Category: राज्य

  • भारत में बदलेगा टाइम सिस्टम! डिजिटल से लेकर वित्तीय कामों तक IST होगा अनिवार्य

    भारत में बदलेगा टाइम सिस्टम! डिजिटल से लेकर वित्तीय कामों तक IST होगा अनिवार्य

     नई दिल्ली
    अगले साल मार्च से, भारत में सभी संस्थाओं को कानूनी, कमर्शियल, डिजिटल और प्रशासनिक कामों के लिए इंडियन स्टैंडर्ड टाइम (IST) का इस्तेमाल करना होगा। सरकार ने इस संबंध में लीगल मेट्रोलॉजी (इंडियन स्टैंडर्ड टाइम) रूल्स, 2026 की ऐलान किया। लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट के तहत घोषित ये नियम गजट में पब्लिश होने के 180 दिन बाद लागू होंगे, जिससे मार्च 2027 के आसपास से IST अनिवार्य हो जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने पर एक्ट के तहत जुर्माना लगाया जाएगा।

    मार्च 2027 से IST जरूरी
    सरकार की ओर से जारी इस नोटिफिकेशन के तहत, जब तक खास तौर पर छूट न दी गई हो, सभी कानूनी, प्रशासनिक और आधिकारिक डॉक्यूमेंट्स के लिए भारतीय मानक समय (IST) अनिवार्य टाइम रेफरेंस होगा। यह कमर्शियल गतिविधियों, ट्रांसपोर्ट, पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, कानूनी कॉन्ट्रैक्ट्स और फाइनेंशियल ऑपरेशन्स में भी IST को स्टैंडर्ड टाइम रेफरेंस बनाता है।

    'वन नेशन, वन टाइम' का फैसला क्यों
    संस्थाओं को आधिकारिक कामों के लिए IST के अलावा किसी अन्य टाइम रेफरेंस का इस्तेमाल, डिस्प्ले या रिकॉर्ड करने की इजाजत नहीं होगी, सिवाय उन मामलों के जहां विदेशी टाइम जोन स्पष्ट रूप से बताए गए हों। या फिर जहां वैज्ञानिक रिसर्च, नेविगेशन या खगोल विज्ञान के लिए वैकल्पिक टाइम सोर्स की इजाजत हो। ये नियम इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि आधुनिक डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर माइक्रोसेकंड-लेवल की टाइमिंग सटीकता पर निर्भर करता है।

    इस नोटिफिकेशन से क्या बदल जाएगा?

    • पेमेंट सिस्टम, स्टॉक एक्सचेंज, टेलीकॉम नेटवर्क, 5G सर्विस, डिजिटल नेविगेशन, पावर ग्रिड और डेटा सेंटर को ट्रांजैक्शन प्रमाणित करने में अहम रोल
    • ऐसे ऑपरेशन्स में तालमेल बिठाने और नेटवर्क की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए सिंक्रोनाइज्ड घड़ियों की जरूरत होती है।
    • यह नोटिफिकेशन टाइम सिंक्रोनाइजेशन, ट्रेसेबिलिटी और साइबर सिक्योरिटी के लिए एक देशव्यापी सिस्टम बनाता है और सटीक समय को महत्वपूर्ण डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर मानता है।
    • नियमों के तहत, CSIR-नेशनल फिजिकल लेबोरेटरी (NPL) भारत के प्राइमरी टाइम स्केल, UTC(NPLI) को बनाए रखना जारी रखेगी
    • इससे IST लिया जाता है, जबकि रीजनल रेफरेंस स्टैंडर्ड्स लेबोरेटरीज (RRSLs), ISRO का NavIC और अन्य अधिकृत टाइमिंग सोर्स आधिकारिक समय का प्रसार करेंगे।
    • इन नियमों की एक और बड़ी विशेषता साइबर रेजिलिएंस पर ध्यान देना है।
    • संगठनों को उचित टाइम-सिंक्रोनाइजेशन सिस्टम लगाने होंगे, नेटवर्क को स्पूफिंग, जैमिंग और साइबर हमलों से बचाना होगा, कई अधिकृत टाइमिंग सोर्स को इंटीग्रेट करना होगा
    • बिना रुकावट के काम सुनिश्चित करने के लिए आकस्मिक व्यवस्था (कंटिंजेंसी मैकेनिज्म) बनाए रखनी होगी, जिसमें जरूरत पड़ने पर एटॉमिक घड़ियां भी शामिल हैं।

     

  • योगी का दावा- लखनऊ बना ब्रह्मोस मिसाइल का केंद्र, यूपी देश के विकास का ग्रोथ इंजन

    योगी का दावा- लखनऊ बना ब्रह्मोस मिसाइल का केंद्र, यूपी देश के विकास का ग्रोथ इंजन

    लखनऊ
     रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को अपने संसदीय क्षेत्र लखनऊ को सौ करोड़ से अधिक रुपयों की सौगात दी। राजनाथ सिंह के साथ सीएम योगी आदित्यनाथ ने योजनाओं का शिलान्यास किया।

    दिलकुशा ग्राउंड पर आयोजित समारोह में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आज लखनऊ की ऐतिहासिक धरती पर एक साथ अनेक योजनाओं का शिलान्यास हुआ है। लखनऊ की गति और प्रगति को पूरे यूपी से जोड़कर देखता हूं। यदि यहां के किसी प्रतिनिधि ने कहा कि मुख्यमंत्री जी ये काम होना चाहिए, उन्होंने दिल खोलकर काम किया है। केंद्र और राज्य सरकार की सोच एक दिशा में चलती है तो विकास की गति कई गुणा बढ़ जाती है।

    उन्होंने कहा कि यह 12 परियोजनाएं एक संकल्प हैं। आज भारत विकसित भारत के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। आज से दस से 12 वर्षों पहले अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की बात को इतनी गंभीरता से नहीं लेते थे, आज विश्व कान खोलकर सुनता है। विकसित भारत की यात्रा बड़े शहरों से शुरू होकर हर मुहल्ले तक पहुंचना चाहिए। समय बदलता है, शहर बदलते है और जरूरत बदलते हैं इसलिए नियम बदलते रहते हैं।

    लखनऊ सहित देश भर में बिल्डिंग बाइलाज बदल दिया है। अब ज्यादा ऊंचाई के मकान बन सकते हैं। बदलाव केवल इमारतों से नहीं हमारी पहचान में भी होता है।लखनऊ छांवनी परिषद ने पांच बाजार के नाम बदल दिया है। नाम बदलना केवल बोर्ड बदलना मात्र नहीं है। यह स्मृति को बदलना जैसा होता है। कोई ऊदा देवी बाजार का नाम सुनेगा तो उनके बलिदान को याद करेगा।

    आधुनिक मिसाइल ब्रह्मोस का केंद्र भी लखनऊ : योगी आदित्यनाथ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पिछले नौ वर्षों के अंदर प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश ने अपनी एक नई यात्रा सुरक्षा और सुशासन की तय की है। प्रदेश की राजधानी लखनऊ आज से 20 वर्ष पहले रेलवे स्टेशन पर एक बोर्ड लगा होता था मुस्कुराइये आप लखनऊ में हैं। शंकरी गलियां, जाम और गंदगी को देखकर रोने का मन करता था। लखनऊ में आज सकरी गलियां भी हैं तो आउटर रिंग रोड भी है। ब्रह्मोस जैसी आधुनिक मिसाइल का केंद्र भी लखनऊ बना है।

    उन्होंने कहा कि यूनेस्को ने लखनऊ के कुजीन को मान्यता दी है। अटल जी के सपनों को साकार रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के मार्गदर्शन से हो रहा है। हम इस वर्ष के अंत तक गोमती नदी को पूरी तरह से स्वच्छ बनाने में सफल होंगे। बदलते विश्व परिवेश में लखनऊ में जिन सुविधाओं की आवश्यकता थी, वो आज निरंतर प्राप्त हो रही है। पिछले नौ वर्ष के अंदर हमने उत्तर प्रदेश को एक नई दिशा देने का प्रयास किया है, 2017 से उत्तर प्रदेश की पहचान का संकट था, पहले अराजकता थी, उपद्रव था, अभाव था, आज उत्तर प्रदेश इकोनामी का ग्रोथ रेट का इंजन बन गया है।

    यूपी के पास 60 प्रतिशत एक्सप्रेसवे का नेटवर्क 
    देश की 60 प्रतिशत एक्सप्रेसवे का नेटवर्क यूपी के पास है, सबसे बड़ा रेल नेटवर्क और मेट्रो यूपी में है। देश की पहली रैपिड रेल और वाटर वे यूपी में प्रारंभ हुआ है।हमारे पास 17 घरेलू और पांच इंटरनेशनल एयरपोर्ट क्रियाशील हैं। देश में सैनिक स्कूल की शुरुआत यूपी से प्रारंभ हुई थी, आज यूपी के अंदर कई सैनिक स्कूल भावी अधिकारी तैयार कर रही है। अब छावनी परिषद को किसी तरह के फंड की कमी नहीं होगी। लखनऊ की छावनी परिषद आदर्श बनेगी, इज ऑफ लिविंग के लक्ष्य को प्राप्त करेगी।

    बाहर से आने वाले देखते हैं लखनऊ का विकास : ब्रजेश पाठक
    उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि अटल जी का लखनऊ को संवारने का सपना राजनाथ सिंह जी पूरा कर रहे हैं। लखनऊ का विकास बाहर से आने वाले लोग देखते हैं। छावनी में आयोजित 100.92 करोड़ रूपये की योजनाओं का शिलान्यास करते हुए समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने कहा कि प्रदेश सरकार का पहला दायित्व अपने नागरिकों की रक्षा करना। जब दुश्मन की गोली आती है और उसका जवाब गोले से देने का आदेश हमारे चीफ ने दिया होता है, तो आंतरिक सुरक्षा और मजबूत होती है। बागपत में आर्म्ड फोर्स में चयन की तैयारी का प्रयोग सफल हुआ है, 65 प्रतिशत बच्चों का चयन हुआ है। इसे लखनऊ में भी शुरू करेंगे।

  • अब जांच के लिए अस्पताल जाने की जरूरत नहीं! बिहार में घर बैठे कैंसर, शुगर और BP टेस्ट की सुविधा

    अब जांच के लिए अस्पताल जाने की जरूरत नहीं! बिहार में घर बैठे कैंसर, शुगर और BP टेस्ट की सुविधा

    मुजफ्फरपुर.

    अब बीमारी की जांच के लिए लोगों को अस्पताल के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। एक सितंबर से प्रदेश में ‘जांच एवं उपचार चिकित्सा आपके द्वार’ अभियान शुरू होने जा रहा है। इसके तहत स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर पहुंचकर कैंसर, शुगर और बीपी समेत कई गंभीर बीमारियों की स्क्रीनिंग करेंगी।

    अभियान 30 नवंबर तक चलेगा। राज्य स्वास्थ्य समिति ने सभी जिलों के डीएम, सिविल सर्जन और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। अभियान का मुख्य उद्देश्य गैर संचारी रोगों की शुरुआती स्तर पर पहचान करना है। कैंसर, मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों का समय पर पता चलने से इलाज जल्द शुरू किया जा सकेगा। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि शुरुआती जांच और उपचार से गंभीर जटिलताओं और असमय होने वाली मौतों को रोकने में मदद मिलेगी।

    पांच तरह की बीमारियों पर फोकस
    अभियान में उच्च रक्तचाप और मधुमेह के साथ मुंह, स्तन और गर्भाशय के मुख के कैंसर की स्क्रीनिंग की जाएगी। हृदय रोग, फैटी लिवर और फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारियों की भी जांच की जाएगी। संदिग्ध मरीजों को आगे की जांच और उपचार के लिए सरकारी स्वास्थ्य केंद्र भेजा जाएगा।

    महंगी जांच भी मुफ्त
    चिन्हित मरीजों को सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर जांच और उपचार की सुविधा निश्शुल्क मिलेगी। ब्लड शुगर, लिवर फंक्शन टेस्ट, किडनी फंक्शन टेस्ट, 24 घंटे का यूरिन प्रोटीन टेस्ट, ईसीजी, पैप स्मीयर और बायोप्सी जैसी जांच भी कराई जाएगी। विटामिन-डी3 और बी12 की जांच की सुविधा भी अभियान में शामिल है।

    आशा कार्यकर्ता करेंगी घरों का सर्वे
    अभियान में आशा कार्यकर्ता अपने क्षेत्र की एएनएम के साथ घर-घर जाएंगी। परिवार के सभी सदस्यों की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी जुटाकर पारिवारिक फोल्डर तैयार किया जाएगा। सर्वेक्षण के दौरान गैर संचारी रोगों से जुड़ी जानकारी मोबाइल आधारित एनसीडी पोर्टल पर दर्ज की जाएगी।

    संदिग्ध मरीजों की होगी निगरानी
    स्क्रीनिंग में संदिग्ध पाए गए मरीजों को सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाने में स्वास्थ्यकर्मी सहयोग करेंगे। उपचार करा रहे मरीजों की लाइन लिस्ट और फालोअप पंजी तैयार की जाएगी। आशा कार्यकर्ताओं को गृह भ्रमण से जुटाए गए आंकड़े रियल टाइम में एनसीडी पोर्टल पर अपलोड करने की जिम्मेदारी दी गई है।

  • विधानसभा में सामने आया छात्रवृत्ति का उलझा हिसाब, OBC विद्यार्थियों के भुगतान पर सरकार से सवाल

    विधानसभा में सामने आया छात्रवृत्ति का उलझा हिसाब, OBC विद्यार्थियों के भुगतान पर सरकार से सवाल

    चंडीगढ़
     हरियाणा में ओबीसी विद्यार्थियों की पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति को लेकर सरकार के विधानसभा में दिए आंकड़ों में ऐसा अंतर सामने आया है, जिसका स्पष्ट मिलान जवाब में नहीं मिलता।

    वर्ष 2024-25 में ओबीसी विद्यार्थियों के 63,893 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 52,023 आवेदन स्वीकृत किए गए। इसके बावजूद छात्रवार विवरण में छात्रवृत्ति पाने वाले विद्यार्थियों की संख्या शून्य दर्ज है।

    वहीं, इसी वर्ष के वित्तीय विवरण में ओबीसी पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए 776.04 लाख रुपये का बजट स्वीकृत होने और उसमें से 3.44 करोड़ रुपये वितरित किए जाने की जानकारी दी गई है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब छात्रवार रिकार्ड में किसी विद्यार्थी को भुगतान नहीं हुआ, तो 3.44 करोड़ रुपये किस अवधि या किन विद्यार्थियों के लिए जारी किए गए।

    आदित्य सुरजेवाला ने पूछे सवाल
    यह मामला कैथल से कांग्रेस विधायक आदित्य सुरजेवाला के विधानसभा सवाल के जवाब में सामने आया। उन्होंने 2019 से अब तक एससी, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस विद्यार्थियों की पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के आवेदन, स्वीकृति, वास्तविक भुगतान और बजट वितरण का वर्षवार ब्योरा मांगा था।

    सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2023-24 में 60,696 ओबीसी विद्यार्थियों ने आवेदन किया। इनमें 50,910 आवेदन स्वीकृत हुए, लेकिन केवल 17,937 विद्यार्थियों को भुगतान किया गया। 2022-23 में 39,745 आवेदन स्वीकृत हुए और 38,483 विद्यार्थियों को भुगतान किया गया। हालांकि 3,8 करोड़ रुपये के स्वीकृत बजट के मुकाबले केवल 7 करोड़ 87 लाख रुपये ही वितरित किए गए।

    हरियाणा सरकार ने छात्रवृत्ति भुगतान में देरी या कमी के लिए निष्क्रिय आधार, सत्यापन में दिक्कत, अधूरे दस्तावेज और बजट की अनुउपलब्धता जैसे कारण बताए हैं। 2025-26 में 38,333 आवेदन आए, 29,784 मंजूर हुए और 25,847 विद्यार्थियों को भुगतान किया गया।

    बीसीए के 75,621 विद्यार्थियों को वजीफा
    नूंह से कांग्रेस विधायक चौधरी आफताब अहमद के सवाल के जवाब में स्कूल शिक्षा विभाग ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में कक्षा 10वीं के 38,364 और कक्षा 12वीं के 37,257 बीसीए विद्यार्थियों, यानी कुल 75,621 विद्यार्थियों को मासिक वजीफा दिया गया।

    सरकार ने स्पष्ट किया कि यह योजना ओबीसी पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति से अलग है। जवाब में यह भी कहा गया कि स्कूल शिक्षा विभाग में बीसी-बी विद्यार्थियों के लिए कोई छात्रवृत्ति योजना संचालित नहीं है।

    वहीं, ईडब्ल्यूएस विद्यार्थियों की पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के मामले में 2019-20 से 2026-27 तक लगातार आठ वित्तीय वर्षों में न बजट स्वीकृत होने और न राशि वितरित होने का रिकॉर्ड सरकार ने दिया है।

     

  • चंडीगढ़ में नशे के खिलाफ युवाओं की हुंकार, 20 सितंबर को Gen Z करेंगे बड़ा अभियान

    चंडीगढ़ में नशे के खिलाफ युवाओं की हुंकार, 20 सितंबर को Gen Z करेंगे बड़ा अभियान

    चंडीगढ़.

    पंजाब के साथ-साथ अब हरियाणा और चंडीगढ़ में भी नशा एक चुनौती बन चुका है। युवाओं को नशे के खिलाफ एकजुट करने और समाज में व्यापक जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से 20 सितंबर को चंडीगढ़ के सेक्टर-17 प्लाजा में “Gen Z Against Drugs” कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

    कार्यक्रम में शहर के विभिन्न कॉलेजों, शिक्षण संस्थानों और अलग-अलग क्षेत्रों से हजारों युवाओं के शामिल होने की उम्मीद है। कार्यक्रम के संयोजक संजीव राणा ने कहा कि नशा आज केवल किसी एक व्यक्ति या परिवार की समस्या नहीं है, बल्कि यह देश की युवा शक्ति और भविष्य के सामने गंभीर चुनौती बन चुका है। नशे की गिरफ्त में आने वाला युवा अपने स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य के साथ-साथ अपने परिवार और समाज को भी प्रभावित करता है। इसलिए अब समय आ गया है कि Gen Z स्वयं आगे आए और नशे के खिलाफ एक मजबूत सामाजिक अभियान का नेतृत्व करे। उन्होंने कहा कि Gen Z को अक्सर केवल सोशल मीडिया, ट्रेंड और विरोध-प्रदर्शनों से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन 20 सितंबर का कार्यक्रम यह संदेश देगा कि नई पीढ़ी समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारी को भी पूरी गंभीरता से समझती है। हजारों युवा एक मंच से नशे के खिलाफ आवाज उठाकर यह संकल्प लेंगे कि वे स्वयं भी नशे से दूर रहेंगे और दूसरे युवाओं को भी इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करेंगे।

    संजीव राणा ने कहा कि यह कार्यक्रम केवल युवाओं का नहीं, बल्कि हर उस माता-पिता और परिवार का कार्यक्रम है जो अपने बच्चों को सुरक्षित, स्वस्थ और नशामुक्त देखना चाहता है। उन्होंने अभिभावकों से भी कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे सुरक्षित रहें, गलत संगत और नशे से दूर रहें, तो उन्हें भी इस अभियान में आगे आना होगा। बच्चों को नशे से बचाने की जिम्मेदारी केवल सरकार, पुलिस या शिक्षण संस्थानों की नहीं, बल्कि परिवार और पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है।

    संजीव राणा ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा शक्ति है। इस शक्ति को नशे की गिरफ्त में नहीं जाने दिया जा सकता। आओ, हम सब मिलकर अपने बच्चों और युवाओं के सुरक्षित भविष्य के लिए आगे आएं। जागरूक और संगठित युवा ही नशे के खिलाफ सबसे मजबूत दीवार बन सकते हैं। 20 सितंबर को सेक्टर-17 प्लाजा से “नशे को ना, जिंदगी को हां” के संदेश के साथ नशामुक्त युवा और मजबूत भारत का संकल्प लिया जाएगा।

  • केंद्र-राज्य की सोच एक दिशा में हो तो कई गुना बढ़ती है विकास की गति: रक्षा मंत्री

    केंद्र-राज्य की सोच एक दिशा में हो तो कई गुना बढ़ती है विकास की गति: रक्षा मंत्री

    लखनऊ के विकास में सीएम योगी का सबसे बड़ा सहयोग: राजनाथ सिंह

    रक्षामंत्री ने कहा- विकास व सुशासन के नए मानदंड स्थापित करता रहेगा उत्तर प्रदेश

    केंद्र-राज्य की सोच एक दिशा में हो तो कई गुना बढ़ती है विकास की गति: रक्षा मंत्री

    लखनऊ,
    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि लखनऊ में जो विकास कार्य हुए हैं, उसमें सबसे बड़ा सहयोग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का है। उन्होंने वह सब किया, जो कहा था। लखनऊ के हर कार्य में उन्होंने दिल खोलकर सहयोग किया और समय-समय पर समीक्षा भी की। केंद्र व राज्य सरकार की सोच एक दिशा में होने पर विकास की गति स्वाभाविक रूप से कई गुना बढ़ जाती है। रक्षा मंत्री रविवार को मुख्यमंत्री के साथ लखनऊ छावनी के लिए करीब 101 करोड़ रुपये की 12 विकास परियोजनाओं के शिलान्यास एवं भूमि पूजन अवसर पर जनसमूह को संबोधित कर रहे थे।

    उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार, रक्षा मंत्रालय और उद्योग जगत मिलकर विकास के कार्य को आगे बढ़ा रहे हैं। उत्तर प्रदेश विकास और सुशासन के क्षेत्र में नए मानदंड स्थापित करता रहेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत विकसित भारत के संकल्प के साथ तेजी से आगे बढ़ रहा है। आज से 10-12 वर्ष पहले अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की बातों को गंभीरता से नहीं लिया जाता था, लेकिन आज भारत जब बोलता है तो पूरी दुनिया कान खोलकर सुनती है। विकसित भारत का अर्थ केवल बड़ी परियोजनाएं और आधुनिक इमारतें नहीं, बल्कि इसका मतलब है कि बच्चों को अच्छी शिक्षा मिले, हर परिवार तक स्वच्छ पानी पहुंचे, युवाओं को खेलने और प्रतिभा दिखाने का अवसर मिले और दिव्यांग बच्चों को यह महसूस न हो कि वे समाज से पीछे हैं। विकसित भारत की यात्रा बड़े शहरों से शुरू होकर हर मोहल्ले, बस्ती और परिवार तक पहुंचनी चाहिए।

    तीन से पांच मंजिल तक निर्माण की राह खुली
    राजनाथ सिंह ने कहा कि समय के साथ शहरों और लोगों की जरूरतें बदलती हैं, इसलिए नियमों में बदलाव भी जरूरी है। लखनऊ सहित छावनी क्षेत्रों में नई व्यवस्था लागू की गई है। पहले जहां तीन मंजिल तक निर्माण का प्रावधान था, अब पांच मंजिल तक निर्माण की अनुमति दी गई है। लखनऊ छावनी क्षेत्र अपनी विरासत को सुरक्षित रखते हुए आधुनिक सुविधाओं के साथ तेजी से आगे बढ़ेगा।

    ब्रिटिश काल के बाजारों को मिली नई पहचान
    रक्षा मंत्री ने कहा कि बदलाव केवल इमारतों में नहीं, पहचान में भी होना चाहिए। लखनऊ छावनी में ब्रिटिश काल से चले आ रहे कुछ बाजारों के नाम बदलकर स्वतंत्रता संग्राम, सामाजिक चेतना और राष्ट्रसेवा से जुड़े व्यक्तित्वों के नाम पर किए गए हैं। 

    12 परियोजनाएं नहीं, 12 संकल्प
    राजनाथ सिंह ने कहा कि लखनऊ
    छावनी के लिए आज का दिन महत्वपूर्ण है। करीब 101 करोड़ रुपये की लागत वाली ये 12 परियोजनाएं लखनऊ कैंट के भविष्य के प्रति प्रतिबद्धता हैं। इन परियोजनाओं के जरिए स्वच्छ छावनी, बेहतर जलापूर्ति, बच्चों के बेहतर भविष्य, युवाओं को खेल और प्रतिभा दिखाने के अवसर, सम्मानजनक नागरिक सुविधाएं तथा आधुनिक तकनीक के साथ आगे बढ़ती छावनी का संकल्प पूरा किया जाएगा।

  • नए श्रम नियमों में काम के घंटे, विश्राम और सुरक्षा व्यवस्था के कड़े प्रावधान

    नए श्रम नियमों में काम के घंटे, विश्राम और सुरक्षा व्यवस्था के कड़े प्रावधान

     पटना
    राज्य के कारखानों, प्रतिष्ठानों एवं दुकानों में काम करने वाले कामगारों के लिए नियुक्ति पत्र अब अनिवार्य होगा। हर साल नियोक्ता द्वारा अपने खर्च पर कामगारों की मुफ्त स्वास्थ्य जांच कराई जाएगी।

    प्रदेश उपजीविकाजन्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यदशा नियमावली-2026 के तहत कार्यस्थल पर काम के घंटे, विश्राम, सुरक्षा और जरूरी सुविधाओं से जुड़े कई नए नियम प्रभावी किए हैं।

    इसकी जांच के लिए श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग की टीम कारखानों, प्रतिष्ठानों एवं दुकानों में निरीक्षण करेगी।

    नियुक्ति पत्र का प्रविधान
    राज्य में नई श्रम संहिता की गाइडलाइन में नियुक्ति पत्र का प्रविधान कम से कम 10 कर्मचारियों वाले कारखानों, प्रतिष्ठानों और दुकानों पर ही लागू होगा।

    घरेलू और कृषि क्षेत्र के कामगार इसके दायरे में नहीं होंगे। महिला कर्मचारियों को उनकी सहमति से सभी प्रकार के प्रतिष्ठानों में काम करने का अवसर मिलेगा।

    सुरक्षा का रखा जाएगा ख्याल
    विभाग के एक उच्च पदस्थ अधिकारी के मुताबिक प्रभावी प्रविधानों के आधार पर कारखानों, प्रतिष्ठानों एवं दुकानों का तैयार डाटाबैंक भी तैयार किया जाएगा। महिला कामगारों के लिए रात्रिकालीन सेवा में आवश्यक सुरक्षा उपायों को अनिवार्य कर दिया गया है।

    सुरक्षा व्यवस्था के बीच महिला कामगार रात्रिकालीन पाली में भी काम कर सकेंगी। अब नियोक्ताओं को अलग-अलग पंजीकरण कराने की जगह एकल पंजीकरण की सुविधा मिलेगी। श्रमिकों के काम के घंटे और विश्राम की अवधि भी निर्धारित नियमों के अनुसार होगी।

    भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकारों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण के लिए भी अलग से विशेष व्यवस्था किए गए हैं। नियोक्ता को कार्यस्थल पर संभावित जोखिमों का आकलन करना होगा। इसकी भी विभागीय स्तर पर मानीटरिंग की व्यवस्था की गई है।

  • दुकान-फैक्ट्री कर्मचारियों के लिए नए नियम, अपॉइंटमेंट लेटर और फ्री हेल्थ चेकअप अनिवार्य

    दुकान-फैक्ट्री कर्मचारियों के लिए नए नियम, अपॉइंटमेंट लेटर और फ्री हेल्थ चेकअप अनिवार्य

    पटना.

    राज्य के कारखानों, प्रतिष्ठानों एवं दुकानों में काम करने वाले कामगारों के लिए नियुक्ति पत्र अब अनिवार्य होगा। हर साल नियोक्ता द्वारा अपने खर्च पर कामगारों की मुफ्त स्वास्थ्य जांच कराई जाएगी। प्रदेश उपजीविकाजन्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यदशा नियमावली-2026 के तहत कार्यस्थल पर काम के घंटे, विश्राम, सुरक्षा और जरूरी सुविधाओं से जुड़े नए नियम प्रभावी किए हैं। इसकी जांच के लिए श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग की टीम कारखानों, प्रतिष्ठानों एवं दुकानों में निरीक्षण करेगी।

    नियुक्ति पत्र का प्रविधान
    राज्य में नई श्रम संहिता की गाइडलाइन में नियुक्ति पत्र का प्रविधान कम से कम 10 कर्मचारियों वाले कारखानों, प्रतिष्ठानों और दुकानों पर ही लागू होगा। घरेलू और कृषि क्षेत्र के कामगार इसके दायरे में नहीं होंगे। महिला कर्मचारियों को उनकी सहमति से सभी प्रतिष्ठानों में काम करने का अवसर मिलेगा।

    सुरक्षा का रखा जाएगा ख्याल
    विभाग के एक उच्च पदस्थ अधिकारी के मुताबिक प्रभावी प्रविधानों के आधार पर कारखानों, प्रतिष्ठानों एवं दुकानों का तैयार डाटाबैंक भी तैयार किया जाएगा। महिला कामगारों के लिए रात्रिकालीन सेवा में आवश्यक सुरक्षा उपायों को अनिवार्य कर दिया गया है। महिला कामगार रात्रिकालीन पाली में भी सुरक्षा व्यवस्था के बीच काम कर सकेंगी। अब नियोक्ताओं को अलग-अलग पंजीकरण कराने की जगह एकल पंजीकरण की सुविधा मिलेगी। श्रमिकों के काम के घंटे और विश्राम की अवधि भी निर्धारित नियमों के अनुसार होगी। भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकारों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण के लिए भी अलग से विशेष व्यवस्था किए गए हैं। नियोक्ता को कार्यस्थल पर संभावित जोखिमों का आकलन करना होगा। इसकी भी विभागीय स्तर पर मानीटरिंग की व्यवस्था की गई है।

  • रांची की विशेष अदालतों में हाई-प्रोफाइल मामलों पर हुई सुनवाई, कई याचिकाओं पर आदेश

    रांची की विशेष अदालतों में हाई-प्रोफाइल मामलों पर हुई सुनवाई, कई याचिकाओं पर आदेश

    रांची
    झारखंड की राजधानी रांची स्थित सीआईडी और एनआईए की विशेष अदालतों में शनिवार को कई हाई-प्रोफाइल मामलों में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। 

    जेपीएससी परीक्षा गड़बड़ी, जेएसएससी-सीजीएल पेपर लीक और पूर्व मंत्री रमेश सिंह मुंडा हत्याकांड से जुड़ी याचिकाओं पर अदालती आदेश सामने आए हैं।

    रोशन केरकेट्टा व अन्य की जमानत पर सुनवाई 2 सितंबर को
    सीआईडी कोर्ट में जेपीएससी (JPSC) परीक्षा गड़बड़ी मामले में धोखाधड़ी कर परीक्षा पास करने के आरोपी रोशन केरकेट्टा, मनोज कुमार और एजेंट उमाकांत उरांव ने एक साथ जमानत याचिका दाखिल की है। 

    एपीपी के अनुरोध पर अदालत ने सुनवाई की अगली तिथि 2 सितंबर निर्धारित की है। तीनों को 5 अगस्त को सीआईडी और लखनऊ पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में गिरफ्तार किया गया था।

    वहीं, मामले के एक अन्य आरोपी लालू कुमार यादव की अग्रिम जमानत याचिका पर 7 सितंबर को सुनवाई होगी।

    टीडीपीएल कर्मी अभय तिवारी की याचिका पर होगी सुनवाई
    जेएसएससी-सीजीएल (JSSC-CGL) परीक्षा-2024 पेपर लीक मामले में टीडीपीएल के पूर्व अधिकारी अभय कुमार तिवारी की जमानत याचिका पर सीआईडी कोर्ट में 2 सितंबर को सुनवाई होगी। 

    अभय तिवारी 20 अगस्त से न्यायिक हिरासत में हैं, जबकि उनकी पत्नी सुषमा कुमारी और भाई अक्षय तिवारी भी जेल में हैं। 18 दिसंबर 2024 को रातू थाना में दर्ज इस केस की जांच 1 जनवरी 2025 से सीआईडी कर रही है।

    पूर्व मंत्री रमेश सिंह मुंडा हत्याकांड: एनआईए कोर्ट ने खारिज की जमानत
    एनआईए (NIA) की विशेष अदालत ने पूर्व मंत्री रमेश सिंह मुंडा हत्याकांड के आरोपित प्रफुल्ल कुमार महतो और बलराम साहू उर्फ डेविड की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। 

    एनआईए के विशेष न्यायाधीश अभिमन्यु कुमार की अदालत ने बहस पूरी होने के बाद फैसला सुनाया। उल्लेखनीय है कि 9 जुलाई 2008 को बुंडू स्थित एसएस हाईस्कूल में कार्यक्रम के दौरान तत्कालीन विधायक रमेश सिंह मुंडा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। 

    एनआईए के अनुसार, प्रफुल्ल पर साजिश में शामिल होने, हथियार उपलब्ध कराने और नक्सलियों को पनाह देने का आरोप है।

     

  • 223 SC छात्रावासों की होगी मरम्मत और सुविधाओं का विस्तार, योगी सरकार ने मंजूर किए 12.45 करोड़

    223 SC छात्रावासों की होगी मरम्मत और सुविधाओं का विस्तार, योगी सरकार ने मंजूर किए 12.45 करोड़

    अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के 223 छात्रावासों का होगा कायाकल्प, योगी सरकार ने मंजूर किए 12.45 करोड़

    रखरखाव व मरम्मत के लिए स्वीकृत की धनराशि, विद्यार्थियों को मिलेगा सुरक्षित और बेहतर आवासीय वातावरण: राज्यमंत्री असीम अरुण
        
    पेयजल, बिजली, शौचालय, रंग-रोगन, सुरक्षा व सफाई आदि सुविधाओं पर होगा फोकस

    गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ पूरे होंगे कार्य, पढ़ाई के अनुकूल बनेगा छात्रावासों का माहौल

    लखनऊ, 
     अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के सभी 223 राजकीय अनुसूचित जाति छात्रावासों के रखरखाव, मरम्मत और बुनियादी सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए 12.45 करोड़ रुपये की बजट स्वीकृति प्रदान की गई है। सरकार की इस पहल से छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों को स्वच्छ, सुरक्षित और अध्ययन के अनुकूल वातावरण मिलने की उम्मीद है।

    क्षमता के अनुसार होगा धनराशि का आवंटन

    छात्रावासों में विद्यार्थियों की क्षमता के आधार पर रखरखाव और मरम्मत के लिए धनराशि जारी की जाएगी। इसके तहत 50 विद्यार्थियों की क्षमता वाले छात्रावासों को प्रति छात्रावास पांच लाख रुपये तक की राशि उपलब्ध कराई जाएगी। इससे छात्रावासों की जरूरत के अनुसार आवश्यक सुधार कार्य कराए जा सकेंगे।

    बुनियादी सुविधाओं पर विशेष ध्यान

    स्वीकृत बजट से छात्रावासों में पेयजल व्यवस्था को बेहतर करने, विद्युत उपकरणों की मरम्मत एवं सुधार, शौचालयों की मरम्मत, रंग-रोगन तथा सुरक्षा और स्वच्छता से जुड़े जरूरी कार्य कराए जाएंगे। इन सुविधाओं के मजबूत होने से विद्यार्थियों को बेहतर दैनिक सुविधाएं मिलेंगी और पढ़ाई के लिए अनुकूल माहौल तैयार होगा। योगी सरकार की प्राथमिकता अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ सम्मानजनक आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराना है। छात्रावासों में सुविधाओं का सुधार इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। 

    रखरखाव और मरम्मत के कार्यों में गुणवत्ता व समयबद्धता पर जोर

    समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि छात्रावासों में रखरखाव और मरम्मत के सभी कार्य गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय सीमा में पूरे किए जाएं। उन्होंने कहा कि छात्रावास केवल रहने का स्थान नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण के केंद्र हैं। बजट स्वीकृति से सभी 223 छात्रावासों की व्यवस्थाओं में व्यापक सुधार होगा।