Category: राज्य

  • खाद की कालाबाजारी पर लगेगी लगाम? बिहार में Farmer ID आधारित उर्वरक बिक्री का विस्तार

    खाद की कालाबाजारी पर लगेगी लगाम? बिहार में Farmer ID आधारित उर्वरक बिक्री का विस्तार

    पटना
    उर्वरक बिक्री व्यवस्था को पारदर्शी एवं सुव्यवस्थित बनाने के लिए 'खेत बचाओ, गुणवत्तायुक्त बीज एवं खाद सुलभ कराओ' विषय पर सोमवार को कृषि भवन सभागार, मीठापुर, पटना में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।

    कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने फ्रेमवर्क फार फर्टिलाइजर एप्लीकेशन सिस्टम (एफएफएएस) के माध्यम से ऑनलाइन व्यवस्था विकसित की गई है।

    आईएफएमएस एवं एग्रीस्टैक के एकीकरण से उर्वरक की खरीद-बिक्री प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित एवं पारदर्शी बनाने का प्रविधान किया गया है।

    इस व्यवस्था के अंतर्गत राज्य में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में वैशाली एवं शेखपुरा जिलों में फार्मर आईडी के आधार पर उर्वरक बिक्री की शुरुआत की गई।

    इसके सफल क्रियान्वयन के बाद जहानाबाद, अरवल, शिवहर, लखीसराय एवं किशनगंज जिलों में भी इसे लागू किया गया है।

    अधिकारियों को दी जाएगी ट्रेनिंग
    सिन्हा ने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम में कृषि विभाग के संबंधित पदाधिकारियों को उर्वरक बिक्री की डिजिटल एवं फार्मर आईडी आधारित व्यवस्था, उर्वरक की उपलब्धता एवं वितरण व्यवस्था तथा किसानों को गुणवत्तायुक्त उर्वरक एवं बीज सुनिश्चित करने से संबंधित आवश्यक जानकारी एवं प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।

    कृषि मंत्री ने कहा कि खाद की बिक्री व्यवस्था को डिजिटल बनाने का उद्देश्य केवल तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि किसान हित में पूरी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है।

    सरकार का प्रयास है कि किसानों को उनकी आवश्यकता के समय आवश्यक कृषि इनपुट आसानी से उपलब्ध हो और उन्हें किसी प्रकार की कठिनाई का सामना नहीं करना पड़े।

    उन्होंने बताया कि किसानों को गुणवत्तायुक्त उर्वरक एवं बीज समय पर और सुगमता से उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उर्वरक बिक्री व्यवस्था को डिजिटल एवं पारदर्शी बनाया जा रहा है।

  • पंजाब में जीत AAP के लिए क्यों जरूरी? दिल्ली के बाद ‘रंगला पंजाब’ प्लान से सत्ता की नई उम्मीद

    पंजाब में जीत AAP के लिए क्यों जरूरी? दिल्ली के बाद ‘रंगला पंजाब’ प्लान से सत्ता की नई उम्मीद

    चंडीगढ़ 
    साल-2027 मिशन के लिए पंजाब सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) ने भी कमर कस ली है। पंजाबियों को दोबारा सेवा का भरोसा दिलाते हुए सत्ता में वापसी करना आप के लिए एक बड़ी चुनौती रहेगा। पार्टी ने सीएम भगवंत मान पर ही बड़ा दांव खेलने की तैयारी कर ली है। राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल मान को अगली बार के लिए भी सीएम फेस घोषित कर चुके हैं। चुनाव में आप का दारोमदार मान पर ही रहेगा।

    चुनावी तैयारियों के मद्देनजर रिक्त पदों पर नियुक्तियां लगभग पूरी हो गई हैं। बूथ से लेकर हलका स्तर तक संगठन को मजबूत करने की कवायद जारी है। चुनाव प्रचार की मुख्य कमान भी सीएम भगवंत सिंह मान ही संभालेंगे जबकि दिल्ली की टीम चुनावी प्रबंधन देखेगी। दिल्ली के कई आप नेताओं को पंजाब में सक्रिय करने की तैयारी कर ली गई हैं। उनकी जिम्मेदारियां तय की जा रही हैं और इसके लिए आप के पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया पूरी तरह सक्रिय हैं।

    पार्टी मान सरकार के पांच साल के कार्यकाल को ही अपना मुख्य चुनावी एजेंडा बनाएगी। लोगों के बीच अपने काम गिनवाकर और सियासी विरोधियों को निशाने पर लेते हुए दोबारा सेवा का माैका मांगेगी। इसके लिए पार्टी मान सरकार का रिपोर्ट कार्ड तैयार करेगी, जिसे मतदाताओं में वितरित किया जाएगा।

    राज्यसभा सांसद छोड़ चुके साथ
    2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब में सक्रिय रहे राज्यसभा सांसद भाजपा में चले गए हैं। इनमें राघव चड्ढा, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, विक्रमजीत सिंह साहनी और राजिंदर गुप्ता शामिल हैं। साल 2022 के चुनाव में राघव चड्ढा आप के प्रमुख रणनीतिक चेहरों में रहे हैं जबकि संदीप पाठक संगठन और चुनावी रणनीति से जुड़े रहे।

    पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह का युवाओं में प्रभाव है। अशोक मित्तल शिक्षा क्षेत्र से जुड़े हैं। विक्रमजीत साहनी उद्योग, समाजसेवा और पंजाबी प्रवासी समुदाय में पहचान रखते हैं। इसी तरह राजिंदर गुप्ता उद्योगपतियों में अच्छा रसूख रखते हैं। चुनाव से पहले सांसदों के दल-बदल से विधानसभा चुनाव में आप को नुकसान हो सकता है।

    2014 में एंट्री और 2022 में सत्ता
    पंजाब की सियासत में आम आदमी पार्टी का निर्णायक उदय 2014 के लोकसभा चुनाव से माना जाता है। पार्टी ने 13 में से चार सीटें फतेहगढ़ साहिब, फरीदकोट, संगरूर और पटियाला जीती थीं। साल 2017 के विधानसभा चुनाव में आप ने 20 सीटें जीतकर कांग्रेस के बाद मुख्य विपक्षी दल का दर्जा हासिल किया। हालांकि 2019 लोकसभा चुनाव में पार्टी तीन सीटों तक सिमट गई लेकिन 2022 में उसने जोरदार वापसी की। भगवंत मान के नेतृत्व में आप ने 117 में से 92 सीटें जीतकर दो-तिहाई से अधिक बहुमत के साथ सरकार बनाई।

    पार्टी के लिए जीत क्यों जरूरी
    पंजाब में दोबारा जीत पार्टी के लिए बहुत जरूरी है। इसी के चलते पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल भी सूबे में सत्ता वापसी के भरसक प्रयासों में जुटे हैं। साल 2022 में जब आप ने पंजाब में सरकार बनाई थी तो दिल्ली में भी आप की सरकार थी। दिल्ली माॅडल के बूते ही पंजाब में सत्ता की राह आसान की गई मगर अब हालात विपरीत हैं। आप दिल्ली खो चुकी है और अब पंजाब को हाथ से फिसलने नहीं देना चाहती। लिहाजा दोबारा जीत के लिए पूरी ताकत झोंकने की तैयारी है।

  • सीएम योगी ने यूपी को देश के शीर्ष तीन राज्यों में पहुंचाया, अपराधियों के हौसले किए चकनाचूर : राजनाथ

    सीएम योगी ने यूपी को देश के शीर्ष तीन राज्यों में पहुंचाया, अपराधियों के हौसले किए चकनाचूर : राजनाथ

    लखनऊ
     रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में हुए बदलाव और महिला सुरक्षा की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश पहले पूरे देश में बहुत पीछे हुआ करता था, लेकिन योगी आदित्यनाथ ने इसे आज देश के शीर्ष तीन राज्यों में लाकर खड़ा कर दिया है। पहले बेटियों के माता-पिता उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते थे, आज अपराधी और उनके घरवाले चिंतित रहते हैं। महिलाओं को गलत नजर से देखने वालों के हौसले योगी सरकार ने सिर्फ तोड़े नहीं, बल्कि चकनाचूर कर दिए हैं। उनकी हिम्मत भी तोड़ी है, उनके ठिकाने भी तोड़े हैं और उनके घुटने भी तोड़े हैं।

    वीरांगना अवंतीबाई लोधी की भव्य प्रतिमा के लोकार्पण समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए। राजनाथ सिंह ने वीरांगना अवंतीबाई के शौर्य और बलिदान को नमन करते हुए कहा कि उनका जीवन अन्याय के सामने कभी न झुकने और मातृभूमि की रक्षा के लिए सर्वस्व बलिदान करने की प्रेरणा देता है।

    महिला सुरक्षा पर रक्षा मंत्री ने कहा कि पहले की सरकारों के समय देश की राजधानी तक में महिलाएं सुरक्षित नहीं थीं। उत्तर प्रदेश को लेकर उन्होंने कहा, मैं दावे के साथ कह सकता हूं, या तो कल्याण सिंह की हुकूमत थी या आज योगी आदित्यनाथ की हुकूमत है कि कोई महिलाओं पर गलत नजर डालने की हिम्मत नहीं कर सकता। पहले बेटियों के माता-पिता उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते थे, लेकिन आज अपराधी और उनके घरवाले चिंतित रहते हैं। योगी जी ने पूरे हिंदुस्तान में प्रदेश की एक नई पहचान बनाई है। पहले यूपी पूरे देश में बहुत पीछे हुआ करता था। उसे आज देश के शीर्ष तीन राज्यों में लाकर खड़ा करने का काम योगी जी ने किया है।

    महापुरुषों के विचारों व योगदान को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का पूरा प्रयास
    उन्होंने कहा कि सरकार गौरवशाली विरासत को सामने लाने और महापुरुषों के विचारों व योगदान को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का पूरा प्रयास कर रही है। महापुरुषों और वीरांगनाओं के नाम पर बटालियनों और विभिन्न स्थानों का नामकरण किया जा रहा है। इससे समाज में अपने महापुरुषों के प्रति गौरव की अनुभूति होगी और आने वाली पीढ़ियां उनसे प्रेरणा प्राप्त करेंगी।

    तीन महिला पीएसी बटालियनों की कल्पना नहीं की जा सकती थी
    रक्षा मंत्री ने मुख्यमंत्री की ओर से पीएसी की तीन महिला बटालियनों के गठन और उनके नामकरण का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लखनऊ में वीरांगना ऊदा देवी और गोरखपुर में वीरांगना झलकारी बाई के नाम पर पीएसी की बटालियन का नाम रखा गया है। बदायूं में पीएसी की नई बटालियन का नाम वीरांगना अवंतीबाई लोधी के नाम पर रखा गया है। कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था कि किसी मुख्यमंत्री की ऐसी समावेशी सोच होगी।

    कल्याण सिंह ने सत्ता को ठोकर मार दी थी
    देश के नायकों को सम्मान देने की चर्चा करते हुए राजनाथ सिंह ने पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को भी याद किया। उन्होंने कहा कि कारसेवकों पर गोलियां चलाए जाने के विरोध में कल्याण सिंह ने सत्ता को ठोकर मारने का काम किया था।

    अवंतीबाई ने किसानों व आम लोगों की सेना लेकर अंग्रेजों को हराया
    वीरांगना अवंतीबाई को नमन करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में उन्होंने जिस साहस के साथ अंग्रेजों का सामना किया, वह भारतीय इतिहास का गौरवपूर्ण अध्याय है। मातृभूमि के प्रति उनका समर्पण भारत कभी नहीं भूल सकता। अत्यंत विषम परिस्थितियों में शासन की बागडोर संभालने के बावजूद उन्होंने सुशासन का मॉडल खड़ा किया था। अंग्रेजों ने जब छलपूर्वक उनका राज्य छीनने का प्रयास किया तो उन्होंने न केवल हथियार उठाए, बल्कि आसपास के राजाओं और जमींदारों को भी संघर्ष के लिए प्रेरित किया। उन्होंने किसानों और आम लोगों की सेना के बल पर अंग्रेजों को हराकर उन्होंने अपने पराक्रम का परिचय दिया।

    पंचतीर्थ से महाराजा सुहेलदेव के स्मारक तक
    राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर से जुड़े पांच स्थानों को पंचतीर्थ के रूप में विकसित किया है। इसी तरह बहराइच में महानायक सुहेलदेव का भव्य स्मारक बनाया गया है। योगी जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में भी इस गौरवशाली विरासत को सामने लाने का पूरा प्रयास हो रहा है। महापुरुषों और वीरांगनाओं के नाम विभिन्न स्थानों से जोड़कर नई पीढ़ी को उनके योगदान से परिचित कराया जा रहा है।

    ऑपरेशन सिंदूर में महिलाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई
    रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत की महिलाओं ने हर क्षेत्र में अपनी क्षमता साबित की है। सेना, पुलिस, विज्ञान, खेल, शिक्षा और प्रशासन, सभी जगह महिलाएं अपनी क्षमता का परिचय दे रही हैं। ऑपरेशन सिंदूर में महिला पायलटों व सैनिकों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 

    सैनिक स्कूलों के दरवाजे भी बेटियों के लिए खुले
    राजनाथ सिंह ने कहा कि नारी शक्ति को अधिक आत्मविश्वासी और सशक्त बनाने के लिए सरकार अधिकार, अवसर, सुरक्षा और सम्मान देने का काम कर रही है। 

  • लखनऊ में योगी का सपा पर वार, JPNIC को बताया ‘सैफई सिंडिकेट’ का अड्डा; वसूली की भी कही बात

    लखनऊ में योगी का सपा पर वार, JPNIC को बताया ‘सैफई सिंडिकेट’ का अड्डा; वसूली की भी कही बात

    लखनऊ
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि लखनऊ में बना जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (जेपीएनआइसी) समाजवादी पार्टी के भ्रष्टाचार का जीवंत स्मारक है। सपा ने इसे अपनी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का अड्डा जैसा बना दिया था। एक महापुरुष के नाम का इससे बड़ा अपमान नहीं हो सकता।

    मुख्यमंत्री रविवार को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के साथ वीरांगना अवंतीबाई लोधी की प्रतिमा का लोकार्पण करने के उपरांत जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए पूरा जीवन समर्पित करने वाले जयप्रकाश नारायण के नाम पर सपा शासनकाल में शुरू किए गए इस प्रोजेक्ट की लागत 200 करोड़ रुपये थी, लेकिन 864 करोड़ खर्च करने के बावजूद यह अधूरा रहा।

    जिस काम को 18 महीने में पूरा होना था, वह दो साल बाद भी अधूरा था। सेंटर पर सपा का कब्जा रखने के लिए एक कमेटी गठित की गई, जिसमें अखिलेश यादव, डिंपल यादव, धर्मेंद्र यादव, अखिलेश के निजी सचिव और सपा प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी शामिल थे। सीएम योगी ने कहा कि जेपीएनआइसी पर खर्च हुए 864 करोड़ रुपये सैफई सिंडिकेट के नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की जनता के हैं।

    सरकार ने कमेटी भंग कर इस सेंटर को वापस लिया है। अब लखनऊ विकास प्राधिकरण के मार्गदर्शन में इसे संचालित कर जयप्रकाश नारायण की स्मृति को जीवंत किया जाएगा। प्रदेश के खजाने से खर्च धनराशि की वसूली का प्रयास किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि वीरांगना अवंतीबाई लोधी की भव्य अश्वारोही प्रतिमा भारतीय नारी की गरिमा, शौर्य और तेजस्विता का प्रतीक बनकर देशवासियों को प्रेरित करेगी। सीएम ने कहा कि भाजपा सरकार ने पीएसी की सभी 54 कंपनियों को पुनर्गठित किया। प्रदेश में वीरांगनाओं ऊदा देवी, झलकारी बाई व अवंतीबाई लोधी के नाम पर तीन महिला बटालियन गठित की गई हैं।

    इनमें एक लखनऊ, दूसरी गोरखपुर और तीसरी बदायूं में निर्माण के अंतिम चरण में है। अवंतीबाई लोधी ने झांसी व ग्वालियर के बीच संघर्ष का नेतृत्व किया। उनका जीवन हमें एकजुट रहने की प्रेरणा देता है। सीएम योगी ने कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ‘बाबूजी’ ने विधान भवन के सामने अवंतीबाई लोधी की अश्वारोही प्रतिमा स्थापित कराई थी।

    अलीगढ़ में उनके नाम पर स्टेडियम बन रहा है। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान लखनऊ में तिरंगा फहराने वाले अमर शहीद गुलाब सिंह लोधी के सम्मान में उन्नाव के पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय का नामकरण किया गया है। बुलंदशहर में कल्याण सिंह की स्मृति में मेडिकल कॉलेज का निर्माण कराया गया है।

    लखनऊ के कैंसर संस्थान का नाम भी बाबूजी के नाम पर रखा गया और वहां उनकी भव्य प्रतिमा स्थापित कराई गई है। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री बी.एल. वर्मा, उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह, बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह, लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

  • PU चुनाव में बवाल के बाद बड़ा फैसला, छात्रों को वोट डालने के लिए अतिरिक्त समय

    PU चुनाव में बवाल के बाद बड़ा फैसला, छात्रों को वोट डालने के लिए अतिरिक्त समय

    चंडीगढ़.

    पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) में छात्र संघ चुनाव के लिए सोमवार को मतदान जारी है। वोटिंग करने को लेकर छात्रों में उत्साह है। पीयू प्रशासन की तरफ से सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए हुए हैं। प्रत्याशी और उनके संगठन के समर्थक वोटर्स को अपने पक्ष में वोट करने के प्रयास में जुटे हैं।

    इसी बीच पीयू के लॉ डिपार्टमेंट के बाहर छात्रों ने जमकर हंगामा किया। छात्रों का आरोप है कि वोटिंग का समय सुबह 11 बजे तक था, लेकिन गेट को सुबह 10 बजे ही बंद कर दिया गया। छात्रों का कहना है कि कई विद्यार्थी दूर-दराज से आए थे और रास्ते में जाम में फंसने के कारण समय पर नहीं पहुंच पाए। गेट समय से पहले बंद होने के चलते वे मतदान नहीं कर सके, जिससे छात्रों में रोष फैल गया। छात्रों ने मौके पर नारेबाजी कर अपना विरोध जताया। पुलिस लॉ डिपार्टमेंट से मत पेटी लेकर जाने लगी थी, जिसकाे विद्यार्थियों ने जाने नहीं दिया। हंगामा बढ़ता देख विद्यार्थियों की मांग मान ली गई और उन्हें वोट करने का अतिरिक्त समय दिया गया।

    एबीवीपी-सोई गठबंधन से दिलचस्प हुआ छात्र चुनाव
    छात्र परिषद चुनाव से पहले रविवार शाम एबीवीपी और सोई ने गठबंधन कर लिया। दोनों संगठनों के साथ आने की चर्चा पिछले कुछ समय से कैंपस में चल रही थी, लेकिन औपचारिक गठबंधन के बाद चुनावी समीकरण तेजी से बदलने की चर्चा शुरू हो गई है। गठबंधन से एबीवीपी को चुनावी मैदान में मजबूती मिलने के साथ मुकाबला और कड़ा होने की संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक जानकार इस गठजोड़ को छात्र राजनीति से आगे पंजाब की सियासत के नजरिए से भी महत्वपूर्ण मान रहे हैं। छात्र संगठनों की गतिविधियां लंबे समय से बड़े राजनीतिक दलों की रणनीति और युवाओं तक पहुंच से जुड़ी रही हैं। ऐसे में एबीवीपी और सोई का साथ आना आगामी विधानसभा चुनाव के राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है।

    गठबंधन के बाद दोनों संगठनों के कार्यकर्ता और समर्थक संयुक्त रूप से चुनाव प्रचार करेंगे। इससे अन्य छात्र संगठनों के सामने चुनौती बढ़ सकती है। कैंपस में इस गठबंधन को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि गठबंधन का वास्तविक प्रभाव चुनाव परिणाम आने के बाद ही स्पष्ट होगा, लेकिन फिलहाल पीयू छात्र परिषद चुनाव में मुकाबला पहले से अधिक रोचक हो गया है। साथ ही युवा राजनीति के बदलते रुझानों को लेकर भी इस गठजोड़ पर नजरें टिक गई हैं। 

  • डिजिटल पहचान से बदलेगी छात्र सुविधाओं की तस्वीर, लखनऊ विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक पहल

    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा डिजिटल उत्तर प्रदेश, ई-गवर्नेंस और तकनीक आधारित पारदर्शी व्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में लखनऊ विश्वविद्यालय ने एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक पहल की है। विश्वविद्यालय आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से अपने मुख्य परिसर, द्वितीय परिसर और सभी संकायों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के आधिकारिक आईडी कार्ड्स को भारत सरकार के डिजीलॉकर प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने जा रहा है।

    इस व्यवस्था के तहत लखनऊ विश्वविद्यालय स्वयं इस्यूइंग अथॉरिटी के रूप में कार्य करेगा। विश्वविद्यालय का कहना है कि डीजीलॉकर पर विद्यार्थियों के आधिकारिक पहचान पत्र जारी करने वाला वह देश का पहला राज्य विश्वविद्यालय बन गया है। नई व्यवस्था को डिजिटल इंडिया मिशन और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के विद्यार्थी केंद्रित एवं तकनीक आधारित विजन के अनुरूप लागू किया जा रहा है।

    योगी सरकार के डिजिटल उत्तर प्रदेश को मिलेगी नई रफ्तार
    प्रदेश सरकार लगातार सरकारी एवं शैक्षणिक संस्थानों में पेपरलेस कार्यप्रणाली, डिजिटल सेवाओं, पारदर्शी प्रशासन और तकनीक आधारित गुड गवर्नेंस को बढ़ावा दे रही है। उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय के मार्गदर्शन में लखनऊ विश्वविद्यालय की यह पहल इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे विद्यार्थियों को पहचान पत्र से जुड़ी सुविधाएं डिजिटल माध्यम से उपलब्ध होंगी और कागजी तथा भौतिक प्रक्रियाओं पर निर्भरता कम होगी। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, इस पहल से छात्र सेवाओं को अधिक सुव्यवस्थित, सुरक्षित, त्वरित और विद्यार्थी हितैषी बनाया जा सकेगा।

    अपार आईडी होना अनिवार्य
    डिजीलॉकर पर डिजिटल पहचान पत्र उपलब्ध कराने की व्यवस्था के लिए विद्यार्थियों के पास भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त पंजीकृत अपार आईडी (APAAR ID) होना अनिवार्य होगा। अपार यानी ऑटोमेटेड पेमेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री के माध्यम से विद्यार्थी की शैक्षणिक पहचान को डिजिटल रूप से एकीकृत करने की दिशा में भी यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विश्वविद्यालय के अनुसार, प्रवेश प्रक्रिया और शुल्क जमा होने के बाद अधिकृत डिजिटल पहचान पत्र विद्यार्थी के डिजीलॉकर खाते में उपलब्ध कराया जाएगा।

    कुलपति बोले-तकनीक आधारित गुड गवर्नेंस की दिशा में नया कदम
    लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जे.पी. सैनी ने कहा कि विश्वविद्यालय लगातार तकनीक आधारित, पारदर्शी और विद्यार्थी हितैषी गुड गवर्नेंस की दिशा में नए प्रतिमान स्थापित कर रहा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा स्वयं इस्यूइंग अथॉरिटी के रूप में डिजीलॉकर पर विद्यार्थियों के पहचान पत्र जारी करना डिजिटल उत्तर प्रदेश और डिजिटल इंडिया के संकल्प को मजबूती प्रदान करता है। अपार आईडी के साथ एकीकृत यह व्यवस्था विद्यार्थियों को 24 घंटे सुलभ और सुरक्षित डिजिटल पहचान उपलब्ध कराएगी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का लक्ष्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पेपरलेस, त्वरित और तकनीक-संचालित बनाकर विद्यार्थियों को विश्वस्तरीय और बाधारहित शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना है।

    स्मार्टफोन में 24 घंटे सुरक्षित रहेगा आई कार्ड
    नई व्यवस्था के बाद विद्यार्थियों को अपने पहचानपत्र को हर समय साथ रखने की आवश्यकता नहीं होगी। डीजीलॉकर ऐप के माध्यम से उनका अधिकृत डिजिटल आईडी स्मार्टफोन में उपलब्ध रहेगा। इससे कार्ड के खोने, टूटने, फटने या चोरी होने जैसी समस्याओं से राहत मिलेगी। साथ ही, पहचान पत्र खो जाने की स्थिति में डुप्लीकेट कार्ड बनवाने की प्रक्रिया से भी विद्यार्थियों को काफी हद तक राहत मिलेगी।

    क्यूआर कोड से हो सकेगा सत्यापन
    डिजिटल पहचान पत्र में उपलब्ध क्यूआर कोड के माध्यम से उसकी प्रामाणिकता का डिजिटल सत्यापन किया जा सकेगा। इससे जरूरत पड़ने पर संबंधित संस्थान या अधिकृत एजेंसी पहचान पत्र की वैधता की जांच कर सकेगी। विश्वविद्यालय का कहना है कि डीजीलॉकर के माध्यम से जारी डिजिटल दस्तावेजों की डिजिटल सत्यापन सुविधा विद्यार्थियों के लिए विभिन्न शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्यों में उपयोगी साबित होगी।

    पढ़ाई पूरी होने के बाद डिजिटल आईडी निष्क्रिय
    नई व्यवस्था में विद्यार्थी की विश्वविद्यालय में अध्ययन अवधि से आईडी कार्ड को जोड़ा जाएगा। पढ़ाई पूरी होने के बाद संबंधित डिजिटल पहचान पत्र की वैधता समाप्त/निष्क्रिय हो जाएगी। इससे पुराने पहचान पत्रों के अनधिकृत इस्तेमाल की आशंका को कम करने में मदद मिलेगी।

    ग्रीन कैंपस की दिशा में भी पहल
    डिजिटल आईडी कार्ड व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण लाभ पर्यावरण संरक्षण भी है। भौतिक पीवीसी कार्ड और लेमिनेशन के इस्तेमाल में कमी आने से प्लास्टिक की खपत घटेगी। विश्वविद्यालय की यह पहल उसके ग्रीन कैंपस और पर्यावरण अनुकूल कार्यप्रणाली के प्रयासों को भी मजबूती देगी। विश्वविद्यालय की आईटी टीम ने इस व्यवस्था के लिए आवश्यक तकनीकी एकीकरण पूरा कर लिया है। जल्द ही विद्यार्थियों के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।

  • पशुपालन महंगा होने पर बढ़े दूध के दाम, उल्लंघन करने पर लगेगा 2100 रुपये जुर्माना

    पशुपालन महंगा होने पर बढ़े दूध के दाम, उल्लंघन करने पर लगेगा 2100 रुपये जुर्माना

    सवाई माधोपुर
     पशुपालन महंगा होने के चलते दूध के दाम बढ़ाने का फैसला किया गया है। चौथ का बरवाड़ा में दूध देने वाले किसानों और दूध विक्रेताओं की बैठक में एक सितंबर से दूध 80 रुपए प्रति लीटर और भैंस का घी 1500 रुपए प्रति किलो बेचने पर सहमति बनी। वहीं 1 से 3 सितंबर तक दूध की सप्लाई बंद रखने का निर्णय लिया गया है। तय निर्णय का उल्लंघन करने पर 2100 रुपए जुर्माना लगाने पर भी सहमति बनी।

    चौथ का बरवाड़ा कस्बे के शिव मंदिर पार्क में रविवार को दूध देने वाले किसानों एवं दूध विक्रेताओं की बैठक आयोजित हुई। बैठक में पशुपालन की बढ़ती लागत, पशु आहार, चारा और अन्य जरूरी सामग्री के लगातार बढ़ते दामों को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। बढ़ती लागत के कारण पशुपालकों को हो रहे आर्थिक नुकसान को देखते हुए दूध और घी के नए भाव निर्धारित करने का निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया।

    बैठक में तय किया गया कि एक सितंबर से दूध का नया भाव 80 रुपए प्रति लीटर रहेगा। इसके अलावा भैंस के घी का भाव 1500 रुपए प्रति किलो निर्धारित करने पर सहमति बनी। नए भाव लागू करने से पहले 1 से 3 सितंबर तक दूध की सप्लाई बंद रखने का फैसला भी लिया गया। बैठक में यह भी तय किया गया कि निर्धारित निर्णय का उल्लंघन करने वाले पर 2100 रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा।

    पशुपालन की बढ़ती लागत बनी वजह
    दूध विक्रेताओं ने बताया कि पशु आहार, चारा-दाना और पशुपालन से जुड़े अन्य खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में पशुपालकों को दूध का उचित मूल्य मिलना जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए दूध के भाव में बढ़ोतरी का निर्णय लिया गया। बैठक में दूध की गुणवत्ता बनाए रखने और दूध विक्रेताओं के बीच आपसी समन्वय मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।

    सर्वसम्मति से नई कार्यकारिणी गठित
    बैठक में दूध विक्रेताओं की नवीन कार्यकारिणी का भी सर्वसम्मति से गठन किया गया। रामजीलाल गुर्जर को अध्यक्ष, मुरारी को उपाध्यक्ष, मैनेजर नागर को कोषाध्यक्ष और पनुलाल सैनी को सचिव बनाया गया। भरतलाल और रामप्रसाद को सदस्य, गिर्राज को महासचिव, बीरबल और विजय को सहसचिव, बुधराज को मीडिया प्रभारी तथा हनुमान को सोशल मीडिया प्रभारी बनाया गया। हेवराज गुर्जर को विधि सलाहकार और कालूराम गुर्जर को सलाहकार मनोनीत किया गया।

  • माओवाद से साइबर अपराध तक, झारखंड पुलिस की बड़ी कार्रवाई; 7.5 महीने में 113 माओवादी गिरफ्तार

    माओवाद से साइबर अपराध तक, झारखंड पुलिस की बड़ी कार्रवाई; 7.5 महीने में 113 माओवादी गिरफ्तार

    रांची
    झारखंड पुलिस ने राज्य में विधि व्यवस्था, माओवाद, साइबर अपराध, मानव तस्करी, मादक पदार्थ अधिनियम, पोक्सो एक्ट, पुलिस आधुनिकीकरण व पुलिस कल्याण की दिशा में इस वर्ष साढ़े सात महीने के भीतर की गई कार्रवाई पर अपनी रिपोर्ट कार्ड पेश की है।

    अपनी रिपोर्ट कार्ड में पुलिस ने बताया है कि माओवादियों के लिए कुख्यात रहे झारखंड के दस बड़े क्षेत्र अब पूरी तरह माओवादियों से मुक्त हो चुके हैं। इस साढ़े सात महीने के भीतर पुलिस ने साइबर अपराध, मादक पदार्थ अधिनियम, संगठित आपराधिक गिरोह के विरुद्ध भी ताबड़तोड़ कार्रवाई की है।

    15 अगस्त तक 113 माओवादी हुए गिरफ्तार
    गिरफ्तार माओवादियों में 49 भाकपा माओवादी, 30 पीपुलस लिबरेशन फ्रंट आफ इंडिया (पीएलएफआइ), 23 तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति कमेटी (टीएसपीसी), 10 झारखंड जन मुक्ति परिषद (जेजेएमपी) व एक संघर्ष जन मुक्ति मोर्चा का सदस्य है।

    इनमें बड़े माओवादियों में एक करोड़ का इनामी पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा, 25 लाख का इनामी स्पेशल एरिया कमेटी सदस्य अजय महतो, 15-15 लाख रुपये के इनामी रीजनल कमेटी सदस्य रवींद्र गंझू शामिल है।

    मेहनत उर्फ मोछृू व मदन महतो उर्फ शंकर महतो, 10 लाख का इनामी जोनल कमेटी सदस्य मृत्युंजय भुईया तथा पांच लाख का इनामी सब जोनल कमांडर रवि सरदार को भी अरेस्ट किया गया।

    झारखंड के ये माओवाद प्रभावित क्षेत्र पूरी तरह हो चुके हैं माओवादियों से मुक्त
        माओवादियों का गढ़ माने जाने वाला छत्तीसगढ़-गढ़वा-लातेहार के सीमावर्ती बूढ़ा पहाड़ का क्षेत्र।
        कोल्हान का सारंडा, टोंटो, गोईलककेरा, पोड़ाहाट क्षेत्र।
        चतरा व पलामू का कोलेश्वरी क्षेत्र।
        गिरिडीह का पारसनाथ क्षेत्र।
        बोकारो का लुगु पहाड़ एवं झुमरा पहाड़ क्षेत्र।
        गुमला का चैनपुर व बिशुनपुर आदि पहाड़ी क्षेत्र।
        लातेहार का सरयू, गारू, महुआडांड़ आदि का जंगली क्षेत्र।
        लोहरदगा का पश्चिमी पहाड़ी क्षेत्र।
        खूंटी का पश्चिमी/, दक्षिणी वन क्षेत्र।
        सरायकेला के कुचाई का जंगली क्षेत्र।

    50 माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण
    पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने वाले 50 माओवादियों में 46 भाकपा माओवादी व एक पीएलएफआइ व तीन जेजेएमपी के माओवादी रहे शामिल। इनमें मुख्य रूप से 15 लाख का इनामी रीजनल कमेटी सदस्य संतोष उर्फ बासुदेव, 10 लाख रुपये का इनामी जोनल कमेटी सदस्य चंदन लोहरा, पांच लाख रुपये का इनामी जेजेएमपी का सब जोनल कमांडर सुरेंद्र लोहरा व माओवादी सागेन अंगरिया तथा गुलशन शामिल हैं।

    कुल 43 नक्सलियों ने 28 हथियार एवं 4549 गोलियों के साथ पुलिस मुख्यालय में आत्मसमर्पण किया था। इनके अलावा झारखंड पुलिस के अभियान अभियान के फलस्वरूप छत्तीसगढ़ में भी आठ माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया था।

    इनमें मुख्य रूप से जोनल कमेटी सदस्य अश्विन उर्फ लच्छू कोरसाम, सब जोनल कमांडर सोहन पूनेम उर्फ रंगा, राहत मांडवी शामिल थीं। इसी तरह पश्चिम बंगाल में भी 02 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया था।

    इनमें जोनल कमेटी सदस्य मधाई पात्रा व पुष्पा महतो शामिल थीं। तेलंगाना में भी दो माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया था, इनमें स्पेशल एरिया कमेटी सदस्य विश्वनाथ उर्फ संतोष व रीजनल कमेटी सदस्य पूनम उर्फ जोभा शामिल थीं।

    मुठभेड़ में मार गिराए गए 22 माओवादी
    इस वर्ष 15 अगस्त तक राज्य में सुरक्षा बलों से मुठभेड़ में 22 माओवादी मार गिराए गए। इन माओवादियों में मुख्य रूप से एक करोड़ रुपये के इनामी सेंट्रल कमेटी सदस्य अनल उर्फ पतिराम मांझी, 25 लाख रुपये का इनामी स्पेशल एरिया कमेटी सदस्य अनमोल उर्फ सुशांत, 15 लाख रुपये का इनामी रीजनल कमेटी सदस्य अमित मुंडा व सहदेव महतो उर्फ अनुज, दस लाख रुपये का इनामी जोनल कमांडर रंजीत गंझू व इजराइजल पूर्ति।

    माओवादियों के पास से बरामदगी
    माओवादी विरोधी अभियान के दौरान इस वर्ष 15 अगस्त तक कुल 111 हथियारों की बरामदगी हुई है। इनमें पुलिस से लूटे गए 81 रेगुलर हथियार दो व देसी हथियार 28 शामिल हैं।

    माओवादियों के पास से 9904 कारतूस, 11 किलोग्राम विस्फोटक पदार्थ, लेवी के छह लाख रुपये भी बरामद हुए। सुरक्षा बलों ने माओवादियों के बिछाए गए आइईडी को भी बरामद कर नष्ट किया।

    छह माह में साइबर अपराध मामले में 658 कांड दर्ज, 468 अपराधी गिरफ्तार
    झारखंड में साइबर अपराध के विरुद्ध लगातार कार्रवाई हुई है। इसके तहत इस वर्ष छह महीने में साइबर अपराध के मामले में 658 कांड दर्ज किए गए हैं, जिसमें 468 साइबर अपराधी गिरफ्तार किए गए हैं।

    साइबर अपराध के अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए जिला पुलिस लगातार स्पेशल ड्राइव चला रही है। इसके फलस्वरूप काफी संख्या में साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी हुई है

    साइबर अपराधियों की निशानदेही पर कुल 17 लाख 78 हजार 750 रुपये नकदी की बरामदगी हुई है। वहीं, 679 सिम कार्ड, 651 मोबाइल फोन, 74 एटीएम कार्ड, 21 दोपहिया वाहन, पांच चारपहिया वाहन, 08 लैपटाप, 57 बैंक पासबुक, 19 बैंक चेकबुक एवं 02 स्वाइप मशीन की बरामदगी हुई है।

    प्रतिबिंब एप के माध्यम से जनवरी से जुलाई तक यानी सात महीने में 121 कांड दर्ज किए गए हैं। इसके तहत 336 गिरफ्तारियां हुईं हैं। कुल 545 मोबाइल व 655 सिमकार्ड की बरामदगी हुई है। साइबर अपराध के विरुद्ध डायल 1930 पर कुल 77503 शिकायतें मिलीं।

    इसके माध्यम से बैंक खातों में 150 करोड़ रुपये फ्रीज कराए गए। 19 करोड़ रुपये पीड़ितों को वापस दिलाए गए हैं। इस डायल 1930 के माध्यम से 22165 मोबाइल नंबर ब्लाक किए गए, जबकि 10054 आइएमईआइ नंबर ब्लाक किए गए हैं।

    साइबर अपराध को देखते हुए झारखंड के रांची, बोकारो, हजारीबाग, रामगढ़, लातेहार, दुमका, चाईबासा, सरायकेला-खरसांवा में 08 नये साइबर अपराध थानों का सृजन किया गया है।

    संगठित गिरोह के 193 अपराधी गिरफ्तार किए गए, 50 पर गुंडा एक्ट

    • इस वर्ष सात महीने में संगठित आपराधिक गिरोह के 193 अपराधियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इन अपराधियों के पास से कुल 63 हथियार व 274 कारतूस की बरामदगी हुई है। पुलिस ने इस संगठित आपराधिक गिरोह के 50 अपराधियों के विरुद्ध क्राइम कंट्रोल एक्ट या गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई की है।
    • सात महीने में गुंडा एक्ट के तहत 46 अपराधी निरुद्ध किए गए हैं। 46 अपराधी जिला बदर किए गए हैं और नौ अपराधियों के विरुद्ध लुकआउट नोटिस जारी किया गया है।
    • इनमें चतरा जिला से राहुल दूबे, प्रिंस खान व राहुल सिंह, रामगढ़ जिला से राहुल दूबे, धनबाद जिला से जियाउर हक उर्फ गोपी खान, अरशद उर्फ रितिक व शेख उसतार, पूर्वी सिंहभूम जिला से नीरज सिंह व तजेन्दर पाल सिंह शामिल हैं।

    मादक पदार्थ के विरुद्ध छह माह में 435 कांड दर्ज, 710 गिरफ्तारियां
    झारखंड पुलिस ने मादक पदार्थ के विरुद्ध इस वर्ष छह महीने में 435 कांड दर्ज की और इसके तहत कुल 710 को गिरफ्तार किया। मादक पदार्थ से जुड़े अपराधियों के पास से 3461 किलोग्राम गांजा, जिसकी अनुमानिक कीमत 17.30 करोड़ रुपये आंकी गई है कि जब्ती की गई है।

    इसके अलावा करीब 7.5 करोड़ रुपये कीमत के 151 किलोग्राम अफीम, 36 लाख रुपये मूल्य के 3.6 किलोग्राम ब्राउन शुगर व 15.30 करोड़ रुपये मूल्य के 10218 किलोग्राम डोडा की बरामदगी हुई है।

    उक्त सभी का कुल अनुमानित मूल्य करीब 41 करोड़ रुपये है। इसके अलावा वर्ष 2025-26 में लगभग 4620 एकड़ भूमि में लगे अफीम की फसल को भी पुलिस ने नष्ट किया है।

    पोक्सो एक्ट में 542 गिरफ्तारियां, मानव तस्करी में 50 अपराधी गिरफ्तार
    झारखंड पुलिस ने इस वर्ष प्रोटेक्शन आफ चिल्ड्रेन फ्रोम सेक्सुअल अफेंसेज (पोक्सो) व दुष्कर्म से जुड़े मामले में विशेष अभियान चलाया। इस अभियान के फलस्वरूप इस वर्ष जून तक यानी छह महीने में राज्य भर में कुल 653 कांड दर्ज हुए हैं।

    इन कांडों में कुल 298 मामले निष्पादित हुए हैं। इनमें कुल 542 आरोपितों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। इसी तरह मानव तस्करी के विरुद्ध कार्रवाई कर पुलिस ने इससे जुड़े 50 अपराधियों से भी अधिक की गिरफ्तारी की है।

    इसमें मानव तस्करी के शिकार 140 से भी अधिक पीड़ितों की बरामदगी की है। इस वर्ष छह महीने में एससी-एसटी एक्ट से जुड़े 458 कांड दर्ज हुए, वहीं इस अवधि में 720 कांड निष्पादित भी किए जा चुके हैं।

    पुलिस कल्याण से जुड़े 1007 लाभन्वितों में बंटे 3.69 करोड़ रुपये
    झारखंड पुलिस मुख्यालय स्तरीय झारखंड पुलिस सहाय्य एवं कल्याण कोष से 1007 लाभान्वितों को करीब 3.69 करोड़ रुपये, झारखंड पुलिस शिक्षा कोष से 9443 लाभान्वितों को 11.46 करोड़ रुपये व झारखंड पुलिस परोपकारी कोष से पुलिस पदाधिकारियों व कर्मियों के 737 आश्रितों को सहायता के लिए लगभग 3.93 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।

    पुलिसकर्मियों के 237 आश्रितों को अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति दी गई है। इसके अलावा वीरता पदक प्राप्त 37 पुलिस पदाधिकारियेां, कर्मियों को पारी से बाहर प्रोन्नति दी गई है। 970 पुलिस पदाधिकारियों को एसीपी, एमएसीपी की स्वीकृति दी गई है।

    जैप के 201 हवलदारों को अवर निरीक्षक (स) की कोटि में प्रोन्नति दी गई है। आयुधिक संवर्ग (आर्मर) के 10 आयुधिक अवर निरीक्षक को आयुधिक निरीक्षक एवं 24 हवलदार को आयुधिक अवर निरीक्षक कोटि में प्रोन्नति दी गई है।

    वितंतु संवर्ग (वायरलेस) के 11 पुलिस अवर निरीक्षक को पुलिस निरीक्षक एवं 03 सहायक पुलिस अवर निरीक्षक को पुलिस अवर निरीक्षक कोटि में प्रोन्नति प्रदान की गई है।
    12 जिलों में बन रहा संयुक्त पुलिस स्टेशन, पांच जिलों में एसडीपीओ कार्यालय

    पुलिस आधुनिकीकरण की दिशा में भी राज्य में बेहतर कार्य हो रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य के 12 जिलों रांची, बोकारो, धनबाद, हजारीबाग, जमशेदपुर, दुमका, चतरा, देवघर, गढ़वा, गिरिडीह, पलामू व गुमला में संयुक्त पुलिस थाना का निर्माण हो रहा है।

    इन थानों में महिला थाना, साइबर थाना, एससी, एसटी थाना, एएचटीयू थाना एक ही परिसर में होगा। वर्ष 2025-26 में राज्य के पांच जिलों धनबाद, जमशेदपुर, दुमका, देवघर व हजारीबाग में सीआइ व एसडीपीओ कार्यालय सह आवास का निर्माण किया जा रहा है।

    इसी वर्ष 13 मार्च को मुख्यमंत्री ने आधुनिक पुलिस वाहनों का लोकार्पण किया। झारखंड पुलिस को 636 चार पहिया वाहन एवं 849 दो पहिया वाहन प्रदान किया।

    इसके फलस्वरूप राज्य में कानून-व्यवस्था, त्वरित पुलिस प्रतिक्रिया एवं जनसुरक्षा और अधिक सुदृढ़ हुआ है। इसके अलावा, वित्तीय वर्ष 2026-27 में 627 चार पहिया वाहन एवं 848 दो पहिया वाहन के खरीदारी के लिए आदेश निर्गत किया गया है, जो जल्द से जल्द पुलिस विभाग को प्राप्त हो जाएगी।

     

  • राजस्थान की 27 हजार राशन दुकानों पर मंडराया संकट, POS मशीनों का रखरखाव टेंडर फंसा

    राजस्थान की 27 हजार राशन दुकानों पर मंडराया संकट, POS मशीनों का रखरखाव टेंडर फंसा

    जयपुर
    प्रदेश में खाद्य सुरक्षा योजना के तहत करोड़ों लाभार्थियों को मिलने वाले गेहूं के वितरण पर आने वाले दिनों में संकट खड़ा हो सकता है। प्रदेश की करीब 27 हजार राशन दुकानों पर गेहूं वितरण और लाभार्थियों के सत्यापन में इस्तेमाल होने वाली पोस (पॉइंट ऑफ सेल) मशीनों के रखरखाव का टेंडर चुनाव आचार संहिता में फंस गया है। मौजूदा रखरखाव फर्म की अवधि 4 सितंबर को समाप्त हो रही है। ऐसे में यदि समय रहते नई व्यवस्था नहीं हुई तो मशीन खराब होने की स्थिति में राशन वितरण प्रभावित हो सकता है।

    रोजाना आती हैं करीब 600 शिकायतें
    विभागीय स्तर पर पोस मशीनों में तकनीकी खराबी की रोजाना करीब 600 शिकायतें सामने आती हैं। मौजूदा फर्म द्वारा इन मशीनों को ठीक किया जाता है। पोस मशीन के साथ आईरिस स्कैनर और वेइंग मशीन से जुड़ी तकनीकी समस्याओं का समाधान भी इसी व्यवस्था के तहत किया जाता है।

    अब 4 सितंबर के बाद यदि नया टेंडर नहीं होता है और किसी राशन दुकान की पोस मशीन खराब हो जाती है तो लाभार्थी का अनिवार्य सत्यापन नहीं हो पाएगा। ऐसी स्थिति में डीलर गेहूं का वितरण नहीं कर सकेगा। इससे राशन की दुकानों पर लाभार्थियों और डीलरों के बीच विवाद की स्थिति भी बन सकती है।

    बिना पोस के गेहूं बांटा तो गबन माना जाएगा
    विभाग के उच्च अधिकारियों के अनुसार खाद्य सुरक्षा योजना में गेहूं वितरण की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए पोस मशीन का इस्तेमाल अनिवार्य है। ऐसे में यदि कहीं बिना पोस मशीन के गेहूं का वितरण किया जाता है तो उसे गंभीर अनियमितता मानते हुए गबन की श्रेणी में माना जा सकता है। इससे डीलरों के सामने भी स्थिति पेचीदा हो सकती है।

    निजी कंपनी के निशुल्क रखरखाव ऑफर से चर्चा
    इसी बीच करीब चार दिन पहले जिला रसद अधिकारियों के मोबाइल पर एक पोस्टर मैसेज पहुंचा। इसमें एक निजी कंपनी की ओर से राशन डीलरों को पोस मशीन, आईरिस स्कैनर और वेइंग मशीन खराब होने पर निशुल्क रिपेयरिंग और तकनीकी सपोर्ट देने की पेशकश की गई है। इसके बाद विभाग में इस बात को लेकर चर्चा शुरू हो गई है कि बिना किसी टेंडर के निजी कंपनी राशन डीलरों को मशीनों के रखरखाव की सुविधा देने का ऑफर किस आधार पर दे रही है।

    खाद्य सुरक्षा योजना के तहत प्रदेश में करीब 4.34 करोड़ लाभार्थी शामिल हैं। प्रत्येक लाभार्थी को हर माह 5 किलो गेहूं दिया जाता है। इस हिसाब से प्रदेश में हर महीने करीब 2.20 लाख मीट्रिक टन गेहूं का वितरण किया जाता है। इसके लिए पूरे राजस्थान में करीब 27 हजार राशन दुकानें संचालित हैं, जबकि अकेले जयपुर जिले में करीब 1200 राशन दुकानें हैं। ऐसे में पोस मशीनों की तकनीकी व्यवस्था प्रभावित होने का सीधा असर करोड़ों लाभार्थियों के गेहूं वितरण पर पड़ सकता है।

    फैक्ट फाइल:
        4.34 करोड़ लाभार्थी
        5 किलो प्रति लाभार्थी गेहूं
        2.20 लाख मीट्रिक टन मासिक गेहूं वितरण
        27 हजार राशन दुकानें
        1200 राशन दुकानें जयपुर जिले में

  • विमुक्ति दिवस पर CM सैनी का संदेश- केवल दिवस मनाने से नहीं चलेगा, समाज को अधिकार और सुविधाएं भी मिलें

    विमुक्ति दिवस पर CM सैनी का संदेश- केवल दिवस मनाने से नहीं चलेगा, समाज को अधिकार और सुविधाएं भी मिलें

    चंडीगढ़
     हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने रविवार को अपने चंडीगढ़ आवास पर हरियाणा और पंजाब की घुमंतू एवं विमुक्त जातियों के प्रतिनिधियों के साथ संवाद किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल विमुक्ति दिवस मनाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि इस समाज को वे अधिकार और सुविधाएं मिलनी चाहिए, जिनसे वह लंबे समय तक वंचित रहा है।

    उन्होंने समाज के प्रतिनिधियों से सरकारी योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र परिवार तक पहुंचाने का भी आह्वान किया। उन्होंने जानकारी दी कि 702 घुमंतू परिवारों को प्लाट देकर आवास योजनाओं का लाभ प्रदान किया गया है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्रदेश में 1.60 लाख परिवारों को पक्के मकान दिए गए हैं।

    समाज के ऐतिहासिक योगदान का उल्लेख 
    मुख्यमंत्री ने कहा कि अंग्रेजों ने 1871 में क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट के जरिए घुमंतू समाज को जन्मजात अपराधी घोषित कर कलंकित किया था। 31 अगस्त 1952 को इस कानून से मुक्ति मिली, इसलिए इस दिन विमुक्ति दिवस मनाया जाता है।

    उन्होंने समाज के ऐतिहासिक योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की स्वतंत्रता और रक्षा में विमुक्त एवं घुमंतू समाज के अनेक महापुरुषों और योद्धाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

    मुख्यमंत्री ने सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का ब्योरा देते हुए बताया कि करनाल, पलवल और रोहतक में 702 घुमंतू परिवारों को प्लाट आवंटित किए गए हैं। उन्होंने इसे परिवारों के सुरक्षित भविष्य की नींव बताया।

    उन्होंने बताया कि डा. आंबेडकर आवास नवीनीकरण योजना में मकान मरम्मत की सहायता 30 हजार से बढ़ाकर 80 हजार रुपये की गई है। इससे 85,815 परिवारों को 416 करोड़ रुपये की सहायता मिली है। गरीब परिवारों को 500 रुपये में गैस सिलिंडर उपलब्ध कराने की योजना से 15 लाख से अधिक महिलाओं को लाभ मिला है।

    8000 से 12000 रुपये तक छात्रवृत्ति…
    मुख्यमंत्री ने घुमंतू समाज से बच्चों को हर हाल में शिक्षित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार 12वीं तक विद्यार्थियों को मुफ्त किताबें, वर्दी और स्टेशनरी देने के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए निशुल्क कोचिंग उपलब्ध करा रही है। डा. आंबेडकर मेधावी छात्रवृत्ति योजना के तहत 8,000 से 12,000 रुपये तक छात्रवृत्ति दी जा रही है।

    उन्होंने युवाओं से हुनर सीखने, खेलों में आगे बढ़ने और नशे से दूर रहने का आह्वान किया। साथ ही प्रतिनिधियों से सरकारी योजनाओं की जानकारी समाज के प्रत्येक परिवार तक पहुंचाने को कहा, ताकि घुमंतू एवं विमुक्त समाज सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त हो सके।

    कार्यक्रम में अखिल भारतीय डीएनटी कल्याण संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र सिंह देसुजोदा, हरियाणा घुमंतू जाति विकास बोर्ड के चेयरमैन सरदार जसमेर सिंह बंजारा और पूर्व विधायक लक्ष्मण नापा मौजूद रहे।