Category: राज्य

  • बिहार में बाढ़ का अलर्ट! गंडक का जलस्तर तेजी से बढ़ा, 62 राहत शिविर किए गए तैयार

    बिहार में बाढ़ का अलर्ट! गंडक का जलस्तर तेजी से बढ़ा, 62 राहत शिविर किए गए तैयार

     पटना
     बिहार में गंडक नदी के जलस्तर ने फिर चिंता बढ़ा दी है। रविवार को गंडक के जलस्तर में लगातार वृद्धि दर्ज जा रही है।

    शाम छह बजे 1,77,800 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज दर्ज किया गया। सुबह आठ बजे की तुलना में बराज से पानी के डिस्चार्ज में लगभग दो गुनी वृद्धि हुई है।

    पानी बढ़ने के साथ नदी के जलस्तर पर भी निगरानी बढ़ा दी गई है। जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार गंगा में भी जल स्तर बढ़ने की आशंका है। जल संसाधन विभाग के शीर्ष अधिकारियों का कहना है कि खतरा टला है, लेकिन प्रशासन सतर्क है।

    उधर, वाल्मीकिनगर गंडक बराज से सुबह आठ बजे जहां 1.24 लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया जा रहा था, वहीं शाम छह बजे तक डिस्चार्ज बढ़कर एक लाख 77 हजार 800 क्यूसेक पहुंच गया।

    यानी 10 घंटे में डिस्चार्ज में 53,800 क्यूसेक की वृद्धि हुई। सुबह आठ बजे बराज के अपस्ट्रीम का जलस्तर 354.40 फीट दर्ज किया गया था, जो शाम छह बजे बढ़कर 356.30 फीट हो गया। इस तरह जलस्तर में 1.90 फीट की वृद्धि हुई।

    वहीं, डाउनस्ट्रीम का जलस्तर भी सुबह के 351.60 फीट से बढ़कर शाम को 353.60 फीट पहुंच गया। इसमें दो फीट की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

    जलस्तर और डिस्चार्ज में वृद्धि को देखते हुए नदी किनारे के क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा दी गई है। गंडक बराज, वाल्मीकिनगर के सहायक अभियंता सत्येंद्र का कहना है कि वर्षा नहीं होने के बावजूद गंडक नदी के जलस्तर में वृद्धि हो रही है।

    अनुमान है कि नेपाल और ऊपरी क्षेत्रों में आई बाढ़ का पानी गंडक नदी में पहुंच रहा है। इसी वजह से नदी के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।
    बाढ़ को लेकर अंचल प्रशासन अलर्ट, 62 राहत शिविर केंद्र चयनित

    गंडक के जलस्तर में वृद्धि से संभावित बाढ़ को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रखने के लिए 62 बाढ़ राहत शिविर केंद्रों का चयन किया गया है।

    सभी चयनित राहत शिविर केंद्रों के लिए प्रभारी की भी नियुक्ति कर दी गई है। तटवर्ती इलाकों में लोग जरूरी सामान और पशुओं की सुरक्षा को लेकर तैयारी करने लगे हैं।

  • अंकित बालियान के हत्यारों के एनकाउंटर के बाद राजभर का अखिलेश पर वार, बोले- जाट लिखकर बेटे की लाश पर राजनीति करना सौदागरी

    अंकित बालियान के हत्यारों के एनकाउंटर के बाद राजभर का अखिलेश पर वार, बोले- जाट लिखकर बेटे की लाश पर राजनीति करना सौदागरी

    लखनऊ
    अंकित बालियान हत्याकांड के दो आरोपियों के एनकाउंटर के बाद सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। राजभर ने अखिलेश पर हत्या के मामले को जातीय रंग देकर राजनीति करने का आरोप लगाया।

    सोशल मीडिया पर लिखी एक पोस्ट में ओपी राजभर ने कहा, 'अखिलेश जी, खबर पता चल गई ना? जिस अंकित बालियान की हत्या पर आप राजनीति करना चाहते थे, उसके हत्यारे वहीं पहुंच गए, जहां उनकी जगह थी।' राजभर ने आगे कहा कि किसी बेटे की लाश पर जाट लिखकर राजनीति करना संवेदना नहीं, बल्कि सौदागरी है।

    उन्होंने कहा कि हत्या मानवता के खिलाफ अपराध है और उसे किसी जाति या गोत्र से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। राजभर ने अखिलेश यादव पर चुनाव को देखते हुए जाट समाज की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें जाट तब याद आया, जब चुनाव नजदीक आने लगे।

    राजभर ने कहा कि जनता एक तरफ विपक्ष की जातीय राजनीति को देख रही है तो दूसरी तरफ पुलिस और सरकार की कार्रवाई को भी देख रही है।

    अंकित बालियान की हत्या के बाद गरमाई थी राजनीति
    बता दें कि यूपी के शामली में 26 अगस्त को अंकित बालियान की हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद यह मामला राजनीतिक रूप से भी चर्चा में आ गया था। अखिलेश यादव ने भी इस मामले को लेकर सरकार पर सवाल उठाए थे और अंकित बालियान की जाति को लेकर सरकार पर निशाना साधा था। अब आरोपियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के बाद ओपी राजभर ने अखिलेश यादव को सीधे निशाने पर लिया है।

     

  • बिहार CM सम्राट चौधरी पर फिर अभद्र टिप्पणी का मामला, साइबर पुलिस ने शुरू की जांच

    बिहार CM सम्राट चौधरी पर फिर अभद्र टिप्पणी का मामला, साइबर पुलिस ने शुरू की जांच

    पटना 
    सोशल मीडिया फेसबुक पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करने का मामला सामने आया है। इस मामले में साइबर पुलिस ने 28 अगस्त को केस दर्ज कर किया है। पता लगाया जा रहा है कि अभद्र टिप्पणी करनेवाला कौन है? मालूम हो कि बिहार सरकार ने चार दिन पहले अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन योजना की घोषणा की थी। इस योजना को लेकर एक शख्स ने फेसबुक पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और उनके परिजनों के खिलाफ अभद्र टिप्पणी की। जाति विशेष के नाम पर बने फेसबुक अकाउंट से अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया है। इसकी जानकारी मिलने पर साइबर थाना ने स्वत: संज्ञान लेते हुए मामले की जांच शुरू की। फेसबुक से जुड़े मोबाइल नंबर, ई-मेल के जरिए आरोपित का पता लगाया जा रहा है।

    बता दें कि इससे पहले इसी महीने बिहार के ही सहरसा जिले में पुलिस ने सम्राट चौधरी पर किए गए अभद्र टिप्पणी के मामले में ऐक्शन लिया था। यहां बनमाईटहरी पुलिस ने इस मामले में दो नाबालिगों में एक को पकड़ा था। इस नाबालिग ने अपनी गलती मानते हुए कहा था कि वो नशे की हालत में था। सहरसा पुलिस ने कहा था कि हथियार के साथ फोटो और मुख्यमंत्री के प्रति अपशब्द वाले वीडियो के मामले में दो नाबालिगों को पुलिस ढूंढ रही थी। जांच में यह पाया गया था कि यह वीडियो पुराना था और बाद में यह भी पता चला था कि नशे की हालत में यह वीडियो बनाया गया था।

    इस वीडियो में दोनों लड़के अपना लोकेशन मनिया बता रहे थे। पुलिस ने ऐक्शन लेते हुए एक किशोर को पकड़ा था। इस लड़के ने स्मैक के नशे में अपशब्द कहने की बात कहते हुए माफी मांगी थी। इलाके में यह मामला काफी चर्चा में रहा था।

  • JSSC CGL केस में ICN पर शिकंजा, बिहार से दिल्ली तक दर्ज मामलों की जांच में जुटी CID

    JSSC CGL केस में ICN पर शिकंजा, बिहार से दिल्ली तक दर्ज मामलों की जांच में जुटी CID

     रांची
    झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की सीजीएल परीक्षा संचालन में शामिल एजेंसी आईसीएन को लेकर भी सीआईडी की एसआईटी को कई अहम जानकारियां मिलीं हैं।

    आईसीएन एजेंसी पहले से ही केंद्रीय एजेंसियों व राज्य बोर्ड के माध्यम से ब्लैकलिस्ट थी। अब सीआईडी यह पता लगा रही है कि जब एजेंसी ब्लैकलिस्ट थी तब उसे जेएसएससी सीजीएल परीक्षा के संचालन का काम कैसे मिला।

    सीआईडी ने रिमांड पर लिए गए आईसीएन के दो कर्मियों सोमांश प्रकाश व राहुल कुमार से तीसरे दिन भी पूछताछ में इसपर सवाल किया है। दिल्ली से गिरफ्तार दोनों ही आरोपित सीआईडी की पांच दिनों की रिमांड पर हैं।

    सीआईडी उनकी एजेंसी आईसीएन की जेएसएससी सीजीएल परीक्षा संचालन में भूमिका की भी जानकारी जुटा रही है। सीआईडी यह जानना चाह रही है कि परीक्षा संचालित कराने वाली एजेंसी मेसर्स वेबेल टेक्नोलॉजी का आईसीएन के साथ किस तरह का करार था।

    आईसीएन के विरुद्ध बिहार के शास्त्रीनगर थाने में भी दर्ज है प्राथमिकी
    परीक्षा संचालित कराने वाली एजेंसी आईसीएन के विरुद्ध पटना के शास्त्रीनगर थाने में भी वर्ष 2019 में प्राथमिकी दर्ज है। बिहार पुलिस सिपाही भर्ती (सीएसबीसी पटना, विज्ञापन सं. 02/2018) के दौरान आईसीएन ने अभ्यर्थियों से फार्म फीस के तौर पर वसूले गए 14,06,39,674 रुपये बोर्ड के खाते में जमा नहीं किया था।

    इस मामले में शास्त्री नगर थाने में 2019 में 409 व 420 भादवि के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। बोर्ड ने कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर दिया था।

    पटना हाईकोर्ट ने भी 2021 में कंपनी के खिलाफ पारित ब्लैकलिस्टिंग के फैसले को सही ठहराया था। केंद्रीय गृह मंत्रालय के पुलिस फाइनेंस-V विंग ने भी 13 फरवरी 2024 को जारी आदेश के तहत आईसीएन कंपनी को मंत्रालय और उसके सभी अधीनस्थ विभागों से एक साल के लिए काली सूची में डाल दिया था।

     

  • महिला अभ्यर्थियों के लिए खुशखबरी, UPSC से बैंकिंग तक परीक्षा पास करने पर मिलेगी आर्थिक सहायता

    महिला अभ्यर्थियों के लिए खुशखबरी, UPSC से बैंकिंग तक परीक्षा पास करने पर मिलेगी आर्थिक सहायता

     पटना
    मुख्यमंत्री नारी शक्ति योजना के तहत संचालित सिविल सेवा प्रोत्साहन राशि योजना का लाभ अब सभी वर्ग की महिला अभ्यर्थियों को मिलेगा।

    अभी योजना का लाभ निर्धारित आरक्षित वर्ग, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अति पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) और दिव्यांगजन अभ्यर्थियों तक सीमित था।

    इसके कारण सामान्य वर्ग, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और पिछड़ा वर्ग की उन अभ्यर्थियों, जिन्होंने कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रारंभिक परीक्षा में सफलता हासिल की है, प्रोत्साहन राशि से वंचित रह जाती थीं। इसलिए समाज कल्याण
    विभाग ने योजना का दायरा बढ़ाने का फैसला किया है।

    इससे सामान्य वर्ग एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और पिछड़ा वर्ग की उन अभ्यर्थियों को भी लाभ मिलेगा, जो केंद्रीय संघ लोक सेवा आयोग एवं बिहार लोक सेवा आयोग के अलावा अन्य प्रशासनिक, बैंकिंग, रक्षा और अन्य महत्वपूर्ण सेवाओं की प्रतियोगिता परीक्षाओं में सफलता अर्जित कर रही हैं।

    समाज कल्याण मंत्री डॉ. श्वेता गुप्ता के मुताबिक विभाग के स्तर से सिविल सेवा प्रोत्साहन राशि योजना का लाभ सामान्य वर्ग, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और पिछड़ा वर्ग की उन महिला अभ्यर्थियों को देने का निर्णय लिया गया है।

    प्रस्ताव पर जल्द ही कैबिनेट से स्वीकृति ली जाएगी। इसके बाद पात्रता की निर्धारित शर्तें पूरी करने वाली सभी वर्गों की महिला अभ्यर्थियों को इसका लाभ मिल सकेगा। वर्ष 2021-22 से अब तक 4513 महिला अभ्यर्थियों को इस योजना का लाभ दिया जा चुका है और 23.395 करोड़ रुपये दी जा चुकी है।

    परीक्षा के आधार पर मिलेगी राशि
    भारतीय अभियंत्रण सेवा संघ (आइईएस), भारतीय आर्थिक सेवा, भारतीय सांख्यिकी सेवा, कंबाइंड जियो-साइंटिस्ट सहित निर्धारित यूपीएससी परीक्षाओं की प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण करने वाली महिला अभ्यर्थियों को भी 75 हजार से एक लाख रुपये तक की प्रोत्साहन राशि देने का प्रस्ताव है।

    सीडीएस, एनडीए, सीबीआई तथा अन्य राज्यों की राज्य सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में सफल होने वाली अभ्यर्थियों को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने का प्रविधान किया गया है।

    वहीं, रिजर्व बैंक ग्रेड-बी, एसबीआई तथा निर्धारित रेलवे भर्ती परीक्षाओं की प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण करने पर 30 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने का प्रस्ताव है।

    वर्तमान में यूपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण करने वाली महिला अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा की तैयारी के लिए एक लाख रुपये, जबकि बीपीएससी प्रारंभिक परीक्षा में सफल महिला अभ्यर्थियों को 50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।

     

  • UP में IAS अधिकारियों के इस्तीफे और VRS ने बढ़ाई चिंता, दिव्या मित्तल समेत कई नाम चर्चा में

    UP में IAS अधिकारियों के इस्तीफे और VRS ने बढ़ाई चिंता, दिव्या मित्तल समेत कई नाम चर्चा में

    लखनऊ 
    देश की सबसे प्रतिष्ठित नौकरी भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) से भी मोहभंग हो रहा है? ऐसा मानना पूरी तरह ठीक तो नहीं होगा लेकिन आंकड़े बताते हैं कि कड़ी मेहनत और मशक्कत के बाद मिलने वाली सर्वोच्च सेवा को भी अधिकारी बनने के बाद यूं ही छोड़ा जा रहा है। पिछले कुछ सालों में आईएएस की नौकरी छोड़ने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। सिर्फ यूपी की बात करें तो स्वैच्छित सेवानिवृत्ति (वीआरएस) लेने और इस्तीफा देने वालों की संख्या काफी तेजी से बढ़ी है। नौ अधिकारियों ने वीआरएस लिया है और पांच ने इस्तीफा दिया है।

    मनमुताबिक काम नहीं मिलना बड़ा कारण?
    पिछले कुछ दिनों के दो इस्तीफों को देखें तो ऐसा लगता है कि उन्हें अपने मनमुताबिक काम नहीं मिला इसलिए इस्तीफा दे दिया। हालांकि अभी दोनों इस्तीफे स्वीकार नहीं हुए हैं। वर्ष 2023 बैच के रिंकू सिंह राही ने राजस्व परिषद में रहते हुए इसलिए इस्तीफ दे दिया कि उन्हें मनमुताबिक काम नहीं मिला। इसके कुछ समय बाद उन्होंने इस्तीफा वापस लिया तो उन्हें जालौन में संयुक्त मजिस्ट्रेट के पद पर तैनाती दी गई। हालांकि, वे वहां भी काम को लेकर चर्चाओं में हैं।

    सोशल मीडिया पर छाया आईएएस दिव्या मित्तल का इस्तीफा
    अब पिछले 24 घंटों से आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल का इस्तीफा चर्चा में छाया हुआ है। दिव्या का इस्तीफा अभी अफसरों को तो नहीं मिला है लेकिन सोशल मीडिया पर सार्वजनिक हो चुका है। इनके इस्तीफे के पीछे भी मनमुताबिक काम यानी फिल्ड की जगह राजस्व विभाग में तैनाती मानी जा रही है। दिव्या मित्तल मई तक देवरिया की डीएम थीं। इससे पहले भी संतकबीरनगर और मिर्जापुर की डीएम रह चुकी थीं। इस दौरान अपने कार्यों के कारण लगातार चर्चा में रहीं।

    दिव्या जब देवरिया डीएम पद से हटाकर राजस्व परिषद में भेजी गईं तो सोशल मीडिया पर ऐसी पोस्ट लिखी, जिससे साफ हो गया कि वह खुश नहीं हैं। उन्होंने लिखा कि स्कूलों और उच्च शिक्षा संस्थानों में खुश रहना क्यों नहीं सिखाया जाता। तब उनकी पोस्ट को ज्यादा सीरियस किसी ने नहीं लिया। अब उनका इस्तीफा आया तो पुरानी पोस्ट के निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। इसी तरह पीसीएस से आईएएस बनने वाले राकेश वर्मा ने पीसीएस सेवा में वापस होकर वीआरएस ले लिया था।

    वीआरएस लेने वाले अफसर
    नाम और बैच

    आरपी सिंह 1983

    मोहम्मद मुस्तफा 1995

    अमोद कुमार 1995

    रेणुका कुमार 1987

    जूथिका पाटणकर 1988

    राजीव अग्रवाल 1993

    विकास गोठलवाल 2003

    रिग्जियान सैंफिल 2003

    अनामिका सिंह 2004

    रजनीश चंद्र 2014 (स्वीकार नहीं हुआ)

    इस्तीफा देने वाले अफसर और बैच
    विद्या भूषण 2008

    अभिषेक सिंह 2011

    रिंकू सिंह रही 2023 (बाद में वापस लिया)

    दिव्या मित्तल 2013

    एस मुथु शालिनी 2007

  • लिखित आदेश की मांग पर अड़े छात्र, फीस बढ़ोतरी के खिलाफ पंजाबी यूनिवर्सिटी में प्रदर्शन

    लिखित आदेश की मांग पर अड़े छात्र, फीस बढ़ोतरी के खिलाफ पंजाबी यूनिवर्सिटी में प्रदर्शन

    पटियाला.

    पंजाबी यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से फीस बढ़ोतरी का फैसला वापस लिए जाने के बावजूद स्टूडेंट्स ने अपना धरना समाप्त नहीं किया है। स्टूडेंट्स ने स्पष्ट किया है कि जब तक प्रशासन फीस बढ़ोतरी वापस लेने संबंधी लिखित आदेश जारी नहीं करता, तब तक वीसी दफ्तर के बाहर उनका धरना जारी रहेगा।

    धरने पर बैठे स्टूडेंट्स का कहना है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने फीस बढ़ोतरी का फैसला वापस लेने की बात कही है, लेकिन अभी तक उन्हें इसका लिखित आश्वासन या आदेश नहीं दिया गया है। ऐसे में वे केवल मौखिक भरोसे के आधार पर अपना आंदोलन समाप्त करने को तैयार नहीं हैं। स्टूडेंट्स ने कहा कि फीस बढ़ोतरी का फैसला वापस लेने की बात स्पष्ट रूप से लिखित में सामने आनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस फैसले को दोबारा लागू किए जाने को लेकर कोई संशय न रहे। उनका कहना है कि लिखित आदेश मिलने के बाद ही धरना समाप्त करने पर विचार किया जाएगा।

    हॉस्टल की सुविधाओं पर भी उठाया मुद्दा
    स्टूडेंट्स के अनुसार, यूनिवर्सिटी प्रशासन ने हॉस्टलों की मरम्मत और सुविधाओं में सुधार के लिए करीब दो करोड़ 80 लाख रुपये का बजट भी मंजूर किया है। स्टूडेंट्स का कहना है कि हॉस्टल सुविधाओं में सुधार के साथ फीस से जुड़े फैसले को लेकर भी प्रशासन को स्पष्टता रखनी चाहिए।

    लिखित आदेश के बाद ही धरना होगा वापस
    उन्होंने कहा कि हॉस्टलों की मरम्मत के लिए बजट मंजूर करना सकारात्मक कदम है, लेकिन फीस बढ़ोतरी वापस लेने का निर्णय भी लिखित रूप में दिया जाना जरूरी है। फिलहाल वीसी दफ्तर के बाहर स्टूडेंट्स का धरना जारी है। उनका कहना है कि जैसे ही प्रशासन फीस बढ़ोतरी वापस लेने संबंधी लिखित आदेश जारी करेगा, उसके बाद आंदोलन समाप्त करने को लेकर निर्णय लिया जाएगा।

  • लखनऊ के चौक में फ्रेगरेंस पार्क का लोकार्पण, राजनाथ सिंह बोले- विकास लोगों के जीवन में महसूस होना चाहिए

    लखनऊ के चौक में फ्रेगरेंस पार्क का लोकार्पण, राजनाथ सिंह बोले- विकास लोगों के जीवन में महसूस होना चाहिए

    लखनऊ
     राजधानी के चौक क्षेत्र में नवनिर्मित फ्रेगरेंस पार्क का शनिवार को रक्षा मंत्री एवं लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह ने लोकार्पण किया। इस अवसर पर पार्क परिसर में स्थापित पंजाब केसरी लाला लाजपत राय और शहीदे आजम भगत सिंह की आदमकद प्रतिमाओं का भी अनावरण किया गया। साथ ही लगभग 43 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित विभिन्न विकास कार्यों का शिलान्यास किया गया।

    समारोह को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सरदार भगत सिंह युवा भारत की ऊर्जा के प्रतीक थे जबकि लाला लाजपत राय अनुभवी भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं। राष्ट्र निर्माण के लिए ऊर्जा और अनुभव, दोनों की आवश्यकता होती है। फ्रेगरेंस पार्क में स्थापित दोनों महान स्वतंत्रता सेनानियों की प्रतिमाएं सही अर्थों में दो पीढ़ियों के संवाद का संदेश देती हैं।

    उन्होंने कहा कि आज की जीवनशैली में लोग एक-दूसरे को पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे हैं। बच्चे भी बड़ी मात्रा में स्क्रीन के सामने समय बिता रहे हैं। ऐसे समय में पार्क और खुले सार्वजनिक स्थल लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने का काम करते हैं। पार्क किसी भी शहर के सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि विकास ऐसा होना चाहिए जिसमें कंक्रीट और प्रकृति के बीच बेहतर समन्वय हो।

    राजनाथ सिंह ने कहा कि वह लखनऊ का समग्र और समावेशी विकास चाहते हैं। शहर में स्थान-स्थान पर हरियाली, बेहतर कनेक्टिविटी और नागरिक सुविधाओं का विस्तार होना चाहिए। उनका प्रयास है कि लखनऊ का विकास केवल आंकड़ों में नहीं बल्कि लोगों के जीवन में महसूस हो। शहर केवल सड़कों, मॉल और इमारतों से नहीं बनता, बल्कि पार्क, खुले मैदान, हरियाली और नागरिक सुविधाएं भी शहर के विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्होंने इस दिशा में लखनऊ विकास प्राधिकरण के कार्यों की सराहना की।

    कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के सामूहिक गायन से हुई। तत्पश्चात क्षेत्रीय विधायक डा. नीरज बोरा ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। अपने उद्बोधन में  उन्होंने कहा कि वर्ष 1947 में भारत-पाकिस्तान विभाजन की विभीषिका का दंश झेलकर पाकिस्तान से भारत आए परिवारों ने देश के विभिन्न हिस्सों में नए सिरे से अपना जीवन शुरू किया। विस्थापित परिवारों को जहां-जहां बसाया गया वहां लाजपत नगर जैसे नामों के माध्यम से उनके संघर्ष और स्मृतियों को सम्मान दिया गया। उन्होंने कहा कि उनकी इच्छा थी कि लाला लाजपत राय के नाम पर एक सुंदर पार्क विकसित हो और परिसर में पंजाब केसरी लाला लाजपत राय तथा शहीदे आजम भगत सिंह की प्रतिमाएं स्थापित हों। इस संबंध में उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से अनुरोध किया था।

    कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री ने एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत पार्क परिसर में चंदन का पौधा रोपा। इसके बाद बटन दबाकर दोनों महान स्वतंत्रता सेनानियों की प्रतिमाओं का अनावरण किया। फ्रेगरेंस पार्क में विभिन्न प्रकार के सुगंधित एवं औषधीय पौधे लगाए गए हैं। इससे यह क्षेत्र के नागरिकों के लिए हरित, सुगंधित और स्वास्थ्यवर्धक सार्वजनिक स्थल के रूप में विकसित होगा।

    कार्यक्रम में भारत विभाजन की 80 वर्ष पूर्व हुई मानवीय त्रासदी पर केंद्रित लघु फिल्म का प्रसारण किया गया। फिल्म के माध्यम से विभाजन के दौरान विस्थापन और पीड़ा झेलने वाले परिवारों के संघर्ष को प्रस्तुत किया गया। इसके साथ ही लखनऊ में हो रहे विभिन्न विकास कार्यों पर आधारित लखनऊ विकास प्राधिकरण की लघु फिल्म भी प्रदर्शित की गई।

    इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने विभाजन के समय पाकिस्तान से भारत आए परिवारों का अभिनन्दन किया। इनमें पूर्व विधायक विद्यासागर गुप्ता, पूर्व महापौर संयुक्ता भाटिया तथा जसवंत कौर शामिल रहीं।

    कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, उद्यान राज्य मंत्री दिनेश प्रताप सिंह, राज्यसभा सांसद एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा, सांसद बृजलाल, संजय सेठ, महापौर सुषमा खर्कवाल, भाजपा लखनऊ महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी, विधान परिषद सदस्य मुकेश शर्मा, विधायक योगेश शुक्ला, ओपी श्रीवास्तव, उमेश द्विवेदी, सांसद प्रतिनिधि दिवाकर त्रिपाठी, उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक के सभापति विवेक तोमर, मंडल अध्यक्ष दयाशंकर पांडे, क्षेत्रीय पार्षद अनुराग मिश्रा, वैज्ञानिक डॉ. शरद श्रीवास्तव सहित भाजपा पदाधिकारी, पार्षद, जनप्रतिनिधि, लखनऊ विकास प्राधिकरण के अधिकारी एवं बड़ी संख्या में क्षेत्रीय नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्र गान के साथ हुआ।

  • फ्लू को लेकर यूपी में अलर्ट, अस्पतालों में दवा-ऑक्सीजन का पर्याप्त स्टॉक

    फ्लू को लेकर यूपी में अलर्ट, अस्पतालों में दवा-ऑक्सीजन का पर्याप्त स्टॉक

    लखनऊ
    प्रदेश में मौसमी फ्लू के बढ़ते मामलों के बीच स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों में इलाज और जरूरी चिकित्सा संसाधनों की उपलब्धता को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने शनिवार को प्रदेशभर के स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से स्थिति की समीक्षा की और अस्पतालों में ओसेल्टामिविर (टैमीफ्लू), ऑक्सीजन, नेबुलाइजर, ऑक्सीजन मास्क और ब्रोंकोडायलेटर्स का पर्याप्त स्टॉक रखने के निर्देश दिए।
    प्रदेश में मरीजों की संख्या को देखते हुए संबंधित जिलों में अस्पतालों को पूरी तरह तैयार रखने और संसाधनों की नियमित निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।
    उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने निर्देश दिए कि अस्पतालों में सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षणों के साथ भर्ती सभी गंभीर मरीजों की फ्लू जांच सुनिश्चित की जाए। इन्फ्लुएंजा-लाइक इलनेस और सांस संबंधी संक्रमण वाले मरीजों के संपर्क में आने वाले लोगों में लक्षण पाए जाने पर चिकित्सकीय सलाह के अनुसार समय से एंटीवायरल दवाएं शुरू की जाएं।

    ज्यादा मामले वाले जिलों में अलग ओपीडी
    जिन जिलों में फ्लू के मामले अधिक हैं, वहां श्वसन संबंधी शिकायत वाले मरीजों के लिए अलग ओपीडी संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे मरीजों की जांच, चिकित्सकीय परामर्श और उपचार को सुगम बनाने के साथ अस्पतालों में भीड़ को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने गंभीर मरीजों के उपचार के लिए प्रत्येक जिले में जिला एवं संयुक्त अस्पताल स्तर पर चार से छह आइसोलेशन बेड तैयार रखने को कहा है। अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि गंभीर मरीजों के इलाज में दवा, ऑक्सीजन या अन्य आवश्यक उपकरणों की कमी न हो।

    फ्लू-बुखार मरीजों के लिए अलग रजिस्ट्रेशन काउंटर
    उपमुख्यमंत्री ने अस्पतालों में बुखार और फ्लू से संबंधित मरीजों के लिए अलग रजिस्ट्रेशन काउंटर बनाने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य मरीजों का पंजीकरण जल्द कराकर उन्हें बिना अनावश्यक इंतजार के चिकित्सकीय परामर्श और उपचार उपलब्ध कराना है।

    डिप्टी सीएम ने की होप सेंटर से ऑनलाइन मॉनिटरिंग
    उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने लखनऊ के कैसरबाग स्थित स्वास्थ्य भवन में स्थापित केंद्रीय कमांड एवं कंट्रोल सेंटर होप (हेल्थ ऑनलाइन पैरामीटर इवैल्यूएशन) पहुंचकर प्रदेश के अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की। उन्होंने चिकित्साधिकारियों से अस्पतालों में दवा, ऑक्सीजन और अन्य आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता की जानकारी ली तथा किसी भी कमी को तत्काल दूर करने के निर्देश दिए।

    नेपाल सीमा से लगे जिलों में विशेष सतर्कता
    नेपाल से सटे उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग को इन क्षेत्रों में फ्लू एवं बुखार के मामलों की प्रभावी निगरानी करने को कहा गया है। साथ ही नेपाल अथवा उत्तर प्रदेश से आने वाले प्रत्येक मरीज को तत्काल चिकित्सकीय सहायता और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। डिप्टी सीएम ने अधिकारियों को अस्पतालों में मास्क, हाथों की स्वच्छता और खांसी के शिष्टाचार के प्रति मरीजों एवं तीमारदारों को जागरूक करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेशवासियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर सरकार पूरी तरह सतर्क है और फ्लू की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। 
    समीक्षा बैठक में अपर मुख्य सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित कुमार घोष, महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. पवन कुमार अरुण सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

  • खाद की कालाबाजारी पर लगेगी लगाम? बिहार में Farmer ID आधारित उर्वरक बिक्री का विस्तार

    खाद की कालाबाजारी पर लगेगी लगाम? बिहार में Farmer ID आधारित उर्वरक बिक्री का विस्तार

    पटना
    उर्वरक बिक्री व्यवस्था को पारदर्शी एवं सुव्यवस्थित बनाने के लिए 'खेत बचाओ, गुणवत्तायुक्त बीज एवं खाद सुलभ कराओ' विषय पर सोमवार को कृषि भवन सभागार, मीठापुर, पटना में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।

    कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने फ्रेमवर्क फार फर्टिलाइजर एप्लीकेशन सिस्टम (एफएफएएस) के माध्यम से ऑनलाइन व्यवस्था विकसित की गई है।

    आईएफएमएस एवं एग्रीस्टैक के एकीकरण से उर्वरक की खरीद-बिक्री प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित एवं पारदर्शी बनाने का प्रविधान किया गया है।

    इस व्यवस्था के अंतर्गत राज्य में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में वैशाली एवं शेखपुरा जिलों में फार्मर आईडी के आधार पर उर्वरक बिक्री की शुरुआत की गई।

    इसके सफल क्रियान्वयन के बाद जहानाबाद, अरवल, शिवहर, लखीसराय एवं किशनगंज जिलों में भी इसे लागू किया गया है।

    अधिकारियों को दी जाएगी ट्रेनिंग
    सिन्हा ने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम में कृषि विभाग के संबंधित पदाधिकारियों को उर्वरक बिक्री की डिजिटल एवं फार्मर आईडी आधारित व्यवस्था, उर्वरक की उपलब्धता एवं वितरण व्यवस्था तथा किसानों को गुणवत्तायुक्त उर्वरक एवं बीज सुनिश्चित करने से संबंधित आवश्यक जानकारी एवं प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।

    कृषि मंत्री ने कहा कि खाद की बिक्री व्यवस्था को डिजिटल बनाने का उद्देश्य केवल तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि किसान हित में पूरी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है।

    सरकार का प्रयास है कि किसानों को उनकी आवश्यकता के समय आवश्यक कृषि इनपुट आसानी से उपलब्ध हो और उन्हें किसी प्रकार की कठिनाई का सामना नहीं करना पड़े।

    उन्होंने बताया कि किसानों को गुणवत्तायुक्त उर्वरक एवं बीज समय पर और सुगमता से उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उर्वरक बिक्री व्यवस्था को डिजिटल एवं पारदर्शी बनाया जा रहा है।