरूकता पैदा करने के साथ—साथ पीड़ित की सूचना पर त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने लंबित प्रकरणों की नियमित समीक्षा, गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध अनुसंधान तथा जांच प्रक्रिया को और प्रभावी बनाने पर भी उन्होंने विशेष जोर दिया।

    आमजन की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश
    शर्मा ने पुलिस अधिकारियों को निर्देशित किया कि थाने पर आने वाले प्रत्येक परिवादी की शिकायत को गंभीरता और संवेदनशीलता से सुना जाए तथा नियमानुसार त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। पुलिस और आमजन के बीच बेहतर संवाद एवं समन्वय स्थापित कर पुलिस के प्रति विश्वास को और मजबूत करने पर उन्होंने जोर दिया। उन्होंने महिला एवं बाल अपराध, संपत्ति संबंधी अपराध तथा अन्य आपराधिक गतिविधियों की रोकथाम के लिए सतर्कता बढ़ाने और प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए।

    गश्त और निगरानी व्यवस्था मजबूत करने पर जोर
    डीजीपी ने क्षेत्र में पुलिस गश्त एवं निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने तथा अपराध संभावित क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने स्थानीय सूचना तंत्र को प्रभावी बनाने और अपराध की रोकथाम के लिए सक्रियता बढ़ाने के साथ ही नए सीएलजी सदस्यों को अधिक से अधिक पुलिस-जन सहभागिता से जोड़ने पर भी जोर दिया

    तकनीक के साथ मजबूत होगा पुलिसिंग का तंत्र
    महानिदेशक पुलिस  राजीव कुमार शर्मा ने कहा कि पुलिस का प्रमुख दायित्व आमजन को सुरक्षित एवं भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराना, अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण रखना और कानून का राज स्थापित करना है।

    उन्होंने पुलिस अधिकारियों एवं जवानों से टीम भावना के साथ कार्य करते हुए जनता के बीच पुलिस की सकारात्मक, संवेदनशील एवं भरोसेमंद छवि को और मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने तकनीक एवं आधुनिक पुलिसिंग के प्रभावी उपयोग के साथ पारंपरिक पुलिसिंग और मजबूत सूचना तंत्र को भी और सुदृढ़ करने के निर्देश दिए।

    इस दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बूंदी  संजय सिंह चम्पावत, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महिला अपराध अनुसंधान सेल बूंदी  जसवीर सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक त्वरित अनुसंधान सेल बूंदी अदिति चौधरी सहित समस्त वृत्ताधिकारी, थानाधिकारी एवं पुलिस जवान उपस्थित रहे।

  • कोटा को मिली ई-बस सेवा की सौगात, रेलवे स्टेशन से यूनिवर्सिटी तक जुड़ेंगे प्रमुख इलाके

    कोटा को मिली ई-बस सेवा की सौगात, रेलवे स्टेशन से यूनिवर्सिटी तक जुड़ेंगे प्रमुख इलाके

    कोटा
    कोटा शहर में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत अब कोटा की सड़कों पर इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू होने जा रहा है। मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा मंगलवार को जयपुर से वर्चुअली बसों को हरी झंडी दिखाएंगे। प्रथम चरण में कुल 10 बसों से सेवा का शुभारंभ होगा।

    निगम आयुक्त एवं कोटा बस सर्विस लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ओमप्रकाश मेहरा ने बताया कि योजना के तहत शहर में 100 पीएम ई-बसें संचालित की जानी हैं। इनमें 5 बसें 12 मीटर लंबी ब्लू कलर की और 95 बसें 9 मीटर लंबी पिंक कलर की हैं। इनमें से अब तक 41 बसें कोटा बस सर्विस लिमिटेड को प्राप्त हो चुकी हैं, जिनमें से 10 बसों के साथ बस सेवा शुरू होगी।

    20 मार्गों पर होनी है संचालित
    इन बसों के संचालन के लिए शहर में 20 रूट निर्धारित किए गए हैं, जिनके जरिए रेलवे स्टेशन, नया बस स्टैंड, एरोड्रम, नयापुरा, कोटा विश्वविद्यालय, सोगरिया, बोरखेड़ा, रायपुरा, झालीपुरा, दादाबाड़ी सहित शहर के प्रमुख इलाकों को जोड़ा जाएगा। नई ई-बसों के सड़क पर उतरने से शहर के प्रमुख बाजारों, शिक्षण संस्थानों, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और बाहरी क्षेत्रों के बीच सार्वजनिक परिवहन की सुविधा और मजबूत होने की उम्मीद है।

    दूरी के हिसाब से तय होगा किराया
    पीएम ई-बस सेवा में किराया दूरी के आधार पर प्रस्तावित किया गया है। 3 किमी तक 10 रुपए, 3 से 6 किमी तक 15 रुपए, 6 से 12 किमी तक 20 रुपए, 12 से 15 किमी तक 25 रुपए, 15 से 20 किमी तक 30 रुपए और 20 से 25 किमी तक 35 रुपए किराया रहेगा। इसी तरह 25 से 30 किमी के लिए 40 रुपए, 30 से 35 किमी 45 रुपए, 35 से 40 किमी 50 रुपए, 40 से 45 किमी 55 रुपए तथा 45 किमी से अधिक दूरी के लिए अधिकतम 60 रुपए किराया होगा।

    ये होंगे प्रमुख रूट
    1. रेलवे स्टेशन-बंदा धर्मपुरा : खेडली फाटक, अदालत चौराहा, नयापुरा, अग्रसेन सर्किल, जेडीबी कॉलेज, कोटड़ी, एरोड्रम, सीएडी, केशवपुरा, महावीर नगर तृतीय होते हुए बूंदी धर्मपुरा।

    2. न्यू बस स्टैंड-बोराबास : कॉमर्स कॉलेज, तलवंडी, केशवपुरा, तीन बत्ती, जीएडी सर्किल, संतोषी नगर, चावला सर्किल, तिलमसंघ, नयागांव-दौलतगंज होते हुए रथकांकरा।

    3. रंगबाड़ी-एरोड्रम-न्यू बस स्टैंड : एरोड्रम, डीसीएम सर्किल, भामाशाह मंडी, अनंतपुरा, गोबरिया बावड़ी, कॉमर्स कॉलेज होते हुए एरोड्रम

    4. एरोड्रम-रानपुरः विज्ञान नगर, कॉमर्स कॉलेज, आईएल चौराहा, अनंतपुरा, रेतिया चौकी, आरटीओ कार्यालय, रीको, ट्रिपल आईटी, जेएमएयू, देव नारायण, गणेशजी, मेडिकल कॉलेज, एलआईसी बिल्डिंग, अहिंसा सर्किल, घटोत्कच चौराहा, केशवपुरा, सीएडी होते हुए एरोड्रम।

    5. एरोड्रम-सोगरिया : कोटड़ी चौराहा, सेवन वंडर रोड, सब्जी मंडी, लख्खी बुर्ज, अग्रसेन सर्किल, नयापुरा, खेलड़ी फाटक और रेलवे स्टेशन सोगरिया।

    6. रायपुरा-भदाना : राजनगर, देवली अरब रोड, कोरल पार्क, नया नोहरा, मानपुरा, बोरखेड़ा, एसपी सर्किल, नयापुरा, अदालत सर्किल, कोटा रेलवे स्टेशन होते हुए रंगपुर पुलिया।

    7. झालीपुरा-अरंडखेड़ा: नया नोहरा, बोरखेड़ा, एसपी सर्किल, नयापुरा, गीता भवन, गुमानपुरा छावनी, एरोड्रम, डीसीएम, रायपुरा, धाकड़खेड़ी, उम्मेदगंज कृषि महाविद्यालय होते हुए खेड़ा रसूलपुरा।

    8. बड़गांव-सीमलिया : नांता पुलिस स्टेशन, पत्थर मंडी, मोहनलाल सुखाड़िया आवासीय योजना, अभेड़ा महल, नांता, थर्मल सर्किल, महाराणा प्रताप सर्किल, नयापुरा, एसपी सर्किल, बोरखेड़ा, मानपुरा, नया नोहरा, बोरखंडी, झालिपुरा बाइपास, ताथेड़, केथूड़ी, दाहरा होते हुए पोलाई कलां।

    9. रेलवे स्टेशन-कोलीपुरा: खेड़ली फाटक, नयापुरा, अग्रसेन सर्किल, जेडीबी कॉलेज, कोटड़ी, छावनी, एरोड्रम, सीएडी, चंबल गार्डन, गोदावरी धाम, शिवपुरा, आरटीयू, नयागांव-दौलतगंज होते हुए रथकांकरा।

    10. चंद्रसेल-आरके पुरम: काला तालाब, विकास नगर, अब्दुल कलाम यूआईटी आवासीय योजना, महात्मा गांधी तिराहा, एसपी चौराहा, सरस्वती कॉलोनी, अंटाघर अंडरपास, नयापुरा, अग्रसेन सर्किल, जे.डी.बी. कॉलेज, कोटड़ी, एरोड्रम, विज्ञान नगर, कॉमर्स कॉलेज, सिटी मॉल, अनंतपुरा थाना, सुभाष विहार, ट्रक यूनियन, अजय आहूजा नगर, कबीर सर्किल, कोटा विश्वविद्यालय और ईथोस अस्पताल।

    11. सोगरिया स्टेशन-अनंतपुरा: रेलवे प्लेटफॉर्म नंबर 4, रेलवे कॉलोनी, माला फाटक, एसपी ऑफिस, 80 फीट रोड, संजय नगर, डकनिया स्टेशन, नालंदा कॉलेज होते हुए अनंतपुरा।

    12. न्यू बस स्टैंड-न्यू बस स्टैंड सर्कुलर: एरोड्रम अंडरपास, घोड़े वाले बाबा सर्किल, सीएडी, गढ़ पैलेस, सकतपुरा, थर्मल कॉलोनी, नाका चुंगी, अभेड़ा महल, करणी माता मंदिर, बड़गांव तिराहा, गुरुद्वारा, त्रिकुटा माता मंदिर, प्रताप सर्किल, नयापुरा, अंटाघर अंडरपास और 80 फीट रोड।

  • राजस्थान में चुनावी हलचल तेज, 309 निकायों के 10,245 वार्डों की आरक्षण लॉटरी आज

    राजस्थान में चुनावी हलचल तेज, 309 निकायों के 10,245 वार्डों की आरक्षण लॉटरी आज

    जयपुर
     राजस्थान सरकार ने जिला परिषद सदस्यों, प्रधान, पंचायत समिति सदस्यों, सरंपच और वार्ड पंचों के आरक्षण की लॉटरी की नई तारीखें तय कर दी हैं। जिला स्तर पर जिला परिषद सदस्य, प्रधान और पंचायत समिति सदस्यों के लिए आरक्षण लॉटरी अब अगले माह 17 सितंबर को निकाली जाएगी। जबकि उपखंड स्तर पर सरपंच और वार्ड पंच के आरक्षण की लॉटरी 18 सितंबर को निकाली जाएगी। वहीं, 309 निकायों के 10,245 वार्डों के आरक्षण की लॉटरी आज निकाली जाएगी।

    पहले लॉटरी 17 और 18 अगस्त को निकाला जाना प्रस्तावित था। अचानक लॉटरी की तिथि बदलने से पंचायतीराज संस्थाओं के आरक्षण की लॉटरी करीब एक माह आगे खिसकने के बाद अब ग्रामीण क्षेत्र में आचार संहिता लागू होने को लेकर भी नई अटकलें शुरू हो गई है। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार, 13 अगस्त को जिला प्रमुख पदों के आरक्षण लॉटरी प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव द्वितीय चरण में संभावित होने के कारण जिला स्तर पर जिला परिषद सदस्य और प्रधान पद तथा उपखंड स्तर पर सरपंच एवं वार्ड पंच के आरक्षण की लॉटरी की तारीखें निर्धारित की गई है।

    आचार संहिता को लेकर भी बढ़ी अटकलें
    यदि नगरीय निकाय और पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव अलग-अलग चरण में होते हैं, तो ग्रामीण क्षेत्रों में नगरीय निकाय चुनाव के साथ ही आचार संहिता लागू नहीं होगी। ऐसी स्थिति में पंचायत क्षेत्रों में विकास कार्यों की रफ्तार पर चुनावी बंदिशों का तत्काल असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, ग्रामीण क्षेत्र में आचार संहिता कब और किस स्तर पर लागू होगी, यह स्थिति राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से जारी होने वाले अंतिम चुनाव कार्यक्रम के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगी।

    बिना ठोस कारण बताए लॉटरी स्थगित करने पर चर्चाएं तेज
    पंचायतीराज विभाग ने अचानक एक दिन पहले पंचायतीराज संस्थाओं के वार्डों की लॉटरी को 1 महीने आगे खिसकाने के पीछे कोई ठोस कारण नहीं बताया है। लॉटरी स्थगित करने को लेकर पंचायतीराज विभाग के आदेश में हाईकोर्ट के नवंबर तक पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव करवाने के फैसले की पालना करने के संकल्प का हवाला दिया है। पंचायतीराज विभाग के आदेश में पंचायतीराज चुनाव शहरी निकायों के बाद दूसरे फेज में होने की संभावना का हवाला दिया है। एक तरफ विभाग ने हाईकोर्ट के आदेशों की पालना करने की बात कही है, दूसरी तरफ पंचायतीराज चुनाव दूसरे फेज में होने की संभावना के कारण लॉटरी को एक महीने आगे खिसकाया है।

    निकायों की लॉटरी आज
    राज्य की 309 निकायों के 10,245 वार्डों के आरक्षण की लॉटरी सोमवार को निकाली जाएगी। निकायों के चुनाव पहले चरण में होंगे। आरक्षण का निर्धारण होते ही भाजपा और कांग्रेस में टिकट के दावेदारों का गणित बदल जाएगा। जिन वार्डों में आरक्षण की स्थिति बदलेगी, वहां कई निवर्तमान पार्षदों और संभावित प्रत्याशियों को नए वार्ड तलाशने पड़ सकते हैं, जबकि लंबे समय से चुनाव की तैयारी कर रहे नए चेहरों के लिए भी मौका बन सकता है।

  • राजस्व विभाग ने रोकी राजस्व मंडल की तबादला सूची, अब 164 तहसीलदारों की सूची मान्य

    राजस्व विभाग ने रोकी राजस्व मंडल की तबादला सूची, अब 164 तहसीलदारों की सूची मान्य

    जयपुर
    राजस्थान सरकार की दो अलग-अलग 'तबादला सूची' की वजह से बड़ी गफलत सामने आई है। ये गफलत तब सामने आई जब राजस्व विभाग में तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों के स्थानांतरण/पदस्थापन आदेशों को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हो गई। दरअसल, एक ही दिन में दो अलग-अलग प्रशासनिक स्तरों से दो अलग-अलग तबादला सूचियां जारी होने से न केवल आम जनता में बल्कि खुद राज्य के विभिन्न जिलों में तैनात अधिकारियों के बीच भी अनिश्चितता का माहौल बन गया। इस पूरे मामले में सबसे ध्यान खींचने वाली बात यह रही कि राजस्व मंडल और राजस्व विभाग दोनों ने ही अपनी-अपनी अलग-अलग तबादला सूची जारी कर दी, जिससे पूरा मामला उलझ गया और आखिरकार सरकार को एक सूची पर तुरंत रोक लगानी पड़ी।

    पहले आदेश जारी हुआ, फिर कुछ ही देर में रोक
    राजस्थान राजस्व विभाग में जैसे ही तबादला सूची आई, वैसे ही राज्य के अलग-अलग जिलों में काम कर रहे अधिकारियों और आम लोगों के बीच यह खबर आग की तरह फैल गई। लेकिन इस खुशी और चिंता के बीच एक नया मोड़ तब आया जब पता चला कि दो अलग-अलग स्तरों पर तबादला आदेश तैयार किए गए थे।

    राजस्व मंडल ने अलग सूची निकाली और जयपुर स्थित राजस्व विभाग ने अपनी अलग सूची जारी की। जब इस 'गफलत' या भ्रम की जानकारी उच्च अधिकारियों तक पहुंची, तो तुरंत कार्रवाई करते हुए राजस्व विभाग ने राजस्व मंडल द्वारा जारी की गई सूची पर रोक लगा दी। इस फैसले ने यह साफ कर दिया कि प्रशासन में समन्वय की कितनी बड़ी कमी रही, जिसके कारण अधिकारियों को भी समझ नहीं आया कि उनका नया पदस्थापन आदेश कहां का है।

    157 बनाम 164 तहसीलदार
    इस पूरे विवाद की सबसे बड़ी वजह तबादला आंकड़ों में आया अंतर है। विभिन्न जिलों में नई पोस्टिंग का इंतजार कर रहे अधिकारियों के लिए ये दोनों सूचियां बिल्कुल अलग कहानी बयां कर रही थीं

    राजस्व मंडल की सूची: राजस्व मंडल ने कुल 157 तहसीलदार और 47 नायब तहसीलदार के तबादले का आदेश जारी किया था।

    राजस्व विभाग की सूची: दूसरी तरफ, राजस्व विभाग ने 164 तहसीलदार और 49 नायब तहसीलदार के तबादले के आदेश जारी कर दिए।

    जब दोनों सूचियों का मिलान किया गया, तो संख्या में अंतर के साथ-साथ कई अधिकारियों के नाम और पदस्थापन स्थानों में भी अंतर पाया गया। इस वजह से जिला स्तर पर प्रशासनिक कार्य प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई।

    तहसीलदार और नायब तहसीलदार किसी भी जिला प्रशासन की वह महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं जो जमीन, राजस्व, जाति प्रमाण पत्र, नामांतरण और स्थानीय कानून-व्यवस्था जैसे जरूरी कामों से सीधे जुड़े होते हैं।

    राजस्थान के ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में आम जनता रोजमर्रा के कामों के लिए तहसील कार्यालय के चक्कर काटती है। जब इस तरह की तबादला सूची पर भ्रम बनता है, तो स्थानीय स्तर पर काम पूरी तरह से ठप हो जाता है:

    अब कौन सी ट्रांसफर लिस्ट मान्य?
    राजस्व विभाग के सख्त आदेश के बाद अब पूरी स्थिति साफ हो चुकी है। विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि राजस्व मंडल (Revenue Board) द्वारा जारी की गई सूची को निरस्त/होल्ड पर रखा गया है।

    अब सिर्फ और सिर्फ राजस्व विभाग द्वारा जारी की गई तबादला सूची ही मान्य मानी जाएगी। इसका मतलब है कि 164 तहसीलदार और 49 नायब तहसीलदार वाली सूची के हिसाब से ही अधिकारियों को अपनी नई पोस्टिंग की जगह पर रिपोर्टिंग करनी होगी। विभाग ने सभी जिला कलेक्टर्स और संबंधित अधिकारियों को भी निर्देश दे दिए हैं कि वे केवल विभाग के आदेश का ही पालन करें।

    प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल
    इस पूरी घटना ने राजस्थान के राजस्व प्रशासन के भीतर चल रहे आंतरिक संवाद के अभाव को उजागर किया है। आमतौर पर तबादला सूची जारी करने से पहले सभी स्तरों पर स्वीकृति और सत्यापन पूरा किया जाता है। लेकिन एक ही दिन में दो अलग-अलग स्रोतों से अलग-अलग संख्या में तबादला आदेशों का बाहर आना यह दर्शाता है कि विभागीय प्रक्रियाओं में समन्वय की कमी थी।

    सरकार ने हालांकि समय रहते इस पर रोक लगाकर स्थिति को संभालने की कोशिश की है, लेकिन इस घटना से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल जरूर उठ रहे हैं। अब देखना यह होगा कि नए आदेश के बाद सभी तहसीलों में कामकाज सामान्य रूप से शुरू हो पाता है या नहीं।

  • घेवर का सैंपल जांच को भेजा, एक्सपायर्ड मिल्क केक-पनीर भी मिला

    घेवर का सैंपल जांच को भेजा, एक्सपायर्ड मिल्क केक-पनीर भी मिला

    जयपुर
    जयपुर के सांगानेर क्षेत्र में खाद्य सुरक्षा विभाग की जयपुर मुख्यालय स्थित सेंट्रल टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मिलावटखोरों और दूषित खाद्य सामग्री बेचने वालों पर शिकंजा कसा है। शनिवार को खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीम ने रामपुरा रोड, सांगानेर स्थित 'संस्कार स्वीट्स कैटर्स' के परिसर का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान प्रतिष्ठान में भारी अनियमितताएं और अस्वच्छता पाई गई।

    घेवर का नमूना लैब भेजा गया
    कार्रवाई के दौरान खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत टीम ने प्रतिष्ठान में तैयार किए जा रहे 'घेवर' का एक नमूना लिया। इस नमूने को गुणवत्ता की जांच के लिए खाद्य प्रयोगशाला (फूड लैब) में भेजा जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, लैब से जांच रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार आगे की विधिक व प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

    निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को प्रतिष्ठान में लगभग 83 किलोग्राम एक्सपायर्ड और अस्वास्थ्यकर खाद्य सामग्री मिली। जनस्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए टीम ने इस पूरी एक्सपायर्ड सामग्री को मौके पर ही नष्ट करवा दिया।

        मिल्क केक
        पाव ब्रेड
        खट्टा पनीर
        डोडा बर्फी
        टोस्ट एवं काला नमक

    गंदगी मिलने पर इम्प्रूवमेंट नोटिस
    कार्रवाई के दौरान प्रतिष्ठान के भीतर साफ-सफाई की स्थिति भी बेहद असंतोषजनक पाई गई। तैयार खाद्य सामग्रियों को अनहाइजीनिक (अस्वास्थ्यकर) स्थितियों में रखा गया था। मौके पर पाई गई अन्य कमियों व सफाई में सुधार के संबंध में खाद्य विभाग द्वारा प्रतिष्ठान को अलग से 'इम्प्रूवमेंट नोटिस' जारी किया जाएगा।

    लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई
    खाद्य सुरक्षा आयुक्त टी. शुभमंगला ने बताया कि पूरे प्रदेश में खाद्य पदार्थों की शुद्धता, गुणवत्ता और स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए यह जांच अभियान लगातार जारी रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने या खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

     

  • राजस्थान में नगर पालिका सेवा के 41 अधिकारियों का तबादला, 11 को APO किया गया

    राजस्थान में नगर पालिका सेवा के 41 अधिकारियों का तबादला, 11 को APO किया गया

    जयपुर
     राजस्थान में निकाय चुनाव से ठीक पहले स्वायत्त शासन विभाग ने बड़ा प्रशासनिक फेरबदल कर दिया है। विभाग ने नगर पालिका सेवा के 41 अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग के आदेश जारी किए हैं। इनमें लंबे समय से APO यानी अवेटिंग पोस्टिंग ऑर्डर में चल रहे 24 अधिकारियों को नई जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, 11 अधिकारियों को वर्तमान पद से हटाकर APO किया गया है। विभाग के इस फैसले के बाद कई नगर पालिकाओं और नगर परिषदों में अधिकारियों की जिम्मेदारियां बदल गई हैं।

    लंबे समय से APO चल रहे 24 अधिकारियों को पोस्टिंग
    तबादला सूची में 24 ऐसे अधिकारी हैं, जो लंबे समय से APO चल रहे थे। अब विभाग ने इन सभी को प्रदेश के अलग-अलग नगर निकायों में पोस्टिंग दे दी है। किसी को आयुक्त तो किसी को अधिशासी अधिकारी और राजस्व अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है। लंबे समय से खाली पड़े पदों पर अधिकारी मिलने से अब संबंधित नगर पालिकाओं और नगर परिषदों में कामकाज तेजी से होने की उम्मीद है। साथ ही रोजमर्रा के प्रशासनिक काम भी आसानी से हो सकेंगे।

    अलग-अलग स्तर के अधिकारियों का तबादला
    स्वायत्त शासन विभाग की ओर से जारी आदेश में नगर पालिका सेवा के अलग-अलग स्तर के अधिकारी शामिल हैं। इनमें वरिष्ठ आयुक्त, आयुक्त, अधिशासी अधिकारी और राजस्व अधिकारी स्तर के अधिकारियों के तबादले किए गए हैं। विभाग ने अलग-अलग नगरीय निकायों में प्रशासनिक जरूरत और उपलब्ध पदों को देखते हुए अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां दी हैं। कुछ अधिकारियों को उनके मौजूदा पद से हटाकर दूसरे नगर निकायों में भेजा गया है। इससे कई अधिकारियों की जिम्मेदारियां बदल गई हैं।

    11 अधिकारियों को APO किया, नई पोस्टिंग का इंतजार
    इसी तबादला सूची में 11 अधिकारियों को APO भी किया गया है। यानी इन अधिकारियों को फिलहाल उनकी मौजूदा पोस्टिंग से हटा दिया गया है और अब नई जिम्मेदारी मिलने तक वे इंतजार में रहेंगे। अभी इन अधिकारियों को किसी दूसरे नगर निकाय में तैनाती नहीं दी गई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में विभाग इनके लिए नई पोस्टिंग जारी कर सकता है। इसके बाद इन्हें प्रदेश के किसी नगर निकाय में जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।

  • ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहला बड़ा हवाई युद्धाभ्यास, जोधपुर में जुटेंगी विदेशी वायुसेनाएं

    ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहला बड़ा हवाई युद्धाभ्यास, जोधपुर में जुटेंगी विदेशी वायुसेनाएं

    जयपुर
    भारतीय वायुसेना का मेगा मल्टीलेटरल युद्धाभ्यास तरंगशक्ति का दूसरा संस्करण ‘तरंगशक्ति-2026’ सितंबर से राजस्थान के जोधपुर वायुसेना स्टेशन पर शुरू होगा। यह अभ्यास केवल लड़ाकू विमानों की उड़ान तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि भारत की बढ़ती सैन्य क्षमता, रणनीतिक साझेदारी और स्वदेशी रक्षा तकनीक का वैश्विक प्रदर्शन भी बनेगा। खास बात यह है कि मई 2025 में 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारतीय वायुसेना की ओर से पाकिस्तान के एयरबेस पर की गई कार्रवाई के बाद यह पहला बड़ा बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास होगा।

    इसमें अमरीका, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त अरब अमीरात, ग्रीस, सिंगापुर, बांग्लादेश और श्रीलंका अपने-अपने लड़ाकू विमान, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर के साथ भाग लेंगे। 18 देशों के सैन्य पर्यवेक्षक भी मौजूद रहेंगे। भारत ने 51 देशों को आमंत्रित किया है, जिसमें से अधिकांश ने सहमति दी है। यह युद्धाभ्यास एक पखवाड़े का होगा, जो सितंबर अंत से लेकर अक्टूबर तक चलेगा। मानसून जाने के बाद जोधपुर का आसमान एकदम साफ होने की वजह से फ्लाइंग के लिए बेहतरीन माना जाता है। तरंगशक्ति का पहला संस्करण वर्ष 2024 में अगस्त-सितंबर में तमिलनाडु और जोधपुर में हुआ था।

    डिफेंस एक्सपो सहित कई कार्यक्रम होंगे
    युद्धाभ्यास में डिफेंस एक्सपो सहित कई कार्यक्रम होंगे, जिसमें एक दूसरे देश की सैन्य क्षमताओं का प्रदर्शन होगा। नई वार टेक्नोलॉजी का भी प्रदर्शन किया जाएगा। भारत भी स्वदेशी तकनीक को दूसरे देशों को बताएगा ताकि डिफेंस सामग्री के लिए मार्केट मिल सके। इसके अलावा युद्धाभ्यास के दौरान भारतीय वायुसेना के विमान अलग-अलग मैन्युवर में प्रदर्शन करेंगे। सूर्यकिरण टीम 9 हॉक विमानों के साथ भाग लेगी। सारंग हेलीकॉप्टर टीम के भी शामिल होने की संभावना है।

    इन लड़ाकू विमानों के शामिल होने की संभावना
        ऑस्ट्रेलिया से एफ-18
        बांग्लादेश से सी-130 ट्रांसपोर्ट जहाज
        ग्रीस से एफ-16 लड़ाकू विमान
        यूएई से एफ-16 व अवॉक्स
        अमरीका से एफ-16, ए-10, एफआरए
        सिंगापुर से सी-130
        जापान एयरफोर्स के लड़ाकू विमान
        यूएई से एफ-16

    भारतीय वायुसेना के ये विमान होंगे शामिल
    तेजस, राफेल, सुखोई-30 एमकेआई, मिराज-2000, जगुआर, मिग-29, एलसीएच प्रचंड हेलीकॉप्टर, एएलएच मार्क-4 रुद्र हेलीकॉप्टर, सी-130, आईएल-78, अवॉक्स।

    सभी देशों की एयरफोर्स ऐसे करेगी युद्धाभ्यास

    • विद इन विजुअल रेंज (WVR) कॉम्बेट मिशन।
    • बियोंड विजुअल रेंज कॉम्बेट (बीवीआर) मिशन।
    • लार्ज फोर्स एंगेजमेंट (एलएफई)।
    • एयर मोबिलिटी ऑपरेशन।
    • लॉ लाइट ऑपरेशन।
    • डायनेमिक टारगेटिंग।
    • एयर टू एयर रिफ्यूलिंग मिशन।
    • कॉम्बेट सर्च एण्ड रेस्क्यू।
    • हाई वेल्यू एरियल एसेट प्रोटेक्शन एंड बस्टिंग।