Category: राज्य

  • बाबा बकाला में चन्नी गुट की ताकत का प्रदर्शन, वड़िंग गुट रहा दूर; राहुल दौरे से पहले सियासी हलचल

    बाबा बकाला में चन्नी गुट की ताकत का प्रदर्शन, वड़िंग गुट रहा दूर; राहुल दौरे से पहले सियासी हलचल

    चंडीगढ़
     पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी को समाप्त करना पार्टी हाईकमान के लिए गंभीर चुनौती बन गया है। हालात यह हैं कि प्रदेश के नेता जब दिल्ली तलब किए जाते हैं तब वहां वे एकजुटता की बातें करते हैं, लेकिन पंजाब की धरती पर आते ही गुटों में बंट जाते हैं। इसी बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी के सितंबर महीने के पंजाब दौरे से पहले प्रदेश कांग्रेस के नेताओं को एक मंच पर लाना हाईकमान के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

    कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी परेशानी पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी गुट से है। चन्नी गुट इन दिनों राज्य में जहां भी मौका मिलता है, वहां अपना शक्ति प्रदर्शन करने से नहीं चूकता।  कांग्रेस में गुटबाजी पहली बार नहीं है लेकिन जिस तरह के हालात इस समय पार्टी हाईकमान के सामने बने हैं, उससे हाईकमान भी असहज महसूस कर रहा है।

    एक मंच पर लाने में कामयाब
    हाईकमान बार-बार यह तो कह रहा है कि गुटबाजी सहन नहीं होगी लेकिन किसी पर भी कार्रवाई करने से अभी तक बच रहा है। पूर्व की बात करें तो राजिंदर कौर भट्ठल, नवजोत सिंह सिद्धू और कैप्टन अमरिंदर सिंह गुट अलग-अलग समय में एक दूसरे के खिलाफ बयानबाजी तो करते थे लेकिन हाईकमान हर समय उनको एक मंच पर लाने में कामयाब हो जाता था।

    अब हालात यह हैं कि चन्नी गुट ने प्रदेश प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है।  हाईकमान की कई कोशिशों के बाद भी दोनों गुट एक नहीं हो सके हैं। हाल ही में लुधियाना के इसड़ू में रैली की बात हो या अमृतसर के बाबा बकाला में रक्खड़ पुन्नया में आयोजित होने वाली रैली… दोनों ही स्थानों पर चन्नी गुट हावी रहा।

    नहीं पहुंचे वड़िंग गुट के नेत
    इससे पहले जब भी यहां पर रैली हुई तो गुटबाजी के बावजूद पार्टी नेता एक मंच पर दिखाई देते और जनता में यह संदेश देने का प्रयास करते कि वे एक हैं। शुक्रवार को बाबा बकाला में रक्खड़ पुन्नया के अवसर पर चन्नी गुट की ओर से की गई रैली में प्रदेश प्रधान राजा वड़िंग का मंच पर लगे पोस्टर में चित्र तो दिखा लेकिन न तो वड़िंग और न ही वड़िंग गुट का कोई नेता पहुंचा।

    हालात ऐसे बने कि प्रदेश नेतृत्व को यह तर्क देना पड़ रहा है कि यह कार्यक्रम स्थानीय स्तर पर होते हैं। प्रदेश प्रधान राजा वड़िंग ने शनिवार को इस पर सफाई देते हुए कहा कि यह जरूरी नहीं कि पार्टी के सभी वरिष्ठ नेता हर कार्यक्रम में मौजूद रहें। उनके अलावा कई अन्य वरिष्ठ नेता नहीं पहुंचे थे। 

    रंधावा से मिल स्लीपर सेल के बारे में पूछेंगे
    वड़िंग प्रदेश प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने शनिवार को एक वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने कहा कि बाबा बकाला में रैली के दौरान सुखजिंदर रंधावा द्वारा पार्टी में ‘स्लीपर सेल’ और ‘समझौता करने वाले नेताओं’ का बयान दिया गया।

    वड़िंग ने कहा कि रंधावा से पूछेंगे कि उनका इशारा किसकी ओर है। उन्होंने कहा कि हर पार्टी में ऐसे लोग हो सकते हैं और उनकी पहचान कर उन्हें सामने लाना जरूरी है, क्योंकि वे विरोधियों से ज्यादा पार्टी को नुकसान पहुंचाते हैं। 

    वही घर है, वही रंधावा… जदों भी आओगे तुहाडा वेलकम’
    वड़िंग के वीडियो संदेश के बाद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने इंटरनेट मीडिया पर पोस्ट डालकर जवाब दिया। रंधावा ने लिखा, 'वही घर है, वही रंधावा, जदों भी तुसी आओगे… तुहाडा मोस्ट वेलकम।'

     

  • बिहार को मिलेगा नया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा बक्सर-भागलपुर कॉरिडोर

    बिहार को मिलेगा नया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा बक्सर-भागलपुर कॉरिडोर

    पटना
    राज्य कैबिनेट ने हाल ही में बक्सर से भागलपुर के बीच ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण को मंजूरी दी है। परियोजना का विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) तैयार करने के लिए निविदा प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।

    करीब 3,700 करोड़ का 336 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे बिहार के 13 जिलों से होकर गुजरेगा, लेकिन पटना इससे सीधे नहीं जुड़ेगा।

    यह पूरी तरह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे होगा, हालांकि कई स्थानों पर इसे पहले से बनी सड़कों से कनेक्टिविटी दी जाएगी।

    इन 13 जिलों से गुजरेगा एक्सप्रेसवे
    बक्सर से शुरू होकर यह एक्सप्रेसवे भोजपुर, अरवल, जहानाबाद, गया, नालंदा, नवादा, शेखपुरा, लखीसराय, मुंगेर, जमुई और बांका होते हुए भागलपुर के बाहरी क्षेत्र तक पहुंचेगा।

    बक्सर तक पहले से सड़क की सुविधा उपलब्ध है। इसके बाद ग्रीनफील्ड एलायनमेंट के माध्यम से सड़क भोजपुर पहुंचेगी और वहां से अरवल की ओर जाएगी।

    अरवल से जहानाबाद होते हुए गया, फिर नालंदा, नवादा, शेखपुरा, लखीसराय, मुंगेर, जमुई और बांका के रास्ते भागलपुर तक इसका विस्तार होगा।

    जिस एलायनमेंट पर यह एक्सप्रेसवे प्रस्तावित है, वहां अभी तक कई क्षेत्रों के बीच निर्बाध सड़क कनेक्टिविटी उपलब्ध नहीं थी। एक्सप्रेसवे के निर्माण से इन क्षेत्रों के बीच आवागमन आसान होगा।

    पटना से एक्सप्रेसवे तक पहुंचने का सबसे नजदीकी रास्ता जहानाबाद
    पटना से इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे तक पहुंचने के लिए जहानाबाद सबसे नजदीकी कनेक्टिंग प्वाइंट होगा। पटना और जहानाबाद के बीच पहले से फोरलेन राष्ट्रीय राजमार्ग उपलब्ध है। इसी वजह से जहानाबाद में इस एक्सप्रेसवे को एनएच से कनेक्टिविटी दी जाएगी।

    जहानाबाद के रास्ते एक्सप्रेसवे पर पहुंचने के बाद गया जाना भी आसान होगा। इसके आगे गया से नालंदा, नवादा और शेखपुरा समेत अन्य जिलों के लिए नई सड़क कनेक्टिविटी विकसित होगी।

    पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से भी जुड़ेगा
    बक्सर-भागलपुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ने की भी योजना है। इससे बिहार के 13 जिलों को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के माध्यम से उत्तर प्रदेश और आगे दिल्ली की ओर बेहतर सड़क संपर्क मिल सकेगा।

    पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से कनेक्टिविटी मिलने के बाद बिहार के इन जिलों से दिल्ली की यात्रा अपेक्षाकृत आसान और तेज होने की उम्मीद है। इससे व्यापार, परिवहन और क्षेत्रीय आवागमन को भी बढ़ावा मिलेगा।

    पूरी तरह टोल आधारित होगा एक्सप्रेसवे
    बक्सर-भागलपुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का निर्माण पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मोड में किया जाना प्रस्तावित है। परियोजना में निजी कंपनी निर्माण के लिए निवेश करेगी। इसके बदले एक्सप्रेसवे पर वाहनों से टोल शुल्क लिया जाएगा।

    इस तरह यह पूरी तरह टोल आधारित एक्सप्रेसवे होगा। सड़क के निर्माण से बिहार के दक्षिणी और पूर्वी हिस्सों के बीच सीधी कनेक्टिविटी मजबूत होने के साथ कई जिलों को राष्ट्रीय स्तर के सड़क नेटवर्क से जोड़ने में मदद मिलेगी।

     

  • राशन कार्ड में नाम जोड़ने-हटाने के नए नियम लागू, इन परिवारों को नहीं मिलेगा लाभ

    राशन कार्ड में नाम जोड़ने-हटाने के नए नियम लागू, इन परिवारों को नहीं मिलेगा लाभ

     रांची
     झारखंड में राशन कार्ड बनवाने और पुराने राशन कार्ड में सदस्यों का नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया में व्यापक बदलाव किया गया है। खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने राशन कार्ड प्रबंधन प्रणाली (RCMS) के तहत नए प्रविधान लागू किए हैं।

    इसके तहत अब राशन कार्ड बनवाने के समय ही वह तमाम जानकारियां ली जाएंगी जिसके आधार पर पूर्व में राशन कार्ड रद किया जाता था। मसलन, उपभोक्ता को पहले ही बताना होगा कि उनकी आमदनी का मुख्य स्रोत क्या है। उनके पक्के आवास में कितने कमरे हैं और किस प्रकार का टैक्स भरते हैं।

    अब आवेदकों को पहले से अधिक दस्तावेज और जरूरी औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। सबसे अहम बदलाव यह है कि नए राशन कार्ड के लिए आवेदन करते समय घर की तस्वीर अपलोड करना अनिवार्य होगा। इसमें स्पष्ट रूप से भवन में बने कमरों की जानकारी देनी होगी।

    अब पहले ही ई-केवाईसी करवाना होगा
    नए राशन कार्ड के लिए आवेदन करने से पहले संबंधित डीलर के यहां ई-केवाईसी करवाना अनिवार्य कर दिया गया है। ई-केवाईसी सत्यापन पूरा होने के बाद ही आवेदन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इसी तरह प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी स्तर पर लंबित यूआइडी सुधार और परिवर्तन से जुड़े अनुरोधों पर भी ई-केवाईसी पूरा होने के बाद ही आगे प्रक्रिया होगी।

    अधिक जीएसटी भरने वालों और आयकर दाताओं का नाम नहीं जुड़ेगा
    नई व्यवस्था में अब आवेदक को स्वघोषणा करनी होगी कि परिवार का कोई सदस्य आयकर, सेवा कर, व्यावसायिक कर या जीएसटी नहीं देता है। अधिक जीएसटी भरने वालों और आयकर देने वालों के नाम राशन कार्ड में नहीं चढ़ाया जा सकेगा।इसके अलावा परिवार के पास पांच एकड़ से अधिक सिंचित या दस एकड़ से अधिक असिंचित भूमि नहीं होनी चाहिए।

    इसी तरह परिवार के पास चार पहिया वाहन, तीन या उससे अधिक कमरों वाला पक्का मकान और 5 लाख रुपये या इससे अधिक कीमत का मशीनचालित कृषि उपकरण नहीं होना चाहिए।

    बता दें कि, विभाग ने हाल ही में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत शामिल आठ श्रेणियों के अपात्र लाभुकों के राशन कार्ड रद किए हैं। जांच के दौरान सामने आया कि कुछ लाभुक सालाना 25 लाख रुपये तक का जीएसटी रिटर्न दाखिल करने के बावजूद राशन योजना का लाभ ले रहे थे।

    इसके अलावा अधिक भूमि रखने वाले, दोपहिया वाहन वाले और छह लाख रुपये तक आयकर का भुगतान करने वाले लाभुकों के राशन कार्ड भी रद किए गए हैं।

    जिलावार सीमा और प्रतीक्षा सूची से जुड़ेगा नाम
    झारखंड राज्य खाद्य सुरक्षा योजना (JSFSS) के तहत नए राशन कार्ड और नए सदस्य का नाम जोड़ने के आवेदनों पर कार्रवाई अब जिला व निर्धारित सीमा और प्रतीक्षा सूची में आवेदक की स्थिति के आधार पर होगी।

    सदस्य का नाम जोड़ने के लिए अलग-अलग दस्तावेज पुराने राशन कार्ड में किसी सदस्य का नाम जोड़ने के लिए अब उसके आधार के अनुसार संबंधित दस्तावेज देने होगा।

    • जन्म प्रमाण पत्र अपलोड करना होगा।
    • विवाह के बाद नाम जोड़ना है- पिछले राशन कार्ड से सदस्य का नाम हटाए जाने की स्वीकृति का दस्तावेज देना होगा।
    • दत्तक सदस्य का नाम जोड़ना है- दत्तक ग्रहण प्रमाण पत्र जरूरी होगा।
    • स्थानांतरित या परिवार से अलग सदस्य- पिछले राशन कार्ड से नाम हटाए जाने का प्रमाण पत्र देना होगा

    राशन कार्ड रद या सरेंडर करने के लिए भी सत्यापन
    राशन कार्ड को रद या सरेंडर करने की प्रक्रिया अब परिवार की मुखिया की सहमति से ही पूरी होगी। इसके लिए यूआईडी आधारित ओटीपी सत्यापन भी जरूरी किया गया है। जांच में ऐसे लाभुक भी सामने आए थे जो बेहतर आर्थिक स्थिति के बावजूद योजना का लाभ ले रहे थे। इसके बाद राशन कार्ड की पात्रता और सत्यापन प्रक्रिया को लेकर इन नए प्रावधानों को लागू किया गया है।

     

  • राहुल गांधी संभालेंगे पंजाब कांग्रेस की कमान! कलह खत्म कराने 135 किमी की यात्रा, चन्नी-वड़िंग संग दिखेंगे

    राहुल गांधी संभालेंगे पंजाब कांग्रेस की कमान! कलह खत्म कराने 135 किमी की यात्रा, चन्नी-वड़िंग संग दिखेंगे

    चंडीगढ़ 

    पंजाब में कांग्रेस विधानसभा चुनाव से पहले एक यात्रा निकालने वाली है. पंजाब के प्रभारी महासचिव भूपेश बघेल ने इस बारे में राहुल और प्रियंका गांधी से मुलाकात की है. राहुल ने बघेल को इस यात्रा का पूरा रोडमैप तैयार करके आने के लिए कहा है. कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक सितंबर के पहले हफ्ते में यह यात्रा शुरू होगी. राहुल गांधी पहले अमृतसर के हरमंदिर साहिब में मत्था टेकेंगे और फिर यात्रा की शुरुआत की जाएगी. यह यात्रा बस से की जाएगी और 135 किलोमीटर की होगी. यह 135 किलोमीटर की यात्रा पंजाब के तीनों खित्तों यानी माझा, दोआब और मालवा से होकर गुजरेगी। 

    पार्टी को एकजुट करना है यात्रा का मकसद
    राहुल गांधी की इस बस यात्रा का मकसद पंजाब में बुरी तरह बंटी हुई कांग्रेस को एकजुट करना है. कांग्रेस की पंजाब में सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वाडिंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी एक दूसरे को पसंद नहीं करते हैं और एक दूसरे को देखना तक नहीं चाहते हैं. कांग्रेस आलाकमान ने अभी तक यह साफ कर दिया है कि प्रदेश अध्यक्ष नहीं बदला जाएगा और किसी भी नेता को मुख्यमंत्री का चेहरा के तौर पर पेश नहीं किया जाएगा. लेकिन पंजाब में कांग्रेस नेताओं की गुटबाजी खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही है. कांग्रेस की दिक्कत ये है कि चरणजीत सिंह चन्नी और सुखजिंदर सिंह रंधावा ने मिलकर एक गुट बना लिया है और प्रदेश अध्यक्ष राजा वाडिंग के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। 

    कांग्रेस के संगठन महासचिव के सी वेणुगोपाल ने कई बार इन नेताओं को अकेले में और एक साथ बैठा करके भी मुलाकात कर चुके हैं. लेकिन नतीजा कुछ निकला नहीं. यहां तक जब पंजाब के प्रभारी भूपेश बघेल 'हर बूथ कांग्रेस मजबूत' जैसा कार्यक्रम पूरे पंजाब में कर रहे थे तो वहां पोस्टर में बघेल की तुलना जनरल डायर से की गई, तो राजा वाडिंग के सर्मथकों ने चन्नी को बीजेपी-आरएसएस का एजेंट बताया. पंजाब में कांग्रेस ने एक परिवार एक टिकट का भी नियम बनाया है उसको लेकर भी नेताओं में नाराजगी बताई जा रही है।

    कांग्रेस के सामने बड़ी चुनाैती
    राहुल की यात्रा से पहले चन्नी और वड़िंग दोनों खेमों को साथ लाना कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। पार्टी स्तर पर इसे पंजाब बचाओ यात्रा नाम देने और अमृतसर से शुरू करने की तैयारी चल रही है। राहुल गांधी पंजाब दौरे के दौरान बस यात्रा के लिए सहमत हो गए हैं। पंजाब कांग्रेस जल्द ही इस संदर्भ में शेड्यूल जारी करेगी। 

    पार्टी सूत्रों के अनुसार, यात्रा के दौरान राहुल गांधी श्री हरिमंदिर साहिब में माथा टेकेंगे। इसके बाद वे करीब 135 किलोमीटर का सफर करेंगे। इसमें माझा, दोआबा और मालवा के कार्यकर्ताओं व स्थानीय नेताओं से संवाद किया जाएगा। इस यात्रा का मकसद चुनावी अभियान को गति देना और संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करना है। साथ ही कांग्रेस की एकजुट तस्वीर पेश करना भी इसका लक्ष्य है।

    एक बस में दिखेंगे बड़े नेता?
    यात्रा की सबसे बड़ी राजनीतिक अहमियत यह होगी कि इसमें प्रदेशाध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और प्रताप सिंह बाजवा समेत अन्य वरिष्ठ नेताओं को एक मंच पर लाने की कोशिश होगी। यह तस्वीर पार्टी के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि फिलहाल वड़िंग और चन्नी खेमों के बीच खींचतान खुलकर सामने आ चुकी है। 

    राहुल की बस यात्रा के तीन मकसद

        पहला पंजाब के नेताओं की एकजुट तस्वीर पेश करना. कहा जा रहा है कि राहुल गांधी के साथ बस में चरणजीत सिंह चन्नी और प्रदेश अध्यक्ष वाडिंग तो होंगे ही साथ में पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा और सुखजिंदर सिंह रंधावा भी रहेंगे. यानी राहुल गांधी एक बाजू में चन्नी और दूसरे बाजू में राजा वाडिंग को लेकर 'ऑल इज़ वेल' का संदेश देंगे। 

        दूसरा इस यात्रा का मकसद संगठन को सक्रिय करना है जिससे कि कार्यकर्ताओं में संदेश जाए कि उपर के लेवल पर सब ठीक हो गया है। 

        इस यात्रा का तीसरा मकसद है पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के प्रचार की विधिवत शुरुआत करना। 

    कांग्रेस के सूत्र यह भी बता रहे हैं कि राहुल गांधी की यह यात्रा जो अमृतसर से हुसैनीवाला तक जाएगी पहली यात्रा होगी और अगली यात्रा इस यात्रा की सफलता पर निर्भर होगी. इसके अलावा कांग्रेस आलाकमान पंजाब के नेताओं को टिकट बांटने में भी अहम भूमिका देने पर विचार कर रही है। 

    राहुल गांधी शुरू करेंगे बस यात्रा
    प्रदेश कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि पहले चरण में बस यात्रा हुसैनीवाला तक करीब 135 किमी का सफर तय करेगी। इस यात्रा में राहुल गांधी प्रदेश कांग्रेस नेताओं के साथ करीब 30 विधानसभा क्षेत्रों के मतदाताओं से उनकी समस्याओं पर चर्चा करेंगे। बस यात्रा के दौरान कांग्रेस उन विधानसभा क्षेत्रों पर खास ध्यान देगी, जहां वर्ष 2022 के चुनाव में बहुत कम अंतर के साथ हार का सामना करना पड़ा था।

    मालवा क्षेत्र की 69 सीटों पर पार्टी का खास ध्यान
    पंजाब विधानसभा चुनाव में मालवा का अपना महत्व है। प्रदेश की 117 में से 69 सीटें इसी क्षेत्र से आती है। माना जाता है कि जो पार्टी इस क्षेत्र में अपना परचम लहराती है, प्रदेश में वही सरकार बनाती है। वर्ष 2022 में आम आदमी पार्टी ने यहां 67 में से 64 सीट पर जीत हासिल की थी। कांग्रेस को दो और अकाली दल को एक सीट मिली थी। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस यहां अपना प्रदर्शन सुधारते हुए खोई हुई जमीन वापस हासिल करने में काफी हद तक सफल रही। पार्टी ने मालवा की आठ लोकसभा में चार सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा। तब पार्टी ने 19 विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त हासिल की थी।

    सर्वदलीय बैठक में उठाया जाए परिसीमन मुद्दा: खरगे
    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर आग्रह किया कि परिसीमन के मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए। साथ ही कहा कि किसी भी प्रस्ताव को संसद में पेश करने से पहले सभी राजनीतिक दलों तथा राज्य सरकारों को उस पर विस्तार से अध्ययन करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाए। कांग्रेस अध्यक्ष ने इस बात का उल्लेख किया कि उन्होंने इससे पहले 16 जुलाई 2026 को भी प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सरकार के परिसीमन संबंधी प्रस्तावों पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने का अनुरोध किया था।

    खरगे ने परिसीमन को लेकर तीन मांगें रखते हुए कहा कि लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या अगले 25 वर्षों तक बरकरार रखी जाए, लोकसभा में राज्यों के लिए मौजूदा सीटों का आवंटन अगले 25 वर्षों तक कायम रखा जाए।

    क्या खत्म होगी कांग्रेस में गुटबाजी?
    लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि राहुल गांधी की बस यात्रा से क्या पंजाब कांग्रेस का संकट या गुटबाजी खत्म हो जाएगी. कांग्रेस के सूत्र बताते हैं कि अगर पंजाब में राहुल की यात्रा खत्म होने तक इन नेताओं ने अपना झगड़ा खत्म नहीं किया तो फिर कांग्रेस नेतृत्व कुछ कठोर फैसले पर मजबूर होगा. भले ही इससे पार्टी को नुकसान हो. वैसे भी कांग्रेस 2017 में 77 सीटें लेकर सत्ता में आई थी जो 2022 में घट कर 18 सीट रह गई है, तब चन्नी के नेतृत्व में ही चुनाव लड़ा गया था. वही मुख्यमंत्री थे. लेकिन लोकसभा चुनाव में लोगों ने कांग्रेस पर भरोसा जताया और 13 में से 7 सांसद कांग्रेस से जीते.अभी चरणजीत सिंह चन्नी,राजा वाडिंग और सुखजिंदर सिंह रंधावा तीनों सांसद हैं. मगर विधानसभा चुनाव से पहले इन तीनों नेताओं को एकजुट करना कांग्रेस नेतृत्व के लिए अभी तक चुनौती बना हुआ है। 

     

  • पंजाब BJP में बड़े बदलाव की तैयारी? 31 अगस्त से सतीश पूनिया का दौरा, संगठन पर रहेगा फोकस

    पंजाब BJP में बड़े बदलाव की तैयारी? 31 अगस्त से सतीश पूनिया का दौरा, संगठन पर रहेगा फोकस

    चंडीगढ़
     भाजपा पंजाब के प्रदेश प्रभारी, राज्यसभा सदस्य एवं राष्ट्रीय महासचिव डाॅ. सतीश पूनिया आज 31 अगस्त से 2 सितंबर तक तीन दिवसीय पंजाब के संगठनात्मक दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वह प्रदेश नेतृत्व के साथ बैठकें कर पार्टी के संगठनात्मक ढांचे की समीक्षा करेंगे और आगामी गतिविधियों को लेकर दिशा-निर्देश देंगे।

    उनका दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब भाजपा पंजाब में बूथ स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक संगठन को मजबूत करने की कवायद में जुटी है। भाजपा पंजाब के प्रदेश महासचिव अनिल सरीन ने बताया कि डा पूनिया के दौरे की शुरुआत 31 अगस्त को चंडीगढ़ से होगी।

    वह सेक्टर 37-ए स्थित भाजपा पंजाब कार्यालय में प्रेस कान्फ्रेंस को संबोधित करेंगे। इसके बाद प्रदेश सोशल मीडिया, आईटी और मीडिया टीम के साथ अलग-अलग बैठकें करेंगे। दिन के अंत में प्रदेश कोर कमेटी के साथ महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठक होगी।

    जालंधर में पदाधिकारियों के साथ करेंगे मंथन
    एक सितंबर को डाॅ. पूनिया जालंधर पहुंचेंगे। यहां पीएम सेवा संकल्प अभियान को लेकर आयोजित कार्यशाला में हिस्सा लेंगे। इसके बाद प्रदेश पदाधिकारियों, जिला प्रभारियों और सह-प्रभारियों तथा प्रदेश महासचिवों के साथ बैठक करेंगे। इन बैठकों में पार्टी की मौजूदा संगठनात्मक गतिविधियों की समीक्षा के साथ आगे की रणनीति पर चर्चा की जाएगी।

    अमृतसर में हरमंदिर साहिब में करेंगे दर्शन
    दो सितंबर को डाॅ. पूनिया जालंधर में अनौपचारिक बैठकों में हिस्सा लेने के बाद अमृतसर रवाना होंगे। वहां भाजपा कार्यालय का दौरा करने के बाद दुर्गियाना मंदिर और श्री हरमंदिर साहिब में दर्शन करेंगे। अनिल सरीन ने कहा कि डा पूनिया का पंजाब दौरा प्रदेश नेतृत्व और संगठनात्मक टीमों के लिए महत्वपूर्ण है।

    उनके मार्गदर्शन से पार्टी संगठन को हर स्तर पर मजबूत करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि पंजाब भाजपा मजबूत, अनुशासित और सक्रिय संगठन तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है, जो प्रदेश के जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाने के साथ जनता की सेवा के लिए लगातार काम करेगा।

  • श्रमिकों को सस्ता भोजन और बेहतर सुविधाएं, योगी सरकार लेबर अड्डों को बनाएगी मॉडल

    श्रमिकों को सस्ता भोजन और बेहतर सुविधाएं, योगी सरकार लेबर अड्डों को बनाएगी मॉडल

    लखनऊ
     तमिलनाडु राज्य की अम्मा कैंटीन की तर्ज पर अब प्रदेश में श्रमिकों को सरकार सस्ते दर पर भोजन की थाली मुहैया कराएगी। योगी आदित्यनाथ सरकार के इस कदम से अब गांव से आकर शहरों में मजदूरी करने वाले कहीं पर भूखे नहीं रहेंगे। लेबर अड्डों पर श्रमिकों के लिए कैंटीन खोली जाएंगी, जहां उन्हें सस्ते दर पर नाश्ता और भोजन मिलेगा। भोजन की थाली की कीमत पांच से दस रुपये होगी। प्रदेश में पंजीकृत 1.95 करोड़ श्रमिक इससे लाभान्वित होंगे।

    विधान सभा चुनाव से पहले कैंटीन सेवा का लाभ उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड में पंजीकृत 1.95 करोड़ श्रमिकों को देने के लिए सरकार सितंबर में सात नगर निगमों के 13 लेबर अड्डों पर श्रमिक सुविधा केंद्र निर्माण का शिलान्यास करने जा रही है। सुविधा केंद्रों पर श्रमिकों को अन्य सुविधाएं भी मिलेंगी।

    चुनाव के मद्देनजर सरकार विभिन्न योजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास करने के साथ ही हर वर्ग को साधने में जुटी है। हाल ही में युवाओं व महिलाओं से संबंधित कई अहम निर्णय करने के बाद सरकार अब निर्माण श्रमिकों को तोहफा देने की तैयारी में है।

    लेबर अड्डों पर बनाए जाने वाले श्रमिक सुविधा केंद्र में श्रमिकों के लिए बैठने, स्वच्छ पानी, शौचालय की सुविधा के साथ ही कैंटीन की सुविधा भी रहेगी। इसके साथ ही सुविधा केंद्र में श्रमिकों को कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने के काउंटर तथा कौशल प्रशिक्षण की व्यवस्था भी होगी।

    सरकार के निर्देश पर श्रम विभाग ने सभी शहरों में उन लेबर अड्डों का चयन कर लिया हैं, जहां सुविधा केंद्र बनाए जाने हैं। लेबर अड्डों पर श्रमिक सुविधा केंद्र के निर्माण के लिए जिलाधिकारियों से जमीन मुहैया कराने को कहा गया है।

    न्यूनतम दर पर श्रमिकों को भोजन की थाली
    श्रम मंत्री अनिल राजभर के मुताबिक गाजियाबाद, झांसी, मुरादाबाद, लखनऊ, मेरठ, गोरखपुर और वाराणसी नगर निगम क्षेत्र के 13 लेबर अड्डों पर श्रमिक सुविधा केंद्र के लिए जगह मिल गई है। इन अड्डों पर सुविधा केंद्र बनाने के लिए अगले महीने शिलान्यास कार्यक्रम होगा। गाजियाबाद में तीन, झांसी में दो, मुरादाबाद में दो, लखनऊ में एक, मेरठ में तीन, गोरखपुर में दो तथा वाराणसी में एक लेबर अड्डे के पास जमीन मिल गई है।

    तीन मंजिला तक सुविधा केंद्र
    उन्होंने बताया कि इसी वर्ष कैंटीन शुरू कर देने की कोशिश है। भोजन थाली पांच से दस रुपये की होगी। तीन मंजिला तक सुविधा केंद्र बनाए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि तमिलनाडु की तत्कालीन मुख्यमंत्री जे. जयललिता ने अम्मा कैंटीन शुरू की थी। इनमें श्रमिकों, गरीबों, छात्रों आदि को तीन से पांच रुपये में सांभर-चावल, दही आदि दिया जाता है। गुजरात, महाराष्ट्र सहित कई और राज्यों में भी ऐसी कैंटीन संचालित हैं।

     

  • महिलाओं की मेहनत से बदली गांवों की तस्वीर, 31 जिलों में रोज 12.5 लाख लीटर दूध का कारोबा

    महिलाओं की मेहनत से बदली गांवों की तस्वीर, 31 जिलों में रोज 12.5 लाख लीटर दूध का कारोबा

     लखनऊ
    उत्तर प्रदेश के गांवों में महिलाओं की आर्थिक ताकत अब श्वेत क्रांति की नई कहानी लिख रही है। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी महिला समूहों की पांच कंपनियों ने वर्ष 2019 से अब तक करीब 5,716.26 करोड़ रुपये का कारोबार किया है। इन कंपनियों से 3.88 लाख से अधिक महिलाएं जुड़ चुकी हैं। दुग्ध उत्पादन और उसके संग्रहण से लेकर प्रसंस्करण और विपणन तक महिलाओं की बढ़ती भागीदारी ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नया आधार दिया है। महिला दुग्ध उत्पादक कंपनियां इस समय प्रतिदिन करीब 12.5 लाख लीटर दूध का संग्रहण कर रही हैं। इन महिला कारोबारियों का नेटवर्क 31 जनपदों के 6,603 गांवों तक पहुंच चुका है, जिसे और विस्तार देने की योजना है।

    दूध के कारोबार से आत्मनिर्भरता की नई राह
    महिलाओं को केवल स्वयं सहायता समूहों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें कारोबार और कंपनी संचालन से जोड़ने का असर अब गांवों में साफ दिखाई दे रहा है। ग्रामीण परिवारों की महिलाएं दुग्ध उत्पादन को नियमित आय के साधन के रूप में अपना रही हैं। दूध के संग्रहण और बिक्री की व्यवस्थित व्यवस्था ने उन्हें स्थानीय स्तर पर बाजार उपलब्ध कराया है। इससे पशुपालन को भी आर्थिक गतिविधि के रूप में मजबूती मिल रही है।

    उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के निदेशक अरुण कुमार ने बताया कि दुग्ध उत्पादक महिलाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नई ताकत बनकर उभर रही हैं। महिला समूहों के माध्यम से तैयार कंपनियां महिलाओं को उत्पादन से लेकर कारोबार तक की पूरी श्रृंखला से जोड़ रही हैं। इसका सकारात्मक असर उनकी आय और गांवों की आर्थिक गतिविधियों पर पड़ रहा है।

    12.5 लाख लीटर दूध प्रतिदिन संग्रहण
    प्रदेश में महिला दुग्ध उत्पादक कंपनियों की बढ़ती सक्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इनके माध्यम से प्रतिदिन करीब 12.5 लाख लीटर दूध संग्रहीत किया जा रहा है। बड़ी संख्या में महिलाएं पशुपालन और दुग्ध उत्पादन से जुड़कर नियमित रूप से दूध उपलब्ध करा रही हैं। संगठित संग्रहण व्यवस्था के कारण दूध को बाजार तक पहुंचाने में भी आसानी हो रही है।

    इस पूरी प्रक्रिया में महिला समूहों की भूमिका केवल दूध उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। समूहों से जुड़ी महिलाएं सामूहिक रूप से आर्थिक गतिविधियों का संचालन सीख रही हैं और कारोबार की समझ विकसित कर रही हैं। इससे ग्रामीण महिलाओं के बीच उद्यमिता की भावना को भी बढ़ावा मिल रहा है। यह सफल कारोबार अब तक 31 जनपदों के साढ़े छह हजार से भी अधिक गांवों तक पहुंच चुका है, जिसे और विस्तार देने की योजना पर काम किया जा रहा है।

    योगी सरकार आने के बाद से कारोबार में लगातार विस्तार
    महिला समूहों की पांच कंपनियों ने वर्ष 2019 से अब तक 5,716.26 करोड़ रुपये का कारोबार किया है। यह आंकड़ा बताता है कि ग्रामीण महिलाओं को संगठित कारोबारी मॉडल से जोड़ने की पहल अब बड़े आर्थिक प्रभाव में बदल रही है। योगी सरकार आने के बाद से इन कंपनियों से जुड़ी 3.88 लाख से अधिक महिलाओं की भागीदारी ने इस मॉडल को व्यापक आधार दिया है।

    महिला समूहों के इस कारोबारी मॉडल से गांवों में रोजगार और आय के नए अवसर तैयार हो रहे हैं। पशुपालन, दूध संग्रहण और उससे जुड़ी गतिविधियों में आर्थिक भागीदारी बढ़ने से ग्रामीण परिवारों की स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिल रही है।

    घर-घर रोजगार से बदल रहा गांवों का आर्थिक चेहरा
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने पर जोर दिया जा रहा है। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के जरिए स्वयं सहायता समूहों को आजीविका गतिविधियों से जोड़ने के साथ उन्हें कारोबार की दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है। इसका उद्देश्य गांव की महिलाओं को रोजगार के लिए बाहर जाने के बजाय स्थानीय स्तर पर ही आय के अवसर उपलब्ध कराना है।

    दुग्ध उत्पादन इस दिशा में महत्वपूर्ण माध्यम बनकर सामने आया है। पशुपालन पहले जहां मुख्य रूप से घरेलू जरूरतों से जुड़ी गतिविधि माना जाता था, वहीं अब संगठित रूप से इसे आय और कारोबार का आधार बनाया जा रहा है। महिला समूहों की कंपनियां इसी बदलाव की तस्वीर पेश कर रही हैं।

    वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी के लक्ष्य से जुड़ रहीं ग्रामीण महिलाएं
    प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महिला समूहों की भूमिका को व्यापक आर्थिक लक्ष्य से भी जोड़ा जा रहा है। महिलाओं को उद्यम, उत्पादन और बाजार से जोड़ने से गांवों में आर्थिक गतिविधियों का दायरा बढ़ रहा है। इससे ग्रामीण परिवारों की क्रय शक्ति बढ़ने के साथ स्थानीय स्तर पर कारोबार को भी प्रोत्साहन मिल रहा है।

    महिला समूहों की पांच कंपनियों का हजारों करोड़ रुपये का कारोबार और लाखों महिलाओं की भागीदारी इस बात का संकेत है कि स्वयं सहायता समूह अब केवल बचत और छोटे ऋण तक सीमित नहीं हैं। वे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में कारोबारी इकाइयों के रूप में अपनी पहचान बना रहे हैं।

    'महिलाओं की दुग्ध शक्ति से गांवों में समृद्धि'
    दूध संग्रहण की इतनी बड़ी व्यवस्था महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को नए स्तर पर ले जा रही है। इससे एक ओर पशुपालन को प्रोत्साहन मिल रहा है तो दूसरी ओर महिलाओं को अपनी मेहनत का आर्थिक मूल्य हासिल करने का अवसर मिल रहा है। नियमित आय के साथ महिलाएं परिवार की आर्थिक जरूरतों में अधिक प्रभावी भूमिका निभा पा रही हैं।

    ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत गठित पांच मिल्क प्रोड्यूसर कंपनियां
    बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, काशी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, सामर्थ्य मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, श्री बाबा गोरखनाथ कृपा मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड तथा सृजनी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड।

    इन जिलों तक फैला कारोबार
    बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, जालौन, झांसी, ललितपुर, महोबा, बलिया, चंदौली, गाजीपुर, मिर्जापुर, संत रविदास नगर, सोनभद्र, वाराणसी, प्रतापगढ़, रायबरेली, सुल्तानपुर, अयोध्या, फतेहपुर, अमेठी, कानपुर नगर, देवरिया, गोरखपुर, कुशीनगर, महराजगंज, बरेली, लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, शाहजहांपुर, सीतापुर, रामपुर।

  • पेयजल को और सुरक्षित बनाने की तैयारी, योगी सरकार गहन जांच में शामिल करेगी माइक्रोप्लास्टिक और PFAS

    पेयजल को और सुरक्षित बनाने की तैयारी, योगी सरकार गहन जांच में शामिल करेगी माइक्रोप्लास्टिक और PFAS

    योगी सरकार करेगी पेयजल की गुणवत्ता का परीक्षण ज्यादा गहनता से, माइक्रोप्लास्टिक और पीएफएएस की भी होगी जांच 

    विश्वस्तरीय परीक्षण सुविधाओं से लैस नई स्टेट लैबोरेटरी भवन का कराया जा रहा तेजी से निर्माण 

    माइक्रोप्लास्टिक एवं पीएफएएस जैसे उभरते प्रदूषक के परीक्षण के लिए आवश्यक उन्नत उपकरणों का प्रस्ताव वार्षिक कार्ययोजना में शामिल 

    पेयजल एवं स्वच्छता विभाग भारत सरकार के सचिव ने मौजूदा स्टेट लैब का किया था निरीक्षण 

    प्रदेश में 1 स्टेट, 3 क्षेत्रीय, 72 जिला एवं 62 वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट प्रयोगशालाओं का नेटवर्क 

     राज्य स्तरीय प्रयोगशालाओं में उन्नत स्तर की परीक्षण सुविधाएं उपलब्ध, इसके 50 मानक एनएबीएल प्रमाणित 

     लखनऊ
     प्रदेश में ग्रामीण पेयजल की गुणवत्ता जांच व्यवस्था को और अधिक उन्नत एवं भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने की दिशा में उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है। जल निगम (ग्रामीण) द्वारा विश्वस्तरीय परीक्षण सुविधाओं से लैस नई स्टेट लैबोरेटरी भवन का निर्माण कराया जा रहा है, जिसका कार्य तेजी से पूर्ण कराने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। नई स्टेट लैब में अत्याधुनिक विश्लेषणात्मक सुविधाओं के साथ पेयजल में उभरते प्रदूषक (इमर्जिंग कंटेमिनेंट्स) जैसे माइक्रोप्लास्टिक या पीएफएएस की जांच क्षमता विकसित करने की योजना है।

    केंद्रीय पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव ने मौजूदा स्टेट लैब का किया था निरीक्षण
    हाल ही में उत्तर प्रदेश के दौरे पर आए भारत सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव ने उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) की मौजूदा स्टेट लैबोरेटरी का निरीक्षण किया था। इस दौरान जल गुणवत्ता परीक्षण सुविधाओं, उन्नत उपकरणों तथा भविष्य में विकसित की जाने वाली परीक्षण क्षमताओं पर चर्चा हुई। इस दौरान उन्होंने माइक्रोप्लास्टिक तथा पीएफएएस जैसे उभरते प्रदूषकों की जांच की सुविधा भी स्टेट लैब स्तर पर विकसित किए जाने पर जोर दिया। 

    प्रदेश में व्यापक जल गुणवत्ता प्रयोगशाला नेटवर्क
    उत्तर प्रदेश में ग्रामीण पेयजल गुणवत्ता की निगरानी एवं परीक्षण के लिए बहुस्तरीय प्रयोगशाला नेटवर्क कार्यरत है। इसमें 1 राज्य स्तरीय,  3 क्षेत्रीय, 72 जिला स्तरीय तथा 62 जल शोधक संयंत्र प्रयोगशालाएं हैं। राज्य स्तरीय प्रयोगशालाओं में उन्नत स्तर की परीक्षण सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसके 50 मानक एनएबीएल प्रमाणित हैं। इस नेटवर्क के माध्यम से जल जीवन मिशन के अंतर्गत पेयजल गुणवत्ता की नियमित निगरानी एवं आवश्यकतानुसार विस्तृत प्रयोगशाला परीक्षण किया जाता है।

    माइक्रोप्लास्टिक और पीएफएएस दो अलग श्रेणियों के प्रदूषक
    माइक्रोप्लास्टिक और पीएफएएस को एक ही पदार्थ मानना तकनीकी रूप से सही नहीं है। माइक्रोप्लास्टिक सामान्यतः 5 मिमी से छोटे प्लास्टिक कणों को कहा जाता है, जबकि पीएफएएस फ्लोरीन युक्त कृत्रिम रसायनों का व्यापक समूह है, जिन्हें पर्यावरण में अत्यधिक स्थायित्व के कारण इसे फॉरएवर कैमिकल कहा जाता है। दोनों की नमूना परीक्षण तथा तकनीकी जांचें अलग-अलग होती हैं।

    कैसे होगी माइक्रोप्लास्टिक की जांच
    माइक्रोप्लास्टिक परीक्षण में प्रदूषक मुक्त सैंपलिंग अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। नमूने को इस प्रकार एकत्र एवं संभाला जाता है कि इसे इकट्ठा करने का फ्लास्क या बर्तन, वातावरण, कपड़ों अथवा प्रयोगशाला सामग्री से बाहरी प्लास्टिक कण नमूने में न मिलें। इसके बाद जल शोधन एवं आवश्यक नूमने परीक्षण के माध्यम से कणों को अलग किया जाता है। माइक्रोस्कोपित परीक्षण से सैंपल या नमूनों में संदिग्ध कणों की संख्या, आकार, आकृति और रंग जैसी विशेषताओं का आकलन किया जा सकता है, जबकि पॉलीमर की पुष्ट पहचान के लिए एफटीआरआर या रमन माइक्रोस्कोपी जैसी स्पेकट्रोस्कोपिक तकनीक का उपयोग किया जाता है।

    बीआईएस मानकों एवं जल जीवन मिशन के प्रोटोकॉल के अनुरूप पेयजल गुणवत्ता निगरानी
    जल जीवन मिशन के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल गुणवत्ता की निगरानी निर्धारित राष्ट्रीय प्रोटोकॉल तथा लागू भारतीय मानकों के अनुरूप की जाती है। प्रयोगशालाओं के साथ-साथ ग्राम स्तर पर प्रशिक्षित महिलाओं/जल गुणवत्ता निगरानी समूहों द्वारा फील्ड टेस्टिंग किट से प्रारंभिक निगरानी की व्यवस्था भी इस प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आवश्यकता एवं निर्धारित परीक्षण कार्यक्रम के अनुसार नमूनों को प्रयोगशालाओं में भेजकर विस्तृत जांच की जाती है।

    भविष्य की जल गुणवत्ता चुनौतियों के लिए तैयार होगी नई स्टेट लैब
    नई स्टेट लैबोरेटरी को आधुनिक एवं विश्वस्तरीय परीक्षण सुविधाओं से लैस करने का उद्देश्य प्रदेश में मजबूत राज्य रेफरल, आधुनिक रेफरल प्रयोगशाला की क्षमता विकसित करना है। माइक्रोप्लास्टिक एवं पीएफएएस जैसे प्रदूषक की परीक्षण सुविधा विकसित होने से भविष्य में बेसलाइन डाटा तैयार करने, संभावित प्रदूषण स्रोतों की पहचान, वैज्ञानिक निगरानी तथा राष्ट्रीय स्तर पर विकसित होने वाले मानकों एवं दिशानिर्देशों के अनुरूप परीक्षण व्यवस्था स्थापित करने में मदद मिलेगी।

    तेज गति से पूरा कराया जाएगा कार्यः प्रबंध निदेशक
    उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) के प्रबंध निदेशक योगेश कुमार ने बताया कि नई स्टेट लैबोरेटरी भवन का निर्माण कार्य तेजी से कराया जा रहा है और इसे विश्वस्तरीय परीक्षण सुविधाओं से सुसज्जित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। स्टेट लैब की उन्नत परीक्षण क्षमता से जल निगम के साथ-साथ आवश्यकता के अनुसार अन्य सरकारी विभागों एवं संस्थाओं को भी उच्च स्तरीय जल परीक्षण में सहयोग मिल सकेगा। माइक्रोप्लास्टिक एवं पीएफएएस जैसे उभरते प्रदूषकों की जांच को विकसित करना, भविष्य की जल गुणवत्ता चुनौतियों के दृष्टिगत महत्वपूर्ण पहल है।

  • दिल्ली-पटना-दरभंगा का सफर होगा आसान, नए एक्सप्रेसवे से चार राज्यों की कनेक्टिविटी को मिलेगा बूस्ट

    दिल्ली-पटना-दरभंगा का सफर होगा आसान, नए एक्सप्रेसवे से चार राज्यों की कनेक्टिविटी को मिलेगा बूस्ट

    पटना

    बिहार में 170 किमी के गया-दरभंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण की रफ्तार तेज हो गई है. इसे आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे (NH-119D) भी कहते हैं. इसकी लंबाई लिंक रूट को मिलाकर 230 किमी तक बढ़ जाती है. 4 लेन के एक्सप्रेसवे को NHAI भारतमाला परियोजना के फेज-1 के तहत बनाया  रहा है, जिसे छह लेन किया जा सकता है. एक्सप्रेसवे दक्षिण में औरंगाबाद, गया जिले से गुजरते हुए उत्तर में दरभंगा तक जाता है. औरंगाबाद और गया जिले के बॉर्डर के पास आमस से इसकी शुरुआत होगी, जो दिल्ली-कोलकाता NH-19 से कनेक्ट होगा. इसका आखिरी प्वाइंट दरभंगा का बेला नवादा है, जो NH-27 ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर को जोड़ता है।

    आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे का रूट
    आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे (NH-119D) 198 किमी लंबा है और 5 हजार करोड़ रुपये की लागत से बनाया जा रहा है. यह गया जिले के आमस से दरभंगा तक जाएगा. यहां से लिंक रोड के जरिये ये बोधगया और राजगीर से जुड़ जाएगा. ये बिहार का पहला ग्रीनफील्ड एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे है. यह एक्सप्रेसवे उत्तर और दक्षिण बिहार को आपस में जोड़ता है. ये ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक केंद्रों को जोड़ेगा।

    गया-दरभंगा एक्सप्रेसवे का रूट

    1. औरंगाबाद
    2. गया
    3. जहानाबाद
    4. पटना
    5. वैशाली
    6. समस्तीपुर
    7. दरभंगा
    आगे बोधगया और राजगीर से लिंक

    दरभंगा से गया 3-4 घंटे में 
    अभी गया, आमस से दरभंगा की दूरी तय करने में 6 से 7 घंटे लगते हैं और एक्सप्रेसवे से ये 3-4 घंटे रह जाएगा. बोधगया, राजगीर, पटना और वैशाली जैसे बुद्ध और जैन सर्किट स्थल कनेक्ट होगी. देश-विदेश के पर्यटकों को आवाजाही में आसानी होगी.उत्तरी बिहार के खाद्य उत्पादों जैसे मखाना, लीची को दक्षिण बिहार और दिल्ली-कोलकाता कॉरिडोर से बंदरगाह तक पहुंचने में आसानी होगी. साथ ही यूपी, झारखंड और पश्चिम बंगाल से आने वाले पर्यटकों की आवाजाही आसान होगी. आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे चालू होने और इसके वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जुड़ जाने के बाद बिहार से दिल्ली, कोलकाता और अन्य शहरों की यात्रा कम समय में हो पाएगी।

        दरभंगा से दिल्ली – 18 से 22 घंटे- 10 से 12 घंटे- आमस-दरभंगा से पूर्वांचल और यमुना एक्सप्रेसवे
        पटना से दिल्ली- 16 से 18 घंटे- 9 से 10 घंटे – पटना-बक्सर, पूर्वांचल, यमुना एक्सप्रेसवे
        दरभंगा से कोलकाता-  14 से 16 घंटे- 7 से 8 घंटे- आमस-दरभंगा, वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे
        गया, आमस से कोलकाता- 10 से 12 घंटे – 5 से 6 घंटे- वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे  से रास्ता
        वाराणसी से गया आने में पहले 5-6 घंटे लगते थे, जो घटकर 2 से 2.5 घंटे रह जाएंगे
        वाराणसी से दरभंगा जाने में पहले 10-12 घंटे लगते थे जो अब 5 से 6 घंटे में तय होगा रास्ता
        आमस-दरभंगा और वाराणसी-कोलकाता के जरिये रांची का सफर 5-6 घंटे में पूरा हो जाएगा
        आमस-दरभंगा के उत्तरी छोर से जुड़ने से उत्तर बिहार से सिलीगुड़ी की दूरी 6 से 7 घंटे रह जाएगी

    पटना में आउटर रिंग रोड – गंगा पर नया पुल
    इस एक्सप्रेसवे के लिए गंगा नदी पर नया पुल कच्ची दरगाह-बिदुपुर ब्रिज बन रहा है. पटना के पास ये एक्सप्रेसवे गंगा नदी को पार करने के लिए निर्माणाधीन 9.75 किमी लंबे 6 लेन के कच्ची दरगाह-बिदुपुर महासेतु से आवाजाही आसान होगी.ये पटना आउटर रिंग रोड के जरिये राजधानी को बेहतर कनेक्टिविटी देगा.एक्सप्रेसवे को नेपाल बॉर्डर पर जयनगर तक विस्तार दिया जा सकता है,इससे भारत-नेपाल व्यापार में इजाफा होगा. बिहार सरकार ने इस एक्सप्रेसवे से लिंक रोड से बोधगया और राजगीर को भी सीधे जोड़ने का प्रस्ताव तैयार किया है. पटना, जहानाबाद, गया जैसे भीड़भाड़ वाले शहरों के अंदर गए बिना सीधे आउटर रिंग रोड से गाड़ियां निकल जाएंगी।

    राजगीर और बोधगया से कनेक्टिविटी
    बिहार सरकार ने बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए 35 हजार करोड़ की योजना को हरी झंडी दी है. प्रदेश के धार्मिक पर्यटन स्थलों को जोड़कर एक सर्किट बनाने के लिए ये प्रस्ताव तैयार किया गया है. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को ये प्रस्ताव मंजूरी के लिए भेजा गया है. पटना से शुरू होने वाले इस एक्सप्रेसवे से गयाजी, राजगीर, बोधगया जैसे धार्मिक केंद्रों को जोड़ा जाएगा. इस योजना में आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे से बोधगया और राजगीर को जोड़ा जाएगा. साथ ही वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे से इंटरलिंक किया जाएगा.राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण  (NHAI) राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों को जोड़ने वाले इस एक्सप्रेसवे और लिंक एक्सप्रेसवे निर्माण की जिम्मेदारी संभालेगा।

    वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे का रूट
    वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे (NH-319B) से भी ये कनेक्ट होगा. 6 लेन के ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को वाराणसी-रांची-कोलकाता एक्सप्रेसवे भी कहा जाता है. भारत के चार बडे़ राज्यों उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल हाईस्पीड कनेक्टिविटी मिलेगी.वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे बिहार के चार जिलों कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद और गया से होकर गुजरता है. इस एक्सप्रेसवे के एलाइनमेंट में बदलाव कर सासाराम के पहाड़ी इलाके में सुरंग का प्रस्ताव दिया गया है. इससे एक्सप्रेसवे की दूरी करीब 15 किलोमीटर घट जाएगी. साथ ही इस बदलाव से गया और राजगीर को भी सीधी कनेक्टिविटी मिल जाएगी.बिहार की ये एक्सप्रेसवे परियोजना करीब 610 किलोमीटर होगी. इस एक्सप्रेसवे का लगभग 170 किलोमीटर हिस्सा बिहार में बनाया जाएगा और बाकी दूसरे राज्यों से होकर गुजरेगा।

    वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे की यूपी के 4 राज्यों से कनेक्टिविटी
    उत्तर प्रदेश में वाराणसी रिंग रोड से चंदौली जिले के बरहुली गांव तक सीमा. 
    बिहार में कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद और गया जिले, कुल दूरी 170 किमी 
    झारखंड में चतरा, हजारीबाग, रामगढ़ और बोकारो तक, 187 किलोमीटर 
    बंगाल में पुरुलिया, बांकुड़ा, हुगली और हावड़ा से कोलकाता के उलुबेरिया तक 

  • हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला: आय की गलती से योजनाओं से वंचित परिवारों की होगी जांच और सुधार

    हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला: आय की गलती से योजनाओं से वंचित परिवारों की होगी जांच और सुधार

    चंडीगढ़
    हरियाणा सरकार परिवार पहचान पत्र (फैमिली आइडी) में आय संबंधी शिकायतों के समाधान के लिए प्रदेशभर में विशेष अभियान चलाएगी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के निर्देश पर इस अभियान के तहत आय से जुड़ी त्रुटियों और विसंगतियों का सत्यापन ग्राम सभाओं के माध्यम से किया जाएगा, ताकि कोई भी पात्र परिवार केवल आय संबंधी गलती के कारण सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे।

    पीपीपी कोआर्डिनेट डा. सतीश खोला ने बताया कि मुख्यमंत्री ने ग्राम सभाओं की भूमिका को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए हैं। ग्राम सभाओं में निर्धारित कोरम पूरा कर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। प्राप्त जानकारी और आवश्यक दस्तावेजों के आधार पर आय संबंधी शिकायतों का निष्पक्ष परीक्षण किया जाएगा।

    उन्होंने बताया कि अभियान का पहला चरण दो अक्टूबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए सभी जिलों में प्रशासनिक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। हरियाणा के मुख्य सचिव ने सभी उपायुक्तों, अतिरिक्त उपायुक्तों और जिला परिषदों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ बैठक कर अभियान की रूपरेखा और शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

    डा. खोला ने कहा कि फैमिली आइडी में आय का सही और अद्यतन विवरण सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र परिवारों तक पहुंचाने के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने आय संबंधी शिकायत वाले परिवारों से संबंधित ग्राम सभा में आवश्यक दस्तावेजों के साथ उपस्थित होकर सत्यापन प्रक्रिया में सहयोग करने की अपील की।