Category: राज्य

  • तीन राज्यों को जोड़ेगा 88 KM का एक्सप्रेसवे, चंबल पर बनेगा 1600 मीटर पुल

    तीन राज्यों को जोड़ेगा 88 KM का एक्सप्रेसवे, चंबल पर बनेगा 1600 मीटर पुल

    आगरा
     आगरा से ग्वालियर का सफर मात्र 60 मिनट में पूरा होने वाला है। 88 किलोमीटर लंबा, छह लेन का एक्सप्रेसवे तीन राज्यों को जोड़ेगा। यानि उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश को कनेक्टिविटी मिलेगी। आगरा ग्वालियर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे ईधन और समय दोनों की बचत करेगा। अभी यह सफर तय करने में तीन घंटे से अधिक का समय लगता है। चंबल नदी पर 1600 मीटर लंबा हैंगिंग पुल बनेगा। आगरा के 14, धौलपुर राजस्थान और मुरैना मध्य प्रदेश के 30 गांवों से गुजरेगा।

    आगरा से ग्वालियर की दूरी 33 किमी कम हो जाएगी। सिर्फ एक घंटे के अंदर ग्वालियर पहुंचा जा सकेगा। आगरा से ग्वालियर की दूरी 121 किमी है। चार लेन की रोड से इस दूरी को तय करने में अभी दो से ढाई घंटे लगते हैं।

    आगरा में अवंतीबाई चौराहा से मधुनगर होते हुए ग्वालियर हाईवे मुरैना और धौलपुर के आबादी क्षेत्रों से होता हुआ निकलता है, जिसके कारण जाम के हालात बने रहते हैं।
    आगरा-ग्वालियर ग्रीनफील्ड-एक्सप्रेसवे तीन तहसीलों से गुजरेगा।

    47 पुलिया, चार छोटे और पांच बड़े पुल बनेंगे
    आगरा-ग्वालियर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे जिले की तीन तहसीलों से होकर गुजरेगा। तहसील सदर, फतेहाबाद और खेरागढ़ के 15 गांवों की 117.83 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण होगा। ग्वालियर स्थित सुसेरा गांव में वर्तमान ग्वालियर हाईवे से जोड़ा जाएगा। एक्सप्रेस-वे में 47 पुलिया, चार छोटे और पांच बड़े पुल बनेंगे। आगरा में तहसील सदर के तीन, फतेहाबाद के पांच और खेरागढ़ के सात गांवों की कुल 117.83 हेक्टेयर भूमि इस प्रोजेक्ट में ली गई है। आगरा में एक्सप्रेस-वे की लंबाई 22 किमी प्रस्तावित है और इसे ऊंचाई पर बनाया जाएगा। दो से तीन मीटर की दीवार भी बनाई जाएगी। इससे जानवर सीधे एक्सप्रेस-वे पर नहीं पहुंच सकेंगे।

    1.24 लाख पौधे भी लगाए जाएंगे
    पर्यावरण के नजरिए से 1.24 लाख पौधे भी लगाए जाएंगे और उनकी ठीक तरीके से देखभाल की जाएगी। एक्सप्रेसवे का निर्माण खत्म होने से पूर्व चार औद्योगिक जोन चिन्हित कर विकसित किया जाएगा। जोन को एक्सप्रेसवे की सर्विस रोड से जोड़ा जाएगा। इससे वाहनों का आवागमन आसानी से हो सकेगा। जोन बनने से फैक्ट्री लगेंगी और इससे रोजगार के अवसर विकसित होंगे। यह जोन उप्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान में बनेंगे। रास्ते में मुसाफिरों के रुकने और स्वल्पाहार आदि के लिए दो ट्रंपेट भी तैयार किए जाएंगे यानी कि मुख्य एक्सप्रेसवे से अलग रोड निकालकर साइड में शौचालय और रेस्टोरेंट-कैफे जैसी सुविधा रहेगी।

    छह बड़े जंक्शन रहेंगे
    इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे में छह बड़े जंक्शन रहेंगे। यानी जहां से वाहन चढ़ और उतर सकेंगे। इसमें मुरैना, धौलपुर सिटी, धौलपुर में स्टेट हाईवे क्रमांक दो, धौलपुर बाइपास रोड पर महाराजपुरा गांव, आगरा के जाजऊ और आगरा बाइपास की ओर बाद में रहेगा। इसके अलावा, 131 छोटे जंक्शन भी चिह्नित किए गए हैं, जो एक्सप्रेस वे के आसपास के गांवों से गुजरने वाली सड़कें हैं, लेकिन इन सड़कों का प्रवेश एक्सप्रेस वे पर नहीं रहेगा।

    ये भी जानिए
        4613 करोड़ रुपये से बन रहा है ग्वालियर-आगरा एक्सप्रेसवे
        88 किमी लंबा है एक्सप्रेसवे
        121 किमी है वर्तमान फोरलेन हाईवे की लंबाई
        33 किमी कम हो जाएगी आगरा से ग्वालियर की दूरी
        60 मिनट आगरा से ग्वालियर पहुंचने में लगेंगे
        88.400 किमी लंबे एक्सप्रेस वे पर 36 बस स्टॉप भी तैयार किए जाएंगे।
        माल ढुलाई करने वाले ट्रकों के रुकने के लिए अलग से तीन लंबाई रोड का भी प्रस्ताव

    आगरा ही नहीं दिल्ली और देहरादून भी
    अभी ग्वालियर-आगरा फोरलेन हाईवे की लंबाई 121 किमी है। इस नए एक्सप्रेसवे के जरिये आगरा से यमुना एक्सप्रेस-वे पर जा सकेंगे। यमुना एक्सप्रेस वे पर जेवर के पास इंटरचेंज से ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे पर पहुंच सकते हैं। इससे हरिद्वार-देहरादून तक की दूरी कम हो सकेगी। अभी सड़क मार्ग से जाने वाले लोगों को नोएडा, गाजियाबाद होकर ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे पर पहुंचना पड़ता है।

    ग्वालियर से 564 किलोमीटर की दूर है देहरादून
    ग्वालियर से देहरादून तक की दूरी 564 किमी है, लेकिन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे तैयार होने से आगरा की दूरी जहां 33 किलोमीटर कम होगी, तो वहीं ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे होते हुए दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का इस्तेमाल करने पर देहरादून तक की दूरी 39 किमी कम हो जाएगी। दिल्ली से देहरादून की दूरी 249 किमी है, लेकिन ट्रैफिक के चलते देहरादून तक पहुंचने में छह घंटे लगते हैं।

    इकोनॉमिक कॉरिडोर से घट गया समय
    इकोनॉमिक कॉरिडोर से यह दूरी जहां 210 किमी रह गई है। देहरादून तक पहुंचने में सिर्फ ढाई घंटे का समय लगता है। ग्वालियर से देहरादून तक पहुंचने में जहां 10:45 घंटे लगते हैं। ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे बनने से जहां दिल्ली तक तीन घंटे, तो वहीं दिल्ली से देहरादून तक सिर्फ ढाई से तीन घंटे में पहुंच सकेंगे।

     

  • IAS, कारोबारी और नेताओं की जमीन खरीद फंसी, 846 भूखंडों पर होगी कार्रवाई

    IAS, कारोबारी और नेताओं की जमीन खरीद फंसी, 846 भूखंडों पर होगी कार्रवाई

    लखनऊ
    यूपी की राजधानी लखनऊ में सुशांत गोल्फ सिटी में कंसोर्टियम की 1000 करोड़ की जमीन खरीदने वाले 846 प्रभावशाली लोगों की रजिस्ट्री अब निरस्त होगी। कंसोर्टियम के नियमों का उल्लंघन कर करीब 19-19 हजार वर्ग फुट के बड़े भूखंड खरीदने वालों के आवंटन और बैनामे निरस्त कराने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। खास बात यह है कि इन खरीदारों को एलडीए की ओर से किसी तरह का मुआवजा भी नहीं दिया जाएगा। प्रमुख सचिव आवास पी गुरुप्रसाद ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है। अवैध बैनामों को ‘विधि शून्य’ घोषित कराने के लिए सक्षम न्यायालय में कानूनी चुनौती देने को भी कहा है। इन प्रभावशाली लोगों में आईएएस अधिकारियों, कारोबारियों, पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों, राजनेताओं और जनप्रतिनिधियों के शामिल हैं।

    149.459 हेक्टेयर जमीन की बिक्री जांच के घेरे में: कंसोर्टियम की कुल 163.18 हेक्टेयर जमीन में से करीब 149.459 हेक्टेयर जमीन की बिक्री को लेकर सवाल उठे हैं। एलडीए को योजना का हैंडओवर मिलने के बाद इस जमीन की बिक्री और इससे जुड़े बैनामों की जांच कराई जाएगी। कंसोर्टियम से बेचे गए 846 भूखंडों का औसत आकार करीब 19 हजार आठ वर्ग फुट है। इतने बड़े भूखंडों का इस्तेमाल फार्महाउस या निवेश के लिए किए जाने की बात सामने आई है। एलडीए सक्षम न्यायालय में उचित प्रक्रिया के तहत बैनामों को चुनौती देकर निरस्त कराने की कार्रवाई करेगा।

    शासन ने ट्रांजेक्शन एडवाइजर रखने का दिया आदेश: एलडीए अब आईआरपी अथवा एनसीएलटी के माध्यम से परियोजना की देनदारियों और संपत्तियों को हासिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगा। इसके लिए पेशेवर ट्रांजेक्शन एडवाइजर की मदद से संपत्तियों और देनदारियों का अध्ययन कराया जाएगा। इसके बाद परियोजना के टेकओवर की कार्ययोजना तैयार होगी।

    12 गांवों के विवादित भूखंड हैं शामिल
    846 भूखंड लखनऊ के 12 गांवों में हैं। यह सभी सुशांत गोल्फ सिटी टाउनशिप के भीतर हैं। इनमें बरौना में 243, पहाड़नगर टिकरिया में 156, सोनेई कजेहरा में 131, हसनपुर खेवली में 66, दाउदनगर में 64, निजामपुर मजिगांव में 59, माढर मऊ कला में 51, अहमामऊ में 24, मुजफ्फरनगर घुसवल में 22, यूसुफनगर बगियामऊ में 17, हरिहरपुर में आठ और देवामऊ में पांच भूखंड शामिल हैं।

    आईएएस, कारोबारी और नेताओं की खरीद फंसी
    इन 846 बड़े भूखंडों को खरीदने वालों में आईएएस अधिकारियों, कारोबारियों, पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों, राजनेताओं और जनप्रतिनिधियों के शामिल होने की बात सामने आई है। यही वजह है कि शासन ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रमुख सचिव आवास ने एलडीए को आईआरपी व एनसीएलटी के समक्ष मजबूती से पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं। मामला कंसोर्टियम एग्रीमेंट के उल्लंघन और डबल सेलिंग से जुड़ा है। हाईटेक टाउनशिप नीति के तहत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के भूमिधरों की जमीन को कंसोर्टियम व्यवस्था में शामिल किया गया था। व्यवस्था के अनुसार भूमिधर कंसोर्टियम के सदस्य रहते और परियोजना से मिलने वाले लाभ में हिस्सेदार होते। आरोप है कि अंसल बिल्डर की ओर से कंसोर्टियम सदस्यों को जमीन का भुगतान किए जाने के बाद भी कुछ सदस्यों ने उसी जमीन के हिस्से दूसरे लोगों को बेच दिए।

  • जीरो बैलेंस खाते से रियायती लोन तक, राजस्थान के कर्मचारियों-पेंशनर्स को मिलेंगे बड़े फायदे

    जीरो बैलेंस खाते से रियायती लोन तक, राजस्थान के कर्मचारियों-पेंशनर्स को मिलेंगे बड़े फायदे

    जयपुर
    राजस्थान सरकार ने राजकीय कार्मिकों, 70 वर्ष तक की आयु के पात्र पेंशनर्स तथा राज्य स्वायत्तशासी निकायों एवं सार्वजनिक उपक्रमों के कर्मचारियों के लिए कम्पोजिट सैलरी अकाउंट पैकेज (सीएसएपी) लागू किया है। इस पैकेज के माध्यम से लाभार्थियों को एकीकृत एवं सुगम बैंकिंग सेवाओं के साथ वित्तीय एवं बीमा सुरक्षा उपलब्ध होगी। इस पैकेज के माध्यम से लाभार्थियों को एकीकृत एवं सुगम बैंकिंग सेवाओं के साथ वित्तीय एवं बीमा सुरक्षा उपलब्ध होगी। सीएसएपी के लिए 12 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को सूचीबद्ध किया गया है।

    राजस्थान सरकार का महत्वपूर्ण कदम
    पात्र कार्मिक एवं पेंशनर्स अपनी सुविधा और पसंद के अनुरूप एम्पैनल्ड बैंकों में से किसी एक का चयन कर सकते हैं। इसके लिए वे अपने मौजूदा बैंक खाते को सीएसएपी खाते में परिवर्तित करा सकते हैं अथवा नया खाता खुलवाकर पैकेज का लाभ ले सकते हैं। राजस्थान सरकार की यह पहल कार्मिकों एवं पात्र पेंशनर्स के वित्तीय कल्याण, सामाजिक सुरक्षा तथा सुविधाजनक बैंकिंग सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

    जीरो बैलेंस खाते से लेकर रियायती ऋण तक की सुविधाएं
    वित्त विभाग के संयुक्त शासन सचिव हरीश लड्ढा ने कहा कि सीएसएपी के तहत उन्नत बैंकिंग सुविधाओं से युक्त जीरो बैलेंस सैलरी अकाउंट उपलब्ध होगा। एनईएफटी, आरटीजीएस, आईएमपीएस एवं यूपीआई के माध्यम से धन हस्तांतरण की सुविधा निःशुल्क रहेगी। इसके अतिरिक्त आवास, शिक्षा, वाहन एवं व्यक्तिगत आवश्यकताओं के लिए ऋण पर रियायती ब्याज दर, ऋण प्रसंस्करण शुल्क में छूट तथा लॉकर किराए में रियायत जैसी सुविधाएँ भी उपलब्ध होंगी। पारिवारिक बैंकिंग सहित अन्य बैंकिंग सुविधाओं का लाभ भी पैकेज के अंतर्गत मिलेगा।

    दुर्घटना एवं जीवन बीमा के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा
    वित्त विभाग के संयुक्त शासन सचिव हरीश लड्ढा ने कहा कि पैकेज में लाभार्थियों के लिए व्यापक बीमा सुरक्षा का प्रावधान किया गया है। इसके तहत 3.50 करोड़ रुपए तक का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा, 4.00 करोड़ रुपए तक का एयर दुर्घटना बीमा तथा 20 लाख रुपए तक का टर्म लाइफ इंश्योरेंस उपलब्ध होगा। इसके साथ ही स्वयं एवं परिवार के लिए हेल्थ इंश्योरेंस तथा अतिरिक्त टॉप-अप सुविधा भी प्रदान की जाएगी।

    उन्होंने बताया कि सीएसएपी के अंतर्गत उन्नत सुविधाओं वाले डेबिट एवं क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराए जाएँगे। लाभार्थियों को एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस, रिवॉर्ड प्रोग्राम एवं कैशबैक जैसी सुविधाओं का लाभ भी मिलेगा। इसके साथ कार्ड से संबंधित बेहतर डिजिटल सेवाएँ और अन्य बैंकिंग सुविधाएं भी पैकेज का हिस्सा होंगी।

    सूचीबद्ध बैंकों के नाम जानिए
    हरीश लड्ढा ने बताया कि इस कार्य के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, कैनरा बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक, यूको बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र एवं पंजाब एंड सिंध बैंक को सूचीबद्ध किया गया है।

  • वन्यजीव प्रेमियों के लिए खुशखबरी, 1 अक्टूबर से झारखंड में जंगल सफारी

    वन्यजीव प्रेमियों के लिए खुशखबरी, 1 अक्टूबर से झारखंड में जंगल सफारी

    रांची
    झारखंड के जंगलों में रोमांच और वन्यजीवों के करीब जाने का इंतजार अब खत्म होने वाला है। मौसम और तैयारियों ने इस बार सफारी का रास्ता समय पर साफ कर दिया है। वहीं, जंगल पर्यटन को लेकर वन विभाग की तैयारियां सिर्फ सफारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आने वाले वर्षों के लिए भी कई योजनाओं पर काम तेज हो गया है।

    राज्य के जंगलों में होने वाली सफारी एक अक्टूबर से प्रारंभ हो जाएगी। पिछले साल पीटीआर और दलमा में सफारी अक्टूबर के तीसरे सप्ताह से शुरु की गई थी, लेकिन इस साल मौसम साफ रहने और कच्ची मिट्टी के ट्रैक की समय पर मरम्मत हो जाने की वजह से सही समय पर सफारी प्रारंभ हो रही है। इसके लिए आनलाइन बुकिंग भी हो रही है।

    मुख्य वन संरक्षक, वन्य प्राणी एसआर नटेश ने बताया कि जंगल सफारी में वन प्रबंधन ने खुले वाहन से सफारी का रोमांचक प्रयोग किया है। इस साल भी पर्यटकों को बैटरी आधारित नए वाहन से जंगलों का सौंदर्य देखने को मिलेगा। मानसून ब्रेक के दौरान वन विभाग वन्यजीवों के आंकड़े जुटाता है।

    अक्टूबर के दूसरे सप्ताह कर इसकी जानकारी केंद्रीय वन्यजीव प्रबंधन संस्थान को दी जाएगी। दिसंबर में केंद्र सरकार की तरफ से ये आंंकड़े जारी किए जाते हैं।

    नए सफारी पर तेजी से चल रहा काम
    राज्य सरकार ने लातेहार जिले में टाइगर सफारी बनाने की घोषणा की है। इसके लिए वन विभाग की उपलब्ध जमीन को चिह्नित कर लिया गया है। वर्ष 2028 के पहले टाइगर सफारी को प्रारंभ करने की योजना है। नवंबर में केंद्रीय वन्य जीव संस्थान की टीम प्रस्तावित स्थल का दौरा करने आएगी। इसके साथ ही गिरिडीह और दुमका में बनने वाले चिड़ियाघर के लिए भी डीपीआर तैयार की जा रही है।

     

  • लखनऊ में जाम का समाधान, तेलीबाग में 4 लेन फ्लाईओवर को मिली मंजूरी

    लखनऊ में जाम का समाधान, तेलीबाग में 4 लेन फ्लाईओवर को मिली मंजूरी

    लखनऊ
    यूपी की राजधानी लखनऊ में तेलीबाग चौराहे पर रोजाना जाम झेलने वालों को अब राहत मिलने वाली है। यहां चार लेन वाले 858.06 मीटर लंबा फ्लाईओवर बनने जा रहा है। इस फ्लाईओवर के निर्माण को मंजूरी मिल गई है। इसे 145.99 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जाएगा। फ्लाईओवर बन जाने से पांच लाख से अधिक लोगों को जाम से निजात मिलेगी।

    लखनऊ-रायबरेली मार्ग पर स्थित तेलीबाग चौराहा शहर के व्यस्तम चौराहों में से एक है। यहां पर सुबह और शाम पीक ऑवर में लोगों को भीषण जाम का सामना करना पड़ता है। तीज-त्योहारों में तो चौराहे से वाहनों को निकालने में ट्रैफिक पुलिसकर्मियों के पसीने तक छूट जाते हैं। लोगों को आधा-आधा घंटा तक चौराहे पर ही जाम से जूझना पड़ता है। घंटों जाम में जूझने की वजह से बच्चों को स्कूल और बड़ों को आफिस पहुंचने में देरी होती है। इस समस्या को देखते हुए सरोजनीनगर के विधायक राजेश्वर सिंह ने यहां पर फ्लाईओवर बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा था। शासन के निर्देश पर सेतु निगम ने इसका खाका तैयार कर अनुमोदन के लिए भेजा। व्यय वित्त समिति की हुई बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगा दी गई है। सेतु निगम के अधिकारियों ने बताया कि अब शासन से धनराशि स्वीकृति का इंतजार है।

    आगरा एवं कानपुर से आने वाले वाहन निर्बाध निकल सकेंगे : तेलीबाग चौराहे पर फ्लाईओवर बन जाने से आगरा और कानपुर एक्सप्रेस-वे की तरफ से आने वाले वाहन बिना बाधा के चौराहे से निकल सकेंगे। रायबरेली रोड, आलमबाग रोड पर स्थित और पीजीआई की कॉलोनियों सहित कैंटोनमेंट, वृंदावन योजना से रोजाना आने-जाने वालों को सुविधा हो जाएगी।

    दो साल में मिलने लगेगी फ्लाईओवर की सुविधा
    सेतु निगम के अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा वित्तीय वर्ष में निर्माण के लिए शासन से धनराशि आवंटित होगी। धनराशि मिलते ही निर्माण कार्य के लिए निविदाएं आमंत्रित करने सहित अन्य औपचारिकताएं पूरी करने के बाद निर्माण कार्य शुरू होगा। संभावना है कि डेढ़ से दो साल में लोगों को इस फ्लाईओवर की सुविधा मिलने लगेगी।

    पीजीआई के मरीजों को भी राहत मिलेगी
    कानपुर, आगरा के अलावा शहर में आलमबाग, कृष्णा नगर, कैंटोनमेंट आदि क्षेत्रों से पीजीआई जाने वाले मरीजों को राहत मिलेगी। कैंटोनमेंट से रायबरेली रोड और आलबाग व पीजीआई रोड से शहीद पथ तक सीधे निर्बाध रूप से वाहनों का आवागमन सुलभ हो सकेगा। प्रस्ताव में निर्माण के दौरान लखनऊ शहर के पालोहरुखेड़ा, इमलिया बाग समेत आसपास के क्षेत्रों से जुड़े यातायात को भी ध्यान में रखा गया है।

  • यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो-26 में पुलिस की आधुनिक कार्यप्रणाली, तकनीक और सुरक्षा व्यवस्था का हुआ शानदार प्रदर्शन

    यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो-26 में पुलिस की आधुनिक कार्यप्रणाली, तकनीक और सुरक्षा व्यवस्था का हुआ शानदार प्रदर्शन

    ग्रेटर नोएडा

     यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो-26 में उत्तर प्रदेश पुलिस के स्टॉल ने तीसरे वर्ष भी ‘बेस्ट डिस्प्ले अवार्ड’ हासिल किया। ट्रेड शो के हॉल नंबर-4 में लगाए गए यूपी पुलिस के स्टॉल पर पूरे आयोजन के दौरान लाखों की संख्या में विजिटर्स पहुंचे थे। स्टॉल पर योगी सरकार की यूपी पुलिस की आधुनिक कार्यप्रणाली, जनसुरक्षा के लिए इस्तेमाल की जा रही तकनीक और विभिन्न पुलिस सेवाओं की जानकारी दी गई। यह अवार्ड सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा ने प्रदान किया, जिसे पुलिस अधीक्षक साइबर क्राइम, मुख्यालय उत्तर प्रदेश राजेश कुमार यादव तथा प्रभारी मीडिया सेल, यूपी 112 करुणा शंकर सिंह ने ग्रहण किया।

    वर्ष 2024 और 2025 में भी मिला था सम्मान

    यूपी पुलिस के स्टॉल को यह सम्मान लगातार तीसरी बार मिला है। इससे पहले वर्ष 2024 और 2025 में भी ट्रेड शो में यूपी पुलिस के स्टॉल को बेस्ट डिस्प्ले अवार्ड से सम्मानित किया गया था। इस वर्ष भी स्टॉल पर बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी रही और पुलिस की तकनीक एवं सेवाओं को लेकर दर्शकों ने रुचि दिखाई। पुलिस के स्टॉल पर साइबर अपराध से बचाव, यूपी 112 की सेवाओं, आधुनिक पुलिसिंग और जनसुरक्षा में तकनीक के इस्तेमाल को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया। यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो-26 में यूपी पुलिस के स्टॉल को मिला लगातार तीसरा बेस्ट डिस्प्ले अवार्ड पुलिस की आधुनिक कार्यप्रणाली और तकनीक आधारित सेवाओं की प्रदर्शनी का प्रमुख आकर्षण रहा। स्टॉल के माध्यम से आम लोगों को पुलिस की सेवाओं और सुरक्षा व्यवस्था में तकनीक की बढ़ती भूमिका से परिचित कराया गया। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश पुलिस के गौरवशाली इतिहास और बदलती पुलिस व्यवस्था की भी जानकारी दी गई। स्टॉल पर युवाओं और बच्चों ने भी पुलिस की तकनीक और सेवाओं को करीब से जाना।

  • भारत का मूल धर्म है सनातन, इसके बिना राष्ट्र की कल्पना भी नहीं की जा सकती: मुख्यमंत्री

    भारत का मूल धर्म है सनातन, इसके बिना राष्ट्र की कल्पना भी नहीं की जा सकती: मुख्यमंत्री

    गोरखपुर

     गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सनातन, भारत का मूल धर्म है। सनातन के बिना भारत की कल्पना भी नहीं की जा सकती। हमारी कमी यह रही कि हमने अपने आप को विस्मृत कर दिया। हमारे पास सब कुछ था। दुनिया जब अंधकार में जी रही थी, तब सबसे सुसभ्य, सुसंस्कृत और सबसे सुदृढ़ परंपरा भारत के पास मौजूद थी।

    सीएम योगी गोरखनाथ मंदिर में युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 57वीं एवं राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 12वीं पुण्यतिथि समारोह के उपलक्ष्य में मंगलवार शाम श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञानयज्ञ के विराम सत्र पर अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। दिग्विजयनाथ स्मृति भवन सभागार में कथा श्रवण करने तथा व्यासपीठ के समक्ष श्रद्धावनत होने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन्होंने उत्तर प्रदेश की सनातन धर्मनगरियों के मर्म को नहीं पहचाना है, वे उत्तर प्रदेश और भारत को नहीं समझ पाएंगे। जिन लोगों ने अयोध्या की मर्यादा, काशी की चेतना, मथुरा-वृंदावन की भक्ति तथा कुंभनगरी प्रयागराज की सामाजिक समरसता को नहीं जाना, वह उत्तर प्रदेश और भारत को कैसे समझ पाएंगे। 

    गोमाता में है सनातन धर्म की पहचान
    मुख्यमंत्री ने सनातन धर्म में गोमाता की प्रतिष्ठा को विस्तार से रेखांकित करते हुए कहा कि सनातन की पहचान गोमाता में है। हमारे सनातन की परंपरा रही है कि पहला ग्रास गोमाता का होता है। यदि हर सनातनी यह कार्य करता तो गोमाता आज सड़कों पर नहीं विचरतीं। इसी तरह अंतिम ग्रास श्वान का माना गया है। यदि यह कार्य किया जाता तो सड़क पर निराश्रित कुत्ते राहगीरों को शिकार नहीं बनाते।इसे लेकर हमने अपने ऋषि मुनियों की परंपरा का अनुसरण नहीं किया।

    धरती माता को बचाने के लिए गोमाता को बचाना पड़ेगा
    सीएम योगी ने कहा कि धरती माता का एक नाम गोमाता भी है। हमें यदि धरती माता को बचाना है तो गोमाता को भी बचाना पड़ेगा। गोमाता के संरक्षण और संवर्धन के लिए सरकार अपने स्तर से सभी प्रयास कर रही है, लेकिन इसमें नागरिकों को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी पड़ेगी। उन्होंने बताया कि सात हजार से अधिक गोशालाओं के माध्यम से प्रदेश में 16 लाख से अधिक गोवंश का लालन-पालन किया जा रहा है। 

    भारतीय नस्ल की गोमाता का दूध अमृततुल्य
    मुख्यमंत्री ने बताया कि गोमाता और गोवंश के संरक्षण के लिए सरकार निराश्रित गोवंश को रखने पर किसानों को प्रति गोवंश प्रतिमाह 1500 रुपये की आर्थिक सहायता भी देती है। इसी तरह निराश्रित गोआश्रय स्थलों से कुपोषित परिवारों के लिए बियाही गाय और उसके भरण पोषण की धनराशि दी जाती है। सीएम ने कहा कि देसी भारतीय नस्ल की गोमाता का दूध अमृततुल्य होता है। आमजन भी गोशाला के संचालन में भागीदार बनकर पुण्य लाभ ले सकते हैं। उन्होंने आह्वान किया कि गोशाला में गोवंश को गोद लीजिए। उसके अनुरूप व्यवस्था करिए और गोपाष्टमी पर तिलक लगाकर उनका पूजन करिए। ऐसा करने पर आपका घर धन-धान्य से पूर्ण होगा, जीवन सुखमय होगा, सभी प्रकार की आरोग्यता की प्राप्ति होगी और गोमाता के आशीर्वाद से दुख, दरिद्रता नहीं रहेगी।

    हर बीमारी का रामबाण उपचार है देसी गाय
    मुख्यमंत्री ने कैंसर, किडनी और लिवर की खराबी जैसी बीमारियों पर चिंता जताते हुए कहा कि यह सब सिस्टम की गलती का नतीजा है, जिसने रासायनिक उर्वरकों और खतरनाक दवाओं के इस्तेमाल से हर खाद्यान्न को प्रभावित कर दिया है। इसका समाधान सिर्फ उपचार नहीं है। इस समस्या का समाधान भारतीय गोमाता आधारित प्राकृतिक खेती में है। गाय के गोबर से की गई प्राकृतिक खेती से उपजा अन्न उपयोग किया जाएगा तो कैंसर, किडनी व लीवर की खराबी, डायबिटीज जैसी बीमारियां नहीं होगी और तनाव भी नहीं होगा। गंभीर बीमारियों का रामबाण उपचार भारतीय नस्ल की गोमाता हैं, इसलिए हमें गोवंश का संरक्षण और संवर्धन करना होगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि आयुष्मान कार्ड से इलाज के अतिरिक्त, गरीबों की गंभीर बीमारियों के इलाज में उन्होंने अपने विवेकाधीन कोष से 1400 करोड रुपये अलग से दिए हैं।

    कथा व्यास की मुक्त कंठ से सराहना की सीएम योगी ने
    कथा व्यास मलूकपीठाधीश्वर, वृंदावन से पधारे स्वामी श्री राजेंद्रदास द्वाराचार्य की मुक्त कंठ से सराहना करते हुए सीएम योगी ने कहा कि स्वामी जी ने अत्यंत सरलता और सहजता से श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कराया। इस कथा के मध्य में देश के कई राज्यों में भीषण आपदा ने जन जीवन को प्रभावित किया। पर, गोरखपुर में शिवावतार महायोगी गोरखनाथ की पावन भूमि पर कथा व्यास के मुखारविंद से पावन कथा अनवरत श्रद्धाभाव से चलती रही। आपदा भी इसके मार्ग में बाधक नहीं बनी और यही भारत की पहचान है। आपदाओं का सामना करके भी कथा अनवरत ससमय प्रारंभ होती रही और सभी श्रद्धालुओं ने मर्यादा, समता, भक्ति और जीवंतता से कथा का आनंद लिया।

    कथा के विराम पर मुख्यमंत्री, संतजन व यजमानगण ने श्रीमद्भागवत महापुराण और व्यासपीठ की आरती उतारी। इस अवसर पर प्रदेश सरकार के जलशक्तमंत्री स्वतंत्र देव सिंह, मस्तनाथ पीठ अस्थल बोहर रोहतक हरियाणा के महंत एवं राजस्थान विधानसभा के विधायक बालकनाथ, वाराणसी से आए डॉ. रामकमल दास वेदांती, अयोध्या से आए स्वामी रामदिनेशाचार्य, गोरखनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ, कालीबाड़ी के महंत रविंद्रदास सहित कई साधु संत, यजमानगण और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता रही।

  • यूपीआईटीएस 2026 में ₹6,500 करोड़ के 4,400 एमओयू, ₹15,500 करोड़ के संभावित कारोबार का बना नया रिकॉर्ड

    यूपीआईटीएस 2026 में ₹6,500 करोड़ के 4,400 एमओयू, ₹15,500 करोड़ के संभावित कारोबार का बना नया रिकॉर्ड

    ग्रेटर नोएडा

    उत्तर प्रदेश की कला, उद्यमिता, कौशल और कारोबारी सामर्थ्य को वैश्विक मंच प्रदान करने वाले उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) 2026 के चौथे संस्करण का मंगलवार को निवेश, कारोबार और अंतरराष्ट्रीय भागीदारी के नए आयामों के साथ भव्य समापन हुआ। 25 से 29 सितंबर तक इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट, ग्रेटर नोएडा में आयोजित पांच दिवसीय मेगा आयोजन ने उत्तर प्रदेश के उत्पादों, एमएसएमई, निर्यातकों, कारीगरों और उद्यमियों को देश-दुनिया के खरीदारों से सीधे जुड़ने का सशक्त मंच उपलब्ध कराया।

    आयोजन के दौरान लगभग 680 मिलियन अमेरिकी डॉलर यानी करीब ₹6,500 करोड़ मूल्य के 4,400 एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इसके अतिरिक्त, ट्रेड शो के दौरान प्राप्त कारोबारी पूछताछ के आधार पर लगभग ₹15,500 करोड़ के संभावित कारोबार का अनुमान है। ये आंकड़े प्रदेश में निवेश, निर्यात और कारोबारी गतिविधियों के बढ़ते विस्तार को प्रदर्शित करते हैं।

    41,500 बी2बी बैठकें, 5.99 लाख से अधिक विजिटर्स की मौजूदगी

    फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशंस (एफआईईओ) के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष यूपीआईटीएस में कुल 41,500 बी2बी बैठकें दर्ज की गईं। इनमें 13,500 बैठकें रिवर्स बायर-सेलर मीट (आरबीएसएम) क्षेत्र में हुईं, जबकि मुख्य प्रदर्शनी क्षेत्र में लगभग 28,000 कारोबारी संवाद दर्ज किए गए।

    इन बैठकों के माध्यम से देश-विदेश से आए खरीदारों ने उत्तर प्रदेश के उद्यमियों, निर्माताओं और निर्यातकों के साथ सीधे संवाद करते हुए कारोबारी साझेदारियों और संभावित ऑर्डरों की दिशा में कदम बढ़ाए। पांच दिनों में ट्रेड शो में कुल 5,98,693 विजिटर्स और बिजनेस बायर्स की उपस्थिति दर्ज की गई। इनमें 1,74,990 घरेलू बिजनेस बायर्स तथा 4,23,703 सामान्य विजिटर्स शामिल रहे।

    पिछले संस्करण से कारोबार के प्रमुख मानकों में उल्लेखनीय उछाल

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप आयोजित यूपीआईटीएस 2026 ने पिछले संस्करण की तुलना में कारोबार और भागीदारी के लगभग सभी प्रमुख मानकों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की।

    वर्ष 2025 में दर्ज 31,650 बी2बी बैठकों की तुलना में इस वर्ष यह संख्या बढ़कर 41,500 हो गई, जो 31.12 प्रतिशत की वृद्धि है। आरबीएसएम क्षेत्र में विदेशी खरीदारों के साथ बैठकों में 123.1 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई और यह संख्या 6,050 से बढ़कर 13,500 हो गई। मुख्य प्रदर्शनी क्षेत्र में भी बी2बी बैठकों में 9.38 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

    हस्ताक्षरित एमओयू की संख्या 3,900 से बढ़कर 4,400 हो गई, जो 12.82 प्रतिशत की वृद्धि है। वहीं एमओयू के अनुमानित मूल्य में सबसे बड़ी वृद्धि दर्ज की गई। यह ₹2,680 करोड़ (425 मिलियन डॉलर) से बढ़कर ₹6,500 करोड़ (680 मिलियन डॉलर) हो गया, जो 142.54 प्रतिशत की वृद्धि है। कारोबारी पूछताछ में भी 24 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और संभावित कारोबार का अनुमान ₹12,500 करोड़ से बढ़कर ₹15,500 करोड़ पहुंच गया।

    छह देशों की भागीदारी से अंतरराष्ट्रीय आयाम हुआ और व्यापक

    यूपीआईटीएस 2026 की अंतरराष्ट्रीय पहुंच भी पिछले संस्करणों की तुलना में कहीं अधिक व्यापक रही। पिछले संस्करण में रूस एकमात्र पार्टनर देश था, जबकि इस वर्ष रूस, ऑस्ट्रिया, जापान, सिंगापुर, बेलारूस और वियतनाम सहित छह देशों ने पार्टनर कंट्री के रूप में भागीदारी की। विदेशी प्रतिनिधिमंडलों और खरीदारों ने प्रदेश के मैन्युफैक्चरिंग, आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल और एग्री-फूड प्रोसेसिंग सहित विभिन्न क्षेत्रों में विशेष रुचि दिखाई। इससे उत्तर प्रदेश के उद्यमियों को वैश्विक बाजार की आवश्यकताओं को समझने और संभावित साझेदारों के साथ सीधे संवाद का अवसर मिला।

    ओडीओसी ने दिखाई उत्तर प्रदेश की पाक विरासत की समृद्ध तस्वीर

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन कुज़ीन’ (ओडीओसी) पहल यूपीआईटीएस 2026 के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रही। प्रदेश के सभी 75 जिलों की विशिष्ट पाक परंपराओं और स्थानीय स्वाद को एक मंच पर प्रस्तुत करते हुए ओडीओसी ने उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता को कारोबारी संभावनाओं से जोड़ा।

    पांचों दिनों ओडीओसी हॉल में विशेष चहल-पहल रही। आगंतुकों और खरीदारों ने क्षेत्रीय व्यंजनों, पारंपरिक रेसिपी और स्थानीय खाद्य उद्यमों को नजदीक से जाना। सेलिब्रिटी शेफ हरपाल सिंह सोखी सहित अन्य प्रसिद्ध शेफ की मास्टर क्लासेज ने आयोजन को विशेष आकर्षण प्रदान किया। पाक-कौशल, लाइव डेमॉस्ट्रेशन और मनोरंजन के इस संगम ने ओडीओसी को दर्शकों के बीच खासा लोकप्रिय बनाया।

    ओडीओसी ने यह भी रेखांकित किया कि किसी जिले की पाक विरासत केवल सांस्कृतिक पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह फूड एंटरप्रेन्योरशिप, फूड प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, हॉस्पिटैलिटी, पर्यटन, ब्रांडिंग और रिटेल जैसे क्षेत्रों में रोजगार एवं कारोबार की नई संभावनाओं का आधार बन सकती है।

    75 जिलों के उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने का मंच

    यूपीआईटीएस में प्रदेश के 75 जिलों के पारंपरिक शिल्प, हथकरघा, पीतल उत्पाद, कालीन, चमड़ा उद्योग और विशिष्ट कृषि उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध हुआ। एमएसएमई, स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को देश-विदेश से आए खरीदारों के साथ सीधे संवाद और संभावित ऑर्डर हासिल करने का अवसर मिला। इससे यूपीआईटीएस का स्वरूप महज प्रदर्शनी तक सीमित न रहकर व्यावसायिक संपर्क, बाजार विस्तार और वास्तविक कारोबारी अवसरों के सृजन के मंच के रूप में और मजबूत हुआ। नीति एवं उद्योग से जुड़े लगभग 20 नॉलेज सेशंस ने भी उद्यमियों को बदलते कारोबारी परिदृश्य, बाजार की संभावनाओं और नीतिगत विषयों पर विशेषज्ञ संवाद का अवसर दिया।

    कारोबार के साथ संस्कृति और परंपरा का भी संगम

    दिनभर कारोबार और निवेश के संवादों से गुलजार रहने वाला यूपीआईटीएस 2026 हर शाम उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के रंगों से भी सराबोर रहा। पांच दिवसीय आयोजन में शास्त्रीय, लोक, भक्ति और समकालीन प्रस्तुतियों की विविध श्रृंखला ने देश-विदेश से आए आगंतुकों को प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता से परिचित कराया। लोक संगीत, कथक, मथुरा के लोकनृत्य, ढेठिया, राई और थारू जनजातीय नृत्य, पखावज एवं सितार वादन, सुगम संगीत, आल्हा गायन, भजन और सूफी संगीत के साथ सेलिब्रिटी कलाकारों और म्यूजिकल बैंड की प्रस्तुतियों ने आयोजन को सांस्कृतिक गरिमा प्रदान की।

    समापन दिवस पर ओम प्रकाश दुबे के भजन गायन, गोरखपुर के राकेश उपाध्याय के लोकगीत गायन और गाजियाबाद की सुश्री मिताली सैनी की कथक प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। इसके बाद श्रीराम सांखला द्वारा कोरियोग्राफ किए गए ‘कलर्स ऑफ इंडिया’ ने पांच दिवसीय सांस्कृतिक यात्रा को यादगार समापन प्रदान किया।

    युवा सहभागिता ने बढ़ाई आयोजन की जीवंतता

    यूपीआईटीएस 2026 में छात्र और युवा भागीदारी भी आयोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा रही। युवाओं ने क्विज, मॉडल यूनाइटेड नेशंस (एमयूएन), माइम, कला एवं संस्कृति गतिविधियों, साइबर सुरक्षा एवं सड़क सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रमों और बैटल ऑफ बैंड्स में सक्रिय सहभागिता की। दिल्ली-एनसीआर के स्कूलों की भागीदारी ने आयोजन में नई ऊर्जा का संचार किया। विद्यार्थियों को उद्योग, नवाचार, रचनात्मकता और व्यावहारिक कारोबारी परिवेश से परिचित होने का अवसर मिला।

    उत्तर प्रदेश की नई कारोबारी पहचान का वैश्विक मंच

    यूपीआईटीएस 2026 के चौथे संस्करण का समापन केवल आंकड़ों और फुटफॉल की उपलब्धियों के साथ नहीं हुआ, बल्कि इसने उत्तर प्रदेश की बदलती कारोबारी पहचान की व्यापक तस्वीर भी प्रस्तुत की। एक ही मंच पर सरकारी नीतियों, निवेश, उद्यमिता, निर्यात, अंतरराष्ट्रीय सोर्सिंग, तकनीक, परंपरागत शिल्प, खान-पान और संस्कृति का संगम देखने को मिला। 25 सितंबर से शुरू हुई पांच दिवसीय कारोबारी और सांस्कृतिक यात्रा 29 सितंबर को अपने समापन तक निरंतर गतिशील रही। ₹6,500 करोड़ के एमओयू, ₹15,500 करोड़ के संभावित कारोबार, 41,500 बी2बी बैठकों और करीब 5.99 लाख फुटफॉल के साथ यूपीआईटीएस 2026 ने उत्तर प्रदेश के उत्पादों और प्रतिभाओं को वैश्विक बाजार से जोड़ने की दिशा में एक सशक्त मंच के रूप में अपनी पहचान को और विस्तार दिया।

  • बढ़ेगी दिव्यांगजन की जीवन सुगमता, सीएम योगी करेंगे उपकरण वितरण

    बढ़ेगी दिव्यांगजन की जीवन सुगमता, सीएम योगी करेंगे उपकरण वितरण

    गोरखपुर

    समान अवसर और पूरा सम्मान देकर दिव्यांगजन के सशक्तीकरण और कल्याण के लिए क्रियाशील योगी सरकार बड़े पैमाने पर दिव्यांगजन के लिए आवश्यक कृत्रिम अंग और सहायक उपकरणों का वितरण करती है। इसी क्रम में दिव्यांगजन की जीवन सुगमता बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार (30 सितंबर) को गोरखपुर में कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण वितरण समारोह में सम्मिलित होंगे। समारोह में 509 दिव्यांगजन को समाज के मुख्य धारा से जोड़ने के लिए विभिन्न प्रकार के 664 सहायक उपकरणों का वितरण किया जाएगा।

    उपकरण वितरण का यह समारोह सिविल लाइंस स्थित गोरखपुर क्लब में दोपहर बाद होगा। इसमें दिव्यांगजन को उनकी दिव्यांगता के अनुकूल करीब सवा करोड़ रुपये के उपकरण वितरित किए जाएंगे। समारोह में 127 दिव्यांगजन को मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल, 25 को ई-ट्राईसाइकिल, 70 को ट्राईसाइकिल, 155 दिव्यांगजन को 319 स्मार्ट केन एवं ब्रेल किट, 90 को हियरिंग एड, 5 को स्मार्टफोन, 1 को ब्रेल लिपि की गीता, 1 को ब्रेल लिपि की रामायण, 10 को कृत्रिम अंग, 20 को वयोश्री योजना का लाभ, और 5 को पाठ्य पुस्तकों का वितरण किया जाएगा।

  • 7500 आबादी पर बनेंगी नई पंचायतें, बिहार पंचायत चुनाव अब 2027 में संभव

    7500 आबादी पर बनेंगी नई पंचायतें, बिहार पंचायत चुनाव अब 2027 में संभव

     पटना
     बिहार(Bihar News) में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों(Bihar Panchayat Chunav) के समय पर आयोजन पर फिलहाल रोक लग गई है। राज्य सरकार द्वारा पंचायतों और वार्डों की सीमाओं के पुनर्गठन (परिसीमन) और नए प्रशासनिक नियमों के लागू होने के कारण चुनाव प्रक्रिया में देरी हो रही है।

    इस चुनावी प्रक्रिया के पिछड़ने की मुख्य वजह राज्य में व्यापक स्तर पर चल रहा परिसीमन का काम है। सरकार की योजना के अनुसार, लगभग 7,500 की जनसंख्या के आधार पर एक नई पंचायत का गठन किया जा रहा है। इस बड़े बदलाव से राज्य भर की पंचायतों और उनके वार्डों के ढांचे में महत्वपूर्ण फेरबदल होना तय माना जा रहा है।

    पंचायत चुनाव नए आरक्षण रोस्टर पर
    परिसीमन के अलावा, चुनाव से जुड़े प्रशासनिक और कानूनी मापदंडों को पूरा करने में भी समय लग रहा है। इस बार पंचायत चुनाव नए आरक्षण रोस्टर और तीसरे चक्र के पदवार आरक्षण नियमों के तहत आयोजित किए जाने हैं। इसके तहत जिन सीटों पर लगातार दो बार से आरक्षण लागू था, वहां के समीकरण अब बदल जाएंगे।

    इसके साथ ही, पिछड़े वर्ग के आरक्षण को पारदर्शी बनाने के लिए गठित डेडिकेटेड कमीशन (समर्पित आयोग) की रिपोर्ट और आवश्यक सरकारी मंजूरियां हासिल करने में प्रशासनिक समय लग रहा है।

    अगले साल होगा पंचायत चुनाव
    इन सभी तकनीकी औपचारिकताओं, आपत्ति-निवारण और नए रोस्टर की मंजूरी के कारण चुनावी शेड्यूल आगे खिसक गया है। अधिकारियों के मुताबिक, सभी प्रक्रियाओं को पूरा करके चुनाव कराना अब अगले साल (2027) तक संभव हो पाएगा।

    इस फैसले से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे भावी प्रत्याशियों का इंतजार बढ़ गया है, जबकि जमीनी स्तर पर प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखने की तैयारियां चल रही हैं।