Category: राज्य

  • यूपी की ऐतिहासिक छलांग, जेम पर ₹1 लाख करोड़ से अधिक की खरीद, तीन राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित

    यूपी की ऐतिहासिक छलांग, जेम पर ₹1 लाख करोड़ से अधिक की खरीद, तीन राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित

    लखनऊ

     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने सार्वजनिक खरीद व्यवस्था में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। राज्य ने गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जेम) पर वर्ष 2017 में इसकी स्थापना से अब तक ₹1 लाख करोड़ (₹1 ट्रिलियन) से अधिक की खरीद दर्ज कर नया रिकॉर्ड बनाया है। देश के सभी राज्यों द्वारा जेम के माध्यम से की गई कुल खरीद में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत से अधिक है। यह उपलब्धि प्रदेश में डिजिटल गवर्नेंस, ट्रांसपेरेंसी, एफिशियंसी और इन्क्लूसिव पब्लिक प्रोक्योरमेंट को बढ़ावा देने की दिशा में योगी सरकार की नीतियों की प्रभावशीलता को दर्शाती है।

    तीन राष्ट्रीय पुरस्कारों से यूपी का सम्मान

    उत्तर प्रदेश की इस उपलब्धि को राष्ट्रीय स्तर पर भी मान्यता मिली है। 10 अगस्त 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित जेम के 10वें स्थापना दिवस समारोह में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने उत्तर प्रदेश को सार्वजनिक खरीद के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए तीन प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया। उत्तर प्रदेश को मिले पुरस्कारों में- जेम ओवरऑल एक्सीलेंस अवार्ड, हाईएस्ट जेम प्रोक्योरमेंट वैल्यू और बेस्ट आउटरीच बिल्डिंग अवार्ड शामिल हैं। इन पुरस्कारों को उत्तर प्रदेश शासन के प्रमुख सचिव शशिभूषण लाल सुशील ने प्राप्त किया।

    योगी सरकार के सुशासन मॉडल की बड़ी उपलब्धि

    उत्तर प्रदेश की यह उपलब्धि केवल सरकारी खरीद के आंकड़े तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे योगी सरकार के गुड गवर्नेंस और डिजिटल गवर्नेंस मॉडल की महत्वपूर्ण सफलता के रूप में देखा जा रहा है। जेम के व्यापक उपयोग से सरकारी विभागों की खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, प्रतिस्पर्धी, सरल और जवाबदेह बनाने में मदद मिली है। सरकारी खरीद में डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते इस्तेमाल से पारंपरिक प्रक्रियाओं में होने वाली जटिलताओं को कम करने, अधिक विक्रेताओं को प्रतिस्पर्धा का अवसर देने और सरकारी संस्थानों को बेहतर कीमत पर गुणवत्तापूर्ण उत्पाद एवं सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव आया है।

    ₹1 लाख करोड़ की खरीद ‘वैल्यू फॉर मनी’

    जेम पर ₹1 लाख करोड़ से अधिक की खरीद यह दर्शाती है कि उत्तर प्रदेश के सरकारी विभागों और सार्वजनिक संस्थानों ने डिजिटल खरीद व्यवस्था को बड़े पैमाने पर अपनाया है। इसके माध्यम से खरीद प्रक्रिया में ट्रांसपेरेंसी, कम्पीटीशन, एफिशियंसी और ‘वैल्यू फॉर मनी’ को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। योगी सरकार की नीति के अनुरूप सरकारी खरीद को अधिक परिणामोन्मुख बनाने के साथ-साथ छोटे और स्थानीय कारोबारियों को भी सरकारी बाजार तक पहुंच उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया गया है।

    एमएसएमई, महिला उद्यमियों और स्टार्टअप्स को मिले अवसर

    जेम के माध्यम से उत्तर प्रदेश ने सरकारी खरीद को केवल बड़े कारोबारियों तक सीमित रखने के बजाय एमएसएमई, महिला उद्यमियों, एससी/एसटी वर्ग द्वारा संचालित उद्यमों और स्टार्टअप्स के लिए भी अवसरों का विस्तार किया है। इस व्यवस्था से छोटे उद्यमों को देशभर के सरकारी खरीदारों तक पहुंच बनाने का डिजिटल मंच मिला है। इससे प्रदेश के स्थानीय उद्यमियों के लिए सरकारी बाजार का दायरा बढ़ा है और उन्हें राज्य के बाहर भी अपने उत्पाद एवं सेवाएं उपलब्ध कराने का अवसर मिला है।

    क्षमता निर्माण पर भी जोर

    उत्तर प्रदेश की सफलता में ट्रेनिंग और कैपेसिटी बिल्डिंग की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। राज्य में समय-समय पर अधिकारियों, विभागों और अन्य हितधारकों के लिए व्यापक प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं, ताकि जेम की सुविधाओं और प्रक्रियाओं का अधिक प्रभावी ढंग से इस्तेमाल किया जा सके। इसी दिशा में किए गए प्रयासों को ‘बेस्ट आउटरीच इनिशिएटिव फॉर कैपेसिटी बिल्डिंग’ राष्ट्रीय पुरस्कार के माध्यम से मान्यता मिली है। उत्तर प्रदेश सरकार और जेम के बीच लगातार बेहतर होते समन्वय ने प्रदेश में सार्वजनिक खरीद सुधारों को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से खरीद प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी, समावेशी और परिणाम आधारित बनाने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं।

  • MSP से कर्जमाफी तक मांगों को लेकर सड़क पर किसान-मजदूर, 22 जिलों में प्रदर्शन

    MSP से कर्जमाफी तक मांगों को लेकर सड़क पर किसान-मजदूर, 22 जिलों में प्रदर्शन

    पटियाला.

    किसान मजदूर मोर्चा चैप्टर पंजाब के आह्वान पर आज, 31 अगस्त को पंजाब के सभी 22 जिलों में डीसी कार्यालयों के सामने एक-दिवसीय मोर्चा लगाया गया। मोर्चे में पंजाब के किसानों, मजदूरों, युवाओं को बड़ी संख्या में शामिल होने का आह्वान किया गया है।

    किसान मजदूर मोर्चा चैप्टर पंजाब ने कहा कि पंजाब की कृषि, पानी, जमीन, रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े गंभीर मुद्दों का समाधान करने के बजाय सरकारें ऐसी नीतियां लागू कर रही हैं, जिनका सबसे अधिक असर किसानों, मजदूरों और ग्रामीण लोगों पर पड़ता है। इसलिए 31 अगस्त के मोर्चे के माध्यम से पंजाब सरकार और केंद्र सरकार के सामने निम्नलिखित मांगें जोरदार ढंग से रखी जा रही हैं।

    जानें किसानों की मांगें-
    पंजाब सरकार बासमती, मक्का, मूंग, सरसों और आलू की फसल की अपने स्तर पर एम.एस.पी. से ऊपर लाभकारी मूल्य पर खरीद सुनिश्चित करे, ताकि किसानों को मंडी में लूट का सामना न करना पड़े। किसानों और मजदूरों की संपूर्ण कर्जमाफी की जाए। कर्ज के कारण आत्महत्या करने वाले किसानों और मजदूरों के परिवारों को उचित मुआवजा तथा परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए। पंजाब में बार-बार आने वाली बाढ़, भूजल के लगातार गिरते स्तर तथा वायु और जल प्रदूषण के बढ़ते संकट को हल करने के लिए वैज्ञानिक और दीर्घकालिक प्रभावी नीति बनाई जाए। नदी जल का बंटवारा राइपेरियन सिद्धांत के अनुसार किया जाए। केंद्र द्वारा लाए गए Seeds Bill/Act, 2025, Cooperative Laws/Changes, 2026, MGNREGA के स्थान पर लागू किए गए Viksit Bharat–G RAM G Act, 2025 और Electricity (Amendment) Bill, 2025 का विरोध करते हुए पंजाब विधानसभा में इन्हें खारिज करने के लिए प्रस्ताव पारित किया जाए। पंजाब में प्रीपेड बिजली मीटर लगाना तुरंत बंद किया जाए। केंद्र सरकार ने 1 जुलाई 2026 से VB–G RAM G Act लागू करके MGNREGA को रद्द किया है। पंजाब सरकार भारत–अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में पंजाब विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से इस समझौते को रद्द करने की मांग करे। शंभू और खनौरी मोर्चों से किसानों की ट्रालियों सहित जब्त या लूटा गया सारा सामान वापस किया जाए और आंदोलनकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाइयों में न्याय सुनिश्चित किया जाए। सभी प्रकार के आबादकार किसानों और मजदूरों को उनके द्वारा बसाई और खेती की जा रही जमीन के मालिकाना हक दिए जाएं। किसान-मजदूर आंदोलनों के दौरान दर्ज किए गए पुलिस और रेलवे के मुकदमे तथा पराली जलाने से संबंधित दर्ज किए गए मामले रद्द किए जाएं। आंदोलनों के दौरान शहीद हुए किसानों और मजदूरों के परिवारों को उचित मुआवजा तथा परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।

    पंजाब की लैंड पूलिंग नीति तुरंत वापस ली जाए और भारतमाला प्रोजेक्ट सहित किसी भी परियोजना के लिए किसानों की जमीन उनकी सहमति और उचित मुआवजे के बिना जबरदस्ती कब्जे में लेना बंद किया जाए। पंजाब सरकार ने 2026 में लैंड पूलिंग नीति में कई संशोधन किए हैं, लेकिन किसानों की मांग है कि इस नीति को वापस लिया जाए। पंजाब में नशे पर प्रभावी ढंग से नियंत्रण किया जाए और युवाओं के लिए स्थायी तथा सम्मानजनक रोजगार के अवसर पैदा किए जाएं, ताकि युवाओं को नशे और बेरोजगारी से बचाया जा सके। पंजाब में विभिन्न जोन बनाने के नाम पर निजी संस्थाओं द्वारा गांवों की ड्रोन के माध्यम से, गांववासियों की सहमति के बिना की जा रही मैपिंग तुरंत बंद की जाए और ऐसे कार्यों के लिए गांववासियों की सहमति तथा पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए। पड़ोसी देश पाकिस्तान के साथ व्यापारिक गलियारा खोला जाए, ताकि पंजाब के किसानों, व्यापारियों और छोटे कारोबारियों को नए बाजार मिल सकें तथा सीमावर्ती क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले।

    किसान मजदूर मोर्चा चैप्टर पंजाब ने कहा कि ये मोर्चे केवल किसानों के नहीं, बल्कि पंजाब के पानी, जमीन, रोजगार, कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पंजाब के भविष्य को बचाने की लड़ाई हैं।

  • बठिंडा में नशा तस्कर पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, अवैध कब्जा हटाने पहुंचा बुलडोजर

    बठिंडा में नशा तस्कर पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, अवैध कब्जा हटाने पहुंचा बुलडोजर

    बठिंडा.

    नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बीच बठिंडा में प्रशासन ने कथित अवैध निर्माण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। सिविल लाइन थाना क्षेत्र की धौबियाणा बस्ती में जसप्रीत कौर पत्नी इंद्रजीत सिंह की ओर से बनाई गई इमारत को सोमवार को बुलडोजर की मदद से ध्वस्त कर दिया गया।

    कार्रवाई के दौरान मौके पर पुलिस बल तैनात रहा। प्रशासन के अनुसार, उक्त इमारत को लेकर संबंधित व्यक्ति को कई बार नोटिस जारी किए गए थे। नोटिस के माध्यम से कब्जा हटाकर जगह खाली करने के निर्देश दिए गए, लेकिन इसके बावजूद जगह खाली नहीं की गई। इसके बाद सक्षम प्राधिकारी एवं उपायुक्त-सह-मजिस्ट्रेट के निर्देश पर प्रशासनिक टीम पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची और निर्माण को गिरा दिया।

    19 इमारतें अब तक ध्वस्त
    प्रशासन ने बताया कि नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के साथ कथित तौर पर नशे के कारोबार से जुड़े लोगों के अवैध कब्जों और निर्माणों पर भी कार्रवाई की जा रही है। इसी अभियान के तहत जिले में अब तक 19 अवैध रूप से निर्मित इमारतों को ध्वस्त किए जाने का दावा किया गया है।

    17 महीने में 3177 मुकदमे, 4487 गिरफ्तार
    पंजाब सरकार के ‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ अभियान के तहत बठिंडा पुलिस ने अपनी कार्रवाई के आंकड़े भी जारी किए हैं। पुलिस के अनुसार, एक मार्च 2025 से अब तक 3177 मुकदमे दर्ज कर 4487 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें 113 कथित बड़े नशा तस्कर भी शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, वर्ष 2023 से अब तक नशा तस्करी से जुड़े मामलों में 92 आरोपितों की करीब 14 करोड़ 89 लाख रुपये की संपत्ति फ्रीज करवाई जा चुकी है। पुलिस का कहना है कि नशे के कारोबार से जुड़े नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी है।

    सूचना देने की अपील
    बठिंडा पुलिस ने लोगों से नशे की अवैध बिक्री या तस्करी की जानकारी साझा करने की अपील की है। इसके लिए पंजाब सरकार की नशा विरोधी हेल्पलाइन 97791-00200 और बठिंडा पुलिस की नशा विरोधी हेल्पलाइन 91155-02252 पर सूचना दी जा सकती है। पुलिस ने सूचना देने वाले की पहचान गोपनीय रखने का भरोसा दिया है। पुलिस के मुताबिक, जसप्रीत कौर के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत पहले से दो मुकदमे दर्ज हैं। आगे की कार्रवाई और इमारत से जुड़े तथ्यों की जांच जारी है।

  • बिहार के बाद यूपी पर JDU की नजर, चुनावी तैयारियों को लेकर बैठकों का दौर तेज

    बिहार के बाद यूपी पर JDU की नजर, चुनावी तैयारियों को लेकर बैठकों का दौर तेज

    पटना
    जनता दल यूनाइटेड (JDU) अगले वर्ष उत्‍तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में फिर अपनी संभावना तलाश रहा है।

    चुनाव को लेकर यूपी और बिहार में बैठकों का सिलसिला नियमित रूप से चल रहा पर अभी यह तय नहीं हाे पाया है कि जदयू पिछले विधानसभा चुनाव की तरह अकेले वहां चुनाव लड़ेगा या फिर गठबंधन की बात बढ़ेगी।

    निराशाजनक रहा था 2022 का विधानसभा चुनाव  
    वर्ष 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में जदयू की आरंभ में यह योजना थी कि वह एनडीए गठबंधन के घटक के रूप में चुनाव लड़ेगा पर इस पर बात नहीं बनी। सीटों को लेकर सहमति नहीं बनी।

    इसके बाद जदयू ने अपने बूते चुनाव में उतरने का फैसला किया। वर्ष 2022 के उत्‍तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जदयू ने 27 विधानसभा क्षेत्रों से अपने प्रत्याशी उतारे पर एक भी सीट पर उसे सफलता नहीं मिली।

    हाल यह रहा कि जदयू को एक प्रतिशत वोट भी नहीं आ सका। उपलब्ध आंकड़े के अनुसार उक्त चुनाव में जदयू को मात्र 0.11 प्रतिशत वोट ही मिले। अधिकांश सीटों पर जदयू प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गयी।

    पूर्वांचल में जदयू का रहा अधिक जोर
    वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में जदयू का जोर पूर्वांचल की सीटों पर अधिक रहा। इसके तहत उसने जौनपुर के मल्हानी, मड़ियाहू, मुंगरा-बादशाहपुर, वाराणसी के रोहनिया, वाराणसी कैंट, चुनार, सोनभद्र के राबर्टसगंज, दुद्धी, कुशीनगर के तुमकुही राज, कुशीनगर, देवरिया के पथरदेवा, बलिया के फेफना, गाजीपुर के जहूराबाद, मुगलसराय के साथ-साथ लखनऊ कैंट, प्रयागराज के करछना, प्रतापपुर, रानीगंज, रायबरेली के सलोन आदि सीटों पर अपने उम्मीदवार दिए थे।

    वर्ष 2017 में भी थी तैयारी पर नहीं गए चुनाव मैदान में 
    2017 में भी जदयू ने उप्र विधानसभा चुनाव में किस्मत आजमाने की तैयारी की थी। भाजपा के साथ गठबंधन का प्रयास किया गया था पर बात नहीं बनी। आखिर में यह तय हुआ कि जदयू चुनाव में नहीं लड़ेगा।

    शुरू हुआ बैठकों का दौड़ 
    अगले वर्ष उप्र में होने वाले विधानसभा चुनाव को ले जदयू की सक्रियता फिर आरंभ हुई है। यूपी के जदयू प्रभारी श्रवण कुमार लगातार यूपी का दौरा कर रहे हैं।

    यहां तक कि पश्चिमी उप्र में भी बैठक हो रही है। यूपी के पार्टी नेताओं के साथ हाल ही में राजगीर में भी बैठक हुई है। वैसे यह बात कही जा रही है कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से इस बारे में चर्चा की जाएगी और उसके बाद यह तय होगा कि कहां-कहां से लड़ना है।

     

  • श्रीकृष्ण के जीवन से लें कर्म और कर्तव्य की प्रेरणा, सीएम योगी ने विकसित यूपी का संकल्प लेने की अपील की

    श्रीकृष्ण के जीवन से लें कर्म और कर्तव्य की प्रेरणा, सीएम योगी ने विकसित यूपी का संकल्प लेने की अपील की

    लखनऊ 
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। पाती के माध्यम से उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के सत्य, धर्म, कर्म और लोकमंगल के संदेश को जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया। साथ ही विकसित, समृद्ध और गौरवशाली उत्तर प्रदेश के निर्माण का संकल्प लेने की अपील की। सीएम ने कहा कि योगेश्वर श्रीकृष्ण का संपूर्ण जीवन लोक कल्याणकारी शासन की मूल भावना की प्रेरणा देता है। इसी भावना के अनुरूप प्रदेश सरकार समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को सम्मान और सुरक्षा देने, उत्तर प्रदेश को गरीबी मुक्त बनाने, प्रतिभाशाली और निपुण युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने, अन्नदाताओं को सहारा देने तथा बेटियों को बेटों के समान आगे बढ़ने का अवसर देने के लिए कार्य कर रही है।

    समरसता और समानता का संदेश
    सीएम योगी ने कहा कि श्रीकृष्ण कुलीनता के नहीं, बल्कि समरसता के प्रतीक हैं। उन्होंने समाज के प्रत्येक वर्ग के साथ खड़े होकर समानता और आत्मीयता का संदेश दिया। द्वारकाधीश होने के बावजूद भगवान श्रीकृष्ण सुदामा के आत्मीय मित्र बने रहे। उनकी मित्रता बताती है कि सच्चे संबंध पद, प्रतिष्ठा और संपन्नता से नहीं, बल्कि आत्मीयता से बनते हैं। उन्होंने कहा कि समरसता, समानता और आत्मीयता आज के समाज की भी आवश्यकता है।

    बाल लीलाओं में छिपा जीवन का संदेश
    मुख्यमंत्री ने कहा कि असत्य और अन्याय के अंधकार के बीच भगवान श्रीकृष्ण के रूप में सत्य और धर्म का प्रकाश प्रकट हुआ। उनकी बाल लीलाएं केवल आनंद देने वाली कथाएं नहीं हैं, बल्कि इनमें गहरे जीवन संदेश छिपे हैं। माखन चोरी की लीला सहजता और निश्छलता, जबकि गोप-गोपियों के साथ आत्मीयता प्रेम और सामाजिक समरसता का संदेश देती है। कालिय नाग के दमन की लीला अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है।

    सामूहिक एकजुटता से मिलती है शक्ति
    सीएम योगी ने कहा कि श्रीकृष्ण का जीवन बताता है कि समाज की वास्तविक शक्ति सामूहिक सहकारिता और एकजुटता में निहित है। गोवर्धन पर्वत धारण कर उन्होंने प्रकृति, पशुधन और कृषि आधारित जीवन के संरक्षण का संदेश दिया। गोवर्धन पूजा सामूहिक एकजुटता के जरिए बड़ी से बड़ी चुनौती का सामना करने की प्रेरणा देती है।

    कर्म, ज्ञान और कर्तव्य का मार्ग दिखाया
    उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने मानवता को कर्म, ज्ञान और कर्तव्य का मार्ग दिखाया। उनका संदेश हर युग में व्यक्ति और समाज को सही दिशा प्रदान करता है। उत्तर प्रदेश की धरती श्रीकृष्ण की लीलाओं की पावन भूमि है। मथुरा, गोकुल, वृंदावन, गोवर्धन, बरसाना और नंदगांव आज भी सनातन सांस्कृतिक चेतना के जीवंत केंद्र हैं।

  • भारी सुरक्षा के बीच जामा मस्जिद के पास बुलडोजर एक्शन, अवैध ढांचे और अतिक्रमण हटाए गए

    भारी सुरक्षा के बीच जामा मस्जिद के पास बुलडोजर एक्शन, अवैध ढांचे और अतिक्रमण हटाए गए

     नई  दिल्ली 
    दिल्ली में सोमवार को ऐतिहासिक जामा मस्जिद के पास जमकर बुलडोजर गरजे। हाई कोर्ट के आदेश पर दिल्ली म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन (एमसीडी) ने यहां अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया। मुगलकालीन इस इमारत के आसपास सरकारी जमीन और पार्क पर कब्जा कर लिया गया था, जिसे अदालत ने खाली कराने का आदेश दिया था। भारी सुरक्षा के बीच एमसीडी के अधिकारियों ने अवैध कब्जे को तोड़ा और मलबे को ठिकाने लगाया गया।

    एमसीडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सुबह से ही जामा मस्जिद और उसके आसपास सार्वजनिक स्थानों और पार्क से अतिक्रमण हटाना शुरू कर दिया गया। अधिकारी ने कहा, 'सार्वजनिक जगहों और पार्कों पर किए गए अतिक्रमण को हटाया जा रहा है। स्मारक के आसपास यह कार्रवाई की जा रही है।' एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इलाके के कम से कम तीन पार्कों को कब्जा मुक्त कराया गया है। लंबे समय से इन पर अतिक्रमणकारियों का कब्जा था।

    ढांचे भी तोड़े गए
    यह कार्रवाई दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश के बाद की गई जिसमें जिसमें एमसीडी को जामा मस्जिद और उसके आसपास अवैध निर्माण और अतिक्रमण का सर्वेक्षण करने और उन्हें हटाने के लिए उचित कार्रवाई करने को कहा गया था। अधिकारियों के अनुसार एमसीडी की टीम सोमवार सुबह इलाके में पहुंचीं और स्मारक के आसपास सार्वजनिक जगहों पर कब्जा कर बनाए गए ढांचों और अन्य अतिक्रमणों को हटाना शुरू किया।

    पुलिस बल की तैनाती के बीच ऐक्शन
    एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'जामा मस्जिद के पास प्रशासन की ओर से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा रही है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी अप्रिय स्थिति को रोकने के लिए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की गई है।'दिल्ली की प्रमुख मुगलकालीन ऐतिहासिक धरोहरों में शामिल जामा मस्जिद में बड़ी संख्या में पर्यटक और नमाजी आते हैं। इसके आसपास भीड़भाड़ वाला कारोबारी इलाका है। अधिकारियों ने बताया कि नगर निगम की यह कार्रवाई जामा मस्जिद के आसपास अतिक्रमण और अवैध निर्माण को लेकर उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन के तहत की जा रही है।

  • पंजाब में कर्मचारियों के हक में कांग्रेस, महंगाई भत्ता बकाया और OPS की मांग का समर्थन

    पंजाब में कर्मचारियों के हक में कांग्रेस, महंगाई भत्ता बकाया और OPS की मांग का समर्थन

    चंडीगढ़.

    पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने लंबित महंगाई भत्ते के बकाये और पुरानी पेंशन योजना की बहाली की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे सरकारी कर्मचारियों के समर्थन में आवाज उठाई है। अपने लाइव संवाद कार्यक्रम ‘वडिंग विद वॉरियर्स’ के चौथे सत्र में उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उसके कार्यकर्ता कर्मचारियों को न्याय मिलने तक उनके साथ खड़े रहेंगे।

    वडिंग ने कर्मचारियों की मांगों को जायज बताते हुए कहा कि वे सरकार से कोई विशेष रियायत नहीं, बल्कि अपना हक मांग रहे हैं। उन्होंने कहा-
    "जो लड़ते हैं, वही जीतते हैं।"
    पंजाब सरकार पर वादों से पीछे हटने का आरोप लगाते हुए उन्होंने ओल्ड पेंशन स्कीम को लेकर सवाल किया कि यदि इसे लागू करने की मंशा नहीं थी तो अधिसूचना क्यों जारी की गई। उन्होंने सरकार को कर्मचारियों से टकराव से बचने की चेतावनी देते हुए कहा कि पंजाब का कामकाज कर्मचारियों के बिना ठप हो जाएगा। वडिंग ने कहा कि कर्मचारियों को कार्रवाई की धमकी देकर डराने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री को चुनौती देते हुए कहा, “अगर हिम्मत है तो कार्रवाई करके देखो… आपकी सरकार छह महीने पहले ही चली जाएगी।” उन्होंने याद दिलाया कि 2022 में इन्हीं कर्मचारियों ने आप को सत्ता में लाने में अहम भूमिका निभाई थी।

    वित्तीय प्राथमिकताओं पर वडिंग के तीखे सवाल
    वडिंग ने सरकार की वित्तीय प्राथमिकताओं पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कर्मचारियों के करीब 14,000 करोड़ रुपये के बकाये व लाभ न देने और 25,000 करोड़ रुपये का कर्ज लेने के लिए कथित 341 करोड़ रुपये सलाहकारों को देने पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि 2022 में करीब 2.85 लाख करोड़ रुपये का कर्ज अब बढ़कर लगभग 4.48 लाख करोड़ रुपये हो गया है।

    पंजाब की नई उम्मीद हैं राहुल
    वडिंग ने मालवा नहर, नए मेडिकल कॉलेजों और स्कूल-कॉलेजों से जुड़े वादों पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से मान सरकार को हटाने और स्थिर सरकार के लिए संघर्ष जारी रखने की अपील की। राहुल गांधी की तारीफ करते हुए वडिंग ने उन्हें “भारत की नई उम्मीद और पंजाब की नई उम्मीद” बताया। उन्होंने कहा कि राहुल तमाम मुश्किलों के बावजूद संघर्ष करते रहे और कांग्रेस कार्यकर्ताओं को भी उनसे प्रेरणा लेकर लड़ाई जारी रखनी चाहिए।

  • कचरे के पहाड़ खत्म करने की तैयारी, भलस्वा-ओखला के लिए दिसंबर की डेडलाइन; गाजीपुर का लक्ष्य 2027

    कचरे के पहाड़ खत्म करने की तैयारी, भलस्वा-ओखला के लिए दिसंबर की डेडलाइन; गाजीपुर का लक्ष्य 2027

    नई दिल्ली
    सरकार दिल्ली में कचरे के पहाड़ों को खत्म करने की होड़ में लगी है। इसी के तहत भलस्वा, ओखला और गाजीपुर में 15 लाख ट्रक कचरा हटाकर दिल्ली ने लैंडफिल की 100 एकड़ जमीन वापस हासिल कर ली है, जो कि लगभग 60 फुटबॉल मैदानों के बराबर है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के दफ्तर के मुताबिक अब तक तीनों जगहों पर लगभग 2.16 करोड़ मीट्रिक टन कचरे का निपटान किया जा चुका है। इससे आस-पास के इलाकों में रहने वाले लोगों को साफ-सुथरा माहौल देने में मदद मिली है।

    सबसे ज्यादा सफाई का काम नॉर्थ दिल्ली के भलस्वा में हुआ है, जहां 1 करोड़ टन कचरे का निपटान किया गया और 45 एकड़ जमीन वापस हासिल की गई। इसके बाद साउथ दिल्ली का ओखला (70 लाख टन और 35 एकड़) और ईस्ट दिल्ली का गाजीपुर (44 लाख टन और 20 एकड़) का नंबर आता है।
    सरकार ने दो और लैंडफिल को खत्म करने के लिए दिसंबर की डेडलाइन तय की
    सरकार ने भलस्वा और ओखला लैंडफिल को पूरी तरह खत्म करने के लिए इस दिसंबर की डेडलाइन तय की है, जबकि गाजीपुर के लिए डेडलाइन दिसंबर 2027 है। हालांकि, शहर में पहले भी ऐसे लक्ष्य तय किए गए हैं और डेडलाइन पूरी नहीं हो पाई हैं। ओखला के लिए लक्ष्य को कई बार आगे बढ़ाया जा चुका है, जिसमें इस साल पांचवीं बार बदलाव भी शामिल है।

    पुराने कचरे को हटाने के लिए बायोमाइनिंग का काम चल रहा है, लेकिन लैंडफिल साइटों पर अभी भी नया कचरा पहुंच रहा है। ऐसे में सरकार के लिए असली परीक्षा यह होगी कि क्या इन नई डेडलाइन के साथ दिल्ली में कचरे के पहाड़ खत्म हो पाएंगे।

    सड़कों के नीचे बेस बनाने में कचरा का उपयोग किया जा रहा
    सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि गाजीपुर में कचरे की प्रोसेसिंग के बाद जो बेकार बचा हुआ मटीरियल (इनर्ट मटीरियल) मिलता है, उसका इस्तेमाल निचले इलाकों को भरने और सड़कों के नीचे बेस बनाने में किया जा रहा है। उन्होंने कहा, इससे न केवल कचरे की वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेसिंग सुनिश्चित हुई है, बल्कि इस प्रक्रिया से मिले मटीरियल का इस्तेमाल भी हो रहा है।

    एक बार जब प्रोसेसिंग प्लांट तैयार हो जाएंगे, तो सरकार हर दिन पैदा होने वाले कचरे को उसी गति से प्रोसेस करने की क्षमता विकसित कर लेगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि कचरा जमा न हो और कचरे के नए पहाड़ न बनें। सीएम ने कहा कि दिल्ली सरकार सभी तरह के कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन पर ध्यान दे रही है।

  • दिल्ली में फ्री बस यात्रा के लिए पिंक कार्ड अनिवार्य? 31 अगस्त को खत्म हो रही छूट

    दिल्ली में फ्री बस यात्रा के लिए पिंक कार्ड अनिवार्य? 31 अगस्त को खत्म हो रही छूट

    नई दिल्ली
    एक सितंबर से दिल्ली की महिलाओं के लिए डीटीसी बसों में मुफ्त सफर के लिए पिंक कार्ड जरूरी हो सकता है। सरकार की ओर से दी गई छूट 31 अगस्त को खत्म हो रही है। सरकार के पिछले आदेश के मुताबिक इसके बाद बिना पिंक कार्ड के महिलाओं को बस में मुफ्त सफर की सुविधा नहीं मिलेगी। हालांकि, सरकार ने कार्ड बनवाने की प्रक्रिया जारी रखी है। हालांकि, कार्ड बनने तक मुफ्त सफर की सुविधा को लेकर मंगलवार से क्या व्यवस्था रहेगी, यह अगले निर्देश पर निर्भर करेगा।

        दरअसल, दिल्ली सरकार ने महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा की सुविधा का लाभ केवल दिल्ली की महिलाओं तक सीमित रखने के लिए पिंक कार्ड अनिवार्य करने का फैसला किया है।
        इसके लिए दिल्ली के आधार कार्ड वाले लाभार्थियों के पिंक कार्ड बनाए जा रहे हैं।
        1 सितंबर से बदल सकता है नियम, पिछले आदेश में 31 अगस्त तक की मिली थी राहत
        अब तक 4 बार पिंक कार्ड की अनिवार्यता टाली जा चुकी है, अब मंगलवार से इसे लागू करने की योजना है

    पिंक कार्ड बनाने के लिए 50 सेंटर बनाए गए
    दिल्ली में पिंक कार्ड बनाने के लिए 50 सेंटर बनाए गए हैं। महिलाएं इन सेंटरों पर जाकर कार्ड बनवा सकती हैं। अब तक 18 लाख से ज्यादा महिलाएं पिंक कार्ड बनवा चुकी हैं। सरकार ने साफ किया है कि पिंक कार्ड बनाने का काम एक सितंबर के बाद भी जारी रहेगा। यानी जिन महिलाओं ने अभी तक कार्ड नहीं बनवाया है, वे अपने नजदीकी सेंटर पर जाकर इसे बनवा सकती हैं। गौरतलब है कि सरकार पहले पिंक कार्ड की अनिवार्यता एक अगस्त से लागू करने वाली थी। बाद में इसकी तारीख बढ़ाकर 16 अगस्त, फिर 28 अगस्त और उसके बाद 31 अगस्त कर दी गई। सरकार अब तक चार बार पिंक कार्ड की अनिवार्यता की तारीख बढ़ा चुकी है।

  • निकाय चुनाव में टिकट को लेकर BJP में बढ़ी खींचतान, प्रदेश कार्यालय के बाहर कार्यकर्ताओं ने की नारेबाजी

    निकाय चुनाव में टिकट को लेकर BJP में बढ़ी खींचतान, प्रदेश कार्यालय के बाहर कार्यकर्ताओं ने की नारेबाजी

    जयपुर
    नगरीय निकाय चुनाव में प्रत्याशी चयन को लेकर भाजपा का मंथन रविवार को चौथे दिन भी आधी रात के बाद तक जारी रहा। करीब 4 से 5% सीटों पर अभी अंतिम फैसला नहीं हो सका। पार्टी इन सीटों पर आज फैसला करेगी। प्रदेश कार्यालय में प्रत्याशी चयन में गोपनीयता बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है। प्रत्याशी चयन को लेकर हुई बैठक में मोबाइल को लेकर सख्ती रही। कक्ष में नेताओं और पदाधिकारियों के मोबाइल रखने पर रोक थी।

    इसी दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ का टेबल पर चार्जिंग में लगा मोबाइल भी सुरक्षाकर्मी (पीएसओ) के जरिए बैठक कक्ष से बाहर भिजवा दिया गया। इस घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इससे पहले रविवार को प्रदेश कार्यालय में पहले भरतपुर संभाग के शेष निकायों के वार्डों पर प्रत्याशियों के नाम तय किए गए।

    इसके बाद जयपुर संभाग के 2,970 वार्डों पर मंथन शुरू हुआ। स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के कारण कई वार्डों पर नाम तय करने में पेच फंसा रहा। सोमवार को नामांकन के अंतिम दिन पार्टी के अधिकृत जिला या निकाय प्रभारी संबंधित रिटर्निंग अधिकारी को प्रत्याशियों के सिंबल सौपेंगे। सूत्रों के अनुसार पार्टी सिंबल वितरण के बाद ही प्रत्याशियों की सूची सार्वजनिक करने की तैयारी में है, ताकि बगावत की आशंका को कम किया जा सके। भाजपा की तरफ से प्रत्याशियों को नामांकन भरने के लिए फोन भी किए गए।

    'चर्चा में बैठते है तो वाद-विवाद होते ही है'
    भरतपुर संभाग के चुनाव संचालन समिति के प्रभारी अशोक परनामी ने रविवार को प्रदेश कार्यालय में मीडिया के सामने कहा कि मेरे घर पर हुई बैठक में कोई विवाद नहीं हुआ। न तो पूर्व विधायक राजकुमारी जाटव ने कोई चप्पल दिखाई और न ही करौली जिलाध्यक्ष गोवर्धन सिंह जादौन ने कोई गला दबाने का काम किया। जब हम चर्चा में बैठते हैं तो वाद-विवाद होते ही है। बाद में हमने मिलकर एक नाम तय कर दिया।

    अलवर निगम में टिकट वितरण को लेकर भाजपा में बगावत शुरू हो गई है। शहर के चार में से दो मंडल अध्यक्षों ने अपनी पूरी कार्यकारिणी के साथ इस्तीफा दे दिया है। ये इस्तीफे भाजपा जिलाध्यक्ष को भेजे गए हैं। वरिष्ठ भाजपाई सुरेश मेहता ने सोशल मीडिया पर लिखा- पार्टी को अनुभवी और पुराने नेताओं की जरूरत नहीं है। हमें घर बैठना चाहिए ताकि स्वार्थी और चापलूस लोगों को जगह मिल सके।

    प्रदेश कार्यालय के कार्यकर्ताओं बाहर ने की नारेबाजी
    जयपुर शहर के 150 वार्डों में प्रत्याशी चयन को लेकर रविवार देर रात तक माथापच्ची चलती रही। रात करीब 9 बजे के बाद चर्चा शुरू हो सकी। सिविल लाइंस और किशनपोल विधानसभा क्षेत्रों से जुड़े वार्डों में संभावित नामों को लेकर गहमागहमी रही। कुछ कार्यकर्ताओं के प्रदेश कार्यालय पहुंचने और गेट के बाहर नारेबाजी करने से टिकट वितरण का मुद्दा और गरमा गया।