Category: राज्य

  • सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए यूपी में बड़ा अभियान, पात्र बेटियों को घर पर लगेगा मुफ्त HPV टीका

    सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए यूपी में बड़ा अभियान, पात्र बेटियों को घर पर लगेगा मुफ्त HPV टीका

    लखनऊ
    सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए अब पात्र बेटियों तक एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमावायरस) वैक्सीन पहुंचाने के लिए घर-घर अभियान चलाया जाएगा।

    प्रदेश में 25 लाख से अधिक बच्चियों को यह टीका लगाया जा चुका है। स्वास्थ्य केंद्रों पर चल रहे टीकाकरण से वंचित 14 साल की आयु पूरी कर चुकीं, लेकिन 15 साल से कम उम्र की बालिकाओं को घर जाकर वैक्सीन लगाने की तैयारी है। सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाला दूसरा सबसे आम कैंसर है।

    राष्ट्रीय एचपीवी टीकाकरण अभियान के तहत बालिकाओं को उनके माता-पिता की सहमति से सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर निश्शुल्क वैक्सीन लगाई जा रही है।

    इसके लिए निर्धारित आयु वर्ग की बालिकाएं पात्र हैं। सरकारी स्वास्थ्य इकाइयों और जिला अस्पतालों में चिकित्सकों की निगरानी में टीकाकरण जारी है। केंद्र सरकार द्वारा प्रदेश के लिए निर्धारित 25 लाख बच्चियों के टीकाकरण का लक्ष्य पूरा किया जा चुका है। अब घर-घर अभियान के जरिये छूटी हुई पात्र बालिकाओं तक पहुंचने की तैयारी है।

    निजी अस्पतालों में एचपीवी वैक्सीन की कीमत अधिक होने के कारण कई परिवार इसका लाभ नहीं ले पाते। ऐसे में सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों के साथ घर-घर निश्शुल्क टीकाकरण के जरिये इन परिवारों की बेटियों तक भी वैक्सीन पहुंचाने की योजना है।

    राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की निदेशक डॉ. पिंकी जोवल ने बताया कि केंद्र सरकार ने प्रदेश में 25 लाख बच्चियों को वैक्सीन लगाने का लक्ष्य दिया था, जिसे पूरा कर लिया गया है। अब किसी कारण से टीकाकरण से छूटी पात्र बालिकाओं को वैक्सीन लगाने के लिए टीमें घर-घर जाएंगी।

    एचपीवी संक्रमण सर्वाइकल कैंसर का प्रमुख कारण है। किशोरावस्था में समय पर एचपीवी टीकाकरण से भविष्य में सर्वाइकल कैंसर के जोखिम को कम किया जा सकता है। इसी के तहत टीकाकरण के साथ जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है।

    भारत में हर साल करीब 1.28 लाख महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर के नए मामले सामने आते हैं। यह महिलाओं में होने वाला दूसरा सबसे आम कैंसर है। हर साल करीब 80 हजार महिलाओं की इस बीमारी से मौत होती है। नए मामलों और मौतों के औसत के आधार पर करीब हर सात मिनट में एक महिला की जान जाती है।

  • 1 अक्टूबर से जेब पर पड़ेगा असर! LPG सब्सिडी, बैंक चार्ज और प्रॉपर्टी टैक्स समेत 6 बड़े बदलाव

    1 अक्टूबर से जेब पर पड़ेगा असर! LPG सब्सिडी, बैंक चार्ज और प्रॉपर्टी टैक्स समेत 6 बड़े बदलाव

    पटना
     New rules October 2026: बिहार में 1 अक्टूबर से बड़े बदलाव होने जा रहे हैं, जिसका असर सीधा आम आदमी पर पड़ने वाला है। इस स्टोरी में हम कुछ प्रमुख बदलावों के बारे में बता रहे हैं, जिसके बारे में जानना आपके लिए बहुत जरूरी है। बिना जानकारी के आपको नुकसान हो सकता है, तो आइए एक-एक कर इन बदलावों के बारे में जानते हैं…

    LPG सिलिंडर के लिए BAA अनिवार्य
    बिहार समेत पूरे देश के घरेलू एलपीजी (LPG) उपभोक्ताओं के लिए 1 अक्टूबर से बड़ा बदलाव होने जा रहा है। केंद्र सरकार के नए नियमों के तहत एलपीजी सिलिंडरों पर मिलने वाली सरकारी सब्सिडी का लाभ उठाने के लिए बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन (BAA) कराना अनिवार्य हो गया है।

    अगर कोई उपभोक्ता तय समय सीमा तक इस प्रक्रिया को पूरा नहीं करता है, तो उसके गैसे सिलिंडरों की बुकिंग या आपूर्ति तो बंद नहीं होगी, लेकिन उसे सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी का लाभ मिलना बंद हो जाएगा।

    अगर आपने BAA पहले ही पूरा कर लिया है तो दोबारा कुछ करने की जरूरत नहीं है। आपका रिफिल पहले की तरह जारी रहेगा।

    जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र में बदलाव
    जन्म-मृत्यु पंजीकरण संशोधन अधिनियम के नए प्रावधान लागू होंगे। नए नियमों के तहत, जन्म या मृत्यु के 21 दिनों के अंदर भीतर रजिस्ट्रेशन फ्री और सरल रहेगा।

    वहीं, जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र पंजीकरण में देरी होने पर अब नए प्रावधानों के तहत जुर्माने और कड़ी अनुमति का प्रवाधान है।

    एक वर्ष से अधिक और दो वर्ष के भीतर जन्म प्रमाण पत्र के रजिस्ट्रेशन के लिए उपजिलाधिकारी या जिलाधिकारी के कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अनुमति जरूरी होगी

    ऐसे में अब किसी की मौत होने पर मृत्यु प्रमाण पत्र और जन्म होने पर जन्म प्रमाण पत्र बनवाने में बिल्कुल भी देरी न करें।

    SBI का कैश विदड्रॉल पर नया नियम
    अगर आपका भी भारतीय स्टेट बैंक (SBI) में अकाउंट है, तो नया नियम जानना बहुत जरूरी है। स्टेट बैंक ब्रांच के जरिए खोले गए 'बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट अकाउंट' से कैश निकालने के चार्ज में बदलाव कर रहा है।

    इसके तहत, 1 अक्टूबर से महीने में चार बार कैश निकालना फ्री रहेगा। इसके बाद आपको हर बार कैश निकालने पर 15 रुपये और उस पर लागू GST देना होगा।

    बल्क FD पर समान दरें
    बैंक अब एक ही शहर/क्षेत्र की अलग-अलग शाखाओं में बल्क एफडी पर अलग-अलग ब्याज दरें ऑफर नहीं कर सकेंगे। दरें सभी जगह समान और पारदर्शी होंगी।

    अब 3 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा की FD बल्क डिपॉजिट मानी जाएगी। पहले यह सीमा 2 करोड़ रुपये थी। बल्क FD पर बैंक अपनी जरूरत के हिसाब से अलग ब्याज दर तय कर सकेंगे।

    बच्चों के बायोमेट्रिक अपडेट की फ्री सुविधा खत्म
    आधार कार्ड में  बच्चों के बायोमेट्रिक अपडेट की फ्री सुविधा 30 सितंबर को खत्म हो रही है। 1 अक्टूबर से फिंगरप्रिंट, फोटो आदि के अपडेट करने के लिए 125 रुपये फीस देनी होगी। अगर फीस से बचना है, तो 30 से पहले अपडेट करा डालें।

    प्रॉपर्टी टैक्स पर जुर्माना
    पटना नगर निगम क्षेत्र के संपत्तिधारकों के लिए संपत्ति कर जमा करने की अंतिम तिथि 30 सितंबर है। इसके बाद एक अक्टूबर से बकाया कर की मूल राशि पर हर माह 1.5 प्रतिशत की दर से ब्याज देना होगा। बकाया जितने समय तक रहेगा, देनदारी उतनी ही बढ़ती जाएगी।

     

  • अक्षय ऊर्जा से पश्चिमी राजस्थान को नई रफ्तार, निवेश के साथ रोजगार और उद्योगों के बढ़ेंगे अवसर

    अक्षय ऊर्जा से पश्चिमी राजस्थान को नई रफ्तार, निवेश के साथ रोजगार और उद्योगों के बढ़ेंगे अवसर

    जैसलमेर/बाड़मेर
     थार की तेज धूप और लगातार चलने वाली हवाएं अब पश्चिमी राजस्थान की अर्थव्यवस्था का नया आधार बन रही हैं। अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं के विस्तार के साथ निवेश, तकनीकी सेवाओं, परिवहन, निर्माण, रख-रखाव, सुरक्षा और स्थानीय रोजगार की नई अर्थव्यवस्था आकार ले रही हैं। जैसलमेर में अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में करोड़ों रुपए के निवेश की संभावनाएं हैं।

    प्रस्तावित परियोजनाओं में करीब 60 हजार मेगावाट क्षमता की सौर, पवन, बैटरी भंडारण और जैवभार आधारित परियोजनाओं का उल्लेख है। इन परियोजनाओं के लिए करीब 1.50 लाख हेक्टेयर भूमि चिन्हित किए जाने की जानकारी है। इससे पश्चिमी राजस्थान में ऊर्जा उत्पादन के साथ इससे जुड़े अन्य क्षेत्रों में भी गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।

    राजस्थान में करीब 4913 मेगावाट पवन ऊर्जा क्षमता है। इसमें जैसलमेर-बाड़मेर क्षेत्र की हिस्सेदारी 4000 मेगावाट से अधिक बताई जाती है। फतेहगढ़, लाठी, नेड़ान-मूलाना और नोख क्षेत्र में सौर ऊर्जा विस्तार की गतिविधियां इस ऊर्जा पट्टी को और बड़ा आधार दे रही हैं। वहीं, बाड़मेर में 1000 से अधिक कृषि कुओं पर सौर संयंत्र संचालित होने की जानकारी है। बालोतरा के पॉपलीन उद्योग में भी सौर ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ने की उम्मीद है।

    पोकरण में 3500 एकड़ में सौर परियोजना
    पोकरण क्षेत्र के रामपुरिया, भिणाजपुरा, हस्तिनापुर और मसूरिया में रिन्यू की सौर परियोजना करीब 3500 एकड़ में फैली है। परियोजना की क्षमता को लेकर उपलब्ध विवरणों में 975 मेगावाट और 1.3 गीगावॉट, दोनों आंकड़े सामने आ रहे हैं। परियोजना से सालाना करीब 2490 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन का अनुमान है।

    इस परियोजना से करीब पांच लाख परिवारों की बिजली जरूरतों को लाभ मिलने और हर साल करीब 23 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम होने का अनुमान जताया जा रहा है। इससे क्षेत्र में बड़े स्तर पर अक्षय ऊर्जा उत्पादन के साथ पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने की दिशा में भी काम होने की बात सामने आती है।

    स्थानीय उद्योग और रोजगार शृंखला भी जरूरी
    पश्चिमी राजस्थान की ताकत केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है। ऊर्जा आधारित स्थानीय उद्योग और रोजगार शृंखला भी इसके आर्थिक प्रभाव को बढ़ा सकती है। पारेषण, भंडारण, कौशल विकास और सहायक उद्योगों का विस्तार साथ हुआ तो अक्षय ऊर्जा क्षेत्र से होने वाले निवेश का स्थानीय आर्थिक प्रभाव व्यापक हो सकता है।

    जितेंद्र थानवी, ऊर्जा विशेषज्ञ, के अनुसार पश्चिमी राजस्थान में अक्षय ऊर्जा का विस्तार केवल बिजली उत्पादन का विषय नहीं है, बल्कि इससे जुड़े स्थानीय उद्योग और रोजगार के अवसर भी क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकते हैं।

     

  • INDIA ब्लॉक बैठक से पहले सीट बंटवारे पर सपा की तैयारी, प्रत्याशियों की जीत पर रहेगा जोर

    INDIA ब्लॉक बैठक से पहले सीट बंटवारे पर सपा की तैयारी, प्रत्याशियों की जीत पर रहेगा जोर

     लखनऊ
    उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस का गठबंधन तय माना जा रहा है, लेकिन सीट शेयरिंग का फॉर्मूला अभी तक पूरी तरह हल नहीं हो पाया है. सपा और कांग्रेस नेताओं के बीच जारी बयानबाजी के बीच नई दिल्ली में 'इंडिया गठबंधन' की बैठक बुलाई गई है. माना जा रहा है कि इस दौरान सपा-कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे पर विस्तार से चर्चा हो सकती है। 

    सूत्रों के मुताबिक, समाजवादी पार्टी ने गठबंधन की बैठक में सीट बंटवारे को लेकर अपना रुख मजबूती से रखने का प्लान बनाया है. बैठक में सपा, कांग्रेस से संभावित उम्मीदवारों के नामों के साथ-साथ पसंदीदा सीटों की सूची मांग सकती है। 

    बता दें कि अखिलेश यादव और राहुल गांधी के बीच पहले भी उच्च स्तरीय बैठकें हो चुकी हैं. आगामी बैठक में सपा प्रमुख अखिलेश यादव स्वयं मौजूद न रहकर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को भेज सकते हैं. इस दौरान सपा सीट शेयरिंग को लेकर कांग्रेस के सामने चार प्रमुख मांगें रख सकती है। 

    कांग्रेस के सामने सपा की चार अहम शर्तें
    सपा प्रमुख अखिलेश यादव सीट शेयरिंग पर लगातार एक ही बात कहते आ रहे हैं कि गठबंधन में सीटों की संख्या नहीं, बल्कि जीत सबसे अहम होगी. जो प्रत्याशी जीत दर्ज कर सकता है, उसे ही सीट मिलनी चाहिए. 2024 के लोकसभा चुनाव की तर्ज पर ही 2027 के चुनाव के लिए भी सपा ने अपनी शर्तें रखी हैं। 

        मजबूत प्रत्याशी का नाम: कांग्रेस को यूपी की जिन विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ना है, उन पर अपने संभावित उम्मीदवारों के नाम स्पष्ट करने होंगे। 

        सीटों के नाम: सपा का साफ कहना है कि कांग्रेस जिन विशिष्ट सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है, उनकी सूची दे। 

        क्षेत्रीय जनाधार: कांग्रेस जिन सीटों पर दावेदारी कर रही है, वहां उसका जनाधार और राजनीतिक आधार क्या है, यह स्पष्ट करना होगा। 

        जीत की संभावना: सपा की मांग है कि कांग्रेस उम्मीदवार की जीत की कितनी संभावना है, इसका आकलन किया जाए. अखिलेश यादव का मानना है कि प्रत्याशी के चयन से ही चुनावी नतीजे तय होते हैं.

    इंडिया ब्लॉक की बैठक में सपा की रणनीति
    बैठक में सपा सीटों की दावेदारी के साथ कांग्रेस के संभावित उम्मीदवारों की जमीनी पकड़ का मुद्दा उठाएगी. सपा का मुख्य फोकस सीटों की संख्या के बजाय प्रत्याशी की जीतने की क्षमता पर रहेगा। 

    सपा का मानना है कि सिर्फ कागजी दावों या बयानबाजी के आधार पर सीटों की मांग करना गठबंधन के हित में नहीं है. सपा की ओर से यह बात प्रमुखता से रखी जाएगी कि गठबंधन का मुख्य लक्ष्य हर हाल में चुनाव जीतना है। 

    2027 चुनाव जीत के समीकरणों पर मंथन

    यूपी विधानसभा चुनाव में सीट शेयरिंग के दौरान उम्मीदवारों के क्षेत्रीय समीकरण और जीत की क्षमता को ही मुख्य आधार बनाया जाएगा. अखिलेश यादव का पूरा ध्यान 2027 के चुनाव पर है, क्योंकि यह चुनाव पार्टी के राजनीतिक वजूद के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है. इसीलिए सपा नेतृत्व किसी भी तरह की ढील नहीं देना चाहता है। 

  • चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव: कांग्रेस-AAP के बीच फिर गठबंधन के आसार

    चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव: कांग्रेस-AAP के बीच फिर गठबंधन के आसार

    चंडीगढ़
     दिसंबर में प्रस्तावित चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव को लेकर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) के बीच एक बार फिर गठबंधन की संभावना बनती दिखाई दे रही है। रविवार को कांग्रेस की प्रदेश चुनाव समिति और पाॅलिटिकल अफेयर्स कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक हुई।

    प्रदेश चुनाव समिति में नगर निगम चुनाव के लिए आप के साथ गठबंधन के प्रस्ताव पर चर्चा हुई। बैठक में पार्टी प्रभारी रजनी पाटिल, सांसद मनीष तिवारी सहित चुनाव समिति के सदस्य मौजूद रहे।

    सूत्रों के अनुसार, प्रदेश चुनाव समिति की बैठक में सदस्यों से सीधे पूछा गया कि क्या कांग्रेस को नगर निगम चुनाव में आम आदमी पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ना चाहिए।

    चर्चा के दौरान अधिकांश सदस्यों ने गठबंधन के प्रस्ताव पर सहमति जताई। अब चुनाव समिति के सदस्यों की राय के बाद प्रस्ताव को पार्टी हाईकमान के समक्ष रखा जाएगा। अंतिम फैसला हाईकमान ही करेगा।

    मालूम हो कि पंजाब विधानसभा से पहले चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव होने हैं। साल 2024 का लोकसभा चुनाव भी चंडीगढ़ में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने गठबंधन के तहत ही लड़ा था जिस कारण कांग्रेस उम्मीदवार मनीष तिवारी भाजपा को काफी कम मार्जन से हराने में कामयाब हुए थे।

    जबकि पंजाब में दोनों पार्टियों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था। पिछले दो मेयर चुनाव भी कांग्रेस और आप एक साथ मिलकर लड़ चुके हैं ।ऐसे में अब फिर से गठबंधन होने पर भाजपा की राह मुश्किल हो जाएगी।

    कांग्रेस के भीतर गठबंधन को लेकर मंथन की बड़ी वजह वर्ष 2021 का नगर निगम चुनाव है। उस चुनाव में आम आदमी पार्टी ने पहली बार चंडीगढ़ में नगर निगम चुनाव लड़ा था और 35 में से 14 वार्ड जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी।

    कांग्रेस को आठ सीटें मिली थीं, जबकि भाजपा ने 12 और शिरोमणि अकाली दल ने एक सीट जीती थी ।कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि 2021 में भाजपा और कांग्रेस के बीच परंपरागत मुकाबला आप के मैदान में उतरने के बाद त्रिकोणीय हो गया था।

    आप को मिले वोटों का एक हिस्सा ऐसा था, जो विपक्षी वोट के रूप में कांग्रेस के खाते में जा सकता था। कांग्रेस का मानना है कि इस बार तीनों दलों के अलग-अलग चुनाव लड़ने पर फिर से विपक्षी वोटों का बंटवारा हो सकता है।

    इस बैठक में पार्टी के प्रमुख रजनी पाटिल, सांसद मनीष तिवारी समेत चुनाव समिति के अन्य प्रमुख सदस्य उपस्थित थे। यह स्पष्ट हुआ कि एकसाथ खड़े होने से ना केवल वोटों का उलझन भंग होगा बल्कि भाजपा की सत्ता-धारण की राह पर भी गहरा असर पड़ेगा। पिछले 2021 के नगर निगम चुनाव की याद ताजा करते हुए यह कहा जा सकता है कि तब भी आम आदमी पार्टी ने पहली बार नगर निगम में भाग लेकर 14 वार्ड जीत कर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी। कांग्रेस को मात्र आठ सीटें मिलीं और भाजपा एवं शिरोमणि अकाली दल ने क्रमशः बारह और एक-एक सीट जीती। उस समय यह स्पष्ट था कि विपक्षी दलों के बीच प्रतिस्पर्धा के कारण वोट शेयरों का बंटवारा भड़कर हुआ था। उसी तर्क को आज के दौर में उभारा गया है कि यदि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी अलग-अलग चुनाव लड़ती हैं तो फिर से वोटों का विखंडन हो सकता है और परिणामस्वरूप भाजपा आसान जीत का दावा कर सकती है। विगत वार्षिक चुनावों में देखा गया कि जब दोनों दल एक साथ खड़े हुए थे, या कुछ प्रमुख वार्ड्स में गठबंधन के बाद हों थे, तो उन्हें काफी मजबूती मिली। 2021 के चुनाव में कुल 29.

    79 प्रतिशत वोट कांग्रेस को मिले, इसके बाद भाजपा के 29.30 प्रतिशत व आम आदमी पार्टी के 27.08 प्रतिशत वोट थे। इसके अतिरिक्त निर्दलीय उम्मीदवारों को 7.10 प्रतिशत और अन्य दलों को 6.26 प्रतिशत वोट मिले थे। कांग्रेस वफादार चेहरे अब इस गठबंधन के तहत नई टिकट रणनीति अपनाने को तैयार हैं और अपने दल बदलों के अनुभव से सबक लेकर विजयी मार्ग पर अग्रसर हैं। अतीत में दिखे संघर्षों के बावजूद, अब दोनों दल यह समझते हैं कि सिर्फ़ ट्रिक-टैको पर टिके रहकर नहीं जीत सकते; बल्कि एक मजबूत और तालमेलपूर्ण गठबंधन योजना बनानी पड़ेगी ताकि विपक्षी दलों के बीच समन्वय हो सके और मतदाताओं के बीच मतभेद को दूर किया जा सके। इसके अलावा, पंजाब विधानसभा चुनाव के बावजूद भी चंडीगढ़ में नगर निगम चुनाव पूर्व होना अनिवार्य है और इस बार भी दोनों दलों के बीच एकजुट होकर कार्य करने की संभावना तेज़ी से बढ़ रही है। कांग्रेस के अंदर भी यह सर्वसम्मति स्पष्ट हो रही है कि 2024 के लोकसभा तथा 2025 के नगर निगम चुनाव में भी दो प्रमुख दलों के बीच एक फ्यूजन की आकांक्षा है। यह मतदाताओं के बीच उम्मीद जगाती है कि दोगली चुनाव लड़ने की बजाए एक सशक्त, संयुक्त मोर्चा प्रस्तुत किया जाएगा। इस प्रकार, चंडीगढ़ में आगामी नगर निगम चुनाव के परिदृश्य में दोनों दलों के बीच गठबंधन संभवतः आने वाले दिनों में एक महत्वपूर्ण खबर बनकर सामने आ सकता है।

    कांग्रेस को मिले थे 29 प्रतिशत वोट
    साल 2021 के नगर निगम चुनाव में कांग्रेस को आप और भाजपा के मुकाबले कम सीटें मिली थी ।लेकिन सबसे ज्यादा वोट हासिल करने वाली पार्टी कांग्रेस बनी है। निगम चुनाव में कांग्रेस को 29.79 फीसद वोट पड़े हैं।

    दूसरे नंबर पर भाजपा को 29.30 फीसद और तीसरे नंबर पर आम आदमी पार्टी को 27.08 फीसद वोट पड़े हैं। निर्दलीय उम्मीदवार को 7.10 फीसद और अन्य को 6.26 फीसद वोट पड़ी हैं।मालूम हाे कि पंजाब में दोनो दल के नेता एक दूसरे का खुलकर विरोध करते हैं ।

     

  • सब्जियों पर कलरफुल लाइट पड़ी भारी, बार-बार नियम तोड़ा तो लाइसेंस होगा सस्पेंड

    सब्जियों पर कलरफुल लाइट पड़ी भारी, बार-बार नियम तोड़ा तो लाइसेंस होगा सस्पेंड

    चंडीगढ़ 

    चंडीगढ़ में लगने वाली सब्जी मंडियों में वेंडरों की ओर से रंगीन लाइटों का प्रयोग करने पर एक्शन की तैयारी हो गई है। हरी, पीली या अन्य रंगों की लाइटें लगाने वाले वेंडरों के लाइसेंस तक कैंसिल किए जाएंगे। इस संबंध में निगम की कमेटी ने प्रस्ताव तैयार किया। 

    इस बार होने वाली हाउस की मीटिंग में यह एजेंडा लाया जाएगा। नगर निगम की समिति के मेंबर व पार्षद गुरप्रीत गाबी का कहना है कि लोग पैसे देकर फ्रेश और साफ-सुथरी सब्जियों के लिए आते हैं। लेकिन मार्केट में वेंडर रंग-बिरंगी लाइटें लगा देते हैं। वे सब्जियों पर हरी लाइट्स और फ्रूट पर येलो या रेड लाइट का प्रयोग करते हैं।

    इससे व्यक्ति मार्केट से सब्जी हरी समझकर खरीदकर ले आता है, लेकिन घर में आकर वह खराब या पीली निकलती है। यह धोखाधड़ी है। यह लोगों के खाने पर भी डाका है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। इसके अलावा वेंडर प्लास्टिक बैग और गंदगी फेंककर चले जाते हैं।

    चालान का सिस्टम भी किया तैयार गाबी ने बताया कि चालान का सिस्टम भी बनाया गया है। इसके तहत कानून तोड़ने वाले वेंडर का चालान होगा। तीन बार चालान होने पर छह महीने के लिए लाइसेंस सस्पेंड कर दिया जाएगा। आईडी कार्ड में परिवार का ब्यौरा भी रहेगा। इसमें उसका पूरा एड्रेस रहेगा।

    किसानों को मंडी में 50 प्रतिशत छूट दी जाएगी इस कार्य का फायदा होगा कि उसे पूरी तरह से कवर किया जाएगा। लोकल किसानों को मंडी में 50 प्रतिशत छूट दी जाएगी। यह छूट मंडी फीस में मिलेगी। यह छूट उन किसानों को मिलेगी, जिनके पास उनकी जमीन की फर्द और आईकार्ड होगा।

    कमेटी के सभी सदस्य इलाके के पार्षद नगर निगम की मंडी से जुड़ी कमेटी ने प्रस्ताव तैयार किया है। इस कमेटी के सभी सदस्य इलाके के पार्षद हैं। अक्टूबर माह की मीटिंग में यह प्रस्ताव आएगा। अगर सब कुछ सही रहा तो निगम की मीटिंग के बाद प्रशासन की मंजूरी मिलने पर इसे लागू कर दिया जाएगा।

  • PUC सर्टिफिकेट एक्सपायर हुआ तो कटेगा ₹10 हजार का चालान, 1 अक्टूबर से शुरू होगी ड्राइव

    PUC सर्टिफिकेट एक्सपायर हुआ तो कटेगा ₹10 हजार का चालान, 1 अक्टूबर से शुरू होगी ड्राइव

    नई दिल्ली

    दिल्ली में गाड़ी चलाते हैं तो 1 अक्टूबर की तारीख याद रख लीजिए. क्योंकि अब सिर्फ गाड़ी का इंजन, ब्रेक और हॉर्न ही नहीं, आपकी जेब में रखा PUC सर्टिफिकेट भी सरकार की नजर में होगा. PUC वैलिड नहीं है तो मुश्किल बढ़ सकती है. दिल्ली सरकार ने साफ कर दिया है कि 1 अक्टूबर से इनवैलिड या एक्सपायर्ड PUC सर्टिफिकेट वाले वाहनों के लिए इंफोर्समेंट ड्राइव (Enforcement Drive) शुरू होगी. यानी सड़क पर निकलने से पहले यह देख लेना जरूरी होगा कि आपकी गाड़ी प्रदूषण जांच में पास है या नहीं। 

    दरअसल, सर्दियों की शुरुआत के साथ ही दिल्ली की हवा खराब होने लगती है. और इस बार सरकार पहले से ही कड़ी तैयारी में है. दिल्ली ही हवा को साफ रखने के लिए सरकार ने बुराड़ी में ऐसा ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ATS) भी शुरू किया है, जहां सालाना 1 लाख वाहनों की जांच हो सकेगी. मतलब दिल्ली की सड़कों पर अब प्रदूषण फैलाने वाली गाड़ियों की पहचान और कार्रवाई, दोनों पर निगरानी बढ़ने वाली है। 

    दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन के लॉन्च के मौके पर कहा कि, "दिल्ली में 1 अक्टूबर से वैलिड पीयूसी सर्टिफिकेट से जुड़ा इंफोर्समेंट सिस्टम लागू किया जाएगा. इसके तहत वाहनों के PUC certificate की वैधता की जांच की जाएगी. उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार पूरे साल वायु प्रदूषण कम करने के लिए अलग-अलग कदम उठा रही है और यह उसी दिशा में एक और पहल है। 

    सरकार PUC सेंटर्स की निगरानी और उनके काम करने के तरीके को भी ज्यादा इफेक्टिव और भरोसेमंद बनाने की तैयारी कर रही है. इसके लिए तकनिकियों में बदलाव किया जाएगा और इसे और भी एडवांस बनाया जाएगा. ताकि PUC सर्टिफिकेट जारी करने के प्रोसेस और उसकी मॉनिटरिंग पर बेहतर नजर रखी जा सके। 

    कैमरों से निगरानी
    मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली के सभी PUC सेंटर्स पर कैमरा लगाए जा रहे हैं. इन कैमरों की मदद से यह निगरानी की जाएगी कि PUC सर्टिफिकेट जारी करने की प्रक्रिया सही तरीके से हो रही है या नहीं. सरकार का फोकस PUC सिस्टम को ज्यादा ट्रांसपैरेंट और भरोसेमंद बनाने पर है. इससे उन वाहनों पर भी नजर रखने में मदद मिल सकती है, जिनके प्रदूषण प्रमाणपत्र की वैधता खत्म हो चुकी है या जो तय प्रदूषण मानकों पर खरे नहीं उतरते। 

    10,000 का चालान
    बिना वैलिड पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (PUC) सर्टिफिकेट के वाहन चलाते हुए पकड़े जाने की स्थिति में वाहन चालक को मोटी चपत लग सकती है. अधिकारियों का कहना है कि, PUC नियमों का उल्लंघन करने के लिए 10,000 रुपये तक का चालान काटा जा सकता है. इसलिए वाहन मालिकों को तत्काल अपने वाहनों के पीयूसी की जांच करनी चाहिए और यदि वैलिडिटी खत्म हो गई है या आने वाले दिनों में समाप्त होने वाली है तो समय से पहले PUC जांच करवा कर सर्टिफिकेट प्राप्त करना जरूरी है। 

    बुराड़ी में देश का सबसे बड़ा ATS
    रेखा गुप्ता ने बुराड़ी में जिस ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन का उद्घाटन किया है, उसे उन्होंने देश का सबसे बड़ा ATS बताया है. इस स्टेशन के जरिए बड़ी संख्या में कमर्शियल व्हीकल्स की फिटनेस और पॉल्यूशन से जुड़ी जांच की जाएगी. सरकार के मुताबिक, इससे दिल्ली की सड़कों पर चलने वाले ज्यादातर कमर्शियल वाहनों की आसानी से जांच की जा सकेगी. बुराड़ी ATS में हर साल 40,000 हैवी मोटर व्हीकल्स और 60,000 लाइट मोटर व्हीकल्स की जांच करने की क्षमता होगी. यानी यह स्टेशन सालाना कुल 1 लाख वाहनों की टेस्टिंग कर सकेगा। 

    ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर पंकज सिंह ने बताया कि बुराड़ी ATS में वाहनों की फिटनेस टेस्टिंग पूरी तरह ऑटोमेटेड प्रोसेस के जरिए होगी. इस टेस्टिंग के दौरान ब्रेकिंग इफिसिएन्सी, सस्पेंशन परफॉर्मेंस, हेडलाइट कंडिशन, साइड-स्लिप और इमिशन लेवल जैसे पैरामीटर्स की जांच की जाएगी. इसके अलावा वाहनों के अंडरसाइड की भी जांच की जाएगी. इस ऑटोमेटेड टेस्टिंग सिस्टम के जरिए यह तय हो सकेगा कि, उक्त वाहन शहर में चलने लायक है या नहीं। 

    दिल्ली सरकार के मुताबिक, बुराड़ी से पहले 3 सितंबर को तेहखंड में भी एक ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन का उद्घाटन किया गया था. इस ATS में हर साल करीब 72,000 वाहनों की जांच करने की क्षमता है. सरकार अब दिल्ली में ATS और PUC सेंटर्स के नेटवर्क को मजबूत करने पर जोर दे रही है. एक तरफ ऑटोमेटेड टेस्टिंग के जरिए वाहनों की फिटनेस और इमिशन की जांच की जाएगी, वहीं दूसरी तरफ PUC सेंटर्स पर कैमरा और टेक्नोलॉजी के जरिए निगरानी बढ़ाई जाएगी। 

  • गोरखनाथ मंदिर में आहुत श्रद्धांजलि सप्ताह में सम्मिलित होंगे मुख्यमंत्री

    गोरखनाथ मंदिर में आहुत श्रद्धांजलि सप्ताह में सम्मिलित होंगे मुख्यमंत्री

    गोरखपुर

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मंगलवार (29 सितंबर) को गोरखनाथ मंदिर में ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 57वीं और ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 12वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में आयोजित साप्ताहिक श्रद्धांजलि समारोह में सम्मिलित होंगे। 

    मुख्यमंत्री, गोरखनाथ मंदिर में मंगलवार सुबह युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की पुण्यस्मृति में आहुत श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करेंगे। इस कार्यक्रम में देशभर के प्रमुख संतों की भी सहभागिता होगी। इसके बाद गोरखनाथ मंदिर में मलूक पीठाधीश्वर स्वामी राजेंद्रदास जी महाराज द्वारा सुनाई जा रही सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण की कथा का विराम होगा। सीएम योगी भी इस कथा के विराम सत्र में सम्मिलित होंगे। गोरखपुर दौरे के तीसरे दिन, बुधवार को मुख्यमंत्री अपने पूज्य गुरुदेव राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की पुण्य स्मृति में आयोजित श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करेंगे।

  • यूपीआईटीएस-2026 में चार दिन में ₹5,500 करोड़ के व्यापारिक समझौते

    यूपीआईटीएस-2026 में चार दिन में ₹5,500 करोड़ के व्यापारिक समझौते

    ग्रेटर नोएडा

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘लोकल से ग्लोबल’ विजन के अनुरूप उत्तर प्रदेश को देश-दुनिया के लिए भरोसेमंद व्यापारिक साझेदार के रूप में स्थापित करने की दिशा में आयोजित चौथे यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) ने चार दिनों में ही नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में 25 से 29 सितंबर तक आयोजित इस पांच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में 28 सितंबर तक संचयी रूप से ₹5,500 करोड़ यानी करीब 574 मिलियन अमेरिकी डॉलर के 3,765 व्यापारिक समझौतों (एमओयू) पर हस्ताक्षर हो चुके हैं। इसके अलावा देश-विदेश के खरीदारों और कंपनियों की ओर से ₹12,500 करोड़ की कारोबारी पूछताछ दर्ज की गई है। मंगलवार को ट्रेड शो का अंतिम दिन है, जिससे इन आंकड़ों में और वृद्धि की संभावना है।

    फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस (एफआईईओ) के अपर महानिदेशक सुविध शाह के अनुसार, 28 सितंबर तक कुल 35,387 बिजनेस-टू-बिजनेस (बी2बी) बैठकें संपन्न हुई हैं। इनमें अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए आयोजित रिवर्स बायर्स सेलर्स मीट (आरबीएसएम) में 11,887 बैठकें, जबकि मुख्य प्रदर्शनी क्षेत्र में घरेलू व अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के बीच 23,500 बी2बी बैठकें हुईं। इन बैठकों ने प्रदेश के उद्यमियों, निर्माताओं और निर्यातकों को सीधे वैश्विक खरीदारों से जोड़ने का काम किया है।

    योगी सरकार की नीतियों का वैश्विक बाजार में दिख रहा असर

    यूपीआईटीएस-4.0 महज उत्पादों की प्रदर्शनी नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की औद्योगिक नीतियों, निवेश अनुकूल वातावरण और उद्यमिता की क्षमता को वैश्विक बाजार से जोड़ने का प्रभावी मंच बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में विकसित किए जा रहे औद्योगिक एवं कारोबारी इकोसिस्टम का लाभ एमएसएमई, ओडीओपी, हथकरघा, हस्तशिल्प, कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण तथा आधुनिक विनिर्माण क्षेत्र के उद्यमियों को मिल रहा है। चार दिनों में हुए 3,765 एमओयू और ₹12,500 करोड़ की कारोबारी पूछताछ से स्पष्ट है कि यूपीआईटीएस ने प्रदेश के स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजारों से जोड़ने के लिए एक महत्वपूर्ण व्यापारिक सेतु का काम किया है। यहां छोटे उद्यमियों से लेकर बड़े निर्माताओं तक को घरेलू और विदेशी खरीदारों के साथ सीधे संवाद, उत्पाद प्रदर्शन और व्यापारिक समझौतों का अवसर मिल रहा है।

    ‘लोकल से ग्लोबल’ की दिशा में यूपी की नई पहचान

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘लोकल से ग्लोबल’ विजन के तहत यूपीआईटीएस के माध्यम से प्रदेश के पारंपरिक और आधुनिक उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। एक जिला-एक उत्पाद (ओडीओपी) जैसे कार्यक्रमों ने स्थानीय कारीगरों, शिल्पकारों और छोटे उद्यमियों के उत्पादों को वैश्विक खरीदारों के सामने पहुंचाने का अवसर दिया है। यूपीआईटीएस-4.0 के माध्यम से उत्तर प्रदेश की एमएसएमई शक्ति, ओडीओपी उत्पाद, हथकरघा, हस्तशिल्प, कृषि उत्पाद, खाद्य प्रसंस्करण और विनिर्माण क्षमता एक ही मंच पर वैश्विक बाजार से जुड़ रही है। इससे न केवल व्यापार के नए अवसर बन रहे हैं, बल्कि प्रदेश के स्थानीय उत्पादों के लिए निर्यात की संभावनाएं भी विस्तार पा रही हैं।

  • योगी सरकार में बालवाटिकाओं को मिलेगा ‘लर्निंग कॉर्नर’ का नया संसार, 966 पीएम श्री विद्यालयों में होगी आधुनिक व्यवस्था, ₹193 लाख की मंजू

    योगी सरकार में बालवाटिकाओं को मिलेगा ‘लर्निंग कॉर्नर’ का नया संसार, 966 पीएम श्री विद्यालयों में होगी आधुनिक व्यवस्था, ₹193 लाख की मंजू

    लखनऊ

    योगी सरकार ने नौनिहालों की प्रारंभिक शिक्षा को और अधिक रोचक, गतिविधि आधारित एवं बाल-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। पीएम श्री योजना के अन्तर्गत वर्ष 2026-27 में 966 पीएम श्री विद्यालयों में स्थित को-लोकेटेड आंगनवाड़ी केंद्रों/बालवाटिकाओं में लर्निंग कॉर्नर विकसित किए जाएंगे। इसके लिए ₹193 लाख की धनराशि स्वीकृत की गई है। प्रत्येक चयनित विद्यालय के लिए ₹20,000 की दर से धनराशि उपलब्ध कराई जाएगी। 

    इन केंद्रों में बच्चों की आयु और सीखने की जरूरतों के अनुरूप रीडिंग कॉर्नर, ब्लॉक कॉर्नर, परफॉर्मेंस कॉर्नर और आर्ट कॉर्नर विकसित किए जाएंगे। 966 पीएम श्री विद्यालयों में लर्निंग कॉर्नर की स्थापना से बालवाटिकाओं में बच्चों के लिए ऐसा वातावरण तैयार होगा, जहां किताब, खिलौना, कला, अभिनय और गतिविधि सीखने के माध्यम बनेंगे। योगी सरकार की यह पहल प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा को अधिक जीवंत, अनुभवपरक और बच्चों की स्वाभाविक जिज्ञासा के अनुरूप बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

    खेल और गतिविधियों से सीखेंगे बच्चे, बालवाटिका बनेगी सीखने की प्रयोगशाला

    राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप प्रारंभिक बाल्यावस्था में बच्चों को गतिविधि आधारित शिक्षण से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। शासन के निर्देशों के अनुसार चारों लर्निंग कॉर्नर बच्चों के सामाजिक एवं संवेदनात्मक विकास, संज्ञानात्मक विकास, शारीरिक विकास तथा सूक्ष्म मांसपेशियों के विकास में सहायक होंगे। 3-5 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए तैयार किए जाने वाले लर्निंग कॉर्नर में रीडिंग, ब्लॉक, परफॉर्मेंस और आर्ट गतिविधियों के लिए आयुवर्ग के अनुरूप सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। 

    कहानी की किताबों से लेकर पजल और ब्लॉक्स तक, सीखने के लिए समृद्ध सामग्री

    रीडिंग कॉर्नर में हिंदी वर्णमाला मैट, चित्रात्मक कहानी की पुस्तकें, ओपन बुक शेल्फ, चित्र एवं संख्या चार्ट और लेखन/चित्रकारी के लिए क्लिप बोर्ड जैसी सामग्री शामिल है। इसका उद्देश्य बच्चों में शब्दावली, सुनने और शुरुआती साक्षरता से जुड़ी क्षमताओं को बढ़ावा देना है। ब्लॉक कॉर्नर में बड़े फोम ब्लॉक्स, लकड़ी के ब्लॉक्स, शेप सॉर्टर, पिक्चर पजल, अल्फाबेट एवं नंबर ब्लॉक्स, स्टैकिंग टॉयज और लेसिंग बोर्ड जैसी सामग्री निर्धारित की गई है। इससे बच्चों में आकार पहचान, समस्या समाधान, स्थानिक समझ, शुरुआती साक्षरता एवं संख्याज्ञान जैसी क्षमताओं के विकास को प्रोत्साहन मिलेगा। 

    परफॉर्मेंस और आर्ट कॉर्नर से निखरेगी रचनात्मकता

    परफॉर्मेंस कॉर्नर में बच्चों के लिए विभिन्न भूमिका-आधारित गतिविधियों से जुड़ी सामग्री रखी जाएगी। इनमें ड्रेस-अप कॉस्ट्यूम, फिंगर स्टिक पपेट, किचन प्ले सेट, सॉफ्ट डॉल, इमोशन मास्क, स्मॉल ड्रम, हैट्स एवं स्कार्फ और टॉय टेलीफोन जैसी सामग्री शामिल है। इनका उद्देश्य कल्पनाशील भूमिका-अभिनय, कहानी कहने, संवाद, सामाजिक सहभागिता और भावनात्मक विकास को बढ़ावा देना है। आर्ट कॉर्नर में नॉन-टॉक्सिक फिंगर पेंट, क्रेयॉन, चाइल्ड-सेफ ग्लू स्टिक, आर्ट शीट एवं कलर पेपर जैसी सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। इसके माध्यम से बच्चों को रचनात्मक अभिव्यक्ति और सूक्ष्म मोटर कौशल विकसित करने के अवसर मिलेंगे। 

    3-5 और 5-6 वर्ष के बच्चों की जरूरत के अनुसार अलग व्यवस्था

    लर्निंग कॉर्नर की सामग्री आयु वर्ग के अनुरूप निर्धारित की गई है। 3-5 वर्ष और 5-6 वर्ष के बच्चों के लिए अलग-अलग सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि बच्चों की उम्र और विकासात्मक जरूरतों के अनुरूप गतिविधियां संचालित की जा सकें। 5-6 वर्ष के बच्चों के लिए रीडिंग कॉर्नर में शुरुआती पठन कौशल को ध्यान में रखते हुए अर्ली रीडर्स एवं द्विभाषी पुस्तकों जैसी सामग्री का प्रावधान किया गया है। 
     

    “लर्निंग कॉर्नर से बच्चों की जिज्ञासा को मिलेगा सीखने का नया मंच”

    “बालवाटिका में सीखना बच्चों के लिए जितना सहज और आनंददायक होगा, उनकी बुनियाद उतनी ही मजबूत होगी। 966 पीएम श्री विद्यालयों में लर्निंग कॉर्नर विकसित होने से नौनिहालों को पढ़ने, खेलने, कला, अभिनय और गतिविधियों के माध्यम से सीखने का अवसर मिलेगा। हमारा प्रयास है कि बच्चे अपनी स्वाभाविक जिज्ञासा के साथ सीखें और शुरुआती वर्षों में ही उनकी क्षमताओं को सही दिशा मिले।”

    संदीप सिंह, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), बेसिक शिक्षा

    “गतिविधि आधारित वातावरण से निखरेंगी बच्चों की सीखने की क्षमताएं”

    “लर्निंग कॉर्नर में आयु वर्ग के अनुरूप निर्धारित सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि बच्चों को उनकी विकासात्मक जरूरतों के अनुसार सीखने के अवसर मिलें। रीडिंग, ब्लॉक, परफॉर्मेंस और आर्ट कॉर्नर के प्रभावी उपयोग के साथ सामग्री की उपलब्धता और गुणवत्ता की नियमित निगरानी भी सुनिश्चित की जाएगी।”
     मोनिका रानी, महानिदेशक, स्कूल शिक्षा