Category: राज्य

  • त्योहारों में घर जाना महंगा, जयपुर एयरपोर्ट से फ्लाइट टिकट के दाम आसमान पर

    त्योहारों में घर जाना महंगा, जयपुर एयरपोर्ट से फ्लाइट टिकट के दाम आसमान पर

    जयपुर
    त्योहारों पर घर जाना है? जाइए जरूर, बस टिकट बुक करने से पहले जेब को समझा दीजिए कि इस बार सफर थोड़ा 'भावुक' करने वाला है। दिवाली अभी दूर हैं, लेकिन उसकी महंगाई ने जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पहले ही दस्तक दे दी है। श्राद्ध, नवरात्र, दशहरा, करवाचौथ, दिवाली और छठ… लगातार त्योहारों ने हवाई यात्रा की मांग बढ़ाई तो एयरलाइंस ने किराए का मीटर भी तेज कर दिया।

    जयपुर से कई रूट पर सामान्य दिनों की तुलना में किराया डेढ़ से तीन गुना तक बढ़ गया है। यानी त्योहारों की खरीदारी शुरू होने से पहले ही टिकट ने बजट बिगाड़ दिया। ट्रैवल एजेंट्स के अनुसार इस बार त्योहारों का सिलसिला लगातार बना हुआ है। श्राद्ध, नवरात्र, दशहरा, दिवाली और छठ के दौरान देशभर में रह रहे प्रवासी राजस्थानियों का घर आना-जाना बढ़ेगा। पर्यटकों की आवाजाही भी तेज रहेगी।

    ज्यादातर प्रमुख ट्रेनें पैक, स्पेशल ट्रेनों में भी वेटिंग
    उधर, त्योहारी सीजन में जयपुर से संचालित होने वाली ज्यादातर प्रमुख ट्रेनें अभी से पैक हो चुकी हैं। कई रूटों पर नो रूम की स्थिति बन गई है। रेलवे की ओर से घोषित स्पेशल ट्रेनों में भी अब लंबी वेटिंग शुरू हो गई है।

    छह से आठ नवंबर के बीच किराए की पड़ताल में सामने आई तस्वीर
    जयपुर-मुंबईः
    जयपुर से मुंबई का हवाई किराया 14 हजार रुपए तक पहुंच गया है। वहीं 5 नवंबर को मुंबई से जयपुर का न्यूनतम किराया 14 हजार और अधिकतम 18 हजार रुपए से अधिक है। सामान्य दिनों में यह किराया 6 से 7 हजार रुपए के बीच रहता है।

    जयपुर-पुणेः जयपुर से पुणे का किराया 10,559 रुपए से शुरू होकर 12 हजार रुपए तक पहुंच गया है। वहीं पुणे से जयपुर का किराया 20 हजार रुपए तक पहुंच गया। 9 नवंबर को दोपहर 3 बजे रवाना होने वाली एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट का किराया 20,230 रुपए दर्ज किया गया। अन्य फ्लाइट्स भी 13 हजार रुपए तक किराया वसूल रही हैं।

    जयपुर-कोलकाताः 6 नवंबर की बुकिंग पर जयपुर से कोलकाता का न्यूनतम किराया 10 हजार है, जो 17 हजार रुपए तक पहुंच गया है। कोलकाता से जयपुर आने वाले यात्रियों को किराए में कुछ राहत मिल रही है।

    जयपुर-दिल्लीः 5 नवंबर की बुकिंग पर जयपुर से दिल्ली का अधिकतम हवाई किराया 14 हजार रुपए तक पहुंच गया है, जो सामान्य किराए से करीब चार गुना अधिक है।

    गत वर्ष की तुलना में महंगा हुआ सफर
    गत वर्ष की तुलना में इस बार हवाई किराया अधिक महंगा है। पिछले वर्ष इन दिनों जयपुर से मुंबई का सामान्य किराया 5,190 से 5,506 रुपए के बीच था, जबकि वर्तमान में सामान्य किराया 6,744 रुपए तक पहुंच चुका है। जयपुर से कोलकाता, पुणे, अहमदाबाद समेत कई रूटों पर भी किराए में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। प्रमुख वजह एयर ट्रैफिक फ्यूल की बढ़ी हुई दरों को माना जा रहा है।

  • PR धान का रकबा घटा, 9.60 लाख किसानों ने कराया पंजीकरण; पोर्टल पर डाटा मिसमैच बनी चुनौती

    PR धान का रकबा घटा, 9.60 लाख किसानों ने कराया पंजीकरण; पोर्टल पर डाटा मिसमैच बनी चुनौती

    कैथल
    प्रदेश के डेढ लाख किसानों ने पीआर धान की खेती छोड़ दी है। पिछली बार 11.07 लाख किसानों ने 73.48 लाख एकड़ का पंजीकरण मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर कराया था, जबकि इस बार 9,60,874 किसानों ने 57,75,937 एकड़ का पंजीकरण कराया। जो किसान 31 जुलाई तक पंजीकरण नहीं करा पाए, उनके लिए सरकार ने 21 से 29 सितंबर तक पोर्टल फिर खोला था।

    सात दिनों में सिर्फ 5874 किसानों ने 38 हजार एकड़ का पंजीकरण कराया। अब तहसील और एसडीएम कार्यालय में जांच का काम चल रहा है। काफी किसानों का अब भी डाटा मिसमैच हो रहा है। जिस खेत में धान की फसल खड़ी है, पोर्टल पर उसमें गन्ना लहलहा रहा है। 30 सितंबर तक सत्यापन करना है।

    यह चुनौती है। भिवानी हिसार में रकबा कब
    कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पंजीकरण का वेरिफिकेशन चल रहा है, अब अगले दो से तीन दिनों में एरिया का डाटा बढ़ सकता है। धान की सुचारू खरीद के लिए 883 सीसीटी कैमरे लगाए गए हैं, कैमरे मंडियों के गेटों पर लगाए गए हैं। पिछले साल की अपेक्षा भिवानी और हिसार में अब भी सबसे कम पंजीकरण हुआ है। हिसार में 2025 में 6.86 लाख एकड़ का पंजीकरण हुआ था, इस बार अब तक 3074.82 एकड़ का पंजीकरण हुआ है।

    प्रमुख जिलों का पंजीकरण ब्योरा मेरी फसल मेरा ब्योरा
    पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार अंबाला में 37,507 किसानों ने 2,29345.37 एकड़ फसल का पंजीकरण कराया। इसी प्रकार भिवानी में 70,402 किसानों ने 4,06118.30 एकड़, चरखीदादरी में 43,077 किसानों ने 2,05300 एकड़, फतेहबाद में 59301 किसानों ने 4,17,768.92 एकड़, हांसी में 27,345 किसानों ने 1,63,934.39 एकड़, हिसार में 54,900 किसानों ने 3,07,434.82 एकड़, झज्जर में 31,747 किसानों ने 2,01,481.72 एकड़, जींद में 38,659 किसानों ने 3,72,491.25 एकड़, कैथल में 50,825 किसानों ने 3,89,490.61 एकड़।

    करनाल में 54,002 किसानों ने 4,07,495.11 एकड़, कुरुक्षेत्र में 45,548 किसानों ने 3,01,091.25 एकड़, पानीपत में 19,727 किसानों ने 1,50,290.30 एकड़, रोहतक में 29,853 किसानों ने 1,75,994.75 एकड़, सिरसा में 91,088 किसानों ने 6,71,925.49 एकड़, सोनीपत में 35,315 किसानों ने 2,15,959.85 और यमुनानगर में 46,382 किसानों ने 2,38,738.81 एकड़ पीआर धान का पंजीकरण कराया है।

    दो लाख एकड़ मिसमैच, गड़बड़ाया हिसाब
    पिछले दिनों पटवारियों की हड़ताल के कारण किसान के सामने समस्या खड़ी हो गई है। सत्यापन नहीं होने से पोर्टल पर डाटा मिसमैच हो रहा है। जिस खेत में धान की फसल खड़ृी है पोर्टल पर उसमें गन्ने की फसल दिखाई है। इसी मिसमैच के कारण गेटपास नहीं कट पा रहे हैं। बड़ी संख्या में किसान मंडियों में गेट पास कटवाने पहुंच रहे हैं, लेकिन पोर्टल पर उनकी फसल मिसमैच दिखाई दे रही है। अकेले यमुनानगर में ही करीब एक लाख 10 हजार एकड़ से अधिक रकबा मिसमैच है।

    हड़ताल के कारण आई दिक्कत
    किसानों की बोई फसल का सही ब्योरा दर्ज करने के लिए हर वर्ष गिरदावरी कराई जाती है। सामान्य तौर पर राजस्व विभाग के पटवारी 10 से 15 सितंबर तक खेतों में जाकर यह कार्य पूरा करते हैं। इस बार निर्धारित अवधि में गिरदावरी नहीं हो सकी। बाद में आनन-फानन में गिरदावरी कराई, लेकिन खामियां रह गईं

  • गड्ढे और जाम से परेशान रांची के लोग, जमीन-पुल के पेंच में अटका सड़क निर्माण

    गड्ढे और जाम से परेशान रांची के लोग, जमीन-पुल के पेंच में अटका सड़क निर्माण

     रांची
     बड़गाईं चौक से लेम चौक तक की जर्जर सड़क के दिन बहुरने का इंतजार चार साल बाद भी खत्म नहीं हुआ है। करीब चार किलोमीटर लंबी इस सड़क के चौड़ीकरण, मजबूतीकरण और पुनर्निर्माण के लिए करीब 122 करोड़ रुपये का डीपीआर तैयार है।

    टेंडर की प्रक्रिया भी हो चुकी है, लेकिन जमीन अधिग्रहण और पुल निर्माण से जुड़े मामले अटकने के कारण सड़क निर्माण अब तक शुरू नहीं हो सका है। नतीजा यह है कि रोजाना इस मार्ग से गुजरने वाले हजारों लोगों को गड्ढों, धूल और जाम के बीच आवाजाही करनी पड़ रही है।

    बड़गाईं से लेम तक सड़क की हालत खराब
    बड़गाईं चौक से लेम चौक तक सड़क कई जगह टूट चुकी है। बारिश के दिनों में गड्ढों में पानी भर जाने से स्थिति और खराब हो जाती है। दोपहिया वाहन चालकों को सबसे अधिक परेशानी होती है। सड़क की खराब स्थिति के कारण वाहनों की रफ्तार भी प्रभावित होती है। महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग होने के बावजूद लंबे समय से इसकी मरम्मत और पुनर्निर्माण का इंतजार किया जा रहा है।

    122 करोड़ से होना है सड़क का निर्माण
    पथ निर्माण विभाग ने इस मार्ग के चौड़ीकरण और मजबूतीकरण के साथ पुनर्निर्माण की योजना तैयार की है। विभागीय दस्तावेज के अनुसार सड़क की लंबाई करीब 3.750 किलोमीटर है। इसमें बड़गाईं से लेम होते हुए आगे बोरेया तक सड़क का विकास प्रस्तावित है।

    वर्तमान में सड़क की चौड़ाई अलग-अलग हिस्सों में करीब 3.75 से सात मीटर तक है। परियोजना के तहत सड़क को सात मीटर चौड़ा किया जाना है।

    सड़क के साथ करीब 3750 मीटर पक्की नाली बनाने की भी योजना है। परियोजना में चार नए कलवर्ट और एक नए पुल के निर्माण का भी प्रस्ताव है। दस्तावेज के अनुसार सड़क के लिए करीब 10 से 12 मीटर चौड़ाई में भूमि उपलब्ध कराने की जरूरत है।

    जमीन नहीं मिली तो कैसे बनेगी सड़क
    सबसे बड़ी अड़चन भू-अर्जन को लेकर है। सड़क निर्माण के लिए जिन हिस्सों में अतिरिक्त जमीन की जरूरत है, वहां भू-अर्जन की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण निर्माण एजेंसी काम आगे नहीं बढ़ा पा रही है। इसके अलावा प्रस्तावित पुल से जुड़ा मामला भी अभी लंबित है। ऐसे में टेंडर होने के बावजूद जमीन और पुल निर्माण से जुड़े मामलों का समाधान नहीं होने के कारण सड़क पर काम शुरू नहीं हो सका है।

    चार साल से लोग कर रहे इंतजार
    वार्ड की पूर्व पार्षद हुस्ना आरा ने बताया कि सड़क निर्माण की योजना बनने और टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ने के बावजूद धरातल पर काम नहीं होने से उनकी परेशानी बढ़ती जा रही है। हर दिन इस मार्ग से बड़ी संख्या में लोग आवागमन करते हैं।

    सड़क की स्थिति खराब होने से वाहन चालकों को समय के साथ अतिरिक्त खर्च भी उठाना पड़ रहा है। लोगों की मांग है कि भू-अर्जन और पुल निर्माण से जुड़े मामलों का जल्द समाधान कर निर्माण शुरू कराया जाए, ताकि 122 करोड़ की योजना कागज से निकलकर जमीन पर दिखाई दे सके।

  • नौ साल बाद चुकाया जाएगा चुनावी बकाया, पटना जिला प्रशासन को मिले ₹4.85 लाख

    नौ साल बाद चुकाया जाएगा चुनावी बकाया, पटना जिला प्रशासन को मिले ₹4.85 लाख

    पटना
     नगरपालिका आम चुनाव हुए नौ साल बीत गए, लेकिन चुनाव के दौरान किए गए काम का भुगतान अब जाकर होगा।

    वर्ष 2017 में हुए नगरपालिका आम निर्वाचन से जुड़े विभिन्न कार्यों के बकाये भुगतान के लिए पटना जिला प्रशासन को 4.85 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है।

    नगर विकास एवं आवास विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में बकाया भुगतान की मंजूरी दी है। विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार, नगर पालिका चुनाव 2017 के दौरान एजेंसियों ने कई तरह के काम किए थे।

    जिला निर्वाचन अधिकारी ने क‍िया था भुगतान का अनुरोध
    इन कार्यों से जुड़े कुछ बिल का भुगतान लंबित रह गया था। जिला निर्वाचन पदाधिकारी -सह-जिलाधिकारी, पटना की ओर से बकाया भुगतान के लिए राशि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था।

    इसके बाद विभाग ने कुल 4.85 लाख रुपये की स्वीकृति दी है। यह पूरी राशि पटना जिला निर्वाचन पदाधिकारी को आवंटित की जाएगी।

    इसके लिए सीएफएमएस के माध्यम से राशि उपलब्ध कराई जाएगी। विभाग के स्तर पर इस संबंध में आदेश जारी कर दिया गया है।

     

  • औद्योगिक क्षेत्रों की बदहाल सड़कों पर एक्शन, लखनऊ DM ने गठित की जांच टीम

    औद्योगिक क्षेत्रों की बदहाल सड़कों पर एक्शन, लखनऊ DM ने गठित की जांच टीम

     लखनऊ
     औद्योगिक क्षेत्रों में जलभराव और खराब सड़कों की समस्या पर जिलाधिकारी विशाख जी ने नाराजगी जाहिर की है। मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में हुई जिला स्तरीय उद्योग बंधु की बैठक में अमौसी-नादरगंज और सरोजनीनगर औद्योगिक क्षेत्र में जल निकासी और सड़कों की बदहाली व अन्य सुविधाओं को लेकर समीक्षा की गई। डीएम ने संबंधित विभागों को समस्याओं के शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए।

    सरोजनीनगर औद्योगिक क्षेत्र में लखनऊ-कानपुर मार्ग के किनारे एनएचएआई की ओर से बनाए जा रहे ड्रेन का लेवल औद्योगिक क्षेत्र के ड्रेन से ऊंचा होने के कारण जल निकासी प्रभावित होने का मामला बैठक में उठा। पूर्व में गठित संयुक्त समिति की रिपोर्ट शासन को बजट स्वीकृति के लिए भेजी गई थी। नगर निगम ने बताया कि ड्रेनेज व्यवस्था के विकास का प्रस्ताव स्वीकृत हो गया है। इसका कार्य सीएंडडीएस की ओर से कराया जाएगा।

    एसटीपी के दौरान खराब हुई सड़क, जांच के आदेश
    उद्यमियों ने औद्योगिक क्षेत्र की आंतरिक सड़कों पर गड्ढों और जलभराव की समस्या उठाई। इससे माल ढुलाई और औद्योगिक इकाइयों के कामकाज पर असर पड़ने की बात कही गई। यूपीसीडा ने बताया कि एसटीपी निर्माण के लिए पाइपलाइन डालने के दौरान सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। इस पर डीएम ने कहा कि एसटीपी निर्माण के स्वीकृत बजट में ही सड़क रेस्टोरेशन का प्रावधान किया जाना था।

    मामले की जांच के लिए लोक निर्माण विभाग और जल निगम के अधिशासी अभियंताओं की संयुक्त टीम गठित की गई। टीम को एसटीपी के मूल बजट में सड़क रेस्टोरेशन के लिए स्वीकृत धनराशि और जल निगम द्वारा अब तक सड़क की मरम्मत पर खर्च की गई राशि का विवरण जुटाकर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए।

    नादरगंज-अमौसी औद्योगिक क्षेत्र से सुनहरा रोड होते हुए रिंग रोड तक जाने वाली 5.7 किलोमीटर सड़क के चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण का मामला भी बैठक में उठा। लोक निर्माण विभाग ने बताया कि सड़क को कार्ययोजना में शामिल कर लिया गया है। बैठक में चर्चा हुई कि तालकटोरा औद्योगिक क्षेत्र में नाली निर्माण का काम अभी शेष है।

    इसके अलावा निवेश मित्र पोर्टल 2.0 और 3.0 पर लंबित प्रकरणों की समीक्षा करते हुए डीएम ने संबंधित विभागों के नोडल अधिकारियों को साप्ताहिक समीक्षा करने और निर्धारित समय में मामलों का निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। खासकर हाउसिंग, फिल्म बंधु, कृषि, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, प्रदूषण और विद्युत विभाग से जुड़े समय सीमा पार कर चुके मामलों पर विशेष ध्यान देने को कहा गया।

  • पंजाब में नगर निगम भर्ती नियमों में बड़ा बदलाव, सेक्रेटरी के 90% पद प्रमोशन से भरेंगे

    पंजाब में नगर निगम भर्ती नियमों में बड़ा बदलाव, सेक्रेटरी के 90% पद प्रमोशन से भरेंगे

    चंडीगढ़
    पंजाब सरकार ने नगर निगमों में कारपोरेशन सेक्रेटरी बनने के लिए पदोन्नति के नियम बदल दिए हैं। अब इस पद के 90 प्रतिशत पद कारपोरेशन सुपरिंटेंडेंट ग्रेड-2 के कर्मचारियों में से पदोन्नति करके भरे जाएंगे। वहीं 10 प्रतिशत पद सुपरिंटेंडेंट (सैनिटेशन) के कर्मचारियों को पदोन्नति देकर भरे जाएंगे। स्थानीय निकाय विभाग ने इस संबंध में 28 सितंबर को अधिसूचना जारी की है।

    नए नियम के अनुसार कारपोरेशन सेक्रेटरी के 90 प्रतिशत पदों पर पदोन्नति पाने के लिए कर्मचारी का ग्रेजुएट होना जरूरी होगा। साथ ही उसके पास संबंधित सेवा में कम से कम चार साल का अनुभव होना चाहिए। यह ग्रेजुएशन किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी या संस्थान से होना जरूरी है।

    इसी तरह 10 प्रतिशत पद सुपरिंटेंडेंट (सैनिटेशन) के कर्मचारियों के लिए रखे गए हैं। इस श्रेणी में पदोन्नति के लिए भी ग्रेजुएशन और चार साल का अनुभव जरूरी होगा। यानी नगर निगमों में सेक्रेटरी के पद पर पहुंचने के लिए अब दोनों श्रेणियों के कर्मचारियों के लिए शैक्षणिक योग्यता और अनुभव की शर्त पूरी करनी होगी।

    1978 के नियम में संशोधन
    सरकार ने यह बदलाव पंजाब म्यूनिसिपल कारपोरेशन सर्विसेज के वर्ष 1978 में बनाए गए भर्ती और सेवा नियमों में किया है। इसके लिए नियमों के अपेंडिक्स-बी में बदलाव किया गया है। सरकार का यह संशोधन सरकारी गजट में प्रकाशित होने के साथ ही लागू हो गया है।

    सुपरिंटेंडेंट सैनिटेशन के लिए भी तय पद
    नए नियमों से यह भी साफ हो गया है कि कारपोरेशन सेक्रेटरी के पद पर पदोन्नति के लिए कितने पद किस कैडर से भरे जाएंगे। कुल पदों में से 90 प्रतिशत का हिस्सा सुपरिंटेंडेंट ग्रेड-2 और 10 प्रतिशत हिस्सा सुपरिंटेंडेंट (सैनिटेशन) के लिए तय किया गया है।

    स्थानीय निकाय विभाग के सचिव घनश्याम थोरी, आईएएस की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि नियमों में यह बदलाव सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बाद किया गया है। यह संशोधन पंजाब म्यूनिसिपल कारपोरेशन एक्ट, 1976 के तहत सरकार को मिले अधिकारों के आधार पर किया गया है।

  • धान का भाव ₹4345 तक पहुंचा, लेकिन सरकारी खरीद में अड़चन; राइस मिलर्स ने बढ़ाई चिंता

    धान का भाव ₹4345 तक पहुंचा, लेकिन सरकारी खरीद में अड़चन; राइस मिलर्स ने बढ़ाई चिंता

    पानीपत
    पीआर धार की मंगलवार को सरकारी खरीद शुरू हो गई। ढांड मंडी में 800 क्विंटल धान की खरीद हुई। धान (पीआर) सामान्य का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,441 रुपये प्रति क्विंटल और धान (पीआर) ग्रेड "ए" का एमएसपी 2,461 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया हैं।

    कुरुक्षेत्र में पहले दिन धान की खरीद शुरू होते ही 13,720 क्विंटल धान की खरीद हुई। इसमें से 1200 क्विंटल थानेसर मंडी में खरीदा गया है। यमुनानगर में पहले दिन 13 अनाज मंडियों में केवल 3400 क्विंटल की खरीद हो पाई है।

    अधिक नमी के कारण खरीद कम हो पाई। मिसमैच के कारण पोर्टल वेरिफाई न होने के कारण कई किसानों के गेट पास नहीं कट पा रहे हैं। कई मंडियों में पोर्टल में गड़बड़ी भी आड़े आई।

    करनाल में भी 470 क्विंटल की खरीद हुई। जींद और पानीपत में खरीद नहीं हुई। सिरसा मंडी में अभी पीआर धान की आवक नहीं हुई है।

    प्राइवेट खरीदार लगा रहे 2200 से 2250 रुपये प्रति क्विंटल तक भाव
    कई किसान तो ऐसे हैं, जो एक सप्ताह से मंडियों में धान लेकर बैठे हैं, लेकिन खरीद नहीं हो पा रही। निजी बिक्री में भाव 2200 से 2250 रुपये प्रति क्विंटल मिलता है। सरकारी भाव 2461 रुपये प्रति क्विंटल है।

    1509 के भाव 4345 रुपये प्रति क्विंटल पहुंचे कैथल अनाज मंडी में 1509 धान के मिल रहे भाव से किसान खुश नजर आ रहे हैं। मंगलवार को अब तक के सबसे ज्यादा भाव 4345 रुपये प्रति क्विंटल भाव 1509 के मिले हैं, जिससे किसानों के चेहरे पर खुशी नजर आ रही है।

    किसानों ने बताया कि इससे पहले पीआर धान के भाव इतने कभी भी नहीं मिले हैं। पिछले साल की अपेक्षा इस बार 1200 से 1300 रुपये प्रति क्विटंल भाव ज्यादा मिल रहे हैं। पिछले साल 2800 से 3000 रुपये प्रति क्विंटल भाव मिले थे।

    धान एक, नमी मीटर में नमी की मात्रा अलग अलग
    करनाल मंडी में निरीक्षण के दौरान डीसी ने मंडी में पहुंचकर धान की ढेरियों पर नमी मापक यंत्र से नमी की जांच करवाई। एक माइश्चर मीटर में धान की नमी 21 प्रतिशत तो दूसरे माइश्चर मीटर में नमी की मात्रा 19 प्रतिशत आई। डीसी ने माइश्चर मीटर ठीक कराने के निर्देश दिए। असंध के विधायक योगेंद्र राणा ने मंगलवार को असंध की नई अनाज मंडी का दौरा कर धान खरीद कार्य शुरू करवाया।

    जींद-पानीपत में राइस मिलर्स ने नहीं कराया रजिस्ट्रेशन
    धान की पेराई के लिए जींद और पानीपत में किसी भी राइस मिलर्स ने रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है। सरकार के सामने चुनौती खड़ी हो गई है। यदि धान खरीद भी लिया तो उठान कैसे होगा। कैथल में मिलर्स मांगें पूरी करने की मांग कर रहे हैं, जबकि करनाल में आढ़ती बकाया आढ़त मांग रहे हैं।

     

  • दिल्ली-NCR की सफाई होगी हाईटेक, 70 स्वीपिंग मशीनों के साथ 1000 बैटरी लिटर पिकर मंजूर

    दिल्ली-NCR की सफाई होगी हाईटेक, 70 स्वीपिंग मशीनों के साथ 1000 बैटरी लिटर पिकर मंजूर

    नई दिल्ली
    एमसीडी की हाउस मीटिंग में मंगलवार को 70 मेकैनिकल रोड स्वीपिंग मशीन और बैटरी से चलने वाले 1000 वैक्यूम बेस्ड लिटर पिकर मशीनों को खरीदने सहित कई अन्य महत्वपूर्ण प्रस्ताव पास किए गए। डिप्टी मेयर डॉ. मोनिका पंत की अध्यक्षता में बैठक हुई। आम आदमी पार्टी के निगम पार्षद बैठक में मौजूद नहीं रहे। शुरुआत में नेता विपक्ष अंकुश नारंग बैठक में आए और शोक प्रस्ताव पढ़ने के बाद बैठक छोड़कर चले गए। सत्ता पक्ष ने बैठक के शुरुआत में ही एजेंडा पास कर दिया। इसके बाद पल्यूशन और अवैध निर्माण जैसे मुद्दों पर चर्चा शुरू हुई।

    मेकैनिकल रोड स्वीपिंग और लिटर पिकर मशीनें खरीदी जाएंगी

    • डिप्टी मेयर डॉक्टर मोनिका पंत ने बताया कि निगम द्वारा 70 रोड स्वीपर खरीदे जाएंगे।
    • 1,000 वैक्यूम बेस्ड बैटरी से चलने वाली लिटर पिकर मशीनें खरीदने के प्रस्ताव को भी सदन ने मंजूरी दे दी है।
    • बैठक में एमसीडी एक्ट की धारा 506 (ए) के तहत दिल्ली के 48 गांवों को शहरीकृत घोषित करने से संबंधित प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी गई।
    • एजेंडा पास करने के बाद बैठक में प्रदूषण, अवैध निर्माण और अन्य गंभीर नागरिक मुद्दों पर विभिन्न दलों के पार्षदों द्वारा सार्थक चर्चा की गई।
    • इस बीच आप के निगम पार्षदों ने मंच की तरफ वाले गेट से अंदर घुसने की कोशिश की, सिक्यूरिटी ने उन्हें रोकने का प्रयास किया।
    • एंट्री को लेकर निगम पार्षदों और सिक्यूरिटी स्टाफ के साथ धक्का मुक्की भी हुई।
    • नेता विपक्ष अंकुश नारंग जैसे ही बाकी निगम पार्षदों के साथ बैठक मे पहुंचे, डिप्टी मेयर ने सदन की बैठक को अगली बैठक तक के लिए स्थगित कर दिया।
    • इसके बाद विपक्षी निगम पार्षदों ने थप्पड़ मामले को लेकर जमकर नारे लगाए।

    ‘PRAGATI-50’ से कूड़े पर पैनी नजर
    दिल्ली-NCR में साफ-सफाई और कूड़ा प्रबंधन को लेकर अब निगरानी और सख्त होने वाली है। केंद्र सरकार ने दिल्ली-NCR समेत देशभर के 50 शहरों को स्वच्छता के नए मॉडल के तौर पर विकसित करने के लिए 'PRAGATI-50' पहल शुरू की है। इसमें दिल्ली कैंटोनमेंट बोर्ड, MCD और NDMC के अलावा हरियाणा के फरीदाबाद और गुरुग्राम को भी शामिल किया गया है। इन शहरों में सिर्फ सफाई अभियान चलाने के बजाय कूड़ा प्रबंधन, सीवेज, इस्तेमाल किए गए पानी, नागरिक भागीदारी और जमीन पर दिखने वाले साफ-सफाई के परिणामों की तय मानकों पर निगरानी होगी। केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने मंगलवार को नई दिल्ली में इस पहल की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि इन 50 शहरों को दूसरे शहरों के लिए स्वच्छता के रोल मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा। खास बात यह है कि मंत्री खुद हर दो महीने में समीक्षा बैठक कर इन शहरों की प्रगति देखेंगे।

    मंत्री खुद दो महीने में समीक्षा बैठक कर इन शहरों की प्रगति देखेंगे
    PRAGATI-50 में दिल्ली के तीनों प्रमुख शहरी निकायों को जगह मिली है। वहीं हरियाणा से गुरुग्राम, फरीदाबाद और करनाल को चुना गया है। इससे कूड़ा उठाने, कचरे की छंटाई, इस्तेमाल किए गए पानी के प्रबंधन और सफाई जैसे मुद्दों पर निगरानी बढ़ने की उम्मीद है। सरकार ने इसके लिए स्वच्छतम पोर्टल पर PRAGATI की तर्ज पर डिजिटल रिव्यू सिस्टम भी तैयार किया है। मंत्रालय के अधिकारी विशेष शहरों की जिम्मेदारी लेकर नियमित निगरानी और मदद करेंगे। इसके लिए स्वच्छता ऐप के साथ ही डेडिकेटेड वाट्सऐप चैनल भी शुरू किया गया है। इसके जरिए लोग सफाई से जुड़ी शिकायतें दर्ज कराने और शहर को साफ रखने में भागीदारी करने में आसानी से सक्षम होंगे। मंत्रालय के मुताबिक प्रोग्राम में कंस्ट्रक्शन एंड डिस्ट्रक्शन (C&D) कचरे के लिए सेकेंडरी कलेक्शन सेंटर बनाने की SOP और कचरे को घर से ही अलग करने से जुड़ी गाइडलाइन भी जारी की गई।

  • राजभर की अखिलेश को सीधी सलाह- ‘तीन राज्यसभा प्रत्याशियों के चक्कर में दूसरा मत गंवा दीजिएगा’

    राजभर की अखिलेश को सीधी सलाह- ‘तीन राज्यसभा प्रत्याशियों के चक्कर में दूसरा मत गंवा दीजिएगा’

    राजभर का अखिलेश पर हमला- ‘PDA में परिवार, दौलतमंद और अपराधियों को राज्यसभा भेजने की जुगत में लगे हैं’

    राजभर ने अखिलेश से पूछा- ‘राज्यसभा के तीनों प्रत्याशी आपके PDA वाले होंगे या परिवार, दौलतमंद और अपराधी जाएंगे?’

    ‘पहला प्रोफेसर साहब, ये PDA वाले परिवार से हो गए; अब D और A से कौन होगा?’ राजभर का अखिलेश पर तंज

    अखिलेश के PDA फॉर्मूले पर राजभर का सवाल- ‘D से दौलतमंद और A से कोई अपराधी होगा क्या?’

    ‘पिछड़े, दलित और मुसलमान जानना चाहते हैं’, राजभर बोले- ‘PDA में परिवार, दौलतमंद और अपराधियों को संसद भेजने की जुगत कैसे?’

    राजभर की अखिलेश को सीधी सलाह- ‘तीन राज्यसभा प्रत्याशियों के चक्कर में दूसरा मत गंवा दीजिएगा’

    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी की ओर से तीन प्रत्याशी उतारने की चर्चा के बीच सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। राजभर ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अखिलेश यादव के ‘PDA’ फॉर्मूले पर सवाल उठाते हुए राज्यसभा के प्रत्याशियों को लेकर सीधे निशाना साधा।

    राजभर ने अपनी पोस्ट की शुरुआत अखिलेश यादव को संबोधित करते हुए की। उन्होंने लिखा, ‘अखिलेश जी, सुना है आप राज्यसभा के लिए तीन प्रत्याशी मैदान में उतारने जा रहे हैं। ये बताइए, तीनों आपके ‘पीडीए’ वाले होंगे या नहीं?’

    ‘पहला तो प्रोफेसर साहब हैं, ये आपके PDA वाले परिवार से हो गए’

    राजभर ने आगे सपा के संभावित प्रत्याशियों में प्रोफेसर रामगोपाल यादव के नाम की चर्चा का हवाला देते हुए तंज कसा। उन्होंने लिखा, ‘पहला तो प्रोफेसर साहब हैं। ये आपके पीडीए वाले ‘परिवार’ से हो गए। अब ‘डी’ और ‘ए’ से कौन होगा?’

    इसके बाद राजभर ने PDA की व्याख्या को लेकर तंज कसते हुए सवाल किया कि ‘डी से कोई ‘दौलतमंद’ होगा क्या? ए से कोई ‘अपराधी’?’

    ‘पिछड़े, दलित और मुसलमान जानना चाहते हैं PDA में परिवार-दौलतमंद-अपराधी कैसे?’

    राजभर ने अपनी पोस्ट में अखिलेश यादव के PDA फॉर्मूले को सीधे पिछड़े, दलित और मुस्लिम समाज से जोड़ते हुए लिखा कि ‘सभी पिछड़े वर्ग के लोग, दलित भाई और मुसलमान भाई जानना चाह रहे हैं कि आपके पीडीए में परिवार, दौलतमंद और अपराधियों को कैसे आप संसद के ऊपरी सदन भेजने की जुगत में लगे हैं।’

    ‘तीन के चक्कर में दूसरा मत गंवा दीजिएगा’

    राजभर ने अपनी पोस्ट के आखिर में अखिलेश यादव को राज्यसभा चुनाव के गणित को लेकर भी सलाह दी। उन्होंने लिखा, ‘आख़िर में एक और सलाह है। तीन के चक्कर में दूसरा मत गंवा दीजिएगा।’

  • बिहार में फिर बाढ़ का संकट, गंडक के तटबंध टूटने से निचले इलाकों में बढ़ा खतरा

    बिहार में फिर बाढ़ का संकट, गंडक के तटबंध टूटने से निचले इलाकों में बढ़ा खतरा

    पटना
    बिहार में गंडक नदी का कहर जारी है। अब गंडक ने राज्य के दो अन्य जिलों में तटबंधों को तोड़ दिया है। जल संसाधन विभाग के अनुसार गंडक नदी में अत्यधिक जलस्राव तथा गंगा नदी के भी ख़तरे के निशान से ऊपर रहने के कारण गंडक नदी के तटबंधों पर भारी दबाव है। इसके अलावा अनेक जगहों पर सीपेज और पाइपिंग हो रहे हैं, जिन्हें दिन रात फ्लड फाइटिंग करके नियंत्रित किया जा रहा है। इस क्रम में आज दो जिलों में तटबंध ब्रीच हो गया है।

    गोपालगंज जिला के बैकुण्ठपुर प्रखंड, ग्राम-शीतलपुर, में गंडक नदी के दायें मुख्य तटबंध के अंदर नदी साइड में बंधौली-शीतलपुर-फैजुल्लाहपुर (बी0एस0एफ0) जमींदारी बाँध लगभग लगभग 06 मीटर में तटबंध टूट गया है और इस धंसान के कारण बैकुण्ठपुर प्रखंड के परसौनी, शीतलपुर एवं पकहाँ ग्रामों के निचले इलाकों में पानी का फैलाव और संपर्कता भंग होने की संभावना है। सारण मुख्य तटबंध सुरक्षित है।

    सारण जिला के मकेर प्रखण्ड के ग्राम-हैजलपुर में गंडक नदी के दायां सारण तटबंध 46.50 कि.मी. पर अचानक लगभग 08 मीटर में धंस जाने एवं कि0मी0 45 पर निर्मित बाढ़ निरोधक फाटक (ए0एफ0एस) क्षतिग्रस्त होने से पानी का फैलाव कन्ट्री साईड में में हो रहा है। इस धसान के कारण मकेर प्रखंड के हैजलपुर, परमानंद छपरा एवं नौकरहा गांवों के निचले इलाकों में पानी का फैलाव होने तथा संपर्कता भंग होने की संभावना है। संबंधित क्षेत्रों में लोगों को अलर्ट कर दिया गया है। जल संसाधन विभाग, आपदा प्रबंधन विभाग की टीम एवं जिला प्रशासन गोपालगंज और सारण द्वारा आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

    बताया जा रहा है कि मकेर के बाघाकोल गांव के पास बुधवार की सुबह गंडक नदी पर स्थित मुख्य सारण तटबंध करीब 10 फीट की दूरी तक टूटा। प्रशासन बांध की मरम्मत करा स्थिति को नियंत्रित करने में जुटा है। बाघाकोल गांव के निचले इलाके और आसपास के गांवों की ओर अब पानी बढ़ भी रहा है। सारण के तरैया, पानापुर, परसा और मकेर में बाढ़ की स्थिति फिर से बनने लगी है। छपरा के करीब सरयू (घाघरा) नदी के आसपास बसे गांवों की ओर भी तेजी से पानी बढ़ रहा है।