Category: राज्य

  • पंजाब के सरकारी कर्मचारियों के DA विवाद में नया मोड़, मुख्य सचिव पर अवमानना केस और हाईकोर्ट में माफी की पेशकश चर्चा में

    पंजाब के सरकारी कर्मचारियों के DA विवाद में नया मोड़, मुख्य सचिव पर अवमानना केस और हाईकोर्ट में माफी की पेशकश चर्चा में

    चंडीगढ़ 

    पंजाब के सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) के बकाये से जुड़े मामले में आज (12 अक्टूबर) पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। पिछली सुनवाई में चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा की बेंच ने इस मामले को नियमित अवमानना केस से अपग्रेड कर आपराधिक अपराध की तरह सुनवाई। 

    इस दौरान पंजाब के मुख्य सचिव केएपी सिन्हा के लिखित माफीनामे पर फैसला हो सकता है। उन्होंने कोर्ट में लिखित रूप से बिना शर्त माफी का प्रस्ताव दिया है। पिछली बेंच ने इस माफीनामे को स्वीकार करने या खारिज करने का फैसला नई बेंच पर छोड़ दिया था।

    आज नई बेंच यह तय करेगी कि मुख्य सचिव की माफी को स्वीकार कर उनके खिलाफ चल रही आपराधिक अवमानना की कार्रवाई को यहीं बंद किया जाए? या कोर्ट को गुमराह करने और गलत तथ्य रखने के लिए उनके खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय कर कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ाया जाए?

    9 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान मुख्य सचिव केएपी सिन्हा अदालत में पेश हुए थे। मामले में मुख्य सचिव के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई का मुद्दा भी उठा था। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा था कि अदालत की गरिमा से समझौता नहीं किया जा सकता।

    वहीं, पंजाब सरकार की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट विकास सिंह ने कहा था कि मुख्य सचिव का अदालत को गुमराह करने का कोई इरादा नहीं था। उन्होंने यह भी कहा था कि यदि अदालत चाहे तो मुख्य सचिव बिना शर्त माफी मांगने को तैयार हैं।

    पिछली सुनवाई में क्या-क्या हुआ, 5 पॉइंट में पढ़िए

        सुप्रीम कोर्ट में मामला सूचीबद्ध नहीं हुआ: कर्मचारियों की ओर से सीनियर एडवोकेट संजय कौशल ने कहा कि DA के बकाये से जुड़े हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, लेकिन यह मामला अब तक सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हुआ है।

        वकील बोले- सुनवाई में इतनी देरी क्यों हो रही: संजय कौशल ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय से जुड़े मामले में हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने के लिए सरकार ने तुरंत अपील दायर की और उस पर सुनवाई भी तय हो गई। एडवोकेट ने इसे सरकार का दोहरा रवैया बताते हुए कहा कि लाखों कर्मचारियों के बकाये के मामले में इतनी देरी क्यों हो रही है?

        सरकार बोली- पिछली सरकारों का है बकाया: पंजाब सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने पक्ष रखते हुए कहा कि कर्मचारियों का DA बकाया मौजूदा सरकार के समय का नहीं, बल्कि पिछली सरकारों के कार्यकाल से जुड़ा है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि फैसला देने से पहले अदालत पूरे मामले के रिकॉर्ड की जांच कर चुकी है।

        गलत जानकारी देने पर कोर्ट ने जताई नाराजगी: हाईकोर्ट ने साफ कहा कि सरकार को अपने फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का पूरा अधिकार है। हालांकि, अपील करने के बाद अदालत को गलत जानकारी देना स्वीकार नहीं किया जा सकता।

        अपील की कमियां अब तक दूर क्यों नहीं हुई?: कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि सुप्रीम कोर्ट में दायर अपील की कमियां अब तक दूर क्यों नहीं की गईं? इसी मामले में अदालत ने आपराधिक अवमानना का नोटिस जारी किया था। हाईकोर्ट ने कहा कि आपराधिक अवमानना के मामले की सुनवाई तय रोस्टर के अनुसार संबंधित पीठ ही करेगी।

    मामले में अब तक क्या-क्या हुआ, जानिए

        8 अप्रैल 2026: पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में कर्मचारियों की याचिकाओं पर विस्तृत सुनवाई शुरू हुई, जिसमें पंजाब सरकार द्वारा केंद्रीय पैटर्न पर बढ़े हुए DA को रोकने की नीति को चुनौती दी गई थी।

        3 अगस्त 2026: पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच (जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर) ने फैसला सुनाया। कोर्ट ने सरकार की वित्तीय तंगी की दलीलें खारिज कीं और करीब 8 लाख कर्मचारियों व पेंशनर्स के बकाये को 15 दिनों के भीतर जारी करने का आदेश दिया। इसी दिन कोर्ट ने सख्त निर्देश दिया कि जब तक बकाया नहीं चुकाया जाता, सरकार अपने प्रचार-प्रसार के लिए बड़े पैमाने पर विज्ञापन (प्रिंट/सोशल मीडिया) जारी नहीं कर सकती।

        31 अगस्त 2026: हाई कोर्ट की ओर से अनुपालन हलफनामा दाखिल करने के लिए मुख्य सचिव को दी गई अंतिम समयसीमा समाप्त हो गई, लेकिन सरकार भुगतान करने में विफल रही।

        1 सितंबर 2026: पंजाब सरकार ने हाई कोर्ट के इस कड़े आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और वहां एक विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की।

        10 सितंबर 2026: हाई कोर्ट ने अनुपालन न होने पर सरकार से दोबारा जवाब मांगा। राज्य सरकार ने बताया कि मामला सुप्रीम कोर्ट में दायर किया जा चुका है। हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट की अपील में मौजूद कमियों को 10 दिन में दूर करने का समय दिया।

        1 अक्टूबर 2026: एडवोकेट जनरल और मुख्य सचिव के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में कमियों को दूर कर अपील को दोबारा फाइल किया गया।
        6 अक्टूबर 2026: हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री से स्टेटस रिपोर्ट मंगवाई, जिसमें यह खुलासा हुआ कि पंजाब सरकार की अपील अभी भी कमियों के कारण अटकी हुई है और सूचीबद्ध होने के योग्य नहीं है। कोर्ट ने इसे गलत जानकारी देकर गुमराह करना माना और मुख्य सचिव केएपी सिन्हा को आपराधिक अवमानना का कारण बताओ नोटिस जारी कर 9 अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का हुक्म दिया।

        9 अक्टूबर 2026: मुख्य सचिव निजी तौर पर कोर्ट में पेश हुए। उनके वकील ने अदालत से बिना शर्त माफी मांगने की पेशकश की। हालांकि, चीफ जस्टिस की बेंच ने राज्य के इस आचरण को बेहद पीड़ादायक बताया और माफी स्वीकार करने से मना करते हुए पूरे मामले को आपराधिक अवमानना से जुड़ी रोस्टर डिवीजन बेंच के पास ट्रांसफर कर दिया।

  • तांबे की बढ़ती मांग के बीच झारखंड को बड़ी उम्मीद, गिरिडीह और बगोदर में तेज होगी खनिज खोज

    तांबे की बढ़ती मांग के बीच झारखंड को बड़ी उम्मीद, गिरिडीह और बगोदर में तेज होगी खनिज खोज

     रांची
    बीसवीं सदी लौह की थी तो इक्कीसवीं तांबा की। यह क्रिटिकल मिनरल्स की श्रेणी में है। झारखंड के लिए सुखद यह है कि झारखंड के गिरिडीह में डुमरी के बाद बगोदर में भी ताम्र का भंडार मिला है। झारखंड सरकार के भूतत्व सर्वे के प्रारंभिक परिणाम में यह पुष्ट हो चुका है कि बगोदर के अंबाडीह में धरती के नीचे तांबा का भंडार है।

    अब भूतत्व सर्वे कार्य को और व्यापक पैमाने पर किया जाएगा। ब्रिटिश काल में ही यह ज्ञात हो गया था कि गिरिडीह में धरा के नीचे ताम्र है। यह कहां पर कितना है? अब झारखंड सरकार का भूतत्व विभाग इसकी खोज में लगा है। बगोदर में ताम्र की खोज की शुरुआत 2023 में हुई।

    वहां से कुछ पत्थर लिए गए। भूतत्व निदेशालय ने उन पत्थरों को जांच के लिए भारतीय भू वैज्ञानिक सर्वेक्षण की कोलकाता प्रयोगशाला में भेजा था। कोलकाता से जांच रिपोर्ट आई कि उन पत्थरों में ताम्र के साथ सीसा और जिंक भी प्रचुर मात्रा में है।

    इस नतीजे से उत्साहित भूतत्व निदेशालय ने पिछले साल से वहां खनिज अन्वेषण के कार्य को तेज किया। आधा किमी क्षेत्र का टोपोग्राफिक सर्वे (स्थलाकृत सर्वेक्षण) किया गया। तीन स्थानों पर 200 मीटर की गहराई तक जमीन की छेदन कार्य कर अयस्क निकाला गया। उसमें भी ताम्र के अलावा और भी खनिज मिले हैं।

    डुमरी के बरगुंडा में मिला बड़ा खजाना
    गिरिडीह में डुमरी के बरगुंडा में तकरीबन एक वर्ग किमी की परिधि में धरा के नीचे ताम्र का विशाल खजाना मिल चुका है। वहां भू सर्वे की विवरणी शासन को दी जा चुकी है। छोटानागपुर के भूतत्व उप निदेशक कुणाल कौशल ने लगातार चार साल तक सर्वेक्षण कार्य किया। अब भूतत्व निदेशक कुमार अमिताभ के पर्यवेक्षण में बगोदर में ताम्र खोज का कार्य आगे बढ़ाया जा रहा है।
    धरती के नीचे से निकाले गए अयस्क में तांबा की मात्रा का आकलन करते भूतत्व अधिकारी।

    गुलामी काल में मुसाबनी में मिली थी खदान
    झारखंड में अभी पूर्वी सिंहभूम के मुसाबनी प्रखंड में भारत सरकार के उपक्रम हिंदुस्तान कापर लिमिटेड (एचसीएल) द्वारा ताम्र खनन किया जा रहा है। 1923 में गुलामी काल में ब्रिटिश सरकार ने मुसाबनी में तांबा खोजा था। इसके अलावा अभी मध्य प्रदेश के बालाघाट और राजस्थान के खेतरी में ही ताम्र खान है। गिरिडीह में तांबा का विधिवत खनन प्रारंभ हो जाएगा तो बड़ी उपलब्धि होगी।

    महज तीन साल में 75 प्रतिशत हो गया महंगा
    इलेक्ट्रिक वाहन और एआइ डाटा सेंटर के लिए ताम्र की वैश्विक मांग बढ़ी है। टेक इंडस्ट्रीज से जुड़ी आधारभूत संरचना में ताम्र की आवश्यकता सबसे अधिक है। तीन साल में तांबा का मूल्य 75 प्रतिशत बढ़ा है। भारत के मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) में तांबा की कीमत 14 सौ रुपये किलो के आसपास है।

    गिरिडीह में डुमरी के बरगुंडा में ताम्र की खोज हो चुकी है। बगोदर के अंबाडीह में भी ताम्र के भूतत्व अन्वेषण के परिणाम बेहद सकारात्मक है। भूगर्भ में तांबा मिला है। अब अन्वेषण कार्य और व्यापक किया जाएगा।
        -कुमार अमिताभ, भूतत्व निदेशक, झारखंड

     

  • बिजली विभाग से निकाले गए आउटसोर्स कर्मियों की होगी वापसी, बेदाग रिकॉर्ड वालों को मिलेगी प्राथमिकता

    बिजली विभाग से निकाले गए आउटसोर्स कर्मियों की होगी वापसी, बेदाग रिकॉर्ड वालों को मिलेगी प्राथमिकता

    लखनऊ
     बिजली विभाग में काम करने वाले आउटसोर्सिंग कर्मी के लिए रहात भरी खबर है। अब ये कर्मचारी विभाग में 60 साल तक नौकरी कर सकेंगे। इसके लिए उनका फिट रहना अनिवार्य है। फिट रहने पर उन्हें 60 साल तक नौकरी करने का मौका दिया जा सकता है। वहीं, छंटनी में निकाल गए कर्मचारियों की सेवाएं अगर बेदाग रहेंगी तो उन्हें दोबारा नौकरी में लिया जाएगा। पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन और संविदा कर्मचारियों के संगठन के बीच हुई बातचीत के आधार पर इसकी सहमति बनी है।

    पावर कॉरपोरेशन अध्यक्ष रणवीर प्रसाद और आउटसोर्स कर्मचारियों के प्रतिनिधि संगठन के बीच कई मसलों पर बातचीत हुई। कई अहम मसलों पर फैसला हुआ। कर्मचारी संगठन ने प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन खत्म करके कॉरपोरेशन के राजस्व लक्ष्यों व व्यवस्था में सहयोग का आश्वासन दिया। बैठक में फैसला लिया गया है कि अगर आउटसोर्स कर्मचारियों का स्वास्थ्य और शारीरिक फिटनेस बेहतर रही तो वे 60 साल तक सेवाएं दे सकेंगे।

    55 साल की उम्र के बाद देना होगा फिटनेस प्रमाण पत्र
    55 साल की उम्र पूरी करने के बाद उन्हें अपनी फिटनेस के संबंध में संबंधित आउटसोर्स कंपनी को प्रमाणपत्र देना होगा। साथ ही कर्मचारियों को यह घोषित करना होगा कि वे कार्य करने में सक्षम व इच्छुक हैं। एजेंसी द्वारा कॉरपोरेशन को ऐसे कर्मचारियों की जानकारी उपलब्ध कराए जाने के बाद उन्हें काम पर रखने में प्राथमिकता दी जाएगी। इस फैसले पर अमल के लिए कॉरपोरेशन आउटसोर्स एजेंसियों के अनुबंध में जरूरी संशोधन करेगा।

    निकाले गए कर्मचारियों को लिया जाएगा वापस
    पूर्व में हटाए गए आउटसोर्स कर्मचारियों को दोबारा सेवा में लिए जाने के मसले पर भी बातचीत हुई है। कॉरपोरेशन ने साफ कर दिया है कि केवल उन्हीं कर्मचारियों को वापस काम पर रखने का विचार किया जाएगा, जिनके विरुद्ध पहले कर्तव्य पालन में शिथिलता, उपभोक्ताओं से गलत व्यवहार, अनुशासनहीनता, बिजली चोरी में संलिप्तता, धन उगाही, अनुचित आचरण या बिलिंग संबंधी कदाचार की कोई शिकायत नहीं हुई हो। दोबारा काम पर रखने के पहले डिस्कॉम पिछले कार्यकाल के अभिलेखों का सत्यापन करेंगे।

    कॉरपोरेशन के कामों में सहयोग करेगा कर्मचारी संगठन
    वार्ता में कर्मचारी संगठन के प्रतिनिधियों ने प्रबंधन को आश्वस्त किया कि प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन समाप्त करते हुए कॉरपोरेशन के कामों में पूरा सहयोग करेगा। संगठन ने राजस्व लक्ष्यों को पूरा करने, छह माह में एटीएंडसी हानियों में 10 प्रतिशत की कमी लाने, लाइन लॉस कम करने तथा थ्रू-रेट में वृद्धि के लिए सहयोग देने का भरोसा दिया। कर्मचारी संगठन की तरफ से प्रदेश अध्यक्ष मो. खालिद, प्रदेश उपाध्यक्ष सुरेंद्र पांडेय, प्रदेश महामंत्री देवेंद्र कुमार पांडेय आदि शामिल रहे।

  • बिहार में बदले जाएंगे जर्जर बिजली तार और पोल, 12 हजार करोड़ की योजना से सुधरेगी बिजली सप्लाई

    बिहार में बदले जाएंगे जर्जर बिजली तार और पोल, 12 हजार करोड़ की योजना से सुधरेगी बिजली सप्लाई

     पटना
    बिहार में लोगों को जल्द ही कम वोल्टेज की समस्या से निजात मिल सकता है। राज्य के सभी पुराने जर्जर तार, पोल और बिजली खपत के भार के अनुरूप ट्रांसफार्मर बदले जायेंगे। इससे जर्जर तार के टूटकर गिरने और ट्रांसफार्मर जलने की समस्या कम होगी। साथ ही राज्य के करीब सवा दो करोड़ बिजली उपभोक्ताओं के घरों को लो वोल्टेज की समस्या से निजात भी मिलेगी। उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने को लेकर ऊर्जा विभाग ने 12 हजार करोड़ रुपए प्रस्ताव तैयार किया है। इसे जल्द ही स्वीकृति के लिए कैबिनेट को भेजा जाएगा। ऊर्जा विभाग को लगातार जर्जर तार और पोल गिरने के साथ ही ट्रांसफार्मर जलने की शिकायतें मिल रहीं हैं।

    विभाग की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री के निर्देश पर ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल ने अधिकारियों को इसकी विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने को कहा था। ऊर्जा विभाग योजना को जमीन पर उतारने के लिए बैंकों से करीब 12 हजार करोड़ रुपए का कर्ज लेगा। पिछले एक दशक (2015-16) में राज्य में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या दोगुनी से भी अधिक बढ़ी है। इससे तार और ट्रांसफार्मरों पर लोड और इनके जलने की घटनाएं बढ़ी हैं। इसलिए कम क्षमता वाले तार को उच्च क्षमता वाले तार में बदला जाएगा। ऊर्जा विशेषज्ञ, एस. के. सिंह ने कहा कि अब गांवों में भी घरों में एसी-कूलर हैं। इससे तार और ट्रांसफार्मर पर लोड बढ़ा है। इसलिए जर्जर तार बदलना और उच्च क्षमता का ट्रांसफार्मर लगाना जरूरी है। पावर सब सटेशन और ग्रिड की संख्या भी बढ़ानी होगी।

    किस पर कितना खर्च
    . पोल औऱ केबल के तार (1.18 लाख किमी) – 8465 करोड़

    . बांस-बल्ला पर तार (33,698 किमी) – 2262 करोड़

    . ट्रांसफार्मर (12 हजार) – 370 करोड़

    इस तरह होगा खर्च
    . उत्तर बिहार ऊर्जा वितरण कंपनी से 21 जिलों में 6066 करोड़ खर्च

    . दक्षिण बिहार ऊर्जा वितरण कंपनी से 17 जिलों में 5031 करोड़ खर्च

    क्या होगा फायदा
    . उपभोक्ताओं को निर्बांध बिजली

    . दुर्घटना में कमी आएगी

    . बिजली की बर्बादी रूकेगी

    . ट्रांसफार्म जलने की समस्या कम

  • राहुल गांधी-खड़गे से मुलाकात नहीं करेंगे CJI सूर्यकांत, SIR और वोट चोरी के मुद्दे पर विपक्ष का मार्च आज

    राहुल गांधी-खड़गे से मुलाकात नहीं करेंगे CJI सूर्यकांत, SIR और वोट चोरी के मुद्दे पर विपक्ष का मार्च आज

    नई दिल्ली
     भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने 'वोट चोरी' के आरोपों पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मिलने से इनकार कर दिया. और कहा है कि इसी तरह के मामले सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं, सूत्रों ने रविवार को बताया। लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष के नेता (LoPs) राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने सीजेआई को लेटर लिखकर सोमवार को शाम 4 से 5 बजे के बीच उनसे मिलने का समय मांगा था. इसमें उन्होंने 'वोट चोरी' खत्म करने, चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को रोकने और पेपर बैलेट फॉर्मेट पर वापस जाने की मांग करते हुए एक मेमोरेंडम सौंपा था। 

    विपक्षी पार्टियों ने अपनी मांगों को लेकर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट तक विरोध मार्च निकालने का ऐलान किया है. कांग्रेस ने इसे 'चलो दिल्ली- डेमोक्रेसी के लिए मार्च' नाम दिया है. इसके लिए नेता दोपहर 1.30 बजे कनॉट प्लेस-बाराखंभा रोड जंक्शन पर इकट्ठा होंगे। 

    सूत्रों ने बताया कि राहुल गांधी की मीटिंग की रिक्वेस्ट के जवाब में सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि एडमिनिस्ट्रेटिव साइड पर कोई ऑर्डर पास नहीं किया जा सकता, और कांग्रेस लीडर से ज्यूडिशियल साइड पर एक पिटीशन फाइल करने को कहा, जिस पर मंगलवार को सुनवाई हो सकती है। 

    उन्होंने आगे कहा कि सीजेआई ने कहा कि अगर किसी नागरिक के फंडामेंटल राइट्स का उल्लंघन होता है, तो सुप्रीम कोर्ट उसके लिए 24×7 खुला है. सूत्रों ने बताया कि उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट एडमिनिस्ट्रेटिव साइड पर शासन के कामों में दखल नहीं दे सकता। 

    इससे पहले राहुल गांधी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा था कि पार्टियों, जेंडर, जाति, कम्युनिटी और स्टेट से ऊपर उठकर एकजुट होकर हम भारतीय सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालेंगे. सोमवार को देश के युवा शांति से प्रोटेस्ट करने के लिए दिल्ली में निकले. वे अपने दिलों में प्यार लेकर आए थे, नफरत या गुस्सा लेकर नहीं. उन्हें पुलिस और बीजेपी के गुंडों, दोनों ने पीटा. यह वह भारत नहीं है जो हम चाहते हैं। 

    गांधी ने पोस्ट में कहा, 'हम भारतीय पार्टी, जेंडर, जाति, समुदाय और राज्य से ऊपर उठकर एक होकर सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करेंगे. युवा, सभी विपक्षी पार्टियां, सिविल सोसाइटी ग्रुप और वे सभी लोग जो डेमोक्रेसी में विश्वास करते हैं और भारत के संविधान के साथ खड़े हैं, हमारे साथ चलेंगे। 

    विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A. के अलग-अलग विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने शुक्रवार को पार्लियामेंट से विजय चौक तक मार्च किया और बाद में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक ज्ञापन सौंपा. वहीं, बेंगलुरु में खड़गे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने पूरे देश में 'अराजकता पैदा कर दी है', और शनिवार को विरोध प्रदर्शनों के दौरान भारी पुलिस तैनाती और हिरासत में लेना, युवाओं के आंदोलन से सरकार के 'डर' को दिखाता है। 

    खड़गे ने कहा, 'हमने (CJI से) शाम 4 से 5 बजे के बीच का समय मांगा है. हम उन्हें बता देंगे, क्योंकि हम मांग नहीं कर सकते. हम उनसे हाथ जोड़कर ही रिक्वेस्ट कर सकते हैं.' खड़गे ने कहा, 'गृह मंत्री और प्रधानमंत्री देश में अराजकता फैला रहे हैं. अघोषित इमरजेंसी लगा दी गई है। 

  • Bathinda News: पार्क अस्पताल में ED की रेड से मचा हड़कंप, वित्तीय लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही टीम

    Bathinda News: पार्क अस्पताल में ED की रेड से मचा हड़कंप, वित्तीय लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही टीम

     पटियला / बठिंडा

    पंजाब में सोमवार सुबह प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने पार्क अस्पताल की सभी ब्रांचों पर एक साथ रेड की। पटियला और बठिंडा में टीम सुबह करीब 9 बजे स्थानीय पुलिस बल के साथ अस्पताल पहुंची और जांच शुरू की। कार्रवाई के दौरान अस्पताल के प्रशासनिक कार्यालयों और दस्तावेजों की जांच की गई। अस्पताल प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों से भी पूछताछ की गई। हालांकि, ED ने अभी तक छापेमारी के कारण और इससे जुड़े मामले को लेकर आधिकारिक जानकारी नहीं दी है।

    वित्तीय रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच
    जांच के दौरान अस्पताल के वित्तीय लेन-देन, कर भुगतान और सरकारी योजनाओं के तहत किए गए दावों से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। टीम कंप्यूटर, सर्वर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में मौजूद डिजिटल डेटा की जांच कर रही है। इसके अलावा, बिलिंग रिकॉर्ड, बैंक खातों के विवरण और अन्य दस्तावेज भी जांच के दायरे में हैं।

    सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई वित्तीय अनियमितताओं या नियमों के उल्लंघन से जुड़ी शिकायतों के आधार पर की जा सकती है। हालांकि, ED की ओर से इसकी पुष्टि नहीं की गई है। फिलहाल यह भी स्पष्ट नहीं है कि छापेमारी किस मामले या प्राथमिकी (FIR) के तहत की जा रही है।

  • पंजाब में बारिश से धान खरीद व्यवस्था पर असर, खेतों में पानी और मंडियों में अनाज के ढेर से किसान परेशान

    पंजाब में बारिश से धान खरीद व्यवस्था पर असर, खेतों में पानी और मंडियों में अनाज के ढेर से किसान परेशान

    चंडीगढ़ 
    पंजाब में बारिश ने धान की फसल पर दोहरी मार की है। खेतों में खड़ी फसल तेज हवा और पानी से प्रभावित हुई है तो मंडियों में बिकने के इंतजार में पड़ा धान भीगकर खराब होने के खतरे में है। कहीं मंडियों में तीन फीट तक पानी भर गया तो कहीं खुले में रखी धान की बोरियां पानी में डूब गईं। 

    खेतों में जलभराव के कारण कंबाइन से कटाई नहीं हो पा रही। दूसरी ओर, उठान की धीमी रफ्तार ने किसानों और आढ़तियों की चिंता बढ़ा दी है। प्रदेश की मंडियों में करीब 15 लाख मीट्रिक टन धान उठान के इंतजार में बताया जा रहा है। किसानों ने प्रभावित क्षेत्रों में गिरदावरी करवाकर मुआवजा देने की मांग की है।

    मंडियों में भीगा धान, उठान की रफ्तार धीमी
    बारिश के बीच मंडियों में धान की आवक जारी है, लेकिन उठान उस गति से नहीं हो रहा, जितनी जरूरत है। खुले में रखी बोरियों को तिरपाल से ढकने के बावजूद कई जगह पानी धान तक पहुंच गया। मंडियों में पर्याप्त ढके हुए स्थान और जलनिकासी की कमी ने परेशानी बढ़ा दी है। धान में नमी बढ़ने से खरीद के निर्धारित 17 प्रतिशत मानक को लेकर भी किसानों की चिंता बढ़ गई है।

    एक दिन में मंडियों में तीन लाख मीट्रिक टन से अधिक धान पहुंचा, जबकि उठान दो लाख मीट्रिक टन से कम रहा। इससे मंडियों में धान का ढेर बढ़ता जा रहा है। राज्य सरकार केंद्र से उठान तेज करने की मांग कर रही है। पिछले साल का करीब 10 लाख मीट्रिक टन धान और गेहूं भी उठान के इंतजार में बताया जा रहा है। ऐसे में नई फसल के लिए मंडियों में जगह की कमी का संकट गहराने लगा है।

     

  • राजा वड़िंग ने चन्नी को बताया रणनीतिकार, पायलट-परगट के समर्थकों से बातचीत के बाद दिए बयान ने बढ़ाई राजनीतिक चर्चा

    राजा वड़िंग ने चन्नी को बताया रणनीतिकार, पायलट-परगट के समर्थकों से बातचीत के बाद दिए बयान ने बढ़ाई राजनीतिक चर्चा

    चंडीगढ़ 

    पंजाब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने वाले अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने रविवार को एक बयान में कहा कि भले ही पार्टी हाईकमान या पंजाब प्रभारी सचिन पायलट उन्हें आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट न दें, लेकिन वह राहुल गांधी के एक वफादार सिपाही के रूप में कांग्रेस का झंडा हमेशा बुलंद रखेंगे। रविवार को चंडीगढ़ स्थित कांग्रेस भवन में नए प्रदेश अध्यक्ष परगट सिंह के पदभार ग्रहण समारोह के दौरान वडिंग के इन बयानों ने राजनीतिक गलियारों में खासी चर्चा बटोरी है।
    शक्त्ति प्रदर्शन और खुलकर सामने आई आंतरिक कलह
    पदभार ग्रहण समारोह से पहले राजा वडिंग ने पार्टी मुख्यालय के पास एक किराए के मकान में अपने समर्थकों और कई वरिष्ठ नेताओं (ब्रह्म मोहिंद्रा, राणा केपी सिंह, सुरिंदर डावर, अनिल जोशी, सिमरजीत सिंह बैंस, हरदयाल कंबोज और मालविका सूद) के साथ एक बैठक की, जिसे उनके शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा गया।

    'नहीं करुंगा किसी का विरोध'
    वडिंग ने स्वीकार किया कि जब वे पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष थे, तब पार्टी के कई लोगों ने उनका विरोध किया था और हो सकता है कि आगे भी करें, लेकिन वे किसी का विरोध नहीं करेंगे। परगट सिंह को नया प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी हाईकमान का हर फैसला उन्हें स्वीकार है और वे नए अध्यक्ष के साथ पूरी मजबूती से खड़े रहेंगे।

    सचिन पायलट और टिकट को लेकर बड़ा बयान
    समारोह के दौरान सचिन पायलट की मौजूदगी में वडिंग ने तंज कसते हुए कहा कि पायलट साहब अगली बार मेरा टिकट भी काट सकते हैं, लेकिन मैं राहुल गांधी का सिपाही बना रहूंगा और हमेशा कांग्रेस के साथ रहूंगा।

    गौरतलब है कि पिछले महीने पंजाब में नेतृत्व परिवर्तन के बाद कांग्रेस हाईकमान ने पूर्व हॉकी कप्तान और विधायक परगट सिंह को नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया था। इस बदलाव से पहले पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी कलह और चरणजीत सिंह चन्नी समेत कई वरिष्ठ नेताओं का विरोध खुलकर सामने आया था।

    दोनों गुटों के एक दूसरे को दिए गए अहम मैसेज, जानिए…
    राजा वड़िंग का पावर शो: राजा वड़िंग ने अपने समर्थक नेताओं को ताजपोशी समारोह से पहले अपने पास बुलाया। करीब दो घंटे तक राजा वड़िंग ने उनके साथ बैठक की और उन्हें कहा कि वो डटकर कांग्रेस पार्टी के लिए काम करें। वो उनके लिए राहुल गांधी से बात करके आए हैं। राहुल गांधी से क्या बात हुई इसका खुलासा वो ताजपोशी समारोह के मंच से करेंगे। ताजपोशी समारोह से पहले राजा वड़िंग ने अपने समर्थक नेताओं को बुलाकर पावर शो किया और सचिन पायलट समेत विरोधी गुट को साफ कह दिया कि आज भी नेताओं का बड़ा गुट उनके साथ है और वो पार्टी में उनकी अनदेखी होने नहीं देंगे।

    सचिन पायलट समेत चन्नी को दिखाया आयना: राजा वड़िंग ने ताजपोशी समारोह में सचिन पायलट, चरणजीत सिंह चन्नी व प्रधान परगट सिंह को स्पष्ट मैसेज दे दिया कि ये सब मिलकर भी उनका और उनके समर्थकों का कुछ नहीं बिगाड़ सकते। राजा वड़िंग ने सचिन पायलट के सामने साफ कह दिया कि उनके नेता सिर्फ राहुल गांधी हैं और अपने समर्थकों की बात वो राहुल गांधी से करके आए हैं। वड़िंग ने ऐसा कहकर प्रधान, प्रभारी व अन्य नेताओं को साफ कर दिया कि उनके समर्थकों की अनदेखी करना उनके लिए आसान नहीं होगा।

    चन्नी गुट से खुद को अलग दिखाया: राजा वड़िंग के लिए ताजपोशी समारोह में मंच पर कुर्सी लगी थी। राजा वड़िंग जब मंच पर आए तो उन्होंने सिर्फ परगट सिंह व सचिन पायलट से हाथ मिलाया। ऐसा उन्होंने प्रोटोकॉल के तहत किया। इसके अलावा सुखजिंदर सिंह रंधावा, चरणजीत सिंह चन्नी, विजय इंदर सिंगला समेत कई बड़े नेता मंच पर थे लेकिन राजा वड़िंग ने उनके साथ हाथ तक नहीं मिलाया औार उसके बाद मंच पर लगी कुर्सी पर नहीं बैठे। वो वहां से नीचे उतर कर कार्यकर्ताओं के साथ बैठ गए। अमृतसर से सांसद गुरजीत औजला उन्हें मनाने गए लेकिन वो मंच पर चन्नी, सचिन पायलट व अन्य नेताओं के साथ बैठने को राजी नहीं हुए। ऐसा करके उन्होंने अपने समर्थकों को मैसेज दिया कि जो लोग उनके साथ मंच पर नहीं बैठना चाहते थे अब वो भी उनके साथ मंच पर नहीं बैठेंगे।

    परगट ने वड़िंग को खिलाड़ियों की सूची से बाहर रखा: परगट सिंह हॉकी कैप्टन के अंदाज में अपनी टीम के बारे में बता रहे थे तो उन्होंने सुखपाल खैहरा का नाम लेकर अपनी टीम के खिलाड़ियों की खूबियां बतानी शुरू की। परगट सिंह ने सुखजिंदर सिंह रंधावा, प्रताप सिंह बाजवा, राणा केपी समेत अन्य नेताओं के नाम लिए। इसी बीच उन्होंने चरणजीत सिंह चन्नी को टीम का ऐसा खिलाड़ी बताया जो कि रणनीति बनाकर जीत हासिल करता है। अपनी इस टीम में उन्होंने राजा वड़िंग का कहीं नाम नहीं लिया, जिससे साफ है कि परगट सिंह राजा वड़िंग को अपनी टीम से दूर ही रखना चाहते हैं।

    चन्नी ने खुद को दिखाया पावरफुल: चरणजीत सिंह चन्नी ने अपने भाषण के दौरान राजा वड़िंग का नाम ही नहीं लिया। ऐसा चन्नी ने चंडीगढ़ में धरने के दौरान भी किया था। इस पर राजा वड़िंग ने अपने भाषण में जब चन्नी का नाम लिया तो यहां तक कहा कि कोई मेरा नाम ले या न ले मैं सब का नाम लूंगा। चन्नी ने वड़िंग का नाम न लेकर उन्हें यह मैसेज दिया कि उनकी वड़िंग से दूरी अब भी बरकरार है। कंपेनिंग कमेटी का चेयरमैन नियुक्त होने के बाद पहली बार चन्नी ने हाईकमान का धन्यवाद किया। चन्नी ने अब खुद को कंपेनिंग कमेटी का चेयरमैन मान लिया है।

    युवाओं को टिकट देने की मांग
    राहुल गांधी के साथ अपनी हालिया मुलाकात का जिक्र करते हुए राजा वडिंग ने कहा कि उन्होंने शीर्ष नेतृत्व से आग्रह किया है कि आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी की लड़ाई लड़ने वाले युवाओं को 50 प्रतिशत से अधिक टिकट दिए जाएं। वडिंग ने स्पष्ट किया कि उनका एकमात्र उद्देश्य पंजाब में अगली कांग्रेस सरकार का गठन करना है और इसके लिए वे पूरी निष्ठा से काम करते रहेंगे।

     

  • भरतपुर में 70-80 लोगों की भीड़ के हमले का आरोप, दो साल पुराने खनन विवाद की जांच में जुटी पुलिस

    भरतपुर में 70-80 लोगों की भीड़ के हमले का आरोप, दो साल पुराने खनन विवाद की जांच में जुटी पुलिस

     भरतपुर
    राजस्थान के भरतपुर जिले के वैर थाना क्षेत्र में पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना की मौत की यह पूरी कहानी महज़ एक अचानक हुआ हादसा नहीं है, बल्कि यह माइनिंग, स्थानीय रसूख और ग्रामीणों के बीच लंबे समय से सुलग रहे गंभीर आक्रोश की एक बड़ी और डरावनी कहानी है। पूर्वी राजस्थान के इस चर्चित राजनीतिक घटनाक्रम ने पूरे प्रशासनिक अमले और राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। आखिर किन परिस्थितियों में एक पूर्व विधायक को अपनी जान गंवानी पड़ी और इस खूनी संघर्ष के पीछे की असली वजह क्या थी, इसकी पूरी परतें अब धीरे-धीरे सामने आ रही हैं।

    इस सनसनीखेज वारदात को अंजाम देने वाले कौन थे और यह विवाद इतना कब और कैसे बढ़ा, इसे लेकर स्थानीय स्तर पर कई बड़े खुलासे हुए हैं। पुलिस और प्रशासनिक स्तर पर इस पूरे मामले की गहनता से छानबीन की जा रही है ताकि यह साफ हो सके कि इस हिंसक झड़प के पीछे असल साजिश किसकी थी?

    किसने किया हमला? 70 से 80 लोगों की उग्र भीड़ का धावा!
    इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 11 अक्टूबर 2026 की शाम को हुई, जब भरतपुर के वैर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले भौंडा और रायपुर गांव के करीब 70 से 80 स्थानीय ग्रामीण और अज्ञात लोग लाठी-डंडों, पत्थरों और घातक हथियारों से लैस होकर क्रेशर प्लांट पर अचानक आ धमके। क्रेशर से सटी पहाड़ी पर जब मशीनों के जरिए खनन का काम चल रहा था, तब पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना वहीं मौजूद थे।

    उग्र भीड़ ने वहां पहुंचते ही सीधा हमला बोल दिया और पूर्व विधायक तथा उनके निजी सुरक्षाकर्मी (बॉडीगार्ड) गगन शर्मा को बुरी तरह घेरकर ताबड़तोड़ मारपीट शुरू कर दी। इस दौरान पूर्व विधायक की पत्नी कमलेश भड़ाना ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि इस हिंसक हमले के बीच भीड़ की तरफ से फायरिंग भी की गई, जिसमें अतर सिंह भड़ाना को गोली लगी। हालांकि, स्थानीय पुलिस ने शुरुआती जांच के बाद गोली लगने की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं की है और इसे मेडिकल रिपोर्ट तथा जांच का विषय बताया है

    क्यों हुआ यह खूनी संघर्ष? क्या है 2 साल पुराना माइनिंग विवाद?
    इस पूरे खूनी संघर्ष की मुख्य जड़ माइनिंग लीज (खनन पट्टा) और क्रेशर प्लांट के संचालन का रास्ता है, जो पिछले काफी समय से विवादों में था। वैर थाना पुलिस के मुताबिक, यह कोई रातों-रात उपजा विवाद नहीं है, बल्कि भौंडा और रायपुर गांव के ग्रामीणों तथा क्रेशर संचालक (पूर्व विधायक के परिवार) के बीच पिछले करीब 2 वर्षों से तनाव का दौर चल रहा था।

    यह माइनिंग लीज पूर्व विधायक की पत्नी कमलेश भड़ाना के नाम पर आवंटित थी। स्थानीय ग्रामीणों का लंबे समय से यह आरोप था कि इस क्रेशर और माइनिंग गतिविधियों के कारण उनके पारंपरिक रास्ते बंद हो रहे हैं, पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है और गांवों का जनजीवन प्रभावित हो रहा है।

    इसी मांग को लेकर ग्रामीण पिछले दो साल से लगातार धरने और विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। रविवार की शाम को जब प्लांट पर दोबारा खनन कार्य और मशीनें सुचारू की गईं, तो लंबे समय से सुलग रहा ग्रामीणों का गुस्सा अचानक ज्वालामुखी की तरह फूट पड़ा और मामूली कहासुनी कुछ ही मिनटों में हिंसक झड़प में बदल गई।

    पुलिस की भूमिका और इंटेलिजेंस फेलियर!
    इस पूरे घटनाक्रम के बाद स्थानीय पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली और भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। जब लगभग एक घंटे तक क्रेशर प्लांट और भौंडा गांव के बीच भारी बवाल और तनाव का माहौल बना रहा, तब सूचना मिलने के बाद वैर थाना पुलिस मौके पर पहुंची।

    पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए घायल पूर्व विधायक और उनके सुरक्षाकर्मी को संभालकर वैर के उपजिला अस्पताल पहुंचाया, जहां से उनकी गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें तुरंत जयपुर रेफर किया गया था।

    लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि चूंकि यह माइनिंग विवाद पिछले दो वर्षों से चल रहा था और ग्रामीण लगातार धरने पर बैठे थे, तो स्थानीय खुफिया तंत्र (इंटेलिजेंस) और पुलिस को इस बात का अंदेशा क्यों नहीं हुआ कि यहां कभी भी बड़ा टकराव हो सकता है? रविवार को जब विवादित प्लांट पर काम शुरू हुआ, तब वहां पुलिस बल की मौजूदगी का न होना प्रशासनिक ढिलाई को साफ तौर पर दर्शाता है।

    भारी पुलिस बल तैनात और ताबड़तोड़ दबिश
    पूर्व विधायक की मौत की दुखद खबर जैसे ही भरतपुर संभाग और उनके गृह क्षेत्र में पहुंची, पूरे इलाके में सनसनी फैल गई और भारी तनाव का माहौल बन गया। किसी भी तरह की जातीय, सामाजिक या राजनीतिक हिंसा को रोकने के लिए प्रशासन ने तुरंत कड़े कदम उठाए।

    भौंडा गांव, क्रेशर साइट और स्थानीय अस्पतालों के आसपास भारी संख्या में पुलिस जाब्ता और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भरतपुर मुख्यालय से अतिरिक्त त्वरित प्रतिक्रिया दल (QRT) और विशेष पुलिस फोर्स को वैर भेजा गया है। पुलिस अब घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज, वीडियो और चश्मदीदों के बयानों के आधार पर हमलावर ग्रामीणों की पहचान करने में जुटी है तथा मुख्य आरोपियों की धरपकड़ के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।

  • अमृतसर में लावारिस लिफाफे से निकली असॉल्ट राइफल, प्लॉट में हथियार मिलने से सुरक्षा व्यवस्था पर बढ़ी चिंता

    अमृतसर में लावारिस लिफाफे से निकली असॉल्ट राइफल, प्लॉट में हथियार मिलने से सुरक्षा व्यवस्था पर बढ़ी चिंता

    अमृतसर 

    में लुहारका रोड के पास एक प्लॉट से असॉल्ट राइफल बरामद की गई है। मिलिट्री इंटेलिजेंस अमृतसर के कर्मचारियों से मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए हथियार बरामद किया। थाना कंबो में आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है।

    पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, 11 अक्टूबर को एएसआई सरवन सिंह पुलिस के साथ इलाके में गश्त और संदिग्ध व्यक्तियों की तलाश के संबंध में मीराकोट खुर्द में मौजूद थे। उनके पास मिलिट्री इंटेलिजेंस अमृतसर के कर्मचारी पहुंचे। उन्होंने सूचना दी कि लुहारका रोड पर कैम्ब्रिज स्कूल के पास स्थित प्लॉट में घातक हथियार या असलहा छिपाकर रखा हो सकता है।

    बताए गए स्थान पर तलाशी अभियान चलाया सूचना मिलने पर ASI सरवन सिंह ने पुलिस और मिलिट्री इंटेलिजेंस के कर्मचारियों के साथ बताए गए स्थान पर तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान कैम्ब्रिज स्कूल के पास स्थित प्लॉट की जांच की गई। तलाशी के दौरान वहां से पीले रंग का एक लिफाफा बरामद हुआ।

    जांच करने पर असॉल्ट राइफल मिली लिफाफे की जांच करने पर उसके अंदर से एक असॉल्ट राइफल मिली। राइफल की बॉडी पर CAL 223 BORE S/A लिखा हुआ था। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, बरामद राइफल के साथ मैगजीन और रॉड नहीं मिली। हथियार को कब्जे में लेकर उसकी वीडियोग्राफी भी की गई।

    उपलब्ध रिकॉर्ड में कोई जानकारी नहीं इस मामले में थाना कंबो में 11 अक्टूबर 2026 को भारतीय आर्म्स एक्ट की धारा 25(8), 54 और 59 के तहत केस दर्ज किया गया है। मामले में अज्ञात आरोपी का उल्लेख किया गया है। फिलहाल, हथियार किसने और किस मकसद से प्लॉट में छिपाकर रखा था, इस संबंध में उपलब्ध रिकॉर्ड में कोई जानकारी नहीं दी गई है।