Category: पंजाब

  • पंजाब बोर्ड के छात्रों के लिए जरूरी खबर, कॉपियों की री-चेकिंग और री-इवैल्यूएशन के आवेदन शुरू

    पंजाब बोर्ड के छात्रों के लिए जरूरी खबर, कॉपियों की री-चेकिंग और री-इवैल्यूएशन के आवेदन शुरू

    मोहाली.

    पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (PSEB) द्वारा जुलाई 2026 में आयोजित की गई मैट्रिक (10वीं) और सीनियर सेकेंडरी (12वीं) की अनुपूरक परीक्षाओं (री-अपीयर/कंपार्टमेंट और अतिरिक्त/वोकेशनल विषय) का परिणाम घोषित किया जा चुका है।

    12वीं कक्षा का परिणाम 25 अगस्त 2026 और 10वीं कक्षा का परिणाम 28 अगस्त 2026 को जारी किया गया था। इस संबंध में जानकारी देते हुए पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड के एक प्रवक्ता ने बताया कि ​इन परीक्षाओं से संबंधित जो परीक्षार्थी अपने उत्तर-पुस्तिकाओं की री-चेकिंग (पुनः जांच) या री-मूल्यांकन (Re-evaluation) करवाना चाहते हैं, वे 07 सितंबर 2026 से 21 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन फॉर्म और फीस जमा कर सकते हैं।

    ​मुख्य बातें:

    • आवेदन की अवधि: 07 सितंबर 2026 से 21 सितंबर 2026 तक।
    • आवेदन प्रक्रिया: फॉर्म और फीस केवल ऑनलाइन माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे।
    • ​हार्ड कॉपी जमा करने की आवश्यकता नहीं: फॉर्म भरने और फीस का भुगतान करने के बाद परीक्षार्थी प्रिंटआउट अपने पास रिकॉर्ड के लिए संभाल कर रखें। इसे बोर्ड कार्यालय में जमा करवाने की आवश्यकता नहीं है।
    • अधिक जानकारी: विस्तृत दिशा-निर्देशों और अन्य जानकारी के लिए बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट www.pseb.ac.in पर जाएं।
  • क्लर्क-जूनियर असिस्टेंट की वरिष्ठता विवाद पर CAT का फैसला, लंबी सेवा अवधि वालों को मिलेगी प्राथमिकता

    क्लर्क-जूनियर असिस्टेंट की वरिष्ठता विवाद पर CAT का फैसला, लंबी सेवा अवधि वालों को मिलेगी प्राथमिकता

    चंडीगढ़.

    केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) की चंडीगढ़ बेंच ने क्लर्कों और जूनियर असिस्टेंट की वरिष्ठता को लेकर चल रहे विवाद पर अहम फैसला सुनाया है। कैट ने चंडीगढ़ प्रशासन को निर्देश दिया है कि कॉमन कैडर में भर्ती क्लर्कों और विभागीय कैडर से कॉमन कैडर में शामिल होने का विकल्प देने वाले कर्मचारियों की संयुक्त वरिष्ठता सूची तैयार की जाए।

    वरिष्ठता तय करते समय कैडर में की गई कुल सेवा अवधि को आधार बनाया जाएगा। कैट ने प्रशासन की ओर से 23 और 24 सितंबर 2021 को जारी किए गए उन आदेशों को रद कर दिया है, जिनके आधार पर कॉमन कैडर के क्लर्कों की अलग वरिष्ठता सूची तैयार की जा रही थी। साथ ही 16 सितंबर 2020 और 14 दिसंबर 2020 के पत्रों के तहत कर्मचारियों को कॉमन कैडर में शामिल होने का दिया गया विकल्प बहाल कर दिया गया है। प्रशासन को आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के तीन महीने के भीतर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

    1993 से 2014 में भर्ती कर्मचारियों ने उठाया था मामला
    यह मामला विकास शर्मा समेत 23 कर्मचारियों की ओर से दायर OA नंबर 1336/2021 से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं में जीएमसीएच-32 समेत विभिन्न विभागों में कार्यरत जूनियर असिस्टेंट और क्लर्क शामिल हैं। इन कर्मचारियों का कहना था कि वे 1993 से 2014 के बीच विभागीय कैडर में भर्ती हुए, जबकि कॉमन कैडर के तहत शामिल कई कर्मचारी 2016 से 2018 के बीच नियुक्त हुए। इसके बावजूद अलग वरिष्ठता सूची बनने से बाद में भर्ती हुए कर्मचारी पदोन्नति में उनसे आगे निकल सकते हैं। याचिकाकर्ताओं ने 23 सितंबर 2021 के मेमो और 24 सितंबर 2021 के सर्कुलर को चुनौती देते हुए सभी संबंधित क्लर्कों की एक समान वरिष्ठता सूची बनाने की मांग की थी।

    2015 में बना था कॉमन कैडर
    कैट ने अपने फैसले में कहा कि 2015 से पहले विभिन्न विभागों में क्लर्कों के लिए अलग-अलग भर्ती नियम थे। प्रशासन ने 29 मई 2015 को ग्रुप-सी क्लर्क और स्टेनो-टाइपिस्ट के लिए कॉमन कैडर भर्ती नियम अधिसूचित किए। इसके बाद विभागीय भर्ती नियमों को समाप्त कर मिनिस्टीरियल पदों को कॉमन कैडर में लाने की प्रक्रिया शुरू हुई। इसके बाद 23 सितंबर 19 को सीनियर असिस्टेंट और सुपरिंटेंडेंट ग्रेड-2 के लिए कॉमन भर्ती नियम अधिसूचित हुए। इन नियमों में पांच साल की सेवा पूरी करने वाले क्लर्क और जूनियर असिस्टेंट को सीनियर असिस्टेंट के पद पर पदोन्नति के लिए पात्र माना गया।

    अलग-अलग प्रमोशन चैनल पर कैट ने जताई आपत्ति
    अधिकरण ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में एक तरफ 2016 से पहले भर्ती हुए कर्मचारियों को अपने मूल विभाग में पदोन्नति का इंतजार करना पड़ता है, जबकि 2016 के बाद कॉमन कैडर में भर्ती कर्मचारियों के लिए कॉमन कैडर में पदोन्नति का रास्ता खुला है। इससे एक ही तरह का काम करने वाले कर्मचारियों के बीच पदोन्नति के अवसरों में असमानता पैदा हो रही है। कैट ने स्पष्ट किया कि समान कार्य करने वाले कर्मचारियों के लिए पात्रता, वेतन और पदोन्नति के अवसरों में समानता होनी चाहिए। हालांकि, अधिकरण ने यह भी माना कि इस स्तर पर सभी विभागों के कर्मचारियों की एक ही समेकित वरिष्ठता सूची बनाना प्रशासनिक रूप से व्यावहारिक नहीं होगा।

    विकल्प देने वालों की सेवा अवधि से तय होगी वरिष्ठता
    कैट ने निर्देश दिया कि 16 सितंबर 2020 और 14 दिसंबर 2020 के पत्रों के तहत कॉमन कैडर में शामिल होने का विकल्प देने वाले कर्मचारियों को भी सूची में शामिल किया जाए। कॉमन कैडर में सीधे भर्ती कर्मचारियों और विभागीय कैडर से विकल्प के आधार पर शामिल कर्मचारियों के बीच इंटर-से वरिष्ठता उनकी कुल सेवा अवधि के आधार पर तय की जाएगी। हालांकि, जो कर्मचारी विकल्प देने के बाद इस मामले के लंबित रहने के दौरान अपने मूल विभाग में नोट-II के तहत पदोन्नत हो चुके हैं, उन्हें कॉमन कैडर की नई वरिष्ठता सूची से बाहर रखा जाएगा।

    अधिकरण ने यह भी कहा कि खाली पदों को नियमित रूप से कॉमन कैडर में स्थानांतरित करने के बजाय प्रशासन को उचित जांच-पड़ताल करनी चाहिए, ताकि विभागीय स्तर पर पदोन्नति की संभावना रखने वाले कर्मचारियों के हित प्रभावित न हों। न्यायिक सदस्य रमेश सिंह ठाकुर और प्रशासनिक सदस्य रश्मि सक्सेना साहनी की पीठ ने ओए को स्वीकार करते हुए प्रशासन को तीन महीने में कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। मामले में किसी प्रकार की लागत नहीं लगाई गई है।

  • नशे के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे मजदूर ने उठाया खौफनाक कदम, सरपंच समेत 5 पर FIR

    नशे के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे मजदूर ने उठाया खौफनाक कदम, सरपंच समेत 5 पर FIR

    संगरूर.

    दिड़बा विधानसभा क्षेत्र के गांव तूरबंजारा में आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता के कार्यक्रम के दौरान नशे का मुद्दा उठाने वाले एक मजदूर द्वारा जहरीली वस्तु निगलकर आत्महत्या कर ली। मजदूर गुलजार सिंह को आत्महत्या के लिए उकसाने के रूप में गांव की सरपंच उसके पति समेत पांच व्यक्तियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत थाना दिड़बा में मामला दर्ज किया गया।

    मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए सिविल हॉस्पिटल संगरूर लाया गया है। जहां मोहनजीत इंसाफ संघर्ष कमेटी के कार्यकर्ता भी पहुंचे हुए हैं जिनके द्वारा वित्त मंत्री के खिलाफ भी मामला दर्ज करने की मांग की जा रही है। मृतक मजदूर के भाइयों बिक्कर सिंह और जसवीर सिंह, निवासी तूरबंजारा, ने बताया कि गत दिवस गांव में वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा का कार्यक्रम था। इस दौरान उनके भाई गुलजार सिंह ने नशे का मुद्दा उठाते हुए कहा था कि उनका बेटा चिट्टे का नशा करता है और घर का सारा सामान बेच चुका है।

    उन्होंने आरोप लगाया था कि गांव में खुलेआम चिट्टा बिक रहा है, जिससे वह बेहद परेशान हैं। गुलजार सिंह की एक वीडियो भी वायरल हुई है, जिसमें वह पूरी घटना का जिक्र करते हुए सवाल उठा रहा है। परिजनों के अनुसार, सोमवार सुबह गुलजार सिंह ने उन्हें बताया कि गांव की महिला सरपंच के पति बलजीत सिंह सहित तीन अन्य व्यक्ति उस पर पंचायत में जाकर माफी मांगने के लिए दबाव बना रहे थे और कथित तौर पर धमका रहे थे। इससे परेशान होकर उसने सल्फास/जहरीली वस्तु निगल ली। जिसके कारण दत्त रात्रि डीएमसी लुधियाना में मजदूर की मौत हो गई।

  • पंजाब चुनाव की तैयारी में जुटी कांग्रेस, राहुल-प्रियंका से मिले सचिन पायलट; रणनीति पर बनी बात

    पंजाब चुनाव की तैयारी में जुटी कांग्रेस, राहुल-प्रियंका से मिले सचिन पायलट; रणनीति पर बनी बात

    चंडीगढ़.

    पंजाब कांग्रेस के नए प्रभारी सचिन पायलट ने मंगलवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा से मुलाकात की। पंजाब का प्रभारी बनाने के बाद राहुल और प्रियंका के साथ पायलट की पहली मुलाकात है। इसे पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    माना जा रहा है कि बैठक में पंजाब कांग्रेस की मौजूदा राजनीतिक स्थिति, चुनावी रणनीति और पार्टी नेताओं के बीच चल रही गुटबाजी पर भी चर्चा हुई। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के इसी महीने पंजाब दौरे पर आने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी के दौरे से पहले सचिन पायलट अगले सप्ताह पंजाब और चंडीगढ़ पहुंचेंगे। अपने पहले दौरे के दौरान वह प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और प्रमुख पदाधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। पायलट की इस बैठक के बाद ही राहुल गांधी के पंजाब दौरे का कार्यक्रम अंतिम रूप लेने की संभावना है। राहुल गांधी के सितंबर के अंत में पंजाब आने की संभावना जताई जा रही है। पायलट के पंजाब दौरे का कार्यक्रम अगले दो-तीन दिनों में अंतिम हो सकता है। पंजाब कांग्रेस प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग भी सोमवार को नई दिल्ली में पायलट से मुलाकात कर चुके हैं। वड़िंग ने भी कहा था कि पायलट का पंजाब दौरा करीब एक सप्ताह के भीतर प्रस्तावित है।

    गुटबाजी खत्म करना पायलट के सामने बड़ी चुनौती
    पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से गुटबाजी पार्टी के लिए चुनौती बनी हुई है। प्रदेश कांग्रेस प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के बीच राजनीतिक मतभेद लगातार चर्चा में रहे हैं। करीब दो महीने पहले कांग्रेस हाईकमान की ओर से विधानसभा चुनाव से जुड़ी समितियों के गठन के बाद चन्नी और उनके समर्थक विधायकों-सांसदों ने वड़िंग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। वड़िंग को प्रदेश प्रधान पद से हटाने की मांग भी उठी थी।

    इसके बाद कांग्रेस हाईकमान ने पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल को असम की जिम्मेदारी सौंपते हुए सचिन पायलट को पंजाब का नया प्रभारी नियुक्त किया। अब पायलट के सामने विधानसभा चुनाव की रणनीति तैयार करने के साथ ही प्रदेश कांग्रेस के विभिन्न धड़ों के बीच समन्वय कायम करने की चुनौती है। ऐसे में राहुल गांधी के पंजाब दौरे से पहले पायलट का प्रदेश में पहुंचकर नेताओं के साथ बैठक करना संगठनात्मक रूप से अहम माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व की कोशिश है कि राहुल गांधी के दौरे से पहले पंजाब कांग्रेस में आपसी तालमेल और चुनावी तैयारियों को लेकर स्पष्ट रोडमैप तैयार किया जाए।

  • कैलिफोर्निया में बड़ा ड्रग भंडाफोड़, पंजाबी युवक के ठिकाने से 40 किलो कोकीन और हथियार बरामद

    कैलिफोर्निया में बड़ा ड्रग भंडाफोड़, पंजाबी युवक के ठिकाने से 40 किलो कोकीन और हथियार बरामद

    जालंधर

    अमेरिका के कैलिफोर्निया (California) में पुलिस ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट (Drug Syndicate) का पर्दाफाश करने का दावा किया है।पुलिस के अनुसार, पंजाब (Punjab) निवासी कवंलप्रीत पिज्जा रेस्टोरेंट (Pizza) की आड़ में कथित तौर पर कोकीन और अन्य नशीले पदार्थों की सप्लाई का नेटवर्क चला रहा था। आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है।

    पिज्जा डिलीवरी की आड़ में ड्रग्स का कारोबार
    जांच एजेंसियों के मुताबिक, आरोपी पिज्जा बिजनेस और डिलीवरी नेटवर्क का इस्तेमाल कथित तौर पर ड्रग्स की सप्लाई के लिए करता था। पुलिस का आरोप है कि इस नेटवर्क के जरिए स्थानीय स्तर पर कोकीन और मेथ जैसे नशीले पदार्थ पहुंचाए जाते थे।

    बताया जा रहा है कि आरोपी ने धीरे-धीरे एक बड़ा सप्लाई नेटवर्क तैयार कर लिया था और इससे भारी रकम कमाता था।

    रेड में 40 किलो कोकीन, पिस्तौल और कैश बरामद
    गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने आरोपी के घर और उससे जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की। पुलिस के अनुसार, इस कार्रवाई के दौरान करीब 40 किलो कोकीन, कई पिस्तौलें और बड़ी मात्रा में अमेरिकी डॉलर बरामद किए गए।

    हथियारों की बरामदगी ने जांच को और गंभीर बना दिया है। अधिकारियों को आशंका है कि ड्रग नेटवर्क से जुड़े अन्य लोग भी इस अवैध गतिविधि में शामिल हो सकते हैं।

    अवैध तरीके से अमेरिका में रहने का भी आरोप
    जांच में आरोपी के अमेरिका (US) में अवैध तरीके से रहने की बात भी सामने आने का दावा किया गया है। पुलिस अब उसके इमिग्रेशन रिकॉर्ड के साथ-साथ कथित ड्रग नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

    उम्रकैद तक की सजा का सामना कर सकता है आरोपी
    इतनी बड़ी मात्रा में कोकीन, हथियारों की बरामदगी और कथित ड्रग तस्करी के आरोपों के चलते आरोपी को अमेरिकी कानून के तहत गंभीर कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। दोष सिद्ध होने पर उसे लंबी जेल की सजा, यहां तक कि उम्रकैद, और भारी आर्थिक दंड का सामना करना पड़ सकता है।

    हालांकि अंतिम सजा अदालत के फैसले पर निर्भर करेगी। पुलिस अब कथित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचने के लिए जांच और छापेमारी आगे बढ़ा रही है।

  • पंजाब में विवादों के बीच घिरी मान सरकार, प्रदर्शन से लेकर स्कूल-कुत्तों के मुद्दे तक विपक्ष का हमला

    पंजाब में विवादों के बीच घिरी मान सरकार, प्रदर्शन से लेकर स्कूल-कुत्तों के मुद्दे तक विपक्ष का हमला

    चंडीगढ़

    पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले सामने आए कुछ विवादों ने सियासी रंग ले लिया है। राजनीतिक दल इन मुद्दों को जोर-शोर से उठा रहे हैं और इनके जरिये सरकार को घेरने के साथ चुनावी समीकरण साधने की कोशिश में हैं। खास बात यह है कि इनमें से कई मामलों पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लिया है। आयोग ने मुख्य सचिव, डीजीपी समेत अन्य अधिकारियों से जांच के बाद रिपोर्ट मांगी है।

    अमूमन विधानसभा चुनाव से पहले धरने और प्रदर्शन सियासी माहौल को गर्म करते हैं। राजनीतिक दल भी इन आंदोलनों को अपने एजेंडे से जोड़ते हैं। पंजाब में पिछले कुछ दिनों में सामने आए इन विवादों ने इस सिलसिले को और तेज कर दिया है। विपक्षी दल जहां इन्हें सरकार के खिलाफ माहौल बनाने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं वहीं सरकार डैमेज कंट्रोल में जुटी है। 

    काला झंडा दिखाने से लेकर लाठीचार्ज तक
    मोहनजीत सिंह का मामला
    : सुनाम के शेरों गांव में मुख्यमंत्री की लोक मिलनी के दौरान नशे के खिलाफ आवाज उठाते हुए मोहनजीत सिंह ने छत पर खड़े होकर काला झंडा फहराया था। पुलिस ने उसे हिरासत में लिया था। बाद में मोहनजीत ने पुलिस पर थर्ड डिग्री टॉर्चर का आरोप लगाया। भाजपा, शिअद और कांग्रेस के नेताओं ने उसका समर्थन करते हुए सरकार को घेरा। राज्यसभा सांसद तरुण चुघ की शिकायत पर आयोग ने मुख्य सचिव, डीजीपी, संगरूर एसएसपी और डीसी से तत्काल जांच कर कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है।

    पांच करोड़ के आरोप : मुख्यमंत्री की पत्नी के नाम पर दुराचार के आरोपी को बचाने के लिए कथित तौर पर पांच करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार का आरोप लगा। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस रणजीत सिंह की शिकायत पर आयोग ने मुख्य सचिव और डीजीपी से जांच रिपोर्ट मांगी है।

    सफाई कर्मचारियों पर लाठीचार्ज : बरनाला में मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे सफाई कर्मचारियों पर पुलिस लाठीचार्ज के आरोप लगे। महिलाओं समेत प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग का आरोप है। आयोग ने स्वत: संज्ञान लेते हुए पूछा है कि लाठीचार्ज का आदेश किन परिस्थितियों में दिया गया और इसकी मंजूरी किस अधिकारी ने दी। घायलों की संख्या, चोटों की प्रकृति, चिकित्सा स्थिति और मुआवजे की जानकारी भी मांगी गई है।

    स्कूलों से छात्राओं और आवारा कुत्तों तक
    सीमावर्ती स्कूलों में स्वतंत्रता दिवस : पंजाब के सीमावर्ती सरकारी स्कूलों में 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस नहीं मनाने के आरोप लगे। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सरकार की ओर से मोर्चा संभाला। आयोग ने मुख्य सचिव से राज्य, जिला और स्कूल स्तर की कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है।

    मोगा में छात्राओं से कथित उत्पीड़न : सरकारी स्कूल में छात्राओं से कथित यौन उत्पीड़न के मामले में आयोग ने स्वत: संज्ञान लिया। मुख्य सचिव और मोगा एसएसपी को नोटिस जारी कर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई। शिक्षा विभाग प्रधानाचार्य को निलंबित कर चुका है।

    रूपनगर में बच्ची की मौत : आवारा कुत्तों के हमले में आठ वर्षीय बच्ची की मौत के मामले में भी आयोग ने स्वत: संज्ञान लिया। पंजाब में आवारा कुत्तों के आतंक और सरकार की ओर से उठाए गए कदमों पर मुख्य सचिव से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। इन मामलों को लेकर विपक्षी दल सरकार पर सवाल उठा रहे हैं। चुनाव नजदीक आने के साथ इन विवादों के और सियासी मुद्दा बनने के आसार हैं।

  • अर्श डल्ला गैंग के खिलाफ पुलिस का एक्शन, पंजाब में 2 आरोपी गिरफ्तार; हथियारों का जखीरा बरामद

    अर्श डल्ला गैंग के खिलाफ पुलिस का एक्शन, पंजाब में 2 आरोपी गिरफ्तार; हथियारों का जखीरा बरामद

    मानसा.

    जिला पुलिस ने अर्श डल्ला गैंग के दो गुर्गो को पांच पिस्टल और कारतूस समेत गिरफ्तार किया है। पुलिस गिरफ्तार किए गए इन आरोपितों का अदालत से पुलिस रिमांड हासिल करके गहराई से जांच करेगी कि उनका आगे मकसद क्या था।

    एसएसपी वैभव चौधरी ने प्रेस काॅन्फ्रेंस दौरान बताया कि ऑपरेशन प्रहार मुहिम के तहत गश्त के दौरान पुलिस नेहरू काॅलेज की बैक साइड पहुंची तो दो आरोपित थैले से कुछ निकालकर अपने डब्ब और जेब में कुछ डालते दिखाई दिए। पुलिस पार्टी की ओर से काबू किए गए आरोपितों की पहचान शहर के वार्ड नंबर 9 वासी अमृत पाल सिंह उर्फ जैकी पुत्र गोरा सिंह और गांव मूसा वासी कुलदीप सिंह उर्फ घुग्गी पुत्र करनैल सिंह के रूप में हुई। पुलिस ने दोनों आरोपितों के कब्जे से 4 पिस्टल 32 बोर समेत 12  कारतूस और 315 बोर की देसी पिस्टल बरामद करके उनके खिलाफ थाना सिटी-2 में आर्म्स एक्ट तहत मामला दर्ज किया गया।

    एसएसपी ने बताया कि प्राथमिक पूछताछ के दौरान सामने आया कि वे अर्श डल्ला गैंग के लिए काम करते थे और अवैध तरीके से असले की सप्लाई वे मध्य प्रदेश से मंगवाते थे। अमृत पाल सिंह के खिलाफ 3 और कुलदीप सिंह के खिलाफ पहले 2 मामले एनडीपीएस,आर्म्ज और लूटपाट के दर्ज है। एसएसपी ने बताया कि पुलिस की मुस्तैदी से दोनों आरोपितों को गिरफ्तारी करने से बड़ी वारदात टल गई है। उन्होंने बताया कि पुलिस रिमांड के दौरान बरामद हथियारों का सोत्र और इससे जुड़े आरोपितों के बारे ओर जानकारी हासिल की जाएगी। पुलिस लोगों की सुरक्षा और शांति को यकीनी बनाने के लिए बचनबद्ध है और गैर कानूनी गतिविधियों के नेटवर्क को तोड़ने के लिए लगातार कार्रवाई जारी रखेगी। इस दौरान एसपी जसबिंदर सिंह, डीएसपी जसविंदर सिंह और पुशपिंदर सिंह भी मौजूद थे।

  • चंडीगढ़ में PU अंडरपास को मिली रफ्तार, 2019 से लंबित प्रस्ताव अब मंजूरी की ओर; खर्च होंगे ₹8.40 करोड़

    चंडीगढ़ में PU अंडरपास को मिली रफ्तार, 2019 से लंबित प्रस्ताव अब मंजूरी की ओर; खर्च होंगे ₹8.40 करोड़

    चंडीगढ़

    चंडीगढ़ स्थित पंजाब यूनिवर्सिटी से जुड़े दो बड़े अंडरपास प्रोजेक्ट अब फाइलों से निकलकर अगले चरण में पहुंच गए हैं। पीयू और पीजीआई के बीच बनने वाले अंडरपास का टेंडर जल्द आवंटित किया जाएगा।

    पीयू-पीजीआई अंडरपास का प्रस्ताव वर्ष 2019 में तैयार हुआ था। इसके बाद डिजाइन और सुविधाओं में कई बदलाव किए गए। अब करीब सात साल बाद इसका निर्माण शुरू करने की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ी है। इस प्रोजेक्ट पर कुल 8.40 करोड़ रुपए खर्च होंगे।

    25 हजार लोगों की रोजाना आवाजाही
    पंजाब यूनिवर्सिटी और PGI के बीच रोजाना करीब 25 हजार लोग पैदल आवाजाही करते हैं। इनमें PGI आने वाले मरीज, उनके परिजन, पीयू के छात्र और कर्मचारी शामिल हैं। पहले पीयू के गेट नंबर-1 के सामने सड़क पार करने के लिए एक रास्ता था, लेकिन वहां वाहनों की आवाजाही बढ़ने से जाम लगने लगा। इसके बाद यह रास्ता बंद कर दिया गया।

    अब लोगों को नेहरू अस्पताल के निकास द्वार के सामने से सड़क पार करनी पड़ती है। यहां दोनों तरफ भारी ट्रैफिक होने के कारण खासकर मरीजों और बुजुर्गों को परेशानी होती है। पीजीआई के मुख्य गेट से आने-जाने वालों को भी लंबा रास्ता तय करना पड़ता है।

    मई में निकला टेंडर जल्द आवंटन पीयू और पीजीआई के बीच बनने वाले अंडरपास के लिए मई में टेंडर जारी किया गया था। टेंडर प्रक्रिया में शामिल कंपनियों के साथ शर्तों को लेकर बातचीत हुई। अब सहमति बनने के बाद टेंडर जल्द आवंटित करने की तैयारी है। अंडरपास प्रोजेक्ट की कुल लागत 8.40 करोड़ रुपए है। इसमें से 6.73 करोड़ रुपए निर्माण कार्य पर खर्च होंगे, जबकि 1.67 करोड़ रुपए भूमिगत सीवरेज और ड्रेनेज लाइनों को बदलने पर खर्च किए जाएंगे।

    अंडरपास निर्माण से पहले इलाके में मौजूद भूमिगत सीवरेज और ड्रेनेज व्यवस्था में बदलाव किया जाएगा। पीजीआई के एडवांस न्यूरो साइंस सेंटर की ओर जाने वाले गेट नंबर-3 के छोटे चौक से लेकर सेक्टर-14 और 15 के चौक तक लाइनों को बदला जाएगा। नई लाइनें बिछाने के बाद उन्हें मौजूदा सीवरेज और ड्रेनेज नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।

    पहले सिर्फ सीढ़ियां, सुविधा के लिए बदला प्लान इन सात वर्षों में अंडरपास के डिजाइन में कई बदलाव हुए। शुरुआती योजना में अंडरपास के अंदर केवल सीढ़ियों का प्रावधान था। बाद में पीजीआई आने वाले मरीजों और अन्य लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए डिजाइन में बदलाव किया गया। अंडरपास के अंदर बनने वाली दुकानों की संख्या भी कम की गई। पहले यहां 12 दुकानें बनाने की योजना थी, जिसे घटाकर 9 दुकानें कर दिया गया, ताकि दुकानों और आवाजाही के लिए अधिक जगह मिल सके।

    नॉर्थ-साउथ कैंपस के बीच जाम से समाधान
    पीयू के सेक्टर-25 स्थित साउथ कैंपस में पिछले डेढ़ दशक के दौरान काफी विस्तार हुआ है। वर्ष 2010 तक यहां मुख्य रूप से डेंटल कॉलेज और यूआईईटी थे, लेकिन बाद में पंजाब यूनिवर्सिटी के कई साइंस विभाग और तीन हॉस्टल भी यहां बनाए गए। इसके कारण नॉर्थ और साउथ कैंपस के बीच छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों की आवाजाही बढ़ी है।

    इलाके में जाम की समस्या भी बढ़ गई है
    दूसरी ओर, मध्य मार्ग और दक्षिण मार्ग पर भारी ट्रैफिक के कारण इस इलाके में जाम की समस्या भी बढ़ गई है। इसी को देखते हुए पीयू के गेट नंबर-3 के पास नॉर्थ और साउथ कैंपस को जोड़ने के लिए दूसरा अंडरपास बनाने की योजना तैयार की गई।

    चीफ आर्किटेक्ट के पास पहुंचा डिजाइन
    प्रशासनिक मंजूरी के बाद इंजीनियरिंग विभाग ने इस प्रोजेक्ट के लिए कंसल्टेंट नियुक्त किया था। कंसल्टेंसी रिपोर्ट तैयार होने के बाद अब प्रस्तावित डिजाइन को चंडीगढ़ टाउन प्लानिंग विभाग और चीफ आर्किटेक्ट कार्यालय की मंजूरी के लिए भेज दिया गया है।

    सेक्टर-25 स्थित साउथ कैंपस तक पहुंच बनाई जाए
    प्रस्तावित योजना के अनुसार, गेट नंबर-3 के पास टीचर फ्लैट्स के सामने से अंडरपास निकालकर सेक्टर-25 स्थित साउथ कैंपस तक पहुंच बनाई जाएगी। पार्क की ओर या टीचर फ्लैट्स की दूसरी साइड से अंडरपास बनाने के विकल्प पर योजना तैयार की गई है।

  • पंजाब में पावर कट से बढ़ी चिंता, इंजीनियरों ने मान सरकार से की बिजली उत्पादन बढ़ाने की मांग

    पंजाब में पावर कट से बढ़ी चिंता, इंजीनियरों ने मान सरकार से की बिजली उत्पादन बढ़ाने की मांग

    पटियाला 

    पीएसईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को पत्र लिखा है। एसोसिएशन ने राज्य में थर्मल और सोलर बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने की मांग की है। महासचिव इंजीनियर अजयपाल सिंह अटवाल ने कहा कि पंजाब का बिजली क्षेत्र वित्तीय संकट और बिजली की कमी का सामना कर रहा है।

    बिजली की बढ़ती कमी से उद्योग, खेती और घरेलू खपतकर्ता प्रभावित हो रहे हैं। तत्काल कदम न उठाने पर आने वाले वर्षों में हालात गंभीर होंगे। पंजाब की अपनी बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ती मांग से बहुत कम है। इससे पावरकाॅम को ऊर्जा विनिमय से महंगी बिजली खरीदनी पड़ रही है। राजपुरा और तलवंडी साबो के निजी थर्मल प्लांट कोयला भंडार बनाए रखने में विफल रहे हैं। इन प्लांटों में कोयले की भारी कमी है। यह सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के नियमों का सीधा उल्लंघन है। निवेश में देरी से महंगी बिजली खरीद पर निर्भरता बढ़ेगी।

    इंजीनियरों के अनुसार पंजाब सरकार की ओर से सब्सिडी की राशि का भुगतान लंबित है। इसके अलावा कई सरकारी विभागों पर बिजली बिलों का भुगतान नहीं करने के कारण भी पावरकॉम पर वित्तीय दबाव बढ़ रहा है।

    एसोसिएशन ने दावा किया है कि एआरआर में खर्चों का अनुमान कम रखे जाने के कारण टैरिफ में अनुचित कटौती हुई है। इससे पावरकॉम के राजस्व पर असर पड़ रहा है। इंजीनियरों के मुताबिक मौजूदा वित्त वर्ष में पावरकॉम को करीब 7,800 करोड़ रुपये के राजस्व घाटे का सामना करना पड़ सकता है।

    संकट के प्रमुख कारण
    एसोसिएशन के अनुसार, पंजाब को गैर-सौर और रात की उच्चतम मांग पूरी करने के लिए थर्मल उत्पादन क्षमता तुरंत बढ़ानी होगी। ऐसा न करने पर राज्य हर गर्मी में गंभीर बिजली की कमी के चक्र में फंसा रहेगा। पंजाब बिजली की मांग पूरी करने के लिए राज्य के बाहर से खरीदी गई बिजली और निजी उत्पादकों पर तेजी से निर्भर हो रहा है। इस आर्थिक बोझ के कारण तत्काल नीति समीक्षा की आवश्यकता है। क्षमता बढ़ाने में लगातार देरी से बिजली मांग और इन-स्टेट उत्पादन क्षमता का अंतर बढ़ रहा है।

    वित्तीय चुनौतियां और भविष्य की मांग
    पावरकाॅम की वित्तीय स्थिति लगातार कमजोर हो रही है। इसका मुख्य कारण पंजाब सरकार का बकाया सब्सिडी का भुगतान न करना है। मौजूदा वित्तीय साल में पावरकाॅम को करीब 7,800 करोड़ रुपये के राजस्व की कमी का सामना करना पड़ सकता है। एसोसिएशन के सुझावों पर ध्यान नहीं दिया गया जबकि औद्योगिक विस्तार, खेती, घरेलू खपत और डेटा सेंटर जैसे उच्च-भार वाले क्षेत्रों से भविष्य में बिजली की जरूरत काफी बढ़ेगी। राज्य-क्षेत्र बिजली उत्पादन परियोजनाओं में निवेश से पंजाब के युवाओं को रोजगार का बड़ा मौका मिलेगा।

    गर्मियों में बढ़ जाती है मांग
    पत्र के अनुसार गर्मियों में बिजली की मांग बढ़ने के साथ ही पीक डिमांड के समय पंजाब का अपना बिजली उत्पादन अपेक्षाकृत कम हो जाता है। ऐसे में मांग पूरी करने के लिए बिजली एक्सचेंज से महंगी दरों पर बिजली खरीदनी पड़ती है। इससे पावरकॉम पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ता है।

    एसोसिएशन ने कहा कि हिमाचल प्रदेश जैसे जलविद्युत उत्पादन वाले राज्य भी अब बिजली बैंकिंग के बजाय खुले बाजार में बिजली बेचने को प्राथमिकता दे रहे हैं। इससे पंजाब के लिए सस्ती बिजली की उपलब्धता और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

    निजी बिजली संयंत्रों पर निर्भरता पर सवाल
    इंजीनियरों ने निजी थर्मल प्लांटों पर बढ़ती निर्भरता को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इससे पंजाब का बड़ा पूंजी निवेश निजी क्षेत्र की ओर जा रहा है। एसोसिएशन ने सरकार से दीर्घकालिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सरकारी क्षेत्र में नए बिजली उत्पादन प्रोजेक्ट शुरू करने और प्रदेश की अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए तत्काल नीति बनाने की मांग की है।

     

     

  • चंडीगढ़ में सियासी हलचल तेज, पार्षद रामचंद्र यादव को AAP ने निष्कासित किया

    चंडीगढ़ में सियासी हलचल तेज, पार्षद रामचंद्र यादव को AAP ने निष्कासित किया

    चंडीगढ़.

    आम आदमी पार्टी को नगर निगम चुनाव से पहले एक और बड़ा झटका लगने जा रहा है। आप के पार्षद रामचंद्र यादव मंगलवार को कांग्रेस में शामिल होंगे। वह अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं के साथ सेक्टर-35 स्थित चंडीगढ़ कांग्रेस भवन पहुंचकर कांग्रेस का हाथ थामेंगे।

    रामचंद्र यादव के कांग्रेस में जाने की सूचना मिलते ही आम आदमी पार्टी ने भी उनके खिलाफ कार्रवाई कर दी। पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाते हुए आप प्रभारी जमैल सिंह और प्रदेश अध्यक्ष विजेपाल यादव ने उन्हें पार्टी से निष्कासित करने के आदेश जारी कर दिए। रामचंद्र यादव पिछले काफी समय से आप नेताओं से दूरी बनाए हुए थे। पार्टी के साथ उनकी खटपट भी चल रही थी। जनवरी में हुए मेयर चुनाव के दौरान उन्होंने पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार के बजाय डिप्टी मेयर पद के लिए निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन दाखिल कर दिया था। उस समय भी काफी चर्चा में रहे थे।

    हालांकि रामचंद्र यादव ने कहा था कि वह पार्टी के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन उन्हें भी चुनाव लड़ने का मौका मिलना चाहिए, इसलिए उन्होंने नामांकन दाखिल किया है। चुनाव के दिन उन्होंने अपना नामांकन वापस ले लिया था। उनके इस कदम ने उस समय भी आप के भीतर चल रही नाराजगी को सामने ला दिया था। अब नगर निगम चुनाव से कुछ महीने पहले उनका कांग्रेस में जाना राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। रामचंद्र यादव वार्ड नंबर 15 से पार्षद हैं। आगामी नगर निगम चुनाव के लिए वार्डों के आरक्षण का ड्रॉ 11 सितंबर को होना है।

    ऐसे में वार्ड 15 के आरक्षित होने की संभावना को भी उनके कांग्रेस में जाने की एक बड़ी वजह माना जा रहा है। यदि वार्ड आरक्षित हो जाता है तो रामचंद्र यादव के लिए वहां से दोबारा चुनाव लड़ना संभव नहीं होगा। दूसरी ओर आप में रहते हुए किसी दूसरे वार्ड से टिकट मिलने की संभावना भी उनके लिए आसान नहीं दिखाई दे रही थी। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस में शामिल होने को उनकी सोची-समझी राजनीतिक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि कांग्रेस उन्हें आगामी चुनाव में टिकट देगी या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

    मुनव्वर के बाद अब रामचंद्र
    आप के पार्षद मुनव्वर के कांग्रेस में शामिल होने के बाद ही रामचंद्र यादव के भी कांग्रेस में जाने की चर्चाएं तेज हो गई थीं। मुनव्वर ने जुलाई में कांग्रेस का हाथ थामा था। उनके शामिल होने के बाद कांग्रेस के पार्षदों की संख्या नौ हो गई थी। हालांकि कांग्रेस ने दोनों पार्षदों को एक साथ पार्टी में शामिल कराने के बजाय अलग-अलग समय पर आप को झटका देने की रणनीति अपनाई। अब रामचंद्र यादव के कांग्रेस में शामिल होने के बाद कांग्रेस के पार्षदों की संख्या बढ़कर 10 हो जाएगी।

    2021 में सबसे बड़ी पार्टी थी आप
    2021 के नगर निगम चुनाव में आम आदमी पार्टी 14 पार्षदों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। भाजपा को 12 और कांग्रेस को आठ सीटें मिली थीं, जबकि शिरोमणि अकाली दल के हरदीप सिंह ने एक सीट जीती थी। हरदीप सिंह बाद में आप में शामिल हो गए थे, जिसके बाद निगम में अकाली दल का कोई पार्षद नहीं बचा। इसके बाद आप के पार्षदों के लगातार पाला बदलने से पार्टी की संख्या घटती गई। सुमन शर्मा और पूनम भाजपा में शामिल हुईं, जबकि कई पार्षद कांग्रेस का हाथ थाम चुके हैं।

    मुनव्वर के कांग्रेस में जाने के बाद आप की संख्या और कम हुई और अब रामचंद्र यादव के जाने के बाद आप के पास महज आठ पार्षद रह जाएंगे। वहीं भाजपा और कांग्रेस लगातार आप के पार्षदों में सेंध लगाने में सफल रही हैं। ऐसे में 2026 के नगर निगम चुनाव से पहले दलों के बीच पार्षदों को अपने पाले में लाने की सियासत और तेज होने की संभावना है। कभी 14 पार्षदों के साथ सदन की सबसे बड़ी पार्टी रही आप अब आठ पार्षदों तक सिमट गई है। नेता प्रतिपक्ष का पद भी मुनव्वर के कांग्रेस में जाने के बाद आप के हाथ से निकल चुका है। अब रामचंद्र यादव के जाने से पार्टी को एक और बड़ा झटका लगा है।

    पार्टी     पार्षदों की संख्या –
    भाजपा     17
    कांग्रेस     10
    आम आदमी पार्टी     8
    शिरोमणि अकाली दल     0

    हरदीप सिंह के आप में शामिल होने के बाद से निगम में अकाली दल का कोई पार्षद नहीं है। इसके अलावा चंडीगढ़ के सांसद का सदन में अलग से मतदान अधिकार है।