Category: राजस्थान

  • कर चोरी और अपात्र ITC पर राजस्थान सरकार सख्त, कई जिलों में ताबड़तोड़ कार्रवाई

    कर चोरी और अपात्र ITC पर राजस्थान सरकार सख्त, कई जिलों में ताबड़तोड़ कार्रवाई

    जयपुर
     वाणिज्यिक कर विभाग द्वारा कर चोरी एवं अपात्र इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत 14 से 19 अगस्त 2026 के दौरान राज्य के विभिन्न हिस्सों में सर्वे एवं तलाशी की कार्रवाई की गई। खैरथल, अलवर, धौलपुर, चित्तौड़गढ़, सांगड़िया, श्रीगंगानगर, सवाई माधोपुर, नीमराना/कोटपूतली-बहरोड़ तथा भिवाड़ी सहित विभिन्न स्थानों पर की गई इन कार्रवाइयों में खाद्य तेल, विनिर्माण, परिवहन, होटल एवं आतिथ्य, प्रिंटिंग तथा औद्योगिक सेवाओं सहित अनेक क्षेत्रों में कर अनियमितताएं सामने आईं।

    इन मामलों में कुल मिलाकर लगभग 2.83 करोड़ रुपए की प्रारंभिक कर देयता/राजस्व प्रभाव चिन्हित हुआ है। कार्रवाई के दौरान संबंधित करदाताओं द्वारा लगभग 2.06 करोड़ रुपए की राशि स्वेच्छा से जमा अथवा रिवर्स की गई है। इनमें नियमानुसार कर, ब्याज एवं दंड से संबंधित भुगतान भी शामिल हैं।

    फर्जी एवं गैर-मौजूद फर्मों से आईटीसी लेने के मामले सामने आए –
    खैरथल स्थित रामचंद्र राम निवास ऑयल मिल्स, जो सरसों एवं सरसों तेल के कारोबार से जुड़ी है, के मामले में लगभग 20 लाख रुपए की आईटीसी ऐसी फर्म से प्राप्त करने का मामला सामने आया जो अस्तित्व में नहीं पाई गई। कार्रवाई के दौरान फर्म द्वारा लगभग 19.05 लाख रुपए की राशि स्वेच्छा से जमा की गई। भौतिक स्टॉक सत्यापन में भी अंतर पाया गया और मामले की आगे जांच जारी है।

    इसी प्रकार अलवर के एग्रो फूड पार्क, मत्स्य औद्योगिक क्षेत्र स्थित आर.आर. ऑयल एंड फैट्स प्राइवेट लिमिटेड के मामले में लगभग  15 लाख रुपए की आईटीसी ऐसी गैर-मौजूद फर्म से प्राप्त करने का मामला सामने आया। कार्रवाई के दौरान करदाता ने लगभग 14.85 लाख रुपए की राशि स्वेच्छा से जमा की। स्टॉक के भौतिक सत्यापन में भी अंतर पाया गया।

    अपात्र आईटीसी के विरुद्ध कार्रवाई
    चित्तौड़गढ़ में मेवाड़ इन्फ्रा डेवलपर्स एलएलपी, जो होटल व्यवसाय से जुड़ी है, के मामले में लगभग 32 लाख रुपए की अपात्र आईटीसी का मामला सामने आया। कार्रवाई के दौरान करदाता ने लगभग 31.90 लाख रुपए की राशि स्वेच्छा से रिवर्स की।

    नीमराना के रीको औद्योगिक क्षेत्र स्थित कमल सीईडी सॉल्यूशंस एलएलपी के मामले में निर्माण एवं वर्क कॉन्ट्रैक्ट से संबंधित खर्चों पर अपात्र आईटीसी लिए जाने का मामला सामने आया। इसमें लगभग 20.51 लाख रुपए की राशि शामिल थी, जिसे करदाता द्वारा कार्रवाई के दौरान स्वेच्छा से जमा किया गया। मामले की आगे जांच जारी है।

    भिवाड़ी स्थित विरगो ग्राफिक्स प्राइवेट लिमिटेड के मामले में भी अपात्र आईटीसी से संबंधित अनियमितता सामने आई। प्रारंभिक रूप से लगभग 50 लाख रुपए की आईटीसी की जांच की गई, जबकि कार्रवाई के दौरान करदाता द्वारा कुल लगभग 74.15 लाख रुपए की राशि स्वेच्छा से जमा की गई। मामले में आगे की जांच जारी है।

    स्टॉक और उत्पादन में अंतर से कर चोरी के संकेत
    श्रीगंगानगर स्थित श्री टायल इंडस्ट्रीज, जो सीमेंट टाइल्स के निर्माण से जुड़ी है, में भौतिक स्टॉक एवं खरीद अभिलेखों की जांच के दौरान खरीदे गए सीमेंट की मात्रा और उससे तैयार होने वाली टाइल्स के घोषित उत्पादन में महत्वपूर्ण अंतर पाया गया। प्रारंभिक जांच में उत्पादन कम दिखाकर बिक्री एवं कर देयता कम दर्शाए जाने की आशंका सामने आई। मामले में लगभग 22 लाख रुपए की संभावित कर देयता चिन्हित हुई और करदाता द्वारा 15 लाख रुपए की राशि स्वेच्छा से जमा की गई।

    धौलपुर में यादव इलेक्ट्रिकल्स के मामले में विभिन्न वित्तीय वर्षों में दावा की गई आईटीसी में लगभग 82.79 लाख रुपए का अंतर पाया गया। प्रारंभिक रूप से लगभग 19.73 लाख रुपए की संभावित कर देयता चिन्हित हुई है। फर्म अपने घोषित व्यावसायिक परिसर पर संचालित पाई गई और मामले की विस्तृत जांच जारी है।

    सांगड़िया, हनुमानगढ़ स्थित वीर चंद एंड संस, जो फावड़े एवं अन्य कृषि उपकरणों के कारोबार से जुड़ी है, के मामले में 100 प्रतिशत आईटीसी के दावे से संबंधित अनियमितता सामने आई। कार्रवाई के दौरान करदाता ने लगभग 10.08 लाख रुपए की राशि स्वेच्छा से जमा की।

    परिवहन क्षेत्र में भी कार्रवाई
    सवाई माधोपुर में अंबिका बल्क कैरियर के मामले में लगभग 78.59 लाख रुपए की आईटीसी की पुष्टि एवं पात्रता की जांच का मामला सामने आया। प्रारंभिक रूप से लगभग 78.58 लाख रुपए का संभावित कर प्रभाव चिन्हित किया गया। कार्रवाई के दौरान करदाता द्वारा 10 लाख रुपए की राशि स्वेच्छा से जमा की गई। मामले की विस्तृत जांच जारी है।

    विभिन्न क्षेत्रों में लगातार निगरानी
    हाल की इन कार्रवाइयों से स्पष्ट है कि विभाग का प्रवर्तन अभियान किसी एक वस्तु या व्यापारिक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। खाद्य तेल, विनिर्माण, परिवहन, होटल एवं आतिथ्य, प्रिंटिंग, औद्योगिक सेवाओं तथा अन्य व्यापारिक क्षेत्रों में कर अनियमितताओं की जांच की जा रही है। जहां आवश्यक पाया जा रहा है, वहां लेखा अभिलेखों, खरीद-बिक्री विवरण, स्टॉक एवं आईटीसी दावों का विस्तृत सत्यापन किया जा रहा है।

    वाणिज्यिक कर विभाग ने कहा है कि कर चोरी एवं अपात्र आईटीसी के मामलों में कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। साथ ही, कार्रवाई के दौरान सामने आने वाली अनियमितताओं को स्वेच्छा से दूर करने और नियमानुसार कर, ब्याज एवं दंड जमा करने वाले करदाताओं को कानून के अनुसार आवश्यक अवसर दिया जा रहा है।

    विभाग ने ईमानदार एवं नियमित करदाताओं से अपील की है कि वे अपने अभिलेख व्यवस्थित रखें, अपने आपूर्तिकर्ताओं की वैधता की जांच करें तथा केवल वही इनपुट टैक्स क्रेडिट लें जो कानून के तहत पात्र है। विभाग का उद्देश्य राजस्व की सुरक्षा के साथ-साथ ईमानदारी से कारोबार करने वाले करदाताओं के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना है।

  • अब हादसे वाले रास्तों पर पहले ही चेतावनी देगा Google Maps, जयपुर रेंज के 93 ब्लैक स्पॉट पर अलर्ट सिस्टम लागू

    अब हादसे वाले रास्तों पर पहले ही चेतावनी देगा Google Maps, जयपुर रेंज के 93 ब्लैक स्पॉट पर अलर्ट सिस्टम लागू

    जयपुर
    जयपुर रेंज में सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने और हादसों में होने वाली जनहानि को न्यूनतम करने के लिए पुलिस ने एक बड़ा तकनीकी कदम उठाया है। जयपुर रेंज पुलिस महानिरीक्षक (IG) राहुल प्रकाश के निर्देशन में Operation Safer Roads” नाम का एक अभिनव सड़क सुरक्षा पहल शुरू की गई है। इस पहल के तहत जयपुर रेंज के प्रमुख राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के उन दुर्घटना संभावित क्षेत्रों को चिह्नित किया गया है, जहां बीते 3 वर्षों में सबसे ज्यादा हादसे और मौतें दर्ज की गई हैं। सबसे खास बात यह है कि पुलिस डेटा का वैज्ञानिक विश्लेषण कर इन 93 ब्लैक स्पॉट्स को सीधे Google Maps प्लेटफॉर्म से इंटीग्रेट कर दिया गया है, ताकि वाहन चालक जैसे ही इन इलाकों के करीब पहुंचेंगे, उनके मोबाइल में अलर्ट बज जाएगा।

    यह आधुनिक तकनीक न केवल ड्राइवरों को पहले से सचेत करेगी, बल्कि उन्हें वाहन की गति धीमी करने और सुरक्षित ड्राइविंग के लिए भी जागरूक करेगी। इससे जयपुर, सीकर, अलवर और दौसा जैसे जिलों से गुजरने वाले लाखों यात्रियों का सफर बेहद सुरक्षित हो जाएगा।

    3 साल का विश्लेषण- 7 जिलों में 93 ब्लैक स्पॉट
    जयपुर रेंज पुलिस द्वारा वर्ष 2023 से 2025 तक के एक्सीडेंट डेटा, पुलिस रिकॉर्ड और ट्रैफिक रिपोर्ट्स का गहन अध्ययन किया गया। इस डेटा एनालिसिस में दुर्घटनाओं की संख्या से ज्यादा वहां हुई मानव क्षति की गंभीरता को प्राथमिकता दी गई।
    रेंज के 7 जिलों में कुल 93 दुर्घटना संभावित स्थान चिह्नित किए गए हैं:

    कोटपूतली-बहरोड़: 17 स्थान

    A, B और C श्रेणी में बांटे गए रिस्क जोन
    सड़क सुरक्षा संसाधनों का सटीक उपयोग करने और वाहन चालकों को आसानी से समझने योग्य चेतावनी देने के लिए पुलिस ने इन 93 स्थलों को तीन श्रेणियों में विभाजित कर Google Maps और QR Code के साथ जोड़ा है:

    Red (लाल) — A Type (High Risk Zone): कुल 06 स्थान चिह्नित। ये वे स्थान हैं जहां पिछले 3 वर्षों में हादसों के कारण 20 से अधिक लोगों की जान गई है।

    Orange (नारंगी) — B Type (Medium Risk Zone): कुल 30 स्थान चिह्नित। इन स्थानों पर पिछले 3 वर्षों में 10 से 20 जनहानि दर्ज की गई हैं।

    Yellow (पीला) — C Type (Low Risk Zone): कुल 57 स्थान चिह्नित। ये वे डेंजर स्पॉट हैं जहां पिछले 3 वर्षों में 5 से 10 के बीच मौतें हुई हैं।

    QR Code स्कैन करते ही दिखेगा पूरा मैप
    आम जनता, ट्रांसपोर्टर्स और दैनिक यात्रियों के लिए जयपुर रेंज पुलिस ने एक विशेष QR Code व्यवस्था विकसित की है। इस QR कोड को किसी भी स्मार्ट फोन या Google द्वारा स्कैन करते ही स्क्रीन पर गूगल मैप खुल जाएगा, जहां रेड, ऑरेंज और येलो कलर के स्पॉट दिखाई देंगे।

    इस व्यवस्था के जरिए चालक यात्रा शुरू करने से पहले ही अपने पूरे रूट के रिस्क स्पॉट्स को देख सकते हैं और उसी अनुसार अपनी यात्रा की योजना बना सकते हैं।

    कैसे काम करेगा यह अलर्ट सिस्टम?
    तकनीकी एकीकरण के दूसरे चरण में जयपुर रेंज पुलिस ने अपना सत्यापित जियोस्पेशियल डेटा गूगल की टेक्निकल टीम के साथ साझा किया। आवश्यक टेस्टिंग के बाद इसे Google Maps के नेविगेशन सिस्टम में लाइव कर दिया गया है।

    अब जब भी कोई व्यक्ति गाड़ी चलाते समय Google Maps ऑन रखकर नेविगेट करेगा, तो चिह्नित A, B या C श्रेणी के ब्लैक स्पॉट के 500 मीटर से 1 किलोमीटर के दायरे में पहुंचते ही ऐप के माध्यम से वॉयस और स्क्रीन पर पॉप-अप रोड सेफ्टी अलर्ट मिलेगा। यह चेतावनी मिलते ही ड्राइवर तुरंत अपनी स्पीड नियंत्रित कर सकेगा।

    हर 3 महीने में होगा रिव्यू
    पुलिस प्रशासन के अनुसार, यह पहल केवल लिस्ट बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि डेटा बेस्ड एविडेंस पुलिसिंग का बेहतरीन उदाहरण है। जयपुर रेंज पुलिस हर 3 महीने में एक्सीडेंट आंकड़ों का पुनः विश्लेषण करेगी। यदि किसी नए स्थान पर दुर्घटनाएं बढ़ती हैं, तो उसे लिस्ट में जोड़कर Google Maps पर अपडेट किया जाएगा।

    पुलिस ने सभी वाहन चालकों से अपील की है कि वे अलर्ट मिलने पर ओवरस्पीडिंग से बचें, सीट बेल्ट और हेलमेट का अनिवार्य उपयोग करें और थकान या मोबाइल उपयोग के दौरान ड्राइविंग करने से बचें।

     

  • जयपुर की सड़क से हटेंगे 310 अतिक्रमण, हाईकोर्ट ने जेडीए को 3 महीने की मोहलत दी

    जयपुर की सड़क से हटेंगे 310 अतिक्रमण, हाईकोर्ट ने जेडीए को 3 महीने की मोहलत दी

     जयपुर
    राजस्थान हाईकोर्ट ने 22 गोदाम रेलवे स्टेशन से बी-2 बाइपास तक सड़क पर मौजूद लगभग 310 अतिक्रमणों को 15 दिनों का नोटिस देकर और सुनवाई का अवसर प्रदान करते हुए हटाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने 3 महीने में अतिक्रमण हटाकर रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने याचिका को जनहित याचिका के रूप में स्वीकार कर लिया है। न्यायाधीश इंद्रजीत सिंह और न्यायाधीश संदीप तनेजा की खंडपीठ ने सीताराम देवांदा व अन्य द्वारा दायर याचिका तथा इससे जुड़ी अवमानना व विविध याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया।

    जेडीए की ओर से पेश हुए अधिवक्ता अमित कुमार ने एक शपथ पत्र प्रस्तुत किया। जेडीए ने शपथ पत्र में यह भी स्वीकार किया कि सड़क के इन तीनों हिस्सों पर अलग-अलग स्थानों पर लगभग 310 अतिक्रमण मौजूद है। सुनवाई के दौरान मध्यस्थ के वकील ने कोर्ट को बताया कि रेलवे अधिकारियों ने भी उक्त सड़क के कुछ हिस्सों पर अतिक्रमण किया हुआ है। अगली सुनवाई 25 नवंबर 2026 को तय की गई हैं। राजस्थान हाईकोर्ट ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए आदेश दिया है कि देश की कोई भी सिविल अदालत या ट्रिब्यूनल इस सड़क से संबंधित किसी भी अपील या सिविल सूट (दीवानी मामले) पर सुनवाई नहीं करेगा।

        22 गोदाम रेलवे स्टेशन से महेश नगर फाटकः 40 फीट
        महेश नगर फाटक से गोपालपुरा बाइपासः 60 फीट
        गोपालपुरा बाइपास से बी-2 बाइपासः 80 फीट

    एमडी रोड पानी-पानी, नाले से अतिक्रमण हटाने की मांग
    जयपुर की MD रोड पर सोमवार को जलभराव हो गया है। ऐसे में लोगों को आने-जाने में काफी परेशानी हुई। आनंदपुरी नव युवक विकास समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि जेडीए और निगम में कई बार शिकायत कर चुके, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई। समिति के महामंत्री गिर्राज प्रसाद शर्मा ने बताया कि नायला हाउस से खरबूजा मंडी तक बरसात में जलभराव से अब तक निजात नहीं मिल पाई है। जबकि, पूर्व में जेडीए-निगम से लेकर स्वायत्त शासन विभाग को भी पत्र लिखा जा चुका है। समिति ने मांग की कि आनंदपुरी के सामने बड़ा नाला है। इसको अतिक्रमण से मुक्त कराया जाए और मुख्य सडक़ की चौड़ाई मास्टरप्लान के अनुरूप की जाए।

  • 5 से 900 रुपये तक राखियां, झुंझुनूं बाजार में रक्षाबंधन की खरीदारी ने पकड़ी रफ्तार

    5 से 900 रुपये तक राखियां, झुंझुनूं बाजार में रक्षाबंधन की खरीदारी ने पकड़ी रफ्तार

    झुंझुनूं
    रक्षाबंधन का पर्व नजदीक आते ही झुंझुनूं शहर सहित जिले के प्रमुख बाजार रंग-बिरंगी राखियों से सज गए हैं। दुकानों पर तरह-तरह की राखियां आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। बच्चों से लेकर युवाओं और महिलाओं की पसंद को ध्यान में रखते हुए बाजार में पारंपरिक से लेकर आधुनिक डिजाइन की राखियां उपलब्ध हैं। पर्व को लेकर बहनों में राखी खरीदने को लेकर उत्साह नजर आने लगा है, वहीं दुकानदारों ने भी ग्राहकों की पसंद और बजट के अनुसार अलग-अलग रेंज में राखियां मंगवाई हैं।

    बाजार में इस बार कार्टून कैरेक्टर, रुद्राक्ष, मोती, चंदन, स्टोन व आकर्षक डिजाइन वाली राखियों की मांग अधिक है। छोटे बच्चों के लिए पसंदीदा कार्टून कैरेक्टर वाली राखियां उपलब्ध हैं तो युवाओं के लिए स्टाइलिश और डिजाइनर राखियां दुकानों पर सजी हुई हैं। वहीं पारंपरिक राखियों में रुद्राक्ष, चंदन और मोती वाली राखियां भी ग्राहकों को पसंद आ रही हैं।

    राखियों के साथ बाजार में भाई-बहन के रिश्ते को खास बनाने के लिए गिफ्ट पैक, चॉकलेट, ड्राई फ्रूट्स पैक और छोटे उपहार भी उपलब्ध हैं। कई दुकानदारों ने राखी के साथ गिफ्ट कॉम्बो तैयार किए हैं, ताकि ग्राहक एक ही जगह से राखी और भाई के लिए उपहार खरीद सकें। इससे राखी के साथ गिफ्ट की बिक्री भी बढऩे लगी है।

    ऑनलाइन दौर में बाजार में जाकर राखी खरीदने का उत्साह बरकरार
    राखी विक्रेता पीयूष पंसारी ने बताया कि बाजार में हर वर्ग के ग्राहकों को ध्यान में रखकर राखियां मंगाई गई हैं। सामान्य राखियों से लेकर आकर्षक और डिजाइनर राखियों की अलग-अलग कीमतें हैं। उन्होंने बताया कि पांच रुपए से लेकर नौ सो रुपए तक की राखी उपलब्ध है।

    बदलते समय के साथ रक्षाबंधन मनाने का तरीका भी बदल रहा है। दूसरे शहरों और राज्यों में रहने वाले भाइयों तक राखी पहुंचाने के लिए ऑनलाइन राखी भेजने का चलन लगातार बढ़ रहा है। बहनें घर बैठे राखी, चॉकलेट और गिफ्ट पैक पसंद कर ऑनलाइन ऑर्डर कर रही हैं। इसके बाद डिलीवरी के माध्यम से राखी सीधे भाई के पते तक पहुंचाई जा रही है। इसके बावजूद शहर के बाजारों में जाकर अपनी पसंद की राखी खरीदने का उत्साह आज भी बरकरार है।

    बच्चों की पसंद में कार्टून राखियां
    छोटे बच्चों के लिए बाजार में कार्टून कैरेक्टर वाली राखियों की बड़ी रेंज उपलब्ध है। इनमें बच्चों के स्पीनर, घड़ी, लाइटिंग सहित पसंदीदा किरदारों के अलावा रंग-बिरंगे डिजाइन और आकर्षक सजावट वाली राखियां शामिल हैं। दुकानदारों के अनुसार बच्चों के लिए राखी खरीदने वाले अभिभावक डिजाइन और रंग को विशेष महत्व दे रहे हैं।

    राखी के साथ भाई को उपहार देने का चलन भी बढ़ा है। बाजार में राखी के साथ चॉकलेट, ड्राई फ्रूट्स और अन्य छोटे गिफ्ट पैक उपलब्ध हैं। कई बहनें राखी के साथ भाई की पसंद की चॉकलेट या उपहार भी खरीद रही हैं। इससे राखी के साथ गिफ्ट आइटम की बिक्री में भी तेजी आई है।

  • शिक्षा, टीबी और नशे की रोकथाम पर राज्यपाल सख्त, अधिकारियों को दिए अहम दिशा-निर्देश

    शिक्षा, टीबी और नशे की रोकथाम पर राज्यपाल सख्त, अधिकारियों को दिए अहम दिशा-निर्देश

    जयपुर
    राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने मंगलवार को जिला कलक्ट्रेट सभागार में अधिकारियों की बैठक लेकर जिले में टीबी की स्थिति, मादक पदार्थों की रोकथाम के लिए की जा रही कार्रवाई तथा शिक्षा व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से विभिन्न बिंदुओं पर जानकारी लेते हुए टीबी मरीजों को समय पर पूरा उपचार मुहैया कराने, ‘नशा मुक्त दौसा’ बनाने के लिए नशे के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    राज्यपाल ने जिले में टीबी की स्थिति की समीक्षा करते हुए वर्तमान में टीबी से ग्रसित मरीजों की संख्या, उनकी औसत आयु और उपचार की स्थिति सहित विभिन्न बिंदुओं पर अधिकारियों से रिपोर्ट ली। उन्होंने कहा कि टीबी मुक्त जिले का लक्ष्य रखते हुए टीबी के प्रत्येक मरीज को समय पर समुचित उपचार उपलब्ध कराया जाए। गंभीर मरीजों को आवश्यकता के अनुसार अस्पताल में भर्ती कर उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    राज्यपाल ने जिले में मादक पदार्थों के उपयोग एवं नशे की स्थिति की समीक्षा करते हुए ‘नशा मुक्त दौसा’ बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नशे के दुष्प्रभावों के प्रति लोगों को जागरूक करने के साथ युवाओं के मन में नशे के प्रति नकारात्मक भावना विकसित की जाए। नशीले पदार्थों के स्रोतों को चिन्हित कर उन्हें बंद करने के लिए प्रभावी कार्रवाई की जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि पुलिस मादक पदार्थों के स्रोत तक पहुंचे।

    उन्होंने कहा कि सरकारी विभागों को अपने कार्मिकों के स्तर पर भी नशा मुक्ति के लिए पहल करनी चाहिए। शिक्षण संस्थानों के आसपास नशीले पदार्थों की उपलब्धता पूरी तरह रोकने के लिए संबंधित विभाग समन्वय से कार्रवाई करें। पुलिस नशे के नेटवर्क के खिलाफ दृढ़ता से कार्रवाई करते हुए लगातार निगरानी एवं मॉनिटरिंग सुनिश्चित करे।

    राज्यपाल ने जिला शिक्षा अधिकारियों के साथ जिले में शिक्षा की स्थिति की समीक्षा करते हुए विद्यार्थियों की संख्या, शिक्षक-विद्यार्थी अनुपात, शिक्षकों की उपलब्धता तथा विषयवार शिक्षकों की स्थिति सहित विभिन्न मानकों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यक्ति के जीवन को बेहतर बनाने और उसे आगे बढ़ाने का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है। जितने अधिक नागरिक शिक्षित होंगे, उतना ही देश मजबूत होगा। उन्होंने शिक्षकों से ‘मैं शिक्षक हूं’ की भावना को हमेशा अपने मन में रखते हुए विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने का आह्वान किया। उन्होंने निर्देश दिए कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहे, ड्रॉपआउट न हो और किसी भी स्तर पर पढ़ाई बीच में न छूटे, यह सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने नीट एवं जेईई में चयनित विद्यार्थियों की जानकारी लेते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए।

  • निकाय चुनाव के लिए चुनाव चिह्न जारी, जानें निर्दलीय प्रत्याशियों को कौन-कौन से सिंबल मिलेंगे

    निकाय चुनाव के लिए चुनाव चिह्न जारी, जानें निर्दलीय प्रत्याशियों को कौन-कौन से सिंबल मिलेंगे

    जयपुर
    राजस्थान में आगामी नगर निकाय और पंचायती राज चुनावों को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। राजनीतिक दल जहां अपनी-अपनी तैयारियों में जुटे हैं, वहीं निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों के लिए चुनाव चिह्नों की आधिकारिक घोषणा कर दी गई है। राज्य में होने वाले निकाय चुनावों के मैदान में हर बार की तरह इस बार भी दिलचस्प और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े प्रतीक नजर आने वाले हैं। चुनाव आयोग द्वारा जारी सूची में जहां रसोई घर से जुड़े चिमटा, केतली और मूसल को जगह मिली है, वहीं पुरानी यादों को ताजा करने वाली चक्की, चारपाई और बच्चों के बस्ते से गायब हो चुकी स्लेट भी उम्मीदवारों के चुनावी पहचान पत्र बनेंगे।

    दिलचस्प बात यह है कि आज के दौर में युवा पीढ़ी और 'जेन-जी' के बीच बेहद लोकप्रिय रहने वाले लैपटॉप, स्मार्टफोन, टैबलेट या स्कूटी जैसे आधुनिक गैजेट्स को चुनाव चिह्नों की सूची में शामिल नहीं किया गया है।

    राष्ट्रीय-राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों के लिए आरक्षित सिंबल
    राज्य निर्वाचन आयोग की सूची के अनुसार, मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के लिए उनके पारंपरिक चुनाव चिह्नों को सुरक्षित रखा गया है। 6 राष्ट्रीय स्तर के दलों के लिए उनके चिह्न आरक्षित हैं-
    भारतीय जनता पार्टी (BJP): कमल

    भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC): हाथ का पंजा

    बहुजन समाज पार्टी (BSP): हाथी

    कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया – मार्क्सवादी (CPI-M): हथौड़ा, हसिया और सितारा

    आम आदमी पार्टी (AAP): झाड़ू

    नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP): किताब

    इसके अलावा, राजस्थान के राज्य स्तरीय मान्यता प्राप्त दलों में शामिल राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) का बोतल और भारत आदिवासी पार्टी (BAP) का तीर-कमान का चिह्न भी सुरक्षित श्रेणी में रखा गया है।

    नगर पालिका अध्यक्ष पद के निर्दलियों के लिए 40 प्रतीक
    नगर पालिका अध्यक्ष (चेयरमैन) पद पर स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के लिए 40 मुक्त चिह्नों की अलग सूची तय की गई है। इस सूची में मुख्य रूप से घरेलू उपयोग और पुरानी जीवनशैली से जुड़ी वस्तुओं को शामिल किया गया है

    पढ़ाई और पत्राचार: स्लेट, पेंसिल और लैटर बॉक्स (डाक पेटी)।

    रसोई व घरेलू सामान: चाय की केतली, चिमटा, मूसल व खरल, भारी-भरकम पुराना प्रेस और छड़ी।

    अन्य वस्तुएं: करणी (राजमिस्त्री का औजार) व अन्य पारंपरिक उपकरण।

    वार्ड पार्षद प्रत्याशियों के लिए चक्की, चारपाई और फ्रॉक
    नगरीय निकायों के विभिन्न वार्डों से पर्चा भरने वाले निर्दलीय प्रत्याशियों के लिए 40 अलग मुक्त प्रतीक जारी किए गए हैं। इन चिह्नों को मतदाता आसानी से पहचान सकें, इसके लिए दैनिक जीवन की परिचित चीजों को चुना गया है।

    घरेलू और पुरानी वस्तुएं: हाथ से चलाने वाली आटा चक्की, चारपाई, सिलाई मशीन, पुराना टेलीफोन, जंजीर, आरी और बक्सा।

    सब्जियां व फल: फूलगोभी, अंगूर और हरी मिर्च।

    वाहन व उपकरण: पाल युक्त नौका (नाव), हाथ गाड़ी, ईंट, फव्वारा और साइकिल पंप।

    पहनावा व स्टेशनरी: फ्रॉक, पेंसिल बॉक्स और बांसुरी व हारमोनियम जैसे संगीत वाद्य यंत्र।

    चुनावी अपडेट्स और आधिकारिक जानकारियां
    निकाय चुनाव से जुड़ी सटीक जानकारियों, मतदाता सूचियों और चुनाव कार्यक्रमों के लिए राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग के पोर्टल का उपयोग करें।

  • एक साल से बंद जर्जर कमरे की छत ढही, डूंगरपुर स्कूल में मचा हड़कंप

    एक साल से बंद जर्जर कमरे की छत ढही, डूंगरपुर स्कूल में मचा हड़कंप

    डूंगरपुर
    डूंगरपुर के दोवड़ा ब्लॉक स्थित ग्राम पंचायत सत्तु देवकी के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। रोजाना की तरह स्कूल में कक्षाएं संचालित हो रही थीं और लगभग 120 बच्चे अपने-अपने कमरों में बैठकर पढ़ाई कर रहे थे

    बता दें कि इसी दौरान स्कूल परिसर में लंबे समय से बंद पड़े एक जर्जर कमरे की छत अचानक तेज आवाज के साथ भरभराकर गिर गई। छत ढहने की आवाज सुनते ही पूरे स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई, जिसके बाद शिक्षक और विद्यार्थी घबराकर तुरंत अपने-अपने कमरों से बाहर निकल आए।

    एक साल से बंद था जर्जर कमरा
    जिस कमरे की छत गिरी, वह पिछले एक साल से बेहद जर्जर हालत में था। स्कूल प्रशासन ने कमरे को पहले ही असुरक्षित घोषित कर दिया गया था और उसमें बच्चों की कक्षाएं लगाना पूरी तरह बंद था। यदि बच्चों को उस कमरे में बैठाया गया होता, तो हादसा हो सकता था। इस सावधानी की वजह से 120 विद्यार्थियों और शिक्षकों की जान बाल-बाल बच गई और कोई भी चोटिल नहीं हुआ।

    10 में से 2 कमरे हैं जर्जर
    स्कूल प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार, विद्यालय भवन में कुल 10 कमरे हैं। इनमें से 2 कमरे काफी समय से पुराने और जर्जर हो चुके थे। सुरक्षा के दृष्टिकोण से इन दोनों ही कमरों का इस्तेमाल पूरी तरह रोक दिया गया था। इन्हीं 2 जर्जर कमरों में से एक की पूरी छत अचानक ढह गई। घटना के तुरंत बाद विद्यालय के शिक्षकों ने पूरे मामले की सूचना पंचायत प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी पंकज वर्मा को दी।

    अधिकारियों ने लिया जायजा, जल्द मरम्मत का दिया आश्वासन
    सूचना मिलते ही PEEO पंकज वर्मा और मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी दीपक शाह तुरंत मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने दुर्घटनाग्रस्त कमरे तथा दूसरे जर्जर कमरे का गहन निरीक्षण किया। CBEO दीपक शाह ने बताया, दूसरे जर्जर कमरे की स्थिति को देखते हुए नई छत डालने और मरम्मत कार्य करवाने का प्रस्ताव उच्च अधिकारियों को भेजा जा चुका है। स्वीकृति मिलते ही निर्माण व मरम्मत का कार्य प्राथमिकता से शुरू करवाया जाएगा।

  • गहलोत सरकार का 2019 का नियम अब भी लागू, पार्षद बने बिना मेयर-अध्यक्ष बनने का मौका

    गहलोत सरकार का 2019 का नियम अब भी लागू, पार्षद बने बिना मेयर-अध्यक्ष बनने का मौका

    जयपुर
    राजस्थान में आगामी नगर निकाय चुनावों की सुगबुगाहट तेज होते ही राजनीतिक गलियारों में टिकट पाने और समीकरण साधने की होड़ मच गई है। निकाय चुनावों में राजनीतिक दलों की नजरें केवल पार्षदों के टिकटों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि चुनाव के बाद बनने वाले महापौर, सभापति और अध्यक्ष के पदों पर भी टिकी हुई हैं। सबसे दिलचस्प बात यह है कि राजस्थान में इन शीर्ष पदों पर बैठने के लिए उम्मीदवार का खुद निर्वाचित पार्षद होना कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं है। यानी राजनीतिक पार्टियां किसी ऐसे प्रभावशाली चेहरे को भी सीधे मेयर या निकाय अध्यक्ष बना सकती हैं, जिसने पार्षद का चुनाव तक नहीं लड़ा हो।

    इस खास कानूनी प्रावधान के कारण प्रदेश के ऐसे कई बड़े नेताओं की उम्मीदें जाग गई हैं, जो हालिया विधानसभा या लोकसभा चुनावों में हार का सामना कर चुके हैं, लेकिन अपने-अपने जिलों और शहरों में मजबूत जनाधार और सामाजिक पकड़ रखते हैं।

    2019 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने बदला था नियम
    वर्ष 2019 में तत्कालीन अशोक गहलोत नीत कांग्रेस सरकार ने राजस्थान नगरपालिका (निर्वाचन) नियमों में संशोधन किया था। इस संशोधन के तहत निकाय अध्यक्ष या महापौर पद के प्रत्याशी के लिए निर्वाचित पार्षद होने की बाध्यता को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया था।

    नियमों के अनुसार, कोई भी व्यक्ति जो पार्षद का चुनाव लड़ने की निर्धारित योग्यताएं (जैसे न्यूनतम आयु, शैक्षणिक योग्यताएं और अन्य कानूनी मापदंड) पूरी करता है, वह सीधे मेयर या अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ सकता है। हालांकि, उस गैर-पार्षद प्रत्याशी का चुनाव सदन में जीतकर आए निर्वाचित पार्षद ही मतदान के जरिए करेंगे।

    भाजपा ने किया था विरोध, लेकिन सत्ता में आने के बाद रखा कायम
    जब 2019 में कांग्रेस सरकार ने इस 'बाहरी चेहरे' या गैर-पार्षद को अध्यक्ष बनाने वाले विकल्प का प्रावधान लागू किया था, तब भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने विपक्ष में रहते हुए इसका जमकर विरोध किया था। लेकिन 2023 में राज्य में भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में भाजपा सरकार बनने के बाद भी इस नियम को समाप्त या निरस्त नहीं किया गया

    वर्तमान में यह प्रावधान यथावत लागू है, जिससे रणनीतिक तौर पर दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों (कांग्रेस और भाजपा) के पास चुनाव नतीजों के बाद अपने-अपने पसंदीदा या बड़े नेताओं को शीर्ष पद पर बैठाने का विकल्प खुला हुआ है।

    नेताओं की राजनीतिक वापसी साधने का जरिया
    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह नियम जयपुर, जोधपुर, कोटा जैसे बड़े शहरों में राजनीतिक दलों को काफी सहूलियत देता है। कई बार पार्षदों के चुनाव के दौरान स्थानीय गुटबाजी या भितरघात के कारण पार्टी के बड़े नेता पार्षद का टिकट लेने से हिचकिचाते हैं या हार जाते हैं।

    ऐसी स्थिति में, चुनाव परिणाम आने के बाद अगर किसी पार्टी को बहुमत मिलता है, तो वह किसी वरिष्ठ नेता या क्षेत्रीय-जातिगत समीकरण में सटीक बैठने वाले 'बाहरी चेहरे' को सीधे महापौर के पद पर प्रत्याशी बनाकर चुनाव जिता सकती है। इससे विधानसभा और लोकसभा चुनाव हार चुके नेताओं के लिए स्थानीय राजनीति के जरिए पुनर्वापसी करने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।

  • 25 महिला पुलिसकर्मियों का कमांडो मिशन शुरू, मानेसर में 12 हफ्ते की कड़ी ट्रेनिंग

    25 महिला पुलिसकर्मियों का कमांडो मिशन शुरू, मानेसर में 12 हफ्ते की कड़ी ट्रेनिंग

    जयपुर
    राजस्थान पुलिस के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है, जहां प्रदेश की बेटियां अब आतंकवाद और आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए स्पेशल 'ब्लैक कैट' कमांडो का रूप धारण करेंगी। राजस्थान पुलिस के आरएसी एवं एमबीसी कैडर से चयनित 25 महिला पुलिस कार्मिकों को राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) के मानेसर हरियाणा स्थित प्रशिक्षण केंद्र में 12 सप्ताह के अति-कठिन और गहन कमांडो प्रशिक्षण के लिए भेजा गया है। 24 अगस्त से शुरू हो रहा ये यह विशेष प्रशिक्षण 13 नवंबर तक संचालित होगा। इस दौरान महिला कार्मिकों को अत्याधुनिक हथियार तकनीक, अर्बन काउंटर टेररिज्म, काउंटर-आईईडी और जीरो एरर की रणनीति पर तैयार किया जाएगा।

    राजधानी जयपुर स्थित पांचवीं बटालियन आरएसी (घाटगेट) में आयोजित विदाई समारोह के दौरान सभी चयनित महिला जवानों का उत्साह चरम पर दिखा। इस ऐतिहासिक ट्रेनिंग सेशन के लिए रवाना होने से पहले वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने महिला जवानों का हौसला बढ़ाया और उन्हें इस कठिन चुनौती को सफलतापूर्वक पार करने का मंत्र दिया।

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    जीरो एरर की नीति और कड़ा अनुशासन : ADG रूपेंद्र सिंह
    महिला कार्मिकों को मानेसर के लिए हरी झंडी दिखाकर रवाना करने से पूर्व अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (आर्म्स बटालियन्स, राजस्थान) रूपेंद्र सिंह ने जवानों को विस्तृत रूप से ब्रीफ किया। एडीजी सिंह ने एनएसजी कमांडो प्रशिक्षण की राष्ट्रीय महत्ता पर प्रकाश डालते हुए महिला जवानों को प्रेरित किया।

    उन्होंने कहा, 'कमांडो प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य जवानों को ऐसी अद्वितीय दक्षता और क्षमता प्रदान करना है, जिससे वे किसी भी प्रकार की चुनौतीपूर्ण या विषम परिस्थितियों में आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए पूरी क्षमता और आत्मविश्वास के साथ कार्य कर सकें।'

    उन्होंने कहा, 'एनएसजी का मूल मंत्र 'सर्वत्र सर्वोत्तम सुरक्षा' है और आपको प्रशिक्षण के दौरान कड़े अनुशासन, अत्याधुनिक हथियार तकनीक और जीरो एरर की नीति को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी है।'

    जयपुर से मानेसर के लिए रवाना
    समारोह के बाद एडीजी रूपेंद्र सिंह ने सभी 25 महिला पुलिसकर्मियों को विशेष राजकीय वाहन से मानेसर स्थित राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड प्रशिक्षण केंद्र के लिए रवाना किया। इस अवसर पर उप महानिरीक्षक पुलिस (आरएसी) विनीत बंसल, चतुर्थ बटालियन एवं पांचवीं बटालियन आरएसी के कमांडेंट सहित पुलिस विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

    12 सप्ताह की इस स्पेशल ट्रेनिंग को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद ये महिला कार्मिक राजस्थान पुलिस की पहली समर्पित महिला कमांडो यूनिट का हिस्सा बनेंगी, जिन्हें राज्य में वीआईपी सुरक्षा, एंटी-टेरर ऑपरेशन्स और आपातकालीन रेस्क्यू ऑपरेशन्स में तैनात किया जाएगा।

  • जोजरी प्रदूषण मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, नदी किनारे विकास गतिविधियों पर रोक

    जोजरी प्रदूषण मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, नदी किनारे विकास गतिविधियों पर रोक

     जयपुर
    राजस्थान में जल संकट और नदियों में बढ़ते औद्योगिक प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। सोमवार को जोजरी नदी प्रदूषण से जुड़े एक स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने नदी के किनारों के संरक्षण के लिए अंतरिम आदेश जारी किया। जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने जोजरी नदी के किनारे से 100 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार के निर्माण या विकास गतिविधियों पर पूरी तरह से रोक लगा दी है।

    इसके अलावा कोर्ट ने पर्यावरण की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए निर्देश दिया है कि नदी के मौजूदा प्रवाह पथ या चिन्हित फ्लड लाइन के दोनों ओर 500 मीटर के दायरे में कोई भी खतरनाक, प्रदूषण फैलाने वाली या नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचाने वाली औद्योगिक गतिविधि संचालित करने की अनुमति नहीं होगी। यह प्रतिबंध तब तक प्रभावी रहेगा, जब तक कि हाई फ्लड लाइन और आवश्यक पारिस्थितिक बफर जोन के निर्धारण के लिए चल रही वैज्ञानिक प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती।

    पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के लिए अंतरिम उपाय
    सुप्रीम कोर्ट ने नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को हुए नुकसान पर गहरी चिंता व्यक्त की। पीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जब तक हाई फ्लड लाइन (उच्च बाढ़ रेखा) और बफर जोन का वैज्ञानिक सीमांकन पूरा नहीं हो जाता, तब तक नदी के अस्तित्व को बचाने के लिए एक निश्चित और मापने योग्य अंतरिम सुरक्षा क्षेत्र लागू करना अनिवार्य हो गया था।

    कोर्ट ने उल्लेख किया कि जोजरी नदी में प्रदूषण का स्तर अत्यधिक चिंताजनक स्थिति तक पहुंच चुका है, जिसके कारण राज्य के इस जल-अभाव वाले क्षेत्र में रहने वाली लगभग 20 लाख की आबादी प्रभावित हो रही है। अदालत इस मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को करेगी, जिसमें आगे की रिपोर्ट और निर्देशों पर विचार किया जाएगा।

    प्रदूषण से प्रभावित प्रमुख नदियां और क्षेत्र
    राजस्थान के पश्चिमी हिस्से में नदियों के प्रदूषण का मुद्दा काफी समय से संवेदनशील बना हुआ है। जोजरी नदी मुख्य रूप से जोधपुर जिले से होकर गुजरती है, जबकि बांडी नदी पाली जिले से और लूणी नदी बालोतरा से होकर बहती है। बांडी और जोजरी नदियां आगे चलकर बालोतरा शहर के पास लूणी नदी में मिल जाती हैं।

    कपड़ा छपाई, रंगाई और अन्य औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले अंनट्रीटेड जहरीले पानी ने इन मौसमी नदियों के पानी और आसपास के भूजल को प्रदूषित कर दिया है। इससे न केवल पीने के पानी का संकट पैदा हुआ है, बल्कि कृषि भूमि भी बंजर हो रही है।

    राज्य सरकार को 20 सूत्रीय कार्य योजना बनाने के निर्देश
    इससे पहले 4 अगस्त को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को जोजरी, बांडी और लूणी नदियों में जारी प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए 20 सूत्रीय संकल्प योजना तैयार करने का सुझाव दिया था। कोर्ट ने विशेष रूप से पाली शहर का जिक्र करते हुए कहा था कि वहां का पूरा औद्योगिक क्षेत्र नदी के किनारे स्थित है। दीर्घकालिक समाधान के रूप में राज्य अधिकारियों को इन उद्योगों को नदी से दूर किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने पर विचार करना होगा।

    इसके साथ ही 7 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक हफ्ते के भीतर 'एकीकृत समन्वय समूह' का गठन करे। यह समूह तीनों नदियों के प्रदूषण को नियंत्रित करने और अदालत के आदेशों को धरातल पर लागू करने की जिम्मेदारी संभालेगा। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से राजस्थान के औद्योगिक क्षेत्रों में हलचल तेज हो गई है। वहीं, पर्यावरणविदों और स्थानीय निवासियों ने इसे नदियों को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना है।