Category: राज्य

  • नीरू की संघर्ष से सफलता की कहानी, कबड्डी में दो दिन में 3 पदक

    नीरू की संघर्ष से सफलता की कहानी, कबड्डी में दो दिन में 3 पदक

    जींद.

    जब जींद जिले के संगतपुरा गांव की रहने वाली सुदेश देवी बीपीएल राशन कार्ड पर अनाज लेने के लिए घर से निकली थीं तब उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि उनकी बेटी सात समंदर पार जापान में तिरंगा फहराने जा रही है। 2026 एशियाई खेलों से आई इस खबर ने पूरे परिवार की जिंदगी बदल दी।

    मां सुदेश ने एएनआई को दिए अपने इंटरव्यू में बताया कि वे गरीबी रेखा के तहत मिलने वाला राशन लेने जा रही थी तभी उन्हें नीरू के गोल्ड मेडल जीतने का पता चला। एक तरफ राशन लेने की मजबूरी थी तो दूसरी तरफ पोडियम पर सबसे ऊपर खड़ी उनकी बेटी नीरू ढांडा, जिन्होंने एशियाई खेलों की महिला ट्रैप शूटिंग स्पर्धा में भारत के लिए पहला व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया।

    30 में से 28 सटीक निशाने और नया एशियाई रिकॉर्ड
    26 साल की नीरू ने निशानेबाजी के फाइनल दौर में जबरदस्त एकाग्रता दिखाई। उन्होंने 30 में से 28 निशाने एकदम सटीक लगाए और नया एशियाई खेल रिकॉर्ड कायम किया। चीन की दिग्गज निशानेबाज सन युनोंग 26 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहीं। नीरू के लिए यह मेडल केवल एक खेल प्रतियोगिता की जीत नहीं है बल्कि उस लंबे आर्थिक और सामाजिक संघर्ष का नतीजा है जिसे उनके परिवार ने सालों तक झेला है।

    कबड्डी के मैदान से गन थामने तक की कहानी
    नीरू शुरुआत से शूटिंग में नहीं थीं। वे स्कूल और स्टेट लेवल पर कबड्डी खेला करती थीं। साल 2018 में जब उनके चचेरे भाई लक्ष्य श्योराण ने जकार्ता एशियन गेम्स में सिल्वर जीता, तब नीरू के मन में भी इस खेल को अपनाने का विचार आया। सुदेश देवी ने द इंडियन एक्सप्रेस को दिए अपने बयान में कहा, 'हमारे पास केवल दो एकड़ जमीन और कुछ पशु हैं। नीरू कबड्डी खेलती थी, लेकिन लक्ष्य के पदक जीतने के बाद उसने शूटिंग करने की इच्छा जताई। हमारी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि हम बंदूक खरीद सकें या ट्रेनिंग का खर्च उठा सकें।'

    तालाब किनारे टीन के डिब्बों पर साधे शुरुआती निशाने
    जब जेब खाली हो तो महंगे खेलों का सपना देखना भी भारी पड़ता है। ऐसे में नीरू के चाचा सोमवीर श्योराण मदद के लिए आगे आए। शुरुआत में नीरू के पास अभ्यास के लिए अपनी राइफल तक नहीं थी इसलिए वे लक्ष्य की गन से ही प्रैक्टिस करती थीं। टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए अपने बयान में नीरू ने उस दौर को याद करते हुए कहा, 'मेरे चाचा मुझे एक तालाब के पास ले गए और उन्होंने मुझे टीन के एक छोटे टुकड़े पर निशाना लगाने को कहा। मैंने खुद से कहा कि चलो देखते हैं मैं क्या कर सकती हूं, और मैंने वह टेस्ट पास कर लिया।' इसके बाद वे औपचारिक कोचिंग के लिए मध्य प्रदेश राज्य शूटिंग अकादमी (भोपाल) पहुंचीं।

    भारतीय सेना में नायब सूबेदार
    आज नीरू भारतीय सेना की कोर ऑफ मिलिट्री पुलिस में नायब सूबेदार के पद पर तैनात हैं और महू स्थित आर्मी मार्क्समैनशिप यूनिट में अपनी ट्रेनिंग करती हैं। खेल मंत्रालय ने उन्हें TOPS स्कीम के डेवलपमेंट ग्रुप में भी शामिल किया है। 2022 में अंतरराष्ट्रीय डेब्यू करने वाली नीरू ने 2025 एशियाई शूटिंग चैंपियनशिप में गोल्ड जीता था।

  • नशीले पदार्थों के मामले में नंगल के युवक को मृत्युदंड, परिवार ने सरकार से लगाई गुहार

    नशीले पदार्थों के मामले में नंगल के युवक को मृत्युदंड, परिवार ने सरकार से लगाई गुहार

    नंगल.

    काम के सिलसिले में विदेश गए नंगल के पास पत्ती लोअर गांव के युवक गुरप्रीत सिंह उर्फ बब्बी को सऊदी अरब में कथित नशीले पदार्थ के मामले में मौत की सजा सुनाई गई है। इस सूचना के बाद परिवार में मातम का माहौल है।

    परिवार ने केंद्र और पंजाब सरकार से मामले में हस्तक्षेप कर गुरप्रीत की सजा कम करवाने और उसकी वतन वापसी के लिए प्रयास करने की अपील की है। परिवार के अनुसार, गुरप्रीत सिंह को मिली मृत्युदंड की जानकारी नंगल के तहसीलदार के माध्यम से परिवार को दी गई। इससे पहले 24 सितंबर को रूपनगर के उपायुक्त को मस्कट स्थित भारतीय दूतावास की ओर से इस संबंध में पत्र प्राप्त हुआ था। पत्र के माध्यम से गुरप्रीत को सुनाई गई मौत की सजा की जानकारी अधिकारियों तक पहुंचाई गई। दिवंगत जरनैल सिंह का बेटा गुरप्रीत करीब चार वर्ष पहले काम के सिलसिले में मस्कट गया था। उसकी मां जसवंत कौर ने बताया कि गुरप्रीत उनका इकलौता बेटा है। बेटे को मौत की सजा मिलने की जानकारी से परिवार बेहद परेशान है।

    ट्रक चलाने का करता था काम
    परिवार और ग्रामीणों के अनुसार, गुरप्रीत सिंह ट्रक चालक के तौर पर काम करता था। काम के सिलसिले में उसका मस्कट से सऊदी अरब आना-जाना रहता था। परिवार का कहना है कि करीब दो वर्ष पहले उसके ट्रक से कथित तौर पर नशीले पदार्थ बरामद हुए थे। इसके बाद उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया। परिवार के अनुसार, गुरप्रीत करीब दो वर्ष तक जेल में रहा। इसके बाद उसे मौत की सजा सुनाई गई। हालांकि परिवार का दावा है कि गुरप्रीत निर्दोष है और उसे इस मामले में फंसाया गया है। परिवार अब सरकारी स्तर पर हस्तक्षेप की उम्मीद कर रहा है।

    मां बोली, इकलौते बेटे को बचाएं
    गुरप्रीत की मां जसवंत कौर ने कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस से संपर्क किया है। उन्होंने इस मुलाकात में मदद की गुहार लगाई है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान से भी अपील की है कि उनके बेटे को बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएं। जसवंत कौर का कहना है कि उनका बेटा परिवार का इकलौता सहारा है। उन्होंने सरकार से सऊदी अरब के अधिकारियों के साथ राजनयिक स्तर पर मामला उठाने और गुरप्रीत की सजा कम करवाने की दिशा में प्रयास करने की मांग की है।

    सरपंच ने भी सरकार से लगाई गुहार
    गांव की सरपंच मोनिका देवी ने कहा कि गुरप्रीत को मौत की सजा मिलने की जानकारी से गांव के लोग भी दुखी हैं। उन्होंने सरकार और संबंधित अधिकारियों से अपील की कि मामले को गंभीरता से लेते हुए राजनयिक माध्यमों से सऊदी अरब के अधिकारियों के समक्ष उठाया जाए। परिवार को अब केंद्र और पंजाब सरकार से राहत की उम्मीद है। गुरप्रीत की मां और ग्रामीण चाहते हैं कि मामले में कानूनी और राजनयिक स्तर पर आवश्यक मदद उपलब्ध कराई जाए, ताकि सजा के खिलाफ उपलब्ध विकल्पों पर कार्रवाई हो सके।

    मंत्री हरजोत बैंस उठाएंगे मर्सी पटीशन की मांग
    इस मामले में पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने भी पीड़ित परिवार को हर संभव मदद का आश्वासन दिया है। मंत्री बैंस ने बताया कि वे गुरप्रीत सिंह की सजा माफ कराने (मर्सी पिटीशन) की याचिका को तुरंत भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के समक्ष रखेंगे, ताकि इसे कूटनीतिक स्तर पर सऊदी अरब सरकार के सामने उठाया जा सके। उन्होंने कहा कि युवक की सुरक्षित वतन वापसी और उसके परिवार की सहायता के लिए वे अपने स्तर पर हर संभव प्रयास करेंगे।

  • पेट्रोल-डीजल भरवाने से पहले संभल जाएं, PUC नहीं हुआ तो नहीं मिलेगा फ्यूल

    पेट्रोल-डीजल भरवाने से पहले संभल जाएं, PUC नहीं हुआ तो नहीं मिलेगा फ्यूल

     नई दिल्ली
    दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने का दौर शुरू होने से पहले सरकार ने कुछ नए कदम उठाए हैं. इनमें सबसे अहम है 'नो पॉल्यूशन सर्टिफिकेट, नो फ्यूल' नियम. इसके तहत अगर आपकी गाड़ी के पास वैध PUC (पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट) नहीं है, तो पेट्रोल पंप पर आपको फ्यूल नहीं दिया जाएगा। 

    इस नियम को लागू करने के लिए दिल्ली के करीब 500 पेट्रोल पंप पर ऑटोमैटिक सिस्टम लगाया गया है. इन पेट्रोल पंप पर कैमरे लगाए गए हैं. ये कैमरे परिवहन के डेटाबेस से जुड़े हैं. सिस्टम गाड़ी का नंबर स्कैन करके यह पता करता है कि उसका PUC वैध है या नहीं। 

    जैसे ही बिना वैध PUC वाली गाड़ी पेट्रोल पंप पर पहुंचती है, सिस्टम उसका नंबर पहचान लेता है. इसके बाद ऑटोमैटिक अनाउंसमेंट होता है. इसमें गाड़ी के नंबर के साथ बताया जाता है कि उसके पास वैध पॉल्यूशन सर्टिफिकेट नहीं है. ऐसी गाड़ी को तुरंत ईंधन देने से रोक दिया जाता है. यानी पेट्रोल या डीजल लेने से पहले वाहन मालिक को PUC बनवाना होगा। 

    पेट्रोल पंप पर ही PUC बनवाने की सुविधा
    सरकार ने वाहन मालिकों के लिए एक ऑप्शन भी रखा है. कई पेट्रोल पंप पर PUC बनवाने वाले कियोस्क लगाए गए हैं. अगर किसी वाहन का PUC वैध नहीं है, तो वह वहीं अपना प्रदूषण सर्टिफिकेट बनवा सकता है. इसके बाद वाहन में ईंधन भरवाया जा सकता है. यानी वाहन मालिक को PUC बनवाने के लिए अलग जगह जाने की जरूरत नहीं होगी। 

    अगर वाहन मालिक के पास PUC नहीं है, तो उसे इसे बनवाने के लिए कुछ समय दिया जा सकता है. लेकिन अगर तय समय के बाद भी वाहन का प्रदूषण प्रमाणपत्र नहीं बनवाया गया, तो कार्रवाई हो सकती है. ऐसी गाड़ियों पर करीब ₹10 हजार तक का चालान लगाया जा सकता है। 

    दरअसल, दिल्ली में हर साल सर्दियों के दौरान प्रदूषण बड़ी समस्या बन जाता है. तापमान गिरने के साथ हवा की गुणवत्ता भी खराब होने लगती है. ऐसे में सरकार ने इस बार प्रदूषण बढ़ने से पहले ही कुछ कदम लागू किए हैं. अब करीब 500 पेट्रोल पंप पर यह सिस्टम काम कर रहा है. कैमरे, परिवहन डेटाबेस और ऑटोमैटिक अनाउंसमेंट के जरिए नियम लागू किया जा रहा है। 
    हालांकि, बड़ा सवाल यह है कि ऐसे कदमों से दिल्ली के प्रदूषण में कितना फर्क पड़ेगा. आने वाले दिनों में इसका असर साफ होगा. फिलहाल सरकार की कोशिश है कि बिना वैध PUC वाली गाड़ियों पर लगाम लगाई जाए और प्रदूषण को बढ़ने से पहले नियंत्रित किया जा सके। 

  • ‘अखिलेश ऑनलाइन भी जुड़ सकते थे’, इंडी गठबंधन की बैठक से दूरी पर राजभर ने घेरा

    ‘अखिलेश ऑनलाइन भी जुड़ सकते थे’, इंडी गठबंधन की बैठक से दूरी पर राजभर ने घेरा

    ‘अखिलेश से पूछिए, इंडी गठबंधन की बैठक में क्यों नहीं आए?’, ओपी राजभर का राहुल गांधी पर सीधा हमला

    इंडी गठबंधन की बैठक में नहीं पहुंचे अखिलेश तो राजभर ने राहुल से पूछा- ‘डिंपल या धर्मेंद्र को क्यों नहीं भेजा?’

    ‘अखिलेश ऑनलाइन भी जुड़ सकते थे’, इंडी गठबंधन की बैठक से दूरी पर राजभर ने घेरा

    'अखिलेश खुद नहीं गए तो डिंपल या धर्मेंद्र को भेज देते', इंडी गठबंधन की बैठक को लेकर राजभर का तीखा हमला

    ज्ञानेश कुमार पर विपक्ष के आरोपों को लेकर राजभर का राहुल पर हमला- ‘पहले चुनावों का इतिहास देखिए’

    ओपी राजभर की राहुल गांधी को नसीहत- ‘ज्ञानेश कुमार पर ऊर्जा बर्बाद करने के बजाय जनता के बीच जाइए’

    ‘आरोप-आरोप खेलते रहिए, आपस में लड़ते रहिए’, राहुल गांधी पर ओपी राजभर का तीखा हमला

    लखनऊ
    सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने गुरुवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। राजभर ने सोशल मीडिया पर राहुल गांधी को संबोधित करते हुए इंडी गठबंधन की बैठक में अखिलेश यादव की गैरमौजूदगी को लेकर सवाल उठाए हैं।

    राजभर ने कहा कि राहुल गांधी ने इंडी गठबंधन की बैठक की, लेकिन अखिलेश यादव बैठक में शामिल नहीं हुए। उन्होंने राहुल गांधी से कहा कि अपने दोस्त अखिलेश यादव से पूछिए कि वह ऐसा कौन सा काम कर रहे थे कि बैठक में नहीं आ सके।

    '6 अक्टूबर तक नामांकन था, कल ही जाने की क्या जल्दी थी'

    ओपी राजभर ने कहा कि राज्यसभा का नामांकन 6 अक्टूबर तक होना है। ऐसे में उन्होंने सवाल किया कि अखिलेश यादव के लिए पहले ही नामांकन करने की ऐसी क्या जल्दी थी। राजभर ने तंज कसते हुए कहा कि मान लिया कि उस दिन नामांकन नहीं होता तो अखिलेश यादव के लिए पहाड़ टूट जाता, लेकिन अगर खुद नहीं जाना था तो डिंपल यादव या धर्मेंद्र यादव को क्यों नहीं भेजा गया।

    राजभर ने कहा कि डिंपल यादव और धर्मेंद्र यादव भी नामांकन में नहीं थे। उन्होंने आगे सवाल उठाया कि अगर नामांकन इतना जरूरी था और अखिलेश यादव खुद नहीं आ सकते थे तो वह ऑनलाइन भी इंडी गठबंधन की बैठक से जुड़ सकते थे।

    'अखिलेश एसी में बैठक पीसी करके ठहाके लगा रहे थे'

    राजभर ने अपने पोस्ट में कहा कि जब राहुल गांधी दिल्ली में बैठक कर रहे थे, तब अखिलेश यादव ‘एसी में बैठक पीसी करके ठहाके लगा रहे थे।’ उन्होंने कहा कि कई नेता ऑनलाइन बैठक में जुड़े थे, ऐसे में अखिलेश यादव भी ऑनलाइन जुड़ सकते थे।

    ज्ञानेश कुमार को लेकर भी राहुल गांधी पर निशाना

    ओपी राजभर ने अपने पोस्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार फरवरी 2025 में मुख्य चुनाव आयुक्त बने हैं और बीजेपी के चुनावी इतिहास को देखा जाना चाहिए कि उनके पहले बीजेपी कितने चुनाव जीत चुकी है।

    राजभर ने कांग्रेस नेता अभिजीत दीपके के बयान का जिक्र करते हुए कहा कि वह कह रहे हैं कि ज्ञानेश कुमार ने बीजेपी को हरियाणा, महाराष्ट्र और दिल्ली जिता दिया। राजभर ने कहा कि उन्हें बताया जाना चाहिए कि इन तीनों राज्यों में चुनाव ज्ञानेश कुमार के मुख्य चुनाव आयुक्त बनने से पहले हो चुका था।

    उन्होंने अपने पोस्ट में 2014, 2019 और 2024 में बीजेपी की जीत का भी जिक्र किया और कहा कि उस समय ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त नहीं थे।

    'ज्ञानेश कुमार पर ऊर्जा बर्बाद करने की जगह जनता के बीच जाइए'

    ओपी राजभर ने राहुल गांधी को सलाह देते हुए कहा कि ज्ञानेश कुमार पर अपनी ऊर्जा बर्बाद करने की जगह जनता के बीच जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता के बीच जाने पर ही जीत की कुछ संभावना बनेगी। राजभर ने कहा कि अगर ऐसा नहीं किया गया तो विपक्ष आरोप-आरोप का खेल खेलता रहेगा, आपस में लड़ता रहेगा और विपक्ष में बैठे रहने के अलावा कुछ हासिल नहीं होगा।

  • 2027 चुनाव से पहले पंजाब कांग्रेस का मेगा प्लान, संगठन में फेरबदल के संकेत

    2027 चुनाव से पहले पंजाब कांग्रेस का मेगा प्लान, संगठन में फेरबदल के संकेत

    चंडीगढ़.

    पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से चल रही अंदरूनी खींचतान के बीच अब संगठन में बड़े बदलाव की तैयारी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को बदलने की अटकलों के बीच माना जा रहा है कि आज या अगले एक-दो दिन में नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम की आधिकारिक घोषणा हो सकती है।

    हाई कमान की ओर से सिंगल को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने का फैसला ले लिया गया है और इस संबंध में अमरिंदर सिंह को भी जानकारी दे दी गई है। उन्होंने भी इसकी पुष्टि की है। हालांकि, अंतिम फैसला कांग्रेस हाईकमान की घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा।

    कांग्रेस संगठन में बदलाव की तैयारी
    प्रदेश अध्यक्ष बदलने के साथ ही पंजाब कांग्रेस संगठन में कई अन्य पदों पर भी फेरबदल किए जाने की संभावना है। हाईकमान 2027 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए संगठन में क्षेत्रीय और राजनीतिक संतुलन बनाने की कोशिश कर सकता है। ऐसे में नए प्रदेश अध्यक्ष के साथ नई टीम के गठन पर भी नजर रहेगी। दरअसल, एक जुलाई को कांग्रेस हाईकमान ने 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर कमेटी का गठन किया था। इसके बाद पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी मतभेद खुलकर सामने आए।

    पंजाब कांग्रेस में दिखी गुटबाजी
    पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के साथ सुखजिंदर सिंह रंधावा, परगट सिंह और राणा गुरजीत सिंह समेत कई नेताओं ने संगठन से जुड़े फैसलों को लेकर असहमति जताई थी। इसके बाद प्रदेश नेतृत्व में बदलाव की मांग भी लगातार चर्चा में रही। विवाद के बीच पंजाब कांग्रेस के तत्कालीन प्रभारी भूपेश बघेल को जिम्मेदारी से हटाया गया और पांच सितंबर को सचिन पायलट को पंजाब कांग्रेस का प्रभारी बनाया गया।

    सचिन पायलट ने की नेताओं से मुलाकात
    पायलट ने इसके बाद पार्टी के विभिन्न गुटों के नेताओं से मुलाकात कर एकजुटता बनाने की कोशिश की। इसके बावजूद प्रदेश कांग्रेस में अंदरूनी मतभेद पूरी तरह समाप्त नहीं हो सके। अब वड़िंग के स्थान पर नया प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के बाद सबसे बड़ी चुनौती सभी गुटों को साथ लेकर चलने की होगी। वहीं, वड़िंग को किसी दूसरे प्रदेश में संगठनात्मक जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चा भी है। आने वाले दिनों में कार्यकारी अध्यक्षों और संगठन के अन्य पदों पर भी बदलाव हो सकते हैं। ऐसे में नए प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा के साथ यह भी महत्वपूर्ण होगा कि हाईकमान पंजाब कांग्रेस की नई टीम में किन नेताओं को जगह देता है और 2027 विधानसभा चुनाव के लिए संगठन को किस तरह तैयार करता है।

  • बेअदबी कानून को लेकर पंजाब सरकार सक्रिय, PCS अधिकारी बने नोडल अफसर

    बेअदबी कानून को लेकर पंजाब सरकार सक्रिय, PCS अधिकारी बने नोडल अफसर

    चंडीगढ़ 
    पंजाब सरकार ने जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (शोध) एक्ट 2026 को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने इस एक्ट से संबंधित संशोधनों पर सहमति बनाने के लिए सात सदस्यीय समिति का गठन किया है। इस संबंध में जत्थेदार श्री अकाल तख्त साहिब को पत्र लिखकर जानकारी दी गई है।

    यह कमेटी श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से गठित कमेटी के साथ बैठकें कर एक्ट में प्रस्तावित संशोधनों पर सहमति बनाने का काम करेगी। दोनों कमेटियों के बीच तालमेल के लिए पंजाब सरकार ने पीसीएस अधिकारी हरजीत सिंह संधू को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है।

    समिति में श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह, दमदमी टकसाल के मुखी संत ज्ञानी हरनाम सिंह खालसा, संत बाबा सेवा सिंह रामपुर खेड़ा, सेवानिवृत्त न्यायाधीश जसपाल सिंह, सेवानिवृत्त न्यायाधीश गुरबीर सिंह और सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी व पंजाब लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष जतिंदर सिंह औलख को शामिल किया गया है। विधि अधिकारी प्रीत इंदर पॉल सिंह भी इस सात सदस्यीय समिति के सदस्य हैं। 

    हरजीत संधू नोडल अफसर नियुक्त पंजाब सरकार द्वारा हरजीत सिंह संधू पीसीएस को 23.09.2026 के आदेशों के माध्यम से नोडल अफसर नियुक्त किया गया है। वह पंजाब सरकार द्वारा गठित कमेटी और श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से गठित कमेटी के बीच तालमेल स्थापित करने के लिए जिम्मेदार होंगे। इस कमेटी द्वारा श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से प्राप्त सुझावों और मार्गदर्शन को पूरे सत्कार के साथ विचार के अधीन लाया जा रहा है।

    पंजाब सरकार ने पीसीएस अधिकारी हरजीत सिंह संधू को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। उनका कार्य दोनों समितियों के बीच तालमेल स्थापित करना होगा। यह समिति श्री अकाल तख्त साहिब की समिति के साथ बैठकें करेगी। इन बैठकों में एक्ट के संशोधनों पर सहमति बनाई जाएगी। 

    यह काम करेगी कमेटी पंजाब सरकार द्वारा गठित कमेटी विचार-विमर्श करते हुए श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से गठित कमेटी के साथ आवश्यक विचार-विमर्श और तालमेल करेगी। सभी सुझावों एवं विचारों को ध्यान में रखते हुए मामले को अंतिम रूप दिया जाएगा।

  • हरियाणा स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी में बड़ा बदलाव, VC को तीन हफ्ते में इस्तीफे का आदेश

    हरियाणा स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी में बड़ा बदलाव, VC को तीन हफ्ते में इस्तीफे का आदेश

    चंडीगढ़.

    पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा की स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी सोनीपत के कुलपति पद पर पूर्व आईपीएस अधिकारी अशोक कुमार की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए अहम आदेश जारी किया है।

    हाई कोर्ट के समक्ष संबंधित कुलपति की ओर से कहा गया कि वह व्यक्तिगत कारणों से पद पर बने रहने की स्थिति में नहीं हैं और तीन सप्ताह के भीतर इस्तीफा सौंप देंगे। इसके बाद जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने याचिका का निपटारा करते हुए राज्य सरकार को इस्तीफा स्वीकार करने और कुलपति पद पर अंतरिम व्यवस्था करने के निर्देश दिए।

    नियुक्ति को यूजीसी नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाकर दी गई थी चुनौती
    डॉ. डीएस मोर उर्फ देवेंद्र सिंह मोर और एक अन्य याचिकाकर्ता ने याचिका दायर की थी। इसमें संबंधित विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में अशोक कुमार की नियुक्ति को गैरकानूनी और शुरू से ही अमान्य घोषित करने की मांग की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि नियुक्ति विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के 2018 के नियमों के विपरीत की गई है। इसके अलावा कुलपति के वेतन निर्धारण से जुड़े 15 जुलाई 2024 के पत्र को भी चुनौती दी गई थी।

    इस्तीफा स्वीकार होने तक वरिष्ठ डीन संभालेंगे जिम्मेदारी
    हाई कोर्ट ने कहा कि कुलपति अपना इस्तीफा तीन सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करेंगे और राज्य सरकार इस्तीफा मिलने के एक सप्ताह के भीतर उसे स्वीकार करेगी। इस बीच विश्वविद्यालय के कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाएगा। अदालत ने विशेष रूप से विश्वविद्यालय के नियमों के नियम-दो में दी गई व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि कुलपति का पद इस्तीफे के कारण रिक्त होने की स्थिति में वरिष्ठ डीन को अंतरिम तौर पर कुलपति के कर्तव्यों का निर्वहन कराया जाए। यह व्यवस्था नए कुलपति की नियुक्ति होने तक जारी रहेगी।

    नई नियुक्ति में यूजीसी के 2018 नियमों का सख्ती से पालन
    हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि विश्वविद्यालय के अगले कुलपति की नियुक्ति यूजीसी के 2018 के नियमों का पूरी तरह पालन करते हुए की जाए। अदालत ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के डा एस. मोहन बनाम सेक्रेटरी टू द चांसलर, पुडुचेरी टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी एवं अन्य मामले में 2026 में दिए फैसले को भी ध्यान में रखने को कहा है।

    31 अक्टूबर तक पूरी करनी होगी सभी जरूरी कार्रवाई
    हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस्तीफा स्वीकार करने, अंतरिम व्यवस्था करने और नए कुलपति की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करने समेत सभी आवश्यक कदम 31 अक्टूबर 2026 तक पूरे किए जाएं। मामले में अदालत की सहायता के लिए नियुक्त एमिकस क्यूरी के सहयोग की भी पीठ ने सराहना की।

  • रायबरेली कोर्ट में फर्जी वकीलों की एंट्री पर रोक, बार एसोसिएशन ने जारी की चेतावनी

    रायबरेली कोर्ट में फर्जी वकीलों की एंट्री पर रोक, बार एसोसिएशन ने जारी की चेतावनी

     रायबरेली
    उत्तर प्रदेश के रायबरेली सिविल कोर्ट परिसर में वकीलों की पहचान और अनुशासन को लेकर सेंट्रल बार एसोसिएशन ने सख्त रुख अपनाया है। एसोसिएशन की ओर से जारी सूचना में बिना सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस (C.O.P.) के वकीलों की निर्धारित ड्रेस में कोर्ट परिसर में प्रवेश करने वालों को चेतावनी दी गई है। नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ विधिक कार्रवाई की बात कही गई है। सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेश चंद्र यादव और महामंत्री संजय प्रताप सिंह 'कछवाह' की ओर से जारी सूचना में कहा गया है कि जिन लोगों के पास सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस (C.O.P.) नहीं है, वे वकीलों की निर्धारित पोशाक पहनकर न्यायालय परिसर में प्रवेश न करें। एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।

    फर्जी वकीलों पर कार्रवाई को लेकर सख्ती
    बार एसोसिएशन के इस कदम को कोर्ट परिसर में वकीलों की पहचान और पेशेवर अनुशासन से जोड़कर देखा जा रहा है। एसोसिएशन की ओर से जारी चेतावनी के बाद ऐसे लोगों पर निगरानी बढ़ने की संभावना है, जो बिना वैध दस्तावेजों के खुद को अधिवक्ता के तौर पर पेश करते हैं। कोर्ट परिसर में आने वाले लोगों के लिए अधिवक्ता की पहचान और वैध दस्तावेजों को लेकर स्पष्टता बनाए रखना इस तरह के निर्देशों का प्रमुख उद्देश्य है। 

    कचहरी परिसर में चर्चा का विषय बना नोटिस
    सेंट्रल बार एसोसिएशन की ओर से जारी सख्त सूचना के बाद रायबरेली कचहरी परिसर में इसे लेकर चर्चा तेज हो गई है। नोटिस में नियमों के पालन पर जोर देते हुए स्पष्ट किया गया है कि कोर्ट परिसर में अधिवक्ता की निर्धारित ड्रेस का इस्तेमाल नियमों के अनुरूप ही किया जाए। एसोसिएशन के इस कदम से न्यायालय परिसर में पेशेवर पहचान और अनुशासन को लेकर निगरानी बढ़ने की उम्मीद है।

    नियम तोड़ने पर विधिक कार्रवाई की चेतावनी
    एसोसिएशन ने अपने निर्देश में साफ किया है कि C.O.P. के बिना निर्धारित अधिवक्ता ड्रेस में कोर्ट परिसर में प्रवेश करने वालों के खिलाफ सख्त विधिक कार्रवाई की जा सकती है। अब इस निर्देश के लागू होने के बाद कोर्ट परिसर में ऐसे लोगों की पहचान और उनके खिलाफ कार्रवाई किस तरह की जाती है, इस पर नजर रहेगी।

  • कांग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर सस्पेंस के बीच विजय इंदर सिंगला का बेबाक जवाब

    कांग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर सस्पेंस के बीच विजय इंदर सिंगला का बेबाक जवाब

    चंडीगढ़.

    'मुझे दिल्ली क्यों जाना चाहिए?'- पंजाब कांग्रेस में नए प्रदेश अध्यक्ष के चयन और संगठन में जारी खींचतान के बीच पूर्व केंद्रीय मंत्री और पंजाब कांग्रेस चुनाव प्रबंधन व समन्वय समिति के अध्यक्ष विजय इंदर सिंगला का यह बेबाक बयान सामने आया है।

    बीती रात से पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रधान पद के लिए चली आ रही खींचतान के बीच ये उनका पहला रिएक्शन है, जो सामने आया है। राज्य इकाई की कमान संभालने की रेस में सबसे आगे चल रहे सिंगला ने दिल्ली जाने और पार्टी हाईकमान से मुलाकात करने की अटकलों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। अध्यक्ष पद को लेकर जारी घमासान और दिल्ली दौरों से जुड़े सवालों पर विजय इंदर सिंगला ने साफ लहजे में कहा- भाई, मुझे दिल्ली क्यों जाना चाहिए? मेरे संगरूर के गांवों में पहले से कार्यक्रम तय हैं और मैं उन्हीं में व्यस्त हूं। मैं दिल्ली तभी जाता हूं जब वहां कोई काम होता है या फिर हाईकमान की ओर से कोई बुलावा आता है। फिलहाल दिल्ली जाने का ऐसा कोई कार्यक्रम तय नहीं है।

    पंजाब कांग्रेस में सुगबुगाहट तेजह
    विजय इंदर सिंगला का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पंजाब कांग्रेस में बड़े बदलाव की सुगबुगाहट तेज है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी हाईकमान वर्तमान अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की जगह किसी नए चेहरे को कमान सौंपने पर विचार कर रहा है। इसके पीछे का मुख्य मकसद 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के धड़ों के बीच राजनीतिक संतुलन स्थापित करना है।

    हाईकमान के फैसले का इंतजार जारी
    हिंदू चेहरे और केंद्रीय नेतृत्व के करीबी माने जाने वाले विजय इंदर सिंगला को इस अंदरूनी खींचतान के बीच एक सर्वमान्य और तटस्थ विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, उनके इस बयान से साफ है कि वे फिलहाल अपनी जमीनी राजनीति और संगरूर क्षेत्र के दौरों पर ही ध्यान केंद्रित कर रहे हैं तथा हाईकमान के औपचारिक फैसले का इंतजार कर रहे हैं।

  • मावां-धीयां सत्कार योजना: आज खाते में आएगी तीसरी किस्त, CM मान गोइंदवाल साहिब से करेंगे जारी

    मावां-धीयां सत्कार योजना: आज खाते में आएगी तीसरी किस्त, CM मान गोइंदवाल साहिब से करेंगे जारी

     चंडीगढ़

    मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान आज गोइंदवाल साहिब में 'मावां-धीयां सत्कार योजना' के तहत महिलाओं को सम्मान राशि की तीसरी किस्त जारी करेंगे। इस किस्त में 36 लाख 87 हजार 677 महिलाओं के खातों में 1,262 करोड़ 54 लाख रुपये ट्रांसफर किए जाएंगे।

    यह राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाएगी। यह योजना राज्य की महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू की गई है। मान सरकार ने अब तक इस योजना के तहत कुल 73 लाख 99 हजार महिलाओं को लाभ पहुंचाया है। इन महिलाओं के खातों में कुल 2,562 करोड़ 33 लाख रुपये की सम्मान राशि ट्रांसफर की जा चुकी है। यह राशि दो किस्तों में वितरित की गई है। 

    कार्यक्रम में सरकार की ओर से योजना के तहत महिलाओं और बेटियों से जुड़ी आर्थिक सहायता की किस्त जारी की जाएगी।‘मुख्यमंत्री मावां धीयां सत्कार योजना’ का उद्देश्य महिलाओं और बेटियों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। आज गोइंदवाल साहिब में होने वाले राज्य स्तरीय कार्यक्रम के दौरान इसी को लेकर कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।

    कार्यक्रम को लेकर प्रशासन की ओर से तैयारियां की गई हैं। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान कार्यक्रम में शामिल होकर योजना को लेकर जानकारी साझा करेंगे और लाभार्थियों से भी संवाद करेंगे। इस के तहत सामान्य वर्ग की महिलाओं को प्रति माह ₹1,000 और अनुसूचित जाति (SC/ST) की महिलाओं को प्रति माह ₹1,500 की वित्तीय सहायता दी जाती है।

    योजना के तहत सामान्य वर्ग की महिलाओं को 3,000 रुपये की सम्मान राशि मिलती है। वहीं, अनुसूचित जाति की महिलाओं को 4,500 रुपये की सम्मान राशि दी जाती है। यह पहल महिलाओं के सशक्तीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सरकार का लक्ष्य अधिक से अधिक महिलाओं को इस योजना से जोड़ना है।

    18 साल से अधिक उम्र की महिलाओं को लाभ योजना के तहत 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र की पात्र महिलाओं को लाभ दिया जाता है। एक परिवार में पात्र महिलाओं की संख्या पर कोई सीमा नहीं रखी गई है। राशि सीधे बैंक खातों में DBT के जरिए ट्रांसफर की जाती है। पहली किस्त जुलाई 2026 में तीन महीने की राशि एक साथ जारी की गई थी। सामान्य वर्ग की महिलाओं को ₹3,000 और अनुसूचित जाति की महिलाओं को ₹4,500 मिले।

    ₹9,300 करोड़ का बजट प्रावधान पंजाब सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में योजना के लिए ₹9,300 करोड़ का प्रावधान किया है। सरकार की ओर से करीब 97% महिलाओं को योजना के दायरे में लाने का अनुमान बताया गया है।