Category: राज्य

  • पंजाब कांग्रेस में बदलाव की अटकलें तेज, 48 घंटे में फैसला संभव; वड़िंग पर टिकी नजरें

    पंजाब कांग्रेस में बदलाव की अटकलें तेज, 48 घंटे में फैसला संभव; वड़िंग पर टिकी नजरें

    चंडीगढ़ 

    पंजाब कांग्रेस में अगले 48 घंटे के बीच बड़ा बदलाव हो सकता है। इसको लेकर दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान से लेकर पंजाब तक हलचल तेज है। कांग्रेस हाईकमान से जुड़े सोर्सेज के मुताबिक पंजाब में पार्टी प्रभारी सचिन पायलट की रिपोर्ट के बाद ये बदलाव होगा। 

    कांग्रेस के भीतरी सोर्सेज के मुताबिक यह बदलाव पार्टी प्रधान अमरिंदर राजा वड़िंग को लेकर हो सकता है लेकिन अभी तक इसकी कोई औपचारिक पुष्टि नहीं हुई है। पायलट ने हाल ही में यूथ कांग्रेस और जिला प्रधानों से दिल्ली में मीटिंग कर इसका फीडबैक लिया था।

    पायलट ने राहुल-खरगे को सौंपी फीडबैक रिपोर्ट

    पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के भीतर संगठन को लेकर हलचल तेज हो गई है. सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर पंजाब कांग्रेस को लेकर अहम बैठक हुई. बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और पंजाब कांग्रेस के प्रभारी सचिन पायलट मौजूद रहे. सूत्रों के मुताबिक, बैठक में सचिन पायलट ने पंजाब कांग्रेस को लेकर अपनी विस्तृत रिपोर्ट राहुल गांधी और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को सौंप दी है। 

    संगठन के भीतर चल रही खेमेबाजी और नेताओं के बीच मतभेद को लेकर फीडबैक दिया गया है. रिपोर्ट में प्रदेश अध्यक्ष की कार्यशैली का भी जिक्र है. सूत्रों के मुताबिक, सचिन पायलट की रिपोर्ट में पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष की कार्यशैली को लेकर भी फीडबैक दिया गया है. रिपोर्ट में संगठन के कामकाज, नेताओं के बीच समन्वय और प्रदेश नेतृत्व को लेकर सामने आई बातों का उल्लेख किया गया है। 

    चन्नी खेमे की शिकायतों को भी रिपोर्ट में जगह
    सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्ट में चरणजीत सिंह चन्नी खेमे की ओर से उठाई गई शिकायतों और आपत्तियों का भी जिक्र किया गया है. चन्नी खेमे की ओर से प्रदेश संगठन और नेतृत्व को लेकर जो बातें हाईकमान के सामने रखी गई थीं, उन्हें भी पायलट के फीडबैक में शामिल किए जाने की जानकारी है. पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से अलग-अलग खेमों के बीच मतभेद की स्थिति रही है. हाल में सचिन पायलट के पंजाब प्रभारी बनने के बाद चन्नी और प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग एक ही मंच पर नजर आए थे। 

    रिपोर्ट के बाद अब हाईकमान के फैसले पर नजर
    सूत्रों के मुताबिक, पायलट की रिपोर्ट में पंजाब कांग्रेस की जमीनी स्थिति से लेकर संगठन के अंदरूनी समीकरणों तक का फीडबैक शामिल है.
    अब निगाह इस बात पर है कि पायलट की रिपोर्ट और राहुल गांधी-खरगे के साथ हुई चर्चा के बाद पंजाब कांग्रेस के संगठन को लेकर हाईकमान क्या कदम उठाता है। 

    PM मोदी का दो दिवसीय चिंतन शिविर शुरू, सुधारों पर होगा मंथन
    पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस नेतृत्व के लिए संगठन के भीतर समन्वय और सामूहिक नेतृत्व अहम मुद्दा बना हुआ है. पायलट पहले ही कह चुके हैं कि कांग्रेस पंजाब चुनाव सामूहिक नेतृत्व में लड़ेगी और राहुल गांधी चुनाव अभियान का चेहरा होंगे। 

     

  • 36वीं राज्य स्तरीय कला प्रदर्शनी में कलाकारों को मिलेगा मौका, 1 अक्टूबर से आवेदन शुरू

    36वीं राज्य स्तरीय कला प्रदर्शनी में कलाकारों को मिलेगा मौका, 1 अक्टूबर से आवेदन शुरू

    लखनऊ

    योगी सरकार प्रदेश के कलाकारों को राज्य स्तर पर पहचान दिलाने का बड़ा मौका दे रही है। राज्य ललित कला अकादमी (संस्कृति विभाग) की ओर से '36वीं राज्य स्तरीय कला प्रदर्शनी 2026-27' का आयोजन किया जा रहा है। इसमें चित्र, रेखांकन, ग्राफिक यानी छापा कला, मूर्ति, पोर्ट्रेट यानी व्यक्ति चित्र-मूर्ति, वॉश और पारंपरिक कला विधाओं में कलाकार अपनी कृतियां भेज सकेंगे। प्रदर्शनी में शामिल होने के लिए प्रविष्टि शुल्क और छायाचित्र जमा करने की प्रक्रिया पहली अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक चलेगी। अकादमी की ओर से प्रदर्शनी में चयनित अति विशिष्ट कृतियों के लिए 10 कलाकारों को 25-25 हजार रुपये, प्रमाणपत्र और स्मृति चिह्न दिए जाएंगे।

    प्रदर्शनी में भाग लेने के लिए 300 रुपये प्रवेश शुल्क देना होगा। शुल्क निदेशक राज्य ललित कला अकादमी, उत्तर प्रदेश के नाम नकद, मनीऑर्डर या लखनऊ में देय बैंक ड्राफ्ट के माध्यम से जमा किया जा सकता है। विवरण पत्र यानी शेड्यूल, छायाचित्र, जीवन परिचय और पोट्रेट से संबंधित सामग्री कलाकार स्वयं या उचित माध्यम से अकादमी के पते पर भेज सकते हैं। एक कलाकार केवल एक ही विधा में भाग ले सकेगा। आवेदन अकादमी द्वारा निर्धारित प्रपत्र पर ही करना होगा। चयन के पहले चरण में आवेदन के साथ भेजे गए छायाचित्रों के आधार पर कृतियों का चयन होगा और दूसरे चरण में चयनित कृतियों में से पुरस्कार के लिए चयन किया जाएगा।

    1 अक्टूबर 2025 के बाद बनाई गई कृतियां ही इस प्रदर्शनी के लिए स्वीकार की जाएंगी। ऐसी कृति स्वीकार नहीं की जाएगी जो पहले किसी राज्य स्तरीय प्रदर्शनी में प्रदर्शित हो चुकी हो। छायाचित्र 5×7 इंच के दो-दो स्पष्ट रंगीन फोटो के रूप में भेजने होंगे। फोटो के पीछे केवल कृति का शीर्षक, माध्यम, मूल्य और निर्माण वर्ष लिखा जाना चाहिए। निर्धारित आकार से छोटा फोटो या अतिरिक्त जानकारी लिखे होने पर उसे अस्वीकार किया जा सकता है। चित्र का अधिकतम आकार 4×4 फीट और मूर्ति का अधिकतम आकार 4×4×4 फीट, जबकि मूर्ति का न्यूनतम आकार 2×2 फीट निर्धारित है। मूर्तियां धातु, लकड़ी, पत्थर और फाइबर ग्लास जैसे टिकाऊ पदार्थों की होनी चाहिए। 

    छायाचित्रों के चयन के बाद अकादमी की ओर से चयनित कृति भेजने के लिए कलाकारों को अलग से सूचना दी जाएगी। कलाकार अपनी ओर से सीधे कृति अकादमी को नहीं भेज सकेंगे, जब तक अकादमी की ओर से उसे आमंत्रित न किया जाए। निर्धारित समय में कृति अकादमी को नहीं पहुंचने पर उसे प्रदर्शनी और कैटलॉग में शामिल नहीं किया जाएगा। चयन एवं निर्णायक समिति का निर्णय अंतिम होगा। सभी पर ‘अन्तर्वस्तु 36वीं राज्य स्तरीय कला प्रदर्शनी 2026-27, लखनऊ के लिए है’ लिखना होगा। प्रदर्शनी में शामिल सभी कलाकारों को एक-एक निशुल्क कैटलॉग भी दिया जाएगा। चयनित कृति को प्रदर्शनी समाप्त होने से पहले हटाने की अनुमति नहीं होगी।

    प्रदर्शनी से संबंधित आवेदन और पत्राचार राज्य ललित कला अकादमी, लाल बारादरी भवन, ललित कला अकादमी मार्ग, कैसरबाग, लखनऊ-226001 के पते पर किया जा सकता है। अकादमी का दूरभाष 0522-2616033 और ईमेल slka_up@yahoo.com है। 

    पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि प्रदेश की समृद्ध कला और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के साथ ही कलाकारों को उचित मंच और प्रोत्साहन देना योगी सरकार की प्राथमिकता है। राज्य ललित कला अकादमी के माध्यम से युवा, उभरते, स्थापित और वरिष्ठ कलाकारों को प्रतिभा प्रदर्शित करने के अवसर दिए जा रहे हैं। 36वीं राज्य स्तरीय कला प्रदर्शनी प्रदेश के कलाकारों को अपनी रचनात्मक प्रतिभा सामने लाने और राज्य स्तर पर पहचान बनाने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान करेगी। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले कलाकार भी कला गतिविधियों से जुड़ें और उन्हें प्रशिक्षण, प्रदर्शन, पुरस्कार व आर्थिक सहयोग के माध्यम से आगे बढ़ने के अवसर मिलें।

  • PM मोदी से सीधा संवाद करेंगे हरियाणा के BJP विधायक, सैनी-अर्चना गुप्ता की अगुवाई में पहुंचेंगे दिल्ली

    PM मोदी से सीधा संवाद करेंगे हरियाणा के BJP विधायक, सैनी-अर्चना गुप्ता की अगुवाई में पहुंचेंगे दिल्ली

    चंडीगढ़
     हरियाणा की राजनीति में 3 अक्टूबर का दिन भाजपा के लिए अहम रहने वाला है। प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अर्चना गुप्ता की अगुवाई में पार्टी के सभी विधायक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे।

    प्रधानमंत्री के साथ विधायकों की यह मुलाकात दोपहर 3 बजे प्रस्तावित है। इसके लिए प्रदेश भाजपा ने विधायकों को दिल्ली पहुंचने के निर्देश दिए हैं।

    प्रधानमंत्री से मुलाकात से करीब एक घंटे पहले दोपहर 2 बजे सभी विधायक हरियाणा भवन में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ लंच करेंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष और सभी विधायक प्रधानमंत्री से मिलने जाएंगे। एक साथ होने वाली इस मुलाकात को सरकार और संगठन के बीच समन्वय के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    विधायकों के साथ प्रधानमंत्री की सीधी बातचीत का कार्यक्रम
    मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रदेश के भाजपा विधायकों से सीधे संवाद कर सकते हैं। हालांकि, बैठक का विस्तृत एजेंडा अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन हरियाणा की मौजूदा राजनीतिक और प्रशासनिक परिस्थितियों को देखते हुए प्रदेश सरकार के कामकाज, विकास योजनाओं और संगठनात्मक गतिविधियों से जुड़े मुद्दे चर्चा में आने की संभावना है।

    मुख्यमंत्री नायब सैनी की अगुवाई में भाजपा सरकार के कार्यों और आगामी कार्यक्रमों को लेकर भी प्रधानमंत्री के समक्ष जानकारी रखे जाने की संभावना है।

    लंच से लेकर प्रधानमंत्री मुलाकात तक सियासी मायने
    विधायकों का पहले हरियाणा भवन में मुख्यमंत्री के साथ एक साथ बैठना भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। विधानसभा के भीतर और अपने-अपने क्षेत्रों में विधायकों की भूमिका, जनता से जुड़े मुद्दों और सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर मुख्यमंत्री के साथ अनौपचारिक चर्चा का अवसर मिलेगा।

    इसके बाद प्रधानमंत्री के साथ सामूहिक मुलाकात से केंद्रीय नेतृत्व, प्रदेश सरकार और विधायकों के बीच सीधा संवाद स्थापित होगा।

    हरियाणा में भाजपा सरकार बनने के बाद यह मुलाकात ऐसे समय हो रही है, जब पार्टी सरकार और संगठन के स्तर पर अपने कामकाज को आगे बढ़ा रही है। ऐसे में 3 अक्टूबर का कार्यक्रम केवल शिष्टाचार मुलाकात तक सीमित रहने के बजाय प्रदेश के राजनीतिक और संगठनात्मक मुद्दों पर संवाद का अवसर भी बन सकता है।

     

  • कोसी का बाढ़ वाला पानी अब बुझाएगा खेतों की प्यास, 117.50 किमी लंबी नहर का होगा निर्माण

    कोसी का बाढ़ वाला पानी अब बुझाएगा खेतों की प्यास, 117.50 किमी लंबी नहर का होगा निर्माण

    किशनगंज
     कोसी नदी में मानसून के दौरान तबाही मचाने वाले अतिरिक्त पानी को सीमांचल के खेतों की प्यास बुझाने के काम में लाने वाली महत्वाकांक्षी 'कोसी-मेची इंट्रा-स्टेट लिंक परियोजना' अब धरातल पर उतरने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। किशनगंज जिले में परियोजना के निर्माण कार्य को लेकर कुल 571 एकड़ भूमि चिह्नित कर ली गई है।

    इसमें 552 एकड़ रैयती (निजी) भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा, जबकि 19 एकड़ सरकारी भूमि शामिल है। भूमि का सबसे बड़ा हिस्सा बहादुरगंज अंचल से अधिग्रहित किया जाएगा। परियोजना की कार्ययोजना के तहत कोसी नदी के अतिरिक्त पानी को नियंत्रित नहर प्रणाली के जरिए महानंदा नदी बेसिन तक पहुंचाया जाना है।

    117.50 किलोमीटर लंबी इस लिंक नहर का अंतिम छोर किशनगंज जिले के माखनपुर गांव के समीप मेची नदी में होगा। कोसी से निकला पानी नहर के रास्ते किशनगंज पहुंचेगा और मेची नदी में विसर्जित होकर महानंदा नदी तंत्र का हिस्सा बन जाएगा।

    बहादुरगंज अंचल में सबसे अधिक 454 एकड़ जमीन का होगा अधिग्रहण
    प्रशासन द्वारा तैयार किए गए भूमि विवरणी के अनुसार, बहादुरगंज अंचल में सर्वाधिक 454 एकड़ जमीन चिह्नित की गई है, जिसमें 13 एकड़ सरकारी जमीन है। इसके अलावा टेढ़ागाछ अंचल में 99 एकड़ (3 एकड़ सरकारी) और ठाकुरगंज अंचल के एक गांव में 17 एकड़ (2 एकड़ सरकारी) भूमि अधिग्रहण के दायरे में आएगी।

    कोसी-मेची लिंक परियोजना
        चिह्नित कुल भूमि: 571 एकड़ (552 एकड़ निजी + 19 एकड़ सरकारी)।

        अंचलवार भूमि विवरण:

            बहादुरगंज अंचल: 454 एकड़ (13 एकड़ सरकारी)।

            टेढ़ागाछ अंचल: 99 एकड़ (3 एकड़ सरकारी)।

            ठाकुरगंज अंचल: 17 एकड़ (2 एकड़ सरकारी)।

        नहर की संरचना (कुल लंबाई 117.50 किमी):

            भाग-1: वीरपुर बराज से फारबिसगंज तक पूर्वी कोसी मुख्य नहर (41.30 किमी) का विस्तार।

            भाग-2: फारबिसगंज से किशनगंज के माखनपुर तक नई नहर (76.20 किमी)।

        अंतिम पड़ाव: किशनगंज का माखनपुर गांव (मेची नदी संगम)।

        लागत व समय-सीमा: अनुमानित 6,282.32 करोड़ रुपये (केंद्र अंशदान ₹3,652.56 करोड़); मार्च 2029 तक लक्ष्य।

        लाभान्वित प्रखंड (किशनगंज): टेढ़ागाछ, दिघलबैंक, बहादुरगंज और कोचाधामन।

    41.30 किमी पुरानी नहर का विस्तार, 76.20 किमी बनेगी नई नहर
    कोसी-मेची लिंक परियोजना को दो मुख्य भागों में बांटा गया है। पहले हिस्से में वीरपुर बराज से फारबिसगंज तक पूर्वी कोसी मुख्य नहर (ईकेएमसी) के 41.30 किलोमीटर हिस्से का जीर्णोद्धार और क्षमता विस्तार होगा। इसके बाद फारबिसगंज से लेकर किशनगंज के माखनपुर तक 76.20 किलोमीटर लंबी पूरी तरह नई नहर का निर्माण किया जाएगा।

    इस परियोजना के जरिए पूर्वी कोसी मुख्य नहर की जल वहन क्षमता को 15 हजार क्यूसेक से बढ़ाकर 20 हजार क्यूसेक किया जाएगा।

    किशनगंज के 4 प्रखंडों में 39,548 हेक्टेयर भूमि होगी सिंचित
    इस परियोजना से किशनगंज जिले के चार प्रमुख प्रखंडों—टेढ़ागाछ, दिघलबैंक, बहादुरगंज और कोचाधामन के किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। जिले के 39,548 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में सालोंभर सिंचाई की सुनिश्चित सुविधा उपलब्ध होगी। खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए चार मुख्य शाखा नहरों और छह वितरणियों (डिस्ट्रीब्यूटरी) का विस्तृत नेटवर्क बिछाया जाएगा।

    बाढ़ प्रबंधन के साथ 2.14 लाख हेक्टेयर में सिंचाई का लक्ष्य
    मानसून के दौरान कोसी नदी से लगभग 2,050 मिलियन क्यूबिक मीटर अतिरिक्त बाढ़ के पानी को डायवर्ट कर सीमांचल भेजा जाएगा। इससे कोसी क्षेत्र में बाढ़ की विभीषिका कम होगी और अररिया, पूर्णिया, किशनगंज व कटिहार जिलों के 2,14,813 हेक्टेयर खेतों को पानी मिलेगा।

    प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (PMKSY-AIBP) में शामिल इस परियोजना की कुल अनुमानित लागत 6,282.32 करोड़ रुपये है, जिसमें केंद्र सरकार 3,652.56 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दे रही है। इसे मार्च 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

    जिले में कोसी-मेची लिंक परियोजना के फेज-टू के तहत भूमि अधिग्रहण की आवश्यक प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इसका औपचारिक प्रस्ताव तैयार कर संबंधित विभाग को भेजा गया है। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होते ही नहर निर्माण का कार्य तेजी से शुरू कराया जाएगा।
    — नवीन कुमार, जिलाधिकारी, किशनगंज

  • डेयरी क्षेत्र में 22 कंपनियां करेंगी 695.18 करोड़ का निवेश

    डेयरी क्षेत्र में 22 कंपनियां करेंगी 695.18 करोड़ का निवेश

    लखनऊ

    उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस-2026) युवाओं के लिए रोजगार के बड़े अवसर भी लेकर आया। ट्रेड शो में मिले प्रस्तावों के जरिए डेयरी क्षेत्र की 22 कंपनियां उत्तर प्रदेश में 695.18 करोड़ का निवेश करेंगी। कुल निवेश से 2500 से अधिक युवाओं को रोजगार व नौकरी मिलेगी। यहां डेयरी क्षेत्र में सबसे बड़ा निवेश ऐस इंटरनेशनल लि. की ओर से किया जाएगा। कंपनी हाथरस, अलीगढ़ व आगरा में 457 करोड़ का निवेश कर 1500 युवाओं को रोजगार/नौकरी देगी। वहीं केयरब्रो इनोवेटर्स प्रा. लि. की ओर से 100 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। 

    ऐस इंटरनेशनल लि. करेगी 457 करोड़ का निवेश, 1500 युवाओं को देगी रोजगार 
    ऐस इंटरनेशनल लिमिटेड के आदित्य गोयल उत्तर प्रदेश को निवेश का सबसे उपयुक्त गंतव्य मानते हैं। उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी यहां 457 करोड़ का निवेश करेगी। उन्होंने हाथरस, अलीगढ़, आगरा में प्रस्तावित निवेश को लेकर विभाग से समन्वय किया है। वे लगभग 1500 से अधिक युवाओं को अपने साथ जोड़कर उन्हें समृद्धि के राह पर लाएंगे। 

    अयोध्या, लखनऊ, मेरठ व बरेली में 100 करोड़ का निवेश करेगी केयरब्रो इनोवेटर्स प्रा. लि. 

    केयरब्रो इनोवेटर्स प्रा. लि. की ओर से दुग्धशाला विकास विभाग को निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। निवेशक अमित सिंह ने बताया कि उनकी कंपनी अयोध्या, लखनऊ, मेरठ व बरेली में 100 करोड़ का निवेश करेगी। इसके जरिए 250 से अधिक युवाओं को रोजगार से जोड़ा जाएगा। 

    सहकारी व निजी क्षेत्र के उद्यमियों को प्रदान किया गया प्रमाण पत्र 

    दुग्धशाला विकास विभाग की ओऱ से उप्र दुग्धशाला विकास व दुग्ध उत्पाद प्रोत्साहन नीति-2022 के अंतर्गत यह निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुआ है। विभाग, सहकारी व निजी डेयरी उद्यमियों के स्टॉल पर लगभग काफी भीड़ भी रही। पराग-अमूल, नमस्ते इंडिया, पारस डेयरी, ज्ञान डेयरी, न्यू एरा डेयरी, अल्फा मिल्क फूड्स, सीपी मिल्क समेत अनेक कंपनियों ने हिस्सा लिया। वित्त नियंत्रक अरविंद कुमार सिंह, मुख्य दुग्धशाला विकास अधिकारी एपी सिंह, दुग्धशाला विकास अधिकारी आईबी सिंह आदि ने निवेशकों, आगंतुकों को विभाग से जुड़ी योजनाओं की जानकारी दी। 

    विभाग को मिले शीर्ष 5 निवेश प्रस्ताव 

    कंपनी                  निवेश प्रस्ताव     रोजगार    प्रस्तावित जनपद 
    ऐस इंटरनेशनल लिमिटेड   457 करोड़   1500  हाथरस, अलीगढ़ व आगरा 
    केयरब्रो इनोवेटर्स प्रा. लि.    100 करोड़   250  अयोध्या, मेरठ, लखनऊ व बरेली
    अंजुम डेयरी         50 करोड़           40   मुरादाबाद, अमरोहा व रामपुर
    ग्विन व्हे प्रोटीन एलएलपी        27 करोड़    250   एटा, फिरोजाबाद व इटावा
    गौरी फूड एंड बेवरेजेज    14.65 करोड़      55   झांसी 

    उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस-2026) में दुग्धशाला विकास विभाग को 695.18 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। निवेश से प्रदेश के अनेक जनपदों में यह प्रस्ताव धरातल पर उतरेंगे। इससे प्रदेश के 2500 से अधिक युवाओं को रोजगार/नौकरी भी मिलेगी। इसके अतिरिक्त विभाग अन्य निवेशकों को प्रदेश में आमंत्रित कर युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए कार्य कर रहा है। 

    धनलक्ष्मी के. 
    दुग्ध आयुक्त, उत्तर प्रदेश

  • महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता पर जोर, झारखंड में डेयरी से बढ़ेंगे कमाई के अवसर

    महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता पर जोर, झारखंड में डेयरी से बढ़ेंगे कमाई के अवसर

    रांची
     गव्य विकास निदेशालय द्वारा डेयरी के माध्यम से महिला सशक्तीकरण विषय पर आयोजित कार्यशाला में कृषि सचिव अबु बक्कर सिद्दीख ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

    उन्होंने घोषणा की कि जल्द ही झारखंड में 'महिला किसान खुशहाली योजना' लागू की जाएगी, जिसके तहत महिलाओं को इंटीग्रेटेड फार्मिंग (एकीकृत कृषि) से जोड़कर उनकी आय बढ़ाई जाएगी।

    कृषि सचिव ने जोर देकर कहा कि डेयरी का दायरा केवल दूध उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि गाय पालन से जुड़े अन्य उत्पाद और दुग्ध प्रसंस्करण भी इसका मुख्य हिस्सा हैं। किसानों व महिलाओं को डेयरी व्यवसाय को लाभदायक बनाने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

    डेयरी उत्पादों से तीन गुना अधिक मुनाफा
    नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (NDRI), करनाल के निदेशक डॉ. धीर सिंह ने कहा कि पूर्वी भारत और विशेषकर झारखंड में डेयरी क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं।

    हरियाणा और पंजाब की तर्ज पर झारखंड की महिलाओं को भी को-ऑपरेटिव (सहकारिता) बनाकर काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि NDRI झारखंड की महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए तैयार है और जल्द ही महिलाओं के एक दल को प्रशिक्षण के लिए हरियाणा ले जाया जाएगा।

    3 लाख लीटर से अधिक दूध संग्रह कर रहा झारखंड मिल्क फेडरेशन
    नेशनल मिल्क फेडरेशन के अध्यक्ष सुधीर सिंह ने बताया कि झारखंड में पशुओं के नस्ल सुधार कार्य से बड़ा बदलाव आया है। वर्तमान में झारखंड मिल्क फेडरेशन प्रतिदिन 3 लाख लीटर से अधिक दूध का संग्रह कर रहा है।

    वहीं, बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (BAU) के कुलपति डॉ. एस. सी. दुबे ने कहा कि झारखंड का समग्र विकास महिलाओं की भागीदारी के बिना संभव नहीं है।

    सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने की अपील
    कार्यक्रम की शुरुआत में गव्य निदेशक डॉ. संजीव कुमार ने अतिथियों का स्वागत किया और विभाग द्वारा संचालित कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए महिलाओं से इनका लाभ उठाने का आह्वान किया।

    इस अवसर पर पशुपालन निदेशक रोबिन टोप्पो, मत्स्य निदेशक अमरेंद्र कुमार और गव्य विभाग के उप निदेशक डॉ. मनोज तिवारी समेत कई वरिष्ठ अधिकारी व महिला पशुपालक उपस्थित थे।

  • पाक सीमा के करीब सेना की ताकत का प्रदर्शन, हाईवे पर हेलीकॉप्टर लैंडिंग-टेकऑफ

    पाक सीमा के करीब सेना की ताकत का प्रदर्शन, हाईवे पर हेलीकॉप्टर लैंडिंग-टेकऑफ

    बीकानेर
    भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक पश्चिमी राजस्थान के रेगिस्तानी भूभाग में मंगलवार को एक अनूठा और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण नजारा देखने को मिला। बीकानेर जिले के दंतौर क्षेत्र में आम दिनों की तरह दौड़ने वाला नेशनल हाइवे-911 कुछ समय के लिए पूरी तरह से एक अस्थायी मिलिट्री रनवे में तब्दील हो गया। भारतीय सेना की एविएशन इकाइयों ने इस राष्ट्रीय राजमार्ग पर विशेष हाईवे लैंडिंग अभ्यास को अंजाम दिया। इस दौरान देश के आधुनिक सैन्य बेड़े में शामिल रुद्र, ध्रुव और चेतक हेलीकॉप्टरों ने निर्धारित हाईवे स्ट्रेच पर न केवल सफलतापूर्वक लैंडिंग की, बल्कि सटीक टेकऑफ प्रक्रिया भी पूरी की। सीमावर्ती रेगिस्तान में इस तरह का प्रशिक्षण भारतीय सेना की ऑपरेशनल तैयारियों और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता का एक बड़ा प्रमाण माना जा रहा है।

    रेगिस्तानी वातावरण और सामरिक चुनौतियों के बीच अभ्यास
    दंतौर का यह क्षेत्र भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा के काफी करीब स्थित है। पश्चिमी राजस्थान के इस रेगिस्तानी इलाके में लंबी दूरियां, गर्म और शुष्क मौसम, धूलभरी आंधियां और तेज हवाएं सैन्य अभियानों के सामने हमेशा से एक अलग तरह की चुनौतियां पेश करती रही हैं।

    ऐसे कठिन भौगोलिक वातावरण में सैन्य एविएशन इकाइयों के लिए पारंपरिक एयरबेस या हेलीपैड के अलावा वैकल्पिक लैंडिंग क्षेत्रों की पहचान करना और उनका सुरक्षित उपयोग करना बेहद जरूरी होता है। इसी सामरिक जरूरत को ध्यान में रखते हुए यह अभ्यास किया गया, ताकि युद्ध या आपातकालीन परिस्थितियों में पारंपरिक रनवे उपलब्ध न होने की स्थिति में इन वैकल्पिक स्थानों से भी सुरक्षित संचालन किया जा सके।

    अभ्यास की मुख्य विशेषताएं और तकनीकी प्रक्रिया
    सड़क पर हेलीकॉप्टर उतारना केवल पायलट की व्यक्तिगत दक्षता का मामला नहीं होता, बल्कि इसके लिए बेहद सटीक योजना और तकनीकी समन्वय की आवश्यकता होती है। इस अभ्यास के दौरान निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं पर विशेष जोर दिया गया।

    सतह और दृश्यता का आकलन: लैंडिंग से पहले एयरक्रू द्वारा हाईवे की सतह, आसपास के दायरे, हवा की गति और दृश्यता का बारीकी से मूल्यांकन किया गया।

    सटीक समन्वय: सुरक्षित लैंडिंग से लेकर दोबारा उड़ान भरने तक हवा में मौजूद एयरक्रू और जमीन पर तैनात ग्राउंड क्रू के बीच तालमेल बिठाया गया।

    विविध प्लेटफार्मों की भूमिका: अभ्यास में शामिल रुद्र, ध्रुव और चेतक हेलीकॉप्टरों ने अलग-अलग सैन्य भूमिकाओं—जैसे सैनिकों की आवाजाही, लॉजिस्टिक सहायता और निगरानी—के तहत अपनी दक्षता का प्रदर्शन किया।

    ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी और सैन्य गतिशीलता
    आधुनिक सैन्य अभियानों में किसी एक स्थायी बुनियादी सुविधा पर निर्भरता को कम करना और परिस्थितियों के अनुसार तुरंत वैकल्पिक विकल्पों का इस्तेमाल करना सबसे अहम माना जाता है। हेलीकॉप्टरों की सबसे बड़ी खासियत यह होती है कि वे बेहद सीमित स्थानों से भी सुगमता से संचालित हो सकते हैं।

    हाईवे लैंडिंग जैसे प्रशिक्षण एयरक्रू को गैर-पारंपरिक और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम करने का अमूल्य अनुभव प्रदान करते हैं। बीकानेर के इस राष्ट्रीय राजमार्ग पर हुए इस सैन्य अभ्यास ने यह साबित कर दिया है कि भारतीय सेना हर परिस्थिति में देश की रक्षा और त्वरित कार्रवाई के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।

  • अब पानी के लिए नहीं करना होगा इंतजार, फलोदी की 3 ढाणियों में पहुंची बेहतर पेयजल सुविधा

    अब पानी के लिए नहीं करना होगा इंतजार, फलोदी की 3 ढाणियों में पहुंची बेहतर पेयजल सुविधा

    जयपुर
    कभी पानी का इंतजार रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा था। जरूरत के पानी के लिए व्यवस्था पर निर्भरता थी और हर किसी की उम्मीद यही रहती थी कि पानी की सुविधा बेहतर हो और समय पर मिले। फलोदी जिले के लोहावट क्षेत्र की सुथारों की ढाणी (इन्द्रनगर), डूडियो की ढाणी (सदरी) और पुनियों की ढाणी (नौसर) में अब इसी इंतजार की तस्वीर बदलती नजर आ रही है।

    इन ढाणियों में पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री बजट घोषणा के तहत करीब 1.50 करोड रुपये की लागत से किए गए कार्यों ने ग्रामीण पेयजल तंत्र को नया आधार दिया है। तीन उच्च जलाशयों के निर्माण, पाइपलाइन बिछाने सहित अन्य आवश्यक कार्य पूरे होने के बाद इन क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था में सुधार आया है। आज 2,805 ग्रामीण इस योजना से लाभान्वित हो रहे हैं।

    बजट में घोषणा हुई और गांव तक पहुंचा बदलाव
    किसी गांव के लिए पानी की सुविधा केवल एक सरकारी परियोजना नहीं बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी जरूरत है। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए इन तीनों ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल तंत्र को सुदृढ़ करने का कार्य किया गया। 15 जनवरी, 2025 को कार्यादेश जारी होने के बाद प्रस्तावित कार्यों को पूरा किया गया। उच्च जलाशयों के निर्माण के साथ पाइपलाइन संबंधी जरूरी कार्य किए गए ताकि पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत आधार मिल सके।

    तीन ढाणियां, हजारों ग्रामीणों की बदली तस्वीर
    सुथारों की ढाणी, डूडियो की ढाणी और पुनियों की ढाणी – नाम भले तीन हों लेकिन इनसे जुड़ी जरूरत एक ही थी – बेहतर और मजबूत पेयजल व्यवस्था। आज जब इन क्षेत्रों में पेयजल तंत्र पहले से मजबूत हुआ है और 2,805 ग्रामीणों तक योजना का लाभ पहुंच रहा है तो यह बदलाव सिर्फ बने हुए जलाशयों या बिछी पाइपलाइनों में नहीं बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में दिखाई देता है।

    मुख्यमंत्री बजट घोषणा से विकास की असली तस्वीर बड़े शहरों की इमारतों में ही नहीं, बल्कि गांव की उन ढाणियों में भी दिखाई देती है, जहां एक बेहतर पेयजल सुविधा लोगों के लिए सुविधा, राहत और भरोसे का आधार बन जाती है।

     

  • बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए 16 राहत शिविर और 10 बाढ़ चौकियां सक्रिय

    बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए 16 राहत शिविर और 10 बाढ़ चौकियां सक्रिय

    कुशीनगर में बाढ़ राहत को युद्धस्तर पर किया गया सक्रिय, एनडीआरएफ-एसडीआरएफ समेत टीमें तैनात

    गंडक के बढ़ते जलस्तर के बीच योगी सरकार का राहत अभियान तेज, प्रभावितों तक शीघ्र पहुंच रही मदद

    बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए 16 राहत शिविर और 10 बाढ़ चौकियां सक्रिय

    13 हजार से अधिक लंच पैकेट और 2100 राशन किट बांटे, सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए जा रहे लोग

    प्रभावित गांवों में राहत शिविर और सामुदायिक रसोई सक्रिय, गांवों में पहुंचाई जा रही हर जरूरी राहत

    लखनऊ/कुशीनगर
     उत्तर प्रदेश में बाढ़ की स्थिति को लेकर योगी सरकार की ओर से प्रशासन को पूरी तरह सक्रिय रखा गया है। कुशीनगर में बड़ी गंडक नदी के जलस्तर में लगातार वृद्धि के बाद राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने जिला प्रशासन से प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने प्राथमिकता पर प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के साथ ही उन्हें समय पर भोजन, राशन और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराया है।

    राहत आयुक्त कार्यालय के मुताबिक 29 सितंबर को सुबह आठ बजे बड़ी गंडक नदी का जलस्तर 96.48 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के बिंदु 96 मीटर से 0.48 मीटर ऊपर था। वाल्मीकि नगर बैराज से भी बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण खड्डा तहसील के 18 और तमकुहीराज तहसील के 14 गांव प्रभावित हुए हैं।

    प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया
    राहत कार्यों के तहत प्रभावित गांवों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 10 बाढ़ चौकियां और 16 राहत शिविर स्थापित किए हैं। इन व्यवस्थाओं के माध्यम से प्रभावित परिवारों की जरूरतों पर लगातार नजर रखी जा रही है।

    एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पीएसी भी तैनात
    बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पीएसी बाढ़ राहत दलों की टीमें तैनात की गई हैं। साथ ही स्थानीय स्तर पर भी नावों की व्यवस्था की गई है। रिपोर्ट के अनुसार राहत एवं बचाव कार्य के लिए स्थानीय गोताखोरों की 66 सदस्यीय टीम भी सक्रिय है।

    16 सामुदायिक रसोई से उपलब्ध कराया जा रहा भोजन
    प्रभावित लोगों को भोजन की समस्या न हो, इसके लिए खड्डा तहसील में 13 और तमकुहीराज तहसील में तीन सामुदायिक रसोई स्थापित की गई हैं। इन रसोइयों के माध्यम से प्रभावित परिवारों को नियमित भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अलावा प्रशासन की ओर से 13,030 लंच पैकेट और 2,100 राशन किट वितरित किए जा चुके हैं। राहत सामग्री की उपलब्धता और वितरण की लगातार निगरानी की जा रही है।

    स्वास्थ्य सेवाओं की भी व्यवस्था
    बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए दो मेडिकल टीमों को लगाया गया है। प्रशासन ने प्रभावित परिवारों तक आवश्यक चिकित्सा सहायता पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही पुलिस, स्वास्थ्य, पशुपालन, विद्युत आपूर्ति सहित संबंधित विभागों को भी राहत एवं बचाव कार्य में सक्रिय रखा गया है। प्रशासन की ओर से बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत के अनुसार बचाव एवं राहत कार्यों को आगे बढ़ाया जा रहा है। योगी सरकार की आपदा प्रबंधन व्यवस्था के तहत प्रभावित लोगों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

  • ‘न्यायिक अनुशासन से बंधी है कोर्ट’, उमर खालिद-शरजील इमाम की जमानत पर हाईकोर्ट का फैसला

    ‘न्यायिक अनुशासन से बंधी है कोर्ट’, उमर खालिद-शरजील इमाम की जमानत पर हाईकोर्ट का फैसला

    नई दिल्ली
    साल 2020 के दिल्ली दंगे के आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को दिल्ली हाईकोर्ट ने फिर से राहत देने से इनकार कर दिया है और दोनों की जमानत याचिका खारिज कर दी है। बता दें कि दोनों आरोपी फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े यूएपीए मामले में लगभग 6 साल से बंद हैं।सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि यह कोर्ट न्यायिक अनुशासन से बंधा हुआ है। आदालत ने आगे कहा कि वह शरजील इमाम और उमर खालिद पर लगाई गई शर्तों में बदलाव नहीं कर सकता है।

    क्या थीं शर्तें
    दरअसल, जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस दिनेश भट्ट की बेंच ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित आदेश में किसी तरह का बदलाव नहीं कर सकते। उस आदेश में जमानत पाने के लिए कुछ शर्तें रखी गईं हैं, जिनमें पहली, संरक्षित गवाहों के बयान पूरे होने पर और दूसरी, आदेश पारित होने की तारीख 5 जनवरी, 2026 से एक साल पूरा होने पर ही जमानत पर विचार किया जा सकता है।

    बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट से पहले कड़कड़डूमा कोर्ट ने बीते 4 जुलाई 2026 को दोनों की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी 5 जनवरी 2026 को झटका दिया था।

    शरजील इमाम और उमर खालिद पर दिल्ली में दंगे भड़काने का आरोप
    बता दें कि शरजील इमाम और उमर खालिद पर मुख्य रूप से फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगों की बड़ी साजिश रचने का आरोप है। दोनों पर देश विरोधी भड़काऊ भाषण देने का भी आरोप है। दिल्ली पुलिस के मुताबिक दोनों ने CAA और NRC के विरोध प्रदर्शनों की आड़ में हिंसा भड़काने की सोची-समझी योजना बनाई थी।