Category: पंजाब

  • भारत आने वाले 104 सिख श्रद्धालुओं की मुश्किल बढ़ी, पाकिस्तान एयरपोर्ट पर रोका; NOC को लेकर अटके यात्री

    भारत आने वाले 104 सिख श्रद्धालुओं की मुश्किल बढ़ी, पाकिस्तान एयरपोर्ट पर रोका; NOC को लेकर अटके यात्री

    अमृतसर
     पाकिस्तान में मौजूद सिख श्रद्धालुओं के साथ एक बार फिर अजीबोगरीब व्यवहार का मामला सामने आया है। भारत स्थित ऐतिहासिक गुरुधामों के दर्शन के लिए आ रहे 104 पाकिस्तानी सिख श्रद्धालुओं के एक जत्थे को फैसलाबाद एयरपोर्ट पर पिछले 12 घंटे से अधिक समय से रोककर रखा गया है। भारत के इस्लामाबाद स्थित उच्चायोग द्वारा वैध वीजा जारी किए जाने के बावजूद, पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) के इमीग्रेशन अधिकारियों ने श्रद्धालुओं को फ्लाइट में सवार होने से रोक दिया।

    वाघा बॉर्डर से रोका तो खरीदी महंगी हवाई टिकटें
    श्रद्धालुओं के अनुसार, वे शुरुआत में वाघा-अटारी जमीनी सीमा के रास्ते भारत जाने की योजना बना रहे थे, लेकिन पाकिस्तानी अधिकारियों ने उन्हें सड़क मार्ग से जाने की अनुमति नहीं दी। इसके बाद मजबूर होकर उन्होंने भारी-भरकम खर्च उठाकर हवाई यात्रा का विकल्प चुना और महंगी फ्लाइट टिकटें बुक कराईं। समय पर फैसलाबाद एयरपोर्ट पहुंचने के बाद इमीग्रेशन अफसरों ने यह कहकर अड़ंगा लगा दिया कि उनके पास पाकिस्तान सरकार, गृह विभाग और विदेश विभाग की विशेष एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) नहीं है।

    पूरी रात एयरपोर्ट पर बैठकर गुरुवाणी पाठ करते रहे श्रद्धालु
    इमीग्रेशन क्लीयरेंस न मिलने के कारण यात्रियों को रात 10 बजे से लेकर अगली सुबह तक एयरपोर्ट लाउंज में ही जागते हुए काटना पड़ा। अधिकारियों के इस अप्रत्याशित रवैये से आहत होकर श्रद्धालु वहीं फर्श पर बैठकर कीर्तन और गुरुवाणी का पाठ करने लगे। श्रद्धालुओं ने आक्रोश जताते हुए कहा कि अगर कोई अतिरिक्त एनओसी अनिवार्य थी, तो उन्हें टिकट बुकिंग के समय क्यों नहीं बताया गया? अचानक फ्लाइट छूटने से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ा है।

    हाथ में वीजा थामे युवाओं ने पूछा- धार्मिक यात्रा पर यह राजनीति क्यों?
    एयरपोर्ट पर फंसे एक सिख युवक ने कैमरे के सामने अपना भारतीय वीजा दिखाते हुए पाकिस्तानी तंत्र पर तीखे सवाल खड़े किए। उसने कहा कि जब दोनों देशों के नियमों के तहत वीजा जारी हो चुका है, तो ऐन वक्त पर एनओसी का नया नियम थोपना सीधे-सीधे परेशान करने की मंशा को दर्शाता है। श्रद्धालुओं ने अपील की कि दोनों देशों के राजनीतिक मतभेदों से धार्मिक यात्राओं और आस्था को पूरी तरह अलग रखा जाना चाहिए।

    गोल्डन टेंपल और हेमकुंड साहिब दर्शन का था कार्यक्रम
    इस 104 सदस्यीय जत्थे का मुख्य उद्देश्य अमृतसर स्थित सचखंड श्री हरमंदिर साहिब (गोल्डन टेंपल), उत्तराखंड स्थित श्री हेमकुंड साहिब, दिल्ली के ऐतिहासिक गुरुद्वारों और पंजाब के प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन करना था। कई महीनों की तैयारी और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद ऐन मौके पर इस तरह रोके जाने से सिख समुदाय में गहरा रोष व्याप्त है।

    श्री अकाल तख्त और एसजीपीसी से दखल की गुहार
    परेशानी में घिरे श्रद्धालुओं ने भारत के शीर्ष सिख नेतृत्व से तत्काल दखल देने की अपील की है। उन्होंने श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी और दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (DSGMC) के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका से आग्रह किया है कि वे इस गंभीर मामले को उच्च स्तर पर उठाएं ताकि पाकिस्तानी अधिकारियों की मनमानी खत्म हो सके और जत्था भारत पहुंच सके।

  • ड्रग्स तस्करी पर पुलिस का बड़ा शिकंजा, फरीदकोट में 12 किलो से अधिक हेरोइन जब्त; 2 गिरफ्तार

    ड्रग्स तस्करी पर पुलिस का बड़ा शिकंजा, फरीदकोट में 12 किलो से अधिक हेरोइन जब्त; 2 गिरफ्तार

    फरीदकोट 

    फरीदकोट में सीआईए स्टाफ ने नशा तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 12 किलो 221 ग्राम हेरोइन के साथ बाइक सवार दो युवकों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान गांव करमूंवाला, जिला तरनतारन निवासी सुदागर सिंह उर्फ घुल्ला और कवलजीत खान उर्फ कम्मू के रूप में हुई है। दोनों के खिलाफ थाना सदर फरीदकोट में एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। 

    गांव चंदबाजा के पास पुलिस ने की थी नाकाबंदी
    पुलिस के अनुसार, एसएसपी गुरबंस सिंह बैंस के दिशा-निर्देशों पर सीआईए स्टाफ प्रभारी एसआई हाकम सिंह के नेतृत्व में पुलिस पार्टी ने गरुवार रात अमृतसर-बठिंडा नेशनल हाईवे-54 पर गांव चंदबाजा के पास नाकाबंदी की हुई थी।  

    इस दौरान तलवंडी की तरफ से तेज रफ्तार बाइक पर आए दोनों युवकों ने पुलिस को देखकर बाइक पीछे मोड़कर भागने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें काबू कर लिया। तलाशी के दौरान कवलजीत खान के कंधे पर लटके किट बैग से छह पैकेट हेरोइन बरामद हुई। मौके पर पहुंचे डीएसपी (डी) अवतार सिंह राजपाल की निगरानी में कार्रवाई की गई। पुलिस ने हेरोइन और बाइक कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। 

  • पंजाब में कांग्रेस के सामने फिर वही पुरानी चुनौती, गुटबाजी के बीच नेतृत्व बदलाव की मांग; क्या दोहराएगा इतिहास?

    पंजाब में कांग्रेस के सामने फिर वही पुरानी चुनौती, गुटबाजी के बीच नेतृत्व बदलाव की मांग; क्या दोहराएगा इतिहास?

    चंडीगढ़ 
    पंजाब की सियासत में कांग्रेस एक बार फिर उसी दोराहे पर खड़ी दिख रही है, जहां वह 2022 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले खड़ी थी. कांग्रेस ने पांच साल पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटाकर चरणजीत सिंह चन्नी को सत्ता की कमान सौंपी थी, लेकिन नवजोत सिंह सिद्ध की नाराजगी दूर नहीं हो सकी और कांग्रेस को सत्ता गंवानी पड़ गई थी. अब कांग्रेस ने 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठन में बदलाव शुरू। 

    कांग्रेस में नेतृत्व के टकराव के मुद्दे को सुलझाने के नाम पर पार्टी आलाकमान फैसले ले रहा है. भूपेश बघेल को हटाकर पार्टी ने सचिन पायलट को पंजाब का प्रभारी बना दिया है. इसके बाद भी चन्नी खेमा राजा वडिंग को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने की मांग कर रहा है। 

    पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के बीच कांग्रेस के सामने सियासी संकट खड़ा हो गया है. इस समय जहां चुनाव की तैयारी में राजनीतिक दल जुटे हैं, तो कांग्रेस अभी संगठन में ही उलझी है. कांग्रेस प्रभारी के बाद प्रदेश अध्यक्ष बदलती है तो मामला सुलझने से ज्यादा कहीं उलझ न जाए और फिर से उसे कहीं 'चेकमेट' का सामना न करना पड़ जाए?

    पांच साल पहले वाली गलती दोहरा रही कांग्रेस
    पंजाब में कांग्रेस एक बार फिर उसी मुकाम पर खड़ी है, जिसने 2021 में पार्टी को गहरे राजनीतिक संकट में डाल दिया था. उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच चली लंबी खींचतान ने कांग्रेस को कमजोर कर दिया था. पार्टी नेतृत्व ने संगठन में अचानक बदलाव किए थे. मुख्यमंत्री से लेकर प्रदेश अध्यक्ष तक बदल दिए थे, लेकिन नतीजा यह हुआ कि पार्टी पूरी तरह बिखर और आम आदमी पार्टी (AAP) ने प्रचंड बहुमत हासिल कर कांग्रेस का किला ढहा दिया। 

    2022 में कांग्रेस को करारी मात खानी पड़ी थी. अब फिर कुछ वैसे ही हालत नजर आ रहे हैं. इस बार पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है. साल 2021 में कांग्रेस ने इसी तरह की गुटबाजी को खत्म करने के लिए बदलाव किया था. अब फिर से कांग्रेस बदलाव कर मामले को सुलझाने की कवायद शुरू की है, जिसमें भूपेश बघेल को हटाकर सचिन पायलट को प्रभारी बनाया है। 

    चुनावी माहौल में बदलाव महंगा न पड़ जाए
    कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष को लेकर भी बदलने की चर्चा है, लेकिन यह बदलाव 2021 की तरह महंगा न पड़ जाए. पंजाब विधानसभा चुनाव को अब छह महीने से भी कम समय है. कांग्रेस हाईकमान ने करीब दो महीने के सियासी मंथन के बाद और राहुल गांधी ने पंजाब के एक-एक नेता से दिल्ली में बैठक कर फीडबैक लिया. इसके बाद एक जुलाई को राजा वडिंग को प्रदेश अध्यक्ष और चरणजीत सिंह चन्नी को कैंपेन कमेटी का चेयरमैन नियुक्त किया. इसके बाद से चन्नी गुट ने वड़िंग को हटाने की मांग उठा दी, जो सियासी टेंशन का सबब बना हुआ। 

    बता दें कि पंजाब के 2022 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को सिर्फ 18 सीटें मिली थी, जो राज्य में पार्टी का अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन रहा था. आम आदमी पार्टी ने 92 सीटों के साथ शानदार जीत हासिल कर सरकार बनाई थी। 2022 के बाद कांग्रेस में कोई नेता प्रदेश अध्यक्ष की कमान लेने को तैयार नहीं था. ऐसे में राहुल गांधी ने राजा वडिंग को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया था। 

    राजा वडिंग ने पंजाब में सिर्फ संगठन की बागडोर ही नहीं संभाली बल्कि 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को राज्य की 13 में से 7 लोकसभा सीटें जिताकर अपना लोहा भी मनवाया था, जबकि चरणजीत चन्नी 2022 के चुनाव हार के बाद पंजाब छोड़कर विदेश चले गए थे और रंधावा राजस्थान का प्रभार संभाल रहे थे. ऐसे में राजा वडिंग ने काफी मशक्कत कर कांग्रेस को खड़ा किया, लेकिन 2027 चुनाव की सियासी सरगर्मी बढ़ने के साथ ही चन्नी ने प्रदेश अध्यक्ष बदलने का मोर्चा खोल दिया है। 

    चन्नी समर्थक विधानसभा चुनाव से पहले उन्हें मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित करने और वडिंग को हटाने की मांग को लेकर पार्टी नेतृत्व पर दबाव बना रहे हैं. ऐसे में प्रभारी रहे भूपेश बघेल गुटबाजी को दूर करने में नाकाम रहे और विवाद इतना बढ़ा कि पार्टी आलाकमान को सचिन पायलट को नया प्रभारी नियुक्त करना पड़ा. इसके बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष को बदलने की चर्चा चल रही है, लेकिन चुनाव से ठीक पहले बिहार में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष को बदलकर अपना हश्र देख चुकी है. ऐसे में क्या पंजाब में जोखिम भरा कदम उठाएगी?

    पंजाब की सत्ता में वापसी पर कहीं न लग जाए ग्रहण
    पंजाब की सियासत का इतिहास गवाह है कि जब-जब कांग्रेस ने विधानसभा चुनावों से ठीक पहले शीर्ष नेतृत्व और प्रदेश अध्यक्ष के चेहरे पर अनिश्चितता पैदा की है, तब-तब उसे भारी नुकसान उठाना पड़ा है. चन्नी खेमे की मांग है कि राज्य में दलित वोटों और समीकरणों को ध्यान में रखते हुए नेतृत्व में बदलाव किया जाए या चन्नी को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जाए। 

    वहीं, कांग्रेस हाईकमान के सामने जाट सिख और दलित नेतृत्व के बीच संतुलन साधने की बड़ी चुनौती बनी हुई है. पिछले 2022 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने जाट सिख की जगह चन्नी को आगे कर दलित दांव खेला था, लेकिन सफल नहीं रहा. कांग्रेस का परंपरागत मतदाता जाट सिख नाराज होकर आम आदमी पार्टी के साथ चला गया. चन्नी अपने दलित समुदाय को भी साधकर नहीं रख सके। 

    पंजाब में जाट सिख और दलित केमिस्ट्री में उलझी
    पंजाब में जाट सिख का दांव हमेंशा सफल रहा है. आजादी के बाद से पंजाब में जब-जब कांग्रेस ने जाट सिख चेहरे को आगे कर चुनाव लड़ा, पार्टी को पूर्ण बहुमत के साथ बड़ी सफलता मिली. 2002 और 2017 के विधानसभा चुनावों में जाट सिख नेतृत्व ने मालवा, माझा और दोआबा के ग्रामीण क्षेत्रों में कांग्रेस का आधार मजबूत किया। 

    पंजाब की ग्रामीण आबादी, कृषि अर्थव्यवस्था और किसान-समर्थित वोट बैंक में जाट सिख समुदाय का दबदबा माना जाता है. इस वर्ग से चेहरा आगे करने पर अकाली दल और आम आदमी पार्टी के पारंपरिक ग्रामीण वोट बैंक में सेंध लगाना आसान रहता है। 

    2022 में पार्टी ने चुनावों से ठीक पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटाकर चरणजीत सिंह चन्नी (जो रामदासिया दलित सिख समुदाय से आते हैं) को मुख्यमंत्री बनाया था, इसके बाद भी दलित समाज का वोट कांग्रेस को नहीं मिल सका। 

    पंजाब में लगभग 32 फीसदी दलित आबादी होने के बावजूद यह प्रयोग चुनावी जीत में नहीं बदल सका. कांग्रेस को 2022 में अब तक की सबसे बड़ी हार का सामना करना पड़ा और पार्टी केवल 18 सीटों पर सिमट गई. ग्रामीण जाट सिख वोटों का एक बड़ा हिस्सा आम आदमी पार्टी (भगवंत मान – जाट सिख चेहरा) की तरफ शिफ्ट हो गया. ऐसे में कांग्रेस ने जाट सिख चेहरे के तौर पर अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को आगे किया। इसका नतीजा 2024 के लोकसभा चुनाव में दिखा, जब कांग्रेस 7 सीटें जीतने में सफल रही। 

    2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के अंदर जारी खींचतान के पीछे यही बहस है कि क्या कांग्रेस को अपने कोर जाट सिख फॉर्मूले पर ही कायम रहना चाहिए या दलित नेतृत्व को दोबारा बड़ी जिम्मेदारी देकर नया सामाजिक समीकरण तैयार करना चाहिए. सचिन पायलट के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वे बिना कोई बड़ा नुकसान किए सभी धड़ों को एक मंच पर लाएं, वरना इतिहास खुद को दोहराने में देर नहीं लगााएगा। 

  • चंडीगढ़ के 111 सरकारी स्कूलों में डिजिटल अटेंडेंस, छात्र गैरहाजिर तो अभिभावकों को तुरंत मिलेगा मैसेज

    चंडीगढ़ के 111 सरकारी स्कूलों में डिजिटल अटेंडेंस, छात्र गैरहाजिर तो अभिभावकों को तुरंत मिलेगा मैसेज

    चडीगढ़.

    घर से निकलकर स्कूल न जाने के बजाय पार्कों या मार्केट्स में घूमना अब आसान नहीं होगा। स्कूल बंक करते ही तुरंत अभिभावकों के पास मैसेज पहुंच जाएगा। स्कूल शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों की अटेंडेंस को स्कूल मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम (एसएमआईएस) से जोड़ दिया है।

    यह व्यवस्था 111 सरकारी स्कूलों के करीब 1.70 लाख छात्रों के लिए लागू की गई है। अब कोई विद्यार्थी सुबह गैरहाजिर पाया जाता है तो माता-पिता के मोबाइल नंबर पर टेक्स्ट मैसेज भेजा जाएगा। स्कूल शुरू होने के करीब एक घंटे के अंदर अभिभावकों को पता चल जाएगा कि उनका बच्चा स्कूल पहुंचा है या नहीं। स्कूल शिक्षा विभाग के डायरेक्टर नितिश सिंगला का कहना है कि नई व्यवस्था से स्कूल बंक करने वाले विद्यार्थियों पर नजर रखने के साथ-साथ माता-पिता और शिक्षकों के बीच बेहतर तालमेल बनाने में मदद मिलेगी। कई बार विद्यार्थी स्कूल पहुंचने से पहले ही पार्कों या मार्केट में चले जाते हैं। कुछ स्कूल के समय बाहर बैठकर मस्ती करते हैं और क्लास छोड़ देते हैं। माता-पिता को अकसर यह पता नहीं चलता था कि उनका बच्चा स्कूल पहुंचा है या नहीं। स्कूल की ओर से भी गैरहाजिर छात्र की जानकारी तुरंत माता-पिता तक नहीं पहुंच पाती थी। अब नई व्यवस्था के जरिए इस समस्या को दूर करने की कोशिश की गई है।

    स्कूल मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम को छात्रों की अटेंडेंस से जोड़ा गया है। दाखिले के समय स्कूल रिकॉर्ड में दर्ज माता-पिता के मोबाइल नंबर पर टेक्स्ट मैसेज भेजकर बताया जाएगा कि छात्र स्कूल में मौजूद नहीं है। इससे छात्रों की गतिविधियों पर नजर रखना आसान होगा। नई व्यवस्था के तहत छात्रों को सुबह की प्रार्थना सभा के बाद अटेंडेंस के समय क्लास में मौजूद रहना होगा। छात्र स्कूल समय के दौरान बाहर जाना चाहता है तो माता-पिता की अनुमति जरूरी होगी। बिना अनुमति गेट पार नहीं करने दिया जाएगा। इसका मकसद स्कूल के समय छात्रों की गतिविधियों पर नजर रखना और सुरक्षा सुनिश्चित करना है।  इस तरह की अटेंडेंस व्यवस्था ज्यादातर निजी स्कूलों में पहले से लागू थी। अब स्कूल शिक्षा विभाग ने इसे सरकारी स्कूलों में भी शुरू कर दिया है। 

  • पंजाब-हरियाणा विधानसभा को बम धमाके की धमकी, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट; परिसर में तलाशी

    पंजाब-हरियाणा विधानसभा को बम धमाके की धमकी, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट; परिसर में तलाशी

    चंडीगढ़.

    चंडीगढ़ स्थित पंजाब एवं हरियाणा विधानसभा भवन को बम से उड़ाने की धमकी वाला ई-मेल मिलने से वीरवार को सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही पुलिस टीम के साथ ऑपरेशन सेल, बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वायड को मौके पर भेजा गया।

    टीमों ने विधानसभा परिसर में तलाशी अभियान चलाया। धमकी वाला ई-मेल मिलने के बाद सुरक्षा व्यवस्था को तत्काल अलर्ट किया गया। बम निरोधक दस्ते और डॉग स्क्वायड ने परिसर के अलग-अलग हिस्सों की जांच की। आसपास के एरिया में हाईअलर्ट जारी किया है।

    पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां ई-मेल के स्रोत और उसे भेजने वाले की पहचान का पता लगाने में जुटी हैं। सूचना मिलते ही पुलिस टीम के अलावा ऑपरेशन सेल की टीम मौके पर पहुंची। बम निरोधक दस्ते ने संदिग्ध वस्तुओं की जांच की, जबकि डॉग स्क्वायड की मदद से परिसर में तलाशी ली गई। पुलिस साइबर स्तर पर भी ई-मेल की जांच कर रही है। धमकी भेजने वाले की पहचान और ई-मेल के स्रोत का पता लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है।

  • सफाई को लेकर बठिंडा में बड़ा कदम, हर हफ्ते 100 KM क्षेत्र की होगी मशीनों से सफाई

    सफाई को लेकर बठिंडा में बड़ा कदम, हर हफ्ते 100 KM क्षेत्र की होगी मशीनों से सफाई

    बठिंडा.

    शहर की सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए नगर निगम की ओर से शुरू किए गए मैकेनिकल स्वीपिंग (डीप क्लीनिंग) प्रोजेक्ट का स्थानीय निकाय विभाग के सचिव घनश्याम थोरी ने जायजा लिया।

    उन्होंने शहर में चल रही मैकेनिकल स्वीपिंग की कार्यप्रणाली का निरीक्षण किया और अधिकारियों को सफाई व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए जरूरी निर्देश दिए। इस दौरान नगर निगम कमिश्नर लवजीत कलसी सहित निगम और विभाग के अन्य अधिकारी मौजूद रहे। नगर निगम की ओर से वर्तमान में प्रति सप्ताह करीब 100 किलोमीटर सड़कों की मैकेनिकल स्वीपिंग की जा रही है। निरीक्षण के दौरान सचिव घनश्याम थोरी ने प्रोजेक्ट के तहत की जा रही सफाई व्यवस्था की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि आधुनिक मशीनरी के इस्तेमाल से शहर की सड़कों की सफाई व्यवस्था में सुधार लाया जा सकता है। इससे शहर के सौंदर्यीकरण को भी बढ़ावा मिलेगा।

    अंदरूनी सड़कों की सफाई पर जोर
    सचिव ने अधिकारियों को शहर की अंदरूनी सड़कों पर भी मैकेनिकल स्वीपिंग और डीप क्लीनिंग का काम तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अंदरूनी सड़कों की करीब 630 किलोमीटर साप्ताहिक मैकेनिकल स्वीपिंग का काम जल्द शुरू किया जाए। इसके लिए जरूरी प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने को कहा गया है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सफाई व्यवस्था केवल मुख्य सड़कों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि शहर की अंदरूनी सड़कों और अन्य प्रमुख स्थानों पर भी नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए।

    164 किमी मुख्य सड़कों के टेंडर जल्द निपटाने के निर्देश
    मुख्य सड़कों की सफाई से संबंधित करीब 164 किलोमीटर के लंबित टेंडर कार्यों को भी जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों को कहा गया कि टेंडर प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो और निर्धारित प्रक्रिया पूरी कर काम को जमीन पर शुरू करवाया जाए। घनश्याम थोरी ने अधिकारियों को सफाई व्यवस्था की नियमित निगरानी करने और मैकेनिकल स्वीपिंग के काम की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए भी कहा। उन्होंने कहा कि योजनाओं का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब उनका प्रभाव जमीन पर दिखाई दे।

    लोगों की भागीदारी भी जरूरी
    सचिव ने शहर को स्वच्छ बनाए रखने के लिए लोगों की भागीदारी को भी जरूरी बताया। उन्होंने नगर निगम अधिकारियों को सफाई के प्रति लोगों में जागरूकता पैदा करने के लिए अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने शहरवासियों से अपील की कि वे सड़कों, सार्वजनिक स्थानों और अपने आसपास गंदगी न फैलाएं तथा शहर को साफ रखने में नगर निगम का सहयोग करें।

  • CM चेहरे पर नहीं खुलेगा पत्ता! पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी खत्म करने के लिए नया फॉर्मूला

    CM चेहरे पर नहीं खुलेगा पत्ता! पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी खत्म करने के लिए नया फॉर्मूला

    चंडीगढ़.

    पंजाब कांग्रेस के नए प्रभारी सचिन पायलट ने 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी की रणनीति काफी हद तक स्पष्ट कर दी है। कांग्रेस पंजाब में चुनाव से पहले किसी नेता को मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर घोषित नहीं करेगी।

    पायलट के मुताबिक पार्टी सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ेगी और चुनाव अभियान की अगुवाई राहुल गांधी करेंगे। चुनाव में बहुमत मिलने के बाद ही मुख्यमंत्री के नाम पर फैसला किया जाएगा। पंजाब के प्रभारी बनने के बाद पायलट का यह बयान ऐसे समय आया है, जब प्रदेश कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर खींचतान चल रही है। प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के बीच राजनीतिक दूरी लगातार चर्चा में है।

    पायलट के बयान से बहस पर रोक
    चन्नी खेमे की ओर से वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने और चुनाव में चन्नी को प्रमुख चेहरा बनाने की मांग भी सामने आती रही है। ऐसे में पायलट का मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर दिया गया बयान पार्टी के भीतर चल रही इस बहस को फिलहाल विराम देता दिखाई दे रहा है। पायलट ने संकेत दिया कि कांग्रेस के लिए किसी एक व्यक्ति का चेहरा महत्वपूर्ण नहीं, बल्कि पूरी पार्टी का एकजुट होकर चुनाव लड़ना अहम है। उन्होंने कहा कि पंजाब कांग्रेस एक टीम के रूप में चुनाव मैदान में उतरेगी और राहुल गांधी अभियान का प्रमुख चेहरा होंगे। उनका जोर संगठन को मजबूत करने और सभी नेताओं को साथ लेकर चलने पर है। पायलट ने इससे पहले भी पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से एकजुट होकर चुनाव लड़ने की अपेक्षा जताई है।

    सामूहिक मेहनत से सत्ता वापसी
    राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात के बाद उन्होंने सामूहिक मेहनत और मजबूत संगठन के दम पर पंजाब में कांग्रेस की सत्ता में वापसी का भरोसा जताया था। कांग्रेस के लिए यह रणनीति इसलिए भी अहम है क्योंकि 2017 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में चुनाव लड़ा था और सत्ता हासिल की थी।

    गुटबाजी थामना पायलट की बड़ी चुनौती
    वहीं 2022 में आम आदमी पार्टी ने भगवंत मान को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित कर चुनाव मैदान में उतरकर सरकार बनाई थी। अब कांग्रेस बिना मुख्यमंत्री चेहरे के चुनाव में उतरने की रणनीति अपना रही है। पायलट जल्द पंजाब दौरे पर आने वाले हैं। ऐसे में उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रदेश कांग्रेस के अलग-अलग गुटों को एक मंच पर लाने की होगी। खास तौर पर यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उनके दौरे और आगे राहुल गांधी के संभावित पंजाब अभियान के दौरान चन्नी, रंधावा और वड़िंग किस तरह साथ दिखाई देते हैं।

  • चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर 36 दिन ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित, 12 ट्रेनें रद्द; यात्रियों की बढ़ेगी मुश्किल

    चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर 36 दिन ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित, 12 ट्रेनें रद्द; यात्रियों की बढ़ेगी मुश्किल

    अबोहर.

    चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन के उन्नयन कार्य के चलते रेल यात्रियों की परेशानी बढ़ने वाली है। रेलवे ने स्टेशन पर 36 दिनों के लिए पावर और ट्रैफिक ब्लॉक को मंजूरी दी है। यह ब्लॉक तीन चरणों में 10 सितंबर से 15 अक्टूबर तक रहेगा।

    इस दौरान फुट ओवरब्रिज के निर्माण और उसे स्थापित करने के साथ स्टेशन के मौजूदा ढांचे को हटाने सहित कई जरूरी कार्य किए जाएंगे। रेलवे के आदेश के अनुसार पहला ब्लॉक 10 से 21 सितंबर, दूसरा 22 सितंबर से तीन अक्टूबर और तीसरा चार से 15 अक्टूबर तक रहेगा। इस अवधि में स्टेशन की विभिन्न रेल लाइनों पर यातायात और बिजली से जुड़े कार्य किए जाएंगे।

    12 ट्रेन सेवाएं रहेंगी रद्द
    ब्लॉक के कारण रेलवे ने 12 ट्रेन सेवाओं को रद्द करने का फैसला लिया है। इनमें फिरोजपुर-चंडीगढ़ ट्रेन संख्या 14630 भी शामिल है। यह ट्रेन नौ सितंबर से 15 अक्टूबर तक रद्द रहेगी। वहीं चंडीगढ़-फिरोजपुर ट्रेन संख्या 14629 को 10 सितंबर से 16 अक्टूबर तक रद्द किया गया है। इसके अलावा चंडीगढ़-अमृतसर ट्रेन संख्या 14541 और अमृतसर-चंडीगढ़ ट्रेन संख्या 14542 समेत अन्य ट्रेन सेवाएं भी प्रभावित रहेंगी। रेलवे के अनुसार ब्लॉक के कारण कुल 442 फेरे रद्द किए गए हैं।

    श्रीगंगानगर, अबोहर और फाजिल्का के यात्रियों पर असर
    फिरोजपुर-चंडीगढ़ ट्रेन सेवा रद्द होने का सीधा असर श्रीगंगानगर, अबोहर और फाजिल्का क्षेत्र के यात्रियों पर पड़ेगा। श्रीगंगानगर से चलकर फिरोजपुर पहुंचने वाली संबंधित रेल सेवा आगे चंडीगढ़ के लिए रवाना होती है। ऐसे में इसके रद्द रहने से इस क्षेत्र के यात्रियों को चंडीगढ़ आने-जाने में परेशानी होगी। इसके अलावा अमृतसर रूट भी इससे प्रभावित रहने वाला है। लंबे समय तक ट्रेनें रद्द रहने के कारण यात्रियों को वैकल्पिक रेल सेवाओं या दूसरे परिवहन साधनों का सहारा लेना पड़ सकता है। रेलवे ने यात्रियों से सफर शुरू करने से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति की जानकारी जांचने की अपील की है।

  • पंजाब के 3 पवित्र शहरों में मांस पर सख्ती, बिक्री से लेकर इस्तेमाल तक पर लगी रोक

    पंजाब के 3 पवित्र शहरों में मांस पर सख्ती, बिक्री से लेकर इस्तेमाल तक पर लगी रोक

    चंडीगढ़.

    पंजाब सरकार ने राज्य के तीन पवित्र शहरों में मांस की बिक्री और इस्तेमाल पर रोक से संबंधित नोटिफिकेशन अब असाधारण गजट में प्रकाशित कर दिया है। पंजाब सरकार के 9 सितंबर 2026 के असाधारण गजट में पशुपालन, मत्स्य पालन एवं डेयरी विकास विभाग की ओर से जारी आदेश को प्रकाशित किया गया है।

    खास बात यह है कि गजट में प्रकाशित आदेश पर 23 दिसंबर 2025 की तारीख दर्ज है। यानी प्रतिबंध का आदेश करीब साढ़े आठ महीने पहले जारी किया गया था, लेकिन अब इसे सरकारी गजट में प्रकाशित किया गया है। सरकार का यह आदेश अमृतसर की चारदीवारी वाले क्षेत्र, रूपनगर जिले के श्री आनंदपुर साहिब और बठिंडा जिले के तलवंडी साबो (श्री दमदमा साहिब) में लागू होगा। आदेश में कहा गया है कि इन क्षेत्रों में मांस की बिक्री और इस्तेमाल पर रोक तत्काल प्रभाव से लागू की जाएगी। उल्लंघन करने वालों के खिलाफ राज्य में लागू संबंधित कानूनों और नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी।

    गृह विभाग के निर्देश पर जारी हुआ आदेश
    पशुपालन विभाग के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह कार्रवाई गृह मामले विभाग की 15 दिसंबर 2025 की अधिसूचना में दिए गए निर्देशों के अनुपालन में की गई है। इसके बाद पशुपालन, मत्स्य पालन एवं डेयरी विकास विभाग ने 23 दिसंबर 2025 को प्रतिबंध संबंधी आदेश जारी किया। अब इसे 9 सितंबर 2026 को पंजाब सरकार के असाधारण गजट में प्रकाशित किया गया है।

    अमृतसर में पूरे शहर पर नहीं, चारदीवारी क्षेत्र में रोक
    नोटिफिकेशन में अमृतसर के लिए पूरे शहर को प्रतिबंधित क्षेत्र नहीं बनाया गया है। इसमें विशेष तौर पर अमृतसर के चारदीवारी वाले शहर का उल्लेख है। वहीं श्री आनंदपुर साहिब और तलवंडी साबो (श्री दमदमा साहिब) की संबंधित नगर पालिका सीमाओं में यह आदेश लागू होगा।

    पवित्र शहर घोषित करने के फैसले की पृष्ठभूमि
    राज्य सरकार ने इन क्षेत्रों को धार्मिक महत्व को देखते हुए पवित्र शहर घोषित करने का फैसला किया था। अमृतसर में श्री हरमंदिर साहिब, श्री आनंदपुर साहिब में तख्त श्री केसगढ़ साहिब और तलवंडी साबो में तख्त श्री दमदमा साहिब जैसे प्रमुख धार्मिक स्थल हैं। इन क्षेत्रों की धार्मिक मर्यादा और गरिमा को बनाए रखने के उद्देश्य से प्रतिबंध का फैसला लिया गया था। हालांकि, वर्तमान गजट में मांस की बिक्री और इस्तेमाल पर प्रतिबंध का स्पष्ट उल्लेख है। शराब, तंबाकू और अन्य नशीले पदार्थों पर रोक संबंधी व्यापक घोषणा को अलग सरकारी आदेश के बिना इसी नोटिफिकेशन का हिस्सा नहीं माना जा सकता।

  • अंबेडकर प्रतिमा की बेअदबी पर आक्रोश, विरोध में आज बंद रहेगा जालंधर

    अंबेडकर प्रतिमा की बेअदबी पर आक्रोश, विरोध में आज बंद रहेगा जालंधर

    जालंधर.

    मंगलवार को लुधियाना में डाक्टर बीआर अंबेडकर की प्रतिमा की बेअदबी के विरोध में जिले के वाल्मीकि संगठनों ने दस सितंबर वीरवार को जालंधर बंड का ऐलान किया है। संगठनों ने सुबह नौ से लेकर शाम पांच बजे तक शहर के सभी बाजारों, मार्केटें व माल्स सहित व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रखने का एलान किया हुआ है।

    हालांकि कुछ वाल्मीकि संगठनों ने बुधवार रात को बैठक कर 10 दिसंबर को सुबह 9 से शाम 4 बजे तक बंद करने की घोषणा भी की है। इस दौरान रेलवे ट्रैक या फिर नेशनल हाईवे को बंद नहीं किया जाएगा। कई शिक्षण संस्थानों में इन दोनों परीक्षाएं चल रही है, ऐसे में शिक्षण संस्थान भी बंद नहीं करवाए जाएंगे।

    आज क्या रहेगा बंद
    वीरवार को शहर की मार्केट, दुकानें, माल्स, शोरूम, बेकरी, स्वीट शाप सहित तमाम तरह के व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहेंगे।

    किसे मिलेगी राहत
    वाल्मीाकि संगठनों के प्रतिनिधियों ने बंद के दौरान राहत की भी घोषणा की है। जिसके तहत वीरवार को सुबह नौ से शाम पांच बजे तक बंद के दौरान अस्पताल, मेडिकल की दुकानें, एंबुलेंस का संचालन, विदेश की फ्लाइट वाले यात्रियों, मृत्यु पर जाने वालों तथा शिक्षण संस्थानों को राहत रहेगी।